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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २६१
फीर लखन पुनमको वापस गोदमे उठाकर बहार लेकर आगया.. देखातो पुरी चदर दोनोके कामरसके साथ साथ खुनसे भी भरी हुइ थी.. तो लखनने पुनमको चेरपे बीठाकर चदरको चेन्ज करलीया.. ओर पुनमको बेडपे लीटाते उनपे ब्लेन्केट डाल दीया.. ओर खुदभी ब्लेन्केटमे घुसते पुनमसे चीपकके लेट गया.. तो पुनमने लखनकी ओर करवट लेते लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनो अेक दुसरेकी आंखोमे देखते रहे.. तभी.... अब आगे
पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. अब हमारी सादी हो जायेगी.. मे आपकी बीवी होजाउगी.. तो क्या तब भी मुजे दीदी कहोगे..?
लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते होंठ चुमते) हंम.. मेने मेरी दीदीसे प्यार कीया हे.. ओर जींदगीभर दीदीसे प्यार करता रहुगा.. तो आप ओर सृती दीदी हमेसा मेरी बीवीया होते भी बहेन ही रहेगी.. क्युकी मुजे मेरी बीवीयोसे ज्यादा बहेनको प्यार करनेमे बहुत मजा आता हे.. हम बुढे होजायेगे तब भी आपको दीदी कहुगा.. ओर प्यार करुगा..
पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. मुजे नही पता थाकी आप मुजे इतना प्यार करते हे.. वरना मे कीसी ओरसे सादी ही ना करती.. फीर बडे भाइ ही क्युना हो..? मेरी नादानीकी वजहसे हमने होस्टेलकी लाइफको मीस कर दीया.. वरना वही हमारे बीच सबकुछ होजाता..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. अब छोडीये उन बातोको.. अबतो हम मील गयेनां..? दीदी.. क्या आपने राधुसे बात करली..?
पुनम : (मुस्कुराते) नही भाइ.. अच्छा हुआ आपने याद दीलाया.. मुजे उनसे जरुरी काम भी हे.. भाइ.. सामको मुजे राधुदीदीको मीलने जाना हे.. हो सकता हे मे रातमे वही रुक जाउ.. मेरा उनसे मीलना जरुरी हे..
लखन : (थोडा मायुस होते) क्या दीदी.. हमारे पास सीर्फ ये दो राते ही हे.. आप उनको बादमे मील लेना.. क्युकी परसोतो आप चली जाओगी..
पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. मे आपकी बात समज गइ.. लेकीन सुबह तक आप मेरी हालत खराब कर दोगे.. मे कल आपको प्यार देनके लायक भी नही रहुगी.. क्युकी आज हम दोनोकी सुहागरात हे.. ओर मे सोना नही चाहती.. ओर आपको भी सोने नही दुगी.. हमारी सुहागरातको मे यादगार बनाना चाहती हु.. हम सुबह तक प्यार करेगे.. आज मे आपके साथ हु.. आप जी भरके प्यार करलो मुजसे..
लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) दीदी.. अभी आपकी हालत ठीक नही हे.. जो मे आपसे प्यार करु..
पुनम : (मुस्कुराते होठ चुमते) भाइ.. कीतनी केर करतेहो मेरी..? ये हमारा मीलन.. फीर अेक हप्ते तक जुदा होना.. फीर हमारी सादी.. ओर उसी रात हमारी फीरसे सुहागरात होगी.. तब मे मेरे भाइको इतना प्यार करुगी.. हम जींदगी भर साथ रहेगे.. अभी तो आप सीधा लेट जाइअे..
कहेते पुनम बेडपे बैठ गइ.. तो लखन मुस्कुराते पीठके बल लेट गया.. पुनम भी सरारतसे मुस्कुराते लखनके दोनो पैरके बीच बैठ गइ.. फीर लखनकी ओर कातील स्माइल करते लखनके लंडको मुठीमे थाम लीया.. ओर लखनके उपर जुकते उनके होठोको चुमने लगी..

ओर धीरे धीरे लंडको सहेलाने लगी.. जब लंड तनके सख्त होगया तो पुनम लखनकी कमरकी दोनो ओर पैर करके बैठ गइ.. फीर लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट करलीया.. ओर धीरे धीरे बैठने लगी.. कुछ ही देरमे लखनका पुरा लंड अपनी चुतमे नीगल लीया..

तो पुनम कमर हीलाते लखनकी कमरपे कुदने लगी.. लखनसे रहा नही गया.. ओर वो भी हाथके बल बैठ गया.. तो पुनमने उछलना बंध करदीया.. ओर लखनकी गरदनको दोनो हाथसे पकडकर अपनी कमरको गोल गोल घुमाते चुदाइ करने लगी..

पुनमको अेक अलग ही महेसुस होने लगा.. पुनम बहुत ही कामुक नजरोसे लखनकी ओर देखते चुदाइ कर रही थी.. वो अब लखनसे काफी खुल चुकी थी.. पुनमको लखनका लंड अपनी चुतमे घुमानेमे बहुत मजा आरहा था.. वो काफी देर अपनी कमर हीलाती रही..
जीसे वो जडनेकी कगारपे आगइ.. उसने जोरोसे लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखनसे बडी आंख करते लीपलोक करलीया.. तभी आंखोकी पुतलीया उपरकी ओर चडाते अपनी कमरको जटके देने लगी.. तो लखनको अपने लंडपे गरमाहट महेसुस हुइ..
जब पुनम जडके सांत होगइ तो पुनमने लीपलोक छोड दीया ओर लखनके कंधेपे सर रखते अैसे ही बाहोमे भीचते बैठी रही.. लखनने वही पोजीसनमे पुनमको पीठके बल लीटा दीया ओर उनपे जुकते अपनी कमर हीलाते पुनमको चोदने लगा..

पुनम फीरसे आंखोकी पुतलीया पलटते मदहोस होने लगी.. ओर अेक बार फीर दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. लखनने इस बार भी पुनमको दो बार ओर जडा दीया.. ओर आखीरमे दोनो साथमे जड गये.. लखनने लंडको बहार नीकाल दीया..
अध्याय - २६१
फीर लखन पुनमको वापस गोदमे उठाकर बहार लेकर आगया.. देखातो पुरी चदर दोनोके कामरसके साथ साथ खुनसे भी भरी हुइ थी.. तो लखनने पुनमको चेरपे बीठाकर चदरको चेन्ज करलीया.. ओर पुनमको बेडपे लीटाते उनपे ब्लेन्केट डाल दीया.. ओर खुदभी ब्लेन्केटमे घुसते पुनमसे चीपकके लेट गया.. तो पुनमने लखनकी ओर करवट लेते लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनो अेक दुसरेकी आंखोमे देखते रहे.. तभी.... अब आगे
पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. अब हमारी सादी हो जायेगी.. मे आपकी बीवी होजाउगी.. तो क्या तब भी मुजे दीदी कहोगे..?
लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते होंठ चुमते) हंम.. मेने मेरी दीदीसे प्यार कीया हे.. ओर जींदगीभर दीदीसे प्यार करता रहुगा.. तो आप ओर सृती दीदी हमेसा मेरी बीवीया होते भी बहेन ही रहेगी.. क्युकी मुजे मेरी बीवीयोसे ज्यादा बहेनको प्यार करनेमे बहुत मजा आता हे.. हम बुढे होजायेगे तब भी आपको दीदी कहुगा.. ओर प्यार करुगा..
पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. मुजे नही पता थाकी आप मुजे इतना प्यार करते हे.. वरना मे कीसी ओरसे सादी ही ना करती.. फीर बडे भाइ ही क्युना हो..? मेरी नादानीकी वजहसे हमने होस्टेलकी लाइफको मीस कर दीया.. वरना वही हमारे बीच सबकुछ होजाता..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. अब छोडीये उन बातोको.. अबतो हम मील गयेनां..? दीदी.. क्या आपने राधुसे बात करली..?
पुनम : (मुस्कुराते) नही भाइ.. अच्छा हुआ आपने याद दीलाया.. मुजे उनसे जरुरी काम भी हे.. भाइ.. सामको मुजे राधुदीदीको मीलने जाना हे.. हो सकता हे मे रातमे वही रुक जाउ.. मेरा उनसे मीलना जरुरी हे..
लखन : (थोडा मायुस होते) क्या दीदी.. हमारे पास सीर्फ ये दो राते ही हे.. आप उनको बादमे मील लेना.. क्युकी परसोतो आप चली जाओगी..
पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. मे आपकी बात समज गइ.. लेकीन सुबह तक आप मेरी हालत खराब कर दोगे.. मे कल आपको प्यार देनके लायक भी नही रहुगी.. क्युकी आज हम दोनोकी सुहागरात हे.. ओर मे सोना नही चाहती.. ओर आपको भी सोने नही दुगी.. हमारी सुहागरातको मे यादगार बनाना चाहती हु.. हम सुबह तक प्यार करेगे.. आज मे आपके साथ हु.. आप जी भरके प्यार करलो मुजसे..
लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) दीदी.. अभी आपकी हालत ठीक नही हे.. जो मे आपसे प्यार करु..
पुनम : (मुस्कुराते होठ चुमते) भाइ.. कीतनी केर करतेहो मेरी..? ये हमारा मीलन.. फीर अेक हप्ते तक जुदा होना.. फीर हमारी सादी.. ओर उसी रात हमारी फीरसे सुहागरात होगी.. तब मे मेरे भाइको इतना प्यार करुगी.. हम जींदगी भर साथ रहेगे.. अभी तो आप सीधा लेट जाइअे..
कहेते पुनम बेडपे बैठ गइ.. तो लखन मुस्कुराते पीठके बल लेट गया.. पुनम भी सरारतसे मुस्कुराते लखनके दोनो पैरके बीच बैठ गइ.. फीर लखनकी ओर कातील स्माइल करते लखनके लंडको मुठीमे थाम लीया.. ओर लखनके उपर जुकते उनके होठोको चुमने लगी..

ओर धीरे धीरे लंडको सहेलाने लगी.. जब लंड तनके सख्त होगया तो पुनम लखनकी कमरकी दोनो ओर पैर करके बैठ गइ.. फीर लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट करलीया.. ओर धीरे धीरे बैठने लगी.. कुछ ही देरमे लखनका पुरा लंड अपनी चुतमे नीगल लीया..

तो पुनम कमर हीलाते लखनकी कमरपे कुदने लगी.. लखनसे रहा नही गया.. ओर वो भी हाथके बल बैठ गया.. तो पुनमने उछलना बंध करदीया.. ओर लखनकी गरदनको दोनो हाथसे पकडकर अपनी कमरको गोल गोल घुमाते चुदाइ करने लगी..

पुनमको अेक अलग ही महेसुस होने लगा.. पुनम बहुत ही कामुक नजरोसे लखनकी ओर देखते चुदाइ कर रही थी.. वो अब लखनसे काफी खुल चुकी थी.. पुनमको लखनका लंड अपनी चुतमे घुमानेमे बहुत मजा आरहा था.. वो काफी देर अपनी कमर हीलाती रही..
जीसे वो जडनेकी कगारपे आगइ.. उसने जोरोसे लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखनसे बडी आंख करते लीपलोक करलीया.. तभी आंखोकी पुतलीया उपरकी ओर चडाते अपनी कमरको जटके देने लगी.. तो लखनको अपने लंडपे गरमाहट महेसुस हुइ..
जब पुनम जडके सांत होगइ तो पुनमने लीपलोक छोड दीया ओर लखनके कंधेपे सर रखते अैसे ही बाहोमे भीचते बैठी रही.. लखनने वही पोजीसनमे पुनमको पीठके बल लीटा दीया ओर उनपे जुकते अपनी कमर हीलाते पुनमको चोदने लगा..

पुनम फीरसे आंखोकी पुतलीया पलटते मदहोस होने लगी.. ओर अेक बार फीर दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. लखनने इस बार भी पुनमको दो बार ओर जडा दीया.. ओर आखीरमे दोनो साथमे जड गये.. लखनने लंडको बहार नीकाल दीया..









