Incest Porn Kahani - EK MAA - Page 4 - SexBaba
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Incest Porn Kahani - EK MAA

अपडेट- 26




तुषार- जब तुम अंदर जा रही थी तो दूसरे दूर से दो बहुत hi खूबसूरत लड़किया निकली, एक लड़की ने स्कर्ट और शर्ट फेनी हुई थी बहुत hi फिटिंग की बहुत टाइट कपडे थे पूरा फिगर दिख रहा था, और उसके पीछे दूसरी लड़की ने एक बहुत hi शार्ट स्कर्ट और बहुत टाइट टॉप पहना हुआ था जिसमे उसके बूब्स और अस्स अलग hi दिख रहे थे, मैं उन्हें देख रहा था, जब मैंने उन पैर धयान दिया तो मेरे फैट गई,

दीपा- तू यहाँ खड़ा होकर दूसरी लड़कियों की सुंदरता और सेक्सी कपडे देख रहा था, हम से मन भर गया क्या हम लोग काम पद रहे ह तुझे,

तुसाहर- क्या बोल रही हो पूरी बात तो सुन लो सुन्ना क्या देख लो,

तुषार ने फ़ोन निकला और दीपा को कुछ फोटो दिखने लगा, फोटो को गौर से देखने पैर दीपा की आँख फटी रह गई, ये ये तो


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तुषार- है यही तो, मेरी भी ऐसी hi हालत हुई थी, ये सीमा दी hi ह,

दीपा- लेकिन सीमा इस रूप में घर से तो कुछ और hi फेन क्र आती ह

तुषार- इसी लिए वो हम सबको ऑफिस से दूर रखती ह, और तुम्हे क्या जानकारी मिली

दीपा- सुरेश चोपड़ा पिछले 1 महीने में 2 बार यहाँ आ चुक्का ह और सीमा उससे मिली भी ह, एक संडे को को वो यही रुका था और सीमा उस संडे को ऑफिस में आई थी,

तुषार- ये तो बहुत गड़बड़ वाली बात ह

दीपा- है यार अब क्या करे हमने तो उन्हें जानकरी लेने भेजा था वो पूरी hi बदल गई

तुषार- लेकिन कोई इतनी जल्दी कैसे बदल सकता ह

दीपा- आज शाम को बात करेंगे

तुषार- तुम टेंशन न लो मैं कुछ करता हु आज रात उनके hi साथ बितानी पड़ेगी बहुत दिन हो गए

दीपा- है जी दिन तो हो गए हैं

तुषार- आप भी प्यासी हो

दीपा- अब तू अपना पानी कही और डालेगा तो हम प्यासी hi रहेंगी

तुषार- कही और मतलब

दीपा- ज्यादा भोला मत बन मैं बच्ची नहीं हु सब समझ आता ह मुझे, लेकिन थोड़ी कंफ्यूज हु

तुषार- ऐसा क्या हो गया जो आप कंफ्यूज हो गई

दीपा- तेरा और मेरा रिश्ता असल में ह क्या

तुषार- आप भी सीमा दी की तरह बहक गई हो क्या, हम भाई बहन ह

दीपा- है कुछ टाइम पहले तक तो भाई बहन hi थे, लेकिन जिस दिन तूने सीमा की चुदाई की तबसे तू एक तरह से मेरा जीजा भी बन गया ह, और फिर तूने मुझे छोड़ा तो मेरा पति बन गया, और अब तूने हमारी माँ भी छोड़ दी ह तो तू अब मेरा बाप भी बन गया, अब तुझे भाई बोलू जीजा बोलू पति बोलू या बाप बोलू

दीपा की बात सुनकर तुषार की सच में गांड फैट गई,

तुषार- ये ये ये क्या बोल रही हो पागल हो गई हो क्या माँ कैसे मतलब आप

दीपा- ोोू फत्तू दर मत मैंने hi तुझसे कहा था माँ की प्यास बुझाने को और मुझसे hi छुपा रहा ह, साला फत्तू हमारे घर में चुप क्र कोई काम नहीं हो सकता

तुषार- श्री वो मैंने सोचा कही माँ गुस्सा करेगी किसी को पता चला तो इसलिए नहीं बताया

दीपा- ज्यादा मत सोचा क्र और पूरी बात बता मुझे

फिर तुषार ने दीपा को अंजलि और खुद की चुदाई की कहानी सुनाई

दीपा- ू bête माँ से शादी क्र ली, अब तो तू पक्का हमारा बाप बन गया ह और मैं तेरी बेटी

तुषार- प्लस यार मजे मत लो मेरे

दीपा- मजे नहीं ले रही मुझे ख़ुशी ह, तूने माँ को वो ख़ुशी दी, लेकिन तुझे के काम और करना ह मुझसे भी शादी करनी ह

तुषार- ये कैसे हो सकता ह माँ तो यही रहेगी किसी को पता नहीं चलेगा लेकिन आपकी तो शादी होगी आपको तो जाना पड़ेगा फिर आप कैसे शादी क्र सकती हो मुझसे,

दीपा- मुझे नहीं पता तू क्या करेगा क्या नहीं मैं नहीं करने वाली किसी से शादी समझा, और सीमा से अपनी और माँ की कहानी छुपा क्र रखना

तुषार- वो तो छुपा लूंगा लेकिन

दीपा- लेकिन वेकिन छोड़ और चल गर चलते ह, आज घर में कोई नहीं होगा जल्दी जाकर चुदाई करते हैं

तुषार- आप कब से ये गंदे वर्ड्स बोलने लगी

दीपा- जब से तेरे लुंड ने मेरी छूट फड़ी ह, अब मजा आता ह तेरे सामने ऐसे बोलने में

दोनों जल्दी से घर पहुंचे और एक तगड़ी वाली चुदाई की,

दीपा- यार तू इतना कैसे छोड़ लेता ह इतना दम कहा से आता ह तेरे में

तुसाहर- पता नहीं

दीपा- तुझे थकन नहीं होती क्या

तुषार- होती ह पैर जल्दी hi ठीक हो जाता हु

फिर कुछ देर बाद रूचि भी आई गई, दीपा और तुषार ने रूचि को साडी बात बताई,

रूचि- मेरा दर सही था

दीपा- अब क्या किया जायेगा

रूचि- दीपा जितना हम सोच रहे हैं प्रॉब्लम उससे कही बड़ी हो सकती ह

तुषार- मतलब?

रूचि- सीमा दी ने झूट बोलै ये तो प्रॉब्लम ह hi लेकिन वो कपडे कहा से खरीद रही हैं, उनकी अभी एक hi साल्लेर्य आई ह उसमे से उन्होंने घर में दे दिए हमे भी शॉपिंग करवा दी, इतने पैसे तो मिले नहीं थे, और जो ड्रेस ये फेन रही ह उसकी कमर 2000 से काम नहीं होगी और ऐसी एक hi ड्रेस तो खरीदी नहीं होगी, और अगर खुद से नहीं खरीदी तो दी किसने,

दीपा- हो सकता ह कंपनी ने दी हो

रूचि- कंपनी में कोई और भी ऐसी ड्रेस में था

दीपा- शामे ऐसी तो नहीं लेकिन जीन्स में स्कर्ट में लड़किया थी

रूचि- अगर कंपनी देगी तो सबको एक जैसी ड्रेस देगी न

दीपा- कही उनका कोई बर्फ तो नहीं बन गया, दीपा ने तुषार की तरफ देखते हुए बोलै

रूचि- हो भी सकता ह वो उप्पेर वाले दिमाग से काम hi सोचती हैं

तुषार- ये उप्पेर वाला दिमाग मतलब दिमाग एक ह जगह होता ह

रूचि- नहीं बच्चो दो जगह होता ह एक उप्पेर एक निचे, जैसे तेरा घुटने में ह

तुषार- अच्छा बताऊ कहा ह मेरा दिमाग

रूचि- मुझे पता ह कहा ह तेरा दिमाग, पैर अभी तेरे दिमाग का नहीं सीमा दी के दिमाग का मुद्दा ह

दीपा- आज हम उससे बात करेंगे

तुषार- मैं भी साथ रहूँगा

रूचि- नहीं तेरे सामने वो बर्फ का सच नहीं बताएंगी

फिर अंजलि भी आ गई शाम को सभी एक साथ बैठे थे, आज अंजलि ने पिले वाले चावल बनाये थे जिन्हे कही कही तहरी कही वेग बिरयानी भी बोलते ह या पुलाओ बोलते ह, पूरा परिवार एक साथ निचे चादर बिछा क्र बैठा था काफी टाइम बाद सब एक साथ थे,

तुषार- माँ मुझे और चाहिए

रूचि- है माँ इस भुक्कड़ का पेट भरो ये कुछ ज्यादा hi महेनत करता ह

दीपा- क्यों नजर ला रही ह

रूचि- इसे नजर नहीं लग सकती

रूचि- पापा क्या ये बचपन से hi इतना बड़ा भुक्कड़ था, या अभी ऐसा ह या अब कुछ ज्यादा काम करने लगा ह जो इतना खता ह, बचपन में तो ये सबके हिस्से का दूध पि जाता होगा,

राजेश- अरे नहीं नहीं जब ये पैदा हुआ था तो बहुत कमजोर था, डॉ. ने तो हाथ खड़े क्र दिए थे बोलै था इसे बचाना मुश्किल ह, तुम्हारी माँ उस टाइम पूरी तरह ठीक नहीं थी, तो इस बेचारे को पूरा पोषण नहीं मिल पाया, 1 साल तक तो इसे दूध भी बड़ी मुश्किल से पिलाया जाता था, तुम्हारी माँ का दूध तो इसने पिया hi नहीं ड्राप से दूध पिलाया जाता था इसे, फिर तुम्हारी माँ इसे लेकर बहुत जगह गई, हरिद्वार गई वेद के पास, कई शेरो में बड़े बड़े डॉ. के पास गई, फिर एक डॉ. ने इलाज किया, 12 साल तक की आगे में इसे इंजेक्शन लगते रहे तब जाकर ये कुछ ठीक हुआ था,

राजेश की बात सुनकर क्र सभी के अंदर एक दर्द उभर आया, सभी की आंखे नाम हो गई थी, सीमा भी दुखी थी,

अंजलि- आप भी क्या बात लेकर बैठ गए, अब ठीक ह वो

रूचि- श्री टुशु आज के बाद नहीं तोकूँगी, तू मेरे हिस्से का भी खा लेना, जितना दिल करे उतना खाना

दीपा- पहले तू hi खायेगा बाकि सब बाद में

तुषार- अअअअअ मेरी प्यारी भेने

अंजलि- किसी को किसी के हिस्से का खाने की जरुरत नहीं ह, महेनत करो ज्यादा कमाओ जिसे कोई भूका न रहे समझे, हिस्सा लूटना hi प्यार नहीं होता, परिवार के लिए महेनत करना उनका ख्याल रखना उनके लिए कामना भी प्यार hi होता ह, इसलिए एक दूसरे के लिए महेनत करो समझे

रूचि- समझ गए मदर इंडिया, हम अपने परिवार के लिए पूरी महेनत करेंगे, कोई हमे अलग नहीं क्र सकता न hi ये दुनिया न hi किसी का प्यार न hi पैसा न दिखावा, सब हमारे परिवार के प्यार के सामने काम hi रहेगा,

ये बात रूचि ने सीमा को देखते हुए बोली, दीपा भी उसका मतलब समझ गई थी, बिना सोचे उठाया हुआ टॉपिक सही जगह काम आ गया था,

रात को दीपा और रूचि सीमा के रूम में बैठे थे, सीमा भी खुश होकर बात क्र रही थी,

रूचि- दी हमारा परिवार कितना लकी ह न हम सब एक दूसरे से कितना प्यार करते हैं

दीपा- है रूचि कोई चीज हमे अलग नहीं क्र सकती और अबसे बड़ी बात ह हम सब एक दूसरे से झूट नहीं बोलते, हमारी माँ ने हमारे बिच कभी कोई बात छुपानी नहीं सिखाई,

रूचि और दीपा पूरा इमोटीनल सीन बना रही थी जिसका असर सीमा पैर हो रहा था,

सीमा- हमारा परिवार कभी अलग नहीं होगा

दीपा- है सीमा बस कोई झूट हमारे बिच न आ जाये

सीमा- वो वो दीपा मैं एक बात बताना चाहती हु

रूचि- क्या हुआ दी हम बहेनो में क्या फोर्मलटीएस बोलो

सीमा- वो मैंने सबसे एक झूट बोलै

दीपा- कैसा झूट

सीमा- वो मैं सुरेश चोपड़ा से मिली थी

दीपा और रूचि ने सरप्राइज होने का नाटक किया, क्या ?

सीमा- है लेकिन हम जैसा उनके बारे में सोच रहे थे वो वैसे नहीं ह बहुत अच्छे इंसाने ह वो, अपने स्टाफ का बहुत ख्याल रखते हैं

दीपा- अच्छा ऐसा क्या किया उन्होंने

सीमा- माँ को मत बताना

दीपा- नहीं बताएँगे

सीमा- उन्होंने मुझे फ़ोन दिलाया और बहुत साडी ड्रेस दिलवाई ऑफिस में पहनने के लिए, ये सूट तो मैं वह नहीं फेन सकती न, और 6 महीने बाद साल्लेर्य भी बढ़जाएगी मेरी, उसकी वजह से ऑफिस में धक् ह मेरी, अलका के साथ भी मेरी काफी बनती ह, ये अच्छे लोग हैं माँ के साथ किसी और ने कुछ किया होगा माँ को उनके खिलाफ भड़काया होगा, और वैसे भी आज तक माँ ने तो कभी उन्हें गलत कहा hi नहीं न ये कहा की उनसे माँ का कोई रिश्ता था,

दीपा- लेकिन

रूचि ने दीपा को रोक दिया, सही बोल रही हो दी अब इस मटर को यही बंद करते हैं, आप ज्यादा कुछ जानने की कोशिश मत करना और है अपने बारे में या माँ के बारे में खास तोर पैर किसी से ज्यादा मत बताना

सीमा- मैं क्यों बताउंगी किसी को

फिर दोनों बहार आ गई

दीपा- तूने मुझे बोलने क्यों नहीं दिया

रूचि- क्योकि इस वक्त उनके दिमाग में पैसे की चकाचोंध हो राखी ह, उन्हें कुछ समझ नहीं आएगा, उन्हें थोड़ा आयना दिखाना पड़ेगा सच हमे hi पता करना पड़ेगा, अगर वो और कुछ पता करने गई तो कही सुरेश चोपड़ा से hi माँ का नाम लेकर जानकारी न पूछनी शुरू क्र दे,

गलती हमारी hi ह हमे उन्हें भेजना hi नहीं चाहिए था, उनका दिमाग सच में उनकी छूट में घुसा पड़ा ह,

दीपा- हे हे मेरी शराफत की रानी क्या बोल रही ह

रूचि- यार दिमाग की माँ बहन हो राखी ह,

दीपा- तू फ़िक्र मत क्र हम कुछ क्र लेंगे तू जाकर आराम क्र,

अगले दिन सभी चल दिए अपनी मंजिल पैर, तुषार शाम को गयम से वापस निकल रहा था, कुछ दूर चलते hi एक बड़ी सी कार उसके पास आकर रुकी, तुषार एक दम चौक गया, और जब उसके अंदर से एक बाला की खूबसूरत औरत उत्तरी तो तुषार और चौक गया, उसे उम्मीद नहीं थी वो औरत वह उसे मिलेगी,


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तुषार- आप यहाँ

औरत- इधर से गुजर रही थी तो तुम दिख गई सोचा पूछ लू मेरा फ़ोन नहीं उठाते हो न hi संस का जवाब देते हो, गलती मेरे देवर की थी मेरी तोडना मुझ पैर गुस्सा क्यों दिखा रहे हो

जी है ये औरत अनीता ठाकुर थी, और वो तुषार से ऐसे बात कर रही थी जैसे दोनों पहले से बड़े क्लोज फ्रेंड या जानकार रहे हो,

तुषार- ऐसी तो कोई बात नहीं ह

अनीता- तो फिर कार में बैठो कुछ बात करनी ह यहाँ लोग देखो कैसे देख रहे हैं

तुषार- लोग तो देखेंगे hi, यहाँ औरतो को कार चलते बहुत काम देखा जाता ह,

अनीता- तो बैठो

तुषार कार में बैठ गया, अनीता ने कार आगे बढ़ा दी,

तुषार- आप यहाँ क्या क्र रही हैं

अनीता- हॉस्पिटल आई थी जहा तुमने उस अजय को आराम करने के लिए लिटा दिया ह, ड्राइवर थान hi तो खुद hi आ गई

तुषार- उसका नाम मत लो मेरे सामने

अनीता- नहीं लेती श्री लेकिन मेरी मज़बूरी ह रिश्ता निभाना पड़ता ह वर्ण मैं तो

तुषार ने अनीता की तरफ देखा,

अनीता- ऐसे क्या देख रहे हो,

तुषार- आप उनसे नाराज लग रही हो

अनीता- नाराज नहीं हु, ऐसे लोगो से क्या नाराज होना जो इंसान hi न हो, मैं तो अपनी किस्मत को कोसती हु की इस परिवार में मेरी शादी हुई

तुषार- अब किस्मत से कोण लड़ सकता ह

अनीता- तुम लड़ते हो तुमने जो सबक उस अजय को सिखाया ह मुझे बड़ी ख़ुशी मिली,

तुषार- हहहहह ये तो अच्छा hi हो गया उसने आपके साथ भी कुछ किया क्या

अनीता की आँखों में आंसू आ गए

तुषार श्री मैंने कुछ गलत बोल दिया क्या, तुषार ने अपने हाथ से अनीता के आंसू पॉच दिए, तुषार के हाथ अनीता के गाल पैर लगते hi वो सिहर उठी, और एक दम कार के ब्रेक लगा दिए, तभी पीछे से दूसरी कार वाला डगमगा गया, और कार को सम्हालते हुए साइड में आया, दीखता नहीं क्या भेनचोद मरवाएगा क्या,

जैसे hi उसकी नजर अनीता पैर गई, ओह्ह्ह मैडम थोड़ा धयान से अभी आपकी थूक जाती, और वो आगे निकल गया

उसके जाते hi अनीता की हसी छूट गई,

तुषार- आपको हसी आ रही ह अभी वो पीछे से थोक देता

अनीता- तुमने उसकी हालत देखि पहले तो गली दे रहा था जब देखा सामने औरत ह तो कितने तमीज से बोलकर गया ह

तुषार- जब सामने आप जैसी खूबसूरत औरत हो तो अच्छा अच्छा को तमीज आ जाती ह

अब अनीता शर्मा सी गई, बस बस रहने दो,

तुषार- मैं झूट नहीं बोलता चाहे उस आदमी से पूछ लेते हैं

अनीता- अच्छा जी

तुषार- हम जा कहा रहे हैं

अनीता- पता नहीं

तुसाहर- हे? ऐसे hi चले जार hi हो

अनीता- वैसे तो घर जार hi थी लेकिन तुम दिख गए तो सोचा तुमसे बात क्र लू, तुमसे बात करके अच्छा लगता ह,

तुषार- लेकिन हमने तो आज तक कभी ठीक से बात की hi नहीं

अनीता- अब क्र लेंगे, अच्छा कुछ खाओगे क्या वो देखो वह हल्दीराम का रेस्टोरेंट ह,

तुषार- नहीं मुझे भूक नहीं ह

अनीता- लेकिन मुझे तो बहुत भूक लगी ह

तुषार- आपको लगी ह तो खा लीजिये

फिर अनीता ने कार उधर मोड़ दी, अंदर जाकर दोनों एक कार्नर की टेबल पैर बैठ गए, अनीता ने अपने लिए राजकचौरी आर्डर क्र दी, तुम क्या लोगे

तुषार- मैं कुछ नहीं कहूंगा

अनीता- कुछ तो लो न प्लस

तुषार- अच्छा ठीक ह जो आपको पसंद ह माँगा लो

अनीता ने उसक लिए पनीर टिक्का माँगा दिया,

अनीता- कल अजय को छुट्टी मिल जाएगी और परषो अजय और यश सब वापस चले जायँगे

तुषार- तो मैं क्या कृ

अनीता- मैं नहीं जा रही उनके साथ बड़ी मुश्किल से माँ जी से रिक्वेस्ट करके रुकी हु

तुषार मन में ये मुझे क्यों बता रही ह ये सब, मुझे क्या करना ह

अनीता- अब यहाँ मैं अकेली हु बोर हो जाउंगी क्यात ुम मेरी हेल्प करोगे

तुषार- मैं आपकी क्या हेल्प क्र सकता हु

अनीता- मैं यहाँ कुछ नहीं जानती क्या तुम मुझे यहाँ घूमने में हेल्प करोगे

तुषार- बड़ी बदकिस्मत हो आप, मैंने खुद आज तक यहाँ कुछ नहीं देखा

अनीता- तो दोनों देख लेंगे क्या तुम मेरे साथ टाइम नहीं बिता सकते

तुषार- ऐसी बात नहीं ह, लोग क्या कहेंगे आप इतने बड़े घर की लेडी और मैं एक गरीब लड़का

अनीता- ये अमीरी गरीबी मेरे लिए मायने नहीं रखती

तभी उनका आर्डर आ गया, आज पहेली बार तुषार ने पनीर टिक्का और राजकचौरी देखि थी, घर में कभी कभी पनीर की सब्जी खाई थी लेकिन ऐसे रेस्ट्रोरेंट में बैठ क्र ऐसे आइटम्स नहीं देखे थे, चारो तरफ पैसे वाले लोग सूंदर लड़किया ितं अभीतरीन खाना, तुषार की हवा टाइट हो रही थी,

अनीता ने राजकचौरी कहानी शुरू क्र दी तुषार थोड़ा घबरा सा रहा था,

अनीता- खाओ न

तुषार ने हिम्मत सी करके पनीर का टुकड़ा उठाया और खाने लगा, उसे बहुत टेस्टी लगा,

अनीता- मैं भी टेस्ट क्र लू कैसा ह, अनीता ने भी के टुकड़ा खा लिया टेस्टी ह ये लो राजकचौरी खा क्र देखो

तुषार- नहीं नहीं ठीक ह

दोनों ने अपना अपना फिनिश किया, तुषार उठने लगा,

अनीता- कहा जार हे हो

तुषार- चलना नहीं ह क्या

अनीता- कही जल्दी जाना ह क्या

तुषार- नहीं जल्दी तो नहीं पैर यहाँ कैसे बैठे रह सकते ह

अनीता- ये कोई किराया तोडना लेंगे बैठो

तुषार बैठ गया लेकिन वो थोड़ा असमंजस में था ये इतना क्यों घुल मिल रही ह मुझसे, वैसे तो तुसाहर खुद चाहता था की वो यश और जय के परिवार की औरतो को चोदे लेकिन अनीता खुद सामने से उसके पास आ रही थी, तुषार न चाहते हुए भी घबरा रहा था, घबराये भी क्यों न उसे अभी दुनिया को कैसे कण्ट्रोल करते ह औरतो और लड़कियों को कैसे अपने सामने झुकाते हैं, इन हालातो में कैसे मजबूत बनते हैं, उसे तो ये hi समझ नहीं आ रहा था अनीता चाहती क्या ह, और सच में नहीं पता था किसी को अनीता चाहती क्या ह,

तुषार- आप मेरे साथ क्यों ह मुझे समझ नहीं आ रहा

अनीता- अब क्या बताऊ मैं यहाँ अकेली हु और किसी को जानती भी नहीं हु किसी पैर विश्वास नहीं क्र सकती लेकिन तुम मुझे अच्छे लगे विश्वास करने लायक लगे तो सोचा तुमसे hi बात क्र लिया करू, मेरा टाइम भी काट जायेगा और एक दोस्त भी मिल जायेगा, क्या मैं तुम्हारी दोस्त बन सकती हु

तुषार- लेकिन मैं तो आपसे छोटा हु

अनीता- ये छोटा बड़ा इसी देश में होता ह विदेश में आगे कोई मायने नहीं रखती दोस्ती माये रखती ह, और मुझे तो कोई ाइटर्ज नहीं तुमसे दोस्ती रखने में

तुषार- ऐतराज तो मुझे भी कुछ नहीं ह , लेकिन हमारे बिच उम्र के अलावा और भी बहुत बड़ा अंतर ह

अनीता- दोस्ती में कोई अंतर नहीं होता समझे, और आजसे तुम मेरे दोस्त हो

तुषार- ठीक ह मम

अनीता- मेरा नाम अनीता ह मम नहीं

तुषार- मैं आपक अनाम कैसे ले सकता हु

अनीता- विदेह में सब एक दूसरे का नाम लेते हैं जैसे मर. तुषार या मरस. अनीता ऐसे hi बोलते ह तुम बस अनीता या दोस्त बोल सकते हो

तुसाहर- दोस्त ठीक ह नाम नहीं ले पाउँगा

अनीता- जैसा तुम ठीक समझो

तुषार- अब चले घर भी जाना ह माँ आ चुकी होंगी

अनीता- ठीक ह चलो पैर मिलते रहना

फिर दोनों निकल आये अनीता ने तुषार को वही कसबे में उतर दिया, तुषार घर के सामने से hi निकला था लेकिन किसी को घर का पता न चले इसलिए वापस कसबे में आ गया, उसे घर लौटने में काफी देर हो गाइट hi,

अंजलि- कहा रह गया था

तुषार- वो माँ थोड़ा काम पद गया था

तभी रूचि आ गई अरे कहा रह गया था कब से वेट क्र रहे थे तेरा इतना देर तो कभी नहीं हुई

तुषार- गयम में टाइम लग गया

अंजलि ने तुषार की आँखों में पढ़ लिया की झूट बोल रहा ह, फिर सबने चाय पि

चाय पिने के बाद अंजलि घर के काम में लग गई, तीनो बहन भाई रूचि के कमरे में बैठे थे,

रूचि- हम लोग किस रस्ते चल रहे हैं मुझे समझ नहीं आ रहा

दीपा- क्या हुआ ऐसा क्यों बोल रही ह

रूचि- हम लोग बदला लेना चाहते ह सुरेश चोपड़ा की जानकरी निकल रहे हैं लेकिन उसके बाद क्या,

दीपा- उसके बाद उनसे बदला लेंगे

रूचि- लेकिन कैसे हमारी हालत जानती ह न, हम अपना घर का खर्चा पूरा करने के लिए पूरा दिन ऐसी टेसी करवाते ह, खुद को खाने को पैसे ह नहीं किसी से बदला कैसे लेंगे

वो कहावत सुनी ह खुद को खाने को ह नहीं डेन और अम्मा चली भुनाने, ऐसा hi कुछ ह न

तुषार- है ह तो सही

दीपा और तुषार ने जो प्लान बनाया था वो रूचि को नहीं पता था रजनी के परिवार की औरतो को छोड़ने का लेकिन बाकि सब का क्या, रजनी की हवस दूर करने के लिए तो ये तरीका ठीक था लेकिन बाकि लोग मजबूत भी थे और ताकतवर भी उन्हें कैसे सबक सिखाये,

दीपा- सही बोल रही ह यार हम करेंगे क्या बस गधो की तरह इधर उधर भाग रहे हैं

तुषार- माँ से बात करे क्या वो कोई रास्ता दिखा दे

रूचि- नहीं माँ से नहीं माँ हमे इन लफड़ो में पड़ने hi नहीं देंगी

दीपा- तू कुछ सोच न टुशु, तू लड़का ह बहार निकल सकता ह कुछ तरीका धुंध सकता ह

तुषार- मेरी आगे चाहे जो भी हो गई ह लेकिन मैं अभी 11तह में हु और मुझे उतना hi ज्ञान ह जितना 11तह तक के लड़के को होता ह इससे ज्यादा न किसी ने ज्ञान दिया न hi मैंने हासिल करने की कोशिश की, तो कहा से ज्ञान लाऊंगा और माँ ने हम सभी को आजादी दी ह मैं hi अकेला बहार नहीं निकल सकता आप भी निकल सकती हो

रूचि- टुशु ठीक बोल रहा ह, वो लड़का ह वॉक र सकता ह लेकिन तरीका हम सबको hi सोचना होगा, लेकिन सम्हाल क्र ऐसा न हो हम माँ के लिए अच्छा करने जाये उल्टा उनके लिए मुसीबत पैदा क्र दे,

रात को खाने के बाद तुषार ने सीमा के पास जाने का फैसला किया, उसने सोचा सीमा उससे प्यार करती ह तो शायद उसे सब कुछ खुद hi बता दे,

तुषार सीमा के रूम में गया तो सीमा फ़ोन में लगी हुई थी,

तुषार- क्या क्र रही हो मेरी जान

सीमा एक दम से घबरा गई, टुशु तू यहाँ इस टाइम

तुषार- क्यों आ नहीं सकता क्या अपनी जान के पास

सीमा- कैसी बात क्र रहा ह आ न

तुषार- क्या कर रही हो बिजी तो नहीं थी

सीमा- अरे नहीं नहीं बिजी क्यों हूँगी

तुषार- आज कल ज्यादा थक जाती हो क्या

सीमा- नहीं तो, ऐसा क्यों बोल रहा ह

तुषार- इतने दिन हो गए आपने मुझे अपने पास बुलाया hi नहीं प्यास मिट गई क्या,

सीमा ने तुरंत तुसाहर का कलर पकड़ा और अपने उप्पेर खींच लिया और तुषार के हॉट चुम लिए, ये प्यास कभी बुझ सकती ह क्या


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तुषार- इतने दिन से दूर दूर हो सोचा प्यास ख़तम हो गई,

सीमा- मुझे लगा तू नाराज ह मुझसे इसलिए मेरे पास नहीं आता आज कल

तुषार- मैं क्यों नाराज रहूँगा आपसे आप hi नाराज रहती हो और अगर नाराज था भी तो कुटिया का फर्ज होता ह अपने मालिक को मानाने का

सीमा- माफ़ क्र दो मालिक आपकी कुटिया आपके पास नहीं आई, इस लिए अपनी कुटिया को सजा दो ऐसी सजा दो की कुटिया की गांड फैट जाये,

तुषार- सजा तो मिलेगी जरूर मिलेगी

तुषार ने सीमा को गॉड में उठा लिया और चूमने लगा,

जल्दी hi दोनों के कपडे उतर चुके थे, सीमा पागलो की तरह तुषार को चुम रही थी उसके लुंड को चूमने लगी तुषार भी सीमा को चूमे जार है था फिर उसकी चूचियों को अच्छे से चूसने मसलने लगा, सीमा तुषार का लुंड चूसने लगी,

आज कल तुषार मोबाइल में सेक्स की अलग अलग पोस्टिटोन देखने लगा था तो उसे एक पोजीशन याद आ गई, उसने सीमा को खड़ा किया और उसे गॉड में उठा क्र पलट दिया, सीमा का सर निचे और पेअर उप्पेर हो गए जिससे सीमा की छूट तुषार के मुँह के सामने आ गई, और तुषार का लुंड सीमा के मुँह के सामने था,

एक बार तो सीमा घबरा गई उसे बड़ा अचंम्भा हुआ तुषार ने उसे खिलोने की तरह उठा लिया था, और ये पोटिओसिओन बड़ी मस्त थी, तुषार ने सीमा की छूट पैर मुँह लगा दिया, सीमा भी तुषा रखा लुंड चूसने लगी,


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ये ज्यादा देर नहीं चला, तुषार ने सीमा को निचे उतरा और एक पेअर हवा में उठाया और लुंड उसकी छूट पैर सेट करके धक्का लगा दिया, सीमा की चीख निकल निकलती रह गई, तुषार आज कुछ नया hi तरय करता जार है था, थोड़ी दे रेज hi छोड़ने के बाद तुषार ने सीमा को गॉड में उठा लिया और अपना लुंड उसकी छूट में घुसा क्र अपने हाथो पैर उछलने लगा,

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सीमा ने तुसह रकि गार्डन में हाथ दाल दिए, और लुंड पैर उछलने लगी, लुंड एक दम गहराइयों तक जार है था, जिससे सीमा की सिसकारियां जोर जोर से निकलने लगी, जिसकी आवाज दीपा के रूम तक जार hi थी, aghhhhhhhhhh छोड़ अपनी कुटिया को अह्ह्ह्हह्ह ऐसे hi उछाल उछाल क्र छोड़ ahhhhhhhhhhhhh बना दे भोसड़ा मेरी छूट का aahhahhhhhhhhhhhhh फाड् दे इस भेनचोद को बहुत प्यासी रहती ह ये छूट aahahhhhhhhhhhhhhhhhhhh, सीमा खुद को सम्हाल नहीं पाई और झाड़ गई,

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तुषार ने सीमा को बीएड पैर लिटाया और पीछे से लुंड छूट में डालने लगा, लेकिन छूट के रास में सना लुंड गलती से सीमा की गांड के छेद सेट हो गया और जैसे hi तुषार ने धक्का मारा तो सीमा की चीख निकल गई अह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह वह नहीं aahhhhhhhhhhhhhhhhh,seema एक दम आगे हो गई,

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सीमा- तू पागल ह क्या वह क्यों दाल रहा ह

तुषार- गलती से चला गया जान

सीमा- मेरी गांड कुँअरि ह वह कभी भी मत डालना

तुषार- मैंने तो कभी सोचा भी नहीं वह डालने का

सीमा- ठीक ह तेरा हुआ नहीं क्या

तुषार ने सीमा को खींचा और सीधा लिटा क्र अपना लुंड एक hi बार में घुसा दिया और धक्के लगाने लगा,


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वो तब तक धक्के लगता रहा जब तक खुद झाड़ नहीं गया, झड़ते हुए उसने अपना लुंड सीमा के मुँह में दे दिया, और पूरा रास उसके मुँह में खली क्र दिया, सीमा 2 बार झाड़ गाइट hi,

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फिर दोनों ने खुद को साफ़ किया, और एक साथ चिपक क्र लेट गए,
 
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गुड मॉर्निंग माय फ्रेंड्स अपडेट आ चूका ह
 
अपडेट-27








सीमा- मजा आ गया तेरे लुंड में बहुत दम ह, छूट की धजिया उदा देता ह

तुषार- फिर भी आप मेरे पास नहीं आती

सीमा- माफ़ क्र दे अब नहीं होगी गलती

तुषार- आप प्यार तो करती हो न मुझसे, कही मेरी जगह कोई और तो नहीं आ गया

सीमा एक दम तुषार के उप्पेर आ गई और गुस्से में उसे देखते हुए, ख़बरदार जो कभी ऐसी बात की तो मेरी जिंदगी में तेरे अलावा कोई नहीं आ सकता, तू जान ह मेरी बहुत प्यार करती हु मैं तुझसे,

तुषार- गुस्सा क्यों हो रही हो मैं तो बस ये कह रहा था, आपको शादी तो करनी hi ह एक दिन अगर कोई इस लायक पसंद आ जाये तो बता देना

सीमा- तब की तब देखि जाएगी, वैसे भी मैं किसी ऐसे आइए से शादी नहीं करूंगी, कोई अच्छा पैसे वाला होना चाहिए

तुषार के दिमाग को एक बड़ा झटका सा लगा, क्योकि सीमा बस यही बोलती थी की वो मेरे तुषार के अलावा किसी से शादी नहीं करेगी लेकिन आज उसने शादी की है भरी और वो भी किसी पैसे वाले से, मतलब मामला बिगड़ रहा ह,

तुषार- क्या पैसे के लिए आप मुझे छोड़ क्र चली जाओगी

सीमा ने तुषार की आँखों में देखा जहा उसे हलकी सी नाम दिखाई दी, तब सीमा को अहसास हुआ उसने क्या बोल दिया ह पैसे वाले इंसाने से शादी

सीमा- नहीं नहीं मेरा वो मतलब नहीं था भाई तू गलत सोच रहा ह

तुषार ने सीमा को बड़े प्यार से अपने उप्पेर से उठाया और साइड में लिटा दिया और खुद उठ क्र कपडे पहनने लगा,

सीमा- टुशु भाई गलती हो गई ह भाई मेरा वो मतलब नहीं था,

तुषार कुछ नहीं बोलै बस चुप चाप कपडे पहन क्र बहार जाने लगा, तो सीमा नंगी hi उससे लिपट गई, टुशु ऐसे मत जा मुझसे नाराज होकर मत जा

तुषार- दीदी हमारे पास पैसा नहीं था फिर भी पूरा परिवार सुखी था, आप वह अपने परिवार के भले के लिए गई थी लेकिन आप तो अपना hi बह्विश्य बनाने लगी, मैं आपको अपना बह्विश्य बनाने से नहीं रोक रहा लेकिन अपने परिवार को धोका देकर नहीं,

सीमा- मैंने कोई धोका नहीं दिया ह वह एशिया कुछ नहीं ह जैसा तुम लोग सोच रहे हो सुरेश जी गलत नहीं हो सकते मैं उनसे मिली हु बहुत अच्छे इंसाने ह

तुषार- लेकिन आपने तो अब तक ये hi बताया था की आप मिली hi नहीं, वो भी तो झूट hi बोलै न आपने

सीमा- तुम सब विश्वास नहीं करते

तुषार- क्यों नहीं करते दीदी, इतना hi भरोसा था आपको अपने परिवार पैर, आप एक बार बोल क्र तो देखती,

सीमा- गलती हो गई भाई मैं दर गई थी की वह कुछ नहीं मिला तो तुम मुझे वह से जॉब हटाने को न बोल दो इसलिए चुप रही

तुषार- दीदी आपने हम पैर विश्वास hi नहीं किया,

सीमा- एक बार मुझे माफ़ क्र दे प्लस अब से गलती नहीं होगी मैं सब बताती हु

तुषार- दीदी मेरे कहने से नहीं जब आपका दिल करे तब बताना. कल सबके साथ बैठ क्र बताना अगर आप चाहो तो,

तुषार वह से निचे आ गया और रूम में लेट गया, काफी देर तक सोचता रहा सीमा की बातो को और सोचते सोचते नींद आ गई, आज संडे का दिन था सब आराम से उठे, तुषार उठ क्र बहार आया तो राजेश बहार रज्जो को नहला रहे थे, रूचि भी राजेश के साथ hi लगी थी, वो रज्जो की बड़ी सेवा करती थी, सीमा अभी उठी नहीं थी और दीपा नाहा रही थी,

अंजलि किचन में काम क्र रही थी, तुषार ने अंजलि को पीछे से आकर बहो में भर लिया, सुबह के टाइम तुषार का लुंड खड़ा था जो सीधा अंजलि की गांड में घुस गया, तुषार ने अंजलि की गार्डन चुम ली,


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अंजलि- क्या करता ह कोई आ जायेगा

तुषार- आने दो मैं अपनी पत्नी को प्यार क्र रहा हु

अंजलि पत्नी शब्द सुन क्र शर्मा गई,

तुषार- uffffffffffff आपका शर्माना, है कातिलाना

अंजलि- बस बस मुझे काम करने दो

तुषार ने अंजलि को पलटा और गॉड में उठा क्र स्लैब पैर बैठा दिया, और उसके हॉट सुमने लगा,


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अंजलि शर्म से लाल हो गई, उसे दर भी लग रहा था कही कोई आ न जाये, लेकिन इस लुका छुपी वाले प्यार में मजा भी बहुत आ रहा था, तुषार ने अंजलि की गांड को दबाया और अपने से सत्ता लिया, तभी किसी के पैरो की आहात हुई तो अंजलि एक दम स्लैब से उतर गई और हड़बड़ाहट में काम करने लगी, तुसाहर भी एक दम पीछे हो गया, तभी किचन में दीपा की एंट्री हुई,

अंदर आते hi उसे महसूस हो गया था की अंदर कुछ चल रहा था, अंजलि का रंग उदा हुआ था, और तुषार के फेस पैर अलग hi मुस्कान थी जैसे वो शर्मा रहा हो,

दीपा- तू क्या क्र रहा ह यहाँ माँ को परेशां तो नहीं क्र रहा

तुषार- मैं क्यों परेशान करूँगा माँ को

दीपा- है करना भी मत

तुषार- अरे नहीं करूँगा क्यों टेंशन ले रही हो

दीपा- टेंशन लेनी पड़ती ह मेरे बाप

बाप शब्द सुनते hi अंजलि और तुषार दोनों हड़बड़ा गए, दीपा के मुँह से बाप सुनते hi तुषार घबरागया कही दीपा अंजलि के सामने कुछ बोल न दे, वही अंजलि के रोंगटे खड़े हो गए, क्योकि उसने तुसाहर को पति मन था तो एक तरह से वो दीपा का बाप बन गया था, वैसे तो ये लाइन कोई भी नॉर्मली बोल देता ह, लेकिन यहाँ ये नार्मल बोली हुई लाइन नहीं थी दीपा ने जान बुझ क्र वो बोलै था,

अंजलि की छूट में एक दम हलचल हो गाइट hi, उसकी चूचिया तन गाइट hi, दीपा के फेस पैर मुस्कराहट थी तुसाहर और अंजलि की हालत देख क्र, तुषार आँखे फाडे दीपा को देख रहा था, तभी रूचि अंदर आई अरे माँ चाय दे दो मैं थक गई,

दीपा- आजा चाय पि ले माँ पापा के साथ

ये दूसरा हमला था दीपा का इस बार अंजलि ने गौर से दीपा को देखा उसके चेरे पैर अलग hi मुस्कराहट थी,

रूचि- है पापा भी मांग रहे ह चाय

तुषार हड़बड़ाता हुआ बहार निकल गया,

अंजलि के हाथ भी कैंप रहे थे, वो चाय कप में दाल रही थी उसके हाथ से चाय गिर जार hi थी तो दीपा ने अंजलि के हाथ पैर हाथ रखा और बोली- माँ सब ठीक ह न

अंजलि- है है सब ठीक ह क्यों क्या हुआ

दीपा- कुछ नहीं बस लाओ मुझे दो मैं करती हु

दीपा ने चाय क्र के रूचि को दी रुचे चली गई

रुचे के जाते hi दीपा ने खुद के लिए चाय ली और बहार चल दी, तभी अंजलि ने टोका तू कुछ कहना चाहती ह क्या

दीपा- नहीं तो मैं क्या कहूँगी माँ

अंजलि- अगर कुछ कहना ह तो कहे सकती ह माँ से कुछ नहीं छुपाना चाहिए

दीपा- माँ आपने हमे सिखाया ह माँ से कुछ न छिपाये ये hi बात माँ के लिए भी ह वो भी बच्चो से कुछ न छुपाये अगर आपको कुछ बताना ह तो बता सकती हैं मैं साथ हु आपके

इतना कहे क्र दीपा चली गई, अंजलि की धड़कने बढ़ा क्र, अंजलि को अहसास हो गया की दीपा को शक ह या उसे कुछ पता ह अंजलि और तुसाहर के बारे में, अब अंजलि शर्म से गाड़ी जार hi थी, उसका दिल बहुत तेज धड़क रहा था,

फिर सभी ने ब्रेकफास्ट किया और अंजलि अपने काम में लग गई, तुषार ने दीपा को सीमा और उसके बिच हुई साडी बात बता दी थी, उसे उम्मीद थी की सीमा आज कुछ बताएगी क्योकि तुषार उसे इग्नोर सा क्र रहा था, फिर सीमा बोली तुम सब मुझे मेरे रूम में मिलो कुछ देर में,

रूचि और दीपा सीमा के रूम में चले गए, तुषार ने कुछ देर में आने का बोल दिया, इधर अंजलि ने सीमा को कुछ काम बता दिया वो उसमे बिजी हो गई, दीपा और रूचि रूम में बैठे थे, सीमा का फ़ोन वही रखा था, जिसे रूचि ने उठा लिया

रूचि- आजा देखते ह दीदी का फ़ोन कैसा ह

दीपा – है देखते ह ये क्या क्या देखती ह इसमें पोर्न भी देखती होगी

रूचि- हैट पागल

फ़ोन का लॉक दोनों को पता था, वो फ़ोन को देखने लगी, तभी एक संस आया,

दीपा- देख किसका संस ह

रूचि- हम क्यों देखे

दीपा- अरे देख न हो सकता ह उसके बर्फ का हो

रुचे नहीं न

दीपा ने फ़ोन चीन क्र व्हाट्सअप खोल लिया तो ये राहुल का संस था,

राहुल संस- तुझे क्या लगता ह तू मुझे जॉब से निकलवा देगी तो मैं तुझे छोड़ दूंगा

संस पढ़ते hi दोनों की आखे बड़ी हो गई, उन्होंने पुराने संस देखने शुरू किये, और जैसे जैसे वो पीछे गए उनका गाला सुख गया दिमाग सुन्नन हो गया चेरे का रंग उड़ गया, राहुल ने बहुत धमकिया दी हुई थी और कुछ फोटो भेजे हुए थे जिन्हे देख क्र रूचि और दीपा का फेस पैर अलग अलग रंग आ रहे थे, और तभी दीपा की गार्डन पैर एक बून्द सी गिरी, दीपा ने एक दम पीछे देखा तो वह तुषार खड़ा था ो कब वह आया दोनों को पता hi नहीं चला था, वो कब से फ़ोन में देख रहा था, और उसकी आँखों में आंसू थे,

आज पहेली बार किसी ने तुषार को रोटा हुआ देखा था,

दीपा- टुशु नहीं बस बस

दीपा ने तुषार को गले से लगा लिया, और उसका सर सहलाने लगी, रूचि के फेस पैर इस वक़्त भयंकर गुस्सा था ऐसा लग रहा था जैसे उसकी आँखे अभी आग बरसा देंगी, तभी रूम में सीमा आ गई, अंदर का नजारा देख क्र वो शॉकेड सी थी,

सीमा कुछ बोल पति उससे पहले रूचि ने एक जोर दर थपड सीमा के गाल पैर रख दिया, थपड लगते hi वह सभी एक दम सुन रह गए, सीमा की तो सोचने समझने की ताकत hi चली गई थी, उसे यकीन hi नहीं हो रहा था अभी जो हुआ वो सच में हो गया था उसकी छोटी बहन सबको सम्मान देने वाली बहन से उस पैर हाथ उठा दिया था,

रूचि- कितनी आग लगी ह आपके अंदर कितनी, जो एक इंसाने से बुझ नहीं प् रही, क्या चाहिए आपको,

दीपा- बस रूचि

रुचे- नहीं दीपा आज पूछ लेने दे मुझे, कितनी गर्मी ह आपके अंदर कितनी हवस ह जो टुशु बुझा नहीं पता आज तक,

अब झटका लगने की बरी तुषार और दीपा की थी, मतलब रूचि को पता था सीमा तुषार से चुद रही ह, लेकिन कैसे और क्या क्या पता ह उसे

सीमा- क्या बकवास क्र रही ह तू तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझ पैर हाथ उठाने की

रूचि- और आपकी हिम्मत कैसे हुई टुशु को चीट करने की

सीमा- मैंने क्या किया मैंने कोई चीट नहीं किया

रूचि- तुषार के साथ रिश्ता बना क्र भी आपको सकूं नहीं मिला क्या काम प्यार दिया तुषा रने आपको या हवस में आप किसी और के पास चली गई

अब सीमा को समझ आ गया रूचि क्या बोल रही ह,

सीमा- तुषार दीपा के साथ सोता ह मैंने तो उसे नहीं रोका फिर मुझ पैर इतनी पाबन्दी क्यों

इस बार तो दीपा और तुषार की गांड hi फैट गई

रूचि- वो आपकी बहन ह और हमारा परिवार की एकता ह की हम एक दूसरे के साथ कितने लॉयल ह लेकिन बहार क्यों आपको प्यार ह टुशु से तो आप कही नहीं जाती आपके अंदर बस हवस ह, आप अपने परिवार से भी प्यार नहीं करती आपको बस अपनी हवस अपने स्वार्थ से मतलब ह, सेल्फिश हैं आप

सीमा- नहीं मैं सेल्फिश नहीं हु (रट हुए) बहुत प्यार करती हु टुशु से अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करती हु, अपने परिवार के लिए कुछ भी क्र सकती हु

रूचि- फिर फिर ऐसा क्यों किया आपने क्यों

सीमा- मैंने कुछ नहीं किया

रूचि- कुछ नहीं किया तो फिर ये फोटो क्या बता रहे हैं,

रूचि ने फ़ोन सीमा के सामने क्र दिया जिसमे सीमा के हाथ में किसी का लुंड था


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दूसरा फोटो जिसमे सीमा का मुँह लुंड के बिलकुल उप्पेर था,

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तीसरे फोटो में सीमा बिलकुल नंगी थी और एक आदमी लुंड लेकर सामने खड़ा था,

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सीमा- एक बार मेरी बात सुन लो तुम सब फिर hi कुछ फैसला करना

रूचि- अब सुनने के लिए क्या बचा ह

सीमा- एक बार सुन तो मेरी बहन

रुच- मुझे नहीं सुन्ना कुछ भी

दीपा ने रुचे के कंधे पैर हाथ रखा और शांत रहने का इशारा किया रूचि गुस्से में थी लेकिन तुषार का फेस देख क्र चुप हो गई, जो अभी भी बौखलाया सा खड़ा था,

फिर सीमा ने बोलना शुरू किया,

जिस दिन मैं ऑफिस देर से पहुंची तो सुरेश चोपड़ा आये हुए थे, उन्हों राहुल से बोल क्र मुझे फ़ोन दिलवाया मैं बहुत खुश थी, फिर उन्होंने मुझे ऑफिस में बुलवाया, और मुझे मेरी फॅमिली के बारे में पूछने लगे,

मैंने बता दिया, बस माँ पापा का नाम नहीं बताया था,

सुरेश चोपड़ा- तुम बहुत सूंदर ह सीमा तुम्हे बहुत आगे जाना ह बहुत महेनत करनी ह

सीमा- यस सर मैं बहुत महेनत करुँगी,

सुरेश चोपड़ा- आज तुम पूरा दिन मेरे साथ रहोगी

सीमा- जी सर

सुरेश चोपड़ा- मेरे साथ रह क्र सीखो काम कैसे होता ह कैसे बॉस को खुश रखा जाता ह

सीमा- जरूर सर मुझे ख़ुशी होगी आपसे काम सिख क्र

मैंने सोचा इन्हे खुश करुँगी तो शायद कुछ जानकारी मिल जाये, दोपहर तक वो बस काम करते रहे और कभी मेरे सर पैर हाथ फेर देते कभी मेरी कमर पैर हाथ फेर देते, दोपहर तक मैं उनके साथ रही, वो थोड़ी थोड़ी देर में जूस मनगटे रहते, और काम समझते रहते, मुझे पता नहीं क्या होता जार है था मेरा मन सेक्स करने का होने लगा, मेरी आँखे लाल होने लगी,

फिर वो बोले काम तो तुम सिख गई लेकिन कॉर्पोरेट का एक और चीज ह जो तुम्हे सीखनी ह,

सीमा- जी सर बताइये

सुरेश- क्लाइंट को कैसे खुश रखना ह

सीमा- काम से खुश करेंगे सर

सुरेश- अगर कोई क्लाइंट तुमसे कुछ और डिमांड करे तो

सीमा- जी मैं समझी नहीं

सुरेश- क्लाइंट को खुश राख्न ेके लिए 3 चीज लगती ह, पहेली आपका काम दूसरी पैसा खिलाना पद सकता ह तिश्री लड़की, कोई क्लाइंट लड़की की डिमांड क्र सकता ह सेक्स के लिए

मैं थोड़ी शर्मा गई

सुरेश- बस ये गड़बड़ ह तुम्हारा शर्माना, इस लाइन में शर्माना नहीं चाहिए, सबसे पहले तुम्हे शर्म दूर करनी होगी अपनी अगर तुम शर्मा गई तो पहेली बार में कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल हो जायेगा,

मैंने खुद को सम्हाला

सुरेश- तुम पर्सनल सेक्रेटरी बनोगी तुम्हारे सामने ऐसे ऑफर आएंगे तुम्हे उनके लिए ाररेंग्मेंट करने पड़ेनेगे

मैं उनकी बात सुनकर गरम हुए जा रही थी, मुझे उनकी बातो में मजा आ रहा था

सुरेश- तुम्हे खुद को नहीं सपना बस इंतजाम कारण आहोता ह, है कभी कभी क्लाइंट के साथ रुकना पद सकता ह जब तक वो किसी लड़की के साथ खुश न हो जाये

सीमा- वो कैसे

सुरेश- जब वो लड़की के साथ सेक्स करेगा तो तुम्हे वह रुकने को बोल सकता ह

सीमा- लेकिन मैं उसके सामने कैसे

सुरेश- बस यही तुम्हे मजबूत बनना होगा खुद को मजबूत करना होगा ये hi सीखना होगा

सीमा- मैं कोशिश करुँगी

सुरेश- चलो आज तुम्हारा टेस्ट लेता हु, अगर तुम फ़ैल हुई तो पनिशमेंट मिलेगी जो मैं देता हु अगर पसा हुई तो जॉब पक्की रहेगी

मैं दर गई, कही जॉब न चली जाये

तभी सुरेश ने बेल्ल बजे, तो तुरंत राहुल आया- यस सर

सुरेश- ऋतू को बेह्जो

राहुल मुस्कुराता हुआ यस सर बोल क्र चला गया

तभी बहार से एक खूबसूरत 24-25 साल की लड़की आई जिसने वाइट शर्ट और ब्लैक स्कर्ट फेनी हुई थी, मेरी मुलाकात उससे काम hi हुई थी वो दूसरे सेक्शन में काम करती थी, वो ऑफिस की मॉडल थी जिसका काम कंपनी के लिए मॉडलिंग करना और क्लाइंट को खुश करना था,


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सुरेश- ऋतू इधर आओ और मिस सीमा को दिखाओ क्लाइंट के लिए क्या क्या करना पड़ता ह और सेक्त्रेट्री को कैसे बैठना पड़ता ह

ऋतू मेरी तरफ देख क्र मुस्कुराई और बड़ी ऐडा से चलती हुई सुरेश के पास पहुंची, और जाते hi उसने सुरेश के होतो से अपने हॉट मिला दिए, मेरी अचम्भे से देखती रह गई, मुझे बड़ी शर्म आ रही थी और मेरी छूट से पानी भेटा जा रहा था, लेकिन सीमा कोशिश क्र रही थी खुद को सम्हालने की,

सुरेश ने ऋतू की शर्ट के बटन खोले और शर्ट बड़े प्यार से उतर केर एकतरफ रख दी, अब ऋतू एक हाफ कप ब्रा में सुरेश के सामने झुकी कड़ी थी, ऋतू की चूचिया काफी बड़ी और वेल शेप्ड थी, मॉडल जोट hi वो, सुरेश ने उसकी चूचिया शालनी शुरू क्र दी, फिर ऋतू निचे बैठने लगी और सुरेश की पेण्ट की जीप खोली और उसका लुंड बहार निकल लिया, सुरेश का लुंड अच्छा खासा लम्बा और मोटा था, ऋतू ने उसका लुंड चूसना शुरू क्र दिया,


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सीमा ने अपना सर झुका लिया

सुरेश- नहीं नहीं सर नहीं झुकना ये hi तुम्हारी सजा ह देर से आने की तुम्हे ये सब देखना ह और सीखना ह तुम्हारा कॉन्फिडेंस काम नहीं होना चाहिए न hi घबराहट होनी चाहिए न hi शर्म, एक दम प्रोफेस्नोल लगनी चाहिए,

सीमा बहुत गरम हो चुकी थी, वो बस वह से उठ क्र भागना चाहती थी, लेकिन कोई मौका नहीं था अहा से जाने का, वो बस ऋतू को सुरेश का लुंड चूसते हुए देखती रही, इस उम्र में भी सुरेश को 15 मिनट्स से ज्यादा हो गए थे, सीमा सुरप्रीसेड थी इस उम्र में इतनी देर तक टिका हुआ था,

काफी देर बाद सुरेश ने पूरा रास ऋतू के मुँह में भर दिया, ऋतू पूरा रास पि क्र उठी और अपनी शर्ट फेन क्र बहार चली गई, उसके फेस पैर कोई एक्सप्रेशन नहीं था एक दम नार्मल थी वो, यहाँ सीमा की हालत ख़राब थी,

सुरेश- तुम्हे फ्रेश होना होगा

सीमा फिर शर्मा गई

सुरेश- सीमा बस शर्माना नहीं ह कितनी बारे बोलै जायेगा तुम्हे, ये शब्द थोड़े कड़क थे, जिनसे सीमा दर गई

सीमा- no सर ी मैं है मुझे फ्रेश होना ह

सुरेश- ok जाओ

सीमा जल्दी से बाथरूम में भागी और अंदर घुसते hi अपनी छूट अपनी मुट्ठी में भर ली और मसलने लगी, काफी देर मसलती रही जब तक वो झाड़ नहीं गई, खुद को ठीक करके वो वापस आई, तो सुरेश उसे देख क्र बिलकुल नार्मल बेहवे क्र रहा था जैसे कुछ हुआ hi न हो,

सुरेश- तुम बहुत म्हणती और प्रोग्रेसिव लड़की हो तुम बहुत जल्दी तरक्की करोगी, बस ये कपडे तुम्हे बदलने होंगे, ऑफिस में थोड़ी मॉडर्न बनो

सीमा- सर वो अभी मेरी फॅमिली कंडीशन अच्छी नहीं ह इसलिए

सुरेश- बस इतनी सी बात कोई नहीं मैं सब देख लूंगा,

ऐसे hi आज सीमा को ऑफिस में देर हो गई, सुरेश ने संडे को ऑफिस आने को कहा, सीमा देर से घर पहुंची थोड़ी थकी हुई थी इसलिए जाते hi रूम में चली गई, अगले दिन वो ऑफिस पहुंची तो, सुरेश ने आज फिर उसके सामने ऑफिस में एक नै लड़की के साथ वैसा hi किया सीमा बस गरम होती रही और जूस पीती रही, लेकिन इसबार सीमा ने कोई शर्म या झिजक नहीं दिखाई थी वो काफी कॉंफिडेंट थी,

फिर सुरेश सीमा को अपने साथ ले गया और उसे शॉपिंग करवाई काफी ड्रेस दिलवाई जो काफी शार्ट और टाइट थी, सीमा मन करती रही,

सीमा- सर मैं ये सब कैसे ले सकती हु मैं इन्हे घर में नहीं ले जा सकती

सुरेश- कोई बात नहीं, हमारे ऑफिस में सभी स्टाफ का एक लाकर होता ह उसमे वो अपना समां रखते ह तुम ये कपडे यही रखो और ऑफिस आकर चगे क्र लिया करो,

सीमा को बात जांच गई, उसने बस ok बोल क्र चुप हो गई,

सुरेश उसे अपने साथ अपने होटल ले आया, वह राहुल पहले से मौजूद था,

सुरेश- राहुल तुम मेरा वेट करो बहार मैं सीमा को थोड़ा और सीखना चाहता हु

राहुल बहार चला गया

सुरेश- सीमा अब तुम्हारा आखरी टेस्ट ह, तुम्हे साबित करना होगा तुम कंपनी के लिए कुछ भी क्र सकती हो,

सीमा- सर बताइये क्या करना ह

सुरेश- तुम्हे बस ये दिखाना ह तुम्हारे अंदर कितना कॉन्फिडेंस ह

सीमा- सर आप काम बताइये

सुरेश- पहले ये जूस पि लो

सीमा ने जूस पि लिया

सुरेश- अब तुम्हे ये सरे कपडे मुझ ेफेन क्र दिखने होंगे मैं देखना छठा हु किट ुम इन कपड़ो में ऑफिस में कैसी लगोगी

सीमा- ok सर मैं अभी करती हु,

सीमा कपडे उठा क्र बाथरूम में जाने लगी

सुरेश- रुको, वह नहीं

सीमा ने सुरप्रीसेली सुरेश को देखा

सुरेश- ये तुम्हे मेरे सामने hi बदलने होंगे

सीमा घबरा गई- लेकिन सर मैं कसिए

सुरेश- क्यों नहीं क्र सकती मैं तुम्हारे दादा की आगे का इंसाने हु तुम्हारा बॉस हु अगर तुम मेरे सामने hi ऐसे शरमाओगी तो फिर कंपनी को कैसे सम्हालेगी, अगर तुमसे नहीं होता तो मुझे बता दो मैं इस पोस्ट के लिए किसी और को दे दूंगा,

सीमा- नहीं नहीं सर मैं करुँगी करती हु

सीमा ने झिझकते हुए अपन एकपडे उतरने शुरू क्र दिए, वो अब ब्रा पंतय में थी

सुरेश- इन्हे भी उतर दो जो मैं लाया हु वो फिनॉल

सीमा ने झिझकते हुए अपनी ब्रा पंतय भी उतर दी, वो बहुत शर्मा रही थी,

सुरेश- कॉन्फिडेंस

सीमा ने तुरंत खुद को सम्हाला और कपडे उठा क्र पहनने लगी, फिर उसने बरी बरी से सरे कपडे फेन क्र दिखाए, सुरेश बस बैठ देखता रहा उसने कोई कोशिश नहीं की सीमा को चुने की भी, जबकि सीमा गरम हो रही थी, और सुरेश से इम्प्रेस भी थी की एक इतनी सूंदर जवान लड़की को नंगी देख क्र भी सुरेश ने अपना सयम नहीं खोया था, उसे चुने की भी कोशिश नहीं किट hi,

जब सरे कपडे तीर हो ए तो सीमा ने सरे कपडे निकल क्र अपने कपडे पहनने शुरू किये तो सुरेश ने रोक दिया,

सुरेश- मेरे पास आओ

सीमा शर्माती हुई उसके पास पहुंची

सुरेश- तुम बहुत खूबसूरत हो बहुत टाइम बाद मुझे ऐसा हिरा मिला ह

सीमा- ठंकु सर आपको मैं एंटी पसंद आई

सुरेश- तुम्हे देख क्र मुझे किसी की याद आ जाती ह, दिल करता ह बस तुम्हे गले से लगा लू

सीमा को पता नहीं क्या हुआ और वो सुरेश के गले लग गई, सुरेश ने भी उसे अपने साइन से लगा लिया,

सुरेश- एक लास्ट टेस्ट

सीमा ने उप्पेर देखा

सुरेश- तुम्हे ऋतू के जैसे बस एक बार करके दिखाना ह

सीमा- सर मैं कैसे क्र सकती हु, सीमा मन क्र रही थी लेकिन शरीर कुछ और hi बोल रहा था

सुरेश- तुम्हे करना नहीं ह बस उसके जैसे एक्टिंग करनी ह, जिससे तुम्हारा कॉन्फिडेंस बढ़ जाये, और तुम मेरी बेस्ट एम्प्लोयी बन जाओ,

सीमा ने न चाहते हुए भी है क्र दी,

सुरेश ने अपने कपडे निकले और नंगा खड़ा हो गया, सीमा उसके लुंड के सामने बैठ गई,

सुरेश- पकड़ क्र देखो

सीमा ने उसका लुंड पकड़ लिया,

सुरेश- ऋतू की तरह मुँह में लेने की एक्टिंग करो

सीमा वैसा hi करती रही, कभी इस तरह कभी उस तरह लुंड को पकड़ क्र एक्टिंग क्र रही थी, कुछ hi देर में सीमा के अंदर से एक आवाज आई तुषार, वो झटके से अलग हो गई,

सीमा- सर बस

सुरेश- बस है बस तुम बहुत बहादुर हो बहुत तैराकी करोगी

सीमा- सर अब मैं जाना चाहती हु

सुरेश- है है क्यों नहीं ये कपडे ले जाओ और ऑफिस के लाकर में रख दो,

सीमा ने जल्दी से कपडे पहने और नए कपडे उठाये और चली गई ऑफिस, और वह कपडे लाकर में रख क्र घर चली गई, आज वो बहुत थक गई थी उसे एक नशा सा हो रहा था, उसके अंदर छुड़ाने के लिए भूचाल आया हुआ था लेकिन उसका दिमाग ख़राब हो रहा था,



उसने क्यों वो सब किया उसे नहीं करना चाहिए था, उसने टुशु को धोका दे दिया, वो खुद से hi गुस्सा हो रही थी, जिससे वो घर वालो से उखड़ी हुई सी हो रही थी, उसे दर था अगर किसी को पता चला तो क्या होगा,
 
अपडेट-28



कुछ दिन बीत गए, ऑफिस में चर्चा शुरू हो गई थी की सीमा बॉस के साथ थी, सीमा ने नई ड्रेस भी पहननी शुरू क्र दी थी,

एक दिन राहुल ने ऑफिस में सीमा को बुलाया और उसके साथ छेद चढ़ करने लगा तो सीमा ने उसे डाट दिया, तो राहुल ने कुछ फोटो सीमा को भेजे और बोलै बॉस से चुदवाती ह और मुझे मन करती ह, फोटो देख क्र सीमा की हवइया उड़द गई,

वो बहुत दर गई, राहुल उसे बालकमाइल करने लगा था सीमा दरी दरी सी रहने लगी, फिर अलका ऑफिस में आ गई तो राहुल की हिम्मत काम हो गई लेकिन वो फ़ोन पैर डरने लगा,

जब सीमा को कोई रास्ता नजर नहीं आया तो उसने सुरेश को फ़ोन क्र साडी बात बता दी, फिर एक दिन सुरेश ऑफिस आया और उसने राहुल को जॉब से हटा दिया, उस दिन सीमा को बहुत ख़ुशी hui,suresh सीमा को होटल लेकर गया लेकिन इत्तेफाक से वह अलका मिल गई और वो सीमा को अपने साथ ऑफिस वापस ले आई,

सीमा अब बहुत खुश थी, अब उसे रहत थी, और घर में भी उसका मूड ठीक रहने लगा था लेकिन जब भी कोई उससे सुरेश के बारे में कुछ जानना चाहता तो वो दर जाती, और झूट बोल देती सुरेश का नाम आते hi उसे वो दिन याद आ जाता और उसे दर लगता कही घर पता न चल जाये, इसी दर से वो सबसे लड़ पड़ती,

लेकिन सीमा के दिमाग में सुरेश के लिए एक बहुत hi अच्छे इंसाने की छवि बन चुकी थी, उसे यकीन था वो किस के साथ गतल नहीं क्र सकते,

सीमा ने जब सबको साडी बात बताई तो सब के मुँह खुले रह गए,

सीमा- अब पता चला मेरी गलती नहीं ह और सुरेश तो बहुत अच्छे इंसान ह

दीपा- हम इस लिए शोकेड नहीं ह की वह क्या हुआ इसलिए शोकेड ह की कोई इतना बेवकूफ़े कैसे हो सकता ह

सीमा- क्या मतलब

रूचि- अरे महा मूरख बहन कोनसे ऑफिस में सेक्स का ज्ञान दिया जाता ह वो ऑफिस काम करने के लिए ह या वह लड़कियों की दलाली होती ह,

दीपा- और तब से अब तक कितनी लड़कियों को क्लाइंट के पास भेजा गया ह

सीमा- अभी तो नहीं भेजा

तुषार- और आपने वो जूस पिया उसके बाद आपकी बॉडी गरम हुई आपको समझ नहीं आया उस जूस में क्या हो सकता ह

रूचि- और होटल के बंद रूम में जहा कोई नहीं घुस सकता वह राहुल आपकी फोटो कैसे खींच सकता ह, और उसने खींचे भी तो सुरेश ने आपसे ऐसे पोज़ क्यों बनवाये अगर वो सही होता तो आपके कपडे उतरने से hi समझ जाता आप का कॉन्फिडेंस, आपसे वो सब करवाने की जरुरत hi क्या थी, वो आपको किसी क्लाइंट के पास सोने तोडना भेने वाला था जो ये सब टेस्ट ले रहा था,

दीपा- तुझे तो सेक्रेटरी की जॉब करनी थी वह रंडी की नहीं

सीमा भौचक्की सी कड़ी तीनो की बात सुन रही थी उसे समझ नहीं आ रहा था ये क्या हुआ ये सब एक जाल था क्या वो सुरेश के जाल में फास गई,

इतना सोचते hi सीमा जोर से रोने लगी,

दीपा- अब चुप हो जाओ बस बस चुप हो जाओ

रूचि- अब रोने का फायदा नहीं ह शुक्र ह भगवान् का आपके साथ कुछ हुआ नहीं वर्ण

तुषार- आप उस ऑफिस में काम नहीं करोगी आप उस सुरेश चोपड़ा से दूर रहोगी

दीपा- तू वह से जॉब छोड़ दे

सीमा- अब क्यों अब तो वो सुरेश वह आता hi नहीं ह अब तो अलका देख रही ह ऑफिस उसकी अपने बाप से भी नहीं बनती

रूचि- फिर भी आपको समझ नहीं आया कोई बेटी अपने बाप से दूर रहती ह तो वो बाप कैसा होगा,

सीमा- अब हो गई गलती माफ़ क्र दो मुझे अब से नहीं होगी

रूचि- आपको एक प्रॉमिस करना होगा, आज के बाद वह या कही भी कुछ भी होता ह आपके साथ आप सबसे पहले हम तीनो को बताओगी

सीमा- ठीक ह प्रॉमिस

रूचि- और आपको सबसे ज्यादा श्री टुशु को बोलना चाहिए उस पैर क्या बीती ह आप समझ सकती हो

रूचि की ये बात सुनते hi दीपा और तुषार के कान खड़े हो गए, अब तक तो वो सीमा से गुस्से में भूल hi गए थे रूचि अब तक क्या बोल रही थी, लेकिन जब उन्हें अहसास हुआ की रूचि को सब पता ह तो दोनों की हालत पतली हो गई, दोनों ने एक दूसरे को देखा, साफ़ पता चल रहा था दोनों के रंग उड़े हुए हैं,

तुषार को कुछ नहीं सुझा वो तुरंत उठा और बहार की तरफ तेजी से निकल गया, सीमा को लगा वो नाराजगी में गया ह वो तुरंत उसके पीछे भागी, रूम में दीपा और रूचि रह गए थे

रूचि- देखा मैंने कहा था न वो कुछ गलत क्र बैठेंगी, बस भगवान् की दया से बच गई

दीपा- झेपते हुए तुझे कब से पता ह

रूचि- क्या पता ह

जैसे hi रूचि को याद आया वो क्या क्या बोल गई थी , वो चुप हो गई जो बाते उसने अपने अंदर छुपाई हुई थी वो आज सब निकल गई थी,

दीपा- तुझे सब पता ह चुप क्यों ह हम सब एक hi तो ह बता कब से पता ह

रूचि- छोड़ न यार

दीपा- तू सीमा से बोलती ह सब कुछ बताये और खुद सब छुपा क्र बैठी रहती ह, बता न कब से पता ह

रूचि- शुरू से, तुम सब मुझे पागल समझते हो ह न, मेरे hi बराबर में लेट क्र वो सब करोगे मुझे पता hi नहीं चलेगा, मैं बच्ची नहीं हूत ुम दोनों से थोड़ी hi छोटी हु, और तू रात के अँधेरे में चुप चाप चूसा चूसै करेगी किसी को पता नहीं चलेगा क्या, अब ये नहीं पता तू आगे बढ़ी या वही चोरी छुपे चूसै क्र रही ह, लेकिन सीमा दी ने तो सब क्र hi लिया, तुम लोग मुझसे छुपा रहे थे तो मैं क्या बोलती की मुझे तुम्हारे राज पता ह

दीपा- श्री यार मुझे लगा शायद तुझे अच्छा न लगे ये सब

रूचि- यहाँ बात अच्छा लगने या बुरा लगने की नहीं ह, यहाँ बस परिवार की बात ह और माँ ने हमे एक रखने के लिए बहुत कुछ किया ह, तो हम पीछे कैसे रह सकते हैं, अगर मेरे भाई बहन इस प्यार से खुश ह तो मुझे कोई ऐतराज नहीं ह, पैर क्या ये सच्चा प्यार ह

दीपा- मुझे सच्चा झूठा नहीं पता, बस इतना पता ह टुशु के अलावा मेरे लिए दुनिया में कोई और लड़का कुछ मायने नहीं रखता

रूचि- लेकिन दोनों बहन एक के hi साथ ये गलत नहीं ह क्या

दीपा- तूने hi कहा न हम परिवार ह और परिवार में सब अपने होते ह, अगर तुषार किसी परिवार वाले के साथ मेरे जैसा रिश्ता रखता ह मुझे ख़ुशी होगी हम सब एक रहेंगे

रूचि- लेकिन बहार वाली उसका क्या, आज कल वो किसी लड़की के साथ घूम रहा ह

दीपा- कोण शाक्षी?

रूचि- तू जानती ह उसे

दीपा- है वो रजनी की बेटी ह, मैंने hi तुषार को उसके पीछे लगाया था

रूचि- लेकिन क्यों हमे तो रजनी को बर्बाद करना था

दीपा- मैं चाहती हु रजनी के घर की साडी औरते टुशु के बच्चे की माँ बने चाहे किसी भी कीमत पैर

रूचि- तेरा दिमाग ख़राब ह क्या, तू जानती ह क्या बोल रही ह

दीपा – है जानती हु जिसने हमारे साथ गलत किया हम उसे नहीं छोडनेगे

रूचि- लेकिन उसके लिए बेकसूरों को सजा क्यों दी जाये, और जो उन्होंने हमारे साथ किया हम भी वैसा hi करे तो उनमे और हम में क्या अंतर रह गया, तुषार को भी यश और जय जैसा बनाना चाहती हो, वो शाक्षी को प्रेग्नेंट करे और छोड़ दे उसे अकेले मरने के लिए, फिर एक और अंजलि का जनम हो उससे हम जैसी औलादे हो, फिर अजय और तुषार में क्या अंतर ह

दीपा की बोलती बंद थी, उसकी आँखे नाम थी

दीपा- श्री बहन मैं गुस्से में अंधी हो गई थी लेकिन करू तो क्या करू मुझे उसे बर्बाद करना ह चाहे कुछ भी हो जाये

रूचि- हम करेंगे जरूर करेंगे लेकिन ऐसे नहीं, तुषार किसी शादी शुदा औरत के साथ सेक्स करता ह उससे कोई दिक्कत नहीं ह क्योकि वो खुद आएगी अपनी प्यास बुझाने लेकिन कुँअरि लड़की को बर्बाद न करे बस

दीपा- ठीक ह टारगेट चेंज अब सीधा रजनी की छूट फड़ी जाएगी

रूचि- हस्ते हुए हहहह तू तो सच में पगला गई ह वो माँ ह तेरी चाहे बुरी सही

दीपा- तो माँ hi सही अब टुशु मेरे माँ छोड़ेगा वो भी कुटिया बना बना क्र

दोनों है पड़े

वही सीमा तुषार को मानाने में लगी थी मन क्या रही थी दोनों एक दूसरे को चुम रहे थे गुस्सा नाराजगी सब एक दूसरे के होतो में निकल रहे थे, तभी रूम में अंजलि आ गई, और दोनों को इस हालत में देख क्र शर्मा गई, पैर उन दोनों को कुछ पता hi नहीं था, अंजल इन वापस जाना hi सही समझा, लेकिन मुड़ते hi उसका हाथ दरवाजे में लग गया,

आवाज सुनते hi तुषार और सीमा अलग हुए उनकी नजर दरवाजे की तरफ गई तो अंजलि झपटी हुई उन्हें देख रही थी, आज का दिन hi तुषार और सीमा के लिए खतरनाक tha,phele रुचे का थपड फिर रुचे ने ऐसा राज खोला अब अंजलि ने देख लिया, दोनों हड़बड़ा गए,

अंजलि हस्ती हुई लगे रो मैं तो चाय पूछने आई थी, तुम लोग लगे रो पैर दरवाजा बंद क्र लो,

अंजलि बहार चली गई लेकिन उसका फेस लाल हुआ पड़ा था, सामने से दीपा और रूचि भी आ रहे थे,

दीपा- माँ क्या हुआ

अंजलि- कुछ नहीं चाय पियोगी क्या

रूचि- है पिएंगे, और ये टुशु कहा ह मैं बुला क्र लती हु

अंजलि घबरा गई- रुक रुक मैं बोल क्र आ गई हूत ु रहने दे

रूचि- अरे मैं बोलती हु उसको

अंजलि- बोलै न रहने दे

तभी तुषार और सीमा रूम से बहार आये, दीपा को सारा माजरा समझ आ गया, रूचि अजीब सी नजरो से दोनों को देख रही थी, तुषार अपनी नज़ारे चुरा रहा था,

सभी एक साथ बैठे चाय पि रहे थे, सभी के दिमाग में कुछ न कुछ चल रहा था, रूचि को पता था तुषार सीमा को छोड़ता ह और दीपा चुप क्र मजे ले रही ह, सीमा को पता था तुषार सीमा और दीपा को छोड़ता ह, दीपा को पता था तुषार सीमा दीपा और उनकी माँ अंजलि को छोड़ता ह, वही अंजलि को पता था तुषार सीमा को दीपा को रजिया को और खुद अंजलि को छोड़ता ह, सभी के पास कुछ ज्यादा कुछ काम जानकारी थी, सभी उस जेकरि के हिसाब से hi अपने आप में hi शर्मा रही थी,

तभी दीपा ने धमाका किया,

दीपा- मेरा मन करता ह मैं किसी को भाभी कहु,

इतना सुनते hi सबको एक साथ खासी आई सबकी वजह अलग अलग थी और रूचि के अलावा सबके चेहरे पैर शर्माहट थी, सीमा को लगा दीपा उसे बोल रही ह, रूचि क ोभी यही लगा वही अंजलि और तुषार समझ गए दीपा किसे बोल रही, अंजलि को,

अंजलि ने नाराजगी वाली नजरो से दीपा को देखा, दीपा ने मुस्कुराते हुए अंजलि की नजरो का जवाब दिया, अंजलि समझ गई वो उसे hi बोल रही थी, अंजलि ने शर्मा क्र नजरे निचे क्र ली,

अंजलि- है है कपिल और सचिन की शादी करवा देते हैं

दीपा- टुशु की पहले करवानी चाहिए

रूचि- पहले सीमा दी की शादी होगी

सीमा- नहीं मैं शादी नहीं करुँगी, और दुबारा मेरी शादी की बात नहीं होनी चाहिए

अंजलि- बात तो सही ह रूचि की पहले बड़ो की शादी होती ह, अगर सीमा तैयार नहीं ह तो दीपा की करवा देते हैं, अब अंजलि ने दीपा पैर उल्टा वॉर क्र दिया था,

दीपा- मैं मैं क्यों कृ शादी मैं नहीं करती शादी,

रूचि- क्यों तुम दोनों को क्या प्रॉब्लम ह शादी करने में

अंजलि- है दीपा बता क्या प्रॉब्लम ह शादी करने में

दीपा- बस नहीं करनी शादी और मुझसे क्यों बोल रहे हो इस सीमा से बोलो न

सीमा- मैं अपने परिवार को छोड़ क्र कही नहीं जाउंगी चाहे कुछ भी हो जाये

रूचि- तो क्या आप परिवार में hi शादी क्र लोगी

ये अलग धमाका क्र दिया था रूचि ने, जोश जोश में कुछ ज्यादा बोल गई,

रूचि की बात सुनकर सब झेप गए,

अंजलि- अच्छा ठीक ह मत करना जिससे दिल आये क्र लेना मेरी तरफ से आजादी ह

अंजलि की बात सुनते hi सीमा और रूचि ने चौक क्र देखा वही दीपा के फेस पैर मुस्कान आ गई,

दीपा- फिर तो मैं भी क्र सकती हु ह न

अंजलि- है टब hi क्र लेना लेकिन एक दूसरे की रजामंदी से

दीपा समझ गई यहाँ सीमा की रजामंदी की बात हो रही थी,

दीपा- सबसे पहले तो आपकी hi रजामंदी होगी क्योकि पहला हक़ तो आपका hi ह

अंजलि- मैं अपने बच्चो को पूरी आजादी दी हुई ह मैं हर फैसले में साथ हु

इस सब में सबसे ज्यादा हालत ख़राब थी वो था तुषार उसे तो सब पता था कोण किसके बारे में क्या बात क्र रहा ह,

तुषार- बहुत हो गई शादी की बा तब कुछ काम क्र लो पापा बेचारे कब से बहार के बगीचे में सफाई क्र रहे हैं चलो सब आज वही पैर अपना अपना टेलेंट दिखाओ,

दीपा हस्ते हुए उठी है है चलो, सभी बहार चले गए, थोड़ी देर में अंजलि ने दीपा को अंदर बुलाया,

दीपा- जी माँ

अंजलि ने दीपा के कान पकड़ क्र बोली- बहुत शैतान हो गई ह तू

दीपा- आए माँ छोड़ो न मैंने क्या किया

अंजलि- तुझे पता ह तूने क्या किया ह अपनी माँ के सामने नाटक करती ह

दीपा- नहीं मैं तो भाभी के साथ मजाक क्र रही थी

अंजलि – मुँह पैर हाथ रखते ह हाआआ बेशरम शर्म नहीं आती


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दीपा- अब कैसी शर्म तुम hi मेरी माँ को तुम hi मेरी भाभी और तुम hi मेरी सौतन भी तो हो किस लिए शर्मो

अंजलि- चुप हो जा कोई सुन ले गए

दीपा ने अंजलि को गले से लगा लिया, माँ मैं बहुत खुश हु बहुत hi ज्यादा खुश आपके चेरे पैर ये कृषि देख क्र बड़ा सकूं मिलता ह

अंजलि- लेकिन बीटा ये बात किसी को पता न चले

दीपा- एक शरत पैर

अंजलि- अपनी माँ के सामने शरत रखेगी, अच्छा बोल

दीपा- आपको टुशु से पुरे रीती रिवाज से शादी करनी होगी

अंजलि- चोकते हुए ये क्या बोल रही ह दीपू ये नहीं हो सकता

दीपा- क्यों नहीं हो सकता जब आप उसके नाम का सिन्दूर लगा सकती हो तो शादी क्यों नहीं क्र सकती

अंजलि- वो अंदर कमरे में हुआ वो मेरा अकेली का फैसला था लेकिन शादी नहीं

दीपा- माँ ये आपकी बेटी का फैसला ह और मैं आपकी शादी पुरे रीती रिवाज से करवाउंगी आपको पूरी तरह सुहागन बनाउंगी

इतना बोल क्र दीपा बहार चली गई, अंजलि भोचकी सी दीपा को जाते हुए देखती रही, ये क्या बोल रही ह ये कैसे हो सकता ह किसी को पता चल गया तो क्या होगा, मेरी शादी मेरे फेरे क्या ऐसा हो सकता ह, नहीं नहीं ऐसा कैसे होगा ये क्या करने वाली ह,


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अंजलि पूरा दिन यही सोचती रही कभी घबराती कभी खुश होती की उसकी शादी पुरे रीती रिवाज से होगी, ऐसे hi दिन निकल गया, अगले दिन सब अपनी मंजिल की तरफ निकल गए, दीपा और रूचि को कॉलेज छोड़ क्र तुषार और अंजलि आगे चले गए,

तुषार- माँ एक बात बतानी थी आपको

अंजलि- क्या हुआ कोई प्रॉब्लम ह

तुषार- पता नहीं प्रॉब्लम ह या कुछ और, वो यश की वाइफ अनीता आज कल मुझसे मिलने लगी ह फ़ोन पैर भी बात करती ह, मुझसे दोस्ती करने के लिए बोल रही ह, अभी तो मैंने हां बोल दी पैर समझ नहीं आ रहा वो क्या चाहती ह,

अंजलि- तूने उसकी आँखों में पढ़ा कुछ

तुषार- माँ उसकी आँखों में हवस तो नहीं थी बाकि पता नहीं, क्या वो मेरे साथ रिलेशन बनाना चाहती ह

अंजलि- नहीं बीटा ऐसा जरुरी नहीं ह, कोई भी औरत ऐसे hi किसी के सामने खुद को नहीं बिछाती, या तो कोई बदचलन औरत हो जो किसी को पसंद करते hi उसके निचे लेट जाये,

एक अच्छी औरत तभी किसी के पास जाती ह जब वो या तो बहुत प्यासी हो उसके पति ने प्यास न बुझाई हो उसकी, उसमे भी वो उसी नसान के पास जाती ह जो उसकी इज्जत क्र सके या विश्वास का इंसाने हो, और अनीता ने कुछ hi मुलाकातों में ऐसा तो कुछ देखा नहीं होगा

तुषार- फिर क्या हो सकता ह

अंजलि- दो कारन हो सकते हैं

पहला या तो वो यश के साथ खुश नहीं ह और उसे कोई साथी चाहिए, लेकिन इसकी संभावना बहुत काम ह वो विदेश में रहती ह तो वह उसे कोई भी मिल सकता था यही गाओं का एक लड़का क्यों पसंद आएगा, उसने तैयार वो भी नहीं देखा जो ये बोल दे की वो उसे देख क्र तेरे पीछे पागल हो गई,

दूसरा उसका कोई बड़ा मकसद ह वो जानती ह यश के परिवार और हमारे परिवार का आपस में प्रोब्लेम्स हैं,

तुषार- हो सकता ह माँ, मुझे क्या करना चाहिए

अंजलि- तू बस उससे दोस्ती क्र और बस इतना जान की वो क्या चाहती ह, बात को दोस्ती से थोड़ा आगे बढ़ा अगर वो सेक्स चाहती ह तो खुद आ जाएगी अगर कुछ और चाहती ह तो वो तुझसे दूर भागेगी,

तुषार- ठीक ह माँ

फिर दोनों चले गए, अपनी अपनी मजिल की तरफ, कॉलेज में तुषार अमन के साथ बैठा था,

अमन- यार सिटी में जाना ह

तुषार- क्या काम ह सिटी में

अमन- वह मेरी बुआ रहती ह उनके पास कुछ सामान देकर आना ह

तुषार- तो चला जा वैसे भी आज कल कोनसा क्लास चल रही हैं

अमन- अकेले नहीं जा पाउँगा सामान ज्यादा ह तू चल मेरे साथ

तुषार- कॉलेज से बंक मार क्र

अमन- वैसे भी कोनसा क्लास चल रही हैं

तुषार- अच्छा बच्चू मेरी लाइन मुझ पैर hi टोक दी

अमन- चल न यार

तुषार- ठीक ह चल

दोनों निकल गए कॉलेज से, अमन ने दो बेग लिए हुए थे जो उसने कॉलेज के मैं गेट पैर गार्ड के पास रख रखे थे,

तुषार- अबे क्या भर लिया इसमें

अमन- यार एक में गुड़ ह और दूसरे में चावल

तुषार- इतने भरी को लेकर बस में कैसे चैलेंज

अमन- चले जायँगे तू चल

थोड़ी देर में बस आ गई, बस में भीड़ थी काफी पैर लड़के तो कही भी घुस जाते हैं तो दोनों भीड़ में घुस गए सामान लेकर, भीड़ को चीरते हुए वो बिच में पहुंच गए, सम्मान रखने की जगह नहीं मिल प् रही थी, तभी एक औरत की आवाज आई, अरे अमन कहा जा रहा ह इतना सामन लिए

अमन ने पीछे देखा तो रजनी और एक औरत के साथ बैठी हुई थी,

अमन- चची बुआ को सामान देने जार है हु

रजनी- इतना सामान कैसे लेकर खड़ा रहेगा,

रजनी ने अभी तक तुषार पैर धयान नहीं दिया था क्योकि वो थोड़ा पीछे था, तभी दूसरी औरत बोली अरे अमन तू इधर बैठ जा सामान लेकर मैं कड़ी हो जाती हु, रजनी ने सुर्प्रीस्ली उसे देखा, और आंको में hi पूछा इतनी महेरबानी किसलिए, उस औरत ने कोई जवाब नहीं दिया और कड़ी हो गई, अमन झट से बैठ गया,

अमन- तुषार ये गुड़ का बैग मुझे दे दे, मैं इसे गॉड में रख लूंगा चावल वाला निचे रख दे,

तुषार का नाम सुनते hi रजनी ने उस तरफ देखा तो तुषार को खड़ा पाया, रजनी की हालत ख़राब हो गई वो झेप गई, तुषार का धयान भी रजनी पैर गया, लेकिन उसने जरा भी ऐसा नहीं दिखाया की उससे नफरत करता ह या उसके दिल में उसके लिए कुछ और ह, तुषार ने बड़ी शालीनता से मुस्कुरा क्र रजनी को नमस्ते बोलै, एक बार तो रजनी बहुत चौक गई लेकिन उसने एक फीकी सी मुस्कान के साथ नमस्ते स्वीकार किया,

वो दूसरे औरत तुषार के बिलकुल नजदीक कड़ी हो गई, भीड़ काफी थी सब एक दूसरे से सटे खड़े थे, तुषार नार्मल खड़ा था रजनी बार बार तुषार को देखे जार hi थी, उसे विश्वास नहीं हो रहा था जिस लड़के को उससे नफरत करनी चाहिए थी वो ऐसा व्यव्हार क्र रहा था जैसे कुछ हुआ hi न हो, वही वो औरत तुषार से लगभग चिपक hi गाइट hi,

भीड़ की वजह से किसी का धयान नहीं गया उधर, अब वो औरत तुषार के बिलकुल सामने आ गई थी, उसने अपनी कमर पीछे सीट से लगा ली और तुषार बिलकुल उसके सामने था, वो बस तुषार को देखे जार hi थी, तुषार कोशिश क्र रहा था खुद को सीधा खड़ा रखने की लेकिन भीड़ उसे ऐसा करने नहीं दे रही थी, बार बार तुषार उस औरत से टकरा जाता, और औरत की चूचिया तुषार की चेस्ट में डाब जाती, तुषार शर्मा जाता लेकिन वो औरत बिलकुल नहीं शर्मा रही थी,

इस धक्का मुक्की में तुषार का लुंड खड़ा हो चुक्का था, तभी बस रुकी और कुछ लड़के और चढ़ गए वो जैसे hi आगे बढे तो धक्का तेज लगा जिससे तुषार पूरा उस औरत से चिपक गया, औरत की चूचिया पूरी तरह तुषार की छाती में डाब गई, तुषार का खड़ा लुंड औरत की छूट के उप्पेर डाब गया, दोनों के मुँह एक दूसरे को क्रॉस क्र गया, तभी उस औरत ने तुषार के गाल पैर अपनी हॉट रगड़ दिए,

तुषार एक दम से चौक गया, औरत की हरकत रजनी ने भी देख लिट् hi, वो भी चौक गई, उसने उस औरत को हाथ मारा, लेकिन वो तो किसी और hi दुनिया में थी, वो पुरे रस्ते तुषार के खड़े लुंड का मजा लेती रही, तुषार की भी हालत ख़राब थी, तभी बस रुक गई सिटी आ चुक्का था, तुषार ने जल्दी से चावल का बेग उठाया और बहार को चल दिया वो औरत कड़ी मुस्कुराती रही,

जब सब उतर गए तो

रजनी- कविता ये क्या क्र रही थी तू

उस औरत का नाम कविता था

कविता- कुछ नहीं भें जी बस अपनी मनोकामना पूरी क्र रही थी

रजनी- ये कैसी मनोकामना थी चलती बस में इतनी भीड़ में एक अनजान लड़के के साथ ऐसी हरकत

कविता- नहीं नहीं ये मेरी मनोकामना नहीं थी,

रजनी- फिर

कविता- इस लड़के के साथ मजा लेने की मनोकामना ह मेरी बस उसी का मज अले रही थी, फिर पता नहीं मिलेगा या नहीं

रजनी- तू जानती ह इसे ये कोण ह

कविता- नहीं भें जी

रजनी- तू बोल क्या रही ह मेरी तो कुछ समझ आ नहीं रहा

कविता- आपको याद ह मैं ीक लड़के के बारे में बताया था मुझे ऑटो में मिला था उसका लुंड ुकि पेण्ट में खड़ा था इतना मोटा और तगड़ा था की मैं उसे देख क्र hi गीली हो गाइट hi,

रजनी- है क्या क्या ये वही था सच में

कविता- है भें जी ये वही था आज तो अच्छे से महसूस किया मैंने उसका लुंड, उफ्फफ्फ्फ़ मैं तो खड़े खड़े hi झाड़ गाइट hi, लुंड नहीं कोई मुसल ह उसके पास

ये वही औरत थी जो तुषार को ऑटो में मिली जब वो पहेली बार रजिया के साथ घर की सफाई करने आया था, और रजिया की बातो से उसका लुंड खड़ा हो गया था, कविता ने hi उसे मस्त लुंड का इशारा किया था, तुषार ने तो उसे नहीं पहचाना था लेकिन कविता के दिल में उसकी सूरत और वो लुंड बस गया था,

रजनी- मैं तो सोच रही थी तू ऐसे hi बढ़ा चढ़ा क्र बोल रही थी,

कविता- भें जी अगर बढ़ा चढ़ा क्र बोलती तो ऐसे भरी भीड़ में खुद को रुस्वा करवाने का रिस्क न लेती

रजनी- वही तो मैं भी सोच रही हु

कविता- वैसे उसने आपको नमस्ते किया आप जानती हो क्या उसे

रजनी- नहीं नहीं मैं कैसे जानूँगी वो तो हो सकता ह अमन की वजह से नमस्ते किआ हो

कविता- ह्म्म्मम्म

रजनी- चल अब



फिर दोनों चली गई
 
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गुड मॉर्निंग आल फ्रेंड्स

सभी को कहानी पसंद आ रही होगी उम्मीद करती हु सबकी उमीदो पैर खरी उतर सकू
 
बहुत बहुत धन्यवाद् आप सभी का मेरी स्टोरी को इतना प्यार देने के लिए

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अपडेट-29






तुषार और अमन चले गए अमन की बुआ के घर, वह सामान देकर नाश्ता करके दोनों वापस चल दिए, दोनों पैदल जा रहे थे, दोनों शहर की सेक्सी सेक्सी कपड़ो में लड़कियों को ताड़ते जा रहे थे, तभी तुषार ने देखा एक बाइक पैर एक फॅमिली जा रही थी जिसमे हस्बैंड वाइफ और 2 बचे बैठे थे, तभी पीछे से एक तेज कार आई और बाइक में साइड मर क्र दी, बाइक वाला गिर गया, बाइक फिसलती हुई काफी दूर जा क्र गिरी, बाइक पैर बैठी औरत वही गिर गई, उसकी गॉड में बचा था, आदमी बाइक के साथ फिसल गया, और दूसरे बच्चा उछाल क्र दूर जाकर गिरा,

बाइक के गिरते hi पब्लिक उधर भागी, तुषार और अमन भी उधर भागे तो तुषार ने भाग क्र आदमी को उठाया अमन ने औरत और बच्चे को उठाया

तुषार- ू भें के लोडे देख क्र नहीं चल सकते क्या मादरचोद

तभी तुषार का धयान दूसरे बच्चे पर गया जो दूर गिरा था, वो रोटा हुआ उठ गया उसके सर में चोट थी, तभी तुषार को कार आती दिखी, तुषार उस तरफ भगा क्योकि बच्चा भी रोटा हुआ अपनी माँ की तरफ चल दिया था, शायद कार वाले ने बच्चे को देखा नहीं, जैसे hi कार बच्चे के पास आई तो तुषार ने उछाल क्र बच्चे को बहो में भर लिया, एक दम कार के ब्रेक लगे, ब्रेक की आवाज दूर तक सुनी जा सकती थी,

फिर भी तुषार बच्चे को लिए कार से टकरा गया और दूर जाकर गिरा, तुषार के हाथ और सर में चोट आ गई थी, पब्लिक और गुस्से में कार की तरफ भागी तो ड्राइवर बहार निकला और हाथ जोड़ क्र खड़ा हो गया लोगो ने उसमे 2-4 थपड मर दिए, तभी पीछे से एक और कार आई उसने उस कार में टक्कर मर दी, टक्कर लगते hi लोग इधर उधर छिटक क्र दूर हो गए, तभी कार में से कुछ लड़के निकले और गली देते हुए ड्राइवर के पास आकर उसे मरने लगे,

बहनचोद दीखता नहीं ह क्या भोसड़ी के, तभी पहेली कार में से एक बहुत hi खूबसूरत लड़की उत्तरी , ीीय काया बतमीजी ह ये,


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लड़का – ोोू मैडम

तभी तुषार लड़खड़ता हुआ आ गया, वो लड़की भाग क्र तुषार के पास पहुंची, श्री श्री श्री श्री सर, वो गलती से हो गया, आपको चोट तो नहीं आई

वही वो लड़के, ो भोसड़ी के तू hi गली दे रहा था न,

ये वही कार वाले थे जिन होने उस बाइक वाले को टक्कर मरी थी,

तभी अमन आया तुषार तू ठीक ह,

तुषार- है मैं ठीक हु तू इस बचे को देख जरा और बाकि सब ठीक ह न

अमन- है भाई वो ठीक ह

अमन बच्चे को ले गया

लड़की- तुम लोगो को तमीज नहीं ह क्या

लड़का- ू मैडम ज्यादा हेरोइन न बनो,

तुषार- तुम लोगो में इतनी भी शर्म नहीं ह की किसी को चोट लगी ह उसे रुक क्र देख ले बस भाग गए वह से

लड़का- सड़क के बिच में चैलेंज तो सेल मरेंगे hi तू मंत्री क्यों बन रहा ह

लड़की- कितने बेशरम हो मैं अभी पुलिस को कॉल करती हु

लड़का- दिखाऊ क्या अपनी बेशर्मी अभी यही तुझे झुका क्र ठोकना शुरू क्र दूंगा फिर देखना कितना बेशरम हु मैं

उस लड़के का इतना बोलना था की तुषार ने उसकी गार्डन पकड़ी और अपनी बगल में दबा ली और घुमा क्र अपनी कमर पैर उठाया और निचे सड़क पैर पटक दिया,


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ये सब इतनी जल्दी हुआ की सभी भोचके से खड़े रह गए, वो लड़की भी एक दम चौक गई

तुषार- सेल तुझे किसी से बात करने तक की तमीज नहीं ह एक तो एक्सीडेंट क्र दिया उप्पेर से अकड़ दिखा रहा और लड़कियों से बत्तमीजी भी क्र रहा ह,

तभी लड़के के दोस्त भाग क्र आये, तुषार भी तैयार था उसने इतनी फुर्ती से हाथ चलाया की एक लड़के की नाक पर घुसा मर दिया, नाक से खून निकलने लगा वो तो वही गिर गया, दो लड़के और ए, उसमे से के ने तुषार के पेट में लात मरी, तुषार थोड़ा सा लड़खड़ाया, लेकिन तुरंत hi सम्हाल क्र वो दोनों पैर कूद पड़ा, और दोनों की गार्डन दबोच ली,


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तभी पीछे से सबस ेफेले वाले लड़के ने एक पठार तुषार की मर दिया, अब तक पब्लिक भी जोश में आ गई थी, भीड़ में उन लड़को क दबोच लिया, तुषा रके सर से खून निकलने लगा,

लड़की ने तुरंत अपनी कार से एक अटल निकला और तुषार के सर पैर रख क्र दबा लिया, अब तक पुलिस भी आ चुकी थी पूरी सड़क पैर जैम लग चुक्का था,

पब्लिक ने चारो लड़को को पुलिस को दे दिया वो बाइक वाली फॅमिली भी चली गई इधर लड़की का ड्राइवर- अलका मंसब चलिए यहाँ से

ये अलका चोपड़ा थी, झगडे की वजह से तुषार ने उसे देखा नहीं था

अलका- पहले हम डॉ. के पास जायेंगे इन्हे लेकर

तुषार- मैं ठीक हु मिस आप जाइये

अलका- नहीं गलती हमारी भी थी और गलती न भी होती फिर भी मैं आपको इस हालत में नहीं छोड़ सकती थी

अलका तुषार को जबरदस्ती कार में बैठा क्र डॉ. के पास ले गई, बहुत ज्यादा चोट तो नहीं थी लेकिन पत्तिया तो बांध hi गाइट hi, तुषार को चोट का दर्द नहीं था बस घर का दर था,

अलका- बहुत बहादुर हो आप

तुषार- ऐसी कोई बात नहीं ह बस गलत को गलत बोलना सिखाया ह मेरी माँ ने

अलका- बहुत सही सिखाया ह आज के टाइम में गलत को गलत बोलने वाले नहीं मिलते सब सर झुका क्र निकल जाते हैं

तुषार- आप भी काफी हिम्मत वाली हैं

अलका- बस मुझे भी गलत बाते पसंद नहीं ह

अच्छा आप रहते कहा ह मैं आपको छोड़ देती हु

तुषार- मैं तो काफी दूर रहता हु बस से चला जाऊंगा आप परेशां न हो,

अलका- इसमें परेसहनी की क्या बात ह आपके लिए इतना तो क्र hi सकती हु

तुषार- नहीं नहीं आप टेंशन मत लीजिये हम चले जायेंगे

अलका- ठीक ह ये मेरा कार्ड रखिये आपको कभी किसी तरह से मेरी जरुरत हो तो जरूर बताइयेगा मुझे बड़ी ख़ुशी होगी,

फिर तुषार और अमन वह से निकल गए तुषार ने सबसे पहले अपनी पत्तिया छोटी करवाई दूसरे डॉ. से क्योकि घर जाकर उसे डाट पड़ने वाली थी,

शाम को वही हुआ सभी एक साथ तुषार पैर चढ़ गई, अंजलि ने थोड़ा काम डाटा बस इतना बोलै ऐसे चोट खायेगा तो मजबूत कैसे बनेगा, आगे से तुझे चोट नहीं लगनी चाहिए, बाकि सब ने अच्छी खासी डाट लगाई,

वही रात में अलका फ़ोन पैर अपनी बहन वर्षा से बात क्र रही थी

अलका- दीदी आज लाइफ में पहेली बार कोई ऐसा मिला ह

वर्षा- ऐसा कोण मिल गया

अलका- दीदी बहुत hi बहादुर लड़का था, और ताकत भी बहुत थी एक लड़के को ऐसे उठा क्र पटक दिया जैसे खिलौना हो, स्मार्ट भी काफी था और अच्छे तो इतनी की दुसरो के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं की,

वर्षा- तू कुछ ज्यादा hi बढ़ा चढ़ा रही ह

अलका- दीदी मैं सच बोल रही हु इंसान की साडी क्वालिटीज़ एक hi बन्दे में मिलना इम्पॉसिबल होता ह लेकिन इस लड़के में वो सब देखा मैंने

वर्षा- तू तो पागल हो गई ह दिल तो नहीं दे बैठी कही

अलका- दीदी आप भी न ऐसा कुछ नहीं ह बस कोई ऐसा पहेली बार मिला ह इसलिए इम्प्रेस हु

वर्षा- अगर तू किसी से इम्प्रेस ह तो जरूर कुछ बात होगी उसमे

अलका- बात तो ह दी

वर्षा- अच्छा अब सो जा और ऐसे झगड़ती मत फिर क्र किसी से

अलका- मैं नहीं झगड़ी वो लोग आये थे

वर्षा- अच्छा अच्छा ठीक ह सो जा अब

अलका फ़ोन काट क्र अपने hi खयालो में खो गई

वही तुषार रात में अनीता से चैटिंग में लगा हुआ था, उसे समझ नहीं आ रहा था कैसे आगे बढे क्या करे,

अनीता- मेरा मन क्र रहा ह कही बहार घूम क्र औ तुम्हारे साथ

तुषार- अच्छा मेरे साथ क्यों अपने पति के साथ नहीं जाना छाती

अनीता- उनके साथ तो साडी जिंदगी हो गई घूमते हुए अब तुम्हारे साथ जाना ह

तुषार- मेरे साथ जाओगी तो कोई तुम्हे मेरी गर्लफ्रेंड कहेगा

अनीता- तो क्या हुआ कहने दो

तुषार- अच्छा जी मतलब इतनी खूबसूरत लेडी अब मेरी गर्लफ्रेंड ह

अनीता- मैंने ऐसा कब कहा

तुषार- और क्या कहा आपने

अनीता- अच्छा तुम्हारी कितनी गिर्ल्फ्रेंड्स हैं

तुषार- आप पहेली हो

अनीता- अच्छा झूठे इतने स्मार्ट हो तुम्हारी कोई गफ नहीं ह ऐसा हो hi नहीं सकता

तुषार- अब क्या करू शायद किसी और को मैं स्मार्ट लगता hi न हु,

अनीता- चलो कल मिलती हु दोपहर को फिर बात करुँगी कल पूरा दिन तुम्हारे साथ hi बिताउंगी

तुषार- अच्छा जी ऐसा क्या ह कल

अनीता- कल अम्मा जा रही ह 1 वीक के लिए तो यहाँ कोई रोकने वाला नहीं होगा

तुषार- ओहो अम्मा से डर्टी हो आप

अनीता- वो सास ह मेरी डरना तो पड़ेगा न

तुषार- सही बता ह चलो कल मिलते हैं

अगले दिन सभी ब्रेकफास्ट क्र रहे थे,

रूचि- माँ कल नया साल ह कॉलेज की छुट्टी ह कही घूमने कहते हैं न

दीपा- है माँ, पापा आप भी छुट्टी ले लो न कल सब साथ रहेंगे मजा आएगा

अंजलि- ठीक ह कल हम सब साथ रहेंगे सीमा तू भी छुट्टी ले लेना

सीमा- मेरी छुट्टी ह कल

अंजलि- बस तो आप भी छुट्टी ले लो कल सब घूमने चैलेंज,

राजेश- जरूर अपने परिवार के साथ टाइम बिताने का इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा,

तुषार- पापा आप खुश ह न

अंजलि- ये कैसा सवाल ह

राजेश- बीटा मैं बहुत खुश हु मैं तुम लोगो को सुख और आराम की जिंदगी नहीं दे पाया लेकिन तुम सब ने मुझे hi इतनी खुशिया दे दी की मैं फुला नहीं समां रहा,

अंजलि- भवनों को रोको ये सब आपकी वजह से hi ह आप नहीं तो कोई खुशिया नहीं

राजेश- बस दुःख ह पता नहीं कब इस गरीबी से आगे बढ़ पाएंगे, कब मेरे बच्चे आराम की जिंदगी काट पाएंगे, कैसे मैं सबकी शादिया करूँगा

रूचि- पापा आपने जो किया ह और जो क्र रहे हैं वो दुनिया में कोई पिता नहीं क्र सकता और हममे से किसी को शादी नहीं करनी हम सब आपके साथ रहेंगे,

अंजलि- उफ्फ्फ ये बच्चे बस बहुत हो गया, काश सचिन और कपिल भी यही होते तो कितना अच्छा रहता, चलो अब देर हो रही ह

फिर सभी चले गए, दोपहर में अनीता तुषार से मिली और दोनों चल दिए कार में बैठ क्र घूमने, आज तुषार कुछ सोच क्र आया था,

तुषार- आप बहुत खूबसूरत हैं अनीता जी

अनीता- ओह्ह फ्लिर्टिंग क्र रहे हो

तुषार- आप मेरी गर्लफ्रेंड हो तो इतना तो क्र hi सकता हु और टैरिफ hi क्र रहा हु,

अनीता- ठंकु जी लेकिन मैं गर्लफ्रेंड कब बानी

तुषार- रात hi तो बानी थी आपने hi तो कहा था जिसको जो समझना ह समझने दो

तुषार ने अपना हाथ अनीता की जांघ पैर रख दिया, अनीता को एक तगड़ा झटका लगा, उसने तुरंत तुषार का हाथ हटा दिया,

तुषार- श्री बुरा लगा क्या

अनीता- तुषार हम बस दोस्त हैं, मैं शादी शुदा हु तुमसे बहुत बड़ी भी हु

तुषार- ये बात दोस्ती करते टाइम तो नहीं कही थी आपने तब तो बोली आगे मायने नहीं रखती

अनीता- तुषार जैसा तुम समझ रहे हो मैं ऐसा नहीं सोचती

तुषार- वही तो जानना चाहता हु आप क्या सोचती हैं

अनीता- मैं बस दोस्त मानती हु तुम्हे

तुषार- लेकिन क्यों आप दोस्त क्यों मानती ह, ऐसा क्या देख लिया मुझमे की आपने पहेली hi मुलाकात में दोस्ती करनी चाही, आप अपनी लाइफ में लाखो लोगो से मिली होंगी लेकिन मुझसे hi क्यों

अनीता चुप हो गई वो बस आगे देखती जार hi थी, और कार चलाये जार hi थी,

तुषार- मैं कुछ पूछ रहा हु अनीता जी, आप मुझे दोस्त मानती ह और मुझसे hi झूट बोल रही हैं,

अनीता- ी ऍम श्री तुषार लेकिन मैं….

तुषार- अगर आप मुझे सच में दोस्त मानती ह तो दोस्ती के नाते बताइये वर्ण मुझे यही उतर दे मैं झूट के रिश्ते नहीं धो सकता

अनीता- मेरी दोस्ती झूटी नहीं ह लेकिन मैं किसी और कारन से तुम्हारे सामने आई

तुसाहर- वही कारन जानना ह क्योकि आप बड़ी ह लेकिन बच्चा मैं भी नहीं हु

अनीता- मैं तुम्हे सब बताती हु लेकिन मेरी बात सुनकर दोस्ती मत तोड़ देना

तुषार- अगर आप सच्ची दोस्त ह तो मैं कभी नहीं तोडूंगा

अनीता- मैं किसी तरह यश से छुटकारा पाना छाती थी

तुषार- मतलब?

अनीता- यश एक बहुत hi गिरा हुआ इंसान ह, औरतो की इज्जत करना तो इस परिवार में किसी ने नहीं सीखा, मैं बहुत खूबसूरत थी और फॅमिली गरीब थी यश ने मुझे एक बार गाओं में देखा और शादी के लिए पीछे पद गया, मैं भी उसका स्टेटस देख क्र उससे शादी को तैयार हो गई, लेकिन कुछ hi टाइम में उसके रंग दिखने लगे उसे दूसरी औरतो के पास जाने से रोक नहीं पाई मैं, अम्मा को बताया वो भी कुछ नहीं क्र पाई, माँ बाप गरीब थे तो मुझे सेना पड़ा,

हमारी बेटी हो गई, विदेश में यश हमेशा हवस में डूबा रहता मेरे पास बस अपनी प्यास बुझाने आता, विदेश में लड़किया मिलना बहुत आसान ह, विदेशी रंग मेरी बेटी पैर भी चढ़ने लगा वो भी गलत रस्ते चल पड़ी वह 16 की आगे में hi सेक्स की परमिशन मिल जाती ह तो उसने बर्फ बना लिए, मैं उस घर में एक नौकरानी की तरह हो गई, न पति इज्जत करता न बेटी, अजय भी ऐसा hi था उसकी नज़ारे और भी गन्दी बस पता नहीं कैसे मैं खुद को उससे बचती आई हु, बस वो अपनी वाइफ से डरता ह क्योकि वो वह अच्छी पैसे वाली ह, जब मैं यहाँ आई तो तुम्हारी फॅमिली को देखा और यश और अजय की नजरे भी देखि, तुम लोगो का व्यव्हार देखा बगावत वाला,

फिर तुम मुझे घर पैर मिले तो लगा तुम इन लोगो से तुम लड़ सकते हो, फिर तुमने अजय की पिटाई की तो मेरी उम्मीद और जग गई मुझे लगा मैं तुम्हारे सहारे यश के चंगुल से निकल सकती हु, बस इसी लिए मैंने तुमसे दोस्ती की.

तुषार- आपने पुलिस का सहारा क्यों नहीं लिया

अनीता- अपनी बेटी के प्यार की वजह से मुझे बस यही दर था मेरी बेटी का क्या होगा, लेकिन मैं उसे भी नहीं रोक पाई

तुषार- मेरे सहारे कैसे क्र सकती हो मैं क्या हेल्प क्र पाउँगा इसमें

अनीता- पता नहीं बस मेरे दिल से एक hi आवाज आ रही थी की ये hi मेरी हेल्प क्र सकता ह

तुषार- तो आपकी दोस्ती बस मतलब के लिए थी

अनीता- है शुरू तो मतलब के लिए hi हुई थी लेकिन अब मैं दिल से तुम्हे दोस्त मानती हु

तुषार- अब कैसे विश्वास हो

अनीता- कैसे यकीन दिलो तुम्हे, अगर तुम्हे लगता ह मेरा शरीर पाकर तुम्हे यकीन हो जायेगा तो मैं वो भी करने को तैयार हु दोस्ती के लिए

तुषार- हहहहहह आपने मुझे यश समझा ह क्या, मैंने आपको हाथ बस ये hi जानने के लिए लगाया था की आप क्या चाहती ह, मुझे कुछ नहीं चाहिए मेरी माँ ने मुझे विश्वास करना सिख्या ह विश्वास तोडना नहीं, और आपकी आँखों में मुझे सच दिख रहा ह

अनीता- ठंकु तुषार मेरे दिल का बोझ काम हो गया आज

तुषार- लेकिन अब आप करेंगी क्या कैसे छुटकारा पाओगी यश से

अनीता- पता नहीं मैं बस अपनी बेटी को सही रस्ते पैर लाना चाहती हु उसे कैसे सम्हालू ये समझ नहीं आ रहा

तुषार- आप मुझे उसके बारे में खुल क्र बताइये कैसी ह वो क्या करती ह

अनीता- कैसे बताऊ एक माँ अपनी hi बेटी के बारे में कैसे कहे की वो क्या बन गई ह

तुषार- मैं आपका दोस्त हु दोस्त को बता सकती हो

अनीता- वो अब तक काफी बर्फ बना चुकी ह, मुझे तो कुछ समझती hi नहीं उसे रोकने की कोशिश करती हु तो बोलती ह मुझे तुम्हारे जैसी जिंदगी नहीं जीनी, मुझे लाइफ में कुछ अलग करना ह,

मैं बोलती हु की बर्फ बदल बदल क्र क्या अलग क्र रही ह तू, तो बोलती ह कोई भी मुझे अलग फील नहीं करवा पता इसलिए दूसरा ढूढ़ना पड़ता ह, तुम नहीं समझोगी माँ तुम तो खूंटे से बढ़ी हु गे हो तुम्हे लाइफ के मजे का क्या पता,

अब तुम hi बताओ तुषार कैसे समझू उसे लाइफ के बारे में,

तुषार- जितना मैं समझ रहा हु उसके अंदर सेक्स अपील बहुत ज्यादा ह लेकिन सतिशफैक्शन ठीक से नहीं मिला, श्री मुझे कहना पद रहा ह ये सब

अनीता- कोई बात नहीं

तुषार- मेरे पास तरीका ह लेकिन उसके लिए आपको अपने दिल पैर पत्थर रखा पड़ेगा

अनीता- मैं कुछ भी करने को तैयार हु

तुषार- ठीक ह फिर जैसा मैं बोलू करती जाना फिर तुषार ने उसे कुछ समझाया

तुषार की बात सुनकर अनीता अचम्भे से तुषार को देखती जा रही थी,

अनीता- ये सब मैं कैसे

तुषार- मुझे ये hi समझ आ रहा ह, बाकि सही ह या गलत पता नहीं

अनीता- अब जो भी होगा देखा जायेगा मैं तैयार हु

तुषार- चलो अब वापस चलते हैं बहुत दूर आ गए हैं घर पहुंचने में देर हो जाएगी

फिर दोनों वापस आ गए, शाम को सभी एक साथ बैठे थे,

अंजलि- बच्चो पढाई कैसी चल रही ह तुम सब की

सब एक साथ मस्त

ानिजली- सीमा तेरी जॉब कैसी चल रही ह

सीमा- अच्छी ह माँ

अंजलि- तूने अब तक क्या सीखा वह

सीमा- माँ मैं सेक्रेटरी हु तो सब काम सिख गई

अंजलि- केवल अपना काम सीखना hi जरुरी नहीं होता जॉब में, आस पास देखो वो सब सीखो, बिज़नेस करना सिख वह

सीमा- हमे कोनसा बिज़नेस करना ह जो सिखु

अंजलि- आज नहीं करना लेकिन फ्यूचर किसने देखा ह क्या पता फ्यूचर में करना पड़े

सीमा- हमारी इतनी औकात कहा ह जो हम बिज़नेस करेंगे

अंजलि- गुस्से में सीमा तमीज से बात क्र

रूचि- दी हम सब साथ ह इससे बड़ी दौलत ह क्या किसी के पास, लोगो के पास पैसा होता ह लेकिन प्यार नहीं हमारे पास प्यार hi प्यार ह,

फिर सभी अपने काम में लग गए, अगले दिन अंजलि ने जल्दी उठा क्र खाने पिने का इंतजाम किया और फिर सभी निकल गए घूमने, पास में एक पहाड़ी इलाका था वही सब घूम रहे थे, मस्ती क्र रहे थे, तभी तुषार के फ़ोन पैर अनीता की कॉल आई,

तुषार- hello डिअर हैप्पी नई ईयर

अनीता- तुषार तुम कहा हो इस वक़्त

तुषार- क्या हुआ इतनी घबराई हुई क्यों हो

अनीता- जल्दी बताओ

तुषार- मैं फॅमिली के साथ बहार घूमने आया हु

अनीता- जल्दी से अपने घर पहुँचो फॅमिली को लेकर

तुषार- क्या हुआ

अनीता- ये नहीं पता लेकिन वह जरूर कुछ होने वाला ह यश और अजय आये हुए हैं यहाँ जल्दी से पहुँचो

तुषार दौड़ क्र अंजलि के पास पंहुचा माँ हमे जल्दी चलना ह

अंजलि- क्या हुआ

तुषार- माँ ये नहीं पता लेकिन घर पैर कुछ प्रॉब्लम ह अजय और यश वही जा रहे ह अनीता की कॉल थी

तभी रजिया की साल आ गई

तुषार- hello चची

रजिया- तुषार कहा ह

तुषार- क्या हु चाही मैं बाहर हु

रजिया- जल्दी से घर पहुंच मैं भी पहुंच रही हु

अंजलि- क्या हुआ

तुषार- माँ रजिया चची भी ये hi बोल रही ह जल्दी से घर पहुंच

अंजलि ने तुरंत सामान पैक किया और सभी जल्दी से घर की तरफ ऑटो लेकर चल दिए, जैसे hi घर के सामने पहुंचे तो देखा अजय और यश खड़े हैं दरवाजा खुला पड़ा ह और कुछ आदमी घर का सामान बहार फेंक रहे हैं

राजेश भाग क्र पंहुचा ये क्या क्र रहे हो

यश- आइये आइये राजेश बाबू

राजेश- ठाकुर शाहब ये सब क्या ह

अजय- हैट भोसड़ी के ये घर हमारा ह अब

अंजलि- अजय जबान सम्हाल क्र बोल

अजय- साली तेरी तो

तभी राजेश ने अजय की गार्डन पकड़ क्र दबा दी, जबान सम्हाल क्र बोल

अजय के आदमी राजेश को लिपट गए पीछे से तुषार भी कूद पड़ा, दोनों बाप bête ने यश के आदमियों को कुछ hi देर में पटक दिया, तभी एक आदमी ने राजेश के सर में डंडा मर दिया, तुषार को और गुस्सा आ गया तुषार ने वही एक डंडा उठाया और टूट पड़ा सब पैर वो पागल सा हो गया था, उसके सामने जॉब hi आ रहा था बस खून से लतपथ होकर जार है था,

तुषार- चिल्ला क्र बोला ख़बरदार मेरे पापा को हाथ भी लगाया तो महादेव की कसम जान से मर दूंगा,

तुषार का रूप देख क्र यश के आदमियों की गांड फैट गई,


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तभी वह पुलिस आ गई,

और पुलिस ने तुषार और राजेश को गिरफ्तार क्र लिया,

अजय- ये देखिये इंस्पेक्टर इसने हमारे आदमियों की कितना मारा ह

अंजलि- इंस्पेक्टर साहिब इन लोगो ने हम पैर हुम्ला किया था

इंस्पेक्टर- ये सब ठाणे में बोलना

अंजलि- लेकिन आप मेरी बात तो सुनिए

इंस्पेक्टर- ये तुझे समझ नहीं आता क्या ज्यादा जबान चला रही ह तुझे भी अंदर क्र दूंगा

तुषार ने इंस्पेक्टर की गार्डन पकड़ ली- जान से मार दूंगा तुझे

इंस्पेक्टर- पकड़ो सेल को इसे आज मैं मजा चखता हु

तभी पीछे से इमरान और रजिया आ गए,

इमरान ये सब क्या हो रहा ह

राजेश- इमरान भाई देखो ये सब हमारा सामान बहार फेंक रहे ह

इमरान- वो राजेश भाई मैंने ये माकन इन्हे बेच दिया

अंजलि- लेकिन आप ऐसा कैसे क्र सकते हो

इमरान- मुझे अच्छे पैसे मिल रहे थे तो मैंने बेच दिया

अंजलि ने तुषार से फ़ोन ले लिया और अलग चली गई

राजेश- लेकिन आपको हमे बताना तो चाहिए था

रजिया- देखिये इन्हे टाइम तो दीजिये सामान निकलने का

अजय- अब ये घर हमारा ह, इंस्पेक्टर ले जाइये इन्हे हम आते ह आपके पास

पुलिस दोनों को ले गई,

अंजलि एक बेग पैर बैठ गई और गुस्से में अजय को देखती रही, अजय मुस्कुराता हुआ अंजलि को देख रहा था, निकालो रे सामान बहार

तीनो भेने अंजलि के पास hi बैठी थी, रजिया अंजलि के पास आई,

रजिया- माफ़ क्र दो बहन मैं कुछ नहीं क्र पाई मुझे ठीक से खबर भी नहीं लगी,

अंजलि- तुम कुछ क्र भी नहीं पति इस साजिश में, बस इतना बताओ घर पैर पैसे पहुंच गए क्या

रजिया- अभी तो कोई पैसे नहीं पहुंचे

अंजलि- ठीक ह

काफी देर तक चारो माँ बेतिया ऐसे hi बैठी रही,

यश- ेय्य ये सामान उठाओ और निकलो यहाँ से

सीमा- माँ चलो यहाँ से देख ली हमारी ुकात क्या मिला हमे गाओं में थे तो खुश तो थे,

दीपा- सीमा तेरी अकाल में भूसा भरा ह क्या

सीमा- तो क्या कहु बिना पैसे के ये hi होता ह, गीरीबो की कोई नहीं सनटैन, पापा और भाई जेल में हम यहाँ घर से बहार क्या करेंगे

तभी एक कार आकर रुकी बंव कर थी, कार को देखते hi सब लोग थोड़े चौक से गए, कार में से एक 50-52 साल का आदमी उतरा

आदमी- hello यहाँ क्या हो रहा ह

यश- आप कोण हो भाई साहब

आदमी- मेरा नाम सुमित महेता ह मैं यहाँ एक प्रॉपर्टी देखने आया था तो यहाँ भीड़ देख क्र रुक गया ये घर बिकाऊ ह क्या

यश- ये घर हमने खरीद लिया अभी अभी

आदमी- ओह्ह्ह मेरे बड़े काम का होता ये घर, आपने कितने में लिया मैं 2-4 लाख ज्यादा दे दूंगा

यश- हमने 30 का लिया

सुमित महेता- ओह्ह काफी सस्ता मैं तो 40 के आस पास समझ रहा था

40 सुनते hi सभी एक्सीटेंड हो गए,

इमरान- क्यों झूट बोल रहे हो यश भाई अपने तो मुझे 25 देने को बोलै था

सुमित- बस 25 मैं अभी 40 दे सकता हु

अजय- है है तो हम तुम्हे बेच देंगे

इमरान- तुम कैसे बेच डोज घर मेरा ह

अजय- तूने हमे 25 में बेच दिया न

इमरान- लेकिन तुमने कोई पैसा तो नहीं दिया न बिना पैसे कैसे बिका

अजय- लेकिन बात तो हो गई न

सुमित- कोई एग्रीमेंट बन गया क्या

इमरान- नहीं कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ

सुमित- फिर तो मालिक आप hi ह

अजय- इमरान तू अपनी औकात भूल रहा ह जनता ह किस्से पन्गा ले रहा ह

इमरान- ोोू ठाकुर जरा सम्हाल क्र मुझे राजेश समझने की गलती मत करना ये घर मेरा ह समझे

तभी यश ने इमरान की गाला पकड़ लिया, और चमत्कारी रूप से फिर पुलिस आ गई, ये क्या हो रहा ह यहाँ

रजिया- साहब ये लोग हमारे घर पैर कब्ज़ा करना चाहते ह और हमारे परिवार वालो ने रोका तो उन्हें hi मर पिट क्र ठाणे भिजवा दिया

यश- ये क्या बोल रही ह तेरे पति ने हमे घर बेचा था

रजिया- नहीं हमने तो इन साहब को बेचा घर

इमरान- है है साहिब ये कब्ज़ा क्र रहे हैं
 
अपडेट-30


ये कोई पुलिस का बड़ा अधिकारी था उसने तुरंत ठाणे फ़ोन मिलाया और उस इंस्पेक्टर को बुलवा लिया राजेश और तुषार के साथ,

अधिकारी- ये सब क्या ह इंस्पेक्टर तुम ऐसे hi किसी को अंदर क्र डोज

इंस्पेक्टर- सर ये सर

अधिकार- शट उप, अभी छोड़ो इन्हे और माफ़ी मानगो सबसे, और इन लोगो को अंदर करो गुंडा गर्दी क्र रहे हैं यहाँ,

एक hi पल में पैसा पलट गया, इंस्पेक्टर को अजय और यश को उनके आदमियों सहित ठाणे ले जाना पड़ा, इंस्पेक्टर ने सबसे माफ़ी मांगी, तीनो बहन बड़ी खुश थी लेकिन अंजलि बस सब देखे जा रही थी,

सुमित- इमरान भाई तो सोडा पक्का ह न

इमरान- है भाई साहिब

थोड़ी देर बाद एक लड़का बाइक से आया और कुछ पप्पेर और एक बेग दिए सुमित को,

सुमित- तो ये लो इमरान भाई इन पैर सिग्न. करो और अपने पैसे गिनो

इमरान- इतनी जल्दी पप्पेर भी बन गए

सुमित- मैं एक बिज़नेस मन हु और वकील भी सरे काम पक्के करता हु आप पैसे गिनो,

इमरान ने तुरंत पैसे पकडे और पप्पेर पैर सिग्न किये और ख़ुशी से घर को चल दिया- चल रजिया कितना तगड़ा सोडा हुआ ह,

रजिया- लेकिन इन सब का क्या होगा

इमरान- मैं क्या क्र सकता हु

सुमित- मैं किसी को बेघर नहीं क्र सकता, आप लोग यही रह सकते हैं जब तक दिल करे इस प्रॉपर्टी की देख रेख भी होती रहेगी,

राजेश- नहीं साहिब हम अपना इंतजाम क्र लेंगे

अंजलि- नहीं हम यही रहेंगे ठंकु सुमित जी

सुमित- मुस्कुराते हुए मुझे ख़ुशी होगी, सुमित अपनी कार में बैठा और अंजलि को आवाज लगाई, एक बात सुनिए

अंजलि के पास गई और दोनों में कुछ बात हुई

तुषार- क्या हुआ माँ क्या बोल रहे थे

अंजलि- कुछ नहीं बस मैंने कहा की हम किराया दे दिया करेंगे

राजेश- ये ठीक किया

इमरान- चलो रजिया

रजिया- नहीं आप जाइये मैं ये सारा सम्मान अंदर रखवा क्र आउंगी

इमरान- तू मेरी बात काट रही ह

रजिया- आज जो आपने किया ह उसके बाद भी आप उम्मीद क्र रहे हैं मैं आपकी बात मनु

इमरान- दिखा ले ड्रामे आएगी तो घर पैर hi न

फिर सबने सारा सामान अंदर रखा, सभी खामोश थे, आज नए साल का पहला दिन था और उनके साथ पहले hi दिन ये क्या हो गया था,

रजिया सामान रखवा क्र चली गई, पूरा परिवार एक साथ बैठा था सब दुखी थे तभी राजेश की आँखों से आंसू भेने लगे

तुषार- नहीं पापा आप क्यों दुखी हो रहे हैं

राजेश- मेरी वजह से सबको ये दिन देखना पड़ा

तुषार- इसमें आपकी क्या गलती ह पापा

राजेश- अगर मैं कुछ पैसे वाला होता तो ये सब न होता हमारा अपना घर होता

सीमा- मैं भी तो यही खेती हु अगर हमारे पास पैसे होते तो हम सुख से जी पते

राजेश- मुझे माफ़ क्र दो बच्चो मुझे माफ़ क्र दो

दीपा- पापा ऐसा मत बोलो आप तो हमारा गर्व हो आपकी वजह से hi हम सर उच्चा करके चलते हैं

रूचि- पापा अगर आप टूट गए तो हमारा क्या होगा

राजेश- अब बर्दास्त नहीं होता मुझसे

अंजलि- बस प्लस शांत हो जाइये, रोयेंगे तो वो जिन्होंने गलत किया ह बहुत पछतायेंगे वो लोग बहुत पछतायेंगे, (गुस्से में ) बहुत हो गया अब बस अब समय आ गया ह,

सबने अंजलि की तरफ देखा अंजलि के फेस पैर गुस्सा देख क्र सबकी हालत ख़राब हो गई थी,

राजेश- लेकिन

अंजलि- नहीं बस बहुत सेह लिया आपने हमारे बच्चो ने अब नहीं

उधर अजय और यश ठाणे से छूट चुके थे क्योकि किसी ने उनके खिलाफ रिपोर्ट hi नहीं की, वो बहार खड़े थे गुस्से में आग बबूला हो रहे थे, तभी सुमित महेता की कार वह से गुजरी तो उसने कार रोक ली,

सुमित- ी ऍम श्री मैं तो प्रॉपर्टी खरीदना चाहता था आपका नुकसान नहीं, अगर आप पप्पेर रेडी करवा लेते तो आप फायदा हो जाता

अजय- अरे सर आप जाइये अभी मूड ठीक नहीं ह

सुमित- मैं तो जा रहा हु लेकिन आप लोगो का नुकसान हुआ ह तो सोच रहा था कुछ फायदा करवा दू

यश- कैसा फायदा

सुमित- मुझे इधर कुछ जमीन खरीदनी ह अगर तुम लोग मुझे दिलवा दो अच्छा कमीशन मिल जायेगा

अजय- हम दलाल नहीं ह समझे

सुमित- अरे भाई मैं तो फायदे की बात क्र रहा हु 25-30 करोड़ की जमीन खरीदनी ह तो कमीशन उतना hi बड़ा होता

25-30 करोड़ सुनकर यश और अजय दोनों के मुँह खुले रह गए,

वही अनीता भी उनके पास कड़ी थी जो उन लोगो को ठाणे से छुड़वाने आई थी,

अनीता ने यश के कान में कहा अपनी जमीन बेच दो न हमे तो वैसे भी विदेश में रहना ह, अच्छा पैसा मिल रहा ह,

शायद ये पहेली बार था जो यश ने अनीता की बात तुरंत मान ली, उसने तो पहले कभी उसकी बात सुनी भी नहीं थी,

यश- जमीन हमारे पास ह अगर आपको पसंद आये तो खरीद लेना

अजय- लेकिन अम्मा

यश- अब टाइम आ गया हिस्सा लेने का

सुमित- अरे वह ये तो बढ़िया ह तो चलो दिखाओ

अजय- अभी

सुमित- मुझे जल्दी ह खरीदने की किसी और की देखने ज ारः था पहले तुम्हारी देख लेता हु,

यश- है है चलिए

फिर वो लोग सुमित महेता को लेकर पहुंच गए गाओं और अपनी पूरी जमीन दिखाई,

सुमित- मुझे आपकी जमीन पसंद आई, और ये घर मुझे ये भी पसंद ह यहाँ मैं फैक्ट्री लगाऊंगा और ये मेरा गेस्ट हाउस बन जायेगा, अगर तुम लोग इसे भी बेचना चाहो

यश- लेकिन घर वो कैसे

सुमित- सोच लो

अनीता- सर हमे थोड़ा टाइम दीजिये तब तक आप कॉफ़ी पीजिये

सुमित को बैठा क्र तीनो कमरे में आ गए,

अनीता- क्यों नहीं अगर अच्छे पैसे मिलेंगे तो जरूर इसमें भी तो हिस्सा ह आपका और आपको यहाँ रहना ह नहीं विदेश में रहना ह तो ये किसके लिए छोड़ रहे हो

अजय- भाभी ठीक बोल रही हैं भैया इसमें भी

यश- लेकिन अम्मा नहीं ह अभी

अजय- तो क्या हुआ जमीन तो हम लोगो के hi नाम ह पिता जी के बाद हम तीनो के नाम चढ़ गई थी, बस ये घर और पीछे वाला हिस्सा अम्मा के नाम ह तो वो उनके आने के बाद बात क्र लेंगे पहले अपनी तो क्र ले

यश- ठीक कहता ह कितने पैसे डिमांड करे

अजय- ये 25-30 करोड़ की जमीन खरीदने को तैयार ह हमारी के 15 तो दे hi देगा,

यश- वैसे तो यहाँ के हिसाब से 10-12 करोड़ की ह इसकी कीमत, 15 मिल गए तो मजा आ जायेगा

अनीता- बात क्र लो

फिर वो सुमित के पास आये सर ये घर तो 1 वीक बाद मिल जायेगा लेकिन जमीन अभी क्र सकते हैं,

सुमित- ठीक ह पैर ये घर चाहिए मुझे तभी सोडा पूरा होगा 20 करोड़ दे रहा हु इस जमीन के घर की अलग दे दूंगा

यश- 20 करोड़

सुमित- काम ह द्देखो 22 कर सकता हु इससे ज्यादा नहीं

अजय- ठीक ह ठीक ह सर हमे मंजूर ह

सुमित- ठीक ह तो कल पप्पेर लेकर रजिस्ट्री ऑफिस आ जाना मैं पैसे लेकर आ जाऊंगा

यश- ठीक ह सर

सुमित वह से निकल गया, लेकिन यश से छोटा और अजय से बड़ा भाई अमर को जब पता चला तो उसने हंगामा क्र दिया, वो जमीन न बेचने पैर अड़ गया,

अमर- मैं ये जमीन नहीं बेचने दूंगा

यश- क्यों हम अपने हिस्से की जमीन बेच रहे हैं

अमर- परिवार में हिस्सा कहा से आ गया

यश- अच्छा अब तक तू साडी जमीन की कमाई अकेला ले रहा था अब हम अपने हिस्सा बेच रहे ह तो दर्द हो रहा ह

अमर- ये क्या बोल रहे हो आप

अजय- सही बोल रहे हैं और हमे इस घर में से भी हिस्सा चाहिए

अमर- अजय तेरा दिमाग ख़राब तो नहीं हो गया

अजय- क्यों इस घर पैर आप कब्ज़ा करना चाहते हो

अमर- तुम लोगो का दिमाग ख़राब हो चुक्का ह अम्मा hi बात करेंगी तुमसे

अमर गुस्से में चला गया

यश- अगर अम्मा ने मन क्र दिया तो

यश- अम्मा से तो लड़ भी नहीं पाएंगे

अनीता- तो अम्मा के आने से पहले क्र लो सब कुछ

अजय- सही कहा कल hi सोडा क्र देते हैं भैया 11-11 करोड़ आ रहे हैं मजे आ जायेंगे फिर हम अपना घर खरीद पीएंगे मुझे अलीशा के घर में गुलाम बन क्र नहीं रहना होगा,

यश- इतने पैसे में घर नहीं आएगा

अजय- कुछ सेविंग ह भाई आ जायेगा

पूरी प्लानिंग हो चुकी थी, वही अंजलि के घर में किसी के फेस पैर से दुःख ख़तम नहीं हो रहा था, दीपा और रूचि ने खाना बनाया लेकिन किसी ने नहीं खाया, अंजलि बस ख़ामोशी से बैठी थी,

रूचि- माँ खाना खा लो

अंजलि- भूक नहीं ह

दीपा- खाना तो खाना hi पड़ेगा

अंजलि- मैंने कहा न नहीं ह भूक

दीपा ने तुषार से कहा अब तू hi कुछ क्र, तुषार ने निचे चादर बिछाई और खाना वह लगाने को कहा, फिर वो सबको ले आया राजेश को भी ले आया, फिर अंजलि के पास गया

तुषार- अंजलि खाना खाओ

उसकी आवाज में एक आदेश सा था, उस आदेश में एक प्यार था, आज पहेली बार तुषार ने एक अधिकार सा जताया था,

अंजलि ने तुषार की तरफ देखा तो उसे अहसास हुआ की जैसे उसका पति उसे आदेश दे रहा ह, अंजलि की आँखों में आंसू आ gaye,tushar ने न में गार्डन हिलाई और अंजलि के आंसू पॉच दिए, और अंजलि का हाथ पकड़ क्र उठा क्र चल दिया, अंजलि भी बिना कुछ कहे उसके पीछे चल दी,

फिर सबने दुखी मन से खाना खाया, तुषार और दीपा ने अपने हाथो से अंजलि और राजेश को खाना खिलाया, रात सबके लिए भरी थी,

अंजलि बस खामोश थी, दीपा और रूचि दुखी थे सीमा भी दुखी थी राजेश की आँखों में आंसू थम नहीं रहे थे, आज पहेली बार उसके बच्चो के सामने उसकी इंसल्ट हुई थी, वही तुषार सबके सामने नार्मल बेहवे क्र रहा था लेकिन उसके अंदर एक गुस्सा उमड़ रहा था, पूरी रात कोई नहीं सोया,

अगले दिन कोई कही नहीं गया, सब घर में hi थे, घर पूरा अस्त व्यस्त था तो उसे ठीक करने लगे, घर का काफी सामान टूट चुक्का था, जिसे देख देख सभी दुखी हो रहे थे, लेकिन अंजलि ने अपना एक पुराण बक्सा उठाया और उसमे से कुछ सामान लेकर घर से निकल गई,

वही यश और अजय पहुंच गए जमीन के पप्पेर लेकर, सुमित महेता ने नए पप्पेर रेडी करवाए और दोपहर तक hi साडी जमीन अपने नाम करवा ली, और 11-11 करोड़ रूपये दोनों भाइयो के अकाउंट में डालवा दिए,

दोनों भाई खुश होते हुए घर लोटे तो सामने अम्मा चंद्रो देवी कड़ी थी, जिसे अमर ने रात hi फ़ोन क्र दिया था,

चंद्रो देवी- ये क्या क्र दिया तुम दोनों ने

यश- अम्मा हमे अपना हिस्सा बेच दिया बस अच्छे पैसे मिल रहे थे

चंद्रो देवी- ये तुम्हारे पुरखो की जमीन थी

अजय- पुरखे चले गए जमीन का क्या करना ह

चंद्रो देवी की आँख में आंसू थे

यश- अम्मा हमे इस घर में और आपके हिस्से की जमीन में भी हिस्सा चाहिए हमारा,

चंद्रो देवी- ये नहीं हो सकता

अजय- क्यों नहीं हो सकता आपको क्या लगता ह आप साडी जमीन अमर को दे डौगी

अमर- अजय मुझे कुछ नहीं चाहिए बस ये बेचो मत

अजय- देखा भैया अम्मा के सामने कितना शरीफ बन रहा ह

अमर- जबान सम्हाल क्र

अजय- क्या क्र लेगा

अमर ने अजय की गरीबां पकड़ ली, अजय ने तुरंत अमर को ढाका दे दिया, अमर गुस्से में अजय की तरफ डोडा तो यश ने उसे पकड़ क्र निचे गिरा दिया, तभी अमर का बीटा शुभम उसने यश को पीछे से पकड़ क्र पटक दिया, फिर तो लड़ाई बड़े लेवल पैर शुरू हो गई, चंद्रो देवी रोकती रही लेकिन कोई नहीं रुका, वही दूर कड़ी अनीता वीडियो बना रही थी,

तीनो भाई आपस में डंडे घुसे चैपल सब बजा रहे थे, अनीता बड़ी खुश थी, वही अमर की पत्नी मंजू रोये जा रही थी, चंद्रो देवी ने चिल्ला क्र बोली तो उन्हें चक्क्र आ गए, वो गिर पड़ी, अनीता और मंजू ने दौड़ क्र अम्मा को उठाया, तब अनीता ने लड़ाई के बिच में पहुंची और यश और अजय को अलग किया,

चारो के सर मुँह से खून निकल रहा था, मंजू चंद्रो देवी के लिए पानी ले आई, चंद्रो देवी को होश आया तो रोने लगी

अम्मा- मैंने क्या सपना देखा था मेरे बच्चे एक साथ मिलकर क्या क्या करेंगे और आज ये देखो क्या क्र रहे हैं

अजय- अम्मा हमे हमारा हिस्सा देकर ये सब ख़तम करो

अम्मा- ठीक ह, मैं नहीं चाहती इस घर में ऐसे लड़ाई हो, बुला वकील को

यश ने खुश होते हुए तुरंत वकील को फ़ोन मिला दिया

अमर- लेकिन अम्मा ये घर

अम्मा- यश ये घर रहने दे अमर पैर तू अलग हिस्सा ले ले

यश- आप कसबे वाला घर अमर को दे दो उसकी कीमत भी इस घर से ज्यादा hi होगी पैर हमे ये वाला चाहिए,

अमर- मुझे सोचने दो, फिर वो अपनी पत्नी और bête को लेकर अंदर चला गया,

अजय और यश भी चले गए अनीता अम्मा के पास hi बैठी थी, थोड़ी देर में एक कार आकर रुकी उसमे से सुमित महेता उतरा,

यश ने सीधे सुमित महेता को कॉल लगा दिया था, सभी सुमित के सामने बैठे थे,

यश- सुमित जी हम ये घर और अपने हिस्से की जमीन बेच रहे ह अम्मा सिग्न करेगी,

सुमित- ठीक ह

अम्मा- अमर तुझे वो घर ठीक ह न

अमर- है अम्मा मैं अपने परिवार के साथ कसबे में बस जाऊंगा

सुमित- अमर जी अगर आप चाहे तो मैं आपकी जमीन भी ले सकता हु

अमर- मैं नहीं बेचना चाहता

सुमित- कोई बात नहीं

अम्मा- बस मेरी एक hi ीचा ह मैं इस घर से नहीं जाना चाहती अगर तुम इसे छोड़ दो तो

सुमित- माँ जी मैं व्यापारी हु अत्याचारी नहीं, आप जब तक चाहो इस घर में रह सकती हो आपको मैं या कोई और कभी इस घर से नहीं निकलेगा ये वडा ह मेरा जब तक आप जिन्दा हो ये घर आपका hi समझो लेकिन बस आप

फिर सब पहुंच गए रजिस्ट्री ऑफिस, वह अम्मा ने अपना घर और यश और अजय के हिस्से की जमीन सुमित के नाम क्र दी, सुमित ने अच्छी कीमत अम्मा के अकाउंट में दाल दी जिसे यश और अजय ने ले लिया, वही अमर ने भी अम्मा की तरफ से मिली जमीन सुमित को बेच दी,

सुमित ने सबको 2 दिन का टाइम दिया घर खली करने का, और चला गया, घर आकर जहा अजय और यश खुश थे, उन्होंने वापसी का टिकट करवा लिया, अनीता ने मन क्र दिया की वो अम्मा को अकेले छोड़ क्र नहीं जाएगी,

जब ये सब हो रहा था अंजलि घर पैर नहीं थी, वही अनीता ने अजय यश और अमर की लड़ाई की वीडियो तुषार को भेज दी, जब अंजलि वापस आई तो तुषार ने वो वीडियो सबको दिखाई, सब खुश थे, लेकिन अंजलि को संतोष नहीं था, उसने अब तक घर का सामान सही करने में कोई हेल्प नहीं की थी, वो गुस्से में hi थी अभी तक

दो दिन बाद सुमित गाओं में पहुंच गया, अमर ने सारा सामान पैक करके गाड़ी में भरा हुआ था, अजय और यश ने भी अपना सामान पैक किया हुआ था, विदेश जाने के लिए, तभी सुमित ने कहा तो आज से ये सब मेरा हुआ,

यश- है जी सर अब आप इसके मालिक ह बस अम्मा का ख्याल रखना

अमर- आपको शर्म नहीं आ रही ये बोलते हुए कोई और आपकी माँ का ख्याल रखेगा

अजय- तो तुम ले जाओ माँ को

अम्मा- मैं कही नहीं जाउंगी मेरी अर्थी जाएगी इस घर से बस तुम दोनों मत आना कन्धा देने को

अजय- अम्मा कब तक नाराज रहोगी हमसे हम bête ह तुम्हारे हमारी टर्की में तो खुश होना चाहिए, हम चलते हैं बस अपन ाखयाल रखना

तभी पीछे से आवाज आई वो मैं रख लुंगी , लेकिन तुम सब 1 मिनट से पहले दफा हो जाओ मेरी प्रॉपर्टी से

आवाज सुनकर सभी चौंक गए, जैसे hi आवाज की तरफ रुख किया तो इस बार तो सबके मुँह खुले रह गए, क्योकि जो इस प्रॉपर्टी को अपना बता रहा था वो कोई और नहीं अंजलि थी, जिसके पीछे राजेश तुषार और रूचि खड़े थे, उनका भी शामे रिएक्शन था, बस सुमित खड़ा मुस्कुरा रहा था,

अजय- दिमाग ख़राब हो गया क्या, जो अपने इन पिल्लो को लेकर यहाँ आ गई ह

अंजलि- मैंने कहा एक मिनट से पहले इस घर से बहार निकलो

अजय- तुझे तो मैं

सुमित- ख़बरदार अगर एक शब्द भी बोलै तो ये hi इस घर और पूरी जमीन की मालकिन हैं

सुमित की बात सुनकर तो वह खड़े सबकी आँख मुँह गांड सब फैट गई, ये क्या हुआ

सबने सुमित को देखा फिर अंजलि को देखा राजेश अब शांत हो चुक्का था उसके फेस पैर मुस्कान आ चुकी थी, लेकिन दोनों भाई बहन तो भोचके से खड़े थे, वही अजय और यश को कुछ समझ नहीं आ रहा था

यश- ये क्या बोल रहे हो सुमित जी

सुमित- आप लोगो ने ठीक से पप्पेर नहीं पढ़े जब वह फोटो खींच रहे थे तो मेरे फोटो वकील और गवाह के रूप में खींचे थे मालिक के नहीं, मालकिन तो ये ह जिनके फोटो तुम लोगो के जाने के बाद खींचे, और सिग्न. करते वक़्त तुमने किसी ने इस बात पैर धयान hi नहीं दिया,

अजय- लेकिन ये भिकारी इसके पास इतने पैसे कहा से आये ये कैसे खरीद सकती ह

अंजलि- ये तुम लोगो का जानना जरुरी नहीं ह बहार निकलो मेरे घर से,

अंजलि राजेश की तरफ देखते हुए, आइये आप इस घर के मालिक हो मैं सब देख सकती हु लेकिन आपकी आँखों में आंसू नहीं

अजय की तरफ मुड़ते हुए- तूने मेरे भगवान् की आँखों में आंसू दिए, ये तेरी सबसे बड़ी गलती ह अजय,

अम्मा माफ़ करना मुझे ये करना पड़ा

अम्मा- मैं समझ सकती हु बीटा

अंजलि- ये हमेशा आपका घर रहेगा अम्मा, आपका hi रहेगा,

अम्मा- नहीं बीटा ये अब तेरा घर ह बस मैं तेरे घर में रहूंगी, तुम सब निकल जाओ अब यहाँ से,

यश- देख लूंगा मैं सबको

अंजलि- शोक से देखना

वही एक ऑफिस में एक मीटिंग चल रही थी, किसी को अंदर जाने की परमिशन नहीं थी, तभी एक आदमी सबको धकेलता हुआ अंदर घुस गया, अंदर आते hi सबने उसे देखा बॉस ने गुस्से में उसे देखा

बॉस- ये क्या बतमीजी ह रोहन

रोहन- सर अकाउंट एक्टिव हो गया ह

बॉस- क्या ?

रोहन- जी सर 4 दिन पहले एक्टिव हो गया ह और बहुत बड़ी अमाउंट निकली ह

बॉस- मीटिंग ओवर, जो तो योर वर्क

बॉस- कहा हुआ ह एक्टिव

रोहन- क्सक्सक्सक्सक्स सिटी में

सिटी का नाम सुनते hi बॉस के फेस पैर एक अजीब सी मुस्कान आ गई,

बॉस अपने आप से मुझे यकीन था, अब कहा जाएगी

ये थे मर. सुरेश चोपड़ा

अजय और यश जा चुके थे, उन्हें समझ hi नहीं आ रहा था ये कैसे हुआ लेकिन वह खड़े होकर उनकी इंसल्ट हो रही थी तो चुप निकल गए, अमर अपने परिवार को लेकर कसबे के घर में शिफ्ट हो गया, अम्मा और अनीता वही गाओं में रुक गई, यश को कोई फरक नहीं पड़ता था अनीता यहाँ रहे या उसके साथ वो तो अकेला hi खुश था,

इवनिंग में सब एक साथ बैठे थे, चंद्रो देवी और राजेश के अलावा सब अभी तक शोकेड में थे ये सब क्या हुआ पुरे गाओं में खबर फ़ैल गई थी, की राजेश ने ठाकुरो की साडी जमीन खरीद ली घर भी खरीद लिया, पूरा गाओं शोकेड में था ये सब क्या हुआ,

अंजलि- अम्मा अब चलती हु

अम्मा- कहा जाएगी ये तेरा घर ह अब पुरे अधिकार से रुक

अंजलि- नहीं अम्मा ये आपका घर ह हम तो बस महेमान ह

अम्मा- तेरे साथ गलत करने की सजा मिली ह मुझे, मैं तेरा साथ तो देती रही पैर गलत होने से रोक नहीं पाई

अंजलि- अम्मा सबकी गलती की सजा भुगतनी hi पड़ती ह, आप अपने बेटो को रोक पति तो ये सब न होता, खेर छोड़ो जिसने गलती की ह उसे सजा जरूर मिलती ह, लेकिन आप मेरी माँ हो और माँ को सजा नहीं प्यार मिलता ह,

अम्मा- हम अकेले कैसे रहेंगे

अंजलि- आज राजेश जी यही रुक जायेंगे आपके साथ

अम्मा- है ये ठीक रहेगा

अंजलि राजेश को वह छोड़ क्र वापस घर आ गई,

घर आते hi

दीपा- कहा चले गए थे तुम सब और पापा कहा ह

तुषार- पापा कल आएंगे, आप जरा कड़क सी चाय पिलवा दो दिमाग घूम रहा ह

दीपा- क्या हुआ कुछ गदद हुई ह क्या

रूचि- माँ ये सब कैसे

अंजलि- अभी नहीं बीटा बस ये सब मुझे करना पड़ा, वक़्त आने पैर सब पता चल जायेगा

रूचि- अब तो हमारा बदला पूरा हो गया माँ उस अजय से आज मैं बहुत खुश हु,

अंजलि- अभी नहीं अभी नहीं हुआ बदला पूरा, अंजलि ने तुषार की तरफ देखा अभी नहीं हुआ ह न बीटा, अभी उन्हें बहुत कुछ झेलना बाकि ह

तुषार ने है में गार्डन हिलाई है माँ अभी नहीं हुआ

अंजलि का ये रूप देख क्र दीपा और रूचि की हालत ख़राब हो गई,

दीपा- कुछ बड़ा हुआ ह क्या

रूचि- मैं बताती हु

अंजलि- वह जो भी हुआ उससे हमारी लाइफ में कोई बदलाव नहीं आना चाहिए, ये मत सोचना की हम लोग पैसे वाले हैं या हो गए हैं, हम वही हैं

रूचि- जी माँ समझ गए

तभी सीमा आ गई, कहा चले गए थे हम दोनों घर में परेशां हो रहे थे,

दीपा ने सबके लिए चाय बनाई, आज अंजलि ने खुद खाना बनाया और बड़े सकूं से खाया लेकिन उसके फेस पैर एक चिंता भी थी, जिसे तुषार अच्छे से पढ़ प् रहा था,

रुचे ने दीपा को सब बता दिया वह जो हुआ, तीनो बहन भाई बस इसी सोच में थे की ऐसा कैसे हो सकता ह इतना पैसा कहा से आया, माँ परेशां क्यों ह, लेकिन किसी की पूछनी की हिम्मत नहीं थी, वो अपने आप को बहुत बड़े खिलाडी समझ रहे थे, इतने दिन से प्लानिंग कर रहे थे, लेकिन आज उन्हें पता चला अंजलि क्या चीज ह जिसने एक hi दिन में ठाकुरो का पूरा परिवार तहस नहश क्र दिया था,

ये hi बात अजय यश अनीता चन्द्रदेवी सबके दिमाग में घूम रही थी, चंद्रो देवी को थोड़ा बहुत पता था अंजलि के बारे में लेकिन अजय और यश वो दोनों तो बस अपने आप को जलाये जा रहे थे,

वही गाओं में.

अनीता- अम्मा जी ये सब क्या था ये कैसे हुआ

अम्मा- अंजलि कोई साधारण गाओं की लड़की नहीं ह

अनीता- वो ह कोण जिसने एक hi पल में सब कुछ बदल दिया और फिर भी ऐसे गरीबो की तरह रहती ह

अम्मा- ये तो मैं नहीं जानती वो कोण ह कहा से आई ह लेकिन वो क्या ह ये जरूर जानती हु, जब एक 16 साल की लड़की गुंडों से लड़ सकती ह अपने बच्चे को बचा सकती ह 6 बच्चो को बिना पैसे पाल सकती ह, किसी और के बच्चे पल सकती ह, उससे ज्यादा खतरनाक कोई नहीं हो सकता, वो चाहती तो कब का अजय को सबक सीखा सकती थी लेकिन वो रुकी रही, लेकिन आज जरूर कुछ ऐसा हुआ ह जिसने उसे मजबूर क्र दिया,

अनीता- वो यश और जय ने उन्हें उनके घर से बहार निकल दिया,

अनीता ने अम्मा को साडी घटना सुना दी,

अम्मा- ये क्या क्र दिया उन दोनों ने एक सोइ हुई शेरनी को जगा दिया,

अनीता- अब तो सब ख़तम हो गया न

अम्मा- नहीं अभी नहीं अभी उसने राजेश की बजाती का बदला लिया ह, जो उसके साथ हुआ उसके लिए वो क्या करेगी ये कोई नहीं जनता

रात में अनीता ने तुषार को कॉल की

तुषार- hello

अनीता- ये चमत्कार कैसे हुआ

तुषार- मैं नहीं जनता

अनीता- आज मैं बहुत खुश हु आज मुझे बड़ा सकूं मिल रहा ह आज यश को बर्बाद होते देख मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं ह

तुषार- आप उनके साथ क्यों नहीं गई

अनीता- मैं उसके साथ नहीं जाउंगी वैसे भी उसे फरक नहीं पड़ता

तुषार- आप अम्मा जी से बोल क्र अपनी बेटी को बुला लो और अपने प्लान पैर काम शुरू करो

अनीता- मुझे बड़ी शर्म आएगी वो सब करते हुए

तुषार- अगर यश को सबक सीखना ह तो वो करना पड़ेगा और बदला लेने के लिए सबसे पहले शर्म को त्यागना पड़ता ह

अनीता- तुम ठीक बोल रहे हो मैं अपनी बेटी को वापस चाहती हु उसके लिए मुझे जो भी करना पड़ेगा मैं करुँगी

तुषार- ये हुई न बात

अनीता- मैं कल बात करुँगी अम्मा जी से

तुषार- ठीक ह गुड नाईट

अनीता- गुड नाईट डिअर आज मुझे थोड़ी सकूं से नींद आएगी.



लेकिन तुषार रूचि दीपा और अंजलि किसी को नींद नहीं थी,
 
गुड मॉर्निंग डिअर फ्रेंड्स उम्मीद करती हु सभी को ये अपडेट पसंद आएगा, इस अपडेट में रोमांस नहीं ह बस अंजलि ह,

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अपडेट-31



अगले दिन सीमा ऑफिस के लिए रेडी होने लगी बाकि सब कॉलेज के लिए,

अंजलि- सीमा तू ऑफिस नहीं जाएगी

अंजलि की बात से सब चौक गए,

सीमा- क्यों माँ मैं क्यों नहीं जाउंगी

अंजलि- मैं बोल रही हु इसलिए

सीमा- माँ अगर मैं जॉब नहीं करुँगी तो घर कैसे चलेगा

अंजलि- वो मैं देख लुंगी तेरी जॉब से पहले भी ये घर चल रहा था,

सीमा- लेकिन आज जो हम अच्छे कपडे फेन रहे हैं वो मेरी जॉब से hi आये हैं

तुषार- दीदी ये क्या बोल रही हो

अंजलि- हमारे पास पैसे नहीं ह समझी, और तू उस J.S.S कंपनी में जॉब नहीं करेगी

J.S.S कंपनी का नाम सुनते hi चारो भें भाइयो का मुँह फटा रह गया

सीमा- माँ J.S.S नहीं R.P.S ह

अंजलि- बहुत हो गया तुम सबका, तुमको क्या लगती हु मैं, तुम्हारी माँ हु तुम्हारे साँस लेने तक की गिनती होती ह मेरे पास, तुम क्या क्या कर रहे हो ये नहीं पता होगा

तुषार- तो आपने तभी क्यों नहीं रोका

अंजलि- ये बात मुझे थोड़ी देर से पता चली, अभी कुछ दिन पहले hi पता चली, वर्ण पहले hi रोक देती,

सीमा- लेकिन क्यों मन क्र रही हो

अंजलि- क्योकि हालत बदल चुके हैं

सीमा- ऐसा क्या हो गया और आपको सुरेश चोपड़ा से इतनी नफरत क्यों ह इतने अच्छे इंसान ह वो

अंजलि- गुस्से में सीमा तू नहीं जानती उस इंसान को

सीमा- जानती हु मैं मिली हु उनसे

अंजलि- क्या तू उससे मिली

सीमा- है उनके ऑफिस में जॉब करुँगी तो क्या मिलूंगी नहीं मुझे तो वो बहुत अच्छे इंसान लगे,

तुषार दीपा और रूचि मुँह फाडे सीमा को देख रहे थे की 4 दिन पहले से सुधर गई थी आज फिर वही बात क्र रही हैं,

सीमा- मैं 3 दिन ऑफिस नहीं गई तो उनका खुद कॉल आ गया पूछने के लिए

अंजलि- क्या बताया तूने

सीमा- अभी तो कुछ नहीं बताया ,लेकिन आज बात करूंगी की वो कंपनी की तरफ से हमे वही शहर में घर दिलवाये,

तभी एक थप्पड़ अंजलि के गलो पैर लगा,

अंजलि- हम कब से अपनी प्रोब्लेम्स दुनिया को बताने लगे, हम आज तक कैसे जीते आ रहे थे हमने कभी किसी से हेल्प ली क्या जो तू आज भीक मांगने लगी

सीमा- रट हुए, वो मेरे बॉस हैं उनसे हेल्प लेने में क्या तकलीफ ह

अंजलि- उस इंसान से कुछ भी लेने से तकलीफ ह उस इनसान के पास जाना भी तकलीफ ह वो इंसान नहीं जानवर ह जानवर

सीमा- वो आपके लिए जो भी होंगे लेकिन मेरे लिए बेस्ट हैं

रूचि दीपा तुषार शोकेड खड़े थे सीमा का ये रूप देख क्र, उन्हें लगा था सीमा को गलती का अहसास हो चुक्का ह लेकिन वो गलत थे, सीमा को बस तुषार के प्यार का अहसास हुआ था अपनी गलती का नहीं, उसे बस इस बात का दुःख था उसने तुषार के साथ गलत किया बाकि उसे कोई दुःख नहीं था, उसकी नजर ने सुरेश चोपड़ा बेस्ट इंसान था,

अंजलि- तूने यहाँ का एड्रेस तो नहीं दिया किसी को, तेरे रिकॉर्ड में कहा का एड्रेस लिखा ह

सीमा- रट हुए गाओं का लिखा ह

अंजलि ने एक घेरि साँस ली,- तुषार रजिया को फ़ोन मिला और बोल अगर कोई भी वह सीमा और अंजलि के बारे में कुछ भी पूछने आये तो बस ये hi बोले की पता नहीं कहा रहते हैं गाओं छोड़ क्र चले गए थे,

तुषार- जी माँ बोल दूंगा

अंजलि- गुस्से में अभी बोल

तुषार ने तुरंत फ़ोन मिलाया और रजिया को बता दिया,

दीपा- माँ आप इतना क्यों दर रही हो कोण ह ये सुरेश चोपड़ा

रूचि- माँ आपको ऐसे परेशां होते नहीं देखा

सीमा- आप अपने दर के लिए हम पैर पाबन्दी क्यों लगा रही हो

अंजलि- ये बात यही ख़तम बस अब कोई कुछ नहीं बोलेगा जाओ सब अपने कमरे में

सीमा अपने पेअर पटकती हुई चली गई, बाकि सास भी शॉकेड मुद्रा में चले गए, तीनि भें बही सीमा के व्यव्हार से ज्यादा सुरप्रीसेड थे,

वही दिल्ली के एक ऑफिस में…

एक 45-46 साल की बाला की खूबसूरत औरत ऑफिस में बारे एक रूम में बीएड पैर दो जवान लड़को के बिच में सैंडविच बानी हुई थी,


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औरत- मादरचोदो जोर लगाओ थोड़ा सा, इसी काम के िये तुम जैसे जवान लड़को को भर्ती किया ह मैंने हरामखोरो में दम hi नहीं ह,

लड़का- श्री मम लेकिन पीछे 1 हरष से हम क्र रहे हैं थक गए हैं

औरत- भोसड़ी के थकने की साल्लेर्य लेते हो क्या अगर दम नहीं ह तो कही और जॉब ढूंढ लो अगर यहाँ नौकरी करनी ह और ऐसी मोती सैलरी चाहिए तो दम दिखाओ और अपना मुँह बंद रखो वानर गांड में हाथ दाल दूंगी,

लड़का- श्री मम

वो दोनों जोर लगा क्र छोड़ने लगे

आह्ह्हह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhhhh ऐसे hi ऐसे hi लगाओ जोर ahhhhhhhhhhhhhhhh

तभी औरत का मोबाइल बजा जिस पैर लिखा पति.

पति का फ़ोन आते hi उसे जाने क्या एक्सिटमेंट हुई और वो झड़ने लगी अह्ह्ह्हह्ह ahhhhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh uufuuffffffffffffff छोड़ो छोड़ो और चड़ाऊ अपनी मालकिन को aahhhhhhhhhhhhhhhh, औरत के झड़ते hi लड़के अलग हो गए, जाओ अपना माल बाथरूम में निकालो, सालो के लुंड के नाम पैर लूली लेकर घूम रहे हैं, औरत ने फ़ोन उठाया- हेल्ली चोपड़ा जी

है जी ये थी मरस. सोनिया चोपड़ा सुरेश चोपड़ा की पत्नी जो एक बहुत hi ायश किसम की औरत ह जो पति से दूर यहाँ दिल्ली में ऑफिस देखती ह, इसे बस दिन रात चुदाई चाहिए,

सुरेश- सोनिया अकाउंट एक्टिव हो गया ह

सोनिया- क्या कोनसा?

सुरेश- कंपनी वाला

सोनिया- ये भोसड़ी वाली इसे अब नहीं छोडूंगी मैं,

सुरेश- तू घर आ जा जल्दी से फिर बात करते हैं

सोनिया- अभी निकलती हु

फिर फ़ोन कट गया

भैंचोड़ो मेरे कपडे कहा ह जल्दी से पहनाओ मुझे, वो दोनों लड़के जल्दी जल्दी सोनिया को कपडे पहनने लगे,

सोनिया कुछ hi देर में एक ऑफिस वुमन की तरह तैयार होकर साड़ी में बड़ी शालीनता से बहार निकली कोई बता hi नहीं सकता था ये औरत अभी अभी दो जवान लड़को के लुंड पैर कूद रही थी,


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सोनिया ने तुरंत चंडीगढ़ के लिए फ्लाइट पकड़ी, और जल्दी hi सुरेश चोपड़ा के सामने कड़ी thi,waha रोहन भी बैठा था,

सोनिया- कहा एक्टिव हुआ ह अकाउंट

रोहन- क्सक्सक्सक्सक्स सिटी में

सोनिया- वह से अगले सिटी में तो हमारा J.S.S का ऑफिस भी ह न जिसे अलका देख रही ह

सुरेश- है

सोनिया- कुछ खबर निकलवाई

सुरेश- अभी एड्रेस पता नहीं चला ह, बैंक से भी पता किया उन्होंने डिटेल नहीं दी बड़ा बैंक ह ऐसे खबर नहीं देगा,

सोनिया- तो जिसके अकाउंट में पैसे भेजे हैं उनका पता करो उनकी डिटेल तो मिल जाएगी न

सुरेश- वह लगा दिए हैं आदमी

सोनिया- मैंने कितनी बार कहा इस कंपनी को बंद hi क्र दो बहुत पैसा जा रहा ह उस अकाउंट में

सुरेश- मैं भी कितनी बार समझा चुक्का हु नहीं क्र सकता मेरे हाथ में नहीं ह अगर मैंने कोशिश भी की तो ट्रस्ट पूरी कंपनी अपने कण्ट्रोल में ले लेगी, बड़ी मुश्किलों से तो अपनी कंपनी शुरू की ह इसका काम 50% बंद करके अपनी कंपनी में दाल दिया, लेकिन कुछ लोग इसमें ऐसे हैं जो काम आगे बढ़ाते रहते हैं , मैं उन्हें रोक नहीं सकता मेरे हाथ में बस 20 % शेयर हैं, बाकि 25 % इतर लोगो के नाम हैं तो उनका फैसला भी लेना पड़ता ह, और 55% को कोई हाथ नहीं लगा सकता, इतने सालो से कंपनी का प्रॉफिट काम दिखते आ रहे हैं, और कुछ नहीं क्र सकता,

प्रॉफिट का 55% तो उस अकाउंट में जायेगा hi,

सोनिया- अब क्या करोगे

सुरेश- मेरे पास एक तरीका ह बस अलका की वजह से काम नहीं क्र प् रहा हु

सोनिया- मुझे बताओ

सुरेश ने कुछ बताया सोनिया को

सोनिया- आपको यकीन ह

सुरेश- तू जानती ह मुझसे ज्यादा कोण जान पायेगा

सोनिया- ठीक ह तो मैं जाउंगी वह और जब तक मैं पूरी जानकारी न निकल लू आप कुछ मत करना, अपने तरीके से कोशिश करते रहना पैर कुछ गड़बड़ न हो पहले मैं सब अपने कण्ट्रोल में क्र लू,

रोहन मुझे पूरी रिपोर्ट भेजो और मेरा टिकट बुक करो जल्दी से जल्दी,

सुरेश- वो मैं करवा चुक्का हु ये लो फाइल इसमें पूरी रिपोर्ट ह, 4 हरष बाद की फ्लाइट ह तेरी

सोनिया- ok मैं करुँगी

एक खतरनाक सी मुस्कान थी सोनिया के फेस पैर

रात को अंजलि ने खाना बनाया और सबको बुलाया लेकिन सीमा गुस्से में लेती रही, राजेश अभी गाओं में hi थे, अंजलि ने दीपा से कहा सीमा को बुलाने के लिए, दीपा गई पहले तो सीमा ने मन क्र दिया लेकिन दीपा के काफी समझने के बाद वो आई, लेकिन मूड अभी भी ख़राब था,

अंजलि- बीटा तू किस बात से गुस्सा ह

सीमा- कुछ नहीं माँ

अंजलि- बीटा मैंने आज तक तुम्हे किसी बात से नहीं रोका तुम्हे जो पसंद आया वो करने दिया अगर आज किसी चीज से रोक रही हु तो कच सोच क्र hi रोक रही हूँगी

सीमा- लेकिन माँ मुझे इससे अच्छी जॉब नहीं मिलेगी, कोई मुझे जॉब नहीं देगा

अंजलि- तो मत क्र जॉब, हमारे लिए हमारा परिवार इम्पोर्टेन्ट ह जॉब नहीं,

सीमा- लेकिन माँ दुनिया कितनी आगे पहुंच चुकी ह हम अभी भी 1990 की जिंदगी जीर हे हैं

रूचि- दी हम एक साथ हैं इससे बड़ी क्या बात ह जिन लोगो ने तरक्की की ह वो अपने hi परिवार से अलग हो गए

दीपा- सीमा पैसे जरुरी हैं हम सबा मानते हैं लेकिन खुद से ज्यादा या परिवार से ज्यादा तो नहीं, तुषार तू hi समझा इन्हे

तुषार- मेरा मन नहीं ह इनसे कुछ बोलने का इनके लिए सुरेश चोपड़ा से ज्यादा कुछ इम्पोर्टेन्ट नहीं ह

सीमा- तुम सब सुरेश चोपड़ा के पीछे क्यों पड़े हो, क्या बिगाड़ा ह उन्होंने तुम्हारा तुम लोग तो मिले hi नहीं हो उनसे फिर कैसे गलत बता रहे हो, मैं मिली हु मझे पता ह वो कैसे हैं,

रूचि- उसके bête ने मेरे सतह जो किया और माँ ने उससे दूर रहने के लिए कहा ये काफी नहीं ह क्या

सीमा- माँ को गलत फहमी भी तो हो सकती ह

अंजलि बस सब सुन रही थी उसके अंदर एक तूफ़ान चल रहा था,

अंजलि- जोर से सब चुप एक दम चुप

सब शांत हो गए

अंजलि- सीमा मुझे नहीं पता तूने उस इंसान में क्या देखा लेकिन मुझे कोई गलतफहमी नहीं ह,

आज मैं तुम सबको एक कहानी सुनती हु,

सभी एक दम अंजलि का मुँह देखने लगे

अंजलि पहले जल्दी से खाना ख़तम करो और काम ख़तम करो फिर मेरे रूम में आ जाओ, और थोड़े गरीबो के बादाम ले आना,

दीपा- बादाम?

अंजलि- अरे बीटा मूंगफली ये hi गरीबो के बादाम हैं ले आना

फिर सबने चुप चाप खाना खाया और अंजलि अपने रूम में चली गई, तीनो बहेनो से जल्दी से काम ख़तम किया और रूम में आ गए,

सभी बीएड पैर बैठ गए, सीमा के फेस पैर बहुत से सवाल थे की उसकी माँ ऐसा क्या सुनाने वाली ह बाकि सबकी हालत भी यही थी, मूंगफली बिच में रख ली गाइट hi,

अंजलि- तो तुम सब तैयार हो

सब एक साथ- जी माँ

अंजलि- तुम मेरे बारे में जो जानते हो वो सब अधूरा ह, तुम तो क्या कोई भी पूरा सच नहीं जनता किसी को नहीं पता मैं कोण हु कहा से आई हु क्या करती थी मेरे पेट में छोटी सी उम्र में बच्चा कैसे आ गया, आज तुम्हे सब बताती हु, अब तक इसलिए नहीं बताया था क्योकि तुम सब अपनी जिंदगी खुशियो में जीर हे थे मैं उनमे दर्द नहीं भरना चाहती थी, लेकिन अब जरुरी हो गया ह,

बात अब से 90 साल पहले की ह जब एक परिवार हापुड़ से पंजाब चंडीगढ़ में शिफ्ट हो गया था, परिवार में धनीराम शुक्ल जी मुखिया थे, उनोने वह कारोबार शुरू किया, उनके बेटे राम शुक्ल जी ने एक कंपनी खोली, जब उनकी बीटा हुआ जयंत शुक्ल और बेटी संजना शुक्ल तो उन्होंने अपनी कंपनी का नाम रख्हा J.S.S

याने जयंत संजना शुक्ल, लेकिन किसी बीमारी के चलते संजना की डेथ हो गई, जिससे पूरा परिवार बड़े दुःख में आ गया, फिर जयंत शुक्ल जी की शादी हुई और उनकी एक बेटी हुई जिसका नाम उन्होंने अपनी बहन के नाम पैर रखा संजना शुक्ल, बहुत प्यारी और खूबसूरत थी वो, जब से वो पैदा हुई J.S.S कंपनी की तरक्की बड़ी तेजी से बढ़ने लगी, जयंत शुक्ल जी को विश्वास था की बेतिया बहुत लकी होती हैं और उनका विश्वास परिणाम के साथ सामने था, संजना बड़ी होती गई, 18 की होते hi उसने पिता के साथ ऑफिस में जाना शुरू क्र दिया, बस सिखने के लिए,

वो इतनी सूंदर थी की पूरा ऑफिस बस उसे hi देखता रहता, वही जयंत शुक्ल जी के पारिवारिक वकील धर्म शर्मा जी थे जिनका बीटा अनिल शर्मा जो संजना के साथ hi पढता था, दोनों के बिच बड़ी दोस्ती थी, संजना तो उसे दोस्त मानती लेकिन अनल संजना को पसंद करता था, लेकिन कभी बोल नहीं पाया,

इधर संजना ऑफिस में आती तो उसकी मुलाकात ऑफिस के सबसे हैंडसम एम्प्लोयी से हुई जीका नाम था सुरेश, सुरेश चोपड़ा

संजना को सुरेश बहुत पसंद आया, आगे काम थी तो वो सुरेश की तरफ अट्रेक्ट होने लगी, जयंत जी को अनिल पसंद था उन्होंने सोचा की परिवार में शादी हो जाएगी तो सब ठीक रहेगा बेटी भी पास रहेगी, लेकिन संजना और सुरेश की नजदीकियां बढ़ने लगी, दोनों ने जीने मरने के कस्मे वेड खा लिए थे,

जयंत जी को जब संजना का पता चला तो उन्होंने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन जवानी के जोश में कुछ दिखाई या सुनाई नहीं देता, तो संजना ने बगावत क्र दी, और जब जयंत जी नहीं मने तो संजना ने सुरेश से भाग क्र शादी क्र ली, इधर अनिल शर्मा जी का दिल टूट गया वो बड़े दुखी रहें ेलगे, उन्होंने शादी न करने की कसम खा ली ,कुछ दिन तो जयंत जी दुखी रहे लेकिन जब उन्हें खबर मिली की संजना प्रेग्नेंट ह तो उन्हें पीछे हन्ता पड़ा और बेटी को घर बुला लिया,

जयंत जी ने सुरेश के सामने शरत राखी की वो घर जमाई बन क्र रहेगा, सुरेश तो जैसे यही चाहता था उसने तुरंत है क्र दी, कुछ hi समय में सुरेश ने ऑफिस सम्हालना शुरू क्र दिया, जहा वो एम्प्लोयी था अब वो बॉस बन क्र जाता था,

फिर कुछ टाइम बाद संजना ने एक बेटी को जनम दिया, जिसका नाम रखा गया अंजलि

अंजलि नाम सुनते hi सरे भें भाइयो ने एक दम अंजलि की तरफ देखा

अंजलि- है अंजलि, अंजलि चोपड़ा और वो मैं hi हु, मैं हु अंजलि चोपड़ा

तुषार- आप सुरेश चोपड़ा की बेटी हैं

सीमा- आप इतनी पैसे वाली हैं, फिर फिर ऐसे क्यों यहाँ क्यों

अंजलि- आगे सुन लो फिर पूछने की जरुरत नहीं पड़ेगी

अंजलि ने आगे बोलना शुरू किया,

संजना बेटी के साथ बिजी रहने लगी सुरेश ऑफिस देखने लगा और जयंत जी बेहि अपनी नातिन के साथ बिजी रहते, सुरेश ने ऑफिस को कण्ट्रोल करना शुरू क्र दिया था, अंजलि बड़ी हो रही थी, इधर सुरेश की हरकते बढ़ती जार hi थी, ऑफिस में लड़कियों के साथ रोज कुछ न कुछ सुनने को मिल रहा था, संजना और सुरेश में झगडे भी होने लगे, सुरेश के ऑफिस में एक सेक्रेटरी आई सोनिया,


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जिस पैर सुरेश अपना दिल हर गया, सोनिया ने सबसे पहले सुरेश को अपना शरीर सोप दिया और स्टाफ की बाकि लड़कियों को भी सुरेश के निचे लेन लगी,

सुरेश बस सोनिया के साथ मजे करता था लेकिन सोनिया कुछ और hi चाहती थी, उसने चालाकी दिखाई और सुरेश से प्रेग्नेंट हो गई, और एक बेटे को जनम दिया सोहन को,

अब सोनिया सुरेश से शादी की जींद करने लगी थी, लेकिन सुरेश नहीं मान रहा था

सोनिया- सुरेश अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती इस बच्चे को कैसे पलु लोग मुझसे सवाल पूछने लगे हैं

सुरेश- सोनिया अभी मैं शादी नहीं क्र सकता मैंने बड़ी मुश्किल से ये दौलत हासिल की ह

सोनिया- अब तो ये तुम्हारी hi ह न तो दे दो तलाक उसे

सुरेश- इस दौलत को हासिल करने के लिए मैंने उस जयंत की बेटी को फसाया था, उससे शादी किट hi क्योकि साडी प्रॉपर्टी उसी के नाम ह

सोनिया- तो क्या मैं हमेशा ऐसे hi रहूंगी

सुरेश- नहीं मैं जल्दी hi संजना से साडी प्रॉपर्टी अपने नाम करवा लूंगा,

उन दोनों की ये बात कोई सुन रहा था, एक नया एम्प्लोयी जिसे अनिल शर्मा ने रखवाया था सुमित महेता उसका काम बस सुरेश पैर नजर रखना था, सुमित ने तुरंत इसकी जानकारी अनिल और जयंत जी को दी,

जयंत जी तुरंत संजना को लेकर अनिल के पास चले गए, जब वो वापस आ रहे थे तो रस्ते में उनका एक्सीडेंट हो गया, और संजना की ों था स्पॉट डेथ हो गई, जयंत जी हॉस्पिटल पहुंचते पहुंचते ख़तम हो गए,

सुरेश के लिए बहुत hi ख़ुशी का दिन था लेकिन अंजलि उसकी तो दुनिया hi उजाड़ चुकी थी, अंजलि जिसकी माँ और नाना hi उसकी दुनिया थे पिता तो बस कभी कभी hi मिलते थे, वो इतने बड़े घर में अकेली पद गई, उसके साथ बस घर की पुराणी नौकरानी रानी थी जो उसका ख्याल रखती,

जयंत जी और संजना के मरते hi hi सुरेश ने पूरी कंपनी अपने नाम करनी चाही लेकिन तभी अनिल शर्मा जी ने एक धमाका क्र दिया,

उन्होंने जयंत शुक्ल जी की वसीहत पढ़ी जिसे दुंकर सुरेश आग बबूला हो गया

वसीहत कुछ ऐसे थी,

मैं जयंत शुक्ल J.S.S कंपनी का मालिक अपने हॉसो हवस में अपनी वसीहत लिख रहा हु, मेरी सरो प्रॉपर्टी जो की टोटल कंपनी की 75% है बाकि 25 % बोर्ड मैंम्बर की ह जिसमे 10 % अनिल शर्मा और 15 % बाकि मैंम्बर्स की ह, मेरे नाम 75% मैं अपनी बेटी संजना के नाम करता हु, और अगर उसे कुछ हो जाता ह तो उसकी वो प्रॉपर्टी उसकी बेटी अंजलि के नाम चली जाएगी, कंपनी के प्रॉफिट का 30 % हिस्सा कंपनी के मैं अकाउंट में जायेगा आगे के प्रोजेक्ट्स के लिए और बाकि 70% हिस्सा कंपनी के शेयर होल्डर के हिसाब से बात जायेगा जिसमे से 75% हिस्सा संजना के अकाउंट में उसके बाद अंजलि के अकाउंट में जायेगा, अंजलि के बाद प्रॉपर्टी उसके बेटियों को मिलेगी, यदि बेटी नहीं ह तो बेटो को, 40 के बाद अंजलि जिसे चाहे वो प्रॉपर्टी दे सकती ह, उससे पहले वो 20 % से ज्यादा हिस्सा किसी को नहीं दे सकती, अगर अंजलि को संतान होने से पहले कुछ हो जाता ह तो साडी प्रॉपर्टी ट्रस्ट के पास चली जाएगी,

इतना पढ़ते hi सुरेश गुस्से में आग बबूला हो चुक्का था, ये वसीहत जयंत जी ने सुरेश के बारे में पता चलते hi बनवाई थी, वो वापस आकर सुरेश को कंपनी से बहार निकलने वाले थे उससे पहले hi एक्सीडेंट हो गया था,

अब सुरेश के पास एक hi ऑप्शन बचा था अंजलि, लेकिन क्या आकर समझ नहीं आ रहा था, 6 महीने बाद सुरेश ने सोनिया से शादी क्र ली,

सोनिया अंजलि से कुछ साल hi बड़ी थी उसने सबसे पहले अंजलि से दोस्ती की, काम आगे में अंजलि को उसकी दोस्ती का मतलब समझ नहीं आया था ो सोनिया के साथ बहुत खुश थी,

लेकिन सुरेश और सोनिया अपनी प्लानिंग में लगे हुए थे

सुरेश- अब क्या करू कैसे अपने नाम करू प्रॉपर्टी,

सोनिया- अंजलि को रस्ते से हटाना पड़ेगा

सुरेश- उसके मरण ेके बाद तो साडी प्रॉपर्टी चीन जाएगी हमसे

सोनिया- उसके लिए अंजलि को माँ बनाना होगा

सुरेश- जब तक वो माँ बनने की आगे में आएगी उसे और अकाल आ जाएगी फिर वो बिलकुल कुछ नहीं करेगी और उसका पति वो भी तो बिच में आएगा

सोनिया- देखो मेरे पास एक तरीका तो ह लेकिन उसके लिए आपको इंसान से जानवर बनना होगा

सुरेश- मैं जानवर hi हूत ुम बताओ क्या करना ह

सोनिया- तो तुम्हे hi अंजलि को प्रेग्नेंट करना होगा

सुरेश- ये क्या बोल रही हो वो बेटी ह मेरी और बहुत छोटी ह

सोनिया- बड़ी मैं क्र दूंगी और ये बाप बनने का नाटक बंद करो अगर प्रॉपर्टी चाहिए तो

सुरेश कुछ सोचते हुए ठीक ह

सोनिया- तुम्हे तो एक नई सील पैक छूट मिल रही ह

सुरेश- मैं पैसे के लिए कुछ भी करूँगा

फिर सोनिया ने अपनी चल चलनी शुरू क्र दी, अंजलि को पहले बीमार किया गया फिर बीमारी को ठीक करने के लिए दवाइया दी गई और इंजेक्शन दिए गए, अंजलि को हर 2 महीने में एक इंजेक्शन दिया जाने लगा, और कुछ दवाइया रोज दी जाने लगी,

1 साल में hi अंजलि का शरीर किसी जवान लड़की की तरह हो गया था, उसके बूब्स 32 साइज के हो गए थे, अस्स 34 की हो गई थी, अंजलि के अंदर सेक्स करने की इच्छा इतनी अधिक हो गाइट hi की, वही सोनिया अंजलि ी दोस्त बन क्र उसे पोर्न का चस्का लगन ेलगी दोनों एक साथ बैठी पोर्न देखती और गन्दी बात एकर्ति,


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इसी दौरान सोनिया ने अंजलि के साथ लेस्बियन रेलशन बना लिए, अब अंजलि को सोनिया की छूट का ऐसा चस्का लगा की वो बस जब भी मौका देखती सोनिया से चिपक जाती अंजलि के अन्देरीटनी गर्मी थी की वो बस सेक्स करना चाहती थी,

एक बार सोनिया ने कहा

सोनिया- अंजलि क्या रियल चुदाई देखना चाहोगी

अंजलि- कैसे सु

अंजलि सोनिया को सु खेती थी

सोनिया- आज रात को आ जाना मेरे रूम के बहार,

अंजलि ने है क्र दी

रात को अंजलि सोनिया के रूम के बहार गई तो देखा सुरेश नंगा खड़ा ह और सोनिया उसका लुंड चूस रही ह, रियल लुंड पहेली बार देखा था अंजलि ने, कुछ hi देर में सुरेश ने सोनिया को घोड़ी बनाया और पीछे से लुंड उसकी छूट में घुसा दिया, एंगल ऐसा था की लुंड साफ़ साफ़ अंदर घुसता हुआ दिख रहा था, अंजलि वह कड़ी देखती रही थी वो पूरी तरह गरम हो चुकी थी, वो खड़ी कड़ी अपनी छूट मसल रही थी, तभी पीछे से किसी ने उसके कंधे पैर हाथ रखा तो अंजलि दर गई, उसने देखा रानी वह कड़ी ह,

अंजलि घबरा गई लेकिन अगले hi पल रानी ने अंजलि के होतो पैर अपने हॉट रख दिए, अंजलि कुछ समझ पति रानी ने उसे दिवार से लगाया ुर उसके हॉट चूमने लगी और उसकी चूचिया दबाने लगी,


अंजलि गरम तो थी hi उसका साथ देने लगी फिर दोनों रूम में आ गए और अपनी प्रेम लीला की, बस अब तो दो दो औरते मिल गई थी अंजलि को,
 
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