Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 47 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

फीर साहील ओर सबाना दोनोही प्यार भरी बाते करते चल रहेथे तब उनको लखन ओर सृती मील गये.. तब चारो अ‍ेक कोफी शोपमे चले गये.. तो सृती ओर सबाना बेंगलोरके बारेमे बाते करने लगी.. तब बातो ही बातोमे सृतीने सबानाको बहुत सारी जानकारीया देदी.. ओर वहा उनके पहेचान वालेका नंबर भी दे दीया.. ओर सबानाको स्कोलशीपके बारेमे भी जानकारी देदी.. तब सबाना सभी जानकारी लेकर बहुत ही खुस होगइ..

तो कुछ ही देरके बाद वहा बंसी सांती जयश्री ओर जागृती भी फोन करके आगये.. पांचो लेडीस अ‍ेक दुसरेकी खरीदारीकी जानकारीया देने लगी.. तब सबानाने साहीलकी गीफ्टके बारेमे बात छुपाली.. तबतक बंसीने सबके लीये ठंडा ओर नास्तेका ओर्डर करदीया.. तब सब लेडीससे बाते करते हुअ‍े भी जागृती ओर जयश्री आपसमे अ‍ेक दुसरेके कानमे घुसपुस करते बार बार लखनकी ओर देखते हस रही थी.. तो सांती सृती ओर सबाना तीनो ही अपनी बातोमे मसगुल थी..

सृती अब भी सबानाको सब बाते बता रही थी.. ओर बातो ही बातोमे सृतीने गांवमे ही अ‍ेक गायनेक डोक्टरकी नोकरीकी बाते भी करली.. जीसे सुनकर सबाना बहुत खुस होने लगी.. तब सांती दोनोकी बाते बडे ही गौरसे सुन रही थी.. तबतक सृती ने सांतीको भी बहुत कुछ पुछ लीया.. तो सांतीने सरमाते अपनी पुरी लव स्टोरी सुनादी.. ओर साथमे श्रीधर जयश्री ओर मुना बरखाकी भी बाते भी हुइ.. जीसे सुनकर सबानाके दिलमे भी हलचल बढ गइ.. ओर वो साहीलकी ओर प्यार भरी नजरोसे देखने लगी..

जब सब लोगोकी खरीदी होगइ.. ओर चाइ नास्ता करलीया.. तो सबलोग बाते करते बहार नीकल गये.. ओर अपनी अपनी कारमे सब सामान रखकर वापस फीरोजके घरकी ओर जाने लगे.. वहा सबलोग घरमे चले गये तब फीरोज अपनी नोकरीपे जा चुकाथा.. तो सबानाने अपना सब खरीदीका सामान ले लीया.. लेकीन उसने ज्वेलरी बोक्षको अपनी सलवारकी जेबमे छुपाकर रखा था..

सबाना अपने कपडे अपनी मम्मीके पास रखकर जटसे अपने रुममे चली गइ.. ओर साहीलने दिया पेन्डल चेइनका बोक्ष ओर ब्रा पेन्टीके सेटको अपनी अलमारीमे छुपाकर रख देती हे.. ओर जटसे वापस बहार आजाती हे.. तब जरीना ओर सलमा उनके सब कपडे देख रही थी.. तब सबाना सबको पानी पीलाती हे.. तो लखन बंसी ओर साहील बहार आइसक्रिम लेने चले जाते हे.. तब जरीना..

जरीना : (सबानाकी ओर देखते) सबु.. इतने सारे कपडे लेनेकी क्या जरुरत थी..? भाइको मना कर देती.. कीतना खर्चा करवाया हे तुमने..

सबाना : (सरमाते हसते) मम्मी.. मे मना कर रही थी.. लेकीन भाइजानने सब जबरदस्तीसे दीलवाया..

सलमा : (मुस्कुराते) हां तो सही तो हे.. अब हमारी सबाना वहा बडे सहेरमे पढने जा रही हे.. तो इतने कपडे तो चाहीयेनां.. साहीलने सही कीया हे..

सृती : (मुस्कुराते) हां भाभी.. साहीलभाइने सही कीया हे.. ओर अब आप सबानाकी कोइ चीन्ता मत करना मेने उसे सब समजा दीया हे.. अगर अभी जो अ‍ेक्जाम हे.. उनमे मेने कहा इतना परसंन्ट आगया तो उनको वहा स्कोलरशीप भी मीलेगी.. तो अभी साहीलभाइने जो पैसे दिये हे उन्हीमे उनकी सब पढाइ होजायेगी..

जरीना : (खुस होते) देवरानीजी.. तबतो आपके मुहमे घी सकर.. मेरी सबुका सभी सपना पुरा होजायेगा..

सृती : (मुस्कुराते) भाभी.. सीर्फ इतना ही नही.. जब सबाना पढकर वापस आयेगी तब हमारे गांवमे ही उसे होस्पीटल सम्हालनी हे.. वहा उनको सरकारी नोकरी मील जायेगी.. तब तो आप लोग भी उधर ही होगे.. हें..हें..हें..

जरीना : (मुस्कुराते) देवरानी.. आपकी सभी बाते सच हो.. आज आप सबलोग हमारे फरीस्ता बनकर आये हे.. अ‍ेक के बाद अ‍ेक खुसी देते ही जा रहे हे.. आज हम सब चेइनकी नींद सोयेगे..

सलमा : (हसते) अरी.. तु चीन्ता मत कर.. हमारा साहील हेनां.. हें..हें..हें..

सब लेडीस बाते कर रहीथी तब साहील लखन ओर बंसी सभीके लीये आइसक्रिम लाते हे.. ओर सब लोग आइसक्रिम खाते बाते करते हे.. तब आज पहेली बार जरीना साहीलकी ओर प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. आज उसे साहील मे अपना बेटा नही.. उपना दामाद नजर आ रहा था.. जो इस बातके लीये गांवमे जाकर कभी फुरसतमे फीरोजसे बात करके उसे मनाना था.. तो लखनके पेन्टमे अब भी तंबु बना हुआ था..

तो जरीना.. सलमा.. जागृती जयश्री सांती ओर सृती सबाना.. सबकी नजर बार बार लखनकी पेन्टकी ओर चली जाती थी.. फीर सबलोग नीकलने लगते हे.. तब जरीना सबको गले मीलने लगी.. तो सबाना भी हस हसके सबको गले मीलने लगी.. जब साहीलको गले मीली तब सबाना उनकी आंखोमे प्यार भरी नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. तब मुस्कुराते उनकी आंख गीली होगइ.. ओर साहीलको सीर्फ इतनाही केह पाइ.. थेन्क्स..

तो साहीलकी आंख भी गली होगइ.. ओर वो जटसे बहार नीकल गया.. तब सबाना उनको देखती ही रही.. साहील बहार नीकलकर अपनी आंखोको पोछने लगता हे.. तब भी सबाना उनकी ओर देख रही थी.. जैसे दो प्रेमी अ‍ेक दुसरेसे बीछड रहे हो.. आज पहेली बार सबानाके दिलमे साहीलके लीये बेसुमार प्यार बरस रहा था.. उनको साहीलसे बीछडनेका दुख हो रहा था.. तब चार आंखे उनकी ओर देख रही थी.. अ‍ेक थी सलमा ओर दुसरी थी जरीना.. दोनो ही अ‍ेक दुसरेके आंसु देखकर सब कुछ समज गइ..
 
सबलोग इजाजत लेकर वहासे नीकल गये.. तब पुरे रास्ते साहील खामोस बैठा रहा.. जैसे अपनी मासुकासे बीछडनेका गम हो.. तो लखनने सृतीको साहील ओर सलमाके बारेमे सब कुछ बता दीया.. तो साहील ओर सलमा दोनोही सरमाने लगे.. फीर सलमा ओर सृती आपसमे बाते करने लगी.. तब सलमाने भी कीसीको ना कहेनेकी हीदायत देते अपनी ओर साहीलके बीच रीलेशनकी सब बाते खुलकर सृतीको बता दी.. की वो अभी साहीलसे प्रेगनेन्ट हे..

तब सृती सुनकर बहुत ही खुस होगइ.. ओर हसने लगी.. फीर सृतीने वही उनको कुछ गोलीया देदी ओर कुछ लीखकर देदी.. तो साहीलभी खुस होगया.. तब बंसीकी जीपमेभी जयश्री ओर जागृती सांतीको छेड रही थी.. तब सांती भी जुठा गुस्सा करते जागृती ओर जयश्रीको मारने लगती.. ओर सबलोग हसी मजाक ओर बाते करते अपने गांव पहोंय गये.. तो बंसी जयश्रीको उनके घरपे छोडकर सांती जागृतीको लेकर अपने घरपे चला गया..

लखनने साहील ओर सलमाको भी उनके घर छोड दीया.. ओर सृतीको लेकर हवेलीपे आगया.. तब सृती ओर लखनके पास बहुत सारे सारीके बोक्ष थे.. तो दया भी उनकी मददके लीये चली गइ.. तो मंजु भावना ओर पुनम आस्चर्यसे सृती ओर लखनकी ओर देखती रही.. तभी लखन सृती ओर पुनमकी ओर मुह बीगाडते नीर्मला भुमीकाके पास जाकर बैठ गया.. तो मंजु भावना ओर पुनम तीनो ही जोरोसे हसने लगी..

तभी सृतीने सभी बोक्ष मंजु भावनाको थमा दीये.. ओर कुछ बोक्ष सृती अपने साथ लेकर पुनमके रुममे चली गइ.. तो पुनम भी हसती हुइ सृतीके पीछे चली गइ.. तब मंजु ओर भावना दोनो ही सभी बोक्ष लेकर भुमीकाके पास जाकर बैठ गइ.. सभीकी आवाज सुनकर चंदा भी विजको गोदमे लेकर हसती हुइ बहार नीकल गइ.. आकर मंजुके पास आकर बैठ गइ.. ओर लखनकी ओर देखते मुस्कुराती रही..

चंदा : (सरमाते हसते) देवरजी.. लगता हे आजतो आपने बहुत सारी खरीदी करली..? पुरी दुकान खरीदकर लाये हे क्या..? हें..हें..हें..

लखन : (जोरोसे बोलते) हां.. आपकी छोटी सौतनको पुछलो.. उन्होने ही मुजसे सब खरीदी करवाइ हे..

सृती : (लखनकी आवाज सुनतेही दोडकर बहार आते) कीतने कमीने हो आप.. मम्मी.. ये सब जुठ बोल रहे हे.. मेने उनसे कोइ खरीदी नही करवाइ.. मेने इनको कुछ भी लेनेको नही कहा था.. इन्होने खुद लीया हे..

भुमीका : (जोरोसे हसते) अरे हमे थोडीना पता हे..? की तुमने क्या कहा होगा.. लखन बेटा जुठ थोडीनां बोलेगा.. हें..हें..हें..

सृती : (गुस्सा करते जोरोसे) अरे.. तो क्या मे जुठ बोल रही हु..? हां जाओ.. अब तुम भी इनकी तरफदारी करो.. ओर बैठ जाओ इनकी गोदमे.. कीतने कमीने हे.. अभी ठहेरो खबर लेती हु इनकी..

कहेते सृती लखनको मारनेके लीये कुछ ढुंढने लगी.. जब कुछ नही मीला तो लखनको मारनेके लीये उनकी ओर दोडकर आगइ.. ओर जैसे ही लखनको मारेने केलीये हाथ उठाया.. तब लखन सृतीसे बचते जोरोसे हसते सोफेके पीछे छलांग लगाकर चला गया.. तो सृती सीधे ही सोफेपे टकराकर उनपे गीर गइ.. तो सब लोग जोरोसे हसते दोनोका तमासा देखने लगे.. तभी सृती वापस लखनको गालीया देते खडी होगइ..

ओर लखनके पीछे जाने लगी.. तब लखन सृतीको सोफेसे दो तीन चकर लगवाकर उपर अपने रुममे दोडकर चला गया.. तब सृती सीडीयोके पास खडी होकर उपरकी ओर देखते गालीया देने लगी.. फीर सबकी ओर देखकर मुस्कुराइ ओर वापस पुनमको लेकर रुममे चली गइ.. तब बहारकी ओर मंजु चंदा ओर भावना सब बोक्ष खोलकर सारीया देखने लगी.. तो नीर्मला ओर भुमीकाभी देखके खुस हो रही थी.. तो रुममे..

सृती : (हसते) पुनोदी.. अभी ये सब बोक्ष आप अपने रुममे रखदो.. मेरे अंडर गार्मेन्टस हे.. हम बादमे देख लेगे.. मुजे आज आपसे बहुत सारी बाते करनी हे.. हमारे देवरके बारेमे.. हें..हें..हें.. चलीये बहार..

पुनम : (हसते धीरेसे) भाभी.. बताइअ‍ेना..? क्या उसने आपके साथ कोइ सरारतकी..? हंम..? हें..हें..हें..

सृती : (हसते सर्मसार होगइ) सरारत..? अरे पुछो ही मत.. वो तो बहुत ही कमीने हे.. मुजेतो बहुत सरम आइ.. अरे बहार तो चलीये अभी हम सारीया देखते हे.. सबके लीये लेली हे.. फीर हम आरामसे बेठकर बात करते हे.. आप सुबह केह रहीथीना हम सामको बात करेगे.. तो मुजे भी हमारे देवरके बारेमे आपको बहुत कुछ बताना हे.. ओर आपसे बहुत कुछ जानना हे..

पुनम : (हसते बहाकी ओर चलते धीरेसे) भाभी.. मुजे भी कुछ बाते कहेनी हे.. पहेले सारीया देखकर फ्रेस होजाइअ‍े फीर हम आरामसे बैठकर बात करेगे.. चलो..

सृती ओर पुनम सबके पास आकर बैठ गइ.. तो जैसेही लखनने लताको सारीके बारेमे कहा.. तो लताभी दोडकर नीचे आगइ.. ओर सबके साथ बैठकर सारीया देखने लगी.. तबतक लखन रुममे जाकर फ्रेस हो गया.. तब नीचेकी ओर सृती सबको अपनी अपनी सारीया देने लगी.. तो दया रजीया ओर चंपाभाभीके साथ नीर्मला भुमीकाको भी सारी मील गइ.. तो सबलोग लखनकी चोइस देखकर खुस होने लगी..

नीर्मला : (हसते) अरे हमारा लखनतो सारी बहुत ही अच्छी लाया हे.. क्या सब उनकी चोइस थी..?

सृती : (हसते) हां.. कहेते थे मेरी चोइस सबको पसंद आयेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे हसते) हां भाभी.. मेरे कपडे लेने जाती तब लखनभैयाको साथमे लेजाती.. मेरे सब कपडे वोही सीलेक्ट करते थे.. उनको कपडेके बारेमे बहुत कुछ ज्ञान हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां.. जब मे सादी करके इधर आइ तब मेरे लीये भी दो तीन बार ड्रेस ओर सारीया लेकर आये हे.. हें..हें..हें..

सबलोग अपनी अपनी सारी देखकर बहुत खुस हो रहेथे.. तब लखन कंपलीट होकर नीचे आगया.. तो नीर्मला भुमीका चंदा सबलोग लखनकी चोइसकी तारीफ करने लगी.. तब लखन बहुत ही खुस होते सबके पास बैठनेके लीये आने लगा.. तभी सृतीने आंखोके इसारोसे मंजु ओर पुनको लखनकी ओर इसारा कर दीया.. जैसेही लखन सबके पास आकर बैठ गया.. तब सृती पुनम मंजु चंदा चारो लखनके उपर घुसे लाते मारते टुट पडी..

तो लखन जोरोसे हसते सबसे बचनेकी कोसीस करता रहा.. तब नीर्मला ओर भुमीकाने हसते हुअ‍े लखनको बचालीया.. तो लखन सबको देख लुगा.. कहेते धमकी देने लगा.. तो सृती वापस उनको मारनेके लीये दोडी.. तब लखन छलांग लगाते बहारकी ओर भाग गया.. तो सभी ओरते जोरोसे हसने लगी.. अब सबको लखनके साथ मस्तीया करनेके बहुत मजा आ रहाथा..

तभी पुनम ओर मंजु.. दोनो ही अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते रहस्यमइ मुस्कान कर रही थी.. क्युकी वक्त बहुत तेजीसे बदल रहा था.. ओर अभी लखनके बारेमे सीर्फ मंजु ओर पुनम ही जानती थी.. की इस खानदानके सभी मर्दको अपनी जीम्वेवारी नीभानेका मौका मीलेगा.. ओर कुछ जीम्वेवारी मंजुने पुनमको अभीसे अपने बेटे वीजयके लीये भी सौंपदी थी.. जीसे सुनकर अ‍ेक बार तो पुनम जैसी लडकी भी सर्मसार हो गइ थी..
 
तो दुसरी ओर आज जयश्रीने भी बहुत सारे कपडे अपने लीये ओर ब्रीन्दाके लीये ले लीयेथे.. उसने श्रीधरके लीये भी दो टीसर्ट खरीद लीयेथे.. तब ब्रीन्दा बहुतही खुस होगइ.. तो सामतके घरपे भी सबलोग बैठकर सादीके कपडे देख रहेथे.. तब सांती जयाको सब कपडे दीखा रहीथी.. तो जागृती अ‍ैसेही मुह फुलाती जयाकी ओर गुस्सेसे देख रहीथी.. तब सांतीने इसारोसे जागृतीको अ‍ैसा ना करनेको मना कीया..

तो जागृती खडी होकर अपने रुममे चली गइ.. बंसी अपने रुममे फ्रेस हो रहाथा.. फीर वोभी बहार आकर सांती जयाके पास बैठ गया.. तभी वहा लखन आगया.. तो जयाने उनको हसकर आवकार दीया.. तो सांती लखनको देखकर सरमा गइ.. ओर लखन बंसीके पास आकर बैठ गया.. दोनो सादीकी तैयारीयाके बारेमे बाते करने लगे.. तब जागृती लखनकी आवाज सुनकर जटसे बहार आगइ..

ओर लखनको देखते ही सरमाके मुस्कुराने लगी.. तब जयाने जागृतीको लखनके लीये चाइ नास्तेके लीये कहा.. तो जागृती उनकी ओर देखते मुस्कुराते चाइ बनाने चली गइ.. तभी सामतभाइ भी आगये.. ओर तीनो सादीकी तैयारीयोकी चर्चा करने लगे.. तब कल सुबह बंसी ओर सांतीका मंडप मुहुर्त था.. तो लखनने हलवाइसे लेकर मंडप पंडालकी सब जीम्वेवारी लेली.. ओर तभी अपने सब दोस्तोको फोन करने लगा..

साहील श्रीधर मुनासे फोनपे बाते करके सबको सादीके कामपे लगा दीया.. तब कुछही देरके बाद श्रीधर ओर जयश्री भी आगये.. तो मुना भी बरखाको लेकर बंसीके घर आगया.. तो साहीलभी अपनी अम्माको कहेकर बंसीके घर आगया.. ओर कुछ ही देरमे घरपे सबलोग सामत भाइके घरपे इकठे हो गये.. तो घरपे सादीका माहोल बन गया.. तो सामतभाइ बहुत खुस होने लगे..

तभी जागृती सबके लीये चाइ लेकर आइ.. ओर सबको चाइ देने लगी.. तब चाइ लेते बंसीने जागृतीका हाथ छु लीया तब जागृती बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर बंसीकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते आगे बढ गइ.. फीर साहिल श्रीधरको देकर लखनके पास चली गइ.. तो लखनने भी जागृतीके साथ वोही हरकत की.. तब जागृती अ‍ेक बार फीर सरमा गइ.. ओर लखनके हाथपे चीमटी काटते हसती हुइ आगे बढ गइ.. फीर सबलोग अपने अपने कामपे लग गये.. तब अ‍ेक घंटेके बाद सामतभाइके घरपे मंडप लग चुके थे..

तो बरखा सांतीको उनके रुममे बैठकर हाथमे मंहेदी लगाने बैठ गइ.. तो जागृती सबको चाइ पीलाकर जयश्रीको लेकर सांतीके रुममे चली गइ.. फीर मंहेदीके लीये अपनी बारीका इन्तजार करते दोनो थोडी दुर बेडपे बैठकर आपसमे धीरे धीरे हस हसके लखन ओर बंसीके बारेमे बाते करने लगी.. जागृती ओर जयश्र िदोनो अपनी सभी बाते अ‍ेक दुसरेके साथ सेर करती थी.. तो आज अभी उनके साथ हुइ सरारतके बारेमे बता रही थी.. तो जयश्री भी सुनकर हसने लगी..

जागृती : (धीरेसे कानमे) जयश्री.. कमीने दोनो ही मेरे पीछे पडे हे.. मुजे तो दोनोको सम्हालनेमे बहुत तकलीफ होती हे.. अगर बंसी भैयाको लखनके बारेमे पता चल गया तो..?

जयश्री : (मुस्कुराते कानमे) कमीनी.. इसीलीये तो तुजे कइ दिनोसे केह रही हु.. की अ‍ेक बार तेरे भाइ बंसीको अच्छी तराह मीलले.. ओर तु हेकी मानती ही नही.. अ‍ेक बार उनसे चुदवाकर देखतो ले.. हो सकता हे इसके बाद सायद तु लखन भैयाको भुलजाये..

जागृती : (सरमाकर हसते धीरेसे कानमे) नही जयश्री.. लखन मेरा पहेला प्यार हे.. मेरा सपनोका राजकुमार.. उसने मुजे वो सुख दिया हे जो कोइ ओर नही दे सकता.. हम दोनोने अ‍ेक दुसरेसे साथ जीने मरनेके कीतने वादे कीये थे.. तुम भी तो हमारी साक्षी थी.. तो मे उसे इतनी आसानीसे कैसे भुल सकती हु..?

जयश्री : (धीरेसे मुस्कुराते) जागु.. पहेले तुम ये बात क्लीलीयर कर.. की तुजे सारी जींदगी लखन भैयाके साथ बीतानी हे या फीर बंसी भैयाके साथ..? मत भुल बंसी भैया तेरे प्यारमे पागल हे..

जागृती : (सरमाकर हसते) जयश्री.. बाततो तेरी सही हे.. अब मैनेभी फैसला करलीया हे.. की अब भाइके साथ सादी करके उनके साथ ही जींदगी बीतानी हे.. लेकीन फीर भी मे लखनको नही भुल सकती.. वो मेरा आज भी ड्रिमबोय हे..

जयश्र : (थोडा हसते कानमे) कमीनी.. तो फीर चुदा दोनोसे मेरे बापका क्या जाता हे.. पता नही तु लखन भैयाका गध्धे जैसा लंड कैसे जेल पाती हे.. तेरी जगह मे होती तो मेरी चुत तो अभी फट गइ होती.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाकर हसते) कमीनी.. इसीलीये तो केह रही थी.. की अ‍ेक बार तुम भी उनसे चुदवाले.. बहुत मजा देता हे.. तु इस बातको नही समजेगी..

जयश्री : (सरमाते अ‍ेक मुका मारते धीरेसे) ना बाबा ना.. मुजे समजना भी नही हे.. तु ही चुदवा उनसे.. नही चुदवाना मुजे.. मेरे लीये तो मेरा भाइ ही ठीक हे.. वो भी मेरी मस्त चुदाइ करते हे.. जागु.. तुजे पता हे.. जब तक वो मुजे दो बार नही चोद लेते तबतक मेरे उपरसे उतरनेका नाम ही नही लेते.. अच्छा हुआ मौसीने खुद हम दोनोकी सेटींग करवादी.. वरना पता नही मेरे नसीबमे कौनसा लडका होता..

जागृती : (मुस्कुराते कानमे) जयश्री.. तु फीकर मत कर.. पीछली बार लास्ट टाइम मीले.. तब ही मेने उनको केह दीया था.. की अब हम दुबारा नही मीलेगे.. ओर कभी मेरा मीलनेका मन हुआ.. तो मे खुद फोन करके तुजे बुला लुगी.. तब तुजे आना पडेगा.. तो वो बंसीको धोखा नही देगे.. कहेते दुबारा मीलनेके लीये मना करने लगे.. तब मेने उनको हमारे प्याका हवाला ओर कसम देते बडी मुस्कीलसे मनाया.. तब जाके माने..

जयश्री : (मुस्कुराते कानमे) कमीनी.. इसका मतलब वो तो बहुत ही सरीफ हे.. बस.. तु ही चुदकड हे.. जो अभी भी दो दो लंडसे चुदवाना चाहती हे.. तेरे अंदर ही आग लगी हुइ हे.. कमीनी इसीलीये केह रही हु.. अ‍ेक बार बंसी भैयासे अच्छेसे चुदवाले.. वो तेरी सभी आग सांत करदेगे..

जागृती : (सरमाते कानमे) ठीक हे.. हमे अकेलेमे मीलनेका मौकातो मीलने दे.. अभी तो उनकी सांती भाभीके साथ सादी हे.. तो ये दो तीन दिन कुछ नही हो सकता.. फीर भी मौका मीला तो हम दोनो देख लेगे.. बस..?

जयश्री : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे) हंम.. कमीनी.. मौका मीलता नही मौका बनाना पडता हे.. देखले.. अगर मौका मीलेतो छोडना नही.. बस.. अ‍ेक बार अपने भाइसे चुदवा लेना.. जागु.. भाइसे चुदवानेका अ‍ेक अलग ही मजा हे.. अ‍ेक बार ट्राइ करके देखले.. हें..हें..हें..

दोनो ही सहेलीया अ‍ेक दुसरेके साथ हस हसके धीरे धीरे अ‍ेक दुसरेके कानमे बाते कर रही थी.. लेकीन ये दोनोको नही पता था की दोनोके उपर सांती नजर जमाये अपने हाथोमे महेंदी लगवा रही हे.. तो बहारकी ओर सामतने सुबह ही सबको फोन करके सादीका न्योता देदीया था.. तो आजु बाजुके सभी पडोसकी लेडीस बंसी ओर सांतीकी सादीके गाना गानेके लीये आगइ.. तब सांती रुममे गाना सुनकर बहुतही सर्मसार हो रही थी..

तो हलवाइ भी अपनी टीमको लेकर आचुका था.. ओर मीठाइआ बनानेकी तैयारीया कर रहा था.. तभी देवायत ओर भानुभी अपने खेतोसे सामत भाइके पास आकर बैठ गये.. तो कुछ देखके बाद पंचायतके दुसरे सदस्योके साथ रमेश भी आगया.. तो जया रमेशको देखते ही खुस हो गइ.. ओर सब लोग सादीकी तैयारीयोका जायजा लेने लगे.. ओर लखनकी टीमको सुचनाये देते रहे.. कुल मीलाके सामत भाइका घर सादीका घर हो गया.. तब सामत भाइ बहुत खुस होने लगे...

कन्टीन्यु
 




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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १८९

तो हलवाइ भी अपनी टीमको लेकर आचुका था.. ओर मीठाइआ बनानेकी तैयारीया कर रहा था.. तभी देवायत ओर भानुभी अपने खेतोसे सामत भाइके पास आकर बैठ गये.. तो कुछ देखके बाद पंचायतके दुसरे सदस्योके साथ रमेश भी आगया.. तो जया रमेशको देखते ही खुस होगइ.. ओर सब लोग सादीकी तैयारीयोका जायजा लेने लगे.. ओर लखनकी टीमको सुचनाये देते रहे.. कुल मीलाके सामतभाइका घर सादीका घर होगया.. तब सामत भाइ बहुत खुस होने लगे...अब आगे

इधर हवेलीपे मंजु विजयको दुध पीलाते चंदा नीर्मला भुमीका सरला सब बाते कर रही थी.. भावना पुनम वाले रुममे अपनी बच्चीको दुध पीला रही थी.. तब लता उनके पास बैठकर रमा ओर नीलुके बारेमे बात कर रही थी.. लताने नीलुके बारेमे भावनाको सब बता दीया.. जीसे सुनकर भावनाका गुस्साभी सातवे आसमानपे चला गया.. वैसे तो मंजुने भावनाको उन दोनोके बारेमे बहुत कुछ बता दीया था.. भावनाको वोभी सब पताथा जो लताको भी नही पता था..

तब पुनम ओर सृती.. दोनो ही मंजुको कहेकर रश्मीके घरकी ओर टहेलते चली गइ.. क्युकी इनको सबकी हाजरीकी वजहसे अकेलेमे बाते करनेका मौका नही मील रहा था..तब दोनोही बाते करते रश्मीके घरकी ओर जानेके बजाये हवेलीके पीछे अ‍ेक गार्डन था.. उन्हीकी ओर चलने लगी.. जहा पुनम पहेली बार धीरेनको अकेले मीली थी.. ओर दोनो धीरे धीरे चलते बाते करने लगी..

पुनम : (हसते चलते) हां भाभी.. अब बताइअ‍े.. लखन भैयाने क्या सरारतकी आपके साथ..? हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) अरे दीदी.. पुछो ही मत.. हमारे देवरतो बहुत ही कमीने हे.. आजतो उन्होने हद ही करदी.. मुजेतो बहुत सरम आइ.. पता हे क्या हुआ..? जब हम सब सोपींग कर रहे थे.. तब मे उनको बहार खडा रखकर मेरे अंडर गार्मेन्ट ले रही थी.. तो बहारसे ही मुजे इसीरोसे हां नां करते मेरे अंडर गार्मेन्ट सीलेक्ट करवाने लगे.. हें..हें..हें.. मुजेतो बहुत सरम आइ.. ओर उपरसे वो कमीनी सेल्सगर्ल इनको मेरा पती मानने लगी..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. जबसे उनको पता चला हेकी मे भी उनकी भाभी हु.. तबसे वो मेरी भी कुछ ज्यादा ही मस्तीया करने लगे हे.. ओर मेरे साथ तो अब फ्लर्ट भी करने लगे हे.. मुजेतो बहुत सरम आ रही थी.. क्या आपके साथभी कुछ अ‍ैसा हुआ हे..?

सृती : (सरमाते हसते) हां दीदी.. दो दिन पहेले जब मे ओर मंजु साथमे थे तब मेरी ओर मंजुकी.. दोनोकी मस्तीया कर रहेथे.. तब वो मस्तीया करते मेरे साथभी फल्र्ट करने लगे थे.. तो कमीनी मंजुभी हस रही थी.. ओर कलभी हम दोनो अकेले सहेर जा रहे थे.. तबभी मेरे साथ फ्लर्ट कर रहेथे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) भाभी.. पहेले भी मस्तीखोर थे.. लेकीन आज कल वो बहुतही कमीने होगये हे.. आपको पता हे..? जब हम दोनो होस्टेलमे थे तब वो मुजे प्यार करने लगे थे.. लेकीन अपने दिलकी बात मुजे कभी नही केह पाये.. ओर मे तब बडे भैयासे प्यार करती थी.. हांलाकी मंजुभाभीने मुजे शक्तीया दी तब मेने सब जान लीया था.. लेकीन ये बात मुजे कल उन्होने भी कही.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते साथ चलते) दीदी.. क्या बात कर रही हो..? क्या सचमे आपको लखनभैया चाहते थे..? तो फीर अपने प्यारका इजहार क्यु नही कर पाये..? ये तो बहुत बडबोले हे.. देखा नही हम सबकी कैसे मस्तीया करते हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) नही भाभी.. तब वो भलेकी मस्तीखोर थे.. लेकीन बहुतही सर्मीले भी थे.. ओर ये बात भी उनहोने मुजे कल ही बताइ.. की मे आपसे प्यार करता था.. कल मेरे साथ बहुत फ्लर्ट कर रहे थे.. कहेते थे अगले जन्मके लीये मेरी बुकींग करलो.. हें..हें..हें.. लेकीन भाभी.. मेने भी उनको सब बता दीया.. उनको क्या पता मेरी हर जन्मके लीये बुकींग हो चुकी हे.. हें..हें..हें..

सृती : (जोरोसे हसते) बेचारे.. आपने तो उनका दिल तोडदीया.. हें..हें..हें.. लेकीन दीदी.. उनकी कपडेकी चोइस बडी मस्त हे.. मेरे चारो सेट उन्होने ही सीलेक्ट करवाया.. कहेते थे अब आपके अंडरगार्मेन्ट मे लेकर आउगा आप अपनी साइज बतादो.. कैसे बेसर्मोकी तराह मेरी साइज मांगने लगे.. मुजे तो बहुत सरम आइ.. हें..हें..हें.. उनके साथ मस्ती करनेमे बहुत मजा आता हे.. क्या आपके कपडे भी वोही लेने जाते थेनां..?

पुनम : (सरमाते हसते) हां भाभी.. मेने घरपे जुठ बोला था.. मेरे सभी कपडे वोही लेकर आते थे.. भाभी.. अ‍ेक राजकी बात बताउ..? वो मेरे अंडर गार्मेन्ट भी लेकर आते थे.. हें..हें..हें.. मेरी साइज भी उनको पता हे.. हें..हें..हें.. ओर पता हे आपको..? मेरे होस्टलकी मालकीन जो वहाकी मेडम हे.. लखन भैयाको बहुत प्यार करती हे.. वो अ‍ेक त्यक्ता हे.. हम वहा पढते थे तबसे दोनोके बीच जीस्मानी ताकुलात हे.. ओर आज भी कायम हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सोक्ट होते जोरोसे हसते) क्या..? लेकीन मेनेतो उनको देखा हे.. क्या मस्त पटाका दीखती हे.. लेकीन लखन भैयासे कीतनी बडी उमरकी हे.. हें..हें..हें.. ओह.. गोड.. कमीनी ये आग भी अजीब चीज हे.. कोइ उमर नही देखती.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. जब भी वो दोनो उनके कमरेमे मीलते.. तो उनको मेरी हाजरीसे कोइ फर्क नही पडता था.. दोनो कमीने मुजे बहार चोकीदारकी तराह उनका ध्यान रखने खडी रखते.. ओर अंदर रुममे जाकर मजे करते.. हें..हें..हें.. भाभी.. अ‍ेक बात कहु..? प्लीज.. कीसीको कहेना नही.. लखन भैयाने कल ही उनके साथ गांधर्व सादी करली हे.. सीर्फ मुजे बताया.. अभी इस बारेमे कीसीको भी नही पता..

सृती : (हसते) क्या.. सादीभी करली..? लेकीन दीदी.. उनकी आपसे साथ पटती भी बहुत हे.. आपके साथ अपनी हर बाते सेर करते हे.. आफ्टरओल आपको प्यार जो करते थे.. हें..हें..हें.. तभी तो आप उनकी हर बाते जानती हे.. हें..हें..हें.. दीदी उनके बारेमे ओर बताइअ‍ेनां.. सुनकर बहुत मजा आता हे.. हें..हें..हें..
 
पुनम : (हसते) भाभी.. वो बहुत ही अच्छे हे.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? जब हम दोनो स्कुलमे थे तब बडै भैया धिरेनका प्रस्ताव लेकर आये.. तब मुजे मालुम होता की लखन भैया मुजे चाहते हे.. तो मे धिरेनसे कभी सादी नही करती.. तब मेरी पहेली चोइस लखन भैया होते.. ओर मे उनसे सादी कर लेती.. कमसे कम लखन भैयासे सादी करके घरपे तो रहेती.. जहा मेरा पहेला प्यार बडे भैया हे..

सृती : (सरमाते हसते) दीदी.. कहेते हेना जो भी होता हे अच्छेके लीये होता हे.. अगर आप लखन भैयासे सादी कर लेती.. तो आप देवुसे कभी सादी नही करपाती..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. सही कहा आपने.. आज मे बडे भैयाकी अर्धागींनी हु.. भाभी.. जो भी हुआ अच्छा ही हुआ हे.. मेरी भी सुरुसे ही तम्मना थी.. की मेरा भी कोइ प्यारा देवर हो.. जो मे उनके साथ ढेर सारी मस्तीया करु.. ओर लखन भैयाने वो कमी पुरी करदी.. लेकीन फीर भी अ‍ेक अफसोस रहेगा.. की मे उनका प्यार कबुल नही करपाइ..





सृती : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. यही गार्डनके अंदर बैठकर बात करते हे.. मुजे हमारे देवरके बारेमे आज सब कुछ जानना हे.. मंजुकी तराह आपको भी तो सब पता चल जाता हे.. तो बताइअ‍ेना लखन भैयाको अ‍ैसे अचानक जडी बुटी देनेकी क्या जरुरत पड गइ..? मुजे कुछ अंदाजा तो हे.. फीर भी मे आपके मुहसे सब सुनना चाहती हु.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) भाभी.. इसीलीये तो मे इस बारेमे आपके साथ बात करना चाहती थी.. भाभी.. कुछ बाते हे जो मे आज आपके साथ सेर करना चाहती हु.. क्युकी आने वाले वक्तमे सीर्फ हम चारोको ही इस हवेलीको सम्हालना हे.. हमारी रमा भाभी उनकी बेटी नीलुको जरीया बनाकर हमारे खीलाफ बहुत ही खतरनाक खेल खेल रही हे.. वो नीलुको लखनके प्यारमे फसाकर हमारी जायदादके लीये हमारे खीलाफ बहुत बडी साजीस कर रही हे..

सृती : (सोक्ट होते आस्चर्यसे देखते) क्या..? अरे हां दीदी.. इस बारेमे आपसे ओर मंजुसे बात हुइ थी.. क्या उन मां बेटीके लीये लखन भैयाको वो जडी बुटी दी हेनां..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही भाभी.. बात सीर्फ उन मां बेटीकी नही हे.. लखन भैयाको जडी बुटी देना सीर्फ उन मा बेटीका ही रीजन नही हे.. साथमे कुछ ओर भी रीजन हे.. इसीलीये मे आपसे बात करना चाहती थी.. (अ‍ेक बेन्चपे बैठते) भाभी.. यहा बैठते हे..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. मे कुछ समजी नही..? ओर रीजन हे मतलब..? कहीयेनां..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी मतलब.. पहेले लखन भैयाके बारेमे बतादु.. की लखन भैयाकी हमारी रजीयाके अलावा राधु मेडम भी बीवी होगइ हे.. ओर आने वाले वक्तमे दो तीन ओर होजायेगी.. ओर इसके अलावा उनका कइ ओरतोके साथ जीस्मानी रीस्ता होगा.. हें..हें..हें..

सृती : (जोरोसे हसते) दोनो भाइ कीतने कमीने ओर ठरकी हे.. हें..हें..हें.. दीदी.. क्या वो इतनी बीवीओको सम्हाल पायेगे..? दिखनेमे लगते भी क्युट हे.. कीतना हेन्सम दिखते हे.. हें..हें..हें.. कोइ भी लडकी उनकी दिवानी होजायेगी.. हमारे पतीकी भी कीतनी बीवीया हे.. हें..हें..हें.. दोनो भाइकी तो बले बले हे.. हें..हें..हें..





पुनम : (हसते) भाभी.. तभी तो उनको कल जडी बुटी देनी पडी.. हें..हें..हें.. बाकी इनके बारेमे मे अभी कुछ ज्यादा नही बता सकती.. भाभी.. मुजे तो बतानेमे भी सर्म आ रही हे.. सुबह सुबह लताभाभी आइ थी.. हमने जो लखनभैयाको जडी बुटी पीलाइ थी.. लगता हे हमारा काम होगया हे.. लखन भैयाके पेनीसमे बहुत बडा बदलाव आगया हे.. लता केह रहीथी उनका हथीयार जो था.. उनसे बडा ओर मोटा होगया हे.. तो वो डर रही थी.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) हां दीदी.. वो बात सुबह हुइ.. जबसे मुजे पता चला उनको जडी बुटी दे दीहे.. तबसे मेरी भी जाननेकी उत्सुक्ता बढ गइ हे.. की क्या होगा.. मेने भी आज सुबहसे कइ बार उनकी पेन्टमे देखा हे.. बहुत बडा उभार दीख रहा था.. (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. अ‍ेक बात कहु..?

आज मुजसे रहा नही गया.. तो मेने उनकी खबर पुछली.. कहेते थे अब कोइ दर्द नही हे.. ओर काम भी सहीसे हो गया हे.. वैसे भी जब बडा नही था तब भी लता कइ बार चीलाती थी.. तो अबतो बडा होगया हे.. तो लता डरेगी नही तो क्या करेगी बेचारी.. हें..हें..हें...

पुनम : (सरमाते हसते) भाभी.. उनका दोस्त हेना वो मुना भैया.. उन्होने अपने सभी दोस्तोको वो स्टेमीना बढानेका आयुर्वेदीक दवाइका कोर्स करवाया हे.. इसीलीये तो लताभाभी चीलाती हे.. हें..हें..हें.. भाभी.. क्या आपने लखन भैयाको उनके पेनीसके बारेमे सीधा ही पुछलीया..? अब देखना.. आगे आगे क्या होता हे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) हां पुनोदी.. ओर नही तो क्या.. आपको ओर मंजुकोतो सब पता चल जाता हे.. तो क्या आप मुजे बता सकती हे की आगे क्या होगा..? क्युकी हमारा देवर आदमी बडा दीलचस्प हे.. हें..हें..हें..

पुनम : भाभी.. कुछ बाते हे जो मे आपको अभी नही बता सकती.. हां.. बाकी सब बता सकती हु.. भाभी.. पहेली बात.. आने वाले दिन हमारे लीये बहुत ही सुहाने दिन होगे.. आपको तो सब पता हेकी हम सब कौन हे.. तो मंजुभाभी केह रही थी की अब हम सबकी उमर थम जायेगी.. जब हमारा पोता जन्म लेगा तब भी हम अ‍ैसेही जवान रहेगी.. बस.. तब उमरमे कुछ ज्यादा फर्क नही पडेगा.. हें..हें..हें..

सृती : (मनमे खुस होते हसते) दीदी.. क्या वाकइ अ‍ैसा होगा..? आजके जमानेमें सुननेमे कीतना अजीब लगता हे.. तो फीर हम सबके बारेमे भी कुछ बताइअ‍ेना.. मुजे सब जानना हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) हां भाभी.. बता तो दुगी.. लेकीन देखना कुछ बाते सुनकर वीचलीत मत होजाना.. क्युकी कुछ बाते अ‍ैसी हे जो आप अभीसे विचलीत हो सकती हे..

सृती : (सरमाते हसते) अरे दीदी.. मे वीचलीत नही हुगी.. अबतो अ‍ैसी बाते सुननेकी आदी हो गइ हु.. अब अ‍ैसी बाते सुनकर बहुत मजा आता हे.. बताइअ‍े तो सही..
 
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. मंजु भाभीने कहा हे.. आगे जाकर हमारे पती हमसे सेक्स करनेमे इतना सक्षम नही होगे.. जो हमे संतुस्ट कर सके.. इसीलीये मंजुभाभीने भाइसे सभी तराहकी छुट लेली हे.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते) सभी तराहकी छुट मतलब..? मे कुछ समजी नही.. जरा खुलकर बताइअ‍ेनां..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. छुटका मतलब.. अभी सीर्फ इतना समजलो.. भाभीने कहा हे हमारे घरकी सभी ओरते.. हमारे ही घरके कीसीभी मर्दके साथ सेक्स कर सकती हे.. बस.. ये सब दोनोकी सहमतीसे होना चाहीये.. तो लखन भैयाको जडीबुटी देनेका अ‍ेक येभी कारण हे.. क्युकी भाइकी भी बहुत सारी बीवीया होगइ हे.. तो वो सबको ठीकसे टाइम नही दे पायेगे..

सृती : (सरमाते आस्चर्यसे देखते) दीदी.. क्या केह रही हे आप..? इसका मतलब भी जानती हे आप..? मुजेतो सुनकर डर लग रहा हे.. मे आपके कहेनेका मतलब कुछ कुछ समज रही हु..

पुनम : (मुस्कुराते) देखा.. इसीलीये मे सब आपको बताना नही चाहती थी.. हां भाभी.. ये सच हे.. जो आप समज रही हे.. क्युकी मे ओर मंजु भाभी.. आनेवाले समयके बारेमे बहुत कुछ जानती हे.. तब इस घरमे रीस्तोकी कोइ अहेमीयत ही नही रहेगी..

इनमे मे ओर आपभी बाकात नही रहेगी.. सबकुछ होगा जो मेरे ओर आपके मनमे अभी चल रहा हे.. भाभी.. हमारी जींदगी सीर्फ हमारे पती तक ही सीमीत नही रहेगी.. हमारी जींदगीमे हमारे पतीके अलावा ओर मर्द भी हे.. जो सीर्फ हमारे घरके ही होगे..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते) पुनोदी.. क्या केह रही हे आप..? तो क्या हमे लखन भैयाके साथ भी.. म..त..ल..ब.., बताने भी सरम आ रही हे.. हें..हें..हें..





पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) हां भाभी.. आप सही सोच रही हे.. लेकीन जबरदस्तीसे कुछभी नही होगा.. जोभी होगा अ‍ेक दुसरेकी सहमतीसे होगा.. भाभी.. अगर अ‍ैसी सीचुअ‍ेशन आइ.. तो आप अपने मनमे कोइ क्षोभ मत रखना.. ओर नाही कोइ गील्टी फील करना..

सीर्फ लखन भैया ही नही.. आगे जाकर हमारा वीजय.. फीर हमारा पोता.. जो स्वयंम आयेगा.. जीसके लीये ये सब बदलाव हो रहा हे.. तब हम ना चाहते हुअ‍े भी उनकी ओर आकर्सीत होजायेगी.. हम सब उनके साथ सेक्स करनेके लीये तरसेगी.. ओर यही सच हे..

सृती : (अपना सर पकडते) ओह गोड.. दीदी.. क्या तब ये सब वाकइ होगा..? क्या ये सब हमारे पतीको धोखा देना नही हे..? मुजेतो बहुत सरम आ रही हे.. ओर आपसे सब सुनकर मजाभी आ रहा हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. कोइ धोखा नही होगा.. क्युकी इन सब चीजोकी उन्होने मंजुभाभीको खुद परमीशन दी हे.. क्युकी वो खुद भी अ‍ैसे रीस्तोसे बंधने वाले हे.. वो भी तो वही सब कर रहे हे.. देखा नही.. इनकी कीतनी सीक्रेट बीवीया होगइ हे.. अब आपही सोचो.. क्या अ‍ेकही टाइममे सबको प्यार दे सकते हे..?

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. बाततो आपकी सही हे.. लेकीन फीरभी दिलमे अ‍ेक क्षोभ होता हे.. ओर अभी आपने कहाकी वो अ‍ेसे रीस्तोमे आने वाले हे.. मतलब..? दीदी.. आज सब खुलकर बता ही दीजीये..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. अभी सबकुछ तो आपको नही बता पाउगी.. लेकीन इतना जानलो हमारे घरकी ओरते जवान होगी.. मर्द नही.. अ‍ेक दिन अ‍ैसा आयेगा तब हमारा पीती भी सेक्स करनेके सक्षम नही रहेगे ओर हमारा देवर लखन ओर विजय भी.. तब हम सब क्या करेगी..? सीर्फ हमारे स्वामी ही जवान होगे ओर वो ही जवान रहेगे.. बाकी सब मे समय समयपे आपको बताती रहुगी.. अ‍ेक सीक्रेट ओर आपको बताती हु.. हमारी लताके बारेमे..

सृती : (मुस्कुराते) हां दीदी.. इनका थोडा बहुत पता हे.. मेरी सादीसे पहेले इस बारेमे मंजुके साथ अ‍ेक बार बात हुइ थी.. की आने वाले वक्तमे वोभी हमारी सौतन होजायेगी.. क्या यहीनां..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. लेकीन ये आधा सच हे.. सीर्फ इतना ही नही.. सुनो.. लता सुरुसेही हमारे पतीसे प्यार करती थी.. वो सादीसे पहेले हमारे पतीसे फीजीकल रीलेशन रखना चाहती थी.. लेकीन भाइने उनपे कुछ ज्यादा ध्यान नही दीया.. ओर वो भी लखन भैयाकी तराह अपने दिलकी बात भाइसे नही केह पाइ.. वो यहा सीर्फ भाइके लीये ही आइ हे.. ओर आपको तो सब पता हे की वोभी हमारी बहेन हे..

सृती : (हसते) हां दीदी मेरी सादीसे पहेले अ‍ेक बार मंजुसे इस बारेमे बात हुइ थी.. तब उसने कहाथा की हमारे बापु ओर रसला चाचीके बीच रीलेशन थे.. भानुभाइ भी इनकी ही संतान हेनां..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. ये सच हे.. लताभाभी आजभी भाइको उतनाही प्यार करती हे जीतना पहेले करती थी.. ओर भाभी.. कुछ दिन पहेले वो अपने प्यारका इजहार भी भाइसे कर चुकी हे.. अब वो वक्त दुर नही जब भाइके साथ उनका फीजीकल रीलेशन हो जायेगा.. वो हमारे लखन भैयाकी पत्नी होनेके बावजुद भी भैयाके साथ रीलेशन बनायेगी.. ओर आने वाले वक्तमे उनका बच्चा भी पैदा करेगी..

सृती : (आस्चर्यसे) ओह.. गोड.. दीदी.. क्या केह रही हे आप..? क्या ये गलत नही हे..? छोटेभाइ भाइकी बीवीके साथ..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) हां भाभी.. वैसे तो समाजकी द्नष्टीसे ये सब गलत हे.. लेकीन हमारे लीये ये गलत नही हे.. क्युकी मत भुलो हम सब वास्तवमे कौन हे.. वरना उस राजाकी चहीती रानी कहासे जन्म लेगी..? उसी राजाके लीये तो ये सब हो रहा हे.. वरना सोचो कोइ राजवी परीवारके घरमे अ‍ैसे रीस्ते होते हे..?

इसीलीये पीछली तीन पीढीसे सब आपसी रीस्तोमे ही सादीया करते आये हे.. भाभी.. वैसे भी लखन भैया कभी लताको प्रेगनेन्ट नही कर सकते.. क्युकी हमारे खानदानमे सीर्फ तीन ओरत अ‍ैसी हे जीनको सीर्फ हमारे पती ही प्रेगनेन्ट कर सकते हे..

सृती : (थोडी सीरीयस होते) दीदी.. लखन भैया प्रेगनेन्ट नही कर सकते मतलब..? मे कुछ समजी नही.. ओर सीर्फ तीन ओरत..? कौन हे वो तीन ओरत..?
 
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