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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २३२
आज पता नही सृतीको देवायतके पास जानेका मन नही हुआ.. तो पुनम करवट लेकर सृतीकी ओर होगइ.. ओर उसे बाहोमे भरते लेटने लगी.. तभी सृतीके फोनपे मेसेजकी रींग टोन बजी.. तो सृती जटसे बेडपे बैठ गइ ओर अपना मोबाइल उठाकर देखने लगी.. तो उनकी फ्रेन्डने सृतीको फोटो सेन्ड करदीया था.. ओर जैसे ही सृतीने फोटो देखली.. सृतीने जोरोसे मोबाइलको बेडपे पटक दीया.. तो पुनम भी जटसे बेडपे बैठ गइ.... अब आगे
पुनम : (थोडी चीन्तासे) सृतीदी.. क्या हुआ..?
सृती : (आंसु बहाते) दीदी.. वोही.. जीसका मुजे डर था.. ओह.. गो..ड..
सृती अपना चहेरा अपनी हथेलोओमे छुपाते जोरोसे रोने लगी.. तो पुनम सबकुछ समज गइ.. ओर उसने फोन करके मंजुको अकेली रुममे बुला लीया.. तो मंजु अपने आपको सही करके धीरेसे पुनमके रुममे घुस गइ ओर जटसे दरवाजा बंध करके सृतीके पास आकर बैठ गइ.. तब पुनम ओर मंजु अेक दुसरेकी ओर चीन्ताके भावसे देखने लगी.. ओर मंजुने सृतीको बैठेही अपनी बाहोमे थाम लीया..
मंजुला : (पीठको सहेलाते धीरेसे) सृती.. सांत होजा.. क्या कर रही हे..? सब लोग आराम कर रहे हे.. तो सुन लेगे.. चुप होजा.. ओर बता क्या हुआ..?
सृती : (कंधेपे सर रखते रोते) मंजु.. मम्मीने अैसा क्यु कीया..? जो मुजसे इतनी बडी बात छीपाइ..
मंजुला : (धीरेसे) सृती पहेले सांत होजा.. हम आरामसे बैठकर बात करते हेनां.. चल पहेले सांत होजा..
बडी मुस्कीलसे मंजुने सृतीको सांत कीया.. तब सृती खडी होकर बाथरुममे अपना हुलीया ठीक करने चली गइ.. तभी पुनम ओर मंजु धीरेसे बाते करने लगी..
पुनम : (धीरेसे) दीदी.. अब क्या करेगे..? उनकी डोक्टर फ्रेन्डने तसवीर भेजदी.. वो भुमी बुआ ओर नीर्मला आंटी की हे.. आप सम्हाल लेना..
मंजुला : (धीरेसे) पुनो.. अब सम्हालना मुजे नही.. तुजे ओर लखनको हे.. अब असली खेल सुरु हो गया हे.. तुम दोनो वहा जाकर इसे सम्हाल लेना.. अभी तो मे इनसे बात करती हु..
तभी सृती अपना मुह साफ करते वापस बहार नीकलती हे.. उनके चहेरेपे मायुसी छाइ हुइ थी.. ओर वो आकर चुपचाप मंजु ओर पुनमके बीच बैठ जाती हे.. तो मंजु ओर पुनम उनकी ओर देखते हे..
सृती : (सामने देखते) मंजुदी.. तुम ओर पुनोदीदी तो सब जानती थीनां..? ओर ताजुबकी बात हे.. इस बारेमे तो खुद नीर्मला आंटी थी जानती हे.. जो सीर्फ मुजे ही नही पता था.. मंजुदी.. मेरे साथ आपने अैसा क्यु कीया..?
मंजुला : (जानते भी अनजान बनते) सृती.. तुम क्या बोल रही हे..? हम दोनो क्या जानती थी..? मम्मीको क्या पता हे..? मेरी तो कुछ समजमे नही आता..
सृती : (गुस्सेसे मंजुकी ओर देखते) मंजुदी.. तुम कीतनी भोली बनती हो.. ना सीर्फ मम्मीने मुजे धोखा दीया हे.. बल्की तुम दोनोने भी मुजे अंधेरेमे रखा.. फीर भी मेरे मुहसे सुनना चाहती हो तो सुनो.. मे मम्मीकी प्रेगनन्सीके बारेमे बात कर रही हु.. ओर अभी मेने बहार आइ तब देखा भी.. उनका पेट कीतना बढ गया हे.. मे अेक डोक्टर हु.. पेट युही नही बढता.. उनके पेटमे कमसे कम पांच छे महीनेका गर्भ हे.. क्या ये सच हेनां..?
मंजुला : (सर जुकाये खामोस बेठी रही) .....
सृती : (थोडा जोरोसे) मंजुदी.. मे आपसे कुछ पुछ रही हु.. मुजे सब सच बतादो.. क्या ये सच हेनां..?
मंजुला : (नजर जुकाते हां मे गरदन हीलाते) हां.. सृती.. वो.. वो..
सृती : (सामने देखते) मंजुदी.. अब बात छीपानेका कोइ फायदा नही.. बस.. इतना बतादो.. इनके लीये कोन जीम्वेवार हे.. मम्मीका कीसके साथ अफैर चल रहा हे.. बस.. मुजे सीर्फ इतना ही जानना हे..
मंजुला : (सामने देखते) मत जानो.. सचाइ जानकर दुख होगा तुजे.. मत भुलो भुमी आंटी भी हममे से अेक हे.. जो अपना फर्ज नीभाने इस धरतीपे आइ हे.. उसे भी अपनी जींदगी अपने तरीकेसे जीनेका हक हे..
सृती : (गुस्सेसे सामने देखते) अब ये सब रहेनेदो मंजुदी.. क्या आपको लगता हे.. अैसी कहानीओ से मे मान जाउगी..? मत भुलो मे अेक डोक्टर हु.. ओर कमसे कम अैसी अयासीओ के लीये तो बीलकुल नही मानती.. जहा अैसी कहानीओके आडमे सीर्फ हवसका खेल चल रहा हो.. बस.. सीर्फ इतना बतादो.. की मम्मीका अफैर कीसके साथ चलता हे.. इस नाजायज बच्चेका बाप कौन हे..?
मंजुला : (सामने देखते) सृती.. वो बच्चा कोइ नाजायज नही हे.. समजी..?
सृती : (सामने देखते) अच्छा..? मम्मीकी उमर देखी हे तुमने..? ओर वो भी अेक विधवा.. वो इतनी हवसी कैसे हो सकती हे..? पता नही कीसके साथ मुह काला करेके उनका पाप अपने पेटमे पाल रही हे..
मंजुला : (थोडा गुस्सेमे) सृती.. मुह सम्हालके बोलो.. ये कोइ पाप नही हे.. भुमी आंटी विधजा नही हे.. आंटीने कायदेसे सादी कीहे उनसे.. ओर ये बच्चा भी उनके पतीका हे..
सृती : (चौंकते) व्होट..? मम्मीने सादी कीहे उनसे..? ओर वो भी इस उमरमे..? तुजे पता हे इस उमरमे बच्चे पैदा करना कीतना खतरनाक होता हे..? कल जब आपकी बात सुनीनां..? तब मुजे लगा मम्मीने अपनी जवानीमे बच्चेके लीये मामासे रीलेशन बनाया होगा.. तब मुजे इतना दुख नही हुआ.. जीतना आज इनके करतुत देखके हुआ.. आज पता चला.. वो कीतनी हवसी ओरत हे.. जो कीसीसे भी सादी करके अपने तनकी आग बुजाती हे..
मंजुला : (थोडा जोरोसे) चुप.. अेकदम चुप.. तुम समजती क्या हो अपने आपको..? जो कबसे अनाप सनाप बके जा रही हो..? तुजे पता हे तु कीसके बारेमे बोल रही हे..? अरे वो मम्मी हे तेरी.. जो तुजे इतना पढा लीखाके डोक्टर बनाया.. की तुम तेरी तमीज भी भुल गइ..? क्या तुजे तेरी डोक्टरीपे इतना घमंड हे..? जो तुम अेक तेरी दोस्तकी बातोमे आगइ..
सृती : (फोनपे तसवीर दीखाते) मंजुदी.. मे सीर्फ हवामे बात नही कर रही हु.. ये देखलो.. मम्मी ओर नीर्मला आंटीकी तसवीर हे.. वो दोनो खुद वहा चेक करवाने गइ थी.. ये तसवीरतो जुठ नही बोलेगी..? ओर ये देखो.. उनकी प्रेगनन्सीकी रीपोर्ट.. जो उनके मोबाइलमे आइ थी.. मंजुदी.. आपको मेरी कसम.. बस.. सीर्फ उस आदमीका नाम बतादो.. जीसने मम्मीके साथ सादी की.. मुजे ओर कुछ नही जानना..
मंजुला : (अपने सरपे हाथ रखते) ओह.. गोड.. सृती तु क्यु जीद कर रही हे..? मत जान.. तुजे ओर दुख होगा..
सृती : (खडी होते बहारकी ओर जाते) ठीक हे.. मत बताओ.. मे अभी उनसे ही पुछ लेती हु.. की तुम कीसका पाप लेकर घुम रही हो.. वो तो बतायेगीनां..?
मंजुला : (पीछे दोडते) सृती.. रुकजा.. तुजे मेरी कसम.. मत जा वहा.. उसे आराम करने दे..
लेकीन तबतक सृती दरवाजा खोलकर जा चुकी थी.. तो मंजु भी उनके पीछे पीछे जाने लगी.. पुनम भी थोडा गभराते मंजुके पीछे चली गइ.. मंजु सृती तक पहोंचे इनसे पहेले ही सृती जोरोसे दरवाजा खोलकर अपनी मम्मीके रुममे चली गइ.. तो दरवाजेकी आवाज सुनकर नीर्मला के साथ भुमीका भी जाग गइ.. ओर दोनो सृतीका रुप देखते ही बेड पे जटसे बैठ गइ.. ओर सृतीकी ओर देखने लगी..
अध्याय - २३२
आज पता नही सृतीको देवायतके पास जानेका मन नही हुआ.. तो पुनम करवट लेकर सृतीकी ओर होगइ.. ओर उसे बाहोमे भरते लेटने लगी.. तभी सृतीके फोनपे मेसेजकी रींग टोन बजी.. तो सृती जटसे बेडपे बैठ गइ ओर अपना मोबाइल उठाकर देखने लगी.. तो उनकी फ्रेन्डने सृतीको फोटो सेन्ड करदीया था.. ओर जैसे ही सृतीने फोटो देखली.. सृतीने जोरोसे मोबाइलको बेडपे पटक दीया.. तो पुनम भी जटसे बेडपे बैठ गइ.... अब आगे
पुनम : (थोडी चीन्तासे) सृतीदी.. क्या हुआ..?
सृती : (आंसु बहाते) दीदी.. वोही.. जीसका मुजे डर था.. ओह.. गो..ड..
सृती अपना चहेरा अपनी हथेलोओमे छुपाते जोरोसे रोने लगी.. तो पुनम सबकुछ समज गइ.. ओर उसने फोन करके मंजुको अकेली रुममे बुला लीया.. तो मंजु अपने आपको सही करके धीरेसे पुनमके रुममे घुस गइ ओर जटसे दरवाजा बंध करके सृतीके पास आकर बैठ गइ.. तब पुनम ओर मंजु अेक दुसरेकी ओर चीन्ताके भावसे देखने लगी.. ओर मंजुने सृतीको बैठेही अपनी बाहोमे थाम लीया..
मंजुला : (पीठको सहेलाते धीरेसे) सृती.. सांत होजा.. क्या कर रही हे..? सब लोग आराम कर रहे हे.. तो सुन लेगे.. चुप होजा.. ओर बता क्या हुआ..?
सृती : (कंधेपे सर रखते रोते) मंजु.. मम्मीने अैसा क्यु कीया..? जो मुजसे इतनी बडी बात छीपाइ..
मंजुला : (धीरेसे) सृती पहेले सांत होजा.. हम आरामसे बैठकर बात करते हेनां.. चल पहेले सांत होजा..
बडी मुस्कीलसे मंजुने सृतीको सांत कीया.. तब सृती खडी होकर बाथरुममे अपना हुलीया ठीक करने चली गइ.. तभी पुनम ओर मंजु धीरेसे बाते करने लगी..
पुनम : (धीरेसे) दीदी.. अब क्या करेगे..? उनकी डोक्टर फ्रेन्डने तसवीर भेजदी.. वो भुमी बुआ ओर नीर्मला आंटी की हे.. आप सम्हाल लेना..
मंजुला : (धीरेसे) पुनो.. अब सम्हालना मुजे नही.. तुजे ओर लखनको हे.. अब असली खेल सुरु हो गया हे.. तुम दोनो वहा जाकर इसे सम्हाल लेना.. अभी तो मे इनसे बात करती हु..
तभी सृती अपना मुह साफ करते वापस बहार नीकलती हे.. उनके चहेरेपे मायुसी छाइ हुइ थी.. ओर वो आकर चुपचाप मंजु ओर पुनमके बीच बैठ जाती हे.. तो मंजु ओर पुनम उनकी ओर देखते हे..
सृती : (सामने देखते) मंजुदी.. तुम ओर पुनोदीदी तो सब जानती थीनां..? ओर ताजुबकी बात हे.. इस बारेमे तो खुद नीर्मला आंटी थी जानती हे.. जो सीर्फ मुजे ही नही पता था.. मंजुदी.. मेरे साथ आपने अैसा क्यु कीया..?
मंजुला : (जानते भी अनजान बनते) सृती.. तुम क्या बोल रही हे..? हम दोनो क्या जानती थी..? मम्मीको क्या पता हे..? मेरी तो कुछ समजमे नही आता..
सृती : (गुस्सेसे मंजुकी ओर देखते) मंजुदी.. तुम कीतनी भोली बनती हो.. ना सीर्फ मम्मीने मुजे धोखा दीया हे.. बल्की तुम दोनोने भी मुजे अंधेरेमे रखा.. फीर भी मेरे मुहसे सुनना चाहती हो तो सुनो.. मे मम्मीकी प्रेगनन्सीके बारेमे बात कर रही हु.. ओर अभी मेने बहार आइ तब देखा भी.. उनका पेट कीतना बढ गया हे.. मे अेक डोक्टर हु.. पेट युही नही बढता.. उनके पेटमे कमसे कम पांच छे महीनेका गर्भ हे.. क्या ये सच हेनां..?
मंजुला : (सर जुकाये खामोस बेठी रही) .....
सृती : (थोडा जोरोसे) मंजुदी.. मे आपसे कुछ पुछ रही हु.. मुजे सब सच बतादो.. क्या ये सच हेनां..?
मंजुला : (नजर जुकाते हां मे गरदन हीलाते) हां.. सृती.. वो.. वो..
सृती : (सामने देखते) मंजुदी.. अब बात छीपानेका कोइ फायदा नही.. बस.. इतना बतादो.. इनके लीये कोन जीम्वेवार हे.. मम्मीका कीसके साथ अफैर चल रहा हे.. बस.. मुजे सीर्फ इतना ही जानना हे..
मंजुला : (सामने देखते) मत जानो.. सचाइ जानकर दुख होगा तुजे.. मत भुलो भुमी आंटी भी हममे से अेक हे.. जो अपना फर्ज नीभाने इस धरतीपे आइ हे.. उसे भी अपनी जींदगी अपने तरीकेसे जीनेका हक हे..
सृती : (गुस्सेसे सामने देखते) अब ये सब रहेनेदो मंजुदी.. क्या आपको लगता हे.. अैसी कहानीओ से मे मान जाउगी..? मत भुलो मे अेक डोक्टर हु.. ओर कमसे कम अैसी अयासीओ के लीये तो बीलकुल नही मानती.. जहा अैसी कहानीओके आडमे सीर्फ हवसका खेल चल रहा हो.. बस.. सीर्फ इतना बतादो.. की मम्मीका अफैर कीसके साथ चलता हे.. इस नाजायज बच्चेका बाप कौन हे..?
मंजुला : (सामने देखते) सृती.. वो बच्चा कोइ नाजायज नही हे.. समजी..?
सृती : (सामने देखते) अच्छा..? मम्मीकी उमर देखी हे तुमने..? ओर वो भी अेक विधवा.. वो इतनी हवसी कैसे हो सकती हे..? पता नही कीसके साथ मुह काला करेके उनका पाप अपने पेटमे पाल रही हे..
मंजुला : (थोडा गुस्सेमे) सृती.. मुह सम्हालके बोलो.. ये कोइ पाप नही हे.. भुमी आंटी विधजा नही हे.. आंटीने कायदेसे सादी कीहे उनसे.. ओर ये बच्चा भी उनके पतीका हे..
सृती : (चौंकते) व्होट..? मम्मीने सादी कीहे उनसे..? ओर वो भी इस उमरमे..? तुजे पता हे इस उमरमे बच्चे पैदा करना कीतना खतरनाक होता हे..? कल जब आपकी बात सुनीनां..? तब मुजे लगा मम्मीने अपनी जवानीमे बच्चेके लीये मामासे रीलेशन बनाया होगा.. तब मुजे इतना दुख नही हुआ.. जीतना आज इनके करतुत देखके हुआ.. आज पता चला.. वो कीतनी हवसी ओरत हे.. जो कीसीसे भी सादी करके अपने तनकी आग बुजाती हे..
मंजुला : (थोडा जोरोसे) चुप.. अेकदम चुप.. तुम समजती क्या हो अपने आपको..? जो कबसे अनाप सनाप बके जा रही हो..? तुजे पता हे तु कीसके बारेमे बोल रही हे..? अरे वो मम्मी हे तेरी.. जो तुजे इतना पढा लीखाके डोक्टर बनाया.. की तुम तेरी तमीज भी भुल गइ..? क्या तुजे तेरी डोक्टरीपे इतना घमंड हे..? जो तुम अेक तेरी दोस्तकी बातोमे आगइ..
सृती : (फोनपे तसवीर दीखाते) मंजुदी.. मे सीर्फ हवामे बात नही कर रही हु.. ये देखलो.. मम्मी ओर नीर्मला आंटीकी तसवीर हे.. वो दोनो खुद वहा चेक करवाने गइ थी.. ये तसवीरतो जुठ नही बोलेगी..? ओर ये देखो.. उनकी प्रेगनन्सीकी रीपोर्ट.. जो उनके मोबाइलमे आइ थी.. मंजुदी.. आपको मेरी कसम.. बस.. सीर्फ उस आदमीका नाम बतादो.. जीसने मम्मीके साथ सादी की.. मुजे ओर कुछ नही जानना..
मंजुला : (अपने सरपे हाथ रखते) ओह.. गोड.. सृती तु क्यु जीद कर रही हे..? मत जान.. तुजे ओर दुख होगा..
सृती : (खडी होते बहारकी ओर जाते) ठीक हे.. मत बताओ.. मे अभी उनसे ही पुछ लेती हु.. की तुम कीसका पाप लेकर घुम रही हो.. वो तो बतायेगीनां..?
मंजुला : (पीछे दोडते) सृती.. रुकजा.. तुजे मेरी कसम.. मत जा वहा.. उसे आराम करने दे..
लेकीन तबतक सृती दरवाजा खोलकर जा चुकी थी.. तो मंजु भी उनके पीछे पीछे जाने लगी.. पुनम भी थोडा गभराते मंजुके पीछे चली गइ.. मंजु सृती तक पहोंचे इनसे पहेले ही सृती जोरोसे दरवाजा खोलकर अपनी मम्मीके रुममे चली गइ.. तो दरवाजेकी आवाज सुनकर नीर्मला के साथ भुमीका भी जाग गइ.. ओर दोनो सृतीका रुप देखते ही बेड पे जटसे बैठ गइ.. ओर सृतीकी ओर देखने लगी..





