Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 104 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

अ‍ेक हप्तेके बाद मुनाने अपने पीता वीभुका सभी कार्य समाप्त करलीया था.. उस दीन लखन रजीयाको लेकर गांव आया था.. क्युकी अब पुनमको पे्रगनन्सीकी वजहसे घरसे बहार नीकलना मना करदीया था.. दोनो साम तक बंसीके वहा क्रीयामे सामील रहे.. ओर सामको मंजु देवायतको मीलकर वापस सहेर चले गया..

दीन बीतने लगे.. मुनाको अ‍ेकीस दीन कुछ करना नही था.. जबतक वीभुका आखरी कार्य समाप्त नही होजाता.. अब बरखा ओर जयश्रीका डलीवरीका दीन भी नजदीक आ रहा था.. इसी बीच अ‍ेक दीन ब्रीन्दाने खुद फोन करके वृन्दाको गांव बुला लीया.. ताकी जयश्रीकी गोद भराइकी रश्म करसके..

जबसे वृन्दा घर छोडते वक्त श्रीधरको आखरी बार गले मीली.. ओर उनको नीचे जोभी चुंभन महेसुस हुआ.. तबसे उनका दीमाग भी घुम गया था.. ओर वो वापस श्रीधरको मीलनेके लीये बेताब थी.. ओर उपरसे उनको ब्रीन्दाका जयश्रीकी गोद भराइके लीये फोन आया..

तो दुसरे ही दीन जीतुलाल खुद वृन्दाको गांव छोडकर वापस चला गया.. क्युकी वृन्दाको दो तीन दीन वही रुकना था.. ओर जीतुलाल ब्रीन्दाको फेइस करना भी नही चाहता था.. जैसे ही वृन्दा घरमे आइ ब्रीन्दाने खुसीसे वृन्दाको गले लगा लीया.. ओर ब्रीन्दाको गले मीलते वृन्दाकी आंख श्रीधरको ढुंढने लगी..

तब जयश्री ओर श्रीधर भी अपने रुममे थे.. वो भी आवाज सुनकर बहार आगये.. तो जयश्री अपनी मम्मीको देखकर हसते हुअ‍े जटसे आइ ओर वृन्दाको गले लगा लीया.. तो वृन्दाकी आंखसे आंसु नीकल गये.. फीर जयश्रीको अलग करते उनके पेटको देखती रही.. ओर अ‍ेक बार फीर जयश्रीको गले लगा लीया..

वृन्दा : (गले लगाते) मेरी बच्ची.. कीतनी अच्छी लग रही हे.. लगता हे तेरी सास तेरा बहुत अयाल रख रही हे.. हें..हें..हें..

जयश्री (हां मे सर हीलाते) हां मम्मी.. वो सास नही हे.. मेरी मां हे.. आइअ‍े बैठीये..

वृन्दा : (श्रीधरकी ओर कातीलाना मुस्कुराते) अभी ठहेरतो सही मेरे दामादको तो अच्छेसे मीलने दे.. घरपे आता ही नही.. हें..हें..हें..

कहा तो जयश्री श्रीधरकी ओर सरमाके मुस्कुराने लगी ओर अपनी मम्मीसे अलग होगइ.. तो श्रीधर हसते हुअ‍े वृन्दाके पास आया ओर उनके पैर छुने लगा.. इनसे पहेले श्रीधर पैर छुअ‍े वृन्दाने उनके दोनो कंधे पकडकर रोक लीया.. ओर श्रीधरको जोरोसे अपने गले लगा लीया..

तो वृन्दाको वही अहेसास.. जो पहेले भी श्रीधरको गले लगाते हुआ था.. फीरसे उनके नीचे वोही चुंभन महेसुस होने लगी.. ओर कामुक्त वृन्दाके तनमे अ‍ेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. उनकी चुत हरकतमे आइ ओर पानीका रीसाव करने लगी.. तो वृन्दाने उसे कसकर बाहोमे भीचते गाल चुमते जटसे छोड दीया..

वृन्दा : (मुस्कुराते) कहो.. कैसे हो मेरे दामदजी..? हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (हसते) दीदी.. ये आपका बेटा भी हे..

वृन्दा : (हसते) नही ब्रीन्दा ये मेरा दामाद ही हे.. ओर दामाद भी बेटा ही होता हे.. बस इनसे अ‍ेक ही सीकायत हे..?

श्रीधर : (हसते) क्या..?

वृन्दा : (मुस्कुराते कान खीचते) बस.. अभी तक मेरी बेटीको लेकर अपने ससुराल नही आया.. इसने मुजे वादा कीया था.. लेकीन अब कहा जायेगा..? हें..हें..हें..

जयश्री : (मुस्कुराते) मम्मी वो तो मुजे ला रहे थे लेकीन मेने ही मना करदीया.. क्युकी मम्मीने इस हालतमे मुजे ट्रावेल करनेको मना करदीया हे..

वृन्दा : (मुस्कुराते) हां तो सही तो कीया हे इसने.. बेटा इस हालमे ट्रावेल करना बहुत जोखीम भरा हे.. लेकीन ये अकेलातो आ सकता हेनां..? सीर्फ मेरा दामाद ही थोडीनां हे.. बेटा ओर भांजा भीतो हे..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) दीदी.. चीन्ता मत करो.. अब गोद भराइके बाद जयश्री उधर चली आयेगी तो ये उसे मीलने तो आही जायेगे.. हें..हें..हें.. बीवीके बगैर कोइ दुर थोडीना रेह सकता हे..

वृन्दा : (जोरोसे हसते) हां सही कहा तुमने.. देखती हु अब ये बच्चु कहा जायेगा..

ब्रीन्दा : (हाथ पकडकर सोफेपे बीठाते) आइअ‍े दीदी.. बैठीये इधर.. पहेले कहो.. कैसी हो..?

वृन्दा : (हाथ पकडकर गीली आंखसे धीरेसे फुसफुसाते) ब्रीन्दा.. आइ अ‍ेम सोरी..

ब्रीन्दा : (धीरेसे मुस्कुराते) दीदी.. भुल जाइअ‍े सब.. मेभी भुल चुकी हु.. अब हम नइ जींदगी ओर नये रीस्तेकी सुरुआत करे..? देखीये यहा हम तीनो बहुत खुस हे.. आशा हे आप सभी खुस होगे..

वृन्दा : (आंख पोछते मुस्कुराते) हां ब्रीन्दा.. हम भी खुस हे.. भगवान करे तुम तीनो हमेसा अ‍ैसे ही खुस रहो.. कास मेने उसी दीन ये दोनोका रीस्ता स्वीकार करलीया होता.. तो घर छोडनेकी नोबत ही नही आती..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) दीदी.. छोडीये सब गीले सीकवे.. ये घर आज भी आप सब लोगोका हे.. ये बताइअ‍े जीजु कैसे हे..?

वृन्दा : (मुस्कुराते) तेरे जीजु ठीक हे.. तुम सबको बहुत याद करते हे.. यहा गोद भराइमे नही आसकते.. वरना उनके साथ आती.. कभी अपने जीजुको तो मीलने आया करो..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) दीदी.. आउगी.. मेरे पोतेका मुह देखने.. लेकीन हम कभी अलग नही हुअ‍े.. ये घर आज भी जीजुका हे.. कभी उसे यहा रु्कनेके लीये भैजे.. या फीर आप दोनो साथ आइअ‍े..

फीर वृन्दा ओर ब्रीन्दा दोनो अ‍ेक दुसरेकी खबर पुछकर गांवकी बाते करने लगी.. जयश्रीने सबके लीये चाइ बनाइ.. तो वृन्दाने श्रीधरका हाथ पकडकर अपने पास सटकर बीठा दीया.. ओर ब्रीन्दासे बात करते उनका हाथ थामे रखा.. ओर बीच बीचमे हाथको कसके दबा देती..

ब्रीन्दा ओर जयश्रीको लगाकी अब वृन्दा काफी बदल चुकी हे.. ओर सास दामाद या फीर अ‍ेक मौसी भांजेके बीच अ‍ेक स्नेह हे जो वृन्दाने श्रीधरका हाथ थामे रखा हे.. लेकीन दोनोको मालुम नही था.. की ये वृन्दाका दामादके प्रती अ‍ेक स्नेह नही.. यहा कामुक्तासे भरी वृन्दा अ‍ेक अलग ही रीस्तेकी सुरुआत करने आइ हे..

क्युकी काफी दीनोसे उसे जीतुलालसे वो प्यार भरा जोस नही मील रहा था जो पहेले मीलता था.. ओर उनकी वजह थी मुनाकी वो नपुसकता वाली जडी बुटी.. जीसका असर जीतुलाल ओर भानुपे होगया था.. तो अब वृन्दाको अपनी प्यास बुजानेके लीये अ‍ेक जवान मर्दकी जरुरत थी.. तो उसे श्रीधरसे बहेतर कौन मीलेगा..?

वृन्दा बहुत ही कामुक ओरत थी.. उसे हर रात प्यार चाहीये था.. मानो उनको चुदाइकी आदत हो चुकी थी.. ओर उनको अ‍ैसा जवान मर्द चाहीये था जो कीसीको उनपे सक ना हो.. ओर पहेली बार चुंभन हुइ तबही वृन्दाने श्रीधरको फसानेका मन बना लीया था.. ये भी नही सोचाकी ये उनका भांजा ओर अब उनका दामाद भी हे.. ओर आज गोद भरइाकी रश्मके बहाने इस रीस्तेको आगे बढाने आइ थी.. इसीलीये तो ब्रीन्दाके फोन आते ही उसने आनेके लीये हां केह दीया था....

कन्टीन्यु
 
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २७७

वृन्दा बहुत ही कामुक ओरत थी.. उसे हर रात प्यार चाहीये था.. मानो उनको चुदाइकी आदत लग चुकी थी.. ओर उनको अ‍ैसा जवान मर्द चाहीये था जो कीसीको उनपे सक ना हो.. ओर पहेली बार श्रीधरकद गले मीलते नीचे चुंभन हुइ तब ही वृन्दाने श्रीधरको फसानेका मन बना लीया था.. ये भी नही सोचाकी ये उनका भांजा ओर अब उनका दामाद भी हे.. ओर आज गोद भरइाकी रश्मके बहाने इस रीस्तेको आगे बढाने आइ थी.. इसीलीये तो ब्रीन्दाके फोन आते ही उसने आनेके लीये हां केह दीया था.... अब आगे

तो दुसरी ओर पुनमने लखनको सबकुछ समजा दीया.. की चंदाके साथ कैसे आगे बढना हे.. ओर चंदाको पहेली बार जबरदस्तीसे अ‍ेक मोर्डन ड्रेस पहेनाया.. तो चंदा बहुत ही सर्मसार होने लगी.. पुनमने चंदाको अ‍ेक जवान लडकीकी तराह हल्कासा मेकअप करके सजा दीया..

ओर सामको जब लखन राधीकाको लेकर घर आया तो चंदा पहेलेसे ही रेडी थी.. लखन भी फ्रेस होते तैयार होगया.. ओर चंदाको लखनके साथ अकेले घुमने भेज दीया.. आज चंदा लखनके साथ उनकी नइ कारमे आगे बैठी थी ओर बहुत ही सरमा रही थी.. लखन पहेले उसे कोलेजके पास ले गया.. ओर कारको वही रोक दी..

लखन : (मुस्कुराते कोलेजकी ओर इसारा करते) भाभी.. देखीये ये हमारा कोलेन हे.. जहा बापु नीर्मला आंटी.. भुमी भाभी.. फीर बडे भैया मंजुमोम.. भावनाभाभीके बाद मे ओर पुनोभी यही पढे हे..

चंदा : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. आपके बडे भाइसे पहेले मेभी इस कोलेजमे पढ चुकी हु.. ओर तब मे हमारी ही होस्टेलमे रहेती थी.. जहा पुनो रहेती थी.. मेने सबकुछ देखा हे यहा..

लखन : (हसते) अच्छा..? तबतो आपने यहा सबकुछ देखा होगा.. तो फीर मे आपको कहा घुमाने लेजाउ..? हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) अरे.. कहीभी घुमाओ.. मेतो बस आपके साथ घुमना चाहती हु.. मेरी पढाइके बाद यहा काफी कुछ बदल चुका हे.. नया होटेल.. मोल.. मोलमे थीअ‍ेटर.. बहुत कुछ.. मेने नया कुछ भी नही देखा..

लखन : (मुस्कुराते) तो क्या हम कीसी थीअ‍ेटरमे चले..? कोइ अच्छीसी फील्म देखेगे..

चंदा : फील्म..? नही.. रातमे बहुत देर हो जायेगी.. कीसी ओर दीन चलेगे.. जैसे थीअ‍ेटर तो बहुत देखे हे पर मोलके नही देखे.. कभी हम मोलमे ही फील्म देखने चलेगे.. अभी तो कोइ अच्छे गार्डनमे लेलो.. फीर घर चले जायेगे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) गार्डन..? हमे डीनर भी करना हे.. पुनोने कहा हे..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) हां गार्डन.. वहा बहुत अच्छा लगता हे.. सीर्फ अ‍ेक बार गइ थी.. वोभी सहेलीओके साथ.. आज वहा लेलो.. देखेतो सही वहा कीतना बदलाव हुआ हे..

फीर लखन ओर चंदा सहेरके मसहुर गार्डनमे चले गये.. वहा ज्यादातर प्रेमी जोडा ही थे.. कुछ लोग फेमीलीके साथ आये थे जो उनके बच्चे खेल रहे थे.. लखन ओर चंदा कार पार्क करके अंदर चले गये.. दोनो साथ साथ चल रहे थे.. ना दुरी बनाके ना ज्यादा नजदीक..

चंदा : (मुस्कुराते) देवरजी.. यहा तो काफी कुछ बदल गया हे.. पहेलेसे भी ज्यादा सुंदर हेये..

लखन : (मुस्कुराते अ‍ेक बेंचकी ओर इसारा करते) हां भाभी.. चलो यहा जगा हे.. वही बैठते हे..

चंदा : (बेंचपे बैठते मुस्कुराते) पता हे देवरजी.. मे कीसी लडके के साथ जींदगीमे पहेली बार गार्डनमे आइ हु.. अ‍ेक बार आइ थी वोभी पढाइके वक्त सहेलीओके साथ..

लखन : (पास बैठते) क्या केह रही हो भाभी..? कीसीके साथ नही आइ..? कोलेजमे कोइ बोयफ्रेन्ड..

चंदा : (मुस्कुराते) नही.. कभी नही.. मे इस चकरमे कभी नही पडी.. तब हमारी हालत भी उतनी अच्छी नही थी.. बादमे पता चलाकी मेरी पढाइ ओर होस्टेलके खर्चा आपके बापु दे रहे थे.. तब सायद होस्टेल आपकी राधीकाकी मम्मी सम्हाल रही थी.. आपके बापु अक्सर उनको मीलने आते थे..

लखन : (मुस्कुराते) आपको पता हे वो कौन थी..?

चंदा : (मुस्कुराते) हां.. तब पता नही था.. बादमे पता चलाकी वो हमारे रामुकाकाकी छोटी बहेन थी.. ओर उनका बापुके साथ रीलेशन था.. मंजुने बताया सब.. दयाकी मौसी हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. बापुके साथ उनका नाजायज रीस्ता था.. उनकी बडी बहेनके साथ भी.. जो हमारी हवेलीमे काम करती थी.. इसीलीये तो राधु मेरी बहेन हे..

चंदा : (मुस्कुराते) पता नही तब आपके बापुके कीतनी ओरतोके साथ रीस्ता था.. अब तो अ‍ैसे रीस्तोसे कोइ फर्कभी नही पडता.. राधुकी मम्मी बहुत कडक थी.. हमे कभी कभार ही बहार नीकलने देती थी.. कोलेज खतम होते ही सादी होगइ.. फीर भी पती इधर नही लेआया.. बादमे मेरी जींदगीमे देवु आया.. वो भी मुजे दो तीन बार यहा लेकर आया.. लेकीन वोभी सीर्फ होटेलमे..

लखन : (हसते) अच्छा दोनो मजे करने आये थे.. हें..हें..हें..

चंदा : (सर्मसार होते जुठे गुस्सेसे अ‍ेक मुका मारते) न..ही.. मतलब.. हां.. सीर्फ दो बार.. हम दोनोका सबसे छुपकर अफैर चल रहा था.. सादीतो बादमे हुइ.. फीर खाना खाकर वापस गांव चले जाते.. ओर वो भी दो पहोर.. धीरेनके ओनेसे पहेले गांव पहोंचना जरुरी था.. लेकीन आज पहेली बार आपके साथ गार्डनमे आइ हु..

लखन : (नजर घुमाते) भाभी.. देखो.. ज्यादातर लवर्स ही यहा आते हे..

चंदा : (मुस्कुराते) हां देख रही हु.. कमसे कम तसलीतो मीलीकी चलो बोयफ्रेन्ड नही.. लेकीन मे अपने देवरके साथ तो आइ हु..
 
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अब हम दोनो यहा आयेगे.. बार बार.. बस आप अपनी लाइफ खुलकर जीयो.. यहा कोइ पाबंधी नही कोइ देखने वाला नही.. कोइ पुछने वाला नही.. कीसीका डर नही.. जब भी यहा आनेका मन करे.. मुजे बता देना..

चंदा : (सामने देखते) थेन्क्स.. इसीलीये तो यहा आइ हु.. वहा गांवमे थोडीसी घुटनसी महेसुस हो रही थी.. तो सोचा आपके साथ रहेने ही आजाउ.. कमसे कम आपसे बाते तो होजायेगी..

लखन : (हाथ थामते धीरेसे) भाभी.. खुलकर बताइअ‍े.. आज अ‍ेक दोस्तकी तराह.. अपना सब बोज नीकाल दीजीये.. मे सुनना चाहता हु.. आपके बारेमे आपकी लाइफके बारेमे..

चंदा : (आंख गीली करते) देवरजी.. थेन्कस.. आज अहेसास हुआ की चलो.. कोइ तो मुजे सुनने वाला हे.. बहुत उलजन भरी जींदगी रही मेरी.. बचपनमे मां बापका साया उठ गया.. ओर भैया दीदीने अपनी बेटीकी तराह पाला.. पढाया.. काबील बनाया.. फीर आपके बापु रीस्ता लेकर आये ओर मेरी सादी होगइ..





लखन : (मुस्कुराते) सादी करके उसी घरमे आइ थीनां जहा आप रहेते थे..?

चंदा : (मुस्कुराते) हां.. घरमे सबकुछ ठीक चल रहा था.. अच्छे लोग थे.. फीर धिरेनका जन्म हुआ.. तो अ‍ेक दीन अचानक मेरे पती चल बसे.. फीर कुछ महीनोमे मेरे सास ससुरनेभी दम तोड दीये.. ओर खेतो.. घर.. फीर धिरेनकी जीम्वेवारी.. काफी प्रोपर्टी छोड गये थे तो घर चलानेमे कोइ दीकत नही आइ..

लखन : (मुस्कुराते) लेकीन आप तो वहाकी सरपंच भी थीनां..?

चंखा : (मुस्कुराते) हां.. यहा पहेले मेरे ससुर.. फीर मेरे पती भी सरपंच रेह चुके थे.. तो गांव वालोने मुजे सरपंच बना दीया.. फीर मंजुकी सादीके बाद देवु मेरी जींदगीमे आये.. ओर कीतने सालो तक हम दोनोका अफैर चला.. फीर तो आप सबकुछ जानते ही हे..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन आप गुमसुम क्यु रहेने लगी..? कोइ टेन्सन..?

चंदा : (गहेरी सास लेते) अब क्या बताउ..? अ‍ेक तो धिरेन ओर पुनो दीदीका इस्यु.. ओर दुसरी ओर दे..वु..

लखन : (आस्चर्यसे) बडे भैया..? क्या कीया उसने आपके साथ..?

चंदा : (जटसे) अरे नही नही.. अ‍ैसा कुछ नही हुआ जो आप सोच रहे हे.. ब..स.. पता नही हम क्यु अ‍ेक दुसरेसे दुर होते जा रहे हे.. उनको मेरे अलावा बाकी सभी बीवीया अच्छी लगती हे.. सायद मेरे साथ भावनात्मक जुडाव कम होगया.. सायद पुनोदी ओर धीरेनके इस्युकी वजहसे मेभी कीसीसे नजरे नही मीला पा रही.. खास करके देवुसे..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) नही भाभी.. मे जानता हु वो भी आपसे बहुत प्यार करते हे..

चंदा : (मुस्कुराते) आइ नो.. मुजे पता हे वो आज भी मुजसे बहुत प्यार करते हे.. लेकीन धिरेन ओर पुनोदीके इस्युके बाद पता नही मे अपने आपको बहुत छोटा महेसुस करने लगी हु.. मनमे अ‍ेक अपराध बोध महेसुस होता हे.. सबकुछ मेरे ओर देवुके अफैरकी वजहसे हुआ हे..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) सायद इसीलीये आप सर्मीन्दगीसे भैयासे दुर रहेने लगी हे..

चंदा : (मुस्कुराते) हंम.. सायद आपने सच कहा.. लेकीन आज आपसे बाते करते बहुत अच्छा महेसुस होता हे.. मन हल्का लग रहा हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. जींदगीमे अ‍ेक सच्चा दोस्त.. या अ‍ेक सहेली जरुर होनी चाहीये.. जो हम उनके साथ अपने दीलकी हर बाते सेर कर सके.. ओर मेरे तो कीतने दोस्त हे.. सभी मुजे अपनी पर्सनल बाते भी खुलकर सेर करते हे..

चंदा : (मुस्कुराते) बीलकुल सही कहा आपने.. मेने मंजुको कभी अपनी भांजी नही माना.. उनको बीना बताये ही मेरी दीलकी बात पता चल गइ.. ओर खुसी खुसी मुजसे अपने पतीको भी बांट लीया.. इतनी अच्छी दोस्त हे मेरी.. लेकीन कुछ बाते अ‍ैसी हे जो मे उनके साथ भी सेर नही कर सकती.. क्युकी हम दोनोका पती अ‍ेक हे.. तो अच्छा नही लगता..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आप अ‍ेक बार मंजुमोमसे कहेकर तो देखती..? उनका दील कीतना बडा हे.. आज अगर मेरी मम्मी वापस धरतीपे आजाती.. ओर मुजे मंजुमोम ओर मम्मी मेसे अ‍ेक को चुनना होता तो मे मंजुमोमको चुनता.. आपको पता ही नही हेकी वो कौन हे..

चंदा : (आंख गीली करते) सायद आप ठीक केह रहे हे.. लेकीन मे दुवीधामे थी.. क्या आपके सभी दोस्त आपसे हर बात सेर करथे हे..? मतलब.. कुछ पर्सनल भी..?

लखन : (मुस्कुराते) जीहां.. क्युकी सबको मुजपे.. ओर मुजे सबपे भरोसा हे.. वो मुजसे अपनी अंगत बात भी सेर करते हे..

चंदा : (मुस्कुराते सामने देखते) मतलब..? जैसेकी..?

लखन : (मुस्कुराते) जैसेकी नीजी बाते भी.. अ‍ेक बात बताता हु.. आप मेरे दोस्त श्रीधरको तो जानती ही हे.. उनकी अ‍ेक नीजी बात बताता हु.. जो बात कीसीको आज तक पता नही थी..

चंदा : (मुस्कुराते) श्रीधर भैया..? जीसने अपनी बहेन जयश्रीसे सादी कीहे वो..? बताइअ‍े..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. क्या आपको पता हे..? वो जयश्रीभाभीके साथ रीलेशनमे भी नही आया था उनसे पहेले कीसके साथ रीलेशनमे था..?

चंदा : (मुस्कुराते) नही.. मतलब.. अ‍ेक ओर अफैर..? कीसके साथ..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. उनकी खुदकी मम्मीके साथ.. जब ब्रीन्दा आंटीको पता चलाकी उनके पतीका उनकी भाभीके साथ पुराना अफैर हे.. तो उसने बदलेकी भावनासे अपने बेटेसे ही अफैर करलीया.. तब श्रीधर भी जवान हो चुका था.. तो वो डीवोर्स भी नही लेपाइ.. ओर पता हे दोनो पहेली बार कहा मीले..?

चंदा : (उत्सुक्तासे मुस्कुराते) नही..

लखन : (मुस्कुराते) वही रुम.. ओर वही बेड.. जहा इस वक्त आप रहेती हे.. तब हम सब गांवमे रहेते थे.. ओर ये घर आली पडा था.. श्रीधर कोलेजका अ‍ेडमीशनल लेने उनकी मम्मीके साथ यहा आया था.. ओर हमारे घरपे रुका हुआ था.. बस.. उन तीन दीनमे दोनो नजदीक आगये.. ओर सबकुछ हो गया.. जो अ‍ेक पती ओर पत्नीके बीच होता हे..
 
चंदा : (जोरोसे हसते हाथ थामते) क्या..? ओर आजतक बीसीको पता नही चला..?

लखन : (मुस्कुराते) नही.. फीर कोलेज खत्म होते ही दोनोने यहा कीसी मंदीरमे सादी करली.. ओर ये बात सीर्फ श्रीधर ब्रीन्दा आंटी.. ओर मेही जानते थे.. हालाकी तब पुनोके पास वो शक्तिया नही थी.. सीर्फ मंजुमोम जानती थी..

चंदा : (मुस्कुराते) कीतना अजीब लगता हेनां..? अब ज्यादातर लोग अपने घरमे ही रीलेशन बनालेते हे.. मानो रीस्तोके कोइ मायने ही नही रहे.. जीसके साथ चाहो रीलेशन रखलो..

फीर धीरे धीरे लखन उनके दीलको बातोसे छुने लगा.. तो चंदाभी धीरे धीरे सबकुछ खुलकर बताती रही.. ओर अपने दीलका बोज हल्का करती रही.. उसे लगाकी अ‍ेक लखन ही हे जो उनकी परवाह करता हे.. उनकी बाते सुनता हे.. ओर इन बातोने दोनोको ओर नजदीक ला दीया..

दोनो दो घंटे तक पार्कमे बैठे रहे.. तबतक लखनने चंदाके हाथको थामे रखा.. ओर चंदाको भी बहुत अच्छा लगा.. उसने अपना हाथ हटानेकी कोइ कोसीस नही की.. कीसीको समयका पता ही नही चला फीर लखन चंदाको अ‍ेक मोलमे लेगया..

वहा उनकी सारीके बजाये अपनी पसंदका दो ड्रेस दीलवाये.. तो चंदाने भी खुसीसे लखनके लीये अ‍ेक टीसर्ट ले लीया.. तभी लखनने उनसे छुपकर चंदाके दो अंतरवस्त्र भी खरीद लीये.. चंदाको बस इतना पता थाकी लखनने भी कुछ खरीदा हे लेकीन क्या खरीदा उनका पता नही था..

फीर लखन चंदाको अ‍ेक बडीयासी होटेलमे ले गया जहा छोटे छोटे प्राइट केबीन थे.. दोनो अ‍ेक केबीनमे चले गये.. वहा चंदा बहुत ही सरमाइ जब वेइटरने ओर्डर लेते वक्त दोनोको नाइस कपल कहा.. तो चंदा सरमसे पानी पानी होगइ.. लेकीन चार घंटेके साथने चंदाको काफी ट्रेससे बहार नीकाला.. अब चंदा लखनसे खुलकर बाते करने लगी थी..

चंदा : (मुस्कुराते) लगता हे आप यहा कइ बार आ चुके हो.. पुनमदीके साथ या फीर अपनी दुसरी बीवीया.. कोइ गर्लफ्रेन्ड..?

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. मेरी कोइ गर्लफ्रेन्ड नही हे.. जीतनी थी उनसे सादीया करली.. हें..हें..हें.. ओर अपनी बीवीओके साथ ही आया हु.. आप पहेली लडकी हे.. ओर अफसोस.. वो भी फ्रेन्ड नही मेरी भाभी हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (कातीलाना मुस्कुराते) क्यु..? भाभी भीतो अ‍ेक फ्रेन्ड ही होती हे.. आज पुरी साम अ‍ेक फ्रेन्डकी तराह हीतो बाते करते थे हम..

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. मे तो बस आपकी टेन्सन खतम करना चाहता था.. सुना हेकी कीसी अपनेको दीलकी बात बतानेसे दीलका बोज हल्का हो जाता हे.. इसीलीये..

चंदा : (भावुक होते) ये..स.. सच कहा आपने.. मे आज बेटर फील कर रही हु.. थेन्क यु वेरी मच.. लगता हे इतने बरसोके बाद कीसीने मेरी बात सुनी.. मे बहुत हल्का फील कर रही हु.. थेन्कस अगेइन..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अपना भी केह रही हो.. ओर थेन्कस भी केह रही हो.. अपनोको थेन्क्स नही कहेते.. ओर अपना कहा ही हे तो देवरजी नही.. सीर्फ लखन..

चंदा : (मुस्कुराते) हां.. लगता हे मेने आपको पहेचाना ही नही था.. आप वाकइ अ‍ेक अच्छे इन्सान हो.. कास.. मेरा धिरेन भी आपके जैसा होता..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) भाभी.. वो मेरे जैसा ही हे.. बस.. थोडा नादान था.. हो सकता हे उनको कोइ गलत फेहमी होगइ हो.. इसीलीये वो नाराज था.. अब सब सही होगया हे.. आप उसे माफ करदो.. अगर वो पुनोदीको नही छोडता तो पुनोदी मुजे कभी नही मीलती..

चंदा : (मुस्कुराते) पुनोदीको इतना प्यार करते हो..?

लखन : (मुस्कुराते) मेरी जानसे भी ज्यादा.. वो मेरा पहेला प्यार थी.. जो धिरेनकी नादानीकी वजहसे मुजे मील गइ.. प्लीज..

चंदा : (आंख गीली करते) लखन.. आपको पता नही हेकी उसने मुजे क्या कहा.. मुजे अ‍ेक रंडी कहा.. क्या मे अ‍ेक बाजारु ओरत हु..?

चंदा : (हाथ थामते) नही भाभी.. गु्स्सेसे मुहसे नीकल गया होगा.. वो अ‍ैसा नही हे..

चंदा : (मुस्कुराते) कीतना अजीब हे.. उन्होने आपके परीवारके साथ इतना बुरा कीया फीर भी आप उसे माफ करनेको केह रहे हो.. मे कीतनी लकी हुकी इस परीवारकी बहु हु.. ठीक हे.. आप कहेते होतो मे इस बारेमे सोचुगी..

लखन : (मुस्कुराते) थेन्क्स भाभी..

चंदा : (हसते) थेन्क्स..? क्या अब हम दोनो अपने नही हे..?

लखन : (हसते) ओह.. सोरी सोरी.. नो थेन्कस.. ओके..? हें..हें..हें..

फीर लखनने ओर्डर दीया ओर दोनो बाते करते हसी मजाकर करते खाना खाने लगे.. खानेके बाद लखनने बील पे कीया.. ओर दोनो अपनी केरी बेट उठाकर कारमे आ गये.. अब चंदा लखनसे काफी घुलमील गइ थी.. ओर देर रात दोनो घरपे आगये..

घरमे अंधेरा था.. सबलोग सो चुके थे.. दोनो अंदर आ गये.. लखन चंदाको उनके रुम तक गया.. ओर सभी केरी बेग बेडपे रखदी.. पुनम वीजयको लेकर अपने रुममे जाग रही थी.. ओर लखनका इन्तजार कर रही थी.. जैसे ही लखन बेग रखकर गुडनाइट करते जाने लगा.. तभी..

चंदा : (धीरेसे) लखन..

लखन : (मुडते) जी भाभी..

तो चंदा दोडकर लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर लखनके सीनेमे सर छुपालीया.. चंदाके दोनो कठोर बुब्स लखनमे सीनेमे चुभने लगे.. तो लखनका हथीयार खडा होकर जटके मारने लगा.. ओर चंदाको यही चुभनका अहेसास फीरसे होने लगा.. लेकीन फीर भी वो लखनसे दुर नही हुइ..
 
चंदा : (मुस्कुराते धीरेसे) लखन.. क्या आप अपनी भाभीके दोस्त बनोगे..?

लखन : (हीचकीचाते पीठपे हाथ रखते) भाभी.. कौन मुर्ख होगा जो आप जैसी खुबसुरत भाभीकी दोस्ती कबुल नही करेगा.. आजसे हम दोस्त हे.. ओर हां.. नो थेन्क्स.. ओर दोस्तोमे तो बीलकुल नही..

चंदा : (अलग होते सामने देखकर मुस्कुराते) लेकीन थेन्कस तो कहेना पडेगा.. इस दोस्तीके लीये नही.. इस खुबसुरत साम साथ बीतानेके लीये.. थेन्कस..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. मे चलता हु..

चंदा : (अ‍ेक केरी बेग दीखाते) ये आपकी केरी बेग..

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. आपहीके लीये हे.. हमारी दोस्तीकी सुरुआतके लीये.. अ‍ेक दोस्तकी तरफसे तोहफा.. रख लीजीये..

चंदा : (मुस्कुराते) मेरे लीये..? लेकीन हमने ड्रेस तो लीये हे.. ये क्या हे..?

लखन : (मुस्कुराते) मेरे जानेके बाद देख लीजीयेगा.. आपके लीयु कुछ खास हे..

लखनके जानेके बाद चंदा मुस्कुराइ ओर उसने दरवाजा बंध करलीया.. उसने बेडपे बैठकर धीरेसे लखनकी केरी बेगसे तीन बोक्ष नीकाले.. ओर खोलकर देखने लगी.. तो अ‍ेक बोक्षमे अ‍ेक पारदर्शी नाइटी नीकली.. जीसे देखकर चंदा सोकट होगइ.. ओर बहुत ही सर्मसार हुइ..

फीर दोनो बोक्ष जल्दीसे खोल दीये तो दोनो बोक्षमे बहुत ही लेटेस्ट ओर सेक्सी काली ब्रा ओर पेन्टी नीकली.. जीसे देखकर चंदा बहुत ही सर्मसार होगइ.. अ‍ैसा नहीथा की लखन इसे पहेली बार लेआया था.. पहेले भी सबके लीये लाता था लेकीन सब नोर्मल थे.. इस बार कुछ अलग था..

चंदा थोडी देरतो तीनो बोक्षको घुरती रही.. उसे समजमे नही आ रहा थाकी इन सबका क्या मतलब हे.. वो इस बातपे लखनपे गुस्सा करे की इसे स्वीकार करले.. अगर इसे स्वीकार करलीया तो लखन इसका क्या मतलब समजेगे.. जो अभी अभी उनको दोस्तीके लीये कहा था..

चंदा : (हाथोमे चहेरा छुपाते मनमे) हे भगवान ये सब क्या हो रहा हे.. मे यहा इसीलीये तो आइ थीकी लखनका प्यार मील सके.. तो क्या लखन भी वोही चहता हे जो मे चाहती हु.. कही उसे मेरे मनकी बात पता तो नही चल गइ..? कही मे पुनोदीके साथ भी वोही तो नही कर रही जो धिरेनने कीया..

इसे हीतो धोखा देनां कहेते हे.. नही नही मे लखनसे दुरी बना लुगी.. ओर इसे वापस कर दुगी.. नही कही उसे बुरा लगा तो..? मेभी वही चाहती हु.. कैसे नीचे चुभ रहा था.. मे भी पीछे नही हटी.. कैसे मेरी पीठको सहेला रहा था.. उनकी बाहोमे कीतना सुकुन मीला.. मे इस बारेमे लखनसे बात करुगी..

यही सब सोचते चंदाकी चुत गीली होगइ.. तो उसने सब कपडे नीकाल दीये.. तभी उनकी नजर लखनने दी हुइ नाइटीपे पडी.. ओर उसने जीजकते नीकाली.. ओर कांपते हाथोसे पहेनली.. फीर आयनेके सामने चली गइ ओर खुदको नीहारने लगी.. तो आज चंदा वाकइ सेक्सी दीख रही थी..

चंदा खुदको देखकर सरमा गइ ओर मुस्कुराने लगी.. उनका हाथ अनायास ही अपनी चुतपे चला गया ओर आंख बंध करते चुतको सहेलाने लगी.. तभी उनकी जहेनमे लखनका चहेरा आ गया ओर वो नाइटीमे हाथ डालकर चुतमे उंगली घुसा देती हे ओर हल्केसे अंदर बहार करने लगी..





चंदा : (धीरेसे बडबडाते) ओ.ह.. ल..ख..न.. ये क्या कीया आपने..? प्ली..ज.. फक मी.. अपनी भाभीको चोदलो.. आपकी दोस्त बहुत प्यासी हे.. मे इसीलीये तो यहा आइ हु.. चोदलो मुजे.. वरना मे पागल होजाउगी.. पता नही कब हमारा मीलन होगा..

चंदा आंख बंध करते मदहोसीमे बड बडाती रही.. तो कुछ ही देरमे उनकी चुतने जवाब देदीया ओर चुतसे पानीका फवारा नीकल गया.. तो चंदा बहुत ही सर्मसार होगइ.. फीर बाथरुममे जाकर चुतको साफ करली ओर लखनके बारेमे सोचते नींदकी आगोसमे चली गइ..

तो दुसरी ओर लखन उपर गया तो सबलोग सो चुके थे ओर सीर्फ पुनम ही जाग रही थी.. लखन चेन्ज करके आया तो पुनम लखनकी बाहोमे समा गइ ओर उनके सीनेको सहेलाने लगी.. फीर लखनने पुरी बात बतादी.. जीसे सुनकर पुनम मुस्कुराने लगी.. फीर धीरेसे कहा..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. आपने अच्छा कीया.. बस अ‍ैसे ही धीरे धीरे आगे बढते रहो..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी पता हे उसने मुजे अपने बारेमे सबकुछ बता दीया.. भैयाके साथ अफेरके बारेमे भी.. वो काफी खुल चुकी थी..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. मुजे सब पता हे.. अब बहुत रात हो चुकी हे.. आज कुछ नही मीलेगा.. ओर करना होतो नीलुके पास चले जाओ.. मुजे नींद आ रही हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी करना तो हे लेकीन सीर्फ दो बार.. ओर ये सब भी सो चुकी हे.. आप सोजाओ मे नीलुके पास चला जाता हु.. फीर काम खतम करके आजाउगा..

कहेते लखनने राधीका ओर रजीयाकी ओर देखातो दोनो गहेरी नींदमे भी.. तो पुनम उसे देखकर हसने लगी.. ओर लखन पुनमके होठोको चुमकर नीलमके कमरेकी ओर चला गया.. नीलम भी नींदमे थी तो लखनके जगाते ही हसने लगी ओर उसने लखनको अपने उपर खीच लीया..





कुछ ही देरमे लखन नीलमको चोद रहा था.. ओर नीलम भी मजे लेकर लखनसे चुदवाती रही.. लखन तबतक चोदता रहा जबतक उसने नीलमकी चुतको दो बार अपने पानीसे सीच नही दीया.. फीर दोनो बाथरुममे चले गये ओर लखन चला गया तो नीलमने गर्भनीरोधक गोली खाइ ओर फीरसे सो गइ..
 
दुसरे दीन जयश्रीकी गोद भराइकी रशम हुइ.. वृन्दा ज्यादासे ज्यादा श्रीधरके पास ही रहेती.. जब भी उनको मौका मीलता श्रीधरका हाथ थाम लेती.. तो श्रीधर भी बहुत कमीना था.. उसे अपनी सास यानीकी अपनी मौसीकी उनके प्रती नजर.. ओर इनके इरादेके बारेमे पता चल चुका था..

तो वो भी मौका पाकर बार बार वृन्दाके गले लगा लेता.. ओर भीच लेता तो वृन्दाको भी नीचे चुभन महेसुस होता.. ओर वो जोरोसे हसते श्रीधरसे दुर हट जाती.. ओर उनके उभारकी ओर नैन नचाते उनकी मस्तीया करने लगती.. अ‍ैसे ही दीन बीता गया..

गोद भराइकी रश्म बहुत ही कम ओर लीमीटेड लोगोके बीच हुइ.. सीर्फ श्रीधरके सभी दोस्तो ओर उनके घरवालो.. फीर साम होते ही सबलोग चले गये.. कल जयश्री अपनी मम्मीके साथ जाने वाली थी.. तो इस रात श्रीधरने बडी ही सावधानीसे जयश्रीको पीछेसे दो बार चोद लीया..





फीर भी उनकी सीसकारीयोकी आवाज वृन्दा तक पहोंच गइ.. जो वृन्दाकी कामाग्नीको भडकानेके लीये काफी थी.. ओर दुसरे दीन श्रीधर देवायतकी कार लेकर वृन्दा ओर जयश्रीको सहेरमे उनके मायके छोडने चला गया.. श्रीधर बडी ही सावधानीसे धीरे धीरे कार चला रहा था..

तो इधर सहेरमे भी सुबह सबलोग चाइ नास्ता करने अ‍ेक साथ बैठे थे तब चंदा लखनसे नजरे चुरा रही थी ओर बहुत ही सरमा रही थी.. चंदा फटाफट नास्ता करके वीजयको लेकर अपने कमरेमे चली गइ.. तो पुनम समज गइकी चंदाको क्या प्रोबलेम हे.. वो लखनकी ओर देखते मुस्कुराने लगी..

वृन्दाने भी श्रीधरका बहुत आव भगत कीया.. उनका पुरा खयाल रखा.. जीसे देखकर जयश्री भी खुस होगइ.. उसे लगाकी उनकी मम्मी अपने दामादको पुरा रीस्पेक्ट दे रही हे.. दो पहोरको खानेके बाद जयश्री आराम करने रुममे चली गइ.. ओर वृन्दाको श्रीधरसे बात करनेका मौका मील गया.. दोनो सोफेपे बैठे थे..

वृन्दा : (सरकते श्रीधरके पास बैठते धीरेसे) श्रीधर.. लगता हे जयश्री तुमसे बहुत खुस हे..

श्रीधर : (मुस्कुराते) हां मौसी.. हम सब बहुत खुस हे.. लाइफ अच्छेसे चल रही हे..

वृन्दा : (सरारती मुस्कानसे धीरेसे) हां देखा मेने रातको.. बहुत आवाज कर रही थी.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) मौसी.. क्या केह रही हे आप..? बेटी हे आपकी..

वृन्दा : (हसते कानमे फुसफुसाते) हां.. आजकल बडे मजे ले रहे हो मेरी बेटीके साथ..? मत भुलो बीवीके साथ तेरी बहेन भी हे.. मुजे पता नही थाकी तुजे अ‍ैसे रीस्ते पसंद होगे..

श्रीधर : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) मौसी.. हम सभी दोस्तोने अपनी बहेनसे सादीया करली हे.. ओर सच कहु तो मुजे अ‍ैसे ही आपसी रीस्ता पसंद हे..

वृन्दा : (मुस्कुराते) आपसी रीस्ता मतलब..? अ‍ैसे तो बहुत सारे रीस्ते होते हे.. जैसेकी बुआ.. मौसी.. मामी.. चाची.. भाभी.. ओर बडी अम्मा भी.. क्या वही सब रीस्ता पसंद हे..?

श्रीधर : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) हां.. यही सब रीस्ते..

वृन्दा : (मुस्कुराते हाथ थामते) क्या सचमे..? तो फीर मेभी तो तुम्हारी बडी अम्मी ओर मौसी हु.. मुजे तो तुमने कभी नही पटाया.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (सरमाते धीरेसे) क्या मौसी..? आपको तो पहेलेसे ही पापाने पटा लीया था.. उनकी भाभी जो थी.. ये भी आपसी रीस्ता हुआनां..?

वृन्दा : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. बहुत तेज दीमाग वाले हो.. लेकीन आपको कोसीस तो करनी चाहीयेनां.. क्या पता मे मान जाती.. वरना कमसे कम हम दोस्त तो होते.. क्या हम भी दोस्त नही हो सकते..? मेने सुनाहेकी आपके दोस्तने आपको कुछ जडी बुटीया भी दी हे..?

श्रीधर : (सरमाते धीरेसे) हां.. मुनाने.. हम सभी दोस्तोको दी हे..

वृन्दा : (जागपे हाथ रखते) हंम.. तभी तो मेरी बेटी चीला रही थी.. मे सोचु आपका हथीयार इतना दमदार क्यु हो गया.. गले मीलते कैसे चुभ रहाथा नीचे.. जैसे कोइ साप बीलमे घुसनेके लीये मचल रहा हो.. तो फीर मे हमारी दोस्ती पकी समजु..?

श्रीधर : (बहुत ही सर्मीन्दगी महेसुस करते धीरेसे) मौसी.. आप ये कैसी बाते कर रही हे..? आप सास हे मेरी.. ओर मौसी के साथ बडी मम्मी भी.. तो फीर आपसे दोस्ती..?

वृन्दा : (जाग सहेलाते कातीलाना नजरोसे मुस्कुराते) तुम अ‍ैसे रीस्तेको कबसे मानने लगे..? अभी तो केह रहेथे तुजे अ‍ैसे रीस्ते पसंद हे.. ओर गांवमे भी रीस्तोके बदलावके लीये तो बडा प्रचार कर रहेथे..? अब क्या हुआ..? मेरे साथ इतने सारे रीस्ते गीनवा दीये तो अ‍ेक रीस्ता ओर सही.. तुजे क्या फर्क पडता हे..?

श्रीधर : (सरमाते धीरेसे वृन्दाके हाथपे हाथ रखते) बस.. आप मेरी सासके साथ बडी मम्मी भी हे.. ओर कुछ नही.. इसीलीये डर लग रहा हे.. अगर जयश्री ओर मेरी मम्मीको पता चला तो..?

वृन्दा : (अपनी जीत देखते मुस्कुराते) अपने घरपे तो मुजे बीन्दास्त गले मीलते चीपक रहे थे.. क्या मेने कोइ अ‍ेतराज कीया..? तो फीर अब क्या हुआ..? भुलजा सब रीस्ते नाते.. जयश्री ओर तेरी मम्मीको कभी पता नही चलेगा.. आइ प्रोमीस..

श्रीधर : (हीचकीचाते धीरेसे) लेकीन.. आप.. मीन्स..

वृन्दा : (मुस्कुराते) हां हां.. बोल.. बीन्दास्त बोल.. मुजे बुरा नही लगेगा..

श्रीधर : (सरमाकर मुस्कुराते) लेकीन आप तो पापाके साथ भी.. मीन्स.. वो..

वृन्दा : (मुस्कुराते) हां.. इसीलीये तो उसने तेरी मम्मीके साथ डीवोर्स लीया था.. तेरे बडे पापा तो अब बुढे हो चुके हे.. ओर तेरे पापा मुजे जीन्दा महेसुस करवाते थे.. लेकीन आजकल पता नही क्यु.. तेरे पापामे भी अब इतना जोस नही रहा.. ओर मुजे इन सब चीजोकी आदत हो चुकी हे.. इसीलीये केह रही हु.. प्लीज.. मान जा..

श्रीधर : (मुस्कुराते धीरेसे) ठीक हे सासुमा.. लेकीन याद रहे.. ये सब सीर्फ हम दोनोके बीच रहेना चाहीये.. वरना मुजे तो कुछ फर्क नही पडेगा लेकीन आपकी जींदगी बीखर जायेगी..

वृन्दा : (कमरमे हाथ डालकर अपनी ओर खीचते धीरेसे) हां पता हे मुजे.. मेने तो उसी दीन तैय करलीया था जब हम घर छोडकर जा रहे थे.. ओर मे तुमसे गले मीली थी.. मेने कहा भी था लेकीन तुम मेरा इसारा नही समजे.. तो फीर अंदर चले..?
 
श्रीधर : (मुस्कुराते बाहोमे भीचते) नही मौसी.. अभी नही.. अंदर जयश्री हे.. हमारा ये पहेली बार होगा तो आपको थोडी मुस्कील होगी.. हमे ये सबके लीये सही मौकेका इन्तजार करना चाहीये..





वृन्दा : (गालको चुमते) क्या इतना बडा दमदार हथीयार हे तेरा..? क्या मे इसे अ‍ेक बार देख सकती हु..? सीर्फ देखुगी..

श्रीधर : (हीचकीचाते आजु बाजु देखते धीरेसे) अभी..? न.. नही.. हम कंट्रोल नही कर पायेगे.. अगर जयश्री आगइ तो..?

वृन्दा : (मुस्कुराते नीचे घुटनोके बल बैठते) नही आयेगी.. अभी अभी सोनेके लीये गइ हे.. ओर मुजे कंट्रोल करने ओर कंट्रोल करवाना दोनो आता हे.. तुम फीकर मत करो..





कहेते वृन्दा बीन्दास्त श्रीधरके दोनो पैरके बीच बीन्दास्त बैठ गइ ओर श्रीधरके पेन्टकी क्लीप खोलने लगी.. श्रीधर भी बहुत उतेजीत हो गया था तो उसने भी हीमत करते धीरेसे अपना हाथ वृन्दाके बुब्सपे रख दीया ओर सहेलाने लगा.. तो वृन्दा उनकी ओर देखते कातीलाना मुस्कुराने लगी..





वृन्दा : (कातील नजरोसे फुसफुसाते) अच्छेसे दबाना.. सब तेरे लीये ही हे..

श्रीधरने अपनी कमर उची करते पेन्ट नीचे करनेमे मददकी.. तो नीकरमे ही बहुत बडा तंबु हो गया था.. जीसे देखते ही वृन्दा अ‍ेक पलके लीये सोकट होगइ ओर हीचकीचाने लगी.. फीर उसने हींमत करके श्रीधरकी चडीको आगेसे खीचलीया तो श्रीधरका हथीयार तनके हवामे जटके मारने लगा..





जीसे देखते ही वृन्दाका मुह खुलाही रेह गया ओर आंख बडी करते कभी श्रीधरकी ओर तो कभी लंडको देखती रही.. उन्होने इतना बडा लंड कभी नही देखा था.. ओर उसने डरते हुअ‍े हींमत करते लंडको छु लीया.. फीर श्रीधरकी ओर देखते लंडको मुठीमे थाम लीया..





वृन्दा : (चोकंते फुसफुसाते) ओह माय गोड.. इतना बडा..? इतना बडा कीसीका हो सकता हे क्या..? देखो कैसे फन फना रहा हे.. जैसे कोइ बडा साप हो..

श्रीधर : (बुब्सको उपरसे ही सहेलाते) देख लीजीये सासुमा.. यही आपकी बेटी ले रही हे.. अ‍ेक दीन आपके बीलमे भी घुसेगा..





वृन्दा : (लंडको धीरेसे सहेलाते) ओह गोड.. मुजे उस दीनका बडे बेसब्रीसे इन्तजार रहेगा.. जब ये मेरे बीलमे घुसेगा.. आज पता चला जयश्री तुम्हारे पीछे इतना क्यु पागल थी.. येतो मेरी फाडके रख देगा..

कहेते वृन्दाने श्रीधरकी इजाजतके बगैर अपना मुह श्रीधरके लंडपे रख दीया ओर श्रीधरकी ओर कामुक नजरोसे लंडपे अपनी जीभ फेरने लगी.. तो श्रीधरने भी वृन्दाके ब्लाउसमे अपना हाथ घुसा दीया ओर उनके बडे मम्मेको दबाकर सहेलाने लगा.. दोनो मदहोस होचुके थे..





तभी श्रीधरको लंडपे गरमाहट महेसुस हुइ.. उसने आंख खोलकर देखा तो वृन्दा उनके लंडको मुहमे पुरा नीगल चुकी थी.. ओर मुहमे लेकर अंदर बहार कर रही थी.. श्रीधर मदहोसीमे आंख बंध करते वृन्दाके बु्ब्सको सहेलाता रहा.. ओर कुछ ही देरकी मसकसतके बाद श्रीधरका लावा फुट पडा..





ओर सीधा वृन्दाके हलकमे चला गया.. वृन्दा कीसी लोलीपोपकी तराह श्रीधरका लंड चुस रही थी.. ओर चुसकर साफ करदीया.. वृन्दा श्रीधरका सारा रस पीगइ.. फीर श्रीधरकी ओर देखते हसने लगी.. फीर खडी होते अपनी सारीको सही करते सारीसे मुह पोछ लीया ओर श्रीधरके पास बैठ गइ..

वृन्दा : (मुस्कुराते) बडा मस्त स्वाद था.. मेरी भी कुछ तम्मनाये हे.. इसी रसको मेरे बीलके अंदर छोडना.. बजा मजा आयेगा..

श्रीधर : (मुस्कुराते धीरेसे) पता नही थाकी आप इतनी कामुक हे.. वरना आपको वो घर छोडनेकी कभी नोबत ही नही आती.. वही दोनो मजे करते.. मे मां बेटी दोनोको सम्हाल लेता..

वृन्दा : (मुस्कुराते होंठ चुमते) वोतो तुम अभी भी सम्हाल सकते हो.. वैसे उस घरको छोडकर मेने सही कीया.. वहा हम दोनोको अकेले मीलनेका बहुत मौका मीलेगा.. जब तुम जयश्रीको मीलने बार बार आओगे.. ओर वैसे भी ससुरालमे दामाद अकेला भी आ सकता हे.. कभी भी..

श्रीधर : (जोरोसे बाहोमे भीचते) आइ लव यु मेरी जान.. तुमने तो मुजे अपना दीवाना बनादीया.. क्या ब्लुजोब दीया हे..





कहेते श्रीधरने वृन्दाको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर वृन्दाके होठोपे होठ रख दीया.. तो वृन्दा भी श्रीधरको साथ देने लगी.. तभी बहारकी ओर कुछ आहट हुइ.. तो दोनो जटसे अलग हो गये ओर श्रीधरने भी फटाफट अपनी चडी सही करते पेन्ट पहेनली.. ओर सही होकर दोनो अलग बैठ गये..

देखा तो कुछ ही देरमे जीतुलाल अंदर आगया.. ओर श्रीधरको देखकर थोडा चोंक गया ओर असहज महेसुस करने लगा.. फीर जल्दही अपने आपको सम्हाल लीया ओर खुस होते श्रीधरके पास आगया तो श्रीधर भी खडा हो गया ओर दोनो अ‍ेक दुसरेको गले लग गये..

जीतुलाल : (खुसीसे) आ गया मेरा बच्चा.. कैसे हो..?

श्रीधर : (सामने देखकर मुस्कुराते) मे ठीक हु पापा.. आप कैसे हो..? बडे पापा कैसे हे..?

जीतुलाल : (अलग होते सोफेपे बैठते) बैठ बेटा.. मे भी ठीक हु ओर तेरे बडे पापा भी ठीक हे..

वृन्दा : (श्रीधरकी ओर मुस्कुराते) जीतु.. हमारा जमाइ हमे छोडने आया था.. जयश्री भी आइ हे.. अंदर आराम कर रही हे..

जीतुलाल : (मुस्कुराते धीरेसे) बेटा.. तुम्हारी मां कैसी हे..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) पापा वो भी मजेमे हे..

फीर कुछ देर बात करते श्रीधर चाइ नास्ता करके वापस गांव चला गया.. ओर जैसे ही घरमे आया.. दरवाजा लोक करते ब्रीन्दाकी ओर देखकर हसने लगा.. तो ब्रीन्दाने उनका खुस चहेरा देखा तो उसे लगाकी अब जयश्रीकी डीलीवरी तक दोनो अकेले हे इसीलीये श्रीधर खुस हे.. ब्रीन्दा दोडकर श्रीधरकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनोके होंठ मील गये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २७८

फीर कुछ देर बात करते श्रीधर चाइ नास्ता करके वापस गांव चला गया.. ओर जैसे ही घरमे आया.. दरवाजा लोक करते ब्रीन्दाकी ओर देखकर हसने लगा.. तो ब्रीन्दाने उनका खुस चहेरा देखा तो उसे लगाकी अब जयश्रीकी डीलीवरी तक दोनो अकेले हे इसीलीये श्रीधर खुस हे.. ब्रीन्दा दोडकर श्रीधरकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनोके होंठ मील गये.... अब आगे

दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे कसते गये.. श्रीधर भी ब्रीन्दाके बुब्सको मसलते उनके होठोको चुमने लगा.. ओर दोनो मदहोसीमे उतेजीत होगये.. नतीजा ये हुआकी श्रीधरने ब्रीन्दाको अपनी गोदमे उठालीया ओर वही सोफेपे पटक दीया.. कुछ ही देरमे ब्रीन्दा जोरोसे सीसकारीया करते श्रीधरसे अपनी कमर उछाल उछालके चुदवा रही थी..





फीर तो श्रीधर अक्सर जयश्रीको मीलनेके बहाने सहेर वृन्दाको मीलने जाने लगा.. लेकीन हर बार जयश्री श्रीधरके साथ ही रहेती ओर दोनो बाते करते रहेते.. श्रीधरको वृन्दाको अकेलेमे मीलनेका बहुत ही कम मौका मीलता.. ओर मीलता तब दोनो कीस ओर छेडखानीसे आगे नही बढ सके..

तो दुसरी ओर सहेरमे भी चंदा लखनसे दुर भागती रही.. ओर लखनसे नजरे चुराती रही.. उनको समजमे नही आ रहा थाकी लखनकी दी हुइ गीफ्ट वापस करे या रखले.. वो जब भी लखनकी ओर देखती उनकी चुत फडफडाने लगती.. दीन मे भी अ‍ेक बार अपने आपको उंगलीसे सांत करती..

वो जानती थी की गीफट वापस करना मतलब लखनकी नाराजगी.. ओर गीफ्ट स्वीकार करना मतलब लखनके साथ रीलेशनमे आगे बढनेकी मौन सहेमती.. वो येभी जानती थी की कल साम लखनने उसे जीन्दा महेसुस करवाया था.. अ‍ैसी साम जो वो कभी नही भुलेगी.. ओर उसने खुद लखनसे दोस्तीकी पहेल कीथी..

तो लखन भी जानता थाकी ये सब होने वाला हे.. वो सोच समजके ही आगे बढा था.. अब लखन इन सब बातोमे माहीर हो चुका था.. उसने भी कुछ दीनोके लीये चंदाको इग्नोर करना तैय करलीया था.. तो चंदा ओर पागल होने लगी.. तो लखन भी अपनी रुटीन लाइफमे बीजी होगया..

नीलम ओर राधीकाको छोडने जाना उसे वापस लाना.. सुबह दो घंटे ओफीसमे बीताना.. फीर देर साम अपनी कीसीभी बीवीको लेकर सृतीके पास चला जाता ओर देर रात तक सृतीके साथ बाते करते उनका मन बहेलाता.. वो नीर्मला ओर भुमीके साथ भी काफी घुलमील गया था..

दुसरी ओर गांवमे भी जबसे देवायतने फीरोजसे सलमाकी सादीकी बातकी तबसे फीरोज भी सलमाके सपने देखने लगा था.. रात होते ही वो जरीनासे सब बाते जाननेके लीये पहेले उसे कीसी भी तराह संतुस्ट करता.. फीर बात जानने केलीये उत्साहीत था की उसने सलमासे बात करली हे.. या नही..

रातको खाने वक्त भी बीना वजह बार बार सलमाकी ओर देखते मुस्कुराता रहा.. जीसे देखकर साहील ओर सलमा भी अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते हसने लगते.. ओर उस रात फीरोजने फीरसे सलमा समजकर जरीनाकी जबरदस्त चुदाइ करली.. बहुत जोसमे..





जरीना : (खुस होते) क्या बात हे फीरोज..? लगातार दुसरी रात भी..? आज कीतने सालोके बाद जडाया हे मुजे..

फीरोज : (खुस होते) बेगम साहीबा.. अब आपको अ‍ैसाही प्यार मीलता रहेगा..

जरीना : (मुस्कुराते) जुठ मत बोलो.. मुजे पता हे ये सलमा भाभीके बारमे सोचते कीया हे..

फीरोज : (थोडा जेंपते) अरे नही यार.. तु भी बहुत खुबसुरत हे.. मेतो हमेसा अ‍ैसे ही तुजे प्यार करता हु..

जरीना : (सामने देखते) तु भी खुबसुरत हे.. तु भी..? मतलब.. सलमा भाभी भी आपको खुब सुरत लगती हे..

फीरोन : (थोडा नाराज होते) यार.. तु भी क्या बातको घुमा रही हे.. अच्छा ये बता क्या भाभीसे कोइ बात हुइ..?

जरीना : (सामने देखते) देखा.. आगइनां जुबापे बात.. हां हुइ हे..

फीरोज : (मुस्कुराते जटसे) तो फीर बतानां उसने क्या कहा.. क्या वो नीकाहके लीये राजी हे..?

जरीना : (सामने देखते) पहेले तो उसने साफ मना करदीया था.. कहेती थी जीसका बच्चा हे उनसे ही सादी करुगी..

फीरोज : (थोडा परेसानीमे) अरे अ‍ैसा थोडीना जरुरी हे..? दोनोकी उमरतो देख.. हमारा साहील अभी इस जीम्वेवारी उठानेके लीये बहुत छोटा हे..
 
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