रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २४२
कहेते लखन सृतीके होठोको चुमते वहासे नीकल गया तो सृती बहुत ही सरमाइ.. ओर मनमे बहुत खुस होते फोन उठालेती हे.. ओर पुनमसे बाते करने लगती हे.. फीर बातो ही बातोमे पुनमको बता दीयाकी वो ओर लखन अेक दुसरेके प्यारको कबुल कर चुके हे जीसे सुनकर पुनम भी बहुत खुस होजाती हे.. फीर सृतीने रातमे मंजुके साथ हुइ घटनाके बारेमे भी बात करलेती हे.. हालाकी पुनमको सबकुछ पता था.. फीर भी वो सृतीकी खुसीके लीये उनकी बाते सुनती रही.... अब आगे
सृती : (खुसीसे फोनपे) दीदी.. आज मे बहुत बहुत खुस हु.. आपको बया नही कर सकती.. हमारे भाइने मेरा प्यार कबुल करलीया हे.. दीदी पता हे..? वो मुजसे नाराज भी नही थे..
पुनम : (मुस्कुराते) हां.. वो तो आपकी बातोसे ही पता चल जाता हेकी आप कीतनी खुस हे.. हें..हें..हें.. दीदी.. क्या आपको अपनी पहेचान होगइ..?
सृती : (खुसीसे) हां दीदी.. रातमे मम्मीने मुजे उनकी भी पहेचान करवाइ.. ओर मेरी भी पहेचान करवाइ.. ओह गोड.. कीतना अदभुत था.. अब मुजे कोइ संदेह नही हेकी अैसा कुछ नही होता.. दीदी.. सब बाते सच हे.. बस.. अब आप जल्दीसे इधर आजाइअे..
पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. आजाउगी.. लेकीन तीन चार दिनके बाद.. अभी कुछ देर पहेले ही सबलोग घरपे आये हे.. बडी दीदीने मुजे वहा सादीकी खरीदी करनेको कहा हे.. तो मे तब आउगी.. दीदी.. क्या कर रही हे राधीका भाभी..
सृती : (मुस्कुराते) बेचारी.. बहुत अच्छी हे.. आज ही अपनी होस्टेलपे गइ हे.. आपको बहुत मीस कर रही हे.. अेक बार आकर उनसे मीललो..
पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. आना ही पडेगा.. अबतो वो भी हमारी सौतन हो रही हे.. कुछ दिन भाभीका मजा लेनेदो.. फीर तो उनको भी दीदी दीदी कहेना पडेगा.. हें..हें..हें..
दोनो बाते करती रही.. तो दुसरी ओर गांवमे चारु नीशा ओर अब सुधीरसे वसुधा बनकर तीनो वापस आ चुके थे.. जो इस वक्त सुधीरके घरपे ही आराम कर रहे थे.. तो चारुने फोन करके मंजु रश्मी ओर वंदनाको अपने आनेकी जानकारी देदी.. तो दुसरी ओर रश्मी ओर वंदना अब भी सहेरमे टीनाके घरपे थी.. अब रश्मीका पेट भी काफी बढ गया था.. उनका भी डीलीवरीका टाइम जनदीक था..
तो वंदनाको भी सहेरमे दो बार उल्टीया हुइ.. तो टीना ओर रश्मी उनको लेकर होस्पीटलपे दीखाने गये.. तो पता चला वंदना भी प्रेगनेन्ट हो गइ थी.. जीसे सुनकर रश्मी ओर टीनातो खुस हुइ.. लेकीन वंदनाको अपनी देवायतकी सादीकी चीन्ता सताने लगी.. क्युकी अभी तक वंदना ओर देवायतकी सादी नही हुइ थी.. तो रश्मीने उसे सादीका आस्वाशन देकर समजाया तब जाके वंदनाको राहत महेसुस हुइ.. ओर रश्मीने ये बात मंजु ओर पुनमको बतादी..
रश्मी : (फोनपे) हेलो.. मंजुदीदी.. कैसे हे सबलोग.. मजेमे..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हां रश्मी भाभी.. सब मजेमे.. तुम कहो.. बहुत रुकी दोनो..? लगता हे वही राच आ गया हे..
रश्मी : (मुस्कुराते) नही दीदी.. अेक दो दिनमे वापस आ रही हे.. सुनो.. अेक खुस खबर देनी थी..
मंजुला : (मुस्कुराते) अच्छा..? बोलो.. कोनसी खुस खबर हे..?
रश्मी : (मुस्कुराते) दीदी.. हमारी वंदना.. सी इस प्रेगनेन्ट.. आज ही रीपोर्ट करवाइ हे.. थोडी सादीको लेकर चीन्तामे थी..
मंजुला : (खुस होते) अच्छा..? सुनो.. उनको कहेना कोइ चीन्ता ना करे.. यहा आओगी तब उनकी सादी जल्द देवुसे करवा दुगी..
रश्मी : (खुस होते) ठीक हे दीदी.. मे उनको बता दुगी.. चलो बाय..
तो सहेरमे भी जवेरीलाल जीतुलाल ओर वृन्दा अपने नये घरमे आ चुके थे.. जीतुलाल ओर वृन्दाने मीलकर धीरे धीरे घरका सब सामान सेट करलीया.. जवेरीलाल अपने बीजनेसपे चले जाते तब वृन्दा सामान सेट करनेके बहाने जीतुलालको घरपे ही रोक लेती.. फीर दोनो खुलकर खुब चुदाइ करते.. ओर आराम करते साथमे सामान भी सेट करते.. अब दोनो ही अेक पती पत्नीकी तराह रहेने लगे थे..
अेक सुबह प्लानके मुताबीक जैसे ही जवेरीलाल ओर जीुलाल अेक ही स्कुटरपे अपनी दुकानपे चले गये.. तो कुछ ही देरमे वृन्दाने जवेरीलालको फोन करके जीतुलालको घरपे कामके बहाने बुला लीया.. तो जवेरीलालने जीतुको घर भेज दिया.. जैसे ही जीतुलाल घरपे आया वृन्दा सजधजके दुल्हनके लीबासमे कंपलीट होकर जीतुलालके इन्तजारमे बैठी थी.. तो जीतुलालने आकर चेन्ज करलीया..
फीर दोनो घरको ताला लगाकर नीकल गये.. ओर सहेरसे दुर अेक मंदिरपे पहोंच गये.. जहा अगले ही दिन जीतुलाल सबकुछ तैय करके आया था.. वहा पंडीतने दोनोकी सादी करवाइ.. इनसे पहेले ही वृन्दाने जवेरीलालका मंगलसुत्र खीचकर तोड दीया.. फीर जीतुलालने वृन्दाको नया मंगलसुत्र पहेनाया ओर उनकी मांग भी भरदी.. फीर दोनो पंडीतको दक्षीणा देकर घर आ गये..

उस रात वृन्दाने जवेरीलालको खानेमे दो नींदकी गोलीया पीलादी.. तो आधे ही घंटेमे जवेरीलाल नींदकी आगोसमे चले गये.. तो वृन्दा फीरसे सज सवरके दुल्हनके लीबासमे जीतुलालके कमरेमे चली गइ.. ओर वहा सुबह चार बजे तक दोनोने अपनी सुहागरात मनाइ.. जीतुलाल वायग्रा खाकर पुरी रात वृन्दाको पेलता रहा.. ओर सुबह तक वृन्दाकी हालत खराब करदी..

वृन्दाका तो बस अेक ही मक्सद था.. वो था अेक लडकेकी चाहत.. जो लडकेको वो जीतुलालसे प्रेगनेन्ट होकर पैदा करना चाहती थी.. लेकीन उनको क्या पता.. की इतनी बार अेबोर्सन करवाके अपनी बच्चेदानी खराब करली थी.. जो इतनी चुदाइके बाद भी वो जीतुलालसे प्रेगनेन्ट नही होपाइ.. फीर सुबह चेन्ज करके वृन्दा अपने कमरेमे जाकर सो गइ.. तो जवेरीलाल भी देरसे जागे.. तो उनको कुछ पता नही चला..