Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 45 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

तब घरपे सामतभाइ फोन लेकर सबको सादीका न्योता देने बैठ गये.. तो देवायत भी रश्मी ओर वंदनाको मीलकर सीधाही सुधीरके घरपे चला गया.. तो वहा सुधीरके साथ नीशा ओर चारु भी बैठकर आपसमे बाते कर रही थी.. तब देवायतको देखतेही सुधीर खुसी होते उनके गले लग गया.. फीर हाथ पकडकर देवायतको अपने पास बीठा देता हे.. तब नीशा ओर चारु दोनो ही सरमाते देवायतकी ओर देखकर मुस्कुराने लगती हे.. दोनोही सारीमे सजधरके मांगमे सींदुर लगाकर बैठी थी.. तभी..

सुधीर : (हसते) आइअ‍े जीजाजी.. हें..हें..हें.. कहीये क्या पीयेगे..

देवायत : (हसते सामने देखते) कमीना कहीका.. सुधीर तुमने अ‍ैसा क्यु कीया..?

सुधीर : (हसते) हें..हें..हें.. भाइ गुस्सा मत करना.. आज इसीलीये तो मेने आपको बुलाया हे.. ताकी आपसे मीलकर सारी बाते करके जाउ.. सायद आज आप अपने दोस्तको आखरी बार मील रहे हो.. हें..हें..हें.. अब ये दोस्त आपको कभी नही मीलेगा.. हें..हें..हें..

देवायत : (थोडा सीरीयस होते) सुधीर.. अ‍ैसा क्यु बोल रहा हे..? क्या हुआ हे तुजे..? हंम..? कोइ सीरीयस मेटर तो नही..

सुधीर : (सरमाते धीरेसे) अरे नही नही भाइ.. कोइ सीरीयस मेटर नही हे.. सोरी भाइ.. मुजे कुछ भी नही हुआ.. आप तो मेरे बारेमे सब जानते हो.. ओर मेरे खास दोस्त भी हो.. तो सीर्फ आपको ही बताकर जा रहा हु.. हम तीनो आज साम ट्रेनसे मुम्बइ जा रहे हे..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) हम तीनो मतलब..? कोन कौन..? ओर कीसलीये जा रहे हो..?

चारु : (सरमाते हसते) देवु.. दरसल सुधीरभाइ.. नीशा.. ओर उनके साथ मे भी जा रही हु.. क्युकी वहा होस्पीटलका मामला हे.. ओर मेने मुम्बइमे सब देखा हे.. ओर वहा नीशाको भी अकेला ना लगे इसीलीये मे भी साथ जा रही हु.. हम सब दश दिनके बाद वापस आजायेगे..

देवायत : (थोडा चोंकते) होस्पीटलमे..? वो भी दश दिन..? लेकीन क्यु..? क्या हुआ हे सुधीरको..?

नीशा : (सरमाते धीरेसे) जानु.. दरसल सुधीर वहा अपना जेन्डर चेन्ज करने जा रहे हे..

देवायत : (चोंकते) जेन्डर चेन्ज करने जा रहे हे..? लेकीन क्यु..? कोइ खास वजह..?

सुधीर : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. गुस्सा मत करना.. बस.. मुजे आपका साथ चाहीये.. दरसल मेरे अंदर अ‍ेक स्त्रीके पुर्ण लक्षण हे.. मे कभी पुरुषमे था ही नही.. बस.. मां की जीदकी वजहसे मुजे नीशाके साथ सादी करनी पडी.. लेकीन अब सब कुछ सही हो गया हे.. तो सोचा मे भी अपनी लाइफ खुलकर जीयु..

चारु : (सरमाते धीरेसे) हां देवु.. सुधीरभाइने सही फैसला लीया हे.. हम सबकी तराह उनको भी खुलकर जीनेका अधीकार हे.. ओर सुनीये.. यहा इस बारेमे अभी कीसीको कुछ भी नही पता.. तो आप भी खयाल रखीयेगा.. हम दस दिनके बाद वापस आजायेगी.. ओर हां.. हमारे बारेमे हमने सुधीरभाइको सबकुछ बता दीया हे.. ओर दुसरी बात.. मे ओर रमेश अलग हो रहे हे.. हम डिवोर्स ले रहे हे..

देवायत : (सामने देखते) लेकीन क्यु..? क्या दोनोका जुदा होना जरुरी हे..? क्या तुम दोनो जल्दबाजी नही कर रहे..? कुछ दिन ठहेर जाओ.. सब ठीक होजायेगा..

सुधीर : भाइ.. मे रमेशके साथ कल बात कर चुका हु.. अब कोइ फायदा नही.. क्युकी बात ही कुछ अ‍ैसी हे.. जो होता हे होने दीजीये.. ओर हां.. अ‍ेक बात ओर.. अब आप यहाके लीये दुसरे सरपंचका इन्तजाम कर लीजीये.. बस.. ओर कुछ नही कहेना.. बाकी हम मेरी क्लीनीकपे बैठकर आरामसे बाते करेगे..

देवायत : (थोडा परेसान होते) लेकीन सुधीर.. वो ओर सामतभाइ मीलकर कीतना अच्छा काम कर रहे थे.. तो फीर अचानक अ‍ैसा फैसला क्यु लीया..? ओर तुजे पता हे..? दोनोने कल ही यहा अ‍ेक बडी होस्पीटलके लीये सरकारसे जमीन भी लेली हे.. इस बारेमे अभी रश्मीके साथ भी बात करके आया हु.. स्कुलके लीये भी सब काम खतम हो चुका हे.. बस अब बील्डींगका काम सुरु होनेकी देरी हे..

सुधीर : (मुस्कुराते) भाइ आपकी सभी बाते सही हे.. लेकीन सीचुअ‍ेशन ही अ‍ैसी हे.. भाइ.. चलो मे भी आपके साथ खेतोपे चलता हु.. हम दोनो वहा आरामसे बात कर सकेगे.. आज क्लीनीकपे नही जाना..

चारु : (सरमाते धीरेसे) देवु.. आज दोपहोरको आपको खानेके लीये इधर आना हे.. मे मंजुभाभीसे बात कर लुगी.. आप ओर सुधीरभाइ इधर आजाना..

सुधीर : (मुस्कुराते) भाइ.. मेरी दोनो बहेनोका हुकुम आगया हे.. अब तो इधर आना ही पडेगा.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते खडा होते) चल यार वहा आरामसे बात करते हे..

दोनोही खेतोपे आजाते हे.. तब भानु ओर रामुकाका बाते कर रहे थे.. ओर देवायत सुधीरको लेकर सीधा ही अपनी ओफीसमे चला गया.. ओर दोनो ही चेरपे बैठ कर बाते करने लगे..
 
देवायत : हां सुधीर अब बता.. क्या केह रहाथा रमेश..? वो क्यु चारु भाभीको डीवोर्स दे रहा हे..?

सुधीर : भाइ.. रमेश नही.. खुद चारुभाभी इनको डीवोर्स दे रही हे.. पता हे क्यु..? मेरी कल ही रमेशके साथ बात हुइ.. कीसीको ना कहेनेकी सर्त पर उन्होने मुजे बहुत कुछ बता दीया.. भाइ.. सामत भाइके लडकेकी सादीके बाद वो ओर जया भाभी सादी करने वाले हे.. सुना हे सामतभाइ अब कुछही दिनोके महेमान हे.. रमेश केह रहाथा उनको ब्लड केंशर हे..

देवायत : (सामने देखते) हां.. पता हे मुजे.. लेकीन सुधीर ये बातका जीक्र अभी तुम कीसी ओरके सामने मत करना.. क्युकी खुद सामत भाइने मना कीया हे.. ओर रमेशको सामतभाइ जीन्दा हे तबतक थोडा इन्तजार करना चाहीये.. वो क्यु इतनी जल्द बाजी कर रहा हे..? क्या कुछ दिन ठहेर नही सकता..?

सुधीर : (सरमाते धीरेस) भाइ.. जल्द बाजी रमेश नही.. जया भाभी खुद कर रही हे.. वो रमेश के उपर जल्दसे जल्द सादी करनेका दबाव डाल रही हे..

देवायत : (आस्चर्यसे) जयाभाभी खुद..? लेकीन क्यु..? क्या उनको पता चल गया हे.. की सामत भाइ अब कुछ ही दिनके महेमान हे..?

सुधीर : (धीरेसे) नही भाइ.. सामत भाइकी बीमारीके बारेमे उनके घरपे कीसीको नही पता.. भाइ.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? रमेशने जया भाभीको प्रेगनेन्ट करदीया हे.. ओर इस बारेमे सामत भाइकी बहेन सांतीको ओर सायद उनकी बेटी जागृतीको भी पता चल गया हे.. क्युकी पीछले तीन चार दीनसे चारुभाभी नीशाके साथ सो रही हे.. तो तबसे जया भाभी अपने घरकी छतसे होते रमेशके साथ सोने चली जाती हे.. ओर ये बात जया भाभीने खुद रमेशको कही हे.. तो वोभी जल्दसे जल्द रमेशके साथ जाना चाहती हे..

देवायत : (परेसान होते) छोड यार.. रमेश ओर जयाभाभीने तो दिमाग ही खराब कर दीया.. अब ये दो दिनमे ही बंसी ओर सांतीकी सादी हे.. अच्छा हे उनकी सादी आरामसे नीपट जाये.. सुधीर.. ये बता तुमने इतना बडा डीसीजन क्यु लीया..? कोइ खास वजह..?

सुधीर : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. मेने मुंबइ जाकर सब टेस्ट करवालीये हे.. अ‍ेक सेक्सोलोजीस्ट डोक्टर दोस्त मील गया हे.. उसीके पास मे गया था.. तो पता चला मेरे अंदर सब होर्मोन्स स्त्रीके हे.. मेरा पेनीसभी सीर्फ ना के बरारबर हे.. ओर पता हे आपको..? मेरे पेटमे बच्चेदानी भी हे.. तो मे बच्चे भी पैदा कर सकता हु..

ओर भाइ.. आपतो जानते हो.. मुजे कभी लडकीओमे इन्ट्रेस नही रहा.. सब लडकेही अच्छे लगते हे.. तो सोचा क्युना मे भी लडकी बनजाउ.. भाइ.. इसीलीये मेने नीशाको आपके साथ सादीके लीये कहा था.. ताकी उनकी भी जींदगी सवर जाये.. हम दोनोने बैठकर बहुत कुछ डीसाइड करलीया हे..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. मुजे नीशा ओर चारुने सब बाते बताइ.. ठीक हे.. अगर वहा कोइ पैसे बैसेकी जरुरत होतो बताना.. वैसे तो मे कुछ पैसे नीशा ओर चारुको दे रहा हु.. फीर भी ज्यादा चाहीये तो बोल देना..

सुधीर : (आंख गीली करते) थेन्क्स भाइ.. वैसेतो पैसे हे मेरे पास.. फीर भी चहीये तो जरुर आपसे लेलुगा.. भाइ.. आपने चारु भाभीसे भी सादी करके बहुत अच्छा कीया.. वरना उनकी जींदगी बरबाद हो जाती..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. अब बता.. जब लडकी हो जायेगा तो आगेका क्या प्लान हे..? तु कीसी अच्छे लडके के साथ सादी कर लेना.. ओर अपनी लाइफ अ‍ेन्जोय करना..

सुधीर : (सरमाते) भाइ.. आजकल अच्छे लडके मीलते कहा हे..? मे हमारी स्कुल कोलेजमे था तब ही सभी लडकोका अनुभव कर चुका हु.. कुछ ही लडके आपकी तराह हमदर्द ओर इमानदार मीले हे.. भाइ.. मेने सबकुछ प्लान करलीया हे.. मे आपकी होस्पीटल सम्हालुगा..

ओर सादी नही करनी.. बाकी सब मे ओपरेशन करवाकर आउगा तब डीसाइड करुगा.. की क्या करना हे.. अगर जरुरत महेसुस हुइ तो मे सादी भी करलुगा.. भाइ.. मे जब आउगानां तब अ‍ेक पुर्ण लडकी बनकर आउगा.. आप मुजे पहेचान भी नही सकोगे.. हें..हें..हें..

दोनो ही बाते करते रहे.. तब सुधीरने देवायतको उनके बचपनसे लेकर आज तक सभी बाते बतादी.. जो उसने नीशाको बताइ थी.. जीसे सुनकर देवायतको भी सुधीरके साथ ओर हमदर्दी होने लगी.. इधर दोनो बाते कर रहे थे.. तब बंसी सांती जागृती ओर जयश्री.. सहेरमे पहोचकर लखनसे फोनपे कोन्टेक्टमे रहेनेका बोलकर अलग हो गये.. ओर सादीकी खरीदारी करने लगे.. तब लखन भी सृतीको उनकी क्लीनीकपे ड्रोप कर देता हे..

तब कारसे उतरते सृतीने लखनको दोपहोरको फोन करनेको कहा.. क्युकी सृतीको भी कुछ अपने लीये खरीदारी करनी थी.. सृती अ‍ेक नजर लखनके पेन्टकी ओर डालकर सरमाती क्लीनीकमे चली गइ.. अब इतने दिनो तक वो हवेलीमे रही.. तो लखनको भी अच्छी तराह जानने लगी थी.. ओर उपरसे वो पहेलेसे ही बहुत ही मोर्डन खयालकी थी.. तो लखन पुनमकी तराह उनकी भी मस्तीया करते उनके साथ भी फ्ल्र्ट करने लगा था.. तो सृतीको भी बहुत अच्छा लगने लगा..

आज सुबह पुनमके साथ लखनके बारेमे बातकी तो जीनकी वजहसे अब सृतीकोभी लखनके लंडको देखनेकी उत्सुक्ता बढने लगी.. तब उनको पता नही था की वो भी पुनमकी तराह लखनकी ओर खीचती चली जा रही हे.. तब सृतीने अंदर क्लीनीकमे जाकर देखा तो आज सीर्फ दो तीन पेसन्ट ही थे.. आज कोइ डीलीवरी भी नही थी.. तो वो अपनी ओफीसमे जाकर पेसन्टको देखने लगी..
 
इधर लखन भी सृतीको ड्रोप करके साहील सलमाको लेकर उनके चाचाके घरकी ओर जाने लगा.. तब सलमा बहुत ही सरमा रही थी.. क्युकी उनके ओर साहीलके बीच चल रहे रीस्तेके बारेमे लखनको भी पता था.. मतलब साहीलके सभी दोस्तोको पता था.. सलमा थी भी बहुत खुबसुरत.. पतली कमर ओर लंबी चोटी.. तीखे नैन नक्सकी वजहसे जो आज भी अ‍ेक लडकी की तराह दीख रही थी.. लेकीन वो भी आज अ‍ेक खास मक्सदसे साहीलके साथ आइ थी.. तभी..

लखन : (मुस्कुराते) साहील अब तुम मुजे घरका रास्ता दीखाना मेने घर नही देखा.. ओर हां.. भाभी.. वहा आप मुजे खानेके लीये मत रोकना मुजे बंसीके साथ खरीदी करने भी जाना हे..

लखनने सलमाको भाभी कहातो सलमा बहुतही सर्मसार होगइ.. क्युकी उनकोभी पता थाकी साहील ओर उनके दोस्तोके बीच सभी तराहकी बाते होती हे.. तब दुसरी ओर साहीलने भी सलमाको लखनके बारेमे बहुत कुछ बता दीया था.. की उनका कीस कीसके साथ रीलेशन हे.. तो सलमाभी लखनके रंगीन मीजाजको अच्छी तराह जानती थी.. ओर लखनका उनको भाभी कहेना बहुत ही अच्छा लगता था..

साहील : (मुस्कुराते) भाइ.. चाचा ओर चाची आपको खानेके बगैर नही जाने देगे.. ओर बंसीकी फीकर मत करो.. उनको भी हम वहा खानेके लीये बुला लेगे.. फीर हमे भी तो खरीदी करनी हे..

सलमा : (सरमाते धीरेसे) लखनभैया.. प्लीज.. वहा ध्यान रखना.. क्युकी हमारे रीलेशनके बारेमे यहा कीसीको नही पता..

लखन : (हसते) अरे.. भाभी.. फीकर मत करो.. वैसे भी मे आपको भाभी कहेता हु.. तो वहा कीसीको पता भी नही चलेगा.. बस अ‍ेक बार फीरोजभाइ गांवमे रहेने आजाये.. फीरतो आप दोनोकी बले बले हे.. देखना सबलोग आप दोनोके रीस्तेको कैसे अ‍ेक्सेप्ट करलेते हे.. फीरोजभाइ ही आप दोनोकी सादी करवा देगे.. हें..हें..हें..

सलमा :(सरमाते मुस्कुराते) लखनभैया.. प्लीज.. अभी उनको हमारी सादीके बारेमे कुछ मत कहेना.. क्युकी मेने मेरे साहीलके लीये कुछ ओर ही सोचा हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) अच्छा.. भाभी.. बताइअ‍ेना.. आपने साहीलके लीये क्या सोचा हे..?

सलमा : (हसते) नही.. अभी नही.. मे आपको बादमे बताउगी.. अभी तो चलो.. लखनभैया.. क्या फीरोजभाइ ओर जरीना वहा आनेके लीये राजी होजायेगे..? आजाये तबतो अच्छा हे.. मेरे साहीलका भी खेतीसे थोडा बोज हल्का होजायेगा..

तीनोही बाते करते साहीलके चाचाके घर पहोंय गये.. जैसेही सलमा साहील ओर लखन घरमे दाखील हुअ‍े.. तो जरीनाने सलमाको देखा.. देखते ही जरीना तो पागल ही होगइ.. ओर दोडकर सलमाके गले लगकर फुटफुटके रोने लगी.. तो उनके रोनेकी आवाज सुनकर फीरोज ओर सबाना भी जटसे रुमसे बहार आगये.. तब सबाना भी साहीलको देखकर पहेलेतो खुस होगइ फीर सरमाते आकर साहीलको गले लगा लीया..

तो आज पहेली बार साहीलको कुछ अलग ही फील होने लगा.. क्युकी सबाना अब काफी बडी हो चुकी थी.. तो उनके दोनो उरोज साहीलके सीनेपे चुभते रगड खा रहेथे.. तो साहीलका लंड जटके मारते खडा होने लगा.. तभी सबानाको भी अपनी चुतमे कुछ चुभन महेसुस हुइ.. तो वो फौरन समज गइ.. ओर जटसे साहीलसे अलग होगइ.. फीर नीचेकी ओर टेडी नजरोसे देखने लगी.. तो साहीलके पेन्टमे तंबु हो गया था..

साहील : (मुस्कुराते) नही दीदी.. यादतो आपकी बहुत ही आ रही थी.. लेकीन यहा आनेका मोका नही मील रहाथा.. ओर आज सीर्फ आपको ही मीलने आया हु.. वो भी स्पेसीयल.. हें..हें..हें..

सबाना : (सरमाते मुस्कुराते) जाओ जाओ.. जुठ मत बोलो.. कीसी ओर कामसे आये होगे.. अगर इस दीदीसे इतना ही प्यार होता तो कभी फोन करलीया होता..

जरीना : (हसते) साहील बेटा सही मौकेपे आये हो.. आज सबानाका जन्मदीन भी हे.. हें..हें..हें..

सबाना : (जुठा गुस्सा करते) मम्मी.. आपभीनां..? क्यु बतादीया..? मे देखना चाहती थी भाइको याद हेकी नही.. हें..हें..हें..

साहील : (अ‍ेक बार फीर हग करते हसते) हेपी बर्थडे दीदी.. सच कहु..? तुमसे जुठ नही बोलुगा.. मुजे सचमे याद नही था.. सोरी..





सबाना : (हसते) हां देखानां..? मुजे पता था आपको याद नही होगा.. इनकी तो मे तगडी गीफ्ट लुगी.. हें..हें..हें..

जरीना : (हसते) अबतो इसे छोड.. हमे भी हमारे बेटेसे मीलने दे.. हें..हें..हें..

कहातो सबाना सरमाकर साहीलसे अलग हो गइ.. ओर अ‍ेक बार फीर साहीलके पेन्टकी ओर देखने सर्मसार होने लगी.. सभी परीवार अ‍ेक दुसरेको गले मीलकर मीलने लगे.. तब लखन दरवाजेपे खडा रहेते सबका मीलन देखकर मुस्कुराता रहा.. तभी अचानक फीरोजका ध्यान लखनकी ओर गया.. तो वो खुसीके मारे जोरोसे छोटे ठाकुर.. कहेते लखनकी ओर चला गया ओर लखनको जोरोसे गले लगा लीया..

फीर हाथ पकडकर उसे सोफेकी ओर ले गया.. ओर उसे आदरसे सोफेपे बीठाया.. तब जरीना ओर सबाना दोनोही सोक्ट होते हसते हुअ‍े लखनको देखती रही.. क्युकी सबाना ओर जरीना भी लखनको अच्छी तराह पहेचानती थी.. लखनको यहा अचानक देखकर उनको कभी उमीद नही थी की गांवके राजा ओर ठाकुरके खानदानसे भी उनके घरपे कोइ आ सकता हे.. तब जरीना बडे ही अहोभावसे लखनकी ओर हाथ जोडते मुस्कुराती रही..

तो सबाना भी लखनकी ओर देखते मुस्कुराते सरमा गइ.. ओर लखनको नमस्ते कहेने लगी.. सबाना कइ बार गांवमे आचुकी थी.. साहीलकी वजहसे उनके सभी दोस्तोको अच्छी तराह जानती थी.. लखन साहील बंसी मुना श्रीधर जयश्री ओर जागृती भी सबानाको अच्छी तराह जानते थे.. ओर बंसी श्रीधरने तो कइ बार साहीलको सबानाको पटानेकी बात भी कही थी..

लेकीन साहील था की वो सबानाको चाहता तो था.. लेकीन इस मामलेमे अपने दिलकी बात कहेने मे बहुत ही सरमा रहा था.. ओर सबानाको पटानेकी हींमत नही कर पाया.. तो दुसरी ओर सबानाको भी साहील अच्छा लगता था.. ओर साहीलके साथ बहुत ही पटती थी.. लेकीन वो उनका भाइ था.. तो सबानाने भी पढाइकी वजहसे कुछ खास ध्यान नही दीया.. फीर सबलोग सोफेपे बैठ गये तब सबानाने सबको पानी पीलाया.. ओर कीचनमे चाइ बनाने चली गइ.. तब..

फीरोज : (हाथ जोडते) लखनभैया.. हम जींदगीभर आपका अहेसानमंद रहेगे.. हम आपका अहेसान कभी भुलेगे.. आपने हमारी जमीन वापस दीलवाकर हमपे बहुत बडी महेरबानी की हे..

लखन : (मुस्कुराते) फीरोजभाइ.. हमने कुछ भी नही कीया.. जो आपका था वोही आपको वापस दीया हे..

फीरोज : (मुस्कुराते) नही लखनभैया.. हमतो कर्जमे पुरी तराह डुब चुके थे.. वो सरपंचने हमारी सब जमीने हमसे लीखवाली थी.. हमे कभी उमीद ही नही थीकी वो जमीन हमे कभी वापस मीलेगी.. भलाहो बडे ठाकुर ओर उस सरपंचकी बीवीका.. जो हमे हमारी जमीन वापस देदी..

फीरोन ओर लखन बाते करने लगे.. ओर बातो ही बातोमे फीरोजने कादीर ओर उनकी बहेन सायराके बारेमे बात की.. तब बाते करते करते लखनने गांवमे हुअ‍े बदलावके बारेमे बहुत कुछ फीरोजको बतादीया.. तब जरीना सलमा ओर कीचनमे चाइ बनाते सबानाके साथ सभी लखनकी बाते बडे ही अहोभावसे सुनते रहे.. फीर सबानाने सबको चाइ नास्ता दीया.. ओर खुद भी सलमाके पास आकर बैठ गइ..

जब लखनने चाइ नास्ता करते गांवमे रीस्तोमे बदलावकी बातेकी.. तब सबानाको लखनकी बातोपे दिलचस्पी होने लगी.. ओर वो लखन ओर साहीलको बार बार चोर नजरसे देखने लगी.. तभी अचानक सबानाका ध्यान लखनके पेन्टकी ओर गया.. तब वो आस्चर्यसे लखनकी ओर देखने लगी.. क्युकी पेन्टके अंदर ही लखनका लंड बहुत बडा दीख रहा था.. सबाना बार बार कभी लखनके पेन्टकी ओर तो कभी उनके सामने देखती रही.. तभी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १८६

जब लखनने चाइ नास्ता करते गांवमे रीस्तोमे बदलावकी बातेकी.. तब सबानाको लखनकी बातोपे दिलचस्पी होने लगी.. ओर वो लखन ओर साहीलको बार बार चोर नजरसे देखने लगी.. तभी अचानक सबानाका ध्यान लखनके पेन्टकी ओर गया.. तब वो आस्चर्यसे लखनकी ओर देखने लगी.. क्युकी पेन्टके अंदर ही लखनका लंड बहुत बडा दीख रहा था.. सबाना बार बार कभी लखनके पेन्टकी ओर तो कभी उनके सामने देखती रही.. तभी....अब आगे

लखन : (मुस्कुराते) फीरोजभाइ.. अगर बुरा मत मानोतो आपसे अ‍ेक बात कहु..?

फीरोज : (हाथ जोडकर मुस्कुराते) अरे.. क्यु मुजे सर्मीन्दा कर रहे हे..? मे क्यु बुरा मानुगा..? जो भी कहेना हो बीन्दास्त कहो.. हें..हें..हें..

लखन : भाइ.. आप कादीरभाइ ओर सायरा दीदीको माफ कर दीजीये.. क्युकी अब हमारे गांवमे अ‍ैसे बहुत रीस्ते देखनेको मीलेगे आपको.. ओर उनकी वजह हे.. हमारे खानदानमे वो राजाके जन्म लेना.. ओर आने वाले वक्तमे तो कोइ रीस्तो के मायने ही नही रहेगे.. ओर ये सब कंट्रोल करना हमारे कीसीके बसकी बात नही हे.. जो भी हो रहा हे वो उपर वालेकी मरजीसे हो रहा हे.. वरना सोचो हमारे ही खानदानमे कोइ अपनी बहेसे सादी कर सकता हे..?

साहील : (मुस्कुराते) हां चाचा.. आपतो सब जानते हे.. पीछली तीन पीढीसे हम सब देखते आये हे.. की ठाकुर खानदानमे सब उनकी बहेनसे ही सादी करते आये हे.. ओर ये सब बरसोसे यही सुनते आये हे.. की अ‍ेक दिन गांवमे अ‍ैसा सब होगा.. तो अब वो वक्त आगया हे.. हमारे गांवमे अब सचमे रीस्तोमे बदलाव होने लगा हे.. हमारे दो तीन दोस्त हे.. वो सब उनकी बहेनसे सादी कर रहे हे.. ओर वोभी अपने घरवालोकी मरजीसे..

फीरोज : (आस्चर्यसे) क्या..? अपने घरवालोकी मरजीसे..? वो लोग मान कैसे गये..? क्या कभी भाइ बहेनके बीच सादीया होती हे..?

सलमा : (सरमाते धीरेसे) हां देवरजी.. होती हे.. इसमे बुराइ भी क्या हे..? वैसे देखा जाये तो मे ओर जरीना भी आपकी बहेन ही हे.. फीर रीस्तेमे कीतनी भी दुर क्यु नाहो.. बहेन आखीर बहेन ही कहेलाती हे.. क्या आपको पता नही हमारे इस देवरजीके खानदानमे तो तीन तीन पीढीयोसे सब उनकी बहेनके साथ ही सादी करते आये हे.. ओर हमारे गांव वाले सीर्फ मान ही नही गये.. बल्की दोनो भाइ बहेनकी सादी धुमधामसे करवा रहे हे.. क्युकी हमारे ज्यादातर गांव वालोने इस बदलावको स्वीकार करलीया हे..

लखन : (मुस्कुराते) फीरोजभाइ.. सीर्फ भाइ बहेनही नही.. ओर भी रीस्तोमे सादीया हो रही हे.. जो विधवा ओर त्यक्ता हे.. सीर्फ हमारे गांवमे नही.. आजु बाजु बहुत गांवमे अ‍ैसे रीस्ते सामने आ रहे हे.. ओर अब आपको यहा सहेरमे भी अ‍ैसा बहुत कुछ दिखनेको मीलेगा.. तो इसमे कादीरभाइ ओर सायरादीदी की क्या गलती हे..? जोभी कुछ हो रहा हे वो उनकी वजहसे नही सब प्रकृतीके बदलावकी वजहसे हो रहा हे..

सलमा : (सरमाते धीरेसे) हां देवरजी.. सीर्फ बहेन भाइ ही नही.. कोइ अपनी विधवा बुआसे तो कोइ अपनी विधवा भाभीसे यहा तक की अ‍ेक दो तो अपनी विधवा ताइ या चाचीसे भी सादी कर रहे हे.. बस.. अब आप भी अ‍ेक बार उन दोनोको माफ कर दीजीये..

फीरोज : (आस्चर्यसे) भाभी..? ये आप केह रही हे..? चलो सादीका तो मे मान भी लु.. लेकीन आपको पता हे वो मेरी सबानाका सभी सपना अपने पैरो तले रोंदते चला गया.. हमे उनसे कीतनी उमीद थी.. सोचाथा अब वो इन्जीनीयर बनके अच्छी जोबपे लग गया हे.. तो मेरी सबाना अब डोक्टर बन जायेगी.. लेकीन उसने हम सबका सपना तोडके चकना चुर कर दीया.. अब मे मेरी बेटीको कैसे पढाउगा..?

साहील : (मुस्कुराते धीरेसे) चाचा.. माफ कीजीये.. छोटा मुह बडी बात केह रहा हु.. अभी आपका छोटा बेटा जीन्दा हे..? सबाना दीदीका डोक्टर बननेका सपना सीर्फ आपका नही मेरा भी हे.. उनके सभी सपने मे पुरा करुगा.. आजसे उनकी सारी पढाइकी जीम्वेवारी मेरी..

इतना सुनतेही फीरोजके घरके सभी सदस्य साहीलके सामने मुह फाडकर आस्चर्यसे देखने लगे.. क्युकी साहीलने वाकइ फीरोजके लीये बहुत बडी बाते कहेदी थी.. उनको उमीद नही थी.. की साहील उनकी इतनी बडी हिंमत करते मदद की पहेरवी करेगा.. क्युकी उनको पताथा की साहील अकेला खेती बाडी देखता हे.. जो उनकी खेती बहुत ही छोटी थी.. ओर साहीलकी बात सुनकर सबाना भी सोक्ट होते साहीलकी ओर मुह फाडकर आस्चर्यसे देखती रही..
 
फीरोज : (आस्चर्यसे देखते) साहील बेटा.. मे तेरे जजबातोको समजता हु.. तुमने जोसमे आकर बहुत बडी बात कहेदी.. लेकीन तुजे पता हे सबानाकी पढाइमे कीतना खर्चा हे..? ये अ‍ेकही सालमे बाराह से तेरा लाख रुपयेका खर्चा हे.. जो अगले महिने ही देने हे.. इतनी बडी रकम तुम हमारी थोडी सी खेतीसे कहासे नीकालोगे..? मुजे भी पता हे इतनीसी खेतीमे तुम अपना खर्चा भी मुस्कीलसे नीकालते होगे..

साहील : (मुस्कुराते) चाचा.. मे जोसमे आकर नही.. ये बात मे होंसमे रहेकर बोल रहा हु.. जब अब्बा गुजर गयेनां.. तब मे खेतीके बारेमे इतना नही जानता था.. हमारे पास जोभी जमीन थी.. उसीमे महेनत करने लगा.. इसके लीये लखन भैयाके बडे भाइ यानीकी हमारे बडे ठाकुर साहबने मेरी बहुत मददकी..

सब उन्हीकी सलाहके अनुसार मे काम करता गया.. की कब कोनसी फसल उगानी हे.. ओर कब बेचनी हे.. मे हमारी सारी फसल उनकोही बेचता हु.. ओर जोभी पैसा आता था.. उनमेसे खर्चा नीकालकर आधा आधा अलग रख देता था..

सलमा : (मुस्कुराते) हां देवरजी.. मेरा साहील कहेताथा.. की इन जमीनमे चाचुकाभी बरोबरका हीस्सा हे.. तो आधा पैसा चाचाका हे.. वो आधा पैसा नीकालकर अलगसे जमा करता था.. कहेताथा चाचाका पैसा हमारे पास अ‍ेकठा करेगे.. जब कादीरभाइ या सायरा दीदीकी सादी होगी तब हम इन पैसोको चाचाको दे देगे.. ताकी उनको बहारसे कभी कर्जा ना लेना पडे.. इसीलीये आपका हीस्सा अलग रखता हे..

साहील : (मुस्कुराते) हां चाचु.. लेकीन देखो.. उपरवालेको कुछ ओर ही मंजुर था.. अब इन पैसोसे आप सबाना दीदीको पढा सकते हो.. मे यहा पैसा लेकर ही आया हु..

फीरोज : (इमोस्नल होते आंसु बहाते) मेरा साहील बेटा कीतना समजदार हे.. बेटा.. तुमने मेरे बारेमे इतना सोचा वोही मेरे लीये काफी हे.. मेतो वो जमीन भुल ही चुका हु.. फीर भी इतनीसी जमीनमे तुमने कीतना पैसा जमा कीया होगा..? मुस्कीलसे तेरे घरका खर्चा भी सायद नीकलता होगा.. बेटा.. बाराह लाख रुपीये कोइ छोटी मोटी रकम नही हे..

साहील : (मुस्कुराते) चाचु.. मे सब हीसाब करके लाया हु.. अभी तक ये चार सालके आपके हीस्सेका मेरे पास तकरीबन साडे आठ लाख रुपीये पडे हे.. ओर मेरे हीस्सेमे घरका खर्चा नीकालते भी साडे चार लाख रुपीये जमा कीये हे.. अभी मेने मेरे लीये धानका बीज ओर दुसरे खर्चेके लीये अ‍ेक लाख रुपीये रखे हे.. तो ये लीजीये अभी बाराह लाख रुपये लेकर ही आया हु.. आप भरदीजीये सबाना दीदीकी फीस..

कहेते साहीलने सलमाके पास रखे बाराह लाख रुपीये लेकर फीरोजके हाथोमे थमा दीया.. तब फीरोज अपना चहेरा होथोमे छुपाते फुटफुटके रोने लगा.. तो जरीना ओर सबाना मुह फाडते आस्चर्यसे साहीलकी ओर देखते रहे.. तीनोकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. फीरोज खडा होकर साहीलको जोरोसे अपने गले लगा लेता हे.. ओर रोने लगता हे.. तब जरीना भी खुसीके मारे रोने लगी.. तो सबाना भी खुसीके मारे सलमाको लीपटकर रोये ही जा रही थी..

तब सलमा साहील ओर लखन तीनोको खुस देखकर हसते रहे.. तभी लखन खडा होकर फीरोजको सम्हालता हे.. ओर उसे सोफेपे बीठाकर कीचनमे चला गया.. ओर तीनोके लीये पानी लेकर आया.. ओर सबको पानी पीलाया.. तब जरीना ओर सबाना बहुत ही सर्मन्दा हो गइ.. ओर सबाना फटाफट अपने आंसु पोछते मुस्कुराने लगी.. ओर खाली ग्लास लेकर कीचनमे चली गइ.. ओर रखकर वापस आकर सलमाके पास बैठ गइ.. तब फीरोज ओर जरीना भी अपने आंसु पोछते मुस्कुराने लगे.. ओर सब लोग वापस सोफेपे बैठ गये.. तभी..
 
जरीना : (सरमाते हसते) देवरजी.. आपने पानी लानेकी क्यु तकलीफ की..? सबाना लेआती..

लखन : (हसते) भाभी.. इसमे तकलीफ काहेकी.. मे थोडीना यहा महेमान हु.. ये मेरा ही घर हे..(फीरोजकी ओर देखते) क्यु फीरोजभाइ.. कैसी रही हमारे साहीलकी सरप्राइज.. हें..हें..हें..

फीरोज : (हाथ जोडते हसते) छोटे ठाकुर.. हमारी खुसीको मे बया नही कर सकता.. आज मुजे मेरे साहीलपे बडा फर्क हो रहा हे.. जो सही मायनोमे मेरा बेटा होकर अपना फर्ज नीभाते मेरे साथ कंधेसे कंधा मीलाकर खडा हे..

लखन : (हसते) फीरोजभाइ.. प्लीज.. आप मुजे ठाकुर मत कहीये.. मेभी आपके छोटेभाइके समान हु.. मुजे नाम लेकर बुलाइअ‍े अच्छा लगेगा.. हें..हें..हें..

फीरोज : (जटसे हसते) ठीक हे गलती होगइ.. आप हमारे राजा हे.. हम आज भी आपको हमारे राजा मानते हे.. ओर आपने अ‍ेक राजा होनेका फर्ज भी हमारी जमीन वापस देकर नीभाया हे.. हम सब आपको नत मस्तक हे..

लखन : (हसते) अच्छा..? अगर आप हमे राजा मानते हे.. तो फीर हमारी बात तो मानते नही.. हें..हें..हें..

फीरोन : (हसते) अरे.. हमने आपकी कौनसी बात नही मानी..? हें..हें..हें.. आपकी सब बाते हमारे सर आंखोपे.. हम आज भी आपको मानते हे.. अभी आपने हमारे गांवमे जोभी बदलावकी बाते की.. वोभी हमने मानलीया हे.. तो फीर दुसरी बात क्यु नही मानेगे..?

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा..? तो फीर आप मेरी दो बाते मानेगे..? मुजे आपसे कुछ पुछना हे..

फीरोज : (हसते) अरे.. जरुर मानेगे.. आप जोभी पुछना चाहो पुछ सकते हे.. कहीये.. क्या पुछना हे..?

लखन : (मुस्कुराते) पहेले तो आप कादीरभाइ ओर सायरा दीदीको माफ कर दीजीये.. ओर उनको वापस बुला लीजीये.. ओर दुसरा.. आपने हमारे गांवको क्यु छोड दीया था..?

फीरोज : (मुस्कुराते) अब क्या करे..? आप तो सब जानते थे.. तब हम लोग कर्जमे पुरी तराह डुबे हुअ‍े थे.. ओर हमारे पास हमारी जमीन भी नही रही थी.. ओर मेरा परीवार भी बडा था.. मेरे चार चार बच्चे थे.. तो मे सबको कहासे खाना खीलाउ..? ओर सब बच्चोकी पढाइकी जीम्वेवारी भी थी..

तो बडे भैयाका ओर भाभीका भी संतानका इस्यु था.. तो उसने मेरे साहीलको गोद लेलीया.. ओर मे इधर सहेरमे परीवारको लेकर कमाने आगया.. ओर वैसे भी वहा थोडीसी जमीन बची थी.. तो भाइ ओर भाभीका भी उनमे मुस्कीलसे गुजारा होता था.. तो इतनी सी जमीनमे हम दोनो भाइ सबका पेट कहासे भरपाते..

लखन : (मुस्कुराते) फीरोजभाइ.. क्या आपको पता हे.. आप जीसे जरासी जमीन केह रहे हे.. उस जमीनपे आपका भी हीस्सा हेनां..?

फीरोज : (आंख गीली करते) नही भाइ.. मे इस जमीनको भुल चुका हु.. वो तो अब मेरे साहीलकी जमीन हे.. इस बेचारेको तो मे पढा भी नही सका.. भले ही बडे भाइने इस गोद लीया.. लेकीन हेतो मेरा ही खुन.. इतनीसी जमीनमे इनका भी मुस्कीलसे गुजारा होता होगा.. तो मे मेरा हीस्सा लेकर क्या करुगा..?

लखन : (हसते) फीरोजभाइ.. भले ही साहील आपका खुन हो.. लेकीन करीमभाइने उसे बाकायदा गोद लीया हे.. अब साहील कायदेसे करीमभाइका लडका हे.. तो साहीलपे आपका अब कोइ हक नही हे.. ओर ये मत भुलना साहील आप मीया बीवीको चाचा चाची कहेकर बुलाता हे.. हें..हें..हें.. ओर सबाना उनकी सगी बहेन नही.. उनके चाचाकी लडकी हे.. हें..हें..हें..

फीरोज : (सरमाते हसते) अरे हां बाबा हां.. मुजे कायदाका सब पता हे.. मे साहीलको मेरे बडे भाइका लडका ही मानता हु.. लेकीन साहील मेरे बेटेसे भी बढकर हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) फीरोजभाइ.. आपने अभी अभी देखानां..? आप जीसे इतनीसी जमीन केह रहे हेनां..? वो इतनी सी जमीनमे ये चार सालोमे साहीलने तकरीबन बीस लाख रुपीये कमालीये हे.. जीसका खर्च नीकालते आधा हीस्सा अभी साहीलने आपको दीया.. मत भुलो.. वो भी अ‍ेक चोथाइ जमीनके हीस्सेसे..

अभी आपको जो जमीन वापस मीली हे वो इनसे तीन गुना बडी हे.. जो अभी बंजर पडी हे.. तो सोचो.. अगर सभी जमीनपे आप फसल उगाओगे.. तो कीतना पैसा आ सकता हे..? क्या आप इतना पैसा अपनी फेक्टरीमे काम करके कमा सकते हो..?

फीरोज : (मुस्कुराते) नही.. कभी नही कमा सकता.. लेकीन आप कहेना क्या चाहते हो..? हें..हें..हें.. मुजे लगता हे आप कुछ ओर बात ही कहेने आये हे.. हें..हें..हें..

जब लखन ओर फीरोज बाते कर रहेथे तब बाकीके सभी लोग दोनोकी बाते बडेही गौरसे सुन रहे थे.. तब साहील ओर सलमा मुस्कुराते लखनकी ओर देख रहेथे.. क्युकी लखन बाते करते करते बडी ही सीफततासे फीरोजको अपने गांव वापीस आनेके लीये मना रहा था.. तो आज सबानाके दिलमे भी साहीलके लीये इजत ओर बढ गइ थी.. भले ही साहील उनसे छोटा था.. लेकीन सबाना साहीलको बहुतही मेच्योर ओर समजदार मानने लगी थी.. तभी..
 
लखन : (मुस्कुराते) फीरोजभाइ.. कहेना कुछ नही.. बस इतना कहेना हे आप फेक्टरीकी नोकरी छोड दीजीये.. ओर आप सबलोग गांव वापस आजाइअ‍े.. आकर अपनी बाकी जमीनको सही करके आप ओर साहील उनमे महेनत कीजीये.. फीर देखीये.. जीतना पैसा साहीलने इन चार सालोमे कमाया हे इतना ही पैसा आप अ‍ेक सालमे कमा लेगे.. ये मेरी गेरेन्टी हे.. कहोतो मे आपको लीखकर दे सकता हु.. हें..हें..हें..

फीरोज : (कुछ सोचते) लखनभैया.. बात.. तो.. आपकी सोला आनी सही हे.. ये हो सकता हे.. ओर वैसे भी अब कादीर ओर सायराकी वजहसे वहा रहेनेका मन भी नही करता.. बस.. अभी सीर्फ सबानाकी पढाइकी चीन्ता हे.. जबतक वो पढनेके लीये बेंगलोर नही चली जाती तबतक तो हमे यही रहेना पडेगा..

सलमा : (सरमाते हसते) देवरजी.. छोडीये सबानाकी चीन्ता.. अब तो वो दो साल बेंगलोर पढने जा रही हे.. तो यहा अब हे भी कौन.. सीर्फ आप ओर जरीना तो हे.. ओर वहा गांवमे भी जबसे आप लोग चले गये हो.. तबसे हमारा पुरा घर खाली पडा हे.. हमने सभी कमरोमे ताला लगाकर रखा हे.. बस.. सीर्फ सफाइ करने ही खोलते हे.. आप सब आजाइअ‍े..

जरीना : (सरमाते धीरेसे) सुनीयेजी.. दीदी ठीक केह रही हे.. अब हम इस घरको बेच देगे.. हम गांव चले जायेगे.. ओर इस घरका पैसा आये.. तो आप मेरे साहीलको इनके पैसे लौटा दीजीयेगा.. हें..हें..हें..

साहील : (मुस्कुराते) नही चाची.. मेने ये पैसे कोइ कर्जेमे नही दीया.. आपका था.. जो आपको लौटा दीया हे.. ओर वैसे भी आप सब लोग मेरेही तो हो.. तो क्या तेरा..? ओर क्या मेरा..? सब हमाराही तो हे..

जरीना : (मुस्कुराते) मेरे बेटेने कीतनी बडी बात कहेदी.. साहील बेटा.. फीर भी हमारा तो सीर्फ साडे आठ लाख रुपीया था तो फीर बाकीका..? हें..हें..हें..

साहील : (थोडी उची आवाजेमे) अरे बाबा नही चाहीये मुजे पैसे.. अ‍ेक बार बोल तो दीया.. क्या अगले साल सबाना दीदीकी फीस नही भरनी..? ये मत भुलो ये सीर्फ अ‍ेक सालकी फीस हे.. (फीरोजको) चाचु.. मेरी आपसे अ‍ेक गुजारीस हे.. क्या आप मेरी बात मानोगे..?

फीरोज : (मुस्कुराते) हां साहील बेटा.. बोलो.. तुम क्या कहेना चाहते हो..?

साहील : चाचा.. आप ये मकान मत बेचीये.. आप इस मकानको कादीरभाइ ओर सायरा दीदीको दे दीजीये.. ओर उनको माफ कर दीजीये.. अब जोभी होना था होगया.. भुल जाइअ‍े सब.. उनको ढुढकर कहीये यहा रहेने आजाये.. आखीर वो दोनो भी तो हमारे ही हे..

सलमा : हां देरवजी.. मेरा साहील ठीक केह रहा हे..

फीरोज : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. जैसा आपको ठीक लगे.. हम भी कब तक उनसे नाराज रहेगे..? आखीर वोभी तो हमारा ही खुन हे.. वैसे भी आपलोग इतने सारे बदलावकी बात कर रहे हो.. तो अब हमे उन दोनोकी सादीसे कोइ अ‍ेतराज नही.. लेकीन याद रखना.. अब मे इनको मेरे साथ कभी नही रहेने दुगा..

लखन : (मु्सकुराते) ओर हां फीरोजभाइ.. आप सबानाकी अगले सालकी फीसकी भी चीन्ता मत करना.. वो मेने ओर साहीलने सब तैय करलीया हे.. बस.. आप हमारे हीसाबसे चलीये.. ओर अपना बोरीया बीस्तर बांधीये.. हें..हें..हें..

साहील : (जोरोसे हसते सबानाको) दीदी.. देखना.. वहासे डोक्टर बनके ही आना.. कही गांवमे मेरी इजतका फालुदा मत करना.. हें..हें..हें..

सबाना : (सब लोग जोरोसे हसने लगे.. तब सबाना सर्मसार होते हसते) जी भाइजान.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) अरे हां सबाना.. तुम्हारे लीये अ‍ेक ओर सरप्राइज हे.. तुम अ‍ेक बार मेरी भाभीको मील लेना.. उनसे बात होगइ हे.. वो तुमको मीलना चाहती हे.. वोभी यहा गायनेक डोक्टर हे.. ओर उन्होने भी बेंगलोरसे गायनेक फाइनल कीया हे.. तो वो तुमको कुछ सजेस करना चाहती हे..

सबाना : (खुस होते हसते) जी लखनभैया.. मे पहेचाहनती हु उसे.. वोहीना.. जीन्होने हमारी जमीनके कागजात पापाको अपने हाथोसे दीये थे..? क्या उनकी सादी बडे ठाकुर साहब से होगइ..?

साहील : (मुस्कुराते) हां दीदी.. हम अभी अभी इनको क्लीनीकपे छोडके आये हे.. ओर बडेभैया अब गांवमे अ‍ेक स्कुल ओर बडी होस्पीटल बनवा रहे हे.. जहा सब बीमारीका इलाज होगा..

लखन : (मु्कुराते) सबाना.. अब तो तुम मीठाइ मंगवा ही लो.. क्युकी तुम्हारी नोकरी भी पकी हो गइ हे.. हें..हें..हें..

फीरोज : (आस्चर्यसे हसते) नोकरी..? लेकीन ये तो अभी डोक्टर भी नही हुइ.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) फीरोजभाइ.. जब सबाना डोक्टर बनकर आयेगी.. तब हमारी ही होस्पीटलमे इनको गायनेक डोक्टरकी नोकरी मील जायेगी.. ओर गायनेक का पुरा डीपार्टमेन्ट सबाना चलायेगी.. ताकी आपको खुदकी होस्पीटलके लीये खर्चा करनेकी जरुरत ही नही.. हें..हें..हें..

सबाना : (खुस होकर हसते) पापा.. तब तो मे हमारे ही गांवमे रहेकर डोक्टरी करुगी.. बहुत मजा आयेगा.. हें..हें..हें..

सबलोग सबानाकी बात सुनकर जोरोसे हसने लगे.. तो सबाना बहुत सरमा गइ.. फीर सब आपसमे खुलकर बाते करने लगे.. तब सबाना सबकी नजर बचाते अपने होठ हीलाकर बार बार साहीलको थेन्क्यु केह रही थी.. तो साहील भी सबानाको आंखोके इसारोसे सबके होनेका अहेसास दीला रहा था ओर इस बारेमे बादमे बात करनेको इसारा कर रहा था.. तभी लखनके फोनपे बंसीका फोन आगया..

जो सब लोग सादीकी खरीदी कर रहेथे.. तब साहीलने लखनसे फोन लेकर बंसीसे बात करली.. ओर सबको खानेके लीये इधर ही बुलालीया.. तब बातो ही बातोमे साहीलने सबको गांवके बारेमे बता दीया.. की कीस कीस की सादी होगइ.. ओर कीसीकी सादी होने वाली हे.. तब सबाना साहीलकी सभी बाते गोरसे सुन रही थी.. उनको आज साहीलपे बहुत प्यार आ रहा था.. तभी..
 
जरीना : (सरमाते धीरेसे) सुनीयेजी.. हमारे गांवसे ओर लोग भी इधर आ रहे हे.. तो आप कुछ मीठाइया लेआइअ‍ेनां.. तब तक मे ओर दीदी खाना बना लेते हे.. सबाना.. अगर तुमको पढने बैठना हे तो अंदर जाकर पढलो..

फीरोज : (खडा होकर चलते) जी.. अभी लेकर आता हु.. कुछ ओर लेना हे..?

जरीना : नही.. सब्जीया पडी हे.. अभी बन जायेगी.. आप सीर्फ मीडाइआ लेकर आइये..

साहील : (जब फीरोज चला गया तब मुस्कुराते) चाची.. अभी खाना खाकर ये लोग सोपींगके लीये जा रहे हे.. तो सोचा मे भी सबाना दीदीको लेकर लखन भैयाके साथ चला जाता हु.. अब दीदी बेंगलोर जा रही हे.. तो इनके लीये भी कुछ कपडे बपडे लेना हे.. तो इनकी भी सोपींग होजायेगी..

जरीना : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. साहीलबेटा.. इनके पास कपडेतो हे.. तो फीर क्यु खामखा खर्चा करना..

सलमा : (सबानाकी ओर मुस्कुराते) अरी जानेदे.. क्यु मना कर रही हे..? अगर मेरा साहील इनको कपडे दीलवा रहा हेतो क्या दीकत हे..? हें..हें..हें.. वैसे भी सबाना इनकी चहीती दीदी हे.. दोनोमे खुब पटती हे.. हें..हें..हें.. चल तु रसोइमे.. मेभी आ रही हु.. मुजे तुमसे कुछ जरुरी बाते भी करनी हे..

साहील : (मुस्कुराते सामने देखकर) दीदी.. थोडी देर पढलो.. फीर खाना खाकर तैयार होजाना.. आपको मेरे साथ चलना हे..

कहेते सबाना सरमाते हुअ‍े लखन ओर साहीलकी ओर मुस्कुराते अपने रुममे चली गइ.. तो जरीना ओर सलमा भी कीचनमे जाकर खानेकी तैयारीया करने लगी.. तब साहील ओर लखन भी धीरे धीरे आपसमे बाते करने लगे.. तब सबाना अपनी कीताब लेकर पढनेके लीये बैठ गइ.. लेकीन पता नही आज उनका पढाइमे मन नही लग रहा था.. उनको बार बार लखन ओर साहीलके पेन्टके तंबु दीख रहे थे.. तब मनमे..

सबाना : (सरमाते मनमे) बापरे.. लखनभैयाका कीतना बडा दीख रहा था.. ओर आज साहील भाइने भी हद करदी.. मुजे गले मीले तब उनका कैसे मेरी मुनीयापे चुभ रहा था.. उनका भी पेन्टमे कीतना बडा उभार था.. क्या मुजे गले मीलकर अ‍ैसा हो गया था..? आज मुजे सोपींगपे भी लेजायेगे.. मेरे लीये कीतना खर्चा कर रहे हे.. पुरेके पुरे बाराह लाख अ‍ेक ही जटकेमे देदीये.. उनके भी पैसे मेरी पढाइमे दे रहे हे.. कास अ‍ैसा ही समजदार पती मुजे मील जाये.. कादीरभाइ ओर सायरा दीदीने भाइ बहेन होकर भी सादी करली..

ओर अभी सबलोगने उनकी सादीको मान भी लीया.. तो फीर.. क्या मेभी साहीलभाइसे सादी नही कर सकती..? वो कीतना मेच्योर हो गये हे.. सबकी जीम्वेवारी नीभाते हे.. कास.. मे साहील भाइसे सादी कर सकती.. नही नही.. मे येसब नही कर सकती.. वो भाइ हे मेरे.. लेकीन अभी तो बहार सब केह रहेथे.. की गांवमे अब रीस्तोमे बदलाव होने लगे हे.. तभी तो पापाने बडे भैया ओर बडी दीदीकी सादीको अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे..

तो फीर मे साहील भाइसे क्यु सादी नही कर सकती..? जो भी हो.. मे इस बारेमे मेरी पढाइके बाद सोचुगी.. अगर अ‍ैसा होता हे तो मे साहील भाइसे ही सादी करलुगी.. बापरे.. साहील भाइका ओर लखन भैयाका पेन्टके अंदर ही कीतना बडा दीख रहा हे..? अगर रीयल देखनेको मीला तो कीतना बडा होगा..? ये तो सादी सुधा ओरतकी भी चीखे नीकलवा देगे.. तो हम जैसी लडकीयोकी क्या हालत करेगे..?

सबाना यही सब सोचते अपनी कीताब देख रही थी.. आज वो पहेली बार साहीलके बारेमे इतना सोच रही थी.. तो दुसरी ओर आज साहीलके दिलमे भी पहेली बार सबानाको लेकर कुछ अलग ही फीलींग्स आ रही थी.. जबसे साहीलने सबानाके दोनो उरोजोको अपने सीनेपे फील कीया.. तबसे उनका भी दिल मचल रहा था.. लेकीन अभी अपने दिलकी फीलींग्सके बारेमे वो कीसीको भी बताना नही चाहता था.. क्युकी सबाना बहुत ही पढी लीखी लडकी थी.. ओर अबतो डोक्टर बनने वाली थी..
 
तो दुसरी ओर साहील ओर सबानाकी बात आज सुबह सलमा जब साहीलको लेकर लखनके साथ गांवसे नीकली.. तब उनके दिमागमे चल रही थी.. ओर उसने आज जरीनाको इस बारेमे बात करनेका फैसला भी करलीया था.. अ‍ेक तो सुरुसेही सबानाकी सलमाके ओर साहीलके साथ अच्छी पटती थी.. सबाना भी जब भी वेकेसन होता या अ‍ेक्जामकी वजहसे पढनेकी छुटी होती तब गांवमे सलमाके पास ही चली जाती थी..

जब कादीर अपनी बडी बहेन सायराको लेकर भाग गया.. तब सबानाके जहेनमे भी साहीलको लेकर बहुत गलत खयाल आने लगे थे.. वो भी मनसे चाहने लगी थी की वो भी साहीलसे सादी करले.. लेकीन अपनी पढाइकी वजहसे सारे गलत खयाल अपने दिमागसे नीकाल दीये.. उनका सीर्फ अ‍ेकही सपना था.. गायनेक डोक्टर बननेका.. तब इस वक्त सलमा ओर जरीना खाना बनाते धीरेसे आपसमे बाते कर रही थी..

सलमा : (सब्जीया काटते धीरेसे) जरीना.. क्या कादीरकी या सायराकी कोइ खबर..? उनको कही ढुंढा नही क्या..? कादीरकी ओफीसमे अ‍ेक बार जाकर देख लेते..

जरीना : (सरमाते धीरेसे) नही दीदी.. हमने उन लोगोको ढुंढनेकी कोसीस ही नही की.. आपके देवरने उनको ढुंढनेके लीये मना कर दीया.. कहेते थे वो अब हमारे लीये मर गये हे.. उन दोनोसे कोइ रीस्ता नही रखना.. वो दोनोसे बहुत नाराज हे..

सलमा : (मुस्कुराते) जरीना छोडनां.. बच्चे हे अ‍ेक बार गलती हो गइ.. अब तो दोनोने नीकाह भी करलीया हे.. तो दोनोको ढुंढकर घरपे बुलालो.. तुजे पता हे..? अभी जो हमारे घरपे साहीलका दोस्त बंसीभाइ आयेगेनां.. वो अपनी विधवा बुआसे सादी कर रहे हे.. उसी सादीकी खरीदी करने यहा आये हे.. ओर ये सादी खुद बंसी भैयाके पीता उनकी बहेनसे कर वा रहे हे..

जरीना : (सामने देखते) दीदी.. ये तो अच्छा हे सब खुलकर अ‍ेक दुसरेकी सहमतीसे कर रहे हे..

सलमा : (मुस्कुराते) हां.. अरी सुननां.. अ‍ेक लडकी ओर उनके साथ हे.. जयश्री नाम हे उनका.. जो साहीलके दुसरे दोस्तकी बहेन हे.. वो भी हमारी सायराकी तराह अपने भाइसे प्यार करती थी.. जो कुछ दिन पहेले ही दोनोने घरसे भागकर कोर्टमे सादी करली.. तो उनके मा बापभी उन दोनोकी सादी अब ताम जामसे कर देना चाहते हे.. वो भी खरीदी करने साथ आइ हे.. जरीना.. अबतो हमे अ‍ैसे रीस्तोसे कोइ आस्चर्य नही होता.. गांवमे सबने अ‍ैसे रीस्तोको स्वीकार करलीया हे..

जरीना : (सामने देखते) दीदी.. मुजेतो कोइ अ‍ेतराज नही.. लेकीन आपके देवर माननेके लीये तैयार नही थे.. येतो आप लोगोने उनसे गांवकी सभी बाते की.. तो मान गये.. उनको मनाना बहुतही मुस्कील था.. पता नही दोनो इस वक्त कहा होगे.. कही सायरा पेटसे हो गइ.. तो उनका सब करेगा कौन..? बस.. मुजे तो सीर्फ यही चीन्ता हे.. कैसे अ‍ेक सादी सुधा ओरतकी तराह होगइ थी..

सलमा : (मुस्कुराते) तब तो दोनोके बीच काफी लंबे अरसेसे (समय) रीलेशन होगे.. जब आपने उन दोनोको पकडा तब आपने उसे पुछा नही की दोनो कीतने समयसे साथ सोते मील रहे थे..

जरीना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. मेने सायराको मेरे रुममे बुलाकर सब कुछ पुछा.. तो कमीनी मुजे बीना डर बेबाकर जवाब देती रही.. कहेती थी मे हाइस्कुलमे पढती थी ओर भाइ कोलेजमे थे तबसे हम दोनो प्यार करते हे.. ओर जब बडे भाइको लिका दौरा पडा.. तब सबाना तो उधर ही आपके पास थी.. मे ओर आपके देवर उघर दो तीन दिनके लीये आये थे.. तब ही उन दोनोने कही जाकर नीकाह करलीया था.. ओर उसी दिन दोनो पहेली बार मीले थे.. बस.. तबसे दोनो हर रात अ‍ेक मीया बीवीकी तराह मीलने लगे..

सलमा : (मुस्कुराते) सायरा तो बडी हिंमत वाली नीकली.. हें..हें..हें.. दोनो पढते थे तबसे ही रीलेशनमे थे तो काफी वक्त दोनो मीलते होगे..

जरीना : (मनमे) दीदी.. अब आपसे क्या बताउ.. हींमत वाली सायरा नही कादीर था.. जो सायरा के साथ साथ उनसे छुपकर उनकी मांको यानी की मुजे भी काफी समयसे ठोकता था.. ये तो अच्छा हुआ मे हर बार आइपील खा लेती थी.. वरना कमीना मुजे भी प्रेगनेन्ट करके चला गया होता.. तो मे सबको क्या मुह दीखाती..?

सलमा : (सरमाते हसते) जरीना.. कहा खो गइ..? मे तुमसे कुछ पुछ रही हु.. दोनो कीतने समयसे मीलते थे..? बताना..

जरीना : (सरमाते हसते) दीदी.. दोनो तबकरीबन चार सालसे मील रहे थे.. ओर कमीनोने हमे उनकी भनक भी नही लगने दी.. जब दोनोको मेने रंगे हाथो पकडा उसी रात दोनो भाग गये.. अच्छा हे मेरी सबाना अ‍ैसी नही हे.. उनको तो बस अपनी पढाइसे ही मतलब हे..

सलमा : (मौका मीलतेही धीरेसे सरमाते) जरीना.. अगर तुम बुरा ना मानोतो तुमसे अ‍ेक बात कहु..?

जरीना : (मुस्कुराते) दीदी.. अब आपकी बातसे क्या बुरा मानना.. आप थोडी पराइ हे.. आप जोभी कहोगी हमारी भलाइ के लीयेही कहोगी.. कहीये.. क्या कहेना चाहती हे..
 
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