Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 98 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रमा : (थोडी सीरीयस होते धीरेसे) नही तो..? दोनो बहार बैठे हे.. मे रुममे.. अकेली.. बोल..

नीलम : (मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. अ‍ेक्चुली जीजुने दादीको जुठ बोला था.. मे ओर जीजु.. हमारे घरपे हे.. सुबह ही हम दोनो यहा आगये थे.. सीर्फ हम दोनो अकेले.. आप साज गइनां..?

रमा : (खुस होते धीरेसे) नीलु.. मंजु दीदीने बताया मुजे.. तुम दोनोके बीच कुछ हुआ हे क्या..?

नीलम : (धीरेसे सरमाते) येस मोम.. सबकुछ.. सब होगया.. जो मे चाहती थी.. मोम.. मे अब लडकी नही रही.. जीजुने मुजे ओरत बना दीया.. आज मे बहुत खुस हु..

रमा : (खुसीसे धीरेसे) सच..? तुजे कुछ हुआ तो नही..?

नीलम : (हसते) नही.. उतना ही जीतना आपको हुआ था..

रमा : (मुस्कुराते धीरेसे) मतलब.. तुम भी बेहोस होगइ थी..? नीलु.. कैसा हे हमारा लखन..?

नीलम : (मुस्कुराते लखनकी ओर आंख मारते) मोम.. अ‍ेकदम मस्त.. जैसा हमने सोचा था.. आज पता चला.. की तुम पापाको छोडकर क्यु इनसे प्यार करने लगी हो.. बात करोगी उनसे..?

रमा : (खुसीसे धीरेसे) हां.. वो हे वहा..? दे.. बात करती हु..

नीलम : (फोन देते) मोम.. आपसे बात करना चाहती हे.. लीजीये..

लखन : (फोन लेते धीरेसे) हाइ स्वीट हार्ट.. कैसी हो..? सब चेक करवा लीया..?

रमा : (सरमाते धीरेसे) हंम.. सब बराबर हे.. जानु.. थेन्क्यु वेरी मच.. मेरी नीलुका खयाल रखना.. अभी छोटी हे.. सब कुछ सीख जायेगी..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. नीलु ठीक हे.. आपको बुरा तो नही लगा..? आप दोनोको बहुत खुस रखुगा..

रमा : (मुस्कुराते) पता हे हमे.. अब हम दोनोको आपहीका सहारा हे.. बस.. हमे अ‍ैसे ही प्यार देते रहेना.. मे आज मीलीथी मंजुदीदीको.. उसने मुजे माफ करदीया.. लखन.. अ‍ेक बार फीर सोरी..

लखन : यार.. तुम दोनो अब बार बार माफी मत मांगो.. अच्छा नही लगता..

रमा : (मुस्कुराते) सोरी सोरी.. सुनो.. वो.. क्या कहेते हे.. बे..सट.. हां.. बेस्ट ओफ लक.. गुड नाइट.. हें..हें..हें.. नीलुका खयाल रखना.. ओर उनको कहेना वो आइ पील लेना ना भुले.. चलो रखती हु.. आपके भाइ आ रहे हे..

मां बेटी लखनके साथ अफैर करके बहुत खुस थी.. इस रात नीलम सादीके जोडेमे थी.. दोनो रातमे फीर रुममे चले गये.. सबकुछ हुआ.. घुंघट उठाना.. गरम दुध पीलाना.. लखनने नीलमको अ‍ेक छोटासा उपहार भी दीया.. सोनेकी चेलन.. फीर दोनो ही प्यारकी आगोसमे खो गये..





लखनने नीलमको अपनी बीवी मानकर पुरी रात रगड रगडके चोदा.. अब नीलम खुलकर लखनके साथ सेक्स कर रही थी.. उसने तोहफेमे लखनको अपना पीछला छेद भी खुलवा लीया.. उस वक्त नीलमको बहुत तकलीफ हुइ.. सुबह तक नीलम चलने लायक नही रही..





लखनने उनका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया था.. लखनने नीलमको हर अ‍ेन्गलसे चोद लीया.. फीर दोनो सावर लेकर सो गये.. ओर दुसरे दिन दो पहोर तक सोते रहे.. जागनेके बाद लखनने खाना ओर्डर कर दीया.. फीर दोनोने खाना खाया ओर लोंन्ग ड्राइवपे चले गये..









लखन नीलमको बीच जंगलोमे अ‍ेक नदीके पास लेगया.. वहा अ‍ेक बार दोनोने खुले आसमानमे सेक्स कीया.. फीर मस्तीया करते नहीमे नहाने चले गये.. तो वहा भी नीलमने खडे खडे लखनसे चुदवा लीया.. साम ढलते ही दोनो वापस आने लगे..





ओर जंगलसे बहार नीकलनेसे पहेले भी अ‍ेक बार लखनने कारमे ही नीलमको चोद लीया.. ओर उनका पीछवाडा भी लाल करदीया.. नीलम पुरी तराह संतुस्ट हो चुकी थी.. वो थकके चकना चुर होगइ थी.. उनकी चुत भी लखनके लंडके हीसाबसे चोडी होगइ थी..





वो अब भी थोडा लडखडाते चल रही थी.. फीर रातका खाना दोनोने बहारही खा लीया ओर घरपे आगये.. घरपे आते ही नीलमने अ‍ेक पेइन कीलर ओर आइ पीलकी गोली खाली.. क्युकी उनकी पढाइ तक नीलमको अपनी सेफ्टीका पुरा खयाल रखना था..
 
नीलम : (सोफेपे बैठते) जीजु.. अब आज कुछ नही.. आपने तो आज मुजे पुरी तराह नीचोडली..

लखन : (हसते) अरे.. अ‍ैसे कैसे छोडदु तुजे.. अब मेरी बीवी हो.. फीर भी मना कर रही हो..?

नीलम : (हसते मुका मारते) कोइ बीवीकी अ‍ैसी हालत करते हे क्या..? जब कुछ नही कीया तब तडपाया मुजे.. ओर जब कीया तो मेरा अ‍ेक भी छेद नही छोडा आपने.. अब तक आधा लीटर आपका ज्युस पी चुकी हु.. मे ज्युस पी पीकर अ‍ैसे ही प्रेगनेन्ट हो जाउगी.. कुछ तो सरम करो..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. मजा नही आया क्या..? चल ठीक हे तु काफी थक गइ हे..

नीलम : (खडी होकर गोदमे बेठते) अरे.. मेरा सोना बाबु नीरास हो गया क्या..? मे तो अ‍ैसे ही केह रही थी.. इतना अच्छा मौका कोइ छोडता हे..? जीजु.. बहुत मजा आया.. आज हमने कीतना सेक्स कीया.. ये मेरी लाइफका सबसे बेस्ट तोहफा था.. हम कीतने दिनोसे प्लान कर रहे थे.. ओर मौका मीला तो भी कैसा..? चार चार दीन.. मानलो ये हमारा छोटासा हनीमुन हो गया..

लखन : (होंठ चुमते) नीलु.. अगर धिरेनको सक होगया तो..?

नीलम : (गाल काटते) अरे..? भाडमे गया धिरेन.. सक होता हे तो होने दो.. मे धिरेनसे नही डरती.. मेतो आपसे ही खुस हु.. आपकी रखेल बनकर रहुगी.. अब मुजे कीसीकी परवाह नही..

लखन : (बाहोमे भीचते) नीलु.. तुजे रखेल नही रानी बनाकर रखुगा.. पर येतो गलत हेनां..?

नीलम : (मुस्कुराते) जीजु.. आप धिरेनकी फीकर मत करो.. वोतो अ‍ैसे ही मेरे पीछे पागल हे.. उसे तो मे अपनी उंगलीपे नचाउगी.. बस.. आप हमारे घरपे आते जाते रहेना.. अपनी इस बीवीको मीलने.. बाकी सब मे मेनेज कर लुगी.. वो सारा दीन घरपे थोडीना रहेगा..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. चल ठीक हे वो सब हम बादमे देख लेगे.. ओर हां.. तेरी मम्मीने कहा हे वो आइ पील ले लेना..

नीलम : (होंठ चुमते) ये मम्मी भीनां..? अरे बाबा आते ही लेली.. अबतक तीन तीन गोलीया खा चुकी हु.. बस.. अपनी पढाय तक खयाल रखना पडेगा.. जैसे ही पढाइ खतम.. हम कुछ करते हेना. वो.. फेमीली प्लानींग..

लखन : (हसते) पागल हो गइ हो..? फेमीली प्लानींग..?

नीलम : (सामने देखते) हां तो..? सादी कीहे हमने.. अगर हम फेमीली प्लानींग नही करेगे तो कौन करेगा..? क्या आपको लगता हे वो धिरेनसे कुछ हो पायेगा..? अगर हो पाया तो भी मे कुछ होने नही दुगी.. बच्चे सीर्फ हमारे ही होगे..

लखन : (सामने देखते) बीलकुल पागल होगइ हो.. सुन नीलु.. कल मुजे राधुके पास जाना पडेगा.. अगर उसे पता चल गयाकी मे यहा हु ओर उसे मीलने नही आया तो उसे बुरा लगेगा..

नीलम : (मुस्कुराते) जीजु.. वो आपकी बीवी हे.. आपको जाना चाहीये.. कल मे दीनमे आराम करलुगी.. आप जाकर मील लेना.. आप साम तक वहा रहेना.. फीर रातको इस बीवीकी सेवा करने आजाना..

फीर दोनो सोनेके लीये चले गये.. कुछ देर आराम करनेके बाद लखनने फीरसे नीलमको दो बार जमकर पेल दीया.. फीर दोनो अ‍ेक दुसरेसे नंगेही चीपकके सो गये.. सुबह दोनो थोडी देरसे जागे.. लखनने हमेसाकी तराह नीलमको चोद कर गुड मोर्नींग वीस कीया..





फीर दोनोने चाइ नास्ता करलीया तो लखन राधीकाके पास चला गया.. ओर नीलम फीरसे आराम करने चली गइ.. लखन सीधा होस्टेलपे चला गया.. ज्यादातर लडकीया प्रवास या फीर अपने घर जा चुकी थी.. तो लखन ओर राधीका साम तक अ‍ेक दुसरेसे प्यार करते रहे..





सुबहसे साम तक लखनने राधीकाको तीन बार चोद लीया था.. ओर अ‍ेक बार बाथरुममे खडे खडे बजादी.. तो राधीका भी खुस हो गइ.. फीर दोनो राधीकाके घर चले गये.. वहा उसने राधीकाकी मम्मीका हालचाल जाना.. फीर सामको लखन वहासे नीकल गया.. राधीकाको सादीमे आनेका बहुत आग्रह कीया.. तो राधीकाने मना कर दीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २६८

सुबहसे साम तक लखनने राधीकाको तीन बार चोद लीया था.. ओर अ‍ेक बार बाथरुममे खडे खडे बजादी.. तो राधीका भी खुस हो गइ.. फीर दोनो राधीकाके घर चले गये.. वहा उसने राधीकाकी मम्मीका हालचाल जाना.. फीर सामको लखन वहासे नीकल गया.. राधीकाको सादीमे आनेका बहुत आग्रह कीया.. तो राधीकाने मना कर दीया.... अब आगे

अब गांवमे भी बहुत कुछ बदलाव होने लगा था.. अ‍ैसे रीस्तो गांवके लीये चर्चाका वीसय नही रहा.. सबने अ‍ैसे आपसी रीस्तोको स्वीकार करलीया था.. अबतो अ‍ैसे रीस्तोके बारेमे लोग सुनते तो कोइ रीअ‍ेक्ट भी नही करते.. अ‍ेक दिन सुबह मुनाने बसंतीको कीचनमे ही दबोच लीया..





ओर बसंतीको वही जुकाते सारीको कमर तक करते पीछेसे लंड घुसाकर वही बसंतीको चोदने लगा.. तभी अचानक बरखा अपने सरपे तोलीया लपेटते कीचनमे आगइ.. दरसल बरखा नहाने गइ तब मुना भी जाग गया था.. ओर बरखा बाथरुममे थी.. ओर नहा रही थी..





तो मोकेका फायदा उठाकर मुना अपनी मां बसंतीको चोदनेके लीये कीचनमे घुस गया था.. उन्होने बसंतीको वही प्लेटफोर्मपे सारी कमर तक उची करते बीठा दीया.. ओर बसंतीके दोनो पैरके बीच आकर लंडको बसंतीकी चुतमे घुसा दीया.. तो बसंतीकी भी मदहोस होते हल्कीसी सीसकारीया नीकल गइ..





मुना बसंतीके उरोजोको थामते उसे चोदने लगा.. बसंती भी सुबह सुबह चुदाइका मजा लेने लगी.. अभी मुना चोद ही रहा थाकी अचानक बरखा आगइ.. कीचनके दरवाजेके पास अदब लगाके पीछे खडी होगइ.. ओर मां बेटेकी चुदाइ देखने लगी..

तभी बसंतीका ध्यान बरखाकी ओर गया.. तो वो थोडीसी गभराते लखनको धका मारते सीधी होगइ.. ओर सर्मीन्दा होते अपनी सारीको नीचे करते सही करने लगी.. तबतक मुनाका ध्यान भी बरखाकी ओर गया.. तो वो भी पेन्टको सही करने लगा..

फीर सरमाते बरखाकी ओर देखते मुस्कुराता रहा.. बरखा अब भी दोनोकी ओर देखते हस रही थी.. बसंती बरखाको हसते हुअ‍े देखकर बहुत ही सर्मसार होगइ.. तो वोभी अपने कपडे सही करते चुपचाप रोटीया बेलने लगी.. उनकी चुत काफी गीली होगइ थी.. तभी..

बरखा : (मुस्कुराते) जानु.. अधुरा क्यु छोड दीया..? दोनो आरामसे अपना काम पुरा कर लेते..

बसंती : (सर्मसार होते धीरेसे) बरखा वो.. वो.. मुना.. अचानक.. मे मना कर रही थी.. फीर भी..

बरखा : (धीरेसे जुठे गुस्सेसे) चुप रहो तुम.. आप दोनोको क्या लगता हे मुजे पता नही चलेगा..?

मुना : (मुस्कुराते बरखाको बाहोमे भीचते) जाने देना.. क्यु परेसान कर रही हे बेचारीको.. तुजे सब पता हे..

बरखा : (धीरेसे) आप चुप रहीये.. मुजे मेरी सौतनसे बात करने दीजीये.. बडी सती सावीत्री बन रही थी मेरे सामने.. इनको कीतनी बार कहा था.. की अपने बेटेसे सेट होजाओ.. लेकीन इनको तो मेरे सामने ढोंग करना था.. तो आज रंगे हाथो पकड लीया.. अब कहीये.. क्या करना हे आपको..?

बसंती : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) अब तु जो कहोगी.. मे तैयार हु..

बरखा : (मुनाकी बाहोसे छुटते थोडी सख्तीसे) अब आप नहा लीजीये.. मुजे मेरी सौतनके साथ कुछ जरुरी बात करनी हे.. जाइअ‍े..

मुना : (हसते हुअ‍े जाते) देखना.. ज्यादा परेसान नही..

बरखा : (मुनाके जाते ही धीरेसे) हां तो मेरी सौतन.. कहीये.. कबसे चल रहा हे दोनोके बीच.. सच बताना..

बसंती : (सर्मीन्दा होते नजर जुकाये) सुरुसे ही.. जब हम दोनोको पहेली बार तेरी प्रेगनन्सी बारेमे पता चला.. ओर हम दोनोके बीच बहेस हुइ.. तब ही मेने तैय करलीया था.. की तुम दोनोका रीस्ता स्वीकार करना ही हे तो फीर मेभी क्यु नही..?

बरखा : (आस्चर्यसे धीरेसे) तो क्या तबसे ही..?

बरखा : (मुस्कुराते) हां.. क्युकी तेरे बापुसे तो कुछ हो नही रहा था.. ओर मे भटक गइ थी.. तो सोचा अगर अ‍ेक बहेन भाइसे रीलेशन रख सकती हे तो फीर मे क्यु नही..? बस.. उसी दीन मुनाको तेरा हाथ मुजसे मांगनेके बहाने बुला लीया.. ओर सर्त रखीकी तु बरखासे सादी करना चाहता हे तो तुजे मुजे भी खुस रखना पडेगा.. बस.. वो मान गया..

बरखा : (मुस्कुराते) ओर पहेली बार कब मीले दोनो..?

बसंती : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) मुजे क्या पता थाकी मुजसे ज्यादा तो उनको मुजे ठोकनेकी आग लगी हुइ हे.. बस.. उसी दीन दो पहोरको मे जब नहाकर नीकली.. मुजे ठोक लीया.. ओर तबसे चल रहा हे.. मेने मनसे उसे पतीके रुपमे स्वीकार करलीया हे.. बस.. अब सीर्फ सादीकी औपचारीक वीधी बाकी हे..
 
बरखा : (हसते आकर हग करते) मोम.. सोरी.. भाइने मुजे कुछ नही छुपाया.. मे सब जानती थी.. अब बताओ.. कैसा हे हमारा मुना..? मस्त हेनां..?

बसंती : (हसते धीरेसे) कमीनी तुमने तो मुजे डरा ही दीया था.. बहुत मस्त हे.. हम दोनोको खुस रखेगा..

बरखा : (मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. आप भी मुनासे सादी करलो.. मे खुस हु आपने भाइको अपना लीया..

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) अभी भी अपने सौहरको भाइ कहेती हो..?

बरखा : (हसते धीरेसे कानमे) क्या करु..? बडा कमीना बेटा पैदा कीया हे आपने.. उनको बीवी अच्छी ही नही लगती.. बहेन ओर अपनी मांपे दील आगया हे उनका.. ओर वो उसीको अपने नीचे लेटाना चाहते हे.. तो बीस्तरमे उनकी बहेन ही रहेती हु.. बीवी नही.. ओर आप..?

बसंती : (सर्मसार होते धीरेसे) ठीक केह रही हो.. मुजे भी मम्मी मम्मी कहेते.. कहेते भी बहुत सरम आ रही हे.. बडा कमीना बेटा पैदा कीया हे मेने..

बरखा : (मुस्कुराते) मोम.. तो फीर आपने क्या सोचा हे.. मीन्स आप दोनोकी सादी..

बसंती : (हाथ थामते धीरेसे) बरखा.. कुछ दीन जैसा चल रहा हे चलने दे.. तेरे बापु.. समज गइनां..?

बरखा : (मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. अब मेरी भी बात उनसे ज्यादा दीन छुप नही सकती.. मेरा पेट देखा हेनां..? ये आखरी महीना चल रहा हे.. तो इसीलीये मे पापाके सामने नही जाती..

बसंती : (मुस्कुराते) अब तो गांवमे अ‍ैसा बहुत कुछ होने लगा हे.. वो भी मान जायेगे.. मुनाको कहेना वो बडे ठाकुरसे बात करले.. वो तेरे बापुको समजायेगे.. तो फीर कोइ दीकत नही होगी..

बरखा : (थोडी चीन्तासे) मोम.. मुजे नही लगता बापु इसके लीये मान जायेगे.. फीर भी भाइसे बात करती हु..

बसंती : (हग करते) बरखा.. थेन्कस.. मुजे समजनेके लीये.. वरना मेरी भी हालत वो जयाके जैसी होती..

बरखा : (मुस्कुराते) मोम.. मुजे आपसे अ‍ेक जरुरी बात करनी हे.. लेकीन बादमे.. मे तैयार होजाउ.. अभी बापु जाग जायेगे.. उनके जोनेके बाद हम बात करते हे.. ओके..? चलो भाइने भी नहा लीया होगा..

बरखा मुनाको कपडे देने चली गइ.. जो बात मुना ओर उनकी मां बसंतीके बीच छुप छुपके हो रहीथी वो बात आज बरखाके सामने उजागर होगइ.. तो अब बसंती ओर मुना दोनो ही बीन्दास्त हो चुके थे.. हालाकी ये राज बरखाको पता था.. उनका पती वीभु चाइ नास्ता करके दुकानपे चला गया..

तो तो मुना ओर बरखा अपने रुमसे बहार आगया.. तो आज पहेली बार मुनाने बसंतीको अपनी बाहोमे भरलीया.. तो दुसरी ओर बरखा भी मुस्कुराते मुनाकी बाहोमे समा गइ.. फीर बसंती बरखा ओर मुना तीनो चाइ नास्ता करने अ‍ेकठे बैठ गये तब बरखाने बातको छेडदी..

बरखा : (मुस्कुराते) भाइ.. अब तुम मांसे सादी करलो.. क्या फर्क पडता हे अभी बापु हे.. हम इनसे ये बात छुपायेगे.. ये बात अभी सीर्फ हम तीनोके बीच रहेगी.. क्या कहेते हो..?

बसंती : (सरमाते धीरेसे) बरखा.. क्या अभी जरुरी हे..? जैसा चल रहा हे चलने देनां..

मुना : (मुस्कुराते) मां बरखा ठीक केह रही हे.. हम तीनो आश्रम चले जाते हेनां..

बसंती : (सरमाते देखते धीरेसे) नही.. वहा कोइनां कोइ पहेचान वाले मील जाते हे.. अगर यही आप दोनोका फैसला हेतो आप बहार कीसी मंदीरमे इन्तजाम करलो.. जहा हमे कोइ पहेचानता नाहो..

मुना : (मुस्कुराते) ठीक हे मां.. अभी लखनकी सादी हे.. उनकी सादीके बाद मे कुछ इन्तजाम करता हु..

बरखा : (सरमाते धीरेसे) मोम.. आपसे अ‍ेक काम था.. हमे आपकी मददकी जरुरत हे..

बसंती : (सामने देखते धीरेसे) कैसी मदद..?

बरखा : (सरमाते धीरेसे) मोम.. मे खुद चाहती थीकी आपका भैयाके साथ रीलेशन होजाये.. क्युकी भैयाको जेलना मेरे अकेलीका काम नही.. पता नही इन्होने सब दोस्तोको कैसी जडी बुटी पीलाइ हे..
 
बसंती : (सर्मसार होते धीरेसे) तो इसमे मे तेरी मदद तो कर रही हु.. ओर क्या मदद चाहीये..?

बरखा : (मुनाके सामने मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. जीस तराह मे आप दोनोका रीलेशन चाहती थी उसी तराह वो.. वो.. जयश्री भी चाहती हे.. क्युकी ब्रिन्दा आंटी आपकी खास सहेली हेनां..? तो बस.. ब्रिन्दा आंटीको समजाना था.. आप उसे समजायेनां..

बसंती : (मुनाके सामने देखकर हसते) क्या..? ये बात जयश्रीने खुद तुजे कही हे..?

बरखा : (दोनोकी ओर देखते हसते) हां क्यु..? कुछ ओर पक रहा हे क्या..?

बसंती : (हसते) नही.. सुन.. अगर जयश्री खुद चाहती हे तो मे बात तो करलुगी.. लेकीन ब्रिन्दासे नही जयश्रीसे..

बरखा : (आस्चर्यसे हसते) जयश्रीसे..? मतलब..? मे कुछ समजी नही..

बसंती : (मुनाकी ओर कातीलाना मुस्कुराते) तेरे इस पतीको पुछले.. इनको सब पता हे..

बरखा : (हसते सामने देखते) भाइ.. मम्मी क्या केह रही हे..? आप कुछ छुपा रहे हो क्या..?

मुना : (हसते धीरेसे) देख बरखा.. तुजे बता तो दुगा.. लेकीन अभी इस बातको तेरे तक ही सीमीत रखना.. अभी जयश्री भाभीको बतानेकी जरुरत नही हे.. बस.. सही समय आनेदे.. फीर बता देना..

बरखा : (मुस्कुराते) लेकीन क्या..? कौनसी बात हे जो मुजे पता नही हे.. बतादो..

मुना : (मुस्कुराते) दरसल.. श्रीधरने अपनी बहेन जयश्री भाभीके साथ रीलेशनमे आनेसे पहेले ही अपनी मां ब्रिन्दा आंटीके साथ सादी करली हे.. वोभी अ‍ेक बदलेकी भावनासे..

बरखा : (आस्चर्यसे मुह फाडते) व्होट..? बदलेकी भावनासे..? मतलब..?

मुना : (मुस्कुराते) बरखा.. जब ब्रिन्दा आंटीकी सादी नही हुइ थी इनसे पहेले ही श्रीधरके पीताका उनकी भाभीके साथ अफैर था.. ओर जयश्री उन दोनोकी लडकी हे.. फीर जीतु अंकलने उनकी भाभीकी बहेन ब्रिन्दा आंटीसे सादी करली.. ओर श्रीधरका जन्म हुआ.. जब ये बात ब्रिन्दा आंटीको पता चली तबतक बहुत देर होचुकी थी.. उनको ये बात बहुत देरसे पता चली.. क्युकी तबतक श्रीधर ओर जयश्री भाभी काफी बडे हो चुके थे..

बरखा : तो फीर ब्रिन्दा आंटीने अपने बेटेके साथ सादी करके बदला लीया..?

मुना : (मुस्कुराते) हां.. ओर उसने ही जयश्री भाभीको श्रीधरके साथ रीलेशनमे आनेके लीये प्रेरीत कीया.. ताकी दोनो भाइ बहेनकी आपसमे सादी करवाके वो जीतुलाल ओर उनकी भाभीसे बदला ले सके.. ओर श्रीधरका बाप अब भी उनकी भाभीके साथ रीलेशनमे हे.. इसीलीये तो जयश्री भाभीकी मां अलग रहेने चली गइ हे.. ताकी वो अपने देवर जीतुलालसे खुलकर प्यार कर सके..

बरखा : (अपना सर पकडते) ओह.. गो..ड.. बेचारी जयश्रीको तो इस बातका पता भी नही होगाकी उनका बाप जीतु अंकल हे.. सुनकर बेचारी बहुत दुखी हो जायेगी..

मुना : इसीलीये केह रहा हु.. की इस बातका जीक्र जयश्री भाभीके साथ मत करना.. बस.. हमे सीर्फ उनको इतना ही बताना हेकी हमने उन मां बेटेकी सेटींग करवा दीहे.. समजी..?

बसंती : (मुस्कुराते) ये सभी बाते ब्रिन्दाने मुजे बताइ हे.. बरखा सुन.. तुम सीर्फ जयश्रीको कहेना मुजे आकर मीले.. बाकी सब बाते मे सम्हाल लुगी.. अगर वो सचमे यही चाहती हे तो मे ब्रिन्दाको बतानेका नाटक करुगी.. ओर मुना श्रीधरसे बात करनेका नाटक करेगा.. बस.. दोनोकी सेटींग हो गइ..

मुना : (मुस्कुराते) मोम.. यही ठीक रहेगा.. बरखा अब चलो.. क्लीनीकपे जानेकी देर रहो रही हे..

फीर मुना ओर बरखा बाते करते क्लीनीकपे चले गये.. तो वहा सुधीर जो अब वसुधा होगया था.. वो पहेलेसे ही क्लीनीकपे आ चुकी थी.. मुनाको देखते ही वो उनकी ओर कामुक स्माइल करती हे.. अब वसुधाको सभी तराहकी फीलींग्स महेसुस होने लगी थी..





उनके बाल उनके बंधेसे नीचे तक आ गये थे.. जो उसने खुले छोडे थे.. ओर बुब्स काफी बढ गये थे.. जो कीसी नइ नइ जवान लडकीकी तराह उभर रहे थे.. मुनाको देखते ही उनकी चुतमे गीलापन महेसुस होने लगा.. ओर उनको सेक्स करनेकी इच्छा होने लगी..

तो नीलमकी फ्रेन्ड दीया भी उनके सास ससुर ओर अपने फीयान्सके साथ घुमनेके लीये मोरेसीयस चली गइ थी.. उनके ससुर ओर सास बहुत ही खुले वीचारके हाइ प्रोफाइल लोग थे.. होटेलमे उन्होने दो रुम बुक कीये थे.. अ‍ेकमे उनके सास ससुर.. तो दुसरे रुममे दीया उनके बोयफ्रन्डके साथ रुममे थी..

इन छे दीनोमे दीयाको उनके बोयफ्रेन्डने खुब जमकर पेला था.. ओर उनके ससुरने उनकी सासको.. उनकी सास अभी भी जवान दीख रही थी.. वो हमेसा स्लीवलेस ब्लाउस पहेनती थी.. ओर हमेसा सेक्सी लुकमे दीखती थी.. बस.. यही मोर्डन परीवारकी पहेचान थी..
 
तो इधर भी अब नीलम पुरा दीन आराम करके काफी ठीक हो गइ थी.. उनका जब भी मन करता वो लखनको ब्लुजोब देने लगती.. ओर लखनने भी दीन रात नीलमको खुब रगडके चोदा.. आज चौथा दीन था.. मंजुका भी फोन आ चुका था.. पुरी रात लखन नीलमकी बेन्ड बजाता रहा..





ओर सुबह भी गुड मोर्नींग बीस करते अ‍ेक बार चोद लीया.. फीर दोनो नहाने गये तब भी लखनने खडे खडे नीलमको चोदलीया जीसे नीलम काफी थक गइ थी.. फीर दोनो तैयार होकर कंपलीट हो गये ओर चाइ नास्ता कर रहे थे.. नीलम अब बहुत संतुस्ट दीख रही थी..

तो आज सबानाकी मेडीकल कोलेजकी पहेली सुची भी नीकल आइ थी.. जीसमे सबानाका नाम तीसरे नंबरपे ही था.. तो सबाना बहुत खुस हो गइ.. ओर उसे चार दीनके बाद नीकलना था.. ओर सबानाने पहेला काम अपनी ट्रेनकी टीकीट बुक करनेका कीया..

फीर उसने साहील ओर सृतीसे भी बात करली.. जीसे सुनकर दोनो खुस होगये थे.. ओर सबाना घरपे आगइ.. जरीना कीचनमे काम कर रही थी.. सबानाने उसे अपना नाम सुचीमे आनेकी बात कही तो जरीना बहुत खुस हो गइ.. फीर सबानाकी सब पेकीग हो चुकी थी तभी जरीना आगइ..

जरीना : (मुस्कुराते) सबु.. सब तैयारीया होगइ..? करली टीकीट बुक..?

सबाना : (खुसीसे मुस्कुराते) हां अम्मी.. सब कंपलीट.. आखीर मे जा रही हु..

जरीना : (मुस्कुराते) साहीलसे बात होगइ..? उनको सब बता दीया..?

सबाना : (सरमाते मुस्कुराते जुठ बोला) कहा अम्मी..? देखती नही हो.. मे सुबहसे दोडधाममे लगी हुइ हु.. सायबर काफे फीर ट्रेनकी टीकीट बुक करना.. ओर अभी घर आइ हु.. कहा टाइम मीला मुजे..? अभी तो फ्रि हुइ हु.. फीर बात कर लेती हु..

जरीना : (सरमाते धीरेसे) सुन.. कल बडी दीदीका फोन आया था.. केह रही थी सबाना जानेसे पहेले अ‍ेक दो दीन यहा रुकने आजाती.. तो मेने हां केह दीया..

सबाना : (सर्मसार होते धीरेसे) अम्मी.. क्यु हां कहा..? मुजेतो बहुत सरम आयेगी.. ओर अबु..?

जरीना : (मुस्कुराते) अरे.. तेरे अबुको थोडीना पता हे हमने तेरा रीस्ता वही पका करलीया हे.. तुम साहीलसे बात करले.. वो तुजे लेजायेगा.. ओर मुजे भी कोइ अ‍ेतराज नही.. आखीर वोही तो तेरा ससुराल हे..

सबाना : (सर्मसार होते धीरेसे) अम्मी.. क्या सादीसे पहेले वहा जाना ठीक होगा..?

जरीना : (मुस्कुराते) हां.. हमे तो अ‍ैसी लाइफ जीनेका मौका नही मीला.. कमसे कम तु तो जीले.. दो साल तेरी पढाइ चलेगी.. तो क्या बीचमे वेकेशनमे तु घर नही आयेगी..? हम वही तो रहेते होगे.. तुजे वही तो आना हे फीर अभी क्या दीकत हे..? अ‍ेक बार साहीलसे अच्छेसे मीलले..

सबाना : (सरमसे पानी पानी होते) अम्मी आप भीनां.. ठीक हे मे भाइसे बात करलेती हु..

जरीना : (मुस्कुराते अ‍ेक मुका मारते) चल बदमास.. तेरा होने वाला सौहर हे.. अभी भी भाइ कहोगी..?

सबाना : (सरमाते हसते धीरेसे) अब भाइसे सादी कर रही हु तो भाइ ही कहुगीनां.. सायरादी भी अभी भाइ केह रही हे.. ओर आपने भी तो अपने भाइसे सादी कीहे..

जरीना : (मुस्कुराते अ‍ेक मुका मारते) चुप बदमास.. भाइ हेतो क्या हुआ.. हेतो मामुका लडका.. चल अब तेरे भाइसे ही बात करले.. हें..हें..हें..

सबाना : (सरमाते धीरेसे) ठीक हे अम्मी.. मे बात करती हु.. लेकीन आप जाओ.. मुजे सरम आ रही हे..

जरीना : (हसते) ठीक हे.. ठीक हे.. मे जा रही हु.. आरामसे बात करलीयो..

जरीनाके जाते ही सबानाने साहीलको फोन कर दीया.. ओर जानेकी सब जानकारीयाके साथ दो दीन वहा गांवमे आनेकी बात की तो सुनकर साहील बहुत खुस हो गया.. तभी उसे याद आयाकी लखन वही हे जो गांवके लीये नीकलने वाला हे.. तो साहीलने फोन काटके लखनसे बात करली.. तो लखन खानेके बाद तुरंत नीकलने वाला था तो साहीलने उसे सबानाको पीक करनेकी बातकी.. ओर सबानाको फोन करदीया..

साहील : (फोनपे) हेलो.. सबु..?

सबाना : (सरमाते धीरेसे) हां भाइजान.. क्या लखन भैयासे बात हो गइ..?

साहील : (मुस्कुराते) हां.. सुनो वो अभी खानेके बाद नीकल रहा हे.. साथमे वो नीलु हे.. उनकी साली.. वो तुजे घरसे पीक करलेगा.. तो तुम फटाफट खाना खाकर रेडी होजाओ..

सबाना : (मुस्कुराते) जी भाइजान..

साहील : (सरारतसे धीरेसे) क्या सीर्फ जान नही बोल सकती..?

सबाना : (सरमाते धीरेसे) यार अम्मी इधर ही होगी.. ओर ये सब बेंगलोर जानेके बाद.. जैसा आप कहो..

साहील : (मुस्कुराते) सबु.. आइ लव यु..

सबाना : (सरमाते धीरेसे) हंम..? लव यु टु जानु.. अब खुस..? चलो रखती हु.. अम्मी आ रही हे..

जरीना : (फोन रखतेही आते) हां सबु.. तेरे आसीकके साथ होगइ बात..? हें..हें..हें..

सबाना : (अ‍ेक मुका मारते) अम्मी.. जाओ नही करती आपसे बात..

जरीना : (जोरोसे हसते) अरे मेतो मजाक कर रही हु.. अच्छा.. अब नही करुगी.. बोल.. बात हुइ..?

सबाना : (मुस्कुराते) हंम.. वो लखन भैया अभी खानेके बाद गांव ही जा रहे हे.. साथमे उनकी साली नीलम भी हे..

जरीना : (मुस्कुराते) तो फीर कोइ दीकत नही हे.. चल आजा फटाफट खाना खाले.. ओर तैयार होजा..

फीर सबानाने खाना खालीया.. तो इधर लखन ओर नीलमनेभी पार्सल मंगवाया था.. तो खानेसे पहेले दोनो ही सोफेपे बैठे अ‍ेक दुसरेको कीस कर रहे थे.. ओर कीस करते दोनोही उतेजीत हो गये.. तो लखनने वही सोफेपे नीलमको अ‍ेक बार फीर जमकर चोद लीया..



 
जब नीलम खाना गरम करने गइ तब भी लखनने वही प्लेटफोर्मपे बीठाकर फीरसे चोद लीया.. फीर दोनोने खालीया.. ओर घरको ताला लगाकर नीकल गये.. आज चोथा दीन था.. इन चार दीनोमे लखन ओर नीलमने खुब चुदाइ की.. लखनने नीलमको हर अ‍ेन्गलसे चोद लीया था..





तो नीलमने भी अपने सभी पसंदीदा आसनमे लखनसे चुदवा लीया था.. वो पुरी तराह संतुस्ट हो चुकी थी.. फीर दोनोने घरको ताला लगादीया.. ओर लखन कार लेकर सबानाके घरपे चला गया.. ओर वहासे सबानाको पीक करते गांवकी ओर नीकल गया.. तभी रास्तेमे..

लखन : (पीछे देखकर हसते) कहीये सबाना भाभी.. जानेका सब सेट होगया.. हें..हें..हें..

सबाना : (सर्मसार होते हसते) लखन भैया.. बी केरफुल.. अभी मे आपकी भाभी नही हुइ..

लखन : (मुस्कुराते) अरे नही हुइ तो होजायेगी.. ये मेरी गेरंटी.. मुजे आप दोनोके बारेमे सब पता हे..

सबाना : (मुस्कुराते) मुजे पता हे.. भाइजानने मुजे सब बताया हे.. लेकीन अभी हम दोनोके बारेमे कीसी ओरको नही पता.. ओर मे चाहती हुकी जबतक मे डोक्टर बनके वापस ना आजाउ.. तबतक ये बात छुपी रहे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आप बीलकुल टेन्शन मत लो.. ये बात सीर्फ हमारे बीच ही रहेगी.. ओर सुन नीलु.. तुभी ध्यान रखना.. वहा गांवमे कीसीको साहील ओर भाभीकी बाते कहीयो मत..

नीलम : (सबानाकी ओर हसते) अरे.. मेने कुछ सुना ही नही.. अ‍ैस करो दोनो.. हें..हें..हें..

सबाना : (मेडीकल स्टोर देखते ही) लखन भैया.. गाडी यहा अ‍ेक मीनीट रोकना.. मे अभी दवाइ लेकर आइ.. बडी अम्मीने मंगवाइ हे..

लखनको जुठ मुठ बडी अम्मीका नाम देकर सबाना मेडीकल स्टोरमे चली गइ.. वहा उसने पेइन कीलर ओर आइपीलकी स्ट्रीप लेली.. ओर अपने पर्समे छुपाली.. क्युकी बेंगलोर जानेसे पहेले अ‍ेक बार वो साहीलसे जमकर मीलनेका मन बना चुकी थी..

ओर इसके लीये वो साहीलको सरप्राइज देना चाहती थी.. फीर दवाइ पर्समे छुपाकर कारमे आकर बैठ गइ.. ओर लखनने कारको गांवकी ओर जाने दी.. बाते करते तीनो गांव पहोंच गये.. लखनने कारको सीधी साहीलके घर जानेदी.. ओर वहा सबानाको ड्रोप कर दीया..

साहील भी घरपे था.. तो सबानाको देखते ही दोडकर उनके गले लग गया.. तो सबाना बहुत ही सर्मसार होगइ.. जीसे देखकर सलमा हसने लगी.. फीर सलमाने भी सबानाको गले लगा लीया.. फीर सलमा ओर साहीलने जबरदस्ती लखन नीलुको चाइके लीये रोक लीया.. ओर सब घरमे आगये.. तभी..

सलमा : (सोफेपे बेठते) हां सबु.. तेरे जानेकी सब तैयारीया होगइ..?

सबाना : (सरमाते मुस्कुराते) हां बडी अम्मी.. ट्रेनकी टीकीट भी बुक होगइ हे ओर पेकींग भी हो गया.. आपका फोन आ गया तो अम्मीने मुजे भेज दीया..

साहील : (मुस्कुराते) अच्छा अम्मीने भेजा लसीलीये आइ हे..?

सबाना : (सर्मसार होते मुस्कुराते) अरे नही नही.. सोरी.. मे खुद भी आना चाहती थी..

साहील : (मुस्कुराते) तुमने तेरी तो सब तैयारीया करली.. ये बता.. चाचीने सब पेकींग करलीया.. क्युकी तुजे छोडने आउगा तब ही उनको यहा लेकर आउगा.. तेरा जानेका फोन आते ही मेने हमारे ट्रक वालेको भी केह दीया हे..

सबाना : (सरमाते मुस्कुराते) हां भाइजान.. ओल मोस्ट मेने ओर अम्मीने मीलकर सब पेक करलीया हे.. ओर अबुने भी अपनी फेक्टरीमे रीजाइनका लेटर दे दीया हे..

सलमा : (सामने देखते) साहील.. क्या तुमने कादीरसे बात करली हेनां..?

साहील : (मुस्कुराते) हां मे ओर लखन भैया मीलने गये थे.. अब चाचा चाची इधर आजाये तो लखन भैयाकी सादीके बाद उनको चाबी देने चला जाउगा.. उनका भी घरपे सब सेट करना पडेगानां..?

लखन : (मुस्कुराते) यार तु उनकी टेन्शन मतले.. मे वहा हुनां..

सलमा : (मुस्कुराते) सबु.. तुम सब बैठो मे चाइ बनाकर आती हु.. फीर चाइ पीकर तुजे सब दीखाती हु.. तुम्हारा ओर तेरे अबु अम्मीके अलावा दो रुम ओर कंपलीट करवा दीया हे..

सबाना : (सरमाते खडी होते) बडी अम्मी आप बैठो चाइ मे बताती हु.. मुजे सब पता हे..

फीर चाइ पीकर लखन ओर नीलम अपने घरपे आजाते हे.. तो कारका होर्न सुनकर मंजु भावना पुनम सृती ओर रजीया सबलोग बहार आजाते हे.. ओर लखन नीलमको देखते ही मंजु खुस होगइ.. फीर लखन मंजुके पैर छुअ‍े.. ओर सबको गले मीलते अंदर आजाते हे..

लता अपने रुममे थी.. जैसे ही लखनकी आवाज सुनी दोडकर बहार आगइ.. लेकीन लखनतो नीर्मला ओर भुमीसे बात करनेमे बीजी था.. नीलम धीरे धीरे चलते लताके पास चली गइ.. ओर उनके गले लग गइ.. लेकीन लता तो लखनकी ओर नजर गडाये खडी थी..

तो लखनने उनके सामने तक नही देखा.. जैसे वो जान बुजके लताको इग्नोर कर रहा हो.. पुनम लताकी ओर देखते उनकी मनोदसा समज गइ.. ओर वो सृतीको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तो पीछे भावना भी लखनकी ओर कातील स्माइल करते पुनम सृतीके पीछे चली गइ..
 
सृती : (अंदर जाते ही बेडपे बैठते धीरेसे) पुनोदी.. नीलुको देखा आपने..? कुछ अलग नही लग रही..?

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. मेने भी देखा.. देखा नही कैसे चल रही थी.. कुछ तो हुआ हे..

सृती : (हसते धीरेसे) पुनोदी.. बताओना आपको तो सबकुछ पता होगा..

पुनम : (रहस्य मुस्कानसे) हो गया नीलुका काम तमाम.. सबकुछ.. पीछले तीन दीनसे वो हमारे पतीके साथ घरमे अकेली ही थी.. समज गइनां..?

सृती : (मुहपे हाथ रखते हसते धीरेसे) तो क्या रमा भाभीकी तराह नीलु भी..?

भावना : (हसते धीरेसे) मेरा देवर बडा ही कमीना हे.. इस बच्चीको भी नही छोडा..

पुनम : (अ‍ेक मुका मारते धीरेसे) भाभी.. आपतो रहेने ही दो.. वो कोइ बच्ची नही हे.. मेरा डीवोर्स नही हुआ था तब कइ बार वो धिरेनसे मील चुकी हे.. अब वो ओरत हो चुकी हे.. ओर आप भी कम नही हो.. उस रात मे घरमे नही थी तब क्या हुआ था..? आपने तो लुट लीया था हमारे पतीको..

भावना : (धीरेसे हसते) यार क्या करु..? मेतो पानी पीने नीचे गइ थी.. क्या पता वो भी पीछे आयेगे.. ओर वो हे ही इतने हेन्डसम.. पता नही उनको देखते ही हम सब होस खो देती हे.. ओर मे भी अपने आपपे काबु नही रख पाइ.. ओर सबकुछ हो गया..

सृती : (हसते) सही कहा आपने.. अच्छा ये छोडो.. अब इस लताको क्या हुआ हे..? कैसे मुह लटकाये खडी थी.. अब तो मंजु मोमने सब छुट देदी हे.. तो लखन क्यु अ‍ैसे कर रहे हे..?

पुनम : (धीरेसे) नही दीदी.. मोमने सबको छुट तो देदी हे.. लेकीन उसने बडे भैयाको पानेके लीये लखन भैयाका गलत युस कीया.. उनकी सची भावनाओके साथ खेला.. ओर ये बात लखन भैयाको हर्ट कर गइ.. वो लतासे बहुत प्यार करते थे.. इसीलीये लखन भैया अब इनको इग्नोर करने लगे हे..

भावना : (सामने देखते धीरेसे) दीदी.. लेकीन येतो गलत हेनां..? अगर मंजुदीने सबको छुट दीहे तो इनमे लताकी क्या गलती..? वो भीतो सुरुसे मेरे पतीको प्यार करती थी..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) तो फीर आपने भानु भाइको क्यु छोडा..?

भावना : (सर्मीन्दा होते धीरेसे) वो.. वोतो रमा भाभीसे सादी.. ओर दुसरी ओरतोके साथ भी उनका रीलेशन था.. इसीलीये..

पुनम : (धीरेसे) अ‍ेक्जेक्टली.. यहीतो लखन भैयाके साथ हुआ.. आप जीसे प्यार करते हो.. ओर अचानक पता चला की वोतो कीसी ओरसे प्यार करती हे.. तो दील नही टुटेगा..?

भावना : (नजरे चुराते धीरेसे) वोतो आपने ओर सृतीदीने भी वोही कीया हे.. लखन भैयाके साथ..

पुनम : (सामने देखते) हां कीया हे.. लेकीन हमारे पतीसे डीवोर्सके बाद.. मानाकी हम उसे प्यार करने लगी थी.. लेकीन जबतक डीवोर्स नही हुआ उसे पास भटकने तक नही दीया.. भाभी.. प्यार होना अ‍ेक अलग बात हे.. ओर धोखेमे रखना अ‍ेक अलग मसला हे.. आपने जो लखन भैयाके साथ कीया ओर बडे भैयाको पता चला तो क्या उसे अच्छा लगेगा..?

भावना : (सामने देखते) लेकीन ये तो मंजुदीने सबको छुट दी हेनां..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. छुट दीहे वो अलग बात हे.. लेकीन बडे भैयाको पता चला तो उनको अच्छा लगेगाकी नही उतना बतादो..

भावना : (मुस्कुराते) नही.. सायद उनको भी बुरा लगेगा..

पुनम : (मुस्कुराते) अ‍ेक्जेक्टली.. इसीलीये तो हम कीसीको गील्टी फील नही होती.. लेकीन मर्द लोगोकी अलग बात हे.. वो बोलेगे कुछ नही.. लेकीन मनमे जरुर रखेगे.. खैर छोडो.. अच्छा हे ये सब मसला हमारे यहा नही हे.. क्युकी सबको पता हे हम सब कौन हे.. ओर हमारे घरके सभी मर्द कौन हे.. अ‍ेन्जोय लाइफ..

सृती : (मुस्कुराते) भावुदी.. आप मनमे कोइ संकोच मत करो.. हमारे यहा अ‍ैसा कोइ मसला नही हे..

पुनम : (मुस्कुराते) लखन भैया भी लताको अपनायेगे.. लेकीन अभी इसमे समय लगेगा.. वो बस.. लताको अपनी गलतीका अहेसास करवाना चाहते हे.. ओर कुछ नही..

भावना : (मुस्कुराते) तब तो ठीक हे बाबा मेतो डर गइ थी.. क्या हेना मे लताको अपनी छोटी बहेन मानती हु.. जीजुसे मीलवानेमे उनका बहुत बडा हाथ हे.. इसीलीये उनकी चीन्ता होती हे..

पुनम : (मुस्कुराते) उनकी चीन्ता मत करो.. हम सब हेनां.. सब सही होजायेगा.. क्युकी अब तो हमे ही सब सम्हालना हे.. लखन भैया कहा जायेगे..? आप फीकर मत करो..

दुसरी ओर सलमा भी साहील ओर सबानाको अकेलेमे मीलनेके लीये मौके दे रही थी.. वो कीसीना कीसी बहाने बहार चली जाती या घरका काम करने लगती.. वो काम करनेके लीये सबानाको हाथ तक नही लगाने देती.. ओर सबाना साहील गांवकी बाते करते रहे..

ओर घरमे ही इधर उधर घुमते साहील उनको अपने कमरे दीखाने ले गया.. ओर मौका मीलते ही दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे लीपट गये.. ओर कीस करने लगे.. सबानाको यहा कीसीका डर नही था.. ओर वो साहीलके साथ थोडा आगे बढना चाहती थी..

तो साहील सबानाके होंठ चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. सबानाने साहीलका हाथ हटानेकी कोइ कोसीस नही की.. वो मदहोस होने लगी.. आधी आंख चडाते साहीलके मुहमे अपनी जीभ डालने लगी.. ओर साहीलसे मजेसे अपनु दोनो बुब्स बारी बारी मसलवाने लगी.. जीनकी वजहसे सबानाकी चुत गीली होने लगी.. सबानाको पता ही नही चलाकी साहील कबसे उनकी चुतको सहेलाने लगा.. तभी....

कन्टीन्यु
 




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