Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 72 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २३०

श्रीधरके लीये पुजामे बैठनेके लीये ब्रीन्दाने जीतुलालके साथ बैठनेके लीये मना करदीया.. तो जीतुलाल तीलमीलाते गुस्सा करने लगा.. तभी ब्रीन्दाने जीतुलालकी ओर कातील स्माइल करते श्रीधरके पास बसंती ओर उनके पती विभुको बीठा दीया.. तो जीतुलाल उन दोनोको देखकर सन्न रेह गया.. ओर वहासे उठकर जवेरीलाल ओर वृन्दाके पास जाकर बैठ गया.. तो वृन्दा उनको अपने पास बैठे देखकर बहुत खुस होगइ.... अब आगे

तो दुसरी ओर हवेलीपे सबलोग सुबह थोडी देरसे जगे.. तब मंजु जागते ही अपने रुममे चली गइ.. तब दया नंगी ही देवायतसे चीपककर उनके बाजुओको तकीया बनाकर सो रही थी.. मंजु दोनोको देखकर हसने लगी.. ओर उसने दरवाजा बंध करदीया ओर दोनोके पास आकर जगाने लगी.. तब दया अपनी हालत देखकर गभराते हुअ‍े जटसे बैठ गइ.. ओर सर्मसार होते अपनी सारीसे अपने तनको ढकने लगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) दया बहेन.. रहेने दीजीये.. यहा तो सब कमीनी सुबह सुबह अ‍ैसी हालतमे ही मीलेगी.. कहो.. कैसी रही दोनोकी सुहागरात..? आपको नीचे कोइ तकलीफ तो नही हुइ..?

दया : (सरमाते नामे गरदन हीलाते) नही दीदी.. बहुत अच्छी रही.. दीदी.. थेन्क्स.. आपने मेरा सपना पुरा कर दीया.. आपका ओर पुनम दीदीका बहुत बहुत सुक्रीया..

मंजुला : (पास बैठपे प्यारसे सरको सहेलाते) दया बहेन.. कैसी बाते कर रही हे..? अपनोका सुक्रिया अदा नही करते.. आप तो हमारी अपनी बहेन हे.. हम सबसे बडी.. ओर आपका सपना तो तब पुरा होगा जब आप नौ महिनेके बाद हमे अ‍ेक फुल जैसी बच्ची देगी.. हें..हें..हें..

दया : (खुसीके मारे मंजुके गले लगते) दीदी.. आपको ओर पुनोदीदीको तो सब पता चल जाता हे.. आज मे बहुत खुस हु.. आपने अ‍ेक नोकरानीको इतना बडा दर्जा दिया.. मेरे पास बोलनेके लीये सब्द नही हे..

मंजुला : (सरको सहेलाते) नही दयाबहेन.. आप ओर रजीया कभी हमारी नौकरानी थी ही नही.. बस.. सीर्फ कुछ समयका इन्तजार था.. जो आगया.. अब आपको यही रहेना हे.. चलीये नहा लीजीये.. सबलोग आजाये तो वहा साहुकारके यहा सादीमे भी जाना हे.. मे लखनको जगाके आती हु.. आप हमारे पतीको भी जगा दीजीये..

दया : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. अ‍ेक बात पुछु..? चलो मे तो आपकी बहेन हु.. हमारे बापुकी सुतान.. तो फीर रजुदीदी..? उसने भी लखन भैयासे सादी करली हे.. तो क्या वो भी..

मंजुला : (पास सटकर बैठते धीरेसे) दीदी.. आज तक कीसीने उनके बारेमे पुछा नही.. लेकन आज आपको बताती हु.. याद रखना ये बात रजु दीदीको पता नही लगनी चाहीये.. जीस तराह वो हमारे घरपे काम कर रहीथी उसी तराह अ‍ेक जमानेमे उनकी मां भी यहा काम करती थी.. जो अ‍ेक विधवा थी.. आप समज गइनां..?

दया : (मुस्कुराते) जी दीदी.. सबकुछ समज गइ.. मुजे ओर कुछ नही जानना.. बस.. इतना सुनकर ही खुस हुकी वो भी हमारी बहेन हे..

मंजुला : (मुस्कुराते खडी होते जाते) दीदी.. कुछ राज राज ही रहेने देना चाहीये.. हें..हें..हें..

कहेते मंजु उपरके रुममे चली गइ.. तो रमा ओर नीलमके रुममे नजर डालती हे.. तो वो मां बेटी भी नंगी अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सोइ हुइ थी.. तो मंजु मुस्कुराते लखनके कमरेमे चली गइ.. तो लखन घोडे बेचकर सो रहा था.. ओर उनके लोअरमे अब भी बहुत बडा तंबु दीख रहा था.. तब मंजु उनके पास बेडपे बैठ गइ.. ओर थोडी देर उस तंबुकी ओर देखती रही.. फीर मुस्कुराते लखनके सरको सहेलाते उसे जगाती हे..

लखन : (जटसे बैठते) अरे भाभीमां आप..? मुजे आवाज लगाती.. मे आजाता..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही.. मे मेरे राजा बेटेको देखने ओर उनसे कुछ बाते करने आइ थी.. क्युकी तेरे पास तो इस मांके साथ बैठकर बाते करनेका टाइम ही नही हे.. तो मुजे आना पडा..

लखन : (बैठेही हग करते) नही मोम.. बस आप हुकुम कीजीये आपका बेटा हाजीर होजायेगा.. कहीये क्या बात करनी थी..? कुछ खास बात थी क्या..?

मंजुला : (मुस्कुराते गाल सहेलाते) हां बेटा.. वो भी सीर्फ तुमसे बात करनी थी.. इसीलीये तो मे यहा आइ हु.. सुन.. अब मे चाहती हु तुम तेरी सभी जीम्वेवारी अच्छी तराह सम्हाल लो..

लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. मेने हमारे बीजनेसका काम भी सुरु करदीया हे.. ओर सुरुआत भी अच्छी हुइ.. हमारे पार्टनर भी बहुत अच्छे हे.. तो कोइ प्रोबलेम नही हे.. फीर भी मे सब देख रहा हु..

मंजुला : (मुस्कुराते) गुड.. बेटे मे सीर्फ बीजनेसकी बात करने नही आइ.. वोतो तुम अच्छेसे सम्हालने लगे हो.. हमे सब दीख रहा हे.. मुजे कुछ ओर बात भी करनी हे.. सुन.. क्या सृतीके साथ कुछ अनबन हुइ हेनां..?

लखन : (सर जुकाते धीरेसे) जी भाभीमां.. आपको ओर पुनोदीदीको सब पता हे क्या हुआ था.. इसमे मेरी कोइ गलती नही थी.. मेने उनको बहुत मना कीया था.. पर वो नही मानी.. ओर मुजे खरी खोटी सुननी पडी..

मंजुला : (मुस्कुराते) बेटा.. जानती हु मे.. की तेरी कोइ गलती नही थी.. सुन.. तुम हम ओरतोको कभी समज नही पाओगे.. इसीलीये तुजे थोडा समजाने आइ हु.. वो तो यहासे जाते वक्त ही तुमसे रीलेशन बनानेका मन बनाकर गइ थी.. बस.. तेरी ज्यादा सरीफाइ ओर अच्छाइसे बात नही बनी.. क्युकी तुम दोनोके बीच देवर भाभीका रीस्ता आडे आ रहा था.. तुम इतना भी सरीफ मत बनो.. कमसे कम इस घरकी ओरतोके सामने तो कभी नही.. समज गया..?

लखन : (आस्चर्यसे सामने देखते) भाभीमां.. मे कुछ समजा नही.. आप खुलकर बताओनां.. क्युकी मुजे दिलके अ‍ेक कोनेमे अब भी लगता हे मे बडे भैयाको चीट कर रहा हु..

मंजुला : (मुस्कुराते) बेटा.. कोइ चीट नही हे.. वो भीतो यही करेगे.. अब तुजे कैसे समजाउ..? क्या जमाना आ गया हे.. अब मुजे अपने बेटेको ही थोडा बदमास बननेका ज्ञान देना पड रहा हे.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) मोम.. अब ये सब आप नही कहोगी तो कौन कहेगा..? बताइअ‍ेनां..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे बेटा.. सुन.. ओरत चाहे कीतनी ही कामी क्युना हो.. वो पहेल कभी नही करेगी.. हर ओरत हमेसा चाहती हेकी पहेल हमेसा पुरुष ही करे.. ओर हमारे घरकी तो सभी ओरते कामी हे.. वो क्यु..? ये तुजे भी पता हे.. इस बारेमे तुजे बतानेकी जरुरत नही हे.. तो तुम कीसको भी मीलनेमे संकोच मत करो की वो क्या सोचेगी.. रीस्तेमे क्या हे.. बस.. तुजे अपना कर्तव्य नीभाना हे..
 
लखन : (सरमाते धीरेसे) भाभीमां.. ये आपने मुजे कैसी जीम्वेवारी देदी..? मे कीस कीसको नाराज करुगा..? कल पुनो नाराज हुइ थी तो अब सृती भाभी.. ओर यहा तो ज्यादातर मेरी भाभीया ही हे.. बस.. यही बातसे डरता हु.. ओर कुछ नही..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानती हु.. इसीलीये तो तुमसे बात करने आइ हु.. बीटु.. तुम डरो मत.. दुसरे लोगोकी बात अलग हे.. ओर हमारे घरकी बात अलग हे.. हम सब कोइ सामान्य मानवी नही हे.. हम अ‍ेक खास मक्सदसे यहा जन्म लेकर आये हे.. अगर तुम संकोच करोगे तो कैसे चलेगा..? हमारा वंस आगे कैसे बढेगा..? क्युकी अब तुम्हारे बडे भैयाके पास सबके लीये टाइम ही नही हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. वंस आगे बढानेके लीये हमारा विजय तो हे.. तो फीर क्यु चीन्ता करती हो..?

मंजुला : (सामने देखते धीरेसे) सुन.. वो अभी छोटा हे.. आगे तो तुजे बहुत कुछ करना हे.. मानाकी वंस आगे बढानेके लीये मेरा विजय हे.. लेकीन वो तभी वंस आगे बढा पायेगा जब उनकी भी बीवीया होगी.. तो तुम उनकी बीवीया कहासे लाओगे..? मत भुलो.. वो भी इस खानदानका खुन हे..

जो उसे अ‍ेक बीवी नही सम्हाल पायेगी.. ओर तुम तो जानते हो हम बहारकी लडकीओसे सादी नही करते.. इसके लीये भी आप दोनो भाइका ही अंस चाहीये.. यानी मेरे विजयकी बहेने.. जैसे अभी आप दोनो भाइकी बीवीया आपकी सभी बहेने हे.. समज गया..?

लखन : (मुस्कुराते) मोमो.. मानाकी ज्यादातर हमारी बहेने ही हे.. लेकीन रजीया..? वो कहा हमारी बहेन हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते धीरेसे) बीटु.. कुछ राज राज ही रहेने दे.. फीकर मत कर वो भी तेरी ही कहेन हे.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते धीरेसे) क्या..? वो भी हमारी बहेन हे..? भाभीमां.. समज गया.. मतलब अभी जो करना हे.. हमे हमारे विजयके लीये करना हे.. यहीनां..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सही समजा.. सुन.. हमारी सभी ओरोतोको तुम दोनो भाइको ही सम्हालना हे.. ओर खास करके चंदा दीदीको.. सृतीको.. वंदनाको.. बस.. मेरे अलावा सबको.. क्या सम्हाल पायेगा..?

लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? चंदा भाभीको भी..? भाभीमां.. मगर वो तो.. उनसे बात करनेमे भी डर लगता हे.. भाइ भी तो हे.. इनको भाइको ही सम्हालने दीजीयेनां.. मुजसे नही होगा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते) क्यु..? चंदाभाभीसे डर गया क्या..? सुन.. आज तुजे अ‍ेक राजकी बात बताती हु.. मेरे जातेही तेरे भाइकी शक्तिया धीरे धीरे करते खतम होजायेगी.. तब इस घरकी ओरते कहा जायेगी..? बेटा.. मेने जो भी नीर्णय लीया हे कुछ सोच समजकर ही लीया हे..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. फीर भी वो मुजसे बहुत बडी हे.. इसके लीये वो कभी तैयार नही होगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. तुम हम ओरतोको जानते नही.. ओर सबसे कामी ओर तो तेरी वो ही भाभी हे.. अगर उनको सेक्स करनेको नही मीला तो वो पागल होजायेगी.. सबपे गुस्सा करने लगेगी.. उनका स्वभाव चीडचीडा होजायेगा.. तब तुम समज लेना उनको क्या चाहीये.. तब तुजे ही उनको सम्हाल पडेगा.. फीर देख वो कैसे तेरी दिवानी हो जाती हे..

लखन : (सरमाकर हसते धीरेसे) ठीक हे मोम.. देखता हु मुजसे क्या होता हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) बस.. मेरे विजयके बडे होने तक तुम सबकुछ सम्हाल ले.. फीर तो मेरा विजय ही सब सम्हाल लेगा.. फीर तुम आजाद..

लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. अभी तो वो बहुत छोटा हे.. क्या वो भी यही सब करेगा..? हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां बेटा.. लेकीन ये सब अ‍ैयासीके लीये नही हे.. यही विजयसे हमे हमारे उस स्वामीको इस दुनीयामे लाना हे.. जो कभी उस जमानेमे तुम अपना बडा भाइ मानते थे.. बस.. इसके आगे मे तुजे कुछ नही बता सकती.. बेटा.. मुजे ओर कीसीकी नही.. बस.. सृती ओर चंदादीदीकी चीन्ता हे.. जो उसे सीर्फ तुजे ही सम्हालना हे.. बाकी सृती तुम्हारे साथ कैसा भी व्यवहार करे.. उसे मत छोडना..

लखन : (मुस्कुराते) जी भाभीमां.. समज गया.. लेकीन ये चंदा भाभी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां बीटु.. हमारी पुनो ओर धिरेनके डीवोर्सकी वजहसे वो कुछ दिन अपसेट रहेगी.. उनकी दिमागी हालत ठीक नही होगी.. तो सायद ये घर छोडकर अपने घर चली जायेगी.. वो भी मेरे विजयको लेकर.. क्युकी वो विजयको बहुत प्यार करती हे.. ओर उसे अपना बेटा मानती हे.. वो धिरेनकी हरकतकी वजहसे सबको फेइस नही कर पायेगी.. वो अपने आपको दोसी मानते देवुसे नजरे नही मीला पायेगी.. तब उनको तुजे ही सम्हालना हे.. वो भी बडे प्यारसे.. समज गयानां..?

लखन : (धीरेसे) भाभीमां.. आप चंदा भाभीकी फीकर मत करना.. मे उनका अच्छेसे खयाल रखुगा.. ओर इस बातके लीये कहीना कही मे भी जीम्वेवार हु.. क्युकी मे चाहता थाकी पुनोदीदी धिरेनसे अलग हो जाये.. ताकी मे अपना पहेला प्यार पा सकु.. मोम.. मेरे दिलमे भी खोट थी.. आइ अ‍ेम सोरी..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही बेटा.. तुम अपने आपको दोसी मत मान.. क्युकी सीर्फ तुम ही नही.. पुनो ओर हम सब भी वही चाहते थे.. बीटु.. पुनो सीर्फ तेरी हे.. मेरी पीयु.. ओर ये सबतो होने ही वाला था.. तो फीर तुम अपने आपको क्यु दोस देते हो..? मे भी दिलसे चाहती हुकी पुनो तेरी बीवी होजाये.. ओर अब तो पुनो भी तुजे जी जानसे चाहने लगी हे.. वो तुजे अपनानेका मन बना चुकी हे.. लखन.. तुम जानते नही.. चंदा दीदीको अपनानेमे खुद पुनो तेरी मदद करेगी.. बस.. पहेल तुजे करनी पडेगी..

लखन : (नीचेकी ओर देखते) मोम.. कही हम गलत तो नही कर रहे..? क्युकी अपनोसे रीलेशन बनाना कोइ आसान बात नही हे.. ओर वो भी मेरी भाभीओसे..

मंजुला : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. लेकीन तुम इस रीस्ते नातो मे मत उलजो.. सीर्फ यही सोचो.. जो कभी उन जमानेमे सोचता था.. तुजे सीर्फ अ‍ेक ही रीस्ता देखना हे.. तुम इस खानदाका अ‍ेक लौता मर्द हो.. ओर सभी ओरते इस खानदानकी ओरते.. जीसे सीर्फ तुम दोनो भाइको ही सम्हालना हे..

धेट्स ओल.. बात रही चंदा दीदीकी तो सुन.. उनको पहेली बार तुजे अपनानेमे थोडी तकलीफ होगी.. लेकीन बादमे वो भी तुजे अपना लेगी.. तब जाके वो ठीक होगी.. लेकीन यहा कभी नही आयेगी.. वो अब हमेसाके लीये वहा तेरे घर यातो फीर अपने घर रहेगी..

लखन : (हां सर हीलाते) भाभीमां.. तो फीर लता.. क्युकी वो केह रही थी.. अब वो यहा रहेगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. मेने ही उसे कहा हे.. सुन.. अब लताको तुम तेरी जींदगीसे आजाद करदे.. मानाकी वो भी तुजे प्यार कने लगी हे तो तेरे साथ रीलेशन रखेगी.. मगर अब वो देवुकी बीवी होजायेगी.. जैसे सृती ओर पुनो देवुकी बीवीया होते तेरी बीवी होगी.. वैसे भी सब कीसीकी भी बीवीया हो.. तुम दोनो भाइको क्या फर्क पडेगा..? सुन.. जा जल्दीसे तैयार होजा.. तुजे मम्मी बुआ.. ओर भाभीको लेने भी जाना हे.. फीर आकर सादीमे भी तो जाना हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. वो पुनो केह रही थी.. जब चंदा भाभी आयेगी.. तब सबकी हाजरीमे वो धिरेनको अपना डीवोर्स पेपर देगी.. मेने दोनोका जगडा सुना हे.. पुनोदीदीने रेकोर्ड कीया हे.. क्या आपने सुना..?

मंजुला : (मुस्कुराते) जी.. नही सुना.. लेकीन मुजे सब पता हे.. जा.. फटाफट नहाले.. फीर देखते हे यहा क्या क्या हंगामा होता हे.. सुन.. इनमेसे अभी तेरी अ‍ेक बीवी नाराज होकर चली जायेगी.. तब सम्हाल लेना तुम दोनो.. कमीनी बहुत नखरे करेगी.. ओर वहा भी कुछ हंगामा करे तो अ‍ेक खीचकर देना उनके कानके नीचे.. कमीनीकी अकल ठीकाने आजायेगी.. जा.. कंपलीट होकर आजा.. फीर चाइ नास्ता करके तु चले जाना.. नौव साडे नौव बजे बस आजायेगी.. ओर सुन.. तुमसे अ‍ेक ओर बात कहेनी हे..

लखन : (मुस्कुराते) जी भाभीमां.. कहीये..

मंजुला : (खडी होकर) बीटु.. सायद तुजे दो ओर ओरतोको भी सम्हालना हे.. वो कीसे..? मे नही बता पाउगी.. तुम अपनी होने वाली बीवीको पुछ लेना.. जीसे तु बहुत प्यार करता हे.. समज गयानां..?

लखन : (मुस्कुराते) जी भाभीमां..
 
जैसे ही मंजु गइ लखन बाथरुमकी ओर जाते रुक गया.. ओर बहार नीकलकर देखने लगा तो मंजु नीचेकी ओर जा रही थी.. तब लखन धीरेसे रमाके कमरेकी ओर गया.. तो अंदर जाते देखा तो रमा अपना गाउन पहेन रही थी.. ओर नीलम अब भी घोडे बेचके सो रही थी.. लखनने रमाको धीरेसे इसारा कीया.. तो रमा लखनको देखते ही जटसे नीलमकी ओर देख लेती हे..

फीर नीलमको सोती हुइ देखकर मुृ्कुराते लखनको नां मे गरदन हीलाते मना करती हे.. लेकीन लखन उनको दरवाजा खोलनेकी जीद करने लगा.. तब रमा नीलमकी ओर देखते भारी धडकनके साथ धीरेसे दरवाजा खोलती हे.. तो लखन जटसे अंदर आगया ओर दरवाजा बंध करके रमाका हाथ पकडकर उसे बाथरुममे ले गया.. तो रमा सर्मसार होते नीलमकी ओर देखते लखनके पीछे खीची चली गइ..

रमा : (अंदर जातेही दबी आवाजमे) लखनजी.. क्या कर रहे हे..? नीलु अभी जाग जायेगी.. अगर कीसीको पता चल गया तो..? छोडीयेना हम बादमे मीलते हेनां.. मेरे घरपे..

लखन : (दरवाजाज बंध करके बाहोमे भीचते) नही भाभी.. पता नही आपने मुजपे क्या जादु करदीया हे.. मेतो रातमे भी आया था.. लेकीन आप दोनो अ‍ेक दुसरेके साथ लगी हुइ थी.. भाभी.. आप बहुत खुबसुरत हो.. क्या मस्त लग रही हो.. मे तो आपका दिवाना हो गया हु.. बस.. सीर्फ अ‍ेक बार.. अभी फटाफट होजायेगा.. कल तो आपकी ननंद भी नीचे थी..





रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) तो फीर रातको ही बुलाना चाहीयेनां.. मे आजाती.. अगर हम मां बेटी साथमे थी तो क्या हुआ..? हमारे पास कीतना अच्छा मौका था.. मुजे तो लगता हे अब नीलु भी हम दोनोके बारेमे जान चुकी हे.. लखनजी.. वैसे क्या सचमे मे आपको खुबसुरत लगती हु..?

लखन : (होंठ चुमते) हां भाभी.. आपकी कसम.. मे सच केह रहा हु.. पता नही आप चली जाओगी तो मेरा क्या होगा.. भाभी.. गाउन नीकालीयेना.. फीर मुजे भी जाना हे..

रमा : (सरमाते गाउन नीकालते धीरेसे) लखनजी.. आप बहुत बदमास हो.. मेरी मानोगे तो नही.. लीजीये.. नीकाल दीया.. अब जो भी करना हो फटाफट करलो.. वरना नीलु कभी भी जाग सकती हे..

तभी लखन रमाको पीछेसे बाहोमे भरलेता हे.. ओर दोनो हाथोसे रमाकी चुचीओको मसलते रमाकी चुतमे पीछेसे ही लंडको घुसा देता हे.. तब रमाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर लखन रमाके बुब्सको मसलते पीछे कमर हीलाते रमाको धनाधन चोदने लगा.. तो रमा भी कामातुर होते मदहोस हो गइ थी.. ओर अपना पीछवाडा पीछे धकेलते लखनको चुदवानेमे साथ देने लगी..





लखनने रमाको फटाफट चोदकर दो बार जडा दीया.. ओर अपना माल भी रमाकी चुतमे उडेल दीया.. अब रमाको लखनसे चुदवानेमे इतनी तकलीफ नही होती थी.. जो पहेली दुसरी बारमे हुइ थी.. फीर लखन अपने कपडे पहेनकर रमाके होठोको चुमकर बहार आगया.. जैसे ही लखन बहार नीकला नीलम बेडपे अपनी आंखोको मलते बैठी थी..ओर रमा दरवाजा बंध करके अपना नीत्य क्रम करते नहाने लगी..

तो लखनको बाथरुमसे नीकलते देखकर नीलम चोंक गइ.. फीर सबकुछ समज गइ ओर लखनकी ओर देखते सरमाकर मुस्कुराने लगी.. तो लखन अपने नाकपे उंगली रखते नीलमको चुप रहेनेका इसारा करते उनके पास चला गया.. ओर नीलम बैठी थी वही बैठकर बाहोमे भरते उनके होठोको चुमते नीलमके बुब्सको मसल दीया.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनके सीनेपे मुका मारते धीरेसे कहा..

नीलम : (मुस्कुराते दबी आवाजमे) क्या जीजु.. सुबह सुबह ही सुरु हो गये..? अंदर मांको तो नीपटाकर आये.. अब बेटी.. कुछ तो सरम करो.. अगर कीसीको पता चल गया तो क्या सोचेगे..? मम्मी अंदर हेनां..?

लखन : (होंठ चुमते) हां नीलु.. क्या करु.. तेरी मम्मी भी तेरी तराह बहुत मस्त हे.. तो मे नही रेह पाया.. बस.. कीसीको कहेना नही वरना बेचारी मुसीबतमे फस जायेगी.. चल मे चलता हु.. सहेर जाना हे.. क्या तु साथ चलेगी..? चलना दोनो मस्तीया करेगे..

नीलम : (नां मे गरदन हीलाते) नही नही.. मुजे जोखीम नही लेना.. मेने देखी हे मम्मीकी हालत.. आप ही जाओ.. वरना वहा मेरे साथ आप कुछ ना कुछ सरारत करोगे.. हें..हें..हें..

लखन : (बुब्सको दबाते होंठ चुमते) नही नीलु.. वोतो हमारी स्पेसीयल नाइट होगी.. वो भी कीसी होटेल या आउट ओफ स्टेशन.. क्या चलोगीनां..? चल तो फीर मे चलता हु.. अब तो हम दोनो सहेरमे ही मीलेगे..

नीलम : (मनमे खुस होते हां मे गरदन हीलाते) हां.. चलुगी.. लेकीन होटेलमे नही.. आउट ओफ स्टेशन.. जहा सीर्फ हम दोनोके अलावा कोइना हो.. (होठोको चुमकर) जीजु.. आइ लव यु.. अब जाओ भी.. वरना मम्मी आजायेगी..

फीर लखन फटाफट यहासे नीकलकर बाथरुममे घुस गया ओर नहाकर कंपलीट हो गया.. फीर नीचे आगया तो रमा नीलम भी कंपलीट होकर नीचे आगइ थी.. नीलम लखनको देखकर मुस्कुराते अपनी मम्मीकी ओर देखने लगी.. लखनने भी हसते हुअ‍े नीलमको बडी आंख करते ना मे गरदन हीलाइ.. फीर बाकीके सबलोग कंपलीट होकर आने लगे.. ओर डाइनींगपे बैठ गये..

तो आज भी पुनम लखनके पास बैठी थी.. जो अभी नीचेसे लखनके पैरोको अपने पैरसे सहेला रही थी.. जैसे दो प्रेमी हो.. तभी लखनने भी अ‍ेक हाथ नीचे लेजाकर पुनमके हाथोमे उंगलीया फसाली.. तो पुनमने भी लखनके हाथोमे उगलीया कसके फसादी.. सबलोग चाइ नास्ता कर रहे थे तब लखन ओर पुनमका चाइ नास्ता करते भी सबसे छुपछुपके प्यारका खेल चल रहा था.. पुनमकी चुत गीली होने लगी.. तभी..

देवायत : लखन.. तुम नास्ता करके फटाफट नीकलो.. जानेमे ही अ‍ेक घंटा लग जायेगा..

लखन : (मुस्कुराते) जी भैया.. अभी जाता हु.. (पुनमकी ओर देखते) क्या कीसीको मेरे साथ चलना हे..?

मंजुला : (दोनोका खेल समज गइ तो कातील नजरोसे मुस्कुराते) नही बी..टु.. कीसको साथ नही चलना तुम अकेले ही चले जाओ.. ओर सबको लेकर फटाफट आजाओ.. क्या तुजे सादीमे नही जानां..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) जी भाभीमां.. जाना हे.. ठीक हे अकेला ही चला जाता हु..

कहा तो पुनम सरमाकर मुस्कुराने लगी.. ओर उसने लखनका हाथ फौरन छोड दीया.. क्युकी उसे पता थाकी अभी उनके ओर लखनके बीच जोभी हरकते हो रही थी.. वो सब मंजु जानती होगी.. ओर पुनम मंजुकी ओर सरमाते देखने लगी.. तो मंजु उनको ही देखते हस रही थी.. पुनम बहुत ही सर्मसार होते मुस्कुराने लगी.. फीर लखन चाइ नास्ता करके देवायतकी बडी कार लेकर सहेरकी ओर नीकल गया..
 
तो आज सुबहसे ही सृतीका मन कही नही लग रहाथा.. उसे आज ना जाने कैसे बैचेनी जैसा लग रहा था.. कल वो सोने तक अपनी मम्मी भुमीकाके बारेमे सोचती रही थी.. जो आज वो आने वाली थी.. तभी उसने अपने मोबाइलमे अपनी डोक्टर फ्रेन्डको फोटो सेन्ड करनेका मेसेज भेज दिया.. ओर वो मनसे चाहने लगी की उस फोटो उनकी मम्मीका ना हो.. लेकीन कीस्मतको कौन टाल सकता हे..

तो इधर पोने घंटेमे ही ड्राइव करते लखन ट्रावेल्सकी ओफीसके सामने पहुंच गया.. ओफीसमे जाकर पुछा तो कहा बस.. १० १५ मीनीटमे ही आ रही हे.. तब लखन अपनी कारमे आकर बैठ गया.. वहा बहुत सारे सोग अपने रीस्तेदारोको लेने आये थे.. पीछले दो दिनसे वो पुनमके साथ प्यारका खेल खेल रहा था.. तभी उसे अचानक याद आ गया.. ओर वो आज पहेली बार अपना मोबाइल नीकालकर पुनमसे चेट करने लगा..

लखन : (चेट मेसेज) हाइ जान.. क्या कर रही हो..?

पुनम : (थोडी देरके बाद) हाइ जानु.. बस.. सादीमे जानेके लीये तैयार हो रही हु..

लखन : (टाइप करते) दीदी.. आज आप क्या पहेन रही हो..?

पुनम : (थोडी देरके बाद) क्यु..? आप खुद ही आकर देख लेना..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. वो रेड चनीया चलो पहेनना.. जो मे आपके लीये लायाय था.. उनमे आप बहुत खुबसुरत लगोगी..

पुनम : (थोडी देरके बाद) ठीक हे.. भाइ मुजे तैयार होनेदोनां.. सबलोग आ रहे हे.. मे बादमे बात करुगी..

लखन : (मेसेज टाइप करके छोड देता हे) दीदी.. आइ लव यु..

पुनम सृती ओर लता पुनमके रुममे सादीमे जानेके लीये तैयार होने लगी.. तभी पुनमके फोनमे वापस मेसेजकी रींगटोन सुनाइ दी.. लेकीन पुनम सबकी हाजरीकी वजहसे मेसेजको इग्नोकर करदेती हे.. क्युकी उसने भी लखनकी तराह आज तक कीसीसे चेट नही कीया था.. वो बहुत सरमा रही थी.. लखनने बहुत वक्त तक पुनमके जवाबका इन्तजार कीया.. लेकीन मेसेज तो नही आया लेकीन उनकी बस आगइ..

पुनमके बारेमे सोचते लखनका लंड जटके मारते टाइट हो गया था.. तो लखन फोनको अपनी जेबमे रखते फटाफट कारसे उतर गया.. ओर लोक करते बसके पास चला गया.. तो सभी पेसेन्जर अ‍ेक के बाद अ‍ेक उतरने लगे.. तभी उसे अपनी सांस सरला चाची बससे उतरती नजर आइ.. तो लखन मुस्कुराते उनके पास चला गया.. ओर उनके पैर छुने लगा.. तो सरला लखनको देखकर बहुत खुस होगइ.. ओर उसने लखनको गले लगालीया..

तभी उसे अपने नीचे चुभन महेसुस हुआ.. तो सरला हडबडाते लखनसे दुर होगइ.. ओर टेडी नजर करते लखनके पेन्टको देखने लगी.. तो उसे लखनका ओजार बहुत बडा लगा.. तो वो लखनको देखते ही रेह गइ.. तो पीछे भुमीका ओर नीर्मला भी उतरके आगइ.. लखनने उनको भी बारी बारी गले लगाया.. तो उन दोनोका भी यही हाल हुआ.. ओर आखीरमे चंदा भी नीचे उतर गइ.. लखनको मंजुकी सभी बाते याद आने लगी..

तभी चंदा लखनको देखते ही दोडकर लखनको जोरोसे गले लगा लीया.. अ‍ेक तो सुबह उसे मंजु चंदाके बारेमे बहुत कुछ बताके गइ थी.. तो दुसरी ओर प्रेगनन्सीकी वजहसे चंदाके चहेरेपे काफी नीखार आचुका था.. आज लखनने चंदाको अपनी भाभी नही अ‍ेक कामी ओरतके रुपमे देखा.. तो लखनने चंदाको कुछ ज्यादाकी बाहोमे भीच लीया.. लखनका लंड सीधाही चंदाकी चुतपे दस्तक देने लगा.. जीसका अहेसास चंदाको भी होगया.. ओर वो सर्मसार होते लखनसे दुर होगइ..

चंदा : (मुस्कुराते) कहीये देवरजी.. कैसे हे आप..? क्या अकेले ही आये हे..? धिरेन नही आया..?

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. मे सीधा हमारे गांवसे ही आ रहा हु.. चलीये कहा हे सामान हमे लेट हो रहा हे.. क्युकी वहा श्रीधरकी सादीमे भी जाना हे.. सब आप लोगोका इन्तजार कर रहे हे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) लखन बेटा.. सामान पीछे डीकीमे हे.. चल मे तेरी मदद करती हु.. तुम लोग कारमे जाकर बैठो.. मे ओर लखन सामान लेकर आते हे..

चंदा : (हसते) अरे दीदी.. मेरे होते हुअ‍े आप सामान लोगी..? चलो मे भी आती हु..

कहेते चंदा लखन ओर नीर्मला बसके पीछे चले गये.. ओर भुमीका ओर सरलाचाची कारकी ओर जाने लगी.. तो बसका आदमी सब लोगोका सामन नीकालकर बहार रखने लगा.. तबतक चंदा ओर नीर्मला दोनो बहेने टेडी नजर करते लखनके पेन्टके उभारको देखती रही.. तभी चंदाने उनमेसे अपना सामान ढुंढकर दो तीन बेग उठाकर लखनको देदी.. तो लखन सामान लेकर कारकी ओर चल पडा.. तभी..

नीर्मला : (लखनकी ओर देखते धीरेसे) चंदा.. देखतो सही.. जडीबुटी देनेके बाद तेरे देवरका कुछ ज्यादा ही बडा हो गया हे.. पता नही इनकी बीवी इनको कैसे जेलती होगी.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते मस्तीमे) हां दीदी.. अभी गले मीले तो कैसे चुभ रहा था.. दीदी पसंद आया..? तो बोलो मेरो देवरको कहेती हु.. आपको खुस करदेगा.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (सर्मसार होते चंदाको अ‍ेक मुका मारते) कमीनी.. कुछ तो सरम कर.. मेरे बेटे जैसा हे वो.. हां अगर तुजे उनसे मजे करनेकी इच्छा हे तो बता.. मे मंजुसे बात करती हु.. वो तेरा सेटींग करवा देगी.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाकर हसते) ना बाबा नांं.. उसे मत कहेना.. वो तो वाकइ कमीनी हे.. दीदी.. वो सबतो ठीक हे.. लेकीन धिरेन क्यु नही आया..? क्या वो इतना बीजी हे की हमारे लीये उनके पास टाइम भी नही..

नीर्मला : (मुस्कुराते) अरी.. क्यु चीन्ता करती हे.. जोबपे गया होगा.. सायद उनको छुटी नही मीली होगी.. सामको घरपे आजायेगा.. तुम उसे फोन कर देना की हम लोग आगये हे..

चंदा : (आंख गीली करते) दीदी.. कल ही उनको फोन कीया था.. तो फोनपे ठीकसे बात भी नही करता था.. उसे कुछ हुआ तो नही..? घर जाकर फीरसे बात करनी पडेगी..

तभी उसे लखन वापस आता दिखाइ दिया तो चंदा फौरन चुप होगइ.. तभी..

लखन : (पास आते ही) लाइअ‍े भाभी सामान.. ओर कीतना हे..?

चंदा :(मुस्कुराते) देवरजी.. ये तीन बेग लेकर जाइअ‍े बाकीका हम दोनो लेकर आती हे.. बस हो गया खतम.. इतना ही हे..

फीर सभी सामान आ गया तो चारो कारमे बैठने लगी.. नीर्मलाने चंदाकी मस्तीया करते उनको जबरदस्ती लखनके पास आगे बीठा दीया ओर वो तीनो पीछे बैठ गइ.. तब चंदा जुठा गुस्सा करते नीर्मलाकी ओर घुरके देखने लगी.. तो नीर्मला ओर भुमीका जोरोसे हसने लगी.. लखनको भी कुछ समज नही आयाकी पीछे सब क्यु हस रहे हे.. तभी चंदाने अ‍ेक बार फीर लखनके पेन्टकी ओर देखलीया..
 
नीर्मला : (हसते) लखन बेटा.. अब जाने दो.. कहो.. तुमने यहा घरपे सब सामान सेट करलीया..?

लखन : (मुस्कुराते) हां आंटी.. वो रमा भाभी ओर लता थी.. तो सब अच्छेसे सेट हो गया.. क्या वहा घरपे चलना हे..?

सरला : नही लखन बेटा.. वहा फीर कभी आयेगे.. आप हमे तो घरपे छोड देना बहुत नींद आ रही हे.. मुजे तो बसमे नींद ही नही आइ..

भुमीका : (हसते) भाभी.. कुछ तो सरम कर.. पुरे रास्ते सोते ही आइ हो.. कैसे खर्राटाते सो रही थी.. तेरी आवाजसे तो हम भी सो नही पाइ..

नीर्मला : (हसते) हां भाभी.. भुमी ठीक केह रही हे.. वहा भी आपने सोनेका ही काम कीया हे..

सरला : अरे मेरी उमर भी तो हो गइ हे.. मे आजकल बहुत थक जाती हु.. तो क्या करु..? हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) भाभी इतनी भी उमर नही दीखती.. अभी भी पटाका लग रही हो.. कभी बाजारसे नीकलोगी तो पता चलेगा.. आज भी अ‍ेक दोको अ‍ैसे ही गीरा दोगी.. यकीन ना होतो पुछलो अपने लखनसे हें..हें..हे (सबलोग जोरोसे हसते हे)

सरला : (सर्मसार होते हसते) कमीनीओ कुछ तो सरम करो.. साथमे लखन बेटा हे.. ओर मेरा दामाद भी हे.. वो मेरे बारेमे क्या सोचेगा..?

लखन : (हसते) काकी.. आप लोग लगे रहो मे कुछ नही सुन रहा.. लगता हे सबने अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते बहुत अ‍ेन्जोय कीया हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) अरे पुछो ही मत.. बहुत मजा कीया.. अच्छा बेटा ये बता.. घरपे कोइ अच्छी खबर..?

लखन : (चंदाकी ओर देखते हसते) हां आंटी.. सुनाहे मे फीरसे चाचा बनने वाला हु.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) अच्छा.. तो तेरी भाभीमांने तुजे तेरी इस चंदा भाभीके बारेमे बता दीया.. हें..हें..हें..

लखन : (खुसीसे चंदाकी ओर देखते) क्या..? भाभी आप भी मां बनने वाली हे..?

चंदा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) जी देवरजी..

भुमीका : (आस्चर्यसे देखते) अ‍ेक मीनीट.. बेटा आप.. भी.. का मतलब..? तो क्या कोइ ओर भी मां बनने वाली हे क्या..?

लखन : (हसते) हां बुआ.. अबतो आप भी मीठाइआ बाटो क्युकी आप भी नानी बनने वाली हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (खुसीसे चीलाते) व्होट..? मतलब क्या सृती..? वो मां बनने वाली हे..?

लखन : (हसते) हां बुआ.. अभी चार दिन पहेलेही सब टेस्ट हुआ तो पता चला भाभी प्रेगनेन्ट हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (खुसीसे हसते) लखन बेटा येतो तुमने बढीया समाचार दीया हमे.. सुन.. तेरी चंदा भाभीका भी कुछ अ‍ैसाही हुआ.. हमने भी वहा सब टेस्ट करवा लीये.. ये भी तुजे अ‍ेक भतीजी या भतीजा देगी..

सरला : (हसते) चलो अच्छा हुआ कमसे कम अब इस घरमे बच्चोकी कीलकीलाट तो सुननेको मीलेगी.. बस.. अब लता भी हमे कोइ खुसखबर सुनादे तो गंगा नहाये..

नीर्मला : (हसते हाथ थामते) अरे भाभी क्यु चीन्ता करती हो..? वो भी होजायेगी..

भुमीका : (मुस्कुराते) लखन बेटा.. क्या सृती भी वहा हे..?

लखन : (मुस्कुराते) हां बुआ.. भाभी मेरे साथ ही आइ हे.. सुनो सब.. अ‍ेक खुस खबर ओर सुनाता हु.. कल भाइने हमारी दया बहेनके साथ सादी करली.. हमारे आश्रमपे.. बाबाने खुद करवाइ.. हें..हें..हें..

चंदा : (थोडा नाराज होते) तुम दोनो भाइ कीतने कमीने हो.. इतनी बीवीया हे फीर भी जी नही भरता जो सादी पे सादी कीये ही जा रहे हो..

नीर्मला : (चंदाको सम्हालते) चंदा.. इसपे इस बेचारेपे क्यु गुस्सा कर रही हो.. क्या तुजे नही पता ये सब क्यु हो रहा हे..? अगर नही पता तो अ‍ेक बार अपने बडी सोतनको पुछले.. सब पता चल जायेगा..

चंदा : (सामने देखते) अरे दीदी मे नाराज कहा हो रही हु.. ये तो मुजे भी पता हे की ये सब क्यु हो रहा हे.. बस.. ये तो मेरे देवरकी थोडी मस्तीया कर रही थी.. सोरी..

लखन : (मुस्कुराते) अरे भाभी.. आप सोरी मत बोलो.. आपको हमे गाली देनेका पुरा हक हे.. अगर भाभीया गालीया नही देगी तो कौन देगा.. मुजे कोइ बुरा नही लगा..

भुमीका : (हसते) क्या तेरी सृती भाभी भी तुजे गालीया देती हे..? हें..हें..हें..

लखन : (हसते) अरे.. बहोत.. उनका गुस्सा हमेसा उनके नाकपे ही रहेता हे.. गालीया क्या वो कभी कभी तो हाथ पाव भी चलाती हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) अच्छा..? आनेदो मुजे घरपे.. उनकी खबर लेती हु.. मेरे बेटेको मारती हे.. हें..हें..हें..

सादीकी बात सुनकर चंदाको अच्छा नही लगा था.. ओर वो भारी मनसे मुस्कुराती रही.. उसे लगा की देवायतने इतनी सादीया करली.. ओर अभी भी सादी कीये ही जा रहे हे तो वो सबको टाइम कैसे देपायेगे..? अब इतनी सादीयोकी वजहसे देवायत उसे बहुत कम वक्त देपायेगा.. यही सोचते चंदा अपने गांवके पाससे गुजरी तो देखा उनके घरपे ताला लगा हुआ था.. तो चंदा थोडी मायुस होगइ..

चंदा : (घरकी ओर देखते) देवरजी.. घरपे तो ताला हे.. तो क्या पुनम दीदी वहा हे..?

लखन : (थोडा सीरीयस होते) हां भाभी.. आप पहेले घरपे चलीये.. पुनोदीदी वही हे..

कहा तो तब चंदाको ये नही पता था.. की अब पुनम ओर धिरेन अलग हो चुके हे.. ओर सब लोग बाते करते हवेलीपे पहोंच गये.. तो घरपे सब लोग तैयार होकर सादीमे जा ही रहे थे.. की लखन कारमे सब लोगोको लेकर आ गया.. तो चारोको देखते ही सब लोग बहार आगये.. ओर यात्रा करते आये थे.. तो सब लोग चारोके पैर छुने लगे.. तब पुनम भी हस हसके सबके पैर छुने लगी.. तब चंदाके पास आते ही चंदाने पुनमको गले लगा लीया.. ओर उनका सर चुमते उसे देखती रही.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २३१

कहा तो तब चंदाको ये नही पता था.. की अब पुनम ओर धिरेन अलग हो चुके हे.. ओर सब लोग बाते करते हवेलीपे पहोंच गये.. तो घरपे सब लोग तैयार होकर सादीमे जा ही रहे थे.. की लखन कारमे सब लोगोको लेकर आ गया.. तो चारोको देखते ही सब लोग बहार आगये.. ओर यात्रा करते आये थे.. तो सब लोग चारोके पैर छुने लगे.. तब पुनम भी हस हसके सबके पैर छुने लगी.. चंदाके पास आते ही चंदाने पुनमको गले लगा लीया.. ओर उनका सर चुमते उसे देखती रही.. तभी.... अब आगे

चंदा : (मुस्कुराते) दीदी.. आप यहा हो..? कैसा हे मेरा धिरेन..? वो वहा भी मीलने नही आया..

पुनम : (मंजुकी ओर देखते) भाभी.. वो.. वो.. सायद बेन्कपे गये होगे..

मंजुला : (बातको सम्हालते) दीदी.. पहेले घरमे तो चलीये.. फीर आरामसे बैठकर बाते करती रहेना..

तो दुसरी ओर सृतीभी चारोके पैर छुनेके लीये अपनी बारीका इन्तजार करते भुमीकाके पेटकी ओर देख रही थी.. तब उसे आज भुमीका पेट थोडा बडा दिख रहाथा.. तो देखते ही सृतीके दिलकी धडकन बढ गइ.. ओर वो भी पैर छुते भुमीके पास आगइ.. जैसे ही पैर छुआ भुमीने उसे उठाकर अपने गले लगा लीया.. तो सृती गले मीलकर जोरोसे रोने लगी..

भुमीका : (हसते) अरे.. क्या हुआ मेरी बच्चीको.. रो क्यु रही हे..? कुछ हुआ क्या..? कही तेरे देवरने तुजे वहा परेसान तो नही कीया..? हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते सर सहेलाते) अरे तुजे इतने दिनके बाद देखा तो मन भर गया होगा..

लखन : (हसते) अरे आंटी.. आपकी बेटी परेसान होने वाली चीज नही हे.. वो परेसान करने वाली चीज हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) अरे हां.. लखन बेटा केह रहा था तु इसे गालीया देती हे ओर इसे मारती भी हे..?

सृती : (लखनकी देखते) मम्मी.. ये तो जुठा हे.. तु कहा इनकी बातोमे आगइ..

कहेते सृती थोडा गुसेल नजरसे लखनकी ओर देखती हे.. तब पुनम ओर मंजु सबकुछ समज गइ.. की सृती क्यु रो रही हे.. मंजुने पुनमकी ओर देखा तो पुनम समज गइ.. ओर जटसे सृतीके पास जाकर उनको सम्हाल लीया.. ओर अपने साथ अंदर लेजाते अपने रुममे लेगइ.. ओर दरवाजा बंध करलीया.. फीर दोनो बेडपे चली गइ.. सृतीका मुड बहुत बीगड चुका था.. ओर वो नजरे जुकाये आंसु बहाती रही..

तबतक सब लोग अंदर आचुके थे ओर होलमे बेठे थे.. नीर्मलाने मंजुको देवायतके बारेमे पुछा तो देवायत तो सुबहसे ही जवेरीलालके घरपे सादीमे चला गया था.. तो मंजुने उसे सादीमे गये हे कहा तो नीर्मला ओर भुमीका थोडी नीरास होगइ.. फीर मंजुने सबका हाल चाल पुछा ओर सब लोग यात्राकी बाते करने लगे.. बातो ही बातोमे नीर्मलाने चंदाके प्रेगनेन्सीकी बात की.. तो सुनकर चंदा बहुत सरमा गइ..

मंजुला : (हसते) मोम.. आपके ओर बुआके लीये भी अ‍ेक खुस खबर हे.. हमारी सृती भी प्रेगनेन्ट हे..

भुमीका : (हसते) अरे वोतो हमे रास्तेमे लखन बेटेने सबकुछ बता दीया.. लेकीन वो हे कहां..? मीलकर चली गइ.. कुछ हुआ हे क्या..?

लखन : (हसते) नही बुआ.. यही होगी.. आपने अपनी बेटीको लाड प्यारमे बहुत बीगाडा हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (जोरोसे हसते पीठमे मुका मारते) चल हट बदमास.. मेरी बेटी बहुत सीधी हे.. लगता हे.. इन दस दिनोमे दोनोने खुब मस्तीया की हे.. हें..हें..हें..

सरला : (हसते) लखन बेटा.. अब तुम हमे घरपे छोडदो.. कीतने दिन होगये.. घर नही देखा.. पता नही भानु ठीकसे खाता भी होगा की नही.. क्युकी भावना ओर रमा भी तो इधर हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) अरे.. अभी अभी तो आप आये हो.. तो थोडा आराम भी करलो.. सामको फुरसतमे भानु भाइके साथ चली जाना.. ओर आप लोगोको सादीमे भी तो आना हे..

सरला : (हसते) ना बाबा ना.. साम तक नही रुकना.. अभी चले जायेगे.. सादीमे भानु तो हे.. हमे लखन बैटा ही छोड देगा.. तो मे ओर रमा चली जायेगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) कोइ जरुरत नही.. अगर साम तक नही रुकना तो खाने तक रुक जाइअ‍े.. अभी खाना बन जायेगा.. वरना हम सबतो सादीमे जा रहे हे तो आप भी चलीये.. आप खाना खाकर चली जाना.. वरना घरपे जाकर भी तो वही करना हे..

रमा : (भारी मनसे) माजी.. दीदी ठीक ही तो केह रही हे.. अगर आपको आराम करना हेतो रुममे जाकर सोजाइअ‍े.. हम खाना खाकर घर चले जोयेगे.. हमारे जमाइ हमे छोड देगे.. मे इन लोगोके साथ सादीमे जा रही हु..

नीर्मला : (मुस्कुराते) नही बेटा हम तो घरपे ही खायेगे.. पीछले दस दिनोसे बहारका ही खाना खा रहे हे.. तो आज घरका खाना मीलेगा..

सरला : (मुस्कुराते) ठीक हे बेटा मे भी यही खालुगी.. अभी तो सोना हे.. बहुत नींद आ रही हे..

रमा लखनकी ओर कातील नजरसे देखते हसती रही.. बहार सब लोग बाते करते बैठे थे तब सरला सोने चली गइ.. तो लता रमा नीलम उपरकी मंजीलपे सादीमे जानेके लीये तैयार होने चली गइ.. दया चंपाकाकी ओर भावना खाना बनाने लगी.. तो चंदा तो आते ही विजयको लेकर कमरेमे चली गइ थी.. ओर विजयको दुध पीलानेके बहाने अपना ब्लाउस उचा करते अपने आंचलसे लगा देती हे.. जो चंदाकी आदत बन चुकी थी..
 
तो दुसरी ओर लखन भी मंजुको कहेकर सादीमे श्रीधरके घरपे चला गया.. ओर उसने देवायतको सबको लेआनेकी खबर दी.. फीर वो भी अपने यार दोस्तोके पास चला गया.. तो सबलोग श्रीधरको ये कहेकर चीडा रहे थे.. की तेरा लडका तुजे पापा कहेगा की मामा.. तो श्रीधर हसते हुअ‍े सबको गालीया दे रहा था.. तब जवेरीलाल.. जीतुलाल.. ओर गांवके सभी मर्द पंचायतकी बाते करते गपे लगा रहे थे..

इसी बीच घरपे सृती रो रही थी.. पुनम रुमका दरवाजा बंध करते सृतीको रोनेका कारण पुछ रही थी.. तो सृती भी पुनमकी ओर घुरके देखती आंसु बहाती रही.. तब पुनो भी थोडी गभरा गइ.. फीर पुनमने मुस्कीलसे सृतीको सांत कीया.. तो सृती बाथरुममे मुह धोकर बहार आगइ.. ओर पुनमके पास नीरास होते बैठ गइ.. पुनमने अपनी कसम देकर सृतीको पुछ ही लीया..

पुनम : (सामने देखते) दीदी.. आपको मेरी कसम.. बताइअ‍े तो सही आपको क्या हुआ..? जबसे ये लोग आये हे तबसे आप रोये ही जा रही हे.. कुछ हुआ हे क्या..? कही लखन भैयासे कोइ.. जगडा..

सृती : (फीकी मुस्कानसे) नही दीदी.. अ‍ैसी कोइ बात नही हे.. अब मे आपसे सब कैसे कहु..? क्या आपको नही पता..?

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. मत भुलो अब मे आपको भाभी नही कहेती.. आप मेरी बहेन हो.. ओर हम दोनोका रीस्तातो बहेनसे भी बढकर हे.. मेरी भी कुछ मर्यादा हे.. मे मंजुदीदीकी परमीशनके बगैर आपको नही बता सकती.. लेकीन आपतो बता सकती हे.. क्या आप अपने दिलकी बात मुजसे नही कहोगी..?

सृती : (सामने देखते) दीदी.. आपको ओर मंजुको तो सब पता चल जाता हेनां..? तो फीर मेरे दिलकी बात नही जानती..? आपको नही पता मुजे क्या प्रोबलेम हे.. मे क्यु दुखी हु..?

पुनम : (सर जुकाते) दीदी.. कभी कभी तो लगता हे मंजुदीदी ने दि हुइ शक्तिया अ‍ेक आशीर्वाद नही.. अ‍ेक अभीसाप हे.. ओर इनसे भी ज्यादा अफसोस इस बातका हो रहा हे.. की ये सब आप लोग जानती हे.. की हममे ये शक्तिया हे.. चलीये.. मत बताइअ‍े.. आप तैयार होजाइअ‍े हमे सादीमे जाना हे..

सृती : (नजरे चुराते) दीदी.. आप लोग चले जाइअ‍े.. मेरा कही जानेका मन नही हे.. मे यही खालुगी.. पुनोदी.. आइ अ‍ेम सोरी.. अगर मेरी बातोसे आपको बुरा लगा हे तो मुजे माफ कर दीजीये.. मेरा मन आपको दुख पहोचानेका नही था.. बस.. मे सीर्फ मम्मीको लेकर परेसान हु..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. आइ नो.. परेसान मत होइअ‍े.. सबकुछ ठीक होजायेगा..

सृती : (मनमे) दीदी.. कुछ ठीक नही होगा.. अब आपको कैसे कहु.. मेरी मां कीसीसे प्रेगनेन्ट हे.. तभी तो इनका अ‍ैसा पेट फुला हुआ हे.. पता नही कीसके साथ मुह काला कीया होगा.. ओर आपतो मेरे मनकी सब बाते जानती हे..

पुनम : (सृतीको गले लगाते) दीदी क्या सोच रही हे..? हां मे सब जानती हु.. पर मेरी भी मजबुरी हे.. की इस बारेमे मे आपको नही बता सकती.. ओर घरपे भी इतने सारे लोग हे.. तो खामखा हंगामा होजायेगा.. दो पहोरको सरला काकी ओर रमा भाभी चली जायेगी.. तब आप मंजु दीदीसे सब पुछ लेना.. वो आपको सब कुछ बता देगी.. अभी तो आप सादीमे चलो.. मन थोडा हल्का होजायेगा.. आपको मेरी कसम.. चलो..

सृती : (आंसु बहाते) दीदी.. आप बार बार कसम मत दीया करो.. सीर्फ आप ही हो जो मेरा दुख समज सकती हो.. ओर अ‍ेक हमारा देवर.. मुजे कीतना समजता हे.. लेकीन आजकल वो भी मुजसे रुठा हुआ हे.. ओर मेरे साथ नही बोलते.. फीर भी सबके सामने मेरी टांग खीचाइ करते रहेते हे..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. सांत होजाइअ‍े.. वो अ‍ैसे ही हे.. अगर वो आपकी टांग खीचाइ करते हे तो मतलब वो भी आपको बहुत प्यार करते हे.. बस.. सीर्फ उपर उपरसे नाराज होनेका नाटक कर रहे हे.. आप तैयार होजाइअ‍े.. हमे चलना हे.. देखना वो बहुत जल्द आपसे बात भी करेगे..

सृती : (मुस्कुराते खडी होते) चलो.. तब तो अच्छा हे.. अ‍ेक बातकी तो तस्सली होगी.. की चलो.. कोइ तो मेरा हे जो मुजसे बात करेगे.. दीदी.. अ‍ेक बात कहु..? उन्होने जबसे मेरे साथ बात करना बंध करदीया हे.. तबसे मेरी बैचेनी बढने लगी हे.. अ‍ैसा लगता हे वो मुजसे बात नही करेगे तो मे जी नही पाउगी.. अ‍ैसा क्यु..?

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. यही तो सचा प्यार हे.. जो मेरे साथ भी अ‍ैसा हो रहा था.. लगता हे.. हम दोनोको लखन भैयासे प्यार होगया हे.. कास.. मे नादान तब उनके प्यारको समज पाती.. जब हम दोनो स्कुलमे पढते थे.. तो कमसे कम आज मे धिरेनके पले तो नही पडती..

सृती : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. सायद आप ठीक केह रही हे.. हम दोनो कीतने नजदीक आ गये थे.. मेने भी वो ही नादानी की जो आपने स्कुलके टाइम की.. वरना आज हम दोनोका रीस्ता कुछ ओर ही होता..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. अब चलीये हमे सादीमे भी जाना हे.. देखना बहुत जल्द हम दोनोकी जींदगीमे खुसीओकी बहार आयेगी.. तब हम सारे दुख भुल जाअ‍ेगी.. फीर सीर्फ खुसीया ही खुसीया होगी..

फीर सृती ओर पुनम सादीमे जानेके लीये तैयार होगइ.. आज पुनमने वोही ड्रेस पहेना जो उसे लखनने कहा था.. लता रमा ओर नीलम भी कंपलीट होकर नीचे आगइ.. तो मंजु भावना दया.. सबलोग जवेरीलालके वहा सादीमे चले गये.. तो वहा ब्रिन्दा ओर वृन्दाने सबका बहुत अच्छा स्वागत कीया.. ओर मान सन्मान दीया.. वहा बसंती ओर बनवारीलालकी बहु.. जो अब उनकी बीवी होगइ थी.. बींदीया.. ओर साहीलकी अम्मा सलमा.. जो ब्रीन्दाकी मदद करते सब महेमानोका खयाल रखती थी..

वहा पुनमको देखकर लखन बहुत खुस हो गयाथा.. दोनो सबसे छुपकर आंख मीचोलीका खेल खेलते रहे.. इसारो इसारोमे ही लखनने पुनमके ड्रेसकी तारीफ की.. तो पुनम सरमा गइ.. सृती भी दोनोके उपर नजरे जमाये हुइ थी.. वो भी इस खेलमे सामील होना चाहती थी.. लेकीन लखन सीर्फ पुनमकी ओर ही ध्यान दे रहा था.. जीसे सृती नीरास हो गइ.. ओर उसे अपने कीयेपे पछतावा होने लगा..

मुहुर्तके बाद कुछ ओर विधीया थी.. जो दोपहेर तक संपन होगइ.. फीर सब लोगोने भोजन कर लीया.. वहा भी लखनने पुनमका वीसेस खयाल रखा.. भोजन करके अपने अपने घरपे जाने लगे.. तो मंजुभी सबको लेकर वापस हवेलीपे आ गइ.. तबतक घरपे भी नीर्मला भुमी सरला चंदा.. सबने खाना खालीया था.. सरला काकी लखनका इन्तजार करते घरपे जोनेके लीये बेकरार थी.. तो आधे घंटेके बाद लखन ओर देवायत भी आगये..
 
सरला : (मुस्कुराते) आ गया बेटा तु.. चलो.. चलो.. अब हमे घरपे छोडदो..

भुमीका : (थोडा गुस्सा होते) अरी बैठना क्या कबसे घरकी रट लगाये बेठी हे..? यहा हम तुमसे पथ्थर तुडवा रहे हे क्या..? जबसे आइ हे घर.. घर.. कर रही हे.. बैठ इधर..

सरला : (जोरोसे हसते) नही.. अब नही बैठुगी.. दीदी.. यहा आये हुअ‍े पंद्नह दिन होगये हे.. पता नही घरकी क्या हालत होगी.. साम तक तो सफाइ ही चलेगी.. तब जाके घर जैसा दिखेगा.. चलो रमा.. अपना बोरीया बीस्तरा लेलो.. हमे चलना हे.. अब नही रुकना.. बस.. अ‍ेक ग्लास पानी पीलादे..

रमा : (जाते हुअ‍े लखनकी ओर देखकर नीलमसे) हां माजी अभी लाइ.. नीलु.. क्या तुजे घरपे आना हे..? तो चल.. कल तेरे पापाके साथ वापस चली आना..

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) नही मोम.. कल तो सादी हे.. तो सादीके बाद जीजुके साथ ही वापस जाना हे.. मे सीर्फ दो दिनकी छुटी लेकर आइ हु.. तो आप ही चली जाओ मुजे नही आना..

तो रमा सरलाको पानी पीलाकर उपर जाके अपना सामन लेकर आजाती हे.. फीर सरला ओर रमा सबको गले मीलने लगती हे.. सरला देवायतसे गले मीलते उसे धीरेसे कानमे घरपे आनेके लीये करहेती हे.. फीर लखन दोनोको लेकर कारमे बैठ गया.. तो सरला लखनके साथ तो रमा जानबुजके लखनकी पीछली सीटपे बैठ गइ.. ओर लखन दोनोको छोडने कार लेकर चला गया.. सरला कारमे बैठते ही नींद आनेकी वजहसे आंख बंध करके बैठ गइ..

ओर इसी बातका रमाने फायदा उठाया.. वो सीटके पीछेसे हाथ डालकर लखनकी जांघोको सहेलाते सेन्टर मीररसे लखनको देखकर हसने लगी.. तो लखनका लंड अंगडाइ देते जटके मारने लगा.. लखनने अ‍ेक बार सरलाकी ओर देखलीया.. तो वो खरार्टे मारते सो रही थी.. लखनने अपने पेन्टकी क्लीप खोलदी.. ओर अपनी चडीको नीचे करते रमाका हाथ पकडलीया.. ओर उसे अपना लंड पकडा दीया..

रमा बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनकी ओर कामुक नजरोसे देखते सरमाके हसने लगी.. फीर लखनके लंडको मुठीमे पकडकर उपर नीचे करते सहेलाने लगी.. रमाकी चुत गीली होने लगी.. ओर वो बहुत ही उतेजीत होगइ.. उनसे अब रहा नही जा रहा था.. ओर वो पीछेसे खडी होगइ.. ओर आगे जुकते लखनकी बाहोमे दुसरा हाथ डालते लखनके गालोको चुमने लगी.. लखनने रमाकी ओर देखा..





ओर अपनी कारकी स्पीडको थोडी स्लो करदी.. तो रमाने लखनके होठोपे अपना होठ रखदीया.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेको चुमने लगे.. तभी सामनेने अ‍ेक मोटर साइकील आते दीखाइ दीया.. तो रमा जटसे सही होकर बैठ गइ.. ओर उसने हाथको पीछे खीच लीया.. लखनने भी अपनी पेन्ट सही करदी.. ओर प्यारका खेल खेलते तीनो घरपे पहोंच गये.. देखा तो सरला अब भी सो रही थी.. तब..

रमा : (धीरेसे कानमे) लखनजी.. माजी तो जाते ही सोजायेगी.. तो आप मेरे रुममे चले आना..

लखन : (हां मे गरदन हीलाते) काकी.. ओ काकी.. देखो घर आ गया.. बहुत नींद आ रही हे क्या..?

सरला : (जागते मुस्कुराते) अरे.. घर आगया..? बेटा मे बहुत थक गइ हु.. ओर उपरसे खाना खाया तो धेन चड गया हे.. बेटा.. तुम चाइ या कुछ ठंडा पीकर ही जाना.. मे तो सो जाउगी.. बहुत नींदआ रही हे.. चलो अंदर..

कहा तो रमाके मनमे तो लडु फुटने लगे.. वो लखनकी ओर कातील नजरोसे देखते हसने लगी.. ओर अपना सामान उठाकर अंदर चली गइ.. तो सरलाने लखनको भी अंदर आनेके लीये कहा.. ओर दोनो अंदर उनके रुममे चले गये.. सरला अपने रुममे जाते ही वही बेडपे लेट गइ.. तो कुछ ही देरमे वो खर्राटा मारते सो गइ.. लखन खडा होकर धीरेसे बहार नीकला.. ओर सरलाके रुमका दरवाजा अ‍ेसे ही खाली बंध करदीया.. ओर रमाको ढुंढने लगा..

देखा तो रमा अपने रुममे सारी नीकालकर अपने कपडे चेन्ज कर रही थी.. अभी वो सीर्फ ब्लाउस ओर पेटीकोट मे थी.. तो लखनने रुममे जाते ही रमाको पीछेसे अपनी बाहोमे भर लीया.. तो रमा सरमाके हसने लगी.. ओर पलटके लखनके सीनेमे सरको छुपालीया.. लखनने उसे फौरन अपनी गोदमे उठालीया.. ओर बेडकी ओर चल पडा.. रमाने लखनके गलेमे हाथ डालदीया.. ओर कामुक नजरोसे देखती रही..

रमा : (सरारतसे) लखनजी.. क्या कर रहे हो.. मे आपके सालेकी बीवी हु.. ओर देखो.. हम दोनोकी सांस भी इधर हे.. कही जनाबका इरादातो नेक हेनां..? देखना कही उच नींच ना होजाये..? हें..हें..हें..

लखन : (बेडपे लीटाते) भाभी.. यहा उच नीच ही तो करने आया हु.. कारमे आपने मुजे गरम जो करदीया हे.. क्या थोडा सबर नही कर सकती थी..? कही सरला काकीने देखलीया होता तो..?

रमा : (लखनको अपने उपर खीचते) बस.. वही तो नही होता.. आपको देखते ही मन होने लगता हे.. आप जैसे जवान जमाइ होतो कीसीकी भी नीयत खराब हो जाती हे.. क्या माजी सो गइ..?

लखन : (रमाके उपर छा जाते) हां भाभी.. वो तो आते ही खर्राटा मारने लगी.. सोगइ वो..

रमा : (होठोको चुमते) हां.. वो तो सोयेगीनां.. आज कीतने दिनोके बाद उसे घरका खाना मीला हे.. ओर वो भी उनकी पसंदका भारी खाना.. तो धेन चड गया होगा.. चलीये तब तो हम आरामसे प्यार कर सकेगे.. अब चलीये समय मत बरबाद कीजीये.. आज तो साम तक आपको छोडने वाली नही हु.. फीर पता नही आप कब मेरे हाथ लगोगे..

लखन : (बुब्स आजाद होते ही मसलते) भाभी.. आप हुकुम तो करो.. मे हाजीर हो जाउगा.. आप जैसी भाभीको प्यार करने कोन नही आयेगा..? मे तो दिवाना हो गया हु आपका.. देखना कही प्रेगनेन्ट ना होजाओ.. आइ पील लेलेनां..

रमा : (मुस्कुराते होंठ चुमते) आइ पील लेनेकी कोइ जरुरत नही हे.. अगर प्रेगनेन्ट होती हु तो होजानेदो.. वैसे भी आपकी सासाको मुजसे अ‍ेक बच्चा चाहीये.. ओर आपके भाइमे तो अब वो दम हे नही.. आप फीकर मत करो.. इनमे आपका नाम कभी नही आयेगा.. ये राज सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगा.. आइ प्रोमीस..

लखन : (पेटीकोटका नाडा खीचते) ठीक हे भाभी.. मुजे आपपे पुरा भरोसा हे.. तो चलीये.. आज तो आपको बच्चा देकर ही जाउगा.. क्या मस्त चुचे हे आपके मेतो दिवाजा हो गया..

रमा : (सर्मसार होते हसते) लखनजी.. अभी बच्चेके लीये समय भी सही चल रहा हे.. ओर हमने वहा भी कीतनी बार करलीया.. तो बच्चा ठहेरनेका पुरा चान्स हे.. अब तो ये भाभी आपकी दिवानी होगइ हे.. तो सीर्फ ये चुचे ही क्यु..? मे तो पुरी की पुरी आपकी हो चुकी हु.. चलीये सुरु कीजीये.. आप लेट जाइअ‍े.. मे उपर आती हु..
 
कहातो दोनो कपडे नीकालकर नंगे होगये.. ओर रमाने लखनको पीठके बल लीटा दीया ओर खुद उनकी कमरपे आकर पैर फैलाके बैठ गइ.. दोनो ही कारमे थे तब ही उतेजीत थे.. ओर रमा जल्दसे जल्द लखनका लंड अपनी चुतमे लेना चाहती थी.. तभी वो थोडी उपर होगइ.. ओर लखनका लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट करदीया ओर लखनकी ओर कामुक नजरोसे देखते धीरे धीरे बैठते लंडको अपनी चुतमे घुसाने लगी..





रमा : (आधी आंख चडाते मदहोसीमे) सीससस... आइइइ.. आह.. लखनजी.. ये बहुत बडा हे.. पता नही मेरी ननंदकी क्या हालत करते होगे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. तकलीफ सीर्फ पहेली दुसरी बारमे ही होती हे.. अबतक तो हम तीनसे चार बार मील चुके हे..

रमा : (जुकते होठोको चुमते) सही कहा आपने.. अब तो आप मुजे जनतकी सेर करवाते हे.. जो भानुने कभी नही करवाइ.. लखनजी.. आइ लव यु.. कास हम पहेले मीलते..





कहेते रमा अपनी कमर हीलाते लखनसे चुदवाने लगी.. रुममे सीर्फ रमाकी कामुक सीसकारीया ही सुनाइ देती थी.. तो कुछ ही देरमे रमा अकडने लगे.. ओर लखनके होठोको जोरोसे चुमते लंडको अपने पानीसे भीगोने लगी.. तभी लखनके लंडपे भी गरमाहट महेसुस हुइ.. रमा लखनके सीनेपे जडके ढेर होगइ.. तो लखनने रमाको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर पलटते रमाके उपर छा गया..

दोनोके होठ अब भी मीले हुअ‍े थे.. ओर लखन जोरोसे कमर हीलाते रमाको चोदने लगा.. रमाकी आंख बडी होगइ.. ओर वो लखनसे होठ छुडाते जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. रुममे अ‍ेक बार फीर फच..फच..थप..थप..के साथ रमाकी सीसकारीया गुजने लगी.. फीर लखन हाथके बल उचा होते रमाको होले होले चोदने लगा.. तो रमा प्यारसे कामुक नजरोसे लखनकी आंखोमे देखते उनके गालको सहेलाने लगी..





रमा : (कामुक आवाजमे) लखन.. मेरे सरताज.. आज करदो मुजे गाभीन.. मे आपका बच्चा पैदा करुगी.. क्या मस्त चुदाइ करते हो.. मेतो आपकी कायल होगइ हु.. बस.. मुजे हमेसा अ‍ैसे ही चोदते रहेना..

कुछ देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. लखन जोरोसे कमर हीलाते रमाको चोदे ही जा रहा था.. कुछ देरकी चुदमइके बाद रमा अ‍ेक बार फीर जड गइ.. ओर उनकी हालत पतली होने लगी.. तब भी लखन उसे चोदे ही जा रहा था.. कुछही देरमे रमा अ‍ेक बार फीर उतेजीत होने लगी.. तभी लखनका तन अकडने लगा.. ओर वो अपना लंड रमाकी चुतमे जड तक घुसाते लंबे लंबे सोट माने लगा..





ओर वो रमासे चीपकते गलेको चुमने लगा तो रमाने लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. अपने दोनो पैरसे लखनकी कमरपे आंटी लगाते जकड लीया.. तभी रमाको अपनी बच्चेदानीपे गरम महेसुस हुआ.. जो लखनका लंड अंदर पीचकारीया छोडपे बच्चेदानीपे अपने विर्यकी बोछार कर रहा था.. रमा भी उतेजीत होते आंखोकी पुतलीया पलटने लगी.. ओर लखनकी कमरपे दबाव बनाते लखनके साथ ही जडने लगी..





कुछ ही देरमे दोनो सांत होगये.. रमा मदहोसीमे लखनकी पीठको सहेलाने लगी.. वो आंख बंध करते चरम सुखकी अनुभुती करती रही.. ओर लखन रमाके गलेको चुमता रहा.. आज रमा पुरी तराह तृप्त होगइ थी.. उनके चहेरेपे संतुस्टीके भाव दीख रहे थे.. रमाको लखनका लंड अब भी उनकी चुतपे सख्त महेसुस हो रहा था.. जो अभी रेह रहेके अंदर जटके मार रहा था.. यही तो वो पल था.. जीसे रमा लखनके बच्चेका स्वागत कर रही थी.. तभी..





रमा : (लखनके बालोको सहेलाते होठ चुमते) मेरे मजनु.. आजसे मे आपको तन..मन.. ओर धन..से समर्पीत होती हु.. आज आपने मुजे जनतकी सेर करवादी.. अब आप ही मेरे पती होगे..

लखन : (होठ चुमते) भाभी.. आज इतना प्यार..? जो अभी भी होसमे नही हो.. आंखे खोलो..

रमा : (आंख खोलते) भाभी नही.. सीर्फ रमा.. आपकी रमा.. जो आपसे बेहद प्यार करती हे.. अब मुजे नामसे बुलाइअ‍े.. क्यु जगाया आपने..? कीतना मजा आ रहाथा.. देखो.. अभी भी अंदर जटके मार रहा हे.. अब उपरसे हटना नही हे क्या..? देखो मेरी पुरी चुत भरी हुइ हे.. आप कीतना पानी नीकालते हो..? लगता हे आज तो मे पका पेटसे हो जाउगी..

लखन : (मुस्कुराते गाल चुमते) रमा.. रहेने अंदर.. मुजे अ‍ेक बार ओर चोदना हे तुजे.. अ‍ैसे ही.. बीना बहार नीकाले.. आज तो तुजे प्रेगनेन्ट करके ही जाउगा..

रमा : (कामुक नजरोसे मुस्कुराते) अच्छा..? ओर चोदना हे..? तो चोद लीजीये.. अब तो ये रमा आपकी होगइ हे.. जीतनी मर्जी हो उतना चोद लीजीये.. मे उह.. तक नही करुगी.. भले ही मेरी हालत बीगड जाये.. मे सबको जवाब दे दुगी.. चोदीये मुजे.. अब मुजे कीसीकी परवाह नही..

कुछ देरके बाद लखन अ‍ेक बार फीर रमाको चोदने लगता हे.. अब तो उसे भी अपनी स्टेमीनाके बारेमे पता था.. ओर अ‍ेक बार फीर दोनोके बीच घमासान चुखाइ हुइ.. इस बार भी लखनने रमाको दो दो बार जडाके रमाकी चुतको हरी भरी करदी.. लखनका लंड अंदर था फीर भी दोनोका कामरस चुत लंडसे रास्ता बनाते बहारकी ओर नीकलने लगा.. रमा लखनसे चुदवाकर पुरी तराह थक चुकी थी..





लखनने रमाका अ‍ेक अ‍ेक अंग ढीला करदीया था.. रमाका पुरा तन दर्द करने लगा था.. लखनने रमाके पेटीकोटसे अपना लंड पोछकर अपने कपडे बहेन लीये.. तब भी रमा बेसुध जैसी हालतमे अ‍ैसे ही नंगी होकर पडी थी.. ओर उनकी चुतसे दोनोका काम रस बहार नीकल रहा था.. लखन रमाके होठोको चुमते रुमसे बहार नीकल गया.. तब उसे पता चलाकी जल्द बाजीमे रुमका दरवाजा तो खुलाही रेह गया..
 
ओर उपरसे दोनोको ये भी नही पता थाकी दोनो कीतनी देर तक चुदाइ कर रहे थे.. लखन जाही रहा था.. तब उसने देखा सरलाके रुमका दरवाजा खुला था.. तो लखनने वहा जाकर अ‍ेक नजर डालते देखा.. तो सरला ना अपने बेडपे थी.. ओर नाही रुममे थी.. तो लखनकी गांड फटने लगी.. ओर वो जटसे बहार नीकलने लगा.. तभी उसे बहार बाथरुममे पानीकी आवाज सुनाइ दी.. तो लखनने राहतकी सांस ली..

लखन धीरेसे आंगनका दरवाजा खोलकर अपनी कार लेकर चला गया.. लखनको पता नही थाकी कारकी आवाज सुनकर सरला बाथरुमकी खीडकीसे लखनको जाते हुअ‍े देख रही थी.. लखनको इतनी देर तक यहा रुकनेकी वजहसे उनको कुछ आसंकाये होने लगी.. वो कुछ देरके बाद अपने रुमकी ओर जाने लगी.. ओर जाते जाते उनका ध्यान रमाके रुमकी ओर चला गया..

देखा तो रमाके रुमका दरवाजा खुला था.. तो सरला धीरेसे वहा चली गइ.. ओर दरवाजेसे अंदर जांकते देखने लगी.. तो अंदरका नजारा देखते ही वो चोंक गइ.. क्युकी अंदर बेडपे रमा अभी भी बेसुध्ध जैसी हालतमे पुरी नंगी सो रही थी.. उनके सभी कपडे नीचे अस्त व्यस्त पडे हुअ‍े थे.. सरला दबे पांव अंदर चली गइ.. ओर नजदीक जाते देखने लगी..

तो रमा गहेरी नींद सो रही थी.. ओर उनकी चुतपे दोनोका काम रस चीपका हुआ था.. जो अभी भी थोडा बहार नीकल रहा था.. तब सरलाको सभी परीस्थीतीया समजमे जरासी भी देर नही लगी.. ओर वो दबे पाव वापस अपने रुममे चली गइ.. वो अपने बेडपे लेटकर आराम करते सोचने लगी.. उसने भी लखनके लंडकी चुभन महेसुस कीथी.. जीस बारेमे सोचकर सरलाकी चुत भी गीली होने लगी..

सरला : (मनमे) हे भगवान ये सब क्या हो रहा हे..? इतना तो पता था मेरी लता देवुसे प्यार करती थी.. ओर मे भी तो देवुसे चुदवाती हु.. तो क्या भानु इनको खुस नही रखता होगा..? मुजे पता हे तनकी आंग कैसी होती हे.. ओर लखन भी हेन्डसम हे.. जो भी हो.. अब मे इसे रोक भी तो नही सकती.. वरना ये बहार कीसी ओरके साथ मुह मारने लगेगी.. तो घरपे खामखा हंगामा हो जायेगा.. ओर घर बीखर जायेगा.. इनसे तो अच्छा हे जो हो रहा हे उसे होनेदो.. कमसे कम घरकी बात घरमे तो रहेगी..

तो दुसरी ओर हवेलीपे लता भावना ओर नीलम उपर लता वाले रुममे आराम करते बाते कर रही थी.. तब नीचेकी ओर नीर्मला ओर भुमीका थकानकी वजहसे नींदकी आगोसमे चली गइ थी.. आज सृती अपनी मम्मीकी वजहसे थोडी अपसेट थी.. मंजुके रुममे मंजु देवायतको चंदाकी ओर इसारा करते छेड रही थी.. तो चंदा भी इतने दिनोसे देवायतको नही मीली थी तो देवायतकी मस्तीया कर रही थी..

तो मस्तीया करते करते कुछ ही देरमे देवायत चंदाके उपर चडते उनकी गुफामे धमाका करने लगा.. चंदा बहुत ही मदहोस होते कामातुर होकर देवायतसे चुदवाने लगी.. वो अपनी कमर उछाल उछालके देवायतको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्सा रही थी.. तो दोदोनी चुदाइ देखते मंजु भी तावमे आ गइ.. ओर अपनी सारी कमर तक करते अपनी बारीका इन्तजार करते चंदाके बुब्सको ओर उनके होठोको चुमते उसे ओर उतेजीत कर रही थी.. जब चंदा जड गइ तब देवायत मंजुके उपर चडते उसे चोदने लगा..

तो कुछ देरकी धमाके दार चुदाइके बाद मंजु भी जड गइ.. तो देवायत वापस मंजुको घोडी बनाकर उनको पीछेसे चोदने लगा.. आज देवायतके रुममे उनकी दोनो रानीया देवायतसे बारी बारी चुदवाती रही.. देवायत चंदा ओर मंजुको दो दो बार चोद लेता हे.. फीर दोनो ही अ‍ेक दुसरेसे चीपकते नींदकी आगोसमे चले गये..

आज पता नही सृतीको देवायतके पास जानेका मन नही हुआ.. तो पुनम करवट लेकर सृतीकी ओर होगइ.. ओर उसे बाहोमे भरते लेटने लगी.. तभी सृतीके फोनपे मेसेजकी रींग टोन बजी.. तो सृती जटसे बेडपे बैठ गइ ओर अपना मोबाइल उठाकर देखने लगी.. तो उनकी फ्रेन्डने सृतीको फोटो सेन्ड करदीया था.. ओर जैसे ही सृतीने फोटो देखली.. सृतीने जोरोसे मोबाइलको बेडपे पटक दीया.. तो पुनम भी जटसे बेडपे बैठ गइ....

कन्टीन्यु
 
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