- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 33,324
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १२०/१
जब भुमीको पांच महीने हो गयेथे तब उसने नरेशको हाथ तक नही लगाने दिया.. ओर किशनके साथ चुदाइ करवाती रही.. ओर जब उनका पेट नीकला तब किशननेभी उसे हाथ नही लगाया.. ओर आखीर पुरे दिन होतेही भुमीकाने सृतीको जन्म दीया.. तब भुमीका ओर नरेश बहुतही खुस थे.. भुमीका की डिलेवरीके लीये गांवसे उनकी जेठानी यानीकी नरेशकी भाभी आइथी.. वो पांच महीने तक नरेशके घर उनके साथ रही.... अब आगे
(अतीतसे बहार)
यही सब सोचते भुमीका कब नींदकी आगोसमे चली गइ उसेभी पता नही चला.. लेकीन उस पांच महीनेके क्या हुआ वो भुमीको भी नही पताथा.. अेकतो पीछले पांच महिनेसे नरेशको भुमीकाने हाथ नही लगाने दीया.. तो नरेशकी सेक्स करनेकी इच्छा बहुत बढ गइ थी.. तो दुसरी ओर उनकी भाभी भी भुमीकी डीलवरीके अेक महिने पहेले आगइ थी.. तो वोभी अपने पतीको नही मील पाइ थी..
ओर उपरसे नरेशभी उनको महेंगी महेंगी गीफ्ट देकर उनका विसेस खयाल रखता था तो उनका पहेलेसे ही नरेशकी ओर कुछ ज्यादाही लगाव था.. ओर उपरसे उनको कोइ संतान नही हो रहीथी.. जीनकी वजहसे उनकी भाभीने नरेशको अपने दिलमे विसेस जगाह दे रखीथी.. जबभी नरेश गांवपे जाता उनकी भाभी नरेशका अेक पत्नीकी तराह खयाल रखती.. ओर नरेशके साथ मस्ती मजाकभी करती थी..

जब भुमीकी डीलीवरीका वक्त आगया ओर भुमीको होस्पीटलमे अेडमीट कर दीया.. तब उनकी भाभीका घरपे ओर होस्पीटलमे नरेशके साथ बहुत बार आना जाना हुआ.. ओर जीनकी वजहसे दोनोको अकेले रहेनेका काफी मौका मीलता रहा.. जीनकी वजहसे दोनो ओर नजदीक आगये.. पहेलेतो दोनोही नजरोसे बाते करने लगे.. ओर अेक दुसरेकी मस्तीया करते बात हाथ पकडके छेडछाड तक पहोंच गइ..
जब सृतीका जन्म होगया तब अेक सुबह उनकी भाभीको नहानेके लीये घर आना था.. तो नरेश उनको लेकर घर आगया.. जब उनकी भाभीने नहालीया तब अपने बालोपे टोलीया लपेटकर रुमसे बहार आइ.. ओर नरेशकी ओर देखते कातीलाना स्माइल करते अपने रुममे वापस चली गइ.. तब नरेश बहुत कुछ समज गया.. ओर उनसे कंट्रोल नही हुआ.. उनका लंड पेन्टके अंदरही जटके मारने लगा..
तब नरेश आज हिमंत करके उनके पीछे चला गया.. तब उनकी भाभी नंगी होकर अपना ब्लाउस पहेन रहीथी.. ओर नरेश उनके पीछे चला गया.. तो कुछ आहट सुनके जटसे पलट गइ.. ओर नरेशको देखतेही ब्लाउस उनके हाथसे छुट गया.. तो उसने जटसे अपने दोनो हाथोसे अपने बुब्स छुपालीये.. ओर सरमाके मुस्कुराते अपनी नजर जुकाते खडी रही.. ओर नरेशने उनके पास जाकर धीरेसे अपनी बाहोमे भीचलीया..
न.भाभी : (सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. ये गलत हे.. कोइ देखलेगा.. छोडीये.. मुजे.. अगर कीसीको पता चल गयातो हम कीसीको मुह दिखाने लायक नही रहेगे..
नरेश : (गाल चुमते) भाभी.. प्लीज.. आज मत रोकीये मुजे.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. यहा हे ही कौन..? भाभी आप मुजे बहुत अच्छी लगती हे.. प्लीज.. आज मत रोकीये.. मे आपसे प्यार करता हु..
न.भाभी : (सरमाते हसते) तबतो वहा मेरे पास आगये होते.. आपको मेने कीतनी हीन्ट दीथी.. फीरभी आप समजेही नही.. की आपकी भाभीभी आपको प्यार करती हे.. अभी छोडीये दरवाजा खुला हे..
ओर नरेश सबकुछ समज गयाकी भाभी ओलरेडी उनके साथ प्यार करनेके लीये तैयार हे.. ओर वो जटसे घरका मेइन गेइट बंध करके फौरन रुममे वापस आगया.. तब उनकी भाभी वेसेही सरमाते नंगी खडीथी.. ओर नरेशने उसे अपनी गोदमे उठा लीया.. ओर बेडपे आकर उनको पीठके बल लीटाके खुदभी कपडे नीकालकर बेडपे आगया.. तब उनकी भाभीने नरेशको जोरोसे खीचके अपनी बाहोमे भीच लीया ओर दोनोके होंठ मील गये..
न.भाभी : देवरजी हमे जल्द जानाभी हे.. अब मे अेक दो महीने यही हु.. जोभी करना हे जल्दी करलीजीये..
ओर नरेन उनकी भाभीपे चड गया.. तब नरेशको पताही नही चलाकी उनकी भाभीने कब उनका लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट करदीया.. नरेशको अपने लंडपे गरमाहट महेसुस हुइ ओर उसने अेकही जटकेमे अपना लंड उनकी भाभीकी चुतमे उतार दीया.. तब उनकी भाभीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर नरेशको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तब नरेश अपनी कमरको जोरोसे हीलाते उनकी भाभीको चोदने लगा..

ओर कुछही देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. आखीर नरेश अकडने लगा तो उनकी भाभीके होठोको लीपलोक करते जोरोसे कमर हीलाने लगा.. तब उनकी भाभी भी समज गइ ओर वो नरेशको जोरोसे बाहोमे भीचते उनकी पीठ सहेलाने लगी.. ओर नरेश उनकी भाभीकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तब उनकी भाभी भी नरेशको बाहोमे भीचते साथमे जडने लगी.. ओर कुछही देरमे दोनो सांत होगये..
न.भाभी : (सरमाते हसते पीठ सहेलाते) तो आखीर आपने अपनी भाभीको चोद ही लीया.. अगर पहेले थोडी हीमत करदेते तो मे कबसे आसे चुद गइ होती.. लेकीन आप समजेही नही..
नरेश : (होठ चुमते) भाभी.. मेरी हिमत नही हुइ.. लेकीन अब फीकर मत करना.. अब जबतक हम जींन्दा रहेगे तबतक हम दोनो मीया बीवीकी तराह रहेगे.. अब मे वहा आकरभी आपकी चुदाइ करता रहुगा..
न.भाभी : हां देरवजी.. आपके बडेभाइ तो मुजे ठीकसे चोदभी नही पाते.. हो सकेतो मुजेभी प्रेगनेन्ट कर दीजीये.. मे हमारा बच्चा पैदा करुगी कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगी.. क्या मुजे बच्चा देगेनां..?
नरेश : हां भाभी.. आजसे आप मेरी बीवी हें.. बस ध्यान रखीयेगा की हमारे रीस्तेके बारेमे भुमीको पता ना चले..
न.भाभी : (सरमाते हसते) हंम.. नही चलेगा.. चलीये अब उपरसे हटीये हमे जाना होगा.. बहुत देर होगइ..
फीर नरेश उनके उपरसे हट गया तब दोनोने अेक बार फीरसे बाथरुममें जाकर साथमे नहा लीया.. तब वहाभी नरेशने उनकी भाभीके साथ नहाते छेडखानीकी.. फीर दोनोही फटाफट तैयार होकर घरसे नीकल गये.. ओर होस्पीटल आगये.. ओर तीसरे दिन भुमीका सृतीके साथ घर आगइ.. तब उनकी भाभी खाना बनाती.. ओर नरेशकी ओर इसारोसे बाते करते उनको वासना भरी नजरोसे देखती.. ओर नरेशको अपने जलवे दीखाती..

आखीर नरेशभी तो अेक मर्द था.. वो अपनी भाभीकी नजरेको कैसे नही पहेचानता.. उसी रात किचनमे नरेश ओर उनकी भाभी दोनोही वापस मीले.. तो नरेशने उनकी भाभीको अपनी बाहोमे भर लीया.. तो उनकी भाभीनेभी हसते हुअे नरेशका लंड अपनी मुठीमे पकडलीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. फीरतो दोनोही बहेक गये.. ओर नरेशने उनकी भाभीको वही नीचे फर्सपे लीटा दीया..

ओर अपना लंड नीकालकर उनकी भाभीकी सारी उनकी कमर तक उची करली ओर अपनी भाभीके उपर चडके लेट गया.. ओर उनकी भाभीने नरेशको जोरोसे अपनी भाहोमे भीचलीया.. ओर सब कुछ होगया.. नरेशने उनकी भाभीको अेक बार फीर कीचनमे चोद लीया..
फीर तो दोनो अक्सर मीलने लगे.. भुमीका ज्यादातर छोटी बच्चीके साथ अपने रुममे आराम करती.. तब नेरश ओर उनकी भाभी.. कभी किचनमे तो कभी उनकी भाभीके रुममे तो कभी उपरकी मजीलके कमरेमे सुबह नहाने जाती तब मील जाते ओर चुदाइ कर लेते..

जब तक उनकी भाभी नरेशके घर रही.. तबतक नरेश ओर उनकी भाभीने खुब चुदाइकी.. आखीर उनकी भाभीका अपने गांव जानेका वक्त हो गया.. ओर वो वापस अपने गांव चली गइ.. समय बीतने लगा.. ओर ओर सृतीभी बडी होने लगी.. फीरतो नेरश उनकी भाभीको मीलनेके लीये उनके गांव जानेके लीये हमेसा तत्पर रहेने लगा.. अब वो हर राखीके दिन अपने गांव जाने लगा.. ओर बीचमे भी मौका मीलतेही कोइ बहाना बनाकर सालमे अेक दो बार चला जाता.. ओर वहा उनकी भाभीकी खुब चुदाइ करके वापस आजाता..
अैसेही दिनसे हप्ते हप्तेसे महिने ओर महिनेसे साल बीतने लगे.. इसी बीच किशनभी नरेश जोबमे होता या अपने गांव जाता तब भुमीको मीलने चला आता.. ओर भुमीको अेक पत्नीकी तराह प्यार करते उनका खयाल रखता.. तो भुमीकाभी अेक पत्नीकी तराह किशनके साथ चुदाइ करवाके अपना हर फर्ज पुरा करती.. भुमी अब नरेश से ज्यादा किशनको तवजो देने लगी थी.. वो किशनको ही अपना पती मानने लगी थी..
अैसेही साल बीतने लगे.. ओर सृतीभी बडी होती गइ.. वो किशनको मामा कहेके बुलाती.. अैसेही सृती १२ सालकी होगइ.. किशनने उनका अच्छी स्कुलमे दाखला दिलवा दियाथा.. तब अेक दिन नरेश होस्पीटलमे ही चकर खाते गीर गया.. ओर कुछ समय बीमार रहेनेके बाद अेक दिन सबको छोडकर चला गया.. तब किशननेही उनका सब कार्य किया.. तब नरेशकी माता उनका भाइ भाभी भी आगये थे.. तब उनकी भाभी खुब रोइ.. फीर कुछ दिन साथ रहेकर भुमीको सब कुछ सोंपकर वापस चले गये..
फीरतो भुमीको खुला दौर मील गया.. किशन ओर भुमीका खुलकर अेक मीया बीवीकी तराह मीलने लगे.. लेकीन भुमीकाने आजतक नातो सृतीको ओर नाही दुसरेको पता चलने दिया की किशन उनका पती हे.. सृतीके सामने दोनोही भाइ बहेनकी तराह रहते.. ओर जब सृती स्कुल चली जाती तब मीया बीवीकी तराह खुब चुदाइ करते.. जबतक किशन सहेर आता जाता रहा तबतक दोनो मीया बीवीकी तराह मीलते रहे..
अब सृती काफी बडी होगइ थी.. सृती ओर मंजु साथमे ही कोलेजमे पढती थी.. जबतक किशन जीन्दा था तबतक वो सृतीकी पढाइका ओर भुमीके घरके खर्चेका पैसा देता रहा.. इसी बीच देवायत ओर मंजु प्यार करते थे.. ओर सृती दोनोको पहेली बार अपने घर लाइ तब भुमीको नही पताथा की देवायत किशनका बेटा हे.. क्युकी जबसे नरेश गुजर गयाथा.. तबसे भुमीने किशनके घर जाना छोड दियाथा..
तब देवायत मंजुने वहीसे आश्रममे जाकर सादी करलीथी.. ओर अपनी सुहागरातभी भुमीके घरपे ही मना चुके थे.. इसी बीच बहुत कुछ हो गयाथा.. देवायत नीर्मलाके साथभी रीलेशनमे था.. ओर उसेभी देवायत मंजुके रीस्तेके बारेमे सब पता चल गया.. तो नीर्मलाने देवायतके साथ अपने रीलेशनभी खतम करलीये थे.. तब देवायत मंजुको अपने घर सादी करके ले आया.. ओर अेक दिन किशनभी सबको छोडकर चला गया..
इधर दोनो कपलके बीच अपनी सुहागरातमे पुरी रातमे चुदाइका तांडव होता रहा.. धिरेन पुरी रातमे पुनमको सीर्फ दो बारही चोद पाया.. उनमेभी धिरेन जल्दीसे जड गया.. ओर पुनमको प्यासी रख दीया.. फीर दोनो नींदकी आगोसमे चले गये.. तो बाजुके रुममे लखनने वायग्रा खाकर लताको चोदकर उनकी हालत खराब करदी.. तो वही हाल रमाका भी हुआ.. भानुने रमाको बडी बेहरेहमीसे चोद लीया था..
तो देवायतने भी चंदा ओर मंजुको दो दो बार चोदलीया था.. फीर तीनोही अेक दुसरेके साथ चीपककर सो गये.. तो गांवमेभी आज सादीकी वजहसे सभी ओरते ओर लडकीया तैयार होकर आइथी ओर अपने यारसे साथ नैन मटकर करते मस्तीया करते ज्यादा गरम होगइ थी.. ओर वही हाल उन सबके यारके थे.. जीनकी वजहसे आज गांवमेभी ओरते ओर लडकीया अपने यारसे या जीनके साथ अवैध रीस्ताथा.. उनसे चुद गइ.. पुरी रात गांवमेभी चुदाइका दोर चलता रहा..
आज हवेलीपे सुबह सब लोग थकानकी वजहसे बहुत देरसे उठे.. सभी लोग नहाके कंपलीट तैयार होकर होलमे आगये.. तो सबने दोनो कपलको अबभी सोने दिया.. तो रमाभी बडी मुस्कीलसे चलकर कीचनमे चली गइ.. तब मंजु सृती ओर चंदाने उनकी मस्ती करते रमाको खुब छेडा.. तब रमा बहुतही सर्मसार होगइ.. देरसे पुनम लता भी नहाके कंपलीट होकर नीचे आगइ.. तब लता थोडा लंगडाके चल रहीथी.. ओर आतेही दोनो पुनमके रुममे चली गइ..
तब नीलम वंदनाभी कंपलीट होकर अपने घर जानेकी तैयारीया कर रहीथी.. धीरे धीरे करते सभी लोग होलमे तैयार होकर आगये.. तबतक दया रजीया ओर चंपाभाभी ने मीलकर चाइ नास्ता बनालीया.. तबतक धिरेन ओर लखनभी कंपलीट होकर नीचे आगये.. ओर सभीने मीलकर चाइ नास्ता करलीया.. तब भानुकी फेमीली ओर भुमीका सृती सब घर जानेकी तैयारीया करने लगे.. तो वंदनाभी सबको मीलकर अपने घर चली गइ..
सरला : (आंसु बहाते) मंजु बेटा.. अब हम चलते हे.. भावु इधरही रुक रही हे.. तो हम भावेशको साथ लेजा रहे हे.. दो दो बच्चा भावु कहा स्महालेगी..? भावेश थोडा बडा होगया हे.. अबतो रमाके साथभी रहेता हे.. तो कोइ दीकत नही होगी.. बस हमारी लताका खयाल रखना..
मंजुला : (हसते) अरे मौसी.. लता थोडीना पराये घरपे हे.. आप इनकी फीकर मत कीजीये.. मेरीतो छोटी बहेन हे.. हम इनका खुब खयाल रखेगे आप टेन्सन मतलो..
भुमीका : (हसते) क्या सरला भाभी.. आप खामखा चीन्ता कर रही हे.. मुजे तो अैसा लगता ही नही की आपकी लता ससुरालमे आइ हे.. चलीये चीन्ता छोडीये.. अब हमे भी घर जाना हे..
देवायत : (हसते) बुआ.. आप दो पहोरको हमारे साथही चलती.. हम सभी साथमे चले जाते..
भुमीका : (सरमाते हसते) नही देवु.. वो सृतीने उनकी सहेलीको कल तक रहेनेको कहाथा.. तो आज उसे अपनी क्लीनीकपे जाना होगा.. दो तीन दिनके बादतो नीमु ओर राजीवभी उधर आजायेगे.. आप इनको छोडने आजाना.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) हां बुआ.. ये ठीक रहेगा मे ओर चंदादीदी दोनोही इनके साथ आजायेगी.. ताकी सहेरसे सादीके लीये सृतीकी पसंदकी कुछ खरीदारी भी होजायेगी.. उसेभी साथ लेजाना हे..
भानु : (खडा होते गले मीलते) भाइ.. तो हम चलते हे.. दो पहोरको खाना खानेके बाद नीलमको लेकर सीधाही नीकल जाउगा.. ओर यहा आजाउगा फीर हम सब साथमे चले जायेगे..
देवायत : (हसते गले मीलते) हां यार.. आनेके लीये बहुत लोग हे.. हमे दोनो कार लेकर जाना पडेगा..
भुमीका : (खडी होते) चलो सभीको राम राम.. अब हमभी चलते हे..
कहेते भुमीका सबको गले मीलने लगी.. तो सृतीभी बडोको पांव छुते बाकीको गले मीलने लगी.. तब देवुको मीलते वो खुब सरमाइ.. तो रमा भानुभी सबको मीलने लगे.. तब लता बहार आगइ.. ओर सबको गले मीलकर खुब रोइ.. फीर भावेशको अपने सीनेसे लगालीया.. ओर उनके गाल चुमते उसे रोते हुअे खुब प्यार दिया.. फीर रमाने लताको समजाकर भावेशको अपनी गोदमे लेलीया..
तब भावनाने लताको सम्हाला.. ओर सभी अपना अपना सामान लेकर बहार नीकलने लगे.. तो नीर्मला राजीव देवायत..घरके सभी लोग उन लोगोको छोडने बहार तक साथ गये.. भानु अपना सामान कारकी डीकीमे रखने लगा.. तबतक लता भावेशको गोदमे लेकर खडी रही.. ओर उसे प्यार देती रही.. क्युकी अबतक भावेशको लताने ही सम्हाला था.. लेकीन सादीके कुछ दिन पहेलेही रमाने उसे सम्हाल लीया था..
मंजुला : (भुमीको गले मीलते धीरेसे कानमे) बुआ.. मेने आपके पर्समे गोलीया रखदी हे.. उसे हर दिन सुबह लेलेना.. दो दिनके बाद हम वहा आ रहे हे..
भुमीका : (खुस होते सरको चुमते) हंम.. मेरी बच्ची.. तु कीतना खयाल रखती हे.. चल हम चलते हे..
मंजुला : (सृतीकी ओर देखते हसते) बुआ.. मेरी इस सौतनका खयाल रखना.. हें..हें..हें..
सृती : (कारमेसे हसते) कमीनी.. तु अेक बार घर चल.. फीर तुजे बताती हु.. सौतन वाली.. हें..हें..हें..
भुमीका : (कारमे आगे बैठते) अब चल भी.. जगडा बादमे करलेना.. हें..हें..हें.. चलो सबको बाय..
कहातो सृतीने सबकी ओर हाथ हीलाते कारको सहेरकी ओर जाने दी.. तो भानुभी देवायतकी बडी कारमे अपना सब सामान ओर घरके सब लोगोको लेकर नीकल गया.. ओर सभी लोग वापस घरमे आगये.. तब मंजु ओर चंदा पुनम लता चारो अंदर जाकर टुर के लीये कपडेकी पेकींग करने लगे.. तो देवायत ओर राजीव अपने खेतोकी ओर नीकल गये..
तब लखन ओर धिरेन भी उपर अपने रुममे जाकर हनीमुनपे जानेकी तैयारीया करने लगे.. लखन अपना सामान देख रहाथा तब धिरेन भी अपने रुममे अकेला पडा तो उनको मौका मील गया.. उनको पताथा की नीलमभी सहेरमे दाखला लेने साथ चल रही हे.. तब वो उनके लीये लाया नया मोबाइल नीकालकर नया सीम डालकरे अपना नंबर सेव करके चेक करने लगा.. ओर उसने अलगसे मोबाइल अपनी जेबमे रख लीया..
होलमे सीर्फ भावना ओर नीर्मला बैठीथी तब भावना अपनी बच्चीको दुध पीला रहीथी.. चंदाने मंजुके बच्चे विजयको जुलेमे डालकर सुला दीया था.. जबसे चंदा सादी करके धिरेनसे दुर होगइ थी तबसे वो मंजुके बच्चे विजयको अपना बेटा मानकर उनका कुछ विसेसही खयाल रखती थी.. नीर्मला अपनी जगाहसे खडी होकर भावनाके पास आकर बैठ गइ ओर उनके सरपे हाथ घुमाते उसे प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. तब..
भावना : (हसते) मोम.. क्या हुआ..? आज इस बेटीपे बहुत प्यार आ रहा हे..? हें..हें..हें..
नीर्मला : (हसते) हां.. भावु.. आइ अेम सोरी.. तेरी इस हालतपे कही ना कही मेभी जीम्मेदार हु.. बस अेक बार अपनी मोमको माफ करदे.. फीर देख मे तेरी जींदगी कैसे खुसीयोसे भर दुगी.. आइ प्रोमीस..
भावना : (फीकी मुस्कानसे) नही मोम.. इसमे आपकी कोइ गलती नही हे.. जब मेरी किस्तमेही ये सब लीखा हेतो कीसीको क्या दोस देना.. मोम.. इनमे आप ओर मंजु लकी हे.. कमसे कम अपने तरीकेसे जींदगीतो जी रही हे.. ओर अब मुजेभी कोइ अफसोस नही हे..
नीर्मला : (प्यारसे गाल सहेलाते) नही भावु.. अपनी किस्मतको दोस मत दे.. हम अपने कुछ नीजी स्वार्थमे भुलही गयेकी हमारी बच्चीके दिलमे क्या क्या सपने हे.. मंजुसे मेरी तेरे बारेमे सबकुछ बाते होगइ हे.. तु कोइभी चीन्ता मत करना.. तुजे अपने तरीकेसे अपनी जींदगी जीनेका पुरा अधीकार हे.. बेटी.. जीले अपनी जींदगी.. अब तेरी मोम.. तुमसे कुछभी नही कहेगी..
भावना : (आस्चर्यसे) मोम.. क्या सचमे मंजुदीदीने आपको सबकुछ बता दीया हे..?
नीर्मला : (मुस्कुराते) हां बेटा.. बस यही समजले हम सब कोइ सामान्य ओरते नही हे.. अब मुजे तेरे कीसीभी रीलेशनसे कोइ अेतराज नही हे.. सायद इसीलीये मंजु ओर देवुने हमारा मकान तेरे नाम करनेको कहा हे.. कास तबही मेने ठंडे दिमागसे सोचते तेरीभी सादी हमारे देवुसे करदी होती.. तो आज कोइ समस्याही नही होती.. भावु.. आइ अेम सोरी.. तुम अपनाले अपना पुराना प्यार.. मुजे कोइ अेतरज नही.. मे तेरे साथ हु..
भावना : (नम आंखोसे नजर जुकाते) मोम.. मेरी जीजुसे इस बारेमे बात होगइ हे.. उसने मेरे प्यारको अपना लीया हे.. क्या मेने मंजुदीदी के साथ कुछ गलततो नही कीया..?
नीर्मला : (मुस्कुराते) नही भावु.. तुमने कुछभी गलत नही कीया.. मेरी मंजु बहुतही समजदार हे.. हम मंजुको कभी समज ही नही पाये.. की वो कौन हे.. देख अभीभी तेरी मौसी ओर सृतीकोभी अपना चुकी हे.. फीरभी तुमतो उनकी सगी बहेन हो.. जब भानु अपना प्यार सादीके बादभी पा सकता हे.. तो फीर तुम क्यु नही..?
नीर्मला : क्या सीर्फ मर्दोको ही ये अधीकार हे..? हम ओरतोको नही..? भावु.. प्यारके मामलेमे मे खुली सोच वाली हु.. प्यारतो कभी भी कीसीके साथ हो सकता हे.. ये हम दोनो पती पत्नीके बीचका मामला हे की हम दोनो अेक दुसरेके साथ कीतना जीमेदार.. ओर अेक दुसरेके साथ कीतना समर्पीत हे.. क्या तुम भानुको छोड रही हो..?
भावना : नही मोम.. मंजुदीदीने मना कीया हे.. मे भानुके साथही रहेकर अपना पुराना प्यार पालुगी.. सायद यही उनकी सजा होगी.. जब वो मुजसे प्यारही नही करताथा तो फीर मुजे दो दो बच्चे क्यु दे दीये..? मोम.. अगर मुजे कोइ प्रोबलेम होगी तो मे हमारे घरपे रहेने आजाउगी..
नीर्मला : (हसते) हां.. आजाना.. अब वो घर तेराही हे.. तु वहा कभीभी आ सकती हे.. ओर वहा रेहभी सकती हे.. बेटी.. देवु तुजे बहुत खुस रखेगा..
मां बेटी दोनोही बाते करती रही तबतक मंजु चंदा पुनम ओर लतामे मीलकर सब पेकींग करली.. तो दया रजीया ओर चंपाभाभीने खानाभी बना लीया.. तो उधर रश्मीनेभी खाना बनाकर सरपंचको खीलाकर खुदभी खा लीया.. तबतक राजीव ओर देवायतभी खेतोसे आकर फ्रेस होगये.. लखन धिरनभी नीचे आगये ओर सभी खाना खाने बैठ गये.. तो वंदनाभी अपने सभी पेपर रेडी करके खानेके लीये बैठ गइ.. तभी..
चारु : (सरमाते नजरे चुराते धीरेसे) बेटा.. वो.. तुम देवुके साथ जा रही हो.. तो तुजे मौका मीलेतो उनसे बात करलेना..
वंदना : (समज गइथी फीरभी अनजान बनते खाना खाते) कीस बारेमे..?
चारु : (सरमाते मुस्कुराते) क्यु..? उस रात हमारे बीच बाततो हुइ थी.. अपने प्यारके बारेमे..
वंदना : (सरमाते धीरेसे) मोम.. उनकी कीतनी बीवीया होगइ हे.. ओर अबतो सृतीदीदीके साथभी सादी कर रहे हे.. तो क्या अब मुजे अपनायेगा..? मानलो मुजे अपनाभी लीया तो क्या ये सही होगा..? लोगोकी छोडो पापाको पता चलेगातो क्या कहेगे..? कुछतो सोचो..?
चारु : बेटी.. कबतक अपने प्यारके लीये अैसे घुट घुटकर जीयेगी.. तुजे उनके साथ सादी करके कहा हवेलीपे रहेना हे.. उनकी बीवी बनकर यहाभी तो रेह सकती हे.. ओर भाडमे जाये लोग.. आज तक कोइ मेरी बच्चीके लीये रीस्ता लेकर हमारे घरपे तो नही आये..? तो हम क्यु लोगोकी परवा करे..?
चारु : ओर कीन कीन कमीनोका रीस्ता कीसके साथ हे वो सब मुजे पता हे.. मे सबको जवाब देदुगी.. ओर तेरे पापाको मे सम्हाल लुगी.. हमे कहा दुसरोके सामने तुम्हारी सादीका ढंढोरा पीटना हे.. तु यहा रहेकरभी अपनी सादीसुधा जींदगी बीता सकती हे..
वंदना : मोम.. अभीतो जो चल रहा हे चलने दे.. इसके बारेमे हम बादमे सोचेगे.. पुनोदीदी कहेगी तब मे आपको बता दुगी.. इस बारेमे उनके साथ मेरी बात होगइ हे.. अभीतो नोकरीके बारेमे सोचना हे.. जब अेक बार स्कुल बन जाये तब हम इस बारेमे सोचेगे.. तबतक आपतो हे.. हें..हें..हें..
चारु : (सरमाते हसते) अरे वो तेरी नोकरी तो पकी होगइ समज.. देवुजो साथ चल रहे हे.. हें..हें..हें.. उनकी होनेवाली बीवीका इतना खयाल नही रखेगा..? हें..हें..हें..
वंदना : (सरमाते हसते जुठे गुसेसे) मोम.. तुमभी कीतनी कमीनी हो.. अभी उनकी बीवी नही हु.. समजी..?
चारु : (हसते) अरे नही हुइ तो होजायेगी.. मुजे पुरा यकीन हे.. चल ठीक हे.. हम बादमे बात करेगे.. मुजेभी नीशाके पास जाना हे.. तेरे पापाकोतो अब हमसे बात करनेका टाइमही नही मीलता.. सुबह ही नीकल जाते हे.. पता नही कहा जाते होगे.. वो ओर हमारे सामतभाइ आजकल पंचायतके कामसे साथमे ही घुमते हे..
अध्याय - १२०/१
जब भुमीको पांच महीने हो गयेथे तब उसने नरेशको हाथ तक नही लगाने दिया.. ओर किशनके साथ चुदाइ करवाती रही.. ओर जब उनका पेट नीकला तब किशननेभी उसे हाथ नही लगाया.. ओर आखीर पुरे दिन होतेही भुमीकाने सृतीको जन्म दीया.. तब भुमीका ओर नरेश बहुतही खुस थे.. भुमीका की डिलेवरीके लीये गांवसे उनकी जेठानी यानीकी नरेशकी भाभी आइथी.. वो पांच महीने तक नरेशके घर उनके साथ रही.... अब आगे
(अतीतसे बहार)
यही सब सोचते भुमीका कब नींदकी आगोसमे चली गइ उसेभी पता नही चला.. लेकीन उस पांच महीनेके क्या हुआ वो भुमीको भी नही पताथा.. अेकतो पीछले पांच महिनेसे नरेशको भुमीकाने हाथ नही लगाने दीया.. तो नरेशकी सेक्स करनेकी इच्छा बहुत बढ गइ थी.. तो दुसरी ओर उनकी भाभी भी भुमीकी डीलवरीके अेक महिने पहेले आगइ थी.. तो वोभी अपने पतीको नही मील पाइ थी..
ओर उपरसे नरेशभी उनको महेंगी महेंगी गीफ्ट देकर उनका विसेस खयाल रखता था तो उनका पहेलेसे ही नरेशकी ओर कुछ ज्यादाही लगाव था.. ओर उपरसे उनको कोइ संतान नही हो रहीथी.. जीनकी वजहसे उनकी भाभीने नरेशको अपने दिलमे विसेस जगाह दे रखीथी.. जबभी नरेश गांवपे जाता उनकी भाभी नरेशका अेक पत्नीकी तराह खयाल रखती.. ओर नरेशके साथ मस्ती मजाकभी करती थी..

जब भुमीकी डीलीवरीका वक्त आगया ओर भुमीको होस्पीटलमे अेडमीट कर दीया.. तब उनकी भाभीका घरपे ओर होस्पीटलमे नरेशके साथ बहुत बार आना जाना हुआ.. ओर जीनकी वजहसे दोनोको अकेले रहेनेका काफी मौका मीलता रहा.. जीनकी वजहसे दोनो ओर नजदीक आगये.. पहेलेतो दोनोही नजरोसे बाते करने लगे.. ओर अेक दुसरेकी मस्तीया करते बात हाथ पकडके छेडछाड तक पहोंच गइ..
जब सृतीका जन्म होगया तब अेक सुबह उनकी भाभीको नहानेके लीये घर आना था.. तो नरेश उनको लेकर घर आगया.. जब उनकी भाभीने नहालीया तब अपने बालोपे टोलीया लपेटकर रुमसे बहार आइ.. ओर नरेशकी ओर देखते कातीलाना स्माइल करते अपने रुममे वापस चली गइ.. तब नरेश बहुत कुछ समज गया.. ओर उनसे कंट्रोल नही हुआ.. उनका लंड पेन्टके अंदरही जटके मारने लगा..
तब नरेश आज हिमंत करके उनके पीछे चला गया.. तब उनकी भाभी नंगी होकर अपना ब्लाउस पहेन रहीथी.. ओर नरेश उनके पीछे चला गया.. तो कुछ आहट सुनके जटसे पलट गइ.. ओर नरेशको देखतेही ब्लाउस उनके हाथसे छुट गया.. तो उसने जटसे अपने दोनो हाथोसे अपने बुब्स छुपालीये.. ओर सरमाके मुस्कुराते अपनी नजर जुकाते खडी रही.. ओर नरेशने उनके पास जाकर धीरेसे अपनी बाहोमे भीचलीया..
न.भाभी : (सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. ये गलत हे.. कोइ देखलेगा.. छोडीये.. मुजे.. अगर कीसीको पता चल गयातो हम कीसीको मुह दिखाने लायक नही रहेगे..
नरेश : (गाल चुमते) भाभी.. प्लीज.. आज मत रोकीये मुजे.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. यहा हे ही कौन..? भाभी आप मुजे बहुत अच्छी लगती हे.. प्लीज.. आज मत रोकीये.. मे आपसे प्यार करता हु..
न.भाभी : (सरमाते हसते) तबतो वहा मेरे पास आगये होते.. आपको मेने कीतनी हीन्ट दीथी.. फीरभी आप समजेही नही.. की आपकी भाभीभी आपको प्यार करती हे.. अभी छोडीये दरवाजा खुला हे..
ओर नरेश सबकुछ समज गयाकी भाभी ओलरेडी उनके साथ प्यार करनेके लीये तैयार हे.. ओर वो जटसे घरका मेइन गेइट बंध करके फौरन रुममे वापस आगया.. तब उनकी भाभी वेसेही सरमाते नंगी खडीथी.. ओर नरेशने उसे अपनी गोदमे उठा लीया.. ओर बेडपे आकर उनको पीठके बल लीटाके खुदभी कपडे नीकालकर बेडपे आगया.. तब उनकी भाभीने नरेशको जोरोसे खीचके अपनी बाहोमे भीच लीया ओर दोनोके होंठ मील गये..
न.भाभी : देवरजी हमे जल्द जानाभी हे.. अब मे अेक दो महीने यही हु.. जोभी करना हे जल्दी करलीजीये..
ओर नरेन उनकी भाभीपे चड गया.. तब नरेशको पताही नही चलाकी उनकी भाभीने कब उनका लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट करदीया.. नरेशको अपने लंडपे गरमाहट महेसुस हुइ ओर उसने अेकही जटकेमे अपना लंड उनकी भाभीकी चुतमे उतार दीया.. तब उनकी भाभीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर नरेशको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तब नरेश अपनी कमरको जोरोसे हीलाते उनकी भाभीको चोदने लगा..

ओर कुछही देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. आखीर नरेश अकडने लगा तो उनकी भाभीके होठोको लीपलोक करते जोरोसे कमर हीलाने लगा.. तब उनकी भाभी भी समज गइ ओर वो नरेशको जोरोसे बाहोमे भीचते उनकी पीठ सहेलाने लगी.. ओर नरेश उनकी भाभीकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तब उनकी भाभी भी नरेशको बाहोमे भीचते साथमे जडने लगी.. ओर कुछही देरमे दोनो सांत होगये..
न.भाभी : (सरमाते हसते पीठ सहेलाते) तो आखीर आपने अपनी भाभीको चोद ही लीया.. अगर पहेले थोडी हीमत करदेते तो मे कबसे आसे चुद गइ होती.. लेकीन आप समजेही नही..
नरेश : (होठ चुमते) भाभी.. मेरी हिमत नही हुइ.. लेकीन अब फीकर मत करना.. अब जबतक हम जींन्दा रहेगे तबतक हम दोनो मीया बीवीकी तराह रहेगे.. अब मे वहा आकरभी आपकी चुदाइ करता रहुगा..
न.भाभी : हां देरवजी.. आपके बडेभाइ तो मुजे ठीकसे चोदभी नही पाते.. हो सकेतो मुजेभी प्रेगनेन्ट कर दीजीये.. मे हमारा बच्चा पैदा करुगी कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगी.. क्या मुजे बच्चा देगेनां..?
नरेश : हां भाभी.. आजसे आप मेरी बीवी हें.. बस ध्यान रखीयेगा की हमारे रीस्तेके बारेमे भुमीको पता ना चले..
न.भाभी : (सरमाते हसते) हंम.. नही चलेगा.. चलीये अब उपरसे हटीये हमे जाना होगा.. बहुत देर होगइ..
फीर नरेश उनके उपरसे हट गया तब दोनोने अेक बार फीरसे बाथरुममें जाकर साथमे नहा लीया.. तब वहाभी नरेशने उनकी भाभीके साथ नहाते छेडखानीकी.. फीर दोनोही फटाफट तैयार होकर घरसे नीकल गये.. ओर होस्पीटल आगये.. ओर तीसरे दिन भुमीका सृतीके साथ घर आगइ.. तब उनकी भाभी खाना बनाती.. ओर नरेशकी ओर इसारोसे बाते करते उनको वासना भरी नजरोसे देखती.. ओर नरेशको अपने जलवे दीखाती..

आखीर नरेशभी तो अेक मर्द था.. वो अपनी भाभीकी नजरेको कैसे नही पहेचानता.. उसी रात किचनमे नरेश ओर उनकी भाभी दोनोही वापस मीले.. तो नरेशने उनकी भाभीको अपनी बाहोमे भर लीया.. तो उनकी भाभीनेभी हसते हुअे नरेशका लंड अपनी मुठीमे पकडलीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. फीरतो दोनोही बहेक गये.. ओर नरेशने उनकी भाभीको वही नीचे फर्सपे लीटा दीया..

ओर अपना लंड नीकालकर उनकी भाभीकी सारी उनकी कमर तक उची करली ओर अपनी भाभीके उपर चडके लेट गया.. ओर उनकी भाभीने नरेशको जोरोसे अपनी भाहोमे भीचलीया.. ओर सब कुछ होगया.. नरेशने उनकी भाभीको अेक बार फीर कीचनमे चोद लीया..
फीर तो दोनो अक्सर मीलने लगे.. भुमीका ज्यादातर छोटी बच्चीके साथ अपने रुममे आराम करती.. तब नेरश ओर उनकी भाभी.. कभी किचनमे तो कभी उनकी भाभीके रुममे तो कभी उपरकी मजीलके कमरेमे सुबह नहाने जाती तब मील जाते ओर चुदाइ कर लेते..

जब तक उनकी भाभी नरेशके घर रही.. तबतक नरेश ओर उनकी भाभीने खुब चुदाइकी.. आखीर उनकी भाभीका अपने गांव जानेका वक्त हो गया.. ओर वो वापस अपने गांव चली गइ.. समय बीतने लगा.. ओर ओर सृतीभी बडी होने लगी.. फीरतो नेरश उनकी भाभीको मीलनेके लीये उनके गांव जानेके लीये हमेसा तत्पर रहेने लगा.. अब वो हर राखीके दिन अपने गांव जाने लगा.. ओर बीचमे भी मौका मीलतेही कोइ बहाना बनाकर सालमे अेक दो बार चला जाता.. ओर वहा उनकी भाभीकी खुब चुदाइ करके वापस आजाता..
अैसेही दिनसे हप्ते हप्तेसे महिने ओर महिनेसे साल बीतने लगे.. इसी बीच किशनभी नरेश जोबमे होता या अपने गांव जाता तब भुमीको मीलने चला आता.. ओर भुमीको अेक पत्नीकी तराह प्यार करते उनका खयाल रखता.. तो भुमीकाभी अेक पत्नीकी तराह किशनके साथ चुदाइ करवाके अपना हर फर्ज पुरा करती.. भुमी अब नरेश से ज्यादा किशनको तवजो देने लगी थी.. वो किशनको ही अपना पती मानने लगी थी..
अैसेही साल बीतने लगे.. ओर सृतीभी बडी होती गइ.. वो किशनको मामा कहेके बुलाती.. अैसेही सृती १२ सालकी होगइ.. किशनने उनका अच्छी स्कुलमे दाखला दिलवा दियाथा.. तब अेक दिन नरेश होस्पीटलमे ही चकर खाते गीर गया.. ओर कुछ समय बीमार रहेनेके बाद अेक दिन सबको छोडकर चला गया.. तब किशननेही उनका सब कार्य किया.. तब नरेशकी माता उनका भाइ भाभी भी आगये थे.. तब उनकी भाभी खुब रोइ.. फीर कुछ दिन साथ रहेकर भुमीको सब कुछ सोंपकर वापस चले गये..
फीरतो भुमीको खुला दौर मील गया.. किशन ओर भुमीका खुलकर अेक मीया बीवीकी तराह मीलने लगे.. लेकीन भुमीकाने आजतक नातो सृतीको ओर नाही दुसरेको पता चलने दिया की किशन उनका पती हे.. सृतीके सामने दोनोही भाइ बहेनकी तराह रहते.. ओर जब सृती स्कुल चली जाती तब मीया बीवीकी तराह खुब चुदाइ करते.. जबतक किशन सहेर आता जाता रहा तबतक दोनो मीया बीवीकी तराह मीलते रहे..
अब सृती काफी बडी होगइ थी.. सृती ओर मंजु साथमे ही कोलेजमे पढती थी.. जबतक किशन जीन्दा था तबतक वो सृतीकी पढाइका ओर भुमीके घरके खर्चेका पैसा देता रहा.. इसी बीच देवायत ओर मंजु प्यार करते थे.. ओर सृती दोनोको पहेली बार अपने घर लाइ तब भुमीको नही पताथा की देवायत किशनका बेटा हे.. क्युकी जबसे नरेश गुजर गयाथा.. तबसे भुमीने किशनके घर जाना छोड दियाथा..
तब देवायत मंजुने वहीसे आश्रममे जाकर सादी करलीथी.. ओर अपनी सुहागरातभी भुमीके घरपे ही मना चुके थे.. इसी बीच बहुत कुछ हो गयाथा.. देवायत नीर्मलाके साथभी रीलेशनमे था.. ओर उसेभी देवायत मंजुके रीस्तेके बारेमे सब पता चल गया.. तो नीर्मलाने देवायतके साथ अपने रीलेशनभी खतम करलीये थे.. तब देवायत मंजुको अपने घर सादी करके ले आया.. ओर अेक दिन किशनभी सबको छोडकर चला गया..
इधर दोनो कपलके बीच अपनी सुहागरातमे पुरी रातमे चुदाइका तांडव होता रहा.. धिरेन पुरी रातमे पुनमको सीर्फ दो बारही चोद पाया.. उनमेभी धिरेन जल्दीसे जड गया.. ओर पुनमको प्यासी रख दीया.. फीर दोनो नींदकी आगोसमे चले गये.. तो बाजुके रुममे लखनने वायग्रा खाकर लताको चोदकर उनकी हालत खराब करदी.. तो वही हाल रमाका भी हुआ.. भानुने रमाको बडी बेहरेहमीसे चोद लीया था..
तो देवायतने भी चंदा ओर मंजुको दो दो बार चोदलीया था.. फीर तीनोही अेक दुसरेके साथ चीपककर सो गये.. तो गांवमेभी आज सादीकी वजहसे सभी ओरते ओर लडकीया तैयार होकर आइथी ओर अपने यारसे साथ नैन मटकर करते मस्तीया करते ज्यादा गरम होगइ थी.. ओर वही हाल उन सबके यारके थे.. जीनकी वजहसे आज गांवमेभी ओरते ओर लडकीया अपने यारसे या जीनके साथ अवैध रीस्ताथा.. उनसे चुद गइ.. पुरी रात गांवमेभी चुदाइका दोर चलता रहा..
आज हवेलीपे सुबह सब लोग थकानकी वजहसे बहुत देरसे उठे.. सभी लोग नहाके कंपलीट तैयार होकर होलमे आगये.. तो सबने दोनो कपलको अबभी सोने दिया.. तो रमाभी बडी मुस्कीलसे चलकर कीचनमे चली गइ.. तब मंजु सृती ओर चंदाने उनकी मस्ती करते रमाको खुब छेडा.. तब रमा बहुतही सर्मसार होगइ.. देरसे पुनम लता भी नहाके कंपलीट होकर नीचे आगइ.. तब लता थोडा लंगडाके चल रहीथी.. ओर आतेही दोनो पुनमके रुममे चली गइ..
तब नीलम वंदनाभी कंपलीट होकर अपने घर जानेकी तैयारीया कर रहीथी.. धीरे धीरे करते सभी लोग होलमे तैयार होकर आगये.. तबतक दया रजीया ओर चंपाभाभी ने मीलकर चाइ नास्ता बनालीया.. तबतक धिरेन ओर लखनभी कंपलीट होकर नीचे आगये.. ओर सभीने मीलकर चाइ नास्ता करलीया.. तब भानुकी फेमीली ओर भुमीका सृती सब घर जानेकी तैयारीया करने लगे.. तो वंदनाभी सबको मीलकर अपने घर चली गइ..
सरला : (आंसु बहाते) मंजु बेटा.. अब हम चलते हे.. भावु इधरही रुक रही हे.. तो हम भावेशको साथ लेजा रहे हे.. दो दो बच्चा भावु कहा स्महालेगी..? भावेश थोडा बडा होगया हे.. अबतो रमाके साथभी रहेता हे.. तो कोइ दीकत नही होगी.. बस हमारी लताका खयाल रखना..
मंजुला : (हसते) अरे मौसी.. लता थोडीना पराये घरपे हे.. आप इनकी फीकर मत कीजीये.. मेरीतो छोटी बहेन हे.. हम इनका खुब खयाल रखेगे आप टेन्सन मतलो..
भुमीका : (हसते) क्या सरला भाभी.. आप खामखा चीन्ता कर रही हे.. मुजे तो अैसा लगता ही नही की आपकी लता ससुरालमे आइ हे.. चलीये चीन्ता छोडीये.. अब हमे भी घर जाना हे..
देवायत : (हसते) बुआ.. आप दो पहोरको हमारे साथही चलती.. हम सभी साथमे चले जाते..
भुमीका : (सरमाते हसते) नही देवु.. वो सृतीने उनकी सहेलीको कल तक रहेनेको कहाथा.. तो आज उसे अपनी क्लीनीकपे जाना होगा.. दो तीन दिनके बादतो नीमु ओर राजीवभी उधर आजायेगे.. आप इनको छोडने आजाना.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) हां बुआ.. ये ठीक रहेगा मे ओर चंदादीदी दोनोही इनके साथ आजायेगी.. ताकी सहेरसे सादीके लीये सृतीकी पसंदकी कुछ खरीदारी भी होजायेगी.. उसेभी साथ लेजाना हे..
भानु : (खडा होते गले मीलते) भाइ.. तो हम चलते हे.. दो पहोरको खाना खानेके बाद नीलमको लेकर सीधाही नीकल जाउगा.. ओर यहा आजाउगा फीर हम सब साथमे चले जायेगे..
देवायत : (हसते गले मीलते) हां यार.. आनेके लीये बहुत लोग हे.. हमे दोनो कार लेकर जाना पडेगा..
भुमीका : (खडी होते) चलो सभीको राम राम.. अब हमभी चलते हे..
कहेते भुमीका सबको गले मीलने लगी.. तो सृतीभी बडोको पांव छुते बाकीको गले मीलने लगी.. तब देवुको मीलते वो खुब सरमाइ.. तो रमा भानुभी सबको मीलने लगे.. तब लता बहार आगइ.. ओर सबको गले मीलकर खुब रोइ.. फीर भावेशको अपने सीनेसे लगालीया.. ओर उनके गाल चुमते उसे रोते हुअे खुब प्यार दिया.. फीर रमाने लताको समजाकर भावेशको अपनी गोदमे लेलीया..
तब भावनाने लताको सम्हाला.. ओर सभी अपना अपना सामान लेकर बहार नीकलने लगे.. तो नीर्मला राजीव देवायत..घरके सभी लोग उन लोगोको छोडने बहार तक साथ गये.. भानु अपना सामान कारकी डीकीमे रखने लगा.. तबतक लता भावेशको गोदमे लेकर खडी रही.. ओर उसे प्यार देती रही.. क्युकी अबतक भावेशको लताने ही सम्हाला था.. लेकीन सादीके कुछ दिन पहेलेही रमाने उसे सम्हाल लीया था..
मंजुला : (भुमीको गले मीलते धीरेसे कानमे) बुआ.. मेने आपके पर्समे गोलीया रखदी हे.. उसे हर दिन सुबह लेलेना.. दो दिनके बाद हम वहा आ रहे हे..
भुमीका : (खुस होते सरको चुमते) हंम.. मेरी बच्ची.. तु कीतना खयाल रखती हे.. चल हम चलते हे..
मंजुला : (सृतीकी ओर देखते हसते) बुआ.. मेरी इस सौतनका खयाल रखना.. हें..हें..हें..
सृती : (कारमेसे हसते) कमीनी.. तु अेक बार घर चल.. फीर तुजे बताती हु.. सौतन वाली.. हें..हें..हें..
भुमीका : (कारमे आगे बैठते) अब चल भी.. जगडा बादमे करलेना.. हें..हें..हें.. चलो सबको बाय..
कहातो सृतीने सबकी ओर हाथ हीलाते कारको सहेरकी ओर जाने दी.. तो भानुभी देवायतकी बडी कारमे अपना सब सामान ओर घरके सब लोगोको लेकर नीकल गया.. ओर सभी लोग वापस घरमे आगये.. तब मंजु ओर चंदा पुनम लता चारो अंदर जाकर टुर के लीये कपडेकी पेकींग करने लगे.. तो देवायत ओर राजीव अपने खेतोकी ओर नीकल गये..
तब लखन ओर धिरेन भी उपर अपने रुममे जाकर हनीमुनपे जानेकी तैयारीया करने लगे.. लखन अपना सामान देख रहाथा तब धिरेन भी अपने रुममे अकेला पडा तो उनको मौका मील गया.. उनको पताथा की नीलमभी सहेरमे दाखला लेने साथ चल रही हे.. तब वो उनके लीये लाया नया मोबाइल नीकालकर नया सीम डालकरे अपना नंबर सेव करके चेक करने लगा.. ओर उसने अलगसे मोबाइल अपनी जेबमे रख लीया..
होलमे सीर्फ भावना ओर नीर्मला बैठीथी तब भावना अपनी बच्चीको दुध पीला रहीथी.. चंदाने मंजुके बच्चे विजयको जुलेमे डालकर सुला दीया था.. जबसे चंदा सादी करके धिरेनसे दुर होगइ थी तबसे वो मंजुके बच्चे विजयको अपना बेटा मानकर उनका कुछ विसेसही खयाल रखती थी.. नीर्मला अपनी जगाहसे खडी होकर भावनाके पास आकर बैठ गइ ओर उनके सरपे हाथ घुमाते उसे प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. तब..
भावना : (हसते) मोम.. क्या हुआ..? आज इस बेटीपे बहुत प्यार आ रहा हे..? हें..हें..हें..
नीर्मला : (हसते) हां.. भावु.. आइ अेम सोरी.. तेरी इस हालतपे कही ना कही मेभी जीम्मेदार हु.. बस अेक बार अपनी मोमको माफ करदे.. फीर देख मे तेरी जींदगी कैसे खुसीयोसे भर दुगी.. आइ प्रोमीस..
भावना : (फीकी मुस्कानसे) नही मोम.. इसमे आपकी कोइ गलती नही हे.. जब मेरी किस्तमेही ये सब लीखा हेतो कीसीको क्या दोस देना.. मोम.. इनमे आप ओर मंजु लकी हे.. कमसे कम अपने तरीकेसे जींदगीतो जी रही हे.. ओर अब मुजेभी कोइ अफसोस नही हे..
नीर्मला : (प्यारसे गाल सहेलाते) नही भावु.. अपनी किस्मतको दोस मत दे.. हम अपने कुछ नीजी स्वार्थमे भुलही गयेकी हमारी बच्चीके दिलमे क्या क्या सपने हे.. मंजुसे मेरी तेरे बारेमे सबकुछ बाते होगइ हे.. तु कोइभी चीन्ता मत करना.. तुजे अपने तरीकेसे अपनी जींदगी जीनेका पुरा अधीकार हे.. बेटी.. जीले अपनी जींदगी.. अब तेरी मोम.. तुमसे कुछभी नही कहेगी..
भावना : (आस्चर्यसे) मोम.. क्या सचमे मंजुदीदीने आपको सबकुछ बता दीया हे..?
नीर्मला : (मुस्कुराते) हां बेटा.. बस यही समजले हम सब कोइ सामान्य ओरते नही हे.. अब मुजे तेरे कीसीभी रीलेशनसे कोइ अेतराज नही हे.. सायद इसीलीये मंजु ओर देवुने हमारा मकान तेरे नाम करनेको कहा हे.. कास तबही मेने ठंडे दिमागसे सोचते तेरीभी सादी हमारे देवुसे करदी होती.. तो आज कोइ समस्याही नही होती.. भावु.. आइ अेम सोरी.. तुम अपनाले अपना पुराना प्यार.. मुजे कोइ अेतरज नही.. मे तेरे साथ हु..
भावना : (नम आंखोसे नजर जुकाते) मोम.. मेरी जीजुसे इस बारेमे बात होगइ हे.. उसने मेरे प्यारको अपना लीया हे.. क्या मेने मंजुदीदी के साथ कुछ गलततो नही कीया..?
नीर्मला : (मुस्कुराते) नही भावु.. तुमने कुछभी गलत नही कीया.. मेरी मंजु बहुतही समजदार हे.. हम मंजुको कभी समज ही नही पाये.. की वो कौन हे.. देख अभीभी तेरी मौसी ओर सृतीकोभी अपना चुकी हे.. फीरभी तुमतो उनकी सगी बहेन हो.. जब भानु अपना प्यार सादीके बादभी पा सकता हे.. तो फीर तुम क्यु नही..?
नीर्मला : क्या सीर्फ मर्दोको ही ये अधीकार हे..? हम ओरतोको नही..? भावु.. प्यारके मामलेमे मे खुली सोच वाली हु.. प्यारतो कभी भी कीसीके साथ हो सकता हे.. ये हम दोनो पती पत्नीके बीचका मामला हे की हम दोनो अेक दुसरेके साथ कीतना जीमेदार.. ओर अेक दुसरेके साथ कीतना समर्पीत हे.. क्या तुम भानुको छोड रही हो..?
भावना : नही मोम.. मंजुदीदीने मना कीया हे.. मे भानुके साथही रहेकर अपना पुराना प्यार पालुगी.. सायद यही उनकी सजा होगी.. जब वो मुजसे प्यारही नही करताथा तो फीर मुजे दो दो बच्चे क्यु दे दीये..? मोम.. अगर मुजे कोइ प्रोबलेम होगी तो मे हमारे घरपे रहेने आजाउगी..
नीर्मला : (हसते) हां.. आजाना.. अब वो घर तेराही हे.. तु वहा कभीभी आ सकती हे.. ओर वहा रेहभी सकती हे.. बेटी.. देवु तुजे बहुत खुस रखेगा..
मां बेटी दोनोही बाते करती रही तबतक मंजु चंदा पुनम ओर लतामे मीलकर सब पेकींग करली.. तो दया रजीया ओर चंपाभाभीने खानाभी बना लीया.. तो उधर रश्मीनेभी खाना बनाकर सरपंचको खीलाकर खुदभी खा लीया.. तबतक राजीव ओर देवायतभी खेतोसे आकर फ्रेस होगये.. लखन धिरनभी नीचे आगये ओर सभी खाना खाने बैठ गये.. तो वंदनाभी अपने सभी पेपर रेडी करके खानेके लीये बैठ गइ.. तभी..
चारु : (सरमाते नजरे चुराते धीरेसे) बेटा.. वो.. तुम देवुके साथ जा रही हो.. तो तुजे मौका मीलेतो उनसे बात करलेना..
वंदना : (समज गइथी फीरभी अनजान बनते खाना खाते) कीस बारेमे..?
चारु : (सरमाते मुस्कुराते) क्यु..? उस रात हमारे बीच बाततो हुइ थी.. अपने प्यारके बारेमे..
वंदना : (सरमाते धीरेसे) मोम.. उनकी कीतनी बीवीया होगइ हे.. ओर अबतो सृतीदीदीके साथभी सादी कर रहे हे.. तो क्या अब मुजे अपनायेगा..? मानलो मुजे अपनाभी लीया तो क्या ये सही होगा..? लोगोकी छोडो पापाको पता चलेगातो क्या कहेगे..? कुछतो सोचो..?
चारु : बेटी.. कबतक अपने प्यारके लीये अैसे घुट घुटकर जीयेगी.. तुजे उनके साथ सादी करके कहा हवेलीपे रहेना हे.. उनकी बीवी बनकर यहाभी तो रेह सकती हे.. ओर भाडमे जाये लोग.. आज तक कोइ मेरी बच्चीके लीये रीस्ता लेकर हमारे घरपे तो नही आये..? तो हम क्यु लोगोकी परवा करे..?
चारु : ओर कीन कीन कमीनोका रीस्ता कीसके साथ हे वो सब मुजे पता हे.. मे सबको जवाब देदुगी.. ओर तेरे पापाको मे सम्हाल लुगी.. हमे कहा दुसरोके सामने तुम्हारी सादीका ढंढोरा पीटना हे.. तु यहा रहेकरभी अपनी सादीसुधा जींदगी बीता सकती हे..
वंदना : मोम.. अभीतो जो चल रहा हे चलने दे.. इसके बारेमे हम बादमे सोचेगे.. पुनोदीदी कहेगी तब मे आपको बता दुगी.. इस बारेमे उनके साथ मेरी बात होगइ हे.. अभीतो नोकरीके बारेमे सोचना हे.. जब अेक बार स्कुल बन जाये तब हम इस बारेमे सोचेगे.. तबतक आपतो हे.. हें..हें..हें..
चारु : (सरमाते हसते) अरे वो तेरी नोकरी तो पकी होगइ समज.. देवुजो साथ चल रहे हे.. हें..हें..हें.. उनकी होनेवाली बीवीका इतना खयाल नही रखेगा..? हें..हें..हें..
वंदना : (सरमाते हसते जुठे गुसेसे) मोम.. तुमभी कीतनी कमीनी हो.. अभी उनकी बीवी नही हु.. समजी..?
चारु : (हसते) अरे नही हुइ तो होजायेगी.. मुजे पुरा यकीन हे.. चल ठीक हे.. हम बादमे बात करेगे.. मुजेभी नीशाके पास जाना हे.. तेरे पापाकोतो अब हमसे बात करनेका टाइमही नही मीलता.. सुबह ही नीकल जाते हे.. पता नही कहा जाते होगे.. वो ओर हमारे सामतभाइ आजकल पंचायतके कामसे साथमे ही घुमते हे..































