Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 18 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२०/१

जब भुमीको पांच महीने हो गयेथे तब उसने नरेशको हाथ तक नही लगाने दिया.. ओर किशनके साथ चुदाइ करवाती रही.. ओर जब उनका पेट नीकला तब किशननेभी उसे हाथ नही लगाया.. ओर आखीर पुरे दिन होतेही भुमीकाने सृतीको जन्म दीया.. तब भुमीका ओर नरेश बहुतही खुस थे.. भुमीका की डिलेवरीके लीये गांवसे उनकी जेठानी यानीकी नरेशकी भाभी आइथी.. वो पांच महीने तक नरेशके घर उनके साथ रही.... अब आगे

(अतीतसे बहार)

यही सब सोचते भुमीका कब नींदकी आगोसमे चली गइ उसेभी पता नही चला.. लेकीन उस पांच महीनेके क्या हुआ वो भुमीको भी नही पताथा.. अ‍ेकतो पीछले पांच महिनेसे नरेशको भुमीकाने हाथ नही लगाने दीया.. तो नरेशकी सेक्स करनेकी इच्छा बहुत बढ गइ थी.. तो दुसरी ओर उनकी भाभी भी भुमीकी डीलवरीके अ‍ेक महिने पहेले आगइ थी.. तो वोभी अपने पतीको नही मील पाइ थी..

ओर उपरसे नरेशभी उनको महेंगी महेंगी गीफ्ट देकर उनका विसेस खयाल रखता था तो उनका पहेलेसे ही नरेशकी ओर कुछ ज्यादाही लगाव था.. ओर उपरसे उनको कोइ संतान नही हो रहीथी.. जीनकी वजहसे उनकी भाभीने नरेशको अपने दिलमे विसेस जगाह दे रखीथी.. जबभी नरेश गांवपे जाता उनकी भाभी नरेशका अ‍ेक पत्नीकी तराह खयाल रखती.. ओर नरेशके साथ मस्ती मजाकभी करती थी..





जब भुमीकी डीलीवरीका वक्त आगया ओर भुमीको होस्पीटलमे अ‍ेडमीट कर दीया.. तब उनकी भाभीका घरपे ओर होस्पीटलमे नरेशके साथ बहुत बार आना जाना हुआ.. ओर जीनकी वजहसे दोनोको अकेले रहेनेका काफी मौका मीलता रहा.. जीनकी वजहसे दोनो ओर नजदीक आगये.. पहेलेतो दोनोही नजरोसे बाते करने लगे.. ओर अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते बात हाथ पकडके छेडछाड तक पहोंच गइ..

जब सृतीका जन्म होगया तब अ‍ेक सुबह उनकी भाभीको नहानेके लीये घर आना था.. तो नरेश उनको लेकर घर आगया.. जब उनकी भाभीने नहालीया तब अपने बालोपे टोलीया लपेटकर रुमसे बहार आइ.. ओर नरेशकी ओर देखते कातीलाना स्माइल करते अपने रुममे वापस चली गइ.. तब नरेश बहुत कुछ समज गया.. ओर उनसे कंट्रोल नही हुआ.. उनका लंड पेन्टके अंदरही जटके मारने लगा..

तब नरेश आज हिमंत करके उनके पीछे चला गया.. तब उनकी भाभी नंगी होकर अपना ब्लाउस पहेन रहीथी.. ओर नरेश उनके पीछे चला गया.. तो कुछ आहट सुनके जटसे पलट गइ.. ओर नरेशको देखतेही ब्लाउस उनके हाथसे छुट गया.. तो उसने जटसे अपने दोनो हाथोसे अपने बुब्स छुपालीये.. ओर सरमाके मुस्कुराते अपनी नजर जुकाते खडी रही.. ओर नरेशने उनके पास जाकर धीरेसे अपनी बाहोमे भीचलीया..

न.भाभी : (सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. ये गलत हे.. कोइ देखलेगा.. छोडीये.. मुजे.. अगर कीसीको पता चल गयातो हम कीसीको मुह दिखाने लायक नही रहेगे..

नरेश : (गाल चुमते) भाभी.. प्लीज.. आज मत रोकीये मुजे.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. यहा हे ही कौन..? भाभी आप मुजे बहुत अच्छी लगती हे.. प्लीज.. आज मत रोकीये.. मे आपसे प्यार करता हु..

न.भाभी : (सरमाते हसते) तबतो वहा मेरे पास आगये होते.. आपको मेने कीतनी हीन्ट दीथी.. फीरभी आप समजेही नही.. की आपकी भाभीभी आपको प्यार करती हे.. अभी छोडीये दरवाजा खुला हे..

ओर नरेश सबकुछ समज गयाकी भाभी ओलरेडी उनके साथ प्यार करनेके लीये तैयार हे.. ओर वो जटसे घरका मेइन गेइट बंध करके फौरन रुममे वापस आगया.. तब उनकी भाभी वेसेही सरमाते नंगी खडीथी.. ओर नरेशने उसे अपनी गोदमे उठा लीया.. ओर बेडपे आकर उनको पीठके बल लीटाके खुदभी कपडे नीकालकर बेडपे आगया.. तब उनकी भाभीने नरेशको जोरोसे खीचके अपनी बाहोमे भीच लीया ओर दोनोके होंठ मील गये..

न.भाभी : देवरजी हमे जल्द जानाभी हे.. अब मे अ‍ेक दो महीने यही हु.. जोभी करना हे जल्दी करलीजीये..

ओर नरेन उनकी भाभीपे चड गया.. तब नरेशको पताही नही चलाकी उनकी भाभीने कब उनका लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट करदीया.. नरेशको अपने लंडपे गरमाहट महेसुस हुइ ओर उसने अ‍ेकही जटकेमे अपना लंड उनकी भाभीकी चुतमे उतार दीया.. तब उनकी भाभीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर नरेशको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तब नरेश अपनी कमरको जोरोसे हीलाते उनकी भाभीको चोदने लगा..





ओर कुछही देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. आखीर नरेश अकडने लगा तो उनकी भाभीके होठोको लीपलोक करते जोरोसे कमर हीलाने लगा.. तब उनकी भाभी भी समज गइ ओर वो नरेशको जोरोसे बाहोमे भीचते उनकी पीठ सहेलाने लगी.. ओर नरेश उनकी भाभीकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तब उनकी भाभी भी नरेशको बाहोमे भीचते साथमे जडने लगी.. ओर कुछही देरमे दोनो सांत होगये..

न.भाभी : (सरमाते हसते पीठ सहेलाते) तो आखीर आपने अपनी भाभीको चोद ही लीया.. अगर पहेले थोडी हीमत करदेते तो मे कबसे आसे चुद गइ होती.. लेकीन आप समजेही नही..

नरेश : (होठ चुमते) भाभी.. मेरी हिमत नही हुइ.. लेकीन अब फीकर मत करना.. अब जबतक हम जींन्दा रहेगे तबतक हम दोनो मीया बीवीकी तराह रहेगे.. अब मे वहा आकरभी आपकी चुदाइ करता रहुगा..

न.भाभी : हां देरवजी.. आपके बडेभाइ तो मुजे ठीकसे चोदभी नही पाते.. हो सकेतो मुजेभी प्रेगनेन्ट कर दीजीये.. मे हमारा बच्चा पैदा करुगी कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगी.. क्या मुजे बच्चा देगेनां..?

नरेश : हां भाभी.. आजसे आप मेरी बीवी हें.. बस ध्यान रखीयेगा की हमारे रीस्तेके बारेमे भुमीको पता ना चले..

न.भाभी : (सरमाते हसते) हंम.. नही चलेगा.. चलीये अब उपरसे हटीये हमे जाना होगा.. बहुत देर होगइ..

फीर नरेश उनके उपरसे हट गया तब दोनोने अ‍ेक बार फीरसे बाथरुममें जाकर साथमे नहा लीया.. तब वहाभी नरेशने उनकी भाभीके साथ नहाते छेडखानीकी.. फीर दोनोही फटाफट तैयार होकर घरसे नीकल गये.. ओर होस्पीटल आगये.. ओर तीसरे दिन भुमीका सृतीके साथ घर आगइ.. तब उनकी भाभी खाना बनाती.. ओर नरेशकी ओर इसारोसे बाते करते उनको वासना भरी नजरोसे देखती.. ओर नरेशको अपने जलवे दीखाती..





आखीर नरेशभी तो अ‍ेक मर्द था.. वो अपनी भाभीकी नजरेको कैसे नही पहेचानता.. उसी रात किचनमे नरेश ओर उनकी भाभी दोनोही वापस मीले.. तो नरेशने उनकी भाभीको अपनी बाहोमे भर लीया.. तो उनकी भाभीनेभी हसते हुअ‍े नरेशका लंड अपनी मुठीमे पकडलीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. फीरतो दोनोही बहेक गये.. ओर नरेशने उनकी भाभीको वही नीचे फर्सपे लीटा दीया..





ओर अपना लंड नीकालकर उनकी भाभीकी सारी उनकी कमर तक उची करली ओर अपनी भाभीके उपर चडके लेट गया.. ओर उनकी भाभीने नरेशको जोरोसे अपनी भाहोमे भीचलीया.. ओर सब कुछ होगया.. नरेशने उनकी भाभीको अ‍ेक बार फीर कीचनमे चोद लीया..

फीर तो दोनो अक्सर मीलने लगे.. भुमीका ज्यादातर छोटी बच्चीके साथ अपने रुममे आराम करती.. तब नेरश ओर उनकी भाभी.. कभी किचनमे तो कभी उनकी भाभीके रुममे तो कभी उपरकी मजीलके कमरेमे सुबह नहाने जाती तब मील जाते ओर चुदाइ कर लेते..





जब तक उनकी भाभी नरेशके घर रही.. तबतक नरेश ओर उनकी भाभीने खुब चुदाइकी.. आखीर उनकी भाभीका अपने गांव जानेका वक्त हो गया.. ओर वो वापस अपने गांव चली गइ.. समय बीतने लगा.. ओर ओर सृतीभी बडी होने लगी.. फीरतो नेरश उनकी भाभीको मीलनेके लीये उनके गांव जानेके लीये हमेसा तत्पर रहेने लगा.. अब वो हर राखीके दिन अपने गांव जाने लगा.. ओर बीचमे भी मौका मीलतेही कोइ बहाना बनाकर सालमे अ‍ेक दो बार चला जाता.. ओर वहा उनकी भाभीकी खुब चुदाइ करके वापस आजाता..

अ‍ैसेही दिनसे हप्ते हप्तेसे महिने ओर महिनेसे साल बीतने लगे.. इसी बीच किशनभी नरेश जोबमे होता या अपने गांव जाता तब भुमीको मीलने चला आता.. ओर भुमीको अ‍ेक पत्नीकी तराह प्यार करते उनका खयाल रखता.. तो भुमीकाभी अ‍ेक पत्नीकी तराह किशनके साथ चुदाइ करवाके अपना हर फर्ज पुरा करती.. भुमी अब नरेश से ज्यादा किशनको तवजो देने लगी थी.. वो किशनको ही अपना पती मानने लगी थी..

अ‍ैसेही साल बीतने लगे.. ओर सृतीभी बडी होती गइ.. वो किशनको मामा कहेके बुलाती.. अ‍ैसेही सृती १२ सालकी होगइ.. किशनने उनका अच्छी स्कुलमे दाखला दिलवा दियाथा.. तब अ‍ेक दिन नरेश होस्पीटलमे ही चकर खाते गीर गया.. ओर कुछ समय बीमार रहेनेके बाद अ‍ेक दिन सबको छोडकर चला गया.. तब किशननेही उनका सब कार्य किया.. तब नरेशकी माता उनका भाइ भाभी भी आगये थे.. तब उनकी भाभी खुब रोइ.. फीर कुछ दिन साथ रहेकर भुमीको सब कुछ सोंपकर वापस चले गये..

फीरतो भुमीको खुला दौर मील गया.. किशन ओर भुमीका खुलकर अ‍ेक मीया बीवीकी तराह मीलने लगे.. लेकीन भुमीकाने आजतक नातो सृतीको ओर नाही दुसरेको पता चलने दिया की किशन उनका पती हे.. सृतीके सामने दोनोही भाइ बहेनकी तराह रहते.. ओर जब सृती स्कुल चली जाती तब मीया बीवीकी तराह खुब चुदाइ करते.. जबतक किशन सहेर आता जाता रहा तबतक दोनो मीया बीवीकी तराह मीलते रहे..

अब सृती काफी बडी होगइ थी.. सृती ओर मंजु साथमे ही कोलेजमे पढती थी.. जबतक किशन जीन्दा था तबतक वो सृतीकी पढाइका ओर भुमीके घरके खर्चेका पैसा देता रहा.. इसी बीच देवायत ओर मंजु प्यार करते थे.. ओर सृती दोनोको पहेली बार अपने घर लाइ तब भुमीको नही पताथा की देवायत किशनका बेटा हे.. क्युकी जबसे नरेश गुजर गयाथा.. तबसे भुमीने किशनके घर जाना छोड दियाथा..

तब देवायत मंजुने वहीसे आश्रममे जाकर सादी करलीथी.. ओर अपनी सुहागरातभी भुमीके घरपे ही मना चुके थे.. इसी बीच बहुत कुछ हो गयाथा.. देवायत नीर्मलाके साथभी रीलेशनमे था.. ओर उसेभी देवायत मंजुके रीस्तेके बारेमे सब पता चल गया.. तो नीर्मलाने देवायतके साथ अपने रीलेशनभी खतम करलीये थे.. तब देवायत मंजुको अपने घर सादी करके ले आया.. ओर अ‍ेक दिन किशनभी सबको छोडकर चला गया..

इधर दोनो कपलके बीच अपनी सुहागरातमे पुरी रातमे चुदाइका तांडव होता रहा.. धिरेन पुरी रातमे पुनमको सीर्फ दो बारही चोद पाया.. उनमेभी धिरेन जल्दीसे जड गया.. ओर पुनमको प्यासी रख दीया.. फीर दोनो नींदकी आगोसमे चले गये.. तो बाजुके रुममे लखनने वायग्रा खाकर लताको चोदकर उनकी हालत खराब करदी.. तो वही हाल रमाका भी हुआ.. भानुने रमाको बडी बेहरेहमीसे चोद लीया था..

तो देवायतने भी चंदा ओर मंजुको दो दो बार चोदलीया था.. फीर तीनोही अ‍ेक दुसरेके साथ चीपककर सो गये.. तो गांवमेभी आज सादीकी वजहसे सभी ओरते ओर लडकीया तैयार होकर आइथी ओर अपने यारसे साथ नैन मटकर करते मस्तीया करते ज्यादा गरम होगइ थी.. ओर वही हाल उन सबके यारके थे.. जीनकी वजहसे आज गांवमेभी ओरते ओर लडकीया अपने यारसे या जीनके साथ अवैध रीस्ताथा.. उनसे चुद गइ.. पुरी रात गांवमेभी चुदाइका दोर चलता रहा..

आज हवेलीपे सुबह सब लोग थकानकी वजहसे बहुत देरसे उठे.. सभी लोग नहाके कंपलीट तैयार होकर होलमे आगये.. तो सबने दोनो कपलको अबभी सोने दिया.. तो रमाभी बडी मुस्कीलसे चलकर कीचनमे चली गइ.. तब मंजु सृती ओर चंदाने उनकी मस्ती करते रमाको खुब छेडा.. तब रमा बहुतही सर्मसार होगइ.. देरसे पुनम लता भी नहाके कंपलीट होकर नीचे आगइ.. तब लता थोडा लंगडाके चल रहीथी.. ओर आतेही दोनो पुनमके रुममे चली गइ..

तब नीलम वंदनाभी कंपलीट होकर अपने घर जानेकी तैयारीया कर रहीथी.. धीरे धीरे करते सभी लोग होलमे तैयार होकर आगये.. तबतक दया रजीया ओर चंपाभाभी ने मीलकर चाइ नास्ता बनालीया.. तबतक धिरेन ओर लखनभी कंपलीट होकर नीचे आगये.. ओर सभीने मीलकर चाइ नास्ता करलीया.. तब भानुकी फेमीली ओर भुमीका सृती सब घर जानेकी तैयारीया करने लगे.. तो वंदनाभी सबको मीलकर अपने घर चली गइ..

सरला : (आंसु बहाते) मंजु बेटा.. अब हम चलते हे.. भावु इधरही रुक रही हे.. तो हम भावेशको साथ लेजा रहे हे.. दो दो बच्चा भावु कहा स्महालेगी..? भावेश थोडा बडा होगया हे.. अबतो रमाके साथभी रहेता हे.. तो कोइ दीकत नही होगी.. बस हमारी लताका खयाल रखना..

मंजुला : (हसते) अरे मौसी.. लता थोडीना पराये घरपे हे.. आप इनकी फीकर मत कीजीये.. मेरीतो छोटी बहेन हे.. हम इनका खुब खयाल रखेगे आप टेन्सन मतलो..

भुमीका : (हसते) क्या सरला भाभी.. आप खामखा चीन्ता कर रही हे.. मुजे तो अ‍ैसा लगता ही नही की आपकी लता ससुरालमे आइ हे.. चलीये चीन्ता छोडीये.. अब हमे भी घर जाना हे..

देवायत : (हसते) बुआ.. आप दो पहोरको हमारे साथही चलती.. हम सभी साथमे चले जाते..

भुमीका : (सरमाते हसते) नही देवु.. वो सृतीने उनकी सहेलीको कल तक रहेनेको कहाथा.. तो आज उसे अपनी क्लीनीकपे जाना होगा.. दो तीन दिनके बादतो नीमु ओर राजीवभी उधर आजायेगे.. आप इनको छोडने आजाना.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां बुआ.. ये ठीक रहेगा मे ओर चंदादीदी दोनोही इनके साथ आजायेगी.. ताकी सहेरसे सादीके लीये सृतीकी पसंदकी कुछ खरीदारी भी होजायेगी.. उसेभी साथ लेजाना हे..

भानु : (खडा होते गले मीलते) भाइ.. तो हम चलते हे.. दो पहोरको खाना खानेके बाद नीलमको लेकर सीधाही नीकल जाउगा.. ओर यहा आजाउगा फीर हम सब साथमे चले जायेगे..

देवायत : (हसते गले मीलते) हां यार.. आनेके लीये बहुत लोग हे.. हमे दोनो कार लेकर जाना पडेगा..

भुमीका : (खडी होते) चलो सभीको राम राम.. अब हमभी चलते हे..

कहेते भुमीका सबको गले मीलने लगी.. तो सृतीभी बडोको पांव छुते बाकीको गले मीलने लगी.. तब देवुको मीलते वो खुब सरमाइ.. तो रमा भानुभी सबको मीलने लगे.. तब लता बहार आगइ.. ओर सबको गले मीलकर खुब रोइ.. फीर भावेशको अपने सीनेसे लगालीया.. ओर उनके गाल चुमते उसे रोते हुअ‍े खुब प्यार दिया.. फीर रमाने लताको समजाकर भावेशको अपनी गोदमे लेलीया..

तब भावनाने लताको सम्हाला.. ओर सभी अपना अपना सामान लेकर बहार नीकलने लगे.. तो नीर्मला राजीव देवायत..घरके सभी लोग उन लोगोको छोडने बहार तक साथ गये.. भानु अपना सामान कारकी डीकीमे रखने लगा.. तबतक लता भावेशको गोदमे लेकर खडी रही.. ओर उसे प्यार देती रही.. क्युकी अबतक भावेशको लताने ही सम्हाला था.. लेकीन सादीके कुछ दिन पहेलेही रमाने उसे सम्हाल लीया था..

मंजुला : (भुमीको गले मीलते धीरेसे कानमे) बुआ.. मेने आपके पर्समे गोलीया रखदी हे.. उसे हर दिन सुबह लेलेना.. दो दिनके बाद हम वहा आ रहे हे..

भुमीका : (खुस होते सरको चुमते) हंम.. मेरी बच्ची.. तु कीतना खयाल रखती हे.. चल हम चलते हे..

मंजुला : (सृतीकी ओर देखते हसते) बुआ.. मेरी इस सौतनका खयाल रखना.. हें..हें..हें..

सृती : (कारमेसे हसते) कमीनी.. तु अ‍ेक बार घर चल.. फीर तुजे बताती हु.. सौतन वाली.. हें..हें..हें..

भुमीका : (कारमे आगे बैठते) अब चल भी.. जगडा बादमे करलेना.. हें..हें..हें.. चलो सबको बाय..

कहातो सृतीने सबकी ओर हाथ हीलाते कारको सहेरकी ओर जाने दी.. तो भानुभी देवायतकी बडी कारमे अपना सब सामान ओर घरके सब लोगोको लेकर नीकल गया.. ओर सभी लोग वापस घरमे आगये.. तब मंजु ओर चंदा पुनम लता चारो अंदर जाकर टुर के लीये कपडेकी पेकींग करने लगे.. तो देवायत ओर राजीव अपने खेतोकी ओर नीकल गये..

तब लखन ओर धिरेन भी उपर अपने रुममे जाकर हनीमुनपे जानेकी तैयारीया करने लगे.. लखन अपना सामान देख रहाथा तब धिरेन भी अपने रुममे अकेला पडा तो उनको मौका मील गया.. उनको पताथा की नीलमभी सहेरमे दाखला लेने साथ चल रही हे.. तब वो उनके लीये लाया नया मोबाइल नीकालकर नया सीम डालकरे अपना नंबर सेव करके चेक करने लगा.. ओर उसने अलगसे मोबाइल अपनी जेबमे रख लीया..

होलमे सीर्फ भावना ओर नीर्मला बैठीथी तब भावना अपनी बच्चीको दुध पीला रहीथी.. चंदाने मंजुके बच्चे विजयको जुलेमे डालकर सुला दीया था.. जबसे चंदा सादी करके धिरेनसे दुर होगइ थी तबसे वो मंजुके बच्चे विजयको अपना बेटा मानकर उनका कुछ विसेसही खयाल रखती थी.. नीर्मला अपनी जगाहसे खडी होकर भावनाके पास आकर बैठ गइ ओर उनके सरपे हाथ घुमाते उसे प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. तब..

भावना : (हसते) मोम.. क्या हुआ..? आज इस बेटीपे बहुत प्यार आ रहा हे..? हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) हां.. भावु.. आइ अ‍ेम सोरी.. तेरी इस हालतपे कही ना कही मेभी जीम्मेदार हु.. बस अ‍ेक बार अपनी मोमको माफ करदे.. फीर देख मे तेरी जींदगी कैसे खुसीयोसे भर दुगी.. आइ प्रोमीस..

भावना : (फीकी मुस्कानसे) नही मोम.. इसमे आपकी कोइ गलती नही हे.. जब मेरी किस्तमेही ये सब लीखा हेतो कीसीको क्या दोस देना.. मोम.. इनमे आप ओर मंजु लकी हे.. कमसे कम अपने तरीकेसे जींदगीतो जी रही हे.. ओर अब मुजेभी कोइ अफसोस नही हे..

नीर्मला : (प्यारसे गाल सहेलाते) नही भावु.. अपनी किस्मतको दोस मत दे.. हम अपने कुछ नीजी स्वार्थमे भुलही गयेकी हमारी बच्चीके दिलमे क्या क्या सपने हे.. मंजुसे मेरी तेरे बारेमे सबकुछ बाते होगइ हे.. तु कोइभी चीन्ता मत करना.. तुजे अपने तरीकेसे अपनी जींदगी जीनेका पुरा अधीकार हे.. बेटी.. जीले अपनी जींदगी.. अब तेरी मोम.. तुमसे कुछभी नही कहेगी..

भावना : (आस्चर्यसे) मोम.. क्या सचमे मंजुदीदीने आपको सबकुछ बता दीया हे..?

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां बेटा.. बस यही समजले हम सब कोइ सामान्य ओरते नही हे.. अब मुजे तेरे कीसीभी रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. सायद इसीलीये मंजु ओर देवुने हमारा मकान तेरे नाम करनेको कहा हे.. कास तबही मेने ठंडे दिमागसे सोचते तेरीभी सादी हमारे देवुसे करदी होती.. तो आज कोइ समस्याही नही होती.. भावु.. आइ अ‍ेम सोरी.. तुम अपनाले अपना पुराना प्यार.. मुजे कोइ अ‍ेतरज नही.. मे तेरे साथ हु..

भावना : (नम आंखोसे नजर जुकाते) मोम.. मेरी जीजुसे इस बारेमे बात होगइ हे.. उसने मेरे प्यारको अपना लीया हे.. क्या मेने मंजुदीदी के साथ कुछ गलततो नही कीया..?

नीर्मला : (मुस्कुराते) नही भावु.. तुमने कुछभी गलत नही कीया.. मेरी मंजु बहुतही समजदार हे.. हम मंजुको कभी समज ही नही पाये.. की वो कौन हे.. देख अभीभी तेरी मौसी ओर सृतीकोभी अपना चुकी हे.. फीरभी तुमतो उनकी सगी बहेन हो.. जब भानु अपना प्यार सादीके बादभी पा सकता हे.. तो फीर तुम क्यु नही..?

नीर्मला : क्या सीर्फ मर्दोको ही ये अधीकार हे..? हम ओरतोको नही..? भावु.. प्यारके मामलेमे मे खुली सोच वाली हु.. प्यारतो कभी भी कीसीके साथ हो सकता हे.. ये हम दोनो पती पत्नीके बीचका मामला हे की हम दोनो अ‍ेक दुसरेके साथ कीतना जीमेदार.. ओर अ‍ेक दुसरेके साथ कीतना समर्पीत हे.. क्या तुम भानुको छोड रही हो..?

भावना : नही मोम.. मंजुदीदीने मना कीया हे.. मे भानुके साथही रहेकर अपना पुराना प्यार पालुगी.. सायद यही उनकी सजा होगी.. जब वो मुजसे प्यारही नही करताथा तो फीर मुजे दो दो बच्चे क्यु दे दीये..? मोम.. अगर मुजे कोइ प्रोबलेम होगी तो मे हमारे घरपे रहेने आजाउगी..

नीर्मला : (हसते) हां.. आजाना.. अब वो घर तेराही हे.. तु वहा कभीभी आ सकती हे.. ओर वहा रेहभी सकती हे.. बेटी.. देवु तुजे बहुत खुस रखेगा..

मां बेटी दोनोही बाते करती रही तबतक मंजु चंदा पुनम ओर लतामे मीलकर सब पेकींग करली.. तो दया रजीया ओर चंपाभाभीने खानाभी बना लीया.. तो उधर रश्मीनेभी खाना बनाकर सरपंचको खीलाकर खुदभी खा लीया.. तबतक राजीव ओर देवायतभी खेतोसे आकर फ्रेस होगये.. लखन धिरनभी नीचे आगये ओर सभी खाना खाने बैठ गये.. तो वंदनाभी अपने सभी पेपर रेडी करके खानेके लीये बैठ गइ.. तभी..

चारु : (सरमाते नजरे चुराते धीरेसे) बेटा.. वो.. तुम देवुके साथ जा रही हो.. तो तुजे मौका मीलेतो उनसे बात करलेना..

वंदना : (समज गइथी फीरभी अनजान बनते खाना खाते) कीस बारेमे..?

चारु : (सरमाते मुस्कुराते) क्यु..? उस रात हमारे बीच बाततो हुइ थी.. अपने प्यारके बारेमे..

वंदना : (सरमाते धीरेसे) मोम.. उनकी कीतनी बीवीया होगइ हे.. ओर अबतो सृतीदीदीके साथभी सादी कर रहे हे.. तो क्या अब मुजे अपनायेगा..? मानलो मुजे अपनाभी लीया तो क्या ये सही होगा..? लोगोकी छोडो पापाको पता चलेगातो क्या कहेगे..? कुछतो सोचो..?

चारु : बेटी.. कबतक अपने प्यारके लीये अ‍ैसे घुट घुटकर जीयेगी.. तुजे उनके साथ सादी करके कहा हवेलीपे रहेना हे.. उनकी बीवी बनकर यहाभी तो रेह सकती हे.. ओर भाडमे जाये लोग.. आज तक कोइ मेरी बच्चीके लीये रीस्ता लेकर हमारे घरपे तो नही आये..? तो हम क्यु लोगोकी परवा करे..?

चारु : ओर कीन कीन कमीनोका रीस्ता कीसके साथ हे वो सब मुजे पता हे.. मे सबको जवाब देदुगी.. ओर तेरे पापाको मे सम्हाल लुगी.. हमे कहा दुसरोके सामने तुम्हारी सादीका ढंढोरा पीटना हे.. तु यहा रहेकरभी अपनी सादीसुधा जींदगी बीता सकती हे..

वंदना : मोम.. अभीतो जो चल रहा हे चलने दे.. इसके बारेमे हम बादमे सोचेगे.. पुनोदीदी कहेगी तब मे आपको बता दुगी.. इस बारेमे उनके साथ मेरी बात होगइ हे.. अभीतो नोकरीके बारेमे सोचना हे.. जब अ‍ेक बार स्कुल बन जाये तब हम इस बारेमे सोचेगे.. तबतक आपतो हे.. हें..हें..हें..

चारु : (सरमाते हसते) अरे वो तेरी नोकरी तो पकी होगइ समज.. देवुजो साथ चल रहे हे.. हें..हें..हें.. उनकी होनेवाली बीवीका इतना खयाल नही रखेगा..? हें..हें..हें..

वंदना : (सरमाते हसते जुठे गुसेसे) मोम.. तुमभी कीतनी कमीनी हो.. अभी उनकी बीवी नही हु.. समजी..?

चारु : (हसते) अरे नही हुइ तो होजायेगी.. मुजे पुरा यकीन हे.. चल ठीक हे.. हम बादमे बात करेगे.. मुजेभी नीशाके पास जाना हे.. तेरे पापाकोतो अब हमसे बात करनेका टाइमही नही मीलता.. सुबह ही नीकल जाते हे.. पता नही कहा जाते होगे.. वो ओर हमारे सामतभाइ आजकल पंचायतके कामसे साथमे ही घुमते हे..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२०/२

इधर हवेलीमे खाना खातेभी धिरेन भावनाकी ओर चोर नजरसे देखता रहा.. उनको भावनाका ओर लताका बहुतही डर लग रहा था.. लेकीन भावनाने धिरेनकी ओर देखाही नही.. उनको धिरेनसे अ‍ेक नफरतसी होगइ थी.. तो लताभी कभी कभी धिरेनको चोर नजरसे देखती रही.. सबने खाना खा लीया तब नीर्मलाने राजीवको दवाइ पीलादी तो राजीव सबको मीलकर अपने रुममे जाकर सो गया.. तभी रश्मी अपने सभी पेपर लेकर आगइ..

तो उनके पीछे वंदनाभी अपने सब पेपर लेकर हवेलीपे आगइ.. तो भानुभी नीलमको लेकर उनके सब सामानके साथ आगया.. तब पुनम ओर लताभी जानेके लीये तैयार होने लगी.. तो लखन धिरेनभी तैयार होकर नीचे आकर बैठ गये.. तब धिरेन नीलमको देखकर बहुत खुस होगया.. तो नीलमभी खुस होते चोर नजरसे धिरेनको देखती रही.. नीलम आज अपने आपको अ‍ेक आजाद पंछीकी तराह महेसुस करते खुस हो रहीथी..

तभी लता ओर पुनमभी नइ नवेली दुल्हनकी तराह सज धजके अपने सामानकी बेग लेकर बहार आगइ.. दोनो चलतीथी तब दोनोने पैरोमे पायलकी छमछम की आवज आ रहीथी.. दोनोके माथेपे बींदीया ओर मांगमे सींदुर लगा हुआथा.. दोनोके हाथोमे कांचकी चुडीया खनखन करती रही.. देवायत पुनमकी ओर देखता ही रेह गया.. अ‍ेक पलतो उनको लगने लगाकी धिरेन पुनमको उनसे छीनकर लेजा रहा हे..

देवायतकी तराह सब उन दोनोको देखते ही रहे.. तब लखन ओर धिरेनकी उनको देखकर हालत पतली होगइ.. दोनोके लंड अपनी पेन्टके अंदरही जटके मारने लगे.. देवायतभी पुनमको चोर नजरसे देखता रहा.. तब पुनम ओर उनकी आंख मील गइ.. ओर देवायत पुनमको देखकर नजर घुमाते अपनी आंखके कोनेको साफ करने लगा..

तो पुनम देवायतकी आंख गीली देखकर थोडी वीचलीत होगइ.. ओर मंजु समज गइ.. तो पुनमको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तब पुनम मंजुसे लीपटकर अपने आंसु बहाने लगी.. तो बडी मुस्कीलसे मंजुने पुनमको सम्हाला तब पुनम मंजुका हाथ पकडकर कहेने लगी..

पुनम : भाभी.. आप भाइको सम्हालना.. वो मुजे देखकर आंसु बहा रहे हे.. उनको कहेना उनकी पुनम बहुतही जल्द उनको वापस मील जायेगी.. वो मेरे बीना नही रेह सकते..

मंजुला : (पुनमके आंसु पोछते) हां मेरी बच्ची.. तु उनकी चीन्ता मत कर.. तुमभी अपने आंसु पोछले.. वरना तुजे अ‍ैसे रोते देखकर वो फीरसे कमजोर हो जायेगे.. ओर सुन.. हनीमुनके बाद तुमको इधरही आना हे.. तुम सृती ओर देवुकी सादीके बाद अपने घर जाओगी.. धिरेनको केह देना.. मेने चंदादीदी से बात करली हे..

पुनम : भाभी.. मेने तीन दिनसे वो दवाइया लेना बंध करदीया हे.. तो कुछ अजीबसा लगता हे..

मंजुला : (धीरेसे समजाते) पुनो.. अगर अ‍ैसा लगेतो अ‍ेक दो दिन उल्टीयोकी टेबलेट ले लेना.. देखना कुछ गडबड ना होजाये.. तुम ओर धिरेन अच्छेसे मीललो.. ताकी धिरेनको तसली होजायेकी ये बच्चा उनका हे.. तुजे हनीमुनसे वापस आकर १० १२ दिनोके बाद अपनी प्रेगनन्सी धिरेनसे बात करके डीकलेर करनी हे.. ओर वोभी सीर्फ धिरेनको कहेना हे.. यहा कीसीको नही समजी.. बाकी सब मे सम्हाल लुगी.. क्या धिरेनके साथ सेक्स करना अच्छा लगता हे..? सच कहेना.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) नही भाभी.. जबसे भाइके साथ मीलन करलीया हे तो उनका कुछ पताभी नही चलता.. बहुतही छोटा हे हें..हें..हें.. पता नही नीलुका क्या होगा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (जोरोसे हसते) चुप.. कोइ सुन ना ले.. तु हनीमुन मनाकर वापस आजा.. फीर हम दोनो नीलुके बारेमे बात करेगे.. वैसे अबतो तुजेभी पता चल गया होगाकी उनका क्या होने वाला हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) हंम.. भाभी.. क्या मुजे आभास होता हे.. वोही सब सच होगा..? मुजेतो बहुतही डर लग रहा हे.. हमारे लखन भैयाभी कुछ कम नही हे.. वोभी नीलुके पीछे लग गये हे..

मंजुला : (हसते) हंम.. यानी तुजे सब पता चलने लगा हे.. देख बीटु.. कुछ बाते जानकर तुम विचलीत या दुखी मत होना.. तु मेरी स्ट्रोंग बेटी हे.. पता नही सृतीको हम कैसे सम्हालेगे.. चल बहार.. तुजे अब जाना हे..

पुनम : (गले मीलते) भाभी.. जब वापस आजाउ तब आपसे बहुतसी बाते करनी हे.. आप भाइको सम्हालना.. मे उसे दुखी होते नही देख सकती.. आपभी साथमे आइअ‍ेना.. फीर भाइके साथ वापस चली आना.. वरना वहा मे भाइको अकेली सम्हाल नही पाउगी..

मंजुला : (हसते) हंम.. ठीक हे.. वैसे आज हमारी दो दो सौतनतो साथ चल रही हे.. अब वंदुको भी उनके नजदीक आने दे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) हंम.. आजके जमानेमे ये सब कीतना अजीब हेनां..? भाभी क्या हम बाबाके दर्शन करके नीकले..? आप भाइसे बात करलो.. चलो हम चलते हे..

मंजुला : (हसते) अरे हां क्यो नही.. अभी काफी वक्त भी हे.. चलो..

कहेते दोनोही हसती हुइ बहार आगइ.. ओर सब जानेके लीये खडे होने लगे.. तो मंजुने चंदासे सबको छोडने साथ जानेकी बात करली.. तो चंदाभी हसने लगी.. ओर उसने विजयको अपने पास रखाथा.. ओर सब बहारकी ओर आने लगे.. तब मंजुने देवायतको पहेले आश्रम लेजानेकी बात कहेदी.. भानुकी कारमे लखन धिरेन रश्मी बैठ गये.. तो देवायतकी कारमे मंजु वंदना पुनम लता ओर नीलम बैठ गये.. ओर चंदा भावना ओर नीर्मलाने बहार खडे होकर हसके सबको हाथ हीलाकर बाय कहेने लगी..

तब पुनम ओर लताभी सरमाकर हसने लगी.. ओर दोनो कार सहेरकी ओर दोडने लगी.. आधे घंटेके बाद सब लोग आश्रमपे आगये.. ओर साथमे चलकर बाबाके पास जाने लगे.. तब पुनम ओर लता मांगमे सींदुरके साथ अपने पतीके साथ चलते बहुतही सरमा रही थी.. ओर सबलोग होलमे आगये तब बाबा सबको देखकर हसने लगे.. ओर सभी उनके चरण स्पर्स करते वही बैठने लगे.. तब बाबाने सबको आशीर्वाद दीये..

बाबा : (मंजुको देखकर हसते) बेटी.. होगइ सादी..? सब अच्छेसे नीपट गयानां..?

मंजुला : (हसते) जी बाबा.. बस ये लोग घुमने जा रहे हे.. तो सोचा इनसे पहेले आपके आशीर्वाद लेले..

बाबा : (हसते) अरे जाओ जाओ.. मेरा आशीर्वाद हे..

भानु : (हसते नीलमकी ओर इसारा करते) बाबा इनकोभी आशीर्वाद दीजीये.. पढनेके लीये सहेरमे दाखला लेने जा रही हे.. वही रहेकर पढेगी.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां.. आशीर्वाद.. आशीर्वाद.. हें..हें..हें.. देखना बेटी दुसरी चीजोके अलावा पढाइमेभी ध्यान देना.. बहुत ही चंचल लडकी हे.. हें..हें..हें..

कहतो पुनम ओर मंजु सब समज गइ.. की बाबाको सब पता चल गया हे.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते रहस्यमय तरीकेसे मुस्कुराने लगी.. तो लता नीलमकी ओर खाजाने वाली नजरोसे देखते घुरने लगी.. तब नीलमने कीसीकी ओर नही देखा.. ओर वो सरमाकर हसती रही.. तब सबके लीये चाइ आगइ.. ओर सब चाइ पीकर जानेके लीये खडे होगये.. ओर बाबाके पेर छुने लगे तब बाबाने पुनमके सरपे हाथ रख दीया.. ओर कहा..

बाबा : (हसते) बेटी.. तेरी सब मनोकामना पुरी होगी.. तुजे मेरा आशीर्वाद हे..

तब पुनम बहुतही खुस होगइ.. ओर सब बाबाकी इजाजत लेकर नीकल गये.. ओर आघे पोने घंटेकी ड्राइवके बाद सब स्कुलपे आगये.. वहा देवायतने पहेलेसे ही बात करलीथी तो नीलमका दाखला स्कुलमे हो गया.. ओर सब दाखला दीलवाकर बाजुमे होस्टेलमे आगये.. ओर वहाभी नीलमका दाखला दीलवा दीया.. यहा पुनम रहेती थी तो वहाका सभी स्टाफ पुनमकी जान पहेचानका था.. तो पुनमने सबको नीलमका खयाल रखनेकी सीफारीस करदी..

पुनमने ही मेइन मेट्रनसे मीलकर कुछ बाते करके सब अ‍ेरेन्ज करदीया.. ओर उपरकी मंजीलका रुम नंबर ओर बेडका नंबर लेकर पुनमने लखनको देदीया.. ओर नीलमका सामान वही पहोचानेको कहा तो लखन नीलमका सामान लेकर उपरकी मंजीलपे जाने लगा.. तब मौका देखकर धिरेनभी लखनके साथ चला गया.. ओर कुछ सामान लखनके हाथोसे अपने हाथोमे लेलीया.. तब इधर नीलम सबको गले मीलने लगी.. ओर लताको मीलतेही उनकी आंखसे आंसु नीकल गये..

लता : (हसते) देख नीलु.. यहा सबके साथ अच्छेसे रहेना ओर मन लगाकर पढाइ करना.. मे ओर तेरे जीजु तुजे मीलने आते रहेगे.. अगर कोइ काम होतो सृतीदीदीने तुजे उनका नंबर दीया हे.. उसे फोन करना..

मंजुला : (हसते) हां नीलु.. तुजे कुछ भी चाहीये तो सृतीको फोन करना.. मे उनसे बात करलुगी..

नीलम : (हसते) नही मौसी.. सृतीमौसीसे मेरी बात होगइ हे.. वो मुजे मीलने आयेगी..

भानु : (नीलमको गले लगाते) बेटी.. यहा सब पुनमदीदीके पहेचान वाले हे.. हमभी तुजे मीलने आते रहेगे.. बस सीर्फ तीन चार सालहीतो नीकालने हे.. तुजे कुछ खाने पीनेको चाहीये तो तेरे धिरेन जीजुभी इधर आते जाते हे.. हम उसीके हाथो भीजवा देगे..

लता : (जटसे) नही.. भाइ.. इनके लखन जीजु देजायेगे.. ओर हमभी यहा आते जाते रहेगे.. वैसे पुनोदीदीने कहा हे.. वहा होस्टेलमेभी अच्छा खाना मीलता हे.. आपको नीलुकी चीन्ता करनेकी कोइ जरुरत नही हे..

कहातो पुनम ओर मंजु लताकी उत्सुक्ता ओर उनके मनकी बात समजते मनमे हसने लगी.. ओर सोचने लगी.. की लता नीलमको धिरेनसे दुर रखनेकी कीतनी भी कोसीस करले.. आखीर दोनो मीलही जायेगे.. ओर बालीक होतेही धिरेन नीलमसे सादी भी करलेगा..

यही सोचते पुनम मुस्कुराती रही.. नीलम तो पुनम देवायतके वापस मीलन करवाने ओर साथ रहेनेका जरीया हे.. पुनमने छुपकेसे वहाकी अपनी पहेचान वाली मेइन मेट्रननको नीलमकी खबर उनतक फोनसे देनेके लीयेभी केह दीयाथा.. नीचे सब नीलमको समजाते उसे मील रहे थे..

तभी उपरकी मंजीलमे लखनके हाथोसे अ‍ेक चेइनवाली बेग धिरेनने लेलीथी.. ओर वोभी उनके साथ चलने लगा.. जब दोनो उस रुमके पास पहोंचे तब लखनने उनके बेडपे नीलमका सामान रख दीया.. ओर वापस बहार नीकलने लगा तब धिरेनने जटसे अपनी जेबसे अ‍ेक चीठी ओर अ‍ेक नया मोबाइल नीकालकर नीलमकी बेगमे चेइन खोलकर रख दीया.. ओर जटसे वापस चेइन बंध करके दोडकर लखनके साथ होगया..

जब लखन ओर धिरेन नीचे आगये तो सब नीलमको बाय कहेकर नीकलने लगे.. तब भानुकी आंख गीली होगइ.. क्युकी नीलम उनकी खुदकी लडकी थी.. ओर गांवसे सीधीही सहेरमे आगइ थी.. तो जाहीरसी बात हे अ‍ेब बापको अपनी बेटीकी चीन्ता होती हे.. सब नीकलने लगे.. तब नीलम वही खडी रहेते सबको जाते हुअ‍े देखती रही.. तभी धिरेनने सबकी नजर बचाते नीलमको देखते आंखोसे कुछ इसारा कीया..

तो नीलमके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर वो जटसे अपने रुमकी ओर जाने लगी.. दोनो कपलको जानेमे अभी काफी टाइम था.. उनकी बस सामको ७ बजेकीथी तो देवायतने अपनी कार सीधेही जीलेकी पंचायतकी ओफीसकी ओर लेली.. तो इधर सबके जातेही नीलम उपर अपने रुममे चली गइ.. हर रुममे चार बेड लगे हुअ‍े थे.. तो वहा अभी उनके रुममे उनके साथ सीर्फ अ‍ेकही लडकी थी.. जो अभी अपने रुममे नही थी..

नीलम रुममे जातेही दरवाजा बंध करते अपनी अलमारीमे अपने कपडे बेगसे नीकालकर रखने लगी.. तो नीलमको अ‍ेक बेगमे अ‍ेक नये मोबाइलका बोक्ष मीला.. तो वो आस्चर्यसे उसे देखने लगी.. ओर उसे धिरेनकी इसारोसे कही बाते याद आगइ.. ओर उपरसे धिरेनभी सामान रखने उपर आयाथा..

तब नीलम बहुत कुछ समज गइ ओर वो खुसीसे मुस्कराते बोक्ष खोलने लगी.. जैसेही बोक्ष खोला.. तो अ‍ेक नये मोबाइलके साथ अ‍ेक चीठीभी मीली.. तो नीलम मोबाइलको साइडमे रखते जटसे चीठी खोलकर पढने लगी.. तो वो धिरेनकी लीखी हुइ चीठी थी.. ओर नीलम उसे मुस्कुराते खुस होते पढने लगी..

मेरी प्रिय रानी नीलम.. आइ लव यु..

मे ये मोबाइल तेरे लीये लाया हु.. तुम इसे मेरे प्यारकी पहेली गीफ्ट समजना.. इसे मे तुजे रुबरु मीलकर देना चाहता था.. लेकीन आजही पता चलाकी कल हमे अ‍ेक हप्तेके लीये हनीमुनपे जाना हे.. तो इसे मे देर रातको पुनमके सोनेके बाद ये चीठी लीख रहा हु.. मेने मोबाइलमे सीमकार्डभी लगा दीया हे.. ओर फोनमे मेरा नंबरभी सेव करदीया हे.. बस सीर्फ इतना कहेनाथा की जबतक मे ना कहु तबतक तुम मुजे सामनेसे फोन मत करना.. फोन सीर्फ मे ही करुगा.. ताकी वहा कीसीको पता ना चले.. ये अ‍ेक हप्ता तुजे मीले बीना कैसे कटेगा..? बस इसीलीये तुजे मोबाइल दे रहा हु.. इसे तुम चालु करके अपने साथ रखना.. वहा मोका मीलते ही में तुमसे फोनपे बात करुगा.. बाकी सब हम मीलेगे तब तुमसे ढेर सारी बाते करनी हे.. आइ लव यु..

सीर्फ ओर सीर्फ तेरा धिरेन..

चीठी पढते ही नीलम खुसीके मारे हसते हुअ‍े चीठीको चुमने लगी.. ओर कुदते नाचने लगी.. फीर चीठीको अपनी अलमारीमे छुपाकर जटसे मोबाइल लेकर उनको चालु करती हे.. ओर चेक करती हे तो उनमे सीर्फ धिरेनका फोन नंबरही सेव कीया हुआथा..

तो दुसरी ओर सभी लोग जीला पंचायतकी ओफीसपे पहोंच गये.. ओर वहा जाकर देवायत उन अधीकारीको मीला.. जीनसे उनकी बाते होगइ थी.. ओर अपना दोस्तभी था.. वहा उसने वंदनाके ओर रश्मीके सभी पेपर सबमीट करवा दीये.. ओर दोनोके दस्तखत भी करवा दीये..

फीर रश्मीने स्कुलकी जमीनके लीये कुछ ओर पेपरभी सबमीट करवा दीये.. तबतक उन अधीकारीने देवायतकी पुरी फेमीलीको देखकर सबके लीये चाइ नास्तेका इन्तजाम कर दीया.. तबतकत देवायत ओर वो अधीकारी हस हसके बाते करते रहे.. तब उनका अ‍ेक ओफीसर दो पेपर लेकर आगया.. ओर उन अधीकारीने उनपे दस्तखत करदीये.. फीर रश्मी ओर वंदनाका जोइनींग ओर्डर दे दीया.. तब वंदना ओर रश्मी दोनोही आस्चर्यसे देखते खुस होगइ.. तो मंजुने हसते हुअ‍े स्वीटका बोक्ष नीकाला..

मंजुला : (हसते) देवु.. लीजीये यहा सबका मुह मीठा करवाइअ‍े.. मे लेकरही आइ हु.. हें..हें..हें..

जी. अधीकारी : (हसते) भाभीजी.. लाइअ‍े पहेले मुजे दीजीये.. मेने इन दोनोकी नोकरी पकी करदी हे.. तो पहेला हक मेरा हे.. मुजे दीजीये.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां हां.. क्यु नही.. बाकी स्टाफ वालोकोभी दीजीये.. पुरा बोक्ष आपही रख लीजीये.. अपहीके लीये लाइ हु हें..हें..हें..

मीठाइ खा रहेथे तब सबके लीये चाइ नास्ताभी आगया.. ओर सबने चाइनास्ता कीया तबतक देवायत ओर उन अधीकारी हस हसके बाते करते रहे.. ओर अ‍ैसेही ६ बज गये तो सब लोग नीकलने लगे.. तब वंदना ओर रश्मी बहुतही खुस नजर आरही थी.. तो पुनम वंदना ओर रश्मीसे धीरेसे बाते करते देवायतकी ओर आंखोसे इसारा करते करते उन दोनोको छेड रहीथी.. तब वंदना खुब सरमाइ..

फीर सभी वहासे नीकल गये ओर ट्रावेल्सकी ओफीसमे आगये.. तो वहा अ‍ेक आलीसान लकजरी बस खडी थी.. ओर वहा बहुत सारे हनीमुन कपल आये हुअ‍े थे.. सब अपना सामान बसमे रख रहेथे.. तब देवायत ओफीसमे चला गया ओर टीकीट दीखाकर सीट नंबर जान लीया ओर बहार आकर दोनो कपलका सामान कारसे नीकालकर लखन ओर धिरेनको बसमे रखनेके लीये दे दीया.. तबतक सभी लेडीस साथमे खडी रहेकर बाते करने लगी..

जब जानेका वक्त होगया.. तब सभी कपल अपने रीस्तेदारोको गले मीलकर बसमे बैठने लगे.. तो लखन लता ओर धिरेन पुनमभी सरमाते सबके गले मीलने लगे.. पुनम जब वंदनाको गले मीली तब वंदनाने पुनमके कानमे कुछ कहा तो पुनम सर्मसार होगइ.. फीर वो मंजुके गले मीली.. तब मंजुने उसे अ‍ेक बार फीर सबकुछ समजा दीया.. फीर रश्मीको गले मीली.. ओर भानुके पैर छुकर देवायतको गले मीली तब उनके आंसु नीकल गये..

पुनम : (धीरेसे) भाइ.. मे आपको बहुत मीस करुगी.. कास हम दोनो अ‍ैसे हनीमुनपे जाते..

देवायत : (पुनको बाहोमे भरते धीरेसे कानमे) गुडीया.. चीन्ता मत कर.. हम भी जायेगे.. चल जा. ओर रोना बंध कर.. मुजे फोन करती रहेना.. ओर तुम लोग खुब अ‍ेन्जोय करना.. मे तेरा इन्तजार करलुगा..

लता : (देवायतको मीलते) भाइ.. आपभी दोनो भाभीओके साथ हमारे साथ चलते.. तो बहुत मजा आजाता..

देवायत : (हसते) हंम.. अगली बार हम सब साथमे जायेगे.. तब तेरी दो भाभी नही.. तीन होगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां.. लता तुम सबके वापस आतेही दुसरे दिन तेरे जेठकी सादी सृतीसे कर देगे.. बस मेरी पुनोका खयाल रखना..

देवायत : (अपना डेबीट कार्ड देते) ले लखन.. तु इसे अपने पास रखले.. कही जरुरत पडेतो इनमेसे खर्च करना.. धिरेनको पैसे मत नीकालने देना..

धिरेन : (सरमाते हसते) जीजु.. मेरे पासभी मेरा कार्ड हे.. इनकी जरुरत नही हे..

देवायत : (हसते) हां मुजे पता हे.. तु अब पैसेवाला होगया हे.. तो कार्डतो होगाही.. लेकीन अब तु हमारा जमाइ होगया हे.. तो तुजे खर्च करनेकी जरुरत नही हे.. ओर पुनो तुजे ओर लताको जोभी चाहीये लेलेना..

पुनम : (सरमाते हसते) जी भाइ.. हम चलते हे.. सब बैठ गये हे..

फीर दोनो कपल सबको बाय कहेते बसमे बैठ गये.. तो कुछही देरमे बस सभी हनीमुन कपलको लेकर अपनी मंजीलकी ओर नीकल पडी.. तब रश्मी वंदना ओर मंजु देवायतकी कारमे बैठ गइ.. ओर भानु अकेला अपनी कारमे बैठ गया.. ओर देवायतके पीछे चलने लगा.. तभी देवायतने कारको अ‍ेक बडीयासी होटेलमे लेली.. तो पीछे भानुभी आगया.. ओर सब लोग होटेलके अंदर चले गये.. ओर वहा डीनर करने साथमे बैठ गये.. तभी..

रश्मी : (हसते) देवरजी.. वंदनाकी नोकरीतो पकी होगइ.. अब जबतक स्कुल नही बनजाती तबतक वो सबको पढायेगी कहा..? स्कुलमे विद्यार्थीका अ‍ेडमीशन भी लेना हे.. आपने इनके बारेमे कुछ सोचा हे..?

देवायत : हां.. सीर्फ वंदनाकी नही आपकीभी अ‍ेपोइटमेन्ट होगइ हे.. कुछ दिनोके लीये कीसीका मकान कीरायेपे रखलो.. वरना पंचायका अ‍ेक कमरा इसे टेम्पररी देदो.. ओर स्कुलकी बील्डींगका ओर्डर आतेही आप लोग जल्दसे जल्द स्कुलका काम सुरु करवादो..

रश्मी : हां.. यही ठीक रहेगा.. पंचायतमे हमे कीरायातो नही देना पडेगा.. वैसेभी दो कमरेतो खाली पडे हे.. हम अ‍ेकही कमरेमे ओफीस अ‍ेडजेस्ट कर लेगे.. ओर हां.. अ‍ेक दो दिनमे मेरे मकानका कामभी सुरु करवा रही हु.. रमेशभाइने कारीगरका अ‍ेडजेस्ट करलीया हे..

मंजुला : (आस्चर्यसे देखते) रश्मीभाभी.. आप दुसरा मकान बनवा रही हे..?

रश्मी : (सरमाते हसते) हां देवरानीजी.. अब इस मकानमे नही रहेना.. बडा ही मनहुस मकान हे.. वहा सुकुनही नही मीलता.. अब उनसे छुटकारा मीलजाये तो अच्छा हे.. खडीयामे पडे पडेभी बहुत नखरे कर रहे हे.. अबतो खानाभी नही खा रहे.. येतो अच्छा हुआ देवरजीने मुजे नोकरी दीलवादी.. वरना मेरातो जीना ही मु्सकील हो जाता..

मंजुला : (हसते) हंम.. चलो अच्छा हुआ.. लेकीन रश्मीभाभी.. आपके लीये हमारे घरके दरवाजे हमेसा खुला हे.. जबभी कोइ जरुरत हो आप बेजीजक चली आइअ‍े..

रश्मी : (हसते) थेन्क्स देवरानीजी.. पता नही आपसे मेरा कोनसा रुणानुबंध हे.. जो आप हम सबका इतना खयाल रखती हे.. लेकीन अब कोइ दीकत नही हे..

भानु : (थोडा परीसानीमे) भाभी.. अब आप भावुकोभी थोडा समजाइअ‍ेनां.. वो अभीभी मुजसे रुठी हुइ हे.. मुजसे बातही नही करती..

मंजुला : (हसते) भानुभाइ आप भावुकी चीन्ता मत कीजीये.. अभी भावु हमारे घर हेतो मे उनसे बात करलुगी.. वो जल्दही आपके साथ वापस आजायेगी.. बस अभी कुछ दिन वो मम्मी पापाके साथ रहेना चाहती हे.. बाकी कुछ नही हे..

देवायत : हां भानु.. तेरी भाभी उनको समजा देगी.. धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा..

भानु : (हसते) चलो अच्छा हे.. इनकी वजहसे वो रमाभी परेसान रहेती हे..

ओर सब लोगने डीनर करलीया तब वापस गांवकी ओर नीकल गये.. वंदना कारमे देवायतकी ओर चोर नजरोसे देखती रही.. लेकीन उनको देवायतके साथ अकेलेमे बात करनेका मौका नही मीलताथा.. अ‍ैसेही बाते करते सब अपने गांव पहोंच गये.. तब भानु देवायतको कल खेतोमे मीलेगे कहेकर सीधेही अपने गांव चला गया.. तो देवायतने कार सीधेही रश्मीके घर लेली.. वहा रश्मीको ड्रोप करके वंदनाको छोडने रमेशके घर चले गये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२१/१

ओर सब लोगने डीनर करलीया तब वापस गांवकी ओर नीकल गये.. वंदना कारमे देवायतकी ओर चोर नजरोसे देखती रही.. लेकीन उनको देवायतके साथ अकेलेमे बात करनेका मौका नही मीलताथा.. अ‍ैसेही बाते करते सब अपने गांव पहोंच गये.. तब भानु देवायतको कल खेतोमे मीलेगे कहेकर सीधेही अपने गांव चला गया.. तो देवायतने कार सीधेही रश्मीके घर लेली.. वहा रश्मीको ड्रोप करके वंदनाको छोडने रमेशके घर चले गये....अब आगे

वहा चारुभाभी ओर रमेश डीनर करके टीवी देखते वंदनाका इन्तजार कर रहेथे.. हमे देखतेही दोनो खुसीसे खडे होगये.. ओर हम सब सोफेपे बैठ गये.. तब चारुभाभी कीचनमे पानी लेने चली गइ.. तो वंदना उनके सब पेपर रखने अपने रुममे चली गइ.. तभी चारुभाभी हसती बहार आतेही हमको पानी देने लगी.. तभी रमेश ओर चारुको सब बाते जाननेकी उत्सुक्ता बढने लगी.. ओर हमारी ओर देखते रहे..

मंजुला : (हसते) भाभी.. जाइअ‍े हमे मीठाइ खीलाइअ‍े.. वंदुकी नोकरी पकी होगइ हे.. हें..हें..हें.. उनकी नोकरीका सीधा ओर्डर लेकरही आये हे..

रमेश : (खुसीसे आस्चर्यसे हसते) क्या..? ओर्डरभी लेकर आगये..? इतनी जल्दी ओर्डर दे दीया..?

चारु : (खुसीसे हसते) अरे हमारे देवरजी जो साथमे गये थे.. तो ओर्डरतो लेकरही आते.. आप बैठो मे मीठाइ लेकर आती हु.. फीर आपको मस्त चाइ पीलाती हु..

कहेते चारुभाभी उत्साहीत होते कीचनमे चली गइ ओर अ‍ेक डीसमे मीठाइ लेकर वापस आगइ तो हम सबने मुह मीठा कीया.. फीर हम चाइके लीये नही रुके ओर हम दोनो उनकी इजाजत लेकर वहासे नीकलकर हवेलीपे आगये.. ओर फ्रेस होकर होलमे आकर बैठ गये.. तब राजीव नीर्मला चंदा ओर भावना भी वही होलमे हमारा इन्तजार करते बैठेथे.. हमे आनेमे देर होगइ तो सब डीनर करके बैठे थे.. तो दया चंपाभाभी ओर रजीया कीचनमे खाना खा रहीथी.. तभी..

राजीव : (हसते) कहो बेटा.. छोड आये सबको..? कोइ तकलीफतो नही हुइ..?

देवायत : (हसते) नही पापा.. वो चारोभी चले गये.. ओर नीलमकोभी दोनो जगाह दाखला दीलवाकर सेट करके आये.. ओर आश्रममे बाबाको भी मीलकर आये.. तो वंदना रश्मीभाभीकी नोकरी भी पकी करके आये..

नीर्मला : (हसते) ओ बापरे.. हें..हें..हें.. कीतना कुछ करके आगये..? क्या वो दोनोकी नोकरीभी पकी होगइ..?

मंजुला : (हसते) हां मोम.. वो अधीकारी देवुका दोस्तथा.. तो वही दोनोका ओर्डर देदीया.. ओर उसने हम सबको चाइ नास्ताभी करवाया.. बहुतही अच्छा अधीकारी था..

चंदा : (सरमाते हसते) देवु.. वो आप लोगोका खाना.. क्या खाकर आये हे..?

मंजुला : (हसते) हां दीदी.. हम सभी होटेलमे खाकर ही आये हे.. वरनातो इधर पहोंचनेमे देर होजाती..

राजीव : देवुबेटा.. वो भानु चला गया..? इधर नही आया..?

देवायत : हां पापा.. वैसेभी वो थका हुआ लग रहाथा.. कल सीधा खेतोपे आयेगा.. क्यु..? उनका कुछ काम था..?

राजीव : (भावुकी ओर देखते हसते) अरे नही नही.. काम बाम कुछ नही था.. बस अ‍ैसेही पुछ रहाथा..

मंजुला : (हसते) पापा.. आप भावुकी चीन्ता छोडदो.. वो सब देवु देख लेगे.. अब भावुकी सब जीम्वेवारी हमारी हे.. ओर भानुके साथभी सब ठीक हो जायेगा.. वो हम सब देख लेगे.. आप टेन्शान मतलो..

राजीव : (हसते) अरे बेटी चीन्ता नही हे.. हम दोनो वापस घर जायेगे तब भावुभी साथ चल रही हे.. तो सोचा देवुभी हमे छोडने आ रहे हे.. तो क्युना हम उसी दिन मकान भावुके नाम रजीस्टर करवाले..

भावना : पापा.. इतनीभी क्या जल्दी हे..? आरामसे हो जायेगा.. क्यु इतनी चीन्ता करते हो..? मुजे कोइ प्रोबलेम नही हे.. मे खुस हु..

मंजुला : नही भावु.. पापा ठीक केह रहे हे.. मेभी साथ चल रही हु.. मे ओर देवु दोनो ही आयेगे..

कहातो नीर्मला बहुत कुछ समज गइ.. ओर राजीवकी ओर देखते उनकी आंख गीली होगइ.. लेकीन जटसे अपनी आंख पोछते सम्हल गइ.. फीर खडी होकर राजीवको दवाइआ पीलाने लगी.. तबतक रजीया चंपा ओर दयानेभी खाना खा लीयाथा.. ओर अपना काम नीपटाने लगी.. फीर सब लोग अपने अपने कमरेमे चले गये.. भावना भी अपनी बच्चीको लेकर अपने रुममे चली गइ..

तो मंजु रुममे जातेही अपने बच्चे विजवको लेकर बेडपे बैठ गइ.. ओर उसे ब्लाउस उचा करके दुध पीलाने लगी.. तबतक चंदा ओर देवायत अपने कपडे चेन्ज करते नाइटके कपडे पहेनने लगे.. उस रात नीर्मला राजीवके साथ सोगइ.. तब कीतने दिनोके बाद आज नीर्मला उनके साथ सोइथी.. तो राजीव उसे बाहोमे लेकर प्यार करते उसे चोदनेकी जीद करने लगा.. तब बहुतही मुस्कीलसे नीर्मलाने उसे समजाया..

राजीव : (धीरेसे बाहोमे भीचते) नीमु.. सीर्फ अ‍ेक बार.. कीतने दिन होगये.. हमने नही कीया..

नीर्मला : (प्यारसे समजाते) भाइ.. कुछतो सोचो.. इस हालतमे आपको डोक्टरने मना कीया हे.. आपके लीये ये बहुतही जोखीम भरा हे.. वरना क्या मेने आपको कभी मना कीया हे..?

राजीव : (प्यारसे हसते जीद करते) नीमु.. प्लीज.. आज तुजे चोदनेका बहुत मन कर रहा हे.. तु कल क्या मस्त लग रही थी.. मेरातो कलही तुजे चोदनेका मन था.. लेकीन तु भुमीके साथ सोने चली गइ.. सीर्फ अ‍ेक बार.. इनमे कुछ नही होगा.. बस उपर उपरसे.. धीरेसे आरामसे चोदुगा.. चलना..

नीर्मला : (प्यारसे गाल सहेलाते) राजीव.. मेरे भाइ आप क्यु नही समजते..? यहा आपकी तबीयत बीगड गइतो सब क्या सोचेगे.. हम घरपे जाये तब आपका जीतना मन करे मुजे चोद लेना मे मना नही करुगी.. बस अ‍ेक बार हम डोक्टरको दीखादे.. तो हम उनकी परमीशन ले लेगे.. फीर आप मुजे चोद लेना..

राजीव : (हसते) नीमु.. देख ये फटा जा रहा हे.. इनका मे क्या करु..? ये तो तेरी चुतमे जानेके लीये मचल रहा हे.. प्लीज.. सीर्फ अ‍ेक बार चोदलेने दे..

नीर्मला : भाइ.. भाइ.. आप क्यु नही समजते..? दीजीये मे इसे अपने हाथोसे सांत करदेती हु.. वरना आप मानोगे नही..





ओर नीर्मलाको अपने हाथोसे राजीवका लंड पकडकर हीलाते राजीवको सांत करना पडा.. तो देवायतने भी चंदा ओर मंजु दोनोको साथमे दो दो बार जमकर चोद लीया.. तो दुसरी ओर दोनोही कपल लकझरी बसमे सफर कर रहेथे.. आगे धिरेन ओर पुनम बैठे थे तो उनके पीछे लखन ओर लता बैठे थे.. आज सादीकी दुसरी रात थी.. तो जाहीरसी बात हे दोनोही कपल अ‍ैसे नही बैठे होगे.. खास करके लखन ओर लता..

ठंडीकी वजहसे दोनो कपलने अपने उपर कंबल डाल दीयाथा तो कंबलके अंदरसेही लखन लताको अपनी बाहोमे भरके बैठाथा.. ओर उनके बुब्समे हाथ डालते उसे मसल रहाथा.. ओर बीच बीचमे दोनो अपने होंठ मीलाते कीसभी करते रहे.. तब लता लखनका लंड अपनी मुठीमे पकडकर होले होले सहेला रहीथी.. तो आगे धिरेनभी पुनमको अपने आपसे सटाकर बाहोमे भरते वही कर रहाथा जो लखन कर रहा था..

धिरेन पुनमके बुब्सके साथ खेलते पुनमकी चुतकोभी सहेलाता रहा.. तब पुनमभी काफी गरम हो चुकीथी.. ओर वोभी धिरेनका लंड अपने हाथोमे पकडकर सहेला रही थी.. जबसे अपनी सुहागरातमे धिरेनने पुनमको चोदलीयाथा तबसे पुनमने धिरेनको पतीके रुपमे पुरी तराह स्वीकार कर लीयाथा.. लेकीन उनकी जहेनमे अबभी देवायत घुम रहाथा.. वो धिरेनको देवायत समजकर प्यार करती रही.. ओर कुछही देरके बाद लता ओर पुनमने अपने अपने पतीको हाथसे हीलाकर जडा दीया..

फीर अपने पतीके रुमालसे दोनोने अपने हाथको साफ करलीया.. तो कुछही देरमे अ‍ेक होटेलपे खानेके लीये बस रुक गइ.. तो दोनो कपल बसके नीचे उतर गये.. तब लखन धिरेन बाते करते वोस रुमकी ओर जाने लगे.. तो लताभी पुनमके साथ बाते करते उन दोनोके पीछे चलने लगी.. ओर वहा उन दोनो लेडीस बाथरुममे घुस गइ.. फीर सब फ्रेस होकर बहार आगये.. तो लखन धिरेन होटेलकी ओर आगे चलने लगे.. तब लता पुनमभी आपसमे धीरेसे बाते करते उन दोनोके पीछे चल पडी.. तब पुनमने लताको पुछही लीया..

पुनम : (सरमाते हसते) कहो लताभाभी.. कैसा चल रहा हे आपका हनीमुनका सफर.. हें..हें..हें.. भाइ आपको ज्यादा तंगतो नही करते..? हें..हें..हें..

लता : (सर्मसार होते हसते) पुनोदीदी.. आपतो दोनोको जानती हे.. लगता हे आज हमे ये दोनो ठीकसे सोने नही देगे.. हें..हें..हें.. हमारी बसमे सभी कपल अपनी वाइफके साथ लगे रहे थे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) हां सबकी नइ नइ सादी हुइ होगी.. ये टुर ही हनीमुन कपलके लीये हे.. यहा कीसीको कीसीकी ओर देखनेकी फुरसत नही हे.. तो सब अपनी बीवीओके साथ लगे होगे.. भाभी.. आपने ओर लखनभैयाने भी इस दिनोका कही महीनोसे इन्तजार कीया होगा.. ओर धिरेनभी बहुत ठरकी हे.. हें..हें..हें..

लता : (थोडा गंभीर होते) पुनोदीदी.. अ‍ेक बात कहु..? क्या आपने नही कीयाथा..? मुजे आपके बारेमे थोडा बहुत पता हे.. आपने सादीसे पहेले धिरेनजीजुको हाथ तक नही लगाने दीया.. अब आपसे कैसे कहु..? बस आप धिरेन जीजुका खयाल रखना.. मुजे अभी ओर कुछ नही कहेना..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. उनके बारेमे मे सबकुछ जानती हु.. बस आप ये बात कीसीको मत कहेना.. जोभी होता हे होने दो.. क्या आप धिरेन ओर नीलुके बारेमे बात कर रही हेनां..? ओर मेरे बारेमे ओर क्या जनती हे..?

लता : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) दीदी.. आपके बारेमे ज्यादातो नही पता.. पर दिलके अ‍ेक कोनेमे अ‍ैसा लगता हे.. की हम दोनोही हमसफर हे.. आपसे मेरा बहुत लगाव हे.. अ‍ैसा लगता हे की हम दोनोकी मंजील अ‍ेक हे.. बस इनसे ज्यादा कुछ नही पता.. आपसे अ‍ेक बात पुछु..? क्या आपको नीलु ओर धिरेनजीजुके बारेमे जानकर दुख नही होता..?

पुनम : (हसते) भाभी.. आपका दिल सही बोल रहा हे.. कुछ बाते हे जो मे आपको सबकुछ बताउगी.. लेकीन अभी समय नही हे.. ओर जबसे प्यारकी परीभासा समजने लगी.. तबसे मेने अ‍ैसे कइ रीस्ते देखे हे..

लता : (हसते) दीदी.. कमीने सभी मर्द अ‍ेक जैसेही होते हे.. फीर चाहे बडा हो या छोटा.. हमारे भानुभाइ भी कुछ कम नही हे.. कीसीको अ‍ेक बीवीसे संतोष ही नही होता.. आपका खानदानतो रोयल ओर राजवी परीवार हे.. दो क्या तीन बीवीयोसे सादीकी परंपरा हे.. लेकीन भानुभाइभी..? अगर उनको मामीसे प्यारही था तो फीर भावना भाभीकी जींदगी क्यु खराब करदी..? उनको दो दो बच्चेभी दे दीये..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. अ‍ेक बात कहु..? चाहे मर्द हो या हम जैसी औरत.. हम सभीके मनमे अपने अपने सपनोके राजकुमार या रानीकी कल्पना होती हे.. फीर चाहे वो सादी कीसीसेभी करले.. प्यारतो कभीभी कीसीभी उमरमे हो सकता हे.. जीस दिन उसे अपने सपनोका मर्द या ओरत मील जायेगी..

तब वो उसे पाकरही रहेगा.. या उसे पानेकी कोसी करता रहेगा.. ओर ये आजकल नही.. बरसोसे चला आ रहा हे.. तो हम कीसीको क्या दोस दे.. आपके ओर मेरे मनका भी कोइ राज कुमार होगा.. तो यही बात मर्दमे भी लागु होती हे.. तो इसमे बेचारे भानुभाइकी क्या गलती.. भाइनेतो कीतनी सादीया की हे.. ओर अभीभी कीयेही जा रहे हे..

लता : (सरमाते हसते) दीदी.. आपने सही कहा.. आपकी बातोसे मुजे ओरभी जाननेकी उत्सुक्ता बढ गइ हे.. क्या मुजे ओरभी बाते बता सकती हे..? हम दोनोके बारेमे..

पुनम : (हसते) भाभी.. अभी कुछ नही.. लेकीन अभी इतना बता सकती हुकी आपने अभी कहानां.. की हम दोनो हमसफर हे.. हम दोनोकी मंजील अ‍ेक लगती हे.. तो भाभी.. अभी इतनाही जानलो.. की आपके मन की ये बात सच हे.. अभी इस बारेमे कीसीको कुछ मत कहेना.. सब समयपे छोडदो.. इस बारेमे मुजे आपसे बहुत कुछ कहेना हे.. लेकीन अभी नही.. हम दोनोही फुरसतमे बात करेगे..

लखन : (दुरसे जोरोसे आवाज देते) अरे.. दोनो चलोभी.. कीतनी बाते करोगी.. बाते बादमे करलेना..

लता : (जोरोसे) अरे आ रहे हे.. (पुनमकी ओर हसते) चलीये दीदी.. हम इस बारेमे हम बादमे बाते करेगे.. मुजे आपसे बहुत कुछ जानना हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) हां भाभी.. चलो.. मुजेभी आपसे बहुत कुछ बताना हे.. हें..हें..हें..

फीर दोनोही लखन धिरेनके पास चली गइतो चारो होटेलमे चले गये ओर वहा सबने आपसमे बाते करते डीनर करलीया.. फीर बहार आकर धिरेनने दो तीन पानीकी बोटल लेली.. तो कुछ लोग पान ठंडाभी पीते रहे.. ओर धीरे धीरे करते सब वापस बसमे बैठ गये.. ओर बस अपनी मंजीलकी ओर चल पडी तब लखन धिरेनने लता ओर पुनमको कंधेसे पकडकर अपने आपसे सटालीया तो कुछही देरमे दोनो अपने पतीके कंधेपे सर रखके सोगइ..

तब भानुके गांवमेभी भानु जब रातपे घरपे गया.. तो सरला ओर रमा भी खाना खाकर भानुका इन्तजार करते आंगनमे खटीया डालकर बैठी हुइ थी.. रमाने भावेशको दुध पीलाकर अपने रुममे सुला दीया था.. तभी भानुभी आगया ओर वही बैठ गया.. तो रमाने उसे पानी पीलाया.. ओर खाली ग्लास लेकर वही भानुकी ओर सवालीया नजरोसे देखते नीलमकी बाते सुननेके लीये खडी रही.. तब सरलाने पुछही लीया..

सरला : भानु.. क्या नीलमका सब अ‍ेडमीशन होगया..? उनको होस्टेलमे जगाह मील गइ..?

भानु : (हसते) हां माइ.. वो स्कुलवाले तो हमारे देवुके पहेचान वालेथे.. ओर होस्टेलमे पुनमदीदीके पहेचान वालेथे.. तो हमारी नीलुको रहेनेके लीये रुमभी बढीया मील गया.. ओर वैसेभी वहा सृतीदीदी हे ओर हमारे साले साहब धिरेनभी सहेरमे नोकरी करते हे.. तो वोभी वहा आते जाते रहेगे.. वहा नीलुको कोइ तकलीफ नही हे.. बस वो अच्छेसे पढ लीखले.. ताकी उनकोभी हमारी लताकी तराह कोइ अच्छासा लडका मील जाये..

रमा : (खुसीसे हसते) अरे.. आप नीलुकी चीन्ता तो छोडही दो.. हमारी लता केह रहीथी हमारे देवरही उनके लीये कोइ अच्छासा लडका ढुंढ देगे.. क्यु माजी..? हमारे लखन तो बहुतही अच्छे हे.. ओर देवरजीभी हमारा कीतना खयाल रखते हे..

सरला : (हसते) हां.. हमारा देवुही उनके लीये कोइ अच्छा रीस्ता ढुंढ लेगा.. भानु.. ये बता तुने खाना बाना खायाकी नही..? हम दोनोतो खाकर बैठी हे..

भानु : (हसते) हां.. देवुने हम सबको अ‍ेक मस्त होटेलमे खाना खीलाया.. वो मंजुभाभी भी साथमे आइ थी..

सरला : (हसते) चलो सब अच्छेसे नीपट गया.. हमारी लता वहा राज करेगी राज.. हें..हें..हें.. ओर उनकी जेठानीभी कौन हे.. हमारी मंजु बीटीया.. उनको कोइ पैसो या राजघरानेकी बहु होनेका घमंड नही हे.. वोभी लताको अपनी छोटी बहेन मानती हे..

रमा : (जोरोसे हसते) माजी.. कास हमारे लखनकेभी कोइ अ‍ेक छोटे भाइ होते.. हें..हें..हें.. तो मे मेरी नीलुको वही उनके साथ ही ब्याह देती.. हें..हें..हें.. हमारे जमाइ लखनभी कीतने अच्छे हे.. अबतो अपने भाइका ज्यादातर कारोबार आपके बेटेके साथ रहेते वोही सम्हालते हे.. क्युजी..?

भानु : (हसते) हां माइ.. देवु केह रहाथा वो लखन ओर हमारी लताको सहेरमे रहेनेके लीये भेज रहा हे.. वहा देवुका अ‍ेक बंगलो पहेलेसे ही ले रखा हे.. हमारी लता ओर लखन अब वही बडे सहेरमे रहेगे.. हें..हे..हें..

रमा : (बहुत खुस होते) क्या..? तो हमारी लतादीदी अब सहेरमे रहेगी..? तबतो हमे नीलुकी कोइ चीन्ता नही करनी.. कास लखनका कोइ छोटा भाइभी होता.. तो मे पका नीलुकी ब्याह उनसे करवा देती.. हें..हें..हें..

सरला : (खुसीसे हसते) अरे उनको लखन होगया वोही बडी बात हे.. वरना उनके खानदानमे तो अभी तक सीर्फ अ‍ेकही लडका होताथा.. येतो अच्छा हुआ बाबाने उनके खानदानमे जो श्रापथा उन श्रापका नीवारण करदीया.. तो लखन भी आगया.. ओर बादमे पुनमभी आगइ.. फुल जेसी बच्ची हे वो.. कीतनी सुंदर..

रमा : (हसते) माजी.. सब बच्चे चले गयेतो आज घर कीतना सुना सुना लग रहा हे.. अच्छा हुआ मे भावेशको लेकर आगइ..

सरला : (हसते) हां.. अच्छा हुआ तुम भावेशको लेकर इधर आगइ.. हमारा कुछ टाइमतो नीकलेगा..

रमा : (अ‍ेकदम सरमाते हसते) माजी.. लेकीन अब भावेशको मे हमेसाके लीये मेरे साथही रखुगी.. आजसे वो मेरा बेटा हे.. मे इसे अपना बेटा मानकरही हमेसाके लीये मेरे साथ रखुगी..

भानु : माइ आपको बैठना हेतो बैठो.. मे चला सोने.. आज सहेर जाके बहुत थक गया हु..

सरला : (हसते) हां सो जाओ हमभी सो जाते हे.. येतो तेरा इन्तजार कर रहेथे.. जा सोजा.. रमा तुम बैठ.. मुजे तुमसे कुछ बात करनी हे..

रमा : (भानु चला गया तब सरलाके पास बैठते) जी माजी.. कहीये..

सरला : (सरमाते धीरेसे) सुन रमा.. अब तुम दोनो चाहोतो अपने बच्चेके बारेमेभी सोचो.. तुमने खामखा ओपरेशन करवालीया.. क्या ये वापस ठीक नही होता..

रमा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) जी.. वो बीमारथे तबही ठीक करवाया था.. हम कोसीस कर रहे हे.. लेकीन कोइ फायदा नही हो रहा.. इसीलीये अब भावेशको अपना बेटा मानती हु..

सरला : (हसते) हंम.. चल ठीक हे.. कोसीस करती रहेना.. अबब जा तुमभी सोजा..

फीर दोनो ही उठ गइ ओर अपने अपने रुममे चले गइ.. भानु चेन्ज करके सोने लगा तो रमाभी चेन्ज करके भानुके पास आकर लेट गइ.. आज सरलाकी बातोने उसे फीरसे जावानीकी ओर धकेल दीया.. ओर वो भानुकी ओर करवट लेकर पलट गइ.. फीर अपनी अ‍ेक टांग उठाकर भानुकी कमरपे डालकर भानुके सीनेपे हाथ रखते उनके सीनेको सहेलाने लगी.. तो भानुका लंड खडा होने लगा.. ओर वो रमाकी ओर करवट लेकर रमाको जोरोसे बाहोमे भीच लेता हे.. ओर उनके होठ चुमने लगता हे..

रमा : (सरमाते धीरेसे) जानु आपतो थक गये थेनां..? तो फीर सो जाओ.. हें..हें..हें..

भानु : (मुस्कुराते होंठ चुमते) अरे वोतो तुजे रुममे बुलानेके लीये कहाथा.. क्या केह रहीथी मां..?

रमा : (सरमाते हसते) वो.. वो मुजे हमारे बच्चेके लीये केह रहीथी.. हें..हें..हें..

भानु : (हसते) अच्छा..? तो फीर चल कपडे नीकाल.. आजतो तुजे बच्चा देही दु.. हें..हें..हें.. रमा.. क्या मस्त लग रही हे तु.. जी चाहता हे तुजे चोदताही रहु.. हें..हे..हें..

रमा : (सर्मसरार होते अपना गाउन नीकालते) आप बहुत गंदे हो.. कीतना ठरकी होगये हो.. ओर मुजेभी ठरकी करदीया.. अबतो मुजेभी आपसे चुदवाये बीना नींद नही आती.. जबसे हमारी सादी हुइ हे तबसे अ‍ेक रातभी आपने मुजे चोदे बीना नही जाने दी.. वहाभी आप मेरी ठुकाइ करलेते थे.. हें..हे..हें..

भानु : (होंठ चुमते बुब्सको मसलते) रमा.. तु चीज ही अ‍ैसी हे.. तुजे चोदे बीना मन नही लगता..

रमा : (सरमाते धीरेसे गाल सहेलाते) भानु.. लेकीन आज कोइ गोली बोली नही खानी.. आप गोली खाकर मुजे चोद चोदकर थका देते हो.. आज सीर्फ अ‍ेकही बार चोदलो फीर चुदाइ करके सो जाओ.. आपभी आज थक गये हे..

फीर भानु रमाके उपर चडकर लेट गया.. तो रमाने भानुका लंड पकडकर अपनी चुतपे टीका दीया ओर भानुने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड रमाकी चुतमे घुसा दीया तो रमाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर भानु हाथके बल उचा होते रमाको कमर हीलाते जोरोसे चोदने लगा.. तब रमाभी मदहोस होते भानुकी पीठ सहेलाते मजेसे चुदवाने लगी.. ओर भानु रमाके बीच धीरे धीरे करते घमासान चुदाइ होने लगी..





कुछही देरकी धमासान चुदाइकी वजहसे दोनोही अकडने लगे.. ओर रमाने जोरोसे भानुको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर भानुके होठोसे लीपलोक करलीया तब भानु ओर रमा दोनोही साथमे जडने लगे.. ओर भानु जडतेही रमाके सीनेपे सर रखते ढेर होगया तब रमा भानुकी पीठ सहेलाती रही.. तो कुछही देरमे भानुका लंड सीकुडकर रमाकी चुतसे नीकल गया तो रमाने अपनी चुतको ओर भानुके लंडको साफ करलीया..

रमा : (सरमाते हसते) भानु.. आजतो गोली नही खाइतो जल्दी होगया.. हें..हें..हें.. वरना तो आप मेरी हालत बीगाड देते हो.. अब मे आपको गोली नही खाने दुगी.. हां हप्तेमे अ‍ेक दो बार ठीक हे.. देखना अबतो ये भावेशभी हमारे साथ सोयेगा..

भानु : (हसते) तुमने खामखा बच्चेका ओपरेशन करवा लीया.. वरना हमभी अ‍ेक बच्चा पैदा कर लेते.. हें..हें..हे..

रमा : (सरमाते धीरेसे हसते) भानु.. अ‍ेक बात कहु..? मेने कभी ओपरेशन करवाया ही नही.. जबभी आप वहा आकर मुजे चोदते थे.. तब में आइपील ले रहीथी.. लेकीन हमारी सादीके बाद मेने वो लेना बंध करदीया हे.. फीरभी हमारा बच्चा नही ठहेरता.. मेनेतो अब उमीदही छोडदी हे.. इसीलीयेतो भावेशको लेकर आगइ हु..

भानु : (हसते प्यारसे गाल सहेलाते) हंम.. वोभी तो मेरा बच्चा हे.. चल ठीक हे.. रमा.. तुम मस्त हो.. जीस तराह तुजे चोदता हुनां.. उसी तराह मेने भावुकोभी खुब चोदा हे..

रमा : (सरमाते) हां.. तभीतो उन बेचारीको छोटी उमरमे दो दो बच्चे देदीये.. लगता हे आपको बच्चे पैदा करनेका बहुत सोख हे.. हें..हें..हें.. हमारी नीलम होगइ वोही बहुत हे.. हम रीलेशनमे आये तबही मुजे पेटसे कर दीयाथा.. ओर भावुको भी सादी करतेही प्रेगनेन्ट करदीया.. अभी भावेश बडाभी नही हुआ.. ओर उसे दुबारा पेटसे करके बच्ची देदी.. हें..हें..हें..

भानु : रमा.. आज मेने मंजु भाभीसे बात करली.. वो भावुको समजायेगी.. ताकी वोभी हमारे साथ सो सके.. मेने भी भावुको कीतने दीन होगये नही चोदा.. उनको चोदनेका बहुत मन कर रहा हे..

रमा : (थोडा सख्तीसे) देख भानु.. वो जो कर रही हे उसे करने दे.. उसे हमारे साथ सुलानेकी अब कोइ जरुरत नही हे.. क्या मे आपको चोदनेके लीये मना कर रही हु..? मुजे जीतना मन करे उतना चोदलो.. मे मना नही करुगी.. मानाकी गलती तेरी थी.. लेकीन वो तुमसे नाराज हे तो होनेदे.. अबतो तेरे ससुरभी उनके नाम अपना मकान कर रहे हे.. अगर वो वहा रहेना चाहेतो तुम उसे मना मत करना.. केह देती हु..

भानु : (थोडा परेसान होते) लेकीन रमा वोभी मेरी बीवी हे.. क्या वो वहा रहेगीतो अच्छा लगेगा..? लोग क्या कहेगे..? कुछतो सोच समजकर बोला कर.. मत भुलो तुम दोनोही मेरी बीवी हो.. उनकाभी इतना हक हे जीतना तुम्हारा हे.. येतो अच्छा हुआ वो तुम्हारी सादी मेरे साथ करवाने मान गइ.. वरना सोचो तुम क्या करती..? हमे आजभी सबसे छुप छुपके मीलना पडता..

रमा : (थोडा प्यारसे) भानु.. मानाकी वो मान गइ.. लेकीन क्या मे तुजे करने नही देती..? हमारी सादीसे पहेले जबसे उसे हमारे रीस्तेके बारेमे पता चला तबसे आपको हाथभी लगाने नही दीया.. तो फीर उसे हमारे साथ सुलाकर अब क्या फायदा..? उल्टा हमारा मजा खराब करेगी.. ओर आपका मुडभी ठीक नही रहेगा.. भानु.. तुम मुजे जीतना चोदना चाहो चोदलो.. मुजे प्रेगनेन्ट करना चाहोतो वोभी करलो.. मे मना नही करुगी.. हम बच्चेके लीये कोसीसभी तो कर रहे हे.. लेकीन उसे रहेने दो.. प्लीज..

भानु : चल ठीक हे.. उनके बारेमे हम बादमे सोचेगे.. अब सोजा.. वरना फीरसे तुजे चोद लुगा.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते भानुकी बाहोमे आते) तुम बहुत कमीने हो.. तुम्हारातो मनही नही भरता.. अब कल चोद लेना अभी सोजाओ.. मेरा अच्छा बच्चा.. हें..हें..हें..

फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भरते सोने लगे तब कुछही देरमे भानु नींदकी आगोसमे चला गया तब रमा सोते हुअ‍े सोचमे डुब गइ.. वो भलेही भावनाके साथ अपनोसा व्यवहार करती रही.. लेकीन मनसे वो भावनाको भानुसे दुर रखना चाहती थी.. इसीलीये आज उसने भानुसे भावनाको ना मनानेकी बात कहेदी.. वो भावनाके मनकी बात जान चुकीथी.. इसीलीये भावनाको अपने प्रेमीसे मीलने प्रोत्साहीत कर रहीथी.. ताकी उनका रास्ता हमेसाके लीये साफ रहे.. यही सब सचते वोभी नींदकी आगोसमे चली गइ..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२१/२

आज सुबहका सुरज सबके लीये अ‍ेक नइ उमीद लेकर नीकलाथा.. कीसीको अपने प्यारकी चाहत थी तो कीसीको अपनी मनचाही मासुकाको पानेकी चाहत थी.. सभी लोग अ‍ेक नइ उमीद लेकर उठ गये.. मंजु चंदा नीर्मला रजीया दया चंपाभाभी सभी सुबह जल्दी उठ गये.. ओर तैयार होकर अपने कामपे लग गये.. नीर्मलाभी राजीवको कंपलीट करके भावनाके पास चली गइ.. तो भावना तैयर होकर अपनी बच्चीको ब्लाउस उचा करके दुध पीला रहीथी.. जैसेही नीर्मलाको देखा उनके चहेरेपे स्माइल आगइ..

भावना : (हसते) मोम.. क्या पापाको कंपलीट कर दीया..? हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते उनके पास बैठते) हां बेटी.. क्या भावेश तेरे बीना रमाके पास रेह पायेगा..?

भावना : हां मोम.. वोतो सुरुसेही लताके पास रहेता था.. उनकोही अपनी मां मानता था.. हें..हें..हें.. ओर जबसे सादी की डेट आगइ.. तबसे रमाही उसे सम्हालने लगी हे.. वो उनके साथ घुल मील गया हे.. ओर वैसेभी मे दो दो बच्चे कैसे सम्हालुगी..? वो भलेही उनके पास रहेता..

नीर्मला : (प्यारसे सरपे हाथ घुमाते) भावु.. तु कोइ चीन्ता मत करना.. तुजे जीस तराह अपनी जींदगी जीनी हे जीले.. हम तुजपे अब कोइ पाबंदी नही लगायेगे.. बस अ‍ेकही बीनंती हे.. तुम भानुको मत छोडना.. इसमे आगे जाकर तेराही फायदा हे..

भावना : (हसते) मोम.. क्या आपकी मंजु दीदीसे इस बारेमे कोइ ओर बात हुइ हे..?

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां.. थोडी बहुत.. लेकीन तुजे भी तेरे बारेमे मंजु ही सबकुछ बतायेगी..

भावना : मोम.. मे ठीकतो कर रही हुनां..? कोइ गलतीतो नही करती..? खास करके मंजु दीदीके साथ..

नीर्मला : (हसते) नही मेरी बच्ची.. तुम मंजुको जानती ही नही.. वो बहुतही विसाल दिलकी हे.. देखा नही चंदा सृती सबको हसी खुसी अ‍ेक्सेप्ट करलीया..

मंजुला : (कमरेमे आते) नही भावु.. मेरी छोटी बहेन कभी गलती नही कर सकती.. तुम चाइ नास्ता करलो.. ओर बच्चीको थोडी देर मम्मीको सम्हालने देदो.. अभी देवु खेतोपे चला जायेगा.. तब हम दोनोको रश्मी भाभीके घर जाना हे.. वहा हम दोनोही आरामसे बात कर सकेगे.. मुजे वहा कुछ काम भी हे..

नीर्मला : (खुस होते) हां भावु.. मंजुके साथ वही चलीजा.. अ‍ैसी बात करना यहा उचीत नही हे.. मे तेरी बच्चीको सम्हाल लुंगी.. ओर हां.. इस बारेमे अभी तेरी मौसीको बतानेकी जरुरत नही हे.. तु समज गइनां..?

फीर तीनोही बात करके बहार होलमे आगइ.. तब राजीव सोफेपे बैठकर खबार पढ रहाथा.. तभी चंदाभी देवायतके साथ रुमसे नीकलकर सबके पास होलमे आकर बैठ गइ.. तभी दयाने टेबलपे सबका चाइ नास्ता रख दीया तो सभी डाइनींग टेबलपे आगये.. तब राजीवभी देवायतके साथ खेतोपे जानेके लीये तैयार होगया.. ओर चाइ नास्ता करके दोनो खेतोपे चले गये.. तो कुछ देरके बाद भावना ओर मंजुभी बच्चीको नीर्मलाको थमाकर रश्मीके घरकी ओर बाते करते चली गइ..

भावना : (हसते) दी.. हम हमारे रुममेभी बात कर सकते थे.. तो फीर रश्मी भाभीके घर क्यु जाना..?

मंजुला : नही भावु.. कुछ बाते अ‍ैसी हे अगर वहा चंदादीदीने सुनलीयातो उनको बडा दुख होगा.. ओर रश्मीभाभीके घर उनका सेपे्रट रुम हे.. वहा बैठकर हम आरमसे बात कर सकते हे.. क्युकी आज मुजे तुम्हे तुम्हारे बारेमे ओर लता नीलु सबके बारेमे बहुत कुछ बताना हे..

दोनोही बाते करते रश्मीके घरकी ओर चली जा रहीथी तब देवायत ओर राजीवभी खेतोपे आगये तो भानु अभी तक खेतोपे नही आयाथा.. तो राजीव रामुकाकाके पास जाकर उनके साथ खटीयापे बैठ गया.. तो उसे देखकर रामुकाकाभी खुस होगये.. ओर दोनो बाते करने लगे तब देवायत तीन चार दिनोसे खेतोपे नही आयाथा तो वो सब मजदुरोको मीलने ओर सबके कामका जायजा लेने खेतोपे घुमते चला गया..

तो वहा हरीया ओर मालतीके साथ छोटु ओर उनकी बीवी रीटाभी काम कर रहेथे.. तब मालती देवायतको देखतेही उनकी ओर कातीलाना स्माइल करने लगी.. तो रीटाभी प्यासी ओर कामुक नजरोसे देवायतको देखते हसने लगी.. तभी मालतीने देवायतको चाइ बनानेका पुछ लीया.. तो देवायत समज गया.. ओर उसने राजीवका सोचते मालतीको हसके मना कर दीया.. ओर थोडी देरके बाद बनानेको कहा..

हरीया : (हसते पास आते) मालीक.. अब आप अ‍ेक बार कबीलेमे जाकर सबको मील लीजीये.. सबलोग आपको मीलना चाहते हे.. मेतो अब इधर आ गया हुतो.. सबका कहेना हे.. अब कबीलेमे कीसीको मुखीया बनादे.. या फीर वहा अ‍ेक पुजाके लीये गुरु चाहीये.. जो कबीलेका काम करे..

देवायत : (हसते) क्यु..? कुछ हुआ हे क्या..? मे बाबासे मीलकर इस बारेमे बात करलुगा.. ओर अभी दो तीन ठहेरजा मे जाकर कुछ करता हु.. ओर वो मंगीयाके भाइ डुंगरकी बीवीका क्या हुआ..? वो तेरे पास आगइ की नही..? हें..हें..हें..

हरीया : (सरमाते हसते देवायतको थोडा दुर लेजाते) जी.. मालीक.. दरसल उसीके बारेमे आपसे बात करनी थी.. वो हमारे घर डुंगरको छोडकर आगइ हे.. मुजे ओर मालतीको कबीलेपे जाना हे.. वही मंदिरमे जाकर सादी करलेगे फीर मालतीतो इधरही हे.. मे उनकोभी यहा लेकर आजाउगा.. इसीलीये मुजे ओर मालतीको उसे लेने जाना हे..

देवायत : (हसते) हंम.. अभीतो तुम लोग गांवमे गयेथे.. वापस आये सीर्फ तीन दीन हुअ‍े.. फीरभी जाना हे..?

हरीया : (हसते) जी.. मालीक जाना पडेगा.. हमारे यहा आनेके बादही वो वहा आगइ.. मुजे दुसरे मजदुरसे पता चला.. आपतो जानते हे हम बीवीओको ज्यादा दिन अकेले नही रखते.. हें..हें..हें.. इसीलीयेतो मे मालतीको साथही रखता हु.. हें..हें..हें.. ओर आपसे मालतीभी कुछ बात करना चाहती हे.. वो जमीलाके बारेमे..

देवायत : (हसते) ठीक हे.. चले जाना.. ओर वापसभी जल्दीसे आना.. अब यहाभी कुछ कामपे ध्यानदे.. अब कामभी बढ जायेगा.. जा.. अब बुला उसे.. अभी बात करलेते हे..

तभी हरीया मालतीको इसारा करते बुलाता हे तो मालतीभी सरमाते हसते हुअ‍े दोनोके पास आगइ..

मालती : (सरमाते हसते) जी मालीक.. कहीये..

हरीया : (हसते) अरे वो तुम मालीकसे बात करना चाहतीथी नां..? वो जमीलाके बारेमे..

मालती : (सरमाते हसते धीरेसे) वो.. वो.. मे मालीकसे अकेलेमे मीलकर बात करलुगी.. अभी चाइ देने जाउगी तब बात करलुगी.. मुजे ओर भी बात करनी हे..

देवायत : (हसते) चलो ठीक हे.. बाकीतो सब सही चल रहा हेनां..? कुछ चाहीयेतो नही..?

हरीया : (हसते) जी नही मालीक.. आपकी दयासे अभी सबकुछ ठीक हे.. मे चलता हु.. क्या हम दोनो अपने घर जाये..? वो मेरी दुसरी बीवीको लेकर हम जल्दी वापस आजायेगे..

मालती : (कातीलाना मुस्कानसे) मालीक.. अब वो रीटाभी अच्छा खाना बनाती हे.. मुजसे केह रहीथी.. अगर आप कहोतो हम दो दिनमे वापस आजायेगे.. मेरी सौतनको लेने जाना हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते कुछ पैसे देते) हां चले जाना.. येलो.. इनकी सादीमे काम आयेगे.. ओर भानु आजाये तब तुम हमारे लीये चाइ बनाकर लेआ..

मालती : (खुस होते पैसे लेकर) जी.. मालीक.. मे अभी बनाकर लेआइ..

कहेते देवायत मालतीको कुछ पैसे देताहे तो हरीया ओर मालती दोनोही खुस होजाते हे.. ओर देवायत रीटाकी ओर नजर डालते मुस्कुराते वापस राजीव ओर रामुकाकाके पास आकर बैठ जाता हे.. तब राजीव ओर रामुकाका हस हसके पुरानी बाते कर रहेथे.. ओर देवायत वहीसे खडे होकर अपने गोडाउनकी ओफीसमे जाकर बैठ जाता हे.. तभी भानुभी कार लेकर आगया ओर राजीव रामुकाकाके पैर छुकर सीधाही खेतोमे चला गया..

तो इधर धिरेन लखन पुनम ओर लताभी सुबह अ‍ेक होटेलमे बस रुकीतो फ्रेस होगये.. ओर चाइनास्ता करके अपनी मंजीलकी ओर बढ गये.. अभी उन लोगोको गौवा पहोंचनेमे चार पांच घंटेका वक्त था.. लखन ओर लता अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते सफर कर रहेथे.. तो दुसरी ओर अब पुनमभी धिरेनके साथ काफी घुल मीलकर खुल चुकीथी.. ओर वोभी धिरेनका ध्यान रखते उनके साथ हसी मजाक करते मस्ती करने लगी..

तो गांवमे मी मंजु ओर भावना आपसमे बाते करते रश्मीके घर पहोंच गइ.. तब रश्मी कीचनमे काम कर रहीथी.. तो दोनोको देखतेही अपने हाथ पोछते हसते हुअ‍े बहार आगइ.. तो मंजुने रश्मीको भावुसे अकेलेमे बात करनेको कहा.. तो रश्मीने उन दोनोको अपने बेडरुम मे भेज दिया.. ओर कीचनमे चाइ नास्ता बनाने चली गइ.. तो मंजु ओर भावना रश्मीके बेडरुममे आगये ओर मंजुने धीरेसे दरवाजा बंध करदीया.. ओर दोनो बेडपे आकर बैठ गइ.. तो भावनाने मंजुकी ओर सवालीया नजरोसे देखा.. तो मंजुने कहा..

मंजुला : भावु.. कुछ बाते अ‍ैसी हे.. जो वहा बात करना मुमकीन नही हे.. अगर चंदादीदी ओर मोमने ने सुन लीया तो दुखी होजायेगी.. इसीलीये तुजे यहा लेकर आइ हु.. अब हमारे पास समय ही समय हे..

भावना : दीदी अ‍ैसी क्या बात हे जो दोनो दुखी होजायेगी.. आज मुजे सबकुछ खुलकर बताइअ‍े.. मुजे पता हे आपको हम सबके बारेमे पहेलेसेही पता चल जाता हे.. तो आज खुलकर हम सबके बारेमे बताइअ‍े.. खास करके मेरे ओर नीलम.. लताके बारेमे.. आपने मकान सीर्फ मेरे नामही क्यु करनेको कहा.. मुजे सब कुछ जानना हे..

मंजुला : हां भावु.. इसीलीये तो तुजे लेकर यहा आइ हु.. सुन.. तुम भानुको मत छोडना.. मुजे रमाभाभीकी नीयत कुछ ठीक नही लगती.. तुजे वो भानुभाइसे दुर रखना चाहती हे.. ताकी वो अकेली उनके साथ मजे कर सके.. वो भी तेरी सासकी तराह बहुतही कामी होगइ हे.. वो नही चाहती तुमभी उन दोनोके साथ अ‍ेकही बीस्तरमे रहो.. वो भानुके साथ तुमको सेर करना नही चाहती.. उनको तुमसे थोडी ज्वेलेसी हे..

भावना : (आस्चर्यसे) लेकीन क्यु..? मेने उनका क्या बीगाडा हे..? उल्टा वोतो मुजे सपोर्ट कर रहीथी.. कहेतीथी अपने पुराने प्यारको अपनालो.. मे तुम्हारे साथ हु.. गलती भानुकी ही हे.. वगैरे.. वगैरे..

मंजुला : (हसते) यहीतो वो चाहती हे.. ताकी तुम अपने पुराने प्यारके पास चले जाओ ओर उनको तुमसे छुटकारा मील जाये.. वो बहुतही सातीर दीमाग वाली हे.. भानुके साथ खुलकर मजे कर सके इसीलीये अपनी बच्चीकोभी होस्टेलमे डालने राजी होगइ.. भावु.. उनको अपना वारीस चाहीये.. लेकीन भानुके साथ सादी नही हुइथी तो बरसो तक बार बार आइपील लेनेकी वजहसे उनके गर्भमे कुछ प्रोबलेम लगता हे..

जबसे उनकी सादी भानुभाइसे हुइ तबसे आइपील लेना बंध करदीया हे.. फीरभी उनको गर्भ नही ठहेरता.. उनको लगने लगा हे की अब वो भानुसे बच्चे पैदा नही कर सकती.. इसीलीयेतो वो भावेशको लेगइ.. अब वो भावेशकोही अपना बेटा मानकर उसे वारीस समजेगी.. ओर भावेशको तुमसे दुर कर देगी..

भावना : (आस्चर्यसे देखते) लेकीन दीदी वोतो कहेती हेकी उसने बच्चेका ओपरेशन करवालीया हे..?

मंजुला : (हसते) नही भावु.. वो सबको जुठ बोल रही हे.. मेने कहाना वो बहुतही सातीर दीमागवाली हे.. बस वो सीर्फ भानुभाइसे सादीका इन्तजार कर रहीथी.. सादी होतेही वो अपना वारीस चाहतीथी.. लेकीन उनका सब दाव उल्टा पड गया.. हें..हें..हें..

भावना : (सोचते) दीदी.. क्या रमादीदी अ‍ैसा कर सकती हे..? मुजे तो यकीन ही नही हो रहा.. दीदी मुजे मेरे बारेमे सब कुछ जानना हे.. आप मेरे बारेमे बताओ..

मंजुला : भावु.. तेरे बारेमे बतानेसे पहेले मुजे मेरे बारेमे तुजे कुछ बताना हे.. ताकी सब बाते तेरी समजमे आजाये.. भावु तुम बात सुनकर दुखी मत होना.. ओर ये बात सीर्फ तेरे तकही सीमीत रखना.. मोम ओर पापाकोभी ये बात पता नही चलनी चाहीये.. मे अब सीर्फ दो ढाइ सालकी ही महेमान हु..

भावना : (बुरी तराह चोंकते) व्होट.. क्या कहा आपने..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. मे अब सीर्फ दो ढाइ सालकी महेमान हु.. मेरे बच्चेदानीमे अ‍ेक अ‍ैसी प्रोबलेम हे की मे बच्चा पैदा करुगी तो ज्यादासे ज्यादा ढाइ साल जींन्दा रेह सकुगी.. मेडीकल लाइनमे ये नया केश हे.. इनका कोइ इलाज नही.. धीमे धीमे कमजोर होते खतम होजाउगी.. ओर उनके पीछे कइ रीजन हे.. तुमतो जानती हो.. हम सभी कोइ सामान्य ओरते नही हे.. हम सभी परीया यातो अप्सराये हे.. हम अ‍ेक खास मक्सदसे यहा हमारे स्वामीके लीये आइ हे.. तो मुजे वापस जाना होगा..

भावना : (आंसु बहाते) दी.. तो फीर आपने बच्चा क्यु पैदा कीया..? नही करती.. बच्चा..

मंजुला : (हसते) नही भावु.. तुम आंसु मत बहा.. यही बात तुजे समजनी हे.. मे सीर्फ जा नही रही.. मुजे अ‍ेक नया सरीर लेकर वापस भी तो आना हे.. तेरी कोखसे..

भावना : (अ‍ेकदम आस्चर्यसे) मेरी कोखसे..? मतलब..? मे कुछ समजी नही..

मंजुला : (हसते) हां भावु.. मुजे तेरी कोखसे जन्म लेकर फीरसे इस घरतीपे आना हे.. फीर मे मेरे विजयसे सादी कर लुगी.. ओर उनका बच्चा पैदा करुगी.. ओर वोही हमारे स्वामी होगे.. हम सबके स्वामी.. फीर जब वो बडा होजायेगा तब मे विजयको छोडके उनसे सादी करलुगी..

भावना : (आस्चर्यसे सुनते) दीदी.. कीतना अजीब हेनां.. आप अपने बेटेसे ही सादी करलेगी.. लेकीन दीदी.. अब मेने फैसला करलीया हे.. मे अब भानुके साथ कभी फीजीकल नही होउगी.. अब उस आदमीसे अ‍ेक नफरतसी हो गइ हे.. तो फीर मेरी कोखसे आप कैसे जन्म लोगी..?

मंजुला : (हसते) नही भावु.. तेरे नसीबमे अभी तीन बच्चे ओर भी हे.. लेकीन वो तीनो बच्चे अब भानुभाइसे नही होगे.. वो तीनो बच्चे तेरे पुराने प्यारसे होगे.. यानी मेरे देवुसे.. इसीलीये तुजे भानुभाइको नही छोडना.. फीर चाहे उनके साथ फीजीकल रीलेशन ही क्यु ना रखना पडे.. वरना तुम भानुभाइ ओर बाकी सबको क्या कहोगी..?

की ये तीनो बच्चे कीसके हे.. बात कुछ समजमे आइ..? हंम.. इसीलीये तुजे मम्मीका मकान दे दीया हे.. ताकी तुम देवुको वहा खुलके मील सको.. भावु.. देवु तुमसे गांधर्व सादी करलेगा.. तुम वहा देवुकी सीक्रेट बीवी बनकर रहोगी.. तुजे दोनो जगाहपे रहेना हे.. अब वो तुजे देखना हेकी तुम सब कैसे मेनेज करती हो.. बात कुछ समजमे आइकी नही..? हें..हें..हें..

भावना : (सोचमे पडते) हां दीदी.. बाततो समज गइ.. लेकीन.. उस भानुके साथ.. कीतना कमीना हे.. हें..हें..हें.. ठरकी कहीका.. हें..हें..हें.. सकलतो जीजु जैसी हे.. लेकीन अकल बीलकुल नही हे.. कमीना बहुतही ठरकी हे.. उनको हर वक्त चुदाइ ही करनी होती हे.. क्या कोइ इतना ठरकी हो सकता हे..?

मंजुला : (हसते) भावु.. सुन.. आज तुजे अ‍ेक राजकी बात ओर बताती हु.. भानुभाइ ओर लता.. दोनोही मेरे ससुरकी संतान हे.. हें..हें..हें.. मेरे ससुरका तेरी सासके साथ अवैध रीस्ताथा.. क्युकी तेरे ससुर बच्चा देनेमे ओर सरला चाचीको संतुस्ट करनेके सक्षम नही थे.. ओर वैसे देखा जायेतो तुमभी हमारे खानदानकी ही बहु हो..

ओर देवु तेरे जेठजी हे.. हें..हें..हें.. समज गइ..? इसीलीये केह रही हु.. उनके साथ रीलेशन रखले.. आगे जाकर तुजे आसानी रहेगी.. तुजे बच्चेके बारेमे कीसीको जवाब नही देना पडेगा.. खास करके वो रमाभाभीको.. की ये बच्चे कीसके हे.. वैसेभी भानुभाइ बच्चे पैदा करनेके बहुत सोकीन हे.. हें..हें..हें..

भावना : (हसते) हां.. तभीतो मुजे दो दो बच्चे दे दीये.. सालेमे कीतनी आग हे.. पता नही बहारभी कीतनी ओरतोके साथ उनका रीस्ता होगा.. दीदी.. अब बात कुछ समजमे आइ.. तो फीर हमारी लता भी लखनकी बहेन हुइना..? वो दोनो भाइ बहेनकी भी सादी होगइ.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां.. यहीतो हमारे खानदानकी परंपरा होगइ हे.. सुन.. विजय मेरा बेटा हे.. ओर मुजे तेरी कोखसे पैदा होना हे.. तो वोभी तो देवुकी बच्ची होगी.. तो हम दोनोभी भाइ बहेन सादी करलेगे.. हें..हें..हें.. भावु.. पीछली तीन पीढीसे हमारे खानदानमे सब अपनी बहेनोके साथ ही सादी करते आये हे.. ओर आगेभी वोही सब होगा.. बल्की उनसेभी ज्यादा होगा.. तु समज गइनां..?

रश्मी : (हसते चाइ नास्ता अंदर लेआते) अरे दोनो बहेने बाते करनेके बहुत बीजी हो.. सोरी आप लोगोको डीस्टर्ब कीया.. लीजीये चाइ ठंडी होजाये इनसे पहेले आप दोनो चाइ नास्ता कर लीजीये..

मंजुला : (हसते) हां भाभी.. बात थोडी गहेरीथी तो भावुको यहा लेकर आगइ ताकी हम दोनोको कोइ डीस्टर्बना करे.. दीजीये.. ओर आपभी यही हमारे साथ चाइ नास्ता कीजीये.. बाते तो होती रहेगी.. क्या अपने पतीको चाइ नास्ता करवा लीया..?

रश्मी : भाभी जबसे सादीकी तैयारीया करने उधर आ रही हु तबसे कमीना खाना ही नही खा रहा.. क्यु मे उनको खानेमे जहेर मीलाकर दे रही हु.. अपना मुह ही नही खोलता.. कब तक भुखा रहेगा..? अबतो इतनी कमजोरसी आगइ हे हीलभी नही सकते.. फीरभी खाना नही खाते..

मंजुला : (हसते) लगता हे अब आपको जल्दी उनसे छुटकारा मील जायेगा.. हें..हें..हें..

रश्मी : (जोरोसे हसते) भाभी आपके मुहमे घी सकर.. हें..हें..हें..

भावना : (हसते) रश्मीभाभी.. आप कैसी बीवी हो..? अपने पतीके लीये कोइ अ‍ैसा बोलता हे..? हें..हें..हें..

रश्मी : (हसते) अरे दीदी.. आप उनकी करतुतोके बारेमे ज्यादा जानती नहीनां..? इसीलीये अ‍ैसा बोल रही हे.. अ‍ेक बार उनकी करतुतोके बारेमे सुनोगीनां.. तो आपभी उनको यही कहेगी..

फीर तीनोही चाइ नास्ता करने वही बैठ गइ.. रश्मीने अ‍ेक छोटा टेबल खीचके लेलीया.. ओर तीनोके लीये चाइ नीकालने लगी तब मंजु ओर भावना नास्ता खाने लगी.. ओर उनके साथ रश्मी भी सामील होगइ.. फीर तीनोने औपचारीक सादीकी बाते करते चाइ नास्ता करलीया.. तब रश्मी खाली कप ओर बरतन लेकर वापस चली गइ.. तो मंजुने फीरसे धीरेसे दरवाजा बंध करलीया.. ओर बातोका दौर आगे बढाया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२२

फीर तीनोही चाइ नास्ता वही करने बैठ गइ.. रश्मीने अ‍ेक छोटा टेबल खीचके लेलीया.. ओर तीनोके लीये चाइ नीकालने लगी तब मंजु ओर भावना नास्ता खाने लगी.. ओर उनके साथ रश्मीभी सामील होगइ फीर तीनोने औपचारीक सादीकी बाते करते चाइ नास्ता करलीया तब रश्मी खाली कप ओर बरतन लेकर वापस चली गइ.. तो मंजुने फीरसे धीरेसे दरवाजा बंध करलीया.. ओर बातोका दौर आगे बढाया....अब आगे

भावना : (हसते) दीदी मेरी बाततो होगइ.. लेकीन ये नीलुका क्या चकर हे.. वो क्यु धिरेनके पीछे पडी हे..? ओर हमारा धिरेन.. वो पहेलेतो अ‍ैसा नही था.. कीतना सीधा था.. पुनमदीदी कीतनी अच्छी लडकी हे.. कमीना उनकोभी धोखा दे रहा हे.. ओर वो नीलुके पीछे पागल हे.. अच्छा हुआ मे वहा चली गइ.. वरना उस दिन वो नीलुको बरबाद ही करलेता.. ओर वो लडकीभी उनकी मां की तराह ठरकी लगती हे..

मंजुला : (थोडी गंभीर होते) भावु.. सुन.. तुम धिरेनको गाली मत दे.. क्युकी वोभी मेरी तराह दो तीन सालकाही महेमान हे.. ओर ये बात तुम कीसीको मत कहेना.. खास करके चंदादीदी ओर मोमको.. वरना दोनो टुटही जायेगी.. धिरेनभी हम सबकी जींदगीका अहेम हीसा हे.. हमारी पीछली जींदगीमे उनकाभी कोइना कोइ रोल होगा.. वरना वो हमसे क्यु जुडा होता..?

भावना : (आस्चर्यसे देखती रही) दी..दी.. ये आप क्या केह रही हे..? आपतो सब जान जाती हे.. फीरभी आपने पुनोदीदीकी सादी उनसे क्यु करदी..? आपको पताथा की पुनोदीदी दो तीन सालमे वीधवा होजायेगी.. फीरभी उनकी धिरेनके साथ सादी करदी.. कोइ खास वजह...? आप बहुतही रहस्यभरी बाते कर रही हे.. अगर पुनोदीदी इतनी छोटी उमरमेही विधवा होजायेगी.. तो फीर वो कहा जायेगी..? आपने इनके बारेमे कुछ सोचा हे..?

मंजुला : (थोडी गंभीर होते) भावु.. सुन.. अब मे जो कहेने जा रही हु वो तुम कीसीको नही कहोगी.. तुजे मेरी कसम खानी पडेगी.. तभी मे ये बात तुमको केह पाउगी.. बोल..? मेरी कसम खाती हे..?

भावना : (आस्चर्यसे) हां.. दीदी आपकी कसम.. ये बात सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगी.. कहो..

मंजुला : भावु.. हमारी पुनो बाबाके कहेनेके मुताबीक चल रही हे.. वोभी मेरी सौतन हे..

भावना : (घोर आस्चर्यसे देखते) व्होट..? आपकी सौतन..? मतलब..? दीदी.. फीरसे कहोतो..?

मंजुला : (हसते) हां भावु.. पुनो मेरी सौतन हे.. उसनेभी अपने भाइ देवुसे सादी करली हे.. ओर बाबाने खुद उन दोनोकी सादी करवाइ हे.. याद कर जब हम दोनो होस्पीटलमे डीलीवरीके लीये गइथी.. तब वो दोनो भाइ बहेन वहा साथमेही आते जाते थे.. बस उसी टाइम दोनोने सादी करली..

ओर उसी रात दोनोने अपनी सुहागरातभी मनाइ.. जबतक मे चंदादीदीके वहा थी.. तबतक पुनो ओर देवु मीया बीवीकी तराह साथमे ही सोते थे.. पुनो हर रात देवुका बीस्तर गरम करती रही.. ओर नतीजेके फल स्वरुप आज पुनो प्रेगनेन्ट हे..

भावना : (आस्चर्यसे मुहा खुलाही रखते धीरेसे) ओह माय गोड.. दीदी.. क्या पुनमदीदी प्रेगनेन्ट हे..?

मंजुला : (हसते) हां भावु.. बाबानेही उसे अ‍ैसा करनेको कहा हे.. उनके पीछे उनका अ‍ेक खास मक्सद हे.. जो आगे जाकर सायद तुजेभी पता चल जायेगा.. क्युकी तब तुमभी होगी.. भावु ये बात मेरे सृती ओर रश्मीभाभीके अलावा कीसीको मालुम नही हे.. तुमभी कीसीको मत कहेना.. मेरे बाद मेरी पुनोही मेरे देवुको सम्हाल लेगी..

भावना : दीदी.. अगर पुनोदीदीने जीजुसे सादी करली हे तो फीर उनकी धिरेनके साथभी क्यु सादी करवाइ..? कोइ खास वजह..? मेतो ये सब सुनके चकरा गइ हु.. मेरी तो कुछ समजमे नही आता..

मंजुला : (हसते) हां भावु.. यहा कीसीभी बात बीना वजह नही होती.. सुन.. अ‍ेकतो गांवमे हम सबको लोग राजाकी फेमीली मानते हे.. देवुको आजभी लोग राजा मानते हे.. अगर सबको पता चलेगाकी उनके राजाने अपनी बहेनसे सादी करली हे तो हमारी इजत मीटी मे मील जायेगी.. दुसरी बात.. अगर पुनो बीना सादी बच्चा पैदा करती तो लोग क्या कहेते..? की देवुकी बहेनने कीसीके साथ मुह काला करके बीना सादीके बच्चा पैदा कीया.. तो पुनोकी इजत मीटीमे मील जायेगी.. इसीलीये बाबाने ये रास्ता नीकाला हे..

भावना : (हसते) तो क्या आपके खानदानमे तीन पीढीसे सबने अपनी बहेनसे सादी की हे.. तो गांवके लोगोको पता नही हे..? पुनोदीदीकी सादी सबके सामने ही जीजुसे कर देते..

मंजुला : (हसते) नही.. .. अ‍ेकतो मेरे दादा ससुर ओर ससुरने अ‍ैसा करनेसे लोग हमसे जाराज थे.. सभी अपनी बहेनसे सादी करते आये हे.. तो इस वजहसे कुछ सालो तक गांवके लोगोके बीच कुछ अनबन रही.. ये बहुत लंबी कहानी हे.. उनमे नही जाना.. बाबाको पता हे की धिरेनकी आयु कम हे.. इसीलीये उसने पुनोकी सादी धिरेनके साथ करवादी..

जब दो तीन सालके बाद पुनो विधवा होजायेगी तब वो वापस देवुके पास आजायेगी.. तबतक उनकी बच्चीभी आगइ होगी.. ओर लोगोको ये लगेगाकी बच्ची धिरेनकी हे ओर पुनो विधवा होकर यहा अपने भाइके पास रहेने आगइ हे.. तब हवेलीमे पुनो देवुकी सुहागन बनके पुरी जींदगी इधर रहेगी.. ओर मेरे देवुका हर तराहका खयाल रखेगी.. तो ये हे पुनो धिरेनकी कहानी..

भावना : (हसते) ओह.. गोड.. तो दीदी.. क्या तब चंदामौसी पुनमको अपनी सौतनके रुपमे अ‍ेक्सेप्ट करलेगी..? पुनो दीदी भी तो उनकी बहु हे.. कोइ अपनी बहुको अपनी सौतन बनाती हे..?

मंजुला : भावु बस उन्हीकी चीन्ता हे.. अ‍ेकतो वो धिरेनकी दुसरी सादीसे थोडी परेसान रहेगी.. उपरसे धिरेनके जातेही कुछ महीनोके लीये अपना मानसीक समतुलन खो देगी.. ओर मेरे विजयको धिरेन मानकर उनके साथ सहेरमे जाकर धिरेनके मकानमे रहेने लगेगी.. विजय वही सहेरमे उनके साथ रहेकर पढेगा.. चंदादीदीके ज्यादा लाड प्यारकी वजहसे विजय अ‍ेक अयास ओर बीगडेल ओलाद हो जायेगा.. जब वो बडा होजायेगा.. तो वो कीसीकी नही सुनेगा..

ओर नतीजेके फल स्वरुप अ‍ेक दिन चंदादीदीको भी उनका खामयाजा भुगतना पडेगा.. विजय चंदादीदीके साथही फीजीकल होजायेगा.. तब वो सही तो होजायेगी.. लेकीन कीसीको फरीयाद नही करपायेगी.. विजयको अपने पापाके बीजनेस ओर हमारी प्रोपर्टीमे कोइ रुची नही होगी.. वो अपना अ‍ेक अलगही बीजनेस करेगा.. चंदादीदी ज्यादातर उनके साथही रहेगी.. तो उनको पुनोके बारेमे पताभी नही चलेगा..

भावना : (हसते) हंम.. कीतना अजीब हेनां..? मौसी जीनको अपना बेटा मानती होगी.. उन्हीकी वासनाका सीकार होगी.. दीदी.. तो फीर बेचारी नीलुका क्या होगा..? हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां.. नीलुके बारेमे भी सुन.. नीलुभी उनकी मां की तराह कामी लडकीतो हे.. बादमे बहुतही ठरकी होजायेगी.. अभी उनकी जवानी उफानपे हे.. अगर उस दिन तुम वहा नही गइ होती तो धिरेन पका उनके साथ चुदाइ कर लेता.. वो धिरेनके साथ चुदाइ करनेके लीये बीलकुल तैयार थी.. वो धिरेनके साथ सादी कर लेगी.. लेकीन उनके साथ संतुस्ट नही होगी..

तब वो हमारे लखनके साथ रीलेशनमे आजायेगी.. हमारा लखनभी कुछ कम नही हे.. नीलु चंदा दीदीके साथ सहेरमे ही रहेगी.. क्युकी वोभी तो धिरेनकी बीवी होगी.. चंदादीदी विजयको अपना बेटा मानती होगी तब विजयभी नीलुको भाभी कहेकर बुलाता होगा.. तुमतो जानती हो देवर भाभीका रीस्ता कैसा होता हे.. वो मेरे विजयके साथभी अपनी आगको सांत करती रहेगी..

भावना : सब कीतना अजीब हे.. यहातो रीस्तेके कोइ मायनेही नही रहेगे.. दीदी.. तुम हमारी लताके बारेमे भी कुछ केह रहीथी.. क्या उनके बारेमे भी आपको सब पता हे..? उनके बारेमेभी मुजे कहोनां..

मंजुला : हां भावु.. सुन.. जीस तराह धिरेन दो तीन सालका महेमान हे.. उसी तराह हमारे लखनकी आयुभी कुछ ज्यादा नही हे.. धिरेनके जानेके बाद.. वोभी छे सात सालोके बाद चला जायेगा.. उनका रीजन मे तुमको नही बता सकती.. बस तुम इतना जानलो.. की अनजानेमे ही सही.. लखन तेरा बदला भानुभाइसे ले लेगा.. क्युकी जब भानुभाइ थक जायेगे.. तब रमा लखनके साथ अपना अवैध रीस्ता बनालेगी.. सबसे छुपकर लखन ओर रमा फीजीकल रीलेशनमे होगे.. वो भानुभाइको भी धोखा देगी..

भावना : कमीनी.. मां बेटी दोनोही कीतनी ठरकी हे.. अपने ही नंनदोइसे रीलेशनमे होगी..? लेकीन दीदी.. जब लखनभैया चले जायेगे तबतो हमारी लताभी बेचारी विधवा हो जायेगी.. क्या उन बेचारीका कुछ नही हो सकता..? वो कीतनी अच्छी हे.. मेरी हर बातपे मेरा साथ देती हे..

मंजुला : नही भावु.. तुम उनकी चीन्ता मत करना.. तब सरलाचाचीके कहेनेपे भानुभाइ लताकी सादी देवुसे कर देगे.. ओर लताको देवुसे अ‍ेक बच्चीभी होगी.. लेकीन वो अपाहीज होगी.. बस वोही हमारे स्वामीकी चहीती रानी होगी.. मेरी ननंद ओर मेरी सौतन.. मेरे पतीसे मुजे अ‍ेक बेटी भी होगी.. वोभी अपने भाइसे यानी मेरे बेटेसे सबसे पहेले सादी करेगी.. वो होगी हमारी मोम.. ओर हमारे पीछले जन्मकी मेरी सोनु..

भावना : (आस्चर्यसे) पीछले जन्मकी सोनु..? मतलब..? ये नामतो मेने कही सुना हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां भावु.. तुजे याद हे जब हम सब कोलेजमे थी तब सृतीके पास वो किताबथी.. जो हम अक्सर उनको पढते थे.. (ये केसी अनुभुती) बस.. उनका सोनुका केरेक्टर हे वोही हमारी मोम हे.. ये बात तुम कीसीको नही कहोगी..

भावना : (आस्चर्यसे) अरे हां.. दीदी मुजे सब याद आगया.. वोहीनां जीसने अपने भाइसे पहेले सादी करलीथी.. ओर हर जन्ममे उनकी पहेली बीवी होनेका वचन लीयाथा.. क्या ये हमारी मोम हे..? ओह माय गोड.. हें..हें..हें.. तो फीर इस जन्ममे उसने अपने स्वामीसे क्यु सादी नही की..?

मंजुला : (गंभीर होते) नही भावु.. वो सोनु यानी हमारी मोम इस जन्ममे भी उनकी पहेली बीवी हे.. ये बात मे तुजे नही बता सकती.. तुजे जानकर दुख होगा.. कुछ बाते अ‍ैसी होती हे.. वो हम ना जाने तोही बहेतर होगा..

भावना : (हसते) हां दीदी.. लेकीन मेभी आपकी बहेन हु.. मुजे इतना कमजोर मत समजो.. की अब मे ये सब बातोसे दुखी होउगी.. मुजे इतनातो पता चलही गयाकी हमारी मोमका भी कोइ अवैध रीस्ता हे.. अबतो मुजेभी इस सब रीस्तोसे कोइ फर्क नही पडता.. दीदी.. आज मुजे सब खुलकर बतादो.. मेने आपकी कसम खाइ हे.. ये बातभी मेरे तकही सीमीत रहेगी.. प्लीज.. मेरे ओर मोमके रीलेशनमे कोइ फर्क नही पडेगा..

मंजुला : (कुछ सोचते) भावु.. तो सुनले.. मे तेरी सोतेली बहेन हु.. मे देवुकी बहेन हु.. मेरे पीता मेरे ससुर ही हे.. बस कुछ रीजनकी वजहसे मोमकी सादी मेरे ससुरसे नही होपाइ.. क्युकी उन्होनेभी अपनी बहेनसे सादी करली थी.. ओर मेरी सासनेही मोमको मेरे ससुरसे दुर कर दीयाथा.. तब मे मोमके पेटमे थी.. फीर तुमतो जानती हो.. हम ओरतोकी भी कुछ नीड होती हे.. जीस तराह मेरे ससुरने उनकी बहेनसे सादी करके मोमको छोड दीया.. तो मोमनेभी गुसेमे आकर अपने भाइसे सादी करली..

भावना : (आस्चर्यसे हसते) क्या..? हमारे पापा मोमके भाइ हे..? आइ कान्ट बीलीव.. हें..हें..हें.. दीदी कीतना अजीब हेनां.. सुनके बहुत मजा आता हे.. कैसा लगता होगा.. जब अ‍ेक भाइ बहेन फीजीकल होते होगे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हंम.. सच कहु..? बहुत मजा आता हे.. तेरे जीजुभी मेरा भाइ हे.. हम दोनोके बीच आजभी इतना गहेरा प्यार हे.. मे तुजे बया नही कर सकती.. भावु.. तुजे अ‍ेक बात कहु..? जबभी हम दोनो फीजीकल होते हे तब देवु मुजे बहेन मानकर चोदते हे.. ओर मे भी देवुको अपना भाइ मानकर ही चुदाइ करवाती हु.. तब हम दोनोका जोस कइ गुना बढ जाता हे.. हें..हें..हें..

भावना : (जोरोसे हसते) दीदी.. ये आपके खानदानमे तो ठीक हे.. लेकीन हमारे खानदानमे भी वोही नीकला.. हें..हें..हें.. अब समजी मोम पापाको इतना प्यार क्यु करती हे.. हें..हें..हें.. तो क्या पापाही वो स्वामी आइ मीन वो राजा हे..?

मंजुला : (सीरीयस होते) नही भावु.. वो राजाका अंस.. मेरा देवु हे.. मे देवुके साथ रीलेशनमे आइ उनसे पहेले हमारी मोम देवुके साथ गांधर्व सादी करके रीलेशनमे थी.. वो दोनो मेरी सादीसे पहेलेही कइ बार फीजीकल हो चुके थे.. देवु अक्सर हमारे घर पापाको हमारे बीजनेसके सीलसीलेमे मीलने आतेथे.. तब दोनोकी आंख मील गइ.. ओर मोम देवुके साथ रीलेशनमे आकर मेरे देवुकी पहेली बीवी होगइ..

भावना : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) दीदी.. हमारी मोमभी..?

मंजुला : भावु.. उनमे मोमकी कोइ गलती नही हे.. क्युकी हम सब परीया हे.. मोमने इस जन्ममेभी अपने स्वामीकी पहेली बीवी होनेका फर्ज अदा कीया हे.. ओर तुम मोमके सामने बीलकुल इस बातका जीक्र मत करना.. वरना मोम हमसे सर्मीन्दा होगी.. हमारे स्वामीने अपने पहेले जन्ममे सबको हर जन्ममे पत्नीके या फीर प्रमीकाके रुपमे मीलनेका वादा कीया हे.. तो सबको इधर देवुके साथ ओर बादमे मेरे पोतेके साथ रीलेशनमे आना लाजमी हे.. इसीलीये देवुका कइ ओरते ओर लडकीयोसे रीलेशन हे..

भावना : (हसते) ओह गोड.. मो..म.. आइ कान्ट बीलीव.. हें..हें..हें.. दीदी.. सुनके बीतना अजीब लगता हे.. दीदी अ‍ेक बात कहु..? मुजे मोमके इस रीस्तेके बारेमे सुनकर जरासाभी दुख नही हुआ.. पतां नही क्यु.. लेकीन सुनकर बहुत अच्छा लगा.. सबकी अपनी अपनी लाइफ हे.. जीनमे सबको अपने तरीकेसे जीनेका अधीकार हे.. जीजुकी कीतनी बीवीया ओर गलफ्रेन्ड हे..? हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) भावु.. तेरे जीजुपे बाबाका आशीर्वाद हे.. वो अ‍ेक साथ हम जैसी दस कामी ओरतोको संतुस्ट कर सकते हे.. मेरा पोतातो उनसेभी बढकर होगा.. बस यहाभी उनकी वोही जीम्वेवारी हे.. जो उस हिमाचलके राजाकी यानीकी हमारे स्वामीकी थी.. मे.. चंदामौसी.. पुनो रश्मीभाभी.. हमारी मोम.. सृती.. ओर आगे जाकर वंदना नीशाभाभी चारुभाभी.. लता ओर आखीरमे तुम.. ओर अ‍ेक दो नाम ओरभी हे.. जो तुजे आगे चलकर पता चल जायेगा..

भावना : (हसते) दीदी अब इतना कुछ बता दीयातो वो नाम भी बतादो.. हें..हें..हें.. मे कहा कीसीको कहेने वाली हु.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हंम.. लेकीन ध्यान रखना.. कीसीको कहेना मत.. वो हमारी बुआ.. हमारी मोमकी बेस्ट फ्रेन्ड.. हमारी भुमीका मौसी.. सी इस प्रेगनेन्ट.. बस ये बात तुम अभीके लीये सबसे छुपाके रखना..

भावना : (घोर आस्चर्यसे) भुमी मौसी..? क्या वो अभी प्रेगनेन्ट हे..? आइ कान्ट बीलीव.. कैसे..?

मंजुला : (हसते) भावु.. मत भुलो हम सभी कौन हे.. हम सब यानीकी देवुके संपर्कमे जीतनीभी ओरते आयेगी वो यातो परीया होगी या फीर अप्सराये.. वो सभी अपने स्वामीके लीये इधर आइ हे.. क्युकी हमारे स्वामीने सबको हमेसाके लीये हर जन्ममे मीलनेका वचन दीयाथा.. क्यु तुमने किताब ठीकसे नही पढी..?

भावना : (हसते) हंम.. पढी हे.. मुजे आजभी उन किताबका अ‍ेक अ‍ेक सब्द याद हे.. वो मेरी फेरवरीट किताबो मेसे अ‍ेक हे.. दीदी.. सायद इसीलीये हम जीजुको देखतेही अपना कंट्रोल खो देती हे.. हम सबकुछ भुल जाती हे.. बस मनमे अ‍ेकही खयाल आने लगता हे.. की हम इस आदमीके साथ रीलेशन बनाये..

मंजुला : (हसते) हां भावु.. देवुका आकर्सणही अ‍ैसा हे.. हमारे चंदामौसी वीधवा होनेके बावजुदभी अपने आपको कंट्रोल नही करपाइ.. ओर उनके साथ रीलेशनमे आगइ.. चंदामौसी क्या हमारी मोम ओर भुमी मौसीभी इतने बडे बच्चे होनेके बावजुदभी उनके साथ रीलेशनमे आगइ.. इनको छोडो तेरी सास सरलाचाचीभी बाकात नही हे.. हें..हें..हें.. ओर पता नही.. ओर कीतनी ओरते होगी.. हें..हें..हें..

भावना : (जोरोसे हसते) हां दीदी.. सायद ये बात हमारी लताभी जानती हे.. हें..हें..हें.. उन्होने दोनोको कइ बार चुदाइ करते देखलीया हे.. हें..हें..हें.. इसीलीयेतो घरमे बीन्दास रहेती थी.. दीदी लता ओर लखनभी उनकी सादीसे पहेले कइ बार फीजीकल हो चुके हे.. हमारी लताभी बहुतही कामी लडकी हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां पता हे मुजे.. चल अब जाना नही हे क्या..? आज तुजे सबके बारेमे बता दीया हे.. अब आगे तुजे देखना हे की तुम सब कैसे मेनेज करती हो.. भावु मेरी मान.. तुम भानुभाइको मत छोडना.. भलेही उनके साथ रीलेशन बनाने पडे.. ओर वैसेभी वो तेरा पतीभी तो हे.. अगर तेरे साथ फीजीकल होगे तो इसमे क्या गलत हे..?

भावना : (सरमाते हसते) हंम.. दीदी सायद आप ठीक केह रही हो.. वरना मे उस आदमीसे सभी रीलेशन खत्म कर देना चाहती थी.. लेकीन अब नही.. अबतो उनकी बीवी बनकरभी बहुत कुछ कर सकती हु.. मे उनके साथही रहुगी.. बल्की अबतो उन दोनोके साथ बीस्तरमेभी सोउगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : भावु अगर तु भानुभाइके साथ अच्छी तराह रहेगी.. तो वो तुजे तेरे जीजुसे मीलनेमे भी कोइ अ‍ेतराज नही करेगे.. वोही समजेगेकी तुम तेरे जीजुसे मील रही हो.. समजी कुछ..?

भावना : (हसते) हां दीदी.. आज बहुत कुछ समज गइ.. अबतो आप कहेगी वोही सब होगा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (खडी होते) हंम.. अब चल घरपे चलते हे.. वरना चंदादीदी कहेगीकी दोनो इतनी देरसे कहा गइ हे.. हें..हें..हें..

फीर दोनो हसते हुअ‍े खडी होगइ.. ओर दरवाजा खोलकर बहार आगइ तब रश्मीभी पंचायतकी ओफीसमे जानेके लीये तैयार होगइ थी.. ओर तीनोही घरसे नीकल गइ तब बीच रास्तेमे रश्मी ओफीसकी ओर चली गइ ओर मंजु भावना हवेलीपे आगइ.. तब चंदा विजयके साथ सोफेपे बैठकर खेल रहीथी.. तो नीर्मला भावुकी बच्चीको राते अपनी गोदमे सांत करनेकी कोसीस कर रहीथी.. जैसेही दोनोको देखा..

नीर्मला : (हसते) लोजी आगइ.. भावु येले तेरी बच्चीको सम्हाल.. उसे भुख लगी होगी.. जरा उनका पेट भरवादे.. कबसे रो रही हे.. इतनी देर दोनो वहा क्या कर रहीथी..?

मंजुला : (हसते) मोम.. वो रश्मीभाभीके पतीकी हालत देखने गइथी.. वोतो खाताही नहीहे.. मुजे नही लगता अब वो ज्यादा दीन नीकालेगे..

नीर्मला : (हसते) चलो अच्छा हुआ.. अबतो वो चला जायेतो बेचारी रश्मीका छुटकारा होजाये.. हें..हें..हें..

भावना : (जोरोसे हसते) मोम.. आपभी वोही केह रही हे..? अभी रश्मीभाभी भी वोही केह रहीथी..

नीर्मला : (हसते) बेटी वो बहुतही कमीना इन्शान था.. ना जाने कीतनी ओरते ओर लडकीयोकी जींदगीसे खीलवाड कर चुका हे.. तभीतो भगवानने उनकी सजा देदी हे.. अब पडाहे खटीया पकडके..

अ‍ैसेही बाते करते भावना वही अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी.. तब कीचनमे दया ओर चंपा आपसमे बाते करते लंचकी तैयारीया करने लगी.. तो रजीया सभी कमरोकी सफाइ करती रही.. तो दुसरी ओर आज वंदनाभी पंचायतकी ओफीसमे चली गइ ओर अपनी स्कुलके लीये बच्चोके नये अ‍ेडमीसनकी तैयारीया करने लगी.. रमेशतो सुबहसेही पंचायतके कामसे घरसे नीकल जाता था.. ओर गांव गांव जाते सभी सरपंचोसे मुलाकात करके उनको स्कुलके लीये बात करताथा ताकी लोग अपने बच्चेको वहा पढनेके लीये भेज सके..

तब चारुभी कामसे फ्रि होगइ तो वोभी नीशाके घर चली गइ.. तब सुधिर अपनी क्लीनीकपे जा चुकाथा.. ओर वहा दोनो मीलकर देवायतको मीलनेके लीये आगेकी प्लानींगकी बाते करने लगी.. तो इधर खेतोपे भानुभी सभी जगाह घुमते अपने कामका जायजा लेकर राजीवके पास जाकर बैठ गया.. तब कुछही देरमे मालती चाइ लेकर आगइ ओर पहेले राजीव भानु ओर रामुकाकाको देकर गोडाउनकी ओफीसमे चली गइ..

मालती : (हसते चाइ देते) मालीक आप इधर अकेले ही बैठे हो.. लीजीये चाइ पीजीये उन सबको बहार देकर ही आइ हु..

देवायत : (चाइ लेते) हां मालती.. बोल क्या कहेना चाहती थी तुम..

मालती : (सरमाते हसते) मालीक.. आजकल आप बहुत बीजी रहेते हो.. तो आपको मुजे मीलनेका टाइमही नही मीलता.. कीतने दिन होगये हम नही मीले.. कुछ टाइम नीकालीयेना.. हमे मीले बहुत दीन होगये हे.. आपको मीलनेका मेरा बहुत मन कर रहा हे.. आपकी आदत जो लग गइ हे..

देवायत : (हसते चाइ पीते) मालती.. बस दो तीन दिन ठहेरजा.. इधर मेरे ससुर आये हे.. दो दीनमे चले जायेगे.. तबतक तुमभी अपने गांव जाकर वापस आजाओगी.. तब तेरी सारी सीकायत दुर कर दुगा.. ओर वो जमीलाका क्या केह रहीथी..?

मालती : (सरमाते) मालीक.. वो.. वो आप अ‍ेक बार गांव जाकर जमीलासे मीललो.. वो आपसे प्रेगनेन्ट होगइ हे.. बेचारी बहुत मायुस लग रही थी.. आपकी अ‍ेक आस लेके बैठी हेकी कभी तो आप उसे मीलने आओगे..

देवायत : (हसते) हां.. वो जो चाहतीथी वो सब होगया.. सोचता हु.. अबतो तुम तीनोही इधर आ गये हो.. तो जमीलाकोही कबीलेकी मुख्या यानीकी रानी बनादु.. उनके बापुभी मुख्या थे.. तो सबलोग उनकी बात मानेगे.. बस कुछ कामसे फ्रि होजाउ तब मील लुगा.. उसे कहेना कोइ प्रोबलेम होतो वो सहेर जाकर सृतीको दीखादे.. तुमतो सृतीको जानती हो..

मालती :(हसते) हां अभी अभी आपकी उनके साथ सगाइ हुइ हे.. मे जमीलाको केह दुगी.. ओर हां.. वो रीटाभी आपको मीलना चाहती हे.. लगता हे उनका छोटुसे मन भर गया हे.. अ‍ेक बार उसेभी मीललो.. ताकी उनकोभी पता चले.. हें..हें..हें.. कमीनी मेरे पीछेही पड गइ हे..की मुजे मालीकसे मीलवादो..

देवायत : (हसते) हंम.. चल ठीक हे.. उसेभी मील लुगा.. ओर हां..उस मजदुरकी लडकीको कहेना.. वो बच्चा ना ठहेरनेकी दवाइ लेले.. ताकी उसे बच्चा ना हो.. उस दिन वो लखनके साथ वो ट्युबवेलकी रुममे थी..

मालती : (सरमाते हसते) जी.. मे वो आइपीलकी टेबलेट रखती हु.. हमारे छोटे मालीक बहुतही सौकीन हे.. वो मा बेटी दोनोही हमारे लखनभैयाके पीछे पागल हे हें..हें..हें.. हमारे लखनभैया ओर हमारे भानुभाइ दोनो भी रीटाके पीछेभी पडे हे.. लेकीन अब वो दोनोको ज्यादा भाव नही दे रही.. वो सीर्फ आपकोही मीलना चाहती हे.. पता नही आपने उनपे क्या जादु करदीया हे.. हें..हें..हें..

फीर देवायत चाइ पीलेता हे तब मालती उनके होंठ चुमते हसती हुइ वहासे चली जाती हे.. ओर देवायत बहार आकर सबके साथ बैठ जाता हे.. ओर चारो गपे लगाते बाते करते हे.. तब कीसीको नही पताथा की घरपे राघव तडप रहा हे.. उनको आज बहुत तकलीफ हो रहीथी.. वो हील नही सकताथा.. फीरभी पता नही आज उनमे कहासे इतनी ताकात आगइ की वो इधर उधर होते करवटे बदलते दर्दके मारे तडपता रहा..

तो अ‍ैसेही दोपहर होगइ तब पुनम लखन चारो अपनी मंजीलपे पहोंच गये.. सभी कपलको अ‍ेक अ‍ेक रुम देदीया.. ओर सबको फ्रेस होकर नीचे लंचके लीये बोल दीया.. ओर सामको साइटसीन देखनेको भी बोल दीया.. तो सब फ्रेस होने अपने सामानके साथ रुममे घुस गये.. तब ज्यादातर कपल रुममे घुसतेही दरवाजा बंध करके अपनी बीवीओपे टुट पडे.. तो जाहीरसी बात हे इसमे लखन ओर धिरेनभी बाकात नही रहे..

लखनतो रुममे जातेही अपने सामानको रखते जटसे दरवाजा बंध करलेता हे ओर लताको पकडने उनकी ओर दोडता हे.. तब लता समज गइ.. ओर हसते हुअ‍े लखनसे बचनेके लीये.. बेडके आसपास चकर लगाते लखनसे बचनेकी कोसीस करने लगी.. तो लखन बेडके उपर चडके लताको दबोच लेता हे.. ओर बेडपे पटकके उनके उपर चड जाता हे.. तब लता जोरोसे हसते लखनसे छुटनेकी कोसीस करने लगती हे..

तो दुसरी ओर बाजुके रुममे पुनम कुछ समजे उनसे पहेलेही धिरेन उनको अपनी गोदमे उठालेता हे तब पुनमभी समज गइ ओर जोरोसे हसते धिरेनकी गोदसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. ओर धिरेन उनको बेडकी ओर लेगया.. तब कुछही देरके बाद पुनम ओर लता दोनोही अपने पतीके नीचे लेटी हुइ थी.. लखन ओ धिरेनने दोनोको नंगी करके खुदभी नंगे हो गये थे.... ओर दोनोही अपनी बीवीओके उपर थे..





दोनोही अपनी बीवीओके बुब्स मसलते उनके होठोपे ओर गलेमे मुह डालके चुम रहेथे ओर उतेजीत कर रहेथे तब कुछही देरमे पुनम ओर लता दोनोही मदहोस हो चुकीथी.. ओर अपने पतीके लंडको अपनी चुतमे लेनेके लीये मचल रहीथी.. तब आजु बाजुके कइ रुममे नये कपल अपनी बीवीओको चोद रहेथे.. तब कुछही देरके बाद पुनम ओर लताभी अपने पतीके साथ सीसकारीया करते चुदाइमे मसगुल हो चुकीथी..





लखन बडेही जोसके साथ लताकी चुदाइ कर रहाथा तब लताभी अपनी कमर उछाल उछालके लखनको चुदाइमे साथ दे रहीथी.. तो दुसरी ओर धिरेनभी पुनमके बुब्स मसलते उनकी नीपलको चुमते पुनमको चोद रहाथा तब कुछही देरमे वो जोरोसे पुनमको चोदने लगा तब पुनमने धिरेनको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर धिरेन जडते हुअ‍े पुनमके सीनेपे ढेर होगया.. तब अ‍ेक बार फीर पुनम प्यासी रेह गइ..

धिरेन : (सरर्मीन्दा होते) पुनो.. सोरी.. तुजे देखतेही पानी छोडने लगता हे.. तो जल्दी होजाता हे..

पुनम : (मुस्कुराते होंठ चुमते) जानु.. कोइ बात नही.. धीरे धीरे करते सब ठीक होजायेगा.. बस आपको मजा आना चाहीये.. क्या आपको मजा आता हेकी नही..? मुजसेतो कोइ गलती नही हुइ..?

धिरेन : नही पुनो.. तुमसे कभी कोइ गलती नही हुइ.. मेरे दोस्तभी कहेते थेकी सुरुके दिनमे जल्दी होजाता हे.. ओर बादमे सब ठीक होजाता हे.. तो तुम चीन्ता मत करना.. हम छे सात बार करगे तब सब सही होजायेगा..

पुनम : (हसते) हंम.. चलो ठीक हे.. देखो आपने मेरी पुरी चुतको भरदी हे.. अब नहाने नही जाना..? सब लंचके लीये नीचे चले गये होगे..

धिरेन : (उपरसे हटते मुस्कुराते) पुनो चलोना हम साथमे नहाने जाते हे.. तो टाइम नही बीगडेगा..

पुनम : (हसते) नही..आप वहाभी सरासरत करोगे.. मे बादमे नहा लुगी.. आप नहालो.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते उसे गोदमे उठाते) अरे चलोतो सही.. मे कोइ सरारत नही करुगा.. अबतो हमे यही करना हे.. देखना आज रात कमसे कम तीन बार करुगा.. अभीसे केह देता हु.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते) अरे बाबा पहेले राततो होनेदो.. आजभी पुरी रात जागे हे.. आपने मुजे कहा सोने दीया.. इधर उधर हाथ डालकर मुजे परेसान करते रहे.. हें..हें..हें..

अ‍ेसी बाते करते दोनो साथमे नहाने चले गये.. तब पुनमको मनमे ये सब नाटक करते हसी आ रहीथी.. ओर उसने पुरे हनीमुनमे अ‍ैसी मजा लेनेका फैसला करलीया.. उसे धिरेनका लंड अपनी चुतमे कोइ खास फील नही हो रहाथा.. फीरभी उसे ये नाटक जारी रखना था.. उसे मनही मन नीलमके उपर तरस आने लगी.. तो दुसरी ओर लखन ओर लता दोनोही साथमे जड गये तब दोनोही नंगे साथमे नहाने चले गये..

लता : (सरमाते हसते) लखन अभी कोइ सरारत नही.. बहुत भुख लगी हे.. फीर दो पहोरकोभी सोने देना.. पुरी रात आपने मुजे सोने नही दीया.. वरना मेरी तबीयत खराब होजायेगी तो आपकाही नुकसान होगा.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) हां सोजाना.. फीरतो रातभर हमे जागना ही हे.. हें..हें..हें..

लता : (हसते) नही.. देखना आज कोइ गोली बोली नही खाना.. चाहोतो कल खा सकते हो.. लेकीन आज नही.. हम सीर्फ दो बार करके सो जायेगे.. अबतो आप पके खीलाडी हो गये हो.. कहासे सीखा ये सब..? कही मेरी सौतन बौतनतो नही..? अगर हेतो अभी बतादो.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) फीर हालतो नही लेकीन आगेका पता नही.. मे कोइ गेरेन्टी नही दुगा.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) कीतने कमीने हो आप.. अभी मुजेतो ठीकसे चोदलो.. फीर सौतनकी बात करना..

लखन : (हसते) अच्छा..? तो फीर देख आज तेरी क्या हालत करता हु.. मुजसे भागती हेकी नही..?

लता : (कामुक नजरोसे हसते) हां हां.. देख लुगी.. आप क्या करते हे.. लेकीन गोली खाकर नही.. अ‍ैसेही चोदलेना.. मे भी देखती हु कीतना चोद पाते हो.. हें..हें..हें..

अ‍ैसेही चुदाइभरी बाते करते सभी नहाके तैयार होजाते हे ओर चारो मीलकर लंचके लीये नीचे डाइनींग होलमे आजाते हे.. ओर वहा लंच करने लगते हे.. तो दुसरी ओर राजीव ओर देवायतभी घरपे आगये.. तो देवायत भानुकोभी जबरदस्तीसे अपने साथ खानेपे ले आया ओर सब खाना खाने बैठ गये.. तब आज भावनाभी भानुके सामने बैठीथी.. ओर दोनोकी आंख मील गइ तब भावना सरमाकर मुस्कुराने लगी..

जीसे देखतेही भानु खुस होगया ओर वोभी भावनाके सामने देखकर मुस्कुराने लगा.. जीसे देखकर राजीव ओर नीर्मलाभी खुस होगये.. ओर सब लोग लंच करने लगे.. तब दुसरी ओर रश्मी थोडी देरसे अपना काम खतम करके घर आगइ.. ओर फैस होकर सीधी कीचनमे चली गइ ओर खाना बनाने लगी.. जब सब्जी पक रहीथी तब वो राघवको देखने उनके रुममे चली गइ.. तो उसे देखतेही वो गभरा गइ..

क्युकी राघव अ‍ेक तरफ मुह करके सांत होकर पडाथा.. उनकी आंख पांव हाथ कुछभी नही हील रहेथे.. उनके मुहसे जाग नीकला हुआथा.. ओर आंख फटी की फटी रहे गइ थी.. तो रश्मी उसे इस हालतमे देखके थोडी गभरा गइ.. ओर जटसे उनके पास जाकर उसे हीलाने लगी.. तो राघव जैसे रश्मी हीला रहीथी हीलता रहा.. लेकीन कोइ रीअ‍ेक्शन नही दे रहाथा.. तब रश्मी बहुत गभरा गइ ओर बहार दोडके देवायतको फोन करने लगी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२३

क्युकी राघव अ‍ेक तरफ मुह करके सांत होकर पडाथा.. उनकी आंख पांव हाथ कुछभी नही हील रहेथे.. उनके मुहसे जाग नीकला हुआथा.. ओर आंख फटी की फटी रहे गइ थी.. तो रश्मी उसे इस हालतमे देखके थोडी गभरा गइ.. ओर जटसे उनके पास जाकर उसे हीलाने लगी.. तो राघव जैसे रश्मी हीला रहीथी हीलता रहा.. लेकीन कोइ रीअ‍ेक्शन नही दे रहाथा.. तब रश्मी बहुत गभरा गइ ओर बहार दोडके देवायतको फोन करने लगी....अब आगे

देवायत : (फोनकी रींग बजतेही खाना खाते फोन उठाता हे) हेलो.. हां रश्मीभाभी.. बोलो.. आइअ‍े लंच करने.. हें..हें..हें..

रश्मी : (थोडा गभराते जटसे) देवु.. प्लीज अगर खाना खा रहे हे तो खाकर जल्दीसे घर आजाओ.. वो राघव हील नही रहा.. उनके मुहसे जाग नीकल रहे हे.. ओर आंखभी नही हीलाता.. लगता हे कुछ हुआ हे..

देवायत : (जटसे) भाभी मे अभी आ रहा हु.. आप फोन करके सुधीरको बुला लीजीये.. मे रमेशको फोन करदेता हु.. आप गभराना नही.. मे मंजुको लेकर अभी आता हु..

मंजुला : (देवायतने फोन काट दीया तब) देवु.. क्या हुआ..? इतने गभराये हुअ‍े क्यु लगते हो..? कुछ हुआ हे क्या..?

देवायत : (फटाफट खाना खाते) मंजु तुम फटाफट खाना खालो.. हमे रश्मीभाभीके घर जाना होगा.. सायद राघव गुजर चुका हे.. भानु तुम भी साथ चलना.. सायद हमे उनके लीये कुछ तैयारीया करनी पडे..

भानु : भाइ आप फीकर मत करो.. आरामसे खालो.. मेने खाना खालीया हे मे जाकर देखता हु.. फीर तुम ओर भाभी आजाना..

कहेते राघव पानी पीकर अपना हाथ मुह धोकर फटाफट अपनी कार लेकर चला गया.. तबतक मंजु ओर देवायतनेभी जल्दी खाना खालीया.. ओर राजीव नीर्मलाको घरपेही रहेनेकी सुचना देकर ओर चंदाको बादमे फोनकरनेके बाद आनेका कहेते दोनो रश्मीके चले गये.. तो वहा सुधीर ओर रमेश पहेले ही पहोंच चुके थे.. जैसेही देवायत घरके अंदर गया.. तब रमेश भानु सुधीर ओर रश्मी होलमे खडे थे.. तो सुधीर उनके पास आगया..

सुधीर : (धीरेसे) भाइ.. वो राघव नही रहा.. तो.. अब हम क्या करे..? उनके घरवालोको खबर करदे..?

रश्मी : (धीरेसे) देवरजी.. उनके घरवालोमे अब हे ही कौन..? मेरे सास ससुरतो कबसे गुजर चुके थे.. ओर इनके काका काकीभी हमारे पासमे रहेते थे वोभी चले गये.. बस मेरे काका ससुरकी अ‍ेकही लडकी हे.. इनकी कजीन बहेन .. सीर्फ उनको फोन करना हे.. मे अभी उसे फोन कर देती हु.. बाकी कीसीको फोन नही करना..

देवायत : हंम.. भानु.. तुम ओर रमेश जाकर अर्थीका सामान लेकर आओ.. जबतक हम तैयारी करेगे तबतक उनकी बहेन भी आजायेगी.. ओर सुधीर तुम इनका डेड सर्टीफीकेट बनादो.. ताकी भविस्यमे कोइ प्रोबलेम ना हो.. इनकी बीमारीकातो तुजे पताही हे..

मंजुला : रश्मीभाभी.. आप मेरे साथ आइअ‍े.. हम आपके रुममे चलते हे.. वहीसे सबको फोन कर देगे.. चारुभाभी नीशाभाभी ओर हमारे पहेचान वाली सभी ओरतोको भी फोन करके सुचीत करना हे.. मे चंदादीदीको बुला लेती हु..

रमेश : (भानुके साथ बहार जाते) मंजुभाभी.. हमने चारु ओर नीशाभाभी दोनोको फोन करदीया हे.. अभी आती ही होगी..

कहेते रमेश भानुके साथ चला गया.. तब अंदर जातेही रश्मीने उनकी ननंद ओर अपनी पुरानी बचपनकी खास सहेलीको फोन करदीया की तुम्हारा भाइ गुजर गया हे.. तब वो फोनपे ही रोने लगी.. ओर रश्मीकी बार बार माफी मांगने लगी.. तब रश्मीने उसे अपने भाइके आखरी दर्शन करनेके लीये घरपे आनेके लीये केह दीया.. तो वो अभी आधे घंटेमे पहोंच जायेगी.. कहेकर फोन काट दीया.. तब मंजु ओर रश्मी उनके बारेमे आपसमे बात करने लगी..

मंजुला : भाभी.. क्या ये वोही आपकी सहेली हेना जीनके साथ राघवके नाजायज रीस्ता था.. उनके खानदानमे अभी कोइ नही हे..?

रश्मी : भाभी.. मेरे सास ससुर तो गुजर गये हे.. राघव अकेलाही उनकी संतान था.. ओर ये टीना राघवकी कजीन बहेन हे.. उनके चाचाकी लडकी.. अबतो उनके चाचा चाची भी नही रहे.. इन दोनोके रीस्तोकी वजहसे दोनो फेमीलीमे जगडा हो गयाथा.. इनके चाचा हमारे घरके पासही रहेते थे.. इसीलीये तो टीना मेरी फ्रेन्ट थी.. ओर राघव वहा उनके चाचाको मीलने कइ बार आता जाता रहेता था..

मंजुला : अच्छा इसीलीये आप राघवके संपर्कमे आइ होगी..

रश्मी : हां भाभी.. उनके चाचानेही मेरे पीताजीसे बातकी.. ओर हमारा रीस्ता तैय होगया तब मुजे क्या पता की राघव वहा उनकी बहेनको मीलने आता हे.. भाभी.. राघवने उसे दो बार प्रेगनेन्ट भी करदीया था.. ओर उनके घरवालोने टीनाका अ‍ेबोर्सन करवा दीया.. तब पता चलाकी ये सब करतुत राघवकी हे..

तबतकतो मेरी सादीभी राघवसे होगइ थी.. ओर मेनेभी टीनासे कोइ रीस्ता नही रखा.. फीरतो सुनाथाकी उनके मा बापने टीनाकी सादी कही ओर करदी थी.. लेकीन कुछही दिनोमे अपने पतीको डीवोर्स देकर वापस घरपे आगइ.. फीर पता नही उनका क्या हुआ.. बस इतने सालोके बाद आज टीनाको फोन कीया..

मंजुला : (हसते) हंम.. इसका मतलब अब राघवके रीस्तेदारोमे सीर्फ उनकी ये बहेन ही हे.. क्या डीवार्सके बादभी उनका रीलेशन राघवसे था..?

रश्मी : पता नही भाभी.. सायद होगा.. क्युकी राघव कइ बार हमारे गांव ओर सहेरमे जाता था.. सायद टीनाको मीलनेही जाता होगा.. वो सहेर जातातो दो दो तीन तीन दिन तक नही आताथा.. अबतो इनके बारेमे सब टीनाही बता सकती हे..

तभी चारुभाभी ओर नीशा भी आगइ.. तो अंदर आतेही नीशा देवायतकी ओर देखकर सरमाते मुस्कुराने लगी.. फीर दोनो रश्मी मंजुके पास चली गइ.. देवायत ओर सुधीर वही होलमे बैठकर गांवमे सबको फोन करने लगे.. तब कुछही देरमे धीरे धीरे करते गांवके लोग राघवके घरपे अ‍ेकठे होने लगे.. सबलोग देवायतके कहेनेपे आने लगे.. तो आधे घंटेके बाद रमेश ओर भानुभी अर्थीका सामान लेकर आगये..

फीर रमेश ओर गांवके कुछ लोग राघवकी अर्थी तैयार करने लगे.. तबतक गांवकी बहुतसी ओरतेभी आ चुकी थी.. रश्मीका पुरा कमरा ओरतोसे भरचुकाथा.. तभी अ‍ेक कार आकर रुकती हे.. तो उनमेसे अ‍ेक बहुतही खुबसुरत ओरत सफेद सारीमे अंदर आगइ.. ओर अंदर घरमे आतेही जोरोसे फुट फुटकर रोने लगी.. तब मंजु चारु ओर रश्मीभाभी बहार आगइ.. ओर वो ओरत रश्मीको देखतेही उनसे लीपट गइ ओर उनके कंधेपे सर रखके फुटफुटके रोने लगी.. तभी..





रश्मी : टीना.. अब बसभी कर.. कीतना रोयेगी.. भगवानके पास हमारी थोडीना चलती हे.. मेभी तो उनकी बीवी हु.. चल अंदर उनका मुह देखले..

कहेते तीनो टीनाको लेकर राघवके रुममे चली गइ.. तो वहा सुधीरने राघवको सहीसे सुलाके उनके उपर सफेद चदर डाली थी.. तब टीना उनके मुहके पास नीचे बैठ गइ.. तो रमेशने धीरेसे मुखसे चदर हटाइ.. तब टीना राघवके चहेरेको सहेलाते जोरोसे राने लगी.. ओर अपने दोनो हाथ जमीनपे पटकते हाथकी चुडीया तोडने लगी.. तब रश्मी मंजु ओर चारुभाभी तीनोही अ‍ेक दुसरेके सामने देखते ही रेह गइ..

फीर तीनो टीनाको लेकर अपने रुममे लेकर चली गइ.. तब रमशे ओर गांवके लोग.. अर्थीको तैयार करते बांधने लगे.. तब कुछही देरमे सब कंपलीट होगया.. तो राघवको स्मसानमे लेजानेकी तैयारीया करने लगे.. तब सबने आखरी बार रश्मी ओर टीनाको राघवके मुखको दीखाया.. ओर सब गांवके लोग राघवकी अर्थी लेकर स्मसानकी ओर नीकल गये.. तब टीना अ‍ेक बार फीरसे बहुत रोइ.. ओर सभी लेडीस उनको लेकर अंदर आगइ..

तीन घंटेके बाद सभी लोग वापस आगये.. ओर अपने अपने घरकी ओर जाने लगे.. तब रमेश सुधीरभी अपनी बीवीओके साथ नहाने अपने घर चले गये.. तो मंजुनेभी रश्मी ओर टीनाको नहानेके लीये केह दीया ओर वो नहाके अभी वापस आयेगी.. कहेते चंदा ओर देवायतको लेकर अपनी हवेलीकी ओर नीकल गइ.. तब रश्मी ओर टीनाने बारी बारी अपने रुमके बाथरुममे जाकर स्नान करलीया.. ओर दोनो कंपलीट होकर रुममे ही बैठ गइ.. तब रश्मीने कहा..

रश्मी : टीना.. उनको ब्रेइन स्ट्रोक आ गयाथा.. पीछले पांच छे महीने होगये.. वो बेडपेही पडे थे.. सहेरमे उनका बहुत इलाज करवाया लेकीन कोइ फायदा नही हुआ..

टीना : (रश्मीका हाथ पकडते) रश्मी.. क्या मुजे इतनी पराइ करदीकी मुजे अ‍ेक बार फोन तक नही कीया..? हंम..? कमसे कम हमारी दोस्तीके खातीर तो कीया होता..? क्या तुजे मुजसे इतनी नफरत होगइ थी..?

रश्मी : टीना.. अब गडे मुर्दे उखाडनेका कोइ फायदा नही.. जीनकी वजहसे हम दोनोका मन मोटाव हो गयाथा वोतो चला गया.. अब इस बातका कोइ मायना नही.. भुलजा तुम सब.. मेभी भुल चुकी हु..

टीना : मे मानती हु की मे तेरी गुनहगार हु.. तेरातो सीर्फ पती था.. लेकीन मेरातो अ‍ेक लौता भाइभी था ओर मेरा सबकुछ था.. मेरा बोय फ्रेन्ट कहो.. मेरे बच्चेका बाप कहो.. मेरा सब कुछ मतलब सबकुछ था वो.. बस अ‍ेक बार मुजे फोन करके केह देती.. हम राघवका बडेसे बडी होस्पीटलमे इलाज करवाते.. तुजे जरासाभी खर्चा नही करने देती..

रश्मी : वो मेरे पास जो ओरत बैठीथीनां वोही यहाकी ठकुराइन हे.. यहाकी रानी.. उनके हसबन्ड यहाके राजा हे.. वोही राघवको सहेरमे बडी होस्पीटलमे ले गयेथे.. राधवके अच्छे दोस्त हे.. उन्होनेही राघवको यहाका सरपंच बनाया हे.. तो राघवाका इलाजभी उसीने करवाया.. सब खर्चा उन्होने ही दीया हे.. तो पैसोकीतो कोइ प्रोबलेम ही नही थी..

टीना : (मुस्कुराते) रश्मी.. इनके बारेमे तो मे ज्यादा नही जानती.. लेकीन मेने इनके बारेमे सुना हे.. इनके बारेमे ये बात राघवने ही मुजे कही थी.. जब अ‍ेक बार पुरी रात हम दोनो साथमे थे.. क्युकी राघव मेराभी पती था.. हां रश्मी..

रश्मी : (आस्चर्यसे) क्या..? तुम दोनोने सादी करलीथी..?

टीना : हां रश्मी.. जब मम्मी पापा दोनोही गुजर गये तब मे अकेली रेह गइ.. तब हम दोनोने सादी करली.. फीर मे उन मकानको बेचकर दुसरी जगाहपे सहेरमे मकान लेकर रहेने लगी.. जहा हमे कोइ पहेचानता ना हो.. राघव मुजे हप्तेमे दो तीन दीन मीलने आजाता..

ओर रातमेभी वही ठहेरता.. मे उनकी बीवी बनकर ही वहा रहेने लगी.. ओर राघवने मुजे फीरसे अ‍ेक बार प्रगनेन्ट करदीया.. ओर इस बार मुजे उनसे अ‍ेक बच्चीभी हुइ.. लेकीन वो ज्यादा दिन नही रेह पाइ.. अ‍ेक बीमारीने उनकी जान लेली.. उनकोभी चार साल होगये..

रश्मी : तो क्या हुआ.. उनसे दुबारा बच्चा पैदा करलेती.. तुजेतो सादीसे पहेलेभी दो बार प्रेगनेन्ट करचुका हे..

टीना : हां रश्मी.. लेकीन मेरे घरवालोने जबरदस्तीसे वो बच्चा गीरवा दीया था.. वरना मे पका उसे पैदा करती.. मुजे कीसीका डर नही था.. लेकीन मेरी मां ने मुजे सुसाइड करनेकी धमकी देदी.. ओर मुजे मजबुरन बच्चा गीरवाना पडा.. क्युकी मेभी राघवसे बहुत प्यार करती थी.. मुजे कोइ फर्क नही पडाकी वो मेरा भाइ हे.. मेरी बची मर गइ.. फीर राघव मुजे कभी बच्चा नही देपाया.. पता नही क्यु.. वो ज्यादा सराब पीने लगाथा.. सायद इसीलीये..

रश्मी : (जुठ बोलते) टीना.. कोसीसतो हमनेभी बहुत की.. लेकीन वो बीमार पडे उनसे अ‍ेक महिने पहेले राघवने कोइ कामोतेजक की गोली खाकर मुजे पुरी रात प्यार कीया.. सायद उसी दीन उसने मुजे पेटसे करदीया.. टीना.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट.. अभी मेरे पेटमे उनका बच्चा पल रहा हे..

टीना : (चहेरेपे खुसी लाते) क्या..? रश्मी तुम प्रेगनेन्ट हो..? रश्मी.. आइ अ‍ेक हेपी.. ये तुमने मुजे आज बहुत बडी खुश खबर सुनाइ.. की मेरे.. आइ मीन.. हमारे राघवकी नीशानी तेरे पेटमे पल रही हे..

रश्मी : हां टीना.. मे अभी प्रेगनेन्ट हु.. चोथा महिना चल रहा हे..

टीना : रश्मी.. क्या हम फीरसे वोही दोस्ती कायम नही कर सकते..? मे तुमसे हाथ जोडके माफी मांगती हु..

रश्मी : (हाथ पकडते) नही टीना तु माफी मत मांग.. मे तुमको क्या.. कीसीको दोस नही देती.. क्युकी मेरी कीस्मतमेही ये सब लीखा हेतो हम कीसीको क्या दोस दे..? हम दोस्ततो हे ही.. अबतो दोस्तके साथ हम अ‍ेक दुसरेकी सौतनभी हे..

टीना : (हसते) थेन्कस रश्मी.. अब हम दोनोही अकेली हे.. रश्मी तुम मेरे साथ रहेने आजा.. अब सहेरमे हमारा बहुत बडा मकान हे.. ओर राघव ओर पीताजीकी इतनी प्रोपर्टी हेकी हम दोनो आरामसे अपना गुजारा कर सकती हे.. हम हमारे राघवके बच्चेको अच्छेसे पालेगे.. मे तुजे मेरी आधी प्रोपर्टी ओर पैसे देनेके लीये तैयार हु.. कहोतो तेरे नामभी करदुगी..

रश्मी : (हसते) नही टीना.. मुजे कुछभी नही चाहीये.. मकानतो येभी हे.. ओर वहा गांवमे सुकुनकी जींदगी जी रही हु.. वो यहाके राजा हमारे ठाकुर साहबने ही मुजे पंचायतमे नोकरी दीलवा दी हे.. उसीमे मेरा ओर मेरे बच्चेका गुजारा अच्छेसे होजायेगा.. उल्टा तुम यहा आजा.. हम दोनो साथ रहेगी.. अब मुजे तुमसे कोइ गीला सीकवा नही हे..

टीना : (हसते) थेन्क्स रश्मी.. मुजे अच्छा लगा तुमने मुजे माफ करदीया.. लेकीन मे यहा नही आ सकती.. क्युकी मेरा सहेरमे बुटीकका बीजनेस हे.. वो बहुत अच्छा चल रहा हे.. मे मेरी खुदकी कारसे आइ हु.. रश्मी भगवानने मुजे सबकुछ दीया हे.. बस मेरे प्यारको मुजसे छीन लीया.. यही अफसोस हे.. अगर तुजे कीसीभी चीजकी जरुरत होतो मुजे अपनी छोटी बहेन मानके मांग लेना.. मे खुसी खुसी दे दुगी..

दोनोही बाते करते बैठीथी तब कुछही देरमे देवायत मंजु ओर रमेश चारुभाभी दोनोका खाना लेकर आगये.. ओर मंजुने दोनोको जबरदस्तीसे खीलाया.. फीर रश्मीने टीनाका परीचय मंजु ओर चारुभाभीसे अपनी सौतनके रुपमे करवाया.. ओर खाना खाते रश्मीने सभी बाते मंजु ओर चारुको बतादी.. तो मंजु ओर चारुभी सुनके खुस होगइ ओर हसने लगी.. तबतक देवायत ओर रमेश होलमे बाते करते बेठे रहे..

तब चारो लेडीस भी होलमे आगइ.. ओर रश्मीने देवायत ओर रमेशकाभी परीचय टीनासे करवाया तब टीना देवायतको देखती ही रेह गइ.. उनको उमीद नहीथी.. की कोइ ठाकुर होतेभी इतना सरल हो सकता हे.. फीर सबने पांचवे दिन राघवके लीये सांती हवन करनेका तैय करलीया.. तभी टीनाने अपने पर्ससे पचास हजार नीकालके रश्मीको देदीये.. तो रश्मीने उसे लेनेसे इन्कार करदीया.. तो देवायतने कहा..

देवायत : रहेने दीजीये टीनाजी.. वो हम सब देख लेगे.. ये हमारे गांवके सरपंच थे.. तो हमाराभी फर्ज बनता हे.. आप रश्मीभाभीकी भी चीन्ता मत करना.. हम उनका पुरा खयाल रखेगे..

टीना : (इमोस्नल होते) देवायतजी.. मेने आपके बारेमे राघवसे बहुत सुनाथा लेकीन गलत सुनाथा.. आप लोग इतने सरल हे मुजेतो पताही नही था.. रश्मी मेरी दोस्तही नही मेरी बहेनभी हे.. मे ये पैसे उनको राघवके लीये नही मेरे लीये दे रही हु.. ताकी हम दोनोको तसली मीलेकी हमने राघवके लीये कुछ नही कीया.. प्लीज इसे कहीये ये पैसे लेले..

रश्मी : नही टीना.. मुजे जब जरुरत पडेगी तब तुमसे मांग लुगी.. अभी मुजे कुछभी नही चाहीये.. उनका जो भी कार्य करना हे हम दोनो मीलकर साथमे करेगे.. तुम पांचवे दिन इधर आजाना.. हम दोनो साथमेही इनका कार्य करेगे..

टीना : (हसते) ठीक हे.. लेकीन अब मे जोभी करुगी उसमे तुम मुजे मना मत करना.. मेने बहुतसे लोगोका अन्जानेमे ही सही.. बहुत दिल दुखाया हे.. ओर भगवानने मुजे उनकी सजाभी देदी हे..

रश्मी : नही टीना.. अ‍ैसा मत बोल वो सब हमारी कीस्मतमेही लीखा होता हे.. तो होकरही रहेता हे.. इनकी समज मुजे मंजुभाभीने ना दी होतीतो मे आजभी तुमसे नफरत करती होती..

टीना : (खडी होते हसते) थेन्क्यु मंजुभाभी.. आपकी समजदारीकी वजहसे आज हम दोनो बहेने फीरसे मील गइ.. चलीये मुजे आज्ञा दीजीये मुजे जानाभी हे.. मेरा बुटीक अ‍ैसेही छोडके आइ हु.. ओर आप सब लोगभी सहेरमे आये तो मेरे यहा जरुर आइअ‍ेगा.. चलो सबको बाय..

कहेते टीना सबको गले मीली ओर चली गइ.. तब रश्मी उनको दरवाजे तक छोडने गइ.. ओर वापस आकर सबके साथ बैठ गइ.. तब सबके बीच बातोका दोर चल पडा ओर मंजुने सबको बता दीयाकी ये राघवकी बहेन थी.. ओर राघवने उनसे भी सादी करली थी.. अ‍ैसेही बाते करते साम होगइ.. तब रमेश ओर चारु अपने घरकी ओर जाने लगे.. तो चारुने सबसे छुपकर देवायतको इसारा करते फोन करनेको केह दीया..

तब मंजुने रश्मीको कुछ दिनोके लीये अपने साथ हवेलीपे चलनेको कहा.. तो रश्मीने हसते हुअ‍े उसे मना कर दीया.. तब देवायत ओर मंजु भी अपने घरपे आगये.. ओर अ‍ैसेही दिन नीकल गया.. आज मंजुके लीये पुरा दिन अ‍ैसेही बैठे बैठे नीकल गया तो मंजु थक गइ.. तो सामका डीनर करतेही वो रुममे जाकर अपने बच्चेको दुध पीलाकर सो गइ.. तो चंदाभी मंजुके बच्चेको लेकर उसे सुलाने लगी.. जब सो गया तो वोभी बीस्तरपे लेट गइ..

तभी देवायत बहार चकर लगाने चला गया.. तब राजीवको भी नीर्मलाने दवाइ पीलादी तो वो दोनोभी सोने चले गये.. तब रजीया चंपा ओर दयाभी खाना खाकर सब काम नीपडाके अपने रुममे चली गइ.. ओर भावु अपनी बच्चीको अपने रुममे जाकर दुध पीलाने लगी.. वो कइ दिनोसे देवायतको अकेलेमे मीलनेके लीये इन्तार मे थी.. तो आज उसे मौका मील ही गया.. तो वो देवायतका इन्तजार करते जागती रही..

तो दुसरी ओर देवायत सुधीरके घर चला गया.. तो सुधीर ओर नीशाभी घरपे खाना खाकर टीवी देख रहेथे.. तो जैसेही देवायत घरके अंदर आया तो सुधीर उसे देखतेही खुस होकर हसने लगा ओर देवायतको अपने पास हाथ पकडकर बीठा दीया.. तब नीशा देवायतको देखकर बहुत खुस होगइ ओर वो उनके लीये कीचनमे पानी लेने चली गइ.. ओर वापस आकर देवायतको कामुक नजरोसे देखते हसते हुअ‍े पानी देने लगी..

सुधीर : (हसते) आओ भाइ.. आजतो थक गये.. इतने दिनोसे काममे लगे हुअ‍े थे तो आज थकान महेसुस हो रही हे.. कहो.. क्या पीयोगे.. चाइ के ठंडा..?

देवायत : नही यार रहेने दे.. अभी अभी खाना खाकर ही आया हु.. बस तुजे मीलने चला आया.. थेन्कस यार तुम दोनोने ओर रमेश चारुभाभीने हमारी बहुत मदद की.. तो सब काम आसानीसे नीपट गया..

सुधीर : (थोडा गुसा होते) साले.. हम दोनो कोलेजके टाइमसे दोस्त हे.. हमे दोस्तभी कहेता हे.. ओर थेन्क्स कहेने इधर आया.. तो हमारी दोस्ती कीस कामकी..? आजके बाद हमारी दोस्तीमे ये थेन्कस सब्द नही आना चाहीये.. उलुका पठा.. हें..हें..हें..

नीशा : (हसते धीरेसे) सुधीर.. तुम गालीतो मत दो.. कोइ अपने फ्रेन्डसे अ‍ैसे बोलता हे..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) नही भाभी.. रहेने दीजीये.. कीतने सालोके बाद इसे हमारी दोस्तीका अहेसास तो हुआ.. हम कोलेजमे थे तब अ‍ैसेही बाते कीया करते थे.. बस.. ये बता.. वो राघवकी मौत कैसे हुइ..

सुधीर : भाइ.. लगता हे उन्होने बहुत टाइमसे खाना नही खाया.. ओर उपरसे ये बीमारी.. उनको फीरसे स्ट्रोक आगया था.. तो मुहसेभी जाग नीकल गया.. ओर वैसेभी उनका टाइम हो गयागा.. फीरभी कुछ ज्यादा दिन जीन्दा रहा..

नीशा : (खडी होते) आप दोनो बाते कीजीये.. मे हम सबके लीये मस्त दुध कोल्ड्रींक बनाती हु.. अभी आइ..

सुधीर : (नीशाके कीचनमे जाते ही नजदीक आगया फीर धीरेसे) भाइ आपसे अ‍ेक बात कहेनी थी..

देवायत : (हसते) हंम.. बोल..? क्या बात हे कोइ सीरीयस मेटर तो नही..?

सुधीर : (हसते) सायद.. भाइ.. हमारे यहा वो मुना ओर उनकी बहेन बरखा काम करते हेनां..? बस उनके बारेमे आपसे बात करनी थी.. आज जब सुबह क्लीनीकपे गयाथा तब दोनोही भाइ बहेन वही अपनी ड्युटीपे काम कर रहेथे.. तो वहा बरखाकी तबीयत बीगड गइ.. ओर उसे उल्टीया होने लगी.. तो मेने उसे वही चेक करलीया.. ओर उसे दवाइ देदी.. तो उनकी उल्टीया तो बंध हो गइ.. फीर मेने उसे घरपे आराम करने भेज दीया..

देवायत : हां तो..? तो उनमे कोनसी बडी बात हे..? अच्छा कीया उनकी तबीयत बीगड गइ.. ओर तुमने उसे आराम करने घर भेज दीया..

सुभीर : (हसते धीरेसे) भाइ बात वो नही हे.. अभी मेने उसे कुछभी नही बताया.. सीर्फ नीशा ओर अभी आपको बता रहा हु.. भाइ मेने उसे चेक कीया तो बाकी सब नोर्मल था.. उल्टीकी वजहसे उनके जो सीमटन्स थेना.. उनका बीपी वगैरे.. वो कोइ सामान्य नही थे.. इसके बारेमे हमारी नइ भाभीही ठोस बता सकती हे.. भाइ मुजे लगता हे वो लडकी प्रेगनेन्ट हे.. सायद इसी लीये उसे उल्टीया हुइ थी.. अभी मेने उसे कुछ नही बताया.. सोचा पहेले आपसे बात करलु..

देवायत : (थोडा चोंकते) क्या वो दोनो रमेशके आदमीके वीभुभाइके लडका लडकी हेनां..? तो फीर उनकी कहा सादी हुइ हे..? क्या नीशाभाभीको पता हे..?

सुधीर : (हसते) हां.. मेने अभी अभी उसे बताया.. तो उसने जो कहा.. अब मे आपसे कैसे कहु..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) यहीना की उनका रीलेशन उनके भाइके साथही हे..? मे जानता हु.. ओर सायद उनके भाइने ही उसे प्रेगनेन्ट कर दीया हे.. सुधीर.. तु कल मुजे मीलना.. अभी इस बातका जीक्र कीसीके सामने मत करना.. ओर नीशाभाभीकोभी कहेना अभी कीसीको ना कहे.. हम इस बारेमे कल बात करेगे..

सुधीर : (हसते) ठीक हे भाइ.. मे कल आपके खेतपे आउगा.. तब बात करेगे..

देवायत : नही.. कल मे दोपहोरको क्लीनीकपे आ रहा हु.. तुम उन दोनोको रोकके रखना.. उसे इस बारेमे कुछ भी मत पुछना.. मुजे उन दोनोसे बात करनी हे.. बस मुजे इस बारेमे कीसीको कुछ पुछना हे.. फीर तुजे कल बताता हु..

सुधीर : (हसते) ठीक हे भाइ.. मे कल आपका इन्तजार करुगा.. हें..हें..हें.. भाइ.. अब आपसे कैसे कहु..?

देवायत : (हसते) क्या ओर बातभी कहेनी हे..? साले.. जो भी बोलना हे बीन्दास्त बोलदे..

सुधीर : भाइ.. नीशा कहे रहीथी.. की वो सारा दीन घरपे अकेली बैठी रहेती हे.. तो उसेभी जोब करनी हे.. अगर हमारी स्कुल खुल जाये ओर सीक्षककी जरुरत पडे तो नीशाको भी सेट कर देना..

देवायत : (हसते) हा तो अच्छा हेना.. हमे ओर सीक्षककी जरुरत तो पडेगी.. लेकीन नीशाभाभीके लीये मेने कुछ ओरही सोचा हे.. ओर ये लडकी जो अभी तुमने बताया.. वोभी तो पढी लीखी हे.. दोनोही भाइ बहेन ग्रेज्युअ‍ेट हेनां..? कोइ बात नही.. बस पहेले स्कुलका कुछ होने दे.. मे सहेर जाउगा तब बात करलुगा..

नीशा : (हसते) अरे.. क्या बाते हो रही हे.. लीजीये ठंडा पीजीये.. मेने आपके लीये स्पेसीयल कोल्ड्रींक बनाया हे.. हे..हें..हें.. आपतो इधर आतेही नही हो.. वो चारुभाभीके घरतो बहुत जाते हो..? हें..हे..हें..

सुधीर : (हसते ग्लास लेते) भाइ.. अब इनकीभी सीकायत दुर करदो.. हें..हें..हें.. कमसे कम मुजे नही तो इनको मीलने आया करो ताकी इनकी कोइ सीकायतही ना रहे.. हें..हें..हें.. (नीशाकी ओर देखते) नीशा.. अभी अभी मेने देवुसे तुम्हारे बारेमे बात की.. तुम जोब करना चाहती थीनां..?

नीशा : (सरमाते हसते) हां देवरजी.. अगर स्कुलके लीये ओर टीचरकी जरुरत पडे तो कहेना.. मे सारा दीन खाली बैठी रहेती हु.. तो मेराभी टाइम नीकल जायेगा.. आज देखोना.. रश्मीभाभीका भी छुटकारा होगया..

देवायत : (हसते) भाभी मे आपके बारेमे कुछ ओरही सोच रहा हु.. वो कभी हम फुरसतमे बाते करेगे..

सुधीर : (हसते) भाइ.. क्या वो राघवकी बहेन थी..? जीस तराह उसने राघवके पास अपने हाथोकी चुडीया तोडदी.. तो मुजेतो अ‍ैसा नही लगा की वो उनकी बहेन हे..? मुजेतो दालमे कुछ काला लगा.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां वो उनकी कजीन बहेनही थी.. राघवके चाचाकी लडकी.. लेकीन उन दोनोके बीच प्यार था.. ओर राघवने उनसे सादी भी करली थी.. राघवसे उनको अ‍ेक बच्चीभी हुइ थी.. लेकीन बेचारी कोइ बीमारीकी वजहसे गुजर गइ.. सुधीर.. वो बहुत अच्छी लडकी हे.. टीना नाम हे उनका.. सहेरमे बुटीक चलाती हे..

नीशा : (हसते ठंडा पीते) हां देवरजी.. अभी मे ओर चारुभाभी रश्मीभाभीको मीलने गइ तब वोभी यही केह रहीथी.. उनकी पकी सहेली थी.. बस ये राघवभाइ ही कमीने थे..

सुधीर : देवुभाइ.. आज बहुत अच्छा लगा.. आप अ‍ैसेही यहा आते रहीये.. हमे अ‍ेक अपनापन लगता हे.. कमसे कम आपकी भाभीको अच्छा लगेगा.. येतो घरपेही रहेती हे.. बस जानेको सीर्फ दो जगाह ही हे.. कभी चारुबाभी इधर आती हे तो कभी दोनो आपके वहा या रश्मीभाभीके घर जाती हे.. हमारे रीस्तेदारभीतो दुरके सहेरमे रहेते हे.. मेतो सारा दीन क्लीनीकपे रहेता हु.. आज कल पेशन्टभी बहुत आते हे..

देवायत : (हसते) चल कोइ बात नही.. मे आता जाता रहुगा.. ओर मंजुकोभी साथ लेआउगा.. अब गांवमेभी बहुत काम बढ जायेगा.. बस तुजे कुछही दिनोमे पता चल जायेगा.. हें..हें..हें..

सुधीर : भाइ.. अब यहा अ‍ेक लेडीस डोक्टरकी सख्त जरुरत हे.. कोइ लेडीसके लीये अ‍ेक क्लीनीक लगवादो.. हमारे गांवमे लेडीसके लीये कुछ हेही नही..

देवायत : सुधीर.. बस वोही मेरे दिमागमे हे.. हमे यहा लेडीसके लीये थोडी बडी होस्पीटल बनानी हे.. ताकी आसपासके गांवकी सभी लेडीसको डीलेवरीके लीये सहेरमे जाना ना पडे.. अब तु ही कोइ लेडीस डोक्टरका इन्तजाम करले.. बाकी रमेशको कहेकर उनके लीये यहा कोइ होस्पीटल बनायेगे.. क्या कहेते हो..?

नीशा : (सरमाते हसते) देवरजी तबतो सोनेपे सुहागा होगा.. क्या अ‍ैसा हो सकता हे..?

देवायत : हां भाभी.. बीलकुल हो सकता हे.. मे सृतीको मीलकर उनसेभी कुछ लेडीस डोक्टरकी बात करुगा.. अगर वो कहीसे अ‍ेरेन्ज करदे.. तो हम यहा होस्पीटल खोल सकते हे.. तो हमारे आस पासके गांवकी ओरतोकोभी बहार नही जाना पडेगा..

सुधीर : (हसते) भाइ आप इनमे आगे बढो.. मेरा पुरा सपोर्ट हे आपको.. ये आपने बहुतही अच्छा सोचा हे..

देवायत : (हसते) कमीने मुजे तेरा सपोर्ट नही चाहीये.. मेने इस बारेमे कुछ ओरही सोचा हे.. लेकीन अभी नही इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. ठीक हे..? चल.. हम आगे देखते हे.. मे चलता हु.. अब बहुत देर हो गइ हे.. कल मीलता हु..

नीशा : (सरमाते हसते खडी होते) देवरजी.. आप आये बहुत अच्छा लगा.. आते रहीयेगा.. हें..हें..हें..

फीर देवायत हसते हुअ‍े वहासे नीकल गया.. फीर चलते हवेलीकी ओर जाने लगा.. रातके अंधेरेमे ज्यादातर लोग अपने घरपे सो चुके थे.. या सोनेकी तैयारीया कर रहेथे.. देवायत अ‍ेक सुमसान छोटीसी गलीसे गुजर रहाथा.. तब अ‍ेक घरके पास उसे खीडकीसे कुछ अजीब सुनाइ देने लगी.. तब देवायतको जरासीभी समजने देर नही लगी.. की अंदर क्या हो रहा हे..

उनको खीडकीके पास कीसी ओरतकी सीसकारीयोकी आवाजके साथ मर्द ओरतकी बातेभी सुनाइ दे रहीथी.. देवायत ये घरको अच्छी तराह पहेचानता था.. ये घर उनके पंचायतके सदस्य (सामत)का घर था.. उनके घरमे सामत.. उनकी बीवी जया.. अ‍ेक जवान लडका (बंसी) लडकी (जागृती) ओर सामतकी जवान विधवा बहेन (सांती)के साथ रहेता था.. जो सादीके ८ सालके बाद ही विधवा हो गइथी.. उनके कोइ बच्चे नही थे..

उन खीडके ठीक पासही बेड लगा हुआथा.. तब अंदर सामतका लडका बंसी उनकी जवान विधवा बुआ सांतीको चोद रहाथा.. ओर चुदाइ करते दोनोकी बाते बहार तक सुनाइ दे रहीथी.. तो उनको नही पताथा की उनकी आवाज बहार खीडकीके पास सुनाइ दे रही हे.. तब देवायत धीरेसे वहा खीडकीके पास सटकर खडा रहेके रुक गया.. ओर अंदरकी बाते सुननेकी कोसीस करने लगा.. तो उसे अंदरकी बात साफ सुनाइ देने लगी..





सांती : (धीरेसे सीसकारीया करते) बंसीइइ.. सीइइ बस.. बस.. धीरे चोदोनां.. तुमतो मानतेही नही हो.. बीना कोंन्डम ही चोदे जारहे हो.. कुछ गडबड होगइ तो मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगी.. आइ.. आह... आह..आह.. बस.. बस.. बस.. कीतना जोरोसे चोदते हो..





बंसी : (कामुक आवाजमे चोदते) बुआ.. धीरे ही चोद रहा हु.. तुम सादीमे क्या मस्त तैयार हुइथी.. मेरातो तबसे ही तुजे चोदनेका मन कर रहाथा.. बुआ.. आइ लव यु.. मुजे कोन्डममे तुजे चोदनेमे मजा नही आता..

सांती : (सरमाते हसते) हंम.. बंसी.. मेभी तुमसे बहुत प्यार करती हु.. लेकीन क्या करु..? हमारा इस जन्ममे मीलन मुमकीन नही हे.. अगले जन्ममे तुही मेरा पती होगा.. ये वादा हे.. उइइइ.. बंसी.. धीरे धीरे.. चोदो..

बंसी : (धीरेसे चोदते होंठ चुमते) बुआ.. अब ठीक हे..? चलना.. हम दोनो यहासे कही दुर भागजाये.. जहा हमे कोइ जानता ना हो.. हम सादी करके वही रहेगे.. हमारे ढेर सारे बच्चे होगे.. हंम..? मे कही जोब करलुगा.. चलनां..

सांती : (बाहोमे भीचते) बंसी.. हम भागतो जायेगे.. लेकीन यहा बडे भैयाकी क्या इजत रेह जायेगी.. कुछतो सोचो..बंसी.. हम नही भाग सकते.. हम इसी घरमे पती पत्नी बनके रहेगे.. बस तुम मुजे हमेसा अ‍ैसेही खुस रखना.. बस अ‍ैसेही चोदते रहो.. तु क्या मस्त चोदता हे.. मेतो तेरी दिवानी होगइ हु.. बंसी..





बंसी : बुआ.. तो क्या हम यहा बहार कीसी मंदिरमे जाकर सादी करले..?

सांती : हां बंसी.. वोभी कर लेगे.. लेकीन कुछ दिन ठहेर जाओ.. अभी तीन चार दिनमे मेरा पीरीयड सुरु होजायेगा.. फीर हम कुछ सोचेगे.. अबतो तुमसे चुदवानेका बुहत मन कर रहा हे.. पता नही तुमने क्या जादु करदीया हे.. बस अ‍ेकही डर लग रहा हे.. कही मे पेटसे ना होजाउ.. वरना हमारी इजत चली जायेगी..

बंसी : बुआ.. मेने तुजे वो आइपील तो लाके दी हे.. तु उसे लेती हेकी नही..?

सांती : (धीरेसे सरमाते) हां.. रेग्युलर लेती हु.. अबतो तुमभी मुजे रोज चोदने लगे हो.. वरनातो हप्तेमे अ‍ेक दो बारही चोदते थे.. ओर अबतो वोभी बीना कोन्डम.. इसीलीये डर लग रहा हे.. बंसी.. मुजसे वादा करो.. अगर भाइने तुम्हारी सादी कही ओरके साथ करदी तबभी तुम मुजसे रीलेशन रखोगे.. ओर अ‍ैसेही मेरा खयाल रखोगे..

बंसी : बुआ तुम फीकर मत करो.. मेरी सादीका सवालही पैदा नही होगा.. मे कीसी ओरसे सादी करने वाला नही हु.. मुजे सीर्फ तुम चाहीये.. अगर कुछ उच नीच होगइ तो हम भाग जायेगे.. वरना सबसे बगावत करके मे तुमसे सादी करलुगा.. फीर हमे क्युना दुसरे गांवमे जाकर रहेना पडे..

सांती : (कामुक सीसकारीया करते बंसीको बाहोमे भीचते) बंसीइइइ.. थोडा जोरोसे चोदो मेरा होने वाला हे.. आइ.. हां.. बस.. बस.. अ‍ैसे ही.. उइइइ मां.. बं..सी..इइइइइइ मे.. गइइइइइ आह.. आह.. आइइइइ....

बंसी : (होंठ ओर गलेको चुमते) बुआ.. मे..भी... आ रहा हु.. आह.. आह.. आइ.. बुच.. बुच.. बुच.. आ..ह..





कहेते दोनोही जड गये.. तब देवायतके मुहसे हसी नीकल गइ.. ओर वो चुपचाप वहासे हवेलीकी ओर चलने लगा.. आज उसे बाबाकी अ‍ेक अ‍ेक बाते याद आने लगी.. वो सोचते हुअ‍े घरकी ओर बढ गया.. की नाजाने गांवमे अ‍ैसे कीतने रीस्ते पल रहे होगे.. हमे सबको सम्हालना होगा.. ओर गांव वालोको अ‍ैसे रीस्तोको अपनानेके लीये समजाना पडेगा.. बहुतही मुस्कील काम था.. यही सब सोचते वो हवेलीमे आगया.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२४

कहेते दोनोही जड गये.. तब देवायतके मुहसे हसी नीकल गइ.. ओर वो चुपचाप वहासे हवेलीकी ओर चलने लगा.. आज उसे बाबाकी अ‍ेक अ‍ेक बाते याद आने लगी.. वो सोचता घरकी ओर बढ गया की ना जाने गांवमे अ‍ैसे कीतने रीस्ते पल रहे होगे.. हमे सबको सम्हालना होगा.. ओर गांव वालोको अ‍ैसे रीस्तोको अपनानेके लीये समजाना पडेगा.. बहुतही मुस्कील काम था.. यही सब सोचते वो हवेलीमे आगया....अब आगे

तो सबभी लोग सो चुके थे.. तब वो होलमे आगया ओर जैसेही अपने कमरेकी ओर बढने लगा तो उसे सामनेके कमरेके दरवाजेपे भावना खडी नजर आइ.. जब दोनोकी नजर मीली तो भावनाने इसारलसे देवायतको बुलाया ओर दरवाजेसे थोडी हट गइ.. हटके देवायतको अंदर आनेका रास्ता दे दीया.. तब देवायत समज गया.. ओर चुपचाप भावनाके कमरेमे चला गया तो भावनाने धीरेसे अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया.. तब उनके दिलकी धडकन तेज हो गइ.. ओर वो पलट गइ..

तो देवायत उनसे थोडी दुर खडाथा.. तो भावना दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर उसे जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तो नाजाने कब दोनोके होंठ मील गये.. भावना अचानक देवायतके चहेरेको थामते पागलोकी तराह चुमने लगी.. तो देवायतभी उनका साथ देने लगा ओर भावनाके चहेरेको वो भी चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. ओर भावना कदहोसत होते उतेजीत होगइ.. ओर उनकी सांसे उखडने लगी..





भावना : (मदहोसीमे) जी..जु.. मुजे.. प्यार कजीये.. मे आपको बहुत प्यार करती हु.. मुजे मसल डालीये.. आज अच्छा मौका हे..

देवायत : (भारी आवाजमे) भावु.. प्यारतो मे भी तुजे करना चाहता हु.. लेकीन अभी नही.. तुजे सीर्फ दो महीनाही हुआ हे.. फीर तुजे जीभरके प्यार करुगा.. तेरी सारी कशर पुरी करदुगा.. तेरे अपने घरमे..

भावना : (उनके होंठ चुमते) जीजु.. प्लीज.. बस थोडासा उपर उपरसे ही प्यार करलो.. मे आपके बीना नही रेह सकती.. अब मुजे सीर्फ आपसेही मतलब हे.. आजसे ये तनपे सीर्फ आपका अधीकार हे.. बस अ‍ेक बार मुजे प्यार करलो.. मे कबसे हमारे मीलनके लीये तरस रही हु.. सीर्फ अ‍ेक बार..

देवायत : भावु.. मेभी तुम्हारे साथ जल्दसे जल्द मीलन करना चाहता हु.. बस कुछ दिन ठहेर जाओ.. जबतक सृती तुजे ये सब करनेकी परमीशन नही देगी.. तबतक हमारा मीलन बहुत मुस्कील हे.. बस थोडा सबर करले.. फीर हम अपनी सुहागरात मनायेगे.. मे तुजे पुरी रात प्यार करुगा..

भावना : (जोरोसे भाहोमे भीचते) बस जीजु.. मुजे उसी दिन का इन्तजार हे.. आप मुजसेभी सादी करलो.. मे आपकी बीवी होना चाहती हु.. (सरमाते) जीजु.. मुजे आपकी नीशानी चाहीये.. हम दोनोकी नीशानी.. मेरे गर्भमे.. फीर भलेही मुजे अलगसे रहेना पडे.. मे मम्मीके घर आपकी बीवी बनके रहुगी..

देवायत : (गोदमे उठाते बेडकी ओर जाते) हां भावु.. तुभी मेरी सीक्रेट वाइफ होगी.. हमारे बच्चे भी होगे.. लेकीन अभी सही समय नही हे.. फीर तु जो कहेगी उतने बच्चे तुजे देदुगा..

भावना : (सरमाते लडखडाती आवाजमे) हां जानु.. मे आपके ढेर सारे बच्चे पैदा करुगी.. बस मुजे प्यार करलो.. मे आपके बीना नही रेह सकती.. आपने मुजे बहुत इन्तजार करवाया.. बस अ‍ेक बार आपका बडा हथीयार मुजे नीचे टच करवादो.. मुजे बहुत इच्छा हो रही हे..

कहातो देवायतने भावनाको वही बेडपे लीडा दीया तो भावना फोरन बेठ गइ ओर देवायतके सामने वासना भरी नजरोसे देखते उनके कपडे नीकालने लगी.. ओर खुदभी अपने कपडे नीकालके नंगी होयइ.. तब देवायतका विकराल लंड भावनाकी चुत देखतेही हवामे लहेराते जटके मारने लगा.. ओर वो भावनाके पास बैठते उनको कंधेसे पकडकर लीटा देता हे.. ओर खुदभी उनके बुब्सको मसलते उनके चहेरे पे जुकते होंठ चुमने लगता हे..





तब भावना देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीजते उसे अपने उपर खीच लेती हे.. ओर देवायतके होंठ चुमने लगती हे.. तब कुछही देरमे दोनो मुह खोलते अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीते जीभको चुस रहेथे.. ओर देवायतने धीरेसे अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते भावनाकी चुतपे रख दीया.. तब भावना सरसे पांव तक कांपने लगी.. ओर उसने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते अपने तनसे चीपका लीया.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. आज भावनाके तनमे पुरी तराह वासना हावी हो चुकी थी..

भावना : (मदहोसीमे लडखडाती आवाजमे) जी..जु.. मुजे अभी.. चोदलो.. मे नही रेह सकती.. आपके लीये कीतनी तडपी हु.. बस अ‍ेक बार इसे अंदर डालदो.. मुजे आज बहुत मन कर रहा हे.. फीर जोभी होगा देखा जायेगा.. मे इसे अंदर लेना चाहती हु.. चोदलो मुजे..

देवायत : (मदहोसीमे होंठ चुमते) नही भावु.. बस डार्लींग थोडासा कंट्रोल करले.. वरना तेरी हालत खराब होजायेगी.. इस हालतमे करना ठीक नही हे.. मे तुम दोनो बहेनोको साथमे चोदुगा.. वरना अभी कुछ हो गया तो चंदा.. ओर तेरे मम्मी पापाको जवाब देना मुस्कील हो जायेगा..

भावना : (कामुक आवाजमे) ठीक हे जानु.. पहेले हम दोनो अपनी सुहागरात मनायेगे.. ओर वोभी सीर्फ हम दोनो अकेले.. फीर चाहे आप बादमे हम दोनो बहेनको साथमे चोद लेना.. बस अभी थोडा प्यार करलो..

तब देवायत भावनाके उपरसे उठ जाता हे.. ओर सीक्ष नाइन पोजीसनमे हो जाता हे.. तब भावना समज गइ.. ओर देवायतकी कमर पकडते उनके बडे लंडको देखतेही मुहमे पानी आगया.. ओर लंडको जटसे मुहमे लेनेकी कोसीस करने लगी.. फीर धीरेसे लंडको मुहमे लेलीया ओर उसे अंदर बहार करने लगी.. तो दुसरी ओर देवायत भी भावनाकी चुतमे जीभ डालके उनके चुतके दानेको अपनी जीभसे खरोदने लगा.. तब भावना बहुतही उतेजीत होगइ.. ओर अपनी कमर उछालने लगी..





फीर जोरोसे लंडको मुहमे अंदर बहार करने लगी.. दोनोके उपर काम वासना पुरी तराह हावी हो चुकीथी.. भावना आज पहेली बार देवायतके साथ अ‍ेकही बीस्तरमे उनसे खुलके मील रहीथी.. आखीर उसे अपना मन चाहा प्यार जो मील गया.. जो अभी उनकी चुतको बडेही बेहरेहमीसे खरोद रहाथा.. तब भावना ओर बरदास्त नही कर पाइ.. ओर अपनी कमरको जटके देते जडने लगी.. ओर देवायतका मुह भर गया..

तो देवायतभी आज नइ चुतके साथ खेलते कांपते हुअ‍े जल्दी जडने लगा.. ओर उसने अपना पुरा माल भावनाके मुहमे उडेल दीया तो भावनाका पुरा मुह भर गया.. तो बहुत सारा पानी भावनाके हलकमे उतर गया ओर भावना लंडको मुहसे नीकालते खांसने लगी.. तब देवायत जटसे बेडसे उतर गया ओर भावनाको गोदमे उठाकर बाथरुममे चला गया.. वहा दोनोने अपने अपने मुहको साफ कीया ओर सही होगये.. फीर दोनोही बहार आगये.. तब..

भावना : (सरमाते देवायतकी बाहोमे समाते) जीजु.. आज बहुत मजा आया.. बस मुजे अ‍ैसेही प्यार करते रहेना.. आजसे आपकी ये साली आपकी अमानत होगइ हे.. बस अब मुजे आधीसे पुरी घरवाली बनादो..

देवायत : (हसते सरको चुमते) बस भावु.. अ‍ेकबार तु सही होजा.. फीर तुजे इतना प्यार दुगाकी तुने अपने पतीकी कमी महेसुस नही होगी.. बस अ‍ेकही बीनंती हे.. तुम भानुको मत छोडना..

भावना : (हसते) हा जीजु.. मेरी इस बारेमे दीदीसे बात होगइ हे.. आप फीकर मत करो.. अब मे उनको नही छोडुगी.. ओर उनके साथ अच्छा रीलेशन रखते उनके साथ भी रहुगी.. मुजे दीदीने सारा प्लान समजा दीया हे.. लेकीन अब सही मायनोमे मेरे पती आपही होगे.. आप मुजे प्रोमीस करो..

देवायत : (हसते) हंम.. ठीक हे.. आइ प्रोमीस.. अब तुम सीर्फ मेरी ही बीवी कहेलायेगी.. बस.. चल अब सोजा.. काफी देर होगइ हे.. मेभी सो जाता हु..

भावना : (हसते बाहोमे भीचते होंठ चुमते) जीजु.. बस अ‍ैसे मौका देखकर आते रहेना.. मे इन्तजार करुगी..

कहेते देवायतको अपनी बाहोसे आजाद करदीया तो देवायत उनके होठ चुमते वहासे नीकल गया.. तो भावनाने खुस होते हसते अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया ओर अपने बेडपे जाकर सोगइ.. तो देवायतभी अपने रुममे आगया ओर चेन्ज करके अपनी दोनो बीवीओके बीच जाकर लेट गया तो मंजुने आंख खोलके देखलीया ओर हसती हुइ करवट लेके देवायतके सीनेपे सर रखते उनकी बाहोमे समा गइ..





मंजुला : (धीरेसे) मेरी बहेनको प्यार करके आगये..? चलो अब सो जाओ.. अब कुछभी नही मीलेगा..

देवायत : (हसते) हंम.. ठीक हे.. लेकीन तेरी बहेनने मुजे लुटलीया.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सीनेको सहेलाते) अभी कहा लुटा हे.. बस अ‍ेक बार कमीनी आपका हथीयार अंदर लेगीनां तब उसे पता चलेगा.. की मेरे पतीको लुटना इतना आसान नही हे.. कमीनी बहुतही कामी हे.. अपनी मां पे गइ हे हें..हें..हें..

देवायत : मंजु.. आज मे सुधीरके घरपे गया था.. वहा मुजे अ‍ेक बात पता चली.. ओर आते वक्त अ‍ेक ओर रीस्ता मेरी नजरमे आया.. वो हमारे सामतके घरपे.. आने वाले दिनोमे हमे कीतने लोगोको समजाना पडेगा..

मंजुला : हां.. सामतभाइकी विधवा बहेन ओर उनके लडकेकी बात कर रहे होनां..? जानु.. उनकी बीवीभी कुछ कम नही हे.. उनकाभी रीस्ता हमारे रमेशभाइके साथ हे.. इस बारेमे कीसीको कुछभी नही पता.. लेकीन जल्दही सबको पता चल जायेगा.. वो सब हम देख लेगे.. बस अ‍ेक बार हम दोनोको बाबाको मीलने जाना होगा.. तब वोही कुछ रास्ता नीकालेगे.. अभी सोजाओ मुजे बहुत नींद आ रही हे..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? हमारा रमेश.. लेकीन वोतो बहुत सीधा हे.. साला अपनी बीवीकोभी ठीकसे नही चोद पाता.. ओर सामतकी बीवीके साथ..? वो जयाभाभीनां..?

मंवुला : (हसते) हां.. जानु.. सबको यहीतो चाहीये.. उनको पता हे अपनी बीवीतो घरका खाना हे.. कभीभी मील सकती हे.. बस सबको बहारका नास्ता करना अच्छा लगता हे.. ओर ये बात सीर्फ मर्दोपे नही ओरतोपे भी लागु होती हे.. चारुभाभी भीतो कम नही हे.. वोभी आपसे मजे करती हे.. कमीनी ये आगही अ‍ैसी हे.. अब सोभी जाओ हम कल बाते करेगे.. मुजे बहोत नींद आ रही हे..

फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे नींदकी आगोसमे चले गये.. तो दुसरी ओर गांवसे बहुत दुर गौवामे दोनो कपलने घुमकर बहुत अ‍ेन्जोय कीया.. जब लता लखन ओर पुनम अ‍ेक राइडमे बेठे तब धिरेनने चकर आनेका बहाना बनालीया.. ओर वो नही बैठा.. तब उसी मौकेका फायदा उठाकर वो थोडा दुर चला गया.. ओर अपना फोन नीकालकर फटाफट नीलमको फोन कर दीया.. जब नीलमने फोन उठाया तब वो बात करने लगा..

नीलम : (सरमाते हसते) हां धिरेन.. आप लोग पहोंच गये गौवामे..? कैसेहो..?

धिरेन : (हसते) हां.. नीलु.. बस मजेमे.. आज दो पहोरकोही पहोचे.. ये छोड पहेले ये बता.. तेरे रुममे कोइ हेतो नही..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही धिरेन.. यहा डरनेकी कोइ जरुरत नही.. अभी सीर्फ मे अकेली हु.. मेरे रुममे सीर्फ अ‍ेकही पार्टनर हे अभी वो ट्युसनपे गइ हे.. कहो क्या कहेना चाहते हो.. आपकी बहोत याद आती हे..

धिरेन : नीलु.. आइ लव यु.. सोरी उस दिन मेरी वजहसे तुजे दीदीकी डांट खानी पडी.. आइ अ‍ेम सोरी..

नीलम : हंम.. जानु.. आपके लीये मे कुछभी सहेन करनेको तैयार हु.. बस मुजे छोडना नही.. मेभी आपसे बहोत प्यार करती हु.. आप अपना खयाल रखना.. क्या अभी आप अकेले हो..? मेरी सौतन कहा हे.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) नीलु वो तीनो राइडमे बैठे हे.. तो तुमसे बात करनेका मौका मील गया.. कहो..

नीलम : (सरमाते हसते) जानु.. आप इधर सहेरमे कब आओगे.. मुजे आपको मीलना हे..

धिरेन : ( बस नीलु.. बहुत जल्द आउगा वहा.. अभीतो हम चारो इधर आयेहे.. पहेले तेरी सौतनको तो अच्छेसे मीललु.. फीरतो हम दोनो तो हेही..

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. क्या अपनी सुहागरातमे उनके साथ कुछ कीया कीया..? मतलब.. आप समज गयेनां..? हें..हें..हें..

धिरेन : (जुठ बोलते) हां नीलु.. समज गया.. मेने पुरी रात उनकी बजाइ.. नीलु.. मेने पुनोको चार बार चोद लीया.. उनकी चीखे नीकलवादी.. बस अब तेरी बारी हे.. हें..हे..हें.. देखना जब हमारी सुहागरात होगी तो मे तुजेभी इसी तराह चोदुगा.. हें..हें..हें..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते हसते धीरेसे) क्या..? छी.. गंदे कहीके.. जानु.. कोइ अपनी बीवीके साथ अ‍ैसा करता हे..? क्या उसे दर्द नही हो रहा था..? मेनेतो सुनाहे पहेली बारमे दर्द होता हे..

धिरेन : नही नीलु.. बस पहेली बार डालते हे तब मामुली थोडी देरके लीये दर्द होता हे लेकीन बादमे बहुत मजा आता हे.. पुनोको भी बहुत मजा आया.. अबतो मुजे बार बार चोदनेके लीये केह रही हे.. देखना तुजेभी बहुत मजा आयेगा.. मानो हम जनतकी सेर कर रहेहो..

नीलम : (सरमाते हसते) धिरेन.. क्या आप मुजे उनको करते हुअ‍े दीखा सकते हो.. आप फोनमे वीडीयोकोल चालु रखना मुजे देखना हे.. की कैसे करते हे.. क्या दिखाओगे..?

धिरेन : हां.. आज रातमे देख लेना मे फोन लगाके छुपाकर रखुगा.. तुम देख लेना.. लेकीन तुम कोइ आवाज मत करना.. चल अब रखता हु.. सायद वो लोग आ रहे हे..

कहेते धिरेनने फोन काट दीया ओर फटाफट अपनी जेबमे रखते तीनोके पास चला गया.. ओर वहा सबने बहुत मजे कीये ओर घुमते सामको वापस होटेलपे आगये.. ओर वापस आकर लंच करलीया.. फीर सभी लोग अपने अपने कमरेमे घुस गये.. ओर होटेलमे हनीमुन कपलके बीच चुदाइका दौर चल पडा.. तब लखनको आजभी लताने वायग्रा नही खानेदी.. लखन ओर लता दोनोही चुदाइमे मसगुल थे..





तो इधर पुनम चेन्ज करने बाथरुममे घुस गइतो धिरेनने फटाफट नीलमको विडीया कोल करके फोनको अ‍ेक कोनेमे छुपा दीया.. जहासे पुरा बेड दिख सके.. तभी पुनम बहार आगइ.. तो धिरेन हडबडा गया.. ओर वो भी जटसे बाथरुममे चला गया.. लेकीन येतो पुनम थी.. उसे सब पता चल गया.. ओर वो फोनकी ओर देखते कातील मुस्कान करते अपने बेडपे आगइ.. क्युकी वोभी चाहतीथी की जीतनी जल्दी हो सके नीलम ओर धिरेन मील जाये..

ताकी अपने लीये देवायतको मीलनेका रास्ता साफ हो सके.. तब धिरेनभी आगया.. तो पुनमने उसे रुमकी लाइट बंध करनेको कहा.. लेकीन धिरेनने उसे केह दियाकी वो आज उनको अ‍ैसेही लाइटमे देखते चोदना चाहता हे.. तब पुनम सब कुछ समज गइ.. ओर कुछही देरमे दोनो प्यारकी आगोसमे चले गये.. अब धिरेन पुनमकी मददके बीनाही अपना लंड उनकी चुतमे डालने लगा.. ओर वो कामयाबभी हो गया..





वो ओर पुनम धीरे धीरे करते चुदाइमे मसगुल होगये.. तो सहेरकी होस्टेलमे नीलम अपना फोन लेकर बाथरुममे घुस गइ.. ओर कमोडपे बेठकर धिरेन ओर पुनमकी चुदाइ देखने लगी.. ओर कुुछही देरमे वोभी गरम होने लगी.. तब अ‍ेक हाथसे फोन पकडते दुसरे हाथसे अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर सीसकारीया करने लगी.. तभी उसने फोनको साइडमे रख दीया ओर अपना लोअर नीचे करते अपनी पेन्टीभी नीचे करदी..





ओर अपनी चुतमे धीरेसे उंगली घुसाते फोनमे धिरेन पुनमकी चुदाइ देखते उंगलीको अंदर बहार करने लगी.. नीलम पुरी तराह मदहोसीमे छा गइ.. ओर कुछही देरमे उनकी चुतसे अ‍ेक तेज फवारेकी धार नीकल गइ.. तब नीलम आंख बंध करते सातवे आसमानपे चली गइ.. कीतना प्यारा अहेसास था वो.. ओर उसने मनही मन जल्दसे जल्द धिरेनसे चुदवानेका मन बना लीया.. बस.. यहीतो पुनम चाहती थी..

लखन लताकी दो बार जबरदस्त चुदाइ कर लेता हे.. तब लताभी थकके चकना चुर हो चुकीथी.. फीर दोनो अ‍ैसेही नंगे अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपककर सो जाते हे.. तब धिरेनभी अ‍ेक बार पुनमकी चुतमे अपना माल उडेलके उनके सीनेपे ढेर होगया.. तब पुनम अ‍ेक बार फीर प्यासी रेह गइ.. ओर उसने धीरेसे धिरेनको साइडमे सुला दीया तो धिरेनभी नींदकी आगोसमे चला गया.. ओर पुनम अपने आपको बाथरुममे जाकर सांत करती हे.. ओर वोभी धिरेनके साथ आकर लेटके सो जाती हे..

दुसरे दिन सुबह गौवामे सभी कपल रुटीन टाइमपे उठ गये.. ओर अपनी टुरके तैय कार्यक्रमपे चले गये.. तो इधर गांवमेभी देवायत चंदा मंजु सब उठके कंपलीट होगये.. तो सबने चाइनास्ता करलीया.. लेकीन आज राजीव घरपेही रहा.. क्युकी उसे गांवमे लटार मारने जाना था.. तो खेतोपे सीर्फ देवायत अकेलाही चला गया.. ओर जातेही गोडाउनकी ओफीस मे बेठकर फोन घुमाने लगा.. ओर अपने बीजनेसके लीये मार्केटकी पुरी जानकारीया लेने लगा..

तबतक भानुभी आगया ओर वोभी खेतोका काम देखकर देवायतके पास ओफीसमे आगया.. दोनोही बीजनेसकी बाते करते मालकी सोदे बाजी करने लगे.. पीछले कुछ दिनोसे काम काजकी वजहसे बीजनेस नही होपाया.. तो देवायतने कइ जगाहपे बाते करते कइ सौदे करलीये.. तभी रीटा चाइ लेकर आगइ.. ओर दोनो अपने कामको देखते हुअ‍े चाइ पीने लगे.. तब भानु खडे होकर बात करने लगा.. तो रीटा वही खडी रही.. वो देवायतकी हाजरीकी वजहसे रीटाके सामने देखता भी नही हे..

भानु : भाइ.. लखन नही हे तो मे छोटुको लेकर सहेर चला जाता हु.. वही माल अपने सहेरके गोडाउनमे रखके वापस आजात हु.. अगर कुछ ओर काम होतो बोलो..?

देवायत : नही भानु.. ओर कुछतो नही लेकीन अब लखन आजाये तो तुमभी उसे सहेरका वहीवट समजादो.. तुम कबतक सहेरका चकर लगाते रहोगे.. क्युकी अब लखन ओर लताको मे वही सहेरमे सेट कर रहा हु.. बस हमारा वो मकान ओर ओफीस हे.. उनको अच्छेसे साफ सफाइ करवा देना.. दोनो आयेगे तब उसे वहा रहेने भेज देगे..

भानु : भाइ.. क्या लखनके लीये ये थोडी जल्द बाजी नही हे.. क्यु अभीसे उनपे इतनी जीम्वेवारी डालते हो..? मे सब देख लुगानां..

देवायत : भानु.. अगर उनपे जीम्वेवारी नही डालेगे तो वो कब सीखेगा..? बस तुम उनके साथ रहेना..

भानु : (हसते) तो फीर ठीक हे.. तो वहीसे सीधा बंगलेपे चला जाउगा.. ओफीस हम बादमे देख लेगे.. छोटु साथ हेतो.. सामकोही सब काम नीपटाकर आयेगे.. चलो मे चलता हु..

कहेते भानु चला गया.. तब रीटाभी खाली कप लेकर फटाफट चली गइ.. तो देवायत फीरसे फोनपे बाते करते बीजनेसका वहीवट देखता रहा.. तब भानु छोटुको लेकर कारमे सहेरकी ओर चला गया.. तो कुछही देरमे रीटा वापस आगइ.. ओर सरमाते देवायतकी ओर कामुक ओर प्यासी नजरोसे देखते वही खडी रही..

उनको समजमे नही आ रहाथा की वो देवायतसे कैसे बात करे.. क्युकी कुछ दिनोसे उनके पुरे दिलो दिमागमे सीर्फ देवायतही छाया हुआ था.. ओर उसे आज सही मौका मील गयाथा.. तभी

देवायत कुछ कामसे फ्री हुआ तभी उसे खयाल आयाकी कोइ यहा खडा हे.. तभी

देवायत : (हसते) अरे रीटा तुम..? बोल कुछ काम था क्या..? कुछ कहेना हे..?

रीटा : (सरमाते हसते) मालीक.. वो हरीयाभाइ ओर मालती गांवमे चले गये हे.. ओर अभी भानुभाइ भी मेरे पतीको लेकर सहेरमे गये हे.. तो मालतीने मुजे आपका खयाल रखनेको कहा हे.. अगर आपको कीसीभी चीजकी जरुरत होतो मुजे आवाज देकर बुला लीजीयेगा.. मे आजाउगी.. बस अ‍ेक बार मेरे हाथोका खाना खा लीजीये.. आप मालतीको भुल जायेगे.. बस मे यही कहेने आइ थी.. (सर्मसार होते धीरेसे) क्या अभी आपको भुख नही हे..? अगर खानेका मन कर रहा हे तो कहीये.. आज अच्छा मौका हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते रीटाके कहेनेका मतलब समज गया) जी.. रीटा.. लेकीन क्या तु मुजे अच्छेसे खीला पायेगी..? फीर सोचले.. मुजे खाना खालाके तेरी हालत बीगड जायेगी.. हें..हें..हें..

रीटा : (सरमाते पैरोके अनुठेसे जमीन खरोदते) जी.. मालीक.. सोचलीया हे.. वो छोटु ओर भानुभाइतो सामको आयेगे.. तो मे आराम करलुगी.. बस अ‍ेक बार.. जबसे आपको देखा हे.. तबसे बहुत मन कर रहा हे..

देवायत : (अपने नीजी कमरेकी ओर इसारा करते हसते) ठीक हे रीटा.. जा अंदर जाकर खाना परोस.. मे आता हु..

कहातो रीटा बहुत खुस होगइ.. ओर सरमाते हसते हुअ‍े देवायतके ओफीसके कमरेमे चली गइ.. जहा देवायत मालती ओर जमीलाकी कइ बार जमकर चुदाइ कर चुकाथा.. ओर आज रीटाभी सामनेसे आइ.. वो कइ दिनोसे देवायतके साथ चुदाइ करवाना चाहती थी.. ओर आज उसे मौका मील गया.. वो अंदर जाते बेडपे बैठ गइ तब देवायत ओफीसका दरवाजा बंध करके अपने रुममे चला गया तो रीटा उसे देखते ही बहुतही सरमाइ..

ओर फोरन खडी होके चलकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तो देवायतने भी जोरोसे रीटाको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उसे गोदमे उठाकर बेडपे पीठके बल सुला दीया तब रीटा बहुतही सर्मसार होगइ ओर सरमाते मुस्कुराती रही.. उनकी आंखोमे वासनाके डोरे साफ मंडराते दीखाइ देने लगे.. वो नाजाने कबसे इस मीलनकी धडीके इन्तजारमे थी.. जैसेही देवायत उनपे जुक गया.. रीटाने उसे फोरन अपनी बाहोमे भरलीया..

रीटा : (धीरेसे सरमाते) मालीक.. आज मुजपे कोइ रहेम मत करना.. जबसे मालतीके मुहसे आपकी तारीफ सुनी.. तबसे मे हमारे मीलनके लीये तरस रही थी.. मे आपको हर तराहका सुख दुगी.. बस अभी मुजे ठंडी करदीजीये.. आपसे चुदवानका बहुत मन कर रहाथा.. तो आज मुजे चोद डालीये.. मे रेडी हु..

देवायत : (होंठ चुमते) अच्छा इसीलीये तुम कबसे मुजे खानेके लीये केह रहीथी.. चल आजतो तुजेही खाता हु.. देखुतो सही तेरा स्वाद कैसा हे.. अब तक कीतनेको अपना स्वाद चखा चुकी हे..

रीटा : (सरमाते हसते) मालीक बादमे सब बता दुगी.. बस अभीतो मुजे पहेले अ‍ेक बार ठंडी करदो.. आपके हथीयारकी बहुत तारीफ सुनी हे.. तबसे मेरा मन आपसे मीलन करनेके लीये तरस रहा हे.. वैसेतो मे अ‍ैसी ओरत नही हु.. बस मुजे इन सब चीजोका बहुत सौक हे.. लेकीन अभी नही.. बादमे सब बता दुगी..

कहेके देवायतको अपनी बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमने लगी.. रीटा बहुतही कामुक तरीकेसे अपना मुह खोलते देवायतके मुहके रसको पीने लगी.. तब उसे अपने बुब्सपे देवायतका हाथ उनके बुब्सको मसलते महेसुस हुआ.. तो रीटा बहुतही उतेजीत होते सीसकारीया करते देवायतके होठोको जोरोसे चुसने लगी.. उनकी आंखे लाल होने लगी.. उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. मानो रीटा पहेलेसेही इस खेलमे माहीर हो..

वो चाहतीथी की जल्दसे जल्द देवायतका लंड उनकी चुतमे घुस जाये.. तब वो फौरन बेडपे बैठ गइ ओर देवायतकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते उनके सर्टके बटन खोलने लगी.. तब कुछही देरमे देवायतको नंगा करदीया.. ओर खुदके कपडे नीकालके नंगी होगइ.. तब देवायतका लंड देखतेही अ‍ेक बारतो वो थोडा डरके गभरा गइ.. ओर उसे देवायतसे चुदवानेकी अपनी जल्दबाजी पे पछतावा होने लगा..





देवायत : (हसते) क्यु..? क्या हुआ..? तुजे चुदवानेकी बहुत जल्दी थीनां..?

रीटा : (थोडा गभराते) मालीक.. येतो वाकइ बहुत बडा हे.. अगर मेरी चुत फट गइतो..?

देवायत : (हसते) आज तकतो कीसीकी नही फटी.. ओर वैसेभी तुमतो इस खेरमे काफी खेली खीलाइ लगती हो.. बस सीर्फ दीखनेमे ही भोली लगती हो..

रीटा : (सर्मसार होते हसते) मालीक अब आपसे क्या कहे..? बस साली ये तनकी आगही अ‍ैसी हे.. जबसे जवानीमे कदम रखा हे तबसे अ‍ेक चस्का लग गया हे.. बस इनकी अ‍ेक आदतसी होगइ हे.. अब देर मत कीजीये.. इसे देखकर तो लगता हे मुजे आज आराम भी करना पडेगा.. सही मायनेके मुजे आज बसली लंड मील गया हे.. आइअ‍े.. चोद लीजीये मुजे..

कहेते रीटा वापस बीठके बल लेटते देवायतको अपने उपर खीच लेती हे.. ओर पलटते देवायतको पीठके बल सुलाते अ‍ेक हाथ नीचेकी ओर लेजाते उनके होठ चुमते देवायतके लंडको पकड लेती हे.. ओर मुठीमे पकडते धीरे धीरे सहेलाने लगती हे.. तब देवायतको पुरा यकीन होगयाकी रीटा इस मामलेमे पुरी तराह अनुभवी हे.. ओर रीटा लंड सहेलाते उनके सीनेको चुमते नीचेकी ओर सरक के उनके पैरके बीच बैठ जाती हे..

ओर धीरेसे लंडपे जुकते लंडपे अपनी जीभ फीराते लंडको भीगोने लगी.. जब लंड गीला होगया तो पुरा लंडको मुहमे लेकर लोलीपोपकी तराह चुसने लगी.. ओर मदहोस होने लगी.. तब देवायतभी धीरे धीरे मदहोसीके आलममे चला गया.. रीटा नजर उठाते देवायतकी ओर वासनाभरी नजरोसे देखते उनके लंडको चुस रहीथी.. तब देवायतके मुहसे सीसकारीया नीकलने लगी.. ओर उनके मनमे वासना पुरी तराह हावी होगइ.. उनको यकीन हो गयाकी आज उसे रीटा पुरा मजा देगी..





देवायत : (कामुक आवाजमे) बस..सी.. आह..आह.. री..टा.. क्या मस्त चुसती हे तु.. मजा आगया..

रीटा : (मुहसे लंड नीकालते कामुक आवाजमे) मालीक.. इस चीजका अच्छा खासा अ‍ेक्सीपीरीन्स हे.. मुजे ये सब करना बहुत अच्छा लगता हे..

देवायत : (हसते आस्चर्यसे) अ‍ेक्सीपीरीयन्स..? अरे वाह.. कहा तक पढी हो..?

रीटा : (हसते) जी.. बारवी तक पढाइ की हे मेने.. कोलेजभी जाना चाहती थी.. लेकीन घरवालोने पढने नही दीया.. मुजे बीचमेही कोलेज छुडवादी ओर इस छोटृुसे सादी करदी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) बडी दीलचस्प कहानी लगती हे तेरी.. चल बादमे सुन लुगा अब आकर लेटजा..

तब रीटा सरमाते हसती हुइ आकर पीठके बल लेट गइ.. तो देवायत उनके पैरके बीच बैठ गया ओर अपना लंड रीटाकी चुतपे घीसने लगा तब रीटा आंख बंध करके मदहोसीमे सीसकारीया करने लगी.. ओर आने वाले हसीन पलका इन्तजार करने लगी.. तभी देवायतने लंडको घीसते धीसने उनके टोपेको रीटाकी चुतके लव होलमे डालके थोडा फसा दीया.. ओर रीटापे जुकते उनपे छा गया..

ओर रीटाके दोनोहाथ पंजेसे कपडकर रीटाको लीपलोक करलीया.. रीटा कुछ समज पाये उनसे पहेलेही देवायतने रीटाकी चुतपे दबाव बनाते कमरको अ‍ेक जोरोका जटका दे दीया.. तो पुरा लंड रीटाकी चुतमे घुस गया.. तब रीटाकी चीख देवायतके मुहमे ही दब गइ ओर उनकी आंख बडी होगइ.. वो छटपटाते अपने होंठ छुडानेकी कोसीस करते अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. ओर उनकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. जब देवायतने लोपलोक छुडालीया.. तब..





रीटा : (दर्दसे मुहको इधर उधर करते) मालीक... बस.. बस.. नीकाल लीजीये.. मुजे नही चुदवाना प्लीज.. बहुत दर्द हो रहा हे.. कीतना बडा ओर मोटा हे आपका मे सहेन नही करपाउगी.. नीकाल लीजीये..

देवायत : (कामुक आवाजमे) रीटा.. उनपे ध्यान मतदे.. बस मुजे चुमती रहे अभी दर्द चला जायेगा..

कहेते देवायत रीटाके बुब्सको ओर उनके होठोको बारी बारी चुमने लगा.. तब कुछ देरके बाद दर्द कम होने लगा ओर रीटा छटपटाते सांत होगइ.. आखीर देवायतका तगडा लंड अपनी चुतमे ले ही लीया.. अभी वो लंडको अपनी चुतमे लेकर देवायतके नीचे लेटीथी..

ओर सरमके मारे देवायतसे नजरे चुराते इधर उधर मुह कर रहीथी.. तब देवायत रीटाको धीरे धीरे कमर हीलाते चोदने लगा.. तब कुछही देरमे रीटाकी दर्द भरी आवाजे सीसकारीयोमे तबदील होगइ.. ओर वोभी कमर हीलाते देवायतका चुदवानेमे साथ देने लगी..





ओर कुछही देरमे देवायत ओर रीटाके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. रीटा देवायतकी पीठ सहेलाते अपनी कमर उछाल उछालके देवायतको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्साने लगी.. तब कुछही देरके बाद वो अकडने लगी.. तब उसने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर उनके साथ लीपलोक करतेही जडने लगी.. फीरभी देवायतने उनको चोदना जारी रखा.. तब देवायत हाथके बल उचा होकर रीटाको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा..





रीटा : (कामुक आवाजमे) मालीक.. बस.. बस.. थोडा धीरे.. आप क्या मस्त चोदते हे.. मेतो आपकी दिवानी होगइ.. बस अबतो में आपसेही चुदवाउगी.. जबभी आपका चोदनेका मन करे मुजेही बुला लीजीयेगा.. मे कोइ बहाना करके आजाउगी.. क्या आपको आज मुजे चोदनेमे मजा आरहा हे..की नही..?

देवायत : (होंठ चुमते) हां रीटा.. तुभी मस्त तरीकेसे चुदवाती हे.. बीलकुल मालतीकी तराह..

रीटा : (हसते) मालीक.. अ‍ेक बार हम दोनोको साथमे चोदीयेगा.. वोभी आपकी दिवानी हे.. मेरी पकी सहेली होगइ हे..

तभी देवायत रीटाको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा तो रीटाकी हालत पतली होने लगी.. ओर हल्कासा चीखने लगी.. ओर देवायत उनपे जुकते छागया.. तो रीटाने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया ओर दोनोके होठ लीपलोक होगये.. ओर देवायतने रीटाकी चुतमे जडतक लंड घुसा दीया.. फीर रुक रुक कर अपनी कमरको जटके देने लगा.. तभी रीटाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर उसे अपने बच्चेदानीपे देवायतका गरम विर्य महेसुस हुआ.. तब वोभी उतेजीत होकर साथमे जडने लगी..

आज रीटाके चहेरेपे संतुस्टीके भाव थे.. कुछही देरमे दोनो सांत होगये ओर अपनी सांसेको दुरस्त करते अ‍ैसेही सांत पडे रहे तबतक रीटा देवायतकी पीठको प्यारसे सहेलाते रही.. देवायतका लंड अबभी रीटाकी चुतमे सख्त होकर घुसा हुआथा.. तब रीटाकोभी थोडा अजीब लगा.. ओर मनही मन खुस होते दुसरी बार देवायतसे चुदवानेकी मनमे कामना करने लगी.. तभी देवायतने प्यारसे गालको सहेलाते रीटाको पुछही लीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२५

आज रीटाके चहेरेपे संतुस्टीके भाव थे.. कुछही देरमे दोनो सांत होगये ओर अपनी सांसेको दुरस्त करते अ‍ैसेही सांत पडे रहे तबतक रीटा देवायतकी पीठको प्यारसे सहेलाते रही.. देवायतका लंड अबभी रीटाकी चुतमे सख्त होकर घुसा हुआथा.. तब रीटाकोभी थोडा अजीब लगा.. ओर मनही मन खुस होते दुसरी बार देवायतसे चुदवानेकी मनमे कामना करने लगी.. तभी देवायतने प्यारसे गालको सहेलाते रीटाको पुछही लीया....अब आगे

देवायत : (हसते) हां रीटा.. अब बता.. तुजे अ‍ैसी आदत कहासे लग गइ.. तेरे खानेका वाकइ मस्त स्वाद हे.. तुजे बार बार खानेका जी कर रहा हे..

रीटा : (सर्मसार होते हसते) मालीक मेने कहाथाना मे मालतीसेभी मस्त खाना खीलाउगी.. बस मेरे लीये यही बहुत हे आपको मेरा खाना अच्छा लगा.. अब मुजे मौका दीजीयेगाकी मे ही आपको अ‍ैसेही खीलाती रहु.. मे कबसे आपके नीचे लेटनेको तैयार थी.. बस सही मौकेका इन्तजार था.. सो आज मील गया..

देवायत : रीटा मुजे तेरी पुरी स्टोरी जाननी हे.. क्या राघवभी तुजे चोदताथानां..?

रीटा : (सरमाते हसते) हां मालीक.. जब छोटीथी तब ही बाप गुजर गया.. ओर मेरी मा ने दुसरी सादी करली.. तबवो मुजेभी साथ लेगइ.. वहा मेरा सोतेला बाप ओर अ‍ेक सोतेला भाइ ही था.. वो उमरमे मुजसे ८ साल बडाथा.. तब मे सीर्फ १७ सालकी थी.. ओर जवानीकी ओर कदम रख रहीथी.. ओर मेरे सोतेले बापने मुजे अच्छी सक्ुलमे दाखला दीलवा दीया ओर मे पढने लगी.. तब भाइने भी कोलेज पुरी करके कोइ कंपनीपे नोकरीपे लग गयेथे..

देवायत : तो क्या उनकी सादी नही हुइथी..?

रीटा : नही.. बस उनके रीस्तेकी बाते चल रही थी.. लेकीन वो मुजे हमेसा कुछ अजीब नजरोसे देखते रहेता था.. तब मे पढाइमे मेथ्स मे थोडी कमजोर थी.. तो मेरे बापुने स्कुलकेही अ‍ेक टीचससे अ‍ेकस्ट्रा ट्युसन रखवा दीया जो हमारी गलीके पीछली गलीमे ही रहेता था.. ओर मे सु्कुलसे घर आकर खाना खाकर वही ट्युसनमे चली जाती थी.. तब वोभी अपनी मांके साथ अकेला ही रहेता था..

देवायत : तो क्या तेरा टीचरभी कुआरा था..?

रीटा : (हसते) नही सादी सुधाथा.. लेकीन उनकी बीवी उनको छोडकर कीसीके साथ चली गइथी.. उनकी माके पैरमे दर्द थातो वो उपरकी मंजीलपे नही आ सकती थी.. ओर हम उनकी उपरकी मंजसीपे ही पढाइ करते थे.. हम दोनोको ही अकेलेमे टाइम स्पेन्ट करनेका काफी मोका मीलने लगा.. ओर आपतो जानते हे अ‍ेक जवान लडकी ओर अ‍ेक मर्द ज्यादा टाइम अकेले रहेते हेतो क्या होता हे.. बस यही हमारे साथभी हुआ..

देवायत : (हसते) हंम.. कतलब दोनो प्यार करने लगे..

रीटा : (हसते) क्या मालीक.. मर्दके लीये प्यारकातो अ‍ेक बहाना हे.. असलमे उनको कुछ ओरही चाहीअ‍े.. बस.. अ‍ेक दिन मुजे मेथ्समे पास करवानेकी लालच दे दी.. ओर बदलेमे उसने मुजे प्यारके लीये कहा.. तब मेरी भी जवानी उछल रहीथी.. मुजेभी खुजली हो रहीथी.. ओर मेने उनको हां केह दीया..

उसी दीन पढाइ छोडके दोनोही बहेक गये.. ओर हमारे बीच सबकुछ हो गया.. उसी दिन मेरे टीचरने मेरा कौमार्य भंग कीया.. फीरतो ये सीलसीला रोजके लीये चल पडा.. मेरे जातेही पहेले हम दोनो अपने तनकी प्यास बुजाते फीर थोडी देर पढके मे घरपे वापस आजाती..





देवायत : अच्छा.. तो फीर तुजे इनकी आदत वहासे लग गइ.. तो फीर उनसे सादी करलेती..

रीटा : (सरमाते धीरेसे) हां हमने भी वोही तैय कीयाथा.. लेकीन मेरे सरीरमे बदलावकी वजहसे मांको पता चल गया.. ओर उसने भाइको मेरे उपर नजर रखनेको कहा.. ओर अ‍ेक दिन भाइने हम दोनोको रंगे हाथो चुदाइ करते पकड लीया.. उसी दीन भाइने उन टीचरको खुब मारा.. ओर मेरा ट्युसन छुडवा लीया.. लेकीन भाइने घरपे कीसीको ये बात नही बताइ.. मम्मीने पुछा फीरभी उनको कुछ नही कहा.. तब मेने राहतकी सांस ली.. लेकीन मुजे क्या पताथा की उनके दिमागमे क्या चल रहा हे..

देवायत : क्यु नही बताइ..? कोइ खास वजह..? क्याथा उनके दिमागमे..?

रीटा : (हसते) मालीक बीना वजह कोइ रहेम करता हे..? उनकी भी नीयत ठीक नही थी.. वोतो मे माके साथ इधर आइ तबसे ही सुरुसे मुजपे घात लगाके बैठाथा.. ओर अ‍ेक दिन मम्मी पापा दो दीनके लीये कीसी रीस्तेदारके यहा गांवमे सादीके लीये गये.. तब उसे मौका मीलही गया.. ओर उसने चुपकेसे दो दीनकी नोकरीसे छुटी लेली.. जब मम्मी पापा चले गये तो नोकरीसे घर आगये.. असलमे वो नोकरीपे गये ही नही थे.. ओर घरपे आकर सबसे पहेलेतो दरवाजा बंध करके लोक करदीया..

ओर सीधेही मेरे रुममे आगये.. तब मे नहाकर नीकलीही थी ओर उसने मुजे तभी दबोच लीया.. मेने उनको भाइ बहेनका हवाला दीया.. तो मुजे मम्मी पापाको टीचरके साथ चुदाइकी बात केहे देगे.. कहेके बल्ेकमेइल करते मुजे बेडपे पटक दीया.. अ‍ेकतो मे नहाकर आइथी तो सीर्फ टोलीयाही लपेटाथा.. ओर उसने टोलीया खीचलीया ओर मेरे उपर चड गया.. बस उसी दिन भाइने मुजे जबरदस्ती चोद लीया..





ओर जबतक मम्मी पापा वापस नही आये वो मेरी चुदाइ करते रहे.. उन दो दीनमे भाइने मुजे सातसे आठ बार चोद लीया.. घरका अ‍ेकभी कौना बाकी नही रखा.. खाना बनातेभी कीचनमे मुजे चोद लेते..





ओर भाइका लंडभी टीचरके लंडसे बडा था.. सुरुआतमे दो बार मेने उसे ना नुकुर की.. फीरतो मुजेभी अच्छा लगने लगा.. ओर मेने इस रीस्तेको अपना लीया.. फीर जबभी हम दोनोको मौका मीलते दोनो अ‍ेक होजाते..





भाइ ओर मे अक्सर देर रात घरकी छतपे चले जाते ओर दोनो मजेसे कभी तीन बजे तक.. तो कभी कभी चार बजे तक चुदाइ करते.. ओर वापस आकर सोजाते.. तब अ‍ेक दिन मुजे उल्टीया हुइ तो मम्मीने देख लीया.. ओर उनको संका हुइ तो मुजे डोक्टरके पास लेगइ.. ओर चेक करवाया..

तो मे भाइसे प्रेगनेन्ट हो चुकीथी.. घर आकर मम्मीने मुजे खुब मारा.. लेकीन मेने भाइका नाम नही लीया.. ओर भाइने ही बीचमे आकर मम्मीसे मुजे बचाया.. फीर मम्मीने पापाको कहेकर आनन फाननमे लडका ढुढंकर मेरी सादी इन छोटुसे करवादी.. मेरा अभी जो बच्चा हेनां.. वो मेरे भाइकी नीशानी हे.. फीर तो भाइ ओर मुजे खुलकर मौके मीलने लगे.. मेरी सादीके बादभी मेरा भाइके साथ रीलेशन चालु रहा..

देवायत : (हसते) तो क्या तेरे मम्मी पापाको इसका पता नही चला.. की ये बच्चा कीसका हे..?

रीटा : (फीकी मुस्कानसे) मालीक.. क्या फर्क पडता हे..? जब लडकीकी सादी होजाती हेना तो कोइ नही पुछता..की बच्चा कीसका हे.. सब इस छोटुका बच्चाही समजते हे.. फीरतो मे जबभी मायके जाती या मुजे भाइसे चुदवानेकी इच्छा होती.. तब मायके जाकर भाइसे कोइना कोइ जुगाड करके उनसे चुदवा लेती.. मेने हमारी सादीके बादभी भाइसे रीस्ता रखाथा.. मुजे भाइसे चुदवानेकी आदत जो पड गइ थी.. लेकीन अब मेने मायके जानाही छोड दीया.. मे उस घरसे सभी रीस्ते खतम करके आइ हु..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) क्यु..? कोइ खास वजह..?

रीटा : (सरमाते हसते) आइ.. सीससइइइ.. अभीभी अंदर सख्त लग रहा हे.. मालीक.. मुजे धीरे धीरे चोदीयेनां हम चुदाइ करते बाते करते हे..

देवायत : (धीरे कमर हीलाते चोदते) हां अब बता.. मायकेसे रीस्ता क्यु तोड दीया..?

रीटा : (अपनी कमर हीलाते) हां.. मालीक.. बस अ‍ैसेही.. चोदते रहीये.. सुनीये.. जब बापु गुजर गये तो घरकी सारी जीम्वेवारी भाइके कंधोपे आगइ.. तो बापुके गुजरजानेके बाद अ‍ेक दिन मे माइके गइ.. तब भाइने जुगाड करके मुजे दिनमे ही अपने रुममे बुलाकर चोद लीया.. तो उस दिन छोटु मुजे वापस लेने नही आयातो मुजे रातमे वही रुकना पडा.. तो मेरी माका चहेरा बदल गया.. ओर वो नीरास होगइ.. तब मेने उनपे कोइ खास ध्यान नही दीया.. ओर उस रात मे माके साथ ही बच्चेके साथ सोगइ..

जब रातमे बच्चा दुध पीनेके लीये उठा.. तब मेने उसे दुध पीलाया ओर वापस सुला दीया.. तब देखातो मा मेरी बगलमे नही थी.. तो मेने सोचाकी कही पीसाब बीसाब करने गइ होगी.. लेकीन काफी देरके बादभी मा नही आइतो मे उठकर बहार देखने गइ.. तो भाइके रुमसे मुजे कुछ सीसकारीयोकी ओर धीरेसे बाते करनेकी अजीब आवाज सुनाइ दी.. तब मे समज गइकी भाइके रुममे जरुर कीसीके साथ चुदाइ हो रही हे.. जब मेने बहार जाके खीडकीसे देखातो मेरी मां मेरे भाइके नीचे लेटी हुइ थी ओर भाइ उसे चोद रहा था..





ओर दोनो बातेभी कर रहेथे.. तब उनकी बातोसे लगाकी दोनो मा ओर बापुकी सादीके कुछ दिन बाद ही रीलेशनमे आगये थे.. उनके बीच कइ दीनोसे अवैध रीस्ता था.. तभीतो भाइ सादी नही कर रहेथे.. मेरा भाइ इतना कमीनाथा की वो मेरे साथ रीलेशनमे अया उनसे पहेलेही वो मा को चोद रहाथा..

फीरतो वो हम मां बेटी दोनोको चोद रहाथा.. ओर मे वापस अंदर आगइ.. ओर उनका दरवाजा खुलवाया तो मा ओर भाइ दोनोही गभराये हुअ‍े थे.. दोनोके कपडे अबभी अस्त व्यस्त थे.. तब दोनोको मुजसे कहेनेलीये कुछभी नही था.. ओर मे मेरे रुममे आकर सोगइ..

देवायत : तो क्या सुबह तेरी मां ने तुजे कुछभी नही कहा..?

रीटा : (फीकी मुस्कानसे) मालीक वो क्या कहेती..? भाइतो सुबहही जल्दी घरसे नीकल गया.. तब माने मुजसे इतनाही कहाकी तेरे बापुके साथ सादीके कुछही दीनोमे हम दोनोमे मंदिरमे जाकर सादी करली हे.. तेरे भाइने मेरी मांग भरदी हे.. असलमे मे तेरे भाइकी ही बीवी हु.. तेरे बापु मुजे वो सारीरीक सुख देनेमे सक्षम नही थे.. तो मेने तेरे भाइसे सादी करली..

देवायत : हंम तो फीर.. तुम वापस घर आगइ..

रीटा : तो क्या करती.. मेने माको केह दीयाकी अब हमारा रीस्ता खतम.. मेने इस बच्चेके बोरेमे माको नही बताया.. वरना उनका घरभी टुट जाता.. ओर मे वापस अपने घर आगइ.. इस दिनके बाद मे वहा कभी नही गइ.. कुछ दिन पहेलेही मुजे अ‍ेक रीस्तेदारसे पता चलाकी माको भी भाइसे अ‍ेक लडकी हुइ हे.. मालीक.. बुहत मजा आ रहा हे थोडा जोरोसे चोदीयेनां..

देवायत : तो फीर राघवकी चुंगालमे तुम कब आगइ..

रीटा : (हसते) मालीक आपतो जानतेहे मुजे इनकी आदत लग चुकीथी.. ओर उपरसे छोटुभी मुजसे ठीकसे नही चोद पाता.. उपरसे उसने सरपंचसे कुछ पैसेभी लीये थे.. ओर हम दोनो उनके घरपे ही काम करते थे.. तो छोटु उनको पैसा नही लौटा सका.. ओर बदलमे अ‍ेक दिन सरपंचने मुजे चोद लीया.. फीरतो आये दीन वो मुजे बुलाकर चोदने लगा..

ओर उपरसे कही दिनोसे मेभी प्यासी थी.. तो उसमे मेरीभी रजामंदी थी.. लेकीन अ‍ेक दिन हम दोनोही चुदाइ करते पकडे गये.. तो मेने छोटुको केह दियाकी कर्जके बदले ये मेरा फायदा उठाता हे.. ओर छोटुने वो नोकरी छोडदी.. तब अ‍ेक बार फीर मे बीना चुदाइके दिन काटने लगी.. मालीक अब मे इनके बीना नही रेह सकती..

देवायत : (थोडा जोरोसे चोदने लगा) तो.. फीर.. छोटुकी टांग टु..ट.. गइ.. तो इतने दिन चुदाइके बगैर कैसे रेह पाइ..?

रीटा : (सरमाते हसते) नही रेह पाइ.. ओर मे हमेसा चुदवाती रही.. बस आप कही नाराज ना होजाये.. वरना नामभी बता देती.. आह.. आह.. सीइइइइ मालीक.. धीरेसे.. क्या मस्त चुदाइ करते हो.. अबतो मे सीर्फ आपसेही चुदवाउगी.. ओर जोरसे चोदीयेना मेरा होने वाला हे.. आपतो दो दो बार जडा देते हो..

देवायत : (जोरोसे चोदते) अरे नाम बताना मे नाराज नही होता.. मुजे तेरे कीसीभी रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही बता कीनसे चुदवाती थी..

रीटा : (सरमाते हसते) मालीक.. वो.. वो छोटे मालीक मेरी प्यास बजाते हे.. ओर तीन बारतो भानुभाइने भी मुजे चोद लीया हे.. लेकीन अब वो नही आते.. तो छोटे मालीकही मेरी प्यास बुजाते हे.. मुजे जबभी इच्छा होती हम दोनो वो ट्युबवेल वाली रुममे चले जाते.. ओर यहाकी ज्यादातर मजदुरन हमारे छोटे मालीकपे फीदा हे.. ओर उनसे अपनी प्यासभी बुजा चुकी हे.. हें..हें..हें..

तब देवायत रीटाको जोरोसे चोदने लगा तो रीयाने उसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर लीपलोक करते जडने लगी.. अ‍ैसेही दोनोके बीच धमासान चुदाइ होती रही.. ओर देवायतने अ‍ेक बार फीर रीटाकी चुतको अपने पानीसे भरके हरी भरी करदी.. तब रीटाकी हालत पतली हो चुकीथी.. ओर दोनोने बाथरुममे जाकर अपने आपको सही करलीया.. तब रीटाकी चाल बदल चुकीथी.. ओर वो अपने दोनो पैर सीकुडके लंगडाते चल रहीथी..





रीटा : (सरमाते हसते) मालीक आजतो आपने मेरी हालत खराब करदी.. मेरी अ‍ैसी हालततो कीसीने नही की..

देवायत : (अपनी ओफीसमे आते) रीटा.. ये ले कुछ पैसे तेरे काम आयेगे.. आजतो तुमने मुजे खुस कर दीया.. मुजे तेरे कीसीभी रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. बस मे जब बुलाउ तब आजाना..

रीटा : (हसते) थेन्क्स मालीक.. मुजे पैसे नही चाहीये.. आपकी हम पर बहुत महेरबानी हे.. बस मेरा अ‍ैसेही खयाल रखीयेगा.. जबभी मौका मीले मुजे बुला लीजीयेगा मे हाजीर होजाउगी.. चलो अब चलती हु.. आजतो आराम करना पडेगा.. हें..हें..हें..

कहेते रीटा थोडा लंगडाते अपने घरकी ओर चली गइ.. तब उनके चहेरेपे आज पुरी तराह संतुस्टीके भाव थे.. तबतक दो पहोर होनेको आइथी तो देवायतभी खेतोसे नीकल गया ओर सीधा हवेलीपे आगया.. आकर सीधाही बाथरुममे धुस गया ओर नहाकर कंपलीट होगया तब मंजु रुममे आगइ.. ओर देवायतपे जुठा गुसा करते उनको मारनेके लीये दोडी तब देवायत समज गयाकी वो रीटाकी चुदाइ करके आया हे वो बात मंजुको पता चल गइ हे.. ओर वो हसते हुअ‍े मंजुसे बचनेके लीये बेडका चकर लगाता रहा..

मंजुला : (जुठे गुसेसे) आप कीतने कमीने हो.. उन ठरकी कोतो छोड देते.. कमीनीने मेरे पतीको लुट लीया..

देवायत : (जोरोसे हसते) अरे मेने कहा उनको कहाथा.. वोतो सामनेसे आइथी..

तब देवायत रुक गया तो मंजुने उनको पकडलीया ओर देवायतके सीनेपे हसते हुअ‍े दांत पीसके मुके मारने लगी.. तब देवायतने भी हसते हुअ‍े मंजुको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया तब मंजुभी हसने लगी.. ओर उसने देवातके होठ चुमलीये.. ओर उनके सीनेमे सर छुपाते कहेने लगी..

मंजुला : जानु.. सोरी.. मेतो अ‍ैसेही आपके साथ मजाक कर रहीथी.. बस यहीतो करना हे.. जानु वो बहुतही दुखी ओर कामुक लडकी हे.. सुरुमे उनके साथ बहुत बुरा हुआ हे.. तभी वो अ‍ैसी होगइ.. वैसेतो अभी बारा भी नही बजे आप इतनी जल्दी घर कैसे आगये..?

देवायत : (बाहोमे भीचते) मंजु.. मुजे सुधीरकी क्लीनीकपे जाना हे.. लगता हे अब वक्त आगया हे.. की हमे सबको समजाने जाना पडेगा..

मंजुला : (सीनेको सहेलाते) जानु.. अभीतो आज जाकर उन दोनोको समजादो.. की तुम दोनोकी सादी करदी जायेगी.. लेकीन हमे इस बारेमे बात करने अ‍ेक बार बाबाको मीलने जाना पडेगा.. आप फटाफट खालो.. की वापस आकर खाओगे..? अभी पापाभी नही आये.. लगता हे रमेशभाइके पास बैठ गये हे..

देवायत : (हसते) हां वही देखकर आउगा चल चलता हु.. सुधीरने उन दोनोको रोकके रखा होगा..

मंजुला : जानु.. उन दोनोको प्यारसे समजाना.. हम उन दोनोकी सादी करदेगे.. अभी आप उनसे बात करलो.. अगर जरुरत पडी तो मे उनकी मम्मीसेभी बात करके उनको समजाउगी.. जाइअ‍े.. ओर जल्दी वापस आइअ‍े.. तबतक पापाभी आजायेगे फीर हम सब साथमे लंच करते हे..

ओर देवायत मंजुके होठोको चुमकर वहासे बाइक लेकर नीकल गया ओर सीधाही सुधीरकी क्लीनीकपे आगया.. तो वहा सुधीर मुना ओर उनकी बहेन बरखाको बीठाकर अपनी ओफीसमे बैठाथा तब उन दोनोके चहेरेपे कुछ गभराहटके भाव थे.. ओर देवायतको देखतेही दोनो थोडा ज्यादा गभरा गये.. ओर अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर रोने जैसी सुरत बनाली.. तब देवायतने जातेही मुनाकी पीठपे प्यारसे हाथ रखा ओर दोनोकी ओर मुस्कुराते अंदर सुधीरके पास चला गया..

सुधीर : (हसते) आगये भाइ.. मेने दोनोको रुकनेके लीये कहा हे तो बैठे हे मेने अभी उसे कुछ नही कहा आपही उनसे बात करलो.. चाबी मुनाके पास हे.. वो क्लीनीक बंध करके चले जायेगे.. चलो मे चलता हु..

देवायत : हां सुधीर तुम जाओ मेभी उनसे बात करके नीकलता हु.. बस कुछ अकेलेमे बात करनी हे..उन दोनोको अंदर भेजदे..

कहातो सुधीर नीकल गया.. तब कुछही देरमे दोनो भाइ बहेन थोडा गभराते देवायतके पास आगये.. तो देवायत सुधीरकी चेरपे बेठते मुनाको दरवाजा बंध करनेको कहेता हे तब मुना ओफीरका दरवाजा बंध करके वापस आया तो देवायतने दोनोको सामनेकी चेरपे बेठनेके लीये कहा.. तब दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर डरके मारे धीरेसे बैठ गये.. ओर देवायतकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगे.. तभी..

देवायत : (हसते) अरे डरते क्यु हो..? आरामसे बैठो मुजे सीर्फ तुम लोगोसे बातही तो करनी हे.. क्या तुम दोनो रमेशके यहा काम करता हे वो विभुके लडके होनां..? क्या नाम हे तुम दोनोका..?

मुना : (थोडा गभराते) जी.. ठाकुरसाहब.. मे मुना.. ओर ये मेरी बहेन बरखा हे..

देवायत : हंम.. दोनो कहा तक पढे हो..?

मुना : जी.. दोनोही ग्रेज्युअ‍ेशन कर चुके हे.. ठाकुरसाहब अब सहेरमे सरकारी नोकरी मीलनातो मु्सकील हे.. इसीलीये हम दोनो भाइ बहेन सुधीर अंकलके यहा नोकरी करते हे.. आपतो हमारे घरकी परीस्थीतीके बारेमे सब जानतेही हे.. बापुको अ‍ेक बार दिलका दौरा पड चुका हे.. तो उनको हम भारी काम करने नही देते इसीलीये वो रमेशकाका के यहा नोकरी करते हे..

देवायत : (हसते) चलो अच्छा हुआ.. तुम दोनो अपने बापुके लीये इतनातो अच्छा सोचते हो.. तो अब तुमने अपनी सादीके बारेमे क्या सोचा हे.. देख अबतो तेरी बहेनभी सादीके लायक हो गइ हे.. तो इनके बारेमे नही सोचोगे..?

मुना : (बरखाकी ओर अ‍ेक नजर डालते) जी..

बरखा : (नजर जुकाते धीरेसे) ठाकुरसाहब.. मे सादी करना नही चाहती.. आप भाइको टेन्शन मत दीजीये..

देवायत : (हसते) हंम.. कोइ खास वजह..? इसमे टेन्शन देनेकी क्या बात हे.. मे सीर्फ पुछ रहा हु..

बरखा : (नजर नीचे करती बैठी रही) नही.. बस.. मे इस घरको छोडके कही नही जाना चाहती..

देवायत : हंम.. क्या घरके लोगोको इतना प्यार करती हो..? की सादीभी नही करोगी..

बरखा : (सरमाते) जी.. आप यही समजलो.. लेकीन मे सादी नही करुगी..

मुना : (थोडा जीजकते) हां.. ठाकुरसाहब.. हम दोनो भाइ बहेनने फैसला करलीया हे की हम सादी नही करेगे.. ओर हमारे घरका खयाल हम दोनोही रखेगे.. हमे बापुको ओर काम नही करने देना..

देवायत : (हसते) तो ठीक हे.. मुजे खुसी हुइ.. की तुम दोनोने अपने परीवारके लीये इतना कुछ सोच रखा हे.. लेकीन सादीभी तो जरुरी हे.. तुम दोनो भाइ बहेन अभी अभीतो जवान हुअ‍े हो.. तो फीर पुरी जींदगी कैसे काटोगे..? मेने तो दो दो सादीया करली हे.. ओर अभी तीसरी बीवी ला रहा हु.. हें..हें..हें..

मुना : (नजर जुकाते मुस्कुराते) जी.. लेकीन ठाकुर साहब आपतो राजा हे.. तो आप कर सकते हे..

देवायत : हा तो मेतो कर ही रहा हु.. मेरा मतलब.. आप दोनोभी करलो.. मेरा अ‍ेक सजेसन हे.. अगर मानोतो..?

मुना : (पहेली बार सामने देखते) क्या..? हम आपका सजेसन क्यु नही मानेगे..? जरुर मानेगे कहीये..

देवायत : (हसते) थेन्क्स.. अगर तुम दोनो बहार सादी करना नही चाहते.. तो फीर तुम दोनो आपसमे ही सादी करलो.. ताकी कीसीको घर छोडके जानेकी जरुरत ही ना पडे.. क्या कहेते हो..?

बरखा : (चोंकते अ‍ेकदम सर्मसार होते) व्होट..? ठाकुरसाहब ये आप क्या केह रहे हे..? अ‍ैसा कैसे हो सकता हे.. हम दोनो तो भाइ बहेन हे.. आपने अ‍ैसा सोचाभी कैसे..?

देवायत : (कातील मुस्कानसे) बरखा.. ज्यादा भोली मत बनो.. तो क्या भाइ बहेन आपसमे प्यार नही कर सकते..? हंम..? मुजे पता हे तुम दोनो अ‍ेक दुसरेको प्यार करते हो.. ओर आपसमे दोनोके बीच जीस्मानी रीस्ताभी हे.. तो फीर इसमे मेने क्या गलत कहा.. क्या मे जुठ बोल रहा हु..? मुजे तुम दोनोके बारेमे सबकुछ पता हे.. ओर मे इस माममलेमे आप दोनोकी मदद करने आया हु..

कहातो मुना ओर बरखा दोनोकी गांड फट गइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने गभराते देखने लगे.. जैसे उनकी कोइ बडी चोरी पकडी गइ हो.. ओर बरखाकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. दोनोही सोक्ट होते अपनी नजर नीचे करते आंसु बहाने लगे.. तब देवायतने उसे कहा..

देवायत : देखो मुना.. ओर बरखा.. मे ये रीस्तेको गलत नही मानता.. अगर तुम दोनो चाहोतो मे तुम दोनोकी मदद कर सकता हु.. तुम दोनोकी आपसमे सादी करवा सकता हु.. बस अ‍ेक बार मुजे तुम दोनोके मुहसे हा सुननी हे..

मुना : (आंसु पोछते) ठाकुरसाहब.. क्यु हमे सर्मीन्दा कर रहे हे.. हम मानतेहे की हम अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे.. लेकीन आजके जमानेमे ये सब पोसीबल नही हे.. पहेलेतो हमारे घरवाले ही हमे मार डालेगे.. ओर अगर वो मानभी गयेतो गांववाले को हम क्या मुह दीखायेगे.. हमारे बापुकी क्या इजत रेह जायेगी.. हम दोनोको हमारे हालपे ही छोड दीजीये.. हमारे साथ अ‍ैसा मजाक मत कीजीये..

देवायत : (अ‍ेक नजरसे मुनाकी ओर देखते) मुना.. मे कोइ मजाक नही कर रहा.. मे सच कहेता हु.. ओर ये गांवमे सीर्फ तुम दोनोही अ‍ैसे रीस्तेसे नही बंधे हो.. मे इसी गांवमे बहुत लोगोको जानता हु.. जो अ‍ैसे रीलेशनमे हे.. ओर मे इस रीलेशनको गलतभी नही मानता.. बस अ‍ेक बार अपने मुहसे हां कहेदो.. बाकी मे सब देख लुगा..

बरखा : (सर्मसार होते नजरे जुकाते धीरेसे) ठाकुरसाहब.. ये सच हे.. मे मेरे भाइको बहुत प्यार करती हु.. ओर हमारे बीच सभी रीलेशन हे.. अगर ये पोसीबल हे तो मे भाइके साथ सादीके लीये तैयार हु..

मुना : (आस्चर्यसे देखते) बरखा..? फीर हमारे बा बापुजीके बारेमे सोचा हे.. उनपे क्या बीतेगी..

बरखा : भाइ.. वैसेही हम दोनोके रीस्तेके बारेमे सबको पता चलही जायेगा.. तो अब बातको छुपानेका कोइ मतलब नही.. मे दुनीयासे लड जाउगी मुजे कीसीकी परवाह नही हे.. ओर मुजे ठाकुरसाहबपे पुरा भरोसा हे.. वो हम दोनोकी सादी जरुर कवादेगे.. उन्होने कुछ सोच समजकेही बात की होगी..

देवायत : (हसते) साबास बरखा.. बस मुजे यही हीमत देखनी थी.. अब तुम दोनो फीकर मत करो.. मे तुम्हारे बा बापुजीसे बात कर लुगा.. बस मुजे तुम दोनोका साथ चाहीये.. क्युकी मुजे गांवमे बहुत सारे लोगोको इस नये रीस्तोके बारेमे कन्वीस कराना हे.. बस मुजे तुम्हारी मदद चाहीये.. खास करके मुनाकी..

मुना : (सरमाते हसते) ठाकुरसाहब.. अगर आप हमारी सादी करवाते हो तो मे आपकी मदद कैसे नही करता..? कहो मुजसे क्या मदद चाहीये..

बरखा : (थोडा सरमाते मुस्कुराते) जी.. ठाकुरसाहब अगर मेरी भी कुछ मदद चाहीयेतो मुजसे भी कहेना..

देवायत : (हसते) चलो ठीक हे.. अब जबभी अ‍ैसे मामलोपे गांवमे चर्चा होगी तुम दोनोको मुजे समर्थन देना हे.. बस.. बाकी मे सब सम्हाल लुगा.. अब तुम दोनो घर जाओ.. मे कुछ सोचता हु क्या हो सकता हे.. अब तुम्हारे बा बापुजीको भी मनाना पडेगा.. तबतक के लीये बी केरफुल.. अपना ध्यान रखना.. समज गयेनां..? ओर मुना.. तुम सामको मेरे खेतोपे आना.. मुजे तुमसे कुछ कामभी हे.. ओर अपनी बहेनका खयाल रखना..

बरखा : (खुस होकर खडी होते) जी ठाकुरसाहब.. थेन्क्यु वेरी मच.. हमारे प्यारको समजनेके लीये..

कहेते बरखा खडी होगइ.. ओर देवायतके पास आकर उनके पाव छुने लगी.. फीर सरमाते हसते हुअ‍े बहार चलते अपने घरकी ओर चली गइ.. तो मुनाभी हसते हुअ‍े देवायतका पांव छुने लगा.. तब देवायतभी खडा होगया ओर मुनाके कंधेपे हाथ रखते उनसे धीरसे बाते करते बहार जाने लगा.. तबतक बरखा अपने घरकी ओर चली गइ थी..

देवायत : (हसते) देख मुना.. मुजे कुछ जानकारीया चाहीये.. तो बी केरफुल.. इस बारेमे कीसीको पता नही चलना चाहीये.. सुधीर रमेशकोभी नही.. समज गयेनां..? बाकी मे खुद तेरी सादी तेरी बहेनसे करवाउगा..

मुना : (बहुत खुस होते हसते) जी ठाकुरसाहब समज गया.. आप जोभी कहोगे मे करुगा.. सुक्रीया..

देवायत : (हसते) हंम.. चल ठीक हे मे चलता हु.. सामको उधर खेतोपे आजाना..

कहेते देवायत हवेलीपे आगया.. ओर मुना क्लीनीक बंध करके अपने घर खुस होते हुअ‍े चला गया.. देवायत घरपे आया तब राजीवभी आ चुकाथा.. ओर सब लोग उनकाही इन्तजार कर रहेथे.. तब देवायत दोडकर अपने रुमके बाथरुममे फ्रेस होने चला गया तो सब हसने लगे.. ओर खानेके लीये खडे होकर डाइनींगकी ओर जाने लगे.. तबतक देवायतभी फटाफट फ्रेस होकर बहार आकर सबके साथ बैठ गया..

मंजुला : (हसते) देवु.. बहुत देर करदी..? कही फस गये थे क्या..?

नीर्मला : (हसते) फस नही गया.. अबतो बहेन भाइकी सादी करवाकर फ्रि होगया हे.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) हां भाइ.. अब कामभीतो देखना हे.. ओर गांवका कामभी देखना होता हे.. तो देरतो लगेगी ही.. देवु बेटा.. कल मुजे ओर नीमुको भुमीके घर छोड देना.. वहा वो बेचारी अकेली होगी.. क्युकी उनकोभी सादीकी तैयारीया करनी हे..

चंदा : क्या भैया.. अभीतो सीर्फ दो दिन ही हुअ‍े हे.. अ‍ेक दिन रुक जाइअ‍ेनां.. परसो चले जाना..

भावना : (देवायतकी ओर कातील स्माइल करते) मोम.. मेतो यही रहुगी.. इस बच्चीको लेकर कहा घुमुगी..? फीर सादीमे इनके साथही आजाउगी.. फीर हम हमारे घर चले जायेगे..

मंजुला : (हसते) तो चंदादीदी आप ही देवुके साथ चली जाना.. सृतीके लीये सीर्फ मंगलसुत्र ओर तीन चार सारीया ही तो लेनी हे.. ओर आप खरीदी करनेमे मास्टर भी हे.. तो मे विजयको यही सम्हाल लुगी.. हम दोनो बहेने घरपेही रहेगी.. वैसेभी आप अपनी सादीके बाद बहार नही नीकली.. तो दोनो घुमके आइअ‍े.. हें..हें..हें..

चंदा : (सर्मसार होते हसते) नही.. मंजु तुम साथ चली जाओ.. मे विजयको सम्हाल लुगी..

देवायत : (हसते) ठीक हे.. वो तुम दोनो साम तक आपसमे डीसाइड करलेना कीसको आना हे.. वरना मे दया ओर रजीयाको लेकर चला जाउगा.. हें..हें..हें..

दया : (रोटीया देते जोरोसे हसते) हां.. हां.. मालीक हम दोनो रेडी हे.. हें..हें..हें..

कहातो सब जोरोसे हसने लगे.. तब..

मंजुला : (जोरोसे हसते) ओ.. खयाली पुलाव.. तो मे ओर चंदादीदी क्या यहा भजन करने आइ हे.. हें..हें..हें..

अ‍ैसेही मजाक मस्तीमे प्लीनींग करते सब लंच कर लेते हे.. फीर सब अपने अपने रुममे आराम करने चले जाते हे.. तो देवायत अपने रुममे जातेही सो गया.. तब कुछ देरके बाद चंदा ओर मंजु अपने रुममे आइतो देवुको सोते हुअ‍े देखते ही हसने लगी.. ओर दोनो बेडपे बैठकर बाते करने लगी..

चंदा : (सरमाते हसते धीरेसे) मंजु.. तुमही चली जाना.. वरना वापसी मे मुजे ये पका.. हमारे घरपे ले जायेगे.. ओर वहा घरपे भी कोइ नही हे.. तो पका वहा ये मेरी हालत खराब करेगे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) दीदी.. तो अच्छा हेना.. वैसे अपनी सादीके बाद आप इनसे ठीकसे मीली भी नही हो.. तो दोनो आरामसे सामको चले आना.. ओर अब आप भी बच्चेके बारेमे कुछ सोचीये..

चंदा : (सर्मसार होते हसते धीरेसे) नही मंजु.. अभी नही.. हम बादमे सोचेगेनां..? क्या ये जरुरी हे..? मेरा बेटा अब विजय हेनां.. मे उसे अपना बेटा मानकर पालुगी..

मंजुला : (धीरेसे) दीदी.. वोतो आपहीका बैटा हे.. लेकीन आपसे अ‍ेक बच्ची भी होगी.. अपनी भावुके बेटे भावेशकी बहु.. आप समज गइनां.. आप अभीसे प्लानींग करलो.. भलेही दो तीन साल अभी मजे करलो.. लेकीन बादमे करलेना..

चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे) मंजु.. क्या सचमे मुजे लडकी होगी..? तुजेतो सब पता चल जाता हे.. तो यही होगा.. लेकीन क्या इसके लीये सही समय आगया हे..? हंम.. तुम मुजे बताना.. तो मे कर लुगी..

मंजुला : दीदी बस अभीसे कोसीस सुरु करदो.. सायत दो सालमे कुछ हो सके..

चंदा : (सरमाते हसते) क्या दो साल..? अरे बाबा ये अंदर इतना पानी छोडते हे.. दो साल क्या अ‍ेकही बारमे मुजे प्रेगनेन्ट कर देगे.. अच्छा हे मे आइपील लेती हु.. मंजु.. अभी अ‍ेक साल रहेनेदे.. मे इनके साथ मजे करना चाहती हु.. फीर कर लुगी..

मंजुला : (हसते) ठीक हे दीदी.. लेकीन कल आपही इनके साथ चली जाओ.. फीर वापसीमे दोनो आपके घर होते आना.. यहा महेमानोकी वजहसे हम इसे ठीकसे मीलभी नही पाती.. आप दीनमे मजे करलो.. मे रातमे इनसे ठीकसे मील लुगी.. मेरा भी बहुत मन कर रहा हे.. कल हम दोनोही इनको जगाअ‍ेगी.. आप रातके लीयेभी तैयार रहेना.. अभीतो सो गये हे.. वरना अभी इसे लुट लेती.. हें..हें..हें..

दोनोही बाते करती वही देवायतके पास लेट गइ.. ओर नींदकी आगोसमे चली गइ.. तो नीर्मलानेभी राजीवको दवाइ पीलाकर सुला दीया ओर भावनाके पास जाकर लेट गइ.. तब भावनाभी अपनी बच्चीको दुध पीलाते नींदमे चली गइ.. तो नीचे कीचनमेभी दया रजीया ओर चंपाभाभी तीनो सब काम नीपटाकर अपने रुममे आराम करने चली गइ.. तो सहेरमेभी भानुभी अपना काम नीपटाकर बंगलेकी सफाइ करवा रहाथा..

इसी बीच.. गौवामे दोनो कपल आपसमे मस्तीया करते अपने हनीमुनका लुप्त उठा रहेथे.. अबतक पुनम धिरेनके साथ छे सात बार चुदाइ करवाके पुरी तराह धिरेनको अपना चुकीथी.. ओर वोभी धिरेनके साथ घुलमीलके उनकी मस्तीया करने लगी थी.. जब दोनो अकेले होते तो वोभी धिरेनके साथ खुलकर कामुक बाते ओर उनकी छेडखानी करते धिरेनको रातकी चुदाइके लीये उक्सानेकी कोसीस करने लगी..

इसी तराह साम होगइ.. तो सबने फ्रेस होकर चाइ नास्ता करलीया.. तब देवायत अपने खेतोपे चला गया.. तो आधे घंटेके बीच भानुभी छोटुको लेकर आगया.. तब दोनोही सीधे खेतोपे चले गये.. ओर कुछ सामान वही अ‍ेक रुममे रखकर भानुने छोटुको कहेकर रीटाको चाइके लीये कहेते अपने घर आराम करने भेज दिया.. ओर खुद देवायतके पास आकर सीधे बाथरुममे जाके फ्रेस होकर सामने बैठ गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२६

इसी तराह साम होगइ.. तो सबने फ्रेस होकर चाइ नास्ता करलीया.. तब देवायत अपने खेतोपे चला गया.. तो आधे घंटेके बीच भानुभी छोटुको लेकर आगया.. तब दोनोही सीधे खेतोपे चले गये.. ओर कुछ सामान वही अ‍ेक रुममे रखकर भानुने छोटुको कहेकर रीटाको चाइके लीये कहेते अपने घर आराम करने भेज दिया.. ओर खुद देवायतके पास आकर सीधे बाथरुममे जाके फ्रेस होकर सामने बैठ गया....अब आगे

देवायत : (हसते) क्यु..? थक गये..? हो गया सब..?

भानु : (हसते) हां यार.. सब काम खतम करके छोटु ओर दो मजदुरको लेकर पुरा घर साफ करवाया.. यार वहा लखनको रहेने भेजदो.. कमसे कम घरतो अच्छा रहेगा.. कीतनी मीटी भरी हुइ थी.. बस अब ओफीस साफ करवानी हे..

देवायत : भानु वही प्लान हे.. ताकी तुजेभी सहेरका धका खाना नही पडेगा.. तुम लखनको सब समजादे.. ओर थोडा कामभी सीखादे.. ताकी हम दोनोमेसे कीसीको वहा जाना ना पडे.. अब यहा गांवमेभी काम बढ जायेगा.. यार.. सबका कीसीना कीसीके साथ टाका भीडा हुआ हे.. अबतो साला उसीमे फसा रहुगा..

भानु : भाइ.. क्या भाभीने भावुसे बात की हे की नही..? आप उसे समजाओ.. मे भावुको छोडना नही चाहता..

देवायत : भानु.. मंजुने उनसे बात करली हे.. तेरी भाभीने उसे मनालीया हे.. वो कुछ दिन अपने मम्मी पापाके साथ रहेकर वहा वापस आजायेगी.. ओर तेरे साथही रहेगी.. बस तुमसे थोडी नाराज थी तो मंजुने उसे समजा दीया हे..

भानु : (खुस होते हसते) भाइ तबतो ठीक हे.. साला मेतो टेन्शनमे आगया था.. अच्छा हुआ वो मान गइ..

देवायत : भानु.. तुम दोनो बीवीओपे बोरबर ध्यान दे.. कीसी अ‍ेकको अ‍ैसा नही लगना चाहीये की वो मुजसे ज्यादा दुसरी बीवीपे ध्यान देता हे.. दोनोको बरोबर न्याय मीलना चाहीये..

भानु : (हसते) भाइ.. समज गया.. अब वही होगा.. लेकीन तेरी नइ भाभी मुजपे कुछ ज्यादा ही महेरबान हे.. हें..हें..हें.. उनको अब हर दिन प्यार चाहीये.. लगता हे कुछ ही दिनमे साली मुजे नीचोड लेगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां यार.. बेचारी इतने दिनोसे पतीसे वंचीत थी.. तो क्या करेगी.. बस यही प्यार भावुको भी देना.. वो खुस रहेगी..

तभी छोटु चाइ लेकर आगया ओर दोनोको चाइ पीलाइ तो देवायतने रीटाका पुछ लीया.. तो छोटुने कहाकी आज रीटाकी तबीयत ठीक नही हे.. तो मुजे चाइ देने भेज दीया.. कहातो देवायतस समज गया लेकीन उसने चहेरेपे कोइ भाव आने नही दीया.. फीर चाइ पीली तो देवायतने भानुकोभी अपने घर आराम करने भेज दिया.. तब भानुभी चाइ पीकर चला गया.. ओर छोटुभी खाली कप लेकर चला गया.. तब कुछही देर मे मुना आगया.. तो देवायतने उसे अपनी ओफीस मे बुलालीया ओर मुना देवायतके सामने बेठ गया..

देवायत : (हसते) आओ मुना.. बैठो..

मुना : (हसते सामने बैठते) जी.. ठाकुरसाब बरखाने आपको सुक्रीया कहा हे.. कहीये मेरे लीये क्या सेवा हे.. हुकुम कीजीये..

देवायत : मुना.. देख.. जीस तराह तुम्हारे ओर तुम्हारी बहेन बरखाके बीच रीस्ता हे.. उसी तराह गांवमे बहुत सारे अ‍ैसे रीस्ते हे.. मुजे सबकी इन्फोर्मेशन चाहीये.. तु बता तुजे कीस कीसके अवैध रीस्तोके बारेमे पता हे.. क्युकी तुम जानते हो हमारे कुलगुरुने अ‍ैसा कहा हे.. की आने वाले दिनोमे यहा बहुत बडा बदलाव आने वाला हे.. तो हमे सबको अ‍ैसे रीस्तोके लीये मनाना पडेगा.. अब हमे प्रकृतीकी ओर ढलके जीना हे..

मुना : (थोडा जीजकते) माफ कीजीये ठाकुरसाहेब.. कुछ बाते अ‍ैसी सुनी हे.. जो मे आपको केह नही सकता.. ओर नाही कीसीमे हिमत हे जो आपको ये बात केह सके.. सच क्या हे मुजे भी नही पता.. क्युकी हमने भी हमारे बुजुर्गो ओर बडोसे सुना हे..

देवायत : (थोडा चोंकते अ‍ेक नजरसे मुनाको आस्चर्यसे देखते) क्या..? मुना.. मुजे आज सब कुछ सच जानना हे.. तु गभराना नही.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रहेगी.. बता तुमने हमारे बारेमे अ‍ैसी कोनसी बाते सुनी हे.. क्युकी इस बारेमे मुजेभी नही पता.. ओर यकीन मानो मे तुमसे कुछभी नही कहुगा.. हमारे बारेमे जो भी बाते सुनी हे आज मुजे सब बतादे.. मुजे कोइ फर्क नही पडेगा..

मुना : (थोडी हीमत आगइ तब) ठाकुरसाहेब.. आपको पतातो होगाकी आपके दादाजी ओर पीताजी यानी बडे ठाकुर ओर गांव वालोके बीच कुछ अनबन होनेकी वजहसे काफी वक्त तक अच्छे सबंध नही थे.. उनका रीजन आप जानते हे..? मेने कइ बुजुर्गके मुहसे सुना हे.. बडे ठाकुरसाहबने आपके कुलगुरुकी कही यही भविस्यवाणीकी बाते गांव वालो से कहीथी.. तब सभी गांव वाले भडक गये थे.. ओर आपके खानदानके बारेमे बाते करने लगेथे.. जो मे आपको नही बता सकता..

देवायत : (चोंकते) मुना.. जो भी बाते हो.. आज मुजे खुलकर बतादे.. मुजे सब सच जानना हे.. तु गभरा मत मे तुजे कुछभी कहेने वाला नही हु.. ओर मे तेरी सादीभी तेरी बहेनसे करवा दुगा.. आइ प्रोमीस..

मुना : (खुस होते हसते) ठाकुरसाहब.. गांव वालेको पता चल गयाथा.. की आपके दादा ओर आपके पीताजी दोनोने उनकी बहेनके साथ सादी करली थी.. इसीलीये आप सबको अ‍ैसे रीस्तोमे सबंध रखनेके लीये गांव वालोको आपके कुलगुरुके माध्यमसे मजबुर कर रहे हे.. तभीतो गांव वालोने हवेलीसे अपने रीस्ते खतम करलीये थे.. लेकीन कीसीकी हीमत नही होपाइ की सच आपके सामने केह सके..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) व्होट..? क्या हमारे बारेमे सबको पताथा..?

मुना : (मुस्कुराते) हां ठाकुरसाहेब.. सब जानते थे.. की दोनोने अपनी बहेनसे सादी करली थी.. गांववाले भी आश्रमपे जाते थे.. ओर उनको वहीसे पता चल गयाथा की वहा जो लडकी रहेती थी.. वो दादा ठाकुरकी लडकी थी.. जो बादमे बडे ठाकुरसाहबने उनसे सादी करली थी.. इसीलीये गांवके लोग हवेलीसे दुर रहेने लगे थे.. ओर आप लोगोसे रीस्ता नही रख रहेथे..

देवायत : (हसते) अरे वाह.. मुना तुमतो हमारे खानदानके ओर गांवके बारेमे बहुत कुछ जानते हो..? तो फीर अब गांवमे सबमे इतना परीवर्तन क्यु आगया..? मेभी तो उसी खानदानसे हु..

मुना : (हसते) क्युकी उस दिनो आपने कुलगुरुने जोभी भविस्यवाणी कहीथी सब सच होती जा रही हे.. आपके परीवारके बारेमे उसने जोभी कहाथा वो सब सच होगया.. ओर गांवके बारेमे उसने जोभी कहाथा वही सब अब सच हो रहा हे.. इसीलीये सब दुवीधामेहे की अब क्या करे..? क्युकी इनका समाधान भी आपको ओर बाबाको ही पता होगा.. इसीलीये सब आपकी बातोको माननेके लीये मजबुर हो रहे हे..

देवायत : (हसते) हंम.. अच्छा गांव वालोको मेरे बापु ओर बाबाने कोनसी बाते कही थी..?

मुना : (मुस्कुराते) ठाकुरसाहेब.. उन्होने आने वाले दिनोमे गांवमेभी अ‍ैसे अवैध रीस्तोके बारेमे ओर समाजमे रीस्तोमे परीवर्तनके बारेमे कहाथा.. जो आज सब सच हो रहा हे.. क्युकी सबको मालुम हे.. अब अ‍ैसे रीस्तेको रोकना नामुमकीन हे.. गांवमे सबको पता हे की कीसका टाका कीसके साथ भीडा हुआ हे..

ओर वो अ‍ैसे रीस्तोको लाख रोकनेके बावजुदभी कामयाब नही हुअ‍े.. अब सबके पास आपकी बाते सुनने ओर माननेके अलावा कोइ चारा नही.. ठाकुरसाहेब.. आज हमारे गांवमे ज्यादातर घरोमे अ‍ैसे अवैध रीस्ते पनप रहे हे.. ओर ये सब क्यु हुआ कीसीको पता नही.. अब सबलोग खुलके अपने साथीके साथ प्यार जताने लगे हे..

देवायत : (हसते) वाह मुना.. तुमने मेरा बहुत सारा काम आसान करदीया.. बता कीतने घरोमे अ‍ैसे रीस्ते पनप रहे हे..? मेने तुजे यही जाननेके लीये आज इधर बुलाया था.. लेकीन तुमने तो मुजे मेरी कल्पनासेभी ज्यादा जानकारी देदी हे.. बता.. कीसका टाका कीसके साथ भीडा हुआ हे.. आज सब खुलके बतादे.. तो हम इस बारेमे कुछ सोच सके..

मुना : (हसते) ठाकुरसाहेब.. मे आपको सब बतातो दुगा.. लेकीन आप देखना कही मेरा नाम कीसके सामने ना आये..

देवायत : (हसते) तुम फीकर मत करो.. कीसीको पता नही चलेगा की ये सब तुमने मुजे बताया हे.. कहो..

मुना : (हसते) ठाकुर साहब.. वो हमारे बनवारीलाल हे जीनका लडका दुबइ मे हे.. हमे लगता हे उनके लडकेने दुबइमेही कीसी लडकीसे सादी करली हे.. तो यहा उनकी बीवीने अपने ही ससुरसे रीस्ता बनालीया हे.. ओर उसने दो बार प्रेगनेन्टभी हो चुकी हे..

लेकीन दोनो बार अपने बच्चेको गीराके आगइ.. ओर अबतो दोनो मीया बीवी बनके साथ रहेने लगे हे.. तो दुसरे आपके पंचायतका सदस्य सामतभाइ.. उनकी अ‍ेक विधवा बहेन हे सांतीदीदी.. जो सामतभाइके लडके बंसीके साथही उनका रीलेशन हे..

ओर खुद सामतभाइकी बीवी जयाबहेनका रीलेशन हमारे रमेश अंकलके साथ हे.. कीसीका उनकी भाभीके साथ हे तो कीसीका उनकी बुआके साथ..ओर ज्यादातर लडकेका उनकी सगी बहेन यातो कजीन बहेनके साथ चकर हे.. सीर्फ लडके ही नही बडोभी कीसीना कीसीके साथ लगे रहेते हे.. ठाकुरसाहब.. हमारे गांमे जीतनीभी विधवा या त्यक्ता ओरते हे.. वो कीसीना कीसीके साथ रीलेशनमे हे.. अब सबके रीस्ते बहार आने लगे हे..

देवायत : मुना.. अब हमे वही बातोके लीये सबको समजाना हे.. सबको अ‍ैसे रीस्तेको अपनानेके लीये मनाना हे.. बाबाकी सब बाते सच हो रही हे.. बिलकुल उन हिमाचलकी तराह करना हे.. ताकी यहाभी कोइ विधवा या त्यक्ता ना रहे.. सब सुहागन बनके अपने पतीके साथ हसी खुसी रेह सके.. तुमभी अपनी बहेनके साथ हसी खुसी जींदगी बताओगे.. बस कुछ दिन इन्तजार करलो.. जब सब लोग मुजे सामनेसे कहेगे तब हमे बाबाको बुलाकर सबको यही समजाना हे.. बस यही जानना था..

मुना : (सरमाते हसते) ठाकुरसाहेब.. मेरा अ‍ेक दोस्त हे.. उनकी ताइभी विधवा हे.. अकेली हे.. उनकी कोइ संतान नही हे.. तो मेरे दोस्तकाही उनके साथ चकर हे.. वो अपनी बडी अमाके साथ रीलेशनमे हे ओर अक्सर दोनो अपने तनकी प्यास बुजाते हे.. ओर अ‍ैसे तो कइ रीस्ते हे.. मे आपको कीन कीनके बारेमे बताउ.. मेरा खुद मेरी बहेनके साथ अ‍ैसा रीस्ता हे.. इनमे मेरी कोइ मददकी जरुरत होतो कहेना.. मे आपके साथ हु..

देवायत : मुना.. जीस तराह तुम मेरे साथ हो.. उसी तराह तुम ओरभी लडकोसे बात करके सबको अपने साथ सामील करले.. सबको अ‍ेक अ‍ेक करके मीलना.. ओर मेरी बात उन तक पहोचाना.. सबको कहेना ठाकुरसाहब हमारे साथ हे.. ओर सबकी सादी उनकी पसंदकी लडकीसे करवा देगे.. सबको हमारे साथ सामील करले..

मुना : (खुस होते हसते) जी.. ठाकुरसाहब मे सब समज गया.. येतो मेरे बाये हाथोका खेल हे.. मेरे ज्यादातर दोस्तोमे हम सबको अ‍ेक दुसरेके रीलेशनके बारेमे पता हे.. ओर हम इनकी खुलकर आपसमे चर्चाभी करते हे.. तो सबसे बात करनेमे आसानी रहेगी.. जब ये बात नीकलेगी.. तब हम सभी लडके आपके साथ होगे.. आइ प्रोमीस..

देवायत : (खुस होते हसते) ओर हां अ‍ेक इन्पोटर्न बात कहेनातो रेह गइ.. कल तुम्हारी बहेनकी तबीयत बीगड गइ थी..?

मुना : (आसच्र्यसे देखते) हां ठाकुरसाहेब.. उनको कल क्लीनीकपे ही उल्टी हुइ थी.. तो सुधीर अंकलने उनको दवाइ दी तो उल्टीया बंध होगइ..

देवायत : (हसते) मुना.. मेरी सुधीरसे इस बारेमे बात होगइ हे.. इसीलीये मे तुम दोनो भाइ बहेनको मीलने आयाथा.. सायद तुम्हारी बहेन प्रेगनेन्ट हे.. अगर तुजे उनके साथ सादी करनी हेतो ये बच्चा मत गीराना.. ताकी तुजे उनके साथ सादी करनेमे आसानी रहेगी.. या फीर अभी इस बारेमे उनको कुछ कहेना ही मत.. ताकी बच्चे गीरानेका टाइम नीकल जायेगा तो तेरे माता पीताको मजबुरन उनकी सादी तुमसे करवानी पडेगी.. तु समय गया नां..?

मुना : (थोडा परेसान होते) जी.. ठाकुर साहब.. क्या सचमे बरखा प्रेगनेन्ट हे..?

देवायत : (हसते) अरे तो इसमे इतना गभराता क्यु हे..? देख मेरी तीसरी बीवी इन्हीकी डोक्टर हे.. तो मे जब कहु तुम अ‍ेक बार उनको दीखाकर कंन्फोर्म कर लेना.. बाकी सब मे सम्हाल लुगा.. ओके..?

मुना : (कुछ सोचते) जी.. ठाकुरसाहेब.. अभीतो मे इस बारेमे उनको कुछ नही बताउगा जब वो सामनेसे कहेगी तब मे डोक्टरके पास चला जाउगा.. अब मे चलु..?

देवायत : (हसते) ठीक हे.. मुना.. अब तुम्हे जाना होतो जा सकते हो.. बस अब तुम सुधीरसे दुर रहेना.. उनकी बुरी आदत हमे छुडवानी हे..

मुना : (सरमाते हसते खडा होते) जी.. ठाकुरसाहेब मेतो दुर रहुगा.. लेकीन वो दुर नही रेह पायेगे.. उनको आदतजो होगइ हे.. हें..हें..हें.. चलो अब में चलता हु.. बाय..

कहेते मुना चला गया.. तो आज देवायतकोभी गांवके बारेमे बहुत सारी जानकारीया मील गइथी.. जीनसे आगे चलके उनको बहुत फायदा होने वाला था.. देवायत खुस होते अपने घरकी ओर चल पडा.. तो दुसरी ओर मुनाभी अपनी क्लीनीकपे चला गया.. तो सुधीरने उसे पुछातो कुछ जरुरस बातोको छोडकर मुनाने सुधीरको बहुत कुछ बता दीया.. फीर दोनोही क्लीनीक बंध करके अपने घर चले गये..

दुसरी ओर लखन लता ओर धिरेन पुनम दोनोही कपल अपने हनीमुनको अ‍ेन्जोय करनेमे व्यस्त होगये थे.. दोनोही कपल अ‍ेक दुसरेके साथ खुलकर घुल मील गये थे.. ओर अबतो रातमे भी खुलकर प्यार करने लगे थे.. खास करके धिरेन ओर पुनम.. पुनमने धिरेनको पुरी तराह अपने प्यारमे पागल कर दीयाथा तो इसी चकरमे धिरेनभी नीलमको फोन करना भुल गया.. जीनकी वजहसे नीलमभी थोडी परेसानीमे रहेने लगी..

तो दुसरी ओर भानुभी घर पहोचा गया.. उस रात सबने खाना खालीया ओर सोने चले गये.. तो रुममे जातेही भानु रमा दोनोही प्यारके आगोसमे चले गये.. तब भानु रमाको चोदते हुअ‍े देवायतके साथ भावनाकी कही हुइ बात करता हे.. तो रमा मनही मन भावनाके साथ समाधानकी बात सुनकर भानुसे चीड जाती हे.. ओर भानुको थकनेका बहाना बनाते अपने उपरसे हटाकर दुसरी ओर करवट लेकर सो जाती हे.. तब भानुभी थोडा परेसान होगया..

भानु : (थोडा परेसानीमे) रमा अचानक क्या हुआ..? अ‍ैसा क्यु कर रही हे..? चोदने देना.. अभी मेरातो हुआ भी नही..

रमा : (दुसरी ओर मुह करते सोते) भानु.. आज मे बहुत थक गइ हु.. कल कर लेना.. मुजे नींद आ रही हे..

भानु : रमा मुजे पता हे तुम जान बुजकर अ‍ैसा कर रही हो.. भावुभी मेरी बीवी हे.. तो मे उसे कैसे छोडदु..

रमा : भानु.. मुजे इस बारेमे अभी कोइ बहेस नही करनी.. तुम सो जाओ.. हम कल बात करेगे..

कहातो भानुभी नीरास होकर सोने लगा.. तब रमाके दिलमे आज पहेली बार भानुके लीये गुसा आगया था.. ओर यही भानुसे थोडे दुर होनेकी सुरुआत थी.. तो इधर महेलमेभी देवायत अ‍ेक बार मंजु ओर दो बार चंदाकी जबरदस्त चुदाइ करलेता हे.. तो चंदाकी हालत पतली होजाती हे.. फीर तीनो अ‍ेक दुसरोसे चीपककर सो जाते हे.. तो भावना ओर नीर्मलाभी सो चुकी थी.. तब गांवमे आज मुना देवायतसे बात करके खुसीकी वजहसे अपनी बहेन बरखाको देर रात अपने रुममे चोद रहा था.. तब..





बरखा : (सरमाते खुस होते) भाइ.. बस अ‍ैसेही चोदते रहो मुजे.. आज मे बहुत खुस हु.. लगता हे अब हम दोनोके मीलनेका रास्ता आसान होगया हे.. अब हम सादी करके पती पत्नीकी तराह रेह सकते हे..

मुना : (चोदते हुअ‍े होंठ चुमते) हां बरखा.. आज ठाकुरसाहेबने हमारी राह आसान करदी.. क्या मस्त दीखती हे तु.. तुमने तो मुजे पागल कर दीया हे.. जी चाहता हे आजही तुमसे सादी करलु..

बरखा : (चुदवाते) भाइ बस थोडा सबर करलो.. फीरतो हमारे बच्चेभी होगे.. बस मम्मी पापा मान जाये..

मुना : बरखा ठाकुर साहेबने मुजे कुछ कामभी सोपा हे.. तुजे पता हे.. गांवमेभी हमारी तराह अ‍ैसे बहुत सारे रीस्ते पनप रहे हे.. बस उसीकी इन्फोर्मेशन मुजे ठाकुरसाहबको देनी थी.. वो सबकी सादी करवा देगे..

बरखा : (चुदवाते) सीइइ.. आह..आह..आह..इइइइइ भाइ थोडा जोरोसे.. क्या मस्त चोदते हो आप.. सुनो.. मेरे पास अ‍ेक विडीयो क्लीप हे.. जो मेने आज तक कीसीको नही दिखाइ.. मे आपकोभी नही दीखाउगी.. अगर हमारी सादीके लीये कुछ आना कानी हुइ तो मेही सब नीपटा लुगी.. आप फीकर मत करना..

मुना : (चोदते गलेको चुमते) बरखा.. चुजे चोदनेमे बहुत मजा आ रहा हे.. क्या कसी हुइ चुत हे तेरी.. मुजे बताना.. कीसका विडीयो हे..? क्या अपने पतीको नही बतायेगी.. आह.. आह..इइइ बरखा.. मे आने वाला हु.. येस.. येस.. आइ.. मे गया.. आह.. आह..इइइइइ





कहातो बरखाने मुनाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर वोभी मुनाके साथ जडने लगी.. तब कुछही देरमे मुना जडके बरखाके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. तब बरखा मुनाकी पीठ ओर उनके बालको सहेलाते अपनी सांसे दुरसत करती रही.. ओर सोचने लगीकी मुनाको वो विडीयो क्लीपके बारेमे बताना चाहीयेकी नही.. ओर उसने बातको अपने तरीकेसे नीपटानेकी ठानली.. ओर मुनाको नही बतानेका फैसला करलीया..

क्युकी ये मामला खुदके घरसे जुडा हुआ था.. जब दोनो सांत हो गये तब मुनाका लंड बरखाकी चुतसे सीकुडके बहार नीकल गया.. तो मुना साइडमे लुढक गया तब बरखाने अपनी नीकरसे अपनी चुतको बेडपे बैठकर जुकते साफ करलीया.. फीर नंगीही मुनाके सीनेमे सर रखते उनसे बाते करने लगी..

बरखा : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. आप बीना कोन्डमके करते हो.. देखना कही मे पेटसे ना हो जाउ..

मुना : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) बरखा.. तो फीर अच्छा हेना.. तुम हमारे बच्चेको जन्म देना.. हें..हें..हें..

बरखा : (सरमाते हसते) भाइ.. अ‍ेक मारुगीनां..? क्या बीना सादीका बच्चा पैदा करुगी..? लोग क्या कहेगे..? हां अगर हमारी सादी होगइ होती तो बात अलग थी..

मुना : (देवायतकी बातोपे आगे बढते) बरखा.. हमने खुब मजे कीये हे.. जबसे हम कोलेजमे थे तबसे हम दोनो रीलेशनमे हे.. ओर अबतो हमारी सादीकी उमर बीतने लगी हे.. हमारा प्यार आपभी अ‍ैसे गहेरा हे.. बल्की अबतो ओरभी बढ गया हे.. हम बा बापुजीको कीतने दीनो तक सादीके लीये मना करते रहेगे.. अबतो हम दोनोकी सादी होजायेतो अच्छा हे.. बरखा.. मेरी मानो.. मेरे मनमे अ‍ेक आइडीया आया हे.. हम बा बापुजीको हमारी सादीके लीये मजबुर कर सकते हे.. अगर तुम मुजे थोडासा साथ देदो तो..

बरखा : (सरमाते सीनेको सहेलाते) भाइ.. मुजे आपके साथ पुरी जींदगी बीतानी हे.. इसके लीये मे कुछभी कर सकती हु.. कहो आपके दिमागमे क्या आइडीया हे.. मे कुछभी करनेके लीये तैयार हु..

मुना : (अपनी बातोपे आगे बढते) बरखा.. हम दोनो कुछ अ‍ैसा करेकी हमारे बा बापुजी.. मजबुरन हमारी सादीके लीये मान जायेगे.. इनमे ठाकुरसाहेब भी हमारा साथ देगे..

बरखा : (खुस होते) भाइ कहो.. मुजे क्या करना होगा.. मे तैयार हु.. कहो आपका क्या आइडीया हे..?

मुना : (सरमाते हसते) बरखा.. तुम प्रेगनेन्ट होजाओ..

बरखा : (आस्चर्यसे) भाइ.. आप पागल होगये हो क्या..? बीना सादीके बच्चा..? अगर मानलो मे हमारी सादीके लीये प्रेगनेन्ट हो भी गइ तो क्या होगा..? मम्मी पापापे क्या गुजरेगी..

मुना : इसीलीये कहेता था मुजे तुम्हारा साथ चाहीये.. जब मम्मीको तुम्हारी प्रेगनन्सीके बारेमे पता चलेगा तो तुम बिनदास्त मेरा नाम लेलेना.. बाकी सब मे सम्हाल लुगा.. इनमे ठाकुरसाहबभी हमारा साथ देगे.. तु समज गइनां..? ओर लोगोके बारेमे हमे नही सोचना.. क्युकी मेरे पास सबकी कुंडली हे..

बरखा : (कुछ सोचते) भाइ.. इनमे बहुत रीस्क हे.. मानलोकी अगर मे प्रेगनेन्ट होगइ..? फीरभी बा बापुने हमारी सादीके लीये मना कीया तो..? तो फीर मे कहा जाउगी..? कुछतो सोचो..

मुना : (हसते) बरखा सुन.. जब सबको पता चलेगाकी तुम प्रेगनेन्ट हो.. तब कोइभी बहार वाला तुमसे सादीके लीये मना करेगा.. तब बा बापुके पास तुम्हारी सादी मेरे साथ करवानेके अलावा कोइ रास्ता नही बचेगा.. ओर वो हमारी सादीके लीये मान जायेगे.. ओर तुमभीतो कहेती थी की तुम्हारे पास कोइ विडीयो क्लीप हे.. तो उनकाही इस्तेमाल करना.. क्या कहेती हो..?

बरखा : (सरमाते हसते) भाइ.. आपकी बाततो सही हे.. लेकीन क्या अ‍ैसा हो सकता हे..? अगर अ‍ैसा होता हेतो मे तैयार हु.. करदो मुजे प्रेगनेन्ट.. वैसेभी आप मुजे कइ दिनोसे बीना कोन्डमसे तो करते ही हो.. फीरभी मे कोइ रीस्क लेना नही चाहती थी.. तो आइपीलभी लेती थी.. लेकीन अ‍ेक महीनेसे वोभी खतम हो गइ हे.. तो वोभी नही लेपाइ.. ठीक हे.. भाइ.. अब मुजे आइपील नही चाहीये.. मे रेडी हु.. आप करदो मुजे प्रेगनेन्ट..

मुना : (जोरोसे बाहोमे भीचते) चल तो फीर आजसेही हम कोसीस करते हे.. तैयार होजा दुसरे राउन्डके लीये.. अबतो मे मेरी बहेनको पेटसे करही दुगा.. बरखा तु गभराना नही मे तेरे साथ हु.. मे तेरा साथ कभी नही छोडुगा.. चाहे कुछभी होजाये.. वरना हम इस गांवसे कही दुर जाकर जींदगी बीतायेगे..

बरखा : भाइ.. तो फीर मम्मी पापाका क्या होगा..? पापाकी तबीयतभी ठीक नही हे.. हमोर अलावा उनका हेही कौन..? भाइ.. आप मम्मी पापाको छोडनेकी बात मत करो.. हम सादी करके उनके साथही रहेगे..

मुना : (होठोको चुमते) बरखा तुम कुछ विडीयोकी बात कर रहीथी.. क्या बता सकती हे मुजे..?

बरखा : सोरी भाइ वो मे आपको नही दीखा सकती.. पर यकीन कीजीये.. वो हमारी सादीके लीये मदद रुप हो सकती हे.. बस कुछ राज मुजतकही सीमीत रहेने दिजीये.. इसमे कीसीकी इजतभी जा सकती हे..

मुना : (कुछ सोचते) बरखा.. क्या वो क्लीप हमारे घरकी हे..? आइ मीन.. मोम..

बरखा : (जटसे थोडा गभराते) नही.. भाइ.. प्लीज.. मत पुछो मुजसे.. मे नही बता पाउगी..

मुना : (हसते) चल ठीक हे.. तो फीर वो सब तुमही जानो.. मुजे तुमपे पुरा भरोसा हे.. चल आजतो मे मेरी बहेनको प्रेगनेन्ट करके ही रहुगा.. क्या मस्त दीखती हे तु.. मेतो तेरा दिवाना हो गया हु.. आइ लव यु..

बरखा : (सरमाते हसते) भाइ.. आइ लव यु टु.. चलीये लग जाये मीशन सादीपे.. हें..हें..हें..

तब कुछही देरके बाद मुना ओर बरखा फीरसे बहेकने लगे.. ओर ना जाने दोनो कब अ‍ेक हो गये.. मुना हाथके बल उचा होकर बरखाको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा तो बरखाभी अपनी कमर उछालते मुनाको चुदवानेके साथ देने लगी.. ओर कुछही देरकी घमासान चुदाइके बाद मुना अ‍ेक बार फीरसे बरखाकी चुतको अपने पानीसे भरके हरी भरी करदेता हे.. तब बरखाको नही पताथा की वो ओलरेडी पहेले प्रेगनेन्ट हो चुकी हे..





तब गौवामेभी दोनो कपल अपनी अपनी चुदाइमे मसगुल थे.. अबतो धिरेनभी चुदाइके मामलेमे थोडा अनुभवी होगया था अब वो पुनमकी मददके बगैरही अपना लंड उनकी चुतमे घुसा देता.. ओर पुनमकी चुदाइ अ‍ेक बार करके तीन घंटेके बाद धिरेनने फीरसे दुसरी बार पुनमको चोद लीया.. ओर हर बार पुनमकी चुतमे खलास होते पुनमकी चुतको अपने पानीसे भर दीया.. तो पुनमभी खुस होने लगी.. उनको अपनी प्रेगन्सीको धिरेनके सामने जाहीर करनेकी बात आसान लगने लगी..

तो दुसरी ओर लखन ओर लता दोनोही जमकर चुदाइका आनंद लेते रहे.. लखन लतासे छुपकर वायग्राकी गोली खा लेता ओर पुरी रात तीन बजे तक लताकी जमकर चुदाइ करता रहा.. तब लताभी थकके चकना चुर होगइ.. तब सहेरमे नीलमको अपनी उंगलीसे काम चलाना पडा.. दो दिनसे धिरेनका फोन नही आया तो वो थोडी नीरास हो गइथी.. तो दुसरी ओर सृतीभी देवातसे मीलन करनेके लीये बेकरार होने लगी.. ओर अ‍ैसेही दिन ओर रातभी नीकल गइ..

आज देवायत राजीव ओर नीर्मलाको भुमीकाके घरपे छोडने सहेर जाने वाला था.. तो मंजुने चंदाको भेजना चाहा.. लेकीन रातमेही देवायत चंदाकी हालत खराब कर चुकाथा ओर चंदाको पता थाकी वापस आते देवु उनको बीचमे अपने घरपे लेजाकर दुबारा चोद लेगा.. तो अपनी हालत अकेली दुबारा खराब करना नही चाहती थी.. इसीलीये चंदाने अपने साथ मंजु ओर भावनाको अपने बच्चोके साथ जबर दस्तीसे साथ लेलीया..

तब देवायतने अपनी बडी कार लेली.. ओर सभी लोग चाइ नास्ता करके सहेरकी ओर नीकलने लगे.. तो मंजुने सृतीको वहा आनेकी सुचना देदी.. तो सृती बहुत खुस हो गइ.. ओर उसने क्लीनीपे आज ना आनेकी फोनपे बात करली.. नीर्मलाने अपना सब सामान लेलीया.. भावना सामको मंजु चंदाके साथ वापस आने वालीथी.. जब वो नीकल गये तब घरपे सीर्फ दया रजीया ओर चंपाही रेह गइ..

सब लोग आरामसे बाते करते जा रहेथे.. तो अ‍ेक घंटेके बाद ही सभी भुमीकाके घर आगये.. तो भुमीका ओर सृती दोनोही खुस होते बहार दोडके आगइ.. ओर आतेही नीर्मला राजीव मंजु चंदा सबको गले लगाकर मीली.. तब सृती देवायतको देखतेही बहुतही सरमाने लगी.. तो चंदाने विजयको ओर सृतीने भावनाकी बच्चीको अपनी गोदमे लेलीया ओर सभी लोग अंदर आगये.. तब राजीवतो घर देखतेही खुस हो गया..

राजीव : (हसते) भुमी.. तुमने घरतो बहुत बडा लीया हे.. ये घर थोडीना हे.. येतो बंगलो हे.. बंगलो..

भुमीका : (खुस होते हसते) आओ आओ भाइ.. अंदरतो आओ.. देखो.. ये हमारे देवुने दिलवाया हे..

मंजु : (हसते) पापा.. देवुने हमारे लीयेभी यही अ‍ेक बगलो लेलीया हे.. अभी खाली पडा हे.. इसी सोसायटीमे पीछली गलीमेही हे..

राजीव : (हसते) हां बेटी.. वो मुजे पता हे.. जब कीशन जीन्दाथा तबही लेलीया था.. चलो अच्छा हे.. सहेरमेभी रहेनेके लीये कुछतो होना चाहीये..

देवायत : (हसते सोफेपे बैठते) पापा.. अब सोच रहा हु.. जब लखन वापस आजाये तो इसे वही रहेनेके लीये भेजदु.. ताकी यहाका कामभी वो सम्हालले.. क्या कहेते हो..?

राजीव : (बेठते हसते) हां देवु.. ये सही सोचा आपने.. आपतो गांवमे रहेते हो.. तो लखनको यही रहेनेके लीये भेजदो.. इधरका कामभी बहुत होता हे.. तो उसे सब सीखादो.. तो यहा सम्हाल लेगा..

तभी सृती ओर भावना सबके लीये पानी लेकर आइ तो सभीने पानी पीया.. तब भावना ओर सृती कीचनमे सबके लीये चाइनास्ता बनाने चली गइ.. तो नीर्मला मंजु भुमी सब सोफेपे बेठकर बाते करने लगे.. तब भुमीका चोर नजरोसे देवायतको देखते कुछ ज्यादाही सरमाते हसती रही.. तब नीर्मलाने उनकी मनोदसा जानके हसते भुमीके हाथपे हाथ रखदीया.. तब भुमीका सम्हल गइ.. ओर हसने लगी..

तभी देवायतने खडे होकर राजीवको नीचे नीचेसेही भुमीका बंगलो दीखाने लगा.. क्युकी राजीवको अभी सीडीया चडनेकी मना थी.. तो राजीव भुमीका बंगला देखकरही खुस हो गया.. क्युकी सृतीने अपने घरको पुरी तराह सजाया था.. फीर वापस सोफेपे आकर बैठ गये तो मंजु उठकर कीचनमे चली गइ.. तो भावना कीचनसे बहार आइ.. तो चंदा ओर भावना बच्चेको लेकर नीचेके रुममे चली गइ.. ओर उनको सुलाने लगी.. तभी कीचनमे..

मंजुला : (जातेही सृतीको बाहोमे भीचते) क्युरी कुती.. क्या कर रही हे मेरी सौतन.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) कमीनी.. देखती नही मेरी प्यारीसी सोतनके लीये चाइनास्ता बना रही हु..

मंजुला : (हसते) सोतनके लीये की अपने होनेवाले पतीके लीये..? हें..हें..हें.. कमीनी इनको खाना बाना खीलाके कुछ ताजा माजा करदे.. ताकी तेरी अच्छेसे बजा सके.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते मंजुको पीठमे मुका मारते) छी.. कीतनी कमीनी सौतन हो तुम.. बीलकुल बेसर्म.. अभीभी नही सुधरी..

मंजुला : (कीचनके प्लेटफोर्मपे बेठते) सृती.. चल चाइ नास्ता करके फटाफट तैयार होजा.. हमे मार्केट जाना हे.. तेरे लीये कुछ गहेने ओर मंगलसुत्र लेना हे.. ओर कुछ कपडेभी लेने हे.. फीर हम सामको चले जायेगे..

सृती : (प्यारसे देखते) मंजु.. रातका डीनर करके चले जाना.. सामको क्यु जाना..? रुक जाओनां..

मंजुला : (हसते) नही सृती.. अब अ‍ेक दो दीनमे लखन धिरेनभी अपना हनीमुन मनाकर वापस आजायेगे.. तब दुसरेही दीन तुम दोनोकी सादी आश्रमपे रखी हे.. फीर लखन लताकोभी यही रहेने भेजना हे.. तुम पास होतो उनका खयाल रखना.. ओर साथमे हम रजीयाकोभी यहा भेज रहे हे.. तो काममे कोइ दिकत नही होगी..

दोनोही बाते करते चाइनास्ता बनाने लगी.. तब कुछही देरमे चाइनास्ता बन गयातो सबने साथमे बैठकर चाइ नास्ता करते साथमे खरीदी करने जानेका ओर लंच कीसी होटेलमे करनेका फैसला करलीया.. तब सृती भुमीका.. दोनोही तैयार होने चली गइ.. तब कुछही देरमे भुमीका ओर सृती तैयार होकर आगइ तो घरको ताला लगाकर सब मार्केटमे चले गये.. राजीव ओर देवायत बाते करते रहे..

ओर सभी लेडीस खरीदी करने लगी.. तो नीर्मला ओर भुमीकाने भावना ओर मंजुके बच्चेको सम्हाला.. वहा सब सृतीकी पसंदकी सारीया ओर गहेने लेलीये.. फीर सभी लोग लंच करने अ‍ेक बडी होटेलमे चले गये.. ओर वहा लंच करके वापस भुमीके बंगलेपे आगये.. तबतक दो पहोरके २ बज चुके थे.. आज राजीवको दवाइ लेनेमे लेट हो गया.. तो आतेही नीर्मलाने उसे दवाइ देदी तो वो अ‍ेक रुममे जाकर सो गया..

तो मंजुने देवायतको आराम करनेके लीये उपर सृतीके रुममे भेज दीया.. ओर सभी लेडीस वही होलमे लेटते आराम करते बाते करती रही.. तब ज्यादातर बाते गांवमे बदलावके बारेमे मंजुही कर रहीथी.. तब सृतीके साथ नीर्मला भुमीका भावना सब आस्चर्यके साथ गौरसे सुन रहीथी.. तो दुसरी ओर आज रमा भावुके साथ कुछभी बोल नही रही थी.. ओर मुह फुलाकर चुपचाप अपना काम करती रही.. तो भानुभी थोडा परेसान होने लगा..

तो गौवामे धिरेन ओर पुनम बीचमे अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडके चलते हसी मजाक के साथ बाते करते चल रहेथे..तो लखन लताको अपनी गोदमे उठाकर दोनोके आगे चल रहाथा तब लता जोरोसे हसते खुब सरमा रहीथी.. ओर पुनमको पीछे देखकर अपने भाइसे छुडवानेकी मनते कर रहीथी.. तब पुनम ओर धिरेन दोनोही हस रहेथे.. कुलमीलाके दोनो कपल अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते खुब अ‍ेन्जोय कर रहेथे..

तो सहेरमे नीलम अपने क्लासमे पढते भी कुछ परेसान दीख रहीथी.. उनकी धिरेनके साथ तीन दिनसे बात नही हुइ थी.. ओर उपरसे धिरेनने उनको फोन करनेको मना कीयाथा.. तो वो मनही मन पुनमको गालीया देने लगी.. ओर क्लास खतम होतेही वो होस्टेलमे आगइ.. ओर सीधेही फोन लेकर बाथरुममे चली गइ.. ओर सोचने लगीकी फोन करु की नही.. ओर आखीर हीमत करके उसने धिरेनको फोन लगाही दीया..

तब धिरेन लता पुनम ओर लखन अ‍ेक जगाहपे आइसक्रिम खा रहेथे.. तभी धिरेनके फोनकी रींग बजी.. तो धिरेनने फोन उठाकर देखा तो नीलमका नाम देखतेही वो थोडा गभरा गया.. ओर उसने जटसे फोनको काट दीया.. फीर कुछ देरके बाद बाथरुम जानेका बहाना करके वो बाथरुममे चला गया.. तब पुनम सबकुछ समज गइ.. ओर मनही मन मु्सकुराने लगी.. तब धिरेन बाथरुममे जातेही फोन लगा देता हे..

धिरेन : (फोनपे धीरेसे) हेलो.. नीलम..?

नीलम : (थोठा नाराज होते) हां धिरेन.. आपने मुजे तीन दिन होगये.. फोन क्यु नही कीया.. क्या मेरी सौतन इतनी पसंद आगइ आपको..? की मुजे फोन करनेकाभी टाइम नही मीला..?

धिरेन : (हसते धीरेसे) अरे सुनतो सही मेरी मां.. कीतना बोल गइ तुम..? सुन.. बेबी.. आइ लव यु.. क्या हेना.. की पुनो हर वक्त मेरे साथ होती हे.. तो मे फोन कैसे करता.. बस अब दो दिनके बाद हम वापस आजायेगे तब तुजे मीलने होस्टेलमे आउगा.. ओर अगर तुम चाहोतो हम कही घुमनेभी जायेगे..

नीलम : (धीरेसे सरमाते) जानु.. आपके बीना यहा मेरा जी नही लगता.. पढाइमेभी मन नही लगता.. आपने मुजपे क्या जादु करदीया हे.. प्लीज.. आजाओ.. फीर आप जहा कहोगे मे आपके साथ चलुगी..

धिरेन : देख नीलु.. अभी तुम पढाइमे ध्यान दे.. तो फीर मेरी बेंकमेही तुजे जोबपे लगा दुगा.. तो हम मीया बीवी अ‍ेकही जगाहपे नोकरीपे साथमे जायेगे ओर साथमे आयेगे.. बस तुम ग्रेज्युअ‍ेशन करलो..

नीलम : (सरमाते हसते) जानु.. क्या वाकइ पुनोदीदीके साथ.. आइ मीन.. उनके साथ मजा आता हे..?

धिरेन : (जुठ बोलते) अरे नीलु.. जो बात तुममे हे वो पुनममे कहा.. तुम क्या मस्त प्यार करतीथी उस दिन..

नीलम : (सरमाते हसते) जाओ.. जुठी तारीफ मत करो.. तबतो मुजे फोन करलीया होता..? जुठे कहीके..

धिरेन : (हसते) नही नीलु.. सच कहेता हु.. तेरी कसम.. बस अ‍ेक बार हमारा मीलन होजाये.. नीलु.. तुम ग्रेज्युअ‍ेशन करलो.. तब हम दोनोही फौरन सादी करलेगे.. ओर मेने तेरे लीये बहुत प्लान कीया हे.. बस वही मीलने आउगा तब तुजे सब बता दुगा.. चल अब फोन रखता हु.. वो तीनो मेरा वेइट कर रहे हे.. बाय..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) अरे सुनो.. धिरेन.. क्या मेरी कीस नही चाहीये..? आइ लव यु.. बाबु..

धिरेन : (हसते फोनको चुमते) आइ लव यु टु.. मुहा.. बुच..बुच..

नीलम : (जोरोसे चुमते) बु..च.. बुच.. बुच.. लव यु जानु.. बाय..

फोन काटतेही धिरेन पीसाब करके अपना हाथ साफ करते बहार आगया.. ओर चारो दुसरी जगाहपे घुमने चले गये.. तब नीलम धिरेनसे बात करके कुछ ज्यादाही अ‍ेक्साइटेड होगइ.. ओर फोन कट करतेही वही कमोडपे बैठ गइ.. ओर धिरेनको इमेजींग करते अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर धीरेसे चडी नीचे करते चुतमे उगली घुसा देती हे.. ओर आंख बंध करके जोरोसे चुतमे उंगलीको अंदर बहार करने लगी.. तब कुछही देरमे उनकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया तो सरमाके हसने लगी.. ओर सही होकर बहार आगइ..





तो गांवमे भानुभी खाना खा रहाथा तब रमाने उनसे कोइ बात नही की.. ओर चुपचाप वोभी खाना खाती रही.. वो भावनाको भी खोना नही चाहता था.. तो रमाको इस बारेमे इग्नोर करते भानुभी बीना कुछ बोले खाना खाकर वापस खेतोपे आगया.. ओर सीधा देवायतकी ओफीसमे जाकर आराम करने लगा.. ओर भावनाके साथ की हुइ हर चुदाइको याद करने लगा तब उनका हथीयार खडा होने लगा.. तो उसे कुछ याद आतेही अपना मुह धोकर गांवमे चला गया.. तब अ‍ेक गलीमे कीसीको ना देखकर अ‍ेक घरमे घुस गया....

कन्टीन्यु
 
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