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- Dec 5, 2013
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लखन : हंम.. वो चाची धरकी सफाइ कर रही थी.. फीर..
साहील : भाइ.. चाचा ओर बडे भैया अपनी नोकरीपे गयेथे.. तो दोनो दीदी कोलेज गइथी.. तब चाची उनके कमरेकी सब सफाइ कर रहीथी.. वहा तीनोकी अलमारी अलग अलग हे.. तब चाचीको सायरादीदी की अलमारीमे सफाइ करते बहुत सारी आइपीलकी ओर पेइन कीलरकी गोलीया मीली.. जो उसने अेक खानेमे छुपाकर रखीथी.. जीसे देखकर चाची चोंक गइ.. ओर उसने वो अपने पास रखली..
लखन : (मुस्कुराते) तो उनसे ये थोडीना साबीत होता हे की वो तेरे कादीर भाइसे चुदवाती हे.. हें..हें..हें..
साहील : (सरमाते धीरेसे) नही भाइ सुनोतो सही.. जब उनको ये सब मीला तो उनको सबाना दीदीपे भी संकाये होने लगी.. तो वहा उनकी अलमारीमे उनको कुछ नही मीला लेकीन भाइकी अलमारी साफ करते उनको वहासे बहुत सारे कोन्डम मीले.. तब चाचीको बहुत कुछ आसंकाये होने लगी.. ओर उसने दोनोके उपर नजर रखने की ठानली.. वो दोनोके उपर नजर रखने लगी.. ओर उस रात चाचाकी नाइट सीफ्ट सुरु होगइ..
लखन : (हसते) हंम.. फीर.. हें..हें..हें..
साहीला : (हसते) क्या भाइ.. आपको हसी आ रही हे..? सुनो.. रातपे चाचा अपनी नोकरीपे चले गये तब चाची भैया ओर दोनो दीदीया खाना खा रहेथे.. तब भैया ओर सायरादीदी आंखोके इसारोसे बाते करने लगे.. भैया दीदीको देर रात उपर छतपे आनेको केह रहेथे.. तब उनको नही पताथाकी आज चाची उन दोनोके इसारोको नोटीस कर रही हे.. फीर खाना खाकर भाइ छतपे सोने चले गये तो चाची ओर दोनो दीदीने घरका सब काम नीपटा लीया ओर फीर थोडी देर टीवी देखकर सब अपने अपने रुममे सोने चले गये..
लखन : (हसते) फीर.. हें..हें..हें.. आज दोनो गये कामसे.. हें..हें..हें..
साहील : (हसते) हां भाइ.. सुनोतो सही.. चाचीने दोनोके इसारे देखलीये तब वो अपने रुमका दरवाजा बंध करके कीचनमे अंधेरेमे फ्रिजके पीछे छुपकर खडी थी.. जब देर रात सबानादीदी सोगइ.. तब सायरादीदी धीरेसे दरवाजा खोलकर बहान नीकली.. फीर उसने अपने रुमका फीर चाचीके रुमके दरवाजेको बहारसे धीरेसे लोक करदीया.. ओर दबे पांव धीरेसे उपर छतपे भैयाके पास चली गइ.. तब उनको नही पताथा की चाची कीचनमे उनपे नजर गडाये खडीथी.. हें..हें..हें..
लखन : (जोरोसे हसते) साला.. तो क्या चाचीने दोनोको रंगे हाथ पकडलीया..?
साहील : (हसते) हां.. जब सायरादीदी उपर चली गइ तो चाचीभी काफी देरके बाद उपर दबे पांव गइ.. ओर सीडीयोके पास छुपकर देखने लगी.. तब कादीर भाइ सायरादीदीके उपर लेटते उनको जोरोसे चुदाइ कर रहेथे.. जब दोनो जडने लगे तब चाची दबे पाव उनके पीछे पास जाकर खडी होगइ.. दोनोने चाचीको खडे पाया.. तो उनकी सीटीबीट गुल होगइ.. चाची उनको कुछ नही बोली..
ओर अेक अेक जोरोका तमाचा दोनो के गालपे जड दीया.. फीर दोनोको फटकार लगाकर सुबह उनको मीलकर बात करनेको कहा.. फीर जब सुबह हुइ.. तब भाइ ओर दीदी दोनोही अपने घरपे नही थे.. सुबह चाचीको सायरा दीदीकी चीठी मीली.. जो चाचीके नाम लीखकर गइथी.. की तीन साल पहेलेही दोनो स्कुलमे थे तबही नीकाह करलीया था.. तो उनको ढुढनेकी कोसीस ना करे..
लखन : (हसते) हंम.. तो ये बात हे.. तो इसमे तुम क्या कर सकते हो.. तु अब अपना देख.. ये सबतो होताही रहेगा.. अब ये बता तुम ओर तेरी अम्मा क्या चाहते हो..?
साहील : भाइ.. इतने सालोके बाद अम्माकी गोद भरी हे.. वो बहुत खुस थी.. मे इस बच्चेको गीराना नही चाहता.. बस अब चाचा चाची मानजाये.. उनकोतो पताभी नही हेकी हम दोनो रीलेशनमे हे.. जब उनको पता चलेगा तब पता नही क्या हंगामा करेगे वो.. भाइ.. मुजे सबाना दीदीकी बहुत टेन्शन हे.. बस वो अेकही हे जो मुजसे सबसे ज्यादा प्यार करती हे.. जब इधर आती हे तो भाइ भाइ करते थकती ही नही..
लखन : (मुस्कुराते) क्यु.. अब उनको क्या हुआ..?
साहील : भाइ.. वो सृतीभाभीकी तराह गायनेक डोक्टर बनना चाहती हे.. लेकीन अब कादीरभाइ चले गये हे.. ओर चाचाके पासभी इतना पैसा नही होगा.. तो अब वो सबाना दीदीको पढायेगे कैसे..? बस.. अब फाइनल यर ही बाकी हे.. उसे अब बेंगलोरमे अेडमीशन मील रहा हे.. तो वही पढने चली जायेगी.. चाची केह रहीथी इसमे अभी बारह तेरह लाख रुपीये भरने होगे.. चाचा कहासे नीकालेगे इतने पैसे..?
लखन : (कुछ सोचते) हंम.. पहेले ये बता तुमने इस बारेमे क्या सोचा हे..? फीर मे तुजे कुछ सजेस कर सकता हु..
साहील : भाइ.. अबतक खेती बाडीमे मेने पैसे बचाकर रखे हे.. ओर चाचाके हीसेका आधा पुरा हीसा मेरे पास पडा हे.. मेने सोचाथा की जब सायरादीदी या फीर कादीरभाइकी सादी होगी तब उनको दे दुगा.. लेकीन अबतो मामला ही बीगड गया हे.. तो सोच रहा हु.. अब ये पैसे मे सबानादीदीकी पढाइके लीये उनको देदु..
लखन : (मुस्कुराते) साहील.. तुमने बहुतही सही सोचा हे.. ये बता तेरे चाचाका पैसा तेरे पास कीतना पडा हे.. ओर तेरे पास कीतना पैसा पडा हे.. इतने सालसे खेती सम्हाल रहा हे.. तो कुछ तो होगाही..
साहील : (मुस्कुराते) भाइ.. लगता हे बात बन सकती हे.. इन चार सालमे चाचाके हीस्सेका कोइ साडे आठ लाख रुपीये होगे.. ओर मेरे पास घरका सब खर्चा करते चार साडे चार पांच लाख रुपीया होगा..
लखन : (हसते) तो कमीने होगइ तेरी प्रोबलेम सोल्व.. वैसेभी अभी तुम अपनी खेतीका अेक चोथाइ हीस्सा ही खेड रहे हो.. सोचो.. अभी तीज गुना जमीन तुम्हारी अैसेही बंजर पडी हे.. जो अभी वापस मीली हे.. अगर वो सभी तुम सही करके खेडोगे.. तब तुम्हारी आमदानी कीतनी बढ जायेगी..
साहील : (हसते) लेकीन भाइ.. इस जमीनमेभी मुजे मजदुर लगवाने पडते हे.. तो इतनी सारी जमीन मे अकेला कैसे सम्हाल पाउगा.. ओर वैसेभी ये जीमीन हमारे पुर्खोकी थी.. तो इसमे भी चाचाका हीसा हे..
लखन : अबे उलुके पठे.. वहा तेरे चाचा कीसी प्राइवेट फेक्टरीमे क्या जख मरवाते हे..? तो कमीने उसे यहा वापस बुला नही सकता..? जब उनके पास इतनी जमीन हे.. जब जमीन नहीथी इसीलीये तो गयेथे यहासे.. अब तो सब वापस मील गइ हे तो वापस बुलाले उसे..
साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. क्या बात कर रहे हो..? बाततो आपकी सही हे.. लेकीन वो चाचा हे मेरे.. मे उनसे कैसे बात करुगा..? वो मेरी बात मानेगे नही..
लखन : (मुस्कुराते) साहील.. तुम अेक काम करो.. अभी कल पहेले तो तेरी चाचीको फोन करके बतादे की सबानाकी कोइ चीन्ता मत करना.. उनका सब इन्तजाम होजायेगा.. ताकी उनकी ये टेन्शन तो खतम होजाये.. ओर मे अेक दो दीनमे फ्रि होजाउगा तब तुम दोनो मीया बीवी मेरे साथ चलना.. मुजे चाचसे कुछ बात भी करनी हे.. समजले तेरी ओर उनकी दोनोकी सभी समस्या हल होगइ..
साहील : (सरमाते हसते) ठीक हे भाइ.. क्या आप अम्माको मेरी बीवी केह रहे हो..? वो कहा मेरी बीवी हे..? क्या भाइ आपभी..? वो मेरी अम्मा हे.. अभी हमने कहा नीकाह कीया हे.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) साहील.. इसलीये तो तुजे केह रहा हु.. की तेरे चाचा चाचीको इधर बुलाले.. तब बडे भैया उनको समजा देगे.. तो तेरी ओर तेरी अम्माकी सादी आसानीसे होजायेगी.. ओर तुम दोनोको बच्चा गीरानेकी भी जरुरत नही पडेगी.. क्या कहेते हो..? हें..हें..हें..
साहील : (खुस होते हसते) अरे हां भाइ.. बाततो आपकी सही हे.. ठीक हे.. आप फ्रि हो तब बता देना हम तीनो चाचाके घर चले जायेगे.. हें..हें..हें..
अैसी ही बाते करते दोनो आगेकी प्लानींग करके अपने अपने घरपे चले गये.. इन सबके बीच आज अेक घरमे अेक ओर सुहागरातकी तैयारीया फुलोसे बेड सजाते चल रही थी.. वो घरथा डो. सुधीरका.. वहा चारु ओर नीशा दोनो मीलकर अपना बेड सजा रहीथी.. चारु रमेशको नीशा अकेली हे.. कहेकर उनके घर चली गइथी.. तो रमेश भी आज घरपे अकेला था.. आज रस्मी भी वंदनाको लेकर अपने घरपे चल गइ थी..
साहील : भाइ.. चाचा ओर बडे भैया अपनी नोकरीपे गयेथे.. तो दोनो दीदी कोलेज गइथी.. तब चाची उनके कमरेकी सब सफाइ कर रहीथी.. वहा तीनोकी अलमारी अलग अलग हे.. तब चाचीको सायरादीदी की अलमारीमे सफाइ करते बहुत सारी आइपीलकी ओर पेइन कीलरकी गोलीया मीली.. जो उसने अेक खानेमे छुपाकर रखीथी.. जीसे देखकर चाची चोंक गइ.. ओर उसने वो अपने पास रखली..
लखन : (मुस्कुराते) तो उनसे ये थोडीना साबीत होता हे की वो तेरे कादीर भाइसे चुदवाती हे.. हें..हें..हें..
साहील : (सरमाते धीरेसे) नही भाइ सुनोतो सही.. जब उनको ये सब मीला तो उनको सबाना दीदीपे भी संकाये होने लगी.. तो वहा उनकी अलमारीमे उनको कुछ नही मीला लेकीन भाइकी अलमारी साफ करते उनको वहासे बहुत सारे कोन्डम मीले.. तब चाचीको बहुत कुछ आसंकाये होने लगी.. ओर उसने दोनोके उपर नजर रखने की ठानली.. वो दोनोके उपर नजर रखने लगी.. ओर उस रात चाचाकी नाइट सीफ्ट सुरु होगइ..
लखन : (हसते) हंम.. फीर.. हें..हें..हें..
साहीला : (हसते) क्या भाइ.. आपको हसी आ रही हे..? सुनो.. रातपे चाचा अपनी नोकरीपे चले गये तब चाची भैया ओर दोनो दीदीया खाना खा रहेथे.. तब भैया ओर सायरादीदी आंखोके इसारोसे बाते करने लगे.. भैया दीदीको देर रात उपर छतपे आनेको केह रहेथे.. तब उनको नही पताथाकी आज चाची उन दोनोके इसारोको नोटीस कर रही हे.. फीर खाना खाकर भाइ छतपे सोने चले गये तो चाची ओर दोनो दीदीने घरका सब काम नीपटा लीया ओर फीर थोडी देर टीवी देखकर सब अपने अपने रुममे सोने चले गये..
लखन : (हसते) फीर.. हें..हें..हें.. आज दोनो गये कामसे.. हें..हें..हें..
साहील : (हसते) हां भाइ.. सुनोतो सही.. चाचीने दोनोके इसारे देखलीये तब वो अपने रुमका दरवाजा बंध करके कीचनमे अंधेरेमे फ्रिजके पीछे छुपकर खडी थी.. जब देर रात सबानादीदी सोगइ.. तब सायरादीदी धीरेसे दरवाजा खोलकर बहान नीकली.. फीर उसने अपने रुमका फीर चाचीके रुमके दरवाजेको बहारसे धीरेसे लोक करदीया.. ओर दबे पांव धीरेसे उपर छतपे भैयाके पास चली गइ.. तब उनको नही पताथा की चाची कीचनमे उनपे नजर गडाये खडीथी.. हें..हें..हें..
लखन : (जोरोसे हसते) साला.. तो क्या चाचीने दोनोको रंगे हाथ पकडलीया..?
साहील : (हसते) हां.. जब सायरादीदी उपर चली गइ तो चाचीभी काफी देरके बाद उपर दबे पांव गइ.. ओर सीडीयोके पास छुपकर देखने लगी.. तब कादीर भाइ सायरादीदीके उपर लेटते उनको जोरोसे चुदाइ कर रहेथे.. जब दोनो जडने लगे तब चाची दबे पाव उनके पीछे पास जाकर खडी होगइ.. दोनोने चाचीको खडे पाया.. तो उनकी सीटीबीट गुल होगइ.. चाची उनको कुछ नही बोली..
ओर अेक अेक जोरोका तमाचा दोनो के गालपे जड दीया.. फीर दोनोको फटकार लगाकर सुबह उनको मीलकर बात करनेको कहा.. फीर जब सुबह हुइ.. तब भाइ ओर दीदी दोनोही अपने घरपे नही थे.. सुबह चाचीको सायरा दीदीकी चीठी मीली.. जो चाचीके नाम लीखकर गइथी.. की तीन साल पहेलेही दोनो स्कुलमे थे तबही नीकाह करलीया था.. तो उनको ढुढनेकी कोसीस ना करे..
लखन : (हसते) हंम.. तो ये बात हे.. तो इसमे तुम क्या कर सकते हो.. तु अब अपना देख.. ये सबतो होताही रहेगा.. अब ये बता तुम ओर तेरी अम्मा क्या चाहते हो..?
साहील : भाइ.. इतने सालोके बाद अम्माकी गोद भरी हे.. वो बहुत खुस थी.. मे इस बच्चेको गीराना नही चाहता.. बस अब चाचा चाची मानजाये.. उनकोतो पताभी नही हेकी हम दोनो रीलेशनमे हे.. जब उनको पता चलेगा तब पता नही क्या हंगामा करेगे वो.. भाइ.. मुजे सबाना दीदीकी बहुत टेन्शन हे.. बस वो अेकही हे जो मुजसे सबसे ज्यादा प्यार करती हे.. जब इधर आती हे तो भाइ भाइ करते थकती ही नही..
लखन : (मुस्कुराते) क्यु.. अब उनको क्या हुआ..?
साहील : भाइ.. वो सृतीभाभीकी तराह गायनेक डोक्टर बनना चाहती हे.. लेकीन अब कादीरभाइ चले गये हे.. ओर चाचाके पासभी इतना पैसा नही होगा.. तो अब वो सबाना दीदीको पढायेगे कैसे..? बस.. अब फाइनल यर ही बाकी हे.. उसे अब बेंगलोरमे अेडमीशन मील रहा हे.. तो वही पढने चली जायेगी.. चाची केह रहीथी इसमे अभी बारह तेरह लाख रुपीये भरने होगे.. चाचा कहासे नीकालेगे इतने पैसे..?
लखन : (कुछ सोचते) हंम.. पहेले ये बता तुमने इस बारेमे क्या सोचा हे..? फीर मे तुजे कुछ सजेस कर सकता हु..
साहील : भाइ.. अबतक खेती बाडीमे मेने पैसे बचाकर रखे हे.. ओर चाचाके हीसेका आधा पुरा हीसा मेरे पास पडा हे.. मेने सोचाथा की जब सायरादीदी या फीर कादीरभाइकी सादी होगी तब उनको दे दुगा.. लेकीन अबतो मामला ही बीगड गया हे.. तो सोच रहा हु.. अब ये पैसे मे सबानादीदीकी पढाइके लीये उनको देदु..
लखन : (मुस्कुराते) साहील.. तुमने बहुतही सही सोचा हे.. ये बता तेरे चाचाका पैसा तेरे पास कीतना पडा हे.. ओर तेरे पास कीतना पैसा पडा हे.. इतने सालसे खेती सम्हाल रहा हे.. तो कुछ तो होगाही..
साहील : (मुस्कुराते) भाइ.. लगता हे बात बन सकती हे.. इन चार सालमे चाचाके हीस्सेका कोइ साडे आठ लाख रुपीये होगे.. ओर मेरे पास घरका सब खर्चा करते चार साडे चार पांच लाख रुपीया होगा..
लखन : (हसते) तो कमीने होगइ तेरी प्रोबलेम सोल्व.. वैसेभी अभी तुम अपनी खेतीका अेक चोथाइ हीस्सा ही खेड रहे हो.. सोचो.. अभी तीज गुना जमीन तुम्हारी अैसेही बंजर पडी हे.. जो अभी वापस मीली हे.. अगर वो सभी तुम सही करके खेडोगे.. तब तुम्हारी आमदानी कीतनी बढ जायेगी..
साहील : (हसते) लेकीन भाइ.. इस जमीनमेभी मुजे मजदुर लगवाने पडते हे.. तो इतनी सारी जमीन मे अकेला कैसे सम्हाल पाउगा.. ओर वैसेभी ये जीमीन हमारे पुर्खोकी थी.. तो इसमे भी चाचाका हीसा हे..
लखन : अबे उलुके पठे.. वहा तेरे चाचा कीसी प्राइवेट फेक्टरीमे क्या जख मरवाते हे..? तो कमीने उसे यहा वापस बुला नही सकता..? जब उनके पास इतनी जमीन हे.. जब जमीन नहीथी इसीलीये तो गयेथे यहासे.. अब तो सब वापस मील गइ हे तो वापस बुलाले उसे..
साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. क्या बात कर रहे हो..? बाततो आपकी सही हे.. लेकीन वो चाचा हे मेरे.. मे उनसे कैसे बात करुगा..? वो मेरी बात मानेगे नही..
लखन : (मुस्कुराते) साहील.. तुम अेक काम करो.. अभी कल पहेले तो तेरी चाचीको फोन करके बतादे की सबानाकी कोइ चीन्ता मत करना.. उनका सब इन्तजाम होजायेगा.. ताकी उनकी ये टेन्शन तो खतम होजाये.. ओर मे अेक दो दीनमे फ्रि होजाउगा तब तुम दोनो मीया बीवी मेरे साथ चलना.. मुजे चाचसे कुछ बात भी करनी हे.. समजले तेरी ओर उनकी दोनोकी सभी समस्या हल होगइ..
साहील : (सरमाते हसते) ठीक हे भाइ.. क्या आप अम्माको मेरी बीवी केह रहे हो..? वो कहा मेरी बीवी हे..? क्या भाइ आपभी..? वो मेरी अम्मा हे.. अभी हमने कहा नीकाह कीया हे.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) साहील.. इसलीये तो तुजे केह रहा हु.. की तेरे चाचा चाचीको इधर बुलाले.. तब बडे भैया उनको समजा देगे.. तो तेरी ओर तेरी अम्माकी सादी आसानीसे होजायेगी.. ओर तुम दोनोको बच्चा गीरानेकी भी जरुरत नही पडेगी.. क्या कहेते हो..? हें..हें..हें..
साहील : (खुस होते हसते) अरे हां भाइ.. बाततो आपकी सही हे.. ठीक हे.. आप फ्रि हो तब बता देना हम तीनो चाचाके घर चले जायेगे.. हें..हें..हें..
अैसी ही बाते करते दोनो आगेकी प्लानींग करके अपने अपने घरपे चले गये.. इन सबके बीच आज अेक घरमे अेक ओर सुहागरातकी तैयारीया फुलोसे बेड सजाते चल रही थी.. वो घरथा डो. सुधीरका.. वहा चारु ओर नीशा दोनो मीलकर अपना बेड सजा रहीथी.. चारु रमेशको नीशा अकेली हे.. कहेकर उनके घर चली गइथी.. तो रमेश भी आज घरपे अकेला था.. आज रस्मी भी वंदनाको लेकर अपने घरपे चल गइ थी..



















