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अेक हप्तेके बाद मुनाने अपने पीता वीभुका सभी कार्य समाप्त करलीया था.. उस दीन लखन रजीयाको लेकर गांव आया था.. क्युकी अब पुनमको पे्रगनन्सीकी वजहसे घरसे बहार नीकलना मना करदीया था.. दोनो साम तक बंसीके वहा क्रीयामे सामील रहे.. ओर सामको मंजु देवायतको मीलकर वापस सहेर चले गया..
दीन बीतने लगे.. मुनाको अेकीस दीन कुछ करना नही था.. जबतक वीभुका आखरी कार्य समाप्त नही होजाता.. अब बरखा ओर जयश्रीका डलीवरीका दीन भी नजदीक आ रहा था.. इसी बीच अेक दीन ब्रीन्दाने खुद फोन करके वृन्दाको गांव बुला लीया.. ताकी जयश्रीकी गोद भराइकी रश्म करसके..
जबसे वृन्दा घर छोडते वक्त श्रीधरको आखरी बार गले मीली.. ओर उनको नीचे जोभी चुंभन महेसुस हुआ.. तबसे उनका दीमाग भी घुम गया था.. ओर वो वापस श्रीधरको मीलनेके लीये बेताब थी.. ओर उपरसे उनको ब्रीन्दाका जयश्रीकी गोद भराइके लीये फोन आया..
तो दुसरे ही दीन जीतुलाल खुद वृन्दाको गांव छोडकर वापस चला गया.. क्युकी वृन्दाको दो तीन दीन वही रुकना था.. ओर जीतुलाल ब्रीन्दाको फेइस करना भी नही चाहता था.. जैसे ही वृन्दा घरमे आइ ब्रीन्दाने खुसीसे वृन्दाको गले लगा लीया.. ओर ब्रीन्दाको गले मीलते वृन्दाकी आंख श्रीधरको ढुंढने लगी..
तब जयश्री ओर श्रीधर भी अपने रुममे थे.. वो भी आवाज सुनकर बहार आगये.. तो जयश्री अपनी मम्मीको देखकर हसते हुअे जटसे आइ ओर वृन्दाको गले लगा लीया.. तो वृन्दाकी आंखसे आंसु नीकल गये.. फीर जयश्रीको अलग करते उनके पेटको देखती रही.. ओर अेक बार फीर जयश्रीको गले लगा लीया..
वृन्दा : (गले लगाते) मेरी बच्ची.. कीतनी अच्छी लग रही हे.. लगता हे तेरी सास तेरा बहुत अयाल रख रही हे.. हें..हें..हें..
जयश्री (हां मे सर हीलाते) हां मम्मी.. वो सास नही हे.. मेरी मां हे.. आइअे बैठीये..
वृन्दा : (श्रीधरकी ओर कातीलाना मुस्कुराते) अभी ठहेरतो सही मेरे दामादको तो अच्छेसे मीलने दे.. घरपे आता ही नही.. हें..हें..हें..
कहा तो जयश्री श्रीधरकी ओर सरमाके मुस्कुराने लगी ओर अपनी मम्मीसे अलग होगइ.. तो श्रीधर हसते हुअे वृन्दाके पास आया ओर उनके पैर छुने लगा.. इनसे पहेले श्रीधर पैर छुअे वृन्दाने उनके दोनो कंधे पकडकर रोक लीया.. ओर श्रीधरको जोरोसे अपने गले लगा लीया..
तो वृन्दाको वही अहेसास.. जो पहेले भी श्रीधरको गले लगाते हुआ था.. फीरसे उनके नीचे वोही चुंभन महेसुस होने लगी.. ओर कामुक्त वृन्दाके तनमे अेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. उनकी चुत हरकतमे आइ ओर पानीका रीसाव करने लगी.. तो वृन्दाने उसे कसकर बाहोमे भीचते गाल चुमते जटसे छोड दीया..
वृन्दा : (मुस्कुराते) कहो.. कैसे हो मेरे दामदजी..? हें..हें..हें..
ब्रीन्दा : (हसते) दीदी.. ये आपका बेटा भी हे..
वृन्दा : (हसते) नही ब्रीन्दा ये मेरा दामाद ही हे.. ओर दामाद भी बेटा ही होता हे.. बस इनसे अेक ही सीकायत हे..?
श्रीधर : (हसते) क्या..?
वृन्दा : (मुस्कुराते कान खीचते) बस.. अभी तक मेरी बेटीको लेकर अपने ससुराल नही आया.. इसने मुजे वादा कीया था.. लेकीन अब कहा जायेगा..? हें..हें..हें..
जयश्री : (मुस्कुराते) मम्मी वो तो मुजे ला रहे थे लेकीन मेने ही मना करदीया.. क्युकी मम्मीने इस हालतमे मुजे ट्रावेल करनेको मना करदीया हे..
वृन्दा : (मुस्कुराते) हां तो सही तो कीया हे इसने.. बेटा इस हालमे ट्रावेल करना बहुत जोखीम भरा हे.. लेकीन ये अकेलातो आ सकता हेनां..? सीर्फ मेरा दामाद ही थोडीनां हे.. बेटा ओर भांजा भीतो हे..
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) दीदी.. चीन्ता मत करो.. अब गोद भराइके बाद जयश्री उधर चली आयेगी तो ये उसे मीलने तो आही जायेगे.. हें..हें..हें.. बीवीके बगैर कोइ दुर थोडीना रेह सकता हे..
वृन्दा : (जोरोसे हसते) हां सही कहा तुमने.. देखती हु अब ये बच्चु कहा जायेगा..
ब्रीन्दा : (हाथ पकडकर सोफेपे बीठाते) आइअे दीदी.. बैठीये इधर.. पहेले कहो.. कैसी हो..?
वृन्दा : (हाथ पकडकर गीली आंखसे धीरेसे फुसफुसाते) ब्रीन्दा.. आइ अेम सोरी..
ब्रीन्दा : (धीरेसे मुस्कुराते) दीदी.. भुल जाइअे सब.. मेभी भुल चुकी हु.. अब हम नइ जींदगी ओर नये रीस्तेकी सुरुआत करे..? देखीये यहा हम तीनो बहुत खुस हे.. आशा हे आप सभी खुस होगे..
वृन्दा : (आंख पोछते मुस्कुराते) हां ब्रीन्दा.. हम भी खुस हे.. भगवान करे तुम तीनो हमेसा अैसे ही खुस रहो.. कास मेने उसी दीन ये दोनोका रीस्ता स्वीकार करलीया होता.. तो घर छोडनेकी नोबत ही नही आती..
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) दीदी.. छोडीये सब गीले सीकवे.. ये घर आज भी आप सब लोगोका हे.. ये बताइअे जीजु कैसे हे..?
वृन्दा : (मुस्कुराते) तेरे जीजु ठीक हे.. तुम सबको बहुत याद करते हे.. यहा गोद भराइमे नही आसकते.. वरना उनके साथ आती.. कभी अपने जीजुको तो मीलने आया करो..
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) दीदी.. आउगी.. मेरे पोतेका मुह देखने.. लेकीन हम कभी अलग नही हुअे.. ये घर आज भी जीजुका हे.. कभी उसे यहा रु्कनेके लीये भैजे.. या फीर आप दोनो साथ आइअे..
फीर वृन्दा ओर ब्रीन्दा दोनो अेक दुसरेकी खबर पुछकर गांवकी बाते करने लगी.. जयश्रीने सबके लीये चाइ बनाइ.. तो वृन्दाने श्रीधरका हाथ पकडकर अपने पास सटकर बीठा दीया.. ओर ब्रीन्दासे बात करते उनका हाथ थामे रखा.. ओर बीच बीचमे हाथको कसके दबा देती..
ब्रीन्दा ओर जयश्रीको लगाकी अब वृन्दा काफी बदल चुकी हे.. ओर सास दामाद या फीर अेक मौसी भांजेके बीच अेक स्नेह हे जो वृन्दाने श्रीधरका हाथ थामे रखा हे.. लेकीन दोनोको मालुम नही था.. की ये वृन्दाका दामादके प्रती अेक स्नेह नही.. यहा कामुक्तासे भरी वृन्दा अेक अलग ही रीस्तेकी सुरुआत करने आइ हे..
क्युकी काफी दीनोसे उसे जीतुलालसे वो प्यार भरा जोस नही मील रहा था जो पहेले मीलता था.. ओर उनकी वजह थी मुनाकी वो नपुसकता वाली जडी बुटी.. जीसका असर जीतुलाल ओर भानुपे होगया था.. तो अब वृन्दाको अपनी प्यास बुजानेके लीये अेक जवान मर्दकी जरुरत थी.. तो उसे श्रीधरसे बहेतर कौन मीलेगा..?
वृन्दा बहुत ही कामुक ओरत थी.. उसे हर रात प्यार चाहीये था.. मानो उनको चुदाइकी आदत हो चुकी थी.. ओर उनको अैसा जवान मर्द चाहीये था जो कीसीको उनपे सक ना हो.. ओर पहेली बार चुंभन हुइ तबही वृन्दाने श्रीधरको फसानेका मन बना लीया था.. ये भी नही सोचाकी ये उनका भांजा ओर अब उनका दामाद भी हे.. ओर आज गोद भरइाकी रश्मके बहाने इस रीस्तेको आगे बढाने आइ थी.. इसीलीये तो ब्रीन्दाके फोन आते ही उसने आनेके लीये हां केह दीया था....
कन्टीन्यु
दीन बीतने लगे.. मुनाको अेकीस दीन कुछ करना नही था.. जबतक वीभुका आखरी कार्य समाप्त नही होजाता.. अब बरखा ओर जयश्रीका डलीवरीका दीन भी नजदीक आ रहा था.. इसी बीच अेक दीन ब्रीन्दाने खुद फोन करके वृन्दाको गांव बुला लीया.. ताकी जयश्रीकी गोद भराइकी रश्म करसके..
जबसे वृन्दा घर छोडते वक्त श्रीधरको आखरी बार गले मीली.. ओर उनको नीचे जोभी चुंभन महेसुस हुआ.. तबसे उनका दीमाग भी घुम गया था.. ओर वो वापस श्रीधरको मीलनेके लीये बेताब थी.. ओर उपरसे उनको ब्रीन्दाका जयश्रीकी गोद भराइके लीये फोन आया..
तो दुसरे ही दीन जीतुलाल खुद वृन्दाको गांव छोडकर वापस चला गया.. क्युकी वृन्दाको दो तीन दीन वही रुकना था.. ओर जीतुलाल ब्रीन्दाको फेइस करना भी नही चाहता था.. जैसे ही वृन्दा घरमे आइ ब्रीन्दाने खुसीसे वृन्दाको गले लगा लीया.. ओर ब्रीन्दाको गले मीलते वृन्दाकी आंख श्रीधरको ढुंढने लगी..
तब जयश्री ओर श्रीधर भी अपने रुममे थे.. वो भी आवाज सुनकर बहार आगये.. तो जयश्री अपनी मम्मीको देखकर हसते हुअे जटसे आइ ओर वृन्दाको गले लगा लीया.. तो वृन्दाकी आंखसे आंसु नीकल गये.. फीर जयश्रीको अलग करते उनके पेटको देखती रही.. ओर अेक बार फीर जयश्रीको गले लगा लीया..
वृन्दा : (गले लगाते) मेरी बच्ची.. कीतनी अच्छी लग रही हे.. लगता हे तेरी सास तेरा बहुत अयाल रख रही हे.. हें..हें..हें..
जयश्री (हां मे सर हीलाते) हां मम्मी.. वो सास नही हे.. मेरी मां हे.. आइअे बैठीये..
वृन्दा : (श्रीधरकी ओर कातीलाना मुस्कुराते) अभी ठहेरतो सही मेरे दामादको तो अच्छेसे मीलने दे.. घरपे आता ही नही.. हें..हें..हें..
कहा तो जयश्री श्रीधरकी ओर सरमाके मुस्कुराने लगी ओर अपनी मम्मीसे अलग होगइ.. तो श्रीधर हसते हुअे वृन्दाके पास आया ओर उनके पैर छुने लगा.. इनसे पहेले श्रीधर पैर छुअे वृन्दाने उनके दोनो कंधे पकडकर रोक लीया.. ओर श्रीधरको जोरोसे अपने गले लगा लीया..
तो वृन्दाको वही अहेसास.. जो पहेले भी श्रीधरको गले लगाते हुआ था.. फीरसे उनके नीचे वोही चुंभन महेसुस होने लगी.. ओर कामुक्त वृन्दाके तनमे अेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. उनकी चुत हरकतमे आइ ओर पानीका रीसाव करने लगी.. तो वृन्दाने उसे कसकर बाहोमे भीचते गाल चुमते जटसे छोड दीया..
वृन्दा : (मुस्कुराते) कहो.. कैसे हो मेरे दामदजी..? हें..हें..हें..
ब्रीन्दा : (हसते) दीदी.. ये आपका बेटा भी हे..
वृन्दा : (हसते) नही ब्रीन्दा ये मेरा दामाद ही हे.. ओर दामाद भी बेटा ही होता हे.. बस इनसे अेक ही सीकायत हे..?
श्रीधर : (हसते) क्या..?
वृन्दा : (मुस्कुराते कान खीचते) बस.. अभी तक मेरी बेटीको लेकर अपने ससुराल नही आया.. इसने मुजे वादा कीया था.. लेकीन अब कहा जायेगा..? हें..हें..हें..
जयश्री : (मुस्कुराते) मम्मी वो तो मुजे ला रहे थे लेकीन मेने ही मना करदीया.. क्युकी मम्मीने इस हालतमे मुजे ट्रावेल करनेको मना करदीया हे..
वृन्दा : (मुस्कुराते) हां तो सही तो कीया हे इसने.. बेटा इस हालमे ट्रावेल करना बहुत जोखीम भरा हे.. लेकीन ये अकेलातो आ सकता हेनां..? सीर्फ मेरा दामाद ही थोडीनां हे.. बेटा ओर भांजा भीतो हे..
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) दीदी.. चीन्ता मत करो.. अब गोद भराइके बाद जयश्री उधर चली आयेगी तो ये उसे मीलने तो आही जायेगे.. हें..हें..हें.. बीवीके बगैर कोइ दुर थोडीना रेह सकता हे..
वृन्दा : (जोरोसे हसते) हां सही कहा तुमने.. देखती हु अब ये बच्चु कहा जायेगा..
ब्रीन्दा : (हाथ पकडकर सोफेपे बीठाते) आइअे दीदी.. बैठीये इधर.. पहेले कहो.. कैसी हो..?
वृन्दा : (हाथ पकडकर गीली आंखसे धीरेसे फुसफुसाते) ब्रीन्दा.. आइ अेम सोरी..
ब्रीन्दा : (धीरेसे मुस्कुराते) दीदी.. भुल जाइअे सब.. मेभी भुल चुकी हु.. अब हम नइ जींदगी ओर नये रीस्तेकी सुरुआत करे..? देखीये यहा हम तीनो बहुत खुस हे.. आशा हे आप सभी खुस होगे..
वृन्दा : (आंख पोछते मुस्कुराते) हां ब्रीन्दा.. हम भी खुस हे.. भगवान करे तुम तीनो हमेसा अैसे ही खुस रहो.. कास मेने उसी दीन ये दोनोका रीस्ता स्वीकार करलीया होता.. तो घर छोडनेकी नोबत ही नही आती..
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) दीदी.. छोडीये सब गीले सीकवे.. ये घर आज भी आप सब लोगोका हे.. ये बताइअे जीजु कैसे हे..?
वृन्दा : (मुस्कुराते) तेरे जीजु ठीक हे.. तुम सबको बहुत याद करते हे.. यहा गोद भराइमे नही आसकते.. वरना उनके साथ आती.. कभी अपने जीजुको तो मीलने आया करो..
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) दीदी.. आउगी.. मेरे पोतेका मुह देखने.. लेकीन हम कभी अलग नही हुअे.. ये घर आज भी जीजुका हे.. कभी उसे यहा रु्कनेके लीये भैजे.. या फीर आप दोनो साथ आइअे..
फीर वृन्दा ओर ब्रीन्दा दोनो अेक दुसरेकी खबर पुछकर गांवकी बाते करने लगी.. जयश्रीने सबके लीये चाइ बनाइ.. तो वृन्दाने श्रीधरका हाथ पकडकर अपने पास सटकर बीठा दीया.. ओर ब्रीन्दासे बात करते उनका हाथ थामे रखा.. ओर बीच बीचमे हाथको कसके दबा देती..
ब्रीन्दा ओर जयश्रीको लगाकी अब वृन्दा काफी बदल चुकी हे.. ओर सास दामाद या फीर अेक मौसी भांजेके बीच अेक स्नेह हे जो वृन्दाने श्रीधरका हाथ थामे रखा हे.. लेकीन दोनोको मालुम नही था.. की ये वृन्दाका दामादके प्रती अेक स्नेह नही.. यहा कामुक्तासे भरी वृन्दा अेक अलग ही रीस्तेकी सुरुआत करने आइ हे..
क्युकी काफी दीनोसे उसे जीतुलालसे वो प्यार भरा जोस नही मील रहा था जो पहेले मीलता था.. ओर उनकी वजह थी मुनाकी वो नपुसकता वाली जडी बुटी.. जीसका असर जीतुलाल ओर भानुपे होगया था.. तो अब वृन्दाको अपनी प्यास बुजानेके लीये अेक जवान मर्दकी जरुरत थी.. तो उसे श्रीधरसे बहेतर कौन मीलेगा..?
वृन्दा बहुत ही कामुक ओरत थी.. उसे हर रात प्यार चाहीये था.. मानो उनको चुदाइकी आदत हो चुकी थी.. ओर उनको अैसा जवान मर्द चाहीये था जो कीसीको उनपे सक ना हो.. ओर पहेली बार चुंभन हुइ तबही वृन्दाने श्रीधरको फसानेका मन बना लीया था.. ये भी नही सोचाकी ये उनका भांजा ओर अब उनका दामाद भी हे.. ओर आज गोद भरइाकी रश्मके बहाने इस रीस्तेको आगे बढाने आइ थी.. इसीलीये तो ब्रीन्दाके फोन आते ही उसने आनेके लीये हां केह दीया था....
कन्टीन्यु














