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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १९५
उसने देवायतके साथ मीलकर लीये फैसलेके बारेमे ओर इसके अलावा भी लखनको सबकुछ बतानेका फैसला करलीया.. तब देवायत भी अपना तगडा लंड मंजुकी चुतकी गहेराइओ मे उतारके उनके सीनेपे ढेर होकर पडा था.. आज मंजुने देवायतको तीन तीन बार नीचोड लीया था.. लेकीन उनकी चुत अब भी प्यासी थी.. तभी तो उसने अपनी चुतसे देवायतके लंडको नही नीकालने दिया.. ओर अैसे ही पुरी रात बीत गइ....अब आगे
सब लोग सादीकी थकानकी वजहसे नींदकी गहेराइओमे चले गये थे.. ओर सबको लगा.. की आज सुबहका सुरज बहुत ही जल्दीसे ना नीकले.. सुबह साडे तीन बजे घरके सधी लोग ओर महेमान सो रहे थे.. तब सांतीकी आंख खुल गइ.. क्युकी आज खुदकी सादी थी.. तो आज रात उनको नींद ही नही आइ.. ओर उसने जागृतीको भी जगा दीया.. तो जागृती भी जागकर अपने बीस्तरपे ही बैठ गइ.. तब..
सांती : (सरमाते धीरेसे) जागु.. मे नहाने जा रही हु.. तो तुम तेरे भाइको भी जगादे.. आज उनको भी तैयार होनेमे टाइम लगेगा.. जा जगादे उसे..
जागृती : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी.. मे..? नही आज आप ही जगादोनां.. मे जयश्री ओर बरखाको फोन करती हु.. वो दोनो अभी आपको तैयार करनेके लीये आजायेगी..
सांती : (पास आकर बैठते मुस्कुराते) अरी जाना.. मे नहाने जा रही हु.. वो दोनो चार बजे आजायेगी.. आज सीर्फ मुजे ही थोडीना तैयार होना हे..? आज तो तुजे भी मस्त दुल्हनकी तराह तैयार होना हे.. आज अच्छा मौका हे.. देखले.. मेरा बंसी तुजे देखकर पागल हो जायेगा.. हें..हें..हें..
जागृती : (सर्मसार होते अेक मुका मारते) भाभी.. आपभीनां.. आप बहुत सरारती हो.. पहेले आप दोनोकी सादी तो होजाने दो.. बाद मे मेरे बारेमे सोचुगी.. फीर देखना जींदगी भर आपका पीछा नही छोडुगी.. अेक बार फीर अच्छेसे सोचलो.. हें..हें..हें..

सांती : (मनमे खुस होते) अरे हां हां बाबा.. मत छोडना.. तु जातो सही.. मेने सब सोचलीया हे.. तबतक मे फटाफट नहा लेती हु.. फीर तुम भी नहालेना.. वो दोनो पहेले हम दोनोको तैयार करदेगी.. फीर मम्मीजी को..
जागृती : (सामने देखते) भाभी.. क्या उनका अैसे तैयार होना जरुरी हे..? आपही उनको सरपे चडा रही हे.. फीर देखना वो कमीना रमेश अंकल उनके आस पास ही घुमता रहेगा.. कुछ काम धंधातो करेगा नही..
सांती : (खडी होते गालको चुमते) अरे जाना.. मे जैसा कहु करती जा.. वो भले घुमते रहे.. फीर कल मे तुमसे उनके बारेमे आरामसे बात करुगी.. अभी जीतना बोला हे उतना कर.. मे जा रही हु नहाने..
कहेते सांती जटसे बाथरुममे घुस गइ.. तबतक जागृती अेक नजरसे उनको देखती ही रही.. तभी उसे बंसीको जगानेका खयाल आया तो जागृती बहुत ही सरमाने लगी.. ओर उनके दिलकी घडकन तेज होगइ.. बंसीको जगाना मतलब.. वो अच्छी तराह जानती थी.. की बंसीको जगाने जायेगी.. तब वो जरुर कुछना कुछ सरारत करेगा.. ओर सांती भी तो वही चाहती थी.. की जागृती ओर बंसीके बीच नजदीकीया बढे..
इसीलीये तो उसने आज मौका देखकर जागृतीको बंसीके पास भेज दीया.. तब जागृती सरमाते धडकते दिलके साथ आयनेके सामने चली गइ.. ओर अपने बालोको हाथसे सही करने लगी.. फीर सरमाते धीरेसे दबे पांव बंसीके रुमकी ओर जाने लगी.. जैसे सबसे छुपकर अपने प्रेमीको मीलने जा रही हो.. तब सभी लोग अब भी सो रहे थे.. ओर जागृती धीरेसे दरवाजा खोलकर बंसीके रुममे चली गइ..
ओर अंदर जाते ही उसने दरवाजेको वापस धीरेसे बंध करके लोक करदीया.. ताकी बंसी उनके साथ कोइ सरारत करे तो भी कीसीको कुछ पता ना चले.. वो खुद भी तो वही चाहती थी.. की बंसी उनके साथ सबकुछ करे.. ओर वो भारी धडकनके साथ बंसीके पास चली गइ.. ओर बंसीके उपर जुकते उनको धीरेसे हीलाकर जगाने लगी.. तब दो तीन बार धीरेसे आवाज लगाकर बंसीको जगाया तब बंसी जाग गया..
ओर आंख खोलकर देखा तो जागृती उनपे जुककर उसे जगा रही थी.. तो बंसीने जागृतीको देखते ही पुरे रुममे नजर डालकर दरवाजेकी ओर देखलीया.. तो दरवाजा बंध था ओर इस वक्त जागृती उनके रुममे अकेली थी.. तो बंसी जागृतीकी ओर देखने लगा तो जागृती सरमाते हुअे उनपे जुकते मुस्कुरा रही थी.. तब बंसी सबकुछ समज गया.. की अभी रुममे सीर्फ वो ओर जागृती ही हे..
ओर उसने जागृतीका हाथ पकडकर खीचते अपने उपर गीरा दीया.. तब जागृती बहुत ही सर्मसार होते बंसीके सीनेपे सर रखते गीर गइ.. ओर बंसीने जागृतीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. तो जागृतीकी मुहसे आउच.. की आवाज नीकल गइ.. ओर वो सर्मसार होते मुस्कुराने लगी.. तो बंसी भी मुस्कुराते जागृतीकी पीठको सहेलाते उनके सामने देखकर हसने लगा.. तो जागृतीने सरमाते नजरे जुकाली..
तभी बंसीने दोनो हथेलीमे जागृतीके चहेरेको थाम लीया.. ओर जागृतीकी आंखोमे देखने लगा.. तो जागृतीने अेक नजर बंसीकी ओर देखते मुस्कुराते अेक बार फीर अपनी नजरे जुकाली.. तभी उसे अपने होठोपे बंसीके होठ महेसुस हुअे.. तो जागृती सीरसे लेकर पांव तक कांपने लगी.. उनकी चुत गीली होने लगी.. फीर अचानक उसने बंसीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर अपने तनको बंसीके तनसे रगडने लगी..
तो जागृतीने उनको बाहोमे भीचतेही बंसीने भी जागृतीको कसके बाहोमे भीच लीया.. फीर पलटकर जागृतीको अपने नीचे करते खुद उनके उपर लेट गया.. तब जागृती सरमके मारे पानी पानी होते मुस्मुराते बंसीसे नजरे चुराने लगी.. ओर तभी बंसीने जागृतीके होठोपे अपने होंठ रख दीये.. तो जागृती सर्मसार होते अपना मुह इधर उधर करने लगी.. तभी अचानक बंसीने अेक हाथ उनके दुधुपे रख दीया ओर हल्कासा मसलते जागृतीके होठोका रसपान करने लगा..

तब जागृती भी आंख बंध करते मदहोस होने लगी.. ओर उनका हल्कासा विरोध भी थम गया.. फीर वो भी बंसीकी पीठमे दोनो हाथ रखकर बंसीको बाहोमे भरते उनका होठ चुमते साथ देने लगी.. आखीर आज उसे बंसीको अकेलेमे प्यार करनेका मौका मील ही गया.. तो कुछ ही देरमे दोनोकी जीभ आपसमे पेच लडा रही थी.. दोनो ही अेक दुसरेके मुहको रसको पी रहे थे.. तब बंसी ओर जागृती दोनो ही उतेजीत हो गये थे..
दोनोकी आंखोमे वासनाके डोरे मंडराने लगे.. तभी बंसीने उनके टोपमे अपना हाथ घुसादीया.. ओर टोपको थोडा उचा करते जागृतीके संतरे जैसे बुब्सको थाम लीया.. ओर हल्केसे अपनी मुठीमे दबोचके मसलने लगा.. जीससे जागृती सीसकारीया करते सीहर उठी.. ओर बंसीकी ओखोमे देखने लगी.. जागृतीकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. मनसे तो चाहती थी की बंसी अभी उसे चोदले.. तब..
अध्याय - १९५
उसने देवायतके साथ मीलकर लीये फैसलेके बारेमे ओर इसके अलावा भी लखनको सबकुछ बतानेका फैसला करलीया.. तब देवायत भी अपना तगडा लंड मंजुकी चुतकी गहेराइओ मे उतारके उनके सीनेपे ढेर होकर पडा था.. आज मंजुने देवायतको तीन तीन बार नीचोड लीया था.. लेकीन उनकी चुत अब भी प्यासी थी.. तभी तो उसने अपनी चुतसे देवायतके लंडको नही नीकालने दिया.. ओर अैसे ही पुरी रात बीत गइ....अब आगे
सब लोग सादीकी थकानकी वजहसे नींदकी गहेराइओमे चले गये थे.. ओर सबको लगा.. की आज सुबहका सुरज बहुत ही जल्दीसे ना नीकले.. सुबह साडे तीन बजे घरके सधी लोग ओर महेमान सो रहे थे.. तब सांतीकी आंख खुल गइ.. क्युकी आज खुदकी सादी थी.. तो आज रात उनको नींद ही नही आइ.. ओर उसने जागृतीको भी जगा दीया.. तो जागृती भी जागकर अपने बीस्तरपे ही बैठ गइ.. तब..
सांती : (सरमाते धीरेसे) जागु.. मे नहाने जा रही हु.. तो तुम तेरे भाइको भी जगादे.. आज उनको भी तैयार होनेमे टाइम लगेगा.. जा जगादे उसे..
जागृती : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी.. मे..? नही आज आप ही जगादोनां.. मे जयश्री ओर बरखाको फोन करती हु.. वो दोनो अभी आपको तैयार करनेके लीये आजायेगी..
सांती : (पास आकर बैठते मुस्कुराते) अरी जाना.. मे नहाने जा रही हु.. वो दोनो चार बजे आजायेगी.. आज सीर्फ मुजे ही थोडीना तैयार होना हे..? आज तो तुजे भी मस्त दुल्हनकी तराह तैयार होना हे.. आज अच्छा मौका हे.. देखले.. मेरा बंसी तुजे देखकर पागल हो जायेगा.. हें..हें..हें..
जागृती : (सर्मसार होते अेक मुका मारते) भाभी.. आपभीनां.. आप बहुत सरारती हो.. पहेले आप दोनोकी सादी तो होजाने दो.. बाद मे मेरे बारेमे सोचुगी.. फीर देखना जींदगी भर आपका पीछा नही छोडुगी.. अेक बार फीर अच्छेसे सोचलो.. हें..हें..हें..

सांती : (मनमे खुस होते) अरे हां हां बाबा.. मत छोडना.. तु जातो सही.. मेने सब सोचलीया हे.. तबतक मे फटाफट नहा लेती हु.. फीर तुम भी नहालेना.. वो दोनो पहेले हम दोनोको तैयार करदेगी.. फीर मम्मीजी को..
जागृती : (सामने देखते) भाभी.. क्या उनका अैसे तैयार होना जरुरी हे..? आपही उनको सरपे चडा रही हे.. फीर देखना वो कमीना रमेश अंकल उनके आस पास ही घुमता रहेगा.. कुछ काम धंधातो करेगा नही..
सांती : (खडी होते गालको चुमते) अरे जाना.. मे जैसा कहु करती जा.. वो भले घुमते रहे.. फीर कल मे तुमसे उनके बारेमे आरामसे बात करुगी.. अभी जीतना बोला हे उतना कर.. मे जा रही हु नहाने..
कहेते सांती जटसे बाथरुममे घुस गइ.. तबतक जागृती अेक नजरसे उनको देखती ही रही.. तभी उसे बंसीको जगानेका खयाल आया तो जागृती बहुत ही सरमाने लगी.. ओर उनके दिलकी घडकन तेज होगइ.. बंसीको जगाना मतलब.. वो अच्छी तराह जानती थी.. की बंसीको जगाने जायेगी.. तब वो जरुर कुछना कुछ सरारत करेगा.. ओर सांती भी तो वही चाहती थी.. की जागृती ओर बंसीके बीच नजदीकीया बढे..
इसीलीये तो उसने आज मौका देखकर जागृतीको बंसीके पास भेज दीया.. तब जागृती सरमाते धडकते दिलके साथ आयनेके सामने चली गइ.. ओर अपने बालोको हाथसे सही करने लगी.. फीर सरमाते धीरेसे दबे पांव बंसीके रुमकी ओर जाने लगी.. जैसे सबसे छुपकर अपने प्रेमीको मीलने जा रही हो.. तब सभी लोग अब भी सो रहे थे.. ओर जागृती धीरेसे दरवाजा खोलकर बंसीके रुममे चली गइ..
ओर अंदर जाते ही उसने दरवाजेको वापस धीरेसे बंध करके लोक करदीया.. ताकी बंसी उनके साथ कोइ सरारत करे तो भी कीसीको कुछ पता ना चले.. वो खुद भी तो वही चाहती थी.. की बंसी उनके साथ सबकुछ करे.. ओर वो भारी धडकनके साथ बंसीके पास चली गइ.. ओर बंसीके उपर जुकते उनको धीरेसे हीलाकर जगाने लगी.. तब दो तीन बार धीरेसे आवाज लगाकर बंसीको जगाया तब बंसी जाग गया..
ओर आंख खोलकर देखा तो जागृती उनपे जुककर उसे जगा रही थी.. तो बंसीने जागृतीको देखते ही पुरे रुममे नजर डालकर दरवाजेकी ओर देखलीया.. तो दरवाजा बंध था ओर इस वक्त जागृती उनके रुममे अकेली थी.. तो बंसी जागृतीकी ओर देखने लगा तो जागृती सरमाते हुअे उनपे जुकते मुस्कुरा रही थी.. तब बंसी सबकुछ समज गया.. की अभी रुममे सीर्फ वो ओर जागृती ही हे..
ओर उसने जागृतीका हाथ पकडकर खीचते अपने उपर गीरा दीया.. तब जागृती बहुत ही सर्मसार होते बंसीके सीनेपे सर रखते गीर गइ.. ओर बंसीने जागृतीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. तो जागृतीकी मुहसे आउच.. की आवाज नीकल गइ.. ओर वो सर्मसार होते मुस्कुराने लगी.. तो बंसी भी मुस्कुराते जागृतीकी पीठको सहेलाते उनके सामने देखकर हसने लगा.. तो जागृतीने सरमाते नजरे जुकाली..
तभी बंसीने दोनो हथेलीमे जागृतीके चहेरेको थाम लीया.. ओर जागृतीकी आंखोमे देखने लगा.. तो जागृतीने अेक नजर बंसीकी ओर देखते मुस्कुराते अेक बार फीर अपनी नजरे जुकाली.. तभी उसे अपने होठोपे बंसीके होठ महेसुस हुअे.. तो जागृती सीरसे लेकर पांव तक कांपने लगी.. उनकी चुत गीली होने लगी.. फीर अचानक उसने बंसीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर अपने तनको बंसीके तनसे रगडने लगी..
तो जागृतीने उनको बाहोमे भीचतेही बंसीने भी जागृतीको कसके बाहोमे भीच लीया.. फीर पलटकर जागृतीको अपने नीचे करते खुद उनके उपर लेट गया.. तब जागृती सरमके मारे पानी पानी होते मुस्मुराते बंसीसे नजरे चुराने लगी.. ओर तभी बंसीने जागृतीके होठोपे अपने होंठ रख दीये.. तो जागृती सर्मसार होते अपना मुह इधर उधर करने लगी.. तभी अचानक बंसीने अेक हाथ उनके दुधुपे रख दीया ओर हल्कासा मसलते जागृतीके होठोका रसपान करने लगा..

तब जागृती भी आंख बंध करते मदहोस होने लगी.. ओर उनका हल्कासा विरोध भी थम गया.. फीर वो भी बंसीकी पीठमे दोनो हाथ रखकर बंसीको बाहोमे भरते उनका होठ चुमते साथ देने लगी.. आखीर आज उसे बंसीको अकेलेमे प्यार करनेका मौका मील ही गया.. तो कुछ ही देरमे दोनोकी जीभ आपसमे पेच लडा रही थी.. दोनो ही अेक दुसरेके मुहको रसको पी रहे थे.. तब बंसी ओर जागृती दोनो ही उतेजीत हो गये थे..
दोनोकी आंखोमे वासनाके डोरे मंडराने लगे.. तभी बंसीने उनके टोपमे अपना हाथ घुसादीया.. ओर टोपको थोडा उचा करते जागृतीके संतरे जैसे बुब्सको थाम लीया.. ओर हल्केसे अपनी मुठीमे दबोचके मसलने लगा.. जीससे जागृती सीसकारीया करते सीहर उठी.. ओर बंसीकी ओखोमे देखने लगी.. जागृतीकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. मनसे तो चाहती थी की बंसी अभी उसे चोदले.. तब..







