Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 46 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

सलमा : (सरमाते धीरेसे) जरीना.. अब तुजे सब कैसे कहु..? तुम बुरा मत मानना.. क्युकी बात अभीकी नही हे.. जब हमारी सबाना पढ लीखकर वापस आजाये तबकी हे.. मेने हमारी सबानाके लीये अ‍ेक रीस्ता ढुंढ लीया हे.. ओर अभी इस बातको सीर्फ हम दोनोके बीच ही रखना हे.. क्युकी तब पता नही सबाना डोक्टर बन जायेगी.. तब वो क्या सोचती हे.. हो सकता हे वो कीसी डोक्टरसे भी सादी करले..

जरीना : (धीरेसे सामने देखकर) नही दीदी.. मेरी सबाना अ‍ैसी नही हे.. उनको अपनी पढाइका कोइ धमंड नही हे.. मुजे भी कहेती थी मे सादी हमारी बीरादरीमे ही करुगी.. ओर वोभी वहा.. जहा आप ओर पापा तैय करोगे.. तो दीदी अगर लडका आपने ढुंढा हेतो अच्छा ही होगा.. बताइअ‍ेना कौन हे वो लडका..?

सलमा : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) जरीना.. लेकीन अ‍ेक प्रोबलेम हे.. वो लडका इतना पढा लीखा नही हे..

जरीना : (फीकी मुस्कानसे) दीदी.. पढाइ लीखाइसे क्या होता हे..? संस्कार भी तो होना चाहीये.. हमने कादीर ओर सायराको भी पढाया था.. क्या नतीजा नीकला..? कमीने दोनोही हमारी इजत मीटीमे मीलाकर हमे छोडकर भाग गये.. हमारी तो छोडो मेरी बेचारी सबानाका भी सभी सपना तोडके गये.. ओर अ‍ेक ये हमारा साहील..

भले ही थोडा कम पढा लीखा हे.. लेकीन सबानाकी पढाइके लीये इसने अपनी सारी जमा पुंजी हमे देदी.. तो कौन अच्छा हुआ..? दीदी.. भले ही वो कम पढा लीखा हो.. बस.. हमारे साहीलकी तराह संस्कारी होना चाहीये.. बाकी हम जहा कहेगे हमारी सबाना वही सादी कर लेगी.. कहीये.. वो लडका कौन हे..?

सलमा : (सरमाते धीरेसे) जरीना.. बुरा मत मानना.. वो लडका खुद हमारा साहील हे.. क्या मेरे साहीलके लीये तुम मुजे सबानाका हाथ दे सकती हो..? वोभी उनकी पढाइके बाद.. ओर ये बात अभी सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगी..

जरीना : (सोक्ट होते सामने देखते) दीदी.. क्या केह रही हो आप..? हमारा सा..ही..ल.. आपको भी पता हे वो ओर सबाना दोनो सगे भाइ बहेन हे.. अ‍ेक भाइ बहेन तो हमारी नाक काटकर चले गये.. इसके लीये आपके देवर कभी नही मानेगे..

सलमा : (मुस्कुराते धीरेसे) जरीना.. मेरे देवरको अभी कुछ मत कहेना.. उनको हम सबाना पढकर वापस आयेगी तब बात करेगे.. मुजे सीर्फ तेरी राय जाननी हे.. ओर साहील अब मेरा बेटा हे.. तेरा नही.. देवरजी उनके चाचा हे.. तो चाचाकी लडकीसे सादी करनेमे कोइ बुराइ नही.. अ‍ेक बार सोचले.. अगर तुम मुजे मना करोगी तो भी मुजे बुरा नही लगेगा.. बस.. मेने तो अभी मेरे मनकी बात तुजे कहेदी..

जरीना : (आंख गीली करते) दीदी.. आप भी तो इनके चाचाकी लडकी थी.. आपकी बात सही हे.. साहीलकी सादी सबानाके साथ हो सकती हे.. अगर अ‍ैसा हुआ.. तो मे ओर सबाना इस दुनीयाकी सबसे खुस नसीब ओरत होगी.. मेरे साहील जैसा लडका उनको कहा मीलेगा..? दीदी.. मुजे इस रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही.. बस.. अब आपको देवरको देखना हे.. की वो क्या कहेते हे..

सलमा : (खुसीके मारे जरीनाको गले लगाते) जरीना.. थेन्क्यु.. मुजे तुमसे यही उमीद थी.. लेकीन इस बातको हमे सबसे छुपानी हे.. खास करके साहील ओर सबानासे वरना सबानाका ध्यान पढाइके अलावा कही ओर भटक जायेगा.. ओर ये मे कतइ नही चाहती.. ओर रही बात देवरसे बात करनेकी.. तो वो हमारे बडे ठाकुरजी इनसे बात करलेगे.. वो उनकी बात कभी नही टालेगे..

जरीना : (अलग होते अपने आंसु पोछकर मुस्कुराते) दीदी.. अगर अ‍ैसा होता हे तो बहुत ही अच्छा हे.. लगता हे आज पुरा दिन खुसीयोका हे.. अ‍ेक के बाद अ‍ेक खुसीया मील रही हे.. मुजे ये रीस्ता मंजुर हे.. बस.. मेरी सबानाकी पढाइ तक रुक जाइअ‍े..

दोनोही खाना बनाते बाते करती रही.. तब फीरोज भी मीठाइ लेकर आगया.. तो कुछ ही देरके बाद बंसीका फोन साहीलके फोनपे आगया ओर वो घरका अ‍ेड्रेस पुंछने लगा.. तब साहील फीरोजकी बाइक लेकर उनको रोडपे लेने चला गया.. ओर लखन ओर फीरोज बाते करने लगे.. तब कुछ ही देरमे साहील सबको लेकर घरपे आगया.. तो बंसी आते ही फीरोजके पांव छुकर लखन ओर साहीलको गले लग गया..

तो आज सांतीने सारी पहेनी थी.. जागृती ओर जयश्री सरमाते फीरोजको हाथ जोडकर नमस्ते करने लगी.. तो आवाज सुनकर जरीना सलमा ओर सबाना भी बहार नीकल गइ.. ओर सबको गले मीलने लगी.. तब सबाना सांती जयश्री ओर जागृतीको देखते ही उनके गले लग गइ.. फीर तीनोको लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर उनके साथ हस हसके बाते करने लगी.. तब सलमाने बहारसे ही जरीनाको सांती जागृती ओर जयश्रीका परीचय करवाया..

तब जरीना सांती ओर जयश्री जागृतीको मीली.. ओर उनसे हस हसके बाते करने लगी.. जयश्रीने अपनी मांगमे सींदुर लगाया था.. तब बहार बंसी भी फीरोजको पहेचानता था.. तो वोभी फीरोजके साथ गांवकी बाते करने लगा.. ओर फीरोजको वापस गांवमे आनेके लीये कहेने लगा.. जब खाना बन गया तब सबलोग अ‍ेक साथ खाना खाने बैठ गये.. तब सलमा ओर जरीना सबको खाना परोसने लगी.. ओर सबने बाते करते खाना खालीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १८७

तब जरीना सांती ओर जयश्री जागृतीको मीली.. ओर उनसे हस हसके बाते करने लगी.. जयश्रीने अपनी मांगमे सींदुर लगाया था.. तब बहार बंसी भी फीरोजको पहेचानता था.. तो वोभी फीरोजके साथ गांवकी बाते करने लगा.. ओर फीरोजको वापस गांवमे आनेके लीये कहेने लगा.. जब खाना बन गया तब सबलोग अ‍ेक साथ खाना खाने बैठ गये.. तब सलमा ओर जरीना सबको खाना परोसने लगी.. ओर सबने बाते करते खाना खालीया....अब आगे

जब इधर सब खाना खा रहेथे तब गांवमे आज चारुने भी मंजुको सुधीरके बारेमे सब बाते बतादी.. ओर देवायतके उनके साथ खानेकी बात करली.. तो दो पहोरको सुधीर ओर देवायत वापस सुधीरके घरपे आगये.. ओर चारोने मीलकर खाना खालीया.. तब सुधीर ओर देवायत बाते करते रहे तब चारु ओर नीशाने सब काम नीपटा लीया.. फीर वो दोनो भी थोडी देर देवायत सुधीरसे बाते करती रही..

तब चारु बार बार देवायतको रुममे आनेका इसारा करती रही.. तभी सुधीर थोडी देर आराम करनेका बहाना बनाकर अपने रुममे चला गया.. ताकी वो देवायत नीशा ओर चारुको अकेले मीलनेका मौका दे सके.. तब नीशाने घरका दरवाजा बंध करलीया ओर देवायतका हाथ पकडकर अपने रुममे चली गइ.. तो चारु भी हसते हुअ‍े उनके साथ रुममे घुस गइ.. ओर रुमका दरवाजा भी बंध करदीया..

देवायत : (हसते) नीशा.. क्या कर रही हो..? अंदर सुधीर हे.. हें..हें..हें..

नीशा : (हीते) पता हे मुजे.. इसीलीये तो आज आपको खानेके लीये इधर रोक लीया हे.. ताकी हम आपसे अच्छेसे मील सके.. अबतो हम आपको दस बाराह दिनके बाद ही मीलेगी.. तो सुधीरने ही हमे आपको मीलनेके लीये कहा हे.. हें..हें..हें..

चारु : (हसते अपने कपडे नीकालते) हां देवु.. अब तो सुधीर भैयाको भी हमारे बारेमे सब कुछ पता हे.. तो अब बीन्दास्त अपनी दोनो बीवीओको खुस करदो.. ताकी हमारे दस दिनकी सारी कशर पुरी होजाये..





नीशा : (सरमाकर अपने कपडे नीकालते) हां देवु.. अब तो आप ही हमारे पती हो.. आप भी अपने कपडे नीकाल दीजीये.. अब साम तक हमारे पास वक्त ही वक्त हे.. आइअ‍े हम दोनो बीवीको आज संतुस्ट कर दीजीये..

कहेते नीशा ओर चारु पुरी तराह नंगी होगइ.. ओर बेडपे आ गइ.. तब चारुनेभी देवायतको हाथ पकडकर बेडपे खीच लीया.. तो नीशा अपने दोनो पैर फैलाकर बेडपे पीठके बल लैट गइ.. ओर सरमाते कामुक नजरोसे देवायतकी ओर देखते मुस्कुराने लथी.. आज दोनो ही गलेमे मंगलसुत्र ओर माथेपे सींदुर लगाकर काम देवकी मुरत लग रही थी.. बस.. देवायतको उतेजीत होनेके लीये दोनोका इतना रुप ही काफी था..

तब देवायत नीशाके उपर चड जाता हे.. तो नीशा उनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती हे.. तब देवायतका लंड तनके नीशाकी चुतपे ठोकर मारने लगा.. ओर अपने बीलमे जानेके लीये रास्ता ढुढने लगा.. तो नीशाकी चुतने लंडको पहेचानते ही फडफडाते लंडको नीगल लीया.. तब देवायत लंडको गरमी महेसुस हुइ.. ओर वो बहुत ही उतेजीत होकर लंडको जड तक खुसाते नीशाकी जबरदस्त चुदाइ करने लगा..

तो चारु भी दोनोकी जबरदस्त चुदाइ देखकर तावमे आ गइ.. ओर सरकते देवायत नीशाके पास बैठ गइ.. फीर नसीली आंखोसे देवायतके होठोको चुमते उनको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्साने लगी.. देवायतने दो बार नीशाकी धमासान चुदाइ करते उनको तृप्त करदीया.. ओर तीसरी बार उनकी चुतको लबालब पानीसे भरदीया.. तब नीशाने कांपते हुअ‍े जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीच लीया..

ओर लंबे लंबे सांस लेने लगी.. वो पुरी पसीने पसीने होगइ थी.. देवायतने अ‍ेक ही बारमे चुदाइ करते उनके अ‍ेक अ‍ेक अंगको ढीला करदीया था.. तभी देवायतने फच आवाजके साथ अपना लंड नीशाकी चुतसे नीकाल देता हे.. तब चारु अपने दोनो पैर फैलाकर नीशाकी बगलमे लैट गइ.. तो नीशा चुत साफ करते मुस्कुराते थोडी बाजुमे हट गइ.. ओर देवायत सीधा चारुके उपर चड गया..

ओर चारुने भी देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोको पागलोकी तराह चुमने लगी.. चारु पुरी तराह मदहोसीमे छा चुकी थी.. ओर उसने अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते देवायतके लंडको अपनी मुठीमे थामलीया.. ओर अपनी चुतपे धीसते टोपेको चुतमे फसा लीया.. ओर देवायतको बाहोमे भीचलीया.. तब देवायतने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड चारुकी चुतमे धुसा दीया..

तो चारुकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. तब नीशा हसने लगी.. तब देवायत कमर हीलाते चारुकी भी जबरदस्त चुदाइ करने लगा.. आज नीशा ओर चारु दोनो ही अपने नये पतीसे प्यार बटोर रही थी.. ताकी दस दिनके लीये उसे कोइ प्यारकी कमी महेसुस ना हो.. देवायतने चारुको भी दो बार चोदकर जडा दीया.. फीर तीसरी बार दोनो साथमे जडने लगे.. तब चारुकी चुतको भी अपने पानीसे सीच दीया..





नीशा ओर चारु दोनोको पता नही थाकी वो दोनो अपनी सुहागरात मे ही देवायतसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. तीनो ही साम चार बजे तब प्यार करते रहे.. तब देवायतने अ‍ेक बार ओर दोनोको साथमे अलग अलग पोजीसनमे चोद लीया.. तब दोनोका पुरा तन तोडकर रख दीया था..फीर तीनो ही नाहकर कंपलीट हो गये.. ओर तैयार हो गये.. तबतक सुधीर भी जाग चुका था.. फीर नीशाने सबके लीये चाइ नास्ता बना लीया..

तो चारोने साथ बेठकर चाइ नास्ता करलीया.. ओर देवायतने कुछ पैसे नीशा ओर चारुको अलग अलग दे दीये.. ओर तीनोको गले मीलकर देवायत वापस अपने खेतोपे चला गया.. तब कुछ ही देरके बाद उनको वंदना ओर रश्मी भी मीलने आगइ.. तब चारुने रश्मी ओर वंदनासे भी सब बाते करते नीशाके साथ जानेकी बात करली.. तब साम होते ही सुधीर नीशा ओर चारु लेकर गांवसे नीकल गया.. ओर तीनो सहेरमे आकर ट्रेनसे बोम्बेकी ओर नीकल गये..
 
तो आज जवेरीलालके घरपे दोनो भाइ बीजनेसपे थे.. तब जयश्री भी जागृतीके साथ खरीदी करने सहेरमे गइ थी.. तो इस वक्त घरपे सीर्फ ब्रीन्दा वृन्दा ओर श्रीधरही थे.. दो पहोरको तीनोही अ‍ेकठे बैठकर खाना खा रहे थे.. तब वृन्दा ने ब्रीन्दाकी ओर देखा.. तो ब्रीन्दा वृन्दाकी ओर कातीलाना स्माइल करते खाना खाने लगी.. तो वृन्दा गुस्सेसे तील मीलाइ.. ओर कीसीके सामने देखे बगैरही खाने लगी.. ओर कुछ भी नही बोली..

तब श्रीधर ब्रीन्दाके साथ ही उनसे सटकर बैठा था.. तो श्रीधर ब्रीन्दाके पैरको पैरसे सहेलाता रहा.. तो आज ब्रीन्दाने श्रीधरको नही रोका.. जीनकी वजहसे ब्रीन्दाभी उतेजीत होते श्रीधरके पैरको पैरोसे सहेलाने लगी.. तभी अचानक श्रीधरने खाना खाते दुसरा हाथ ब्रीन्दाकी जांगोपे रख दीया.. ओर सहेलाने लगा.. सहेलाते सहेलाते श्रीधरका हाथ ब्रीन्दाकी चुतपे चला गया.. तब ब्रीन्दा बहुत ही गरम होगइ..

ओर उनकी चुत श्रीधरका हाथ लगते ही पनीयाने लगी.. ओर वो जोरोसे सांसे लेने लगी.. तब उसने होंसमे आकर श्रीधरके हाथ पे हाथ रखते अपनी चुतको सहेलाते रोक लीया.. ओर आंखोसे वृन्दाकी ओर इसारा करते मना करने लगी.. जैसे ही खाना खालीया.. वृन्दा जटसे अपने रुममे चली गइ.. ओर जोरोसे दरवाजा बंध करके अपने बेडपे जाकर सोगइ..

ब्रीन्दा : (श्रीधरकी ओर कातीलाना मुस्कुराते) देखा बीटु..? तेरी मौसीके तेवर तो देख.. कमीनीकी अभी तक अकड नही गइ.. जी तो चाहता हे उसे भी अ‍ेक बार तुमसे चुदवालु.. तब फाड देना उनकी चुतको.. करदे इनको भी पेटसे.. साली.. फीर तेरे बापको भी भुल जायेगी..

श्रीधर : (प्यारसे देखते) मोम.. क्या केह रही हो आप..? छोडो उसे.. आप मुजे हमारी सादीके बाद कुछ बताने वाली थी.. याद हे आपको..? तो आज अच्छा मौका हे.. बताइअ‍ेना..

ब्रीन्दा : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. सब कुछ याद हे.. चल.. आज मेरे पतीको सब कुछ बता ही देती हु.. तुम अपने कमरेमे जाओ.. ओर मेरा इन्तजार करो.. तब तक मे थोडासा काम नीपटाकर आती हु..

श्रीधर : (सरमाते धीरेसे) मोम.. आज घरपे कोइ नही हे.. जरा जल्दीसे आजाना..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते धीरेसे) पता हे मुजे.. मेने ही तेरी बीवीको जागुको कहेकर उनके साथ भेजा हे.. ताकी आज मे मेरे पतीको मील सकु.. हें..हें..हें..

कहा तो श्रीधरने ब्रीन्दाकी ओर देखते कातील स्माइल करते उनके होठोको चुमलीया.. ओर मुस्कुराते अपने रुमकी ओर जाने लगा.. तब ब्रीन्दा बहुत ही सर्मसार होगइ.. वो कइ दिनोसे श्रीधरको नही मीली थी.. तो आज ब्रीन्दाको भी श्रीधरके साथ मीलन करनेकी जल्दी थी.. वो अपना सब काम फटाफट नीपटाने लगी.. जब काम खतम होगया तो अपने रुममे चली गइ.. ओर फ्रेस होकर.. आइनेके सामने बैठकर हल्कासा शींगार करने लगी..

क्युकी आज वो अपने बेटेको नही अपने पतीको मीलने जा रही थी.. ब्रीन्दा ने अपने आपको पुरी तराह सवार लीया.. ओर अपने रुमसे नीकलकर धीरेसे रुमको लोक करदीया.. फीर श्रीधरके रुमकी ओर चली गइ.. जैसे ही श्रीधरके रुममे गइ श्रीधर बेडसे खडा होकर उनको देखता ही रेह गया.. क्युकी ब्रीन्दा शींगार करते बहुत ही कामुक ओर कयामत दीख रही थी.. ब्रीन्दाने रुममे आकर उनका भी दरवाजा लोक करदीया..

तब श्रीधर जटसे खडा होकर ब्रीन्दाके पास आगया.. तो ब्रीन्दा भी जटसे श्रीधरकी ओर चलते उनकी बाहोमे समा गइ.. तब दोनोही अ‍ेक दुसरेके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगे.. ब्रीन्दाकी चुत गीली होने लगी.. श्रीधर इनके चहेरेको लगातार चुमता ही जा रहा था.. तभी अचानक श्रीधरने ब्रीन्दाको अपनी गोदमे उठालीया ओर बेडकी ओर चल पडा.. तब ब्रीन्दा उनके गलेमे बाहे डालकर श्रीधरको प्यार भरी नजरोसे देखती रही..

र्बीन्दा : (सरमाते धीरेसे) बीटु.. आज तेरी बीवी तेरे हवाले हे.. अपनी इस बीवीको खुस करदे.. इतने दिनोकी सारी कशर पुरी करदे.. मे तेरे लीये बहुत तडपी हु.. क्या कभी इस बीवीकी याद नही आती..? हंम..? पहेले तो मेरे पीछे कीतना पागल था..? सारा दिन नइ बीजीसे ही चीपका रहेता हे..

श्रीधर : (बेडपे सुलाते) मोम.. अ‍ैसा कुछ भी नही हे.. आपही ने तो उनके साथ रीलेशन रखनेको कहा था.. आपकी याद बहुत आती हे.. मे आजभी आपके पीछे इतना पागल हु.. जो पहेले था.. आपको इतना चाहता हु जीतना पहेले चाहता था.. आप ही मेरा पहेला प्यार हो.. अच्छा हुआ पापाने आपको डीवोर्स देदीया.. अब हम दोनो अपनी लाइफ खुलकर जी सकेगे.. मोम.. आइ लव यु..

ब्रीन्दा : (श्रीधरको अपने उपर खीचते) बीटु.. लव यु टु.. मे तो मजाक कर रही थी.. मेभी तुमसे बहुत बहुत प्यार करती हु.. वो भी सच्चा वाला प्यार.. जो मेने पहेली बार तुमसे कीया हे.. प्यारकी अहेमीयत क्या हे वो मेने तुमसे ही तो जाना हे.. चल आजा.. अभी कुछ बात नही.. पहेले इस बीवीको प्यार करके तृप्त करदे.. फीर हम आरामसे लैटे बाते करेगे.. कीतने दिनोके बाद तुमसे मीलन करनेका मौका मीला हे..

कहेते ब्रीन्दा कामुक नजरोसे देखते श्रीधरके सर्टके बटन खोलने लगी.. तो श्रीधरभी मुस्कुराते ब्रीन्दाकी सारीको हटाकर उनके ब्लाउसके बटनको खोलने लगा.. तब ब्रीन्दाके दोनो उरोज उछलके बहार आ गये.. कुछ ही देरके बाद दोनोही पुरे नंगे हो चुके थे.. आज श्रीधरके साथ मीलन करना था तो ब्रीन्दाने सुबह ही अपनी चुतके बाल साफ करलीये थे.. जो अभी बहुतही चीकनी होते अ‍ेक कुआरी लडकीकी चुतकी तराह चमक रही थी..

तब कुछ ही देरमे श्रीधर ब्रीन्दाके उरोजोको अपने कुहमे लेलीया.. ओर चुसते चुसते नीचेकी ओर सरकने लगा.. फीर चुतको चाटते उनके उरोजोका मर्दन कर रहा था.. तब ब्रीन्दा पुरी तराह वासना मय हो चुकी थी.. वो आंख बंध करते कामुक्तासे श्रीधरके बालोको सहेला रही थी.. ओर श्रीधर ब्रीन्दाकी चुतमे अपनी जीभ घुसाते उनकी चुतके दानेको खरोद रहा था..

श्रीधरकी यही अदा ब्रीन्दाको अच्छी लगती थी.. अ‍ैसा प्यार सीर्फ अपने बेटेसे ही पाया था.. जबसे ब्रीन्दाने श्रीधरसे सादी करली थी तबसे वो उनके प्यारमे पागल थी.. ओर हर वक्त अब श्रीधरको पती मानकर ही उनके साथ पत्नी जैसा व्यवहार कर रही थी.. ब्र्रीन्दा कइ दिनोसे बीना चुदाइ बहुत ही कामुक ओर उतेजीत होगइ थी.. तब श्रीधरकी इस हरकतको ज्यादा देर तक बरदास्त नही करपाइ.. ओर जड गइ..





तब ब्रीन्दाने श्रीधरके बालोको पकडकर खीचकर अपने उपर चडा दीया.. तो श्रीधर उनके होठोको ओर गलेको चुमने लगा.. तब ब्रीन्दाने हाथ नीचे लेजाकर श्रीधरके लंडको पकड लीया.. ओर अपनी चुतपे घीसते धीरेसे लव होलमे पुस कर देती हे.. तब अ‍ेक ही जटकेमे श्रीधरने पुरा लंड ब्रीन्दा की चुतमे घुसा दीया.. तो ब्रीन्दाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर वो श्रीधरको कसके बाहोमे भीचते उनकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखने लगी..





तब श्रीधरने ब्रीन्दाके उपर जुकते बुब्सको मसलते उनके होठोको अपनी गीरफ्तमे लेलीया ओर अपनी कमर हीलाते ब्रीन्दाकी चुदाइ करने लगा.. तब ब्रीन्दा भी अपनी कमरको तालमेलमे उछालते श्रीधरको चुदवानेमे साथ देने लगी.. दोनोही नीसब्द अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते चुदाइमे मसगुल होगये.. तब कुछ ही देरके बाद श्रीधर ब्रीन्दाकी धमासान चुदाइ करने लगा.. तो ब्रीन्दा दर्दके मारे छटपटाने लगी..





ओर श्रीधरके हर धकेको बडी ही कामुक्तासे जेलती रही.. वो श्रीधरके चोदनेकी स्टेमीनाको अच्छी तराह जानती थी.. उसे येभी पता था की वो दो बारसे ज्यादा श्रीधरको नही जेल पायेगी.. अब तक श्रीधरने ब्रीन्दाको दो बार जडा दीया था.. तभी अचानक श्रीधर ब्रीन्दाके उपर जुकते उनके तनसे चीपक गया.. ओर पुरा लंड ब्रीन्दाकी चुतमे घुसा दीया तब ब्रीन्दाकी चीख नीकल गइ..





ओर उसने श्रीधरको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते लीप लोक कर लीया.. तभी श्रीधर अपनी कमरको जटके देते ब्रीन्दाकी चुतको पीचकारीया मारते अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तो ब्रीन्दाको अपनी बच्चेदानीपे श्रीधरका गरम पानी महेसुस होने लगा.. तो उनका तन पुरी तराह कांपने लगा.. ओर वो उतेजीत होते अ‍ेक बार फीर श्रीधरके साथ जडने लगी.. तब ब्रीन्दाने श्रीधरको जोरोसे अपनी बाहीमे भीच लीया..

दोनो ही पुरी तरा पसीनेसे भीग चुके थे.. श्रीधर लगातार बीस मीनीट तक ब्रीन्दाकी चुदाइ करता रहा.. आज श्रीधरने अ‍ेकही बारमे ब्रीन्दाको पुरी तराह चोदकर नीचोड लीया.. श्रीधर अ‍ैसे ही ब्रीन्दाकी चुतमे लंड घुसाते उनके सीनेपे ढेर होगया था.. तब ब्रीन्दा प्यार भरी नजरोसे देखते धीरे धीरे श्रीधरकी पीठ ओर उनके सरको सहेला रही.. श्रीधरका लंड अब भी ब्रीन्दाकी चुतमे रेह रेहकर जटके मार रहा था.. तब..



 
ब्रीन्दा : (सरमाते धीरेसे) बीटु.. आज तुजे क्या होगया था..? मुजे तो अ‍ेक ही बारमे पुरी तराह थकादी.. इतने जोसमे तो तुने मुजे पहेली बार चोदा था.. जब हमारी सुहागरात थी.. बस.. तुम मुजे अ‍ैसेही प्यार देते रहेना.. मे तो तुजे अपना पती बनाकर तेरी कायल होगइ.. अपनी इस बीवीको अ‍ैसेही चोदते रहेना..

श्रीधर : (होठ चुमते) मोम.. आपको हमेसा यही प्यार मीलेगा.. अब आप कुछ कीजीये.. हमे मीलनेका मौका बहुत ही कम मीलता हे.. मे आपके बीना नही रेह सकता.. मुजे आपका यही प्यार हर दीन चाहीये.. आपही मेरा पहेला प्यार हो.. ओर हमेसा रहोगी..

ब्रीन्दा : (होठ चुमते) बस बीटु.. अब कुछ ही दिनोका इन्तजार करले.. मुजे भी पता हे तुम मेरे बीना नही रहे सकते.. ओर मे भी तेरे बीना नही रेह सकती.. क्युकी अब सीर्फ तुम ही मेरे अ‍ेकलोते पती हो.. तो पत्नी होनेके नाते तुजे प्यार देना मेरा भी फर्ज हे.. लेकीन कुछ दिन सब्र करलो.. जब हमारी दोनो फेमीली अलग होजायेगी तब यहा सीर्फ हम तीनो ही होगे.. तब तुजे वही प्यार हर दिन मीलेगा.. मे भी इसी दिनका इन्तजार कर रही हु.. मुजे भी मेरे पतीका प्यार हर दिन चाहीये..

श्रीधर : (गाल चुमते) मोम.. आपने मुजे हमारी सादीके बाद कुछ बतानेका वादा कीया था.. अब तो बता दीजीये.. आपने मुजे दीदीके साथ क्यु रीलेशन रखनेको कहा था..? तो अबतो हमने सादी भी करली हे.. दीदीके साथ फीजीकल रीलेशन रखवानेकी कोइ खास वजह..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते धीरेसे गाल चुमते) हंम.. चलो आप मेरे पतीको सब बताती हु.. लेकीन पहेले ये बता.. आज ये तेरा हथीयार अभी भी मुजे अंदर क्यु सख्त लग रहा हे..? तुमने कोइ गोली बोली तो नही खाइ..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) नही मोम.. मेरी ओर दीदीकी सादीसे पहेले हमारे दोस्त मुनाने हम सभी दोस्तोको अ‍ेक आयुर्वेदीक गोली पीलाइ थी.. तीन दिनका कोर्स था.. तो मेरे जीतने भी दोस्तने ये कोर्स पुरा कीया.. उन सबका हथीयार थोडा बडा होगया.. ओर हमारी स्टेमीना भी बढ गइ हे.. बस.. उन्हीकी वजहसे दीदी प्रेगनेन्ट होगइ.. (सरारतसे हसते) मोम.. ध्यान रखना.. कही आज आप भी हो सकती हे.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सर्मसार होते गालपे प्यारसे चपत लगाते) हंम.. हो जानेदे.. अब मुजे कीसीकी परवा या डर नही हे.. अगर तुम चाहोगे तो मे भी तुम्हारा बच्चा पैदा करुगी.. लेकीन अभी नही.. पहेले जयश्रीके बच्चेको इस दुनीयामे आनेदे.. वरना उनकी सब देख भाल करेगा कौन..?

अभी तो हमारे पास सारी उम्र पडी हे.. फीर हम भी आरामसे बच्चा करलेगे.. मे तेरा बच्चा पैदा करुगी.. हमारे प्यारकी नीशानी.. बीटु.. अब वापस बहुत इच्छा होने लगी हे.. धीरे धीरे चोदना.. हम चुदाइ करते हुअ‍े बात करेगे.. तुम मुजे चोदते हो तब बहुत अच्छा लगता हे..

श्रीधर : (धीरेसे कमर हीलाते) मोम.. वो दीदीकी बात बताइअ‍ेना..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते अपनी कमर हीलाते) हंम.. सुन बीटु.. तेरे पापा ओर तेरी मौसी दोनो मेरी सादीसे पहेले ही आपसमे रीलेशनमे थे.. ये बात मुजे कभी पता नही चली.. लेकीन जीस दिन मुजे उन दोनोके रीलेशनके बारेमे पता चला तब बहुत देर हो चुकी थी.. जयश्री ओर तुम काफी बडे हो चुके थे.. जयश्री जवानीकी दहेलीजपे कदम रख चुकी थी.. तो तुम भी पुरा जवान होगया था.. तो मे तुजे छोडकर कैसे चली जाती..? मुजे बादमे पता चलाकी हमारी जयश्री भी उन दोनोके प्यारकी नीशानी हे..

श्रीधर : (कमर हीलाते रुकते) मोम.. क्या केह रही हो आप..? तो क्या दीदी मेरी सगी बहेन.. मीन्स.. क्या वो मेरी सौतेली बहेन हे..?

ब्रीन्दा : (कमर हीलाते) हां बीटु.. जयश्री तेरी सौतेली बहेन हे.. तेरे पापाकी संतान.. बेटा.. चोदना क्यु बंध करदीया.. चोदना जारी रखनां.. तुम मुजे चोदते हो तो बहुत मजा आता हे.. सुन.. वो तेरी सगी बहेन हे.. इसीलीये मेने तुजे जयश्रीके साथ रीलेशन रखनेको कहा था.. क्युकी जब तेरे पापा ओर तेरी मौसीको पता चलेगाकी तुम अपनी सगी बहेन यानीकी उनकी बेटीको चोदते हो..

तो ये बात वो दोनो कभी बरदास्त नही करपायेगे.. तेरे पापाने ओर तेरी मौसीने मुजे धोखा दीया हे.. इसीलीये मेने उनसे बदला लेनेके लीये उनकी बेटीको तुमसे चुदवाकर प्रेगनेन्ट करवा दीया.. बस.. यही रीजन था मेने तुजे जयश्रीके साथ रीलेशन रखनेके लीये कहा.. बीटु.. आइ अ‍ेम सोरी..

श्रीधर :(थोडा जोरोसे चोदते मुस्कुराते) मोम.. आपको चोदनेमे बहुत मजा आता हे.. लेकीन आप मुजे सोरी क्यु बोल रही हे..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) बटु.. इसीलीये की मेने मेरा बदला लेनेके लीये तेरा ओर बेचारी जयश्रीका इस्तेमाल कीया.. मैने तेरी खुदकी बहेनको तुमसे चुदवा लीया.. ओर उनको तेरेसे प्रेगनेन्ट तक करवा दीया.. मे तेरी ओर जयश्रीकी गुनहगार हु..

श्रीधर : (मुस्कुराते) नही मोम.. आप अपने आपको दोसी मत मानो.. सीर्फ मेरी नही.. हम सभी दोस्तोकी यही तो फेन्टासी हे.. की हम हमारी बहेन ओर हमारी मम्मीसे प्यार करे.. ओर उनके साथ फीजीकल रीलेशन रखे.. मोम.. थेन्क्स.. आपने मेरे साथ सादी करली.. ओर दीदीको भी मुजसे मीलवा दीया.. मेरी सभी फेन्टासी आपही की वजहसे पुरी हुइ.. मेतो इस बातसे बहुत ही खुस हु.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) अच्छा..? तेरे सभी दोस्त यही चाहते हे..? तो फीर तेरे कीतने दोस्त अपनी मां ओर अपनी बहेनके साथ रीलेशनमे हे..? क्या मुजे बता सकता हे.. आइ..सीसीस... बीटु.. थोडा धीरेसे चोदनां.. अंदर अभी भी कीतना बडा लग रहा हे.. जी तो चाहता हे मे तुमसे चुदवाती ही रहु..

श्रीधर : (मुस्कुराते चुदाइ करते) मोम.. आप कीसीको कहेना नही.. ये बात सीर्फ अपने तक सीमीत रखना.. वो हमारा दोस्त साहील अपनी अम्माके साथ रीलेशनमे हे.. फीर.. मुना.. वो भी अपनी बहेन बरखाके साथ सादी करके उनको प्रेगनेन्ट कर चुका हे.. मोम..

सायद मुनाका भी अपनी मम्मीके साथ रीलेशन हे.. अ‍ैसा हमे इन दोनोके व्यवहारसे लगता हे.. फीर हमारा बंसी.. वो भी अपनी बुआके साथ सादी कर रहा हे.. ओर अभी कल ही पता चला वो अपनी बहेन जागृतीके साथ भी रीलेशनमे आना चाहता हे.. मतलब मेरे सब दोस्तो अपनी बहेनको प्यार करते हे..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हंम.. बीटु.. मुना की मम्मी वो बसंती हेना..? फीकर मत करो.. उनसे तो मे सब उगलवा लुगी.. मेरे साथ उनकी बहुत अच्छी पटती हे.. हें..हें..हें.. आइ.. सीससससस.. बीटु.. तुम क्या मस्त चुदाइ करता हे.. लेकीन तुम अ‍ेक नाम भुल गया.. जो हमने हमारा पहेला मीलन उनके बंगलोपे ही कीया था.. तुमने मेरे प्यारे देवर लखन भैयाके बारेमे मुजे कुछ नही बताया.. हें..हें..हें..
 
श्रीधर : (मुस्कुराते) मोम.. वो हम सबका हीरो हे.. हम सबने उन्हीकी सलाहपे अपनी अपनी बहेनको पटाया हे.. लेकीन मोम.. वो खुद.. इस प्यारसे वंचीत होगये हे.. उन्होने सीर्फ मुजे ही बताया था.. मोम.. वो भी अपनी बहेन पुनमदीदी को बहुत चाहता था.. लेकीन अपने प्यारका इजहार उनसे कभी नही करपाये.. सायद इसीलीये वो हम सबको अपनी बहेनको प्यार करनेके लीये प्रेरीत करते हे..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) बीटु.. उनके खानदानमे तो सब लोग अनी बहेनसे सादी करते आये हे.. तो फीर मेरा देवरने इतनी हींमत क्यु नही की..? वो भी पुनम दीदीको अपने दिलकी बात बता देते..? सायद उनको भी अपना प्यार मील जाता..

श्रीधर : (चुदाइ रुकते) मोम.. मेने भी इनको यही पुछा था.. तो उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. मुजे ओर कुछ नही बता पाये.. मोम.. आप बुरा मत मानना.. वो मेरा बहुत अच्छा दोस्त हे.. भाइसे भी बढकर.. तो हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे कोइ बात नही छुपाते.. तो मुजे मजबुरन हम दोनोके रीस्तोके बारेमे उनको बताना पडा.. क्युकी उनको भी हम दोनोके बारेमे सब पता चल गया था.. तो मे इनके सामने जुठ नही बोल सका.. लेकीन आप फीकर मत करना.. ये बात सीर्फ उनके तक सीमीत रहेगी.. वो कीसीको कुछ नही कहेगे..

ब्रीन्दा : (सोक्ट होते देखते) बीटु.. ये तुम क्या बोल रहा हे..? लेकीन उनको सब पता कैसे चला.. तुमने उनको पुछा नही..? ओर तुमने चोदना क्यु रोक दीया..? चोदना.. चोदते हुअ‍े बाते करनेमे बहुत मजा आता हे.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (मुस्कुराते कमर हीलाकर चोदते) मोम.. मेने उनको पुछा.. की आपको मेरे बारेमे ओर मेरी मोमके बमरेमे पता कैसे चला..? तो कहा.. आपको याद हे.. जब हम दोनो पहेली बार कोलेजके दाखलेके लीये सहेर गये थे.. ओर वहा हम दोनो उनके बंगलोपे पहेली बार मीलेथे..? जब हम वापस आगये तब वो दुसरे दिन ही वहा बंगलोपे गया था.. तब हमारे बेडकी चदर हम दोनोके कामरससे बहुतही खराब हो गइ थी.. बस.. उसीसे लखन भैयाको सब पता चल गया.. लेकीन उन्होने इस बारेमे मुजे कभी नही पुछा..

ब्रीन्दा : (सरमाते मुस्कुराते) बीटु.. हमारी जरासी लापरवाहीसे उनको सब पता चल गया.. लेकीन ये बता.. तो फीर तुम दोनोकी इस बारेमे कब बाते हुइ..?

श्रीधर : (जोरोसे कमर हीलाते) मोम.. मे ओर दीदी सादी करके वापस आये.. उनके दुसरे दिन.. जब हम दोनो अकेले थे तब सब बाते हुइ.. तब उन्होने भी मुजे अपने ओर पुनम दीदीके बारेमे सब कुछ बताया..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते कमर हीलाते) हंम.. बीटु.. मेरे देवरको कहेना हम दोनोके बारेमे वो कीसीको ना बताये.. मे ओर जयश्री दोनो पुरी जींदगी तेरी बीवी बनके रहेना चाहती हे..

श्रीधर : (मुस्कुराते होठ चुमते) मोम.. आप फीकर मत करना.. जैसा आप चाहोगी वैसाही सब कुछ होगा.. मे तुम दोनोको बहुत खुस रखुगा.. पती बनकर आप दोनोकी हर जरुरतको पुरा करुगा.. मुजे आपका यही प्यार सारी जींदगी चाहीये..

ब्रीन्दा : (जोरोसे बाहोमे भरते) बीटु.. मेतो तुजे पाकर धन्य होगइ.. मेतो उपर वालेसे यही प्रार्थना करती हु.. की अब मुजे हर जन्ममे तुही पतीके रुपमे मीले.. बीटु.. मे भी तेरी अ‍ेक नीशानी चाहती हु.. मे तेरे बच्चेकी मां बनुगी.. मे जब कहु.. तब मुजे भी प्रेगनेन्ट करदेना.. अब वो दिन दुर नही तेरी दोनो बीवीया तेरे साथ तेरे बीस्तरमे साथ होगी..

दोनोही प्यार भरी बाते करते चुदाइ करते रहे.. इस बारभी श्रीधरने ब्रीन्दाको दो दो बार जडाके उनकी चुतको अपने पानीसे लबालब भर दीया.. तब ब्रीन्दाकी चुतसे दोनोका कामरस बहार नीकलने लगा.. आज श्रीधरने ब्रीन्दाको पुरी तराह तृप्त करदीया था.. दोनो साम चार बजे तब चुदाइ करते रहे.. फीर दोनो साथमे नहाने चले गये.. तो वहा भी श्रीधरने अ‍ेक बार ब्रीन्दाको खडे खडे पीछेसे चोद लीया..





तब ब्रीन्दा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर दोनो नहाकर बहार आगये ओर अपने अपने कपडे पहेनकर रेडी हो गये.. तब ब्रीन्दा अ‍ेक बार फीर श्रीधरकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. तब ब्रीन्दा श्रीधरको जल्द वापस मीलनेको कहेकर अपने रुममे चली गइ.. तब श्रीधर अपने बेडकी चदरको बदलकर सही कर देता हे.. ताकी जयश्रीको कोइ सक नाहो..
 
तो इधर सहेरमे खाना खाते ही लखन फोनपे सृतीसे बात करलेता हे.. तो सृती भी खाना खाकर अ‍ैसे ही लखनके फोनके इन्तजारमे बैठी थी.. तो सृतीने लखनको उनको क्लीनीकसे लेजानेको कहा.. तब लखन साहीलको बोलकर सृतीको लेने क्लीनीकपे चला गया.. तो इधर सलमा ओर जरीना भी खाना खाने बैठ गइ.. तब सबाना वापस सब लेडीसको अपने रुममे लेगइ.. ओर वो सबके साथ जानेके लीये तैयार होने लगी..

तब साहील ओर बंसी मीलकर फीरोजको फेक्टरी छोडकर खेती सम्हालनेको कहेने लगे.. तब फीरोजने मुस्कुराते सबकी बात मानली.. ओर सबानाके बेंगलोर जाने तक यही सहेरमे रहेनेका फैसला करलीया.. तब जरीना ओर सलमा भी फीरोजका फैसला सुनकर खुस होगइ.. जब सबाना तैयार होगइ तब सबलोग बहार आगये.. तबतक लखन भी सृतीको लेकर वापस आगया..

तो बंसीकी जीपमे सांती जागृती ओर जयश्री बैठ गये.. लखनकी कारमे साहील लखनके पास बैठ गया तब सृती ओर सबाना पीछेकी सीटमे बैठ गइ.. ओर सबने तैय कीया हुआ अ‍ेक बडे मोलकी ओर चले गये.. तब रास्तेमे लखनने सबानाका परीचय सृतीसे करवाया.. तो सृती ओर सबाना हस हसके बाते करने लगी.. सृतीने सबानाकी सब जानकारी लेली.. तब कुछ ही देरमे सभी लोग मोलपे आगये..

तो सृती ओर सबानाकी बाते अधुरी रेह गइ.. ओर सब लोग कार पार्क करके अ‍ेक जगाहपे अ‍ेकठे होगये.. तो जागृती लखनकी ओर देखकर सरमाते मुस्कुराने लगी.. ओर सबकी नजर बचाते लखनको आंखोसे इसारा करते उनके साथ आनेका इसारा करने लगी.. तब जयश्रीने भी देखलीया ओर वो भी पहेले जागृतीकी ओर फीर लखनकी ओर देखकर सरमाकर हसने लगी.. तभी..

लखन : (सबको) सब लोग सुनो.. जीनकी भी खरीद होजाये.. सब अंदरकी होटेलमे मीलेगे.. वरना इधर ही आकर रुकना.. ओर सबका वेइट करना..

साहील : (हसते) हां.. इतने बडे मोलमे सबको कहा ढुंढते फीरे.. हें..हें..हें.. चलो सब लोग.. जीनको जो लेना हे वहा चले जाओ..

कहातो सबलोग मुस्कुराते मोलमे चलने लगे.. तब बंसीके साथ सांती जागृती ओर जयश्री चलने लगे.. ओर वो सब अ‍ेक बडे सारीके शोरुम मे घुस गये.. तब साहील भी सबानाको लेकर अ‍ेक फेन्सी कपडेके सो रुममे चला गया.. तो सृती ओर लखन दोनो अकेले हो गये.. तो वो भी साथ चलने लगे.. तब सृती अ‍ेक शोरुम ढुंढने लगी.. तभी उसे अ‍ेक अंडर गार्मेन्टका शोरुम मील गया.. जो पुरा दरवाजा सीसेका था.. सृती अंदर जाने लगी.. तो लखन भी उनके पीछे चलने लगा.. तब सृती बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर वही रुकते..

सृती : (सरमाते धीरेसे) लखन भैया.. आप कहा आ रहे हो..? इधर ही रुकीये अंदर सभी लेडीस हे.. यहा आपके लीये कोइ चीज नही हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते रुकते) अरे.. तो आप अपने लीये लेना मे मेरी बीवी लताके लीये ले रहा हु.. हें..हें..हें..

सृती : (जुठे गुस्सेसे दांत पीसते) बहुतही कमीने हो आप.. उनके लीये भी मे लेलुगी.. उनका सब पता हे मुजे.. आप इधर ही रुकीये..

लखन : (हसते) भाभी.. उनकी चोइस ओर कलर मुजे पता हे.. की क्या लेना हे.. हें..हें..हें..

सृती : (अ‍ेक नजर पेन्टके उभारकी ओर डालते सरमाते) नही.. आप इधर ही ठहेरो.. अगर आपको लेना हे तो आप बादमे लेलेना.. कमीने कहीके..

कहेते सृती सरमाकर हसते हुअ‍े अंदर चली गइ.. ओर लखन वही अदब लगाते उनको देखकर हसता रहा.. सृती अ‍ेक काउन्टरपे चली गइ.. ओर वहा अ‍ेक लेडीससे बात करने लगी.. तब उन लेडीसने सृतीको आठ दस बोक्ष देदीये.. ओर बोक्ष खोलकर सृतीको ब्रा पेन्टी दीखाने लगी.. तब अ‍ेक यलो ब्रा पेन्टीका सेट सृती देखने लगी.. तभी देखते देखते उनका ध्यान बहार खडे लखन की ओर गया.. तब लखन उनको ही देखते अब भी हस रहा था.. तो सृती बहुतही सरमाइ.. तो काउन्टरकी लेडीसने कहा..

लेडीस : (मुस्कुराते) मेडम.. आपके हसबन्डको भी अंदर बुला लीजीयेनां.. सायद वो अपनी चोइसका आपको दिवाना चाहते हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते थोडी सककपकाते) अरे नही नही.. वो..वो.. वो वही ठीक हे.. मे ले लुगी..

लेडीस : (मुस्कुराते) मेम.. लगता हे वो आपको बहुत प्यार करते हे.. आपका कीतना खयाल रख रहे हे..

कहा तो सृती सेल्सगर्लको ये बतानेकी हिंमत नही करपाइ.. की वो मेरे पती नही हे.. वो अ‍ेक बार फीर लखनकी ओर देखती हे.. तभी लखनने अपना मुह बीगाडते नां मे गरदन हीलाइ.. तो सृतीको बहुत गुस्सा आगया.. ओर लखनको बडी आंख करते होठ हीलाते मनमे गालीया देने लगी.. ओर ब्राके सेटको देखकर वापस रख दीया.. ओर अ‍ेक रेड कलर सेट उठाकर देखने लगी..

जब देख रही थी तब सृतीको वापस लखनकी ओर देखनेका मन हुआ.. वो देखना चाहती थी.. की लखन अभी भी उनकी ओर देख रहा हेकी नही.. ओर उसने धीरेसे लखनकी ओर गरदन घुमाइ.. तब लखनने वापस मुह बीगाडते नां मे गरदन हीलादी.. तब सृती बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर उसने जुठे गुस्सेसे वापस अपने दांत पीसते दीखाये.. फीर मुह दुसरी ओर घुमाते सरमाकर हसने लगी..

ओर उसने वो सेट भी वापस रख दीया.. सृतीको इस खेलमे मजा आने लगा.. वो अब मनही मन सभी सेट लखनको दीखाकर सीलेक्ट करवाना चाहती थी.. ओर सृतीने अ‍ेक काला ट्रान्सपरंट सेट उठालीया.. फीर इस बार जान बुजकर लखनकी ओर देखा.. तो लखनने मुस्कुराते अपना अनुठा ओर पहेली उगलीको मीलाते मींडी बनाकर दीखाते मस्त होनेका इसारा कीया.. तो सृती बहुत ही सर्मसार होगइ..

ओर सृतीकी सरमके मारे हसी नीकल गइ.. तब लखनको बडी आंख दीखाते हसने लगी.. फीर सृतीने अ‍ेक सेट ओर सीलेक्ट कीया.. तो लखनने इसारोसे मना कीया.. तो सृतीने मुस्कुराकर वापस रख दीया.. फीर सृती जान बुजकर हर सेट लखनको दीखाने लगी.. ओर अ‍ैसे ही लखनने चार सेट सृतीको सीलेक्ट करवाया.. हर बार सृती सेट सीलेक्ट करते लखनकी ओर देखती थी.. जब लखनकी ओरसे हां का इसारा होता तब ही वो सेट रख लेती थी..

फीर सृती वो ही ब्राका चार सेट सीलेक्ट करके उनका पेमेन्ट करके बहार आगइ.. ओर जुठे गुस्सेसे दांत पीसकर लखन की पीठमे मुका मारने लगी.. तब लखन जोरोसे हसते दुर सृतीसे दुर होगया.. तो सृती भी हसने लगी.. ओर दोनो साथ चलने लगे.. तभी लखनने चलते चलते सृतीको कंधेसे पकडकर अपने आपसे सटालीया.. तो सृती बहुतही सरमाते हसने लगी.. तब अ‍ेक बार फीर सृतीकी नजर लखनके पेन्टके उभारकी ओर चली गइ.. तब सृतीका दिल मचलने लगा.. ओर आखीर उनसे रहा नही गया.. ओर हिंमत करते धीरेसे पुछ ही लीया..
 
सृती : (साथ चलते सरमाकर मुस्कुराते) लखन भैया.. पुनो दीदीने आपको वो जडीबुटी पीलाइ हे.. तो कोइ दर्द वर्द तो नही..? क्युकी सुबह लता पुनोको पुछने आइ थी.. तो सोचा मे ही आपको पुछलु..

लखन : (सरमाके मुस्कुराते) नही भाभी.. बस.. थोडा मामुली दर्द हे.. भाभी.. क्या आपको भी सब पता हे..?

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) हां.. इस बारेमे मेरी कल पुनो दीदीसे बात हुइ थी.. जब आपको जडी बुटी पीलाइ थी.. गभराइअ‍े नही.. कल सुबह तक सब ठीक होजायेगा.. (सर्मसार होते हिंमत करते) लखन भैया.. वो.. वो.. क्या जीसके लीये जडी बुटी पीलाइ हे.. क्या वो काम होगया..? आइ मीन.. (मुस्कुराते सरारतसे नीचेकी ओर आंखोसे इसारा करते) लग तो रहा हे.. काम हो गया हे.. हें..हें..हें..

लखन : (बहुतही सर्मसार होते मुस्कुराते) हां भाभी.. अब आपसे क्या सरमाना.. आप ओर पुनोदीदी तो मेरी चहीती भाभी हो.. आप मुजे सबकुछ पुछ सकती हो.. भाभी.. जीसके लीये जडीबुटी दी हे वो काम हो गया हे.. अब सब ठीक हे.. काफी अच्छा रीजल्ट मीला हे.. भाभी.. क्या आपको पता हे ये मुजे कीसलीये दी गइ हे..?

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. मुजे सब पता हे.. बस.. जैसा पुनो दीदी कहेती हे.. करते जाइअ‍े.. उन दोनो कमीनीओको छोडना नही.. मां बेटी दोनो हमारी जायदाद हडपना चाहती हे.. क्या इसीलीये जडीबुटी दी हेनां आपको..?

लखन : (सरमाते हसते) हां भाभी.. प्लीज.. अभी ये बात आप अपने तकही सीमीत रखना.. मुजे भाभीने मना कीया हे..

सृती : (सरमाते हसते) हंम.. भाभीका मतलब.. पुनम दीदीसे हेनां..? फीकर मत करो देवरजी.. मुजे ओर आपकी पुनम भाभीको सब पता हे.. अब चलो.. आपको कुछ लेना हे..? हें..हें..हें.. लताके लीये कुछ नही लेनां?

लखन : (हसते) हां भाभी.. चलीये.. सबके लीये लेना हे.. भाभी.. क्या आपको ये भाभी वाली बात भी पता हे..?

सृती : (सरमाते) हंम.. मुजे सबकुछ पता हे.. लेकीन फीकर मत करना.. ये राज सीर्फ मेरे तक ही सीमीत रहेगा.. क्युकी आप हम दोनोके चहीते अ‍ेक लोते जो देवर हो.. हें..हें..हें.. तभी तो आप हमारे साथ फ्लर्ट कर पाते हो.. वरना हम दोनो आपकी टांगे नही तोड देती..? हें..हें..हें.. चलीये..

कहातो लखन सरमाके हसने लगा.. फीर लखन सृतीको अ‍ेक सारीके शोरुममे ले गया.. ओर वहा उसने लता.. मंजु पुनम सृती.. ओर बाकी सभी लेडीसके लीयेभी सारीया लेली.. तब सृती लखनकी चोइस ओर उनकी दीलेरी देखकर बहुत ही खुस होगइ.. सृतीको जबसे पता चलाकी लखनको जडी बुटी देदी हे..

तबसे अ‍ेक डोक्टर होनेकी वजहसे लखनके अंदर होने वाले बदलाव को जाननेकी ओर देखनेकी उनकी उत्सुक्ता बढ गइ थी.. ओर हिमंत करते कुछ बाते जान भी ली.. अब सृती लखनके साथ खुलकर बाते करनेमे काफी खुल चुकी थी.. तभी..

सृती : (हसते) देवरजी.. लताके लीयेतो ठीक हे.. लेकीन आपने हम सबके लीये क्यु सारीया लेली..? क्या आपको सबकी चोइस पता हे..?

लखन : (हसते) भाभी.. मुजे भी कुछ कलरका ज्ञान हे.. मेरी चोइस कभी गलत नही होती.. मे जो भी लेता हु सबको पसंद आजाता हे.. हम जब स्कुलमे थे.. तब पुनम दीदीके लीये मे ही अपने कपडे लेने जाता था.. ओर उनको मेरी चोइसके कपडे पसंद भी आते थे.. रही बात सारी लेनेकी तो लता तो मेरी बीवी हे.. लेकीन आप मंजु भाभी ओर अब पुनोदीदी जो अब मेरी भाभी हे.. तो अ‍ेक देवरकी तरफसे मेरी सभी भाभीको गीफ्ट.. हें..हें..हें.. ओर वैसे दया रजीया ओर चंपा भाभीको कौन लाकर देगा..? तो उनके लीयेभी लेली.. तो बाकी बचा कौन..? तो भावना भाभी भीतो मेरी भाभी हे.. ओर नीर्मला आंटी ओर भुमी बुआतो अ‍ैसेही हमारे घरकी बडी हे.. तो उनके लीयेतो लेना ही था..

सृती : (मुस्कुराते) लखनभैया.. आज मे बहुत खुस हुकी मुजे इतना प्यारा देवरजो मील गया.. (ब्रा पेन्टीके बोक्षकी ओर इसारा करते) वैसे आपकी चोइस वाकइ मस्त हे.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. अब अगली बार आपको यहा आनेकी जरुरत नही हे.. सीर्फ मुजे अपनी साइज बतादेनां.. मे खरीदी करके लेआउगा..

सृती : (सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) लखन भैया आप बहुत ही कमीने हो.. कोइ अपनी भाभीकी साइज पुछता हे..? अ‍ेक दिन मेरे हाथका मार खाओगे तुम..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. बुरा लगा तो सोरी.. लेकीन बीना साइज मुजे पता कैसे चलेगा..? की कोनसी साइज लेनी हे.. मे तो पुनम भाभीके लीये भी लाता था.. जब हम दोनो स्कुलमे थे.. तब तो वो मेरी भाभी भी नही थी..

सृती : (अ‍ेक कामुक नजरसे मुस्कुराते धीरेसे) अच्छा.. दोनोके बीच इतनी अंडरस्टेन्डींग थी..? हंम.. मेरी साइज.. ३२ २८ ३४.. लेकीन देखना इस बारेमे कीसीको पता नही चलना चाहीये.. अब देखती हु आप मेरे लीये कैसा सेट लाते हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते धीरेसे) भाभी.. फीकर मत करो.. बहुत मस्त ओर बडीया सेट लाउगा..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. अब सोपींग होगइ हो तो चलो.. हें..हें..हें..

आज सृती लखनके पेन्टके उभारको देखते बहेकने लगी थी.. अ‍ेक बार तो उनको लखनकी खबर पुछते लंडको चेक करनेके बहाने देखनेकी इच्छा भी हुइ.. लेकीन अपने आपपे सयंम रखते खुदको सम्हाल लीया.. तब सृती बहुत ही उतेजीत होने लगी थी.. जीनकी वजहसे वो अनायास ही लखनकी ओर ढलते उनके साथ खुलकर बाते करने लगी थी.. ओर बातो ही बातोमे पुनमकी बाते सुनकर अपनी साइज भी बता दी.. तब सृतीकी चुत हरकतमे आते पानी बहाने लगी.. तो सृती बहुत ही सरमाइ..
 
तो दुसरी ओर बंसी सांती जयश्री ओर जागृती चारो बहुत सारी सारीया लेकर सांतीकी सादीका जोडा देख रहेथे.. तब बंसी जागृतीके पास बैठा था.. सांती ओर जयश्री सारीया देख रही थी.. तब बंसीने धीरेसे जागृतीके हाथके उपर हाथ रख दीया.. तो जागृती बंसीकी ओर देखते मुस्कुराते बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर उसने हाथको अ‍ैसेही रखा.. तो बंसीने धीरेसे उंगलीओमे उंगली फसाकर जागृतीके हाथको पुजोसे कसके पकडक लीया..

तो जागृती सर्मसार होते अ‍ैसे ही बैठी रही.. ओर हाथको कसके पकडलीया फीर मंद मंद मुस्कुराने लगी.. तो बंसी दुसरे हाथसे जागृतीके बदनको छुते हाथ फीराने लगा.. तब भी जागृती कुछ नही बोली ओर बंसीकी सभी हरकतोको सरमाकर मुस्कुराते अ‍ेन्जोय करती रही.. आज बंसीने जागृतीको फीरसे उतेजीत कर दीया.. तो जागृती भी बंसीको साथ देने लगी.. दोनो भाइ बहेन अ‍ेक प्रेमीकी तराह बीहेव करते रहे.. लेकीन ये सब हरकते जयश्रीकी नजरसे बच नही पाइ..

तो दुसरी ओर साहील भी सबानाको अ‍ेकसे बढकर अ‍ेक लेटेस्ट कपडे दीलवा रहा था.. तो सबाना सरमाकर उनको मना करती रही.. लेकीन साहील उनको जबरदस्तीसे सब दीलवा रहा था.. तो आज सबानाको भी साहील बहुत ही अच्छा लगने लगा.. ओर साहीलने सबानाके लीये छे से सात जोडी कपडे लेलीये.. तो सबाना भी खुस होगइ.. फीर साहील सबानाको अ‍ेक अंडर गार्मेन्टकी शोपमे जबरदस्ती भेज देता हे..

ओर उसे जोभी लेना हे लेनेको कहेते बहार खडा रहेता हे.. तब सबाना भी सर्मसार होगइ.. जैस्े साहील उनका पती हो.. वो सरमाके अंदर चली गइ.. ओर उसने भी दो ब्रा पेन्टीके सेट लेलीये.. तब साहीलने सबका पेमेन्ट करदीया.. तो सबाना वापस सर्मसार होने लगी.. आज उसे साहीलपे बहुत प्यार आरहा था.. उनकी जींदगीमे पहेली बार था.. जो कोइ लडका उनको सोपींगपे लाया हो.. ओर उनको खरीदी करवा रहा हो.. तब साहील सबानाको लेकर अ‍ेक ज्वेलेरीके शो रुममे चला गया.. तब..

सबाना : (सरमाते हसते) साहील भैया हम यहा क्यु आये हे..? आपको आपके लीये कुछ लेना हे क्या..?

साहील : (मुस्कुराते) हां दीदी.. मुजे अ‍ेक पेन्डल वाला चेइन लेना हे.. जो आपकी पंसका हो..

सबाना : (सरमाकर हसते) अरे.. तो फीर आपकी पसंदका ही ले लोनां.. मुजे कहा पसंद करना आता हे..?

साहील : (मु्सकुराते) नही.. आज आपकी पसंदका ही लेना हे.. चलीये चेइन सीलेक्ट कीजीये.. मे पेन्डल देखता हु..

कहेते साहील सबानाको चेइन सीलेक्ट करनेको कहेते उनसे दुर चला गया.. ओर पेन्डल देखने लगा.. तब उसे खुलता हुआ अंदर दो फोटो लगे अ‍ैसा दिल सेइफ पेन्डल दीख गया.. ओर साहीलने दुकानदारसे बात करके छुपकर सबानाको दीखाया.. ओर उनकी तस्वीर लेनेको कहेते दोनोकी तस्वीर इनमे लगानेको कहेता हे.. तब दुकारदार भी सब समज गया.. ओर मुस्कुराते साहील ओर सबानाकी छुपकर तस्वीर खीचकर पेन्डल बनाने लगा..

तो कुछही देरके बाद सबानाने चेइनको सीलेक्ट करलीया.. तबतक पेन्डलभी तैयार होकर आगया.. जो उसमे साहील ओर सबानाकी तस्वीर लगी थी.. लेकीन सबाना इस बातपे अन्जान थी.. उसे पता ही नही चला की साहीलने ये सोनेका चेइनवाला पेन्डल उनके लीये लीया हे.. दुकारनदारने उसे अ‍ेक छोटेसे बोक्षमे डालकर गीफ्टकी तराह पेक करदीया.. ओर साहीलने उसे पेमेन्ट करदीया.. ओर दोनो बहार आगये.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १८८

तो कुछही देरके बाद सबानाने चेइनको सीलेक्ट करलीया.. तबतक पेन्डलभी तैयार होकर आगया.. जो उसमे साहील ओर सबानाकी तस्वीर लगी थी.. लेकीन सबाना इस बातपे अन्जान थी.. उसे पता ही नही चला की साहीलने ये सोनेका चेइनवाला पेन्डल उनके लीये लीया हे.. दुकारनदारने उसे अ‍ेक छोटेसे बोक्षमे डालकर गीफ्टकी तराह पेक करदीया.. ओर साहीलने उसे पेमेन्ट करदीया.. ओर दोनो बहार आगये.. तभी....अब आगे

सबाना : (मुस्कुराते) भाइजान.. पेन्डलतो मस्त लीया आपने.. बहुत मंहेगा हे.. क्या आपने अपनी गर्लफ्रेन्डके लीये लीया हे..? हें..हें..हें..

साहील : (हसते) हां.. यही समजलो.. हें..हें..हें.. लेकीन अभी तो मेरी कोइ गर्लफ्रेन्ट नही हे.. तो मेने मेरी प्यारीसी स्वीट सबाना दीदीके लीये लीया हे.. उनका बर्थडे जो हे.. हेपी बर्थडे डीयर दीदी.. लीजीये मेरी तरफसे आपको गीफ्ट..

सबाना : (चोंकते थोडी गभराते) अरे नही नही.. मे ये नही ले सकती.. इतनी महेगी गीफ्ट मुजे नही चाहीये..

साहील : (मुस्कुराते) दीदी.. अ‍ैसे गभरा क्यु रही हो..? मेने ये स्पेसीयल आपके लीयेही तो बनवाया हे.. क्या अपने भाइका दिल तोडोगी..? आपको लेना ही पडेगगा.. आपको मेरी कसम..

सबाना : (आंख गीली करते) भाइ.. प्लीज.. कसम मत दो.. अब सीर्फ अ‍ेक ही तो भाइ हो आप.. ओर मे ये महेंगी गीफ्ट लुगी तो मम्मी पापा मुजे डाटेगे.. मे ये नही ले सकती.. प्लीज..

साहील : दीदी.. लेकीन आपको कहा उनसे छुपकर गीफ्ट रखना हे.. मे उनसे बात करदुगा.. वो आपको कुछ नही कहेगे.. फीर भी उनके डरसे मना कर रही हो.. तो फीर इनके बारेमे चाचा चाचीको अभी बतानेकी क्या जरुरत हे..? आप इसे छुपाकर रखना.. जब बेंगलोर चली जाओ तो साथ ले जाकर वहा पहेनना.. तो कीसीको पता नही चलेगा..

सबाना : (अ‍ेक नजरसे देखते) भाइ.. बुरा मत मानना.. अ‍ेक भाइ बहेनने तो मम्मी पापाको धोखा दीया हे.. तो अब मे उनसे जुठ छुपाकर ओर धोखा देना नही चाहती.. कभी तो उसे पता चल ही जायेगा.. सोरी.. मे ये गीफ्ट नही लुगी.. आपने इतने सारे कपडे दीलवाये यही मेरे लीये बडी गीफ्ट हे.. सोरी भाइ.. मुजे गलत मत समजना..

साहील : (मुस्कुराते) दीदी.. आज खुसी हुइ आप चाचा ओर चाचीकी इजतके बारेमे इतना कुछ सोचती हे.. लेकीन अबतो मेने आपके लीये लेलीया हे.. आप कहो तो इस बारेमे मे उनसे बात करलुगा.. फीर भी अगर आप इसे लेना नही चाहती तो फीर आपकी मरजी.. अब ये अमानत अ‍ैसे ही आजसे मेरे पास रहेगी.. जब तक आप डोक्टर बनकर वापस नही आती.. ओर तुम इसे सामनेसे नही मागोगी तबतक मेरे पास रहेगी.. जब सामनेसे मांग लोगी तब मे समजुगा मेरी दीदी मुजसे प्यार करती हे..

सबाना : (आंसु बहाते हग करते) भाइ अ‍ैसा मत बोलोे.. मे आपको बहुत प्यार करती हु.. लेकीन मे ये गीफ्ट नही ले सकती.. समजोनां मेरी भी कुछ मजबुरी हे.. अब आपको कैसे समजाउ..?

साहील : (मुस्कुराते आंसु पोछते) चल ठीक हे.. रो मत.. मेतो मजाक मे केह रहा था.. दीदी.. बस.. आप ध्यान लगाके पढना.. डोक्टर बनना सीर्फ आपका ही नही मेरा भी सपना हे.. की मेरी दीदी बहुत बडी डोक्टर बने.. देखना फीर तो तुम हमे पहेचानोगी भी नही.. हें..हें..हें.. चलो..

सबाना : (अपनी आंख साफ करते मुस्कुराते) भाइ.. आप बहुत बदमास हो.. कीसने कहा मे आपको नही पहेचानुगी..? अब तो मे सबको कहुगी.. की देखो.. दुनीयामे सबसे बेस्ट मेरा साहील भाइ हे.. भाइ.. जब मे बेंगलोर जाउगी तब आप मुजे स्टेशन छोडने तो आओगेनां..? वरना मे नही जाउगी.. आपको अभीसे केह देती हु..

साहील : (मुस्कुराते साथ चलते) हंम.. देखता हु.. अगर सहेरमे होउगा तो जरुर आउगा..

सबाना : (साथ चलते) भाइ.. मुजे पता हे आप मुजसे नाराज हो.. लेकीन मे आपको चस बताउ..? जब कादीरभाइ ओर सायरा दीदी चले गयेनां.. तो हम घरवाले लग भग टुट ही चुके थे.. अ‍ेक बारतो मेरे दिमागमे बुरे खयाल आने लगे थे.. की मे भस इस फानी दुनीयाको छोडकर चली जाउ.. भाइ.. अ‍ेक बारतो मैने डोक्टर बननेकी उमीद ही छोडदी थी.. लेकीन भाइ कसमसे.. उस वक्त मुजे आपकी खयाल आया.. क्युकी मे आपको बहुत प्यार करती थी..

साहील : (सोक्ट होते सुनते) तो फीर तुमने मुजे पहेले फोन क्यु नही कीया..? क्या इस भाइपे इतना भरोसा नही था..?

सबाना : (आंख गीली करते) भाइ.. भरोसा तो खुदसे भी ज्यादा आपपे हे.. लेकीन में कैसे आपको फोन करती..? अगर मेने आपको फोन करके बता दीया होता तो आप लोग फौरन यहा चले आते.. तो मेरे मम्मी पापाको पता चल जाता की मैने आपको फोन कीया हे.. भाइ.. तब सीचुअ‍ेशन ही अ‍ैसी थी..

तो मेरे फोन करनेसे पापा मुजपे ओर आप भी सक करते.. ये तो अच्छा हुआ अम्माने बडी अम्माको सब बता दीया.. ओर आज मेरे इस भाइने सबको सम्हाल लीया.. भाइ.. मुजे आप पे बहुत गर्व हे.. अगर आप नही आये तो मे भी नही जाउगी.. आपकी कसम.. नही बनना मुजे डोक्टर.. फीर आपसे कभी बात भी नही करुगी..

साहील : (आंख गीली करते) रुलायेगी मुजे..? अब तो सब सही होगया हेनां..? चल अपना आंसु पोछले.. मे आजाउगा.. बस..? अब तो खुस..?

सबाना : (सामने देखते) नही.. जबतक मेरे भाइकी आंखोमे आंसु हे तबतक मे खुस नही रहुगी.. हें..हें..हें..

साहील : (आंख साफ करते मुस्कुराते) अबतो खुस..? हें..हें..हें..
 
सबाना : (मुस्कुराते साथ चलते) हंम.. भाइ.. आपको तो जुठ मुठ हसना भी नही आता.. सीर्फ मेरा दिल रखनेके लीये हस रहे हेनां..? दीजीये मेरा गीफ्ट.. मे इसे सम्हालके रखुगी.. ओर बेंगलोर जाकर पहेनुगी.. अबतो खुस होजाइअ‍े.. हें..हें..हें..

साहील : (जेबसे बोक्ष नीकालकर देते) तो फीर इतनी देरसे नखरे क्यु कर रही थी..? हें..हें..हें..

सबना : (बोक्षको सीनेपे लगाते हसते) क्युकी मे मेरे भाइके दिलको नही तोड सकती.. आज पता चला मेरा भाइ मुजे कीतना चाहता हे.. भाइ.. लव यु..

साहील : (मुस्कुराते) हंम.. दीदी.. अभी आपने अपने भाइकी चाहतको देखा ही कहा हे..? कभी अजमाना चाहो तो देखलेना.. मे जान भी दे दुगा..

सबाना : (फौरन साहीलके मुहपे हाथ रखते आंख गीली करते) भाइ.. मत बोलो अ‍ैसा.. मेने आपकी चाहतको देख भी लीया.. ओर महेसुस भी करती हु.. नही अजमाना मुजे कुछ.. अगर आप जान दे दोगे.. तो फीर क्या मे जीन्दा रेह सकती हु..? भाइ.. आइ लव यु.. मे मेरे साहील भाइको बहुत चाहती हु.. भाइ.. जब मे वहा चली जाउ तब आप कमसे कम हप्तेमे अ‍ेक बार फोन जरुर करना..

साहील : (साथ चलते) हां जरुर करुगा.. मे तेरे जानेके बाद चाचा ओर चाचीको हमेसाके लीये गांव लेजा रहा हु.. ओर कादीर भाइ ओर सायरा दीदीको ढुंढकर भी वापस लाउगा.. ओर यही मकान उनको दिलवाउगा.. जहा अभी आप लोग रहेते हो.. आइ प्रोमीस..

सबाना : (सरमाते भीरेसे) भाइ.. आपसे अ‍ेक बात पुछु..? क्या कादीरभैयाने ओर सायरा दीदीने आपसमे सादी करके सही कीया..? क्या ये रीस्ता नाजायज नही हे..? आप लोग हमारे गांवके बारमे भी बहुत कुछ बता रहे थे.. तभी तो पापा मान गये..

साहील : (मुस्कुराते) हां सबुदीदी.. वैसे हमारे सभ्य समाजकी द्रष्टीकोणसे देखा जाये तो नाजायज हे.. ओर मेरी द्रष्टीसे देखा जायेतो मुजे सभी रीस्ते जायज लगते हे.. ये सब अपनी अपनी सोचपे नीर्भर करता हे.. हमारे यहा अ‍ैसे रीस्तेको स्वीकार नही करते.. लेकीन आप हीमाचल चली जाओ.. तो वहा आजभी उस राजाकी सुरु की हुइ परंपराको लोग नीभाते हे.. तभी तो वहा आज अ‍ेक भी विधवा या त्यक्ता नही मीलती.. सब लोग अपनी जींदगी हसी खुसीसे गुजारते हे.. ओर अब तो ये सब हमारे गांवमे भी होने लगा हे..

सबाना : (सरमाकर हसते) हंम.. मे जानती हु.. क्या मुना भैया ओर श्रीधर भैयाने भी अपनी बहेनसे सादी करली हेनां..? मेरी इस बारेमे जयश्री दीदीसे बात हुइ.. वो अपने भाइसे सादी करके बहुत खुस हे..

साहील : (मुस्कुराते साथ चलते) हां दीदी.. सीर्फ ये दोनोने ही नही.. बहुत सारे लोग अपनी बहेनसे तो कोइ अपनी विधवा भाभीके साथ.. हमारा बंसी खुद उनकी विधवा बुआके साथ सादी कर रहा हे.. उसी सादीकी खरीदी करने तो इधर आया हे.. ओर वैसे देखा जायेतो हमारे अबु अम्मीके खुदके रीस्ते नाजायज हे.. चाची चाचाकी बुआकी लडकी हे.. तो खुद मेरी अम्मी अबुके सगे चाचाकी लडकी हे.. तो क्या वो दोनो उनकी बहेने नही हुइ..?

सबाना : (हसते) भैया.. लेकीन वो तो उनकी सगी बहेने थोडीनां हे..? हें..हें..हें..

साहील : (मुस्कुराते) बहेन बहेन ही बहोती हे.. फीर चाहे सगी हो या दुरकी.. ये सगी बहेन क्या होता हे..? क्या तुम मुजे बता सकती हो..?

सबाना : (सर्मसार होते मुस्कुराते) भाइ.. मीन्स.. मानलोना दोनो भाइ बहेन अ‍ेक ही मांकी कोखसे जन्मे हो.. उसीको तो सगे भाइ बहेन कहेते हे..

साहील : (हसते) हंम.. दीदी.. आपको तो पता हे.. पहेलेक जमानेमे राजा ओर साहुकार कीतनी सादीया करते थे.. हमारे समाजमे भी चार चार सादीया करते हे.. तो मानलो.. कीसी मर्दकी दो बीवीया हे.. अ‍ेक बीवीसे लडका हुआ.. ओर दुसरी बीवीसे लडकी.. तो फीर आप उसे सगे भाइ बहेन मानती हो.. की नही..? बस.. सीर्फ इतना बतादो..

सबाना : (हसते) ओह.. हें..हें..हें.. भाइ.. आपने तो मुजे उलजनमे डाल दीया.. सायद.. उसे सगे नही.. सौतेले भाइ बहेन कहेते हे.. हें..हें..हें.. क्युकी दोनोकी मां अलग अलग हे.. ओर बाप अ‍ेक हे..

साहील : (हसते) हंम.. तो फीर इसका मतलब ये हुआ की इस मामलेमे ओरतको तवज्जो देते हे.. मर्द को नही.. तो फीर हम ओरतोकी भावनाओका खयाल क्यु नही रखते..? हम क्यु इनकी बेइजती करते हे..? क्या उनको अपने तरीकेसे जींदगी जीनेका अधीकार नही..? क्या वो सीर्फ बच्चे पैदा करनेके लीये हे..? मनलोना.. दोनोकी मां अलग अलग हे.. तो फीर उन भाइ बहेनके बीचकी सादीको तुम क्या मानती हो..? जायज की नाजायज..? क्या उन दोनोके बीच सादी हो सकती हे..? हें..हें..हें..

सबाना : (सरमाते हसते) भाइ.. मुजे नही पता.. हें..हें..हें.. आप तो हम ओरतोके बारेमे काफी कुछ जानते हे.. भाइ.. मुजे आज खुसी हुइ.. की मेरा भाइ ओरतोकी इजत भी करना जानता हे..

साहील : दीदी.. हमारे अबु ओर हमारी अम्मा.. दोनो सीर्फ अ‍ेक ही रीस्ता तो दुर हे.. तो फीर सायरा दीदीकी क्या गलती..? इसीलीये मेतो कादीर भैया ओर सायरा दीदीके रीस्तोको भी गलत नही मानता.. सोचो जब इस पृथ्वीपे पहेला आदमी ओर ओरत आये होगे.. तब उनके बच्चोने भी तो यही सब कीया होगा..

तभी तो हम सब इतने सारे लोग होगये.. तब कहा कोइ रस्ते नाते थे.. जीस पृथ्वीपे हम रेहते हे ओर उनका नाम जीसके उपरसे पडा हे.. वो प्रुथुराजाने खुद उनकी बहेनसे सादी करली थी.. तब कहा कोइ रीस्ते नाते थे..? दीदी.. दुनीया प्रकृतीसे चलती हे.. नाही की समाजके नीयमोसे लोग प्रकृतीकी पुजा करते हे.. समाजकी नही..

सबाना : (मुस्कुराते) अरे वाह.. भाइ.. आइ अ‍ेम इम्प्रेस.. आप बाते बडी दिलचस्प कर रहे हे.. आपको बातोमे कोइ नही हरा सकता.. हें..हें..हें.. कीसने कहा आप कम पढे लीखे हे.. हें..हें..हें..

साहील : (सरमाके हसते) हंम.. भाइको मस्का लगा रही हे..? चल कोइ बात नही.. अब कुछ ठंडा बंडा पीते हे.. अभी सबलोग आजायेगे..

ओर सबाना हसते अ‍ेक नजरसे साहीलको देखती रही.. आज उसे साहील बहुत ही मेच्योर लग रहा था.. वो साहीलकी बातोसे साहीलसे काफी इम्प्रेस होगइ थी.. उसे मन ही मन अपने बडे भाइ कादीर ओर बडी बहेन सायराके बीच सादीका रीलेशन सही लगने लगा.. ओर अ‍ेक पल तो वो खुद अपने भाइ सहीलके साथ सादीकी कल्पना करने लगी.. तब वो बहुत ही सरमाइ.. ओर उसने हिंमत करके साहीलका हाथ पकडलीया..
 
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