Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 39 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

तो इधर होस्पीटलमे सब लोग राजीवके अगल बगलमे खडे थे.. तो कुछही देरके बाद भानुभी भुमीका पुनम ओर चंदाको लेकर होस्पीटलपे आगया.. तो चंदा राजीवको देखतेही आंसु बहाने लगी.. तो भुमीकी आंखसेभी आंसु टपक गये.. तो सृतीने दोनोको इसारोसे आंसु बहानेको मना कीया तो दोनोने जटसे अपने आंसु पोछ लीये.. जब सबलोग आगये तो मंजु रावजीवके पैरोके पास चली गइ.. ओर बीचमे उनके सामने खडी रही..

सबको लगाकी मंजु जगाह नही होनेकी वजहसे वहा चली गइ हे.. लेकीन कीसीको पता नही थाकी वो मनमे मंत्रोचार कर रही हे.. ओर उसने धीरेसे सबसे छुपके राजीवके पैरोको छुआ.. तो राजीवके सरीरमे अ‍ेक जुनजुहाटकी लहेर दोड गइ.. ओर उनकी आंखे बंध होनेके बावजुद अंदरकी ओर फरकने लगी.. राजीवको धीरे धीरे अपना पीछला जन्म अ‍ेक फील्मकी रीलमे माफीक दीखने लगा..

मंजु अ‍ैसा करके उनको अपने पीछले जन्मकी ओर इस जन्मकी पहेचान करवा रहीथी.. राजीवको अपने बाजुमे नीर्मलाके रुपमे पीछले जन्मकी सोनुका चहेरा दिखने लगा.. तो इस साइड उसे देवायतके अंदर वो हिमाचलके राजा राजका अंस दिखने लगा.. जो इस वक्त दोनोही उनकी अगल बगलमे बैठकर आंसु बहा रहेथे.. राजीवको पीछले जन्मका सबकुछ याद आने लगा..

वो अपने आपको पहेचान गयाकी वो पीछले जन्ममे सुनील था.. ओर अपने आखरी वक्तमे उसने राज ओर नेनुको वादा कीयाथा.. की अगले जन्ममे मे तुम्हारे मामा बनके आउगा.. ओर अब वक्त नजदीक था.. जब राज अगला जन्म लेकर वापस इस पृथ्वीपे आयेगा.. उनसे पहेले राजीवको उनके मामा बनके वापस आना हे.. क्युकी अभी तक राजने जन्म नही लीयाथा.. सबलोग उसीके जन्मकी तैयारीके रुपमे आ गयेथे.. ओर राजीवके सरीरमे हरकत होने लगी..

ओर आखीर उनकी आंखोमे अ‍ेक तेज प्रकाश छा गया.. ओर उसे मंजुके रुपमे उस माइके दर्शन हो गये.. जो सबकी जननी थी.. जीनकी दस भुजाये थी.. जो अ‍ेकदम नग्न स्वरुपमे उनके सामने खडी थी.. जीसे देखतेही राजीवका हाथ हीलने लगा.. तो सबलोग खुस होने लगे.. तब सृतीने जटसे धिरेनको डोक्टरको बुलानेको कहा.. तो धिरेन बहारकी ओर दोडके चला गया.. ओर कुछही देरमे डोक्टरको लेकर आगया..

डोक्टर : (आंखे चेक करते) देवायतजी.. लगता हे इनको होस आ रहा हे.. आप सबलोग थोडी देरके लीये बहार जाइअ‍े.. जब इनको होस आजायेगा तब हम आप सबको अंदर बुला लेगे..

कहातो नीर्मला मंजु देवायत ओर सृतीके अलावा सबलोग बहार नीकल गये.. तब राजीवको होस आगया.. उसने धीरेसे अपनी आंखे खोलदी.. तो सामने मंजुको खडी देखा.. तो उनके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर धीरेसे उनको हाथ जोड लीया.. तो मंजुकी आंखसे मुस्कुरानेके बावजुद आंसु नीकल गये.. तब देवायतको पता चल गयाकी सब मंजुकी वजहसे हुआ हे.. मंजुने राजीवको अपनी पहेचान करवादी हे.. तो वो मुस्कुराने लगा.. तभी..

डोक्टर : (मुस्कुराते) हां.. तो अंकल.. अब आपको कैसा लग रहा हे.. लगता हे आपने कुछ चम्तकार कीया हे.. तभी तो आपको इतनी जल्दी होस आगया.. हें..हें..हें..

राजीव : (धीरेसे) हंम.. काफी बेटर लग रहा हे.. थेन्क्स..

डोक्टर : (मुस्कुराते) हंम.. चलो मे सबको अंदर भेजता हु आप सबको मीललो.. लेकीन ज्यादा बोलना नही.. ओके.. आपको ट्रेस होगा..

राजीव : (जब डोकटर चला गया सब लोग वापस अंदर आगये) नीमु.. थेन्क्स.. तुमने मेरा खुब साथ दीया.. लेकीन तुम मेरी अमानत नही हो.. मेरे भांजेकी अमानत हो.. मुजे जाना पडेगा.. तभी तो मेरी भावुकी कोखसे वापस आ पाउगा.. मेरे देवुके पोतेका मामा बनके.. मेने उसे वादा कीया था.. तो नीभाना तो पडेगा.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (मुस्कुराते) मत कीजीये अ‍ैसी बाते.. आपको डोक्टरने बोलनेको मना कीया हेनां..?

राजीव : (मुस्कुराते हाथ थामते) नही नीमु.. आज बोलने दे.. फीर क्या पता दुबारा बोलनेका मौका मीले या ना मीले.. (मंजुकी ओर हाथ जोडते) मंजु बेटा.. माफ करना.. मे तुजे पहेचान नही पाया.. तुमतो हम सबकी जननी हो.. बस.. मेरी नीमु ओर मेरी भावुको सम्हाल लेना..

मंजुला : (आंसु बहाते) पापा मत कीजीये अ‍ैसी बाते.. मे तो आपकी बेटी हु.. मे वादा करती हु.. मे सबको सम्हाल लुगी.. आपको कुछ नही होगा..

राजीव : (भुमीकी ओर देखते) भुमी.. कैसीहो मेरी बहेन.. मे तुमको भी पहेचान गया हु.. हें..हें..हें.. बस.. मेरी नीमुका साथ देना.. वो अकेली ना पड जाये..

भुमीका : (अपने आंसु पोछते) भाइ.. मत करो अ‍ैसी बाते.. वो मेरी बहेन हे.. तो मे उनका खयाल रखुगी..

राजीव बारी बारी सबको याद करता हे.. धिरेनको भी पुनमका खयाल रखनेको कहेता हे.. भानुको भावनाका खयाल रखनेको कहेते सबलोग दो घंटे तब राजीवसे बाते करते रहे.. तो बीचमे हसी मजाकभी चलता रहा.. तब तक राजीवने नीर्मलाका हाथ थामे रखा.. ओर आखीर उनको बोलनेमे भी तकलीफ होने लगी.. तब राजीवने देवायतको पास बुलाकर उनका हाथभी थाम लीया.. ओर नीर्मलाके हाथको पकडकर देवायतके हाथोमे थमा दीया..

राजीव : (नीर्मलाका हाथ देवायतको थमाते) देवुबेटा.. लो सम्हालो अपनी सोनुको.. आजसे मेरी नीमुकी सब जीम्वेवारी आपकी हे.. मे आपको अपनी अमानत सोंप रहा हु..

देवायत : पापा.. आइ प्रोमीस.. मे आपकी नीमुका खयाल रखुगा..

कहातो राजीव मुस्कुराने लगा.. ओर नीर्मलाकी ओर मुह करते उनको देखता रहा.. तब नीर्मलाकी आंखसे भी आंसु नीकल गये.. राजीव अ‍ेक नजरसे नीर्मलाको बीना पलक जपकाये देखता रहा.. तब सृतीको आभास होगया.. ओर वो जटसे आकर राजीवको हीलाती हे.. तो राजीवका हाथ नीचे गीर गया.. तो सृती उनकी हाथकी नब्सको चेक करने लगी.. ओर धिरेनको जल्दीसे डोक्टरको बुलाने कहा तो मंजु समज गइ.. ओर वो रोने लगी..

तो नीर्मला जटसे खडी होगइ.. ओर राजीवको हीलाने लगी.. लेकीन राजीव अ‍ैसेही सीथील पडा रहा.. ओर सबको मनमे आसंकाअ‍े होने लगीकी राजीव हमे छोडकर चला गया हे.. तभी डोक्टरने फटाफट आकर राजीवको चेक करलीया.. ओर सृतीकी ओर देखते नां मे गरदन हीलाते राजीवकी आंख बंध कर देते हे.. ओर उनके उपर चदर डालके देवायतके कंधेपे हाथ रखते अपना अफसोस व्यक्त करते हे..

डोक्टर : सोरी.. देवायतजी.. अब आपके ससुर नही रहे.. आप मेरी चेम्बरमे चलीये.. मे सब पेपर कंपलीट करवाता हु.. फीर इसे लेजाइअ‍ेगा..

कहातो भावना नीर्मला मंजु सबलोग राजीवको घेरकर फुट फुटके जोरोसे रोने लगे.. ओर होस्पीटलमे पुरा वातावरण गमगीन होगया.. तब भुमीका सरला भानु ओर देवायत सबको सम्हालने लगे.. फीर भानुने सामतभाइ ओर रमेशको फोन करदीया.. तो लखनभी नीलमको उनके घर छोडकर अपने खेतोपे था तो वोभी लताके साथ जीस लेडीसको आनाथा वो सभी लेडीसको लेकर राजीवके गांवकी ओर नीकल गया..

इधर सबका रोना धोना थोडा सांत हुआ.. तो भानु ओर धिरेनको कहेकर देवायतने सभी लेडीसको घर भेज दीया.. देवायत सब पेपर कंपलीट करवा देता हे.. तब डोक्टर उनको अफसोस जताते राजीवकी बोडीको घर लेजानेको कहेते हे.. तभी भानुभी सब लेडीसको छोडकर वापस आगया.. तो दोनोही राजीवकी बोडीको लेकर घरपे चले गये.. इस कार्यवाहीमे अ‍ेक घंटा बीत चुकाथा तबतक रमेश सामत लखन सबलोग आगये..

तो आतेही लता मंजुसे चीपककर रोने लगी.. तो रश्मी चारु नीशा जया सांती बसंती ब्रिन्दा सभी लेडीस सबको गले मीलकर आस्वासन देती रही.. तबतक रमेश ओर सामतने अर्थीके सामानका इन्तजाम करलीया ओर बोडीको कंपलीट करदी.. तब देवायतने सबको अ‍ेक बार फीर राजीवके अंतीम दर्शनके लीये कहा.. तब नीर्मला मंजु ओर भावना उनसे लीपटकर बहुत रोइ.. तो रश्मी चारु भुमीका सरलाने सबको सम्हाला..

फीर देवायत भानु धिरेन ओर लखनने अर्थीको उठाया.. ओर सबलोग स्मसान चले गये.. वहा देवायत ओर धिरेनने मीलकर राजीवको मुखमग्नी दी.. फीर वहाकी सब वीधीया करके सबलोग वापस घरपे आगये.. फीर साम होते होते सबलोग अपने घरकी ओर वापस जाने लगे.. सामत रमेशभी सब लेडीसको लेकर वापस नीकल गये.. तो देवायतने लखनको भी लताको साथ लेकर घर जानेको कहा.. तो भानुभी सरलाको लेकर वापस अपने घर नीकल गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १७५

फीर देवायत भानु धिरेन ओर लखनने अर्थीको उठाया.. ओर सबलोग स्मसान चले गये.. वहा देवायत ओर धिरेनने मीलकर राजीवको मुखमग्नी दी.. फीर वहाकी सब वीधीया करके सबलोग वापस घरपे आगये.. फीर साम होते होते सबलोग अपने घरकी ओर वापस जाने लगे.. सामत रमेशभी सब लेडीसको लेकर वापस नीकल गये.. तो देवायतने लखनको भी लताको साथ लेकर घर जानेको कहा.. तो भानुभी सरलाको लेकर वापस अपने घर नीकल गया....अब आगे

तो इधर सुबह भानुके फोनपे जैसेही राजीवकी तबीयत खराब होनेका फोन आया तो भानु सीधाही लखनको कहेकर अपने गांव चला गया.. ओर वहा रमाको सामको देरसे आनेको कहेकर सरलाको साथ लेकर राजीवके गांवकी ओर नीकल गया.. तो घरपे सीर्फ रमा ओर नीलमही रेह गये.. तो रमाको नीलमसे लखनके बारेमे बात करनेका मौका मील गया.. उनके पास सामतक का वक्त था..

तो वो काम करते नीलमके सामने धीरे धीरे बातकी सुरुआत लखनकी तारीफ करते करने लगी.. लेकीन नीलमने कुछ खास ध्यान नही दीया.. वो गुमसुम बैठी रमाकी बात सुनने लगी.. लेकीन उनके दिमागमे अब भी धमासान मचा हुआ था.. उसे बार बार लखनकी सभी हरकते याद आरही थी.. रमा अपना काम करते लखनकी बाते कर रहीथी तो नीलम उनके बारेमे सोचते बैठी थी..

नीलम : (मनमे सोचते) लखनजीजु भीनां.. आजतो उनसे बाल बाल बच गइ.. वरना आज वोभी पका मुजे धिरेनकी तराह चोद लेते.. कैसे लखनजीजुने मुजे जबरदस्तीसे अपना तगडा लंड पकडवाया.. ओ बापरे कीतना बडा था.. क्या लंडभी इतना बडा हो सकता हे..? ओर मेरे होठोको चुमते बुब्सको मसल रहेथे.. हद तो तब होगइ जब लखनजीजुने मेरी चुतको मुठीमे पकडकर भीच लीया.. तब मेरी चुतमे कीतना दर्द होने लगाथा..

लखनजीजु भी बडे ही कमीने कीसमके इन्सान नीकले.. दिखनेमे तो कीतने भोले भाले लगते हे.. ओर उसने तो मेरी ओर धिरेनकी चुदाइकी क्लीप भी बनाली.. वो कब वहा आये होगे..? हमतो उपर धिरेनके रुममे चुदाइ कर रहेथे.. तो क्या वो पीछेसे कहीसे उपर चडकर आये होगे..? हमारे बारेमे मम्मी पापाको ना बतादे.. वरना हमारा सारा प्लान चोपट होजायेगा.. उसने मुजे कीसीको क्लीप दीखाने मनातो कीया हे..

लेकीन ना बताने की सर्तभी क्या रखी..? वोभी मेरे साथ फीजीकल रीलेशन रखना चाहते हे.. फीजीकल रीलेशन रखनेका क्या मतलब हुआ..? मतलब तो वही हुआना की वोभी मुजे चोदना चाहते हे.. तो क्या मेभी लखनजीजुको पसंद आगइ हु..? मे भी मम्मीकी तराह इतनी सुंदर ओर खुबसुरत तो हुही.. की कीसी भी मर्दको अपनी ओर आकर्सीत कर सकती हु.. तभीतो लखनजीजु मुजे चोदना चाहते हे.. लेकीन अबतो मे धिरेनकी हो चुकी हु.. तो फीर.. उनको कैसे..?

लगता हे लखन जीजु भी बहुत रंगीन मीजाजके हे.. बीस्तरमे लतादीदीको चोदते उनकी चीखे नीकलवाने की बात कैसे खुलकर बता रहेथे.. क्या सचमे दीदी चीलाती होगी..? अगर धिरेनके साथ रीलेशनमे आनेसे पहेले मुजसे अपना प्यार जताते तो मे जरुर उनका प्यार अ‍ेक्सेप्ट कर लेती.. लेकीन अब बहुत देर होचुकी हे.. मेने ओर धिरेनने अपनी सुहागरात भी मनाली हे.. अब मे धिरेनको कैसे छोड सकती हु..? वो मुजसे बहुत प्यार भीतो करते हे..

लेकीन जीजुने सचभी तो कहा.. धिरेनके लंडसे तो लखनजीजुका लंड कीतना बडा हे..? बापरे.. क्या ओरते ओर लडकीया.. इसीलीये बडे लंडकी दिवानी होती हे..? सायद उनको बडे लंडमे बहुत मजा आता होगा.. कही मेने धिरेनके साथ रीलेशन रखकर कोइ जल्दबाजी तो नहीकी..? नही नही.. मे गलत सोच रही हु.. अ‍ैसा नही हो सकता.. अबतो लतादीदीने मेरा फोनभी लेलीया हे.. तो उनसे बातभी नही कर सकती..

रमा : (जोरोसे) अरी ओ नीलु.. मे कबसे तुमसे बात कर रही हु.. तेरा ध्यान कीधर हे..? कबसे क्या सोच रही हे.. मे यहा कबसे बडबड कर रही हु.. ओर तु कीस सोचमे डुबी हुइ हे..? हंम..? क्या कोइ परेसानी हे..?

नीलम : (हडबडाते तंद्नासे जागते जटसे) अरे नही नही.. मोम.. बहुत भुख लगी हे.. आप खाना बनाओनां.. फीर हम आराम करते बाते करेगे.. अभी पेटमे चुहे दोड रहे हे.. हें..हें..हें..

रमा : (मुस्कुराते) ये लडकी भीनां..? बीलकुल पागल हे.. होस्टेलमे रहेकर बीगड गइ हे.. हें..हें..हें.. चल मेरी कुछ खानेमे मदद कर.. कल अगर ससुराल जायेगी तो सब खाना बनाना आना चाहीये.. चल..

नीलम : (जोरोसे हसते) मोम.. अगर खाना बनाना नही आया तो मे आपको साथ लेजाउगी.. हें..हें..हें..

रमा : (मुस्कुराते अ‍ेक मुका मारते) चल हट.. बदमास.. तु वहा जाकर सचमे बीगड गइ हे.. चल आजा..

नीलमने बडीही सीफततासे रमाकी बातको टाल दीया.. ओर वो रमाकी मदद करनेके लीये खडी होगइ.. फीर दोनोने मीलकर खाना बनाने लगी.. तबभी रमा बीच बीचमे लता ओर लखनकी बाते करते उनकी तारीफ कर लेती थी.. तब अ‍ेक बारतो नीलमको भी सक होने लगाकी उनकी मां लखन जीजुकी इतजी तारीफ क्यु कर रही हे..? कही लखन जीजुका उनकी मां के साथभी तो कोइ चकर नही..?

नही नही.. मे गलत सोच रही हु.. यही सब नीलमके दिमागमे चल रहाथा.. फीरभी सोचते दोनोने खाना बनालीया ओर खालीया.. फीर सब काम नीपटाकर दोनोही रमाके रुममे आराम करने चली गइ.. तब कुछ देर नीलम भावेशके साथ खेलती रही.. जब रमाने भावेशकोभी हल्कासा खाना खीलाकर सुला दीया.. तो दोनोही मां बेटी अगल बगलमे लेटकर आराम करते बाते करने लगी.. रमा नीलमको सबकुछ खुलकर बताना चाहती थी..
 
रमा : (मुस्कुराते) नीलु बेटा.. बस.. तुम अ‍ेक बार अच्छेसे तेरी सब पढाइ करले.. तुजे पढनेका बहुतही अच्छा मौका मीला हे.. तेरी लतादीदी ओर लखनजीजुने तेरी पढाइ ओर तेरी सादीकी सारी जीम्वेवारी उठाली हे..

नीलम : (अपने मनकी बात रखते) लेकीन मोम.. मे लतादीदीके घरपे नही रहुगी.. मे होस्टेलमे रहेकर अपनी पढाइ पुरी करुगी.. क्या हेना मुजे कीसीके घरपे इतने दिन रहेना अच्छा नही लगता..

रमा : (सामने देखते आस्चर्यसे) तु पागल होगइ हे क्या..? लतादीदी पराइ थोडीनां हे..? तेरी बहेनके घरमे रहेनेमे क्या दीकत हे..? अबतो वो तेरी बुआ हे.. अगर उनके घरपे रहेगी तो कमसे कम तेरे होस्टेलमे रहेनेका ओर खाने पीनाका खर्चा तो बच जायेगा.. तेरी पढाइका खर्चा वो दे या हम दे.. लेकीन जायेगा तो हमारे घरसे ही.. ओर लतादीदीने मुजे सामनेसे कहा हे.. तो फीर तुजे क्या प्रोबलेम हे..?

नीलम : (मनमे) मोम.. अब आपको कैसे समजाउ..? अगर तेरी बेटी वहा रही तो तेरा ननंदोइ हर दिन तेरी बेटीकी चुदाइ करता रहेगा.. जालीमका हेभी कीतना बडा.. मुजेतो दीखाकर पागल कर दीया.. दीखाया क्या..? मेरा हाथ पकडकर कैसे अपने लंडको सहेलवा रहेथे.. बापरे.. कीतना मोटा लग रहा था..

रमा : (सामने देखते) नीलु.. फीर क्या सोच रही हे..? मे देख रही हु तु जबसे आइ हे कुछना कुछ सोचती रहेती हे.. कही तुजे कोइ परेसानी तो नही..? या कोइ प्यार ब्यारका चकरतो नही हेनां..? तो बता देना..

नीलम : (सामने देखते थोडी नाराज होते) क्या मोम.. आपभीनां..? मेरा अ‍ैसा कोइ चकर नही हे समजी.. अब मे सोचना भी छोडदु..? मुजे कोइ परेसानी नही.. आप सोजाओ.. हम फीर बात करेगे..

रमा : (मुस्कुराते) नही नीलु.. आज घरपे कोइ नही हे.. ओर हमे अ‍ेकेलेमे बात करनेका इनसे अच्छा मौका नही मीलेगा.. मे तुमसे कुछ बाते कहेना चाहती हु.. मे चाहती हु की ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रहे..

नीलम : (सामने देखते) मोम.. अ‍ैसी क्या बात हे जो आप मुजसे अकेलेमे बताना चाहती हे..? ओर बात हम दोनोके बीच रहेनी चाहीये.. मतलब..? अ‍ैसी क्या बात हे जो आप घरके लोगोसे छुपकर कहेना चाहती हे..?

रमा : (धीरेसे सरमाकर मुस्कुराते) देख नीलु.. मे मां हु तेरी.. अगर मुजे तेरी चीन्ता नही होगी तो कीससे होगी..? मेभी चाहती हुकी मेरी बेटीको भी लतादीदीकी तराह अच्छा ससुराल मीले.. वोभी अ‍ैसो आरामकी जींदगी जी सके.. इसके लीये तेरी लतादीदीने खुद तेरी सादीकी जीम्वेवारी लेलीहे.. वो कहेतीथी बडे देवरसे कहेकर कोइ अच्छे घरमे तेरा रीस्ता तैय कर देगे..

नीलम : (थोडी परेसान होते) मोम.. आपको नही लगता आप मेरी सादीको लेकर जल्दबाजी कर रही हे..?

रमा : (मुस्कुराते) नही.. तु फीकर मत कर.. हम तेरी पढाइ पुरी होनेका इन्तजार करेगे.. लेकीन नीलु.. मे चाहती हुकी मेरी नीलु सादी करके अ‍ेक अ‍ैसे रइझ घरमे जाये.. वहा उसे कीसीभी बातकी कमी नाहो.. मे तेरा रीस्ता कही अन्जान जगहपे नही करुगी.. इनसे तो अच्छा हे कोइ घरके पहेचान वालोमे तेरी सादी हो.. इसके लीये मेने बहुत कुछ सोचके रखा हे.. अब मे तुजे जो बात बताने जा रही हु उसे ध्यानसे सुनना.. ओर वादा कर ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच रहेगी..

नीलम : (आस्चर्यसे देखते) मोम.. बताइअ‍े.. आइ प्रोमीस मे कीसीको कुछ नही कहुगी.. बताओ..

रमा : (सरमाते मुस्कुराते) नीलु.. मे चाहती हु.. तुम दोनो बहेने पुरी जींदगी साथमे रहो.. मतलब अ‍ेकही घरमे अ‍ेकही पतीकी बीवी बनकर.. मे चाहती हु तुम्हारी सादी भी लखनजीसे होजाये.. वो बहुतही पैसे वाले हे.. वो अ‍ेक राजाकी फेमीली हे.. उनके पास अच्छी खासी प्रोपर्टीभी हे.. अच्छा बीजनेस हे.. सभी गांवमे उनकी इजत भी हे.. ओर सबसे खास बाते वो कीतनीभी सादीया करले.. उनको कोइ पुछने वाला नही..

नीलम : (आस्चर्यसे देखते) मोम.. कही अप पागल तो नही होगइ..? मेरी ही दीदीको मेरी सौतन बनानेके लीये तुली हो..? अगर पापाको पता चल गया तो आपकी खैर नही.. वो आपको घरसे नीकाल देगे.. बात करती हे.. आप अ‍ैसा सोचभी कैसे सकती हे..?

रमा : (थोडी सख्तीसे) कमीनी.. तुम मुजे मत सीखा.. इसीलीयेतो तुजे अभी ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच रखनेको केह रहीथी.. देख आज लतादीदी उस घरकी रानी बन गइ हे.. तो अ‍ेक दिन तुमभी वहा राज करोगी.. राज.. समजी..? हमतो बडे नसीब वाले हेकी हम उस घरके साथ जुडे हुअ‍े हे.. ओर अबतो वो हमारे समधी भी हे.. तो यहा गांवमे हमारी भी इजत बढ गइ हे.. यहाभी हमे लोग इजतकी नजरोसे देखते हे.. कही अ‍ैसी वैसी जगाहपे सादी करनेसे तो अच्छा हे.. तु अपनी दीदीकी सोतन होजाये..

नीलम : (हींमत करते) मोम.. मे आपसे कुछ कहेना चाहती हु.. अगर मुजे कीसीकी दुसरी ही बीवी बनना हे तो मुजे लखन जीजुसे ज्यादा धिरेन जीजु पसंद हे.. वोभी सरकारी नोकरी करते हे.. वोभी सुखी सम्पन हे.. तो आपने उसीका नाम क्यु नही लीया..? सीर्फ लखन जीजुको ही क्यु चुना..?

रमा : (चोंकते अ‍ेक नजरसे देखते) नीलु.. तेरा दिमागतो ठीक हेनां..? कमीनी.. अगर वो सुखी सम्पन होते तो धिरेन इतना बडा होनेके बावजुद भी उनकी मांने क्यु हमारे बडे देवरसे सादी करली..? क्युकी वो खुद अ‍ैसो आरामकी जींदगी जीना चाहती थी.. वोभी इस हवेलीकी रानी बनना चाहती थी.. (कुछ सोचते ही) अ‍ेक मीनीट.. अ‍ेक मीनीट.. नीलु.. सच बताना.. कही तेरा धिरेनके साथ कुछ चकर बकर तो नही..? सच बताना.. कमीनी ये धिरेनकी बात तेरे दिमागमे आइ कैसे..? खा मेरी कसम..

नीलम : (थोडी गभराते जुठ बोलते) नही नही.. मोम.. आप मुजपे सक कर रही हो.. अ‍ैसा कुछभी नही हे.. आपकी कसम.. बस..? मेरे मुहसे अनायास अ‍ैसेही उनका नाम नीकल गया.. मेतो बस अ‍ैसेही आपको केह रही थी.. ठीक हे.. जैसा आपको ठीक लगे.. बस..? अबतो आप खुस..?

कहातो रमाने राहतकी सांसली.. आज बातोही बातोमे नीलम अपने दिलकी बाते अपनी मांको कहेते रमासे जुठ बोलकर बाल बाल बच गइ.. रमासे बचनेके लीये उसे रमाकी जुठी कसमभी खानी पडी.. तो नीलमको मनमे बहुत बुरा लगा.. अब उनके पास रमाकी बात माननेके अलावा दुसरा कोइ रास्ता नही दीखा.. अब आगे जोभी होगा देखा जायेगा.. सोचकर नीलमने रमाको सरेन्डर करते राहतकी सांस ली..

उसने बातोही बातोमे धिरेनके साथ रीलेशनकी बात कहेना चाही.. फीर लताके साथ उनके घरपे ना रहेनेकी रमाके सामने जीतनी भी दलीले की.. वो सभी दलीले बेकार होगइ.. अब उनको पुरा यकीन होगया की उसे अब लतादीदीके साथही रहेना पडेगा.. ओर लतादीदीके साथ रहेनेका मतलब खुदको लखन जीजुको सरेन्डर करना.. ये बातभी वो भली भांती जान चुकी थी.. तभी उनको रमाकी आवाज सुनाइ दी..
 
रमा : (मुस्कुराते) देख नीलु.. मे जोभी कर रही हु सब तेरी भलाइ के लीयेही कर रही हु.. अब मेरी बात ध्यानसे सुनना.. तेरे पास बहुतही अच्छा मौका हे.. तु लतादीदीके घरपे पढाइ तक रुकेगी.. मतलब दो तीन सालतो पकाही समजले.. (नजरे चुराते सरमाकर) तो मे चाहती हु की.. की.. तुम इस मामलेमे खुद आगे बढे.. समज गइनां..? ताकी आगे जाकर खुद लखनजी तेरी सादीकी बात हमसे करे.. क्युकी हम उनको ये सब बात सामनेसे नही केह सकते..

नीलम : (बडेही आस्चर्यसे देखते) मो..म.. आपको पता हेनां..? की आप क्या केह रही हे..? इसका मतलब भी जानती हे आप..? आप अपनी ही बेटीके साथ कीतना बडा खतरनाक खेल खेल रही हे..

रमा : (थोडी नाराज होते) कमीनी तु मुजे मत सीखा.. मुजे सब पता हे मे क्या बोल रही हु.. ओर सुन.. इस बारेमे तेरी लतादीदीको कुछ पता नही चलना चाहीये.. समजी..? वरना सारा खेल बीगड सकता हे..

नीलम : (रमाकी ओर आस्चर्यसे देखते) मो..म.. लगता हे आप पागल होगइ हे.. आपको पता हेनां इसमे मे ओर लखनजीजु आगे बढेगे तो क्या हो सकता हे..? इसमे कुछभी हो सकता हे.. आप समज गइनां..?

रमा : (नजरे चुराते धीरेसे) हां हां.. मुजे सब पता हे.. क्या हो सकता हे.. लेकीन तेरी सादीभी तो उसीके साथ होगी.. अगर तेरा होने वाला पती सादीसे पहेले तेरे साथ कुछ करभी ले तो क्या बुराइ हे..? मे इसे गलत नही मानती.. नीलु.. सोच.. अ‍ेक बार तेरी सादी उनसे हो जायेगी.. तो फीर तुम उस हवेलीकी रानी बन जाओगी.. सोरी नीलुु.. मे अ‍ेक मां होकर तुजसे ये सब केह रही हु.. मुजे गलत मत समजना.. ये सब मे तेरे उज्वल भविस्यके लीये कर रही हु..

नीलम : (कुछ सोचते) मोम.. मुजे पता हे आपको मेरी बहुत फीकर हे.. लेकीन इसके बारेमे मुजे सोचनेके लीये थोडा वक्त दीजीये.. क्युकी आप बहुत बडा रीस्क ले रही हे..

रमा : (सामने देखकर मुस्कुराते प्यारसे गाल सहेलाते) ठीक हे.. मेरी प्यारी बच्ची.. नीलु.. तुम बहुतही समजदार हे.. अ‍ेक बार सांतीसे बैठकर ठंडे दिमागसे सोचले.. फीर आरामसे मुजे तेरा जवाब बता देना.. बेटी.. मे कोइ रीस्क नही ले रही.. मेने जो भी कहा हे बहुत सोच समजकर ही कहा हे..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. अब जमाना बदल गया हे.. अब पहेलेकी तराह प्यार नही होता.. आजका मर्द ओर औरते प्यारका मतलब कुछ ओरही समजते हे.. अ‍ेक बार मान भी लो.. की मेरे साथ लखन जीजुको प्यार होगया.. तो वो मुजसे कुछ ओरही डिमांन्ड करेगे.. तब आप क्या करोगी..? अगर यही प्यार मेने लखन जीजुके अलावा कीसी ओरसे कीया होता.. ओर आपको सब पता चलता तो अबतक तो आप मेरी खाल उखाड दी होती..

रमा : (प्यारसे गाल सहेलाते) मेरी बच्ची.. कीतनी सयानी होगइ हे.. तुम सबकुछ समजती हे.. नीलु.. तु लखनजीसे प्यार करेगी.. तो यकीन मान मे तुछे अ‍ेक सब्दभी नही कहुगी.. क्युकी मे खुद चाहती हुकी तुम उनके साथ आगे बढो.. अ‍ेक बार तुम दोनोके बीच प्यार बढेगा.. तब मुजे पता हे वो तेरे बीना नही रेह सकेगे..

ओर तुम जो केह रही हो वो डीमांन्डभी करेगा.. (सरमाते नजरे चुराते) नीलु.. तो तुम इसमे आगे बढना.. जब दोनो अ‍ेक बार मील जाओगे.. तब तुम उनको सादी करनेके लीये कहेना.. वो खुद आकर तेरे पापासे तेरा हाथ मांग लेगे.. बस.. मेतो तुजे अच्छे खानदानमे राज करते देखना चाहती हु.. ओर कुछ नही..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे मोम.. मुजे सोचनेका समय देनेके लीये थेन्क्स.. अब आप सो जाइअ‍े..

रमा : (मुस्कुराते) मेरी प्यारी बच्ची.. कीतनी समजदार होगइ हे.. चल तुमभी थोडा आराम करले.. लेकीन याद रखना.. चाहे जो भी कुछ हो.. तुजे पढनातो हेतो उसी घरमे रहेकर पढना पडेगा..

कहेते रमा मनमे खुस होते खडी होकर बाथरुममे चली गइ.. क्युकी लखनकी बाते करते वो खुद गरम होगइ थी.. क्युकी अब वोभी लखनसे प्यार करने लगी थी.. उनकोभी पताथा की अ‍ेकना अ‍ेक दिन उनकोभी लखनके नीचे लेटना पडेगा.. ओर उनकी चुतसे लगातार पानी बेह रहाथा.. फीर वो चुतको साफ करके वापस बेडपे आगइ.. ओर करवट लेकर आराम करने लगी.. तो नीलमभी दुसरी ओर करवट लेकर सोने लगी.. लेकीन रमाकी बातोसे उनकी आंखोसे नींद कोसो दुर गायब हो चुकी थी.. वो करवट लेते सोचने लगी..

नीलम : (मनमे) हे भगवान.. मम्मीको क्या हो गया हे..? जीस सर्तके लीये लीये लखनजीजु खुद केह रहेथे वोही बात खुद मम्मी चाहती हे.. की मे उनके साथ फीजीकल रीलेशन रखु.. मेरी अ‍ैसो आरामकी जींदगीके लीये वो खुद मुजसे लखन जीजुसे चुदवानेके लीये राजी हे.. लेकीन उनकी बातभी तो सही हे.. मे खुद अ‍ैसी ही अ‍ैसो आरमकी जींदगी चाहती थी.. इसीलीये तो मेने धिरेनको प्यार कीया.. लेकीन मम्मीकी बातभी सही हे..

खुद धिरेनकी मम्मीने ही बडे जीजुसे सादी करली हे.. ओर बातभी सही हे.. लखनके पास कीतना सारा पैसा ओर प्रोपर्टी हे.. इनके आगे धिरेनतो कुछभी नही हे.. ओर आज लखन जीजुने उनका लंडभी मुजे दिखाया.. दिखाया क्या सीधा मेरे हाथोमे ही थमा दीया.. बापरे कीतना बडा लंडथा उनका.. इनके आगे धिरेनका लंडतो कुछभी नही हे.. ओर क्या कहे रहेथे मुजे..? की तेरी लतादीदीको चोदता हु तो उनकी चीखे नीकल जाती हे..

कीतना गंदा बोल रहेथे.. सायद वो सच केह रहे होगे.. अगर इतना बडा लंड कोइभी अपनी चुतमे लेगीतो चीखेगी नहीतो क्या करेगी..? लगता हे इसीलीये सब औरते बडे लंडकी दिवानी हे.. तो क्या मुजे लखन जीजुकी सर्त मान लेनी चाहीये..? मान लेनी चाहीये क्या माननी ही पडेगी.. क्युकी मेरी ओर धिरेनकी चुदाइकी क्लीप उनके पास हे..

मम्मी भी तो यही चाहती हे.. जोभी हो.. मम्मीकी सब बाते सही हे.. अगर मेरी मम्मी खुदही अ‍ैसा चाहती हे तो फीर मे क्यु पीछे हटु..? मेभी तो यही सब मोज मस्ती करना चाहती हु.. अगर धिरेनके साथ लखन जीजुभी मुजे चोदले.. तो क्या फर्क पडता हे..? अ‍ेक बार लखन जीजुसेभी चुदवाकर देख लुगी की मजा कीसमे आता हे..

लेकीन धिरेनभी मुजसे बहुत प्यार करता हे.. मुजसे सादी तक करनेको तैयार हे.. अगर उनके साथ सादी नही कीतो उनको बुरा लगेगा.. क्या ये प्यारमे धोखा नही हे..? लखन जीजुभी तो यही कहेते थे.. की धिरेनसे सादी करले फीरभी मेरे साथ रीलेशन रखना पडेगा.. जोभी हो.. आगे देखा जायेगा..

क्या फर्क पडता हे.. अगर दोनोसे चुदवालु तो..? मे तब सीचुअ‍ेशन देखकर नीर्णय लुगी.. की मुजे कीसके साथ सादी करनी हे.. अगर धिरेनके साथ सादी करलु.. फीरभी लखनजीजु कीसीभी तराह मुजे चोद लेगे.. अब चुदवाना तो मुजे दो दो लंडसे ही हे.. अभीतो मम्मीकी बात मानही लेती हु.. साला दोनो तरफसे मजातो मीलेगा.. मुजे लखनजीजुकी सर्त मालेनी चाहीये..

यही सब सोचते नीलमके चहेरेपे मुस्कान आगइ.. ओर वो मुस्कुराते अपना सर पीछे घुमाकर उनकी मां रमाकी ओर देखने लगी.. तो रमा खर्राटे मारते सो रहीथी.. तो नीलम मुस्कुराते फीरसे करवट लेकर आंख बंध करके सोनेकी कोसीस करने लगी.. तब उनकी आंखोके सामने अ‍ेक बार फीर लखनका बडा लंड छा गया.. ओर नीलम रोमांचीत होने लगी.. ओर आखीर नीलमने अपनी चुतको सहेलाते लखनकी सर्तको माननेका फैसला करलीया..
 
तो दुसरी ओर राजीवके घर सब लोग चले गये.. तो अब घरमे सीर्फ घरके ही लोग बचे थे.. तब धिरेन गांवके बाजारमे चला गया.. ओर वहा कोइ अच्छीसी रेस्टोरन्टसे सबके लीये खाना पेक करवाके लाया.. आज सुबहसे कीसीने चाइ नास्ता भी नही कीयाथा.. ओर ग्याराह बजे राजीवने अंतीम सांस ली.. तो दो पहोरकोभी कीसीने नही खाया था.. तो अभी नीर्मला ओर भावना खानेको मना करने लगी.. तब भुमीका ओर चंदाने दोनोको जबरदस्तीसे खीलाया.. ओर साथमे सबने भी खाना खालीया..

देवायत : (सबलोग होलमे बेठेथे तब) धिरेन.. अब तुभी कल यहासे सीधे जोबपे चले जाना.. अब यहा रुकनेका कोइ मतलब नही हे.. क्युकी कल मे इस सबको लेकर हमारे घरपे चला जाउगा.. अब पापाकी जोभी वीधीया करनी हे हम वही करेगे.. तुम वहा आते जाते रहेना.. ओर वहीसे जोबपे चले जाना..

नीर्मला : हां बेटा.. तेरे जीजु ठीक केह रहे हे.. ओर अब जबतक सब वीधीया खतम नही होजाती तबतक पुनम बीटीया भी हमारे साथ रहेगी.. वो उनकी अ‍ेकलोती बहु थी.. कल उनकी पे्रगनन्सीकी बात सुनकर कीतने खुस थे.. धिरेन.. अब तर्पणकी सब वीधीया तेरे ओर तेरे जीजुके हाथोसे ही होगी.. यही उनकी आखरी इच्छा थी..

भुमीका : (मुस्कुराते) मेरा भाइ.. हां नीमु.. कल पुनो बेटीके पेटसे होनेकी खुसखबर सुनकर वो कीतना खुस हो रहाथा.. की चलो.. कमसे कम मे दादा तो होजाउगा.. लेकीन भगवानके आगे कीसकी चलती हे.. चलो अब सब लोग सोजाओ.. सुबहसे सब अ‍ैसे ही हे..

मंजुला : (धीरेसे) देवु.. आज आप इधरही रुक रहे हेनां..? अगर कल सबको उधर जाना हे तो हम अभी हमारे सब कपडे पेक कर लेते हे.. चलो पुनो..

नीर्मला : मंजु.. क्या तेरे पापाकी सब वीधीया पुरी होने तक हम यहा नही रुक सकते..? हंम..? मे सीर्फ केह रही हु..

देवायत : (मुस्कुराते) जी.. बीलकुल रुक सकते हे.. अगर आपकी यही इच्छा हे तो हम सब यही रुक जाते हे.. हमे कोइ प्रोबलेम नही..

भुमीका : नही नीमु.. अबतो जो होनाथा वो हो चुका हे.. अगर यही रुकना हेतो देवु ओर धिरेन सबको यहा आना जाना पडेगा.. अगर वहा हेतो वो घरके अलावा अपने बीजनेस ओर धिरेनको जोबमे आने जानेमे आसानी रहेगी.. बाकी तेरी मरजी.. अगर यही रुकना हे तो भी कोइ प्रोबलेम नही..

भावना : मोम.. जीजु ओर मौसी ठीक केह रहे हे.. वैसेभी हमारे कौनसा कोइ रीस्तेदार हे जो यहा आपको आस्वासन देनेके लीये यहा मीलने आयेगे..? ओर यहा रहेगे तो आप पापाको याद करते रोती ही रहोगी.. तो चलो.. हम वही चलेजाते हे.. (मंजुको) दीदी आप चलो.. सब पेकींग करलो मे भी आती हु..

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां.. ये भी सही हे.. चलो हम सब वही आजाते हे.. भावु.. तुम मेरे भी कपडे पेक करले..

कहातो सबके चहेरेपे मुस्कान आगइ.. ओर मंजु पुनम ओर भावना.. सबके कपडे पेक करने चली गइ.. तब मौका देखकर धिरेन धिरेसे नीर्मला ओर देवायतके पास आकर बैठ गया.. सबके व्यवहार देखकर उसने राहतकी सांसली.. की चलो.. उनके ओर नीलमके बारेमे अभी कीसीने उसे कुछ नही कहा.. हालाकी वो जानता थाकी इस बारेमे मंजुदीदीको सब पता चल गया होगा.. धिरेनने मौका देखकर बात छेडदी..

धिरेन : (धीरेसे सरमाते) जीजु.. मेने कल अ‍ेक मकान देखलीया हे.. हमारे मेनेजरकाही हे.. दो बेडरुम.. होल.. कीचन.. भावमे मील रहा हे.. ओर अच्छे अ‍ेरीया मे हे.. तो आप मम्मी ओर पुनम टाइम मीलेतो देखलो.. वो भुमीमौसीकी सोसायटी मे हे.. अ‍ेक गली पीछे..

भुमीका : (खुस होते) अरे वाह.. तो हमारे पडोसी बनकर आ रहे हो.. हें..हें..हें..

चंदा : (मुस्कुराते) बेटा.. वो सब बादमे देख लेगे.. पहेले हम तेरे मौसाजीका कार्य करले.. फीर चलेगे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) नही चंदा.. अगर आज राजीव होते ओर ये सुनते तो कीतना खुस होते.. यही समजले वो हमारे बीच हे.. जो अभी धिरेनकी बात सुनकर खुस हो रहे होगे.. तो हमे उनकी खुसीके मना नही करनी चाहीये.. ओर वैसेभी मे इन सब चीजोमे ज्यादा नही मानती.. जीस तराह हमारे सामने दु:खका अवसर आयातो हमने उसेभी स्वीकार करलीया हे.. तो खुसीयाभी भी हमे स्वीकार करलेनी चाहीये..

देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे धिरेन.. हम अ‍ेक दो दिनमे जाकर सब देख लेगे.. ओर चंदा ओर पुनकोभी पसंद आगया तो हम उसे वही पुरा पेमेन्ट दे देगे..

धिरेन : (मुस्कुराते) नही जीजु.. हमे वहीसे होमलोन मील जायेगी.. वो हमारे मेनेजर ही सब अ‍ेरेन्ज करदेगे.. क्युकी वो घर मे बेन्क लोनसे लेना चाहता हु.. मेरी कमाइकी पहेली प्रोपर्टी.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (गले लगाकर सर चुमते) हंम.. मतलब मेरी बेटा खुदार हे.. हें..हें..हें.. ठीक हे कोइ बात नही..

कहतो धिरेन ओर चंदा दोनोही हसने लगे.. चंदा नीर्मलाको हसते हुअ‍े देखकर बहुतही खुस होने लगी.. क्युकी आजही उनके पती ओर बडेभाइका स्वर्गवास हुआ था.. तो नीर्मला उनको इतजी जल्दीसे सदमेसे बहार नीकलते भुल रही थी.. जीसे देखकर देवायत ओर भुमीकाभी खुस हो रहेथे.. उस रात कुछ नही हुआ.. सब पेकींग होगइ तब देवायत धिरेन होलमे ही सोगये.. ओर सबलोग अपने रुममे अ‍ेडजेस्ट करके सो गये.. तो आज भुमीका नीर्मलाके साथही सोगइ..
 
सुबह सबलोग जल्दी उठ गये.. ओर तैयार होने लगे.. तब चंदा ओर पुनम.. कीचनमे सबके लीये चाइ नास्ता बना रहीथी.. तो देवु धिरेनभी कंपलीट होकर होलमे बैठेथे.. तब देवायतने फोन करके लखन ओर भानुको अपनी कार लेकर बुला लीया.. ताकी सबलोग अपने सामानके साथ आरामसे बैठ सके.. मंजु ओर भावना कंपलीट होकर अपने बच्चोको दुध पीला रहीथी.. उसी वक्त नीर्मला ओर भुमीका दोनोही अपने रुममे अ‍ेक साथ बाथरुममे घुसी हुइ थी.. ओर अ‍ेक दुसरेको बाहोमे अ‍ेक दुसरेके होंठोको चुम रही थी.. तभी..





भुमीका : (होठोको चुमते) नीमु.. अब भुलजा सब पुरानी बाते.. अब आजसे हम दोनोकी जींदगी की नइ सुरुआत होगइ हे.. अब हम दोनो सीर्फ हमारे देवुकी पत्नीया हे.. हमे यही रहेना हे.. तु घरकी अ‍ेक चाबी हमारी भावुको देदे.. ओर अ‍ेक तेरे पाास रखना.. क्युकी अब मे अपनी प्रेगनन्सी ज्यादा दिन सबसे नही छीपा सकती.. तो हो सकता हे मुजेभी कुछ महीने भावुके पास रहेना पडे.. तब मुजे तेरी जरुरत पडेगी..

नीर्मला : (जोरोसे बाहोमे भीचते) भुमी.. तु कभी फीकर मत करना.. मे हमेसा तेरे साथही रहुगी.. आज सही मायनोमे मे अपने ससुराल जा रही हु.. वो भी हमेसाके लीये.. भुमी.. राजीवने आखरी वक्तपे मेरा हाथ सबके सामने हमारे देवुको सोप दीया.. ओर उन्होने अपना प्राण त्याग दीया.. मुजे लगता हे मेरा राजीव हम सबके बारेमे बहुत कुछ जानता था.. ओर उसने मुजे कभी मेरे ओर देवुके रीलेशनके बारेमे नही पुछा.. लव यु भाइ..

भुमीका : (मुस्कुराते) हंम.. तु उनको अकेलेमे हमेसा भाइ कहेती थीनां..?

नीर्मला : (सरमाकर मुस्कुराते) हां भुमी.. भलेही हमने सादी करलीथी.. लेकीन हमने हमारा रीलेशन कभी चेन्ज नही कीया.. ओर वो खुद भी यही चाहता था.. जबभी हम दोनो फीजीकल होते अ‍ेक दुसरेको भाइ बहेन मानकर ही फीजीकल होतेथे.. ओर मे उनको तबभी भाइ कहेती ओर वो मुजे बहेन बहेन कहेते चोदता..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) नीमु.. कीतना अजीब हेनां.. सबको अपनी बहेनही प्यारी लगती हे.. उस थाइलेन्ड देशमे आजभी सब लोग अपनी बहेनसे ही सादी करते हे.. जो अब इनकी सुरुआत हमारे देवुके घरसे होगइ हे.. इनसे पहेले हिमाचलमे सीर्फ वो राजाके घरपे ही हो रहाथा.. जो बादमे वहाकी परंपरा होगइ..

नीर्मला : (मुस्कुराते होंठ चुमते) भुमी.. तबभी वहा हम सब उनकी रानीया थी.. ओर यहाभी हम सभी उनकेही अंसकी रानीया हे.. हमारा कामही उनको खुस रखना.. ओर बदलेमे उनसे हमारी प्यास बुजाना हे.. तु सोच.. जब वो खुद स्वयंम आयेगे तब क्या होगा..? मंजु केह रहीथी तब वो हम सबको हमारा पीछला जन्म याद दीलवा देगा.. जब वो हमसे फीजीकल होजायेगा.. तब हमभी नया जन्म लेकर उनकी रानीया होगी..

भुमीका : (सरमाकर मुस्कुराते) नीमु.. कीतना अजीब होगा.. हम नया जन्म लेकरभी उनकी रानीया होगी.. ओर आजभी उनकी रानीया हे.. क्या हम बुढी होजायेगी तबभी देवु हमसे फीजीकल होगा..?

नीर्मला : (सरमाते धीरेसे होठ चुमते) भुमी.. अ‍ेक बात कहु..? मंजु केह रहीथी.. हमे आगे जाकर नया जन्म लेकर वापस आना हे.. मुजे अगले जन्ममे मंजुकी कोखसे जन्म लेना हे.. तबभी वो मेरा भाइ होगा.. भुमी.. अब हमारी उम्र थम जायेगी.. देवु हमे सब सुख देता रहेगा.. बाकी तो मंजुही जाने.. आगे क्या होगा..

मंजुला (बहासे दरवाजा खटखटाते जोरोसे) मोम.. क्या कर रही हे दोनो.. जाग गइ की नही..? चलो चाइ नास्ता रेडी होगया हे.. सबलोग कंपलीट तैयार होकर बैठे हे..

नीर्मला : (अंदरसे जोरोसे) अरे आ रही हे हम.. कपडेतो बदलने दे.. (भुमीको धीरेसे) भुमी.. चल.. बाकीकी बाते हम वहा आरामसे बैठकर करेगे.. मुजे मंजुसे इस बारेमे वहा जाकर पुछना होगा.. हें..हें..हें..

कहेते दोनोही फटाफट कंपलीट होकर बहार आगइ.. ओर बहार आतेही मंजुकी पीठमे अ‍ेक मुका जड दीया तो सबलोग हसने लगे.. फीर सबलोग चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तब भावना बडीही कातील नजरोसे देवायतके सामने देखते मुस्कुराती रही.. तो मंजुने उनकी जांगपे अ‍ेक चपत लगादी.. तो भावना सर्मसार होगइ.. ओर नजरे जुकाते चाइ नास्ता करने लगी.. तबतक लखन ओर भानुभी कार लेकर आगये..

लेकीन मंजु उनकी मां नीर्मला ओर भुमीकाकी बाते जान चुकी थी.. ओर वो चाइ नास्ता करते दोनोकी ओर देखकर मंद मंद मुस्कुरा रहीथी.. क्युकी उनको पताथा की आगे चलकर क्या होने वाला हे.. जो सुखकी कामना दोनो कर रहीथी.. तब उनको पता नही थाकी देवु उन दोनोको कीतना सुख दे पायेगा.. बल्की सीर्फ उन दोनोको ही नही.. देवुकी जीतनी बीवीया थी.. सबकी जींदगीमे आगे चइकर भुचाल आने वाला था..

फीर सबने चाइ नास्ता करलीया तब भावना चंदा पुनम सबका सामान रुमसे लेकर आगइ.. तब भानु बडेही प्यारसे भावनाकी ओर देख रहाथा.. तभी दोनोकी नजरे मीली.. ओर भानु मुस्कुराने लगा.. तब भावना भी सरमाकर मुस्कुराने लगी.. ओर भानुने उनके हाथसे कपडेकी बेगको लेलीया.. ओर धीरेसे उनकी कारमे साथ आनेको कहा.. तो भावनाभी सरमाकर मुस्कुराते हां मे गरदन हीलाने लगी..

क्युकी इतने दिनो मंजु ओर भावना साथमे रही.. तो मंजुने भावनाको उनके बारेमे आने वाले दिनोमे उनके साथ क्या क्या होगा.. ओर क्या नही होगा.. ओर घरके दुसरे लोगोके बारेमे भी बहुत कुछ बता दीया था.. मंजुने उसे बता दीयाथाकी आने वाले दिनोमे तुजे तेरे जीजुसे दो बच्चे ओर अ‍ेक बच्चा ओर होगा.. लेकीन वो कीससे होगा ये बात मंजुने अभी नही बताइ.. जीनकी वजहसे भावनाको भानुके साथ रीलेशन रखना जरुरी था.. सुनकर भावना बहुतही रोमांचीत हो गइ थी..

ओर मंजुने नीलम ओर रमाको लेकर भी भावनाको आगाह कर दीया था.. की दोनोके दिमागमे क्या क्या चल रहा हे.. ओर दोनो कीतनी सातीर दिमाग वाली हे.. तब सुनकर भावना चोंक गइ.. की पैसोके लीये रमा इतना नीचे तक गीर सकती हे.. की उसके लीये वो अपनी बेटीकी जींदगीसे भी खीलवाड करनेमे राजी हो गइथी.. मंजुने भावनाको इसके अलावा ओर कुछ नही बताया जो रमा ओर नीलमके साथ होने वाला हे..

भानुने ज्यादातर सामान अपनी कारमे तो कुछ सामान लखनकी कारमे रख दीया.. भानु भावनाके साथ अकेलेमे बात करना चाहता था.. आज वो बहुत खुस था.. क्युकी आज भावना उनके सामने मुस्कुरा रहीथी.. तब नीर्मलाने घरको ताला लगानेसे पहेले अ‍ेक बार पुरे घरको नजर घुमाकर देख लीया.. ओर उनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. यही वो घरथा जहा नीर्मलाने सबकुछ पालीया था..

अपना प्यार.. पती.. परीवार.. सबकुछ.. ओर इसी घरमे उनको पहेली बार देवायतभी मीला.. यही घरमे उनके साथ गांधर्व सादी करके कइ राते ओर दिन रंगीन भी कीथी.. नीर्मलाने घरको ताला लगाकर चाबी अपने पास रखली.. ओर देवायतके कारकी ओर चली गइ.. तब देवायतके साथ मंजु ओर पीछे नीर्मला भुमीका बैठ गये.. तो लखनकी कारमे पुनम सृती ओर चंदा बैठ गये.. तो धिरेनने अपनी बाइक लेली..

तो भानुके साथ वाली सीटमे भावना अपनी बच्चीको लेकर बैठ गइ.. पीछे की सीटमे सबका सामान रखा हुआथा.. ओर सबकी कारे देवायतके गांवकी ओर चल पडी.. तो पीछे धिरेनभी अपनी बाइक लेकर आ रहाथा.. जबसे लखन ओर लता उनके घरसे नीलमको लेगये.. तबसे आज तक धिरेनने नीलमको फोन करनेकी बहुत कोसीसकी.. लेकीन हर बार नीलमका फोन स्वीच ओफ आ रहाथा....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १७६

तो भानुके साथ वाली सीटमे भावना अपनी बच्चीको लेकर बैठ गइ.. पीछे की सीटमे सबका सामान रखा हुआथा.. ओर सबकी कारे देवायतके गांवकी ओर चल पडी.. तो पीछे धिरेनभी अपनी बाइक लेकर आ रहाथा.. जबसे लखन ओर लता उनके घरसे नीलमको लेगये.. तबसे आज तक धिरेनने नीलमको फोन करनेकी बहुत कोसीसकी.. लेकीन हर बार नीलमका फोन स्वीच ओफ आ रहा था....अब आगे

तबसे धिरेन बहुत परेसान हो रहा था.. उनको डर था.. की कही नीलमका फोन लताके हाथोमे तो नही आगया..? तब धिरेनको लताकी बातोका अ‍ेक बार ओर सामना होनेका डर सताने लगा.. इस वक्त धिरेन हवेलीपे जाना नही चाहता था.. क्युकी उनको पता थाकी वहा लता होगी.. लेकीन वो कीसीको हवेलीपे जानेके लीये मनाभी तो नही कर सकता..

तो दुसरी ओर भावनाको उनके बारेमें मंजुने सबकुछ बता दीया था.. की आने वाले वक्तमे उनकी जींदगीमे क्या क्या बदलाव होगा.. जीसे सुनकर भावना बहुत ही रोमांचीत फील कर रही थी.. इसी वजहसे अब भावनाको अपने पती भानुसे रीलेशन रखना जरुरी हो गया था.. तो दुसरी ओर वो रमा ओर नीलमके इरादोके बारेमे सबकुछ जान चुकी थी.. तब भानु ओर भावना दोनोही कारमे अकेलेथे तब भावना बहुत सरमा रही थी..

भानु : (मुस्कुराते सामने दैखकर) भावु.. तुम कैसी हो..? क्या मुजे अबभी माफ नही कीया..? मुजे पापाके जानेका बहुतही अफसोस हे.. जीस वक्त मुजे तेरे साथ होना चाहीयेथा.. इस वक्त मे तुमसे दुर था.. भावु.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे माफ करदे..

भावना : (मुस्कुराते) भानु.. तुम माफी मत मांगो.. मेनेतो कबसे तुमको माफ करदीया हे.. हां.. यहा जीजु थे.. तो हमे कोइ दिकत नही आइ.. बस तुमको अपनी जीम्वेवारीका अहेसास हे वोही मेरे लीये काफी हे..

भानु : (मुस्कुराते) भावु.. क्या हम दोनो पहेलेकी तराह साथ नही रेह सकते..? हंम..? आजाना.. तेरी बहुत याद आती हे.. मे वाकइ तेरे बीना नही रेह सकता.. मां की कसम..

भावना : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) भानु.. प्लीज.. अभी मुजे थोडा वक्त चाहीये.. हम जरुर साथ रहेगे.. वोभी पहेलेकी तराह.. अब मुजे तुमसे कोइ गीला सीकवा नही.. बस.. मे अब पहेलेकी तराह हमेसा तेरे साथ नही रहुगी.. कुछ दिन मम्मीके साथभी रहेना पडेगा.. क्युकी अब वो अकेली होगइ हे.. वैसेभी तेरी दुसरी बीवीतो हे.. हें..हें..हें..

भानु : (मुस्कुराकर) भावु.. तुजे सच कहु..? जब दुसरी बीवी आइनां.. तभी मुजे तेरी अहेमीयका पता चला.. बस मे तुजे ओर कुछ कहेना नही चाहता.. सायद मुजसे गलती हुइ हे.. क्युकी उनसे सादी करनेका नीर्णयभी मेरा था.. बस.. मुजे ओर कुछ नही कहेना.. भावु.. तुम आजाओ.. प्लीज..

भावना : भानु.. बस पापाका सब कार्य पुरा हो जानेदो.. मे तुमको सामनेसे फोन करुगी.. तब आकर मुजे लेजाना.. वैसेभी पापाने अपना घर मेरे नाम करदीया हे.. तो कभी कभी मुजे वहा मम्मीको लेकर जाना पडेगा.. क्युकी इस घरमे मम्मी पापाकी बहुत यादे जुडी हुइ हे.. तो जब मम्मी कहेगी तब मुजे उनके साथभी रहेना पडेगा..

भानु : भावु.. कोइ बात नही.. तुजे जबभी जाना हो वापस आना हो तुम आजाद हो.. तुमने मुजे माफ कर दीया वोही मेरे लीये बहुत हे.. भावु.. मे तुजे आजभी उतना चाहता हु जीतना पहेले चाहता था..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) भानु.. मुजे परमीसन देनेके लीये थेन्क्स.. मेभी तुजे इतना चाहती हु जीतना पहेले चाहती थी.. बस.. मुजे तुमसे अ‍ेटेच होनेमे थोडा वक्त लगेगा.. लेकीन फीकर मत करना.. मे कोसीस करुगी की जल्द ही हम तीनो साथमे रहेगे.. क्या यही चाहतेथे ना तुम..?

भानु : (मुस्कुराते) हंम.. मेरी बीवी काफी समजदार हे.. भावु.. आइ लव यु..

भावना : (सरमाते मुस्कुराते) भानु.. आइ लव यु टु..

भावनाने बडीही सीफततासे भानुको मीलनेकी भुमीका तैयार करली.. जबसे भावनाने मंजुसे सब कुछ जान लीया था.. तबसे भावना मन बना चुकी थी.. की उनके रास्तेके काटोको कैसे नीकाला जाये.. इसके लीये भावनाको भानुके घर रहेना जरुरी होगया था.. तब पुनमने भी भावनाको बहुत कुछ बताकर रास्ता भी बता दीया था की कैसे काटोसे काटा नीकालना हे..

क्युकी आजकल इस मामलेमे पुनम बहुतही सातीर दिमाग चला रही थी.. क्युकी खुद उसीका घर टुटनेकी कगारपे था.. ओर वोभी नीलमकी वजहसे.. वैसेतो पुनम खुदके बारेमे बहुत कुछ जान चुकी थी.. की आने वाले वक्तमे उनके साथ ओर घरमे उनकी सभी सौतनोके साथ क्या क्या बदलाव होगा.. इस बातके लीये वो अभीसे खुदको रोमांचीत फील करने लगी थी.. ओर हवेलीकी सभी कमान अपने हाथोमे लेनेके लीये खुदको तैयार कर रही थी..

सब लोग बाते करते हवेलीपे पहोंच गये.. तो पीछे धिरेनभी आगया.. तभी रजीया दया सबलोग कारकी आवाज सुकर बहार नीकले.. तो लताभी उपरसे नीचे आगइ.. ओर सबलोग सामान अंदर लेने लगे.. ओर होलमे आकर बैठ गये.. तो धिरेनभी लतासे नजरे चुराते सबके साथ बैठ गया.. लेकीन आज लताने उनको देखकर अ‍ैसा कोइ रीअ‍ेक्शन नही दिया.. जो धिरेन उमीद लेकर बैठाथा..

लता रजीया दया चंपाभाभी नीर्मलाको गले मीलकर मीली.. ओर अफसोस जताया.. फीर सबको पानी देने लगी.. तो आज लता धिरेनकी ओर देखते अपने नैन नचाते मुस्कुरा रही थी.. तो धिरेनको बडाही आस्चर्य हुआ.. ओर उनकी गांड फटने लगी.. की आज लता उनको हमेसा गाली देने वाली.. उनके सामने हस क्यु रही हे..? तभी पुनम सृती लता तीनोही पुनम वाले कमरेमे चली गइ.. तो मंजु चंदा भावना देवायतके कमरेमे चली गइ.. तभी बहार होलमे..

भानु : भाइ.. अब कुछ काम ना होतो मे खेतोपे चलु..? वहा कोइ नही हे..

दया : (बहार आकर मुस्कुराते) भानुभाइ.. सबके लीये चाइ बन रही हे.. आप चाइ पीकर जाना..

देवायत : हां भानु.. चाइ पीकर चले जाना.. ओर सुन.. अब दो पहोरको खाना इधरही खाने आजाना.. ओर सामको सरला चाचीको इधर छोड जाना.. क्युकी गांवकी ओरते बैठनेके लीये आयेगी.. तो चाची होगीतो ठीक रहेगा..

भुमीका : हां भानु.. सरला भाभीको यही छोडजाना.. ओर जबतक कार्य पुरा नही होगा तबतक उसे वही रुकना हे..

नीर्मला : हां भानुजी.. वो हम सबमे बुजुर्ग हे.. तो ठीक रहेगा.. ओर देवु.. अब आप लोगभी अपने धंधेपे चले जाओ.. यहा हम सब औरते सम्हाल लेगी..

भानु : ठीक हे मम्मीजी.. मे खाना खाकर उसे लेने चला जाउगा.. फीर उसे लेकर आजाउगा..

धिरेन : (धीरेसे) मम्मी.. तो मे भी चलु..? मुजे बेन्कपे जाना हे..

देवायत : धिरेन.. तुमभी अब यहीसे आना जाना.. रातमे वही रुकना.. क्युकी पुनोतो अब कार्य पुरा होने तक यही रहेगी.. तो फीर वहा तुम अकेले क्या करोगे..?

धिरेन : (मुस्कुराते) जीजु.. आप मेरी फीकर मत करो.. पुनो भलेही इधर रुकती.. मे जब यहा वीधीया होगी तब आजाउगा.. क्युकी मुजे सहेरमे बहुत सारे काम नीपटाने हे.. ओर हमारा घरभी तो अकेला नही छोड सकता.. बस.. आप फ्रि हो तब मम्मी ओर पुनोको लेकर आजाना.. उसे हम घर दीखा देगे..

देवायत : (मुस्कुराते) अरे मेतो अभी कार्य सम्पन नही होता तबतक यही हु.. चल ठीक हे मे कल या परसो उन दोनोको लेकर आजाउगा.. अगर दोनोको पसंद आगया तो हम फाइनल कर देगे.. फीर मुजेभी दो दिनके लीये कही जाना हे..

नीर्मला : (सर सहेलाते) अरे बीटु.. अगर अ‍ैसा हेतो मे ओर भुमी भी देखने चलेगी.. देखु तो सही मेरा बेटा कैसा घर ले रहा हे.. हें..हें..हें..

सृती : (बहार आते धीरेसे सरमाते) देवु.. क्या आप अभी चल रहे हो..? मेभी साथ चल रही हु.. वो क्लीनीकपे कोइ नही हे.. तो मुजे आज जाना होगा.. मम्मी भलेही इधर नीर्मला आंटीके साथ रहेती..

नीर्मला : (मुस्कुराते) बेटा.. बुरा मत मानना.. आजकल जमाना बहुत खराब हे.. अ‍ैसे रातमे ओरतका आना जाना ओर घरमे अकेले रहेना ठीक नही.. तुभी कुछ दिन अपडाउन करले.. फीर तेरी मम्मी फ्रि होजाये तब वहा चली जाना..

लखन : (हसते) भाभी.. भाइतो आज नही कल जायेगे.. लेकीन फीकर मत करो.. भाइ अगर फ्रि नही होगे तो मे आपको छोडने ओर लेने आजाउगा..

सृती : (जोरोसे हसते) अरे वाह.. मेरा देवरतो सुधर गया.. हें..हें..हें..

लखन : (भुमीको) देखा बुआ.. आपकी बेटी मुजे क्या समज रही हे..? क्या तो मे अब तक उनको बीगडा हुआ ओर आवारा दीखता था..

भुमीका : (जोरोसे हसते) अरे बेटा.. वो तुम ओर तेरी भाभी जानो.. मुजे तुम दोनोके जगडेमे बीचमे मत घसीटो.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) सृती.. तो आजसे तुजे लेजानेकी ओर वापस लानेकी जीम्वेवारी लखनकी.. हें..हें..हें..

लखन : (सृतीकी ओर मुह बीगाडते) अरे.. मे उसे क्यु लेजाउ..? आपकी बीवीहे आप जानो..

सृती : (जदरदसे हसते) अरे.. मेरे देवरको तो बुरा लग गया..? ठीक हे आपही मुजे छोड देना.. बस..? हें..हें..हें..

लखन : (हसते) नही भाभी बुरा नही लगा.. मेतो सीर्फ मजाक कर रहा था.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) पता हे मुजे.. की आप मजाक कर रहेथे.. लेकीन मे मजाक नही कर रही.. चलीये रेडी होजाइअ‍े मुजे सचमे जाना हे.. फीर सामको फोन कर दुगी.. तब आप मुजे लेने आजाना.. ओर आनेमे अकेला लगे तो लताकोभी साथ लेलो.. उसेभी थोडा सहेर बहेर घुमा देना.. ताकी वापसीमे आपको कंपनीभी मील जायेगी.. देवु.. मे लखन भैयाके साथ चली जाती हु.. आप अपना काम नीपटाते रहो.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे.. वैसेभी वाकइ मुजे तीन चार दिन ज्यादा काम हे.. ओर लखन.. तुम लता आ रही हेतो रजीयाको भी साथ लेजा.. वहा सृतीको छोडकर तीनो हमारे बंगलेपे चले जाना.. ओर कुछ सफाइ बफाइ कर लेना.. ओर लताको भी कहेना वहा सब चीज अच्छी तराह देखले.. अगर कुछ लेना हे तो नया ले लेगे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भैया.. वैसेतो भानुभाइने सब कंपलीट करदीया हे.. फीरभी देख लुगा..

तब पुनम ओर लता अपने रुममे बैठकर इन देवर भाभीकी मस्तीया देखकर हस रही थी.. तो लखन उपर अपने रुममे फ्रेस होने चला गया.. तो पीछे लताभी चली गइ.. ओर दोनो सृतीको उनकी क्लीनीक छोडनेके लीये तैयार होने लगे.. तो सृतीभी जानेकी तैयारीया करने लगी.. तो इधर दया ओर चंपाभाभी भी रजीयाका नाम आतेही खुस होगये.. ओर उसने रजीयाको भी तैयार होने उनके रुममे भेज दीया.. तब रजीया बहुतही सरमाइ..

फीर दयाने सबको चाइ पीलाइ तो भानु ओर धिरेन दोनोही चाइ पीकर हवेलीसे नीकल गये.. तो सृतीने उनकी कारको ही लेजानेको कहा तो लखनने ड्राइवींग सीट पकडली.. तब सृतीने लताको जबर दस्तीसे लखनके पास बीठा दीया.. फीर रजीया ओर खुद पीछेकी सीटपे बैठ गइ.. ओर लखनने कारको सहेरकी ओर दौडादी.. तब लता बहुतही सरमा रही थी.. पुरे रास्ते सृती ओर लखन हसी मजाकर करते अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते रहे..



 
तब देवायतभी अपने खेतोकी ओर नीकल गया.. उनको कल रातभी नीशा ओर चारुके पास जानाथा.. लेकीन राजीवके हादसेकी वजहसे नही जापाया.. आजतो सुधीरभी वापस आने वाला था.. लेकीन उनका क्लीनीक बंध था.. क्युकी कल सुहागरात मनाते ही दो पहोरको खानेके बाद मुना ओर बरखा तो उनके साथ उनका दोस्त श्रीधर ओर जयश्री.. दोनोही कपल दो दिनके लीये अपने छोटे हनीनुमपे कही घुमने चले गये थे..

तबतक साहीलने भी सलमाके साथ बैठकर लखनने कही सभी बाते सलमासे करली.. जीसे सुनकर सलमा बहुतही खुस होगइ.. ओर खुसीके मारे उनके आंसु नीकल गये.. वो तब ही वो फोन लेकर जरीनाको फोन लगा देती हे.. ओर उनको सब बाते बताते सबानाकी कोइ चीन्ता ना करनेको कहेती हे.. जीसे सुनकर जरीनाभी खुसीसे रो पडी.. तब सलमा उनको साहीलके साथ वहा अ‍ेक दो दिनमे मीलने आनेको कहेती हे..

तो आज सामतके घर सुबह सुबह जया ओर सांती कीचनमे चाइ नास्ता बना रही थी.. तब सामत होलमे बैठकर अखबार पढ रहा था.. तो जागृती नहानेके लीये बाथरुममे धुसी हुइ थी.. तब बंसी रात भर सांतीकी चुदाइ करते थका हारा अबभी गहेरी नींद सो रहा था.. आज जया सामतके साथ बैठकर अपने बेटे बंसी ओर नंनद सांतीकी सादीको लेकर बात करने वाली थी.. तब जयाने बंसीसे बात करनेसे पहेले अ‍ेक बार फीर सांतीका मन टटोल लीया..

जया : (मुस्कुराते धीरेसे) सांती.. अब मे सोच रही हु.. तुम दोनोकी सादी करवादु.. क्या तु राजीतो हेनां..?

सांती : (सर्मसार होते धीरेसे) भाभी.. लेकीन भाइ..? उसे आप कैसे समजाओगी..? क्या वो मान जायेगे..?

जया : (मुस्कुराते सरपे हाथ फीराते) हां.. बस तु अ‍ेक बार हां कहेदे.. मे उसेभी मना लुगी.. देखना वो खुद तेरी सादी बंसीसे करवा देगे.. मे आजही उनसे बात करती हु.. जा पहेले तेरे पतीको जगादे.. उनसेभी बात करनी हे.. मेरे बंसीके लीये तुमसे अच्छी बहु कहा मीलेगी.. जा.. जगादे उसे..

सांती : (अ‍ेकदम सर्मसार होते जाते धीरेसे) जी भाभी.. अभी जगाती हु..

सांती अपनी सादीकी बात सुनकर आज बहुतही खुस होने लगी.. वो जैसेही कीचनसे बहार नीकली.. सामने सामतको अखबार पढते देखकर सरमा गइ.. ओर जटसे अपने सरपे चुनी डालकर सरको ढक लेती हे.. जैसे सामत उनका भाइ नही ससुर हो.. ओर वो अ‍ेक नइ नवेली दुल्हनकी तराह सरमाते बंसीके रुममे चली जाती हे.. तब बंसी घोडे बेचकर सो रहाथा.. तब सांती धीरेसे उनके पास जाकर उनके होठोको चुम लेती हे..

तभी बंसी अपने होठोपे गीलापनकी वजहसे आंख खोकर देखता हे.. तो सांती मुस्कुराते उनके चहेरेपे जुकी हुइ थी.. ओर सरमाते मुस्कुरा रही थी.. तब बंसीने उसे खीचकर अपने उपर गीरा दीया.. ओर सांतीको अपनी बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमने लगा.. तब सांती सरमाकर हसते बंसीसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. ओर आखीर सरमाते सांतीने बंसीके सीनेपे अपना सर रख दीया ओर मुस्कुराने लगी..

सांती : (सरमाते हसते) बंसी.. जल्दीसे उठ जाइअ‍े.. लगता हे आज हम दोनोके लीये खुसीका दिन हे.. जाइअ‍े फटाफट तैयार होजाइअ‍े मे आपके कपडे देती हु.. भाभी आपसे बात करना चाहती हे..

बंसी : (सांतीको छोडकर जटसे बेडपे बेठते) कीस बारेमे..? क्या उसने तुमसे कुछ कहा..?

सांती : (सरमाकर हां मे गरदन हीलाते) हां.. वो आज भाइसे हम दोनोकी सादीके बारेमे बात करने वाली हे.. तो इनसे पहेले वो भाइसे बात करे.. अ‍ेक बार भाभी आपसे बात करना चाहती हे.. जाइअ‍े फटाफट..

बंसी : (खुसीके मारे अ‍ेक बार फीर सांतीको बाहोमे भरते) सच..? बुआ.. क्या तुम सच कहे रही हो..?

सांती : (सरमाते गाल चुमकर) हां बंसी.. अबतो मुजे बुआ कहेना छोडदो.. आपकी बीवी होने वाली हु.. अभी अभी इस बारेमे मेरी भाभीसे बात हुइ.. आप जाइअ‍े फटाफट नहा लीजीये.. मे कपडे रखकर जाती हु.. काफी देरसे यहा हु.. भाइ भी बहारही बैठे हे..

बंसी : (होठ चुमते खडा होते) नही सांती.. तुम भलेही मेरी बीवी होजाये.. मे तुमको बुआ कहेना कभी नही छोडुगा.. क्युकी मेने सांतीको नही.. मेरी बुआको प्यार कीया हे.. हें..हें..हें..

सांती : (सरमाते मुस्कुराते) आप कीतने कमीने हो.. ठीक हे.. ठीक हे.. जाइअ‍े फटाफट नहा लीजीये..

कहातो बंसीकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. जो सादीकी बातको लेकर वो खुद सांतीको लेकर भागनेकी प्लानींग कर रहा था.. वोही बात आज खुद सामनेसे उनकी मम्मीने कही थी.. बंसी खुस होकर बाथरुममे घुस गया.. तो सांती हसने लगी.. फीर बंसीके कपडे अलमारी से नीकालकर बेडपे रखती हे.. ओर फीरसे चुनी अपने सरपे डालकर अपने रुममे चली जाती हे.. तब जागृती भी तैयार होकर कामपे लग गइ..

वो कीचनमे देखती हे तो उनकी मां जया नास्ता बना रही थी.. जयाको देखतेही जागृतीको गुस्सा आने लगा.. वो पीछली रात रमेशके घरपे उनकी सारी करतुते जान गइ थी.. ओर वो अपना मुह बीगाडते उनके पापाके रुममे चली गइ.. ओर वहा साफ सफाइ करने लगी.. जब वहा सफाइ होगइ तब वो उनकी बुआ सांतीके रुममे सफाइ करने दरवाजा खोलकर घुस गइ.. तो सांती अंदर बहुतही खुस नजर आ रही थी..

जैसेही सांतीने जागृतीको देखा वो जटसे दोडकर आगइ ओर अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया.. फीर जागृतीके पास हसते हुअ‍े दोडकर चली गइ.. ओर जागृतीको जोरोसे अपने गले लगा लीया.. तब जागृती भी खुस होकर मुस्कुराते आस्चर्यसे सांतीकी ओर देखती रही.. की सुबह सुबह उनकी बुआ इतनी खुस क्यु हे..? फीर सांतीने जागृतीका चहेरा अपने हाथोमे थामलीया.. ओर सरमाकर उनके सामने देखते मुस्कुराती रही.. तब जागृतीने पुछ ही लीया..

जागृती : (मुस्कुराते) भाभी.. बताइअ‍ेना क्या हुआ..? आजतो आप बडी खुस नजर आरही हे..? कुछ हुआ हे क्या..? (सरारतसे कानमे धीरेसे) कही मेरे नन्हे मुन्हे भतीजाकी कोइ खुस खबरी तो नही..? हें..हें..हें..

सांती : (अ‍ेकदम सर्मसार होते पीठमे मुका मारते) अरे नही नही.. सुन.. जागु.. आज भाभी मेरी ओर बंसीकी सादीकी बात भाइसे करने वाली हे.. आज मे बहोत खुस हु.. आज अचानकही सुबह भाभीने मुजे केह दीया..

जागृती : (खुसीसे मुस्कुराते गले लगाकर) भाभी.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. आखीर आपकी तम्मना पुरी होगइ.. तीन चार सालोका सब्रका फल आखीर आपको मील ही गया.. बहुत.. बुहत.. अभीनंदन.. बस.. अब मुजे अ‍ेक प्यारासा.. नन्हासा.. मुन्हा या मुनी मील जाये.. हें..हें..हें..

सांती : (सर्मसार होते धीरेसे दोनो हाथ थामते) हां जागु.. तेरे मुहमे घी-सकर.. मेतो आइपील लेते लेते थक चुकी हु.. मेभी चाहती हु की मेभी अ‍ेक बच्चेकी मां बनु.. अब मेरा सभी सपना पुरा होजायेगा..

जागृती : (मुस्कुराते) भाभी.. आज खुसीका दिन हे.. आप खुसीया मनाओ.. फीर हम आरामसे बात करेगे.. मुजे आपसे बहुत कुछ कहेना हे.. वोभी सीर्फ हम दोनो अकेली हो तब.. लेकीन आज नही..

सांती : (आस्चर्यसे देखते प्यारसे) जागु.. बताना.. क्या कोइ सीरीयस मेटर हे..?

जागुती : (धीरेसे) हां भाभी.. लेकीन आज नही.. आजतो आप खुसीया मनाओ.. हम कल फुरसतमे बात करेगे..

कहेते जागृती सांतीकी ओर मुस्कुराते उनके रुमसे सफाइ कीये बगैर ही बहार जाने लगी.. तब बहार जाते उनकी आंखसे दो बुंद आंसु टपक गये.. उन्होने सोचा चहेरा दरवाजेकी ओर हे.. तो बुआ नही देख पायेगी.. लेकीन उनको क्या पता.. सांतीने जागृतीकी आंखसे आंसु बहेते देखलीये थे.. उनको जागृतीकी बातसे कोइ गंभीर अंदेशा होने लगा.. सांती थोडी गंभीर होगइ.. ओर जागृतीको जाते हुअ‍े देखती रही..

फीर सांती सरपे चुनरी डालकर कीचनमे चली गइ.. तब जागृती बंसीके रुममे जाकर जाडु पोछा करने लगी.. तब बंसी बाथरुममे नहा रहाथा.. आज जागृतीका मुड बंसीकी सादीकी बात सुनकर थोडा बीगड गया था.. उनको आज सांतीसे ज्वेलेसी फील होने लगी थी.. लेकीन अपने चहेरेपे जाहीर नही होनेदी.. तभी बंसी बाथरुमसे कमरमे टोलीया लपेटकर नीकला.. देखातो जागृती उनके रुमकी सफाइ कर रही थी..

जागृतीको देखतेही बंसीका लंड जटके मारते खडा होने लगा.. तब बंसी बीना कुछ बोले धीरेसे दरवाजेके पास चला गया.. ओर बहार नजर करते देख लेता हे.. की कोइ आस पासतो नही.. तब सामत टी.वी. देख रहा था.. ओर उनकी मां ओर सांती कीचनमे काम कर रही थी.. तब बंसी धीरेसे दरवाजा बंध कर देता हे.. तभी जागृतीकी नजर बंसीकी ओर चली जाती हे.. जो दरवाजा बंध कर रहाथा.. तब जागृतीकी दिलकी धडकन बढने लगी.. ओर वो सरमाते सफाइ छोडकर जटसे खडी होगइ..

ओर सरमाकर बंसीकी ओर देखते मुस्कुराते बहार जाने लगी.. जैसेही जागृती दरवाजेके पाइ आइ बंसीने उसे कमरमे हाथ डालकर अपनी ओर खीच लीया.. ओर अपने तनसे सटाकर जागृतीको दबोच लीया.. तो जागृती अचानक हुअ‍े हमलेसे बहुतही गभरा गइ.. तभी बंसी उसे अपनी बाहोमे पकडकर दिवालके सहारे दोनो हाथ पकडकर सटा लेता हे.. ओर खुद भी उनके तनसे सटकर खडा होजाता हे..

बंसी उनसे चीपकर खडा था.. तो जागृतीके दोनो बुब्स बंसीके सीनेमे दब गये.. ओर उसे अपनी चुतपे बंसीका खडा लंड ठोकर मारते महेसुस हुआ.. आखीर आज बंसीने हिंमत करके जागृतीको पकड ही लीया.. तब जागृती बहुतही सर्मसार होगइ.. बंसीको जागृतीकी गरम सांसे साफ सुनाइ दे रही थी.. तब जागृती अ‍ैसेही खडी रहेकर बंसीसे नजरे चुराते इधर उधर देखने लगी.. ओर बहुतही सर्मसार होती रही.. तभी..

जागृती : (धीरेसे सरमाते) भाइ.. क्या कर रहे हो..? छोडीयेनां.. कोइ देख लेगा..

बंसी : (मुस्कुराते उनकी आंखोमे देखते) देखने दो.. जागु.. आइ लव यु.. मुजे तुमसे प्यार होगया हे..

जागृती : (सर्मसार होते धीरेसे) भाइ.. इतना कहेनेमे बहुत देर करदी आपने.. मेभी तो आपको चाहती थी.. लेकीन हमारे बीच भाइ बहेनका रीस्ता दिवार बनकर खडा था.. भाइ.. आइ लव यु टु.. मेभी आपको बहुत चाहती हु.. लेकीन अभी नही.. मुजे जाने दीजीये.. मेरी नइ भाभी कभी भी लधर आ सकती हे.. हम बादमे मीलेगे..

बंसी : (खुस होते) जागु.. तुजे मेरे ओर बुआके बारेमे सब पता हेनां..? तु फीकर मत करना मे तुम दोनोको सम्हाल सकता हु.. ओर खुस रख सकता हु.. बस मेरे लीये यही काफी हे तुमने मेरा प्यार कबुल करलीया..

कहेते बंसी धीरे धीरे अपना चहेरा जागृतीके चहेरेकी ओर लेजाने लगा तब जागृती समज गइ.. ओर बहुतही सर्मसार होते नजरे जुकाये खडी रही.. उनके दिलकी धडकन बढने लगी.. ओर बंसीके होठ चुमनेका इन्तजार करने लगी.. उनके दोनो होंठ फडफडाने लगे.. तभी उसे अपने होठोपे बंसीके होठ महेसुस हुअ‍े.. जो उनके होठोको चुम रहेथे.. जागृती सरसे पांव तक हील गइ.. ओर कांपने लगी..

आज पहेलीबार उनका भाइ उनके होठोको चुम रहाथा.. जागृती अपना होस गवाने लगी.. ओर आंख बंध करते बंसीका साथ उनके होठोको चुमते देने लगी.. जागृतीके दोनो उरोज कठोर होने लगे.. आज लखनके अलावा पहेली बार वो अपने भाइसे प्यार कर रही थी.. वो चाहती थी की बंसी उसे पुरी तराह मसलदे.. लेकीन इसके लीये अभी सही वक्त नही था.. तभी..

जागृती : (धीरेसे होंठ छुडाते) बस.. बस.. भाइ.. अभी नही.. हम फुरसतमे मीलेगे.. जानेदो मुजे..

बंसी : (सामने देखते मुस्कुराते) जागु वादा कर.. अब हम जल्द ही दोनो मीलेगे..

जागृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) मुजे नही पता.. आप बहुत नोटी हो.. जानेदो मुजे.. मीलनेकी इतनी ही जल्दी थी.. तो फीर अपना प्यार जतानेमे इतनी देर क्यु करदी..?

बंसी : (बुब्सपे हाथ रखते धीरेसे मसलते) ठीक हे.. तो फीर अ‍ैसेही खडी रहे.. आज मे अपनी बहेनको छोडने वाला नही.. फीर चाहे कुछभी होजाये..

जागृती : (सर्मसार होते बंसीके हाथको हटाते) छोडीयेना भाइ.. हां.. हां.. मे वादा करती हु.. बस..? हम बहुत ही जल्द मीलेगे.. अबतो छोडीये..?

बंसी : (चुतपे हाथ रखकर धीरेसे कानमे) येस डार्लींग.. आज मे बहुत खुस हु.. हें..हें..हें..





कहातो बंसीने अ‍ेक बार फीर जागृतीके बुब्सको मसलते उनके होठोको चुमलीया.. ओर उसे छोड दीया.. तब जागृती बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर सरमाकर मुस्कुराते जटसे जाडु पोछा लेकर बंसीकी ओर हसते अपनी जीभ नीकालकर दीखाने लगी.. ओर हसते हुअ‍े रुमसे नीकल गइ.. तब बंसी उनकी ओर देखकर हसता रहा.. आखीर बंसीने आज हीमत करके अपनी बहेनको पकड ही लीया.. ओर जागृतीने उनके प्यारको कबुल भी करलीया.. तब वो बहुतही खुस होने लगा.. ओर तैयार होने लगा..
 
तो इधर जागृती रुमसे नीकलते ही जटसे जाडु पोछा रखकर अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करते उनके पीछे सटकर खडी होगइ.. ओर अपने सीनेपे दोनो हाथ रखकर मंद मंद मुस्कुराते आंख बंध करके थोडी देर खडी रही.. कुछही देर पहेले बंसी सांतीकी सादीकी बात सुनकर वो कीतनी मायुस हो गइ थी.. ओर अभी अभी बंसीने अपना प्यार जताते उनको होठोको चुमकर प्यार कीया.. उनके बुब्सको भी मसला.. ओर चुतकोभी सहेलाया.. तब जागृती बहुतही सर्मसार होगइ थी.. ओर खुसीके मारे मुस्कुराती रही..

जागृती सारा गम भुलकर खुस होने लगी.. बंसीने उसे जल्द मीलनेका वादा लेलीया था.. तब जागृतीको यकीन होगया.. की अब उनका भाइ बंसी उसे छोडने वाला नही हे.. मीलतेही वो उनकी चुदाइ जरुर कर लेगा.. यही सोचतेही जागृतीकी चुत गीली होने लगी.. तब वो फीरसे मुस्कुराते सरमाइ.. ओर खुस होते कीचनमे चली गइ.. तो वहा सीर्फ सांती चाइ नास्तेकी तयारी कर रही थी.. ओर जया बंसीके रुममे चली गइ थी..

तो इधर जागृतीके जातेही कुछही देरके बाद बंसीके रुममे उनकी मां जया आगइ.. ओर आते ही जयाने दरवाजा बंध करलीया.. तब अ‍ेक बारतो बंसीकी गांडभी फटने लगी.. उनको लगाकी कही मांने उनको ओर जागृतीको प्यार करते देख तो नही लीया..? तब सांती दरवाजा बंध करके बंसीकी ओर मुस्कुराते बेडपे आकर बैठ गइ.. तब बंसीने राहतकी सांस ली.. ओर वोभी बेडपे आकर जयाके पास बैठ गया.. तो जया प्यारसे उनके सरको सहेलाने लगी.. फीर..

जया : (मुस्कुराते) हंम.. मेरा बेटा.. अब बडा होगया हे.. तो सोच रही हु तेरी सादी करवादु.. हें..हें..हें..

बंसी : (मनमे लडु फुटते, सरमाते धीरेसे) क्या मम्मी.. आपभी.. अभी मेरी सादीकी कोइ उमर हे..?

जया : (सरारतसे कान खीभकर) अच्छाआआआ..? तो मेरे बेटेको अब भी अपनी बुआके साथ ओर अयासीया करनी हे..? हें..हें..हें..

बंसी : (चोंकते सर्मसा होते) मम्मी.. वो.. वो.. मे.. मे..

जया : (गालपे चुटकी भरते मुस्कुराते) बदमास.. मुजे सब पता हे.. की मेरा बेटा अपनी बुआसे प्यार करता हे.. मे तुम दोनोके बारेमे सबकुछ जानती हु..

बंसी : (सरमाते मुस्कुराते) सोरी मम्मी.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे..

जया : (गाल छोडकर मुस्कुराते) हंम.. पता हे मुजे.. मतलब मेरे बेटेको अपनी बुआ पसंद हे.. क्या तु सांतीसे सादी करेगा..? तो अभी बोलदे.. मे तुम दोनोकी सादी करवा दुगी.. वरना तुजे दुबारा ये चान्स नही मीलेगा.. हें..हें..हें..

बंसी : (सर्मसार होते गले मीलते) ओह मोम.. आइ लव यु.. हां मुजे बुआ बहुत पसंद हे.. मम्मी.. मे उसे सारी जींगी खुस रखुगा.. आइ प्रोमीस.. करवा दीजीये हम दोनोकी सादी.. लेकीन मम्मी..? वो.. वो.. पापा..

जया : (मुस्कुराते) तु उनकी चीन्ता मत कर.. उसे मे अभी बात करती हु.. बस.. बात करनेसे पहेले सोचा अ‍ेक बार मेरे बेटेका मन जानलु.. बेटा.. सांती बहुत अच्छी लडकी हे.. खुबसुरत हे.. तेरे लीये बीलकुल परफेक्ट हे..

बंसी : (सरमाकर हग करते) मोम.. मे उनको बहुत चाहता हु.. ओर वोभी मुजे बहुत चाहती हे.. हम दोनो ही अ‍ेक दुसरेके बगेर नही रेह सकते.. आप हम दोनोकी सादी करवा दीजीये.. वरना मे अ‍ेक दो दिनमे ही उनको लेकर चलेजाने वाला था.. मेने सब इन्तजाम करलीया था..

जया : (जटसे अलग होते प्यारसे अ‍ेक चपत लगाते) पागल होगये हो क्या..? अरे बेटा हम खुद भी तो यही चाहते हे.. की तुम दोनोकी सादी होजाये.. तो फीर तुम दोनोको भागनेकी क्या जरुरत हे..? तु फीकर मत करना मे आजही तेरे पापासे बात करती हु.. की जल्दसे जल्द तुम दोनोकी सादी करवादे.. बस..? अबतो खुस..? चल नास्ता करने आजा..

कहेते जया जटसे बंसीके रुमसे दरवाजा खोलकर बहार नीकल गइ.. ओर सामतके पास जाकर उनसे नजदीक बैठ गइ.. तब सामत मुस्कुराते जयाकी ओर देखने लगा.. तब कीचनमे जागृती ओर सांती अ‍ेक सहेलीकी तरह हसते हसते आपसमे धीरेसे बाते कर रहीथी.. ओर बीच बीचमे बाते करते दोनो सरमा भी रही थी.. जागृती बंसीको लेकर सांतीको छेड रही थी.. तब इधर जया मुस्कुराते धीरेसे बातको छेडती हे..

जया : (सरमाते धीरेसे) सुनीयेजी.. अब आप बंसीकी सादीके बारेमे सोचीये.. लडका जवान होगया हे.. कही अ‍ैसी वैसी जगह सादी करलेगा तो हमारी क्या इजत रेह जायेगी.. ओर आज कलतो हमारे गांवमे ना जाने क्या क्या हो रहा हे.. आप जानते हेनां..?

सामत : (हसते) अरे बाबा.. मे उनके लीये लडकी देखतो रहा हु.. लेकीन कोइ उनके लीये अच्छी लडकी भी तो मीलनी चाहीये.. लगता हे मुजे अब बाबाकी बात मान लेनी चाहीये.. हमारे पास उनकी बाते मानलेने के अलावा ओर कोइ चारा नही..

जया : (मुस्कुराते) हां.. मेने तो पहेलेसे ही कहा था.. लेकीन आप हो की नही मानते थे.. हमारी सांतीमे क्या बुराइ हे..? जवान हे.. खुबसुरत हे.. बेचारी भर जवानीमे विधवा होगइ.. तो उसमे उनका क्या कसुर हे..? ओर अ‍ेक बार इस बारेमे हमारी बात भी हुइ थी.. तब आपहीने तो कहाथा की अगर बंसी कहेगा तो मे सांतीकी सादी उनसे कर दुगा.. ओर वैसेभी आजकल हमारे गांवमे अ‍ैसी सादीया तो होने लगी हे..

सामत : (मुस्कुराते) अरे हां बाबा.. मुजे याद हे सब.. लेकीन बंसी कहेना भी तो चाहीये.. की मे सांतीसे सादी करना चाहता हु.. हें..हें..हें..

जया : (थोडा गुसा होते) क्या आपभी अ‍ैसी बाते करते हो..? क्या कोइ जवान लडका अपने बापसे सामनेसे आकर कहेगा की मेरी सादी आपकी बहेनसे करवादो..? बात करते हे.. वो आपसे बात करनेमे डरता हे.. कुछ तो सोचीये..

सामत : (मुस्कुराते) अरे.. इसमे डरनेकी क्या बात हे..? ठीक हे.. तो फीर अब तुही बता मे क्या करु..? मुजे उन दोनोकी सादीसे कोइ अ‍ेतराज नही.. जा पुछले उन दोनोको..

जया : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) अ‍ेजी.. मेने अभी दोनोको पुछलीया हे.. आजही सुबह दोनोसे बात करली हे.. दोनो सादीके लीये राजी हे.. (धीरेसे हसते) सुनीये.. दोनो तीन सालसे अ‍ेक दुसरेको प्यार करते हे.. ओर आपसमे सादीभी करना चाहते हे.. अच्छा हुआ आजही मेने दोनोसे बात करली.. वरना आपका लडकातो आपकी बहेनको लेकर भागजाने वाला था.. हें..हें..हें..

सामत : (खुस होते हसते) क्या..? वो पागल तो नही होगया..? जा जाकर कहेदे उसे मे तुम दोनोकी सादी जल्दही करवा दुगा.. कही भागनेकी जरुरत नही हे.. कही ये लडका हमारी नाक ना कटवाये.. पागल कहीका.. अब कुछ चाइ बाइ मीलेगी की नही..?

जया : (जोरोसे हसते) चलीये सब रेडी हे.. हें..हें..हें..

दोनोही बाते कर रहेथे तब सांती ओर जागृती कीचनसे कान लगाकर दोनोकी बाते सुन रही थी.. जैसेही सामतने खुसी खुसी दोनोके रीस्तेको स्वीकारते सादीकी बातकी तब सांती खुसीके मारे जागृतीसे लीपट गइ.. ओर खुसीके मारे आंसु बहाने लगी.. तब जागृतीभी खुस होकर मुस्कुराते सांतीकी पीठ सहेलाती रही.. तभी जयाने आवाज लगाकर सबको चाइ नास्तेके लीये बुलाया.. तब सांती सरमके मारे बहार नही नीकली.. ओर उसने जागृतीको भी बहार जानेसे रोक लीया..

जया : (हसते) सांती बेटा.. अब तुभी आजा.. हें..हें..हें..

सांती : (सरमाकर धीरेसे) नही भाभी.. आप लोग चाइ नास्ता कर लीजीये मे ओर जागु बादमे करलेगे..

सामत : (बेठते मुस्कुराते) अरे बेटा.. आजा इसमे सरमानेकी क्या बात हे.. मुजसे पहेले पता होता.. तो मेनेतो कबसे तुम दोनोकी सादी करवादी होती.. अबतक तो मेरा पोताभी आ चुका होता.. हें..हें..हें..

जया : (सरमाकर जोरोसे हसते) क्या आपभी.. बेचारीको ओर सरमा रहे हो.. ठीक हे सांती बेटा.. तुम दोनो बादमे करलेना.. बंसी.. आजा बेटा.. चाइ नास्ता रेडी हे..

बंसी : (आकर बेठते) जी मोम.. आगया.. हें..हें..हें..

सामत : (थोडा गुसा होते) क्या बेटा तुमभी.. पहेले मां फीर मांसे मम्मी तक आया ओर अब मम्मीसे सीधा मोम..? लगता हे तुजेभी सहेरकी हवा लग गइ हे.. अब थोडा खेतोमे भी ध्यान दे.. सब मजदुरके भरोसे छोडना ठीक नही.. अब तेरी सादी होने वाली हे.. तो कुछ जीम्वेवारी नीभाना समज..

जया : (थोडा गुस्सेसे) अब आपतो चुपही रहीये.. आपसे ज्यादा तो मेरा बेटाही घरकी सब जीम्वेवारी नीभाता हे.. खेती बाडीका सब मेरा बेटाही तो देखता हे.. आपतो सारा दीन घुमते रहेते हो.. पता नही बार बार सहेरमे जाकर क्या करते रहेते हो.. बस.. सारा दिन समाजकी सेवा ही करते रहेते हो..

सामत : (हसते) हां बाबा.. ठीक हे अब तेरे बेटेको नही डाटुगा.. हें..हें..हें.. तु कहे रही हेनां.. की मे सहेरमे जाकर क्या करता हु.. तो सुन.. जया.. वहा हमने अ‍ेक मकान लेलीया हे.. बहुतही बडा.. हमारे देवुके बंगले जैसा.. बस.. अब उनका सीर्फ रजीस्ट्रेशन करवाना बाकी हे.. तो अ‍ेक दो दिनमे वोभी हो जायेगा.. तो मे सोच रहा हु.. अब वो रजीस्ट्रेशन बंसीके बजाये सांती ओर मेरी जागु बेटीके नाम करवादु.. ताकी कभी उनको सहेरमे रहेने जाना पडे तो कोइ दीकत नही..

जया : (खुस होकर हसते) अरे वाह.. बंगला लेभी लीया.. ठीक हे कोइ बात नही.. लेकीन पहेले हम दोनो कुछ दिन वही रहेगे.. आपसे केह देती हु.. हें..हें..हें..

जागृती : (बहार आकर हसते) पापा.. मेतो अब भैया ओर हमारी नइ भाभीके साथ ही रहुगी.. हें..हें..हें..

सामत : (हसते) अरे हां बाबा हां.. तुजे जीनके साथ रहेना हो रहेना.. फीरतो तेरी भी सादी होजायेगी.. तो चली जायेगी.. हें..हें..हें..

जागृती : (बंसीकी ओर देखते सरमाते) नही.. मुजे कोइ सादी बादी करके कही नही जाना.. मे भाभीके पास ही ठीक हु.. सारी जींदगी भाभीके पास ही रहुगी.. हें..हें..हें..

कहेते जागृती इसारो ही इसारोमे इनडायरेक्टली बंसीको कहे दियाकी मे तुम्हारे साथ सादी करके जींदगी भर तुम्हारे साथ रहेना चाहती हु.. तो बंसी भी जागृतीकी बातको भली भांती समज गया.. ओर मनमे खुस होने लगा.. उसने जागृतीकी ओर देखा तो जागृती अब भी उनकी ओर देखकर हस रहीथी.. तभी अचानक जागृतीने बंसीकी ओर हसते हुअ‍े आंख मारदी.. ओर कीचनमे चली गइ..

आज सामतके घर खुसीका माहोल था.. सबको अपनी उमीद पुरी होती नजर आइ.. पर जैसेही जयाने कुछ दिन सहेर रहेनेकी बात की.. तब जागृतीके मनमे आसंकाये आने लगी.. जबसे रमेशके घरपे रमेश ओर जयाकी बात सुनकर आइ.. तबसे उसे सांतीने कही अ‍ेक अ‍ेक बात सच होते नजर आने लगी.. की आने वाले दिनोमे सायद उनको ओर सांतीको ही इस घरको सम्हालना पडेगा.. ओर आज उनका सक ओर पका होगया....

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