Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 74 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती





my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २३४

फीर रमेश वापस सादीमे आजाता हे.. कीसीको पता भी नही चला की रमेश जयाकी चुदाइ करके कल भागनेकी प्लानींग करके आगया.. वो भोजन पंडालमे जाकर सब व्यवस्था देखने लगा.. इसी बीच लखन बहार चला गया था तो पीछे पुनम ओर लताभी लखनके पास जानेके लीये बहार नीकल गइ.. देखा तो लखन सादीके माहोलसे सबसे दुर अ‍ेक जगाहपे खडा था.. जहा कोइ आता जाता नही था.. तो पुनम लता भी उनके पास चली गइ.. पुनमको पता थाकी लखनको क्या प्रोबलेम हे.. तीनो थोडी दुर अ‍ेक जगहपे जाकर खडे होगये....अब आगे

पुनम : (थोडी चीन्तासे) भाइ.. क्या हुआ..? अ‍ैसे अचानक क्यु बहार चले आये..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. बस.. कुछ नही.. अ‍ैसे ही.. आपने कहाथाना आप मुजे अकेलेमे मीलना चाहती हे.. तो यहा कोइ नही हे.. सब सादीमे बीजी हे.. वैसे आपको तो सब पता तो हे.. की मेरी क्या हालत हे.. ओर अब तो लता भी मुजसे दुर रहेती हे.. हें..हें..हें..

लता : (रुहासी आवाजमे) यार मुजे दीदीने यहा बुला लीया हे.. लखन.. आइ अ‍ेम सोरी.. लेकीन मे क्या करु..? बडी दीदीने मुजे आपसे दुर रहेनेके लीये कहा हे.. फीकर मत बरो.. मे बहुत जल्द आपसे मीलुगी..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. फीकर मत करो.. सीर्फ कुछ दिन सबर करलो.. बडी दीदी ये सब जानबुजके कर रही हे.. ओर इनका भी अ‍ेक रीजन हे.. बस.. मे वहा आउ तब मुजसे पुछ लेना.. मे आपको सबकुछ बता दुगी.. भाइ.. मुजे आपसे कुछ बात कहेनी हे..

लखन : (सामने देखते) हां दीदी.. बताओ क्या बात कहेनी हे.. कोइ प्रोबलेम तो नही..?

पुनम : भाइ.. मेने आपको कहाथानां.. वो सृती दीदीके बारेमे की वो भी हमारी बहेन हे.. फीर उसे भुमी आंटी ओर बडे भैयाके बारेमे भी सब पता चल गया तो वो घर छोडकर अपने घर चली गइ हे.. भाइ.. वो बहुत ही अपसेट हे.. जब यहासे जा रही थी तब दो बार तो अ‍ेक्सीडेन्ट करके बची हे..

लखन : (थोडा परेसान होते) ओह.. गो..ड.. भाभी भीनां.. क्या मेरे आने तक इन्तजार नही कर सकती थी..? मे उनको छोडने चला जाता..

लता : (मुस्कुराते) अरे..? लेकीन आपतो उनसे रुठे हुअ‍े होनां..?

लखन : (परेसानीसे) ओह गोड.. क्या मुसीबत हे..? यार फीर भी उनको छोडने चला जाता.. वैसे कीसीको मेरे रुठनेसे क्या फर्क पडता हे..?

लता : (आंख गीली करते) यार मेरी गलती नही हे.. मे जान बुजके आपको छोडकर नही आइ.. अ‍ैसे ताने तो मत मारो.. दीदी समजाइअ‍ेना इसे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. लता ठीक केह रही हे.. कुछ दिनमे आपको सब पता चल जायेगा.. मेरे खयालसे आपको सृती दीदीसे अ‍ेक बार बात करलेनी चाहीये.. वरना वो अ‍ैसे ही पागल होजायेगी.. वो भले ही बडे भैयासे नफरत करने लगी हो.. लेकीन वो आपको चाहने लगी हे..

लता : लखन.. मेरे खयालसे कल सुबह जाते ही आपको उनसे मील लेना चाहीये.. ओर उनसे बात करके मनाकर हमारे घरपे लेआइअ‍े.. वो वहा अकेली हे.. सबकुछ कैसे मेनेज करेगी..?

लखन : (कुछ सोचते) ठीक हे दीदी.. मे कल सुबह जाउगा तब उनसे मील लुगा.. पर इनसे पहेले आप उनके साथ अ‍ेक बार बात करलेना.. ओर कहेना.. मे कल उसे लेने आ रहा हु..

पुनम : (मनमे खुस होते) ठीक हे भाइ.. मे आज ही उनसे बात करलेती हु.. चलो अब हम चलती हे.. ओर आप भी श्रीधर भैयाके पास जाकर बैठो..

लता : (लंडकी ओर इसारा करते हसते) जानु.. पहेले इनको ठीक करलो.. फीर जाना.. हें..हें..हें..

लखन : (थोडा गुसा करते) कीतनी कमीनी हो तुम.. जब मुजे तेरी सबसे ज्यादा जरुरत थी.. तब ही तु चली गइ.. बात मत करना मुजसे..

लता : (मायुस होते गीली आंखसे) यार मे क्या करती..? बडी दीदीने मुजे बुला लीया था.. लखन आइ अ‍ेम सोरी..

पुनम : (मुस्कुराते) यार दोनो जगडा मत करो.. भाइ.. लता अपनी मरछीसे यहा नही आइ.. आपकी भाभीमांने इनको यहा बुला लीया उनका अ‍ेक खास रीजन हे.. जो मे वहा आउगी तब आपको बता दुगी.. अभी तो हम चलते हे..

फीर पुनम ओर लता वापस अपनी जगाहपे जाकर बैठ जाती हे.. ओर लखन मुनाको फ्रि करके श्रीधरके पास बैठ गया.. जीनका मुनाने बराबर फायदा उठा लीया.. ओर वो लखनको घरपे फ्रेस होने जा रहा हे कहेकर बसंतीको आंखोसे घरपे आनेका इसारा करते घरपे चला गया.. तो बसंती भी ब्रीन्दाके कानमे कुछ कहेती हे.. जीसे सुनकर वो सर्मसार होगइ.. सरमाके हसते कानमे कहेती हे..
 
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) कमीनी.. जा मीलले उसे सब यहा हे तो आज अच्छा मौका हे मीलनेका.. पता नही मे कब इनसे मील पाउगी.. ओर सुन.. काम होते ही जल्दी वापस आजाना..

बसंती : (मुस्कुराते कानमे) कमीनी मे भी देख रही हु.. तु कबसे हमारे देवरके पीछे पडी हे.. देख कीतना बडा हे इनका.. सब सादीमे बीजी हेतो इसे बुलाले अंदर.. क्या पता तेरी भी खुजली मीट जाये.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरमाकर हसते) नही यार.. इनको यहा मीलना पोसीबल नही हे.. बस.. अ‍ेक बार इन सबको सहेर जानेदे.. फीर तो मोका ही मोका हे.. अब तो मेभी आजाद होजाउगी.. अब जा भी.. तेरा यार तेरा इन्तजार करता होगा..

ब्रीन्दाने बसंतीको जल्दीसे वापस आनेको कहेते घर जानेकी अनुमती देदी.. तो बसंती भी सबकी नजर बचाते अपने घरपे चली गइ.. जैसे ही वो घरपे आइ मुनाने दरवाजा बंध करते बसंतीको वही दबोच लीया.. ओर उसे गोदमे उठाकर अपने बेडरुममे ले गया.. बसंतीको बेडपे पटकते उनकी सारी कमर तक उची करते अपना लंड बहार नीकालते बसंतीके पैरोके बीच आ गया.. तो बसंती भी मुनाकी बेकरारी देखकर सरमाके हसने लगी..





बसंती : (मुस्कुराते) मेरे जानु.. इतनी बेताबी अच्छी नही.. मे कहा भागे जा रही हु.. हें..हें..हें..

मुना : (अपना लंड चुतपे धीसते) मम्मी.. अभी कुछ मत बोलना.. आज आप क्या मस्त लग रही हे.. मेरा तो सुबह ही आपको चोदनेका मन कर रहा था.. मे आज मेरी मासुकाको नही मेरी माको चोदना चाहता हु..

बसंती : (उतेजीत होते) तो फीर चोदले मेरे लाल.. तुजे रोका कीसने हे..





कहा तो मुनाने अ‍ेक ही जटकेमे अपना पुरा लंड बसंतीकी चुतमे घुसा दीया तो बसंतीकी चीख नीकल गइ.. ओर आंखमे आंसु आगये.. मुना बसंतीकी परवा कीये बगैर हाथके बल उचा हो गया.. ओर बसंतीको धनाधन चोदने लगा.. बसंती भी मदहोस होने लगी.. ओर आंखोकी पुतलीया पलटते मुनाके हर धकेको अपनी चुतकी गहीराइओमे महेसुस करते अपनी कमरको हीलाते छटपटाने लगी..





दोनोके बीच बहुत ही कामुक तरीकेसे धमाकेदार घमासान चुदाइ होने लगी.. बसंतीके बुब्स मुनाके हर धकेके साथ तालमेलमे उछलते रहे.. कुछ ही देरकी चुदाइके बाद बसंती अपकडने लगी.. ओर मुनाके लंडको अपनी चुतमे भीगोने लगी.. तो मुना ओर उतेजीत हो गया.. ओर जोरोसे कमर हीलाते बसंतीको चोदने लगा.. तब बसंतीकी चुतमे भी दर्द होने लगा.. ओर वो मुह बीगाडते मुनासे चुदवाती रही..





जब मुनाने उसे दुसरी बार जडा दीया तो अपना लंड नीकालते बसंतीको घोडी बनादीया.. ओर पीछेसे लंड घुसाके बसंतीको पीठसे चीपकते उनके दोनो बुब्स थामकर जोरोसे चोदने लगा.. आज बसंती मुनाको हर अ‍ेन्गलमे चुदवानेमे साथ दे रही थी.. तो मुना भी बसंतीको काफी देर तक चोदता रहा.. ओर आखीर दोनो अपने चरम पे पहोंच गये.. ओर मुना बसंतीकी चुतको भरते हरी भरी करने लगा..





ओर उनकी पीठपे ही ढेर हो गया.. दोनो काफी देर अ‍ैसे ही पडे रहे.. आज बसंती हीलनेकी स्थीतीमे भी नही थी.. जो बसंती सुबहसे ही अपने बेटे मुनासे चुदवानेके लीये बेकरार थी.. उसी बसंतीको अभी अभी मुनाने उसे पुरी बहेरमीसे चोद लीया था.. ओर बसंतीकी सारी अकड नीकाल दीथी.. जैसे ही मुनाने अपनां लंड खीचके बहार नीकाला.. बसंती दर्दके मारे मुह बीगाडते बेडपे गीर गइ..





ओर पीठके बल लेटते अपनी सांसको कंट्रोल करने लगी.. उनकी चुतसे दोनोका काम रस बहार नीकल रहा था.. अभी भी बसंतीकी चुत कीसी गभरु परींदेकी तराह फडफडा रही थी..तब मुना बसंतीको गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया ओर बसंतीको नीचे उतारा तब बसंतीके पैर लडखडाने लगे.. ओर वो मुनाको पकडकर जुठे गुस्सेसे सीनेमे मुका मारने लगी.. तो मुना भी हसते हुअ‍े बसंतीको अपनी बाहोमे भीच लेता हे.. ओर उनके होठोको चुम लेता हे..
 
बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) छोडीये मुजे.. क्या अभी भी आपका जी नही भरा..? आज तो आपने अ‍ेक ही बारमे मेरी हालत बीगाडदी.. आज क्या हो गया था आपको जो मुजे इतजी जोरोसे चोद रहे थे..? बापरे.. अब इस हालतमे मे वहा कैसे जाउगी..

मुना : (मुस्कुराते गाल चुमते) सोरी डीर्लींग.. वो आज श्रीधरकी सादी थी.. ओर उपरसे तुम मस्त तैयार होकर आइ थी.. तो मुजसे रहा नही गया.. ओर कुछ नही.. मोम.. चलोना हम भी सादी कर लेते हे.. अब अ‍ैसे छीप छीपके मीलनेमे मजा नही आता..

बसंती : (अपनी चुतको साफ करते) अरे पागल होगये हो क्या..?.. मत भुलो.. अभी आपके बापु जींदा हे.. ओर अ‍ैसे छीप छीपके ही प्यार करनेमे मजा हे.. वरना मे अ‍ेक बार सादी करके आपकी हो गइ.. तो आप मुजे अ‍ैसे ही प्यार थोडीनां करोगे..? चलीये अब सादीमे नही जाना क्या..? लाइअ‍े मे आपका हथीयार धो देती हु.. अब तो उस कमीनीको भी पता चल जायगा की मे आपसे जमकर चुदवाकर आइ हु.. आपने तो मेरी चाल ही बदलदी.. अभी भी नीचे कीतना दर्द हो रहा हे..

मुना : (आस्चर्यसे देखते) कौन..? कीसको पता चल जायेगा..?

बसंती : (सरमाकर हसते) अरे वो.. जो आजकल मेरी पकी सहेली होगइ हे.. तेरे श्रीधरकी मां.. ब्रीन्दा.. वो भी तो अपने बेटे श्रीधरसे चुदवाती हे.. कमीनी बहुत कामी ओरत हे.. ओर तेरा दोस्त भी उनके पीछे पागल हे.. जैसे मे तेरे पीछे पागल हु.. हें..हें..हें..

मुना : (हसते) मोम.. वो दोनो मा बेटे भी रीलेशनमे थे हमे तो पता ही नही था.. सीर्फ लखन भैया जानते थे.. हमे तो सब बादमे पता चला..

बसंती : (आकर बाहोमे समाते) जानु.. अ‍ेक बात कहु..? अभी कीसीको कहीयेगा नही.. जब आपका दोस्त पढता थानां.. तब ही उन मां बेटेने सादी करली थी.. पता नही हमारी सादी कब होगी..

मुना : (मुस्कुराते होठ चुमते) मोम.. इसीलीये केह रहा हु आप भी मुजे सादी करलो.. क्युकी ब्रीन्दा आंटीका पती भी अभी जीन्दा हे.. तो फीर हम सादी क्यु नही कर सकते..?





बसंती : (सीनेपे सर रखकर मुस्कुराते) जानु.. सादी तो अब अ‍ेक औपचारीक रेह गइ हे.. हमने सबकुछ तो कर रहे हे.. जो अ‍ेक पती पत्नीके बीच होता हे.. ओर मेतो मनसे आपको अपना पती भी मान चुकी हु.. ओर पतीकी तराह ही आपका खयाल रखती हु.. तो फीर थोडासा इन्तजार करनेमे क्या हर्ज हे..?

मुना : (मुस्कुराते) ठीक हे मोम.. जैसा आपको ठीक लगे..

बसंती : (अलग होते) बेटा अब कीतने दिन घरपे बैठे रहोगे..? आपके डोक्टरका तो कुछ अता पता नही वो कब आयेगे.. वरना आप अपने बापुकी दुकान ही सम्हाललो..

मुना : (मुस्कुराते) मोम.. बडे ठाकुर भैया केह रहे थे.. ओर तीन चार दिनमे ही होस्पीटल खुल जायेगी.. केह रहेथे.. वहा अब वसुधा नामकी कोइ लेडी डोक्टर आ रही हे.. सायद सुधीर अंकल हमेसाके लीये बोम्बे चले गये हे.. अब चलीये सादीमे..

फीर दोनो ही बारी बारी वापस आजाते हे.. बसंती थोडी धीमे चल रही थी.. ओर उनके पैर भी थोडा लडखडाते थे.. जीसे देखकर ब्रीन्दा उनके सामने देखकर हसने लगी.. तो बसंती सर्मसार होगइ.. उसे नही पताथा की बरखा कबसे दोनोकी हरकत देख रही हे.. ओर वो बसंतीको अ‍ैसे चलते देखकर बहुत कुछ समज जाती हे.. ओर मन ही मन खुस होजाती हे.. अब उसने बसंतीके उपर नजर रखनेकी ठानली..

तो आज वृन्दा ओर जीतुलाल भी बहुत खुस थे.. क्युकी आज जीतुलालको हमेसा हमेसाके लीये ब्रीन्दासे छुटकारा जो मीलने वाला था.. तो वृन्दा भी इसीलीये खुस थी की अब उसे भी हमेसाके लीये जीतुलालका साथ मीलने वाला था.. दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर बार बार हस रहे थे.. जब भी मौका मीलता दोनो बारी बारी घरके अंदर चले जाते.. ओर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा जाते..

फीर जीतुलाल वृन्दाके बुब्सको मसलते उनके होठोका रसपान करता.. फीर बारी बारी दोनो बहार चले आते.. ओर वृन्दा जीतुलालाकी ओर देखकर सरमाके हसने लगती.. आज दोनोके उपर प्यारका परवाना चढा हुआ था.. तब अ‍ेक सख्स था.. जो दोनोकी हरकतको बराबर ध्यान रखता था.. जो अभी वृन्दाके उपर नजर जमाये हुआ था.. वो था श्रीधर..

जबसे उसे ब्रीन्दासे पता चलाकी तउनके पापा जीतुलाल ओर जयश्रीकी मम्मीके बीच चलकर हे.. ओर जयश्री उन्हीकी बेटी हे.. ये सब जानकर श्रीधर अपनी मम्मीको धोखेका बदला लेना चाहता था.. तबसे वो सोच रहाथा.. की उनकी मम्मीका बदला कैसे लीया जाये.. तबसे उनका वृन्दाको लेकर नजरीया बदलने लगा था.. इसीलीये वो जीतुलाल ओर वृन्दापे हर वक्त नजर रखता था..
 
जब लखन इस गांवको छोडकर सहेर चला गया था.. इसी बीच जवेरीलालने भी सहेरमे अ‍ेक दो बेड वाला मकान अच्छी सोसायटीमे लेलीया था.. जो लखनकी सोसायटीके पास ही थी.. सृतीका बंगलो भी लखनके बंगलेकी दुसरी गलीमे ही था.. जीतुलालने भी अपने डीवोर्सके सभी पेपर रेडी रखे थे.. तो जवेरीलालने बटवारेका सब पेपर रेडी करवा लीया था.. सबलोगने अपनी अपनी तैयारीया करके रखी थी..

जैसे ही सादी संपन हुइ बरखा ओर जागृती जयश्रीको लेकर घरमे चले गइ.. तो श्रीधर भी लखनको बुलाकर अपने दोस्तोके साथ अंदर चला गया.. इसी बीच रमेशने सभी जेन्ट्सको भोजनके लीये बुला लीया.. तो सभी लेडीज अ‍ैसे ही मंडपके नीचे बैठकर गप्पे लगा रही थी.. फीर जब जेन्ट्सने भोजन करलीया तो लेडीस भोजन करने आगइ.. फीर सबलोग भोजन करके अपने अपने घरकी ओर जाने लगे..

मंजु भी घरकी सभी लेडीसको लेकर हवेलीपे चली गइ.. ओर लास्टमे देवायत लखन ओर नजदीकके पहेचान वाले वही घरके लोगोके साथ भोजन करने लगे.. आज हवेलीपे चंदाको कही चेइन नही मील रहा था.. तो सादीमेसे आते ही वो फोन लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर उसने धिरेनको फोन लगा दीया.. तो दो तीन बार ट्राइ कीया फीर भी धिरेनने फोन नही उठाया तब चंदा ओर परेसान होगइ.. ओर उसने मंजुको रुममे बुला लीया..

मंजुला : (अंदर आते ही) हां दीदी कहीये.. क्या भावेस सो गया..?

चंदा : (थोडी परेसानीमे) हां मंजुदी.. सुनो.. मुजे आपसे कुछ बात करनी हे.. मे जरा दरवाजा बंध करलु..

मंजुला : (सबकुछ समज गइ फीर भी) अरे.. दरवाजा क्यु बंध कीया..? कोइ खास बात हे क्या..?

चंदा : (दरवाजा बंध करके वापस आते) हां दीदी.. सीर्फ खाली ही बंध कीया हे.. यहा आइअ‍े.. बेठपे बेठकर आरामसे बात करते हे..

मंजुला : (पास बैठते) हां दीदी.. कहीये.. क्या बात हे..?

चंदा : (मुस्कुराते) दीदी.. अब आपसे कैसे कहु..? वो.. वो.. मे देख रही हु.. पीछले दो दिनसे.. पुनो दीदी.. यहा हे.. ओर वो धिरेन भी मेरा फोन नही उठाता.. कही इन दोनोके बीच कुछ जगडा बगडा..? आइ मीन.. सब ठीक तो हेनां..?

मंजुको अब चंदाको सबकुछ बताना उचीत लगा.. क्युकी इस वक्त देवायत ओर लखन भी यहा नही थे.. ओर मंजु सबकुछ जल्दीसे नीपट जाये तो अच्छा हे.. यही सोचकर चंदाको सबकुछ बतानेका फैसला करलेती हे.. ताकी वो जल्दसे जल्द पुनमको लखनके पास सहेर भेज सके.. मंजु गहेरी सोचमे डुबी हुइ थी तभी अ‍ेक बार फीर चंदाकी आवाजने उसे तंद्नसे बहार नीकाल दीया..

चंदा : (थोडी परेसानीसे) मंजुदीदी.. मे आपसे कुछ पुछ रही हु.. आप क्या सोच रही हे..? क्या इन दोनोके बीच सबकुछ ठीक तो हेनां..?

मंजुला : (सामने देखकर धीरेसे) नही दीदी.. सबकुछ खतम हो गया हे..

चंदा : (आस्चर्यसे देखते चीन्तासे) सबकुछ खतम होगया हे..? मतलब.. मे कुछ समजी नही.. दीदी मुजे सबकुछ खुलके बताओनां.. दोनोके बीच क्या हुआ..?

मंजुला : (नजरे चुराते) दीदी.. दिलपे पथर रख लीजीये.. हमारे धिरेनने पुनोको डीवोर्स देदीया हे.. वो भी देवु ओर दयाकी सादी थी उसी दिन.. यानी आप लोग यहा आये उनसे ठीक अ‍ेक दिन पहेले..

चंदा : (सोक्ट होते चोंकते जोरोसे) क्या..? धिरेनने पुनो दीदीको डीवोर्स देदीया..? लेकीन क्यु..? दोनोके बीच कुछ जगडा बगडा हुआ था क्या..?

मंजुला : नही दीदी.. हमारी पुनम तो अ‍ैसी हे वो कीसीके सामने उची आवाजमे बात तक नही करती.. तो वो जगडा क्या करेगी..?

चंदा : (परेसान होते) तो फीर धिरेनने उसे डीवोर्स क्यु दिया..? क्या आप मुजे बता सकती हे..? वैसेभी आपको तो सबकुछ पता चल जाता हे.. तो फीर मे दो दिनसे यहा आगइ हु.. तो मुजसे ये बात छीपाइ क्यु..? मंजुदी.. दोनोके बीच कुछ तो हुआ हे.. बताइअ‍े मुजे..

मंजुला : बडी दीदी.. बात दरसल ये हेकी धिरेन उनकी सादीसे पहेले अ‍ेक दुसरी लडकीसे प्यार करता था.. ओर उनसे ही सादी करना चाहता था.. बस.. पुनोसे सादी तो सीर्फ अ‍ेक बदलेकी भावनासे की थी..

चंदा : (सोक्ट होते) बदलेकी भावनासे..? कीस बातका बदला..? अगर वो दुसरी लडकीसे सादी करना चाहता था तो मुजे बता देना चाहीये था.. तो फीर उसने पुनो दीदीसे क्यु सादी की..? मंजुदी.. मुजे पुरी बात बता दीजीये..

फीर मंजु नीलमका नाम लीये बगैर चंदाको सुरुसे लेकर अंत तक सबकुछ बता देती हे.. ओर धिरेन उनसे कीस बातका बदला लेना चाहता था वोभी बता दीया.. ओर ये भी बता दियाकी धिरेन पुनमके बारेमे ओर उनके बारेमे कैसी सोच रखता हे.. जीसे सुनकर चंदा फुटफुटके रोने लगी.. उसे यकीन नही हो रहा थाकी उनके खुदके बेटेने उसे रंडी तक केह दीया था..
 
ये सब बाते सुनकर चंदाका गुस्सा सातवे आसमानमे पहोंच गया.. ओर वो अपने दोनो हाथोसे अपना सर पीटने लगी.. चंदा पागलोकी तराह बरताव करने लगी.. तो मंजुने उनका हाथ पकडलीया.. ओर उनको गले लगा लीया.. फीर भी चंदा धिरेनके बारेमे अनाप सनाप बोले ही जा रही थी.. चंदाके दिमागमे ये बात बैठ गइ.. की धिरेनने उनके ओर देवायतके रीलेशनकी वजहसे पुनमके साथ बुरा कीया हे..

उसे अब समज नही आ रहाथाकी वो पुनमसे कैसे नजरे मीलायेगी.. उसने देखा ये दो दिनमे पुनमने उनके साथ व्यवहारमे कोइ रागद्वेस नही कीया.. बस.. चंदा जोरोसे रोये ही जारही थी.. तभी सबलोग भी चंदाके रोनेकी आवाज सुनकर मंजुके रुममे दरवाजा खोलकर आगये.. तो पुनम सबकुछ समज गइ.. ओर चंदाको रोते देखकर उनकी आंखोमे भी आंसु आगये.. ओर वो भी चंदाके पास जाने लगी..

तभी चंदाने पुनमको देखलीया.. तो खडी होकर दोडते पुनमको अपने गले लगा लेती हे.. ओर फीरसे फुटफुटकर रोने लगती हे.. नीर्मला भुमीका चंदाको सांत करने लगी.. क्युकी इस बारेमे मंजुने दोनोको पहेलेसे ही सबकुछ बता दीया था.. काफी देर समजानेके बाद चंदा सांत हुइ तब वो पुनमके सामने हाथ जोडकर खडी होगइ.. जैसे उनकी माफी मांग रही हो.. पुनम उनको अ‍ैसा ना करनेको कहेते चंदाके गले लग गइ..

चंदा : (रोते) दीदी.. मुजे माफ करदीजीये.. मेरी वजहसे आपकी जींदगी बरबाद होगइ.. अगर मुजे पता होता तो मे आपकी सादी धिरेनसे कभी नही करवाती.. मुजे माफ करदीजीये.. माफ कर दीजीये..

पुनम : (सांत करते) बस भाभी.. बस.. आपको मेरी कसम.. पहेले आप सांत होजाइअ‍े.. इसमे आपकी कोइ गलती नही हे.. ये सब मेरी किस्मतमे ही लीखा होगा.. मुजे आपसे कोइ सीकायत नही हे..

चंदा : (आंसु पोछते) दीदी.. आपका दिल कीतना बडा हे.. मे आपके साथ हु.. देखना इस हरकतकी वजहसे मे उस कुतेको कभी माफ नही करुगी.. आजसे वो मेरे लीये मर गया..

मंजुला : (जोरोसे) दीदी.. ये आप क्या अनाप सनाप बोल रही हे.. वो बेटा हे आपका.. कोइ बेटेके लीये अ‍ैसा बोलते हे..?

चंदा : (मंजुसे हाथ जोडते) नही मंजुदी.. इनसे तो बे ओलाद होना ही अच्छा हे.. आप भी मुजे माफ करदीजीये.. मे इस घरकी गुनेहगार हु.. मेरी वजहसे पुनो दीदीका घर टुट गया.. हे भगवान.. ये क्या हो गया मुजसे..

मंजुला : (खडी होकर गले लगाते) बस.. बस.. अब कुछ भी मत बोलना.. इनमे आपका कोइ कसुर नही हे.. जो होनाथा वो होगया.. अब आप पहेलेकी तराह ही रहीयेगा.. भुल जाइअ‍े सब..

नीर्मला : (प्यारसे सर सहेलाते) चंदा सांत होजा अब.. इसमे तेरी कोइ गलती नही हे..

चंदा : (नीर्मलाको) बडी दीदी.. मेने क्या गुना कीया था..? सीर्फ देवुसे प्यार ही तो कीया था.. मुज विधवाका हाथ थामा हे देवुने.. मेरी विरान जींदगीमे खुसीया भरदी.. ओर बदलेमे मेने इसे क्या दिया.. उनकी ही बहेनका घर उजाड दीया.. मे धिरेनको कभी माफ नही करुगी.. (मंजुकी ओर हाथ जोडते) दीदी.. मुजे भी इस घरसे नीकाल दीजीये.. इस कुते की यही सजा हे..

मंजुला : (जोरोसे) अरे पागल होगइ हे क्या..? क्या अनाप सनाप बके जा रही हे.. चुप होजाइअ‍े.. ये घर आपका हे.. आपका ससुराल.. कहाना इसमे आपकी कोइ गलती नही.. फीर भी..? अब तो मरते दम तक आप इसी घरमे रहेगी.. समजी..?

चंदा : (सांत होकर बैठते) नही दीदी.. अब मे इस घरमे नही रेह पाउगी.. मे जब भी पुनम दीदीको देखुगी.. मे इनसे नजरे नही मीला पाउगी.. ओर नाही देवुसे.. मुजे मेरे घर जाना हे.. आप लखन भैयाको कहीये मुजे मेरे घरपे छोडदे..

भुमीका : (जोरोसे) चंदा.. क्या अनाप सनाप बके जा रही हे.. अगर यहासे जानेकी बात कहीनां.. तो तुजे अ‍ेक जापट लगाउगी.. कबसे सब केह रही हे..की इसमे तेरी कोइ गलती नही.. फीर भी कीसीकी बात सुनती ही नही.. चुपचाप बैठ इधर.. हम सब अ‍ेक ही कस्तीमे सवार हे.. अ‍ेक तो मुजसे रुठकर चली गइ.. अब तुभी यहासे जाना चाहती हे..?

चंदा : (सर पकठते) दीदी.. मे क्या करु..? मेरा तो दिमाग ही काम काम नही कर रहा.. मेरा सर दर्दसे फटा जा रहा हे.. मेने सोचा नही थाकी मेरी ओलाद अ‍ैसी नीकलेगी.. उसने मुजे रंडी कहा.. कोइ अपनी मांके बारेमे अ‍ैसा बोलता हे..? पता नही मेने उसे कहा पालनेमे गलती करदी..

मंजुला : (विजयको चंदाकी गोदमे देते) दीदी.. भुल जाइअ‍े सब.. आजसे मेरा विजयही आपका लडका हे.. पालीये इसे.. दुनीयाका काबील इन्सान बनाइअ‍े इसे.. आजसे मे मेरे विजयको आपको सोंपती हु..

चंदा : (विजयको वापस देते) नही दीदी.. मे अ‍ेक काबील मां नही बन सकी.. अगर इसे भी पालनेमे मुजसे कमी रेह गइ.. तो मे कीसीको मुह दिखाने लायक नही रहुगी.. मे इस घरकी गुनेहगार हु.. सजा दीजीये मुजे.. आप लोगोकी हर सजा मंजुर हे मुजे..

नीर्मला : (परेसान होते) चंदा.. क्या हो गया हे तुजे..? सांत होजा.. कहाना इसमे तेरी गलती नही हे..

चंदा : (सामने देखते) दीदी.. मेरी ही गलती हे.. सुना नही आपने.. मुजे धिरेनने क्या कहा.. मे अ‍ेक रंडी हु.. तो रडींकी यही सजा हे.. मेरी वजहसे पुनोदीदीकी जींदगी खराब हुइ हे.. मंजुदी.. आप मुजे सजा दिजीये..
 
मंजुला : (सामने देखते) अच्छा..? सजा चाहीये आपको..? तो फीर ठीक हे.. सुनीये.. आजसे आपकी सजा ये हेकी अब आप विजयको अपने बेटेकी तराह पालेगी.. ओर अ‍ैसे पालेगी.. जीसे हमारी पुनो चाहेगी.. इस बारेमे आप कभी पुनोकी बात नही टालेगी.. क्युकी इसी विजयकी माध्यमसे हमे हमारे स्वामीको इस धरतीपे लाना हे.. समजी..? आजसे आपका यही कर्तव्य होगा.. बोलो मंजुर हे..?

चंदा : (विजयको लेकर सीनेसे लगाते) हां.. हां दीदी.. मंजुर हे.. आजसे यही मेरा बेटा हे.. देखना मेने धिरेनके पालनेमे जो गलती की.. इस गलतीको मे अब नही दोहराउगी.. मे इसे खुब पढाउगी.. ओर जैसा पुनोदीदी कहेगी.. अ‍ैसा ही करुगी.. ओर अ‍ैसे ही पालुगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. ये हुइना बात.. लेकीन याद रखना.. अब भुलसे भी यहासे जानेकी बात मत करना.. वरना मुजसे बडी हे फीर भी आपकी टांगे तोड दुगी.. समजी..? हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते मुस्कुराते) हां.. नही जाउगी.. अब सबलोग जाओ भी.. सबलोग यहा क्यु अ‍ेकठे हुअ‍े हे.. यहा कोइ तमासा चल रहा हे क्या..? मुजे मेरे बेटेको दुध पीलाना हे.. देखो.. मेरे बीना कीतना कमजोर हो गया हे..

कहेते चंदा सारीका पलु उठाकर ब्लाउसको उचा करती हे.. ओर विजयको अपने बुब्सकी नीपल मुहमे देते सरपे सारीके पलुसे ढक देती हे.. तो सबलोग आस्चर्यसे चंदाकी ओर देखते बहार नीकल जाते हे.. सीर्फ पुनम ही चंदाके कंधेपे सर रखते पास बैठती हे.. ओर बाकी सब होलमे आकर बैठ जाते हे.. तब मंजु भी सबके पास बैठती हेतो सब उनकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगती हे.. तभी..

मंजुला : मोम.. पुनमका सुनकर दीदीको सदमा लगा हे.. अभी उनकी मानसीक हालत ठीक नही हे.. हमे रातमे सोते वक्त भी उनका खयाल रखना पडेगा.. अब जीतनी जल्दी हो सके.. हमे उनके दिमागसे धिरेन पुनोकी बातको नीकालनी पडेगी.. अभी कुछ दिन उनको अकेला छोडना ठीक नही हे..

नीर्मला : (थोडी नीरास होते) मंजु बेटा.. मुजे तो चंदाकी चीन्ता होने लगी हे.. चंदा महज सीर्फ सात सालकी थी.. जब मांने उनको मुजे सौपा था.. मेने ओर राजीवने उसे अपनी बेटीकी तराह पाला हे.. ये बहुत सेन्सीटीव हे.. वो कभी गलत बात बरदास्त नही करपाती.. तब उसे सम्हालना मुस्कील होजाता हे.. अगर दो तीन दिन इनकी दिमागी हालत अ‍ैसी ही रही.. तो उसे कीसी मानसीक डोक्टरको दीखाना पडेगा..

भुमीका : (चीन्तासे) हां.. देखा नही.. उनको पता हे.. अभी उनको दुध नही आ रहा.. फीर भी विजयको कैसे दुध पीलाने लगी.. अच्छा हे यहा देवु नही था.. वरना ये सब देखकर उनको भी दुख होता..

मंजुला : नही आंटी.. देवुको सब पता हे.. परसो मेने ही सबको बता दीया था.. सुनकर वोभी थोडा दुखी हो गये थे.. लेकीन चंदा दीदीकी वजहसे कुछ नही बोले.. मे सोच रही हु.. अगर अ‍ेक दो दिनमे चंदा दीदीकी हालतमे कोइ सुधार नही हआ.. तो कुछ दिनके लीये इसे लखनके पास सहेर भेज दुगी..

नीर्मला : हां बेटा.. ये तुमने सही सोचा.. अगर वो यहा रहेगी तो पुनम बीटीयाको देखकर दुखी होती रहेगी.. उनके दिमागमे घुस गया हे.. की पुनमका घर मेरी वजहसे टुटा हे..

बहार सब बाते कर रही थी.. तब धीरे धीरे भावना लता भी पुनमके रुममे चली गइ.. ओर भावना अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी.. लता भावनाको देवायतके बारेमे कुछ पुछना चाहती थी.. जो पुछनेसे हीचकीचा रही थी.. तो दुसरी ओर पुनम अब भी चंदाके कंधेपे सर रखते बैठी थी.. ओर चंदा विजयको दुध पीलाते पुनमके सरपे हाथ घुमा रही थी.. आखीर उनसे रहा नही गया.. ओर पुछ ही लीया....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २३५

बहार सब बाते कर रही थी.. तब धीरे धीरे भावना लता भी पुनमके रुममे चली गइ.. ओर भावना अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी.. लता भावनाको देवायतके बारेमे कुछ पुछना चाहती थी.. जो पुछनेसे हीचकीचा रही थी.. तो दुसरी ओर पुनम अब भी चंदाके कंधेपे सर रखते बैठी थी.. ओर चंदा विजयको दुध पीलाते पुनमके सरपे हाथ घुमा रही थी.. आखीर उनसे रहा नही गया.. ओर पुछ ही लीया.... अब आगे

चंदा : (आंख गीली करते) दीदी.. मुजे माफ करदो.. आखीर वो कीस लडकीसे प्यार करता था..? आपको तो सब पता ही होगा..

पुनम : (सही बैठते जुठ बोलते) भाभी.. पता नही.. केह रहेथे वो सहेरमे रहेती हे.. भाभी.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? धिरेन अगर उन लडकीसे सादी भी करलेतानां.. फीर भी मुजे कोइ अ‍ेतराज नही था.. आपको तो पता हे हमारे खानदानमे भी मर्द कीतनी सादीया करते हे.. मुजे उस लडकीसे कोइ अ‍ेतराज नही था.. लेकीन उसने मेरे ओर आपके चरीत्रके बारेमे गलत बोला.. मेरे बच्चेके बारेमे गलत बोला.. जो अभी इस दुनीयामे आया भी नही..

चंदा : (आंसु बहाते) दीदी.. मुजे माफ करदो.. ये सब मेरी वजहसे हुआ हे.. आप मुजे खुलकर बताइअ‍े.. धिरेनने आपको क्या बोला..

पुनम : (आंख गीली करते) भाभी.. इसने मुजे चरीत्रहिन कहा.. कहेता था.. तेरा चकर मायकेमे कही चल रहा हे.. तभी तो मायकेमे पडी रहेती हो.. ओर ये बच्चा भी तेरे उन यारका होगा.. जीनके साथ तुमने मुह काला कीया हे.. उनके साथ मुह काला करते उनका पाप मेरे गले डाल रही हो.. ओर आपको तो पता हे.. मे यहा कीसलीये रुकी थी.. भाभी.. वो मेरे साथ रहेना ही नही चाहते थे.. तो मेने साइन कर दीया..

चंदा : (आंसु बहाते) दीदी.. धिरेनने बहुत बडी गलती करदी.. मे उसे कभी माफ नही करुगी.. पता नही अब मे देवुसे भी कैसे नजरे मीलाउगी.. मुजे बार बार याद आता रहेगा..

पुनम : भाभी.. इस बारेमे दोनो भैयाको सब कुछ पता हे.. वो आपको कुछ नही कहेगे.. आप अपने दिमागसे ये बात नीकालदो.. हमे आपसे कोइ गीला सीकवा नही.. ओर हां.. मेने धिरेनको वो साइन वाला पेपर नही दिया.. कहाथा जब भाभी आजायेगी.. तब सबकी हाजरीमे दे दुगी..

चंदा : (गाल सहेलाते) दीदी.. ये आपने सही कीया.. आनेदो उस कुतेको.. मे उनकी मार मारके चमडी उखाढ दुगी..

पुनम : (सही बेठते) नही भाभी.. आपको मेरी कसम.. आप उसे कुछ मत कहीयेगा.. माफ करदीजीये उनको.. दे देजीये उनको पेपर.. अब मुजे अ‍ैसे आदमीके साथ नही रहेना..

चंदा : दीदी.. मे कीतनी खुस नसीब हु.. जो आप जैसा परीवार मुजे मीला.. आप लोग कीतने विसाल र्हदयके हो.. आपके साथ इतना कुछ हो गया.. फीर भी उसे माफ करनेके लीये केह रही हो.. मुजसे इतनी बडी बात मुजे भुलनेके लीये केह रहे हो.. क्या ये बात कोइ इतनी आसानीसे भुल सकता हे..?

पुनम : (मुस्कुराते हग करते) भाभी.. आपको भुलना ही होगा.. मेरे खातीर.. आप मेरी प्यारी भाभी हो.. क्या अपनी ननंदकी इतनीसी बात नही मानोगी..? वरना मे आपसे बात नही करुगी..

चंदा : (जोरोसे बाहोमे भीचते) अरे नही नही.. दीदी.. आप अ‍ैसा मत बोलीये.. अगर आप मेरे साथ नही बोलोगी तो मे धुट धुटके मर जाउगी.. अ‍ैसा कभी मत करना.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु.. ठीक हे.. देखना अब जो भी करना हे मे करुगी.. उस कुतेको अब फुटी कोडी भी नही मीलेगी.. मे सबकुछ आपके नाम करदुगी..

पुनम : (जटसे अलग होते) नही भाभी.. मुजे कुछ भी नही चाहीये.. सबकुछ उनको दे दीजीये..

चंदा : (मुस्कुराते) ठीक हे.. वो सब मे बादमे देख लुगी.. की मुजे क्या करना हे..

घरपे इतना कुछ हो गया.. लखन ओर देवायत अब भी जवेरीलालके घरपे थे.. वहा भी सीर्फ घरके लोग ही रहे गये थे.. जवेरीलाल अपने घरका बटवारा देवायत ओर पंचायत सदस्योकी हाजरीमे ही नीपटा देना चाहता था.. रमेश भोजन पंडालमे सब समेटने लगा.. लखन ओर उनके दोस्तो श्रीधर जयश्री आज सादी थी.. तो सभी दोस्तो सुहागरातकी तैयारीया करनेमे जुट गये..

जवेरीलाल देवायत ओर पंचायतके दो ओर सदस्यको लेकर अपने घरमे चले गये.. ओर सबलोग होलमे आकर बेठ गये.. जवेरीलालने ब्रीन्दा वृंन्दा ओर जीतुलालाको भी बुला लीया.. तो आज ब्रीन्दाने श्रीधर ओर जयश्रीको भी अपने साथ रखा.. ओर जवेरीलालने ब्रीन्दाको घरके कागजात ओर श्रीधरके बीजनेसमे पार्टनरके रुपमे कागजात सोपे.. ओर पंचोके सामने घरका बटवारा करदीया..

तो जीतुलालने भी मौकेका फायदा उठाकर डीवोर्स पेपरपे ब्रीन्दाकी साइन करवाली.. ओर दोनो अलग हो गये.. तभी वृन्दाने कोइ बडा तीर मारलीया हो.. अ‍ैसे ब्र्रीन्दाके सामने देखकर कातील स्माइल करने लगी.. तो ब्र्रीन्दा भी वृन्दाकी ओर देखते अ‍ेक रहस्यमइ स्माइल करने लगी.. वृन्दाको पता नही थाकी ब्रीन्दाने जीतुलालके साथ क्या कांड करदीया था.. ओर उनके मनमे कीतने खतरनाक मनसुबे जन्म ले चुके थे..
 
फीर सबलोग अपने अपने घरकी ओर नीकल गये.. देवायत भी लखनको जल्दी घर आनेको कहेकर घरपे चला गया.. तो लखनके सभी दोस्त काम नीपटाकर श्रीधर जयश्रीकी टांग खीचाइ करने लगे.. फीर श्रीधरको छोडकर सभी दोस्तो चोराहेपे जाकर बैठ गये.. ओर जीतुलाल वृन्दाके चकरके बारेमे चर्चा करने लगे.. फीर लखनने साहीलसे बात करके उनके चाचा चाचीको गांवमे लानेकी आगेकी प्लानींग करली..

उस रात श्रीधरने अपनी सुहागरातकी सभी तैयारीया करली थी.. उसने मुनासे कामोतेजककी देसी गोलीया मंगवाकर खाली थी.. ओर इस रात श्रीधर जयश्रीकी पुरी रात चुदाइ करते उनकी अलग अलग पोजीसनमे बजाता रहा.. जयश्रीका अ‍ेक अ‍ेक अंग श्रीधरने तोडके रख दीया.. फीर भी श्रीधर जयश्रीको ओर चोदना चाहता था.. जयश्रीने हाथ जोडकर श्रीधरको ओर ना चोदनेकी मनते की..

तो दुसरी ओर आज सांती ओर जागृती जब अपने घरपे गइ.. तब जया दोनोका इन्तजार करते बेठी थी.. जैसे ही दोनोको देखा वो जटसे खडी होगइ.. ओर उनकी आंख गीली होगइ.. तो दोनो उसे देखती ही रही.. तभी जया सांतीका हाथ पकडकर उसे अपने रुममे ले गइ.. तो वहा बेडकी हालत देखकर सांती सबकुछ समज गइ.. ओर जयाकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगी.. तभी..

जया : (आंख पोछते नजरे चुराते) बेटा.. वो.. वो..

सांती : (मुस्कुराते धीरेसे) मम्मी.. जानती हुमे.. क्या रमेश अंकल आये थेनां..? अपने बेडकी चदर तो बदल देती.. देखकर कीसीको भी पता चल जायेगाकी वहा क्या हुआ हे.. कहीये.. क्या केह रहेथे वो..

जया : (धीरेसे) बेटी.. वो.. वो मे चदर बदलना भुल गइ.. सुनो.. कल वो मुजे लेजानेकी बात करने आये थे.. तो कल मे उनके साथ जा रही हु.. बस.. सीर्फ तुजे ही बताना था.. तुम बादमे जागुसे बात करलेना.. क्युकी मे उसे ये सब केह नही पाउगी..

सांती : (मुस्कुराते) नही मम्मी.. आपकी बेटी हे वो.. ओर अब तो वो भी आपको समजने लगी हे.. आपको बरखासे डरनेकी कोइ जरुरत नही हे.. ठहेरो.. मे अभी आपके सामने ही उसे बता देती हु.. (जोरोसे) जागु..

जागृती : (अंदर आते) जी भाभी.. कहीये.. कुछ काम था क्या..? मम्मी.. सब ठीक तो हेनां..?

सांती : (मुस्कुराते) हां सब ठीक ही हे.. सुन.. कल मम्मी ओर रमेश अंकल जा रहे हे.. (जयाकी ओर देखते) मम्मी.. दोनो सुबह कीतने बजे जा रहे हे..

जया : (नजरे जुकाते धीरेसे) जी.. वो.. वो सुबह चार बजे जानेका बोल रहे थे..

जागृती : (जटसे आकर जयाके गले लगते) मम्मी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेने आपके साथ बहुत बुरा व्यवहार कीया.. आप आरामसे जाओ.. जीलो अपनी जींदगी.. हमे आपसे कोइ अ‍ेतराज नही हे..

जया : (जोरोसे बाहोमे भरते रोते) बेटी.. मुजे माफ करदे.. मे जीस रास्तेपे चल पडी हु.. वहासे वापस आना मेरे लीये बहुत मुस्कील हे.. मुजे माफ कर देना.. बस.. तुम दोनो मेरे बंसीको सम्हाल लेना..

सांती : (जागृतीकी ओर कातील मुस्कानसे) जी मम्मी.. आप आरामसे जाइअ‍े.. मे ओर जागु दोनो आपके बेटेको सम्हाल लेगी.. क्यु जागु..? हम दोनो उसे अच्छेसे समजा देगी.. वो कुछ नही कहेगे..

जया : (जटसे अलग होते) नही बेटा.. तुम दोनो खयाल रखना.. मेरे जानेकी बात अभी बंसीको मत बताना.. वरना मे जा नही पाउगी.. मेरे जानेके बाद उसे सब बता देना..

जागृती : (मुस्कुराते) ठीक हे मोम.. जैसा आप चाहो.. हम नही बतायेगे भाइको.. बस.. कभी कभी हमसे फोनपे बात करलीया करना..

जया : (प्यारसे गाल सहेलाते) ठीक हे बेटा.. मे तुम सबसे रीस्ता तोडकर थोडीना जा रही हु.. मे तुम दोनोसे बात करलीया करुगी.. अब जाओ दोनो.. सादीमे थक गइ होगी.. तो आराम करलो.. आप दोनो मेरी फीकर मत करना.. मे सुबह चली जाउगी..

कहा तो सांती ओर जागृती दोनो बारी बारी जयाको गले लगा लेती हे.. देर रात बंसीभी घरपे आजाता हे.. तबतक जया भी उनका अपने रुममे इन्तजार करते जाग रही थी.. जब बंसी घरपे आया तो वो दरवाजेके पास छुपकर बंसीको जी भरके देखने लगी.. जब बंसी अपने रुममे चला गया तो जया भी वापस अपने बीस्तपे आजाती हे.. आज जयाकी आंखोसे नींद कोलो दुर थी.. वो सुबह तीन बजे तक करवटे बदती रही.. फीर वो नहाने चली गइ..

तो बंसी भी आज दिनभर जागृती ओर जयाको देखकर बहुत उतेजीत हो चुका था.. तो वो आते ही सांतीकी गुफामे घुसकर धमाका करने लगा.. उसने सांतीको बीना नीचे उतरे ही दो दो बार चोद लीया.. फीर दोनो नंगे ही अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये.. दोनोका लाइव सो देखकर जागृती भी अपनी उंगलीसे अपने आपको सांत करके सो गइ.. जागृती ओर सांतीने दोनोने सोनेसे पहेले चार बजेका अ‍ेलार्म अपने फोनपे सीर्फ वाइबे्रटमे सेट करलीया था..

तो दुसरी ओर आज मुनाने भी दो पहोरको अपनी मां बसंतीको भी घरपे बुलाकर चोद लीया था.. ओर बसंतीकी हालत खराब करदी थी.. तो अभी इस वक्त बसंती भी घोडे बेचकर सो रही थी.. ओर मुना भी बरखाकी दो दो बार धमाकेदार चुदाइ करके उनसे चीपककर सो गया था.. तो आज साहीलने भी अपनी बडी अम्माकी गुफामे दो दो बार जमकर धमाके करलीये.. जो इस वक्त दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे सो रहे थे..
 
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