बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) छोडीये मुजे.. क्या अभी भी आपका जी नही भरा..? आज तो आपने अेक ही बारमे मेरी हालत बीगाडदी.. आज क्या हो गया था आपको जो मुजे इतजी जोरोसे चोद रहे थे..? बापरे.. अब इस हालतमे मे वहा कैसे जाउगी..
मुना : (मुस्कुराते गाल चुमते) सोरी डीर्लींग.. वो आज श्रीधरकी सादी थी.. ओर उपरसे तुम मस्त तैयार होकर आइ थी.. तो मुजसे रहा नही गया.. ओर कुछ नही.. मोम.. चलोना हम भी सादी कर लेते हे.. अब अैसे छीप छीपके मीलनेमे मजा नही आता..
बसंती : (अपनी चुतको साफ करते) अरे पागल होगये हो क्या..?.. मत भुलो.. अभी आपके बापु जींदा हे.. ओर अैसे छीप छीपके ही प्यार करनेमे मजा हे.. वरना मे अेक बार सादी करके आपकी हो गइ.. तो आप मुजे अैसे ही प्यार थोडीनां करोगे..? चलीये अब सादीमे नही जाना क्या..? लाइअे मे आपका हथीयार धो देती हु.. अब तो उस कमीनीको भी पता चल जायगा की मे आपसे जमकर चुदवाकर आइ हु.. आपने तो मेरी चाल ही बदलदी.. अभी भी नीचे कीतना दर्द हो रहा हे..
मुना : (आस्चर्यसे देखते) कौन..? कीसको पता चल जायेगा..?
बसंती : (सरमाकर हसते) अरे वो.. जो आजकल मेरी पकी सहेली होगइ हे.. तेरे श्रीधरकी मां.. ब्रीन्दा.. वो भी तो अपने बेटे श्रीधरसे चुदवाती हे.. कमीनी बहुत कामी ओरत हे.. ओर तेरा दोस्त भी उनके पीछे पागल हे.. जैसे मे तेरे पीछे पागल हु.. हें..हें..हें..
मुना : (हसते) मोम.. वो दोनो मा बेटे भी रीलेशनमे थे हमे तो पता ही नही था.. सीर्फ लखन भैया जानते थे.. हमे तो सब बादमे पता चला..
बसंती : (आकर बाहोमे समाते) जानु.. अेक बात कहु..? अभी कीसीको कहीयेगा नही.. जब आपका दोस्त पढता थानां.. तब ही उन मां बेटेने सादी करली थी.. पता नही हमारी सादी कब होगी..
मुना : (मुस्कुराते होठ चुमते) मोम.. इसीलीये केह रहा हु आप भी मुजे सादी करलो.. क्युकी ब्रीन्दा आंटीका पती भी अभी जीन्दा हे.. तो फीर हम सादी क्यु नही कर सकते..?

बसंती : (सीनेपे सर रखकर मुस्कुराते) जानु.. सादी तो अब अेक औपचारीक रेह गइ हे.. हमने सबकुछ तो कर रहे हे.. जो अेक पती पत्नीके बीच होता हे.. ओर मेतो मनसे आपको अपना पती भी मान चुकी हु.. ओर पतीकी तराह ही आपका खयाल रखती हु.. तो फीर थोडासा इन्तजार करनेमे क्या हर्ज हे..?
मुना : (मुस्कुराते) ठीक हे मोम.. जैसा आपको ठीक लगे..
बसंती : (अलग होते) बेटा अब कीतने दिन घरपे बैठे रहोगे..? आपके डोक्टरका तो कुछ अता पता नही वो कब आयेगे.. वरना आप अपने बापुकी दुकान ही सम्हाललो..
मुना : (मुस्कुराते) मोम.. बडे ठाकुर भैया केह रहे थे.. ओर तीन चार दिनमे ही होस्पीटल खुल जायेगी.. केह रहेथे.. वहा अब वसुधा नामकी कोइ लेडी डोक्टर आ रही हे.. सायद सुधीर अंकल हमेसाके लीये बोम्बे चले गये हे.. अब चलीये सादीमे..
फीर दोनो ही बारी बारी वापस आजाते हे.. बसंती थोडी धीमे चल रही थी.. ओर उनके पैर भी थोडा लडखडाते थे.. जीसे देखकर ब्रीन्दा उनके सामने देखकर हसने लगी.. तो बसंती सर्मसार होगइ.. उसे नही पताथा की बरखा कबसे दोनोकी हरकत देख रही हे.. ओर वो बसंतीको अैसे चलते देखकर बहुत कुछ समज जाती हे.. ओर मन ही मन खुस होजाती हे.. अब उसने बसंतीके उपर नजर रखनेकी ठानली..
तो आज वृन्दा ओर जीतुलाल भी बहुत खुस थे.. क्युकी आज जीतुलालको हमेसा हमेसाके लीये ब्रीन्दासे छुटकारा जो मीलने वाला था.. तो वृन्दा भी इसीलीये खुस थी की अब उसे भी हमेसाके लीये जीतुलालका साथ मीलने वाला था.. दोनो अेक दुसरेके सामने देखकर बार बार हस रहे थे.. जब भी मौका मीलता दोनो बारी बारी घरके अंदर चले जाते.. ओर अेक दुसरेकी बाहोमे समा जाते..
फीर जीतुलाल वृन्दाके बुब्सको मसलते उनके होठोका रसपान करता.. फीर बारी बारी दोनो बहार चले आते.. ओर वृन्दा जीतुलालाकी ओर देखकर सरमाके हसने लगती.. आज दोनोके उपर प्यारका परवाना चढा हुआ था.. तब अेक सख्स था.. जो दोनोकी हरकतको बराबर ध्यान रखता था.. जो अभी वृन्दाके उपर नजर जमाये हुआ था.. वो था श्रीधर..
जबसे उसे ब्रीन्दासे पता चलाकी तउनके पापा जीतुलाल ओर जयश्रीकी मम्मीके बीच चलकर हे.. ओर जयश्री उन्हीकी बेटी हे.. ये सब जानकर श्रीधर अपनी मम्मीको धोखेका बदला लेना चाहता था.. तबसे वो सोच रहाथा.. की उनकी मम्मीका बदला कैसे लीया जाये.. तबसे उनका वृन्दाको लेकर नजरीया बदलने लगा था.. इसीलीये वो जीतुलाल ओर वृन्दापे हर वक्त नजर रखता था..