Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 81 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

तो दोनोने फटाफट अपने कपडे वही नीकाल दीये.. तो लखन वही टेबलपे बैठ गया.. ओर रजीयाको अपनी गोदमे बीठाकर अपना लंड रजीयाकी चुतपे सेट करते घुसा दीया.. तो रजीयाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर वो वासना भरी नजरोसे लखनकी ओर देखते उछलने लगी.. लखन भी उनके नींतबको पीछेसे पकडकर रजीयाको अपनी गोदमे उछालते चोदने लगा..





लखन रजीयाको काफी देर अ‍ैसेही चोदता रहा.. इसी बीच रजीयाभी अ‍ेक बार जड चुकी थी.. फीर काफी देर चुदाइके बाद दोनो अपनी मंजीलके करीब पहोंच कगे.. तो लखनने अपनी स्पीड बढाइ.. रजीया सीसकारीया करने लगी.. ओर अंतमे दोनो अपने चरमोपे पहोचकर साथमे स्खलीत होगये.. फीर दोनो बाथरुममे चले गये.. ओर सही होकर अपने अपने कपडे पहेन लेते हे..

लखन : (कपडे पहेनते) रजु.. मना आयाकी नही..?

रजीया : (कपडे पहेनते) जानु.. बहुत मजा आ गया.. बस अ‍ैसे ही प्यार करलीया करो..

तब नीलुके स्कुलसे आनेका टाइम भी हो चुका था तो लखन रजीयाके होठोको चुमकर वहासे नीकल गया.. ओर नीलुको लेकर वापस आ गया.. फीर वो नीलुको घरपे छोडकर होस्टेलपे चला जाता हे.. जीसे देखकर राधीका भी खुस होगइ.. ओर वहा भी लखन राधीकाके कुअ‍ेको दो बार अपने पानीसे सीच देता हे.. ओर राधीकाके अ‍ेक अ‍ेक अंगको तोड देता हे.. जीसे राधीका भी खुस होगइ.. फीर दोनो धरकी ओर नीकलते हे..





राधीका : (रास्तेमे) जानु.. ये आपने हमे मीलनेका अच्छा आइडीया ढुंढ नीकाला हे.. घरपे कोइ जंजट ही नही.. आप अपनी दुसरी बीवीओको प्यार करते रहो.. मुजे तो यहा आपका प्यार मील जाता हे.. आजतो आपने मुजे पुरी नीचोडली..

लखन : (मुस्कुराते) राधु.. पहेले भी हम यही तो मीलते थे.. ओर अब इतनी बीवीया होजायेगी तो कुछ मेनेज तो करना पडेगानां.. सुन.. क्या पुनो दीदीसे बात होगइ..?

राधीका : (मुस्कुराते) हां.. वैसे तो फोनपे बात होती रहेती हे.. लेकीन केह रही थी जब मे वहा आउगी तब आपको सब कुछ बताउगी.. फीर भी भाभीमांने मुजे बहुत कुछ बता दीया हे..

लखन : राधु.. तुजे हमारे खानदानके बारेमे जानकर बुरा तो नही लगा..?

राधीका : (हसते) बडा दीलचस्प खानदान हे आपका.. मेतो जानकर हेरान रेह गइ.. क्या आजके जमानेमे भी ये सब पोसीबल हे..? जानु.. क्या मे सचमे परी या अप्सरा हु..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. अगर भाभीमांने कहा हे तो जरुर होगी.. हें..हें..हें..

फीर दोनो अ‍ैसी ही बाते करते घरपे आजाते हे.. तो नीलम सोफेपे बैठकर टीवी देख रही थी.. आज दिनमे भी धिरेन नीलमको लेने स्कुलपे आया था.. फीर दोनो अपने पेपर लेकर कोर्टपे चले गये.. ओर मेरेजका फोर्म भरके अपने सभी पेपर अ‍ेडमीट करदीये.. फीर धिरेन नीलमको लेकर अपने घरपे जाना चाहता था.. तो नीलमने देर होजानेका बहाना बनाकर धिरेनके घरपे जानेका टाल दीया.. उनको पता था धिरेन उनको घरपे क्यु लेजाना चाहता हे..

क्युकी अब धिरेनके साथ इतनी बार सेक्स करते भी नीलम धिरेनके छोटे लंडसे संतुस्ट नही होती थी.. इसी वजहसे नीलमकी दिलचस्पी धिरेनसे कम होती जा रही थी.. जबसे लखनके लंडको देखा तबसे वो मन ही मन लखनको चाहने लगी थी.. इसीलीये तो लखनके साथ रातमे खुलकर प्यार करने लगी थी.. उनको अब धिरेनके बजाये लखनका लंड पसंद आने लगा था..

कइ बार दोनो ओरल सेक्स करते इतने बहेक जाते की नीलम लखनको अपने उपर चडनेकी मनते करने लगती.. अब वो कीसी भी हालमे लखनसे चुदवाना चाहती थी.. इसके लीये नीलमने कइ बार कोसीस भी की.. लेकीन लखन अभी सही वक्त नही हे.. कहेके नीलमकी बातको टाल देता.. क्युकी लखन जानता था की वो नीलमके साथ सेक्स करेगा तो नीलम दो दिन बीस्तरसे उठ नही पायेगी..

ओर नीलमको अ‍ैसे ही जडा देता.. इसी वजहसे लखनके प्रती नीलमकी चाहत बढती ही जा रही थी.. वो चाहती थीकी अब कीसी भी हालमे वो लखनके साथ सेक्स करे.. लेकीन रमाकी हालत देखकर लखन भी जानता था.. की अभी घरपे नीलमके साथ सेक्स करना उचीत नही हे.. वो इसके लीये कीसी खास मौकेके इन्तजारमे था.. राधुको लेकर घरपे आते ही वो नीलमके पास जाकर बैठ गया..

लखन : (मुस्कुराते) कहो नीलु.. पढाइ कैसी चल रही हे..? कोइ प्रोबलेम तो नही..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही जीजु.. अच्छी चल रही हे.. जीजु.. मुजे आपसे बात करनी हे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. बोल.. कुछ चाहीये क्या..?

नीलम : (मुस्कुराते) नही.. जीजु.. आज धिरेन आया था.. फीर मे ओर धिरेन कोर्टमे सब पेपर अ‍ेकमीट करवाके आ गये.. कोर्टने हमे अ‍ेक महीनेके बादकी डेट दी हे.. तो मे क्या करु..?

लखन : (मुस्कुराते) क्या करु मतलब..? सादी करले उनसे.. ओर क्या..? तु फीकर मत कर.. मे सब इन्तजाम करदुगा.. तुजे कुछ नही होगा..

नीलम : (मायुस होते) जीजु.. मेरी वजहसे पुनो दीदीके साथ जो भी हुआ मुजे अच्छा नही लगा.. अगर धिरेनने मेरे साथ भी अ‍ैसा कीया तो..? तो फीर मे कहा जाउगी..? आपने तो पुनोदीदीको अपना लीया.. ओर उनसे सादी भी कर रहे हो.. लेकीन धिरेनने मुजे छोड दीया तो मुजे कौन अपनायेगा..? जीजु.. धिरेनके बारेमे सोचनेके लीये अभी भी वक्त हे.. मुजे आपकी राय चाहीये..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. फीर भी हमे तुमसे कोइ गीला सीकवा नही.. मेरी मान तु करले धिरेनसे सादी..

नीलम : (आंख गीली करते) जीजु.. वही तो..? अगर आपकी जगहपे कोइ ओर होता तो नाजाने अब तक मेरे साथ वो लोग क्या क्या करते.. आप लोग इतने अच्छे क्यु हे..? जीजु.. आइ लव यु..

लखन : (बैठेही हग करते) हंम.. आइ लव यु टु.. नीलु.. तु बहुत अच्छी हे.. हमारी किस्मतमे जो लीखा होता हे वही होता हे.. उसे ना तुम टाल सकती हो ना मे..

नीलम : (आंख पोछते) नही जीजु.. ये किस्मतका खेल नही हे.. कीसीकी साजीसका खेल हे..

लखन : (सामने देखते) मतलब..? तु कहेना क्या चाहती हे..?

नीलम : (सामने देखते धीरेसे) जीजु.. अभी नही.. हम जब रातमे मीलेगे तब.. मे आपसे कुछ कन्फेस करना चाहती हु.. क्युकी मुजसे अब ओर पाप नही होगा.. फीर आप फैसला करना की मुजे क्या करना चाहीये..
 
राधीका : (होलमे आते) अरे.. लखन आप इधर बैठेहो..? फ्रेस नही होना क्या..? चलो आपको मम्मी बुला रही हे.. आपसे कुछ काम हे.. आप फ्रेस होकर रुममे आजाओ.. मे सृती दीदीके पास जा रही हु..

कहेते राधीका उपर चली गइ.. तो लखन मुस्कुराते नीलमके संतरे जैसे बुब्सको दबाते उनके होठोको चुम लेता हे.. तो नीलम सरमाकर हसने लगी.. ओर लखन नीचे ही फ्रेस होने चला गया.. तो नीलम भी रजीयाकी मदद करने कीचनमे चली गइ.. फीर लखन फ्रेस होकर सीधा ही राधीकाकी मम्मीके पास चला गया.. तो उनकी मम्मी लखनको देखकर हसने लगी.. ओर लखन उनके पास जाकर बैठ गया..

लखन : (हग करते) कहो सासुमां.. कैसे याद कीया..? तबीयत तो ठीक हेनां..?

रा.मम्मी : (हसते) अरे.. तेरे जैसे दामाद हेतो मस्त ही होगीनां.. मेरी सभी बीटीया बहुत अच्छी हे.. सब की सब मेरी सेवा करती हे.. मेरी राधुतो बहुत नसीब वाली हे जो आपके खानदानकी बहु हइ.. मुजे पता थाकी आप भी उसी खानदानका खुन हो.. मतलब.. आपका खानदान अ‍ेक रोयल फेमीली हे.. बेटा मुजे आपसे कुछ बात करनी थी..

लखन : (मुस्कुराते) हां मम्मीजी कहो.. क्या बात करनी थी..?

रा.मम्मी : (मुस्कुराते) बेटा.. बाकी कुछ नही.. बस घरकी याद आ रही हे.. तो सोचा कुछ दिन वहा गुजारु.. फीर अच्छा नही लगेगा तो मे वापस आजाउगी.. यहा दामादके घर रहेना भी ठीक नही हे..

लखन : (सरको चुमते) ये कीसने कहा ये आपके दामादका घर हे.. दामादके साथ अपने बेटेका घर नही हे क्या..? कहोतो मे आपसे भी सादी करलु.. हें..हें..हें.. फीर ये आपका भी ससुराल होजायेगा.. फीर तो कोइ दिकत नही..?

रा.मम्मी : (अ‍ेक मुका मारते जोरोसे हसते) तेरी मस्ती करनेकी आदत गइ नही.. तु इस बुढीयासे सादी करेगा..? अगर मेरी राधुने सुनलीया होता तो तेरी पीटाइ करती.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. वैसे भी आज कल उनके हाथ पाव बहुत चलते हे.. वैसे आपको जाना क्यु हे..?

रा.मम्मी : (मुस्कुराते) पता नही बेटा.. आज सुबहसे ही घर जानेका बहुत मन कर रहा हे.. वहा राधु हेना.. ओर वैसे भी मे अकेले रहेनेकी आदी हो चुकी हु.. तो कोइ दिकत नही होगी.. बस.. मुजे सीर्फ अ‍ेक बार घरपे जाने दो.. फीर तो राधुको इधरही रहेना हे..

राधीका : (अंदर आते) दोनो सासु जमाइमे क्या बात हो रही हे..? हम भी तो सुने..

रा.मम्मी : (मुस्कुराते सरपे हाथ फेरते) अ‍ेय.. सुन.. ये मेरा दामाद नही मेरा बेटा हे.. समजी..?

राधीका : (जोरोसे हसते पास बैठते) अच्छा..? तो फीर सासुमा.. कहीये दोनो मां बेटे क्या बात कर रहे थे.. हें..हें..हें..

रा.मम्मी : (जोरोसे हसते अ‍ेक मुका मारते) सासुकी बच्ची तेरी मां भी हु.. तुम दोनो ही अ‍ैक जैसे हो.. सुन.. मे लखन बेटेको केह रही थी.. कुछ दिन मे हमारे घरपे जाना चाहती हु.. फीर वहा अच्छा नही लगा तो हम वापस आजायेगे.. क्या कहेती हो..?

राधीका : (मुस्कुराते) मम्मी ये तो मे भी केह रही थी.. लेकीन ये नही मानते.. कहेते हे यहा सब हेतो आपका टाइम भी नीकल जायेगा.. ओर आपकी देखभाल भी होती रहेगी.. ओर इनकी बात भी सही हे..

रा.मम्मी : (मुस्कुराते प्यारसे गाल सहेलाते) लखन बेटा आपकी बात तो सही हे.. लेकीन घरकी बहुत याद आ रही हे.. बस.. सीर्फ कुछ दिन.. फीर हम वापस यहा आजायेगे..

लखन : (सरको चुमते) ठीक हे मम्मीजी.. मे इस बारेमे आज भाभीमांसे बात करलुगा.. अगर वो जानेकी परमीशन देती हेतो मे आपको घरपे छोड दुगा.. लेकीन सीर्फ कुछ दिनके लीये.. समजी..?

रा.मम्मी : (मुस्कुराते) अरे हां बाबा.. फीर हम वापस आजायेगे.. पका वाला वादा.. बस..? आप अपनी भाभीमांको पुछलो.. मुजे यकीन हे वो मना नही करेगी..

राधीका : (खडी होकर जाते) मम्मी आप दोनो बाते करो.. मे आपका खाना लेकर आती हु..

रा.मम्मी : (राधीकाको जाते देखते मुस्कुराते) बेटा.. मेरी राधु यहा कीतनी खुस हे.. सबके साथ घुलमील गइ हे.. बस.. अब कोइ अच्छीसी खुस खबर सुननेको मीले.. तो गंगा नहाये.. अब इनकी मुजे कोइ चीन्ता नही हे..

लखन : (हसते) मम्मीजी.. आप चीन्ता मत करो.. आपके जानेसे पहेले आपके नातीका मुह दीखा दुगा.. हें..हें..हें..

रा.मम्मी : (खुस होते हसते) तब तो बेटा आपके मुहमे घी सकर.. अगर मुह ना देखना मीले ओर सीर्फ खुस खकर मील जाये तो भी चलेगा.. अब मेरे पास वक्त ही कीतना हे..? अच्छा हुआ कमसे कम इनका घर तो बस गया.. मेरे लीये यही बहुत हे..

फीर कुछ देर बाते करते लखन बहार चला जाता हे.. तो राधीका खाना लेकर अपनी मम्मीके पास जा रही थी.. तो रजीया भी अ‍ेक थाली लेकर उपर सृतीको देने जा रही थी.. तो लखनने रजीयासे थाली लेली.. ओर खुद सृतीको खीलाने उपर चला गया.. तो सृती लखनको देखते ही बहुत खुस होगइ.. ओर लखन सृतीको अपने हाथोसे खीलाने लगा.. तो सृती आंख गीली करते लखनको देखती रही.. तभी..

लखन : (हसते) चुपचाप खाना खालो.. अ‍ैसे क्या देख रही हो..? वरना मुजसे प्यार होजायेगा..

सृती : (मुस्कुराते गाल चुमते) भाइ.. होजायेगा नही.. हो गया हे.. आप मेरी कीतनी कैर करते हो..? आइ लव यु बाबु.. बस.. मुजे अ‍ैसे ही प्यार करते रहेना..

लखन : (खाना खीलाते) दीदी.. आप ओर पुनोदीदी तो मेरी जान हो.. बस.. पीछले जन्मकी कुछ नादानीकी वजहसे इस जन्ममे आप ओर पुनो दीदी थोडे दिन चली गइ थी.. लेकीन याद रखना.. अगले जन्ममे मे आप दोनोको कही जाने नही दुगा.. आप दोनो सीर्फ मेरी हो.. ओर मेरी ही रहोगी..

इतना सुनते ही सृती लखसे बैठेही लीपट गइ.. ओर लखनके कंधेपे सर रखते आंसु बहाने लगी.. फीर अचानक लखनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. ओर लखनके चेहेरोको हाथोमे थामते प्यार भरी नजरोसे आंखोमे देखती रही.. ओर लखनने धीरेसे सृतीके होठोको चुम लीया.. तो सृती मदहोस होने लगी.. ओर लखनके होठोको चुमती रही.. फीर लखनने अ‍ेक ओर नीवाला सृतीके मुहमे ठुस दिया..
 
लखन : (मुस्कुराते) बस बस.. पहेले खाना खालो.. फीर प्यार कर लेना..

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. आज आप यही सोजाओनां.. मुजे आपका साथ बहुत अच्छा लगता हे..

लखन : (जोरोसे हसते) नही.. दीदी.. इनमे खतरा हे.. मुजे ओर चाटा नही खाना.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते अ‍ेक मुका मारते) भाइ.. इस बातको अभी तक नही भुले..? अब भुल जाओ उन बातको.. अब तो हम दोनो आपकी होचुकी हे.. यहा सोजाओनां.. प्लीज..

लखन : (मुस्कुराते) नही दीदी.. इसके लीये मेने कुछ ओर सोचा हे.. देखना वो आपके लीये सरप्राइज होगा.. आज तो मुजे खास काम हे.. आज मुजे नीलुसे कुछ बाते करनी हे.. फीर मे आपको बताउगा..

सृती : (सरमाते हसते धीरेसे) भाइ.. आपने उनके साथ कुछ कीयाकी नही..? अभी कीतना अच्छा मौका हे आपके पास.. वक्त जाहीर मत करो.. जीस तराह रमा भाभीको सबक सीखाया अब आप नीलुको भी सीखादो.. यहा उपर मेरे ओर रजुदीदीके अलावा कोइ हे भी नही..

लखन : (मुस्कुराते) नही दीदी.. अभी इसके लीये सही वक्त नही हे.. क्युकी नीलुकी स्कुल भी चालु हे.. आप समज गइनां.. रमाभाभी तो वैसे भी खाइ खालाइ ओरत थी.. नीलु तो अभी छोटी हे.. वो दो तीन दिन स्कुल नही जा पायेगी.. लेकीन मुजे लगता हे बात कुछ ओर हे.. आज वो मुजसे कुछ बात करने वाली हे..

सृती : (सामने देखकर) भाइ.. क्या आप दोनोके बीच कोइ बात हुइ हे..?

लखन : हां दीदी.. अभी थोडी देर पहेले ही नीचे बात हुइ.. पुनोदीदी ओर धिरेनके बीच जोभी कुछ हुआ.. इसके लीये वो खुदको जीम्वेवार मानती हे.. तो उनको बहुत पछतावा हो रहा हे.. मेरे खयालसे उनका धिरेनसे इन्टड्ढेस कम होगया हे.. सायद इसी सीलसीलेमे मुजसे बात करना चाहती हे..

सृती : (तीरछी नजरोसे देखते मुस्कुराते) भाइ.. जो भी हो.. देखना नीलुको हम अपनी सौतनके रुपमे देखना नही चाहते.. तो आप जो भी करो.. सोच समजके करना.. वरना मुजसे ओर पुनो दीदीसे बुरी कोइ नही होगी.. समजे..?

लखन : (हसते) अरे.. आपतो मुजे अभीसे धमकीया देने लगी हो.. अभी तो केह रही थीकी नीलुकी बारी लेलो.. अब क्या हुआ..? ठीक हे.. कोइ बात नही.. मेने इनका भी हल ढुंढलीया हे.. अ‍ेक बार आप दोनोसे सादी होजाने दो.. फीर आप दोनो मुजे कभी धमकी नही दोगी.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते अ‍ेक मुका मारते) भाइ.. दीदी ठीक केह रही थी.. आप वाकइ बहुत कमीने हो.. बताओ आपने क्या हल ढुंढलीया हे.. मे पुनोदीदीेसे बात करलुगी.. अब हमे आपको सुधारनेके लीये कोइ दुसरा रास्ता ढुंढना होगा.. बताओनां..?

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे) दीदी.. ओर कुछ नही.. मेरी जो भी बीवी मुजे धमकी देगी.. उस रात वो गइ कामसे.. रमा भाभीकी तराह पुरी रात चीखती चीलाती रहेगी.. हें..हें..हें..

इतना सुनते ही सृती सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर सरमाते हससकर लखनके सीनेमे मुके मारने लगी.. तो लखन भी जोरोसे हस पडा ओर सृतीके हाथ पकड लीये.. ओर मस्तीया करते दोनोके होठ कब मील गये पताही नही चला.. लखन सृतीके उरोजोको मसलते उनके होठोको चुम रहा था.. सृती लखनकी बातोसे अ‍ेकदम गरम हो चुकी थी.. ओर वो मदहोसीमे लखनके मुहके रसको पी रही थी..

लखन : (जटसे अलग होते) बस.. बस दीदी.. ओर नही.. हमे अभी हदमे रहेना होगा.. वरना मुजसे कंट्रोल नही होपायेगा.. ओर कुछ गलत होजायेगा..

सृती : (सरमाते धीरेसे कामुक नजरोसे देखते) भाइ.. होजाने दो.. भले ही आज सारी हदे मीट जाये.. मुजे आपका प्यार चाहीये.. अब आपसे दुर रहेना ओर बरदास्त नही होता.. इसीलीये केह रही हु.. की आज आप यही सोजाइअ‍े.. मे रजीया दीदीसे बात करलुगी..

लखन : (मुस्कुराते) नही दीदी.. रजीयासे बात करनेकी कोइ जरुरत नही हे.. उनको हमारे बारेमे सबकुछ पता हे.. बस.. सही वक्त आने दिजीये..

सृती : (आंख गीली करते) भाइ.. क्या उस बातकी सजा दे रहे हे मुजे..? आइ अ‍ेम सोरी..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) नही दीदी.. मेतो उस बातको भुल चुका हु.. आप यकीन कीजीये.. हम दोनो बहुत जल्द मीलेगे.. जो आपके लीये सरप्राइज होगा.. ट्रस्ट मी..

फीर लखन सृतीको खाना खीलाते उनके तनमे प्यारकी चींगारी जलाकर नीचे आगया.. फीर सबने डीनर करलीया.. तो राधीका ओर रजीया घरका काम समेटने लगी.. लखन ओर नीलम होलमे बैठकर टीवी देखने लगे.. आज राधीका ओर रजीया..

दोनोकी दिनमे ही कुटाइ हो चुकी थी.. तो दोनो बहुत थकी हुइ थी.. तो काम खतम होते ही दोनो लखनको कहेकर सोनेके लीये चली गइ.. तो लखनने मंजुको फोन लगा दीया..

मंजुला : (फोन उठाते ही) हां लखन बेटा.. बोल कुछ काम था..? घरपे सब कैसे हे..?

लखन : (मुस्कुराते) बस.. सब मजे मे हे.. भाभीमां.. आइ मीस यु..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. भाभीमांकी याद आ रही हे..? बता.. क्या बात हे..?

लखन : (फोनपे) भाभीमां.. मुजे आपसे कुछ बात करनी थी..

मंजुला : (मुस्कुराते) तुम हर बार भाभीमां क्यु बोलता हे..? अब तो मुजे मां कहेदे.. बेटे मे तेरी भाभीमां नही तेरी मां हु.. समजे..? बोल क्या बात करनी थी..? कुछ परेसानी हे क्या..?

लखन : (मुस्कुराते) सोरी मम्मी.. नही.. क्या हेनां.. वो राधुकी मम्मी केह रही थी.. उसे कुछ दिन अपने घर जाना हे.. तो मेने कहा मम्मी परमीशन देगी तो जाने दुगा.. इसीलीये आपको फोन कीया..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. पता हे मुजे.. सुन बेटा.. उन मां बेटीको जानेदे.. क्युकी उनकी मम्मीकी जान वही अटकी हे.. तु समज गयानां..? फीर राधु चाहे वहा रहे या अमारे घर.. तुजे कोइ फर्क नही पडेगा..

लखन : (मुस्कुराते) जी मम्मी.. समज गया.. ठीक हे.. मे कल उसे बात करलुगा.. ओर कहेगी तो उसे घर छोड दुगा.. मोम.. क्या कर रहे हे बढे भैया..? घरपे सब ठीक तो हेनां.. वो चंदा भाभीकी तबीयत..

मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. तेरे भैया भी ठीक हे.. ओर तेरी चंदा भाभी भी ठीक हे.. पहेले ये बता.. तेरी नइ बीवीके साथ कुछ आगे बढाकी नही..? बीटु.. लोहा गरम हे.. मारदे हथोडा.. क्यु इतना सरमा रहा हे..?

लखन : (मुस्कुराते) मोम.. आपको तो सब पता हे.. बस.. फीर भी अ‍ेक डर लग रहा हे.. ओर वैसे भी परसो उनका बथ्रडे हे.. तो उसे सरप्राइज देना चाहता हु.. ओर कुछ नही..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. समज गइ.. बीटु.. तुम डरो मत.. आगे बढ.. अब पुनो ओर सृतीको तुजे ही सम्हालना हे.. ओर सुन.. अब पुनो भी वहा आनेके लीये तरसने लगी हे.. वोभी जल्द वहा आना चाहती हे.. लेकीन मे चाहती हु.. जबतक पुनो वहा आये उनसे पहेले तुम मेरी नइ बहुसे अच्छेसे मीललो.. समजे..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) ठीक हे मोम.. ओर कुछ काम होतो कहीये..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. सुन.. तुम पुनोसे बात करलेना.. ओर वो जो कहे.. कल वो कार लेले.. कीतने दिन कारके बगैर रहेगा.. यहाके लीये काम आयेगी.. समजे..? कहोतो मे यहासे पैसा भेजदु..?

लखन : (मुस्कुराते) नही मोम.. हे मेरे पास..

मंजुला : अच्छा ठीक हे.. सुन.. तु आज ही पुनोसे बात करले.. चल रखती हु..

लखन : (मुस्कुराते) मोम.. लव यु.. बाय..

मंजुला : (मुस्कुराते) मेरा अच्छा बेटा.. लव यु टु बीटु.. बाय..
 
नीलम : (सामने देखकर मुस्कुराते) जीजु.. बडी मम्मीसे बात हो रही थी..?

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. मेरी मांसे.. वो मां हे मेरी.. नीलु.. तुम मुजे क्या बात करने वाली थी.. बता..

नीलम : (सरमाते धीरेसे खडी होते) जीजु.. यहा नही.. मेरे रुममे.. मे वही आपका इन्तजार कर रही हु.. आप बाते खतम करके आइअ‍े..

लखन : (नीलमके जाते ही पुनमको फोन लगाते) हेलो डार्लींग सीस्टर.. कैसी हो..? हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) अरे.. कैसे हो मेरे मजनु भाइ.. मजेमे..? आज चेट करनेके बजाय सीधा फोन ही करदीया..? जरुर कुछ काम होगा.. कहीये.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. बस.. आपकी याद आ रही थी.. ओर मम्मीने आपको फोन करनेको कहा था तो करदीया.. दीदी.. हमे कार लेनी हे.. तो मेने सोचा आपकी पसंदकी लेलु.. तो कहीयेना आपको कौनसी कार पसंद हे..? तो कल लेने जाना हे तो वोही ले लुगा..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. यहाकी तराह थोडी बडी लेना.. ताकी हम सभी सौतने अ‍ेक साथ बैठ सके.. आप चाहोतो इनोवा अच्छी हे.. आप वो ही लेलो.. ओर वो भी व्हाइट कलर.. या फीर मेटालीक चेरी रेड कलर.. दोनोमेसे आपको जो भी अच्छा लगे.. भाइ.. वो मेरा ड्रिम कलर हे.. फीर भी आप मेरी दुसरी सौतनसे पुछ लेना.. क्या इनके साथ आपकी लव स्टोरी कुछ आगे बढी की नही..?

लखन : (मुस्कुराते) नही.. बस.. धीरे धीरे आगे बढ रही हे.. अ‍ेक डरसा लग रहा हे.. पहेले भाभी थी तब बात कुछ ओर थी.. लेकीन अब तो वो भी हमारी बडी बहेन नीकली.. दीदी.. आप आजाओनां.. मे आपको बहुत मीस करता हु..

पुनम : भाइ.. आइ नो.. मे भी आपको बहुत बहुत मीस कर रही हु.. लेकीन फीकर मत करो.. मे तो अब सीर्फ आपकी हु.. सीर्फ वहा आनेकी देरी हे.. मुजे अपना वादा अच्छी तराह याद हे.. लेकीन अभी जो वहा हे उनकी फीकर करो.. भाइ.. मुजे आपसे अ‍ेक प्रोमीस चाहीये.. दोगे क्या..?

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. प्रोमीस क्या आप जान भी मांगलो.. मे कभी आपको मना कर सकता हु क्या..? बोलो.. क्या प्रोमीस चाहीये..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. तीन चार दिनमे मे ओर दयादीदी भावना दीदी.. सब वहा सादीकी खरीदी करने आ रहे हे.. तो आप वादा करोकी हमारे वहा आनेसे पहेले हमारी सौतनको मील लोगे.. आप समज गयेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. परसो उनका बर्थडे हे.. तो कल रात बारा बजेके बाद हम उनका बर्थडे सेलीब्रेट करेगे.. आप समज गइनां.. आपको तो सब पता हे.. वो क्या चाहती हे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. वो नीलुभी आपसे मीलना चाहती हे.. वो बीलकुल बदल चुकी हे.. मेरी उनसे काफी बाते हुइ.. वो इस बारेमे आपसे बात भी करना चाहती हे.. लेकीन आप भावनाओमे आकर कुछ वादा मत कर देना.. जो हो रहा हे होने दीजीये.. क्युकी खतरा अभी टला नही हे.. आगे तो हमे बहुत कुछ ओर भी करना हे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. इसीलीये तो मे नीलु ओर धिरेनकी सादी अभी करदेना चाहता हु.. ताकी नीलु धिरेनकी बीवी होजाये.. तभी तो आप भी मेरे साथ होगी.. तो आप मुजे गाइड करती जाना.. हम हर मुसीबतका सामना मीलकर करेगे.. दीदी.. क्या आज रातको मे आपको फोन करु..?

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) नही भाइ.. आज भावना दीदी ओर लता दीदी मेरे साथ ही सोती हे.. अगर बाथरुममे देर लगती हे.. तो कमीनी दोनो मुजे आपका नाम लेकर चीडाती हे.. तो मे ही आपको फोन करुगी.. वरना हम चेटपे तो बात करते ही रहेते हे.. भाइ.. आइ मीस यु.. मे जल्दसे जल्द आपके पास आना चाहती हु.. कुछ कीजीयेनां..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. तो फीर आजाओनां.. आप ही कहेती होनां.. सबरका फल मीठा होता हे.. तो जुदाइके बाद ही मीलनका मजा आता हे.. ओर जब हम मीलेगेनां.. तो उस रात थम जायेगी.. आप समज गइनां..?

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हमं.. मतलब मुजे पुरी रात जगानेका इरादा हे जनाबका.. मुजे पता हे आप मुजे सोने नही देगे.. ठीक हे.. मे भी उस रातका बेसब्रीसे इन्तजार करुगी.. भाइ.. जब हम भाइ बहेनका मीलन होगा.. तो देख लेना.. काम ओर रती दोनो अपने चरमो पे होगे.. जो मे अभी आपको बयान नही कर सकती..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. आपकी अ‍ेक पीक भेजोनां.. आज कोनसा कलर पहेना हे आपने..

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) पागल हो गये हो क्या..? अभी..? यार यहा सब लोग हे.. कुछ तो समजो..?

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) बु..च.. दीदी.. प्लीज.. अंदर जाकर लेलोनां.. मुजे आपका देखना हे..

पुनम : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) भाइ.. जीद मत करो.. मे यहा आ रही हुनां..? मेरा सबकुछ तो देख चुके हो.. आपको मेरी कीतनी पीक भेजी हे.. अभीभी जी नही भरा क्या.. बेसर्म लडका..

लखन : (जुठ नाराज होते) तो फीर ठीक हे.. मुजसे बात मत करना.. मे फोन रखता हु..

पुनम : (धीरेसे) यार अ‍ैसे नाराज मत हो.. ठीक हे.. सुनो.. आज आपका फेवरीट.. व्हाइट ट्रान्सफरंट कलर.. कुछ देरके बाद भेजती हु.. यार फीर मे भी नही रेह पाती.. आप देर रात फोन करना.. मे बाथरुममे चली जाउगी.. तब सबकुछ देख लेना जो देखना हो.. फीर देखते रहेना.. ओके..? चलो बाय..लगता हे भाभीमां मुजे ढुंढ रही हे.. मे आपसे बादमे बात करुगी..

लखन : (जटसे) अरे दीदी.. सुनो सुनो.. मे फ्रि होते ही देर रात फोन करुगा.. तो आप बाथरुममे चली जाना.. समज गइनां..?

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) भाइ.. आपने मुजे ये कैसी आदत डालदी.. फोन सेक्समे ही मुजे संतुस्ट कर देते हो.. पता नही हम मीलेगे तब क्या होगा.. ठीक हे.. मे टड्ढाइ करुगी.. आप मीस कोल देना.. बाय..

कहेते पुनमने फोन रखदीया.. तभी उनको ढुंढती हुइ मंजु वहा आ गइ.. ओर उसने पुनमको लखनके साथ बात करनेको बोल दीया.. तो पुनमने उसे बोल दीयाकी बात होचुकी हे.. तो इधर लखन भी फोन रखकर सभी दरवाजा लाइट बंध करके उपरकी ओर चला गया.. तो सृती लखनका इन्तजार करते बेठी थी.. जैसे ही लखन वहासे गुजरा उसने लखनको आवाज देकर अंदर बुलाया.. ओर बाथरुम जानेकी बात की....

कन्टीन्यु
 




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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २४५

कहेते पुनमने फोन रखदीया.. तभी उनको ढुंढती हुइ मंजु वहा आ गइ.. ओर उसने पुनमको लखनके साथ बात करनेको बोल दीया.. तो पुनमने उसे बोल दीयाकी बात होचुकी हे.. तो इधर लखन भी फोन रखकर सभी दरवाजा लाइट बंध करके उपरकी ओर चला गया.. तो सृती लखनका इन्तजार करते बेठी थी.. जैसे ही लखन वहासे गुजरा उसने लखनको आवाज देकर अंदर बुलाया.. ओर बाथरुम जानेकी बात की.... अब आगे

तो लखन सृतीको गोदमे उठाकर अंदर ले गया.. ओर सृतीको पीसाब करना था.. लेकीन आज सृतीने लखनको बहार जानेके लीये नही बोला.. ओर वो कामुक नजरोसे लखनकी ओर देखती रही.. जैसे ही लखन बहार जाने लगा.. सृतीने उनका हाथ पकडकर वही रोक लीया.. ओर सृती पीसाब करने लगी.. ओर लखनकी ओर देखते सरमाते हसती रही.. लखन भी मुस्कुराते दुसरी ओर देख लेता हे..

सृती : (मुस्कुराते) नजर क्यु फेरली..? कैसे मजनु हो आप..? आपकी मासुका आपसे मीलन करनेके लीये तरस रही हे.. ओर आप सरमा रहे हो..?

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. पता हे आप क्या चाहती हो.. लेकीन कुछ दिन इन्तजार नही कर सकती..? मेने कहाना वो आपके लीये सरप्राइज होगा.. आप मान क्यु नही रही..?

सृती : (सरमाते धीरेसे) लेकीन कब..? कितने दिन..? यहा आग लगी हुइ हे.. ओर आप टालते रहेते हो.. अरे बाबु वही इन्तजार तो नही होता.. मेरी अ‍ेक गलतीकी इतनी बढी सजा क्यु दे रहे हे आप..? कास.. उस दिन ही मेने थोडी हींमत करली होती.. ओर हम मील गये होते.. तो आज मुजे इतना तडपना नही पडता.. अब ले चलो मुजे बहार..

लखन : (गोदमे उठाकर होंठ चुमते) दीदी बस.. कुछ घंटे.. देखना मेरी सरप्राइज देखकर आप रो पडोगी..





सृती : (गाल चुमते) भाइ.. प्यारकी तडप क्या होती हे.. आज देख भी लीया.. कास.. पुनो दीदी आपके प्यारको समज पाती.. आप उनके लीये बहुत तडपे होनां..?

लखन : (बेडपे सुलाते) हंम.. ओर आज भी तडप रहा हु.. दीदी.. अभी उनसे बात हुइ.. कारके बारेमे.. तो वो इनोवा लेनेको केह रही थी.. व्हाइट या फीर मेटालीक चेरी रेड.. आप क्या कहेती हो..?

सृती : (खुस होते) वा..व.. इनोवा.. माइ डिड्ढम कार.. भाइ.. वो बहुत महेंगी आती हेनां..? दोनो कलर मस्त हे.. आपको जो पसंद हो वोही लेना..

लखन : (मुस्कुराते होंठ चुमते) कमसे कम.. मेरी होनेवाली दोनो बीवीओसे तो महेंगी नही हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते लखनके सीनेपे मुका मारते) क्या हम दोनो कारसे भी महेंगी हे..? अभी तो हमने खर्या करवाया ही कहा हे..?

लखन : (मुस्कुराते) तो फीर ये आपहीके लीये तो ले रहा हु.. वरना मेरे पास तो मेरी बाइक हेनां.. ठीक हे अब आप सोजाओ.. मे अभी रजीयाको यहा भेजता हु..

सृती : (मुस्कुराते) भाइ.. बेचारी कामसे थकी होगी.. उसे वही सोने दोनां.. अगर मुजे जरुरत पडी तो मे आपको फोन करके बुला लुगी..

लखन : (हसते धीरेसे) हंम.. ठीक हे.. लगता हे.. आज आपकी नीयत कुछ ठीक नही हे.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते) आप मेरे होने वाले पती हो.. तो फीर नीयत बीगड जाये भी तो क्या फर्क पडता हे.. वक्त आनेदो.. देखना मे इसका बदला जरुर लुगी.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते बेडसे खडे होते) अच्छा दीदी.. आप आराम करो मे नीलुसे बात करके आता हु..

सृती : (हाथ पकडते) सीर्फ बाते करोगे..? ओर कुछ नही..

लखन : (वापस बैठते आंखोमे देखते) नही.. सीर्फ बाते.. ज्वेलेसी फील हो रही हे..? वो मुजे आज कुछ कहेने वाली हे.. इस बारेमे हम कल बात करेगे..

सृती : (कंधेपे सर रखते) भाइ.. सच कहु..? अब बहोत ज्वेलेसी फील होती हे.. अ‍ैसा लगता हे आप सीर्फ मेरे हो.. कास.. पहेले मेने आपसे सादी करली होती..

लखन : (मुस्कुराते खडा होते) हंम.. तो फीर आपकी ओर सोतने हे वो कहा जायेगी..?

सृती : (मुस्कुराते) हंम.. आइ नो.. ठीक हे.. मे मेरी सरप्राइजका इन्तजार करुगी..

फीर लखन वहासे चला जाता हे.. ओर रजीयाके पास जाकर उसे देखता हे.. तो वो घोडे बेचकर गहेरी नींद सो रही थी.. तो लखन नीलमके रुममे चला जाता हे.. नीलम उनका ही इन्तजार करते जाग रही थी.. जैसे ही लखन अंदर आया ओर दरवाजा बंध कीया तो नीलम बेडसे उतर गइ.. ओर आज पहेली बार दोडकर लखनकी बाहोमे समा गइ.. तो लखनने उसे वही अपनी बाहोमे भर लीया..

तो नीलमने कसके लखनको बाहोमे भीच लीया.. ओर सरको लखनके सीनेमे छीपा लीया.. फीर कुछ देरके बाद नीलमने सर उठाके लखनकी आंखोमे देखा.. दोनो अ‍ेक दुसरेको देखते रहे.. आज नीलम बडी मासुम लग रही थी.. ओर पता ही नही चला कब दोनोके होंट मील गये.. लखन नीलमके बुब्सको थामते उनके होट चुमने लगा.. फीर लखनने नीलमको वही गोदमे उठा लीया ओर बेडकी ओर चल पडा..
 
लखन : (मुस्कुराते) क्या बात हे नीलु.. आज तो सामनेसे दोडकर आ गइ..?

नीलम : (सरमाते धीरे) जीजु.. आइ लव यु.. मुजे आपसे प्यार हो गया हे.. पता नही अब धिरेनका साथ अच्छा नही लगता..

लखन : (सामने देखते) नीलु.. अ‍ैसा क्यु बोल रही हो..? तुजे तो उनके साथ पुरी जींदगी काटनी हे..

नीलम : (आंख गीली करते) नही जीजु.. अब धिरेनके साथ सादी करना मेरी मजबुरी बन चुकी हे.. मेने आपके साथ जीदंगी भर साथ नीभानेका वादा कीया हे.. तो मेरी जींदगी युही गुजर जायेगी.. वरना मे धिरेनसे सादी नही करती.. ओर आपके साथ करलेती.. लेकीन अब मे चाहते हुअ‍े भी आपके साथ सादी नही करुगी..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भरते) बस.. रोना नही.. क्या मे वजह जान सकता हु..? तुम मेरे साथ सादी क्यु नही करेगी..? ओर तुमने धिरेनको चुन लीया..

नीलम : (आंख पोछते) हां जीजु.. आज इसीलीये तो आपको यहा बुलाया हे.. अगर मेने आपके साथ सादी करली.. तो आपके साथ गजब होजायेगा.. क्युकी कोइ हे जो आपके खानदानके साथ साजीस कर रहा हे..

लखन : (जानते भी अनजान बनते) कैसी साजीस..? कौन हे जो अ‍ैसी साजीस कर रहा हे..?

नीलम : (नजर जुकाते धीरेसे) मेरी मम्मी.. जीजु.. वो मेरी सादी आपके साथ करवाके आपकी आधी जायदाद हडपना चाहती हे.. अगर आप मुजसे सादी नही करते तो वो मेरा इस्तमाल करके मुजे आपसे प्रेगनेन्ट करवाना चाहती हे.. ताकी बडे जीजुको सादीके लीये मजबुर कर सके.. ओर मे आपकी कायदेसे बीवी होजाउ.. बादमे वो दोनो भाइओमे फुट पडावकर जायदादका बटवारा कर सके.. ताकी आपकी आधी जायदाद मेरी होजाये..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा..? इतना बडा प्लान..? लेकीन वो अ‍ैसा करना क्यु चाहती थी..? कोइ खास वजह..?

नीलम : (सर जुकाते) जीजु.. लडकीया चाहे अमीर हो या गरीब.. सबके सौक ओर सपने बहुत बडे होते हे.. इनमे भी ये गरीब घरकी लडकीया.. उनके सपने तो बहुत ज्यादा बडे होते हे.. उनको पैसे बहुत प्यारे लगते हे.. उनका सपना हमेसा अमीर घरमे सादी करना होता हे.. उनकी डीमांन्ड बहुत ज्यादा होती हे.. ओर मम्मीके साथ भी यही हुआ..

लखन : (सामने देखते) मतलब..?

नीलम : अ‍ेक तो उनके मायके वाले बहुत गरीब थे.. अ‍ेक अच्छे परीवारमे सादी हुइ तो पती सराबी नीकला.. जो उनकी ख्वाहीसोको पुरा नही करपाया.. ओर उपरसे उनको जो सुख चाहीयेथा वो नही दे पाया.. फीर मेरे पप्पा इनकी जींदगीमे आये.. जो उनकी हर जरुरतको पुरा करने लगे.. यहा तक उनकी सारीरीक जरुरतको भी पुरी करने लगे.. ओर नतीजा मेरा जन्म हुआ..

लखन : (सामने देखते) लगता हे तेरी मम्मीके बारेमे कुछ ज्यादा ही जानती हो..

नीलम : (फीकी मुस्कानसे) ओर नही तो क्या.. मम्मी समजती थी मे छोटी हु.. नादान हु.. जब भी पप्पा मीलने आते मुजे कीसीभी बहाने खेतोमे भेज देते.. ओर पीछेसे दोनो अपनी प्यास बुजाते.. मेने पीछेकी खीडकीसे कइ बार दोनोको फीजीकल होते देखा हे.. फीर उनसे सादी करली.. ओर यहा आकर देखा तो पापाके पास इतने पैसे नही हे.. ओर उनकी नजर आपपे पड गइ..

लखन : मतलब..?

नीलम : जीजु.. बुरा मत मानना.. पापासे आप लोग अमीर हे.. अच्छी खासी जायदाद हे.. सायद इसीलीये वो आपसे प्यार करबैठी.. ओर मेरी सादी आपसे करवाके अमीर बननेका सपना देखने लगी.. ओर इसी लालसाकी वजहसे वो साजीस कर बैठी..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. आइ थींक.. मेरे खयालसे वो सचमे मुजे प्यार करने लगी हे..

नीलम : (मुस्कुराते) हंम.. सायद.. क्युकी वो बहुत कामी ओरत हे.. ओर आजकल पापाके साथ भी उनके रीलेशन इतने अच्छे नही हे.. क्युकी पापाके भी कइ ओरतोके साथ चकर हे.. इस बातका माको पता चल गया.. इसीलीये तो उसने आपके साथ रीलेशन बनाया..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. तो फीर तुम मुजे ये सब क्यु बता रही हो..? तुम भी तो उनके साथ थी.. क्या इसीलीये तुमने मेरे साथ रीलेशन रखनेके लीये राजी थी..?

नीलम : (नजरे जुकाते) हां जीजु.. आइ अ‍ेम सोरी.. लेकीन यकीन मानीये.. तब मुजे नही पता थाकी मां मेरा इस्तमाल आपके खीलाफ कर रही हे.. दरसल जबसे मेने आपका वो देखा.. तबसे मे आपसे प्यार करने लगी थी.. जीजु.. मेरा यकीन मानीये.. इसमे मेरी कोइ गलती नही हे.. मां सीर्फ मेरा इस्तमाल करना चाहती थी.. ओर सचाइ ये हेकी मे आपसे प्यार करने लगी हु.. कसमसे.. वरना मे ये सब आपको क्यु बताती..?

लखन : (जोरोसे बाहोमे भरते) नीलु.. अब तो तुजे पता चल गयानां भाभीमा ओर पुनोदी सबकुछ जानलेती हे.. हमे ये बात पहेलेसे ही पता थी.. आज खुसी हुइ तुमने मुजे सब सचाइ बतादी.. आइ प्रोमीस मे तेरा साथ कभी नही छोडुगा.. लेकीन अ‍ेक अफसोस जरुर रहेगा.. की मे तुमसे सादी नही कर सकता..

नीलम : (सामने देखते धीरेसे) जीजु.. यही तो मा चाहती थीकी मे आपसे सादी करलु.. इसीलीये मेने सादीके लीये धिरेनको चुना हे.. वरना मे पुनो दीदीका घर क्यु बरबाद करती..? ओर धिरेनभी मुजसे प्यार करता हे.. मे कइ बार धिरेनके साथ सो चुकी हु.. मुजे पता हे वो सेक्सके मामलेमे बीलकुल अनाडी हे.. वो मुजे कभी संतुस्ट नही कर पाया.. तो पुनो दीदीको क्या खाक संतुस्ट करता होगा..? वैसे अच्छा हुआ पुनो दीदी उनसे अलग होगइ.. कमसे कम आपसे सादी करके वो खुस तो रहेगी..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. तेरी मम्मी भी मुजसे प्यार करने लगी हे.. मे उसे समजाउगा.. वो मान जायेगी.. उनसे नादानीमे गलत कदम उठालीया हे.. वो भी तेरे पापाकी वजहसे.. वरना पैसे कीसको नही चाहीये..? मेने तेरी मम्मीको भी कहा हे.. की तुम दोनोकी सभी जरुरत को मे पुरी करुगा.. तो फीर उनको ये सब करनेकी क्या जरुरत हे..?

नीलम : जीजु.. वहीतो..? आप सभी लोग कीतने अच्छे हे.. हो सके तो आप मम्मीको भी माफ करदेना.. वो पापासे प्यार ना मीलनेकी वजहसे बोखला गइ हे.. ओर आपको तो पता हे अ‍ेक कामी ओरतको सेक्सकी कीतनी जरुरत होती हे.. बस.. वही प्यार उनको पापासे नही मील रहा..

जीजु.. मम्मीका रीलेशन आपके साथ हो तो भी मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. बस.. आप मुजे खुस रखना.. मे वादा करती हु.. आपका साथ मे कभी नही छोडुगी.. चाहे मुजे आपकी रखैल बनके भी क्यु ना रहेना पडे.. वरना उस धिरेनमे मुजे अब कोइ इन्ट्रेस नही हे.. मे तो बस आपसे प्यार करती हु..

लखन : नही नीलु.. अब सादी तो तेरी धिरेनसे ही होगी.. लेकीन रखैल नही.. मेरी सीक्रेट बीवी कहेलायेगी.. तु वहा खुसी खुसी रहेना.. हम दोनो मीलते रहेगे.. मे तेरा पुरा खयाल रखुगा.. आज तुमने मुजे सब सचाइ बतादी.. मेरा दिल जीत लीया तुमने..

नीलम : (लखनके सीनेपे सर रखते) जीजु.. आइ लव यु.. अब आप जब चाहो हम मील लेगे.. मे आपको प्यार करनेसे कभी मना नही करुगी.. आजसे मनसे मेने आपको पतीके रुपमे स्वीकार करलीया हे.. ओर जब हम मीलेगे तब तनसे भी आपकी होजाउगी..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) बेचारा धीरेन.. उनकी दोनो बीवीया मेरी होगइ.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. पता हे..? आइ अ‍ेम वर्जीन..

लखन : (चोंकते धीरेसे) व्होट..? लेकीन कैसे..? तुम दोनो तो कइ बार मीले हो..

नीलम : (मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. लेकीन उनका इतनासा हे.. अंदर जाता हेकी नही पता भी नही चलता.. पहेली बार हम मीले थे.. उतना दर्द नही हुआ जो अ‍ेक लडकीको पहेली बारमे होता हे.. सायद पुनोदी भी..

लखन : (मनमे खुस होते) क्या..? इतना छोटा हे उनका..?

नीलम : (मुस्कुराते होंठ चुमते) छोडो उस नामर्दको.. आजसे ये नीलम आपकी होगइ.. मुजसे प्यार करो..





कहेते नीलम लखनके होठोको चुमने लगी.. ओर दोनो ही प्यार करते बहेकने लगे.. लखनने नीलमका टोप नीकाल दीया.. तो नीलमके संतरे जैसे बुब्स उछलके बहार आगये.. लखनने सीधा वहा मुह लगा दीया ओर नीलमके बुब्सको चुमने लगा.. तो नीलम उतेजीत होते लखनका सर सहेलाते आंखोकी पुतलीया पलटाने लगी.. ओर मदहोसीमे लखनके सरको अपने बुब्सपे दबाने लगी..
 
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