Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 52 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९५

उसने देवायतके साथ मीलकर लीये फैसलेके बारेमे ओर इसके अलावा भी लखनको सबकुछ बतानेका फैसला करलीया.. तब देवायत भी अपना तगडा लंड मंजुकी चुतकी गहेराइओ मे उतारके उनके सीनेपे ढेर होकर पडा था.. आज मंजुने देवायतको तीन तीन बार नीचोड लीया था.. लेकीन उनकी चुत अब भी प्यासी थी.. तभी तो उसने अपनी चुतसे देवायतके लंडको नही नीकालने दिया.. ओर अ‍ैसे ही पुरी रात बीत गइ....अब आगे

सब लोग सादीकी थकानकी वजहसे नींदकी गहेराइओमे चले गये थे.. ओर सबको लगा.. की आज सुबहका सुरज बहुत ही जल्दीसे ना नीकले.. सुबह साडे तीन बजे घरके सधी लोग ओर महेमान सो रहे थे.. तब सांतीकी आंख खुल गइ.. क्युकी आज खुदकी सादी थी.. तो आज रात उनको नींद ही नही आइ.. ओर उसने जागृतीको भी जगा दीया.. तो जागृती भी जागकर अपने बीस्तरपे ही बैठ गइ.. तब..

सांती : (सरमाते धीरेसे) जागु.. मे नहाने जा रही हु.. तो तुम तेरे भाइको भी जगादे.. आज उनको भी तैयार होनेमे टाइम लगेगा.. जा जगादे उसे..

जागृती : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी.. मे..? नही आज आप ही जगादोनां.. मे जयश्री ओर बरखाको फोन करती हु.. वो दोनो अभी आपको तैयार करनेके लीये आजायेगी..

सांती : (पास आकर बैठते मुस्कुराते) अरी जाना.. मे नहाने जा रही हु.. वो दोनो चार बजे आजायेगी.. आज सीर्फ मुजे ही थोडीना तैयार होना हे..? आज तो तुजे भी मस्त दुल्हनकी तराह तैयार होना हे.. आज अच्छा मौका हे.. देखले.. मेरा बंसी तुजे देखकर पागल हो जायेगा.. हें..हें..हें..

जागृती : (सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) भाभी.. आपभीनां.. आप बहुत सरारती हो.. पहेले आप दोनोकी सादी तो होजाने दो.. बाद मे मेरे बारेमे सोचुगी.. फीर देखना जींदगी भर आपका पीछा नही छोडुगी.. अ‍ेक बार फीर अच्छेसे सोचलो.. हें..हें..हें..





सांती : (मनमे खुस होते) अरे हां हां बाबा.. मत छोडना.. तु जातो सही.. मेने सब सोचलीया हे.. तबतक मे फटाफट नहा लेती हु.. फीर तुम भी नहालेना.. वो दोनो पहेले हम दोनोको तैयार करदेगी.. फीर मम्मीजी को..

जागृती : (सामने देखते) भाभी.. क्या उनका अ‍ैसे तैयार होना जरुरी हे..? आपही उनको सरपे चडा रही हे.. फीर देखना वो कमीना रमेश अंकल उनके आस पास ही घुमता रहेगा.. कुछ काम धंधातो करेगा नही..

सांती : (खडी होते गालको चुमते) अरे जाना.. मे जैसा कहु करती जा.. वो भले घुमते रहे.. फीर कल मे तुमसे उनके बारेमे आरामसे बात करुगी.. अभी जीतना बोला हे उतना कर.. मे जा रही हु नहाने..

कहेते सांती जटसे बाथरुममे घुस गइ.. तबतक जागृती अ‍ेक नजरसे उनको देखती ही रही.. तभी उसे बंसीको जगानेका खयाल आया तो जागृती बहुत ही सरमाने लगी.. ओर उनके दिलकी घडकन तेज होगइ.. बंसीको जगाना मतलब.. वो अच्छी तराह जानती थी.. की बंसीको जगाने जायेगी.. तब वो जरुर कुछना कुछ सरारत करेगा.. ओर सांती भी तो वही चाहती थी.. की जागृती ओर बंसीके बीच नजदीकीया बढे..

इसीलीये तो उसने आज मौका देखकर जागृतीको बंसीके पास भेज दीया.. तब जागृती सरमाते धडकते दिलके साथ आयनेके सामने चली गइ.. ओर अपने बालोको हाथसे सही करने लगी.. फीर सरमाते धीरेसे दबे पांव बंसीके रुमकी ओर जाने लगी.. जैसे सबसे छुपकर अपने प्रेमीको मीलने जा रही हो.. तब सभी लोग अब भी सो रहे थे.. ओर जागृती धीरेसे दरवाजा खोलकर बंसीके रुममे चली गइ..

ओर अंदर जाते ही उसने दरवाजेको वापस धीरेसे बंध करके लोक करदीया.. ताकी बंसी उनके साथ कोइ सरारत करे तो भी कीसीको कुछ पता ना चले.. वो खुद भी तो वही चाहती थी.. की बंसी उनके साथ सबकुछ करे.. ओर वो भारी धडकनके साथ बंसीके पास चली गइ.. ओर बंसीके उपर जुकते उनको धीरेसे हीलाकर जगाने लगी.. तब दो तीन बार धीरेसे आवाज लगाकर बंसीको जगाया तब बंसी जाग गया..

ओर आंख खोलकर देखा तो जागृती उनपे जुककर उसे जगा रही थी.. तो बंसीने जागृतीको देखते ही पुरे रुममे नजर डालकर दरवाजेकी ओर देखलीया.. तो दरवाजा बंध था ओर इस वक्त जागृती उनके रुममे अकेली थी.. तो बंसी जागृतीकी ओर देखने लगा तो जागृती सरमाते हुअ‍े उनपे जुकते मुस्कुरा रही थी.. तब बंसी सबकुछ समज गया.. की अभी रुममे सीर्फ वो ओर जागृती ही हे..

ओर उसने जागृतीका हाथ पकडकर खीचते अपने उपर गीरा दीया.. तब जागृती बहुत ही सर्मसार होते बंसीके सीनेपे सर रखते गीर गइ.. ओर बंसीने जागृतीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. तो जागृतीकी मुहसे आउच.. की आवाज नीकल गइ.. ओर वो सर्मसार होते मुस्कुराने लगी.. तो बंसी भी मुस्कुराते जागृतीकी पीठको सहेलाते उनके सामने देखकर हसने लगा.. तो जागृतीने सरमाते नजरे जुकाली..

तभी बंसीने दोनो हथेलीमे जागृतीके चहेरेको थाम लीया.. ओर जागृतीकी आंखोमे देखने लगा.. तो जागृतीने अ‍ेक नजर बंसीकी ओर देखते मुस्कुराते अ‍ेक बार फीर अपनी नजरे जुकाली.. तभी उसे अपने होठोपे बंसीके होठ महेसुस हुअ‍े.. तो जागृती सीरसे लेकर पांव तक कांपने लगी.. उनकी चुत गीली होने लगी.. फीर अचानक उसने बंसीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर अपने तनको बंसीके तनसे रगडने लगी..

तो जागृतीने उनको बाहोमे भीचतेही बंसीने भी जागृतीको कसके बाहोमे भीच लीया.. फीर पलटकर जागृतीको अपने नीचे करते खुद उनके उपर लेट गया.. तब जागृती सरमके मारे पानी पानी होते मुस्मुराते बंसीसे नजरे चुराने लगी.. ओर तभी बंसीने जागृतीके होठोपे अपने होंठ रख दीये.. तो जागृती सर्मसार होते अपना मुह इधर उधर करने लगी.. तभी अचानक बंसीने अ‍ेक हाथ उनके दुधुपे रख दीया ओर हल्कासा मसलते जागृतीके होठोका रसपान करने लगा..





तब जागृती भी आंख बंध करते मदहोस होने लगी.. ओर उनका हल्कासा विरोध भी थम गया.. फीर वो भी बंसीकी पीठमे दोनो हाथ रखकर बंसीको बाहोमे भरते उनका होठ चुमते साथ देने लगी.. आखीर आज उसे बंसीको अकेलेमे प्यार करनेका मौका मील ही गया.. तो कुछ ही देरमे दोनोकी जीभ आपसमे पेच लडा रही थी.. दोनो ही अ‍ेक दुसरेके मुहको रसको पी रहे थे.. तब बंसी ओर जागृती दोनो ही उतेजीत हो गये थे..

दोनोकी आंखोमे वासनाके डोरे मंडराने लगे.. तभी बंसीने उनके टोपमे अपना हाथ घुसादीया.. ओर टोपको थोडा उचा करते जागृतीके संतरे जैसे बुब्सको थाम लीया.. ओर हल्केसे अपनी मुठीमे दबोचके मसलने लगा.. जीससे जागृती सीसकारीया करते सीहर उठी.. ओर बंसीकी ओखोमे देखने लगी.. जागृतीकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. मनसे तो चाहती थी की बंसी अभी उसे चोदले.. तब..
 
जागृती : (सर्मसार होते नसीली आंखोसे धीरेसे प्यारसे गाल सहेलाते) बस.. बस भाइ.. अभी ओर कोइ सरारत नही.. हम दोनो सादीके बाद फुरसतमे मीलेगे.. अभी मुजे जाने दो सबलोग जाग जायेगे..

बंसी : (भारी सांसोसे बुब्स सहेलाते) जागु.. आइ लव यु.. मे तुमसे भी बहुत प्यार करता हु.. तुम भी करले मुजसे सादी.. मे तुम दोनोको खुस रखुगा..

जागृती : (सरर्मसार होते मुस्कुराते) भाइ.. जानती हु में.. बस.. थोडासा इन्तजार कीजीये.. भाभी भी यही चाहती हे.. की हम दोनो मील जाये.. पहेले आप दोनोकी सादी तो होजाने दीजीये.. अब तो मे आपकी ही अमानत हु.. फीर हम भी सादी कर लेगे..

बंसी : (सरमाते धीरेसे) जागु.. अ‍ेक बात कहु..? मे हमारी सादीसे पहेले अ‍ेक बार तुमको मीलना चाहता हु.. तु.. तु समज गइना..? बस.. अ‍ेक बार तुमसे मीलन करना चाहता हु.. फीर हम दोनो सादी करलेगे..

जागृती : (सरमाते अ‍ेक नजरसे देखते धीरेसे) भाइ.. मे भी यही चाहती हु.. लेकीन अभी नही.. आपकी सभी तम्मना मे पुरी कर दुगी.. बस.. अ‍ेक बार आप दोनोकी सादी होजाने दीजीये.. फीर हमे इस घरमे अ‍ेकेले मीलनेका बहुत मौका मीलेगा.. तब आप अपनी सारी कसर पुरी कर लेना..

बंसी : (सरमाते हसते) जागु.. चलना अ‍ेक बार अभी करते हे.. अभी फटाफट सब होजायेगा.. कीसीको पता नही चलेगा.. क्युकी तुजे देखकर बहुत मन करता हे..

जागृती : (सरमाते उठनेकी कोसीस करते) भाइ पागल मत बनो.. आज आपकी सादी हे.. भाभी अभी नहाने गइ हे.. बहार नीकलती हो होगी.. हम बादमे मीलते हेना.. मे कहा आपको मना कर रही हु.. बस.. थोडा इन्तजार करनेको केह रही हु.. आज आप भाभीके साथ अच्छेसे सुहागरात मनालो.. आइ प्रोमीस.. फीर हम भी मीलेगे..

बंसी : (पागलोकी तराह चुमते) जागु.. मान भी जाओनां.. अभी फटाफट होजायेगा.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. मुजे तुमसे मीलनेका बहुत मन कर रहा हे..

जागृती : (सर्मसार होते) भाइ समजते क्यु नही..? मुजे भी आपको मीलना हे.. लेकीन आज नही.. वरना मेरी हालत खराब होजायेगी.. मे सबको क्या कहेती फीरुगी.. बस.. थोडासा सब्र करलो.. प्लीज..

लेकीन बंसीने जागृतीकी अ‍ेक नही सुनी.. ओर वो जागृतीके टोपको उचा कर देता हे.. तब जागृतीके दोनो बुब्स उछलकर बहार आगये.. तो जागृती बहुत ही सर्मसार होते उसे ढकनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. लेकीन उनसे पहेले ही बंसीने अ‍ेक बुब्सको अपने मुहमे लेलीया था.. ओर जागृतीके गोरे गोरे बुब्सको चुसते अ‍ेक हाथ नीचे लेजाकर उनकी चुतको सहेलाने लगा..

तब जागृती बहुत ही सर्मसार होते मदहोस होने लगी.. अपनी कमरको उछलने लगी.. वो बंसीके हाथको पकडकर अपनी चुतसे हटानेकी कोसीस करती रही.. तभी बंसीने अपनी मीडल उंगली जागृतीकी चुतमे घुसादी.. ओर उनकी क्लोरीटीसको छेडने लगा.. तो जागृती सातवे आसमानपे चली गइ.. वो पुरी तराह मदहोस हो चुकी थी.. ओर उसने बंसीका हाथ छोडदीया.. ओर अपनी कमर हीलाने लगी..





जागृती : (मदोहसीमे धीरेसे) भा..इ.. बस.. बस.. ओर नही.. मे बहेक जाउगी.. छोडीयेनां.. अभी घरपे महेमान हे.. अंह.. अंह.. सीसससइइइइ.. भाइ..इइइ छोडोनां.. नीचे कुछ हो रहा हे..

उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. ओर मदहोस होते हुअ‍े नसीली आंखसे बंसीकी ओर देखते उनको फीरसे रोकनेकी कोसीस करने लगी.. तभी बंसीने जागृतीकी चुतमे उगली घुसादी ओर उसे अंदर बहार करते हीलाने लगा.. तो जागृतीने आंख बंध करली.. ओर बंसीके चहेरेपे हाथ घुमाते धीरेसे मदहोसीमे बडबडाने लगी.. तब बंसी चुतमे उगली करते जागृतीके दोनो बुब्सको बारी बारी मुहमे लेकर चुसने लगा..

जागृती भी अपना सभी होस गवा चुकी थी.. ओर मदहोस होकर आधी आंख चडाते अ‍ेक हाथसे बंसीके बालोको सहेलाने लगी.. आज बंसीने उनकी चुतको छेड दीया था.. तब जागृती बहुत ही उतेजीत होते अपनी चुतमे अपने भाइसे ही उगली करवा रही थी.. वो बार बार बंसीके गलेमे हाथ डालकर अपने उपर जुकाते उनके होठोको चुमने लगी.. तभी अचानक वो अकडने लगी.. तो..

जागृती : (मदहोसीमे) अंह..अंह.. आइइइ.. भा..इ.. मुजे कुछ हो रहा हे.. कुछ कीजीयेनां..

कहेते दुसरा हाथ नीचेकी ओर लेजाते हिंमत करते बंसीके लंडको पकडलीया.. ओर हल्कासा कडकर सहेलाने लगी.. तब उसे बंसीका लंड भी लखनके लंडकी माफीक मोटा ओर बडा लगा.. तब जागृती मनमे बहुत खुस होते सरर्मसार होने लगी.. दोनो ही काम वासनामे जलने लगे.. जागृती अब बंसीसे चुदवानेके लीये पुरी तराह तैयार थी.. तभी उनकी चुतने जवाब देदीया.. ओर वो जड गइ.. ओर ठंडी होगइ..





तो वो बंसीको धका मारते अपने उपरसे हठा देती हे.. ओर जटसे खडी होते बेडसे उतर गइ.. फीर सरमाकर अपने सब कपडे ओर बालोको सही करते बंसीको ओर नसीली आंखोसे देखते मुस्कुराने लगी.. बंसी भी हसते हुअ‍े खडा होगया.. तभी जागृती अपने आपको सही करके बंसीकी बाहोमे समा गइ.. ओर बंसीके होठोपे होठ रखते कीस करदी.. फीर उनकी बाहोमे रहेकर सीनेपे सर रखते धीरेसे कहा..

जागृती : (धीरेसे) भाइ.. थेन्कस.. कीतना हसीन अहेसास था.. मे आपकी सभी इच्छा पुरी कर दुगी.. लेकीन अभी पुरी नही कर सकती.. आप बादमे करलेना.. भाइ.. आइ लव यु.. आप फीकर मत करो.. हम बहुत ही जल्द मीलेगे.. अब आप ही मेरे पती हो.. आज मेने फैसला करलीया हे.. अब मे हमेसा हमेसाके लीये आपकी होना चाहती हु.. भाइ.. मुजे जाना होगा.. भाभीने नहालीया होगा.. फीर हम आरामसे मीलकर बात करेगे..

कहेते जागृने अ‍ेक बार फीर बंसीके होठोको चुमलीया.. फीर वो जटसे बंसीसे अलग होगइ.. ओर जटसे दरवाजा खोलकर बहार नीकल गइ.. तो बंसी भी खुस होते बाथरुममे धुस गया.. जागृती जटसे वापस सांतीके पास चली गइ.. तब सांती नहाकर नीकली ही थी.. तो जागृतीकी हालत देखते ही समज गइ.. ओर जोरोसे हसने लगी.. तो जागृती बहुत ही सर्मसार होते हसने लगी.. तभी..
 
सांती : (हसते धीरेसे) कमीनी उसे जगाने भेजाथा.. सुहागरात मनाने नही.. समजी..? देख तेरी पुरी सलवार गीली होगइ हे.. जा फटाफट नहाले.. अभी वो दोनो कमीनीओ आती ही होगी.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अ‍ैसा कुछ भी नही हुआ जो आप सोच रही हो.. आज तो बाल बाल बच गइ.. वरना आज तो गइ थी कामसे..

सांती : (खुस होते धीरेसे) चल अच्छा हुआ तुम दोनोकी सेटींग होगइ.. अब जा फटाफट नहाले.. अभी सबलोग जाने लगेगे..

कहा तो जागृती सरमाकर मुस्कुराते बाथरुममे घुस गइ.. आज वो वाकइ बंसीसे बच गइ थी.. तो दुसरी ओर सामत भाइके घरपे सब लोग उठकर तैयार होने लगे.. आज बंसी ओर सांतीकी सादी थी.. तो आज भी जयश्री ओर बरखा सांतीको दुल्हनके रुपमे सजाने सुबह जल्दी आ गइ.. तब जागृती नहाकर बहार नीकल गइ.. ओर सांतीेका शींगार करनेमे मदद करते अपनी बारीका इन्तजार करने लगी..

तो दुसरी ओर आज भी ब्रिन्दा ओर बसंतीको अपने बेटेको मीलनेका फीरसे मौका मील गया था.. तो दोनो कैसे हाथसे जाने देती.. तो ब्रिन्दा जयश्रीके जातेही श्रीधरके रुममे घुस गइ थी.. ओर अभी उनके नीचे लैटते उछल उछलके चुदवा रही थी.. तो दुसरी ओर आज बसंती भी बरखाके जाते ही सामनेसे मुनाके रुममे चली गइ.. तो वो भी इस वक्त मुनाके नीचे नंगी होकर लेटी हुइ थी.. ओर मुना बसंतीकी हाथके बल उचा होकर जबर दस्त चुदाइ कर रहा था..





इधर हवेलीमे भी अ‍ेक अ‍ेक करके सब लोग जागने लगे ओर तैयार होने लगे.. लखन भी जागकर बाथरुम मे घुसा हुआ था.. ओर बाकीकी सभी लेडीस तैयार हो रही थी.. तो गांवमे भी सब तैयार होकर सामत भाइके घरकी ओर जा रहे थे.. तब सामत भाइने आज रमेशको जल्दी बुला लीया ओर सादीकी सारी कमान उनको सौंपदी थी.. ओर खुद जया भाभीके साथ नये कपडे पहेनकर इधर उधर घुम रहे थे..

अ‍ेक घंटेके बाद नीर्मला, भुमीका ओर सरला चाचीके अलावा देवायतकी पुरी फेमीली सामत भाइके घरपे आ चुकी थी.. आज पुरा गांव सामतभाइके घरपे सादीमे अ‍ेकठा हो रहा था.. ओर सामतभाइ अपनी ही विधवा बहेनकी सादी अपने बेटेके साथ करवाके गांवमे अ‍ेक नइ मीसाल कायम कर रहे थे.. तो इस मौके को देवायत ओर मंजु कैसे हाथसे जाने देते.. तो यहा आनेसे पहेले देवायतने आश्रमपे फोन करके बाबासे सभी बाते करली थी..

तो आज बाबा भी सबको समजानेके लीये आने वाले थे.. तो दुसरी ओर ब्रिन्दा ओर बसंती अपने अपने बेटेसे चुदवाकर बहुत ही खुस होगइ थी.. तो दोनो ही आज शींगार करके पटाका लग रही थी.. ओर अपने अपने नये पती.. यानीकी अपने बेटेके साथ आगइ थी.. अ‍ैसा लगता था दोनोकी नइ नइ सादीया हुइ हो.. ये दो दिनमे दोनो सहेलीया होकर अ‍ेक दुसरेसे काफी खुल चुकी थी.. हस हसके दबी आवाजमे अ‍ेक दुसरेके साथ अपने बेटेके साथ कीया हुआ प्यारका अनुभव सेर कर रही थी..

आजकी सादी गांवके लीये बहुत ही खास थी.. क्युकी आज पहेली बार अ‍ैसे आपसी रीस्तोमे सादी हो रही थी ओर वो भी सामत भाइ जैसे प्रतीसीष्ठ व्यक्तीके घरपे.. तो सब लोग गांवमे होने वाले बदलावको देखनेके लीये आरहे थे.. ओर ना सीर्फ इस गांवके बल्की आजु बाजुके गांवमे जीतने भी बडे बुजुर्ग थे.. वो मन ही मन गांवमे ओर अपने घरमे अ‍ैसे जीतने भी रीस्ते पनप रहे थे उनको स्वीकार करने लगे..

आज सामत भाइ बहुत खुस नजर आरहे थे.. जैसेही सादीका मुहुर्त हुआ तब बंसी दुल्हा बनकर मंडपपे आ गया.. तो जयाने उनका स्वागत कीया.. फीर जागृती जयश्री ओर बरखा सांतीको दुल्हनके लीबासमे पंडपके नीचे लेकर आगइ ओर उसे बंसीके सामने बीठा दिया.. तो आज सांतीके कहेनेपे बरखा ओर जयश्रीने जागृतीको भी दुल्हनकी तराह सजा दीया था.. जैसे उनकी भी सादी हो.. वो भी सजधजके दुल्हनकी तराह पटाका लग रही थी.. तो वो भी बार बार बंसीकी ओर देखकर सरमा रही थी..

फीर सामतभाइ ओर जयाभाभी तैयार होकर कन्यादान करने बैठ गये.. तब मंत्रोचारके साथ पंडीत बंसी ओर सांतीके विवाहकी वीधीया करने लगे.. तो सांतीकी आंखसे खुसीके मारे आंसु छलक रहे थे.. तब उनके पास बैठी जागृती ओर जयश्री उनके आंसु पोछती रही.. तो बंसीने भी अपने खास दोस्त लखनको अणवरके तौरपे अपने पास बीठा दीया था.. तो जागृती उनको देखकर भी बहुत सरमा रही थी..

तो आज दुसरे गांवसे भी बहुत महेमान आये हुअ‍े थे.. तो सभी महेमानोको देवायत जवेरीलाल बनजारीलाल ओर रमेश सम्हालके बैठे थे.. तो लखनके सभी दोस्तो भोजनकी व्यवस्थामे लगे हुअ‍े थे.. ओर खुद लखन बंसीके साथ उनका अणवर बनके बैठा हुआ था.. तब बंसीके साथ साथ लखन ओर जागृतीका भी आंख मीचोलीका खेल चल रहा था.. तो इस खेलमे आज जयश्री ओर बरखा भी सामील हो चुकी थी..

तो दुसरी ओर बंसीने भी आज सुबह अपनी बहेन जागृतीके साथ खुलकर प्यार कीया था.. तबसे उनका दिल भी जागृतीको मीलनेके लीये मचल रहा था.. जीनकी वजहसे अभी आंखोसे इसारा करते जागृतीको मीलनेके लीये केह रहा था.. तब जागृती भी आंखोके इसारोसे हां कहेते बहुत ही सर्मसार होने लगती.. आज बंसी ओर लखन दोनो ही उनकी ओर इसारा कर रहेथे.. तब जागृतीको दोनोको सम्हालना मुस्कील होने लगा..

तब उसने सोचलीया की सारी जींदगी अपने भाइ बंसीके साथ गुजारनी हे.. ओर लखनके साथ भी रीलेशन रखना हे.. तब वो बारी बारी दोनोको अ‍ेक दुसरेसे छुपकर इसारोसे जवाब देती रही.. तो दुसरी ओर जागुती ओर लखनके बीच चल रहे आंखोके इसारोका मजा लेते बरखा ओर जयश्री भी बार बार लखनके पेन्टकी ओर देख लेती थी.. ओर सरमाकर हस हसके दबी आवाजमे अ‍ेक दुसरेके कानमे बाते करते हस रही थी..

तब पुनम सृती ओर मंजु भी लखन ओर ये सबकी हरकत देखकर हस रही थी.. तो सृती भी कभी कभी लखनको लेकर पुनमके कानमे कुछ कहेते हसने लगती थी.. तब पुनम बहुत ही सर्मसार हो जाती थी.. जाहीरसी बात हे कल रातसे ही दोनोके मनमे लखनके लंडको लेकर उनको देखनेकी उत्सुक्ता बढ गइ थी.. ओर इस बारेमे अब दोनो खुलकर बीन्दास्त बाते करने लगी थी..

आज रमा ओर नीलम भी साथ साथ बैठी थी.. ओर उनकी बगलमे भावना ओर लता बैठकर आपसमे बाते कर रही थी.. तब रमा ओर नीलम लखनको रीजानेके लीये पुरी कोसीसमे लगी हुइ थी.. तो आज लखन नीलमके बजाये रमापे कुछ ज्यादा ही ध्यान देने लगा था.. आज भानु भी अपना पुराना प्यार बसंतीको देखकर मन ही मन खुस हो रहा था.. ओर बसंतीकी ओर देखकर हसनेकी कोसीस करते आंखोसे इसारा कर रहा था..

तब इन दोनोको नही पता था.. की बसंतीका लडका मुना बसंती ओर भानुपे नजर गडाये दुरसे खडा होकर देख रहा हे.. तभी बसंती ओर भानुकी नजर मीली.. तो बसंतीने भानुकी ओर अपना मुह बीगाडते दुसरी ओर मुह घुमा लीया.. तो भानु नीरास होगया.. ओर वो खडा होकर भोजन वाले पंडालमे चला गया.. अब वो पुरी तराह समज गया की अब बसंतीने उनको छोड दिया हे..

तो ये देखकर मुना मन ही मन खुस होने लगा.. की चलो अब उनकी मांको भानुमे अब कोइ इन्ट्रेस नही रहा.. लेकीन भानुने देवायतको बसंतीको ना मीलनेका प्रोमीस देकर भी आज बंसतीको पानेकी कोसीस की.. जीनकी वजहसे मुना नाराज होगया.. तब उसने भी मनमे कुछ सोच लीया.. जो भानुके लीये बहुत ही खतरनाक था.. तो दुसरी ओर सादीका माहोल देखकर दो लोग अ‍ेक अ‍ेक करके चुपकेसे अपने घर चले गये..

ओर घर जातेही अ‍ेक रुममे घुस गये.. ओर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. फीर कुछ ही देरके बाद वासनामे अंधे होकर अ‍ेक होगये.. दोनो अ‍ेक दुसरेके साथ घमासान चुदाइ करनेमे मसगुल हो गये.. ओर वो थे जीतुलाल.. ओर उनकी भाभी वृन्दा.. जो दोनो सभी घरवालेको सादीमे होनेका फायदा उठा रहे थे.. ओर चुदाइ करते करते अपने बच्चेको लेकर फ्युचरकी प्लानींग कर रहे थे.. वृन्दा अब पुरी तराह जीतुलालसे सादी करके उनकी हो जाना चाहती थी..





वृन्दा चुदवाते हुअ‍े बार बार जीतुलालको उनको प्रेगनेन्ट करनेका दबाव डाल रही थी.. ताकी उनका अपने पती जवेरीलालसे भी छुटकारा हो जाये.. ओर वो जीतुलालकी बीवी बनकर सारी जींदगी जीतुलालके साथ रेह सके.. अब ना वृन्दा जीतुलालके बगैर रेह सकती थी.. ओर ना ही जीतुलाल वृन्दाके बगैर.. दोनोने अ‍ेक दुसरेको अपना पती पत्नी मानलीया था.. जो इस वक्त चुदाइमे मसगुल होकर अपनी वासना सांत कर रहे थे..
 
दुसरे गांवके बहोत सारे सरपंच पंचायतके सदस्तो के साथ गांवके प्रतीसीष्ठ व्यक्ती आये हुअ‍े थे.. तभी अ‍ेक कार आकर रुक गइ.. तो सब लोग उधर देखने लगे.. तो देवायत मुस्कुराते जटसे कारकी ओर चला गया.. तो साथमे मंजु भी हसते हुअ‍े खडी होगइ.. तो सब लेडीस मंजुकी ओर देखने लगी.. तो वो भी जटसे देवायतके पास कारकी ओर चली गइ..तो कुछ ही देरके बाद अंदरसे बाबा मुस्कुराते हुअ‍े बहार नीकले..

तो देवायत ओर मंजुने हसते हुअ‍े उनके पैर छु लीये.. तो सादीमे आये सभी लोग बाबाको देखकर खुस होते खडे होगये.. ओर उनके पैर छुने लगे.. तो बाबा सबको हस हसके आशीर्वाद देते रहे.. तब देवायत ओर मंजुसे बात करके बाबा मुस्कुराते मंडपकी ओर आने लगे.. तो सामत भाइकी खुसीका कोइ ठीकाना नही था.. वो जटसे खडे होगये ओर हाथ जोडकर बाबाके पांव छुने लगे.. तो बाबाने उनको आशीर्वाद दीया..

फीर बंसी ओर सांतीकी ओर चले गये.. ओर उनको भी सादीका आशीर्वाद दीया.. तब गांवके सभी लोग हाथ जोडकर सांत होगये.. फीर बाबाने सबको प्रकृतीके ज्ञानके साथ हिमाचलके राजाकी कहानी सुनाइ.. ओर उसी राजाके देवायतके घर अ‍ेक खास मक्सद से दुबारा जन्म लेनेकी बात कही.. ओर उसी कारण देवायतके घर पीछली तीन पीढीसे अपनी बहेनसे सादीको लेकर गांवमे रीस्तोमे बदलाव होने बात कही..

तो सुनकर गांवके सभी लोग दंग रेह गये.. तब सबको पता चला की हवेलीमे पीछली तीन पीढीसे सभी मर्द अपनी बहेनसे क्यु सादी कर रहे हे.. तब ज्यादातर नां सीर्फ इस गांव बल्की दुसरे गांवके लोगोने भी बाबाकी बातको मान लीया.. ओर आने वाले बदलवावको स्वीकार करलीया.. तभी जोसमे आकर जवेरीलालने खडे होकर अ‍ेक हप्तेके बाद अपनी बेटी जयश्री ओर अपने भाइके लडके श्रीधरकी सादीकी बात सबके सामने कहेते सबको सादीका न्योता दिया..

तो सुनकर जयश्री बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर अपना मुह जागृतीके पीठमे छुपाते मुस्कुराने लगी.. तो गांव वाले जयश्रीकी ओर देखते तालीया बजाने लगे.. तो सब लोग श्रीधरको भी बधाइआ देने लगे.. तब जवेरीलाल भी खुस होगये.. फीर बाबा सबको आशीर्वाद देकर जाने लगे.. तब देवायत मंजुके साथ पुनम सृती भी सामील होगइ.. ओर देवायतने बाबाको अपने घरपे चलनेकी बात कही..

तो बाबाने मुस्कुराकर फीर कभी आनेको कहेते पुनम सृतीसे भी कुछ बाते करली.. ओर आशीर्वाद दीया तो पुनम ओर सृती भी बहुत ही खुस होगइ.. गांवमे कीसीको उमीद नही थी.. की बाबा अ‍ैसे अचानक आयेगे.. जब बाबा चले गये.. तब पुनम मंजुको अ‍ेक तरफ हाथ पकडकर लेगइ.. ओर उसने कल रात लताके साथ जो भी कुछ हुआ वो सब बता दीया.. फीर उसने लताको सबकुछ कहेनेकी बातकी तब..

पुनम : (धीरेसे) दीदी.. लगता हे अब हमे लताभाभीको सबकुछ बता देना चाहीये.. क्युकी परसोतो वो भी सहेर चली जायेगी ओर मे भी चली जाउगी.. ओर अभी वो दोनो उनसे चीपकी ही रहेती हे.. तो उनको बुलाकर बात करलु..?

मंजुला : (मुस्कुराते) क्या..? अभी तक तुमने कीसीको बताया नही..? पुनो.. जा आज ही करले बात.. लेकीन ध्यान रखना.. उन दोनोको इस बारेमे पता ना चलजाये.. वरना तुम दोनो भाइ बहेनका सारा प्लान चोपट होजायेगा.. ओर लताको भी कहेना उनके साथ अपने व्यवहारमे कोइ बदलाव ना लाये.. पहेले उनके साथ रहेती थी अ‍ैसे ही रहे..

पुनम : (मुस्कुराते) जी दीदी.. मे सब देख लुगी.. आप उनकी टेन्शन मतलो..

मंजुला : (हसते धीरेसे) मुजे टेन्शन उनकी नही हे.. वो तो तुम भाइ बहेन सम्हाल ही लोगे.. टेन्शन मुजे तेरी ओर सृतीकी हे.. हें..हें..हें.. कमीनीओ.. जीस तरह तुम दोनो आगे बढ रही हो.. तो मुजे पका यकीन हे.. वो कमीना भी तुम दोनोको छोडने वाला नही हे.. हें..हें..हें.. कल रात तुम दोनो क्या आंख मीचोली खेल रहे थे..?

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो.. भाइ मुजसे इसारा कर रहेथे.. आइ अ‍ेम सोरी..

मंजुला : (प्यारसे गाल सहेलाते) अरे मेरी बच्ची सोरी क्यु बोल रही हे..? मेतो सीर्फ मजाक कर रही थी.. बाकीतो तुजे भी सब पता हे सबके साथ क्या होने वाला हे.. तु अ‍ैसे गभरा मत.. अब तुजेही तो सबको सम्हालना हे.. लेकीन पुनो.. तुजे अ‍ेक बात कहु..? जीस तराह तु अपने बडे भाइको प्यार कती हे.. उसी तराह हमारा लखनभी तुजे आज भी इतना प्यार कता हे.. वो अपने पहेले प्यारको कभी नही भुल पाया.. हो सके तो उनका प्यार कबुल करले..

पुनम : (आंख गीली करते) दीदी.. मे भी उसी उलजनमे हु.. मे उनका प्यार कैसे कबुल करलु..? क्युकी मेरी चाहत बडे भाइ हे.. मुजे भी पता हे वो मुजसे आजभी उतना प्यार करते हे जीतना पहेले करते थे.. कल भी वो अपना प्यार जता रहे थे.. तो मेने मना करदीया..

मंजुला : (आंख पोछते) पुनो दुखी मत हो.. हमे सीर्फ अपनी भावनाओको नही देखना चाहीये.. कभी कभी हमे ना चाहते हुअ‍े भी दुसरेकी भावनाओका खयाल रखना पडता हे.. वो भी तो हमारा भाइ ही हे.. वैसे भी हमे कीसीकी थोडीसी जींदगानीमे उनको कुछ सुख देना पडे.. तो इसमे बुराइ भी क्या हे.. बाकी तुम समजदार हो.. अबतो हमारे बडे भाइको भी इस रीस्तोसे कोइ प्रोबलेम नही हे.. तो फीर तु क्यु डर रही हे..? आखीर तुम सबको दोनो भाइको ही तो सम्हालना हे..

पुनम : (सरमाके मुस्कुराते) जी दीदी.. मे सबकुछ समज गइ.. बस.. थोडासा संकोच हो रहा था.. जो आज आपने दुर करदीया.. दीदी.. फीर भी दिलके अ‍ेक कोनेमे डर लग रहा हे.. कही मे बडे भैयाको धोखा तो नही दे रही..

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) पुनो.. धोखा तो तुम अब भी दे रही हो.. लेकीन देवुको नही धिरेनको.. तो क्या तुजे दुख होता हे..? नहीनां.. तो फीर ये तो हमारा छोटा भाइ हे.. तो फीर तुजे क्या प्रोबलेम हे.. मत भुलो हम सब कौन हे.. ओर हम सभी यहा कीस मक्सदसे आइ हे.. ये बात तुजे हमारी सभी सौतनोको बताना होगा..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) जी दीदी.. तो क्या इस बारेमे मे हमारी सभी सौतनोसे बात करलु..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां मेरी बच्ची.. अभी मे वो ही तो केह रही थी.. अब इस जीम्वेवारी तो तुजे ही उठानी हे.. बस ध्यान रखते सबको विस्वासमे लेले.. मुजे पुरा यकीन हे.. तेरी बात कोइ नही टालेगा.. ओर वैसे भी कहा कीसीके साथ जबरदस्ती करनी हे.. सब अपनी मरजीकी मालीक हे.. बाकीका काम तो हमारा लखनही सम्हाल लेगा.. फीर विजयका भी तो देखना हे.. बस.. जबतक वो इधर हे तुम उनका अच्छेसे खयाल रखना.. जैसा मेने कहा हे करते जा.. ओर हो सके तो इस बारेमे लखनसे भी बात कर लेना..





पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) जी दीदी.. हम तीन तो रेडी हे.. अब लताभाभीको भी सबकुछ बताकर विस्वासमे लेना हे.. वो भी मान जायेगी.. बस.. इसीलीये आपको पुछने आइ थी.. लेकीन लखन भैयाको..? दीदी.. उनको बतानेकी मेरी हींमत नही होगी.. आप ही बतादोनां..

मंजुला : (मुस्कुराते) चल ठीक हे.. मे ही उनसे बात करलुगी.. वैसे भी बाबाका तेरे उपर पुरा आशीर्वाद हे.. तुम जरुर कामयाब होगी.. ओर सुन.. लखन अब बेकाबु होने लगा हे.. मे उनको भी सब बाते बता दुगी.. ताकी तुम सबका संसार अच्छेसे चले.. चल अब हम सबके साथ बैठते हे.. तुम लतासे बात करले..

फीर मंजुला सृती पुनम सबलोग वापस आकर सबके साथ बैठ गये.. आज पुनमने मंजुसे लताके बारेमे सब कुछ पुछ लीया.. तो आज मंजुने भी इन्डारेक्ट पुनमको लखनके साथ आगे बढनेकी बात करली.. सब लोग वापस सादीके माहोलमे खुस होकर अ‍ेक दुसरेके साथ गांवमे होने वाले बदलावकी बाते करने लगे.. तभी जीतुलाल ओर वृन्दा भी घरपे दो दो बार घमासान चुदाइ करके सही होकर वापस आगये..

तब जीतुलाल वृन्दाको पता ही नही थाकी जवेरीलालने सबके सामने श्रीधर जयश्रीकी सादी अ‍ेक हप्तेके बाद फीक्स करदी हे.. तभी पांसके गांवका अ‍ेक सरपंच भी अपनी बीवीके साथ आगया.. उनकी बीवी बहुत ही खुबसुरत ओर पुरी हाइट वाली थी.. जो बहुत ही कामुक पटाखा लग रही थी.. जो सब लेडीसके पास जाकर बैठ गइ.. वो दोनो थे बसंतीका भाइ विनोद ओर उनकी नइ भाभी गीता थी.. जो पहेले बसंतीकी मौसी ओर बादमे उनकी नइ मां फीर उनकी भाभी होगइ थी..

तब बसंती उनको देखकर चौंकनी होगइ.. क्युकी वो आकर बरोबर बसंतीके पीछे ही बैठी हुंइ थी.. बसंती इसी गांवमे रहेती हे वो नातो विनोदको पता था ओर नाही गीताको.. तभी बसंती ब्रिन्दाके कानमे कुछ कहेने लगी.. तो ब्रिन्दा भी पीछे मुह करते गीताकी ओर देखने लगी.. फीर वो भी बसंतीके कानमे कुछ कहेने लगी.. तब बसंती सर्मसार होते पीछे मुडकर देखते हसने लगी.. तभी गीताका ध्यान बसंतीकी ओर गया..

जो दोनो उनकी ओर देखकर हसते बाते कर रही थी.. तब गीता बसंतीको देखते ही चोंक गइ.. ओर कुछ परेसान होने लगी.. क्युकी गीता बसंतीको अच्छी तराह पहेचान चुकी थी.. तभी बंसी ओर सांती फेरेके लीये खडे हो गये.. तो सबलोग वापस सादी देखनेमे बीजी होगये.. तभी पुनम सृती भावना ओर लता साथ ही बैठे थे.. तब पुनमने लताके कानमे कुछ कहा..

ओर सृती भावनाको कानमे कुछ कहेकर खडी होकर पीछे चली गइ.. तो लताभी सबकी ओर नजर डालते धीरेसे सबकी नजर बचाते वहासे सरक गइ.. ओर पुनमके पास पीछे चली गइ.. तब पुनम धीरेसे सरकते हवेलीकी ओर चलने लगी.. तो लताभी जटसे आकर पुनमके साथ होगइ.. ओर दोनो साथ चलते हवेलीकी ओर बाते करते जाने लगी.. आज पुनमने लताको सबकुछ बतानेका फैसला करलीया था....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९६

ओर सृती भावनाको कानमे कुछ कहेकर खडी होकर पीछे चली गइ.. तो लताभी सबकी ओर नजर डालते धीरेसे सबकी नजर बचाते वहासे सरक गइ.. ओर पुनमके पास पीछे चली गइ.. तब पुनम धीरेसे सरकते हवेलीकी ओर चलने लगी.. तो लताभी जटसे आकर पुनमके साथ होगइ.. ओर दोनो साथ चलते हवेलीकी ओर बाते करते जाने लगी.. आज पुनमने लताको सबकुछ बतानेका फैसला करलीया था....अब आगे

पुनम : (साथ चलते मुस्कुराते) हां.. भाभी.. बोल.. कल क्या केह रही थी तुम..?

लता : (मुस्कुराते) पुनोदीदी.. आप मुजसे कुछ कहेने वाली थी.. क्युकी परसो तो आप भी चली जायेगी.. ओर हम भी सहेर चले जायेगे तो हमे बात करनेका मौका ही नही मीलेगा.. बस.. सीर्फ इतना बता दीजीये आपको या मंजु भाभीको लखनको जडी बुटी देनेकी क्या आवस्यक्ता पड गइ.. की इनका इतना बडा होगया..

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. सुन भाभी.. अब आज मे जो भी बात करु.. वो सभी बाते तुमको अपने तक ही सीमीत रखना हे.. भुलसे भी रमा भाभी या नीलमको मत बताना.. वरना बहुत कुछ अनर्थ हो सकता हे.. क्युकी आज मे आपको सबकुछ बता देना चाहती हु.. तुमसे कुछ भी छीपाना नही चाहती..

लता : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) दीदी.. अनर्थ हो सकता हे मतलब..? क्या रमा भाभी ओर नीलुकी वजहसे..? लेकीन कैसे..? छीपाना नही चाहती मतलब..? मे कुछ समजी नही..

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) हां भाभी.. ये सच हे.. मे आपको सबकुछ बता दुगी.. आपको तो पता हे मुजे ओर मंजुभाभीको हमारे बाबाकी दी हुइ शक्तिओके माध्यमसे सबकुछ पता चल जाता हे.. तो लखन भैयाको जडी बुटी देनेका फैसाला भी मेरा ओर मंजु भाभीका था.. ओर वो भी बाबाबके कहेने पे.. ताकी आगे चलकर वो भी अ‍ेक साथ कइ ओरतोको संतुस्ट कर सके.. लेकीन ये बात अभीके लीये नही हे.. अभी इस बातका कोइ मायना नही.. सब बाते आगेके लीये हे..

लता : (दोनो धीरेसे चलते) दीदी.. आगेके लीये..? ओर खुद बाबाने अ‍ैसा कहा हे..? मतलब मे कुछ समजी नही जरा खुलकर बताइअ‍ेनां..





पुनम : ठीक हे भाभी.. मे सबकुछ बताती हु.. सुन.. तुजे तो पता हेनां हम सब कोइ सामान्य ओरते नही हे.. हम सभी उस लोककी परीया यातो अप्सराये हे.. हम यहा अपने स्वामीओके लीये आइ हे.. भाभी.. हमे पता हे.. तुम यहा सीर्फ लखन भैयाके लीये नही.. हमारे बडे भाइके लीये आइ हो.. लखनसे सादी तो सीर्फ यहा आनेका अ‍ेक जरीया हे.. सही मायनेमे तुम बडे भैयाकी बीवी हो.. ओर तेरी ही कोखसे वो हमारे राजाकी चहीती रानी जन्म लेगी.. हमारा यहा जन्म लेनेका उदेस्य कुछ ओर ही हे..

लता : (सरमाते मुस्कुराते) हां दीदी.. इस बारेमे पहेलेभी हमारे बीच सब बाते हुइ हे.. दीदी.. अगर मे बडे भाइकी बीवीहु.. तो फीर हमारे लखनका क्या होगा..? क्युकी इनको जेलना अब मेरे बसकी बात नही हे.. इसीलीये मेने कल ही उसे दुसरी सादीके लीये केह दीया हे.. तो सुनकर वो थोडा नाराज होगये थे.. दीदी.. वो मुजे बहुत प्यार करते हे.. आप अ‍ेक बार केह रहीथीनां.. उनका दुसरी ओरतोके साथ भी रीलेशन हे.. तो उनको कहीयेना उनके साथ ही..

पुनम : (परखते) भाभी.. तो फीर तुजे बुरा नही लगेगा..? हंम..

लता : (मुस्कुराते साथ चलते) दीदी इसमे बुरा लगनेकी क्या बात हे.. वैसे भी हमारे खानदानमे तो सब दो दो तीन तीन सादीया करते ही आये हे.. मानोनां दो तीन सादीओकी अ‍ेक परंपरा ही होगइ हे.. बडे भैयाकी भी तीन तीन सादीया हुइ हे.. ओर हम जैसी ओरत उनको प्यार करती हे वो अलग..

इनमे भावना भाभी ओर आप भी बाकात नही हे.. तो फीर लखन दुसरी सादी करले या दुसरी ओरतसे रीलेशन रखले तो मुजे क्या आपती हो सकती हे..? वैसे भी अ‍ेक दिनको मुजे बडे भैयाके साथ सादी करनी ही हे.. वो भी तो सब आपने ही कहा था..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. तो फीर सुन.. लखन भैयाको जडबुटी देना आवस्यक हो गया था.. क्युकी हमारा जन्म लेनेका उदेस्य अलग हे.. आपकी सादीसे पहेले लखन भैयाका दो ओरतोके साथ रीलेशन था.. अ‍ेक हम स्कुलमे थे तब.. ओर अ‍ेक हम स्कुलसे वापस घर आगये तब.. आप दोनोकी सादीसे पहेले वो उन्हीके साथ रीलेशनमे थे.. ओर अपनी प्यास बुजाते थे.. जीनके साथ उन्होने गांर्धव सादी भी करली हे.. तो तुम सबको वो कैसे संतुस्ट करते..? बस.. इसीलीये हमने उसे जडी बुटी दी हे..

लता : (थोडी मायुस होते) दीदी.. तो फीर मुजे पहेले बताया क्यु नही..? क्या उनको या आपको मुजपे विस्वास नही था..? क्या मे उनको मना करती..?

पुनम : (थोडा सीरीयस होते) नही भाभी.. बात विस्वास ओर अविस्वासकी नही हे..? जीस तराह आप बडे भैयाको प्यार करती हे.. उसी तराह लखन भैया भी उन दोनोसे प्यार करते हे.. ओर आप बहुत ही भोली ओर सेन्सेटीव हे.. उनको डर थाकी कही आपको पता चलेगा तो आप उनको छोडके चली ना जाओ.. ओर कुछ सचाइ अ‍ैसी हे जो जानकर आपको दुख होता.. बस.. इसी डरकी वजहसे वो आपको केह नही पाये.. बाकी कुछ बाते हे जो आज आपको पता चल जायेगी.. देखना सुनकर वीचलीत मत होजाना..

लता : (आंख गीली करते) दीदी.. मे इतनी कमजोर नही हु.. जीतनी आप ओर लखन समज रहे हे.. मेने तो आपको खुलकर सब बता दीया हे.. की हां मे बडे भाइसे प्यार करती हु.. ओर उनको ही पाना चाहती हु.. तो फीर लखनका दुसरी ओरतके साथ रीलेशनसे मुजे क्या फर्क पडता हे.. आपको तो सब पता चल जाता हे तो आपको भी मालुम हे की मे क्या चाहती हु.. मेरी कीताब तो खुली हे.. तो फीर आप मुजे सचाइ बतानेमे संकोच क्यु कर रही हे..? बता दीजीये मुजे सब.. मे भी खुलकर जीना चाहती हु..

पुनम : (धीरेसे साथ चलते) भाभी.. तो फीर सुन.. ओर अभी ये बात तुम तेरे तक ही सीमीत रखना.. क्युकी तुम जानकर अभी विचलीत भी हो सकती हो.. ओर मे ये बात आपको इसीलीये बता रही हु.. ताकी आगे चलकर हम चारोको ही इस घर ओर हमारी विरासतको सम्हालना हे.. क्युकी तुम हमारे लीये कीतनी इम्पोर्टन्ट हो तुजे तो पता ही नही हे..

लता : (आंसु पोछते मुस्कुराते) दीदी.. वो सब पता हे मुजे.. की मेरा रोल कीतना अहेम हे.. आज मुजे सबकुछ खुलकर बता दीजीये.. ओर हम चारो कौन हे..? वो भी बता दीजीये.. जीनका अभी आपने जीक्र कीया.. वो रमाभाभी ओर नीलुके बारेमे.. मैने तो हमारी सादीसे पहेले भी बहुत कुछ देखा हे.. मे इतनी कमजोर नही हु.. जीतनी आप समज रही हे..

पुनम : (गाल सहेलाते) भाभी.. आपको सायद नही पता.. मंजु भाभी मेरी बडी बहेन हे.. वो नीर्मला आंटी ओर हमारे बापुकी लडकी हे.. उसी तराह तुम भी हमारी बहेन हो.. आपके बापु सरला चाचीको सारीरीक सुख देनेमे कमजोर थे.. तो सरला चाचीने हमारे बापुके साथ ही रीलेशन रखलीया था.. सीर्फ आप ही नही.. भानुभाइ भी हमारे भाइ हे..

ओर अ‍ेक सचाइ ओर बतादु.. मंजु भाभी ओर आपकी तराह सृतीभाभी भी हमारी बहेन हे.. हालाकी इस बातका सृतीभाभी ओर भानुभाइको अभी पता नही हे.. तो आपभी खयाल रखीयेगा.. की अभी उन दोनोको इस बात मालुम ना पडे.. भाभी.. हम सब आपसमे बहेने हे.. ओर मजेकी बात ये हे.. हम सब अपने भाइकी बीवीया हे.. हें..हें..हें..
 
लता : (आंसु बहाते हग करते) दीदी.. बस..? इतनीसी बात करनेके लीये डर रही थी..? अगर मुजे पहेले पता होता तो मे पहेलेसे ही इस घरमे बडे भाइकी बीवी बनकर आ चुकी होती.. दीदी.. इस बातका मुजेतो पहेलेसे ही सक था.. क्युकी मेरी मां बहुत ही कामी ओरत हे.. सीर्फ हमारे बापुके साथ ही नही..

मेरी सादीसे पहेले ही उनका बडेभैयाके साथ भी रीलेशन हे.. वो भी मुजे पता हे.. मेने दोनोको कइ बार सेक्स करते देखा भी हे.. तब ही मेने बडेभैयाका हथीयार देख लीया था.. तभी तो मे इनकी ओर आकर्सीत हुइ हु.. बस.. अब आप मुजे भी अपनी छोटी बहेनके रुपमे स्वीकार कर लीजीये..

पुनम : (आंसु पोछते) बस.. बस दीदी.. अब सांत होजाओ.. अब मे आपको कभी भाभी नही कहुगी.. आजसे आप मेरी छोटी बहेन हे.. दीदी.. आगे चलकर मुजे..आपको.. सृती भाभीको ओर भावना भाभी को ही सब सम्हालना हे.. वो कैसे इस बारेमे आप तीनो मुजपे छोड दीजीये.. इनमे अभी लखन भैया भी हमारे साथ हे.. बस.. अभी सीर्फ इतना कहेना हे आप रमाभाभी.. ओर नीलमको ज्यादा तवजो मत देना..

लता : (मुस्कुराते) हां दीदी.. येतो बताइअ‍े उन दोनोसे हमे क्या खतरा हे.. ताकी मेभी चौकनी रहु..

पुनम : दीदी.. अभी जैसा चल रहा हे चलने दो.. अब आप नीलमको धिरेनसे प्यार करनेमे नही रोकेगी.. उनको जो भी करना हो करने दो.. क्युकी मेभी धिरेनको प्यार नही करती.. ओर मुजे यहा वापस भी तो आना हे.. जब मे यहा हमेसाके लीये वापस आजाउगी.. तब हम चारोको इस हवेलीको सम्हालना हे.. ओर रमाभाभीके साथ भी अ‍ैसा व्यवहार करना.. जैसा अभी करती आइ हो.. क्युकी उन दोनोको पता नही चलना चाहीये की हमे उन दोनोके बारेमे सब पता हे..

लता : (मुस्कुराते) दीदी तो फीर रमा भाभी ओर नीलुसे कैसा खतरा हे..? इस बारेमे खुलकर बताइअ‍ेनां..

पुनम : (मुस्कुराते) हां दीदी.. अब इस बातको सुनकर आप वीचलीत मत होना.. क्युकी इसके लीये मेने लखन भैयासे मीलकर कुछ प्लान भी बनाया हे.. बस.. लखन भैयाको जडी बुटी देनेका अ‍ेक कारण येभी हे..

लता : (सरमाकर हसते) वैसे भी हमारा भाइ कमीना.. हे भी बहुत ठरकी.. हें..हें..हें..

पुनम : (जोरोसे हसते) कमीनी गालीयातो मत दे पती हे तेरा.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) दीदी.. तब पता नही थाकी मेरा भाइ ही मेरा पती हे.. वरना उसे गालीया देते प्यार करती.. हें..हें..हें.. इसका मतलब आखीर मैनेभी अपने भाइसे ही सादी की हे.. हें..हें..हें.. दीदी वो रमाभाभीके बारेमे बताइअ‍ेनां..

पुनम : (मुस्कुराते) हां सुन.. रमा भाभीकी तेरे मामाके साथ सादी नही हुइ थी तभीसे ही उसे पैसोसे बहुत लगाव हे.. ओर उपरसे तेरी नानीने उनको पैसेके बदले खरीदा हे.. मानोना.. वो बहुत ही गरीब थे.. जब तेरे मामाका अ‍ेक्सीडन्ट हुआ तब भानुभाइने ही सब खर्चा दिया हे.. तभी वो पैसे देखकर भानुभाइकी ओर ढल गइ.. ओर उनके साथ रीलेशन रखलीये.. वो पैसोके लीये कीसीभी हद तक जा सकती हे..

लता : (आस्चर्यसे धीरेसे) दीदी.. तो क्या वो भाइसे प्यार नही करती थी..? कहीयेना आपको तो सब पता चलजाता हे..

पुनम : (मुस्कुराते साथ चलते) हंम.. सुन.. उसने भानुभासे इसीलीये सादी की.. क्युकी वो समजती थीकी होस्पीटलमे अपने पतीपे इतना खर्चा कीया.. तो इनके पास बहुत पैसे होगे.. लेकीन यहा आकर उनका सपना सपनाही रेह गया.. फीर उसने बडे भैयाको भी रीजानेकी बहुत कोसीसकी.. लेकीन उनमे भी वो कामयाब नही हुइ.. क्युकी बडे भाइ.. भानुभाइको कभी धोखा नही देते.. इसीलीये भाइने उनपे कोइ ध्यान नही दीया..

लता : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? कमीनी अ‍ैसी हे..? फीर..

पुनम : (मुस्कुराते) अरे दीदी.. आगेतो सुन.. सुनकर तेरा तो दिमाग ही चकरा जायेगा.. जब उनकी दाल वहा नही गली.. तब उसने हमारे लखन भैयाको फसालीया.. इसके लीये उसने अ‍ेक बहुत ही खतरनाकर चाल चली हे.. ओर वो भी अपनी बेटीको जरीया बनाके.. तुम सुनोगी तो उनको गालीया देने लगोगी..

लता : (धीरेसे) दीदी आज उनके बारेमे मुजे सबकुछ बताही दीजीये.. कमीनी दीखनेमे तो कीतनी भोली हे..

पुनम : दीदी.. जब आप ओर भाइ नीलुको धिरेनके वहासे लेकर आये.. फीर नीलु अपने घरपे चली गइ तब उसने नीलुको समजाकर अपने विस्वासमे लेलीगा.. ओर अपने प्लानमे सामील करलीया.. अपने प्लानके मुताबीक उसने हमारे लखन भैयाको नीलुके प्यारमे फसाकर उनके साथ फीजीकल रीलेशन रखेनेके लीये नीलुको राजी करलीया हे.. ताकी नीलु उनकी पढाइके आखरी साल लखन भैयासे प्रेगनेन्ट होजाये.. तबतक वो आइ पीलकी गोली लेती रहेगी..

लता : (चोंकते देखते) व्होट..? लेकीन क्यु..? वो नीलुको लखनसे क्यु प्रेगनेन्ट करवाना चाहती हे..? ओर नीलु इस कामके लीये राजी भी कैसे होगइ..?

पुनम : (कातील मुस्कानसे) दीदी.. आखीर नीलु भी तो उनकी बेटी हे.. जीस तराह रमा भाभीको पैसा प्यारा हे उसी तराह उनकी बेटी भी पैसोकी पुजारन हे.. उनके भी महेंगे महेगे सौक हे.. इसीलीये तो धिरेनसे प्यार करती हे.. क्युकी धिरेन बेन्कमे सरकारी जोब करता हे.. तो वो समजती हे उनके पास पैसोकी कमी नही हे.. इसीलीये तो धिरेनको प्यार करती हे.. देखा नही.. वो कैसे जुठ बोलकर धिरेनके साथ उनके घरपे रंगरेलीया मना रही थी.. ओर धिरेनने भी उनको महेगे कपडे ओर महेगा फोन भी तो दीलवाया हे..

लता : (आस्चर्यसे) अच्छा.. तो ये माजरा हे.. फीर..? इनमे रमाभाभी नीलुको लखनसे प्रेगनेन्ट करवाना क्यु चाहती हे..? कोइ खास वजह..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. ताकी इस बातका हमारे बडे भाइको पता चल जाये.. की लखनने नीलुको प्रेगनेन्ट करदीया हे.. ताकी वो नीलुकी सादी लखन भैयासे करवादे.. ओर वो कायदेसे लखन भैयाकी बीवी होजाये.. ताकी इस हवेलीकी आधी जायदादकी मालकीन बन जाये.. फीर दोनो ही मां बेटी दोनो भाइके बीच फुट डालवाके जायदादका बटवारा करवा दे.. ओर हमारी आधी जायदादकी मालकीन बन सके..

लता : (आस्चर्यसे धीरेसे) ओह.. माय.. गोड.. कुती.. कमीनी.. रंडीकी ओलाद.. दीदी.. कमीनीओने क्या प्लान बनाया हे.. अच्छा हे आपको ओर बडी दीदीको सब पता चल जाता हे.. वरना ये दोनो कमीनीतो हमारा घर ही बरबाद कर देती.. कमीनीओको छोडना मत.. क्या कोइ पैसोके लीये इतना नीचे गीर सकती हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां दीदी.. तभी तो हमे लखन भैयाको ये जडीबुटी देनेकी आवस्यक्ता पडी.. हमे भी पता था लखन भैयाको ओर उनके सभी दोस्तोको मुना भाइने स्टेमीनाके लीये आयुर्वेदीकका कोर्ष करवाया हे.. फीर भी हमने इनको जडीबुटी दी.. ताकी इनका हथीयारभी बडा ओर मोटा होजाये.. हमे लखन भैयाका अ‍ैसे बहुत उपयोग करना हे.. उन मा बेटीकी तो फाडके रखदेगे.. कमीनी.. अपनी बेटीको लखन भैयासे चुदवानेका बहुत सौक हेनां.. अब देखो भैया दोनोकी क्या हालत करते हे..

लता : (सरमाकर हसते) दीदी.. क्या रमा भाभीको भी.. मतलब.. वो भी..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. आपको पता नही वो भी चुदवानेकी कीतनी सौकीन हे.. नीलुसे पहेले तो वो लखन भैयाका लेनेके लीये उछल रही हे.. आपको पता नही हे वो भी लखन भैयाको प्यार करने लगी हे.. क्युकी अब उनको भानुभाइ संतुस्ट नही करपाते.. ओर उनको भानुभाइमे अब कोइ इन्ट्रेस भी नही हे.. क्युकी भानुभाइ भाइके प्रती बहुत ही वफादार हे.. उनको पता हे भानुभाइ उनका इस जायदादके मामलेमे साथ नही देगे.. तो उसने लखन भैयाको फसालीया हे..

लता : (थोठी सोचमे) दीदी.. ये दोनो कमीनी तो बहुत ही खतरनाक नीकली.. लखनको कहेना पडेगा.. की इनसे बचके रहे..

पुनम : (वापस मुडकर चलते मुस्कुराते) नही दीदी.. इसकी चीन्ता तुम मत करो.. तुम लखन भैयाको कुछ मत कहेना.. इन दोनोको तो मे ओर लखन भैयाही नीपट लेगे.. बस.. तुम सीर्फ हमारे बडे भाइपे ध्यान देना.. चलो हम वापस चलते हे..

कहेते पुनम ओर लता हवेली तक बाते करते पहोंच गइ थी.. दोनोही अपनी बातोमे मसगुल थी.. लेकीन पुनम हवेलीके आतेही वापस मुड गइ.. लताका पोजीटीव रीस्पोन्स देखकर पुनमने आज लताको सबकुछ बतानेका फैसला करलीया.. तो लता भी पुनमकी बातोसे खुस नजर आ रही थी.. दोनो बाते करते करते चलकर वापस सामत भाइके घरकी ओर चल पडी..
 
लता : (हां मे गरदन हीलाते) ठीक हे दीदी.. मे आपकी सब बाते समज गइ.. मुजे समय समयपे मार्गदर्शन करीयेगा.. लेकीन दीदी.. अब मे लखन भैयाको क्या कहुगी..?

पुनम : लखनभैया..? हें..हें..हें..

लता : (सरमाकर हसते) हां.. अब भाइको भाइ नही तो क्या कहुगी..? कमीनेने.. अपनी बहेनकी ठोक ठोकके हालत खराब करदी.. हें..हें..हें.. दीदी.. कल रात जब अंदर डालानां.. मेरी तो चीख ही नीकल गइ.. अ‍ैसा लगा कीसीने बडा डंडा घुसादीया हो.. हें..हें..हें.. दीदी.. क्या उनको पता हे मे उनकी बहेन हु..?

पुनम : (हसते) हां.. कुछ दिन पहेले ही मेने उसे बताया.. हें..हें..हें.. तो कमीने सुनकर बहुत ही खुस हो रहेथे..

लता : (हसते) हां वैसे भी हमारे खानदानमे सबको अपनी बहेनको ठोकने मे ही मजा आता हे.. तो खुस तो होगेंनां.. हें..हें..हें.. पता नही आप उनसे कैसे बच गइ.. हें..हें..हें.. आप दोनो तो साथमे पढते थेनां..? तो फीर कभी आप पे लाइन मारनेकी कोसीस नही की..?

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. वो मुजे पानेकी पुरी कोसीस कर चुके हे.. आज अ‍ेक ओर सचाइ आपको बता ही देती हु.. आज मे आपसे कुछ छुपाना नही चाहती.. हांलाकी इस बारेमे मंजुभाभीके अलावा सृतीभाभी ओर भावना भाभी भी जानती हे.. की जब हम दोनो स्कुलमे थे.. तब ही लखन भैया मुजको प्यार करने लगे थे.. लेकीन तब मेरी चाहत बडे भैया थे.. मे उनको प्यार करती थी.. तो लखन भैयाको मैने ज्यादा तवजो नही दी.. ओर उनका मुजे प्यार करनेका सपना सपना ही रेह गया..

लता : (खुस होते हसते) दीदी.. क्या केह ही हो..? इस बारेमे मुजेतो पता ही नही था.. लेकीन आपको कैसे पता चला..? क्या कभी उसने अपने प्यारका इजहार कीया था..?

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) नही.. दीदी.. उनकी प्यार जतानेकी हिंमत ही नही हुइ.. वरना आज मे उनकी बीवी होती.. ओर तब मेरे पास ये सब शकितया भी नही थी.. मुजे तो शक्तिया मीली तब पता चला.. ओर जब उनको भी ये पता चलाकी मे बडे भैयाकी बीवी हु.. तबसे वो मुजे भाभी कहेने लगे.. ओर हम दोनो ज्यादा नजदीक आगये.. तब उसने अ‍ेक दिन मेरी मस्तीया करते सबकुछ बता दीया.. की मे भी आपसे प्यार करता था.. लता दीदी.. क्या आपके साथ भी अ‍ेक हादसा हुआ हेनां..?

लता : (सर्मसार होते धीरेसे) हां दीदी.. वो भी तो हमारे भाइ ही हे.. तो वो कैसे अछुत रेह सकते हे.. इस बातका तो कीसीको पता भी नही हे.. मे ही जानती हु की उस रात मे भानु भाइसे कैसे बच गइ.. वरना उस रात पका वो मेरा बलात्कार कर देते.. हें..हें..हें.. (सरमाते हसते) दीदी.. अब तो बता दीजीये वो दोनो कौन हे जीन्होने लखनके साथ गांधव विवाह करलीया हे.. ओर मेरी सौतने हे..

पुनम : (मुस्कुराते) लता.. अ‍ेक तो हम स्कुलमे थे तब मेरी होस्टेलकी मालकीन.. ओर दुसरी हमारी रजीया..

लता : (सरमाते धीरेसे) क्या..? हमारी रजीया..? दीदी.. तो फीर रजीयाको कहीयेना.. अब वो भी हमारे साथ ही सोये.. क्युकी अब मे लखनको अकेली नही जेल पाउगी..

पुनम : (मुस्कुराते) ठीक हे लता.. मे भाभीसे कहुगी वो उनसे बात करलेगी.. उनको बताना भी हे की मेने तुजे सबकुछ बता दीया हे.. की तुम भी हमारी बहेन हो.. ओर सुन.. अ‍ेक राजकी बात ओर.. दया भी हमारी बहेन हे.. वो भी बडे भैयाके साथ रीलेशनमे हे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाकर हसते) दीदी.. हमारे बापु कीतने सौकीन ओर रंगीन मीजाजके रहे होगे.. यहा सबको अपनी बहेनकी लेनेमे ही मजा आता हे.. ओर हम जैसी बहेने भी कम नही हे.. कमीनी सबकी सब अपने भाइसे चुदवानेके लीये बेताब हे.. इनमे आप भी बाकात नही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाकर हसते) हां.. सही कहा तुमने.. लता.. मे भी तुम्हारी तराह सुरुसे ही भाइको पसंद करती थी.. ओर मंजु भाभी डीलीवरीमे होस्पीटलमे थी तब हमने सादी भी करली.. लता मे बहुत खुस हु.. की इस वक्त मे हमारे भाइके बच्चेको मेरी कोखमे पाल रही हु.. अ‍ेक दिन अ‍ैसा भी आयेगा.. की तुम भी हमारे बडे भाइसे प्रेगनेन्ट होजायेगी.. ओर हमारे स्वामीकी चहीती रानीको जन्म देगी..

लता : (सर्मसार होते मुस्कुराते) दीदी.. वो सबतो ठीक हे.. लेकीन मे लखनको क्या कहुगी.. अगर उसे पता चल गयाकी मे भी बडे भाइके साथ रीलेशनमे हु.. तो हम उनको कैसे सम्हालेगे.. क्युकी अभी आपने कहानां की हम चारोके साथ लखन भैया भी हमारे साथ सामील हे..

पुनम : (मुस्कुराते) वो सब तु मुजपे छोडदे.. क्युकी आज तुजे वो बात भी बता देती हु.. जो मंजु भाभीने तैय कीया हे.. अब तुजे इस बातके लीये लखन भैयासे गभरानेकी जरुरत नही पडेगी..

लता : (आस्चर्य भावसे देखकर मुस्कुराते) दीदी.. आज तो अ‍ेक के बाद अ‍ेक राज खोल रही हे.. मुजे सबकुछ बता दीजीये.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. सुनो.. आपतो जानती हे भाइकी लीगल ओर इलीगल.. मतलब जीनके साथ गांधर्व सादीया की हे.. सब मीलाकर उनकी कीतनी बीवीया हे..? मंजुभाभी.. चंदाभाभी.. सृतीभाभी.. के अलावा मे.. फीर रश्मीभाभी.. हमारी वंदना..

हाल हीमे उनकी मम्मी चारुभाभी.. हमारी नीशाभाभी.. दोनोके साथ भी भाइ सादी कर चुके हे.. ओर दो तीन ओर हे जो उनकी जींदगीमे आगेथी.. इनमेसे अ‍ेक तुम भी हो.. इसके अलावा कबीलेकी अ‍ेक लडकी.. फीर हमारी दया बहेन.. ओर दुसरी ओरतोके साथ रीलेशन हे वो अलग..

लता : (जोरोसे हसते) ओह गोड.. भाइ कीतनी बीवीया सम्हालेगे..? क्या भैया सबको टाइम दे पाते हे..? हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) हां.. वो हीतो.. दीदी.. यही तो अ‍ेक समस्या खडी हुइ हे.. की भाइ सबको टाइम नही दे पाते.. इसीलीये मंजु भाभीने कुछ फैसला कीया हे.. ओर इस बातकी उन्होने भाइसे परमीशन भी लेली हे.. तो भाइ भी इस बातके लीये मान गये हे..

लता : (उत्सुक्तासे मुस्कुराते) दीदी.. प्लीज.. जल्दी बताइअ‍ेना भाभीने भाइसे कोनसी बात मनवाली हे..

पुनम : (हसते) दीदी.. भाइकी भी इतनी बीवीया हे.. ओर आने वाले वक्तमे लखन भैयाकी भी दो तीन बीवीया होगी.. तो भाइ भाभी दोनोने डीसाइड कीया हे.. की दोनो भाइकी जीतनी भी बीवीया हे.. वो सभी बीवीओको दोनो भाइ मीलकर सम्हाल ले.. लेकीन इनमे दोनोकी सहमती होनी चाहीये.. यहा जबरदस्ती कुछ भी नही होगा..

लता : (मुहपे हाथ रखकर आस्चर्यसे हसते) दीदी.. क्या कहे रही हे आप..? इसका मतलब.. अब वो दोनो भाइ हम सबको.. मतलब..? आप समज गइनां..? क्या ये कुछ अजीब नही हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही लता.. इनमे कुछ भी अजीब नही हे.. हमारे उस लोकमे कहा कोइ रीस्ते नाते हे.. ओर हम सभी यहा हमारे स्वामीके लीये तो आइ हे.. जो कभी हमने उनको हर जन्ममे पानेकी कामना की थी.. तो ये दोनो भाइ उन्हीका तो अंस हे.. वरना सोच.. तु जब बडे भाइके साथ रीलेशन रखेगी..

तो क्या लखन भैयाको अच्छा लगेगा..? नहीनां.. ओर वैसे भी भाइको भी इतनी सादीया करनी ही थी.. वरना उस वचनका क्या होगा.. जो पीछले जन्ममे उनकी बीवीओको दे चुके हे.. इसीलीये उन्होने भी स्वीकार करलीया हेकी वो सबको टाइम नही देपायेगे.. इसीलीये भाइ भाभीने मीलकर ये फैसला लीया हे..
 
लता : (मनमे खुस होते हसते) ओह गोड.. हमे क्या क्या देखनेको मीलेगा.. दीदी.. तो इसका मतलब आप भी दोनो भाइसे.. आइ.. मीन.. भाइकी सभी बीवीया भी लखनके साथ..

पुनम : (थोडी सीरीयस होते) हां लता.. मत भुलो हम सब कौन हे.. हम सब उस्ी हिमाचलके राजाकी रानीया थी.. जो दुबारा जन्म लेकर उन राजाके लीये आइ हे जो मंजु भाभीके दुसरे जन्ममे उनकी कोखसे जन्मेगा.. हम सब यातो परीया हे या अप्सराये.. हम सबने कभी कामना कीथी.. की हर जन्ममे हमे यही पतीके रुपमे मीले.. ओर हमारे दोनो भाइ उसीका अंस हे.. इसीलीये हम सबका फर्ज हे उन दोनोको खुस रखे.. दरसल हम सभी उन दोनो भाइकी बीवीया हे..

लता : (मुसकुराते) दीदी उन कहानीको तो मे अच्छी तराह जानती हु.. ओर ये भी पता हे हम सब कौन हे.. तो क्या इसीलीये..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. तो फीर सुन.. तुजे अ‍ेक बात ओर बतादु.. फीर तुम ही डीसाइड करना आगे जाकर तुजे क्या करना हे.. भाभीने कहा हे.. अब हम सब की उमर थम जायेगी.. हम सब अ‍ैसेही जवान रहेगी.. ओर जब हमारा विजय बडा होजायेगा तब भाइ भी बुढे होजायेगे.. वो तब हमे कीसीको सारीरीक सुख देनेमे सक्षम नही रहेगे.. तब हम सब क्या करेगी..? क्या तुम अब मर्दके बीना रेह पाओगी..? बता..

लता : (सरमाते मुस्कुराते) नही दीदी.. वैसे भी हमारे घरकी सभी ओरते बहुत ही कामुक हे.. उनको हर दीन अपनी चुतमे अपने पतीका लंड चाहीये.. तो हम क्या करेगी..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. इसीलीये भाइ ओर भाभीने ये फैसला लीया हे.. तुम सोच जब भाइही सक्षम नही रहेगे.. तब अभी हमारे लखन भैया हे.. फीर हमारा विजय भी बडा होजायेगा.. वो तो इन दोनोसे भी ज्यादा अयास होगा.. फीर उनका बेटा जो स्वयंम वो राजा होगा वो आयेगे.. तब ये सब रीस्तेनाते धरेके धरे रेह जायेगे.. तब हमे यहा बहुत कुछ देखनेको मीलेगा.. तब हम चारो होगी.. तब तुम क्या करोगी..?

लता : (हसते) दीदी.. आपकी सभी बाते मे समज गइ.. मतलब हमे अपनी सोच बदलनी होगी.. हम सबको हमारी सरम त्यागनी होगी.. क्या यहीनां..? हें..हें..हें.. मतलब अब इनमे आप भी बाकात नही रहेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हां दीदी.. मे अभी कुछ बता नही सकती.. लेकीन सायद तुम्हारी बात सच हे.. दीदी.. बडे भैयाका भी लखन भैयाके जीतना ही हे.. अब तुम क्या करोगी..?

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) नही दीदी.. मेने सादीसे पहेले बडे भाइका भी देखा हे.. लेकीन लखनका तो उनसे भी बडा दीख रहा हे.. ओर वैसे भी बडे भैयासे मीलकर आप लोगोको तो कुछ नही हुआ.. लेकीन दीदी.. मैने इतना बडा कभी नही देखा.. इसीलीये अ‍ेक डर लग रहा था.. लेकीन लगता हे अब मुजे अ‍ेक बारतो ये दर्द जेलना ही पडेगा..

पुनम : (हसते) हां.. अब आइ लाइनपे.. दीदी.. क्या लखन भैयाका सचमे बडे भाइसे बडा दीखता हे..?

लता : (सरमाकर हसते धीरेसे) हां दीदी.. मेने तो भाइका भी देखा हे.. ओर अब लखन भैयाका भी देखा.. बापरे कीसी गध्धेका लग रहा हे.. हमारी तो फाडके रख देगा.. आप बचके रहीयो.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते धीरेसे) कमीनी तुम तो मुजे भी डरा रही हो.. मुजे इस बारेमे सृती भाभीसे भी बात करनी पडेगी.. चल सबके साथ बैठते हे.. सादी भी होगइ होगी..

लता : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. क्या इस बारेमे लखन भैया भी सब जानते हे..?

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे सरमाकर) नही दीदी.. मुजे तो उनको बतानेमे भी सरम आ रही हे.. तो मैने मंजु दीदीको कहा हे.. वो उनसे बात करलेगी.. क्युकी ये सब उनको भी बताना पडेगा.. अब चलीये सबके साथ बैडते हे..

कहेते दोनो वापस मंडपके नीचे आगइ.. तो मंजु दोनोकी ओर देखकर हसने लगी.. तब पुनम ओर लता दोनोही सरमाकर हसने लगी.. ओर सबके साथ बैठ गइ.. आज पुनमने लताको सबकुछ खुलकर बता दीया था.. इस बातसे लता भी अ‍ेक्साइटेड होगइ थी.. तबतक सादीका फेरे भी होगये.. ओर सादी संपन होगइ.. तो सबलोग बंसी ओर सांतीको आशीर्वाद देने लगे.. ओर सामतभाइ भी खुस होते सभी महेमानोके पास आकर सबको गले मीलकर मीलने लगे..

तबतक भोजनकी भी तैयारीया होगइ थी.. तो रमेश सबको भोजनके लीये बुलाने आगया.. तो सभी जेन्ट्स सादीकी चर्चा करते भोजन पंडालकी ओर जाने लगे.. ज्यादातर लोग इस सादीसे खुस थे तो कुछ लोगोको अ‍ैसी सादी रांच नही आइ.. सभी जेन्ट्स भोजन करने चले गये.. तो गीताने बसंतीको बुलानेकी कोसीस की तो बसंतीने मुस्कुराकर बडे ही आरामसे गीताको पहेचाननेसे इन्कार करदीया..

तो गीताको बहुत बुरा लगा.. ओर वो बार बार धीरेसे बसंतीकी माफी मांगने लगी.. लेकीन हर बार बसंतीने उनको पहेचाननेसे इन्कार करती रही.. ओर वो ब्रिन्दाको लेकर गीतासे दुर चली गइ.. तब गीताकी आंख गीली होगइ.. ओर वो मंजुके पास जाकर बैठ गइ ओर उनसे बाते करने लगी.. तब मंजुके सामने गीताकी पुरी कुंडली आगइ.. ओर उसने गीताका भवीस्य भी जानलीया..
 
तबतक लखन भी बंसीको उनके रुममे छोडकर भोजन पंडालमे आगया.. ओर सभी दोस्तोके साथ मीलकर काम करने लगा.. तभी उनका ध्यान मुनाके मामा विनोदकी ओर गया तो वो मुस्कुराते विनोदके पास चला गया.. विनोद लखनको देखते ही उनके गले लग गया ओर दोनो हस हसके बाते करने लगे.. तब लखनने विनोदके साथ घनीष्ठा बढानेके लीये गांवमे बडी होस्पीटल ओर बडी स्कुलके बारेमे बाते करने लगा..

ओर बातो ही बातो मे लखनने उनकी बीवीको इस बडी स्कुलमे जोबकी ओफर करदी.. जीसे सुनकर विनोद बहुत खुस होगया.. बस.. यही तो लखन चाहता था.. आज लखनने मुनाका काम करते मछलीको पहेला दाना डाल दीया था.. ओर लखन विनोदसे बात करते वहासे मुनाके पास चला गया.. लेकीन उनको मुना कही नही मीला.. तो उसने दुसरे दोस्तोको मुनाके बारेमे पुछा.. तो कीसीको नही पताथा की मुना कहा गया..

दरसल बाबाके जाते ही मुना अपने घरपे चला गया था.. फीर घरसे कुछ जडी बुटीका पावडर मीलाकर दवाइ बना लेता हे.. फीर दवाइकी अ‍ेक पुडी बनाकर जेबमे रख लेता हे.. ओर जेबमे छुपाकर वापस आगया.. तब लखन उनको ढुंढते दीखाइ दीया.. तो मुना लखनके पास चला गया.. तब लखन उनको विनोदकी ओर इसारा करते हसने लगा.. तो मुना भी समज गया की लखन जरुर कुछना कुछ बाते करके आया हे..

फीर मुना धीरेसे सरकते श्रीधरके पास चला गया.. ओर उनके कानमे कुछ कहेने लगा.. तो श्रीधर भी थोडा गुस्सा होकर भानुकी ओर टेडी नजरसे देखते हां मे गरदन हीलाता रहा.. दोनोने मीलकर कुछ प्लान बनालीया.. जीसके बारेमे मुनाने श्रीधरको अभी कीसीको भी ना कहेनेकी बात करली.. फीर दोनो अपने अपने कामपे लग गये.. तो दुसरी ओर आज बंसी ओर सांतीकी सादी होगइ थी..

तो वो सादीके जोडेमे बैठकर नइ नइ दुल्हनकी तराह बहुत ही सरमाते अपने रुममे बैठी थी.. तब बरखा जयश्री ओर जागृती सांतीकी टांग खीचाइ करते छेड रही थी.. तो सांती बहुत ही सर्मसार होते मुस्कुराने लगती थी.. तब बंसी अपने रुममे जाकर फ्रेस होने लगा.. तभी कीसीने जागृतीको आवाज लगाइ.. तो वो खडी होकर हसते हुअ‍े बहार चली गइ.. तो जयश्री बरखा ओर सांती हस हसके बाते करने लगी..

जब जागृती बहार नीकली तो उनको वहा कोइ नही दीखा.. तो वो वापस जाने लगी.. तभी उनका ध्यान बंसीके रुमकी ओर गया.. ओर उसे आज सुबह बंसीको जगाने गइ तब बंसीने उनको कैसे दबोच लीया था.. ओर अपनी नीचे लीटाकर प्यार कीया था.. जागृतीको उनके साथ कीये हुअ‍े प्यारकी याद आगइ.. तब जागृतीकी दिलकी धडकन बढने लगी.. ओर अ‍ेक बार फीर उनको बंसीको मीलनेकी इच्छा होगइ..

तो दुसरी ओर इस वक्त घरमे कोइ नही था.. ओर सांती भी जयश्री बरखाके साथ उनके रुममे गप्पे लगा रही थी.. तब जागृतीकी बंसीके रुममे जानेकी उत्सुक्ता बढ गइ.. अ‍ेक बार फीर जागृतीकी चुत हरकतमे आकर फडफडाने लगी.. जैसे जागृतीसे पहेले उनकी चुतको बंसीके साथ मीलन करनेकी जल्दी हो.. ओर वो धीरेसे दबे पांव अ‍ेक बार फीर बंसीके रुमकी ओर चली गइ.. तब बंसी फ्रेस होकर दरवाजेकी ओर आ रहा था..

जैसेही जागृती बंसीके रुममे घुसी.. तो बंसीसे टकरा गइ तो सरमाकर हडबडा गइ.. तब रुममे कोइ नही था.. तो बंसीने जटसे बहारकी ओर देख लीया.. जब बहार भी कोइ नही दीखा तो बंसीने जटसे जागृतीका हाथ पकडकर रुममे खीच लीया ओर दरवाजा बंध करदीया.. तब जागृती बहुत ही सर्मसार होते हसते हुअ‍े बहारकी ओर जाने लगी.. तभी बंसीने जागृतीको अपनी बाहोमे दबोच लीया.. ओर उनके बुब्सको थामते मसलने लगा.. ओर उनके होठोपे कीस करते जागृतीके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा.. तब..





जागृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) भाइ.. बस.. बस.. ओर नही.. अभी घरपे सब महेमान हे.. हम बादमे प्यार करेगे.. छोडदो मुजे.. कोइ आजायेगा..

बंसी : (होट चुमते) जागु.. क्या मस्त लग रही हे.. अ‍ैसा लगता हे दुल्हन सांती नही तुम हो.. चलनें हम भी सादी करलेते हे.. प्लीज.. मे तेरे बीना नही रेह सकता.. कल मीलनेको कहा था.. तो क्यु नही आइ..? हंम..? सुबह भी नही करने दीया..

जागृती : (जोरोसे बाहोमे भीचते) भाइ.. मे कैसे आती..? भाभीने मुजे कामपे रोक लीया था.. भाइ.. इसीलीये मे आपको सुबह मीलने आइ थी.. हमने प्यार भी तो कीया था.. आज आप भाभीके साथ अपनी सुहागरात अच्छेसे मनालो.. फीर हम बादमे मीलीगे.. तब आप अपनी सारी तम्मना पुरी करलेना.. अब तो मे भी आपकी होगइ हु.. अब आपही मेरे पती होगे..

बंसी : (बुब्स दबाकर मसलते) जागु.. प्लीज.. मुजसे दुर मत होना.. मे तुमसे भी जल्दी सादी करना चाहता हु..

जागृती : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. जानती हु मे.. मेभी आपसे सादी करना चाहती हु.. ओर भाभी खुद चाहती हेकी मेभी आपसे सादी करलु.. लेकीन भाइ.. मे इस बारेमे अ‍ेक बार भाभीसे बात करलु.. फीर हम तीनो डीसाइड करलेगे की कब हमे सादी करनी हे.. तब तक हम दोनो अ‍ैसेही मीलेगे.. ओर आपकी कुछ तम्मना भी हे.. तो मे उसे भी पुरी करना चाहती हु.. भाइ.. फीकर मत करो.. हम हमारी सादीसे पहेले ही मीलेगे..

जागुती : (गलेको चुमते) ठीक हे जागु.. चलना अभी कोइ नही हे.. मे तेरे साथ मीलन करना चाहता हु.. मे तेरे बीना नही रेह सकता.. आज क्या पटाका लग रही हे.. जीतो चाहता हे आज सांतीके साथ तेरे साथ भी सादी करके हमारी सुहागरात मनालु..

जागृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते) भाइ.. मे सीर्फ आपके लीये ही सजी थी.. बस.. थोडासा सब्र करलो.. हमारी सादी भी होगी ओर हमारी सुहागरात भी होगी.. मे भी तो यही चाहती हु.. हम जरुर मीलेगे लेकीन अभी नही.. अभी मुजे छोड दीजीये.. कोइ कभी भी इधर आ सकता हे.. वो दोनो भी मेरे पीछे पडी हेकी मे भी आपस सादी करलु.. भाइ छोडदो मुजे.. आइ प्रोमीस.. हम दोनो बहुत ही जल्द मीलेगे.. बस..?

कहातो बंसीने जागृतीके बुब्सको मसलते होठोको चुमकर छोड दीया.. तो जागृती बंसीकी ओर कामुक नजरोसे देखते हसते हुअ‍े जटसे अपने बालो ओर कपडेको सही करने लगी.. फीर अचानक बंसीकी बाहोमे समा गइ.. ओर बंसीके होठोपे कीस करके हसते हुअ‍े बहारकी ओर भाग गइ.. तब बंसी भी खुसीके मारे हसने लगा.. ओर जागृतीको जाते हुअ‍े देखता रहा.. फीर कुछ देरके बाद वो भी कंपलीट होकर बहार आगया ओर भोजनके पंडालमे चला गया....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
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