Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 68 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती





my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 




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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२४

फीर भी दिलमे अ‍ेक सुकुन था.. क्युकी आज उनके मनकी मुराद पुरी होगइ थी.. कुछ देर अ‍ैसे ही आयनेके सामने देखती रही.. क्युकी सृतीके चहेरेपे लखनका विर्य लगा हुआ था.. ओर उसने उंगलीसे टच कीया.. ओर आंख बंध करते उगलीको चाट लीया.. ओर सरमाकर मुस्कुराने लगी.. फीर सृतीने अपना चहेरा धोकर साफ करलीया.. ओर सही होकर बहार आगइ.. तो लखन भी सरमाकर बाथरुममे घुस गया.. फीर दोनो कंपलीट होकर बहार नीकले.. ओर सृतीने रीसेपनीस्टको बोटल देते लेबोरेटरीमे भेजनेको कहा.. ओर दोनो वहासे नीकल कर कारमे बैठ गये.. तब.... अब आगे

सृती : (सर्मसार होते नजरे चुराते) लखन भैया.. अभी हमारे बीच जो भी कुछ हुआ वो नही होना चाहीयेथा.. अब जो हुआ सो हुआ.. अब भुल जाइअ‍े सब.. की हमारे बीच कभी अ‍ैसा हुआ भी था..





लखन : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे अपने आपको कंट्रोल नही करपाया.. ओर पता नही मे जोसमे क्या क्या बोल गया.. मुजे माफ करदो.. मे कुछ ज्यादा ही बहेक गया था..

सृती : (सामने देखते) लखन भैया.. पुनो दीदीने आपको ठीक ही कहा था.. आप वाकइ कमीने हो.. थोडासा तो कंट्रोल कर लेते.. मत भुलो मे आपकी भाभी हु..

लखन : (अ‍ेक नजरसे देखते) भाभी आइ अ‍ेम सोरी.. मेने आपको पहेले ही कहा था.. इसमे हमसे गलती भी हो सकती हे.. मे कंट्रोल नही करपाउगा.. लेकीन ये आपकी ही जीद थी.. आपको मना कर देना चाहीयेथा..

सृती : (गलतीका अहेसास होते) ठीक हे.. तो फीर इसमे ना गलती आपकी थी.. ओर नाही मेरी.. बस..? ये सीर्फ अ‍ेक टेस्टके लीये था.. फीर भी हम दोनो ही बहेक गये थे.. इसीलीये हम दोनो बरोबरके जीम्वेवार हे.. मुजे आपसे कोइ गीला सीकवा नही.. भुल जाइअ‍े सब.. (बहार देखकर आंसु बहाते) देवु.. आइ अ‍ेम सोरी.. सायद मे आपसे नजरे मीला पाउगी.. माफ करदो मुजे..

लखन : (सृतीके कंधेपे हाथ रखते) भाभी.. प्लीज.. रोइअ‍े मत.. गलती मेरी हे.. बस..? सजा दीजीये मुजे..

सृती : (हाथको हटाते) प्लीज.. डोन्ट टच मी.. आजके बाद मुजे कभी हाथ मत लगाना.. लखन भैया.. प्लीज.. मेने कहानां.. गलती मेरी थी.. मुजे आपसे अ‍ैसी डीमान्ड नही करनी चाहीये थी..

कहा तो लखन सृतीकी ओर देखता ही रहा.. उसे समजमे नही आया.. की गलती कीसकी थी.. पुरे रास्ते सृती खामोस बैठी रही.. ओर बहार देखती रही.. जब घर आया तो सृती कारसे उतरकर जोरोसे दरवाजा बंध करते लखनके सामने देखे बीना चुपचाप सीधी उपर अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करके अपने बेडपे पेटके बल लेट गइ.. ओर अपने हाथोमे चहेरा छुपाकर फुटफुटके रोने लगी.. काफी देर आंसु बहानेके बाद वो थोडी हल्का महेसुस करने लगी.. तभी..

लता : (बहारसे आवाज लगाते) दीदी.. कहा हो आप..? चलीये लंचपे सब आपका इन्तजार कर रहे हे..

सृती : (आंसु पोछते) लता तुम लोग बैठ जाओ.. मे अभी आइ..

लता : (जोरोसे) कोइ जरुरत नही.. हम सब लंच साथमे ही करेगे.. चलीये..

सृती : (खडी होते) अरे आरही हु बाबा.. जरा फ्रेस तो होजानेदो..

लता : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. जल्दीसे आजाइअ‍ेगा..

कहेते लता मुस्कुराते नीचे चली गइ.. तब सृती अपने आंसु पोछते बाथरुममे घुस गइ.. ओर अपना मुह धोकर साफ करलीया ओर टोवेल लेकर आयनेके सामने मुहको साफ करने लगी.. तभी उसने आयमे देखा.. तो सृतीको पुनमके साथ हुइ अ‍ेक अ‍ेक बात याद आने लगी.. ओर वो सरमा गइ.. उसे अपने चहेरेपे अ‍ेक संतुस्टी नजर आइ.. वो सोचने लगी.. आखीर वो चाहती थी उसे हासील कर ही लीया.. तभी..

सृतीकी परछाइ : सृती.. क्या सोच रही हे..? क्या हासील करलीया तुमने..? तेरे देवरकी नाराजगी..? इसमे तेरे देवरकी क्या गलती थी..? यही तो तु चाहती थी..

सृती : (मनमे) हां.. लेकीन उनको इतना आगे बढनेकी क्या जरुरत थी..? वो अपने आप भी तो कर सकते थे.. उनके मनमे खोट थी.. इसीलीये उनको कहेना पडा..

सृतीकी परछाइ : अच्छा..? उनके मनमे खोट थी..? खोट उनके मनमे नही तेरे मनमे थी.. जबसे पुनम ओर मंजुसे बात हुइ तबसे तुम दोनो ही उनके हथीयारको देखने मरी जा रही थी.. देखना क्या तुम तो इनसे भी आगे बढना चाहती थी.. क्या तु उनके साथ सेक्स करना नही चाहती थी..? इसीलीये तो उनके साथ आगे बढ रही थी.. तो फीर अब पीछे हट क्यु कर रही हे..? पुनमके सामने तो बडे डींगे मार रही थी.. अगर इस बार तेरा देवर तुमसे रुठ गया.. तो फीर कभी तेरे हाथ आने वाला नही.. सोचले..

सृती : (मनमे) नही नही.. सच केह रही हे तु.. मे अ‍ैसा नही होने दुगी.. मे लखनको खोना नही चाहती.. मे मना लुगी उसे.. मे यहा कब तक देवुके इन्तजारमे बैठी रहुगी.. मंजुने कुछ सोच समजकर ही हमारे लीये फैसला लीया होगा.. मे लखनको खोना नही चाहती.. इसके लीये मुजे जो भी कीमत चुकवानी पडे चुकाउगी.. चाहे मुजे उनके नीचे लेटना ही क्यु ना पडे..

सृतीकी परछाइ : (हसते) तो फीर क्यु इतने नखरे कर रही हे..? ना जाने क्या क्या सुना दिया उसे.. क्यु तुजे पुनम ओर मंजुलाने नही कहाथा..? की इनकी चपेटमे पहेले तुही आने वाली हे.. तुजे तब ही समज जाना चाहीये.. उसने सच ही तो कहा होगा..

अ‍ेकना अ‍ेक दिनतो तुजे इनका हम बीस्तर होना ही पडेगा.. तो फीर आज इतना अच्छा मौका हाथसे क्यु जाने दीया..? पुनमसे पहेले मील लेती उनसे.. देखा नही.. वो पुनमसे कीतना प्यार करता हे.. कही अ‍ैसा ना होकी तुमसे पहेले पुनम उनसे प्यार करले.. सोच क्या रही हे.. जा नीचे.. ओर उनको मनाले..

सृती : (मनमे) हां सही कहा तुमने.. मे लखनको हासील करना चाहती हु.. वो भी जोसमे ना जाने क्या क्या बोल गये थे.. लगता हे उनके दिलकी बात जुबापे आही गइ.. वो भी तो हम दोनोको चाहते हे.. हां.. अब की बार कहे.. तो मे उनका प्यार कबुल करलुगी.. अब मुजे कीसी भी हालमे लखनको मनाना पडेगा.. कीतनी मुस्कीलसे उनको मेरे साथ बोलनेके लीये मनाया था.. ओह गोड.. मुजसे क्या गलती होगइ..

रजीया : (बहारसे आवाज लगाते) भाभी.. चलीये.. सब आपका इन्तजार कर रहे हे.. कीतनी देर लगेगी..?

सृती : (जटसे बहार आते) अरे आइ बाबा..

कहेते वो मुस्कुराते नीचे आगइ.. तो डाइनींगपे सबलोग इन्हीका इन्तजार करते बेठे थे.. वो लखनसे नजरे नही मीला पाइ.. ओर मुस्कुराते लताके पास आकर बैठ गइ.. आज रमा भी उनके साथ बैठी थी.. तो आज लताने जान बुजकर राधीकाको लखनके साथ बीठाया.. तो राधीका बहुत ही सरमा रही थी.. वो अ‍ैसे पहेली बार फेमीलीके साथ खाना खा रही थी.. सबलोग खाना खाने लगे.. तब सृती बार बार नजरे चुराते लखनको देखने लगी.. तभी..
 
लखन : (मुस्कुराते) लता.. क्या मम्मीने खाना खालीया..?

लता : (मुस्कुराते) अरे वो तो कबका खाना खा लीया.. मेरे हाथोसे खीलाया उन्हे.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते रमाकी ओर देखते) भाभी.. अब कैसी हे आपकी तबीयत..?

रमा : (लखनकी ओर तीरछी नजरोसे मुस्कुराते) दीदी.. अब काफी ठीक हे.. बुखार तो उतर गया.. बस.. थोडीसी कमजोरी लग रही हे.. तो अ‍ेक दो दिन मे सब ठीक होजायेगा..

लखन : (मुस्कुराते) लता.. बंसीकी सादीको अब अ‍ेक दो दिन रेह गया हे.. तो सोच रहा हु.. हम सब परसो गांव चले जाये.. क्या कहेती हो..? राधु भी आयेगीनां..?

लता : (मुस्कुराते) अरे.. मम्मीकी तबीयत ठीक नही हे.. तो कीसी अ‍ेकको तो देखभालके लीये यहा रुकना पडेगा.. तो मे यहा रुकती हु.. आप राधुदीदीको लेजाइअ‍े.. हें..हें..हें..

रजीया : (सरमाते लताकी ओर देखते) नही दीदी.. आप लोग चले जाइअ‍े.. मे सब सम्हाल लुगी.. क्या हेना वहा राधु दीदी भी सबको मील लेगी..

राधीका : (मुस्कुराते) अरे दीदी.. मे कीसी ओर दिन सबको मील लुगीनां.. आप भी चली जाओ. मे यहा सब सम्हाल लुगी.. होस्टेलकाभी तो देखना पडेगा..

रजीया : (मुस्कुराते) तो ठीक हे.. मे ओर राधु दीदी यहा रुकती हे.. बाकी सबलोग चले जाइअ‍े..

सृती : (लखनकी ओर तीरछी नजरोसे देखते) लता.. मे इतने दिनोसे गांवमे थी.. तो अब क्लीनीकपे जाना जरुरी हे.. तो मे नही आ रही.. ओर वैसे भी अ‍ेक दो दिन मे मम्मी मौसी लोग भी आ रहे हे.. तो मे सोचती हु.. अब मम्मीके साथ अपने घर चली जाउ..

लता : (आस्चर्यसे देखते) अरे..? अचानक क्या हो गया..? अ‍ैसे कैसे चली जाओगी..? आप तो यहा रहेने वाली थी..? तो फीर अचानक फैसला क्यु बदल दीया..?

सृती : (लखनसे नजरे चुराते) लता.. अब हमेसाके लीये तो मे यहा नही रेह सकती..? अ‍ेक दिन तो जान ही पडेगा.. वहा घर भी खाली पडा हे..

लखन : (खाना छोडकर पानी पीते) ठीक हे लता.. जैसे भाभीकी मरजी.. जाने दो उसे..

कहेते लखन खाना छोडकर चुपचाप उपर अपने कमरेमे चला गया.. तो सबलोग उनको देखते ही रेह गये.. तब सृतीकी आंख लखनकी ओर देखते गीली होगइ.. सृतीने अपनी आंखे पोछते जल्दीसे अपने आपको सम्हाल लीया.. उनको लगाकी लखन उनको रोकनेके लीये उनसे बात करेगा.. तब बातो ही बातोमे मे उसे मनालुगी.. लेकीन यहातो सृतीका दाव ही उलटा पड गया..

ओर सृती लखनको जाते हुअ‍े देखती रही.. ओर अपने आंसु पोछलीये.. तब लता बहुत कुछ समज गइ.. की दोनोके बीच जरुर कुछना कुछ हुआ हे.. फीर सृतीने बीना कुछ कहे खाना खालीया.. फीर सब लोगोने खाना खालीया.. तो रजीया वहाका सब काम नीपटानेमे लग गइ.. तब लता हाथ पोछते उपरकी ओर जाने लगी.. तभी..

सृती : (सरमाते धीरेसे) लता.. लगता हे मेरे जानेकी बात सुनकर देवरजी थोडा नाराज हो गये हे.. प्लीज.. आप उसे थोडासा समजाओनां..

लता : (रुकते पीछे मुडकर) भाभी.. मे उसे क्या समजाउगी..? फैसला आपने बदला हे.. आपको समजना हे.. क्या आपको लगता हे वो मान जायेगे..? फीर भी मे उनसे बात करती हु..

कहेते लता उपर चली गइ.. तो सृती राधीकाको लेकर होलमे सोफेपे बैठ गइ.. तभी रमा धीरे धीरे चलते अपने रुममे आराम करने जाने लगी.. तो राधीका उनको देखती ही रही.. तो राधीकाको कुछ आृंकाये होने लगी.. फीर वो ओर सृती दोनो बाते करने लगी..

राधीका : (रमाको जाते देखकर धीरेसे) दीदी.. क्या हुआ हे रमा भाभीको..? वो अ‍ैसे क्यु चल रही हे..? बुखारमे तो कोइ अ‍ैसे नही चलते.. हें..हें..हें..

सृती : (मुडकर रमाके रुमकी ओर देखते) देवरानीजी.. उनके पैरमे मोच बोच आगइ होगी.. हें..हें..हें..

राधीका : (हसते धीरेसे) नही.. मोच तो नही आइ.. लगता हे मेरे पतीने ही उनकी सहलजके साथ कुछ कारस्तान कीया हे.. हें..हें..हें..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? क्या केह रही हो..? तो फीर अ‍ैसी बातोसे आपको बुरा नही लगता क्या..? मेरा देवरतो बहुत सीधा हे.. हें..हें..हें..

राधीका : (मुस्कुराते धीरेसे) नही दीदी.. वो कोइ सीधे बीधे नही हे.. मे हमारे खानदानके बारेमे बहुत कुछ जानती हु.. ओर मेरा पती तो कमीना सुरुसे ही अ‍ैसा हे.. इन सब चीजोके काफी सौकीन हे.. जब वहा पढते थे मे तबसे उनको जानती हु.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते) देवरानीजी.. तो फीर आप दोनो कबसे रीलेशनमे आये.. हें..हें..हें..

राधीका : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो.. कुछ बाते हे.. जो मे आपको नही बता सकती.. क्युकी मेने इनको कीसीको ना बतानेका वादा कीया हे.. तब वो बहुत ही डीप्रेशनमे थे.. टुट चुके थे.. जब वो वहा पढते थे.. तो मेने उसे सम्हाला.. बस.. तबसे हम दोनोके बीच रीलेशन हे..

सृती : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. मुजे पुनोदीदीने सबकुछ बता दीया हे.. यहीना..? की वो पुनोदीसे प्यार करने लगे थे.. लेकीन तब पुनोदी मेरे पतीको.. यानीकी अपने बडे भैयाको क्यार करती थी.. ओर लखन भैयाके दिलकी बात भी जानती थी.. फीर भी उसने लखन भैयाको कोइ भाव नही दीया..

राधीका : (सोक्ट होते देकर धीरेसे) हां दीदी.. क्या आपको भी पुनोदीने बतादीया हे..? बस इसी बातसे वो डीप्रेशनमे रहेने लगे.. तब पुनोदीके कहेनेपे मे उनको समजाती.. क्युकी पुनोदी सीर्फ मेरी खास सहेली ही नही.. मे उनको अपनी छोटी बहेन भी मानती हु.. वो अपने दिलकी हर बात मुजसे सेर करती हे..

ओर मे उनको समजाते समजाते मे ही उनको समजने लगी.. की लखन कीतने नेक दिल इन्सान हे.. ओर मेने उनको सम्हाल लीया.. दोनो अ‍ेक दुसरेको प्यार करने लगे.. फीर अ‍ेक दिन प्यार करते दोनो बहेक गये.. उस दिन हम दोनोके बीच सबकुछ हो गया.. तबसे ये सीलसीला चल रहा हे.. ओर हमने हाल ही मे सादी करली..
 
सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) देवरानीजी.. अ‍ेक बात कहु..? सायद अब हमारे देवरको उनकी बहेन मील जायेगी.. क्या आपको पता हे..?

राधीका : (मुस्कुराते) हंम.. पता हे.. अ‍ेक दिन हम दोनोकी बात फोनपे हुइ थी.. कहेती थी बाकी जब मे वहा आउगी तब मीलकर बताउगी.. दीदी.. तब तो अच्छा हे.. मेरे लखनके अरमान पुरे होजायेगे..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. लता रजीया ओर आप भी इनकी बीवी हो.. तो ये सब सुनकर आपको बुरा नही लगता..? की मेरी इतनी सारी सौतने हे..

राधीका : (मुस्कुराते) नही.. क्युकी मे लखनजीके साथ रीलेशनमे आइ उनसे पहेले ही इनके खानदानके बारेमे सबकुछ जानती हु.. क्युकी पुनोदीदीने मुजे सबकुछ बता दीया हे.. की वो अ‍ेक रोयइ फेमीलीसे बीलोन्ग करते हे.. ओर सायद मेने मेरे ससुरको भी देखा हे..

सृती : (सोक्ट होते धीरेसे आस्र्चसे) व्होट..? क्या आपने हमारे ससुरको देखा हे..? पर कैसे..?

राधीका : (मुस्कुराते) दीदी.. तब मे बहुत छोटी थी.. तो उनका चहेरा धुंधला धुंधला मेरे दिमागमे हे.. क्युकी पहेले मम्मी ओर पापा ही हमारी होस्टेलको सम्हालते थे.. वहा स्कुल ओर कोलेजमे उनका बहुत बडा ढोनेशन था.. ओर हमारी होस्टेल भी उन्होने बनवाइ हे.. ओर मम्मी पापा इनको सम्हालते थे.. तो वो कइ बार वहा भी आते थे..

सृती : (मुस्कुराते) तब तो आंटी जरुर उनको जानती होगी.. आपने उनको पुछा नही..?

राधीका : (मुस्कुराते) पापातो बहुत पहेले ही गुजर गये थे.. ज्यादातर मम्मीही होस्टेल सम्हालती थी.. मेने मम्मीको कइ बार पुछा.. लेकीन वो हर बार बातको टाल देती हे.. कहेती हे.. हमने ये होस्टेल कीशनजीसे खरीद लीया हे.. तबसे मुजे ओर मम्मीको लखनजीसे ओर पुनोदीसे ज्यादा लगाव हे.. वो इन दोनोको भी अपना बेटा ओर बेटी मानती हे.. ओर अभी तक हम ही होस्टेल चलाते हे.. ओर वीधीका विधान देखो.. आज मेने ही उनके छोटे बेटेसे सादी करली.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) तो फीर आप दोनोने सादीके बाद कुछ कीया बीया की नही..? आइ मीन.. अपनी सुहागरात.. हें..हें..हें..

राधीका : (सर्मसार होते नजरे जुकाते मुस्कुराते) नही दीदी.. हमने तो कीतने दिन ओर राते रंगीन कीहे.. हम जब भी मीलते हे हमारी सुहागरात ही होती हे.. वो इतना प्यार करतेहे मुजसे.. लेकीन सादीका सबकुछ अचानक हो गया.. ओर मेरे घरके मंदिरके सामने मम्मीकी हाजरीमे हमारी सादी होगइ.. वो.. मम्मी ओर लखनका प्लान था.. ओर उन दिनो उनका कोइ दो दिनका व्रत भी था.. तो हमने कुछ नही कीया..

सृती : (हसते) ओह.. समज गइ.. तो फीर अब क्या दीकत हे..? ये आपका ससुराल भी हे.. ओर यहा मम्मीकी देखभालके लीये हम सब भी हे.. तो मेरे खयालसे आज सबकुछ होजाये..? हें..हें..हें..

राधीका : (सरमसे पानीपानी होते मुस्कुराते) दीदी.. यहा..? मुजे तो बहुत सरम आयेगी.. रहेने दीजीयेना.. अभी मम्मीकी तबीयत भी ठीक नही हे.. तो उनकी टेन्शन.. दीदी.. आप मम्मीको ठीक होजाने दीजीयेनां.. हमे कोइ जल्दी नही..

सृती : (हसते) अरे..? अ‍ैसे कैसे रहेने दीजीये..? राधीका आप टेन्सन मत लो.. वो सब मे ओर लता अ‍ेरेन्ज कर लेगे.. आप अपनी मम्मीकी चीन्ता मत करो.. ओके..?

राधीका : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. थेन्क्स.. पर अभी नही.. जब लखनजी सामनेसे कहेगे.. तब.. क्युकी उनको पता हे.. मेरी मनोदसा अभी क्या हे.. वैसे भी टेनशनमे ये सब.. रहेने दीजीये..

सृती : (मुस्कुराते) अरे वाह.. मेरा देवर तो बहुत ही समजदार नीकला.. हें..हें..हें..

राधीका : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. समजदारतो वो पहेलेसे ही हे.. वो सुरुसे ही मेरी बहुत केर करते हे.. मे उनसे बहुत प्यार करती हु..

सृती : (आंख गीली करते) राधीका.. वाकइ.. तुम बहुत नसीबदार हो.. लखन जैसा लडका ढुंढनेसे भी नही मीलेगा.. बडा प्यारा हे मेरा देवर..

दोनो बाते कर रही थी.. तबतक लता भी लखनके पास जाकर दरवाजा बंध करती हे.. ओर लखनके पास जाने लगती हे.. तब लखन अपने बेठपे सरपे हाथ रखकर लेटा हुआ था.. तो लता लखनकी बगलमे जाकर लेट गइ.. ओर लखनके सीनेपे अपना सर रखते सीनेको सहेलाने लगी..

लता : (लेटते सीनेपे सर रखते) जानु.. क्या हुआ..? अ‍ैसे खाना छोडकर क्यु आ गये..? हंम..? भाभीके साथ कुछ हुआ हे क्या..? हंम..? उनकी भी आंख गीली थी..

लखन : (आंसु बहाते) लता.. सीर्फ तु ही मुजे समज पाती हे.. सीर्फ मेरे साथ ही अ‍ैसा क्यु होता हे..?

लता : (मुस्कुराते) लखन.. मे सीर्फ आपकी अर्धांगीनी ही नही.. आपकी दोस्त भी हु.. कहीये.. क्या हुआ..? देखो.. सच बताना.. हमारे बीच कीसीभी बात ना छुपानेकी डील हुइ हे.. हें..हें..हें..

लखन : (लताके सरको सहेलाते) हां लता.. अब तुमसे क्या छीपाना.. तेरे सामने तो मेरी कीताब खुली हे.. तुम तो मेरे सारे राज जानती हो.. लता.. मे पहेले कीतना खुस था..? हमारी हर रात सुहागरात होती थी.. लेकीन जबसे पुनोदीदीने मुजे जडी बुटी पीलाइ हे.. अ‍ैसा लगता हे.. वो कोइ आशीर्वाद नही.. अ‍ेक साप हे.. जो मुजे हर बार गलती करवा रहा हे..

लता : (आस्चर्यसे सामने देखते) क्यु..? आपको अ‍ैसा क्यु लगता हे..? जरा खुलकर बताइअ‍ेनां..? कही भाभीको पेल बेल तो नही दीया..? हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) लता.. मजाक नही.. सुन.. जबसे दीदीने जडी बुटी पीलाइ हे.. तबसे मेरी काम वासना भी बहुत बढ गइ हे.. ओर ये नीचे बैठनेका नाम ही नही लेता.. मेरा सेक्स करनेका बहुत मन होता हे.. ओर इसी काम वासनाकी वजहसे मुजसे गलती होगइ.. पहेले पुनोदी मुजसे नाराज होगइ.. ओर मुजे लगता हे.. अब भाभीके साथ भी यही हुआ हे..

लता : (प्यारसे सामने देखते) क्या..? जानु.. कहीयेना. भाभीके साथ क्या हुआ..?

लखन : (सर सहेलाते) लता.. जब हम दोनो स्कुटर लेने गये.. तब भाभीने अपनी मेडीकल रीसर्चके लीये.. कुछ टेस्ट करनेकी डिमांन्ड की.. पहेले तो मेने उसे मना कीया.. लेकीन वो नही मानी.. तो अभी उनको लेने गया तब उन्होने मेरा टेस्ट कीया..

लता : (जोरोसे हसते) जानु.. कैसा टेस्ट..? कही उनको चोद तो नही लीया.. हें..हें..हें..

लखन : (सरपे टपली मारते हसते) लता मजाक नही.. वो मेरी भाभी हे.. सुनतो सही.. उसने मेजर टेपसे मेरे हथीयारका माप लीया.. फीर उनको अ‍ेक डिबीमे मेरे स्पम चाहीये था.. ओर तुमतो जानती हो.. मेने कभी हाथसे कीया ही नही.. क्युकी कभी मुने इनकी जरुरत ही नही पडी.. फीर हम दोनोही हाथसे हीलाते हीलाते थक गये.. फीर भी स्पम नही नीकला..
 
लता : (हसते) अरे.. तो वही तो केह रही हु.. तो फीर क्या कीया..? कही भाभीको चोद तो नही लीया.. हें..हें..हें..

लखन : (सरपे टपली मारते) अरे.. फीर मजाक..? अरे वो मेरी भाभी हे यार.. मे अ‍ैसा कैसे कर सकता हु..? ओर मुजे भी ये सब करनेके लीये अ‍ेक साथी चाहीये..

लता : (हसते) अरे बुध्धु.. तो वही तो केह रही हु.. तो फीर कैसे नीकाला..?

लखन : (सरमाते हसते धीरेसे) लता.. सुन.. हाथसे हीलाते दोनो ही बहेक गये.. जब नही नीकला तो मेने उनको ब्लुजोब देनेकी डिमांड की.. तो पहेले तो वो ना नुकुर करने लगी.. फीर मान गइ.. ओर उसने मुजे ब्लु जोब देते मेरा पानी नीकाल दीया.. ओर काचकी डीबीमे भर लीया.. तबसे वो गील्टी फील करने लगी हे.. उसने मुजे थोडी खरी खोटी भी सुनाइ.. तबसे मुजसे बात भी नही करती.. सायद वो मुजसे नजरे मीलाना नही चाहती.. इसीलीये जानेकी बात कर रही हे..

लता : (मुस्कुराते) ओह.. तो ये बात हे..? अब समजी.. की वो जानेकी बात क्यु कर रही हे.. लखन.. आप अ‍ेक काम करो.. अगर वो जाना चाहती हे तो उसे जाने दो.. मत रोकना उसे.. ओर उनसे बात भी मत करना.. समजे..? वरना इस बार मे आपको पीटुगी.. हें..हें..हें..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) अरे.. पागल होगइ हो क्या..? वो मेरी भाभी हे.. इस घरपे उनका भी इतना हक हे जीतना हमारा हे.. तो उसे कैसे जाने देता..?

लता : (लखनके सामने सही बैठपे) अरे बाबा पता हे मुजे.. की इनका भी हक हे.. लेकीन मे जैसा कहु आप करते जाओ.. जानु.. क्या आपको मुजपे विस्वास नही..? हंम..?

लखन : (बाहोमे लेते होठ चुमते) डार्लीग.. विस्वास तो खुदसे भी ज्यादा हे.. लेकीन तुम अ‍ैसा क्यु केह रही हो..?

लता : (मुस्कुराते) जानु.. मुजे लगता हे.. जबसे मंजुदीदीने सबको छुट दी हे.. तबसे सृती भाभी ओर पुनम दीदी आपके साथ आगे बढना चाहती हे.. तो मे चाहती हु.. आप दोनोको थोडा तडपाइअ‍े.. अगर वो आपको चाहती होगी.. तो दोनो आपसे ज्यादा दिन दुर नही रेह पायेगी.. ओर सामनेसे आयेगी.. जब लोहा गरम होजाये तब आप हथोडा मार देना.. फीर देखो.. दोनो कैसे आपकी दिवानी हो जाती हे.. हें..हें..हें..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? ये मेरी लता खुद बोल रही हे..? कही तुम पागल तो नही होगइ..?

लता : (मुस्कुराते होठ चुमते) अरे बुध्धु बलमा.. इसमे पागल होनेकी क्या बात हे.. मे कोइ पागल नही हुइ.. जानु.. आप हम ओरतोको नही जानते.. मेरे खयालसे वो दोनो आपके साथ रीलेशन रखनेका मन बना चुकी हे.. लेकीन आगे बढनेमे डर रही हे.. लेकीन वो पहेले पहेल करना नही चाहती.. इसमे पहेले आपको आगे बढना पडेगा.. बस.. अभी इस बातका जीक्र कीसीके साथ मत करना.. सब कुछ चुप चाप देखते जाओ.. आगे क्या होता हे.. फीर दोनो कैसे सामनेसे आती हे.. समजे..?

लखन : (मुस्कुराते सामने देखते) लता.. क्या ये सब जानकर तुजे बुरा नही लगता..?

लता : (मुस्कुराते) जानु.. बात अगर पहेलेकी होती तो जरुर बुरा लगता.. लेकीन जबसे मंजुदीदी ओर पुनोदीदीसे बात हुइ हे.. तबसे मुजे कीसी भी रीलेशनसे कोइ बुरा नही लगता.. मे भी तो भैयासे मीलुगी..

लखन : (मुस्कुराते) लता.. मुजे तो बहुत अजीब लगता हे.. भाभीमांने भी क्या नीर्णय लीया हे.. खुद अपनी भाभीओके साथ..?

लता : (जोरोसे बाहोमे भीचते) हां.. जानु.. मे आपको बहुत चाहती हु.. अब बडे भैयासे भी ज्यादा.. लखन.. मे पुनो दीदी ओर मंजुदीदीका बात पुरी तराह जान चुकी हु.. हम कोइ सामान्य मानवी नही हे.. ओर हमारे अंदर इतनी आग होना लाजमी हे.. आप ओर भाइ कामके अंस हो..

तो सभी ओरतोपे दोनो भाइका हक हे.. ओर सभीका आपकी ओर आकर्सीत होना लाजमी हे.. आप कभी गील्टी फील मत करना.. जो होता हे होने दो.. भुल जाओ.. वो सब आपकी भाभीया हे.. हम सभी सीर्फ ओरत हे.. जो हमारे स्वामीको खुस करने ओर उनके वंसको बढाने आइ हे.. समजे..?

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. समज गया.. चलो ठीक हे.. जैसा तुम कहो.. सुन.. आज मेने पुनो दीदीसे बात की.. तो बात करते वो रो पडी.. ओर मुजसे माफी मांगने लगी.. लता.. वो ओर धिरेन दोनो अलग हो रहे हे.. धिरेन पुनोदीदीको डिजोर्स दे रहा हे.. बस.. चंदा भाभीके आनेकी देरी हे..

लता : (मुस्कुराते) जानु.. जैसा पुनोदीदीने कहा था.. अ‍ैसा ही हो रहा हे.. देखना.. आपको बहुत जल्द आपका पहेला प्यार भी मील जायेगा.. जानु.. मे बहुत खुस हु.. आप आगे बढो..

लखन : (मुस्कुराते) लता.. तुजे भी तो तेरा प्यार मील जायेगा.. मे भी खुस हु..

लता : (सामने देखकर मुस्कुराते) जानु.. क्या सच मे खुस हो..? कही आपको भी बुरा तो नही लगा..?

लखन : (मुस्कुराते गाल सहेलाते) नही लता.. मे दिलसे खुस हु.. ओर प्यार करना या होना कोइ गुना तो नही.. मेने भी पुनो दीदीको चाहा हे.. ओर अभी भी चाहता हु.. क्युकी मेरा पहेला प्यार वो ही हे..

लता : (सामने देखकर मुस्कुराते) जानु.. तो फीर मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे..

लखन : (मुस्कुराते) हां लता.. बोल.. मुजे कुछ भी बुरा नही लगेगा..

लता : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. मुजे मंजुदीदीने वहा बुलालीया हे.. मुजे जाना होगा.. बडे भैयाके पास.. लेकीन अब मेरी चाहत सीर्फ बडे भैया नही हे.. आप भी हो.. देखना मे आपको बहुत प्यार दुगी.. मे चाहती हुकी मेरा रीलेशन दोनो भाइके साथ रहे..

लखन : (सामने देखते) लता.. तु वहा चली जायेगी तो फीर मे कहा जाउगा..? मे तेरे बीना नही रेह सकता..

लता : (मुस्कुराते होठ चुमते) भाइ फीकर मत करो.. अ‍ेक बहेन चली जायेगी तो क्या हुआ..? दुसरी आजायेगी.. मंजु दीदीने कहा हे आपको अपना पहेला प्यार मील जायेगा.. मतलब अब यहा पुनोदीदी आ रही हे.. मेरे लखनको सम्हालने.. फीर आपकी ये नखरेबाज भाभी भी तो हे.. रजीया हे.. राधीका दीदी हें.. ओर कीतनी चाहीये आपको..? हें..हें..हें..

लखन : (मनमे खुस होते) क्या लता.. तुम भी.. सृतीभाभी..? दिमाग देखा हे उनका..? हें..हें..हें..

लता : (हसते) हां.. भाइ पागल घोडीको काबु करनेमे ही तो मजा हे.. जब अ‍ेक बार वसमे होजायेगीनां.. तो सबसे ज्यादा मजा वोही आपको देगी.. वो मोर्डन खयालातकी ओर सेक्सी भी तो हे.. देखना बीस्तरमे आपको कैसा मजा देती हे.. कमीनीकी चीखे नीकलवा देनां.. हें..हें..हें.. अरे हां.. बायध वे.. आप ओर सृती भाभी क्लीनीकपे गयेथे.. क्या हुआ..? उनकी रीपोर्ट आइ की नही..? मे तो उनको पुछना ही भुल गइ..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. रीपोर्ट आ गइ हे.. सुन.. मे चाचा ओर तुम चाची बनने वाले हे.. हें..हें..हें..

लता : (खुस होकर हसते) क्या..? रीपोर्ट पोजीटीव आइ..? अभी उनकी खबर लेती हु.. कमीनी.. मेरे लखनको रुलाती हे.. हें..हें..हें..

दोनो बाते कर रहे थे तब रजीया भी अपना सभी काम नीपटाकर आगइ.. तो राधीका ओर सृती भी आराम करने चली गइ थी.. तो इसी बीच आज अ‍ेक बार फीर धिरेन ओर नीलम मीले.. ओर धिरेनने नीलमको पुनमकी सारी बाते बतादी.. ओर ये भी कहा की हम दोनोकी विडीयो क्लीप भी उनके पास पहोच गइ हे.. जीसे सुनकर नीलमकी गांड फटने लगी.. ओर वो धिरेनको लेकर गार्डमे चली गइ..
 
नीलम : (थोडी चीन्तासे) हां धिरेन.. मुजे अपनी सारी बात बतादो.. क्या हुआ.. पुनो दीदीके पास हमारी क्लीप कैसे आगइ..? कही लखन जीजुने तो.. नही नही.. वो अ‍ैसा नही कर सकते.. वो तो उल्टा हमारी मदद कर रहे हे.. जानु.. लखन जीजुने खुद मुजसे कहा हे.. वो जल्दसे जल्द हम दोनोकी सादी करवा देगे..

धिरेन : (पायलकी बात छुपाते) क्या..? लखन भैयाने खुद तुमसे कहा..? नीलु.. पुनो केह रही थी.. होस्टेलके सारे सीसी टीवीकी लीन्क उनके पास हे.. तो वो वहा कभी भी देख सकती हे..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) धिरेन.. तो मुजे लगता हे.. अब हमे होस्टेलमे नही मीलना चाहीये.. लेकीन अब हमे मीलना ही नही चाहीये.. क्युकी ये सब मे हमारी सादीके बाद करना चाहती हु.. अगर कही बच्चा ठहेर गया.. तो मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगी.. क्युकी अब तो तुम बीना कोन्डम ही करते हो.. देखना अब मे मेरी पढाइ तक कोन्डमके बीना नही करने दुगी..

धिरेन : (परेसान होते) नीलु.. ये तुम क्या बोल रही हो..? अब तो पुनो भी मुजे छुने नही देगी.. तो फीर मे कहा जाउगा..? अब सीर्फ तुम हीतो अ‍ेक सहारा हो.. नीलु.. चलना हम सादी करलेते हे.. मे तेरे बीना नही रेह सकता.. ठीक हे हम सावधानी बरतके करेगे.. मे आज कोन्डम लेकर ही आया हु..

नीलम : (समसर होते धीरेसे) धिरेन.. देखना कही उच नीच ना होजाये.. ओर अभी अ‍ेक दो दिनमे मुजे सबके साथ सादीमे गांवभी जाना हे.. ओर मम्मी भी वहासे वापस गांव चली जायेगी..

धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. सीर्फ अ‍ेक दो दिनकी बात हे.. घरका रजीस्ट्रेशन भी हो गया हे.. अ‍ेक दो दिनमे हमारा बंगलो खाली होजायेगा.. फीर कोइ दिकत नही होगी.. हम वही मीलते रहेगे.. सुन.. चलना आज कीसी होटलमे चले जाये.. हंम..? बहुत मन कर रहा हे..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे नजर जुकाते) जानु.. अगर हम टाइम पे वापस नही आये तो लखन जीजु मुजे ढुंढेगे.. क्या हम कल नही मील सकते..? हंम..?

धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. अ‍ेक बात कहु..? वैसे भी पुनमको हमारे बारेमे सब पता तो चल ही गया हे.. तो क्या फर्क पडता हे.. की वो देखले.. चल हम होस्टेल ही चले जाते हे.. ओर वो हमे देखलेगी तो मुजे जल्द उनसे छुटकारा भी मील जायेगा.. तुम दियासे रुमकी चाबी लेले.. हम जल्द वापस आजायेगे..

कहा तो पहेले तो नीलम ना नुकुर करने लगी.. फीर उसने धिरेनकी बात मानली.. ओर नीलमने आज फीर दियासे उनके रुमकी चाबी लेली.. ओर दोनो होस्टेलमे चले गये.. तो आज नीलमने सभी दरवाजा ओर खीडकीको अच्छी तराहसे बंध करदीया.. ओर सब कुछ चेक करलीया.. की कही छेद तो नही.. फीर दोनो नंगे होगये.. ओर अ‍ेक बार फीर दो जीस्म अ‍ेक होगये.. तब पुरे रुममे नीलमकी सीसकारीया गुंजने लगी..





धिरेन आज कोन्डम लेकर ही आया था.. ओर दोनो मदहोस होकर चुदाइ कर रहे थे.. तब कुछ देरकी चुदाइके बाद धिरेन जडकर नीलमके उपर ढेर हो गया.. ओर अ‍ेक बार फीर नीलमको मजधारमे छोड दिया.. तो नीलम मन ही मन धिरेनको कोसने लगी.. ओर तब ही उसने लखनसे अपनी प्यास बुजानेका मन बनालीया.. नीलम इतनी बार धिरेनसे चुदवाकर ये जान चुकी थी.. की धिरेन उसे कभी संतुस्ट नही कर पायेगा..

इसीलीये तो नीलम लखनके साथ गांव जानेके लीये तैयार होगइ.. फीर दोनो सही होकर बहार आगये.. ओर धिरेनने नीलमको वापस स्कुलपे छोडदीया.. तो दुसरी ओर आराम करनेके बाद सबलोग होल मे आगये.. तब रजीयाने सबके लीये चाइ नास्ता बनालीया.. तो आज लखन चाइ नास्ता करने नही आया.. जीसे देखकर सृती नीरास होगइ.. उनको लगा की आज उसने अ‍ेक बार फीर लखनको खो दीया..

ओर वो चाइ नास्ता करके भारी मनसे अपनी क्लीनीकपे चली गइ.. लेकीन आज उनका कही मन लग नही रहा था.. वो बेमन अपने पेसन्टको देखती रही.. ओर अ‍ेक डीलीवरीका केस भी करलीया.. तो इधर सृतीके जानेके बाद कुछ देरके बाद लखन भी नीचे आगया.. तो आज राधीकाने उसे चाइ नास्ता दे दीया.. ओर लखनके पास ही बैठ गइ.. तब लखन उनकी ओर देखते मुस्कुराने लगा तो राधीका बहुत सरमा गइ.. ओर उसने धीरेसे कहा..

राधीका : (सरमाते धीरेसे) जानु.. वो.. वो सृतीभाभी पुछ रही थी.. हमारी सुहागरातके बारेमे..

लखन : (प्यारसे देखकर मुस्कुराते) अच्छा..? तो फीर चलो उपर.. सुहागरात मना लेते हे.. हें..हें..हें..

राधीका : (सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) लखन.. प्लीज.. मजाक नही.. मे सीरीयसली केह रही हु..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा तो तुम कहो.. क्या कहा तुमने उसे..?

राधीका : (सरमाते मुस्कुराते) क्या..? मेने तो उसे केह दिया.. की जब मेरा लखन चाहेगा.. तब हम सुहागरात मनालेगे.. जानु.. क्या हेना अभी मम्मीकी तबीयत भी ठीक नही हे तो.. आप समज गयेनां..? मे ये सब अच्छे माहोलमे करना चाहती हु.. ओर वो भी हमारे घरमे.. यहा मुजे बहुत सरम आयेगी.. क्या कहेते हो..?

लखन : (प्यारसे गाल सहेलाते) ठीक हे बेबी.. जब तुम चाहो.. बस..? मुजे कोइ जल्दी नही.. बस मेरी राधु खुस रहेनी चाहीये.. ओर मम्मी भी यहा खुस हे.. तुम चाहोतो हम याभी मील सकते हे.. कोइ दिकत नही हे..

राधीका : (कंधेपे सर रखते आंख गीली करते) जानु.. मेने कोनसे पुन्य कीये होगे.. जो आप पतीके रुपमे मीले.. आपकी फेमीली.. ओह.. सोरी.. हमारी फेमीली कीतनी अच्छी हे.. मम्मी तो यहा आकर बहुत खुस हे.. कहेती थी राधु.. अब मे तो यहासे नही जाउगी.. मेरा बेटा ओर मेरी बेटीया कीतनी अच्छी हे..

लखन : (मुस्कुराते) राधु.. मे मम्मीको ओर तुजे इधरसे जाने भी नही दुगा.. अभी तो तुम मेरी भाभीमांको मीली ही नही हो.. वो तो देवी हे देवी.. राधु.. तुमसे अ‍ेक बात कहु..? क्या तुम मेरी बात मानोगी..?

राधीका : (मुस्कुराते) जानु.. अब आप मेरे पती हे.. आपकी हर बात मेरे सर आंखोपे.. कहीये..

लखन : (मुस्कुराते) राधु.. तु मेरी हर भाभीको भले ही अपनी जेठानी मानो.. लेकीन भाभीमांको अपनी जेठानी कभी मत मानना.. वो मेरी भाभी नही मेरी मां हे.. ओर तेरी सांस.. तो मे चाहता हु.. तुम जब भी उनको मीलो.. उनके पांव जरुर छुना.. क्युकी वो सच मे अ‍ेक देवी हे.. ओर उनके पांवमे जनत हे.. बस..

राधीका : (सरमाकर मुस्कुराते) बस.. सीर्फ इतनीसी बात..? ठीक हे जानु.. आजसे मे उसे मेरी जेठानी नही अपनी सांस मानुगी.. ओर उनका पैर पी छुउगी.. लगता हे अब तो मुजे जल्द अपनी सांसको मीलना पडेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) हां मीलना.. ओर देखना.. उनको मीलते ही तु तेरे सारे गम भुल जायेगी..

दोनो प्यार भरी बाते करते रहे.. फीर लखन नीलमको लेने स्कुल चला गया.. तो आज भी नीलम बहुत खुस नजर आ रही थी.. ओर बार बार लखनकी ओर देखते सरमाकर हसने लगती थी.. तो लखन समज गया की आज भी नीलम ओर धिरेन जरुर मीले होगे.. तो लखनको कुछ अच्छा नही लगा.. ओर वो जल्दसे जल्द नीलमको अपने नीचे लीटानेकी सोचने लगा..

तो गांवमे भी श्रीधर ओर जयश्रीकी सादीकी तैयारीया लगभग होचुकी थी.. तो बंसी भी कल अपने पीता सामतभाइका क्रिया करम थोडा जल्दीसे करने वाला था.. ताकी उनके खास दोस्त श्रीधरकी सादीमे कोइ प्रोबलेम ना हो.. ओर घरके लोग भी सादीमे जा सके.. ताकी उनका भी सामतभाइके गमसे मांइन्ड डाइवर्ट होजाये.. ओर इस बारेमे उसने देवायतसे बात भी करली.. तो देवायत ओर रमेश दोनो सहमत हो गये..

तो मंजु भी दया ओर देवायतकी सादीकी तैयारीया कर रही थी.. तो यहासे दुर नीर्मला भुमीका सरलाचाची ओर चंदा भी अब घर वापसीकी तैयारीया करते अपना सामान बसमे रख रही थी.. अ‍ैसे ही साम ढल गइ.. इसी दौरान धिरेन भी घरपे आ गया.. तो पुनम दरवाजा खोलकर उनके सामने देखे बीना ही वहासे कीचनमे चली गइ.. तो धिरेन भी गुस्सेसे उपर अपने रुममे चला गया..

उस रात भी डीनर करने सीर्फ धिरेन ही अकेला बैठा था.. तो आज भी दयाने उनकी सब्जीमे नींदकी गोलीया मीला दी थी.. जब धिरेनने डीनर करलीया ओर उपर चला गया तब पुनम ओर दयाने भी खाना खालीया.. आज पुनम दयाके साथ ही सोने वाली थी.. तो धिरेन आज रात भी उपर जाते ही नींदकी आगोसमे चला गया.. ओर इस रात पुनम नीचे दयाके साथ सोनेके लीये उनके रुममे आगइ....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 




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