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तब घरपे सामतभाइ फोन लेकर सबको सादीका न्योता देने बैठ गये.. तो देवायत भी रश्मी ओर वंदनाको मीलकर सीधाही सुधीरके घरपे चला गया.. तो वहा सुधीरके साथ नीशा ओर चारु भी बैठकर आपसमे बाते कर रही थी.. तब देवायतको देखतेही सुधीर खुसी होते उनके गले लग गया.. फीर हाथ पकडकर देवायतको अपने पास बीठा देता हे.. तब नीशा ओर चारु दोनो ही सरमाते देवायतकी ओर देखकर मुस्कुराने लगती हे.. दोनोही सारीमे सजधरके मांगमे सींदुर लगाकर बैठी थी.. तभी..
सुधीर : (हसते) आइअे जीजाजी.. हें..हें..हें.. कहीये क्या पीयेगे..
देवायत : (हसते सामने देखते) कमीना कहीका.. सुधीर तुमने अैसा क्यु कीया..?
सुधीर : (हसते) हें..हें..हें.. भाइ गुस्सा मत करना.. आज इसीलीये तो मेने आपको बुलाया हे.. ताकी आपसे मीलकर सारी बाते करके जाउ.. सायद आज आप अपने दोस्तको आखरी बार मील रहे हो.. हें..हें..हें.. अब ये दोस्त आपको कभी नही मीलेगा.. हें..हें..हें..
देवायत : (थोडा सीरीयस होते) सुधीर.. अैसा क्यु बोल रहा हे..? क्या हुआ हे तुजे..? हंम..? कोइ सीरीयस मेटर तो नही..
सुधीर : (सरमाते धीरेसे) अरे नही नही भाइ.. कोइ सीरीयस मेटर नही हे.. सोरी भाइ.. मुजे कुछ भी नही हुआ.. आप तो मेरे बारेमे सब जानते हो.. ओर मेरे खास दोस्त भी हो.. तो सीर्फ आपको ही बताकर जा रहा हु.. हम तीनो आज साम ट्रेनसे मुम्बइ जा रहे हे..
देवायत : (आस्चर्यसे देखते) हम तीनो मतलब..? कोन कौन..? ओर कीसलीये जा रहे हो..?
चारु : (सरमाते हसते) देवु.. दरसल सुधीरभाइ.. नीशा.. ओर उनके साथ मे भी जा रही हु.. क्युकी वहा होस्पीटलका मामला हे.. ओर मेने मुम्बइमे सब देखा हे.. ओर वहा नीशाको भी अकेला ना लगे इसीलीये मे भी साथ जा रही हु.. हम सब दश दिनके बाद वापस आजायेगे..
देवायत : (थोडा चोंकते) होस्पीटलमे..? वो भी दश दिन..? लेकीन क्यु..? क्या हुआ हे सुधीरको..?
नीशा : (सरमाते धीरेसे) जानु.. दरसल सुधीर वहा अपना जेन्डर चेन्ज करने जा रहे हे..
देवायत : (चोंकते) जेन्डर चेन्ज करने जा रहे हे..? लेकीन क्यु..? कोइ खास वजह..?
सुधीर : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. गुस्सा मत करना.. बस.. मुजे आपका साथ चाहीये.. दरसल मेरे अंदर अेक स्त्रीके पुर्ण लक्षण हे.. मे कभी पुरुषमे था ही नही.. बस.. मां की जीदकी वजहसे मुजे नीशाके साथ सादी करनी पडी.. लेकीन अब सब कुछ सही हो गया हे.. तो सोचा मे भी अपनी लाइफ खुलकर जीयु..
चारु : (सरमाते धीरेसे) हां देवु.. सुधीरभाइने सही फैसला लीया हे.. हम सबकी तराह उनको भी खुलकर जीनेका अधीकार हे.. ओर सुनीये.. यहा इस बारेमे अभी कीसीको कुछ भी नही पता.. तो आप भी खयाल रखीयेगा.. हम दस दिनके बाद वापस आजायेगी.. ओर हां.. हमारे बारेमे हमने सुधीरभाइको सबकुछ बता दीया हे.. ओर दुसरी बात.. मे ओर रमेश अलग हो रहे हे.. हम डिवोर्स ले रहे हे..
देवायत : (सामने देखते) लेकीन क्यु..? क्या दोनोका जुदा होना जरुरी हे..? क्या तुम दोनो जल्दबाजी नही कर रहे..? कुछ दिन ठहेर जाओ.. सब ठीक होजायेगा..
सुधीर : भाइ.. मे रमेशके साथ कल बात कर चुका हु.. अब कोइ फायदा नही.. क्युकी बात ही कुछ अैसी हे.. जो होता हे होने दीजीये.. ओर हां.. अेक बात ओर.. अब आप यहाके लीये दुसरे सरपंचका इन्तजाम कर लीजीये.. बस.. ओर कुछ नही कहेना.. बाकी हम मेरी क्लीनीकपे बैठकर आरामसे बाते करेगे..
देवायत : (थोडा परेसान होते) लेकीन सुधीर.. वो ओर सामतभाइ मीलकर कीतना अच्छा काम कर रहे थे.. तो फीर अचानक अैसा फैसला क्यु लीया..? ओर तुजे पता हे..? दोनोने कल ही यहा अेक बडी होस्पीटलके लीये सरकारसे जमीन भी लेली हे.. इस बारेमे अभी रश्मीके साथ भी बात करके आया हु.. स्कुलके लीये भी सब काम खतम हो चुका हे.. बस अब बील्डींगका काम सुरु होनेकी देरी हे..
सुधीर : (मुस्कुराते) भाइ आपकी सभी बाते सही हे.. लेकीन सीचुअेशन ही अैसी हे.. भाइ.. चलो मे भी आपके साथ खेतोपे चलता हु.. हम दोनो वहा आरामसे बात कर सकेगे.. आज क्लीनीकपे नही जाना..
चारु : (सरमाते धीरेसे) देवु.. आज दोपहोरको आपको खानेके लीये इधर आना हे.. मे मंजुभाभीसे बात कर लुगी.. आप ओर सुधीरभाइ इधर आजाना..
सुधीर : (मुस्कुराते) भाइ.. मेरी दोनो बहेनोका हुकुम आगया हे.. अब तो इधर आना ही पडेगा.. हें..हें..हें..
देवायत : (मुस्कुराते खडा होते) चल यार वहा आरामसे बात करते हे..
दोनोही खेतोपे आजाते हे.. तब भानु ओर रामुकाका बाते कर रहे थे.. ओर देवायत सुधीरको लेकर सीधा ही अपनी ओफीसमे चला गया.. ओर दोनो ही चेरपे बैठ कर बाते करने लगे..
सुधीर : (हसते) आइअे जीजाजी.. हें..हें..हें.. कहीये क्या पीयेगे..
देवायत : (हसते सामने देखते) कमीना कहीका.. सुधीर तुमने अैसा क्यु कीया..?
सुधीर : (हसते) हें..हें..हें.. भाइ गुस्सा मत करना.. आज इसीलीये तो मेने आपको बुलाया हे.. ताकी आपसे मीलकर सारी बाते करके जाउ.. सायद आज आप अपने दोस्तको आखरी बार मील रहे हो.. हें..हें..हें.. अब ये दोस्त आपको कभी नही मीलेगा.. हें..हें..हें..
देवायत : (थोडा सीरीयस होते) सुधीर.. अैसा क्यु बोल रहा हे..? क्या हुआ हे तुजे..? हंम..? कोइ सीरीयस मेटर तो नही..
सुधीर : (सरमाते धीरेसे) अरे नही नही भाइ.. कोइ सीरीयस मेटर नही हे.. सोरी भाइ.. मुजे कुछ भी नही हुआ.. आप तो मेरे बारेमे सब जानते हो.. ओर मेरे खास दोस्त भी हो.. तो सीर्फ आपको ही बताकर जा रहा हु.. हम तीनो आज साम ट्रेनसे मुम्बइ जा रहे हे..
देवायत : (आस्चर्यसे देखते) हम तीनो मतलब..? कोन कौन..? ओर कीसलीये जा रहे हो..?
चारु : (सरमाते हसते) देवु.. दरसल सुधीरभाइ.. नीशा.. ओर उनके साथ मे भी जा रही हु.. क्युकी वहा होस्पीटलका मामला हे.. ओर मेने मुम्बइमे सब देखा हे.. ओर वहा नीशाको भी अकेला ना लगे इसीलीये मे भी साथ जा रही हु.. हम सब दश दिनके बाद वापस आजायेगे..
देवायत : (थोडा चोंकते) होस्पीटलमे..? वो भी दश दिन..? लेकीन क्यु..? क्या हुआ हे सुधीरको..?
नीशा : (सरमाते धीरेसे) जानु.. दरसल सुधीर वहा अपना जेन्डर चेन्ज करने जा रहे हे..
देवायत : (चोंकते) जेन्डर चेन्ज करने जा रहे हे..? लेकीन क्यु..? कोइ खास वजह..?
सुधीर : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. गुस्सा मत करना.. बस.. मुजे आपका साथ चाहीये.. दरसल मेरे अंदर अेक स्त्रीके पुर्ण लक्षण हे.. मे कभी पुरुषमे था ही नही.. बस.. मां की जीदकी वजहसे मुजे नीशाके साथ सादी करनी पडी.. लेकीन अब सब कुछ सही हो गया हे.. तो सोचा मे भी अपनी लाइफ खुलकर जीयु..
चारु : (सरमाते धीरेसे) हां देवु.. सुधीरभाइने सही फैसला लीया हे.. हम सबकी तराह उनको भी खुलकर जीनेका अधीकार हे.. ओर सुनीये.. यहा इस बारेमे अभी कीसीको कुछ भी नही पता.. तो आप भी खयाल रखीयेगा.. हम दस दिनके बाद वापस आजायेगी.. ओर हां.. हमारे बारेमे हमने सुधीरभाइको सबकुछ बता दीया हे.. ओर दुसरी बात.. मे ओर रमेश अलग हो रहे हे.. हम डिवोर्स ले रहे हे..
देवायत : (सामने देखते) लेकीन क्यु..? क्या दोनोका जुदा होना जरुरी हे..? क्या तुम दोनो जल्दबाजी नही कर रहे..? कुछ दिन ठहेर जाओ.. सब ठीक होजायेगा..
सुधीर : भाइ.. मे रमेशके साथ कल बात कर चुका हु.. अब कोइ फायदा नही.. क्युकी बात ही कुछ अैसी हे.. जो होता हे होने दीजीये.. ओर हां.. अेक बात ओर.. अब आप यहाके लीये दुसरे सरपंचका इन्तजाम कर लीजीये.. बस.. ओर कुछ नही कहेना.. बाकी हम मेरी क्लीनीकपे बैठकर आरामसे बाते करेगे..
देवायत : (थोडा परेसान होते) लेकीन सुधीर.. वो ओर सामतभाइ मीलकर कीतना अच्छा काम कर रहे थे.. तो फीर अचानक अैसा फैसला क्यु लीया..? ओर तुजे पता हे..? दोनोने कल ही यहा अेक बडी होस्पीटलके लीये सरकारसे जमीन भी लेली हे.. इस बारेमे अभी रश्मीके साथ भी बात करके आया हु.. स्कुलके लीये भी सब काम खतम हो चुका हे.. बस अब बील्डींगका काम सुरु होनेकी देरी हे..
सुधीर : (मुस्कुराते) भाइ आपकी सभी बाते सही हे.. लेकीन सीचुअेशन ही अैसी हे.. भाइ.. चलो मे भी आपके साथ खेतोपे चलता हु.. हम दोनो वहा आरामसे बात कर सकेगे.. आज क्लीनीकपे नही जाना..
चारु : (सरमाते धीरेसे) देवु.. आज दोपहोरको आपको खानेके लीये इधर आना हे.. मे मंजुभाभीसे बात कर लुगी.. आप ओर सुधीरभाइ इधर आजाना..
सुधीर : (मुस्कुराते) भाइ.. मेरी दोनो बहेनोका हुकुम आगया हे.. अब तो इधर आना ही पडेगा.. हें..हें..हें..
देवायत : (मुस्कुराते खडा होते) चल यार वहा आरामसे बात करते हे..
दोनोही खेतोपे आजाते हे.. तब भानु ओर रामुकाका बाते कर रहे थे.. ओर देवायत सुधीरको लेकर सीधा ही अपनी ओफीसमे चला गया.. ओर दोनो ही चेरपे बैठ कर बाते करने लगे..

