Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 76 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

धिरेनको समजमे नही आरहा था.. की पुनमको डीवोर्स देनेके बाद भी लखन उनके साथ अच्छेसे बात कैसे करता हे..? कही लखन उनके साथ कोइ गेम तो नही खेल रहा..? तो इधर साम पांच बजते ही लखन नीलमको स्कुलसे घरपे ड्रोप करदेता हे.. ओर होस्टेलपे चला जाता हे.. तो बेन्कसे छुटी होते ही धिरेन थोडा गभराते होस्टेलपे लखनके पास आजाता हे.. लखन उसे स्माइल करते हाथ मीलाता हे ओर चेरपे बीठा देता हे.. तब..

लखन : (मुस्कुराते) धिरेन भैया.. कैसे हो..?

धिरेन : (थोडा गभराते) भाइ मे तो ठीक हु.. आप बताओ.. मुजे कैसे याद कीया..?

लखन : (मुस्कुराते डीवोर्सके पेपर देते) ये लीजीये.. बडे भैयाने दीये हे.. आपके ओर पुनोदीदीके डीवोर्सके पेपर.. यही चाहीयेथानां आपको..? लीजीये..

धिरेन : (आस्चर्यसे देखते पेपर लेते) जी.. भाइ.. पुनोतो केह रही थी ये सबकी हाजरीमे देगी.. तो फीर..?

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. अब आपको वहा आनेकी जरुरत नही हे.. क्युकी भाभीने आपसे रीस्ता तोड दीया हे.. उन्होने आपको दो तीन बार फोन कीया था.. लेकीन आपने उठाया ही नही.. तो भाइने ये पेपर आपको देनेके लीये कहा था.. भाभी बहुत परेसान हे.. वो बहुत रोइ..

धिरेन : (नजर चुराते) भाइ.. मे वहा कीस मुहसे जाता..? आप तो जानते हे सब.. लेकीन मुजे अ‍ेक बात समजमे नही आइ..? आपको तो सब पता हे.. फीर भी आप मेरे साथ इतना अच्छा व्यवहार कैसे करते हे..?

लखन : (मुस्कुराते थोडा जुठ बोलते) भाइ.. मत भुलो आप मेरे जीजासे पहेले अच्छे दोस्त भी हे.. खैर अब जीजा तो नही रहे.. लेकीन हम अभी दोस्त तो हे.. मेने आपसे दोस्ती अ‍ैसे ही नही की.. मे जीसे दोस्त बनाता हु उनके साथ कभी रीलेशन खराब नही करता.. ये कहो.. आपने भाभीसे बात क्यु नही की..?

धिरेन : (थोडा गभराते) भाइ.. सच कहु..? अ‍ेक डरकी वजहसे.. मुजे पता हे मम्मी मुजे खुब खरी खोटी सुनाअ‍ेगी.. इसीलीये उनका फोन उठानेकी हींमत नही हुइ..

लखन : (मुस्कुराते) खैर जाने दीजीये.. जो होनाथा सो होगया.. कहीये.. आगेका क्या प्लान हे आपका..?

धिरेन : भाइ.. बस.. ओर कुछ नही.. कल मकानका रजीस्ट्रेशन होगया.. ओर मकानकी चाबी भी मील गइ.. अब मे नीलुसे सादी करना चाहता हु.. भाइ.. इनमे मुजे आपकी मदद चाहीये.. क्या आप हमारी मदद कर सकते हे..?

लखन : (मुस्कुराते) हां क्यु नही..? पता हे मुजे तुम नीलुसे सादी करना चाहते हो.. इसीलीयेतो आपने पुनोको डीवोर्स दिया हे.. भाइ.. अ‍ेक बात समजमे नही आइ.. क्या मुजे बता सकते हो..?

धिरेन : (मुस्कुराते) भाइ क्यु सर्मीन्दा कर रहे हो..? हम दोस्त हे.. पुछनेमे कैसी परमीसन..? पुछो..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. आपको भी पता हे अगर आप नीलुसे सादी करलेते तो पुनोदी कभी अ‍ेतराज नही करती.. वो नीलुको अ‍ेक्सेप्ट करलेती.. क्युकी हमनेभी दो दो तीन तीन सादीया कीहे.. तो फीर मुजे नही लगता पुनोको इस बातपे अ‍ेतराज हो.. क्या पुनोको डीवोर्स देनेकी असली वजह जान सकता हु..?

धिरेन : (नजरे चुराते धीरेसे) भाइ.. इनकी असली वजह ना जानोतो ही बहेतर हे.. क्युकी मुछ पर्सनल बाते हे जो मे आपको नही बता सकता.. क्युकी आप पुनोके भाइ हो..

लखन : (मुस्कुराते) तो क्या हुआ..? हम दोस्त भी तो हे.. ओर हमने अ‍ैसी कइ बाते कीहे.. तो मुजे नही लगता तुजे बतानेमे कोइ अ‍ेतराज हो.. बता..

धिरेन : (नजरे चुराते धीरेसे) भाइ.. वो.. वो.. हम दोनोकी सेक्स लाइफ अच्छी नही थी.. मुजसे दुसरी ओरत तो संतुस्ट होजाती थी.. लेकीन इस बातपे पुनो हमेसा मुजसे खरी खोटी सुनाती थी.. बस.. इसीलीये हम दोनो अलग होगये.. बाकी कुछ नही था..

लखन : (मुस्कुराते) धिरेन.. पुनोको संतुस्ट करना तेरा काम भी नही हे.. क्युकी तुजे पता नही वो कौन हे.. खैर.. छोड ये सब.. बता.. क्या कर रही हे पायल भाभी..? अब उसे मीलते होकी नही..? हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) नही भाइ.. इस बारेमे पुनोको सब पता चल गया.. इसीलीये तो हमारे बीच जगडा हुआ.. ओर बात डीवोर्स तक आगइ.. जीसकी वजहसे अब पायल भाभीके साथ भी रीलेशन खतम होगया.. भाइ.. वो.. वो.. पुनो..? क्या उसने कुछ सोचा हे..? आइ मीन.. दुसरी सादी..

लखन : (मुस्कुराते) धिरेन.. अब तुम पुनोकी चीन्ता क्यु करते हो..? अब इनका जो भी कुछ करना हे.. हम देख लेगे.. आप पुनोके बोरेमे पुछनेका हक खो चुके हो..

धिरेन : (सामने देखते) हां भाइ.. सही कहा आपने.. लेकीन मे ये अ‍ेक दोस्तके नाते पुछ रहा हु.. बाकी कुछ नही..

लखन : (मुस्कुराते) हां तो फीर ठीक हे.. सुनो.. अब पुनो सीर्फ मेरी जीम्वेवारी हे.. पता हे क्यु..? क्युकी मे ओर पुनो आपसमे सादी कर रहे हे..

धिरेन : (आस्चर्यसे देखते) व्होट..? लेकीन भाइ.. वो.. वो तो आपकी बहेन हेनां..? फीर भी..?

लखन : (मुस्कुराते सांत लहजेमे) हां.. तुमतो जानते हो.. हमारे खानदानमे सभीने अपनी बहेनसे ही सादी कीहे.. तो मेभी मेरी बहेनसे ही सादी कर रहा हु.. ओर थेन्क्स.. क्युकी ये सब आपकी वजहसे ही मुमकीन हुआ.. अगर आप उनको डीवोर्स नही देते तो मुजे इतनी खुबसुरत बहेन कैसे मीलती..? खैर.. जाने दिजीये ये सब अब हमारे घरकी बात हे.. बस.. आपसे अ‍ेक रीक्वेस्ट करनी हे..

धिरेन : भाइ.. आपने मेरे लीये इतना कुछ किया हे.. तो फीर बार बार मुजे क्यु सरर्मीन्दा कर रहे हे.. कहीये क्या करना हे मुजे..?

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. हो सकेतो आज ही आप अ‍ेक बार भाभीसे फोनपे बात करलो.. वो आपके लीये बहुत परेसान हे.. क्युकी आप उसे लेने भी नही आये थे.. बाकी.. अब आपकी ओर नीलुकी सादीकी जीम्वेवारी मेरी.. वो भी अ‍ेक सर्तपे.. क्युकी मे नीलुकी पढाइको डीस्टर्ब करना नही चाहता..

धिरेन : ठीक हे भाइ.. मम्मीसे बात तो मे करलुगा.. लेकीन आपकी सर्त क्या हे..?

लखन : भाइ सर्त तो कुछ नही हे लेकीन मेने ओर लताने नीलुकी पढाइकी जीम्वेवारी ली हे.. तो मे चाहता हु.. नीलु सादीके बाद भी हमारे घरपे रहेगी.. ओर अपनी पढाइ पुरी करेगी.. जब वो ग्रेज्युअ‍ेशन कंपलीट करले.. तब आप उसे लेजाना.. तबतक वो बीच बीचमे आपसे मीलती रहेगी.. ओर आपसे मीलवानेकी जीम्वेवारी भी मेरी.. बोलो क्या कहेते हो..? अगर आपको मंजुर हे तो मे वादा करता हु नीलुकी सादी आपसे करवा दुगा..

धिरेन : (मुस्कुराते) भाइ ये बात तो नीलु भी केह रही थी.. ठीक हे मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. डन..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे धिरेन.. तो फीर तुम कल कोर्टमे मेरेजकी अ‍ेप्लीकेशन डालदो.. तब जाके तुमको अ‍ेक दो महीनेके बादकी डेट मीलेगी.. तब मे नीलुको लेकर आजाउगा.. तुम दोनो सादी करलेना.. ओर मे वादा करता हु.. उस दिन वो पुरा दिन ओर रात तुम्हारे साथ रहेगी.. तो तुम अपनी सुहागरात भी मनालेना..

धिरेन : (सरमाते हसते) क्या भाइ.. क्यु मजाक करते हो..? ठीक हे तो फीर मे चलता हु.. ओर मे आज ही मम्मीसे बात करलेता हु..

लखन : (मुस्कुराते) धिरेन.. अ‍ेक ओर बात.. मेने नीलुकी सादी तुमसे करवादी हे.. इस बातका उनकी फेमीलीको कभी पता नही चलना चाहीये.. अगर उसे पता चला.. तो फीर तुम्हारी ओर पायल भाभीकी क्लीप मेरे पास हे.. तुम समज गयेनां..

धिरेन : (थोडा गभराते) भाइ.. मुजे मरना हे क्या..? आप मेरी इतनी मदद कर रहे हो.. तो फीर मे क्यु बताउगा..? भाइ यकीन करो.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. चलो मे चलता हु.. बाय..
 
फीर धिरेन चला गया.. तो लखन उनकी ओर देखते कातील मुस्कान करने लगा.. फीर खडा होकर होस्टेलके कीचनमे चला गया ओर वहा सभी लडकीयोके खानेका जायजा लेकर वहासे नीकल गया.. ओर सीधा ही सृतीकी क्लीनीकपे चला गया.. देखा तो सृती क्लीनक्ससे आज जल्दी नीकल चुकी थी.. ओर अपने घरपे आगइ थी.. तो लखन वहासे नीकलकर सीधा सृतीके घरपे चला गया.. तो सृती उनको देखते ही सोक्ट होगइ..

सृती : (सरारतसे हसते) अरे..? आइअ‍े.. आइअ‍े महाराज.. पधारीये.. आज इधरका रास्ता कैसे भुल गये..? कुछ काम बाम था क्या..? हें..हें..हें..

लखन : (दरवाजेपे खडे रहेते सख्तीसे देखते) हां.. काम था.. भाभीमां ओर पुनो दीदीने मुजे आपको लेने भेजा हे.. आप अपना बोरीगा बीस्तरा बांधलो.. ओर चलो हमारे घर..

सृती : (थोडा सख्त लहेजेमे) अच्छा.. मेने तुम्हारे भाइ रीलेशन खतम करलीया तो चान्स मारने आये हो क्या..? अब मेरा घर यही हे समजे..? मुजे कही नही जाना.. मे आपके भाइसे सभी रीलेशन खतम करके आइ हु.. अब उस घरसे मेरा कोइ वास्ता नही हे.. आप जा सकते हे..

लखन : (सामने देखते) भाभी.. ओह.. सोरी सोरी.. दी..दी.. दीदी.. कीतनी घटीया सोच हे आपकी.. अगर मुजे चान्स ही मारना था तो उसी दिन मारलीया होता.. जब आप टेस्टके बहाने मुजे क्लीनीकपे ले गइ थी.. तब मेरी नीयतमे कोइ खोट नही थी.. आपकी नीयतमे खोट थी..

सृती : (अ‍ेक नजरसे देखते थोडी गभराते) वो.. ये बात आपको कैसे पता..? क्या पुनोदीसे बात हुइ..?

लखन : (सामने देखते) कीससे बात हुइ कीससे नही इनसे आपका कोइ लेना देना नही हे.. खैर जाने दीजीये इस बातको.. आप अ‍ेक बात समज लीजीये.. आप अब भी हमारे खानदानसे जुडी हे.. भाभीका रीस्ता खतम करलीया.. लेकीन बहेन भाइका नही..

सृती : (जोरोसे हसते) अरे हां.. मेतो भुल ही गइकी मे आपकी बहेन हु.. फीर भी मुजे कही नही जाना.. क्या कर लोगे..?

लखन : (फीकी मुस्कानसे) करनेको तो मे बहुत कुछ कर सकता हु.. लेकीन करुगा नही.. इतना बता दीजीये आप मेरे साथ चल रही हे..? की नही..?

सृती : (कामुक स्माइलसे अदब लगाते अ‍ेक कंधा दरवाजेपे टीकाते) हंम.. अ‍ेक सर्तपे आउगी.. उस दिन आपने कहाथानां अ‍ेक दिन आप दोनोको मेरे पास आना पडेगा.. ओर आप मुजे आइ लव यु.. आइ लव यु भी बोल रहे थे.. लेकीन तब मे आपके भाइकी अमानत थी.. आज मे उनसे आजाद होगइ हु.. तो फीर बनालो मुजे अपनी गर्लफ्रेन्ड.. मे आपके साथ आनेके लीये तैयार हु.. बस.. यही मेरी सर्त हे..

लखन : (सामने देखते) अगर उस दिन मेरी बात मानली होती तो हम दोनोका रीस्ता कायम हो जाता.. लेकीन अब नही.. आपको मुजे पानेके लीये अपने आपको मेरे काबील होना पडेगा.. मेने कहा थाना. मे आपको तडपाउगा.. अब आप ख्वाब देखती रहो.. क्या ये आपका आखरी फैसला हे..?

सृती : (अदब लगाते मुस्कुराते) नही.. मैने अ‍ैसा तो नही कहा.. तो फीर ठीक हे.. मेरी मरजी.. मे कही भी रहु.. बाय ध वे.. क्या आप थोडा मुस्कुराते बात नही कर सकते..? अभी तक नाराज हे मुजसे..? (दरवाजेसे दुर हटते) आइअ‍े.. अंदर बैठकर बात करते हे.. मे आपके लीये चाइ बनाती हु..

लखन : (थोडा सख्त होते) अंदर आनेकी कोइ जरुरत नही.. मुजे नही पीनी आपकी चाइ.. ओर मे कीसीसे नाराज नही.. हां.. उस दिन मेरी कोइ गलती नही थी.. मेने तो मना कीया था.. लेकीन आप ही नही मानी.. फीर भी आपको लगता हे गलती मेरी हे.. तो उस बातके लीये सोरी.. आप सीर्फ इतना बता दीजीये आप मेरे साथ चल रही हो की नही..?

सृती : (अदब लगाते मुस्कुराते) ओहो.. अभी तक इतना गुस्सा..? मेरी सर्त मानलो.. मे साथ चलनेके लीये तैयार हु..

लखन : (मुस्कुराते) सपने देखना छोड दीजीये.. मेरे लीये मेरी पुनोदी ही ठीक हे.. भाभीमां ने ठीक ही कहा था.. आना हेतो चलो.. जुठे नखरे मत दीखाओ..

सृती : (सामने देखते) क्या कहा हे आपकी भाभीमांने..? उनको केह दीजीयेगा नही आना आपके साथ.. क्या करलोगे..?

लखन : (अ‍ेक नजरसे देखते) ठीक हे.. भाभीमांने तो मुजे कहा हे ना माने तो अ‍ेक खीचकर देना कानके नीचे.. ओर घसीटकर लानेको कहा हे..

इतना सुनते ही सृती कामुक नजरोसे देखते मुस्कुराते लखनके पास आगइ.. ओर अ‍ेक हाथ लखनकी गरदनमे डालकर उनके गालको चुम लेती हे.. फीर मुस्कुराते लखनको आंख मार देती हे.. ओर अपना गाल आगे करते कहेती हे..

सृती : (हसते गाल आगे करते) लो मारलीजीये.. अरे मारीयेनां..? मेतो कबसे आपके हाथका चाटा खानेके लीये तरस रही हु.. लो.. मारलो चाटा.. कुछ ओर करना हे..? तो चलो अंदर.. क्या हेना यहा बहार खुलेमे सब करना अच्छा नही लगता.. तो मेरे बेडरुममे चलते हे.. वहा आरामसे आप मेरा बलात्कार कर लीजीयेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (गभराते थोडा पीछे जाते) नही.. तुम कीतनी बदल गइ हो.. मे लडकीयोके साथ जोर जबरदस्ती करना नही करता.. वरना आपको यहासे घरसीटके भी लेजा सकता हु.. फीर भी कुछ काम होतो मुजे फोन करदेना.. बाय..

कहेते लखन अचानक सृतीके पास आगया.. ओर उनकी गरदनमे हाथ डालकर सृतीके चहेरेको पीछेसे पकड लेता हे.. सृती कुछ समजे इनसे पहेलेही लखनने अपने होंठ सृतीके होठोसे जोरोसे चीपका लीये.. अचानक हुअ‍े हमलेसे सृती सख्तेमे आगइ.. ओर बडी आंख करते हांथ पांव चलाते लखनसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तभी अचानक लखनने उनको छोड दीया..

ओर सृतीकी ओर देखते अपने होठोको पोछते जाने लगा.. तो सृती सोक्ट होते उनको देखती ही रही.. तभी बाइककी आवाजसे सृती तंद्नासे बहार नीकली.. क्युकी लखन बाइकपे बैठकर जा रहा था.. लखनकी मस्ती करते अ‍ेक बार फीर सृतीने लखनको खो दीया.. ओर सृती उनके पीछे दोड पडी..

सृती : (पीछे दोडते) लखन भैया.. लखन भैया.. सुनोतो.. रुको.. मे आ रही हु.. अरे सु..नो..

सृती उनको जाते हुअ‍े देखते ही उनके पीछे लखन भैया.. लखन भैया.. करते दोड पडी.. लेकीन लखनतो अपनी बाइक लेकर नीकल गया.. तो सृती मुह फाडते उनको जाते हुअ‍े देखते वही खडी रहे गइ.. वो पुनमके कहेने पे लखनके साथ जाना तो चाहती थी.. लेकीन लखनके साथ थोडा नखरे करते उनकी मस्तीया करना चाहती थी.. ओर वो भारी मनसे घरमे चली गइ..

ओर फोन लेकर पुनमसे बात करने लगी.. तो पुनम भी सृतीकी बात सुनकर उनसे थोडा नाराज हुइ.. ओर रातमे फुरसतमे बात करनेको कहेते फोन रख दीया.. तो इधर लखन भी घरपे आगया.. ओर वही फ्रेस होगया.. तो रजीया नीलम ओर राधीका सब खानेके टेबलपे आ गये.. ओर सबलोग खाना खाने लगे.. राधीका आज बहुत ही सरमा रही थी.. तो रजीया ओर नीलम भी लखन ओर राधीकाको देखकर हस रही थी.. क्युकी तीनोने मीलकर आज लखनका बेड फुलोसे सजाया था.. तभी..
 
नीलम : (रजीयाकी ओर मुस्कुराते) दीदी.. आज मे भी आपके साथ मम्मीके रुममे सोजाउगी..

रजीया : (मुस्कुराते) हां.. चेन्ज करके आजाना.. आज हम दोनो मम्मीके पास ही सो जायेगे..

कहातो राधीका बहुत ही सर्मसार होते मुस्कुराने लगी.. फीर डीनर खतम होते ही रजीया दोनोके लीये दुध गरम करके उपर रखने चली गइ.. तो साथमे नीलम भी चेन्ज करने जाने लगी.. ओर राधीका कीचनका काम समेटने लगी.. तो लखन राधीकाकी मम्मीके पास चला गया.. ओर वहा उनका हालचाल पुछा.. फीर थोडी देर वही बैठकर वो भी उपर अपने रुममे चला गया.. तबतक रजीया ओर नीलम भी चेन्ज करके नीचे आ चुकी थी..

तो दुसरी ओर धिरेन भी अपने घरपे पहोंच चुका था.. फीर फ्रेस होकर वापस होलमे आगया.. ओर अपनी मम्मीको फोन करने लगा.. तो उधर चंदा अपने रुममे अकेली विजयको लेकर बैठी थी.. बाकी सब लोग होलमे बैठकर गपे लगा रहे थे.. तभी धिरेनका फोन देखते ही चंदाका पारा सातवे आसमानपे चला गया.. वो पहेले धिरेनको बोलनेका मैका देना चाहती थी.. तो उसने सीर्फ इतना ही कहा..

चंदा : (गुस्सेमे) हां बोल.. अब तुजे फोन करनेका टाइम मीला..? बोल.. क्या कहेना चाहता हे तु..?

धिरेन : (धीरेसे डरते) मोम.. वो.. वो मे पुनोसे अलग हो गया हु.. मेने उसे डीवोर्स देदीया हे..

चुदा : (गुस्सेमे) हां तो..? पता चला मुजे.. कमीने इस बात कहेनेसे पहेले तेरी जुबान कट क्यु नही गइ.. क्या मे जान सकती हु..? तुमने इतना बडा कदम क्यु उठाया..?

धिरेन : (थोडा नीडर होते) हां.. अब आप भी गालीया दो मुजे.. क्युकी आपने उस खानदानमे जानेके लीये मेरा इस्तमाल कीया.. ओर पुनोको मेरे पले बांध दीया.. मोम.. मे कीसी ओरको प्यार करता हु.. ओर वैसे भी मेरी ओर पुनोकी लाइफ अच्छी नही थी.. तो हम अलग हो गये..

चंदा : (जोरोसे चीलाते) कमीने.. मेने तेरा क्या इस्तमाल कीया..? ये बात कहेनेसे पहेले तेरी जुबानको लकवा क्यु नही मार गया.. ओर अ‍ेक मासुमकी जींदगीसे खीलवाड करके तुजे क्या मीला..? अगर तुम कीसी ओरसे प्यार करते थे.. तो फीर मुजे बताया क्यु नही..? मे पुनोकी सादी तुमसे कभी नही करवाती.. करलेते उस लडकीसे सादी.. कमीना.. कहीका.. ओर मेने देवुसे सादी करनेसे पहेले तुमसे पुछा थानां..?

धिरेन : (थोडा चीडते जोरोसे चीलाते) हां.. पुछा था.. लेकीन ये नही बताया थाकी तुम मेरी पीठ पीछे उनके साथ गुलछने उडाती थी.. आपको सरम नही आइ घरमे अ‍ेक जवान लडका होते हुअ‍े भी अ‍ेक पराये मर्दके साथ.. छी.. मेने तुम दोनोको दो बार देख लीया था.. तबसे मे बदला लेना चाहता था.. इसीलीये मेने पुनोके साथ सादी की..

ताकी मे भी सादीसे पहेले उनके साथ वोही सब करते उनको सबक सीखाउ.. समजी..? लेकीन वो तो अपने भाइसे भी ज्यादा सातीर नीकली.. मुजे सादीसे पहेले छुने तक नही दीया.. वरना मे उनसे सादी ही नही करता.. बस.. उसे प्रेगनेन्ट करके छोड देता.. मोम.. ये लोगोकी यही सजा हे..

चंदा : (जोरोसे चीलाते) चु..प.. चुप होजा कमीने.. तु अ‍ैसा घरटीया सोच वाला होगा मुजे नही पता था.. कुते.. कमीने.. मे प्यार करती हु देवुसे.. समजे..? सुन.. अब तुमने सारी हदे पार करली हे.. तुजे हमारी जायदासे अ‍ेक फुटी कोडी भी नही मीलेगी.. मे सबकुछ पुनो दीदीके नाम कर रही हु.. तुजे जीनके साथ सादी करनी हे करले.. तेरी यही सजा हे.. ओर सुन.. आजके बाद मुजे कभी फोन भी मत करना.. समजलेना तेरी मां तेरे लीये मर गइ हे.. हरामी साला.. फोन रख..

कहेते चंदा जोरोसे फुट फुटके रोने लगी.. चंदा जोरोसे चीलाके बोल रही थी तो मंजुला पुनम भुमीका भावना लता ओर नीर्मला सबलोग चंदाके पास आकर खडे हो गये थे.. ओर समज गये थेकी चंदा धिरेनके साथ बात कर रही हे.. तो सबलोग वही खडे रहेते चंदाकी बातको सुन रहे थे.. जैसे ही चंदा रोने लगी.. मंजुने उसे अपनी बाहोमे थाम लीया.. तो चंदा मंजुके कंधेपे सर रखते जोरोसे रो रही थी.. नीर्मला ओर भुमीका भी उसे चुप करा रहे थे..

मंजुला : (आंसु पोछते) दीदी.. अब बस भी करो.. कीतना रोओगी..?

चंदा : (रोते हुअ‍े) दीदी.. देखा.. मुजे क्या क्या बोल रहा था.. वो पुनो दीदीकी जींदगी खराब करना चाहता था.. सीर्फ मेरी वजहसे.. अ‍ैसा बेटा होनेके बजाये मर जाना बहेतर हे.. मुजे नही जीना..

नीर्मला : (गुस्सेमे अ‍ेक जोरोसे चाटा मारते) चुप.. अ‍ेक दम चुप.. उस कमीनेके लीये तुम मरोगी..? अब भुलजा उसे वो तेरा बेटा नही हे.. समजी..? ये विजय तेरा बेटा हे.. इसे सम्हाल.. आजके बाद मरनेकी बात कीनां तो मुजसे बुरी कोइ नही होगी..

चंदा : (नीर्मलाको गले लगते रोते) दीदी.. तो फीर मे क्या करु..? इसमे इस मासुमकी क्या गलती थी..? जो इनकी जींदगी खराब करदी.. ये भी नही देखा ये पेटसे हे.. अब ये इस बच्चेका क्या करेगी..?

पुनम : (चंदाको गले लगते) भाभी.. रोइअ‍े मत.. आपको मेरी कसम.. मे इस बच्चेका कुछ नही करुगी.. इसे जन्म देकर इस दुनीयामे लाउगी..

चंदा : (रोते हुअ‍े) नही दीदी.. आपकी उमर अभी बहुत छोटी हे.. अगर बच्चा होगा तो आपसे कौन सादी करेगा..? कुछ तो अपने बारेमे सोचीये.. गीरा दीजीये ये बच्चा..

मंजुला : (सही मौका देखते ही) दीदी.. क्या बोल रही हो..? मेने हमारी पुनोके बारेमे सोचलीया हे.. वो इस बच्चेको जन्म भी देगी.. ओर उनकी सादी भी होगी.. आप फीकर मत करो..

चंदा : (थोडा सांत होते) मंजुदी.. अ‍ैसा कौन लडका होगा जो हमारी पुनोको बच्चेके साथ अपनायेगा.. आज कल अ‍ैसा लडका मीलना बहुत मुस्कील हे.. आपतो सब जानती हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानती हु.. अब पुनोका डीवोर्स हो गया हे.. अब हमे डीसीजन लेना हेकी पुनोकी सादी कीधर करनी हे.. ओर मेने डीसीजन लेलीया हे.. दीदी.. मेरे ध्यानमे हे अ‍ेक लडका.. जो पुनोको बच्चेके साथ अपना लेगा..

चंदा : (आंसु पोछते सामने देखते) मंजुदी.. बताओ कौन हे वो लडका..? मे वादा करती हु.. मे खुद देवुके साथ बैठकर हमारी पुनोका कन्यादान करुगी.. बताइअ‍े कोन हे वो लडका..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. आपही इनका कन्यादान करना.. ओर वो लडका कोइ ओर नही.. खुद हमारा लखन हे.. मे लखनसे बात करुगी.. मुजे पता हे वो मेरी बात नही टालेगा.. वैसे भी हमारे खानदानमे भाइ बहेनकी सादी तो होती ही हे.. तो उस परंपरा भी कायम रहेगी.. कहो.. क्या कहेना चाहते हे सब..?

चंदा : (सामने देखते) दीदी.. अगर लखन भैया हां कहेते हे तो मुजे मंजुर हे.. अगर कीसी ओरको अ‍ेतराज ना होतो.. बस.. अ‍ेक बार पुनो दीदीको भी पुछलो..

सबलोग : (जानते थे फीर भी) हां.. हम सबको भी ये रीस्ता मंजुर हे..

मंजुला : (पुनमकी ओर मुस्कुराते) क्यु पुनो..? करोगीना मेरे बेटेसे सादी..? फीर देखना मेरी ननंदसे मेरी बहु होजायेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमसे पानी पाी होते) क्या दीदी.. आपभीनां..

कहेते पुनम सर्मसार होते मुस्कुराते वहासे दोडकर अपने रुममे चली गइ.. तो सबलोग उनको देखकर हसने लगे.. चंदा भी मुस्कुरा उठी.. ओर उसने मंजुकी ओर देखते दोनो हाथ जोड लीया.. तो मंजुने उसे कसके अपने गले लगा लेती हे.. चंदाकी आंख खुसीके मारे गीली होगइ.. ओर वो अचानक कांपने लगी.. मंजु कुछ समज पाये इनसे पहेले ही चंदा बेहोस होते जमीनपे गेरने लगी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २३८

कहेते पुनम सर्मसार होते मुस्कुराते वहासे दोडकर अपने रुममे चली गइ.. तो सबलोग उनको देखकर हसने लगे.. चंदा भी मुस्कुरा उठी.. ओर उसने मंजुकी ओर देखते दोनो हाथ जोड लीया.. तो मंजुने उसे कसके अपने गले लगा लेती हे.. चंदाकी आंख खुसीके मारे गीली होगइ.. ओर वो अचानक कांपने लगी.. मंजु कुछ समज पाये इनसे पहेले ही चंदा बेहोस होते जमीनपे गेरने लगी.... अब आगे

तो भावना लता ओर मंजुने उसे जटसे सम्हाल लीया.. ओर जमीनपे गेरने नही दिया.. फीर तीनोने मीलकर चंदाको उठाकर बेडपे सुला दीया.. नीर्मला गभराकर अपनी सारीके पलुसे चंदाको हवा देने लगी.. तभी वहा देवायत भी आगया.. तो मंजुने उसे संक्षीप्तमे बात करली.. तो सुनकर वोभी थोडा परेसान हो गया.. तभी भुमीका थोडा सरबत बनाकर ओर पानी लेकर आइ.. ओर चंदाके चहेरेपे छीडकने लगी.. कुछ ही दरमे चंदाको होंस आ गया..

भुमीका : (सरबत पीलाते) ले चंदा.. ये पीले.. सायद बीपी लो हो गया था..

देवायत : (पास बैठते सरको सहेलाते) चंदा.. क्या हुआ..? अब कैसा लग रहा हे..?

चंदा : (लैटेही देवुकी बाहोमे समाते रोते) देवु.. वो.. धिरेन.. उनका फोन अया था.. अब वो हमारे लीये मर गया हे..

देवायत : (जटसे मुहपे हाथ रखते) चुप.. तु ये क्या बोल रही हे..? वो बेटा हे तेरा.. अ‍ैसा नही बोलते..

चंदा : (रोते) देवु.. उसने हमारी पुनो दीदीकी जींदगी खराब कीहे.. ओर हमारे बारेमे भी वो कैसा बोल रहा था.. आपको पता हे..? मुजे तो बतानेमे भी सरम आती हे..

देवायत : (सरको सहेलाते) हां.. मुजे सबकुछ पता हे.. मंजुने सबकुछ बता दीया था.. सुन.. इसे अब अ‍ेक दुखद स्वप्नकी तराह भुलजा.. हमे पुनोकी चीन्ता नही हे.. पुनोको अब हमारा लखन ही सम्हाल लेगा..

चंदा : (आंसु पोछते) देवु.. अभी मंजुदीने कहा वो पुनोदीकी सादी लखन भैयासे करवाना चाहती हे.. तो मे ओर आप पुनोदीदीका कन्यादान करेगे..

देवायत : (मंजुकी ओर देखते) हां चदा.. जैसा तुम कहोगी वैसा ही हम करेगे.. बस तुम ठीक होजाओ..

तो सहेरमे लखन जैसे ही रुममे गया तो उनका बेड फुलोसे सजा हुआ था.. वो देखकर खुस होते मुस्कुराने लगा.. फीर कुछ सोचते उसने मोबाइल नीकाला.. ओर बेडकी तसवीर लेने लगा.. ओर उसने पुनमको सेन्ड करदी.. तो कुछ ही देरमे पुनमका मेसेज आगया.. उसने लखनको मेसेजमे कोन्ग्रेच्युलेशन लीखा.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके साथ चेट करने लगे.. ओर बातोही बातोमे बात सृती तक आगइ.. तो पुनमने लखनको सीधा कोल ही कर दीया..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. अच्छा हुआ आप दोनोको सुहागरात मनानेका टाइम मील गया.. कहा हे मेरी भाभी..? क्या वहा आपके पास हे..?

लखन : (मुस्कुराते) नही दीदी.. वो अभी नीचे हे.. सुनो.. आइ मीस यु.. आपकी बहुत याद आ रही हे.. तो इधर आजाओनां..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. मेरा भी यही हाल हे.. मे भी आपको बहुत मीस कर रही हु.. बस.. मे बहुत जल्द आपके पास आरही हु.. अच्छा क्या हुआ सृतीदीदीका..? क्या आप सृती दीदीको लेने गये थे..?

लखन : (मुस्कुराते) हां दीदी.. आज सामको ही मे दीदीको लेने गया था.. लेकीन वो तो आनेमे नखरे कर रही थी.. तो उनको वही छोडकर आगया.. वो मेरे साथ नही आइ..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. जानती हु में.. वो इतनी आसानीसे नही आयेगी.. वो आपको थोडा परेसान करना चाहती हे.. खैर जाने दीजीये.. अ‍ेक दो दिनके बाद वापस जाना.. ओर उनको जबरदस्तीसे ले आना..

लखन : (मुस्कुराते) अरे यार मे वोही तो नही कर सकता.. दीदी.. कीसीसे अ‍ैसे जबरदस्ती करना ठीक नही हे.. मुजे तो ये सब अच्छा नही लगता.. वैसे भी लगता हे उस दिन जो भी हुआ उनकी मरजीसे हुआ था.. क्युकी वो मुजसे नाराज नही हे.. आज तो हस हसके बात कर ही थी मुजसे.. ओर आनेके लीये ना जाने कोन कोनसी सर्ते रख रही थी..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. आपने सच पहेचाना.. ये सब उनका अ‍ेक प्लान था.. आप हम ओरतोको नही जानते.. कुछ बात हे जो मे अभी आपको बता नही सकती.. सीर्फ अ‍ेक दो दिन इन्तजार करलीजीये.. आपको सबकुछ पता चल जायेगा.. चलो मे फोन रखती हु.. मे राधु भाभीसे कल सुबह बात कर लुगी.. तबतक दोनो अच्छेसे अपनी सुहागरात मनाइअ‍े..

लखन : (धीरेसे) दीदी.. आज धिरेन मीला था.. उसे मेने आपके पेपर देदीये हे.. ओर भाभीसे बात करनेको भी बोला हे..

पुनम : (धीरेसे) अच्छा इसीलीये.. भाइ.. सुनो.. यहा आज बहुत कुछ हुआ.. धिरेनका फोन आया था.. तो भाभी उनपे बहुत गुस्से हुइ.. ओर उनको ना जाने क्या क्या बोल दीया.. इनसे भाभीका बीपी भी बढ गया था ओर वो बेहोस होगइ थी..

लखन : (थोडा परेसान होते) दीदी.. मुजे लगता हे मुजे उनको भाभीके साथ बात करनेके लीये नही कहेना था.. बताओ अब भाभीकी तबीयत कैसी हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ अभी तो सब ठीक हे.. लेकीन मुजे लगता हे उनको गहेरा सदमा लगा हे.. वो बहुत डीप्रेसनमे हे.. ओर भाइ.. आपके लीये अ‍ेक खुस खबरी हे.. मंजु दीदीने सबको हमारी सादीके बारेमे बता दीया हे.. तो घरपे सबलोग इस बातपे बहुत खुस हे.. भाइ.. लगता हे कोइ आ रहा हे.. मे कल फुरसतमे बात करुगी.. चलो बाय..
 
फीर पुनमने फोन रख दीया तो थोडी देरमे राधीका भी अ‍ेक दुल्हनकी तराह सजके आगइ.. ओर आते ही उसने दरवाजा बंध करलीया.. फीर कुछ ही देरके बाद दोनो प्यारकी आगोसमे चले गये.. प्यार करते करते दोनोके जीस्मसे अ‍ेक अ‍ेक कपडे नीकलते गये.. तब लखन राधीकाका ये रुप देखकर बहुत ही उतेजीत हो गया.. ओर अंतमे दोनोके जीस्मसे आखरी वस्त्रभी नीकल गया..





आज राधीका लखनके लंडको देखकर थोडी डर गइ.. लेकीन उतेजनाकी वजहसे कुछ नही बोली.. वो सरमके मारे लखनके लंडके साथ खेलते साथ देने लगी.. दोनो अ‍ेक दुसरेके अंगोके साथ खेलते सीक्स नाइन पोजीशनमे आगये.. ओर अ‍ेक दुसरके अंगोको मुहसे खरोदने लगे.. लखनका लंड राधीकाके मुहमे समा नही रहा था.. ओर वो आधा लंड मुहमे लेकर लोलीपोपकी तराह चुस रही थी..





काफी देर दोनो फोर प्लेय खेलते रहे.. ओर अंतमे दोनो हेक दुसरेके मुहमे जड गये.. तो लखन राधीकाको गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया.. ओर दोनो अपना अपना मुह धोकर सही सो गये.. राधीका अब भी अ‍ेक नइ नवेली दुल्हनकी तराह सरमा रही थी.. जबसे लखनने उनके साथ सादी करली तबसे वो लखनकी बहुत ही रीस्पेक्ट कर रही थी.. ओर दोनो वापस बेडपे आगये.. तभी..

राधीका : (सरमाते बेडके बीच सही बैडते) जानु.. ये तो पहेलेसे भी बहुत बडा होगया हे.. मुजे कुछ होगातो नही..?

लखन : (मुस्कुराते पास आते) नही राधु.. तु खामखा डर रही हे.. हमने तो कइ बार सेक्स कीया हे.. तुजे कुछ नही होगया.. मेने आजही दो पहोरको रजीयाके साथ सेक्स कीया हे.. क्या उसे कुछ हुआ..? राधु.. सबसे पहेले तुम हीतो हो.. जीनके साथ मेने सेक्स कीया.. ओर दुसरी रजीया.. तुमने ओर रजुने मुजे सेक्सका सारा ज्ञान दीया.. तुम दोनो मेरी जींदगीका बहुत ही अहेम हीस्सा हो.. लता तो मेरी बीवी थी ही नही.. वो तो सीर्फ मुजे जरीया बनाकर भाइके लीये आइ थी.. जो उनके पास चली गइ..

राधीका : (आस्चर्यसे देखते) जानु.. क्या सचमे लता दीदी भाइके पास चली गइ..? लेकीन क्यु..?

लखन : (मुस्कुराते) राधु.. उन्होने भाइका प्यार पानेके लीये मुजसे सादी की थी.. मुजसे जुठा प्यारका नाटक कीया.. बस कुछ दिन इन्तजार करले.. जब पुनो दीदी यहा आजायेगी तब तुजे सबकुछ बता देगी.. क्युकी इस बारेमे मे कुछ ज्यादा नही जानता.. वो सीर्फ भाभीमां ओर पुनोदीदी ही जानते हे..

राधीका : (मुस्कुराते होठ चुमते) जानु.. वैसे भी आपके खानदानमे क्या चल रहा हे.. मुजे तो कुछ पता ही नही चलता.. अब तो पुनोदी मीलेगी तब ही सब पता चलेगा.. ओर वो आती भीतो नही.. बस.. सीर्फ फोनपे बात होती हे.. आप भी पुनोदीसे प्यार करते थे.. लगता हे अब आपकी मंजील बहुत करीब हे..

लखन : (मुस्कुराते) हां राधु.. आखीर पुनो मुजे मील ही गइ.. अभी अभी उनसे फोनपे बात हुइ.. वो सृतीदीदीका थोडा इस्यु चल रहा हे.. तो इसी सीलसीलेमे बात हुइ.. क्या तुमसे अ‍ेक बात पुछु..?

राधीका : (मुस्कुराते) हंम.. क्या आपको लगता हे मुजे पुछनेके लीये आपको परमीशनकी जरुरत हे..?

लखन : (होंठ चुमते) नही.. तो फीर सुनो.. राधु.. तुजे अचानक पता चलेकी तुम अ‍ेक इन्सान नही हो.. ओर आसमानसे आइ अ‍ेक परी या अप्सरा हो.. तो तुजे कैसा लगेगा..?

राधीका : (आस्चर्यसे देखते हसते) जानु.. ये कैसा सवाल हे..? क्या आजके जमानेमे ये सब बाते पोसीबल हे..? हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? तुजे पुनोने वो कीताब (ये कैसी अनुभुती) पढनेके लीये नही दी थी..?

राधीका : (हसते) अरे हां.. पुनोदीदी इस बारेमे केह रही थी.. की इसका तालुक आपके खानदानसे हे.. तो क्या..?

लखन : (मुस्कुराते) हां वोही.. इसी बारेमे पुनो तुमसे बात करेगी.. तब तुजे हमारे खानदानके उपर कोइ संसय नही रहेगा.. तुजे सबकुछ पता चल जायेगाकी तुम कौन हो हम कौन हे..

राधीका : (लखनको अपने पास खीचते) हंम.. चलीये मे सब पुनो दीदीसे जान लुगी.. क्या सुहागरातमे यही सब बात करोगे..? पता हेनां हमने सादी की उनको कीतने दिन हो गये हे.. तो आज बडी मुस्कीलसे आपके साथ सुहागरात मनानेका मौका मीला हे.. अब कोइ ओर दुसरा खेल नही.. सबकुछ करलीया.. अब आजाइअ‍े मेरे उपर.. आज मे पुरी रात आपको अपने उपरसे उतरने नही हुगी.. समज गये..?

लखन : (उपर चढते) देखना.. मे सचमे उपरसे नही उतरुगा.. फीर मत कहेना.. हें..हें..हें..

राधीका : (लखनका लंड पकडकर चुतपे धीसते) हां.. नही कहुगी.. वैसे भी आज उपर हम दोनोके सीवा कोइ हे भी नही.. आज मे इतने दिनोकी सारी कशर पुरी करलुगी.. सादीसे पहेले तो हर दिन कैसे मेरी ठुकाइ करने आजाते थे.. जानु.. मुजे अ‍ैसा ही प्यार चाहीये.. जो सादीसे पहेले करते थे..





कहा तो लखन राधीकाके होठोको चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. तो राधीका भी लखनके लंडको अपनी चुतपे घीसते गीला करने लगी.. दोनो बहुत ही उतेजीत होते कामुक तरीकेसे प्यार करने लगे.. राधीका लखनके छेडनेसे मदहोस होने लगी.. वो लखनके होठोको चुमते भी आंखेको उपर चडाने लगी.. जब लंड गीला हो गया तो राधीकाने अपनी चुतके लव होलमे फसाकर लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया..





राधीकाकी चुत लगातार पानी छोड रही थी.. तो लखनने भी देर ना करते राधीकाके होठोको लीपलोक करलीया.. ओर अपनी कमर उची करते थोडा जोर देते अ‍ेक हल्कासा धका दीया.. तो लखनका आधा लंड राधीकाकी चुतको चीरते अंदर घुस गया.. राधीकाकी आंख बडी होगइ.. ओर वो आंखोसे लखनको मना करते अपना मुह लखनके होठोसे छुडानेकी कोसीस करते बेडपे दोनो पैर पटकने लगी..
 
उनकी आंखसे लगातार पानी बहेने लगा.. वो हांथ पावं मारते लखनसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तभी लखनने अ‍ेक ओर जटका मारदीया.. ओर अपना पुरा लंड राधीकाकी चुतमे उतार दीया.. तो राधीकाकी चीख उनके गलेमे ही अटक गइ.. ओर वो चीखते ही बेहोस होगइ.. उनकी चुतसे थोडासा खुन नीकल गया..





लखनने भी देरना करते हाथके बल उचा हो गया.. ओर राधीकाको जोरोसे कमर हीलाते बेहोसीमे ही चोदने लगा.. ताकी राधीकाकी चुत लंडके हीसासे अ‍ेडजेस्ट होजाये.. राधीकाके दोनो बुब्स ताल मेलमे जोरोसे उछलने लगे.. लखन काफी देर राधीकाको आसानीसे चोदता रहा.. अचानक राधीकाका मुह दर्दके मारे बीगडने लगा.. ओर उसे धीरे धीरे होस आने लगी.. तो लखनने चुदाइ रोकदी.. ओर वो राधीकाके उपर लेटते उनके होठोको ओर बुब्सको बारी बारी चुमने लगा..





राधीकाने धीरेसे अपनी आंख खोलदी.. उनको अपनी चुतपे बहुत जलन महेसुस होने लगी.. ओर उनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. उनको आज अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह अहेसास होने लगा.. जैसे पहेली बार उनका कौर्माय अपने पतीको सोपा हो.. लखन बीना कमर हीलाये अ‍ैसे ही राधीकाके होठोको चुमने लगा.. तो कुछ देरके बाद राधीका भी उनका साथ देने लगी..





अब राधीकाको दर्दसे काफी राहत महेसुस होने लगी.. ओर वो धीरे धीरे करते लखनकी पीठको सहेलाने लगी.. वो अबभी सरमके मारे लखनसे नजरे चुरा रही थी.. क्युकी आज लखनने उसे अ‍ेक कुआरी लडकीका अहेसास करवा दीया था.. वो ये सोचकर मन ही मन खुस होने लगी.. की चलो.. मेने अ‍ेक सही आदमीसे सादी करली हे.. जो मुजे जींदगी भर खुस रख पायेगा.. तभी..

लखन : (मुस्कुराते) राधु.. अब कैसा लग रहा हे..? दर्द कम हुआ..?

राधीका : (सरमसे सरको हां मे हीलाते) हां जानु.. थेन्क्यु.. मुजे लगता हे आज सही मायनोमे मेरा कौमार्य भंग हुआ हे.. आज आपने मुजे अ‍ेक लडकीका अहेसास करवा दीया.. थेन्क्यु सो मच..

कहेते राधीका लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती हे.. ओर लखनके चहेरेको चुमने लगती हे.. तब लखनका लंड भी राधीकाकी चुतमे ठुमकी मारने लगा.. ओर लखन धीरे धीरे अपनी कमर हीलाते राधीकाको फीरसे चोदने लगा.. तो कुछ ही देरके बाद दोनोके बीच धमासान चुदाइ हो रही थी.. लखनने अब तक राधीकाको दो दो बार जडा दीया था.. ओर अभी दोनो अपने चरमपे पहोंचनेकी कगारपे थे..





राधीका लखनको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्सा रही थी.. तो लखन जोरोसे कमर हीलाते राधीकाको चोदने लगा.. अचानक राधीकाका तन अकडने लगा.. ओर वो लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती हे.. तभी लखनका लावा भी फुट पडा.. ओर लंबी लंबी पीचकारीया छोडते राधीकाकी चुतको भरने लगा.. राधीकाको भी अपनी बच्चेदानीपे गरम महेसुस हुआ.. ओर वो भी कांपते हुअ‍े जडने लगी..





दोनो अपने चरमपे पहोंच गये.. लखन राधीकाके सीनेपे ढेर हो गया तो राधीका लखनकी पीठको सहेलाने लगी.. दोनो अपनी सांसको दुरस्त करते अ‍ैसे ही पडे रहे.. राधीकाको नही पता थाकी अब ये लखन पहेले वाला लखन नही रहा.. उनकी चुतमे लखनके हजारो सुक्राणु राधीकाके गर्भके बीजको मीलनेके लीये होड लगा रहे थे.. सृतीने पुनमको सही कहा था.. की लखन कीसीको अ‍ेक ही बारमे प्रेगनेन्ट कर सकता हे..





तो दुसरी ओर पुनम अब लखनके साथ सादीके सपने देखने लगी थी.. क्युकी धिरेनके साथ उनकी सादी ज्यादा दिन नही चली.. तीन महीनेमे ही उनका डीवोर्स हो गया.. जब धिरेनसे सादीकी उनके अ‍ेक महीने पहेले ही देवायतसे प्रेगनेन्ट होचुकी थी.. आज उनका चोथा महीना चल रहा था.. ओर अब तो देवायतकी इतनी सादीयोकी वजहसे उनसे भी सभी रीलेशन खतम होगया था..

ओर जबसे मंजुने उनको अपनी पहेचान करवाते शक्तिया दी.. तबसे वो लखनको पहेचान गइ थी की लखन ही बबलु हे.. ओर वो उनकी पीयु.. इसी वजहसे उन्होने लखनको जडीबुटी दी.. ताकी भवीस्यमे उनकी सेक्स लाइफ अच्छी तराह बीते.. तबसे लखनकी ओर ढलने लगी थी.. उपरसे मंजुने घरकी सभी ओरतोको लखनके साथ रीलेशनकी छुट देदी.. लखनसे यारका भी इजहार करलीया..

तबसे वो सीर्फ लखनके सपने ही देख रही थी.. ओर सादीसे पहेले लखनके साथ मीलन करनेके लीये उत्सुक थी.. लखनके बारेमे बार बार सोचते उनकी चुत फडफडाते गील होजाती थी.. जो अभी लखन ओर राधीकाके उपर नजर जमाये बैठी हुइ थी.. ओर दोनोकी चुदाइ देखकर वो भी काफी गरम हो चुकी थी.. लखन ओर राधीका अपने चरमो पे पहोंच गये..

वो सोनेसे पहेले चेन्ज करने बाथरुममे घुस गइ.. ओर लखनके लंडको इमेजींग करते अपनी चुतमे उंगली करने लगी.. जब जड गइ तो सांत होते ही वो बहुत ही सरमाइ.. ओर मुस्कुराते चेन्ज करके अपने बीस्तरपे आ गइ.. तब वहा लता.. ओर भावना भी अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सोइ हुइ थी.. क्युकी अब चंदाके आजानेकी वजहसे भावना देवायतके साथ नही सो रही थी.. ओर उनकी जगह अब दयाने लेली थी..
 
उस रात मंजुने देवायतको पुछकर पहेली बार चंदाको नींदकी गोली देकर सुला दीया.. लेकीन फीर भी चंदाको लेकर देवायतका मुड आज ठीक नही था.. तो दया ओर मंजु भी समज गइ.. ओर सबलोग अ‍ैसे ही सो गये.. भावना लता भी पुनमसे बाते करते नींदकी आगोसमे चली गइ.. लेकीन पुनमकी आंखोसे नींद कोसो दुर थी.. वो धीरेसे चलकर बहार नीकल गइ.. ओर अंधेरेमे होलमे जाकर बैठ गइ.. ओर उसने देर रात सृतीको फोन लगा दीया..

सृती : (धीरेसे) हां दीदी.. बहुत देर करदी आपने.. मे आपके ही फोनका इन्तजार कर रही थी.. सो गये सब..?

पुनम : (धीरेसे) हां दीदी.. तभी तो मे होलमे आकर आपसे बात कर रही हु.. सो गइ थी क्या..?

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) अरे नहीं दीदी.. आपकी तराह मुजे भी नींद कहा आती हे.. तो जागते पडी थी.. कहीये..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. आपको अ‍ेक खुस खबर देनी थी.. तो मुजसे रहा नही गया ओर फोन कदीया..

सृती : (मुस्कुराते) अरे वाह.. अ‍ैसी भी क्या खुस खबर हे जो मेरी दीदीने इतनी रातको फोन कीया.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. मंजुदी मेरी सादी लखन भैयासे करवाना चाहती हे.. ओर ये बात आज उसने सबको बता दीया.. तो इस रीस्तेसे सब लोग बहुत खुस हुअ‍े..

सृती : (खुस होते) क्या..? सब राजी होगये..? क्या चंदादीदी भी.. मतलब.. उनको सब पता चल गया..?

पुनम : (धीरेसे) हां दीदी.. क्या बताउ..? आज उनकी धिरेनसे बात हुइ.. तो वो बहुत ही अपसेट होगइ हे.. ओर अ‍ेक बार बेहोस भी होगइ थी.. तो भुमी आंटीने उनको सरबत पीलाया.. खैर.. छोडीये ये सब.. कहीये.. क्या केह रहे थे भाइ..? वहा आयेथेनां..?

सृती : हां.. कुछ नही.. वो तो मुजे सोरी बोल रहे थे.. केह रहे थे.. भाभीमांने तो मुजे आपको कानके नीचे अ‍ेक देकर आपको घसीटकर लानेको कहा हे.. लेकीन मे अ‍ैसा करना नही चाहता.. हें..हें..हें.. दीदी.. वो बहुत ही अकडके बात कर रहे थे.. तो मुजे तो बहुत हसी आरही थी.. बडी मुस्कीलसे हसीको रोखके रखी..

पुनम : (मुस्कुराते) अच्छा..? आप उनसे क्या केह रही थी..? जरा वो सर्तके बारेमे बताइअ‍ेतो..?

सृती : (सरमाकर हसते) अच्छा तो आपको सब पता चल गया.. क्या करु.. सोचा मे भी थोडी मस्तीया करलु.. लेकीन वोतो बहारसे ही चले गये.. अंदर भी नही आये.. दीदी.. वो कीतना क्युट लग रहे थे.. मेरा तो मनथा उनको यही रोकलु.. मेने उनको रोकनेकी कोसीस भी की.. लेकीन नही रुके.. खैर जाने दीजीये.. ओर कहीये.. चंदा दीदी अब कैसी हे..?

पुनम : (धीरेसे) दीदी.. देर साम धिरेनने भाभीको फोन कीया था.. भाभीने उसे खुब खरी ओटी सुनाइ.. ओर जायदासे बेदखल करनेकी बात की.. तो उनके केरेक्टरके बारेमे भी भला बुरा कहेने लगा.. ओर भाभी उनपे बहुत गुस्से होगइ.. उनका बीपी भी बढ गया था ओर वो बेहोस होगइ थी.. दीदी.. लगता हे चंदा भाभीकी तबीयत ठीक नही हे.. वो सारा दिन विजयको लेकर बैठी रही.. ओर उसे अपना दुध पीलाने लगती हे.. तो लगता हे उनकी दिमागी हालत भी ठीक नही हे..

सृती : (आस्चर्यसे) दीदी.. क्या केह रही हो..? इतना कुछ हो गया.. तो फीर आपको मुजे बताना चाहीयेनां..? दीदी.. उनको कीसी साइक्रीयाके डोक्टरको दीखाना चाहीये.. तभी वो ठीक हो पायेगी..

पुनम : दीदी.. इसीलीये तो आपको फोन कीया.. मे कल मंजु दीदीसे बात करलुगी.. ओर अब हो सके तो आप भी हमारे घरपे आजाओ.. अ‍ेकना अ‍ेक दिन तो आना ही हे.. तो फीर अभी क्यु नही..?

सृती : हां दीदी.. सच कहा आपने.. मे आजाउगी.. आप लोग चंदा दीदीको लेकर यहा आओ तो मुजे कोल करदेना.. मे भी आजाउगी.. बस.. मम्मी ओर देवुसे थोडी नाराजगी हे.. लेकीन मुजे उनकी परवा नही हे.. बस.. चंदा दीदी जल्द ठीक होजाये..

पुनम : (धीरेसे) दीदी.. कुछ बात हे जो मे अभी आपको बता नही सकती.. सीर्फ इतना कहुगी.. वो अ‍ैसे तो ठीक नही होगी.. बस.. अ‍ेक हादसेने उनका दिमाग खराब करदीया.. ओर दुसरे हादसेसे वो ठीक होजायेगी..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. आपकी ओर मंजुकी बात जटसे समजमे नही आती.. पता नही आप कौनसे हादसेकी बात कर रही हो..? इनसे पहेले भी मंजु दीदी या फीर आपसे ये बात हुइ थी.. लेकीन मेतो सब भुल जाती हु.. कुछ याद ही नही रहेता.. अब तो उनको भी कुछ नही पुछ सकती.. दीदी.. अ‍ेक बात कहु..? भले ही मे प्रेगनेन्ट होगइ.. लेकीन मुजे मां बननेकी इतनी खुसी क्यु नही होती..? कोइ खास रीजन..?

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. रीजन तो हे.. लेकीन मे ओर मंजुदीदी सीर्फ जान जाती हे.. उनको टाल नही सकती.. बस.. अ‍ेक हादसा आपके साथ भी हो सकता हे.. तो कल आप अपना खयाल रखीयेगा.. हें..हें..हें.. ओर बाकी आपके प्रेगनेन्ट होनेकी बात.. तो मे वहा आउगी तब आपको रुबरु मीलकर बताउगी..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. तो फीर आप कीस हादसेकी बात कर रही थी..? तो बताइअ‍ेनां ताकी मे सतर्क रेह सकु..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. मेने कहाना हम उसे टाल नही सकते.. मे तो सीर्फ आपको आगाह कर रही हु.. क्या पता उसी हादसे से आपकी जींदगी बदल जाये.. तो कभी कभी अ‍ैसे हादसे हमारी जींदगीके लीये बहुत जरुरी हे.. जैसे मेरे ओर धिरेनके बीच हुआ.. चलीये रात बहुत होगइ हे.. तो फीर सोना भी हे.. बस.. जानेसे पहेले इतना बता देती हु.. की आपकी मंजील बहुत करीब हे.. दीदी.. बेस्ट ओफ लक.. गुड नाइट..
 
कहेते पुनमने फोन काट दीया तो सृती फोनकी ओर देखकर हसने लगी.. फीर वो भी सोनेकी कोसीस करने लगी.. उधर पुनम भी अपने रुममे जाकर सोगइ.. तो इधर लखन बीना लंड बहार नीकाले राधीकाकी दुसरी बार धामेकेदार चुदाइ कर रहा था.. इस पुरी रात सुबह चार बजे तब लखन राधीकाकी चुतमे धमाके करता रहा.. ओर उनकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरता रहा..

पुरी रातमे लखनने राधीकाकी अलग अलग पोजीशन चार बार चुदाइ करली.. जो अ‍ेक साथ कभी नही हुइ थी.. लखनकी स्टेमीना देखकर राधीका भी खुस होगइ.. हांलाकी उनकी इतनी बार चुदाइसे वो पुरी तराह थक चुकी थी.. लखनने राधीकाके अ‍ेक अ‍ेक अंगको जंजोरके रख दीया था.. ओर राधीकाकी चुत सुजके पांव जैसी होगइ थी.. फीर दोनो कंपलीट होकर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे सो गये..

तो इधर हवेलीपे सबलोग गहेरी नींदमे सो रहे थे.. चंदाको दी हुइ नींदकी गोलीका पावर उतर गया था.. तब उसने आंख खोली.. तो साथमे विजयको सोते हुअ‍े पाया.. ओर चंदा जटसे विजयको अपनी आगोसमे ले लेती हे.. ओर उसे ब्लाउस उचा करके अपना दुध पीलाने लगी.. उसे सामको धिरेनसे हुइ बाते याद आने लगी.. तो चंदाके सरमे दर्द होने लगा.. ओर वो जटसे खडी होगइ.. ओर देवायतको जगाने लगी..

चंदा : (देवायतको हीलाते) देवु.. ओ देवु.. देवु.. उठो.. सजा दो मुजे.. देवु.. चोदो मुजे.. मे आपकी रंडी हु.. देवु.. उठो.. मुजे चोदलो..

देवायत : (हडबडाते जागते) हंम.. हां.. हां.. चंदा.. क्या हुआ..? हंम.. चंदा.. कुछ हुआ हे क्या..?

चंदा : (हांमे सर हीलाते जोरोसे) देवु.. उठो.. देखो.. आपके सामने आपकी रंडी खडी हे.. चोदो मुजे.. देवु.. सजादो मुजे..

चंदा पागलपन करने लगी.. उनकी जोरोकी आवाज सुनते मंजु ओर दया भी जाग गइ.. दोनो जटसे बेडपे बैठगइ ओर देखने लगी.. तो चंदा देवायतसे गीड गीडाते उसे चोदनेकी मनते कर रही थी.. मंजु चंदाका पागलपन देखकर सबकुछ समज जाती हे.. ओर वो जटसे खडी होकर अ‍ेक नीदकी गोली ओर पानी लेकर चंदाको पीलनेकी कोसीस करती हे.. लेकीन चंदा जोरोसे आवाज लगाते देवायतको सजा देनेको कहेते उसे चोदनीकी बाते करती रहेती हे..

मंजुके रुमसे सोरकी आवाज सुनकर पुनम भावना ओर लताभी जाग जाती हे.. ओर बहार नीकलती हे.. नीर्मला ओर भुमीका भी मंजुके रुमकी ओर जाते दीखाइ पडती हे.. तो पुनम भावना ओर लता भी वही जाने लगी.. तभी नीर्मला मंजुका दरवजा खटखटाते दरवाजा खोलनेके लीये कहेती हे.. तो दया दरवाजा खोल देती हे तो सबलोग अंदर आजाते हे.. तो चंदा नीर्मलाको देखकर उनके पास आती हे..

चंदा : (नीर्मलाको हीलाते) दीदी.. देवुको कहीयेनां मुजे सजादे.. धिरेन केह रहा था मे इनकी रंडी हु.. इसे कहो मुजे चोदले..

नीर्मला : (चंदाको चांटा मारते जोरोसे) चंदा.. होसमे आओ.. ये क्या पागइपन हे..?

मंजुला : (पास आते) मोम.. आप इसे इस गोली पीला दीजीये.. अभी वापस सोजयेगी.. हम इसे सुबह दीखानेके लीये सहेर लेजायेगे..

भुमीका : (थोडी चीन्तासे) मंजु बेटा.. इसे नींदकी गोली मत दे.. हमे सुबह तक क्यु इन्तजार करना.. इसे अभी होस्पीटल ले चलो.. (पुनमकी ओर देखते) पुनम बेटा.. तुम सृतीको फोन करदे..

मंजुला : (जटसे) नही पुनो.. उन कमीनीको फोन मत करना.. हम कोइ दिमागके डोक्टरको दीखा देगे.. (देवायतको) देवु.. आप फटाफट तैयार होजाओ.. हम अभी नीकलते हे..

पुनम : (धीरेसे) दीदी.. क्या मे भाइको फोन करदु..?

मंजुला : हां पुनो.. तु लखनको फोन करदे.. कहेना हम चंदा दीदीको लेकर आ रहे हे..

चंदा : (आस्चर्यसे देखते) अरे..? मुजे क्या हुआ हे.. जो आप लोग मुजे होस्पीटल लेजा रहे हो.. दी..दी.. मेरा सर फटा जा रहा हे..

भुमीका : (सरको सहेलाते) मेरी बच्ची तुजे कुछ नही हुआ.. चल मे ओर नीमु भी साथ आ रही हे..

साथमे कोन आ रहा हे कोन नही.. इनकी प्लानींग हो रही थी तब देवायत भी बाथरुममे घुस चुका था.. ओर नहाकर कंपलीट हो रहा था.. तबतक बहारकी ओर चंदाको लेकर देवायतके साथ मंजु नीर्मला ओर भुमीकाने जानेका तैय करलीया.. तो भुमीका ओर नीर्मला भी जानेके लीये तैयार होने चली गइ.. जैसे ही देवायत बहार नीकला तो मंजु भी बाथरुममे घुस गइ.. ओर भावना पुनम चंदाको सम्हालके बैठे थे..

जबतक मंजु नहाकर कंपलीट होगइ.. तबतक पुनमने लखनको फोन करदीया था.. तो लखन भी अभी अभी सोया था तो वोभी पुनमकी बात सुनकर थोडा गभरा गया.. ओर वो भी रेडी होने बाथरुममे चला गया.. इधर सब कंपलीट हो गये.. तो मंजुने विजयको सम्हालनेके लीये पुनमको देदीया.. ओर चंदा मंजु नीर्मला ओर भुमीको लेकर देवायत सहेरकी ओर नीकल गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २३९

जबतक मंजु नहाकर कंपलीट होगइ.. तबतक पुनमने लखनको फोन करदीया था.. तो लखन भी अभी अभी सोया था तो वोभी पुनमकी बात सुनकर थोडा गभरा गया.. ओर वो भी रेडी होने बाथरुममे चला गया.. इधर सब कंपलीट हो गये.. तो मंजुने विजयको सम्हालनेके लीये पुनमको देदीया.. ओर चंदा मंजु नीर्मला ओर भुमीको लेकर देवायत सहेरकी ओर नीकल गया.... अब आगे

रास्तेमे देवायतने लखनसे बात करली.. तो लखन राधीका ओर रजीयाको सभी बात बताकर उसी मल्टी स्पेसीयालीस्ट होस्पीटलमे पहोंच गया.. ओर इमरजन्सीमे बात करते लखनने डोक्टरको भी बुला लीया था.. बीस पचीस मीनीटके बाद देवायत भी सबको लेकर पहोंच गया.. तब सुबह साडे सात बजनेको आये थे.. पुरे रास्ते चंदा कुछना कुछ बडबडाती रही.. यहा पहोंचकर लखनने सब कंपलीट रखा था..

चंदाकी ट्रीटमेन्ट सुरु होगइ.. वहा लखनने अ‍ेक स्पेसीयइ रुम ले रखा था.. चंदाके सभी तराहके टेस्ट हुअ‍े.. उनका अ‍ेम आर आइ भी हुआ.. फीर चंदाको दवाइ पीलाइ ओर वो गहेरी नींदमे सो गइ.. अब चंदाके सभी रीपोर्ट आनेका इन्तजार था.. जो इसमे थोडा टाइम लगने वाला था.. अ‍ैसे ही साडे नव बज गये.. कीसीने कुछ खाया पीया नही था..

तो लखनने वही सबके लीये चाइ नास्तेका इन्तजाम कीया.. इसी बीच सुबह जब सृती नहाकर कंपलीट होगइ.. ओर अपनी क्लीनीकपे जा रही थी.. तब बीच रास्ते उन्होने अ‍ैसे ही पुनमको फोन कीया.. तो मंजुके मना करनेके बावजुद भी पुनमने सृतीको चंदाके बारेमे सब कुछ बता दीया.. सुनकर सृती भी थोडी वीचलीत होगइ.. ओर उसने फौरन अपनी कार वहीसे वापस घुमाइ..

कार होस्पीटलकी ओर लेजाते सृतीने लखनको फोन करदीया.. तो बहार मेडीकल स्टोरसे दवाइ ले रहा था.. लखनने उसे कोनसी होस्पीटलमे अ‍ेडमीट हे वो बता दीया.. ओर सृती कार लेकर सीधी वही पहोंच गइ.. तो चंदा गहेरी नींद सो रही थी.. ओर नीर्मला भुमीका ओर मंजु चुदाके पास बैठी थी.. देवायत बहार बैठकर कीसीसे फोनपे बाते कर रहा था.. तभी उसने भी सृतीको आते ही जटसे अंदर जाते देखलीया..

फीर भी वो वही बैठकर बाते करता रहा.. तबतक सृती रीसेप्नीस्टसे पुछकर कमरेमे चली गइ जहा चंदाका रुम था.. तो अंदर जाते ही सबको देखकर उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. ओर वो मंजुकी ओर देखते ही हाथ जोडती हे.. ओर भुमीके पैरमे गीरते मांफी मांगते रोने लगती हे.. तो भुमीका भी दिल पीगल गया.. ओर वो भी आंसु बहाते सृतीके सरपे हाथ घुमाने लगी.. तभी अचानक मंजुने उनका हाथ पकडकर खडा करदीया..

मंजुला : (थोडा गुस्सेमे धीरेसे) क्यु आइ हे इधर..? तमासा करने..? देखती नही ये होस्पीटल हे..

सृती : (मंजेके पैर पकडपे आंसु बहाते) दीदी.. मुजे माफ करदो.. मुजसे बहुत बडी गलती होगइ.. मे आपको पहेचान ना सकी.. बस.. सीर्फ अ‍ेक बार माफ करदो मुजे..

मंजुला : (सामने देखते) क्यु..? अब क्यु माफी मांग रही हे..? तुजे कहाथानां मुजे अपनी सकल मत दीखाना.. मेने तुजे कीतना समजाया था.. तबतो हमारी अ‍ेक नही सुनी.. ओर अब माफी मांग रही हे..? तुजे तेरी सहेलीने समजाया थानां..?

सृती : (रोते आंसु पोछते) हां दीदी.. प्लीज.. मुजे सीर्फ अ‍ेक बार माफ करदो.. मे वादा करती हु.. आइन्दा अ‍ैसी गलती कभी नही करुगी.. प्लीज.. प्लीज..

मंजुला : (थोडा सांत होते) देख सृती.. मे अभी यहा तुमसे कोइ बात करना नही चाहती.. तुम तो हम सबसे रीस्ता तोडके गइ थीनां..? ओर गइ तो सीधे अपने घर..? मेरा बेटा भी तुजे लेने आयाथानां..? तो फीर उनके साथ क्यु नही आइ..?

सृती : (गीडगीडाते) दीदी.. कहानां मुजसे बहुत बडी गइती होगइ.. मुजे माफ करदो.. प्लीज.. ओर क्या हुआ हे चंदा दीदीको..? कीसीने मुजे कुछ बताया भी नही.. मे अ‍ेक डोक्टर हु.. इनको कुछ होने नही दुगी..

मंजुला : (सामने देखते) तेरी सहेलीने तुजे बता दीया.. तभी तो आइ हो इधर.. ओर सुन.. मे यहा अभी कुछ भी बात करनेके मुडमे नही हु.. जब हम घरपे चले जाये तब बात करने आजाना.. अभी यहा होस्पीटलमे मे कोइ तमासा करना नही चाहती.. समजी..? यहा डोक्टर हे इनको देखनेके लीये.. जा यहासे..

सृती : (आंसु बहाते) दीदी.. प्लीज.. मे चंदा दीदीका सब देख लुगी.. इसे कुछ होने नही दुगी.. मुजे यहा रहेने दीजीये..

मंजुला : (दुसरी ओर मुह करते थोडा सख्त लहेजेमे) नही सृती.. मेने कहानां तु अभी यहासे चलीजा.. हम इस बारेमे फीर कभी बात करेगे.. ओर हां.. बात करनी होतो अपनी सहेलीसे बात करके सब जान लेना.. लेकीन अभी यहासे चलीजा..

सृती : (आंसु पोछते) ठीक हे दीदी.. अभी तो मे जा रही हु.. देखना आपको मुजे माफ करना ही पडेगा..

कहेते सृती आंसु बहाते वहासे चली गइ.. वो जटसे अपनी कारमे बैठ गइ.. ओर कारको भगाके वहासे चली गइ.. लखनने दवाइआ लेकर वापस आते हुअ‍े सृतीको जाते हुअ‍े देखलीया.. ओर लखन सीधा ही देवायतके पास चला गया फीर दोनो भाइ अंदर रुममे आ गये.. तो लखनने सृतीके जानेकी बात कही.. मंजुने देवायत ओर लखनको सब कुछ बता दीया..
 
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