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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १०२/२
सुधीर अपनी क्लीनीक पेसन्टकी वजहसे रात ९ बजेतक खुली रखता था.. ओर कभी कभीतो रातके दस साडे दसभी बज जाते थे.. उन्होने क्लीनीकपे सीर्फ दवाइ देनेके लीये उसी गांवके अेक पढे लीखे लडके मुनाको रखाथा.. ओर सुधीरके साथही वो घर जाता था.. क्युकी दोनो आसपासही रहेते थे.. ओर केस नीकालनेके लीये अेक लडकीको रखाथा.. जो मुनाकीही छोटी बहेन बरखा थी.. वोभी पढीलीखी थी.. वो आठ बजतेही अपने घर चली जाती थी..
दोनोही छोटे परीवारसे थे.. उनके पीताजी रमेशके वहा उनकी दुकानपे नोकरी करते हे.. रमेशनेही मुना ओर उनकी बहेन बरखाको पढाया था.. दोनोही भाइ बहेन सहेरमे साथमे बसमे पढने जाते ओर सामको वापस आजाते जीनकी वजहसे दोनो भाइ बहेनको साथमे रहेनेका मोका ज्यादा मीलताथा.. कभी कभी बसमे जगाह कम होती तो दोनो अेकही सीटमे अेडजेस्ट करके बैठ जाते..
तो कभी ज्यादा भीडकी वजहसे दोनोही खडे खडे मुसाफरी करते तब मुना उनकी बहेनको प्रोटेक्ट करते उनके पीछे खडा रहेता जीनकी वजहसे उनका लंड तनके खडे होजाता ओर अपनी बहेनकी चुतडपे घुसे मारता.. तब उनकी बहेन सर्मसार होजाती ओर ये कइ बार होता था.. फीरतो वोभी भीड ना होती तबभी मुनासे अपनी गांड सटकर खडी रहेती.. कभी कभी अेक जगाह मीलती तो मुनाकी गोदमेही बैठ जाती.. ओर दोनोके बीच अेक दुसरेके प्रती आकर्सण बढने लगा..

जब दोनो कोलेजमे आगये.. बार बार दोनो अेक दुसरेके छुनेकी वजहसे नजदीक आने लगे.. फीरतो घरपेभी दोनो अकेले होते तब अेक दुसरेकी मस्तीया करने लगे.. ओर बात मस्तीयोसे सुरु होकर छेडछाड तब पहुंच गइ.. मुना मस्यीया करते उनकी बहेनके चुतडको दबाता.. तो कभी जान बुजकर उनके बुब्सको छु लेता.. उनकी बहेनभी मुनाकी अैसेही म्सया करने लगती.. उनकोभी इस खेलमे मजा आने लगा..
ओर अेक दिन मुनाने कोलेज जाते वक्त मौका देखते उनकी बहेनसे अपने दिलकी बात कहेदी.. तो उनकी बहेनने सरमाते मुनाको सबको पता चल जानेका डर जाहीर कीया तो मुनाने उसे सबसे बात छुपाने ओर जींदगीभर साथ नीभानेकी बात कहेते उसे मनालीया ओर उनकी बहेन बरखाने मुनाका प्यार अेक्सेप्ट करलीया.. नइ जवानीकी वजहसे आपसमे ही दोनो सबसे छुपकर प्यार करन लगे.. जबभी घरमे कोइ नही होता तो दोनो अेक दुसरेकी बाहोमे समा जाते.. ओर अेक दुसरेके होठोको चुमने लगते..

आखीर अेक दिन घरपे दोनो अकेलेथे तब दोनोही बहेक गये.. उस दिन मुनाने अपनी बहेनका कौमार्य भंग कर दीया.. ओर तबसे दोनोके बीच जीस्मानी तालुकात बन गये.. फीरतो अक्सर मौका मीलतेही दोनो मील जाते.. मुनाने उनकी बहेनको चोदकर उसे ओर कामुक्त करदीया.. उसेभी मुनासे चुदवानेकी लत लग गइ.. फीरतो दोनोही सबके सोजानेके बाद उपर छतपे मीलते.. यातो बरखा मुनाके रुममे देर रात चली जाती..
ओर खुब चुदाइ करते.. उनकी बहेनभी पढीलीखी होनेकी वजहसे समय समयपे आइपील लेलेती.. दोनोके रीस्तेके बारेमे आज तक कीसीको पता नही चला.. जब पढाइ पुरी होगइ तब दोनोही सुधीरके वहा नोकरीपे लग गये.. सबके सामने भाइ बहेन जैसा व्यहार करते ओर अपनी मयार्दामे रहेते.. ओर रात होतेही दोनो अेक दुसरेको मीया बीवी मानकर अेक होजाते.. ओर खुब चुदाइ करते..

देवायत जेसेही क्लीनीकमे गया वहा कोइ पेशन्ट नही था ओर सुधीरकी केबीनमेभी कोइ नही दिख रहाथा तब देवायत अंदरकी ओर जाने लगा.. तभी पेशन्टको चेक करनेकी केबीनसे उनका आदमी मुना अपने दांतोमे सर्ट दबाकर अपने पेन्टकी क्लीप बंध करते बहार नीकल रहाथा जैसेही देवायतकी ओर नजर गइतो अेकदा गभराते डर गया.. ओर सर नीचे करते जटसे बहार नीकल गया तो देवायतको कुछ अजीब लगा..
ओर वो उस केबीनकी ओर गया जहासे अभी मुना अपनी पेन्ट पहेनते बहार नीकलाथा.. ओर अंदर जाकते देखा तो सुधीरकी पेन्ट उनके घुटनो तकथी ओर वो जुककर टीस्यु पेपरसे अपनी गांड पोछ रहाथा.. तब देवायतको जरासीभी समजनेमे देर नही लगीकी सुधीर अंदर बेकीनमे अपने आदमी मुनासे गांड मरवा रहाथा.. ओर देवायत सुधीरकी नजर पडे इसे पहेलेही वहासे हट गया ओर बहार चला गया..
फीर कुछ देर रुककर फीरसे अंदर आगया.. तब सुधीरभी अपनी पेन्टमे क्लीप लगाते बहारकी ओर आ रहाथा ओर देवायतको अंदर आते देखकर अेकबार तो वोभी गभरा गया.. ओर फौरन नोर्मल होनेकी अेक्टींग करते देवायतकी ओर स्माइल करने लगा ओर उसे आवकार देते अपनी सामनेकी चेरपे देवायतको बेठनेका इसारा करने लगा.. तो देवायत उनके सामने बेठ गया ओर अेक नजरसे सुधीरकी ओर देखता रहा..
तब सुधीरकी गांड फटने लगी.. क्युकी वो देवायतको कोलेजसे जानता था ओर उसे येभी पताथाकी उनकी कोलेजमे सब उसे गांडु कहेके बुलातेथे.. तब अेक देवायतही था जो उनके लीये कीसीसेभी लडाइ करलेता था.. तबसे उनकी देवायतसे दोस्ती होगइ थी.. ओर उसने अपनी सादीमे देवायतकोभी न्योता दीयाथा ओर देवायतही उनके साथ सादीके मंडपमे उनके पासही अणवर बनके बैठाथा था..
देवायतकोभी पताथाकी सुधीरको सब गांडु क्यु कहेते थे.. लेकीन उसने आजतक सुधीरकी अैसी कोइ हरकत नही देखीथी जो सबपे विस्वास कर सके.. ओर आज उसने अपनी नजरोसे सुधीरकी सब हरकतोको देख लीया.. ओर उसे यकीन हो गयाकी वाकइ सुधीर गांड मरवानेका सौकीन हे.. तो वो अपनी खुबसुरत बीवीको कैसे चोदता होगा..? ओर उसे सुधीरकी बीवी नीशाका उनके प्रती देखनेका नजरीया समजमे आने लगाकी वो उनके प्रती क्यु आकर्सीत होने लगी हे..ओर उसे नीशाके लीये हम दर्दी होने लगी.. तभी..
डो.सुधीर : (हसते) आओ भाइ.. कहो आज यहाका रास्ता कैसे भुल गये.. हें..हें..हें.. बहुत दिनोके बाद हमारी याद आगइ..
देवायत : (हसते) भाइ तुजे ओर भाभीको सादीका न्योता देने आयाथा.. लखन ओर मेरी बहेन पुनमकी सादी हे.. तो तुम दोनो मीया बीवीको सादीमे आना हे.. ओर दोनोकी सादी हवेलीपे रखी हे..
सुधीर : (हसते) अरे वाह.. तो फीर घरपे आना चाहीयेनां.. चलो हम दोनो घरपे चलते हे.. आपकी भाभी सुनकर खुस होजायेगी.. आपको बहुत याद कर रही हे.. कभीतो घरपे भाभीको लेकर आया करो..
देवायत : (मुस्कुराते) हां.. तेरे घरतो चलते हे लेकीन मुजे तुमसे ओर बातभी करनी हे.. बैठ थोडी देर..
कहातो सुधीरकी गांड फटने लगी.. वो गभराने लगा ओर सोचने लगाकी कही अभी देवायतने उसे मुनासे गांड मरवाते देखतो नही लीया.. जो इस बारेमे बात करना चाहते हो.. ओर वो धीरेसे कहेने लगा..
सुधीर : (थोडा गभराते) भाइ.. वो.. वो.. आप कीस बारेमे मुजसे बात करना चाहते हे..?
देवायत : (जोरोसे हसते) अबे साले तो तुम इतना गभरा क्यु रहे हो.. तुम आज भी इतना फंटुसही हो..
सुधीर : (हसते सरमाते) नही यार.. अैसी कोइ बात नही हे.. बस तुम मुजसे बहुत कम मीलता हे तो तुमसे बात करनेमे अेक डरसा लगता हे.. तुम ठहेरे अेक ठाकुर ओर में.. अेक गांवका मामुली डाक्टर..
देवायत : (थोडा गुसेमे) साले अेक जापट लगाउगांना.. बात करता हे.. साले मे तुजे आजभी अपना वोही पुराना दोस्त मानता हु.. ओर मे दुसरोके लीये ठाकुर होगा.. तुम्हारे लीये नही समजा..? देख जाकर रमशेको.. वो आजभी मुजसे अेक दोस्तकी हेसीयतसे बीन्दास्त बाते करता हे.. साले उनके कहेनेपे तुमसे बात करने आया हु.. सोचा चलो बातभी करलुगा ओर साथमे सादीका न्योताभी देदुगा..
सुधीर : (थोडी आंख गीली करते) सोरी यार.. पता नही अब मुजे क्या होगया हे.. मुजे सबसे डर लग रहा हे.. साला मुजे कोइ समजने वालाही नही हे.. खुद मेरी बीवी भी नही..
देवायत : हां उसीके बारेमे तुमसे बात करनीथी.. बोल दोनोके बीच क्या इस्यु चल रहा हे.. तुम दोनोके बीच कुछ जगडा बगडा हुआ हे क्या..? येतो आज रमेशने कहा तभी मुजे मालुम हुआ..
सुधीर : (आंखमे आंसु बहाते) भाइ मे अब आपसे क्या कहु.. मे टुट चुका हु.. अंदरही अंदर घुट घुटके मर रहा हु.. साला सबका इलाज करता हु.. पर खुदका इलाज नही कर सकता..
कहेते सुधीरका सब्रका बांध टुट चुका ओर वो फुट फुटकर रोने लगा तब देवायत खडा होकर उसे सीनेसे लगा लेता हे.. ओर उनकी पीठ सहेलाता हे.. तब कुछ देर रोनेके बाद सुधीर सांत होजाता हे तब वहीसे अेक मटकेसे देवायत उसे पानी भरके पीला देता हे.. ओर सुधीर सांत होजाता हे.. फीर वो अपना मुह पानीसे धीकर पोछ लेता हे ओर वापस अपनी जगाहपे बेठ जाता हे.. ओर अपने सीनेमे दबे हुअे राज अपने यारको केह देनेका फैसला करलेता हे..
देवायत : हां सुधीर.. अब बोल तुजे क्या प्रोबलेम हे..? तु बतायेगा तभीतो उनका हल नीकलेगा..
सुधीर : भाइ.. अब आपसे क्या छुपाउ.. भाइ.. में.. में.. आपकी भाभीको डीवोर्स देना चाहता हु..
देवायत : (चोंकते) अरे पागलतो नही होगया क्या..? दोनोके बीच जगडा बगडातो नही हुआ..?
सुधीर : (सरमींदा होते) नही भाइ.. हम दोनो मीया बीवीके बीच कोइ जगडा नही हे.. हम दोनोही अेक दुसरेको बहुत प्यार भी करते हे.. फीरभी मे उसे डीवोर्स देना चाहता हु.. ताकी उनकी जींदगीतो सुधर जाये.. लेकीन वो मना कर रही हे.. कहेती हे डीवोर्स दियातो मे सुसाइड करलुगी.. अब आपही बताओ मे क्या करु..? उसे दुखी होते भी तो नही देख सकता.. वो बहुतही मासुम ओर अच्छी हे..
देवायत : (थोडा गुसेसे) तो फीर डफर.. अगर तुम दोनोमे इतना प्यार हेतो तुम उसे डीवोर्स देना क्यु चाहते हो..? कुछतो रीजन होगा.. बता क्या प्रोबलेम हे..?
सुधीर : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. प्लीज.. ये बात कीसीको मत कहेना.. दरसल.. दरसल मे आपकी भाभीको सारीरीक सुख ओर बच्चा देनेमे समर्थ नही हु.. ओर वो मुजे बार बार बच्चेके लीये फोर्स कर रही हे.. कहेती हे अपना इलाज करवाओ.. लेकीन अब उसे कैसे समजाउकी मेरा इलाज नही हो सकता.. मे उसे बच्चा नही दे सकता..
देवायत : (थोडा चींतीत होते) क्यु..? तेरा इलाज क्यु नही हो सकता..? अबतो विज्ञानभी काफी आगे बढ चुका हे.. ओर तुम खुद अेक डोक्टर हो.. तो इलाज करवानेमे क्या प्रोबलेम हे..?
सुधीर : (सरमाते) भाइ.. अब आपसे क्या कहु.. आपतो सब जानते हो.. बस बचपनसे मेरी कुछ गलत आदतकी वजहसे.. जो मे आपको नही बता सकता.. मेरे होर्मोन्स सामान्य मानीवसे कुछ अलगही हे..
देवायत : (थोडा सख्त लहेजेमे) मुजे पता हे तेरी आदत.. कोलेजमे सब सचही कहेते थे.. लेकीन में नही मानता था.. ओर आज देखभी लीयाकी वो लोग सच ही कहेते हे.. कमीने तुजे अैसी गलत आदत कहासे लग गइ.. हंम..? क्या इनकी वजहसे तुजे प्रोबलेम होगइ हे..? मुजे सब सच बताना..
सुधीर : (सर नीचे करते सरमाते) भाइ.. सोरी.. क्या आपने आज देखलीया..?
देवायत : (थोडी सख्तीसे) हां देखलीया.. अभी अभी वो रमशेके आदमीका लडका गया हे.. अपनी पेन्ट पहेनते.. सधीर तु अेक डोक्टर हे.. ओर डोक्टर होकर तुजे अैसी आदत कहासे लग गइ..? बात कुछ समजने नही आइ.. अगर तुजे पताही थाकी मे सारीरीक सुख ओर बच्चे देनेमे सक्षम नही हु.. तो फीर तुमने नीशाभाभीसे सादीही क्यु की..? क्युकी उनकी जींदगी खराब..
सुधीर : (खडे होते) भाइ.. सोरी.. अब मुजे आपको सब सचाइ बतानीही पडेगी वरना आपभी मुजे गलतही समजते रहोगे.. भाइ मेरे घरपे ये बात कोइ नही जानता.. मेने कीसीको नही बताया.. लेकीन मे आपको फुरसतमे सबकुछ सच बता दुगा.. अभीतो जानेका टाइम हे ओर आपकोभी ओर जगाह न्योता देने जाना हे..
तो आइअे हम घर चलते हे आपही अपनी भाभीको न्योता देदो.. जब सादीका नीपट जायेतो हम दोनो अकेले मीलेगे तब मे आपको सबकुछ बतादुगा.. अभीतो मेरे साथ घर चलो.. ओर आपकी भाभीसेभी बात करलो उनको कुज समजाओ.. सायद आपकी बात मानजाये..
देवायत : (खडे होते बहारकी ओर नीकलते) साले समजना उनको नही तुजे हे.. तु उनको डीवोर्स देना चाहता हे वो नही.. समजे..? चल उनसेभी मील लेता हु.. कइ दिनोसे भाभीको मीलाही नही..
कहेते दोनोही क्लीनीकके बहार चले जाते हे.. तब सुधीर क्लीनीकको ताला लगा देता हे ओर देवायतके पीछे बाइकमे बैठ जाता हे फीर देवायतने बाइक सीधेही पासमे सुधीरके घरपे लेली.. ओर दोनो उतर कर अंदर चले गये.. तो सुधीरकी बीवी नीशा टीवी देख रहीथी.. जैसेही देवायतको देखा उनके चहेरेपे चमक आगइ ओर हसते हुअे देवायतको नमस्ते करने लगी.. ओर सुधीरने देवायतको सोफेपे बीठाया..

नीशा : (खुस होते हसते) आइअे देवरजी.. आज इधरका रास्ता कैसे भुल गये..? मुजसे नही तो कमसे कम अपने फ्रेन्डको मीलनेतो आजाते.. हें..हें..हें..
सुधीर : (हसते) नीशा.. उनके छोटे भाइ बहेनकी सादी हे.. तो हमे न्योता देने क्लीनीकपे आयेथे.. तो मे इसे इधर लेकर आगया.. कहा आपही अपनी भाभीको न्योता देदो.. हें..हें..हें..
नीशा : (हसते) हांतो सही हेनां.. न्योता देने क्लीनीकपे थोडीनां जाते हे.. वोतो घरका व्यवहार हे.. ओर मेरी इस बारेमे चारुभाभी ओर रश्मीभाभीसे बातभी होगइ हे.. आप नही कहेते तोभी हम कल आने वाली हे.. कलही मुजे चारुभाभीके साथ आपके घर जाना हे.. मंजुभाभीने कहेलवाया हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) देखा..? देख डफर.. तुजे कैसी समजदार बीवी मीली हे.. ओर तु हेकी.. हें..हें..हें..
नीशा : (हसते) देवरजी समजाइअे अपने भाइको.. कैसी कैसी नादानीया करते हे.. उनको मुजे डीवोर्स देना हे.. कुछतो सोच समजकर बोलते.. क्या ये सब बच्चोका खेल हे..? समजाइअे इसे..
सुधीर : (हसतेअपने कान पकडते) सोरी नीशा.. अब अैसी गलती नही करुगा बस..? मेने इस बारेमे भाइसे बात करली हे.. वोही कुछ रास्ता नीकालेगे.. मे तुजे खोना नही चाहता..
नीशा : (हसते) हंम.. अब ठीक हे.. सुधीर तुम जरा फ्रेस होजाओ मे देवरजीके लीये कुछ बनाती हु..
देवायत : (हसते) भाभी कुछ नही पीना.. बस मुजे जाना हे.. अभी तीन चार घरपे ओर जाना हे..
सुधीर : (खडा होते) भाइ.. कीतने दिनोके बाद हमारे घर आये हो.. आप कुछ पीकरही जाना.. बैठो मे अभी फटाफट फ्रेस होकर आता हु..
कहेते वो बाथरुममे टोलीया लेकर चला गया तब नीशा जटसे अपने बेडरुममे चली गइ ओर थोडीही देरमे हाथमे अेक बंध कवर लेकर आगइ.. ओर देवायतके पास उनसे सटकर बैठ गइ फीर कवरको देवायतसे देते धीरेसे बात करने लगी..
नीशा : देवरजी ये चीठी हे.. अभी अपनी जेबमे फटाफट रखलो.. आप घर जाकर अकेलेमे फुरसतमे पढलेना.. मुजे आपसे बहुत कुछ कहेना हे.. जो बात मेने चीठीमेभी लीखी हे आप पढोगे तो सब कुछ समज जाओगे..
देवायत : (हसते धीरेसे) भाभी ये सब मै क्या सुन रहा हु.. कुछ प्रोबलेम हे क्या..?
नीशा : देवरजी मेने चीठीमे सबकुछ लीखा हे आप पढलीजीयेगा.. ओर हां इस बारेके कीसीसे जीक्र करनेकी जरुरत नही हे.. बात सीर्फ हम दोनोकेबीचही रहेनी चाहीये.. ये मेरी पर्सनल बात हे.. जो मे आपको रुबरु नही केह सकती.. इस बारेमे सीर्फ चारुभाभी जानती हे.. ओर कोइ नही.. अब आप बैठीये मे कुछ ठंडा बनाकर लाती हु.. अभी सुधीर आजायेगा.. हम फुरसतमे बात करेगे..
कहेते नीशा सरमाती हुइ कीचनमे चली गइ.. तब कुछही देरमे सुधीरभी अपना हाथ ओर मुह पोछते हुअे नीकला तबतक नीशाकी चीठी देवायतने जेबमे रखली थी.. तो कुछही देरमे नीशाभी दो ग्लास ठंडा लेकर आगइ ओर देवायतको देते उनकी ओर कातील स्माइल करने लगी.. जैसे कोइ जंग फतेह करली हो.. वो बहुतही खुसथी.. ओर देवायत ठंडा पीकर वहासे नीकलने लगा.. तब सुधीर ओर नीशा उनको दरवाजे तक बहार छोडने आये तब नीशा बहुतही सरमा रही थी..
फीर देवायत तीन चार जगाह ओर न्योता देकर सीधाही चंपाभाभीके घर चला गया.. तब वो सोनेकी तैयारीया कर रहीथी.. वो देवायतको देखतेही खुस होगइ ओर उनके अंदर जातेही उन्होने घरका दरवाजा बंध करलीया फीर देवायतको लेकर अपने बेडरुममे चली गइ.. जाहीरसी बात हे चंपाभाभी बहुतही कामी ओरत थी ओर देवायतको कभीभी अैसे बीना चुदवाये नही जाने देतीथी.. देवायत उसे कुछ कहे उनसे पहेलेही वो अपने सब कपडे नीकालकर अपने बेडपे पैर फैलाके लेट गइ.. ओर देवायतकी ओर देखकर हसने लगी..
फीर देवायतका हाथ खीचकर अपने उपर गीरा दीया.. तभी देवायत उसे कुछ कहेता इनसे पहेले चंपाभाभीने देवायतके मुहपे हाथ रखदीया ओर देवायतके सर्टके बटन खोलने लगी.. वो उसे कुछ बोलनेही नही देतीथी.. ओर लेटे लेटेही देवायतके कपडेभी नीकाल दीया ओर अपने उपर चडालीया.. फीर हाथ नीचे लेजाते उनके लंडको मुठीमे पकडलीया..
अपनी गीली चुतमे घीरसे चुतके लव होलमे लंडको अपना रास्ता दीखा दीया.. तभी देवायतने अेकही जटकेमे पुरा लंड चंपाभाभीकी चुतमे उतार दीया तब चंपाभाभी दर्दके मारे मुह बीगाडते छटपटाने लगी.. ओर उसने देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीचलीया ओर अपने पैर उनकी कमरपे रखते पैरकी आंटी लगादी.. फीर कुछ देर अैसेही देवायतकी कमरको अपनी चुतमे दबाते पडी रही.. ओर उनका दर्द कम होगया..

देवायत : (हसते होंठ चुमते) भाभी.. तुजेतो बहुत आग लगी हुइ हे.. हंम.. मुजे बोलनेही नही देती..
चंपा : (मुस्कुराते) मुजे सब पता हे आप मुजे न्योता देने आयेहो.. लेकीन मुजे मालकीनने केह दीया हे.. बस आपतो अपना कामही करो.. मुजे अेक बार ठंडी करदो.. जब आप मुजे अैसे बेहरीमेसे चोदते हो तो मुजे बहुत अच्छा लगता हे.. आजतो आप मेरी हालत खराब करही दो..
देवायत : (हसते कमर हीलाते) भाभी तु बहोत ठरकी होगइ हे.. इतनी ठरकीतो रश्मीभी नही हे..
चंपा : (कमर उछालते) आपको जोभी कहेना हो कहीये.. मेतो अैसेही आपसे चुदवाती रहुगी.. ओर कमसे कम तीन दिनमे तो मेरी अेक बार चुदाइ करकेही जाना.. अब आपकी आदतजो लग गइ हे..

फीर देवायत हाथके बल उचा होकर बडेही जोसमे चंपाकी चुदाइ करने लगता हे तब चंपा दर्दके मारे छटपटाते अपनी कमर उछाल उछालकर देवायतसे चुदवाती रही दोनोके बीच घमासान चुदाइ हुइ.. ओर काफी धकोपैनीके बाद दोनोही साथमे जड गये.. तब देवायतने चंपाभाभीकी चुतको अपने पानीसे लबालब भरदी.. ओर वो चंपाभाभीके उपरसे उतरकर बाथरुममे चला गया ओर अपना लंड साफ करेके बहार आगया..
फीर अपने कपडे पहेनकर चंपाभाभीकी ओर देखता हे तब वो बेसुध्ध जैसे बीस्तरे पडीथी ओर मुह बीगाडते दर्दके मारे कणस रहीथी.. आज देवायतने उनको बहुतही बहेरहेमीसे चोद लीया था.. तब देवायतको उनको देखकर हसी आगइ.. तो चंपाभी दर्द होते हुअे भी सरमाकर मुस्कराने लगी.. ओर देवायतने उनके उपर जुकते चंपाभाभीके होंठ चुमलीये ओर वो बहार नीकलकर अपनी हवेलीकी ओर नीकल गया..
इधर हवेलीपेभी सभी लोग अपने अपने रुममे जाकर सो चुकेथे.. होलमे सीर्फ नीर्मला चंदा ओर मंजुही बैठे थे ओर आपसमे बाते कर रहेथे.. कल पुरी रात देवायतने अपनी सुहागरातमे बीना नीचे उतरे चंदाको चौद लीयाथा.. इसीलीये वोभी काफी थकी हुइथी ओर उसे बहुत जोरोकी नींद आ रहीथी.. तो कुछ देर बाते करते वोभी सोने चली गइ.. तब होलमे सीर्फ मंजु ओर नीर्मलाही रहे गइ.. ओर देवु देरसे आने वाला था..
इसीलये मां बेटीको बाते करनेका पुरा मौका मील गया.. ओर मंजुने नीर्मलाको बाबाने कही हुइ सृतीकी पुरी बात बतादीकी सृतीभी उनकी सौतन हे.. तब अेक बारतो नीर्मलाकोभी सृतीसे ज्वेलेसी होने लगी.. फीर मंजुकी सब बाते याद आतेही अपने आपको नोर्मल करलीया.. फीरतो मंजुने सुरुसे लेकर अबतक की सब बाते नीर्मलाको बतादी की वो सब वास्तवमे कौन हे.. सभीका देवायतके साथ रीलेशन क्यु हे..
उसने भावना लता सरला.. सभीके बारेमे बात करली भानुको रमासे सादी क्यु करनी पडी वोभी मंजुने विस्तारसे नीर्मलाको बता दीया बस कुछ रीस्ते ओर पुनमके देवायतके साथ रीस्तेकी बात नही बताइ.. क्युकी नीर्मला धिरेनको बहुत प्यार करती हे ओर उसे अपना बेटा मानती हे.. तो जाहीरसी बात हे वो पुनमको अपनी बहु मानने लगी थी.. अब उसे देवायतकी कीतनीभी सौतन आजाये उसे बुरा नही लगा.. तभी मंजुने सृतीको फोन लगा दीया....
कन्टीन्यु
अध्याय - १०२/२
सुधीर अपनी क्लीनीक पेसन्टकी वजहसे रात ९ बजेतक खुली रखता था.. ओर कभी कभीतो रातके दस साडे दसभी बज जाते थे.. उन्होने क्लीनीकपे सीर्फ दवाइ देनेके लीये उसी गांवके अेक पढे लीखे लडके मुनाको रखाथा.. ओर सुधीरके साथही वो घर जाता था.. क्युकी दोनो आसपासही रहेते थे.. ओर केस नीकालनेके लीये अेक लडकीको रखाथा.. जो मुनाकीही छोटी बहेन बरखा थी.. वोभी पढीलीखी थी.. वो आठ बजतेही अपने घर चली जाती थी..
दोनोही छोटे परीवारसे थे.. उनके पीताजी रमेशके वहा उनकी दुकानपे नोकरी करते हे.. रमेशनेही मुना ओर उनकी बहेन बरखाको पढाया था.. दोनोही भाइ बहेन सहेरमे साथमे बसमे पढने जाते ओर सामको वापस आजाते जीनकी वजहसे दोनो भाइ बहेनको साथमे रहेनेका मोका ज्यादा मीलताथा.. कभी कभी बसमे जगाह कम होती तो दोनो अेकही सीटमे अेडजेस्ट करके बैठ जाते..
तो कभी ज्यादा भीडकी वजहसे दोनोही खडे खडे मुसाफरी करते तब मुना उनकी बहेनको प्रोटेक्ट करते उनके पीछे खडा रहेता जीनकी वजहसे उनका लंड तनके खडे होजाता ओर अपनी बहेनकी चुतडपे घुसे मारता.. तब उनकी बहेन सर्मसार होजाती ओर ये कइ बार होता था.. फीरतो वोभी भीड ना होती तबभी मुनासे अपनी गांड सटकर खडी रहेती.. कभी कभी अेक जगाह मीलती तो मुनाकी गोदमेही बैठ जाती.. ओर दोनोके बीच अेक दुसरेके प्रती आकर्सण बढने लगा..

जब दोनो कोलेजमे आगये.. बार बार दोनो अेक दुसरेके छुनेकी वजहसे नजदीक आने लगे.. फीरतो घरपेभी दोनो अकेले होते तब अेक दुसरेकी मस्तीया करने लगे.. ओर बात मस्तीयोसे सुरु होकर छेडछाड तब पहुंच गइ.. मुना मस्यीया करते उनकी बहेनके चुतडको दबाता.. तो कभी जान बुजकर उनके बुब्सको छु लेता.. उनकी बहेनभी मुनाकी अैसेही म्सया करने लगती.. उनकोभी इस खेलमे मजा आने लगा..
ओर अेक दिन मुनाने कोलेज जाते वक्त मौका देखते उनकी बहेनसे अपने दिलकी बात कहेदी.. तो उनकी बहेनने सरमाते मुनाको सबको पता चल जानेका डर जाहीर कीया तो मुनाने उसे सबसे बात छुपाने ओर जींदगीभर साथ नीभानेकी बात कहेते उसे मनालीया ओर उनकी बहेन बरखाने मुनाका प्यार अेक्सेप्ट करलीया.. नइ जवानीकी वजहसे आपसमे ही दोनो सबसे छुपकर प्यार करन लगे.. जबभी घरमे कोइ नही होता तो दोनो अेक दुसरेकी बाहोमे समा जाते.. ओर अेक दुसरेके होठोको चुमने लगते..

आखीर अेक दिन घरपे दोनो अकेलेथे तब दोनोही बहेक गये.. उस दिन मुनाने अपनी बहेनका कौमार्य भंग कर दीया.. ओर तबसे दोनोके बीच जीस्मानी तालुकात बन गये.. फीरतो अक्सर मौका मीलतेही दोनो मील जाते.. मुनाने उनकी बहेनको चोदकर उसे ओर कामुक्त करदीया.. उसेभी मुनासे चुदवानेकी लत लग गइ.. फीरतो दोनोही सबके सोजानेके बाद उपर छतपे मीलते.. यातो बरखा मुनाके रुममे देर रात चली जाती..
ओर खुब चुदाइ करते.. उनकी बहेनभी पढीलीखी होनेकी वजहसे समय समयपे आइपील लेलेती.. दोनोके रीस्तेके बारेमे आज तक कीसीको पता नही चला.. जब पढाइ पुरी होगइ तब दोनोही सुधीरके वहा नोकरीपे लग गये.. सबके सामने भाइ बहेन जैसा व्यहार करते ओर अपनी मयार्दामे रहेते.. ओर रात होतेही दोनो अेक दुसरेको मीया बीवी मानकर अेक होजाते.. ओर खुब चुदाइ करते..

देवायत जेसेही क्लीनीकमे गया वहा कोइ पेशन्ट नही था ओर सुधीरकी केबीनमेभी कोइ नही दिख रहाथा तब देवायत अंदरकी ओर जाने लगा.. तभी पेशन्टको चेक करनेकी केबीनसे उनका आदमी मुना अपने दांतोमे सर्ट दबाकर अपने पेन्टकी क्लीप बंध करते बहार नीकल रहाथा जैसेही देवायतकी ओर नजर गइतो अेकदा गभराते डर गया.. ओर सर नीचे करते जटसे बहार नीकल गया तो देवायतको कुछ अजीब लगा..
ओर वो उस केबीनकी ओर गया जहासे अभी मुना अपनी पेन्ट पहेनते बहार नीकलाथा.. ओर अंदर जाकते देखा तो सुधीरकी पेन्ट उनके घुटनो तकथी ओर वो जुककर टीस्यु पेपरसे अपनी गांड पोछ रहाथा.. तब देवायतको जरासीभी समजनेमे देर नही लगीकी सुधीर अंदर बेकीनमे अपने आदमी मुनासे गांड मरवा रहाथा.. ओर देवायत सुधीरकी नजर पडे इसे पहेलेही वहासे हट गया ओर बहार चला गया..
फीर कुछ देर रुककर फीरसे अंदर आगया.. तब सुधीरभी अपनी पेन्टमे क्लीप लगाते बहारकी ओर आ रहाथा ओर देवायतको अंदर आते देखकर अेकबार तो वोभी गभरा गया.. ओर फौरन नोर्मल होनेकी अेक्टींग करते देवायतकी ओर स्माइल करने लगा ओर उसे आवकार देते अपनी सामनेकी चेरपे देवायतको बेठनेका इसारा करने लगा.. तो देवायत उनके सामने बेठ गया ओर अेक नजरसे सुधीरकी ओर देखता रहा..
तब सुधीरकी गांड फटने लगी.. क्युकी वो देवायतको कोलेजसे जानता था ओर उसे येभी पताथाकी उनकी कोलेजमे सब उसे गांडु कहेके बुलातेथे.. तब अेक देवायतही था जो उनके लीये कीसीसेभी लडाइ करलेता था.. तबसे उनकी देवायतसे दोस्ती होगइ थी.. ओर उसने अपनी सादीमे देवायतकोभी न्योता दीयाथा ओर देवायतही उनके साथ सादीके मंडपमे उनके पासही अणवर बनके बैठाथा था..
देवायतकोभी पताथाकी सुधीरको सब गांडु क्यु कहेते थे.. लेकीन उसने आजतक सुधीरकी अैसी कोइ हरकत नही देखीथी जो सबपे विस्वास कर सके.. ओर आज उसने अपनी नजरोसे सुधीरकी सब हरकतोको देख लीया.. ओर उसे यकीन हो गयाकी वाकइ सुधीर गांड मरवानेका सौकीन हे.. तो वो अपनी खुबसुरत बीवीको कैसे चोदता होगा..? ओर उसे सुधीरकी बीवी नीशाका उनके प्रती देखनेका नजरीया समजमे आने लगाकी वो उनके प्रती क्यु आकर्सीत होने लगी हे..ओर उसे नीशाके लीये हम दर्दी होने लगी.. तभी..
डो.सुधीर : (हसते) आओ भाइ.. कहो आज यहाका रास्ता कैसे भुल गये.. हें..हें..हें.. बहुत दिनोके बाद हमारी याद आगइ..
देवायत : (हसते) भाइ तुजे ओर भाभीको सादीका न्योता देने आयाथा.. लखन ओर मेरी बहेन पुनमकी सादी हे.. तो तुम दोनो मीया बीवीको सादीमे आना हे.. ओर दोनोकी सादी हवेलीपे रखी हे..
सुधीर : (हसते) अरे वाह.. तो फीर घरपे आना चाहीयेनां.. चलो हम दोनो घरपे चलते हे.. आपकी भाभी सुनकर खुस होजायेगी.. आपको बहुत याद कर रही हे.. कभीतो घरपे भाभीको लेकर आया करो..
देवायत : (मुस्कुराते) हां.. तेरे घरतो चलते हे लेकीन मुजे तुमसे ओर बातभी करनी हे.. बैठ थोडी देर..
कहातो सुधीरकी गांड फटने लगी.. वो गभराने लगा ओर सोचने लगाकी कही अभी देवायतने उसे मुनासे गांड मरवाते देखतो नही लीया.. जो इस बारेमे बात करना चाहते हो.. ओर वो धीरेसे कहेने लगा..
सुधीर : (थोडा गभराते) भाइ.. वो.. वो.. आप कीस बारेमे मुजसे बात करना चाहते हे..?
देवायत : (जोरोसे हसते) अबे साले तो तुम इतना गभरा क्यु रहे हो.. तुम आज भी इतना फंटुसही हो..
सुधीर : (हसते सरमाते) नही यार.. अैसी कोइ बात नही हे.. बस तुम मुजसे बहुत कम मीलता हे तो तुमसे बात करनेमे अेक डरसा लगता हे.. तुम ठहेरे अेक ठाकुर ओर में.. अेक गांवका मामुली डाक्टर..
देवायत : (थोडा गुसेमे) साले अेक जापट लगाउगांना.. बात करता हे.. साले मे तुजे आजभी अपना वोही पुराना दोस्त मानता हु.. ओर मे दुसरोके लीये ठाकुर होगा.. तुम्हारे लीये नही समजा..? देख जाकर रमशेको.. वो आजभी मुजसे अेक दोस्तकी हेसीयतसे बीन्दास्त बाते करता हे.. साले उनके कहेनेपे तुमसे बात करने आया हु.. सोचा चलो बातभी करलुगा ओर साथमे सादीका न्योताभी देदुगा..
सुधीर : (थोडी आंख गीली करते) सोरी यार.. पता नही अब मुजे क्या होगया हे.. मुजे सबसे डर लग रहा हे.. साला मुजे कोइ समजने वालाही नही हे.. खुद मेरी बीवी भी नही..
देवायत : हां उसीके बारेमे तुमसे बात करनीथी.. बोल दोनोके बीच क्या इस्यु चल रहा हे.. तुम दोनोके बीच कुछ जगडा बगडा हुआ हे क्या..? येतो आज रमेशने कहा तभी मुजे मालुम हुआ..
सुधीर : (आंखमे आंसु बहाते) भाइ मे अब आपसे क्या कहु.. मे टुट चुका हु.. अंदरही अंदर घुट घुटके मर रहा हु.. साला सबका इलाज करता हु.. पर खुदका इलाज नही कर सकता..
कहेते सुधीरका सब्रका बांध टुट चुका ओर वो फुट फुटकर रोने लगा तब देवायत खडा होकर उसे सीनेसे लगा लेता हे.. ओर उनकी पीठ सहेलाता हे.. तब कुछ देर रोनेके बाद सुधीर सांत होजाता हे तब वहीसे अेक मटकेसे देवायत उसे पानी भरके पीला देता हे.. ओर सुधीर सांत होजाता हे.. फीर वो अपना मुह पानीसे धीकर पोछ लेता हे ओर वापस अपनी जगाहपे बेठ जाता हे.. ओर अपने सीनेमे दबे हुअे राज अपने यारको केह देनेका फैसला करलेता हे..
देवायत : हां सुधीर.. अब बोल तुजे क्या प्रोबलेम हे..? तु बतायेगा तभीतो उनका हल नीकलेगा..
सुधीर : भाइ.. अब आपसे क्या छुपाउ.. भाइ.. में.. में.. आपकी भाभीको डीवोर्स देना चाहता हु..
देवायत : (चोंकते) अरे पागलतो नही होगया क्या..? दोनोके बीच जगडा बगडातो नही हुआ..?
सुधीर : (सरमींदा होते) नही भाइ.. हम दोनो मीया बीवीके बीच कोइ जगडा नही हे.. हम दोनोही अेक दुसरेको बहुत प्यार भी करते हे.. फीरभी मे उसे डीवोर्स देना चाहता हु.. ताकी उनकी जींदगीतो सुधर जाये.. लेकीन वो मना कर रही हे.. कहेती हे डीवोर्स दियातो मे सुसाइड करलुगी.. अब आपही बताओ मे क्या करु..? उसे दुखी होते भी तो नही देख सकता.. वो बहुतही मासुम ओर अच्छी हे..
देवायत : (थोडा गुसेसे) तो फीर डफर.. अगर तुम दोनोमे इतना प्यार हेतो तुम उसे डीवोर्स देना क्यु चाहते हो..? कुछतो रीजन होगा.. बता क्या प्रोबलेम हे..?
सुधीर : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. प्लीज.. ये बात कीसीको मत कहेना.. दरसल.. दरसल मे आपकी भाभीको सारीरीक सुख ओर बच्चा देनेमे समर्थ नही हु.. ओर वो मुजे बार बार बच्चेके लीये फोर्स कर रही हे.. कहेती हे अपना इलाज करवाओ.. लेकीन अब उसे कैसे समजाउकी मेरा इलाज नही हो सकता.. मे उसे बच्चा नही दे सकता..
देवायत : (थोडा चींतीत होते) क्यु..? तेरा इलाज क्यु नही हो सकता..? अबतो विज्ञानभी काफी आगे बढ चुका हे.. ओर तुम खुद अेक डोक्टर हो.. तो इलाज करवानेमे क्या प्रोबलेम हे..?
सुधीर : (सरमाते) भाइ.. अब आपसे क्या कहु.. आपतो सब जानते हो.. बस बचपनसे मेरी कुछ गलत आदतकी वजहसे.. जो मे आपको नही बता सकता.. मेरे होर्मोन्स सामान्य मानीवसे कुछ अलगही हे..
देवायत : (थोडा सख्त लहेजेमे) मुजे पता हे तेरी आदत.. कोलेजमे सब सचही कहेते थे.. लेकीन में नही मानता था.. ओर आज देखभी लीयाकी वो लोग सच ही कहेते हे.. कमीने तुजे अैसी गलत आदत कहासे लग गइ.. हंम..? क्या इनकी वजहसे तुजे प्रोबलेम होगइ हे..? मुजे सब सच बताना..
सुधीर : (सर नीचे करते सरमाते) भाइ.. सोरी.. क्या आपने आज देखलीया..?
देवायत : (थोडी सख्तीसे) हां देखलीया.. अभी अभी वो रमशेके आदमीका लडका गया हे.. अपनी पेन्ट पहेनते.. सधीर तु अेक डोक्टर हे.. ओर डोक्टर होकर तुजे अैसी आदत कहासे लग गइ..? बात कुछ समजने नही आइ.. अगर तुजे पताही थाकी मे सारीरीक सुख ओर बच्चे देनेमे सक्षम नही हु.. तो फीर तुमने नीशाभाभीसे सादीही क्यु की..? क्युकी उनकी जींदगी खराब..
सुधीर : (खडे होते) भाइ.. सोरी.. अब मुजे आपको सब सचाइ बतानीही पडेगी वरना आपभी मुजे गलतही समजते रहोगे.. भाइ मेरे घरपे ये बात कोइ नही जानता.. मेने कीसीको नही बताया.. लेकीन मे आपको फुरसतमे सबकुछ सच बता दुगा.. अभीतो जानेका टाइम हे ओर आपकोभी ओर जगाह न्योता देने जाना हे..
तो आइअे हम घर चलते हे आपही अपनी भाभीको न्योता देदो.. जब सादीका नीपट जायेतो हम दोनो अकेले मीलेगे तब मे आपको सबकुछ बतादुगा.. अभीतो मेरे साथ घर चलो.. ओर आपकी भाभीसेभी बात करलो उनको कुज समजाओ.. सायद आपकी बात मानजाये..
देवायत : (खडे होते बहारकी ओर नीकलते) साले समजना उनको नही तुजे हे.. तु उनको डीवोर्स देना चाहता हे वो नही.. समजे..? चल उनसेभी मील लेता हु.. कइ दिनोसे भाभीको मीलाही नही..
कहेते दोनोही क्लीनीकके बहार चले जाते हे.. तब सुधीर क्लीनीकको ताला लगा देता हे ओर देवायतके पीछे बाइकमे बैठ जाता हे फीर देवायतने बाइक सीधेही पासमे सुधीरके घरपे लेली.. ओर दोनो उतर कर अंदर चले गये.. तो सुधीरकी बीवी नीशा टीवी देख रहीथी.. जैसेही देवायतको देखा उनके चहेरेपे चमक आगइ ओर हसते हुअे देवायतको नमस्ते करने लगी.. ओर सुधीरने देवायतको सोफेपे बीठाया..

नीशा : (खुस होते हसते) आइअे देवरजी.. आज इधरका रास्ता कैसे भुल गये..? मुजसे नही तो कमसे कम अपने फ्रेन्डको मीलनेतो आजाते.. हें..हें..हें..
सुधीर : (हसते) नीशा.. उनके छोटे भाइ बहेनकी सादी हे.. तो हमे न्योता देने क्लीनीकपे आयेथे.. तो मे इसे इधर लेकर आगया.. कहा आपही अपनी भाभीको न्योता देदो.. हें..हें..हें..
नीशा : (हसते) हांतो सही हेनां.. न्योता देने क्लीनीकपे थोडीनां जाते हे.. वोतो घरका व्यवहार हे.. ओर मेरी इस बारेमे चारुभाभी ओर रश्मीभाभीसे बातभी होगइ हे.. आप नही कहेते तोभी हम कल आने वाली हे.. कलही मुजे चारुभाभीके साथ आपके घर जाना हे.. मंजुभाभीने कहेलवाया हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) देखा..? देख डफर.. तुजे कैसी समजदार बीवी मीली हे.. ओर तु हेकी.. हें..हें..हें..
नीशा : (हसते) देवरजी समजाइअे अपने भाइको.. कैसी कैसी नादानीया करते हे.. उनको मुजे डीवोर्स देना हे.. कुछतो सोच समजकर बोलते.. क्या ये सब बच्चोका खेल हे..? समजाइअे इसे..
सुधीर : (हसतेअपने कान पकडते) सोरी नीशा.. अब अैसी गलती नही करुगा बस..? मेने इस बारेमे भाइसे बात करली हे.. वोही कुछ रास्ता नीकालेगे.. मे तुजे खोना नही चाहता..
नीशा : (हसते) हंम.. अब ठीक हे.. सुधीर तुम जरा फ्रेस होजाओ मे देवरजीके लीये कुछ बनाती हु..
देवायत : (हसते) भाभी कुछ नही पीना.. बस मुजे जाना हे.. अभी तीन चार घरपे ओर जाना हे..
सुधीर : (खडा होते) भाइ.. कीतने दिनोके बाद हमारे घर आये हो.. आप कुछ पीकरही जाना.. बैठो मे अभी फटाफट फ्रेस होकर आता हु..
कहेते वो बाथरुममे टोलीया लेकर चला गया तब नीशा जटसे अपने बेडरुममे चली गइ ओर थोडीही देरमे हाथमे अेक बंध कवर लेकर आगइ.. ओर देवायतके पास उनसे सटकर बैठ गइ फीर कवरको देवायतसे देते धीरेसे बात करने लगी..
नीशा : देवरजी ये चीठी हे.. अभी अपनी जेबमे फटाफट रखलो.. आप घर जाकर अकेलेमे फुरसतमे पढलेना.. मुजे आपसे बहुत कुछ कहेना हे.. जो बात मेने चीठीमेभी लीखी हे आप पढोगे तो सब कुछ समज जाओगे..
देवायत : (हसते धीरेसे) भाभी ये सब मै क्या सुन रहा हु.. कुछ प्रोबलेम हे क्या..?
नीशा : देवरजी मेने चीठीमे सबकुछ लीखा हे आप पढलीजीयेगा.. ओर हां इस बारेके कीसीसे जीक्र करनेकी जरुरत नही हे.. बात सीर्फ हम दोनोकेबीचही रहेनी चाहीये.. ये मेरी पर्सनल बात हे.. जो मे आपको रुबरु नही केह सकती.. इस बारेमे सीर्फ चारुभाभी जानती हे.. ओर कोइ नही.. अब आप बैठीये मे कुछ ठंडा बनाकर लाती हु.. अभी सुधीर आजायेगा.. हम फुरसतमे बात करेगे..
कहेते नीशा सरमाती हुइ कीचनमे चली गइ.. तब कुछही देरमे सुधीरभी अपना हाथ ओर मुह पोछते हुअे नीकला तबतक नीशाकी चीठी देवायतने जेबमे रखली थी.. तो कुछही देरमे नीशाभी दो ग्लास ठंडा लेकर आगइ ओर देवायतको देते उनकी ओर कातील स्माइल करने लगी.. जैसे कोइ जंग फतेह करली हो.. वो बहुतही खुसथी.. ओर देवायत ठंडा पीकर वहासे नीकलने लगा.. तब सुधीर ओर नीशा उनको दरवाजे तक बहार छोडने आये तब नीशा बहुतही सरमा रही थी..
फीर देवायत तीन चार जगाह ओर न्योता देकर सीधाही चंपाभाभीके घर चला गया.. तब वो सोनेकी तैयारीया कर रहीथी.. वो देवायतको देखतेही खुस होगइ ओर उनके अंदर जातेही उन्होने घरका दरवाजा बंध करलीया फीर देवायतको लेकर अपने बेडरुममे चली गइ.. जाहीरसी बात हे चंपाभाभी बहुतही कामी ओरत थी ओर देवायतको कभीभी अैसे बीना चुदवाये नही जाने देतीथी.. देवायत उसे कुछ कहे उनसे पहेलेही वो अपने सब कपडे नीकालकर अपने बेडपे पैर फैलाके लेट गइ.. ओर देवायतकी ओर देखकर हसने लगी..
फीर देवायतका हाथ खीचकर अपने उपर गीरा दीया.. तभी देवायत उसे कुछ कहेता इनसे पहेले चंपाभाभीने देवायतके मुहपे हाथ रखदीया ओर देवायतके सर्टके बटन खोलने लगी.. वो उसे कुछ बोलनेही नही देतीथी.. ओर लेटे लेटेही देवायतके कपडेभी नीकाल दीया ओर अपने उपर चडालीया.. फीर हाथ नीचे लेजाते उनके लंडको मुठीमे पकडलीया..
अपनी गीली चुतमे घीरसे चुतके लव होलमे लंडको अपना रास्ता दीखा दीया.. तभी देवायतने अेकही जटकेमे पुरा लंड चंपाभाभीकी चुतमे उतार दीया तब चंपाभाभी दर्दके मारे मुह बीगाडते छटपटाने लगी.. ओर उसने देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीचलीया ओर अपने पैर उनकी कमरपे रखते पैरकी आंटी लगादी.. फीर कुछ देर अैसेही देवायतकी कमरको अपनी चुतमे दबाते पडी रही.. ओर उनका दर्द कम होगया..

देवायत : (हसते होंठ चुमते) भाभी.. तुजेतो बहुत आग लगी हुइ हे.. हंम.. मुजे बोलनेही नही देती..
चंपा : (मुस्कुराते) मुजे सब पता हे आप मुजे न्योता देने आयेहो.. लेकीन मुजे मालकीनने केह दीया हे.. बस आपतो अपना कामही करो.. मुजे अेक बार ठंडी करदो.. जब आप मुजे अैसे बेहरीमेसे चोदते हो तो मुजे बहुत अच्छा लगता हे.. आजतो आप मेरी हालत खराब करही दो..
देवायत : (हसते कमर हीलाते) भाभी तु बहोत ठरकी होगइ हे.. इतनी ठरकीतो रश्मीभी नही हे..
चंपा : (कमर उछालते) आपको जोभी कहेना हो कहीये.. मेतो अैसेही आपसे चुदवाती रहुगी.. ओर कमसे कम तीन दिनमे तो मेरी अेक बार चुदाइ करकेही जाना.. अब आपकी आदतजो लग गइ हे..

फीर देवायत हाथके बल उचा होकर बडेही जोसमे चंपाकी चुदाइ करने लगता हे तब चंपा दर्दके मारे छटपटाते अपनी कमर उछाल उछालकर देवायतसे चुदवाती रही दोनोके बीच घमासान चुदाइ हुइ.. ओर काफी धकोपैनीके बाद दोनोही साथमे जड गये.. तब देवायतने चंपाभाभीकी चुतको अपने पानीसे लबालब भरदी.. ओर वो चंपाभाभीके उपरसे उतरकर बाथरुममे चला गया ओर अपना लंड साफ करेके बहार आगया..
फीर अपने कपडे पहेनकर चंपाभाभीकी ओर देखता हे तब वो बेसुध्ध जैसे बीस्तरे पडीथी ओर मुह बीगाडते दर्दके मारे कणस रहीथी.. आज देवायतने उनको बहुतही बहेरहेमीसे चोद लीया था.. तब देवायतको उनको देखकर हसी आगइ.. तो चंपाभी दर्द होते हुअे भी सरमाकर मुस्कराने लगी.. ओर देवायतने उनके उपर जुकते चंपाभाभीके होंठ चुमलीये ओर वो बहार नीकलकर अपनी हवेलीकी ओर नीकल गया..
इधर हवेलीपेभी सभी लोग अपने अपने रुममे जाकर सो चुकेथे.. होलमे सीर्फ नीर्मला चंदा ओर मंजुही बैठे थे ओर आपसमे बाते कर रहेथे.. कल पुरी रात देवायतने अपनी सुहागरातमे बीना नीचे उतरे चंदाको चौद लीयाथा.. इसीलीये वोभी काफी थकी हुइथी ओर उसे बहुत जोरोकी नींद आ रहीथी.. तो कुछ देर बाते करते वोभी सोने चली गइ.. तब होलमे सीर्फ मंजु ओर नीर्मलाही रहे गइ.. ओर देवु देरसे आने वाला था..
इसीलये मां बेटीको बाते करनेका पुरा मौका मील गया.. ओर मंजुने नीर्मलाको बाबाने कही हुइ सृतीकी पुरी बात बतादीकी सृतीभी उनकी सौतन हे.. तब अेक बारतो नीर्मलाकोभी सृतीसे ज्वेलेसी होने लगी.. फीर मंजुकी सब बाते याद आतेही अपने आपको नोर्मल करलीया.. फीरतो मंजुने सुरुसे लेकर अबतक की सब बाते नीर्मलाको बतादी की वो सब वास्तवमे कौन हे.. सभीका देवायतके साथ रीलेशन क्यु हे..
उसने भावना लता सरला.. सभीके बारेमे बात करली भानुको रमासे सादी क्यु करनी पडी वोभी मंजुने विस्तारसे नीर्मलाको बता दीया बस कुछ रीस्ते ओर पुनमके देवायतके साथ रीस्तेकी बात नही बताइ.. क्युकी नीर्मला धिरेनको बहुत प्यार करती हे ओर उसे अपना बेटा मानती हे.. तो जाहीरसी बात हे वो पुनमको अपनी बहु मानने लगी थी.. अब उसे देवायतकी कीतनीभी सौतन आजाये उसे बुरा नही लगा.. तभी मंजुने सृतीको फोन लगा दीया....
कन्टीन्यु

















