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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २५१
मंजुको लखन ओर सृतीके बारेमे भी पता चल गया था.. की दोनो मील गये हे.. ये बात जानकर मंजु बहुत खुस थी.. बस.. अब उनको सीर्फ चंदा ओर भावनाको लखनसे मीलवानेकी चीन्ता थी.. तो दुसरी ओर वो लता ओर वंदनाकी सादी भी जल्द देवायतके साथ करवाना चाहती थी.. ताकी वो लताको प्रेगनेन्ट कर सके.. ओर वंदना तो अैसे ही देवायतसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. ओर उसने लखनको फोन करदीया.... अब आगे
लखन : (फोन उठाते ही) हां मम्मी.. कहीये मेरे लीये क्या हुकम हे..?
मंजुला : (मुस्कुराते) लखन बेटा.. सुन.. कल सुबह तुम अपनी नइ कार लेकर इधर आना.. ओर पुनो भावु ओर दयाको वहा लेजाना.. ताकी तीनो सादीकी खरीदी कर सके.. फीर दो तीन दिनमे सब खरीदी होजाये तो तीनोको यहा छोडदेना.. अेक हप्तेमे मे तुम दोनो भाइ बहेनकी सादी करदेना चाहती हु..
लखन : (मनमे खुस होते) जी मम्मी.. मे सुबह ही पहोंच जाउगा.. ओर कुछ..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. कल मील लीया मेरी नइ बहुको..? सुन.. जब पुनो वहा आजाये तो तुम सब लोग हमारे मंदिरमे जाकर सादी कर लेना.. अब सृतीकी जीम्वेवारी तेरी हे..
लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) मोम.. वो आपकी बेटी भी तो हे.. क्या उनको बथ्रडे वीस कीया..?
मंजुला : (मुस्कुराते) नही.. अभीतक तो नही कीया.. लेकीन तुमसे बात करके उसे भी फोन करलुगी.. ओर सुन.. उनके लीयेभी कुछ लेलेना.. क्या राधु अपने घरपे चली गइ..?
लखन : (मुस्कुराते) हां मम्मी.. कल रात ही उन दोनोको छोडके आया.. मोम.. आपने उसे जानेकी परमीशन क्युदी..?
मंजुला : बेटा.. कुछ बाते हे जो मे तुजे नही बता सकती.. सीर्फ इतना कहेती हु.. उनकी मम्मीकी जान उस घरपे अटकी हुइ हे.. तो उनको वहा भेजना जरुरी था.. तु समज गयानां..?
लखन : (थोडा सीरीयस होते) हां मम्मी.. समज गया.. मोम.. उनके पास कीतना वक्त हे..?
मंजुला : (धीरेसे) बेटा कीसीको कहेना नही.. अभी तो कोइ दीकत नही लेकीन उनके पास बहुत कम वक्त हे.. तुम उनकी फीकर मत कर.. वो सब पुनो वहा आयेगी तो देख लेगी.. क्युकी उनको भी बहुत कुछ पता हे.. वो पुनमको आखरी बार मीलेगी.. ठीक हे..? चल मे फोन रखती हु.. सुबह जल्दी आजाना..
लखन : (मुस्कुराते) जी मम्मी..
आज लखनसे बात करके मंजु बहुत खुस होगइ.. क्युकी अब लखन उनको मम्मी कहेने लगा था.. तो दुसरी ओर लखन ओर सृती भी उनको अपनी मां मानने लगे थे.. फीर मंजुने सृतीको भी फोन करदीया ओर उनको जन्म दिनकी बधाइ दी.. तो सृती बहुत खुस होगइ.. फीर मंजुने उसे उनकी सुहागरातके बारेमे पुछा.. तो सृती बहुत सरमा गइ.. ओर वो भी मंजुको जी मम्मी.. कहेते बाते करने लगी..
मंजुला : (फोनपे हसते) क्यु कुती..? हेपी बर्थ डे.. तुजे मेरे बेटेसे बर्थडे गीफ्ट मील गइ..? हें..हें..हें..
सृती : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) हां मोम.. अब तो गालीया मत दीजीये.. मे भी आपकी बेटी हु..
मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. सुन.. वो बेटा हे मेरा.. तुम सीर्फ मेरी बेटी ही नही.. मेरी बहु भी हो.. अब तुजे पुरी जींदगी अपने भाइके साथ ही गुजारनी हे.. जबतक मेरा विजय बडा नही हो जाता.. तबतक तो बहुत कुछ बदल चुका होगा..
सृती : (मुस्कुराते) येस मोम.. मे समज गइ.. मोम.. आप पुनोदीको यहा कब भेज रही हो..?
मंजुला : (मुस्कुराते) कल.. अभी मेने लखन बेटेसे बात करली हे.. वो सुबह पुनोको लेने आयेगा.. फीर तुम उनसे ही सब जान लेना.. क्युकी मेने पुनो बेटीको सब कुछ बता दीया हे.. ओके.. चल रखती हु.. बाय..
सृती : (सरमाते हसते) बाय मोम.. लव यु..
इधर सृतीसे बात करके मंजुने पुनमको कल सहेर जानेकी तैयारीया करनेको केह दिया.. तो पुनमकी खुसीका कोइ ठीकाना नही था.. ओर वो अपने कपडे पेक करने लगी.. तो इधर आज सारा दिन सृती नीचे ही बैठी रही.. ओर बीच बीचमे वोकर लेकर धीरे धीरे चलते रजीयाके पास चली जाती.. अैसे ही दिन बीत गया.. ओर साम होते ही लखन भी घरपे आगया.. ओर सृतीके पास आकर बैठ गया..
अध्याय - २५१
मंजुको लखन ओर सृतीके बारेमे भी पता चल गया था.. की दोनो मील गये हे.. ये बात जानकर मंजु बहुत खुस थी.. बस.. अब उनको सीर्फ चंदा ओर भावनाको लखनसे मीलवानेकी चीन्ता थी.. तो दुसरी ओर वो लता ओर वंदनाकी सादी भी जल्द देवायतके साथ करवाना चाहती थी.. ताकी वो लताको प्रेगनेन्ट कर सके.. ओर वंदना तो अैसे ही देवायतसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. ओर उसने लखनको फोन करदीया.... अब आगे
लखन : (फोन उठाते ही) हां मम्मी.. कहीये मेरे लीये क्या हुकम हे..?
मंजुला : (मुस्कुराते) लखन बेटा.. सुन.. कल सुबह तुम अपनी नइ कार लेकर इधर आना.. ओर पुनो भावु ओर दयाको वहा लेजाना.. ताकी तीनो सादीकी खरीदी कर सके.. फीर दो तीन दिनमे सब खरीदी होजाये तो तीनोको यहा छोडदेना.. अेक हप्तेमे मे तुम दोनो भाइ बहेनकी सादी करदेना चाहती हु..
लखन : (मनमे खुस होते) जी मम्मी.. मे सुबह ही पहोंच जाउगा.. ओर कुछ..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. कल मील लीया मेरी नइ बहुको..? सुन.. जब पुनो वहा आजाये तो तुम सब लोग हमारे मंदिरमे जाकर सादी कर लेना.. अब सृतीकी जीम्वेवारी तेरी हे..
लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) मोम.. वो आपकी बेटी भी तो हे.. क्या उनको बथ्रडे वीस कीया..?
मंजुला : (मुस्कुराते) नही.. अभीतक तो नही कीया.. लेकीन तुमसे बात करके उसे भी फोन करलुगी.. ओर सुन.. उनके लीयेभी कुछ लेलेना.. क्या राधु अपने घरपे चली गइ..?
लखन : (मुस्कुराते) हां मम्मी.. कल रात ही उन दोनोको छोडके आया.. मोम.. आपने उसे जानेकी परमीशन क्युदी..?
मंजुला : बेटा.. कुछ बाते हे जो मे तुजे नही बता सकती.. सीर्फ इतना कहेती हु.. उनकी मम्मीकी जान उस घरपे अटकी हुइ हे.. तो उनको वहा भेजना जरुरी था.. तु समज गयानां..?
लखन : (थोडा सीरीयस होते) हां मम्मी.. समज गया.. मोम.. उनके पास कीतना वक्त हे..?
मंजुला : (धीरेसे) बेटा कीसीको कहेना नही.. अभी तो कोइ दीकत नही लेकीन उनके पास बहुत कम वक्त हे.. तुम उनकी फीकर मत कर.. वो सब पुनो वहा आयेगी तो देख लेगी.. क्युकी उनको भी बहुत कुछ पता हे.. वो पुनमको आखरी बार मीलेगी.. ठीक हे..? चल मे फोन रखती हु.. सुबह जल्दी आजाना..
लखन : (मुस्कुराते) जी मम्मी..
आज लखनसे बात करके मंजु बहुत खुस होगइ.. क्युकी अब लखन उनको मम्मी कहेने लगा था.. तो दुसरी ओर लखन ओर सृती भी उनको अपनी मां मानने लगे थे.. फीर मंजुने सृतीको भी फोन करदीया ओर उनको जन्म दिनकी बधाइ दी.. तो सृती बहुत खुस होगइ.. फीर मंजुने उसे उनकी सुहागरातके बारेमे पुछा.. तो सृती बहुत सरमा गइ.. ओर वो भी मंजुको जी मम्मी.. कहेते बाते करने लगी..
मंजुला : (फोनपे हसते) क्यु कुती..? हेपी बर्थ डे.. तुजे मेरे बेटेसे बर्थडे गीफ्ट मील गइ..? हें..हें..हें..
सृती : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) हां मोम.. अब तो गालीया मत दीजीये.. मे भी आपकी बेटी हु..
मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. सुन.. वो बेटा हे मेरा.. तुम सीर्फ मेरी बेटी ही नही.. मेरी बहु भी हो.. अब तुजे पुरी जींदगी अपने भाइके साथ ही गुजारनी हे.. जबतक मेरा विजय बडा नही हो जाता.. तबतक तो बहुत कुछ बदल चुका होगा..
सृती : (मुस्कुराते) येस मोम.. मे समज गइ.. मोम.. आप पुनोदीको यहा कब भेज रही हो..?
मंजुला : (मुस्कुराते) कल.. अभी मेने लखन बेटेसे बात करली हे.. वो सुबह पुनोको लेने आयेगा.. फीर तुम उनसे ही सब जान लेना.. क्युकी मेने पुनो बेटीको सब कुछ बता दीया हे.. ओके.. चल रखती हु.. बाय..
सृती : (सरमाते हसते) बाय मोम.. लव यु..
इधर सृतीसे बात करके मंजुने पुनमको कल सहेर जानेकी तैयारीया करनेको केह दिया.. तो पुनमकी खुसीका कोइ ठीकाना नही था.. ओर वो अपने कपडे पेक करने लगी.. तो इधर आज सारा दिन सृती नीचे ही बैठी रही.. ओर बीच बीचमे वोकर लेकर धीरे धीरे चलते रजीयाके पास चली जाती.. अैसे ही दिन बीत गया.. ओर साम होते ही लखन भी घरपे आगया.. ओर सृतीके पास आकर बैठ गया..







