- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 33,357
मंजु देवायतको आंसु बहाते देखकर थोडी वीचलीत होगइ.. उनको पताथाकी देवायत क्यु आंसु बहा रहा हे.. वो जटसे पुनमके पास उनके रुममे चली गइ.. ओर वहीसे देवायतको थोडी जोरोसे आवाज लगाके रुममे बुलाती हे.. तो देवायत अपने आंसु पोछते पुनमके रुममे चला गया.. तब चंदा भुमीका ओर नीर्मला खुसीके मारे हस हसके बाते कर रहीथी.. जब देवायत अंदर आगया.. मंजुने धिरेसे दरवाजा बंध करलीया..
मंजुला : (थोडी चीन्तासे) जानु.. क्यु दुखी हो रहे हो..? आपको पता हेना आज क्या हुआ हे..? तो हमे आजही ये सब करना पडा..
देवायत : मंजु.. लेकीन अैसे कीसीके जजबातोसे मजाक करना.. मुजे अच्छा नही लगा.. देखो.. तीनो कीतनी खुस हे..? क्या तुजे नही लगता हम कीसीके साथ धोखा कर रहे हे..?
मंजुला : (मुस्कुराते बाहोमे समाते) हंम.. समज गइ.. मुजे पता था.. अेकना अेक दिन येतो होनेही वाला था.. लेकीन जानु.. आप समजो.. अगर थोडेसे मजाकसे पापाको खुसी मीलती हे.. तो मे अैसा मजाक बार बार करुगी.. देखो पापा कीतने खुस हे.. मे उनको जानेसे पहेले खुस देखना चाहती हु.. फीरभी आपको लगता हेकी ये गलत हे.. तो आइ अेम सोरी..
देवायत : (सर चुमते) नही मंजु तुम माफी मत मांगो.. मुजे पता हे तेरी कोइना कोइ मजबुरी या उनके पीछे कोइ वजह होगी..
मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) जानु.. थेन्क्स.. मेरी क्या मजबुरीथी.. वो आपको कुछही दिनोमे पता चल जायेगा.. मेने जोभी कीया हे सोच समजके कीया हे.. आप फीकर मत करो..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. भाभी ठीक केह रही हे.. बहुत कुछ जल्दी बदल रहा हे..
देवायत : (प्यारसे सर चुमते) हंम.. पता हे मुजे.. तुम दोनोको बहुत कुछ पता चल जाता हे.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) हां.. चलजाता हे.. इसीलीये तो ये सब करना पडा.. ओर येभी पता हे.. आज मेरी दो सौतने ओर आगइ हे.. जो उनमेसे अेकका उधार आज आपको करना हे.. हें..हें..हें.. देवु.. सीर्फ अेकका नही.. हो सकेतो आजही उन दोनोका सब काम तमाम करदो..
पुनम : (सरमाकर हसते) भाभी.. आप कीसकी बात कर रही हे.. सायद नीशा भाभी..?
मंजुला : (हसते) हां दीदी.. नीशातो हे ही.. लेकीन उस कमीनी भी अब हमारे साथ जुड गइ हे.. तेरी चारु भाभी.. हें..हें..हें.. पता नही ओर कीतनी ओरतोका उधार करना हे.. आज कल हमारे देवरके भी पंख लग गये हे.. हें..हें..हें.. वो कुछ ज्यादा ही उडने लगे हे..
पुनम : (सरमाते धीरेसे हसते) भाभी.. प्लीज.. आप वो थोडीसी जडीबुटी मुजे देना.. जो आपने भाइको दिथी.. बस.. उनमे से थोडीसी लखन भैयाको देनी हे.. आप समज गइनां..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. दीदी.. मेने घरपे सम्हालके रखी हे.. मे घरपे आउगी तब आपको दे दुगी.. लेकीन उनको थोडीसी ही देना.. ओर इस बारेमे मुजे आपसे बातभी करनी हे.. हम वही घर जायेगे तब करलेगे..
देवायत : (हसते) मंजु.. तो अब मे घर चलु..?
मंजुला : (हसते) देवु.. आप बहुत कमीने हो.. इस बेचारीकी हालत इतनी खराब करनेकी क्या जरुरत थी..? थोडा प्यारसे नही कर सकते थे..? आप डीनर करके जाना.. वरना पापाको बुरा लगेगा..
देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे.. मंजु.. पता नही तुजे ओर पुनोको देखकर मुजे क्या होजाता हे.. मे सब कंट्रोल खो देता हु.. हें..हें..हें.. सायद इसकी वजह ये हे.. की तुम दोनो मेरी बहेने हो.. हें..हें..हें.. तो तेरे हिस्सेका प्यारभी पुनोसे वसुल करता हु.. हें..हें..हें..
मंजुला : (सरमाकर हसते) पुनोदीदी.. हमे कीतना कमीना भाइ मीला हे.. कोइ बहेनकी अैसी हालत करता हे.. हें..हें..हें.. देवु.. छोडो ये सब.. आज आप कारको इधरही रखके जाना.. सृती ओर पुनो दोनोही चला लेती हे.. आप आज पापाका स्कुटर लेकर चले जाना.. समज गयेनां..?
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. मंजु.. अगर तुम कहोतो मे रुक जाता हु..
मंजुला : नही देवु.. आप आरामसे जाओ.. वहाभी वो दोनो आपका इन्तजार कर रही होगी.. ओर आप यहा रुके तो सायद मम्मी.. भुमी आंटी.. सबको सक होजायेगा.. आप जाओ.. अकेले अैस करो.. हें..हें..हें..
देवायत : (मुस्कुराते) अरे अकेला कहा..? ठीक हे.. पुनो.. चलो तुम्हे मेरे साथ चलना हे.. आज हम दोनोही घरपे अेकेले हे..हें..हें..हें..
मंजुला : (दांत पीसते मुका मारते) आप बहुत ही कमीने हो.. अकेले कहा..? वहा दोदो कमीनीओ आपका इन्तजार कर रही हे..
पुनम : (धीरेसे) भाभी.. वो वंदु केह रहीथी.. आज कल चारुभाभी ओर रेमशभाइके बीच कुछ ठीक नही चल रहा..
मंजुला : (मुस्कुराते) सब पता हे दीदी.. आगे देखते जाओ.. अबतो वहा बहुत कुछ नया दिखनेको मीलेगा..
देवायत : (होंठ चुमते बुब्स दबाते) मंजु.. अेक दिन तुम दोनो बहेनोके साथ मजा करना चाहता हु.. हें..हें..हें..
कहातो पुनम ओर मंजुला बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर मंजुने सरमाकर देवायतकी पीठमे मुका भी मार दीया.. फीर दोनोही बहार आकर सबके साथ बैठ गये.. तब भावना मीठाइआ ओर आइसक्रिम लेकर आगइ.. सबने देवायतको डीनर तक वही रोक लीया.. वहा खानेके वक्त मीठाइआ बटी.. सब अेक दुसरेका मुह मीठा करने लगे.. फीर आइसक्रिम भी खाइ.. ओर देवायत रात साडे नव बजे वहासे नीकल गया..
मंजुला : (थोडी चीन्तासे) जानु.. क्यु दुखी हो रहे हो..? आपको पता हेना आज क्या हुआ हे..? तो हमे आजही ये सब करना पडा..
देवायत : मंजु.. लेकीन अैसे कीसीके जजबातोसे मजाक करना.. मुजे अच्छा नही लगा.. देखो.. तीनो कीतनी खुस हे..? क्या तुजे नही लगता हम कीसीके साथ धोखा कर रहे हे..?
मंजुला : (मुस्कुराते बाहोमे समाते) हंम.. समज गइ.. मुजे पता था.. अेकना अेक दिन येतो होनेही वाला था.. लेकीन जानु.. आप समजो.. अगर थोडेसे मजाकसे पापाको खुसी मीलती हे.. तो मे अैसा मजाक बार बार करुगी.. देखो पापा कीतने खुस हे.. मे उनको जानेसे पहेले खुस देखना चाहती हु.. फीरभी आपको लगता हेकी ये गलत हे.. तो आइ अेम सोरी..
देवायत : (सर चुमते) नही मंजु तुम माफी मत मांगो.. मुजे पता हे तेरी कोइना कोइ मजबुरी या उनके पीछे कोइ वजह होगी..
मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) जानु.. थेन्क्स.. मेरी क्या मजबुरीथी.. वो आपको कुछही दिनोमे पता चल जायेगा.. मेने जोभी कीया हे सोच समजके कीया हे.. आप फीकर मत करो..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. भाभी ठीक केह रही हे.. बहुत कुछ जल्दी बदल रहा हे..
देवायत : (प्यारसे सर चुमते) हंम.. पता हे मुजे.. तुम दोनोको बहुत कुछ पता चल जाता हे.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) हां.. चलजाता हे.. इसीलीये तो ये सब करना पडा.. ओर येभी पता हे.. आज मेरी दो सौतने ओर आगइ हे.. जो उनमेसे अेकका उधार आज आपको करना हे.. हें..हें..हें.. देवु.. सीर्फ अेकका नही.. हो सकेतो आजही उन दोनोका सब काम तमाम करदो..
पुनम : (सरमाकर हसते) भाभी.. आप कीसकी बात कर रही हे.. सायद नीशा भाभी..?
मंजुला : (हसते) हां दीदी.. नीशातो हे ही.. लेकीन उस कमीनी भी अब हमारे साथ जुड गइ हे.. तेरी चारु भाभी.. हें..हें..हें.. पता नही ओर कीतनी ओरतोका उधार करना हे.. आज कल हमारे देवरके भी पंख लग गये हे.. हें..हें..हें.. वो कुछ ज्यादा ही उडने लगे हे..
पुनम : (सरमाते धीरेसे हसते) भाभी.. प्लीज.. आप वो थोडीसी जडीबुटी मुजे देना.. जो आपने भाइको दिथी.. बस.. उनमे से थोडीसी लखन भैयाको देनी हे.. आप समज गइनां..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. दीदी.. मेने घरपे सम्हालके रखी हे.. मे घरपे आउगी तब आपको दे दुगी.. लेकीन उनको थोडीसी ही देना.. ओर इस बारेमे मुजे आपसे बातभी करनी हे.. हम वही घर जायेगे तब करलेगे..
देवायत : (हसते) मंजु.. तो अब मे घर चलु..?
मंजुला : (हसते) देवु.. आप बहुत कमीने हो.. इस बेचारीकी हालत इतनी खराब करनेकी क्या जरुरत थी..? थोडा प्यारसे नही कर सकते थे..? आप डीनर करके जाना.. वरना पापाको बुरा लगेगा..
देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे.. मंजु.. पता नही तुजे ओर पुनोको देखकर मुजे क्या होजाता हे.. मे सब कंट्रोल खो देता हु.. हें..हें..हें.. सायद इसकी वजह ये हे.. की तुम दोनो मेरी बहेने हो.. हें..हें..हें.. तो तेरे हिस्सेका प्यारभी पुनोसे वसुल करता हु.. हें..हें..हें..
मंजुला : (सरमाकर हसते) पुनोदीदी.. हमे कीतना कमीना भाइ मीला हे.. कोइ बहेनकी अैसी हालत करता हे.. हें..हें..हें.. देवु.. छोडो ये सब.. आज आप कारको इधरही रखके जाना.. सृती ओर पुनो दोनोही चला लेती हे.. आप आज पापाका स्कुटर लेकर चले जाना.. समज गयेनां..?
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. मंजु.. अगर तुम कहोतो मे रुक जाता हु..
मंजुला : नही देवु.. आप आरामसे जाओ.. वहाभी वो दोनो आपका इन्तजार कर रही होगी.. ओर आप यहा रुके तो सायद मम्मी.. भुमी आंटी.. सबको सक होजायेगा.. आप जाओ.. अकेले अैस करो.. हें..हें..हें..
देवायत : (मुस्कुराते) अरे अकेला कहा..? ठीक हे.. पुनो.. चलो तुम्हे मेरे साथ चलना हे.. आज हम दोनोही घरपे अेकेले हे..हें..हें..हें..
मंजुला : (दांत पीसते मुका मारते) आप बहुत ही कमीने हो.. अकेले कहा..? वहा दोदो कमीनीओ आपका इन्तजार कर रही हे..
पुनम : (धीरेसे) भाभी.. वो वंदु केह रहीथी.. आज कल चारुभाभी ओर रेमशभाइके बीच कुछ ठीक नही चल रहा..
मंजुला : (मुस्कुराते) सब पता हे दीदी.. आगे देखते जाओ.. अबतो वहा बहुत कुछ नया दिखनेको मीलेगा..
देवायत : (होंठ चुमते बुब्स दबाते) मंजु.. अेक दिन तुम दोनो बहेनोके साथ मजा करना चाहता हु.. हें..हें..हें..
कहातो पुनम ओर मंजुला बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर मंजुने सरमाकर देवायतकी पीठमे मुका भी मार दीया.. फीर दोनोही बहार आकर सबके साथ बैठ गये.. तब भावना मीठाइआ ओर आइसक्रिम लेकर आगइ.. सबने देवायतको डीनर तक वही रोक लीया.. वहा खानेके वक्त मीठाइआ बटी.. सब अेक दुसरेका मुह मीठा करने लगे.. फीर आइसक्रिम भी खाइ.. ओर देवायत रात साडे नव बजे वहासे नीकल गया..










