Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 93 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २६१

फीर लखन पुनमको वापस गोदमे उठाकर बहार लेकर आगया.. देखातो पुरी चदर दोनोके कामरसके साथ साथ खुनसे भी भरी हुइ थी.. तो लखनने पुनमको चेरपे बीठाकर चदरको चेन्ज करलीया.. ओर पुनमको बेडपे लीटाते उनपे ब्लेन्केट डाल दीया.. ओर खुदभी ब्लेन्केटमे घुसते पुनमसे चीपकके लेट गया.. तो पुनमने लखनकी ओर करवट लेते लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखते रहे.. तभी.... अब आगे

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. अब हमारी सादी हो जायेगी.. मे आपकी बीवी होजाउगी.. तो क्या तब भी मुजे दीदी कहोगे..?

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते होंठ चुमते) हंम.. मेने मेरी दीदीसे प्यार कीया हे.. ओर जींदगीभर दीदीसे प्यार करता रहुगा.. तो आप ओर सृती दीदी हमेसा मेरी बीवीया होते भी बहेन ही रहेगी.. क्युकी मुजे मेरी बीवीयोसे ज्यादा बहेनको प्यार करनेमे बहुत मजा आता हे.. हम बुढे होजायेगे तब भी आपको दीदी कहुगा.. ओर प्यार करुगा..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. मुजे नही पता थाकी आप मुजे इतना प्यार करते हे.. वरना मे कीसी ओरसे सादी ही ना करती.. फीर बडे भाइ ही क्युना हो..? मेरी नादानीकी वजहसे हमने होस्टेलकी लाइफको मीस कर दीया.. वरना वही हमारे बीच सबकुछ होजाता..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. अब छोडीये उन बातोको.. अबतो हम मील गयेनां..? दीदी.. क्या आपने राधुसे बात करली..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही भाइ.. अच्छा हुआ आपने याद दीलाया.. मुजे उनसे जरुरी काम भी हे.. भाइ.. सामको मुजे राधुदीदीको मीलने जाना हे.. हो सकता हे मे रातमे वही रुक जाउ.. मेरा उनसे मीलना जरुरी हे..

लखन : (थोडा मायुस होते) क्या दीदी.. हमारे पास सीर्फ ये दो राते ही हे.. आप उनको बादमे मील लेना.. क्युकी परसोतो आप चली जाओगी..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. मे आपकी बात समज गइ.. लेकीन सुबह तक आप मेरी हालत खराब कर दोगे.. मे कल आपको प्यार देनके लायक भी नही रहुगी.. क्युकी आज हम दोनोकी सुहागरात हे.. ओर मे सोना नही चाहती.. ओर आपको भी सोने नही दुगी.. हमारी सुहागरातको मे यादगार बनाना चाहती हु.. हम सुबह तक प्यार करेगे.. आज मे आपके साथ हु.. आप जी भरके प्यार करलो मुजसे..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) दीदी.. अभी आपकी हालत ठीक नही हे.. जो मे आपसे प्यार करु..

पुनम : (मुस्कुराते होठ चुमते) भाइ.. कीतनी केर करतेहो मेरी..? ये हमारा मीलन.. फीर अ‍ेक हप्ते तक जुदा होना.. फीर हमारी सादी.. ओर उसी रात हमारी फीरसे सुहागरात होगी.. तब मे मेरे भाइको इतना प्यार करुगी.. हम जींदगी भर साथ रहेगे.. अभी तो आप सीधा लेट जाइअ‍े..

कहेते पुनम बेडपे बैठ गइ.. तो लखन मुस्कुराते पीठके बल लेट गया.. पुनम भी सरारतसे मुस्कुराते लखनके दोनो पैरके बीच बैठ गइ.. फीर लखनकी ओर कातील स्माइल करते लखनके लंडको मुठीमे थाम लीया.. ओर लखनके उपर जुकते उनके होठोको चुमने लगी..





ओर धीरे धीरे लंडको सहेलाने लगी.. जब लंड तनके सख्त होगया तो पुनम लखनकी कमरकी दोनो ओर पैर करके बैठ गइ.. फीर लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट करलीया.. ओर धीरे धीरे बैठने लगी.. कुछ ही देरमे लखनका पुरा लंड अपनी चुतमे नीगल लीया..





तो पुनम कमर हीलाते लखनकी कमरपे कुदने लगी.. लखनसे रहा नही गया.. ओर वो भी हाथके बल बैठ गया.. तो पुनमने उछलना बंध करदीया.. ओर लखनकी गरदनको दोनो हाथसे पकडकर अपनी कमरको गोल गोल घुमाते चुदाइ करने लगी..





पुनमको अ‍ेक अलग ही महेसुस होने लगा.. पुनम बहुत ही कामुक नजरोसे लखनकी ओर देखते चुदाइ कर रही थी.. वो अब लखनसे काफी खुल चुकी थी.. पुनमको लखनका लंड अपनी चुतमे घुमानेमे बहुत मजा आरहा था.. वो काफी देर अपनी कमर हीलाती रही..

जीसे वो जडनेकी कगारपे आगइ.. उसने जोरोसे लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखनसे बडी आंख करते लीपलोक करलीया.. तभी आंखोकी पुतलीया उपरकी ओर चडाते अपनी कमरको जटके देने लगी.. तो लखनको अपने लंडपे गरमाहट महेसुस हुइ..

जब पुनम जडके सांत होगइ तो पुनमने लीपलोक छोड दीया ओर लखनके कंधेपे सर रखते अ‍ैसे ही बाहोमे भीचते बैठी रही.. लखनने वही पोजीसनमे पुनमको पीठके बल लीटा दीया ओर उनपे जुकते अपनी कमर हीलाते पुनमको चोदने लगा..





पुनम फीरसे आंखोकी पुतलीया पलटते मदहोस होने लगी.. ओर अ‍ेक बार फीर दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. लखनने इस बार भी पुनमको दो बार ओर जडा दीया.. ओर आखीरमे दोनो साथमे जड गये.. लखनने लंडको बहार नीकाल दीया..
 
ओर पुनमको घोडी बनाके पीछेसे लंडको चुतमे घुसा दीया.. कुछ देरके बाद दोनोके बीच अ‍ेक बार फीर घमासान चुदाइ हुइ.. लखन सुबह चार बजे तब पुनमको बीना लंड नीकाले चोदता रहा.. पुनम काफी थक गइ थी.. आज लखनने उनके अ‍ेक अ‍ेक अंगको ढीला कर दीया..

पुनमकी इतनी जबरदस्त चुदाइ कभी नही हुइ थी.. पुरी रातमे लखनने पुनमकी चुतको पांच बार अपने पानीसे सीच दीया था.. पुनम पुरी तराह संतुस्ट हो चुकी थी.. लखन उनको गोदमे ही बाथरुममे ले जाता ओर सावर लेके गोदमेही उठाकर बहार लेआता..

फीर दोनो नहाकर बेडपे आगये.. पुनम करवट लेकर नंगीही सोगइ.. तो लखन पुनमको पीछेसे चीपकके लेट गया.. पुनम भी थोडी पीछे खीसकते लखनके तनके साथ चीपक गइ.. जैसे उनसे अलग ही नाहोना चाहती हो.. ओर लखनका हाथ पकडकर अपने बुब्सपे रख दीया..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. थेन्क्स.. आज कीतना मजा आया.. आपने मेरी सारी तम्मना पुरी करदी.. मेने अपना वादा पुरा करलीया.. अब हम दोनो हमारी सादीके बाद हमारी सुहागरातमे ही मीलेगे..

लखन : (पीठको चुमते) दीदी.. आपसे अलग होनेका जी नही करता.. आप यही रुक जाइअ‍े.. सादीके अगले दिन दोनो चले जायेगे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. अ‍ैसा नही हो सकता.. कल दोपहर खानेके बाद हम बाकीकी सोपींग करलेगे.. हमे शींगार ओर कुछ मेक अपका सामान लेना हे.. फीर आप मुजे राधु दीदीके वहा छोड देना.. रात मे वहा रहुगी.. उसे बहुत कुछ बताना हे..

लखन : (मुस्कुराते) वापस कब जाना हे..?

पुनम : परसो सुबह हम नीकल जायेगे.. हमे सृतीदीको सरप्राइज भी देनी हे.. रास्तेपे हमारे पुराने मंदिरमे जाना हे.. वहा आपकी ओर सृतीदीकी सादी करवानी हे.. फीर हम घरपे चले जायेगे..

लखन : (गालको चुमते) दीदी.. क्या मम्मीने जो फैसला लीया हे वो सही लीया हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां क्यु..? आप अ‍ैसा क्यु पुछ रहे हो..?

लखन : (मुस्कुराते) सादीके पहेलेकी बात अलग थी.. मेने कइ लडकीया ओर गांवकी भाभीओके साथ सेक्स कीया हे.. लेकीन जबसे सादीके बंधनमे बंधा हु तो अब सब कुछ गलत लग रहा हे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभीओके साथ भी..? मतलब दोस्तोकी बीवीया..?

लखन : (मुस्कुराते) नही.. वो हमारे मजदुरकी बीवीया.. मतलब हरीयाकी बीवी मालती.. वो छोटुकी बीवी रीटा.. जो आजकल हमारे भानु भाइकी बहुत सेवा कर रही हे..

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. पता हे मुजे.. तो..?

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. वो.. मम्मीने.. जो कहा हे.. मतलब.. हमारी भाभीओके साथ भी.. तो थोडा अजीब लग रहा हे..

पुनम : (अ‍ेक गहेरी सांस लेते) भाइ.. आने वाले वक्तमे सबकुछ बदल जायेगा.. कुछ हमेसाके लीये रहेगी तो कुछ चली जायेगी.. भाइ भी इतना सक्षम नही रहेगे.. तब हमारे घरकी ओरते कहा जायेगी..? ये आपने कभी सोचा हे..?

लखन : (सरमाते धीरेसे) आइ नो दीदी.. इस बारेमे मम्मीसे भी बात हुइ.. फीर भी अ‍ेक संकोच हो रहा हे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. कोइ संकोच मत करो.. जीसके साथ मौका मीले.. ओर जो राजीहो उनके साथ सेक्स करनेमे कोइ बुराइ नही.. हमारे घरकी ओरतोको तो छोडो बहारकी कुछ ओरते हे वो भी आपके साथ सेक्स करना चाहेगी.. आपने देखा नही हमारे श्रीधर भैयाकी मांको..

लखन : (मुस्कुराते) अरे हां दीदी.. श्रीधरकी सादीमे तो मुजे खुला नीमंत्रण भी देदीया..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाइ.. अ‍ैसी बहुत सारी ओरते ओर लडकीया होगी जो आपके साथ रीलेशन बनायेगी.. कभी कीसीको मना मत करना.. ओर हां.. अ‍ेक तो हमारे साथ ही आइ हे.. आपके साथ रीलेशन बनानेका पुरा मन बनाचुकी हे.. मौका मीले तो करदो काम तमाम..

लखन : (हसते) कौन..?

पुनम : (सामने देखते हसते धीरेसे) हमारी भावना भाभी.. बीलकुल रेडी हे.. हो सकेतो कल रात ही लेलो.. भाइ सबको मजा करना हे.. आपको कुछ नही होगा.. सबके साथ मजे करते रहो..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) दीदी.. आपके साथ बाते करते कीतना मजा आ रहा हे.. जीतो चाहता हे आपसे प्यार करता रहु.. मे आपसे बहुत प्यार करता हु..

पुनम : (मुस्कुराते) आइ नो भाइ.. मे समजती हु.. पर आप ध्यान रखना.. मेरी वजहसे सृतीदी.. रजुदी.. मीन्स.. आपकी कीसीभी बीवीके प्रती आपका प्यार कम नही होना चाहीये.. इतना प्यार हम दोनो अकेलेहो तब ही जताना.. चलो आपकी अ‍ेक ओर फेन्टासी भी पुरी करती हु.. आप केह रहेथेनां..? की मेभी उस राजाकी तराह प्यार करुगा.. तो चलीये.. आपकी बहेन आपके साथ सोइ हे.. करलो अपनी फेन्टासी पुरी..

लखन : (मुस्कुराते) सच..? आप अनकंन्फोर्टेबल तो फील नही करोगी..? अ‍ेक बार सोचलो.. फीर तो मे हर रात अ‍ैसेही सोउगा..

पुनम : (पीछे गरदन घुमाकर कामुक नजरोसे) सोच लीया.. अब हर रात अ‍ैसे ही सोना हेतो नही फील करुगी.. अब घुसा भीदो.. ताकी हम सो सके..

इतना सुनतेही लखन खुस होगया.. पुनमने अपना अ‍ेक पैर थोडा उठालीया.. तो लखनने थोडा पीछे हटकर अपना लंड पीछेसे पुनमकी चुतमे घुसा दीया.. पुनमकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर लखनके सामने देखते सरमाकर मुस्कुराने लगी..





लंड घुसाके लखन पुनमको पीछेसे चीपक गया.. ओर पुनमके बुब्सको थाम लीया.. पुनम लखनके हाथपे हाथ रखते सोने लगी.. ओर धीरे धीरे करते दोनो भाइ बहेन नींदकी आगोसमे चले गये.. जो कभी उस जमानेमे वो राजा राज अपनी बडी बहेन नेनु या उनकी छोटी बहेन सोनुकी चुतमे लंड डालकर सोजाता था..
 
पुनम कीतने दिनोके बाद सुकुनकी नींद सो रही थी.. इसी तराह गांवमे भी देवायत ओर लता अ‍ेक दुसरेसे चीपकते नंगे सोये हुअ‍े थे.. तो जाहीरसी बात हे आज गांव ओर सहेरमे भी वासनाका तांडव मचा हुआ था..

जबसे जीतुलाल ओर वृंन्दाने सादी करली थी तबसे वृन्दा जवेरीलालको रातमे नींदकी गोली पीलाते उसे सुला देती.. ओर जीतुके पास चली जाती.. फीर दोनो हर रात साथमे सोते ओर जीतुलाल वृन्दाकी जमकर चुदाइ करता ताकी वो वृन्दाको प्रेगनेन्ट कर सके..

लेकीन इस बातसे दोनो अंजान थे.. की बदलेकी भावनासे ब्रीन्दा ओर श्रीधरने मीलकर उनके साथ क्या कीया हे.. दरसल बंसी ओर सांतीकी सादीके दिन जो जडीबुटी मुना भानुके लीये लाया था.. उसने भानुको कोल्ड्रीक्समे मीलकर पीलानेके लीये श्रीधरको दी थी..

तबही उनमेसे आधी श्रीधरने नीकल लीथी.. ओर उसने अपनी मां ब्रीन्दासे बात करते उनको देदी.. ताकी वो कीसी भी तराह अपने पती जीतुलालको पीला सके.. ओर ये मौका ब्रीन्दाको श्रीधर ओर जयश्रीकी सादीमे मील गया.. ओर उसने जीतुलालको पीलादी..

बस.. कुछ ही दिनमे जैसा हाल भानुका होनेवाला था.. अ‍ैसा ही हाल जीतुलालका भी होगा.. इधर दोनो भाइ देर तक सोते रहे.. सृती या रजीयाको लखन ओर पुनमको जगाना उचीत नही लगा.. आज रजीया सुबह कंपलीट होकर कीचनमे चली गइ..

तो दया ओर भावनाने मीलकर सृतीको कंपलीट करदीया.. फीर दोनो भी कंपलीट होगइ ओर सृतीको सहारा देते नीचेकी ओर आगइ.. फीर दया भी कीचनमे जाकर रजीयाकी मदद करने लगी.. तो भावना अपनी बच्चीको लेकर सृतीके पास बैठ गइ.. ओर उसे दुध पीलाने लगी.. तभी..

भावना : (मनमे खुस होते धीरेसे) दीदी.. रातमे कीतना मजा आया.. पुनोदी कैसे चीला रही थी..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) भावुदी.. दोनो भाइ बहेन कीतने सालोके बाद मीले हे.. दोनो स्कुलमे पढते थे तबसे लखन पुनोदीको बहुत प्यार करते थे.. आज उसे अपना प्यार मील गया.. कास मेने पहेलेसे ही लखनसे सादी करली होथी.. इतना सुखतो मुजे देवुसे भी नही मीला..

भावना : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) दीदी.. अ‍ेक बात पुछु..? थोडी पर्सनल..

सृती : (मुस्कुराते) हंम.. पुछ.. अब हम चारोके बीच कुछ पर्सनल नही हे.. बोल..

भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. मुजेतो पता ही नही थाकी आप दोनो रीलेशनमे आ चुके हे.. अभी तक आप दोनो कीतनी बार मीले हो..? मीन्स.. फीजीकल..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) जब मेरा अ‍ेक्सीडन्ट हुआ तब सबसे पहेले लखन ही मेरी हेल्प करने आये थे.. ओर मेने उसी दिन अपने प्यारका इजहार करलीया.. दस बाराह दिन तक हम दोनका खुब रोमांन्स चला.. मे लखनके साथ सामनेसे इन्टीमेट होना चाहती थी.. लेकीन वो हर बार मना करते थे..

भावना : (सरमाते हसते धीरेसे) क्या..? वो मना कर रहे थे..? लेकीन क्यु..? वोतो इन सब चीजोके बहुत सौकीन हे..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) क्युकी वो मुजे सरप्राइज देना चाहते थे.. अ‍ेक हप्ते पहेले मेरा बर्थडे था.. उसी आधी रात सबने मीलकर मुजे सरप्राइज दीया.. ओर मेरा बर्थडे मनाया.. बस.. उसी रात गीफ्टके तोरपे मेने लखनका प्यार मांग लीया.. ओर मेरे बर्थडे वाली रात हम दोनो पहेली बार मीले.. तबसे मेने उनको अपना पती मानलीया हे ओर उनके साथ सोती हु.. तबसे वो मेरे ओर रजु दीदीके साथ फीजीकल होते हे..

भावना : (मनमे खुस होते) वाव.. दीदी.. लखन भैयामे कुछ तो हे.. जो सब इनके पीछे पागल होने लगी हे..जींदगीमे सब कीतना कुछ बदल जाता हे हमे पता ही नही चलता.. कलतक आप पुनोदी.. ओर दस दिन पहेले मेभी देवुकी जींदगीमे आइ.. ओर कीस्मत देखो.. अब हमे हमारे देवरको ही अपनाना पडेगा..

सृती : (सामने देखते) अपनाना पडेगा मतलब..? दीदी.. तो क्या आप लखनके साथ रीलेशनमे आना नही चाहती..? हम आपको कोइ मजबुर नही करते की आप लखनके साथ रीलेशन रखो.. ये आपकी मरजी..

भावना : (सरमाकर सर जुकाते) अरे नही नही.. दीदी अ‍ैसी बात नही हे.. मे देवुसे कीतना प्यार करती थी.. फीर लता ओर दया बहेन आगइ.. मंजुदीने मुजे अचानक उनसे दुर करदीया.. अब तो मेरे सामने तक नही देखते.. तो मुजे बहुत बुरा लगा.. इसीलीये केह रही हु..

सृती : (मुस्कुराते) पता हे क्यु..? क्युकी मंजुमोम.. ओर पुनोदीको सब पता हे आगे क्या होने वाला हे.. मेभी देवुके साथ ज्यादा दिन नही रही.. मुजे मोमने सबकुछ बता दीया हे.. अब हम चारोकी जींदगीमे सीर्फ लखन भैया ही हे.. तो मोम नही चाहती की आपकी देवुसे ओर नजदीकीया बढे.. ओर आप इस सुखसे वंचीत रहे.. अब आपको तैय करना हे की क्या करना हे..

भावना : (आस्चर्यसे) सोरी दीदी.. मेरे कहेनेका ये मतलब नही था.. मेने भी मन बनालीया हे.. की मे लखन भैयाके साथ रीलेशन रखुगी.. बस.. थोडी उलजनमे फसी हु.. तो तैय नही कर पा रही थी.. अब सब क्लीलीयर हे.. मे लखन भैयाके साथ रीलेशनमे आउगी.. लेकीन अ‍ेक बात पुछनी हे.. आप मंजुदीको मोम.. ओर लखन भैयाको अब भी भैया कहेती हो.. क्यु..?

फीर सृती भावनाको सारी बात बता देती हे.. जो उसने मंजुके साथ अनुभुतीकी.. सृती भावनाको अपना लखन ओर मंजु पुनमके पीछले जन्मके बारेमे भी बता देती हे.. जीसे सुनकर भावनाकोभी आस्चर्य होता हे.. ओर उसे सब बाते समजमे आजाती हे..
 
दोनो बाते कर रही थी तभी उपरकी ओर लखनभी जाग जाता हे.. देखता हे तो उनका लंड अबभी पुनमकी चुतमे था.. जीसे देखकर लखन खुस होजाता हे.. ओर पुनमकी कमरको पकडते धीरे धीरे अपनी कमर हीलाते पुनमको नींदमे ही चोदने लगता हे..





लखनकी इस हरकतकी वजहसे पुनमभी जाग जाती हे.. ओर बहुत सरमाती हे.. वो पीछे मुडकर मुस्कुराती हे.. तो लखन उसे गुड मोर्नींग वीस करता हे.. तो पुनम धीरेसे पेटके बल लेटते पैर मोडती हे.. तो लखन उनकी पीठपे सवार होते पुनमको पीछेसे चोदने लगा.. जैसे अ‍ेक कुता कुतीको चोद रहा हो..





तो दुसरी ओर गांवमे भी सुबह लता जाग गइ.. ओर देवुकी ओर देखते प्यारसे मुस्कुराने लगी.. उसने देवायतके सरको चुम लीया.. तो देवायतकी आंख भी खुल गइ.. ओर उसने लताको गुड मोर्नींग वीस करते अपनी बाहोमे भीच लीया.. फीर क्या..

कुछ ही देरके बाद लता देवायतके नीचे लेटी हुइ थी.. ओर देवायत हाथके बल उचा होते लताकी जोरोसे चुदाइ कर रहा था.. उसने लताको अ‍ेक बार जडादीया.. ओर कुछ देरकी घमासान चुदाइके बाद खुदभी लताकी चुतको भरते उनपे ढेर होगया..





दोनो भाइकी सुबह अपनी बीवीको गुड मोर्नींग कहेनेका यही अंदाज था.. लताकी हालत भी रात भर चुदाइकी वजहसे बीगडी हुइ थी.. ओर उसे भी देवायत अपनी गोदमे उठाकर बाथरुममे चला गया.. ओर वहा भी अ‍ेक बार लताकी खडे खडे चुदाइ करली.. लता पुरी तराह संतुस्ट हो चुकी थी..

तो सुबह सांती बरखा ओर जयश्री भी जाग चुकी थी ओर कंपलीट होगइ थी.. सांती कंपलीट होकर बंसीके रुममे चली गइ.. तो जागृती बंसीको चीपककर सोइ हुइ थी.. दोनो नंगेही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे सो गये थे.. तो सांतीने दोनोको जगाना उचीत नही समजा ओर बहार आगइ..

तो जयश्री ओर बरखा अपने अपने घर जानेके लीये नीकल रही थी.. सांतीने उसे चाइ नास्तेके लीये रुकनेके लीये कहा लेकीन वो मना करते अपने घर चली गइ.. बसंती सुबह अपने कमरेमे चली गइ थी.. वो बहुत थकी हुइ थी.. ओर मुना अभी भी घोडे बेचकर नंगा सो रहा था..

तो बरखा सबकुछ समज गइ ओर मुस्कुराते कीचनमे चाइ नास्ता बनाने लगी.. तो इधर जयश्री जब अपने घरपे पहोंची तो ब्रीन्दाका रुम अंदरसे लोक था.. जो वो अभी भी नंगी सोइ हुइ थी.. ओर श्रीधर अपने कमरेमे गाउन पहेनकर सो रहा था..

जयश्रीने सोचा थाकी दोनो मां बेटे अकेले रहेगे तो दोनोके बीच कुछना कुछ होगा.. वो जीस उमीदसे दोनो मां बेठेको अकेले रहेनेका मौका दीया ओर आकर देखा तो जयश्री थोडी नीरास होगइ.. क्युकी उसे अ‍ैसा कुछ भी देखनेको नही मीला जीनकी उसने कल्पना कीथी..

लेकीन जयश्रीको क्या पताथाकी र्बीन्दाका दीमाग कीतना सातीर हे.. खुदतो बीस्तरसे उतरनेकी स्थीतीमे नही थी लेकीन उसने श्रीधरको कपडे पहेनकर सोनेके लीये उनके कमरेमे भेज दीया था.. इधर सहेरमे भी यही हाल था.. पुनमकी घमासान चुदाइके बाद उसे दो बार जडाके लखन उनकी पीठपे ढेर होगया..





पुनमने अपने नीकरसे अपनी चुतको पोछा.. ओर बेडसे उतर गइ.. तो उनके पैर लडखडाने लगे.. लखनने उसे फौरन अपनी गोदमे उठालीया ओर दोनो बाथरुममे चले गये.. दोनो साथमे सावर लेने लगे.. ओर दोनो फीरसे बहेक गये.. यहा भी लखनने खडे खडे पुनमको अ‍ेक बार ओर चोद लीया.. ओर दोनो नहाकर बहार आगये.. तभी..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. थेन्क्स.. आज मेने आपकी गर्लफ्रेन्ड होनेका पुरा हक अदा कर दीया.. अब हम मीलेगे तब मे आपकी पत्नी होजाउगी.. आप कंपलीट होकर नीचेसे रजुदीदीको बुला दीजीये मे कपडे पहेनलु.. वहा आपके रुममे हे..

लखन : (टोलीया लपेटते) दीदी.. मेरे कपडे भी वही हे.. चलो मे आपको ले चलता हु.. आज मे आपको तैयार करदुगा.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) लेकीन देखना अब कोइ सरारत नही.. आपको जीतना प्यार करनाथा मेने करने दीया.. मे अब अ‍ैसी स्थीतीमे नही जो आपका ओर प्यार जेल सकु.. चलीये.. ले चलीये..

लखन : (गोदमे उठाते) दीदी.. प्यार देनेके लीये थेन्क्स.. आप ओर सृतीदी मेरी बेस्ट दीदी हो..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) ओर बेस्ट बीवी भी.. अब चलीये.. मखन लगाकर कुछ ओर करनेका इरादातो नही..?

लखन : (हसते) नही दीदी.. अब आपको ओर तकलीफ नही दुगा.. चलीये आपको पेइन कीलर देता हु.. ताकी कुछ राहत मीले..

पुनम : (मुस्कुराते) नही भाइ.. मे प्रेगनेन्ट हु.. मुजे अ‍ैसी कोइ दवाइ नही खानी.. वैसे भी मुजे ज्यादा तकलीफ नही हे.. मे अपने आप चल सकती हु.. अ‍ेक दो धंटेमे ठीक होजाउगी.. हमने कीतना आराम कीया.. तभी तो आपको सुबह करने दीया.. भाइ.. मे आज राधु दीदीके घरपे रहुगी.. वहा आराम भी होजायेगा ओर मेरा काम भी होजायेगा..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. अ‍ैसा क्या काम हे जो रात आप वहा रुकोगी..?

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. हे अ‍ेक काम.. जो आपको बादमे बता दुगी.. बस.. अभीके लीये इतना जानलो.. वो भी हमारी बहेन हे.. बाकी सब बाते बादमे बता दुगी.. अब चलीये..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. सीर्फ अ‍ेक के बारेमे बतादो.. बाकी बादमे बताना..

पुनम : (मुस्कुराते) कीसके बारेमे..?

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) हमारी सरला काकीके बारेमे.. वो मेरे साथ कुछ अजीब बाते कर रही थी..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ पता हे मुजे.. कमीनी बहुत हवसी ओरत हे.. थोडी लंबी कहानी हे.. अभी उनके बारेमे बात करना पोसीबल नही हे.. इनके बारेमे हम बादमे बात करेगे.. लेकीन जानेसे पहेले आपको बता दुगी..

दोनो मस्ती मजाक करते रुममे आगये.. वहा पुनमको कंपलीट तैयार करके लखनभी रेडी हो गया.. पुनम अपने आप चलते नीचे जाना चाहती थी.. ताकी उसे सबके सामने सरमीन्दा ना होना पडे.. तो वो धीरे धीरे चलने लगी.. लेकीन लखनने उसे चलने नही दीया..
 
पुनमने बहुत मना कीया.. फीर भी लखन नही माना.. ओर पुनमको गोदमे उठा लीया ओर सीडीया उतरके पुनमको लेकर नीचे आगया.. पुनम बहुत ही सर्मसार हो रही थी.. नीचे आते ही पुनमको सृतीके पास बीठाकर खुदभी उन दोनोके बीच बैठ गया..

भावना : (जोरोसे हसते) ओ..हो.. आजकल होने वाली बीवीकी बहुत सेवा हो रही हे..? अ‍ैसा काम करते ही क्युहो जो बीवीकी सेवा करनी पडे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमसे पानी पानी होते अ‍ेक मुका मारते) दी.. आप बहुत कमीनी हो.. जब आपकी बारी आयेगीनां..? तब आपको पता चलेगा.. (लखनकी ओर देखते) भाइ.. थोडा प्यार भावना भाभीको भी देना.. ताकी उनको भी पता चले.. वो भी रेडी हे..

सृती : (जोरोसे हसते) हां लखन.. पुनोदी ठीक केह रही हे.. अब हम सबके बीच कैसा पर्दा..? आज भावना दीदीके साथ अपनी सुहागरात मनालो..

भावना : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) दीदी.. प्लीज.. मुजे थोडा टाइम चाहीये.. पता नही कल रातसे कुछ अजीब लग रहा हे.. मेरी तबीयत भी ठीक नही हे.. कुछ उल्टीया जैसा लग रहा हे..

सृती : (मनमे खुस होते) दीदी.. अभी आपको गोली देती हु.. आप ठीक होजायेगी.. जरा हाथ देना..

भावना : (मुस्कुराते हाथ लंबा करते) जी दीदी.. देख लीजीये..

सृती : (कलाइपे हाथकी नब्स पकडकर घडीमे देखते) दीदी.. आपकी बच्चीके जन्मको कीतना टाइम हुआ..? मेने आपकी ओर मंजुमोमकी डीलीवरी की उनको डेढ साल हुआ हे..

भावना : (मुस्कुराते) हंम.. कुछ दिनोमे मेरी विभा ओर विजय डेढ सालके हो जायेगे.. दोनोका जन्म साथमे ही हुआ हे.. सायद अ‍ेक दिन आगे पीछे होगा..

सृती : (हाथ छोडते धीरेसे) दीदी.. आपको मे अ‍ेक कीट देती हु.. कल सुबह चेक करलेना.. मुजे कुछ आसंकाये लगती हे.. सायद आप प्रेगनेन्ट हे.. (हसते) फीर भी लखनको मीलनेमे कोइ अ‍ेतराज नही..

भावना : (सरमाते लखनकी ओर देखते मुस्कुराते) दीदी.. प्लीज.. बस.. थोडा सोचनेका टाइम दीजीये.. मुजे भी पता हे.. अब हम चारोको लखन भैया ही सम्हालेगे..

लखन : (मुस्कुराते बारी बारी पुनम ओर सृतीके गालको चुमते) भाभी.. कोइ बात नही.. अभी मुजे प्यार देनेके लीये ये मेरी दोनो बहेने हेनां.. आपके हीसेका प्यार मे इनसे लेलुगा..

सृती : अ‍े.. हेलो.. हम दोनो आपको कीसीके हीस्सेका प्यार नही देने वाली.. जीनको प्यार चाहीये वो आपसे ले लेगी.. क्यु पुनोदी..?

पुनम : (भावनाकी ओर देखते हसते) ओर नही तो क्या..? मे भी नही देने वाली..

रजीया : (हाथ पोछते आते) अरे..? आ गये दोनो..? लखन.. आपको चाइ नास्ता बनादु..? हम सब करके बैठे हे.. की अब डायरेक्ट लंच करोगे दोनो..?

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) रजुदी.. बस थोडीसी चाइ पीलादो.. लंचका टाइम भी हो गया हे.. तो नास्ता नही करना.. लखन भैया आपको करना हे..?

लखन : (मुस्कुराते) नही रजु.. हम दोनोको थोडी चाइ ही पीलादे.. फीर लंच करके हमे शोपींगपे जाना हे..

सृती : (पुनमकी ओर देखते) इतनी जल्दी..? सामको आराम करके चले जाना..

पुनम : (सामने देखते) क्या चले जाना..? आपको भी आना हे.. ओर सुनो.. वहा शोपींग करके मे सीधी राधुदीदीके वहा चली जाउगी.. ओर रात वही रुकुगी.. मुजे उनसे अ‍ेक जरुरी काम हे.. फीर हम सबलोग वहेली सुबह गांव नीकल जायेगे.. आप मुजे वहीसे लेजाना..

भावना : क्या वहीसे लेजाना..? हमारा सब सामान इधर पडा हे.. लखन भैया आपको सुबह लेने आयेगे.. हम यहीसे सामान लेकर नीकल जायेगे.. क्या जल्दी हे..

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. वोभी ठीक हे..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) दीदी.. अ‍ेक दिन ओर रुक जाइअ‍ेना.. हम कही धुमने जायेगे..

पुनम : (कीचनकी ओर देखते धीरेसे) नही भैया.. समजोनां.. हमे जाना होगा.. दया बहेनके लीये.. समज गयेनां..? मे चाहती हु कल दो पहोरका लंच हम हमारे घरपे करे.. आपको कल सबकुछ पता चल जायेगा.. ओर रजुदी.. अंदर जाकर दया बहेनको कुछ मत कहेना.. ओके..?

रजीया : (आंख गीली करते) ठीक हे दीदी.. मे आप दोनोके लीये चाइ बनाती हु..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. मे चाइ पीकर ओफीसपे अ‍ेक चकर लगाकर आता हु.. फीर हम लंच करके नीकल जायेगे.. मे राधुको बता दुगाकी साम हमसब वहा डीनर करेगे..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाइ.. ये ठीक रहेगा.. वो सामको जल्दी घर चली जायेगी..

रजीया चाइ बनाने कीचनमे चली गइ.. तो पुनम धीरेसे बात करते तीनोको रामुकाकाके बारेमे बताने लगी.. कुछ देरके बाद लखन चाइ पीकर वहासे नीकल गया.. ओर सीधा राधीकाकी होस्टेलपे पहोंच गया.. वहा उसने पुनमके आनेकी खबर दी..
 
ओर बता दीयाकी वो सामको तेरे घरपे आजायेगी ओर रात वही रुकेगी.. सुनकर राधीका बहुत खुस होगइ.. ओर लखनको लेकर अपने कमरेमे चली गइ.. वहा दोनोने खुब प्यार कीया.. लखनने राधीकाकी चुतको दो बार जमकर रगडा.. फीर वो वापस घरपे आगया..

देखातो खाना बन गया था.. ओर सबलोग लखनका ही इन्तजार कर रही थी.. फीर सब लंच करने बैठ गये.. सृती ओर पुनम लखनके अगल बगलमे बैठी थी.. ओर भावना आज जानबुजके ठीक लखनके सामने बैठ गइ.. तो लखन अपने पैरोसे भावनाके पैरको सहेलाने लगा..

तो भावना कातील नजरोसे लखनकी ओर देखते सरमाके मुस्कुराती रही.. फीर वो भी हींमत करते लखनके पैरको सहेलाते रीस्पोन्स देने लगी.. जीसे देखकर लखन खुस होगया.. ओर अ‍ेक दुसरेको छेडनेसे कीसीको अ‍ेतराज नही था..

ओर अ‍ेक बारतो पैर उठाकर लखनने भावनाकी चुतको भी अपने पैरके अनुठेसे छेड दीया.. तब भावना बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते उसने अपने पैर वापस खीच लीया.. अ‍ैसे ही मस्ती मजाक करते सबने लंच करलीया..

फीर सबलोग तैयार होने उपर चली गइ.. लखन सृतीको गोदमे उठाकर उपर छोडके खुदभी कंपलीट होगया.. ओर सबलोग घरको ताला लगाकर कारमे बैठ गये.. सृतीने दिखाइ जगहपे अ‍ेक मोलमे चले गये.. वहा सादीके लीये शींगारके सब सामान मील रहे थे..

सब लेडीसने मीलकर खुब खरीदारी की.. लखनने सबके लीये चुडीया भी लेली.. पुनम सृती रजीया भावना सब सामान लखनको दीखा दीखाकर खरीद रही थी.. जब खरीदारी होगइ.. तो पुनमने कलके लीये कुछ ओर सामान भी लेलीया ओर अपने पास रखलीया..

फीर सबलोग अ‍ेक काफेपे चले गये.. वहा सबने कुछ ठंडा तो कुछने कोफी ओर साथमे कुछ स्नेक ओर्डर कर दीया.. इसी बीच पुनमने फोन लगाकर राधीकासे बात करली.. तो राधीका भी कुछ खानेका इन्तजाम करके अपने घर चली गइ..

नास्ता करके सबलोग कारमे बैठ गये तो लखनने कारको सीधी राधीकाके घरपे लेली.. वहा सबलोग अंदर चले गये तो राधीका दोडकर पुनमके गले लग गइ.. ओर आंख गीली करके उनकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. फीर वो सबको गले मीली..

तभी इतना कुछ सोर सुनके राधीकाकी मम्मीने अपने रुमसे ही आवाज लगाइ तो पुनम उनकी मम्मीके पास चली गइ.. ओर उनके पैर छुकर उनके गले लग गइ.. तो राधीकाकी मम्मी भी पुनमको देखकर बहुत खुस होगइ.. ओर उसने पुनमको खीचकर अपने गले लगा लीया..

रा. मम्मी : (खुस होते) आगइ मेरी बच्ची..? तुमने मुजे बहुत इन्तजार करवाया.. बस.. अ‍ेक बार होस्टेल छोडकर गइ.. तबसे वापस आइ ही नही.. ओर आज दीखी..

पुनम : (मुस्कुराते गले लगते) सोरी मम्मीजी.. मे बस.. थोडी जींदगीकी उलजनमे फस गइ थी.. अब फ्रि होगइ हु.. कुछ दिनमे मेभी हमेसाके लीये लखन भैयाके साथ रहेने आ रही हु.. तब हम खुब मजे करेगे..

रा. मम्मी : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) हां मेरी बच्ची.. तेरे बारेमे राधीकासे सुना.. सुनकर बहुत दुख हुआ..

पुनम : (मुस्कुराते) छोडीयेना मम्मीजी.. मे वो सब भुल चुकी हु.. इसीलीये तो अब हमेसाके लीये इधर आ रही हु.. आपके पास.. हम दोनो खुब बाते करेगे.. क्युकी अब राधुदी मेरी भाभीजो हो गइ हे.. हें..हें..हें..

रा. मम्मी : (खुस होते मुस्कुराते) हंम.. मेरी राधु बहुत नसीब वाली हे.. मुजे दामाद भी हिरो जैसा मीला हे.. मेरा अ‍ेक मांकी तराह खयाल रखता हे.. ओर तेरे घर वालेभी कीतने अच्छे हे.. उनको मीलकर लगा ही नही की सब अन्जान हे.. अ‍ैसा लगता थाकी मे सबको पहेले मीली हु.. खास करके वो भुमीका ओर नीर्मला..

पुनम : (प्यारसे सामने देते धीरेसे मुस्कुराते) आपकी नजरोमे कोन अनजान हे..? सब पहेचान वाले तो हे.. हां मम्मीजी.. बस.. आज सीर्फ इसीके बारेमे बात करने आइ हु.. पुरी रात आपके साथ रहुगी.. हम फुरसतमे बात करेगे.. सबके चले जानेके बाद..

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) अच्छा..? मतलब मेरे बारेमे तुम जानती हो.. कोइ राजकी बात हे क्या..?

पुनम : (मुस्कुराते गले लगते) हां.. यही समजलो.. आज मे आपको सोने नही दुगी..

तभी सभी लोग अंदर आते हे.. तो राधीकाकी मम्मी रजीयाको देखकर बहुत खुस होजाती हे.. ओर उनको अपने पास बीठा देती हे.. जैसे ही उनकी नजर दयाकी ओर गइ.. तो अ‍ेक नजरसे दयाको देखती रही.. जैसे कोइ पुरानी जान पहेचान हो..

फीर सबलोग बाते करते होलमे आजाते हे तो राधीका ओर रजीया कीचनमे चली गइ.. ओर सबके लीये चाइ नास्ता बनाने लगी.. तबतक लखन ओर पुनम राधीकाकी मम्मीके पास बैठे उनसे बाते करते रहे.. फीर सबने मीलकर चाइ नास्ता कर लीया..
 
रात तक सब वही रुके.. पुनम ओर राधीका रजीयाने मीलकर सबके लीये खाना बनाया.. इसी दौरान पुनमने राधीकाको बहुत कुछ बता दीया.. अपने ओर धिरेनके बारेमे.. सृतीके बारेमे.. मंजुने जो बदलावका फैसला लीया हे उनके बारेमे.. घरके बारेमे.. गांवके बारेमे.. चंदाके बारेमे.. ओर अंतमे उनके ओर लखनके बारेमे भी बता दीया.. जीसे सुनकर राधीकाकी आस्चर्यके साथ खुसीका कोइ ठीकाना ना रहा..

राधीका : (खुस होते गले मीलकर) पुनोदी.. थेन्क्स.. आखीर मेरे लखनके प्यारको आपने कबुल कर ही लीया.. इस बारेमे हमारी बात हुइ थी.. आपके मुहसे सुनकर बहुत अच्छा लगा..

पुनम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. सोचलो.. मे आपकी सौतन बनने जा रही हु.. आपको सुनकर बुरातो नही लगा..?

राधीका : (मुस्कुराते हल्कीसी गालपे चपत लगाते) दीदी कैसी बाते कर रही हो..? मेने तो लखनको इसीलीये सम्हाला थाकी आपने उनका प्यार कबुल नही कीया.. ओर अच्छा हुआ कबुल नही कीया.. वरना वो मुजे थोडीना मीलते..?

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ आपको प्यारतो देते हेनां..?

राधीका : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. जबसे आपने उसे जडी बुटी पीलाइ हे तबसे हम दोनोके बीच प्यार बहुत बढ गया हे.. मुजे अ‍ेक ही बारमे संतुस्ट कर देते हे.. अच्छा अ‍ेक बात बताओ.. आप दोनो कुछ आगे बागे बढेकी नही..?

रजीया : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. इसीलीये तो यहा आइ हु.. कल रात दोनोने अपनी सुहागरात भी मनाली.. मे बहुत खुस हु.. कास मेने पहेले ही लखन भैयाका प्यार कबुल करलीया होता..

राधीका : (खुस होते आस्चर्यसे मुस्कुराते) क्या..? तभी मे सोचु आप अ‍ैसे क्यु चल रही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. कल हम दोनो प्यारके इजहारके बाद पहेली बार मीले.. मेने उसे वादा कीया था.. की हम सादीसे पहेले अ‍ेक बार मीलेगे.. ओर कल रात मेने अपना वादा पुरा कीया..

राधीका : (खुस होते धीरेसे सामने देखते) दीदी.. सच बताना.. मेरा लखन कैसा हे..?

पुनम : (बहुत खुस होते धीरेसे) अरे दीदी.. क्या बताउ..? पुछो ही मत.. इतना सुख मुजे कभी नही मीला.. अ‍ैसा लगता था.. मे भैयासे दुर ही ना रहु.. सुबह तक मेरी हालत खराब करदी.. वो इतना प्यार करते हे मुजसे.. कास मेने स्कुलमे थे तब ही उनका प्यार कबुल करलीया होता.. तो आज मे भैयाकी बीवी होती..

राधीका : (मुस्कुराते) चलो जो हुआ अच्छा ही हुआ.. अब हम दोनो कमसे कम साथमे तो रहेगे.. अच्छा हुआ आप पढती थी तब ही आपने अपने खानदानके बारेमे बता दीया था.. तो आज ये सब सुनकर दुख नही होता.. दीदी.. आप दोनोकी सादी कब हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. सायद इसी हप्ते थी.. लगता हे अब चार पांच दिन ज्यादा इन्तजार करना पडेगा.. क्युकी रामुकाकाकी तबीयत ठीक नही हे.. हमारी दया बहेनके पीताजी हे.. ओर हमारे खेत सम्हालते हे..

राधीका : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. ये नाम मेने कही सुना हुआ हे.. सायद मम्मीके मुहसे.. अ‍ेक बार मेरी बहुत जीदकी वजहसे थोडा बहुत बताया था.. क्युकी मम्मीके भाइका नाम भी रामु था.. मेने उनको कभी देखा नही हे.. मम्मीने उनके सभी रीस्तेदारको छोड दीया था..

पुनम : (मनमे) दीदी.. क्या बताउ..? कुछ राज हे जो आपकी मम्मीने कीसीको नही बताया.. बस.. आज इसी सीलसीलेमे आपकी मम्मीसे बात करने आइ हु.. यही हमारे रामुकाका आपके मामा हे.. जो अब आखरी सांस गीन रहे हे..

राधीका : (मुस्कुराते) दीदी.. कहा खो गइ..? कुछ हुआ हे क्या..?

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी कुछ नही.. आज मे कुछ देरके लीये मम्मीके पास रहुगी.. कुछ बाते करनी हे.. थोडी सीक्रेट.. फीर देर रात आपके पास सोने आजाउगी.. आपसे भी अ‍ेक जरुरी बात करनी हे.. सुबह हम चले जायेगे.. फीर तो सादीके बाद यही आ रही हु.. तब हम बाते करेगे..

फीर खानेके बाद लखन सृती भावना दया ओर रजीयाको लेकर नीकल गया.. ओर पुनम वही राधीकाके पास रुक गइ.. वहा पुरे रास्ते भावना लखनकी मस्तीया करती रही.. अब वो लखनसे काफी खुल चुकी थी.. सबलोग मस्ती मजाक करते घरपे आगये.. तो लखन सृतीको गोदमे उठाकर सीधा उपर अपने रुममे छोडकर आगया.. तो रजीया भी सब दरवाजे लाइट बंध करके सबके साथ उपर चली गइ....

कन्टीन्यु
 
my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २६२

फीर खानेके बाद लखन सृती भावना दया ओर रजीयाको लेकर नीकल गया.. ओर पुनम वही राधीकाके पास रुक गइ.. वहा पुरे रास्ते भावना लखनकी मस्तीया करती रही.. अब वो लखनसे काफी खुल चुकी थी.. सबलोग मस्ती मजाक करते घरपे आगये.. तो लखन सृतीको गोदमे उठाकर सीधा उपर अपने रुममे छोडकर आगया.. तो रजीया भी सब दरवाजे लाइट बंध करके सबके साथ उपर चली गइ.... अब आगे

इधर सबके जातेही राधीका ओर पुनम बेडरुममे चली गइ.. ओर वहा दोनोने खुब बाते की.. पुनमने राधीकाको अपने ओर धिरेनकी सेक्स लाइफसे लेकर सबकुछ बता दीया.. ओर लखनसे प्यारका इजहारसे लेकर कल रात दोनोकी फस्ट नाइटके बारेमे भी बता दीया..

ओर घरपे मंजुने क्या फैसला लीया वोभी बाता दीया.. फीर पुनमने राधीकासे बात करते अपनी ओर मंजुकी कुछ शक्तियोसे अवगत करवाया.. पुनमने राधीकाको सबकुछ बता दीया.. ओर यहा कीस लीये रुकी हे वो भी बात करली.. तो राधीका भी खुस होगइ..

क्युकी उनकी मम्मीने आजतक अपने अतीत.. या फीर कीसी भी रीस्तेदारके बारेमे नही बताया था.. तो राधीका भी सब जाननेके लीये उत्सुक थी.. उसने पुनमको अपनी मम्मीके रुममे भेज दीया.. पुनमने अंदर जातेही दरवाजा बंध करके लोक करदीया.. ओर राधीकाकी मम्मीके पास जाकर बैठ गइ..

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) आओ बेटी.. दरवाजा क्यु बंध कीया..? लगता हे मेरी बेटी कुछ जरुरी बात करने आइ हे.. बता.. क्या बात हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) मम्मीजी.. मुजे मंजु मोमने आपको मीलनेके लीये बोला था.. तो इसी सीलसीलेमे आपसे बात करने आइ हु..

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) ओह.. समज गइ.. वहा मुजसे अकेलीमे मीली थी.. उसने मुजे सब कुछ बतायाकी आप लोग सब कौन हे.. मे कौन हु.. ओर नीर्मला ओर भुमीका भी मुजे मीली.. आपके पीताजी भुमीका नीर्मला सब साथमे कोलेजमे पढते थे.. मंजु बेटीने आपके बारेमे भी बहुत कुछ बताया.. सुना हे आपको भी मंजु बेटीने कुछ शक्तिया दी हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) जी मम्मीजी.. इसीलीये तो यहा आइ हु.. आपके बारेमे सबकुछ जानने..

रा. मम्मी : (सामने देखते मुस्कुराते) क्यु..? तुमभी तो सबकुछ जानलेती हो.. तो फीर मेरे बारेमे क्या जानना हे..? मेरे अतीतके बारेमे राधुको मेने आजतक नही बताया.. मेरा अतीत बहुत खराब हे.. आपको तो सब पता हे.. बस.. अ‍ेक ही बीनंती हे.. इस बारेमे कभी राधुको पता नाचले.. की उनके पीताजी कौन हे..

पुनम : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. ओर यकीन मानीये ये बात राधु दीदीको पता नही चलेगी.. लेकीन मे सब आपके मुहसे सुनना चाहती हु.. आपने अपने भाइसे रीस्ता क्यु तोड दीया..? हमारे रामुकाका ही आपके भाइ हेनां..?

रा. मम्मी : (अ‍ेक नजरसे देखते धीरेसे) हां.. आपको सब पता हे.. मेरे बारेमे.. मेरे अतीतके बारेमे.. तो फीर मेरे मुहसे सब क्यु सुनना हे..?

पुनम : (आंख गीली करते) क्युकी मेने सुना हे कुछ राज लम्बे समयसे अपने दीलमे रखना अ‍ेक बोज लगता हे.. उसे बीसी अपनोसे बताकर बोज हल्का हो जाता हे.. इसीलीये सुनने आइ हु..

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) सही सुना हे आपने.. तो आप मेरा बोज हल्का करने आइ हे..

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. अगर अपनी बात कीसीको बताते दिलका बोज हल्का होता हे तो मे सुनने आइ हु.. ओर आपको पता हे..? वो अपनी जींदगीकी आखरी सांसे गीन रहे हे.. तो सोचा अ‍ेक आखरी बार आप उनको मीलना चाहे.. इसीलीये मे आपसे बात करने आइ हु..

रा. मम्मी : (आंखसे आंसु नीकल गये) क्या..? रामु इतना बीमार हे..? मे अभागन उनसे मील भी नही सकती.. क्युकी उसने मुजे धोखा दीया हे.. हमारी दया तो मुजे पहेचानती भी नही.. की मे उनकी क्या लगती हु.. हम भी उसी गांवमे रहेते थे.. जीस गांवमे आप लोग रहेते हे.. तब आपके परीवारसे भी गांवका कोइ नाता नही था.. ओर कारण क्या था वोतो आपको भी पता हे..

पुनम : हां मुजे पता हे.. क्युकी हमारे परीवारमे सबलोग अपनी बहेनसे सादी करते आये हे.. ओर ये हमारे परीवारकी परंपरा होचुकी हे.. तो गांव वालो अ‍ैसे रीस्तेको गलत मानते थे.. इसीलीये कोइ हमसे रीस्ता नही रखना चाहते थे..

रा. मम्मी : (आंख पोछते मुस्कुराते) ये गांव वालेभीनां.. खुदके घरमे क्या होता हे कीसीको कुछ मतलब नही.. ओर दुसरोके घरपे क्या होता हे उसीकी फीकर करते हे.. तबभी वहा कीसीना कीसी घरपे अ‍ेसे रीस्ते पनप रहे थे.. जीनकी वजहसे गांवालोने आपसे रीस्ता खतम करलीया..

पुनम : (मुस्कुराते) क्या आपको सब पता था..?

रा. मम्मी : (सामने देखते) हां बीलकुल.. सीर्फ मुजे ही नही गांवमे सभीको पता हे.. की वोही खानदान जीसने गांव वालोको भडकाकर आपके खानदानसे गांवको अलग करदीया.. उसी खानदानके घरकी ओरतका मेरे कीशनसे नाजायज तालुक था.. उनका छोटा भाइ उन्हीकी देन हे..
 
पुनम : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. जवेरीलालका छोटा भाइ जीतुलाल.. उनका भी अपनी भाभीके साथ अवैध रीस्ता हे.. दोनो भाइके लडके लडकीने भी आपसमे सादी करली हे.. उनको अपने कीयेकी सजा मील गइ.. अब तो अ‍ैसा हर घरमे होने लगा हे.. वोसब तब भी हो रहा था ओर आज भी हो रहा हे..

रा. मम्मी : बेटा.. इनमे हमारा घरभी बाकात नही था.. खुद हम दोनो बहेने अपने भाइके साथ उनका बीस्तर गरम करती थी.. वैसे ये सब तुम्हारे परीवारकी ये परंपरा थी तो फीर तुमने तेरे भाइके साथ सादी क्यु नही की..? तुम भी करलेती अपने भाइसे सादी.. दोनो यहा साथमे हीतो पढते थे.. राधीकाने बताया तुम्हारा डीवोर्स होगया हे..

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. सही सुना हे आपने.. लेकीन अब मे अपनी गलती सुधार रही हु.. आपकोतो पता हे हमारे घरके मर्द कीतनी भी सादीया करले.. कोइ पाबंधी नही हे.. इसीलीये अब मे भी लखन भैयासे सादी कर रही हु.. क्युकी जो गलती आपने की मे उसे दोहराना नही चाहती..

रा. मम्मी : (चोंकते सामने देखते) बेटी.. मेरी मजबुर थी.. क्युकी मे नही चाहती थीकी आपके परीवारकी तराह हमारे परीवारसे भी सब गांव वाले ओर रीस्तेदार नाता तोडदे.. रामु आपके बापुके अच्छे दोस्त थे.. आपके परीवारमे सबकुछ देखते हम भी इस राहपे चलने लगे थे..

पुनम : (मुस्कुराते) तो फीर क्या बुराइ थी अ‍ैसे रीस्तोमे.. दोनो बहेन साथ रहेती..

रा. मम्मी : बहुत आसान हे अ‍ैसी बाते करना.. लेकीन जब प्यारमे धोखा मीलता हे तो कुछ सोचने समजनेकी स्थीतीमे नही होती.. ओर हमारे परीवारमे था ही कौन..? मां बाप तो पहेलेही चल बसे थे.. घरमे सीर्फ हम तीन लोग.. सबसे बडी बहेन फीर अ‍ेक भाइ.. ओर सबसे छोटी मे..

पुनम : (मुस्कुराते) क्या वो आपकी सगी बडी बहेन थी..?

रा. मम्मी : (सामने देखते) हां.. तुम सब जानती हो.. फीर भी सब मेरे मुहसे सुनना चाहती हो.. तो फीर सुन.. घर चलानेके लीये रामु आपके खेतोको सम्हालने लगेथे.. तो मेरी बडी बहेन आपके घरपे काम करती थी.. मेभी यहा सहेरमे पढती थी.. मे तब स्कुलमे थी.. ओर आपके पीताजी नीर्मला भुमी सब कोलेजमे थे.. सबकुछ सही चल रहा था.. ओर मेभी जवानीके दहेलीजपे कदम रख चुकी थी..

पुनम : (मुस्कुराते) आपको भी अपने भाइसे प्यार होगया था..? अभी आपने कहाना हम भी इस राहपे चलने लगे..

रा. मम्मी : (फीकी मुस्कानसे) बेटी ये प्यार भी अजीब चीज हे.. कहेनेको तो प्यार हे.. लेकीन नइ नइ जवानीमे वीपरीत लींगका आकर्षण होता हे.. प्यारके नामसे सुरु होता हे ओर सेक्सके बाद खतम.. मे अक्सर बहेनके साथ आपकी हवेलीपे आती थी.. इसी बीच आपकी दादी आश्रमसे अ‍ेक लडकीको लेकर आगइ..

पुनम : (मुस्कुराते) वो मेरी मम्मी थी..

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. वोतो कीशनकी सादीके बाद पता चलाकी वो कीशनकी बहेन थी.. मेरी उनके साथ बहुत अच्छी पटती थी.. वो अपनी हर बात मुजसे सेर करती थी.. ओर दोनो भाइ बहेनका प्यार देखकर मे भी रामुकी ओर आकर्सीत होगइ थी.. ओर मनही मन उनको प्यार करने लगी.. तब हम सब जवान थे..

पुनम : तो फीर आपने अपने प्यारका इजहार नही कीया..?

रा. मम्मी : (फीकी मुस्कानसे) कीया था.. तब बहुत देर हो चुकी थी.. प्यारमे केवल धोखा ही मीलता हे.. जब प्यारका इजहार कीया.. लेकीन रामुने मुजे अंधेरेमे रखा.. क्युकी मेरे प्यारके इजहारसे पहेले ही वो हमारी बडी बहेनके साथ काफी आगे बढ चुका था.. ओर दोनोके बीच जीस्मानी रीस्ते भी कायम हो चुके थे.. मेरी बहेन हर रात रामुके साथ बीस्तर गरम करती थी..





पुनम : आपने रामुकाकासे बात नही की..?

रा. मम्मी : की थी.. लेकीन मर्दको तो नया नया जीस्म चाहीये.. उसने बडी बहेनके साथ जीस्मानी तालुकात मुजसे छुपाये.. रामुने मेरा प्यार कबुल करलीया.. ओर मेरा प्यार कबुल करके उसने मेरा भी कौमार्य भंग कीया..





पुनम : (मुस्कुराते) अच्छा.. तो रामुकाका हमारे परीवारकी तराह दोनो बहेनसे प्यार करने लगे थे.. फीर..?

रा. मम्मी : (सामने देखते) बेटी.. जीसे हम प्यार समजते थे वो प्यार ब्यार कुछ भी नही था.. बस.. बस अ‍ेक जीस्मकी भुख थी.. अ‍ेक वासनाका खेल था.. रामुको मेरे तनसे खेलना था.. ओर मुजे भी इनकी जरुरत थी.. सबको अपने अपने तनकी जरुरतको पुरी करनी थी..





पुनम : (मुस्कुराते) दादी.. जीस्मकी भुख सीर्फ अ‍ेक तरफा नही होती.. मर्द ओर ओरते दोनोको चाहीये..

रा. मम्मी : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. इसीलीये तो मे रामुको प्यार करती थी.. तो रामु हमारी बहेनको प्यार करता था.. लेकीन हम दोनोको नही पता थाकी हमारी बडी बहेन कीशनको प्यार करती थी.. ओर रामुके साथ कीशनका बीस्तर भी गरम करती थी.. बस.. हम सब अ‍ेक दुसरेको धोखेमे रखते अपने तनकी आग बुजाते रहे..





पुनम : (आस्चर्यसे देखते) मतलब..?

रा. मम्मी : मे समजीती थी की रामु मुजसे प्यार करता हे.. लेकीन रामुको मुजसे नही मेरे जीस्मसे प्यार था.. ओर मे नादान इसे प्यार समजती थी.. जब भी छुटी होती दो दिन घरपे आजाती.. मे ओर रामु अ‍ेक दुसरेसे फीजीकल होते खुब प्यार करते..





मुजे नही पता थाकी मेरे जाते ही रामु ओर बडी बहेन घरपे क्या गुल खीलाते थे.. ओर अ‍ेक दिन मे सामको अचानक घरपे आगइ.. ओर उस देर रात मे पानी पीने गइ तो बडी बहेनके रुममे मुजे वोही आवाज आरही थी.. जो मे रामुके साथ सेक्स करती थी तब आती थी..
 
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