Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 34 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

फीर उसने श्रीधरकोभी जगा दीया ओर वो तैयार होने लगी.. तब थोडीही देरमे दोनो ही कंपलीट हो गये.. ओर दोनो रुम बंध करके मेइन गेइटको ताला लगाकर बाइकपे बैठ गये..

श्रीधर : (मुस्कुराते) मोम.. कहो.. अब कीधर जाना हे.. जहा आप कहे मे उधर लेलु..

ब्रीन्दा : (सरमाकर मुस्कुराते पीछे बैठते) अरे.. मुजे थोडीना पता हे.. तु अपनी सपनोकी रानीको घुमाने लेजा रहा हे.. तो तुही डीसाइड कर.. मुजे क्या पुछता हे.. जीधर मन करे वहा लेले.. मुजेतो सीर्फ पीछे ही बेठना हे..

श्रीधर : (मनमे खुस होते हसते) देखना.. फीर वहा जाकर आप मुकर मत जाना.. हें..हें..हें..

श्रीधरने सबकुछ पहेलेसे ही तैय करके रखाथा.. उसने बाइक सीधेही अ‍ेक रेस्टोरन्टपे लेली.. वहा दोनोने चाइ नास्ता कीया.. फीर बील पे करके दोनो वहासे नीकल गये.. ओर अ‍ेक थीअ‍ेटरपे आगये.. वहा अ‍ेक बहुतही रोमांटीक फील्म चल रहीथी.. तब ब्रीन्दा सबकुछ समज गइ.. ओर दुसरी ओर मुह करके सरमाकर मुस्कुराने लगी.. दोनोही बाइक पार्क करके टीकीट वीन्डोके पास आगये..

तो श्रीधरने ब्रीन्दाको थोडी दुर खडी रखते दो कोर्नरकी टीकीट लेली.. आज ब्रीन्दा बहुत खुस हो रहीथी.. वो अपने पतीके अलावा कइ बरसोके बाद आज वो अपने बेटेके साथ फील्म देखने आइ थी.. भलेही श्रीधर उनका बेटा हो.. लेकीन थातो अ‍ेक मर्द.. जो उसे बहुत प्यार करता था.. ओर उनका जींदगीभर साथ नीभाना चाहथा था.. उनको पताथा की अंदर श्रीधर उनके साथ कोइना कोइ सरारत जरुर करेगा..

तो ब्रीन्दाभी मानसीक रुपसे श्रीधरका साथ देनेके लीये तैयार होगइ.. जब अगला सो खत्म हुआ तो श्रीधरने ब्रीन्दाका हाथ थामलीया.. ओर प्रेमीकी भांती उसे हाथ पकडकर अंदर चला गया.. तो थीअ‍ेटरमे भी काफी अंधेरा था.. तो ब्रीन्दाने खुद दुसरे हाथसे श्रीधरका हाथ थामलीया ओर उनके पीछे पीछे चली गइ.. दोनोही अंदर जाकर अपनी जगाहपे बैठ गये.. तो कोर्नरकी सीट देखतेही ब्रीन्दा बहुत कुछ समज गइ..

ओर उनके दिलकी धडकन थोडी तेज होगइ.. जैसेही सभी लाइटे बंध हुइ.. तो कुछही देरमे फील्म सुरु होगइ.. श्रीधर तो सीरीयसली फील्म देख रहाथा.. लेकीन ब्रीन्दाका मन बार बार श्रीधरकी ओर जा रहाथा.. जैसे वो श्रीधरकी सरारतके इन्तजारमे हो.. तभी अ‍ेक बहुतही रोमांटीक सीन आगया.. ओर श्रीधरने धीरेसे अपना हाथ ब्रीन्दाके हाथपे रख दीया.. तब ब्रीन्दाके के तनमे अ‍ेक बीजलीसी लहेर दोड गइ....





ओर उसने धीरेसे अपना हाथ खीचकर हटानेकी कोसीस की.. तब श्रीधरने कसके उनका हाथ उंगलीयो मे उंगलीया फसाकर थामलीया.. तब ब्रीन्दा सरसे पांव तक हील गइ.. उनके दिलकी धरडकन ओर बढ गइ.. ओर वो कोइ रीअ‍ेक्शन दीये बगैर अ‍ैसेही बैठी रही.. तो श्रीधर धीरे धीरे उंगलीयोमे कसाव बढाने लगा.. जब ब्रीन्दाने कोइ रीअ‍ेक्शन नही दीया.. तो श्रीधरने हाथ छोड दीया.. तो ब्रीन्दाने टेडी नजरोसे श्रीधरकी ओर देखलीया.. वो थोडा नीरास हो चुकाथा.. तो श्रीधरको अ‍ैसे नीराश देखकर ब्रीन्दाकोभी अच्छा नही लगा..

तभी अचानक ब्रीन्दाको पीछेसे अपने कंधेपे श्रीधरका हाथ महेसुस हुआ.. तो वो बहुतही सरमाइ.. तब कुछही देरमे श्रीधरने ब्रीन्दाको कंधेसे पकडकर अपनी ओर खीच लीया.. ओर अपने कंधेके साथ सटालीया.. तो ब्रीन्दाने भी सरम त्यागकर श्रीधरके कंधेपे सर रखदीया.. तभी श्रीधर अपना दुसरा हाथ उनके उरोजोकी ओर लेगया.. ओर उसे टच करने लगा.. तो ब्रीन्दा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर उसने श्रीधरकी ओर देखा.. लेकीन उनको क्या पता श्रीधर पहेलेसे ही सब तैयारीया करके बैठाथा..

जैसेही ब्रीन्दाने श्रीधरकी ओर देखा श्रीधरने सीधाही अपने होठ ब्रीन्दाके होठोपे रख दीया.. ओर चुमने लगा.. तब ब्रीन्दा कांपने लगी.. उनके तनपे अ‍ेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. श्रीधरकी हरकत उनको अच्छी लगने लगी.. वो मनसे चाहती थीकी श्रीधर उसे अभीके अभी पुरी तराह मसलदे.. ओर सारी मर्यादा पार करले.. लेकीन फीरभी वो श्रीधरकी मां थी.. तो उसने अ‍ेक बार श्रीधरको रोकनेकी नाकाम कोसीस की.. ओर धीरेसे कहा..

ब्रीन्दा : (धीरेसे कानमे) बेटा.. क्या कर रहा हे..? मे मां हु तेरी..

श्रीधर : (बीन्दास होठोको चुमते) नही मोम.. मेरी मां कोतो मे घरपे पापाके पास छोडकर आया हु.. अभी इस वक्त जो मेरे साथ हे वो मेरी सपनोकी रानी हे.. जो मे सारी जींदगी उनके साथ बीताने वाला हु.. तो मे उनके साथ कुछभी कर सकता हु..

ब्रीन्दा : (सरमाते मुस्कुराते) तोफीर अ‍ेक बार फीर सोचले.. इस सपनोकी रानीको तुजे जींदगीभर सम्हालना पडेगा.. इनकी हर जरुरतको तुजे पुरी करने पडेगी.. क्युकी इस रानी बहुतही महेंगी हे.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (उनकी ओर देखते मुस्कुराकर धीरेसे गाल चुमते) मोम.. मेने सब सोच लीया हे.. मे तैयार हु.. इसीलीये तो मेने आपसे कहाथा की मे सादी नही करुगा.. क्युकी मुजे मेरी रानी मील गइ हे.. अब मुजे सादीकी जरुरत नही हे.. अगर मेरी रानी चाहेतो मे उनसे सादी कर लुगा..

ब्रीन्दा : (जोरोसे बाहोमे कसते) बीटु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मेभी तुजे बहुत चाहती हु.. मुजे तेरा प्यार कबुल हे.. आजसे ये ब्रीन्दा तेरी सपनोकी रानी होगइ..

ओर आखीर ब्रीन्दाने श्रीधरका प्यार कबुल करलीया.. तो श्रीधर बहुत खुस होगया.. जैसे उनको दुनीयाकी सारी खुसीया मील गइ.. अब श्रीधरने बीना डर ब्रीन्दाके बुब्सको अपने हाथोमे थामलीया.. तो ब्रीन्दा श्रीधरकी बाहोमे चीपक गइ.. तब कुछही देरमे दोनोके होठ अ‍ेक बार फीर मील गये.. ओर आजु बाजु सबको भुलकर अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे.. श्रीधर ओर ब्रीन्दा दोनोही अ‍ेक दुसरेकी जीभसे पेच लडाते मदहोस होने लगे.. वो सबकुछ भुलकर प्यारके आगोसमे चले गये..

दोनोही फील्म देखना छोडके अ‍ेक दुसरेके होठोको चुम रहेथे तो श्रीधर भी होठोको चुमते ब्रीन्दाके बुब्सको मसलते उनके साथ खेल रहाथा.. ओर खेलते खेलते अपना हाथ नीचेकी ओर लेगया.. तब ब्रीन्दा बहुतही कामातुर हो चुकीथी.. ओर श्रीधरने सीधेही उनकी चुतको सारीके उपरसेही दबोचली.. ओर सहेलाने लगा.. तो ब्रीन्दा उछल पडी.. वो बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर अचानक खडी होकर बहारकी ओर जाने लगी..

तो श्रीधरभी खडा होगया.. ओर वोभी ब्रीन्दाके पीछे चला गया.. उनको समजमे ही नही आयाकी अचानक ब्रीन्दाको क्या होगया.. दरसल श्रीधर उनको कबसे छेड रहाथा.. तो ब्रीन्दा पीछले दो सालसे प्यासी थी.. ओर आज श्रीधरने उनके उरोजोके साथ खेलकर उसे बहुत उतेजीत करदीयाथा.. ओर श्रीधरने अचानक उनकी चुतपे हमला करदीया.. तो ब्रीन्दा बरदास्त नही करपाइ.. ओर उनकी चुतसे फवारा नीकल गया..

उनकी पुरी पेन्टी गीली होचुकी थी.. तो वो जटसे बाथरुमकी ओर चली गइ.. तो पीछे श्रीधरभी उनको आते हुअ‍े दीखा.. ओर वो सरमाकर अंदर चली गइ.. फीर फ्रेस होकर चुतको पानीसे साफ करके पेन्टीको नीकाल देती हे.. ओर जैसेही बाथरुमसे बहार नीकलनेके लीये घुमी.. उसे सामने श्रीधर खडा नजर आया.. ओर वो दोडकर उनकी बाहोमे समा गइ.. ओर श्रीधरको पागलोकी तराह चुमने लगी..





ब्रीन्दा : (मदहोसीमे लडखडाती आवाजमे) बीटु मेरे राजा.. प्लीज.. मुजे यहासे ले चलो.. नही देखनी फील्म..

तो श्रीधरभी सबकुछ समज गया.. ओर वो ब्रीन्दाको लेकर वहासे नीकल गया.. दोनोही अ‍ेक सोपींग मोलपे चले गये.. तो वहा ब्रीन्दाने श्रीधरके लीये.. तो श्रीधरने ब्रीन्दाके लीये काफी खरीदारी करली.. दोनोही अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडकर काफी देर प्यारकी बाते करते घुमते रहे.. फीर श्रीधरने बाइक अ‍ेक होटेलमे लेली.. वहा दोनोने डीनर कीया.. तब ब्रीन्दा श्रीधरके साथ काफी खुल चुकीथी.. ओर आखीर दोनो बंगेलेपे आगये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १६५

तो श्रीधरभी सबकुछ समज गया.. ओर वो ब्रीन्दाको लेकर वहासे नीकल गया.. दोनोही अ‍ेक सोपींग मोलपे चले गये.. तो वहा ब्रीन्दाने श्रीधरके लीये.. तो श्रीधरने ब्रीन्दाके लीये काफी खरीदारी करली.. दोनोही अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडकर काफी देर प्यारकी बाते करते घुमते रहे.. फीर श्रीधरने बाइक अ‍ेक होटेलमे लेली.. वहा दोनोने डीनर कीया.. तब ब्रीन्दा श्रीधरके साथ काफी खुल चुकीथी.. ओर आखीर दोनो बंगेलेपे आगये....अब आगे

दोनोके मनमे आज रातको लेकर विचारोका घमासान युध्ध चल रहाथा.. ब्रीन्दा सोचते सोचते बहुतही रोमांचीत हो रहीथी.. उसे अब पका यकीन होगया था.. की आज रात सबकुछ होगा.. आज वो अपने बेटेको रोक नही पायेगी.. ओर वो बेटेके साथ मीलनके लीये मानसीक रुपसे तैयार होने लगी.. उनकी चुत लगातार गीली हो रहीथी.. उनके दोनो उरोजो तनके सख्त हो चुके थे..

तो दुसरी ओर श्रीधरके मनमे भी ब्रीन्दाको लेकर भविस्यके बारेमे सोचते बहुत कुछ प्लान चल रहाथा.. वो कीसीभी हालमे ब्रीन्दाको पाना चाहता था ओर उनके साथ मीलन करना चाहता था.. जो आज उसे मौका मील गया.. वो भी जल्दसे जल्द अपनी मां ब्रीन्दाके साथ मीलन करनेके लीये बेकरार हो रहाथा.. ओर दोनो मां बेटे अ‍ेक नये नये प्रेमीकी तराह अ‍ेक दुसरेसे सरमा रहेथे..दोनो सब दरवाजा बंध करके बेडरुममे आगये..





आतेही श्रीधरने ब्रीन्दाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा.. ब्रीन्दातो पहेलेसेही मदहोसीमे थी.. क्युकी उसे दो सालोके बाद ये प्यार नसीब हुआ था.. वोभी जल्दसे लज्द अपनी सारी हदे पार करना चाहती थी.. लेकीन इसके लीये पहेलतो श्रीधरको ही करनी थी.. यही सोचते वो श्रीधरको सबकुछ करने दे रहीथी.. ओर श्रीधरने उसे अपनी गोदमे उठालीया ओर बेडकी ओर चला गया..

ब्रीन्दा : (सर्मसार होते धीरेसे) बीटु.. प्लीज.. मे पहेले चेन्ज करलु..? तुमभी करलो.. फीर कोइ जंजट नही..

श्रीधर : (कामुक आवाजमे आंखोमे देखते) नही मोम.. आज सबकुछ मे करुगा.. आज मुजे अपनी ड्रीमर्गके साथ मीलन करना हे.. मोम.. आज मे पहेली बार कीसी लडकीके साथ मीलन करने जा रहा हु.. आइ अ‍ेम वर्जीन.. मानलो आज मेरी सुहागरात हे.. वोभी मेरी सपनोकी रानीके साथ.. तो मे अपने हाथोसे सबकुछ करना चाहता हु.. आपके कपडे मेही नीकालुगा..

ब्रीन्दा : (जोरोसे गले लगते) बीटु.. क्या इतना अपनी मोमको चाहता हे..? मुजेतो पता ही नही थाकी मेरा बेटा मुजसे इतना प्यार करता हे.. चल.. आजा.. बीटु.. अब ये तेरी गर्लफ्रेन्ड सीर्फ दो दिनके लीये नही हे.. मे आजसे हमेसा हमेसाके लीये तेरी सपनोकी रानी होगइ.. मे तुजे अपने पतीके रुपमे स्वीकार कर रही हु.. आजसे सीर्फ तुही मेरा पती होगा.. ओर कोइ नही..

श्रीधर : (सरमाते धीरेसे) मोम.. आजसे मेभी आपको अपनी पत्नीके रुपमे स्वीकार करता हु.. आजसे आपकी सारी जीम्वेवारी मेरी.. लेकीन मोम.. वो.. पा..पा..

ब्रीन्दा : (गाल चुमते) बीटु.. भुलजा उसे.. पीछले दो सालसे हमारे बीच सबकुछ खतम हो गया हे.. मुजे अ‍ेक साथीकी सख्त जरुरत थी.. जो आज मुजे मील गया हे.. बीटु.. आइ लव यु..

श्रीधर : (मुस्कुराते) मोम.. आइ लव यु टु.. मे आपसे बहुत प्यार करता हु..

ओर श्रीधरने ब्रीन्दाको बेडपे बीठा दीया.. तो ब्रीन्दाने भी मुस्कुराते श्रीधरको हाथ पकडके बेडपे खीच लीया.. तो श्रीधर सीधेही ब्रीन्दाके उपर गीर गया.. ओर ब्रीन्दाने श्रीधरको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. तब पताही नही चलाकी कब दोनोके होठ मील गये.. दोनोही अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखते अ‍ेक दुसरेके मुहके सरको पीने लगे.. दोनोकी जीभ आपसमे पेच लडाते अ‍ेक दुसरेके मुहमे घुसनेकी कोसीस कर रहीथी..





दोनोही प्यारकी आगोसमे गोते लगाने लगे.. ब्रीन्दाको पता ही नही चलाकी श्रीधरने कब खुदके ओर ब्रीन्दाके अ‍ेक अ‍ेक करके सब कपडे नीकाल दीये.. श्रीधरने आज पहेली बार अपनी मांक कठोर गोरे उरोजोके दर्शन कीये.. ओर उनके साथ खेलते उनको चुमने लगा.. तब ब्रीन्दा बहुतही उतेजीत होगइ.. ओर श्रीधरने ब्रीन्दाके बुब्सको चुमते धीरेसे हाथ नीचे लेजाकर उनकी पेन्टीको उंगली फसाकर खीचकर नीकालदी.

श्रीधर ब्रीन्दाके तनको चुमते चुमते नीचे सरकने लगा.. ओर ब्रीन्दाके पैरोके बीच आ गया.. तो ब्रीन्दाने अपने दोनो पैर फैला दीये.. तब श्रीधरने पहेली बार अपने जन्म स्थलके दर्शन कीया.. यानीकी ब्रीन्दाकी गुलाबी चुतका दिदार कीया.. वो उसे देखकर पागल होने लगा.. ब्रीन्दाकी चुत अ‍ेकदम कसी हुइ कीसी कुआरी लडकी जैसी थी.. ओर श्रीधरने उतेजीत होते अपनी चडी नीकालदी.. तो उनका तगडा लंड हवामे लहेराते जटके मारने लगा..





तो ब्रीन्दा भी श्रीधरके लंडको देखते पागल होने लगी.. लंडको देखतेही उनकी आंखोमे चमक आगइ.. क्युकी श्रीधरका लंड उनके पापासे थोडा बडा ओर मोटा था.. ओर श्रीधरको हाथ पकडकर बेडपे लेटते अपने उपर खीचने लगी.. तो श्रीधरभी ब्रीन्दाका उतावला पन देखकर समज गयाकी उनकी मां कीतने दिनोसे प्यासी होगी.. ओर श्रीधर उनके होठोके साथ उनके बुब्सको भी चुमने लगा..





ब्रीन्दा अब पुरी तराह मदहोस होते काम वासनामे जलने लगी.. वो आंधी आंख चडाते श्रीधरके बालोको सहेलाने लगी.. ओर श्रीधर चुमते चुमते वापस नीचेकी ओर सरकने लगा.. तब ब्रीन्दा बीन पानी मछलीकी तराह मचलते अपनी कमरको आडी टेडी करने लगी.. ओर आखीर श्रीधर उनकी चुत तक पहोंचही गया.. ओर ब्रीन्दाकी चुतपे मुह लगाते श्रीधरने चुतपे धाबा बोल दीया.. ओर चुमने लगा.. तब ब्रीन्दा अपना सब होस गवा चुकी..





देखतेही देखते प्यारका तुफान भवंडरमे तबदील होगया ओर तबाही मचाने लगा.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके अंदर समा जानेकी जल्दी करने लगे.. श्रीधर बडेही बेहरेहमीसे ब्रीन्दाकी चुतके दानेको खरोद रहाथा.. तो ब्रीन्दाको बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. ओर वो अचानक बेडपे बैठ गइ.. ओर श्रीधरके बालोको खीचकर अपने उपर चडाने लगी.. आज श्रीधरने वाकइ ब्रीन्दाको पागल करदीया था..

अ‍ैसा प्यार जो उसे अपने पती जीतुलालसे भी कभी नही मीलाथा.. जैसेही श्रीधर ब्रीन्दाके उपर आगया तो ब्रीन्दाने हाथ नीचे लेजाकर श्रीधरके लंडको अपनी मुठीमे पकड लीया.. ओर सहेलाते सहेलाते अपनी चुतपे रगडने लगी.. तब श्रीधरकोभी अपने लंडपे ब्रीन्दाके कामरसकी गर्मी महेसुस होने लगी.. तो उनका लंड तनके ओर सख्त होगया ओर जटके मारने लगा.. आखीर ब्रीन्दाने लंडको अपनी चुतके लव होलमे थोडासा पुस करके फसा दीया..





ब्रीन्दा : (वासनाकी नजरोसे देखते धीरेसे) बीटु.. अब डालदे.. नही रहा जाता.. तुनेतो मुजे पागल करदीया मुजे.. जल्दी कर.. मुजे नीचे कुछ हो रहा हे.. पहेले इसे जल्दीसे डालदे.. फीर प्यार करना..

श्रीधर : (धीरेसे सरमाते) मोम.. मेने कोन्डम लीया हे.. पहेनलु..? वरना कुछ गडबड होजायेगी..

ब्रीन्दा : (श्रीधरकी कमरको अपनी चुतपे पुस करते) होने दे गडबड.. कोन्डमकी कोइ जरुरत नही.. तु अ‍ेक बार जल्दीसे डालदे.. वो सब हम बादमे देखलेगे.. नही रहा जाता..

कहतो श्रीधरने अपनी कमर उची करके कसके अ‍ेक जोरोका जडका दीया.. तो श्रीधरका पुरा लंड चुतमे घुस गयाथा.. ओर ब्रीन्दाकी जोरोकी चीख नीकल गइ.. उनकी आंखमे आंसु आगये.. ब्रीन्दा दो सालके बाद कीसीका लंड अपनी चुतमे ले रहीथी.. तो उनकी चुत कसी हुइथी.. ओर उपरसे श्रीधरका लंडभी अपने पतीसे बडा ओर मोटाथा.. तो अचानक पुरा लंड घुस गयातो वो सहेन नही करपाइ.. ओर दर्दके मारे अपना मुह इधर उधर करती रही..





ब्रीन्दा : (दर्दसे मुह बीगाडते) बीटु.. तुने क्या घुसादीया..? बस.. हीलना मत.. अ‍ैसेही रहेना..

श्रीधर : (थोडा गभराते) मोम.. क्या बहुत दर्द हो रहा हे..? मे नीकालदु..?

ब्रीन्दा : (जटसे नां मे गरदन हीलाते) नही नही.. बीटु.. मत नीकालना.. बस.. बीना हीलाये अ‍ैसेही रहे.. अभी दर्द चला जायेगा.. तेरा बहुत ही बडा हे..

ब्रीन्दा इस मामलेमे काफी अनुभवी थी.. वो अ‍ेक हाथ श्रीधरके गलेमे डालकर उनको अपने तनसे चीपका लेती हे.. ओर उनके होठोको चुमने लगती हे.. तो श्रीधरभी उनके होठोको ओर उनके उरोजोको मुहमे लेकर चुसने लगा.. तो कुछही देरमे ब्रीन्दाका दर्द कम होगया.. ओर दर्द भरी सीसकारीया कामुक सीसकारीयो मे तबदील होगइ.. ओर ब्रीन्दा धीरे धीरे अपनी कमरको हीलाने लगी.. ओर जोरोसे सीसकारीया करने लगी..



 
ब्रीन्दा : (कामुक आवाजमे) बीटु.. अब धीरे धीरे कमरको हीलाना सुरु करदे.. लगता हे इस मामलेमे तुम बहुत कुछ जानते हो.. कहासे सीखा ये सब..?

श्रीधर : (कमर हीलाते मुस्कुराते) मोम.. कुछ पोर्न फील्मसे.. तो कुछ पापासे.. मेने कइ बार पापा ओर मौसीको करते हुअ‍े देखा हे.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (थोडा गुस्सेमे) साला.. कुता.. हरामी.. नाम मत ले उन कमीनेका.. मेरे बेटेको भी बीगाड दीया..





श्रीधर ब्रीन्दाको धीरे धीरे अपनी कमर हीलाते चोदने लगा.. ब्रीन्दाभी अपनी कमर उछालते तालमेलमे श्रीधरका साथ देने लगी.. दोनोही अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते चुदाइ करने लगे.. तब कुछही देरके बाद दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. श्रीधर काफी देरतक ब्रीन्दाको चोदता रहा.. तभी अचानक ब्रीन्दा अकडने लगी.. ओर श्रीधरको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर अपनी कमरको जटके मारते जडने लगी.. तब श्रधिरको अपने लंडपे भी गरमाहट महेसुस हुइ..





ओर वो ब्रीन्दाके जडते ही हाथके बल उचा होगया.. ओर ब्रीन्दाको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. आज ब्रीन्दाने अपनी सारे हदे पार करदी.. उसने अपने पतीकी करतुतसे तंग आकर जो फैसला कीया था.. वो आज पुरा हो गयाथा.. जो अभी अपने बेटेके नीचे लेटते उनसे चुदवा रहीथी.. तभी अचानक श्रीधर ब्रीन्दाके उपर जुक गया.. ओर रुक रुकके लंबे लंबे सोट मारने लगा.. तो ब्रीन्दा सबकुछ समज गइ.. ओर उसनेभी वापस श्रीधरको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..





ओर श्रीधरने अपना लंड ब्रीन्दाकी चुतमे पुरा घुसा दीया.. ओर उनसे लीपलोक कर लीया.. तभी ब्रीन्दाको अपनी बच्चेदानीपे गरम गरम महेसुस होने लगा.. तो गरमाहट की वजहसे उनकी चुतभी हरकतमे आगइ.. ओर ब्रीन्दाका तनभी कांपने लगा.. वो समज गइकी श्रीधर जड रहा हे.. ओर उसने जोरोसे श्रीधरको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर उनकी पीठ सहेलाने लगी.. श्रीधरने ब्रीन्दाकी पुरी चुतको अपने पानीसे लबालब भरदी..





तो श्रीधरका विर्य ब्रीनदाकी चुतसे जगह बनाते बहारकी ओर नीकलने लगा.. आज श्रीधरने अ‍ेकही बारमे ब्रीन्दाको दो दोबार जडाकर संतुस्ट करदीया.. दोनोही काफी देर अ‍ैसेही रहे.. तब ब्रीन्दा मुस्कुराते श्रीधरके बालोको सहेला रहीथी.. जब श्रीधर उनके उपरसे हट गया तब ब्रीन्दाकी चुतसे श्रीधरके पानीका सैलाब उमड पडा.. ओर चुतसे बहार आने लगा.. तब ब्रीन्दाने जटसे अपने नीकरसे चुतको साफ करदीया..

फीर दोनोही बाथरुममे चले गये.. तब ब्रीन्दा थोडा लंगडाते चल रहीथी.. तो वहा अंदर भी श्रीधर ओर ब्रीन्दा अ‍ेक दुसरेको नहेलाते अ‍ेक दुसरेके अंगोके साथ खेलने लगे.. ओर खेलते खेलते फीरसे दोनो उतेजीत हो गये.. तब श्रीधरने सावरके नीचे नहातेही ब्रीन्दाको खडे खडे पीछेसे लंड डालकर चोदलीया.. फीर नहाकर वापस बेडपे आकर अ‍ेक दुसरेके सामने मुह करते लेट गये.. तब ब्रीन्दा प्यारसे श्रीधरके गालोको सहेलाते उनसे कहेती हे..





ब्रीन्दा : (मुस्कुराते होंठ चुमकर) बीटु.. आज तुने मेरी सारी तम्मना पुरी करदी.. मे कितने मीहनोसे तुजे पाना चाहती थी.. ओर आखीर तुम मुजे मील ही गया.. क्या तुम इस रीस्तेसे खुस तो हेनां..?

श्रीधर : (मुस्कुराते गाल चुमते) मोम.. खुस..? अरे पुछोही मत.. मे इतना खुस हुकी मुजे लगता हे.. मेने दुनीयाकी सारी खुसीया हासील करली हे.. मोम.. क्या इसीलीये आप मुजे हर वक्त हग करती थीनां..?

ब्रीन्दा : (सरमाकर हसते) हां बीटु.. मे तुजे मेरी ओर आकर्सीत कर रहीथी.. ओर मे तुजे मेरी ओर आकर्सीत करनेमे कामयाब भी होगइ.. जब तु मुजे गालके बजाये मेरे होठोपे कीस करने लगा.. तबही मे समज गइथी की अब तुभी वोही चाहता हे जो मे चाहती थी.. बीटु.. आखीर आज हमारा मीलन होही गया.. आजसे तुम ही मेरे पती होगे.. अब मे तुम्हारी बीवी हु.. तो तुम मुजे नाम लेकरभी बुला सकते हो..

श्रीधर : (सरमाकर हसते) मोम.. मे हमारा रीस्ता चेन्ज करना नही चाहता.. आप बुरा मत मानना.. लेकीन मुजे मेरी मोमको चोदनेकी अ‍ेक फेन्टासी थी.. जो आज आपने पुरी करदी.. मोम.. आइ लव यु..

ब्रीन्दा : (बाहोमे भरते) बीटु.. आइ लव यु टु.. तुजे तो पता ही नही होगा.. की तुमने मुजे आज कीतना प्यारा अहेसास करवा दीया हे.. तुजे पता हे..? आज मेने पहेली बार अपने अंदर कुछ अलग ही महेसुस कीया.. जब हम दोनो चरमो पे पहोचे थे.. इतना मजा तो तेरे पापाके साथभी नही आया..

श्रीधर : (मुस्कुराते) मोम.. आपने मुजे कोन्डम क्यु नही लगाने दीया..? अगर कुछ गडबड हो गइतो..?

ब्रीन्दा : (सरमाते सरारतसे हसते) तो..? होनेदे.. मे तेरा बच्चा पैदा करलुगी.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (सरमाते हसते) मोम.. मजाक नही.. सीरीसली पुछ रहा हु.. अगर सचमे आपको बच्चा ठहेर गयातो..? सबको क्या कहोगी..? की ये बच्चा कीसका हे..

ब्रीन्दा : (थोडा सीरीयस होते) बीटु.. तुम फीकर मत करो.. मे आइपील लेलुगी.. अगर फीरभी बच्चा ठहेर गयातो मे इसे नही गीराउगी.. मे मेरे बीटुकी नीशानी इस दुनीयामे लाउगी.. चाहे इसके लीये मुजे जोभी कदम उठाना पडे.. क्या तब तुम मेरा साथ दोगेनां..? बीटु.. हम दोनो सहेरमे जाकर हमारी अलग दुनीया बसायेगे.. बस.. मुजे सीर्फ तेरा साथ चाहीये.. मुजे नही रहेना तेरे पापाके साथ..

श्रीधर : (बाहोमे भीचते गाल चुमते) मोम.. मे आपसे वादा करता हु.. अब मे आपका साथ जींदगी भर नही छोडुगा.. इसीलीयेतो मेने सादी नही करनेका फैसला कीया हे.. क्या मेने सही फैसला लीया हेनां..?

ब्रीन्दा : (कुछ सोचते) नही बीटु.. सादीतो तेरी होगी.. लेकीन इसके लीये हमे थोडा इन्तजार करना पडेगा.. मुजे तेरे पापासे ओर दीदीसे बदला लेना हे.. बस इसके लीये मुजे तेरा साथ चाहीये.. ओर तु फीकर मत कर.. अगर तेरी बीवी आजायेगी तबभी हम दोनोका रीस्ता अ‍ैसेही बरकरार रहेगा.. मे ही तेरी पहेली बीवी कहेलाउगी..

श्रीधर : (मुस्कुराते होठ चुमते) मोम.. क्या सचमे आपका पापाके साथ रीलेशन खतम हो गया हे..? तो फीर उनके साथ अ‍ेक ही रुममे क्यु सोती हो..? मोम.. अब आप मेरी बीवी हो..

ब्रीन्दा : (होंठ चुमकर) बीटु.. तुम फीकर मत करो.. मे उनके साथ नही सोती.. तेरे पापा वहा अलग सोते हे.. ओर अबतो मे तेरी बीवी होगइ हु.. तो मे अब तेरे साथ सोनेके लीये आजाउगी.. हम मां बेटे हे.. तो घरमे हमपे कोइ सकभी नही करेगा.. क्युकी घरपे सबको पता हे मेरे ओर तेरे पापाके बीच कुछ ठीक नही चल रहा.. तो अब तुजे जीतनाभी अपनी बीवीको प्यार करना हे कर सकता हे.. चल.. अब सोना नही हे क्या..? हें..हें..हें..

श्रीधर : (सरमाते धीरेसे बाहोमे भीचते) मोम.. प्लीज.. मत भुलो आज मेरी सुहागरात हे.. अपनी पहेली बीवीके साथ.. आज मे आपको सोने नही दुगा.. वैसेभी हमे कल सामको नीकलना हे.. तो सुबह आराम करते रहेगे..

ब्रीन्दा : (सरमाते गाल खीचते) क्यु..? कल अपनी बीवीको सोपींग पे नही लेजायेगा..?

श्रीधर : (हसते) हां.. अगर आज रात मेरी बीवी मुजे खुस करदेगी तो जरुर लेजाउगा.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरर्मसार होते हसते) बीटु.. तुम कीतने कमीने हो.. ठीक हे चल आजा.. आज मे मेरे पतीको खुस करही देती हु..





कहेते ब्रीन्दा श्रीधरके पैरोके बीच बैठ गइ.. ओर श्रीधरकी ओर कामुक नजरोसे मुस्कुराते देखकर उनका दमदार लंडको मंठीमे पकडके हीलाने लगी.. ओर धीरेसे कामुक्तासे लंडको चाटते चाटते मुहमे लेने लगी.. ब्रीन्दा आज अपने बेटेके सामने पुरी तराह बेसर्म बन चुकीथी.. ओर लंडको मुहमे लेकर श्रीधरको ब्लुजोब देने लगी.. जब श्रीधरका लंड तनके फीरसे खडा होगया.. तब वो अपना गाउन नीकालकर बेडपे लेट गइ..
 
ब्रीन्दा : (सरमाते धीरेसे) बीटु.. आजा.. अब ये ब्रीन्दा तुजे पुरी तराह समर्पीत होगइ हे.. आजसे ये तनपे सीर्फ तेराही अधीकार होगा.. तुम जब चाहो इस तनको भोग सकते हो.. मे कभी मना नही करुगी..





तब कुछही देरके बाद अ‍ेक बार फीर श्रीधर ब्रीन्दाकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. वो ब्रीन्दाको चोदते हुअ‍ेभी उनके बुब्सको मसलते चुस रहाथा तब ब्रीन्दा अ‍ेकदम पागल हो चुकीथी.. श्रीधरकी हर हरकतपे वो खुस हो रहीथी.. उसे लगाकी अब सही मायनोमे कोइ उनकी धमासान चुदाइ करने वाला असली मर्द मील गया हे.. ब्रीन्दा श्रीधरसे चुदवाते उछल उछलके उनका साथ देती रही..





ओर अ‍ेक बार फीर श्रीधरने ब्रीन्दाकी चुतको अपने पानीसे सीचकर हरी भरी करदी.. आजकी रातका तुफान कभी ना थमने वाला तुफान था.. श्रीधर पुरी रात ब्रीन्दाको अलग अलग तरीकेसे चोदता रहा.. ओर उनकी चीखे नीकलवाता रहा.. दोनोही सुबह चार बजे तब चुदाइ करते रहे.. आज वाकइ श्रीधरने ब्रीन्दाको थका दीया.. उनके सरीरके अ‍ेक अ‍ेक अंगको चोद चोके तोडके रख दीया.. तो ब्रीन्दा हीलनेकी स्थीतीमे भी नही रही..





तो श्रीधर उसे गोदमे उठाकर बाथरुममे लेगया.. फीर दोनोने सावर लीया ओर बेडपे आकर अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भरके नंगेही सो गये.. इधर मां बेटेने आज अपनी सुहागरात मनाली.. इधर श्रीधर अपनी मां ब्रीन्दाकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. उसी वक्त वडोदरा सहेरमे उनका पती जीतुलाल कीसी होटेलके कमरेमे उनकी भाभी वृन्दाकी चुदाइ कर रहाथा.. दोनोही अलग अलग जगाहपे जानेका बहाना करके घरसे नीकल गये थे..

जीतुलाल सुबह बीजनेस टुरका.. तो सामको वुन्दा उनकी बेटी जयश्रीके लीये दो तीन रीस्तेके देखनेका बहाना बनाकर अहेमदाबाद अपने मायके जानेका कहेकर नीकल गइथी.. दोनोही फोनपे कोन्टेक्टमे थे.. तो वृन्दा अहेमदाबाद के बजाय सीधीही वडोदरा पहोंच गइ.. वहा पहोंचतेही सीधी ही अपनी तैय की हुइ होटेलपे चली गइ जहा जीतुलालने उन दोनोके लीये पहेलेसे ही छे दिनके लीये रुम बुक करलीया था..

दोनोही अ‍ैसे कइ बार मील चुके थे.. लेकीन इस बार मीलनेका कुछ खास मक्सद था.. इसीलीये तो दोनो घरपे पांच छे दिन रुकनेका बोलकर गये थे.. दरसल वृन्दा अपने देवरके साथ बार बार चुदाइकी वजहसे प्रेगनेन्ट हो चुकीथी.. तो अपना बच्चा गीरनेके लीये इधर आइथी.. ओर ये पहेली बार नही हुआथा.. इनसे पहेलेभी जीतुलालने वृन्दाको उनकी सादीसे अबतक तीन बार प्रेगनेन्ट करदीया था..

वडोदरामे जीतुलालका अ‍ेक खास पहेचान वाला डोक्टर था.. तो दोनोका काम बडीही आसनीसे यहा हो जाता था.. वृन्दा बच्चा गीरवाकर तीन चार दिन होटेलमे आराम करती फीर दो दिन मायकेमे रहेती तब जीतुलाल बीजनेसके लीये टुरपे नीकल जाता.. ओर वृन्दा वापस गांव आजाती.. इस बारभी वही हुआ.. जीतुलालको दो दिनके बादका डोक्टरका अ‍ेपोइटमेन्ट मीलाथा.. तो ये दो दिन दोनोही चुदाइ करते रहे..

तो ये दो दिन दोनोही मजे करलेना चाहते थे.. वृन्दातो जीतुलालकी सादीसे पहेलेही उनके साथ रीलेशनमे थी.. वजह थी उनके पती जवेरीलालके नपुसंक होनेकी.. उनका ठीकसे खडाभी नही होपाताथा.. ओर वृन्दाकी सुहागरातमे ही वृन्दाको पता चल गयाथा.. वो जवेरीलालको डीवोर्सभी देना चाहती थी.. लेकीन तभी उनका देवर जीतुलाल उनकी नजरमे बस गया.. जो तब कोलेजमे पढाइ कर रहाथा.. दोनोकी आंख मील गइ..

बस.. तबसे दोनो रीलेशनमे थे.. दोनोही बीन्दास्त मीलने लगे.. जब जवेरीलाल बीजनेसके लीये सहेर चले जाते तब जीतुलाल ओर वृन्दा दोनोही घरपे अकेले होते.. ओर बीन्दास्त चुदाइ करने लगे.. नतीजेके फल स्वरुप जीतुलालने वृन्दाको पहेली बार प्रेगनेन्ट करदीया.. ओर ठीक नव महीनोके बाद वृन्दाने जयश्रीको जन्म दीया.. तब उनके चाचाकी लडकी कजीन बहेन ब्रीन्दा अपनी बहेनकी डीलेवरीके लीये मदद करने आइ थी..

तो ब्रीन्दाके माता पीताने जीतुलालको ब्रीन्दाके लीये पसंद करलीया ओर वृन्दासे कहेकर बात चलाइ.. तब वृन्दा उनको मना नही करपाइ.. ओर जीतुलालकी सादी ब्र्रीन्दासे होगइ.. फीरभी जीतुलाल ओर वृन्दाने अपना रीलेशन अ‍ैसेही कायम रखा.. दो साल बाद ब्रीन्दाभी प्रेगनेन्ट होचुकी थी.. ओर ठीक नौ महीनेके बाद उसनेभी श्रीधरको जन्म दिया.. दोनोही बच्चे बडे होते गये.. ओर जयश्रीभी कोलेजमे आगइ..

लेकीन आजतक ब्रीन्दाको अपने पती ओर अपनी बहेनके बीच नाजायज रीलेशनका पता नही चला.. ओर अ‍ेक दिन वो मायके गइथी.. तो श्रीधरकी तबीयतको लेकर अचानक घरपे आगइ.. ओर उसी दिन वृन्दाके रुमसे कुछ अजीब आवाज सुनकर वहा देखने चली गइ.. ओर खीडकीसे देखने लगी तो उनका पती जीतुलाल उनकी बहेनके उपर चडते उनकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा..

उसी दिनसे ब्रीन्दाने जीतुलालको अपने तनको हाथ नही लगाने दिया.. वो जीतुलालको डीवोर्स देनेके लीयेभी तैयार होगइ थी.. लेकीन तबतक उनका बेटा श्रीधरभी जवानीके दहेलीजपे कदम रख चुकाथा.. तो ब्रीन्दाने जीतुलालको छोडनेका विचार त्याग दीया.. ओर अ‍ेकही रुममे साथ रहेते भी ब्रीन्दा जीतुलालसे अलग सोने लगी.. ब्रीन्दा दो साल तक सरीर सुखसे वंचीत रही..

जबभी उनके तनकी आग बढ जाती वो बाथरुममे जाकर अपनी उंगलीसे अपने तनकी आगको सांत करलेती.. लेकीन उनको चुदाइका असली सुख चाहीये था.. तो कबतक इस सुखसे वंचीत रहेती..? उनकोभी अ‍ेक साथीकी जरुरत महेसुस होने लगी.. जो उनके तनकी प्यासको बुजाये.. लेकीन उनका बेटाभी काफी समजदारओर जवान हो चुकाथा.. तो उसे अपने बेटेको लेकर बदनामी का भी डर सता रहाथा..

ओर अ‍ेक दिन वो जब श्रीधरको जगाने गइ.. तब श्रीधर उनका तना हुआ लंड अपनी मुठीमे पकडकर गहेरी नींद सो रहाथा.. बस.. उसी दिन ब्रीन्दाने पहेली बार उनके बेटेका लंड देखा.. वो बहुतही बडा ओर विकरलाल लग रहाथा.. ओर ब्रीन्दाके मनमे अ‍ेक बार फीरसे काम वासना जागृत होगइ.. फीरतो बार बार सुबह श्रीधरको जगाने जाती तब उनके लंडके दिदार करती..

ओर अ‍ैसा बार बार होने लगा.. तो वो धीरे धीरे अपने बेटेकी ओर ढलने लगी.. ओर उनके साथ रीलेशन बनानेके बारेमे बार बार सोचने लगी.. तभी उसके दिमागमे अपने पती जीतुलाल ओर अपनी बहेन वृन्दासे बदला लेनेका खयाल आया.. ओर उनके सातीर दिमागमे अ‍ेक आइडीया आगया.. तबसे ब्रीन्दा श्रीधरकी ओर ज्यादा ढलने लगी.. ओर सजधजके उनको रीजानेकी कोसीस करती रही.. ओर आज नतीजेके फल स्वरुप अपने बेटेसे चुद गइ थी..

दुसरे दिन ब्रीन्दा ओर श्रीधर दोनोही सुबह देर तक सोते रहे.. ब्रीन्दाकी चुतमे रातभर चुदाइकी वजहसे थोडा दर्दथा.. तो वो अपने दोनो पैर फैलाकर सो रहीथी.. तभी श्रीधरकी आंख खुल गइ.. ओर उनको रातका सब घटनाक्रम याद आगया.. ओर वो अपनी मांकी ओर देखने लगा.. तो ब्रीन्दा अपने दोनो पैर फैलाकर नंगी सो रहीथी.. जीसे देखतेही श्रीधरका लंड जटके मारते खडा होने लगा.. ओर श्रीधर बेडपे बैठ गया..

वो धीरेसे अपना लंड हीलाते ब्रीन्दाके पेरोके बीच घुटनोके बल बैठ गया.. ओर अपने थुकसे लंडको गीला करते ब्रीन्दाकी चुतपे सेट करने लगा.. ओर थोडासा चुतके होलमे फसा दीया.. जीनकी वजहसे ब्रीन्दा थोडी हीली.. तो उनसे पहेलेही श्रीधर उनके उपर जुकते अ‍ेक कमरको जटका देता हे.. तो पुरा लंड चुतमे घुस गया ओर श्रीधर ब्रीन्दाके तनपे जुककर छा गया.. तभी अचानक हमलेसे ब्रीन्दा हडबडाते नींदसे जाग गइ..





देखातो श्रीधर उनके होठोको चुमते होले होले कमर हीलाते उनको चोद रहाथा.. तो ब्रीन्दा श्रीधरकी आंखोमे देखती रही.. ओर श्रीधरने होंठ चुमते ब्रीन्दाको गुडमोर्नींग वीस कीया.. तो ब्रीन्दाकी भी सरमके मारे हसी नीकल गइ.. ओर वो प्यारसे श्रीधरके गालको सहेलाने लगी.. तभी श्रीधर हाथके बल उचा होकर ब्रीन्दाकी चुदाइ करने लगा.. ओर कुछही देरकी चुदाइके बाद ब्रीन्दाको भी जडाते अ‍ेक बार फीर श्रीधरने ब्रीन्दाकी चुतको अपने पानीसे लबालब भर दीया..
 
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते चुतको साफ करते) बीटु.. होगइ तेरी गुडमोर्नींग.. ये अपनी मोमको चोदनेका अच्छा तरीका था.. क्या अभी भी तेरा जी नही भरा..? तुनेतो रातमे मेरी हालत खराब करदी थी.. इतना जोस तुजमे कहासे आ गयाथा..? क्या कोइ गोली बोलीतो नही खाइ थी..?

श्रीधर : (हसते होठ चुमते) नही मोम.. मेरा दोस्त मुना स्कुलमे पढता था.. तब उसने अ‍ेक आर्युदीककी कीताब पढीथी.. तो लंडको बडा करनेके चकरमे उसने कुछ जडीबुटीकी दवाइ खाइ थी.. ओर उसने हमेभी खीलाइ थी.. तो हमारे सभी दोस्तोके लंड अ‍ैसे होगये हे.. ओर वैसेभी आप सुरुसेही मेरी ड्रीमगर्ल रही हो.. तो आपको देखतेही जोस आजाता हे.. ओर कुछ नही.. सोरी मोम.. क्या आपको अच्छा नही लगा..?

ब्रीन्दा : (सरमाते हसते) बीटु.. तु भलेही मुजे अपनी मां माने.. लेकीन मेने कलसेही तुजे हमेसा हमेसाके लीये अपना पती मानलीया हे.. तो मे तुजे मना कैसे कर सकती हु..? अब तुही मेरा सहारा हे.. मुजे अब सारी जींदगी तुम्हारे साथ बीतानी हे.. तो तुम अपना दिल छोटा मत कर.. तुजे जबभी मुजे चोदनेका मन करे मुजे चोदलीया कर.. मे तुजे कभी मना नही करुगी.. कल रात तुने मुजे फीरसे अ‍ेक लडकी होनेका अहेसास करवा दीया हे..

श्रीधर : (गालको चुमते) थेन्क्स मोम.. अब चले.. दोनोही नहाकर फटाफट तैयार होजाते हे.. आज मुजे अपनी बीवीको ढेर सारी सोपींग करवानी हे..

ब्रीन्दा : (बेडसे उतरते हसते) हंम.. चल.. लेकीन याद रखना.. कलकी तराह अंदर अब कोइ ओर सरारत नही.. समजे..? कलभी मुजे नहेलाते तुमने खडे खडे चोदलीया था.. कहासे सीखा ये सब..

श्रीधर : (हसते) डार्लींग.. सब तेराही संगतका कमाल हे.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (खुस होकर प्यारसे गालपे चपत लगाते) बदमास.. चल..

दोनोही अ‍ेक साथ बाथरुममे घुस गये ओर अ‍ेक दुसरेको रगड रगडके नहेलाने लगे.. श्रीधरने वाकइ ब्रीन्दाके साथ कोइ सरारत नहीकी.. तो ब्रीन्दाभी खुस होगइ.. फीर दोनोही बहार आकर कंपलीट होगये.. ब्रीन्दा आज लाल सारीमे वाकल कयामत लग रहीथी.. वो नइ नइ ब्याहकर आइ दुल्हनकी तराह सजी थी.. तो बालोको सही करते श्रीधरके पास आगइ ओर सरमाकर मुस्कुराने लगी.. तब श्रीधरने झनको अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये..





ब्रीन्दा : (सरमाते मुस्कुराते) हां तो मेरे मजनु पतीदेवजी.. चले..?

श्रीधर : (हसते) मोम.. यु आर सो ब्युटीफुल.. क्या हम अ‍ेक दिन ओर रुकजाये.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरमाकर जुठे गुस्सेसे) कोइ जरुरत नही.. अब जोभी करना हो धर जाकर करना समजे..? चलो..

श्रीधर : (मुस्कुराते) यस.. डार्लींग.. चलो.. हें..हें..हें..

कहातो ब्रीन्दा सरमा गइ.. फीर दोनोही बहार नीकल गये ओर श्रीधरने बंगलेपे ताला लगा दीया.. दोनोही बाइक लेकर अ‍ेक कोफी सोपपे चले गये.. वहा दोनोने चाइ नास्ता करलीया.. ओर वहासे नीकलकर अ‍ेक बडे आलीसान मोलमे चले गये.. वहा श्रीधरने ब्रीन्दाको ढेर सारी सारीया ओर अपनी पसंदका ड्रेसीस दीलवाया.. फीर ब्रीन्दाको लेकर अ‍ेक अंडर गारमेन्टकी सोपमे चला गया..

वहा ब्रीन्दाको तीन अलग अलग ट्रांन्सपरन्ट नाइटी दीलवाइ.. ओर पांच सेट ट्रांन्सपरन्ट ब्रा पेन्टीके दिलवाये.. तब ब्रीन्दा बहुतही सरमाइ.. उसनेभी दो जीन्स ओर दो टीसर्ट श्रीधरको दिलवाया.. घरका बीजनेस बहुतही अच्छाथा तो पैसोकीतो कोइ कमी नहीथी.. श्रीधरका खुदका बेंक बेलेन्सभी तगडा था.. तो वो ब्रीन्दाको लेकर अ‍ेक ज्वेलरी सोपमे चला गया..

वहा ब्रीन्दाकी पसंदका अ‍ेक नेकलेश ओर डायमंड रींग लेली.. तो ब्रीन्दाभी श्रीधरके लीये अ‍ेक रींग देखने लगी.. तब श्रीधरने उनसे छीपकर अ‍ेक मंगलसुत्र लेलीया.. ओर अपनी जेबमे रखदीया.. फीर श्रीधरने सबका पेमेन्ट करदीया.. ओर बहार आगये.. तबतक दो पहोरके अ‍ेक बज गया था.. तो दोनोही अ‍ेक होटेलमे चले गये वहा दोनोने खाना खाया.. दोनोने आज अ‍ेक दुसरेको अपने हाथोसे खीलाया..

फीर खाना खाकर वापस बंगलेपे आगये.. दोनोही घुमकर थके हुअ‍ेथे.. तो अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भरके सो गये.. ओर साम तक सोते रहे.. सामको दोनो जग गयेतो फ्रेस होगये.. ओर घर जानेके लीये तैयार होने लगे.. तब श्रीधरने अ‍ेक बार ब्रीन्दाको उनकी दिलवाइ ट्रान्सर्फर ब्रा पेन्टी पहेनकर दिखानेके लीये कहा.. तो ब्रीन्दा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर श्रीधरको मना करने लगी..

क्युकी उनको पता था.. अगर वो पहेनकर दीखायेगी तो श्रीधर उनके साथ जरुर कइना कोइ सरारत करेगा.. लेकीन श्रीधरने थोडीसी जीद की तो वो सीर्फ अ‍ेक बार ब्रा पेन्टी पहेनकर दीखानेको तैयार होगइ.. ओर उसने मुस्कुराते श्रीधरको कोइ सरारत ना करनेको भी केह दीया.. तो श्रीधरभी हसते हुअ‍े हां कहे देता हे.. तब ब्रीन्दा ब्रा पेन्टीका अ‍ेक सेट लेकर बाथरुममे घुस गइ.. ओर थोडीही देरके बाद.. सीर्फ ब्रा पेन्टीमे सरमाते हुअ‍े मुस्कुराते बहार आगइ..

श्रीधर : (देखताही रेह गया) वाव.. मोम.. ब्युटीफुल.. यु आर लुकींग सेक्सी गर्ल.. वेरी होट.. गर्ल..

ब्रीन्दा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) चल.. हट बदमास.. क्या मे होट लगती हु..? बेसर्म लडका.. अब देख लीयानां..? चल.. अब बहुत होगया रोमांस.. अब घर नही चलना..?

श्रीधर : (पास आकर बाहोमे भरते) मोम.. प्लीज.. थोडी देर ओर रुकीयेना.. आज आप बहुत मस्त लग रही हे.. जीतो चाहता हे मे आजही आपसे सादी करलु.. ओर आपको हमेसा हमेसाके लीये मेरी बनालु..

ब्रीन्दा : (सरमाकर गाल चुमते) बीटु.. अब हमारे बीच इतना कुछ तो होगया.. तेरी मोम तो कल रातसे ही हमेसाके लीये तेरी होगइ हे.. तो फीर क्यु अ‍ैसा बोल रहा हे..? क्या मुजपे यकीन नही हे..?

श्रीधर : (मुस्कुराते होंठ चुमकर) मोम.. यकीन तो खुदसेभी ज्यादा हे.. लेकीन मे आपको पापाकी सुहागन नही.. मेरी सुहागनमे देखना चाहता हु.. करलीजीये मुजसे सादी.. मे आपको मेरी रानी बनाकर रखुगा..

ब्रीन्दा : (जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह.. बीटु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. तुम कीतना चाहते हो मुजे.. लेकीन बीटु.. सादीके लीये अभी तेरी उमर छोटी हे.. मुजे पता हे तुमने मेरे लीये मंगलसुत्र लीया हे.. ला दे मुजे.. मे इसे तबतक सम्हालकर रखुगी.. जबतक तेरी सादीकी उमर ना होजाये.. बस तुम कोलेज खतम करले.. तब मे तुमसे वादा करती हु.. की मे तुमसे खुद सामनेसे सादीके लीये कहुगी.. तब करलेना मुजसे सादी.. हां.. अगर तुम चाहोतो हम अभी अ‍ेन्गेमेन्ट कर सकते हे.. मेने भी तेरे लीये अंगुठी लेली हे..

श्रीधर : (मुस्कुराते) मोम.. क्या आपने मुजे अंगुठी खरीदते देखलीया था..? हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरारतसे कामुक सम्माइल करते) हंम.. अब तुम मेरे पती हो.. तो पतीपे ध्यानतो रखना पडेगानां..? हें..हें..हें.. चल पहेनादे अपनी बीवीको अंगुठी..

कहातो श्रीधर खुस होकर जेबसे अंगुठी नीकालता हे.. ओर ब्रीन्दाको उंगलीपे पहेना देता हे.. तब ब्रीन्दाभी अपने पर्ससे अंगुठी नीकालकर श्रीधरको पहेना देती हे.. तब श्रीधर उसे अ‍ेन्गेजमेन्टकी गीफ्ट कहेते डायमंडका नेकलेस पहेनाता हे.. तब ब्रीन्दा बहुत खुस होगइ.. ओर श्रीधरको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर खुसीके मारे आंग गीली होगइ.. ओर दोनोने अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमलीये.. तब..
 
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां तो पतीदेव.. अब खुस..?

श्रीधर : (मुस्कुराते गाल चुमते) यस.. मोम.. आइ लव यु.. मे इस दिनका इन्तजार करुगा.. जब हम दोनोकी सादी होगी.. ओर हमारी फीरसे सुहागरात होगी..

कहेतेही श्रीधर ब्रीन्दाके उरोजोको अपनी हथेलीमे थामते उनके होठोका रसपान करने लगा.. तो ब्रीन्दाभी श्रीधरका साथ देने लगी.. ओर कुछही देरमे दोनोही उतेजीत होने लगे.. तब ब्रीन्दाको याद आयाकी वो सीर्फ ब्रा ओर पेन्टीमे हे.. तो वो सरमाते जटसे श्रीधरसे अलग होगइ.. ओर बाथरुमकी ओर जाने लगी.. तब श्रीधरने उनका हाथ पकडलीया.. ओर खीचकर अपनी बाहोमे भीचलीया..

तो ब्रीन्दा सरमाकर धीरेसे श्रीधरको छोडनेकी मनते करने लगी.. ओर श्रीधरसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. तबतक श्रीधर उनके गलेको.. गालको.. होठोको.. चुमता रहा.. ओर ब्रीन्दाको उतेजीत करता रहा.. ओर आखीर श्रीधरकी महेनत रंग लाइ.. ब्रीन्दा सीसकारीया करते श्रीधरकी बाहोमे समा गइ.. ओर श्रीधरको कुछ करनेको कहेने लगी.. तब श्रीधरने उसे पीछेसे बाहोमे भीचलीया.. ओर ब्रीन्दाके बुब्सको मसलते दबाने लगा..

ब्रीन्दा बहुतही उतेजीत होगइ.. तभी श्रीधरने अपना लंड बहार नीकाल लीया.. ब्रीन्दा कुछ समज पाती उनसे पहेलेही श्रीधरने ब्रीन्दाकी पेन्टी खीचकर नीचे करदी.. ओर ब्रीन्दाको थोडासा चुकाकर पीछसे अपना तगडा लंड ब्रीन्दाकी चुतमे घुसा दीया.. तो ब्रीन्दाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर वो छटपटाने लगी.. तब श्रीधर दोनो हाथोसे उनके उरोजोको थामते पीछेसे कमर हीलाकर ब्रीन्दाको चोदने लगा..





कुछही देरकी घमासान चुदाइके बाद श्रीधरने अ‍ेक बार फीर ब्रीन्दाकी चुतको भरके हरी भरी करदी.. तब ब्रीन्दाभी उनके साथ जड चुकीथी.. ब्रीन्दा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर अपनी चुतको पेन्टीसे साफ करके श्रीधरके सीनेमे मुका मारते बाथरुममे भाग गइ.. फीर दोनोही मां बेटे नहाकर कंपलीट होगये.. ओर अपना सामन लेकर बंगलोपे ताला लगा देते हे.. ओर अपनी बाइक लेकर गांवकी ओर नीकल जाते हे..

रास्तेमे दोनोने चाइ नास्ता करलीया.. ओर अपने गांव वापस आगये.. तबसे दोनो मां बेटेके बीच अ‍ेक पती पत्नी वाला रीस्ता बन गया.. ब्रीन्दा अब रातमे श्रीधरके कमरेमे उनके साथ सोने लगी.. ओर उनका बीस्तर गरम करने लगी.. दोनोही मां बेटे थे.. तो कीसीको उन दोनोपे सक नही हुआ.. ब्रीन्दा अब श्रीधरका अ‍ेक पतीकी तराह खयाल रखने लगी.. ओर उनकी हर जरुरतको पुरी करने लगी..

तो श्रीधरभी ब्रीन्दाका अ‍ेक पत्तीकी तराह खयाल रखने लगा.. उनके कपडे.. श्रीगांरका सामान.. उनके लीये ज्वेलेरी.. यहा तक उनके अंडरगार्मेन्टभी श्रीधर लाकर देता.. दिनमेभी घरपे कोइ नही होता तब श्रीधर हर दिन कुछना कुछ जुगाड करके ब्रीन्दाकी चुदाइ करलेता.. तो ब्रीन्दाभी मौका मीलतेही श्रीधरको अपने बेडरुममे बुला लेती.. या फीर खुद उनके बेडरुममे चली जाती ओर उनसे जमकर चुदवा लेती..

अ‍ैसेही श्रीधर दो साल तक ब्रीन्दाकी चुदाइ करता रहा.. दोनोके बीच पती पत्नीका रीस्ता बहुतही गहेरा हो गयाथा.. इस दोनोके रीस्तेके बारेमे आजतक कीसीको पता नही चला.. ब्रीन्दा हर दिन आइपील खालेती.. ताकी बच्चा ठहेरनेका कोइ खतरा नाहो.. जब श्रीधरके कोलेजका दुसरा साल खतम हुआ तब अ‍ेक दिन ब्रीन्दा श्रीधरको लेकर सहेर चली गइ ओर उनसे कीसी मंदिरमे जाकर श्रीधरसे सादीभी करली..

तब श्रीधरने ब्रीन्दाको वही मंगलसुत्र पहेनाया जीसे ब्रीन्दाने सम्हालकर रखाथा.. फीर श्रीधरने वही अपनी मां ब्रीन्दाकी मांग भरदी.. ओर वहा उसी देवायतके बंगलोमे दो दिन ठहेरकर अपनी सुहागरात मनाते श्रीधरने ब्रीन्दाकी खुब चुदाइ की.. फीर दोनो वापस अपने गांव आगये.. आज ब्रीन्दा अपने बेटे श्रीधरकी सुहागन थी.. ब्रीन्दाका अ‍ेक मक्सद पुरा होचुका था.. अब वो अपने दुसरे मक्सदके बारेमे सोचती रही..

(फ्लेसबेक खतम)

ब्रीन्दाके मनमे अ‍ेक अ‍ेक घटनाक्रम कीसी फील्मकी रीलकी तराह चल रहाथा.. उनको पताही नही चलाकी वो अपने ओर अपने बेटेके बीच रीलेशनको लेकर सोचते कीतनी देरसे अपने बेडपे लेटी हुइ हे.. दोनोही मां बेटे तबसे रीलेशनमे थे.. जब श्रीधरने जवानीके दहेलीजपे कदम रखाथा.. ओर ब्रीन्दाने तबसे ही श्रीधरके साथ रीलेशन रखकर उनको जवानीका पाठ पढाया था.. तभी अचानक जयश्री उनके रुममे आगइ..

जयश्री : (सरमाते धीरेसे ब्रीन्दाको हीलाते) मम्मी.. मम्मी.. आप सो गइ हे क्या..?

ब्रीन्दा : (अचानक अतीतसे बहार आते) अरे.. नही तो.. क्या हुआ बेटी..? क्या जागृती चली गइ..?

जयश्री : (सरमाते धीरेसे) हां मम्मी.. वो मुजे सादीकी वीस करने आइथी.. ओर हमने बहुत सारी बातेकी..

ब्रीन्दा : (हसते) बेटा.. आज अचानक मे मौसीसे मम्मी कैसे होगइ..? हें..हें..हें.. तु मुजे मौसी केह सकती हे.. आजा बैठ इधर.. मेरी प्यारी बच्ची..

जयश्री : (सरमाकर मुस्कुराते बैठते) नही मम्मी.. अब मेने आपके बेटेसे सादी करली हे.. अब आप मेरी सांस हे.. अब मे आपको मम्मी ही कहुगी.. हें..हें..हें.. मोम.. थेन्क्स.. आपने हमारी सही समयपे बहुत मदद की.. मोम.. आइ लव यु.. लेकीन लगता हे मम्मी अबभी मुजसे थोडी नाराज हे..

ब्रीन्दा : (प्यारसे गले लगाते) बीटु.. तुम दीदीकी चीन्ता मत कर.. वो सब मे सम्हाल लुगी.. बस.. अबतो तुम ओर श्रीधर अपने नये संसारपे ध्यान दो.. अब तुजे अपना बहुत खयाल रखना पडेगा.. क्युकी अब मेरा पोता तेरे गर्भमे हे.. तुजे समय समयपे चेकअप ओर खाने पीनेका बहुत खयाल रखना पडेगा..

जयश्री : (सरमाते मुस्कुराते) येस मोम.. थेन्क्स अगेइन.. आइ लव यु.. जब आप जैसी मां होतो मुजे चीन्ता करनेकी कोइ जरुरत नही हे.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते सर चुमते) लव यु टु बीटु.. जा.. अब आराम कर.. थक गइ होगी..

कहातो जयश्री ब्रीन्दाको हग करके अपने कमरेमे चली गइ.. तो वहा श्रीधर उनका इन्तजार कर रहा था.. तो जयश्री जातेही श्रीधरकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. आज ब्रीन्दाके दोनो मक्सद उनके बेटेके जरीये पुरे हो चुके थे.. अब उसे जीतुलाल ओर उनकी बहेन वृन्दासे कोइ मतलब नही था.. बस अब अ‍ेकही काम बाकी रेह गयाथा.. ओर वो था श्रीधरको उनकी बीजनेसकी पीढीपे कामपे लगा देनेका.. ओर इसके लीये भी ब्रीन्दाने बहुत कुछ सोचके रखाथा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १६६

कहातो जयश्री ब्रीन्दाको हग करके अपने कमरेमे चली गइ.. तो वहा श्रीधर उनका इन्तजार कर रहा था.. तो जयश्री जातेही श्रीधरकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. आज ब्रीन्दाके दोनो मक्सद उनके बेटेके जरीये पुरे हो चुके थे.. अब उसे जीतुलाल ओर उनकी बहेन वृन्दासे कोइ मतलब नही था.. बस अब अ‍ेकही काम बाकी रेह गयाथा.. ओर वो था श्रीधरको उनकी बीजनेसकी पीढीपे कामपे लगा देनेका.. ओर इसके लीये भी ब्रीन्दाने बहुत कुछ सोचके रखाथा....अब आगे

उधर हवेलीपे जवेरीलालकी फेमीली चली गइ तब सृती पुनमको जगाने उनके रुममे चली गइ.. सृतीने पुनमको जगादीया तो वोभी उठकर लंगडाते धीरे धीरे बाथरुमकी ओर जाने लगी.. तो सृती उनको देखकर जोरोसे हसने लगी.. ओर उनके साथ वोभी बाथरुममे घुस गइ.. फीर वहा उसने पुनमकी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करदी.. तब पुनम सरमाते मुस्कुराती रही.. फीर नहाकर दोनोही बहार आगइ.. ओर सृतीने पुनमके कपडेके साथ अ‍ेक पेइनकीलर उनके रुमसे लाकर देदी..

सृती : (मुस्कुराते) पुनोदी.. क्या जरुरत थी..? उनको मना कर देती.. देखो आपकी हालत कैसी करदी..

पुनम : (सारी पहेनते सरमाते धीरेसे) भाभी.. जब भाइने दो बार करलीया तो मेने उनको मना ही कीयाथा.. लेकीन उनको मेरी बात कहा सुननी हे.. बस.. करतेही जा रहेथे.. जालीमने तीसरी बारभी करलीया.. लेकीन भाभी.. मजा भी बहुत आया.. पता नही भाइको मुजे देखकर क्या होजाता हे..

मुजे छोडते ही नही.. ओर ये सब पहेली बार नही हुआ.. इनसे पहेलेभी दो बार मेरे साथ अ‍ैसा कर चुके हे.. अ‍ेक बार हमारी सुहागरातमे.. ओर अ‍ेक बार जब मुजे प्रेगनेन्ट कीया तब.. उनका बस चलेतो सारा दिन मुजे प्यार करते रहेगे..

सृती : (सरमाते हसते) हंम.. आपको प्यारभी तो बहुत करते हे.. आपजो उनकी चहीती बहेन हे.. हें..हें..हें.. दीदी.. अब फटाफट तैयार होजाइअ‍े हमे नीकलना भी हे..

पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) भाभी.. क्या इस हालतमे हम वहा जायेगे..? सबको पता चल जायेगातो..?

सृती : (बहार जाते हसते) सबका तो नही पता लेकीन उस कमीनीको जरुर सब पता चल गया होगा.. चलीये.. जोभी हो.. हमे जानातो पडेगा ही.. आप फटाफट तैयार होकर बहार आजाइअ‍े.. मे आपके लीये चाइ नास्तेका इन्तजाम करती हु.. फीर देवुको हमे छोडकर वापसभी तो आना हे..

कहेते सृती कीचनमे चली गइ.. फीर दयाको पुनमके लीये चाइ नास्तेका कहेकर वो होलमे देवायतके पास जाकर बैठ गइ.. ओर कातील नजरोसे हसते देवायतके कंधेपे अ‍ेक मुका जड दीया.. तो देवायत हसने लगा ओर मारनेका कारण पुछा तो सृतीने हसते पुनमकी ओर इसारा कीया.. तब पुनम थोडी लंगडाते बहारकी ओर आ रहीथी.. तो देवायत उनको देखकर जोरोसे हसने लगा.. तो पुनम उनकी ओर देखकर अपने दांतोको पीसते जुठा गुसा करने लगी..

जब सृती पुनमके रुममे चली गइथी.. तब लताभी नीलमको लेकर उपरकी मंजीलपे अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करलीया.. तो नीलम समज गइकी अब उनकी खैर नही.. लतादीदी उनको सबकुछ पुछ लेगी.. तो वोभी मानसीक रुपसे लताको जवाब देनेके लीये तैयार होगइ.. उसने मनमे ठानलीया की जोभी हो.. आज लतादीदीको सब सचाइ बतादेनी हे.. की मे धिरेनको प्यार करती हु.. ओर उनसे सादी करना चाहती हु..
 
लता : (सामने देखते) देख नीलु.. मे सीर्फ तेरी बुआ ही नही.. तुजे अपनी छोटी बहेन भी मानती हु.. तुजे पता हे..? तेरे मम्मी पापाको तेरी कीतनी चीन्ता हे..? वो चाहते हे की तु अ‍ेक बार अच्छेसे पढ लीखले.. ताकी तेरी सादीभी कोइ अच्छे घरानेमे होजाये.. ओर तु अ‍ैसो आरामकी जींदगी गुजार सके.. इसीलीये मेने ओर लखनने तेरी पढाइकी ओर तेरी सादीकी सारी जीम्वेवारी हमारे उपर लेली हे.. तु क्यु उस कमीनेके पीछे पडी हे.. भुलजा इसे..

नीलम : (सरमाते नजरे चुराते) दीदी.. सोरी.. हम अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे.. अब ना मे उनके बीना रेह पाउगी ओर नाही वो मेरे बीना.. वो मुजसे सादी करना चाहते हे.. ओर मेभी उनसे सादी करना चाहती हु..

लता : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? पागल होगइ हो क्या..? तेरे दिमागमे ये बात आइभी कैसे..? नीलु.. सच सच बताना.. तुम दोनो कहा तक आगे बढे हो..? मुजे सच बता.. मे तुजे नही डाटुगी..

नीलम : (सरमाते नजरे जुकाते धीरेसे) दीदी.. हमने प्यारकी सारी हदे हमने पार करली हे.. अब हमारी सादीतो सीर्फ औपचारीक ही रेह गइ हे.. बस.. आपको सीर्फ इतना ही कहेना हे.. दीदी मे धिरेनको बहुत चाहती हु.. प्लीज..

लता : (अपना सर पकडते परेसान होते) हे.. भ..ग..वा..न.. नीलु.. नीलु.. ये तुमने क्या कीया..? तु अभी इस चीजके लीये छोटी हे.. तु जीसे प्यार समज रही हे.. वो प्यार नही हे.. बस.. महज अ‍ेक आकर्सण हे.. वो केवल अ‍ेक वासना हे.. तुमने क्या करदीया..? (सामने देखते) नीलु.. सच बताना.. तुमतो कलसे उनके साथ थीनां..? तो बता दोनोने कलसे अबतक कीतनी बार कीया..? सच सच.. बताना मुजे..

नीलम : (सरमाते नजरे जुकाते धीरेसे) दीदी.. कलसे आजतक.. तकरीबन पांच से छे बार..

लता : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? छे बार..? कमीनी.. तु क्या वहा अपना हनीमुन मनाने गइ थी..? अगर कुछ उच नीच होगइ.. तो तेरे मम्मी पापा कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहेगे.. लगता हे इस बारेमे मुजे तेरी मम्मीसे बात करनी ही पडेगी.. वरना कहेगी तेरे साथ थी तो तुमने इनका ध्यान क्यु नही रखा..?

नीलम : (आंसु बहाते गीड गीडाते) दीदी.. प्लीज.. प्लीज.. प्लीज.. इस बारेमे आप मम्मीको कुछ मत बताना.. वरना वो मेरी पढाइ छुडवा देगी.. प्लीज.. आपको मेरी कसम.. उसे कुछ मत कहीये..

लता : (थोडा गुसस्ेसे) क्या नही कहेना..? कमीनी अ‍ेक तो इतना बडा कांड करके आइ हे.. ओर उपरसे कहे रही हे मम्मीको कुछ मत बताना..? अगर कल कुछ उचनीच हो गइ तो हम सबको क्या जवाब देगे..? नीलु.. इसके बाद तुमने कुछ गोली बोली खाइ हे..? मुने सब जानना हे..

नीलम : (सरमाते नजरे जुकाते) हां.. धिरेनने मुजे अ‍ेक दर्दकी ओर.. ओर.. अ‍ेक बच्चा ना ठहेरने की गोली खीलाइ हे.. कल.. ओर आज सुबह भी जब हमने सुबहमे कीया तब.. दीदी.. मुजे कुछ नही होगा.. आप जो भी कहोगी मे करुगी.. प्लीज.. आप मम्मीको मत बताना.. वरना वो मेरी खाल उखाड देगी..

लता : (परेसान होते) नीलु.. नीलु.. तु कब समजेगी..? तुजे मेने इतना कुछ समजाया था.. फीर भी तुम अपनी हरकतोके बाज नही आइ.. तु चल मेरे साथ मुजे देखना हे..

कहेते लता नीलमका हाथ पकडकर उसे बाथरुममे लेगइ.. ओर लताने नीलमको अपने कपडे नीकालनेको कहा.. तो नीलमने सरमाते अपने कपडे नीकाल दीये.. तब लताने नीलमको अपनी पेन्टी नीकालनेको कहा तो नीलम अ‍ैसेही नजरे जुकाते खडी रही.. तो लताने खुद उनकी पेन्टी खीचकर नीचे घुटनो तक करदी.. तब अ‍ेक बारतो नीलमभी गभरा गइ.. ओर अपनी चुतपे दोनो हाथ रख दीया.. तब..

लता : (थोडी सख्तीसे) नीलु.. हाथ हटा.. (जोरोसे) मेने कहानां अपना हाथ हटा..

थोडा जोरोसे आवज करते कहातो नीलमने सरमाते अपना मुह दुसरी ओर करलीया.. ओर अपना हाथ हटालीया.. तब लता नीचे बैठकर नीलमकी चुतको चेक करने लगी.. देखा तो नीलमकी चुतमे लताको कुछ खास बदलाव नही दीखा.. उनकी चुत अ‍ैसेही कसी हुइथी.. जो अ‍ेक कुआरी लडकीकी होती हे.. तब लताने देखकर राहतकी सांसली.. फीर लताने नीलमको अपने कपडे पहेननेके लीये कहा.. ओर बहार आगइ.. तब कुछही देरमे नीलमभी अपने कपडे पहेनकर लताके पास आकर बैठ गइ..

लता : नीलु.. अब में जोभी कहु ध्यानसे सुनना.. अब तु हमेसाके लीये हमारे पास ही रहेगी.. तुम जबभी स्कुल जाओगी यातो मे तुजे लेने छोडने आउगी.. या फीर तेरे लखन जीजु आयेगे.. तु अब अकेली कही नही जायेगी.. अगर तुजे अपने घरपे भी जाना हे तो हमारे साथही जायेगी.. अब हमे पता चला.. की तु उस कमीनेको मीली थी.. तो अब तेरी खैर नही.. इस बार मे तुजे माफ कर रही हु.. लेकीन आइन्दा तुमने उनके साथ कुछ कीया तो मेही तुजे मार मारके सुवर जैसी करदुगी.. समजी..?

नीलम : (सर जुकाते) जी दीदी..

लता : (अचानक याद आतेही) अ‍ेक मीनीट.. अ‍ेक मीनीट.. नीलु.. तुम दोनो अ‍ेक दुसरेके कोन्टेक्टमे कैसे रहे..? क्या उसने तुजे कुछ मोबाइल बोबाइल दीया हे..? सच बताना.. वरना मुजसे बुरी कोइ नही होगी..

नीलम : (हैसेही नजरे जुकाते खामोस बैठी रही..) ....

लता : (जोरोसे आवाज लगाते) अरे कमीनी.. अ‍ैसे गुंगी होकर क्या बैठी हे..? में तुमसे पुछ रही हु.. बता..

नीलम : (नजरे जुकाते गरदन हां मे हीलाते) जी..

लता : (जोरोसे) क्या जी..? तु गुंगी हे..? जोरोसे बोलनां..?

नीलम : (सर जुकाते धीरेसे) हां.. अ‍ेक मोबाइल दीया हे..

लता : (अपना सर पीटते) हे.. भगवान.. देखो कमीनेको.. इतनीसी बच्चीको मोबाइल भी दीया हे.. (जोरोसे) कहा हे वो..?

नीलम : (सर जुकाते धीरेसे) मेरे पास हे.. मेरी कपडेकी बेगमे..

लता : (थोडी सख्तीसे) तो अभी तक यहा क्यु बैठी हे.. जा.. अभीके अभी लाकर दे मुजे.. जा.. कमीनी कहीकी.. अभीतो जवानीके पंखभी ठीकसे नही लगे.. ओर उस कमीनेसे छे छे बार चुदवाके आगइ.. जा जल्दी..

कहातो नीलम दोडकर अपने रुममे चली गइ.. ओर अपनी बेगसे भारी मनसे मोबाइल नीकाला.. ओर लताके पास आकर उसे दे दीया.. तब लताने मोबाइल लेकर नीलमको वापस अपने रुममे भेज दीया.. लताका मन कर रहाथा की नीलमको अभी लखनको साथ लेजाकर रमासे मीलवाये.. लेकीन अभी पुनम ओर सृतीभी जाने वालेथे.. ओर नीलमको आज उनकी मम्मीको मीलवाना लताको ठीक नही लगा.. ओर वो मोबाइलको अपनी अलमारीमे छुपाकर नीचे चली गइ..
 
तब सृती ओर देवायत जानेकी तैयारीया कर रहेथे.. पुनम अबभी डाइनींगपे चाइ नास्ता कर रहीथी.. तब लता उनके पास जाकर बैठ गइ.. पुनमको लता थोडी टेन्शनमे लगी.. उनको मालुम थाकी लता को अभी कीस बातकी टेन्शन हे.. ओर उनसे अभी कुछ बाते कहेना चाहती हे.. लेकीन अभी देवायत सृती सब लोग थे तो पुनमको अभी इस बारेमे बात करना उचीत नही लगा तो उसने धीरेसे कहा..

पुनम : (धीरेसे) भाभी.. अभी कुछभी मत बोलना.. इस बारेमे हम फुरसमे बात करेगे.. मुजे सब पता हे..

लता : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) दीदी.. क्या आपको सब पता हे..? तो क्या आपको बुरा नही लगा..?

पुनम : (चाइ पीते धीरेसे) भाभी.. बीलकुल नही लगा.. आप फीकर मत कीजीये.. कुछ बाते हे जो मे आपको वापस आकर फुरसतमे बताउगी.. जोभी हो रहा हे होने दीजीये.. नीलुको कुछ मत कहेना.. ओके..?

लता : (राहतकी सांस लेते) ठीक हे दीदी.. हम बादमे बात करेगे..

जब पुनमने चाइ नास्ता करलीया.. तो वो लताको घरका ध्यान रखनेको कहेने लगी.. तब सृती अपने ओर पुनमके कपडेकी बेग लेकर आगइ.. लता ओर नीलम दोनोही वही खडे रहेते तीनोको जाते हुअ‍े देखती रही.. जब देवायतने कारमे बैठकर लताकी ओर देखा.. तो देवायतसे आंख मीलतेही लता अ‍ेकदम सर्मसार होगइ.. ओर मुस्कुराते हाथ हीलाकर देवायतको होठ हीलाते धीरेसे बाय.. कहेने लगी.. तब पुनमने देखलीया.. ओर देवायतकी ओर देखते हसने लगी.. ओर देवायत दोनोको लेकर राजीवके गांवकी ओर नीकल गया..

तो राजीवके घरभी सबलोग फ्रेस होकर चाइ नास्ता कर रहेथे.. आजभी दोपहोरको आरामके वक्त राजीवने नीर्मलाको चोदलीया था.. जैसे वो इतने दिनोसे बीमारीकी वजहसे नीर्मलाको ना चोदनेकी सारी कशर पुरी कर रहा हो.. आज राजीवके चहेरेपे बहुत थकान महेसुस हो रहीथी.. तो साथमे खुसभी हो रहाथा.. तब इधर देवायत सृती ओर पुनम तीनोही बाते करते उनके गांवकी ओर जा रहेथे.. तब पुनमने सरमाते बातको छेडदी..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ.. आपने तो आज मेरी सादीके बाद ना मीलनेकी सारी कशर पुरी करदी.. कोइ अपनी बहेनके साथ अ‍ैसा करता हे क्या..? हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) तो फीर..? दीदी इनको दो बार करनेकी आदत कहासे लग गइ..? तबतक तो ये हमे पुरी नीचोड लेते हे.. ओर आजतो आपके साथ तीन बार कीयानां..? देखो आपकी हालत.. आपकोतो छोडतेही नही थे.. मेरे साथभी अ‍ेक बार अ‍ैसा कीया था..

पुनम : ( सरमाकर हसते धीरेसे) भाभी.. लेकीन भाइ मजाभी तो बहुत देते हे.. भाइ.. मुजे आपसे कुछ बात कहेनी हे.. हमारे देवरके बारेमे.. हें..हें..हें.. आपको सब पता तो होगा आज क्या हुआ हे..?

देवायत : (हसते) हंम.. हमारे लखनके बारेमे..? बता.. क्या बात करनी हे..?

पुनमने रमाकी नीलुसे फोनपे बात करवानेको लेकर अपने खानदानकी भाइ बहेनके साथ सादीकी परंपरा.. फीर उनकी देवायतके साथ सादीसे लेकर धिरेनके साथ क्यु सादी करनी पडी.. वो सब बाते.. ओर लताभी उनकी बहेन हे.. वो सभी बाते पुनम देवायतको बताती रही.. तब सृतीभी बीचमे हसते दोनोकी बाते गौरसे सुनती रही.. ओर लखन उनको कीस बातपे क्या कहेकर छेड रहाथा.. पुनमने वोभी बता दीया..

पुनम : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) भाइ.. आज सुबह वो मेरे पास आयेथे.. उनको लताभाभीने नीलुसे रमाभाभीकी बात करवानेको कहा होगा.. तो मेने उनकी होस्टेलमे फोन कीयाथा.. तो वहीसे उनको सब पता चल गया.. तो लखन भैया बहुत गुस्से हो गयेथे.. ओर उसने मुजे धिरेनके साथ सादी करनेका कारण पुछा..

देवायत : (सीरीयस होते) पुनो.. क्या कहा तुमने..?

पुनम : (सरमाते) भाइ.. बातो ही बातोमे बात हमारे खानदानकी परंपरा तक आगइ.. तो उसने मुजे पुछलीया.. की आपने ओर भाइने ये परंपरा क्यु तोडदी..? दोनोने आपसमे सादी क्यु नहीकी..? आपकी धिरेनके साथ सादी करनेकी वजह क्याथी..? वगैरे.. वगैरे.. सवाल पुछने लगे.. तो मुजे मजबुरन उनको सब सचाइ बतानी पडी..

देवायत : ( आस्चर्यसे पुनमको ओर देखते) व्होट..? तो फीर क्या कहा उसने..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. मेने जब उनको सब सचाइ बतादी.. तो.. सचाइ सुनतेही वोतो उल्टा बहुत खुस होगये.. ओर मुजे भाभी भाभी कहेकर छेडने लगे.. हें..हें..हें.. भाइ.. उनकी बातोसे लगाकी वोभी अपने सभी दोस्तोकी तराह अपनी बहेनसे सादी करनेको इच्छुक थे.. तो मेने उसे कीसीको ना कहेनेकी हीदायत देते हमारी लताभाभीके बारेमे भी सब बता दीया.. की वोभी हमारी बहेन हे.. तो वो सुनकर बहेत खुस होगये.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) लखन.. लखन.. मेरा छोटा भाइ.. बहुत सरारती होगया हे.. हें..हें..हें.. क्या तुजे सचमे भाभी कहेता हे..? देखना अभी कुछ गडबड ना करदे..

पुनम : (हसते) भाइ.. आप फीकर मत करो.. मेने उसे सब समजा दीया हे.. वो जब हम दोनो अकेले होगे तबही मुजे भाभी केह सकता हे.. बस मेने अभी उसे इतनीही छुट दी हे..? हें..हें..हें..

सृती : (जोरोसे हसते) अच्छा.. तब भी वो आपकी मस्ती करते भागेथे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) सृतीभाभी.. प्लीज.. ये बात अभी आप तकही सीमीत रखना..

सृती : (मुस्कुराते) अरे डोन्टवरी दीदी.. आप फीकर मत करो.. समजो मेने कुछ सुनाही नही.. हें..हें..हें..

तीनोही अ‍ैसी बाते करते राजीवके घरपे पहोंच गये.. तो मंजु चंदा भावना सब लोग पुनम ओर सृतीको देखतेही बहुत खुस होगये.. ओर सभीने उनको गले लगा लीया.. तब पुनम अपने सरपे पलु डालकर राजीव ओर नीर्मला ओर भुमीकाके पैर छुती हे.. तब राजीवभी बहुत खुस होगया.. आखीर पुनम जो उनकी बहु थी.. भावनाने सबको पानी पीलाया.. फीर सबके लीये चाइ नास्तेका इन्तजाम करने कीचनमे चली गइ..
 
तब मंजुने इसारा करते पुनम ओर सृतीको नीचे अपने रुममे आनेको कहा.. तो दोनोही सबकी नजर बचाते अ‍ेक अ‍ेक करते रुममे मंजुके पास चली गइ.. मंजुको पीछले दो दिनके सभी घटना क्रमके बारेमे सब पताथा.. ओर आज धिरेनके घरपे जोभी हुआ.. वोभी मंजुको सब पताथा.. जो बात पुनमकी प्रेगनन्सीके बारेमे अ‍ेक हप्तेके बाद डीकलेर करना था.. वोही बात उनको आजही डीकलेर करनेकी नोबत आगइ थी..

सृती : (अंदर आतेही) हां मंजु.. बोल.. तुमने सबसे छुपकर हमे यहा क्यु बुलाया..?

मंजुला : (मुस्कुराते) सृती.. पुनोदीदी सब जानती हे.. लेकीन जो बात हमे अ‍ेक हप्तेके बाद डीकलेर करनी थी.. वोही बात आज करनी पडेगी.. तु अपना नाटक करनेके लीये तैयार होजा..

सृती : (थोडी असंमजमे मुस्कुराते) कीस बातका नाटक..? मे कुछ समजी नही..

मंजुला : (पीठमे मुका मारते) अरे कमीनी.. पुनोकी प्रेगनन्सीके बारेमे.. क्या भुल गइ सब..?

सृती : (हसते) ओह.. याद आगया.. याद आगया.. लेकीन अभी क्यु..?

मंजुला : (धीरेसे) कमीनी.. वो सब बतानेका अभी टाइम नही हे.. तुजे जीतना कहा उतना कर.. जब कोइ तुजे पुनोको चेक करनेके लीये बुलाये.. तब तुजे पुनोकी प्रेगनन्सीको डीकलेर करनी हे.. ओर पुनो.. अभी चाइ नास्ता आयेगा.. तब तु नास्ता करते अ‍ेक उंगली अपने गलेमे डाल देना.. तुजे व्होमीट हो जायेगी..

सृती : (जोरोसे हसते) कीतनी कमीनीहो तुम.. ये सब कहासे सीखा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) कुती.. हसो मत.. अभीतो बहार चल.. वो सब मे तुजे बादमे बताउगी.. हें..हें..हें..

कहेते तीनोही रुमसे बहार आगइ.. तो पुनम कीचनमे भावनाकी मदद करने चली गइ.. तो सृती मंजु बहार आकर सबके साथ बैठ गइ.. ओर सब लोग आपसमे बातोमे मसगुल होगये.. तब भुमीका सीर्फ पुनम ओर सृतीकोही नोटीस कर रहीथी.. क्युकी दोनोही थोडा धीरेसे चल रहीथी.. तब वो समज गइकी देवायतने ही इन दोनोकी चाल बीगाडी हे.. भुमीको पुनके बारेमे मंजुने सब बता दीया था.. फीर चाइ नास्ता आगया तो सब लोग चाइ नास्ता करते घुलमीलकर बाते करने लगे..

तभी अचानक पुनमको कुछ अजीबसा लगा.. उनको व्होमीट जैसा लगने लगा.. क्युकी रुमके अंदर मंजुने पुनमको सब समजा दीयाथा की क्या करना हे.. तो वो जटसे खडी होकर अपने मुहपे हाथ रखते बाथरुमकी ओर भाग गइ.. तब मंजु ओर सृती दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने देखते मुस्कुराते मनमे खुस होने लगी.. तो पुनमके पीछे चंदा ओर भावना भी थोडा गभराते खडी होकर चली गइ..

देखातो पुनम व्होमीट कर रहीथी.. तब चंदाभी मनमे खुस होते उनकी पीठ सहेलाती रही.. जब व्होमीट होगइ.. तब पुनमने अपना मुह पानीसे साफ करलीया.. तो चंदा ओर भावना उसे हाथ पकडकर नीचेके रुममे लेगइ.. तभी सृती समज गइकी अभी उनका बुलावा आयेगा.. तभी चंदाने जोरोसे आवाज देकर सृतीको रुममे बुलाया.. तो सृतीके साथ मंजुभी हसते हुअ‍े खडी होगइ.. ओर दोनो रुममे चली गइ..

चंदा : (थोडी चीन्तासे) सृती.. देखतो जरा.. पुनमदीदीको क्या हुआ हे..? इनको व्होमीट हुइ हे..

सृती : (मुस्कुराते पुनमका हाथ चेक करते) दीदी.. गभराइअ‍े नही.. मे अभी देखती हु..

जब सृती पुनमका हाथ पकडकर चेक कर रहीथी तब मंजु.. सृतीकी ओर देखते मुस्कुरा रहीथी.. उनको पताथा.. अभी सृती पुनमको चेक करनेका नाटक बहुत अच्छी तराह कर रही थी.. मंजुको येभी पताथा की पुनमके लीये इतजी जल्द बाजी क्यु करनी पडी.. उनकीभी दो वजहथी.. अ‍ेकतो वो अपने पापाके जानेसे पहेले उनको खुसी देना चाहती थी.. ओर दुसरी वजहथी आनेवाले दिनोमे धिरेनकी कुछ डीमांड.. तभी..

सृती : (मुस्कुराते खुस होते) बडीदीदी.. मीठाइया मंगवा लीजीये.. सायद आपकी बहु.. प्रेगनेन्ट हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (खुसीके मारे चीलाते) क्या..? सृती.. तुम अ‍ेक बार फीरसे ठीकसे चेक करनां..

सृती : (हसते चंदाका हाथ थामते) दीदी इतने सालका तर्जुबा हे.. फीरभी मे इनको अपनी क्लीनीकपे जाकर चेक कर लुगी.. फील हालतो मेरे पास प्रेगनन्सी चेक करनेकी कीट हे.. मे इनको अभी देती हु.. वो सुबह चेक कर लेगी.. हें..हें..हें..

चंदा : (खुसीसे आंसु नीकल आये) पुनोदीदी.. थेन्क्स.. थेन्क्स गोड.. मे अभी बहार बडीदीदी ओर भैयाको खुस खबर सुनाती हु.. वो खुस होजायेगे..

कहेते चंदा बहाकी ओर दोड पडी.. ओर नीर्मलाके पास घुटनोके बल बैठकर उनकी गोदमे सर रखते खुसीके मारे आंसु बहाने लगी.. तब अ‍ेक पलके लीये तो सबलोग गभरा गये.. लेकीन तभी पीछे मंजु ओर सृती भावना सब लोग हसते हुअ‍े बहार नीकले तब सबकी जानमे जान आगइ.. ओर नीर्मला मुस्कुराते चंदाके सरको सहेलाती रही.. तो राजीवभी मुस्कुराते चंदाकी ओर देखता रहा.. तभी..

नीर्मला : (हसते) छोटी.. बोल क्या हुआ..? इतनी खुस हेकी तेरे आंसु नीकल आये..

चंदा : (खुसीसे हसते) हां दीदी.. बातही कुछ अ‍ैसी हे.. सायद आपकी बहु.. मां बनने वाली हे.. हमारे धिरेनका बच्चा.. सी इस प्रेगनेन्ट.. दीदी आज मे बहुत खुस हु..

राजीव : (जटसे खुस होकर पैसे नीकालते) अरे तो इसमे आंसु क्यु बहाती हे..? येतो बहुत खुसीकी बात हे.. (जोरोसे) भावु.. बेटा.. जा जल्दी कुछ मीठाइआ लेकर आ.. ओर साथमे आइसक्रिमभी लाना..

भावना : (हसते) जी पापा.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. अब आप दोनो दादा दादी बन जाओगे.. हें..हें..हें..

कहेते भावना हसते हुअ‍े राजीवके पास आकर पैसे लेकर चली गइ.. घरमे खुसीका माहोल होगया.. सब लोग चंदा ओर राजीव नीर्मलाको बधाइ देने लगे.. लेकीन देवायत मुस्कुराते आंसु बहाने लगा.. क्युकी उनको तो पताथा की पुनो प्रेगनेन्ट हे.. लेकीन आज वो थोडा दुखी होकर आंसु बहा रहाथा.. उनको चंदा राजीव ओर नीर्मलाके जजबातोसे खेलना अच्छा नही लगा.. तो मंजु उसे देखकर सब समज गइ..
 
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