Incest Porn Kahani Rishta - Page 11 - SexBaba
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Incest Porn Kahani Rishta

अपडेट 53

रुचिका ने ये सुनकर मोहनलाल के चेहरे पर चुम लिया तू मोहनलाल ने भी प्रतिक्रिया में उसके नरम नरम गलों पर अपने होठों से स्पर्श किया तू रुचिका सिहर उठी तू मोहन लाल ने अब होठों को दूसरे गाल पर भी स्पर्श किया तू रुचिका की साँसे तेज़ हो गयी और उसने धीरे से कहा 'चलें' तू मोहनलाल ने कहा 'ठीक है' और वो वंहा से बहार निकलने लगे.

बहार आने के बाद मोहनलाल ने रुचिका से पूछा 'अब क्या प्रोग्राम है' तू रुचिका ने कहा 'आगे का प्रोग्राम आप डीडे करो'

मोहनलाल 'देखो हम तू कोई सामान लाये नहीं थे और बिना सामान के होटल में एंट्री गलत नज़रो से देखि जाती है, इसलिए पहले मार्किट चलते हैं और कुछ शॉपिंग करके फिर होटल चलेंगे'

रुचिका 'आप सही कह रहे हो, वैसे भी कुछ कपडे तू होने hi चाहिए नहीं तू दिक्कत हो जाएगी'

मोहनलाल 'अब मार्किट जाना है तू तुम क्या बन कर चलोगी'.

रुचिका हँसते हुए 'आप मुझे क्या बनाकर ले जाना चाहते हैं'

मोहनलाल 'आज मैं ये तुम पर छोड़ता हूँ, क्योँकि मैं कोई भी चीज़ तुम पर लड़ना नहीं चाहता'

रुचिका 'आप सच में मुझे उलझकर फंसा देते हो. जब मैंने आपकी बात मान ली है तू मैं भी आज आपके साथ आपकी मर्जी से चलूंगी'

मोहनलाल 'ठीक है फिर बेटी बनकर चलो'

रुचिका हँसते हुए 'मुझे मंजूर है'

मोहनलाल 'मैं जनता हूँ की तुम भी मुझसे बहुत प्यार करती हो, इसलिए मेरी उचित अनुचित बात मान लोगी, लेकिन मैं ऐसा बिलकुल नहीं चाहता. अब से जो भी निर्णय हो वो हम दोनों का हो न की अकेले मेरा'

रुचिका 'आपकी बात ठीक है, तू फिर आप hi सुझाव दो'

मोहनलाल 'देखो पिछली बार हम दोनों पति पत्नी तू बनने थे और मन hi मन में एक दूसरे से प्यार करने लगे थे लेकिन कुछ कहने से डरते थे तू क्योँ न इस बार हम सही में पति पत्नी बन जाएँ'

रुचिका 'आप जो कहेगे मैं आपके साथ हु लेकिन एक रिक्वेस्ट है की चाहे हम किसी के सामने अपने आप को पति पत्नी पेश करें लेकिन हमें एक दूसरे को बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड समझे. इससे हमें एक दूसरे को अच्छे से समझने का मौका मिलेगा और हमारा रिश्ता भी गहरा होगा'

मोहनलाल 'बात तू तुम्हारी बिलकुल ठीक है तू अब तुम बाकि सबके सामने मेरी बीवी और मेरे मन में गर्लफ्रेंड'

रुचिका हँसते हुए 'अगर चाहो तू असल में भी बीवी मान सकते हो'

मोहनलाल 'सोच लो फिर बाद में कहोगी नहीं अभी बीवी नहीं'

रुचिका 'मैं तू नहीं कंहूगी बाकि आपकी मर्जी'

मोहनलाल ने रुचिका का हाथ पकड़ा और चल पड़े. वंहा पर एक कैब को रुकवाया और मॉल में जाने के लिए बोल दिया. दोनों कैब में अब ऐसे पास पास बैठे थे जैसे की वो वाकई पति पत्नी हो. दोनों के चेहरों पर ख़ुशी झलक रही थी. मोहनलाल ने अपने बांये हाथ से रुचिका का दांया हाथ पकड़ा हुआ था क्योँकि उसके दांये हाथ में अभी भी दर्द था. वो रुचिका के हाथ को हलके हलके सेहला भी रहा था. तिधि देर में वे दोनों मॉल में पंहुच गए

मॉल में पंहुच कर रुचिका ने मोहनलाल से कहा की पहले हाथ पर लगाने के लिए ऑइंटमेंट ले लेते हैं तू मोहनलाल को रुचिका पर बहुत प्यार आने लगा और उसने जिस हाथ को पकड़ा हुआ था उससे कुछ जयादा hi दबाकर ख़ुशी जाहिर की. फिर उन दोनों ने पहले एक मेडिकल स्टोर से ऑइंटमेंट ली और रुचिका बड़े प्यार से उससे लगाने लगी, जिससे देखकर मोहनलाल की आँखों में रुचिका के लिए अथाह मोहबात उत्तर आयी.

मोहनलाल उसके बाद रुचिका को अच्छे से गारमेंट्स स्टोर में ले गया और वंहा मौजूद एक सलेसगिरल को रुचिका के लिए कपडे दिखने के लिए कहा तू वंहा से उसने एक ड्रेस पसंद की और वो ट्रायल रूम में तरय करने चली गयी और उसके बाद उसने एक और ड्रेस देखि और दो ड्रेस ले ली. अब बरी थी उन्देर्गर्मेन्ट्स को तू साइज पूछा तू रुचिका मोहनलाल की तरफ देखने लगी तू मोहनलाल ने सलेसगिरल को उसका साइज बताया तू उसने रुचिका से उनको भी पसंद करा लिया. तभी मोहनलाल की नज़र एक अच्छी सी निघ्त्य पर पड़ी तू उसने सलगिरल को उससे अलग से पैक करने के लिए कहा. ये तब हुआ जब वंहा रुचिका नहीं थी. फिर एक नाईट ड्रेस भी ली. मोहनलाल ने भी अपने लिए एक पेंट शर्ट रुचिका की पसंद से लिया और वो बहार आ गया.

फिर उन्होंने एक ट्राली बैग ख़रीदा और सारा सामान उसमे डाला. फिर वो कुछ कास्मेटिक और कुछ और जरुरी चीज़ों की शॉपिंग करके वंहा पर फ़ूड कोर्ट में जाकर जूस का आर्डर करके एक टेबल पर बैठे थे तू रुचिका ने शरमाते हुए पूछा 'आपको मेरा साइज अभी तक याद है' मोहनलाल उसकी आँखों में देखते हुए 'मैं अपनी बीवी का साइज कैसे भूल सकता हूँ, जो मेरी बहुत प्यारी प्रेमिका भी है' जिससे सुनकर रुचिका और जयादा शर्मा गयी तू मोहनलाल ने कहा 'बुरा लगा है तू भूल जाता हूँ'

रुचिका शरमाते हुए 'मैंने ऐसा कब कहा'

मोहनलाल 'मुझे लगा की तुम्हे बुरा लग रहा है'

रुचिका शरमाते हुए 'कुछ और बात करो न'

मोहनलाल 'अच्छा ये बताओ की रूम लेने के लिए क्या रिश्ता लिखवाएं'

रुचिका 'जो हमारे रिश्ता है'

मोहनलाल 'बाप बेटी'

रुचिका ने गुस्से से मोहनलाल की तरफ देखा तू मोहनलाल भी डरने का नाटक करता हुआ 'ठीक है मैं समझ गया मेरी जान'

रुचिका एक बार फिर सोच में पद गयी की जो हो रहा है वो ठीक है या नहीं. जब तक रुचिका अपनी सोच में थी तू मोहनलाल ने एक होटल बुक कर लिया और तभी जूस भी आ गया. मोहनलाल ने रुचिका का ध्यान भांग करने के लिए टेबल के नीचे से उसकी तंग पर अपने पेअर से इशारा किया तू उसने नज़र उठाकर देखा तू मोहनलाल ने रुचिका से जूस पीने के लिए कहा. जूस पीकर वो बहार आ गए और कैब में बैठकर होटल की तरफ चल पड़े.

होटल में पंहुच कर मोहनलाल रुचिका का हाथ पकडे पकडे रिसेप्शन पर गया और अपनी बुकिंग के बारे में बताय तू उसने उन्हें वेलकम किया और एक वेटर को उनके साथ भेज दिया जो जाकर उन्हें कमरे में छोड़ आया. उसके जाने के बाद मोहनलाल ने कमरे को अंदर से बंद किया और रुचिका को लेकर सोफे पर बैठ गया.

रुचिका ने कमरे को देखकर कहा 'क्या जरुरत थी इतने महंगे होटल में आने की. मोहनलाल ने उससे अपने पास खिसका कर बैठा लिया और कहा 'मैं अपनी जान के लिए कोई सस्ते होटल में जाता, हरगिज़ नहीं. मैं चाहता हूँ की तुम दुनिया की सब अच्छी से अछि चीज़ों का भोग करो'

रुचिका 'ये होटल तू उस होटल से भी जयादा अच्छा लग रहा है'

मोहनलाल ने अपने एक हाथ को उसके सर के पीछे से लेजाकर कंधे पर रखकर थोड़ा सा रुचिका को अपने और पास खिसका लिया और कहा 'तुमने सही पहचाना है, ये उस होटल से काफी बेहतर है. अब तुम मेरी जान हो तू तुम्हारा ख्याल मैं नहीं रखूँगा तू और कौन रखेगा. तुम ये बताओ की खुश हो की नहीं'

रुचिका 'बहुत खुश हूँ'

मोहनलाल 'इस कमरे में आकर खुश हो या किसी और बात से?'

रुचिका 'आपको क्या लगता है की मैं किस बात से खुश हूँ'

मोहनलाल 'मैं तू तुम से जानना छह रहा हु'

रुचिका 'मैं आपके साथ खुश हु, कमरा तू टेम्पररी है, लेकिन रिश्ता परमानेंट है'

मोहनलाल 'सच सच बताओ की तुम मेरा मन रखने के लिए कह रही हो या सही में खुश हो'

रुचिका अपने सर को मोहनलाल के कंधे पर टिकते हुए 'मैं आप से बहुत प्यार करने लगी थी लेकिन आप मेरा दिल तोड़कर मुझे बताये बिना चले आये. आपने ये भी नहीं सोचा की मेरे दिल पर क्या बीत रही होगी'

मोहनलाल उसके कंधे और गर्दन को प्यार से सहलाते हुए 'मैं समझ सकता हूँ क्योँकि मैंने भी उस तड़प और दूर होने के दर्द को महसूस किया है. मैं भी दुखी था लेकिन दिल पर पत्थर रखकर तुमसे दूर होता रहा लेकिन मैं जितना दूर हुआ मेरा प्यार उतना hi जयादा बढ़ता रहा. कई बार मन किया की सब कुछ छोड़ कर तुम्हारे पास पंहुच जॉन, लेकिन हिम्मत नहीं जूता पाया. आज वक़्त ने एक बार हमें फिर मिलाया है और अब मैं तुम्हे अपने दिल से दूर नहीं होने दूंगा' ये कहकर उसने रुचिका को थोड़ा अपने से भींच लिया तू रुचिका के बूब्स उसकी छथि में धंसने लगे.

रुचिका मोहनलाल की बात सुनकर 'मैं भी आज बहुत खुश हूँ की आप मेरे साथ हैं'

मोहनलाल 'ये ठीक है की हम दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करने लगे हैं, लेकि इसका अंजाम क्या होगा'

रुचिका 'अंजाम से मतलब'

मोहनलाल 'कल को तुम्हारी शादी होगी तू......'

रुचिका हंसने लगी और कहने लगी 'मेरी शादी अब किसी और के साथ हो hi नहीं सकती'

मोहनलाल 'क्योँ नहीं हो सकती, क्या तुम शादी करोगी hi नहीं'

रुचिका 'मेरी अगर किसी से भी शादी होती है तू जिन लोगों को हम अपने आप को पति पत्नी बता चुके हैं और वो कहीं गलती से भी मिल गए तू वो शादी तू उसी वक़्त hi टूट जाएगी. जरा सोचकर देखो तब मेरी हालत क्या होगी'

मोहनलाल कुछ सोचते हुए 'इसका मतलब तुम इस दर की वजह से किसी और से शादी नहीं करोगी और इसलिए मेरे साथ मज़बूरी में रिश्ता बना रही हो'

रुचिका 'मैंने तू सिर्फ लॉजिकल बात की, अगर गलत है तू बताओ. दूसरा मैं किसी दर की वजह से नहीं बल्कि अपने पहले प्यार को पाने के लिए आपसे रिश्ता बनाया है'

मोहनलाल 'मैं शादीशुदा हु, दो बच्चों का बाप हु और मेरी उम्र भी तुम से जयादा है तू फिर किस लिए मुझसे रिश्ता बना रही हो'

रुचिका ने अपना एक हाथ अपने बूब पर रखकर कहा 'ये दिल अब सिर्फ आपके लिए धड़कता है और इसमें आपके आलावा अब कोई नहीं आ सकता. रही बात आपके शादीशुदा होने की तू मुझे उन सब से कोई फरक नहीं पड़ता. मुझे सिर्फ इतना hi चाहिए की आप मेरे से सच्चे दिल से प्यार करें और कभी मुझे अकेला न छोड़े'

मोहनलाल ने रुचिका को एक बार फिर अपने से चिपटा लिया और उसके कंधे और गर्दन को सहलाते हुए उसके चेहरे को थोड़ा सा ऊपर उठाकर उसके माथे को चुम लिया तू रुचिका के हाथ भी मोहनलाल के कन्धों पर पंहुच गए. मोहनलाल ने अपने होठों को उसकी आँखों पर पलकों के ऊपर रखा तू रुचिका मचलने लगी, फिर मोहनलाल अपने होठों को दूसरी आँख की पलकों पर ले गया और उस को भी चुम लिया तू रुचिका की साँसे तेज़ चलने लगी और उसकी गरम गरम सांसों को अपने चेहरे पर महसूस कर मोहनलाल उत्तेजित होने लगा लेकिन वो उत्तेजना में इतना आगे नहीं बढ़ना छह रहा था की बना बनाया खेल बिगड़ जाये, इसलिए मोहनलाल ने रुचिका के कंधे और बाज़ू को हलके हलके सहलाते हुए उसकी आँखों में झंकार कहने लगा 'कैसा लग रहा है'

रुचिका ने अपनी पलके झुका कर कहा 'अच्छा'

मोहनलाल का जो हाथ उसके कंधे पर था वो उसके गाल पर पंहुच गया और उसके गलों को सहलाते हुए 'मेरी जान बहुत खूबसूरत है'

रुचिका शरमाते हुए 'आप भी न'

मोहनलाल उसके गलों पर हाथ फेरते हुए 'सच में तुम्हारे गाल बहुत प्यारे हैं' रुचिका ये सुनकर और शर्माने लगी और अपने चेहरे को मोहनलाल की चाहती में छुपाने लगी और उसकी गरम गरम साँसें मोहनलाल को अपनी चाहती पर महसूस हो रही थी तू मोहनलाल अपनी उत्तेजना को काबू में करने के लिए उससे अपने से दूर करने के लिए उसके चेहरे को दांये हाथ से ऊपर उठाने लगता है तू उस हाथ की ऑइंटमेंट उसके चेहरे पर लग जाती है और उसकी स्मेल भी रुचिका को आने लगती तू वो सोचती की स्मेल किस चीज़ की है? उससे मेरे हाथ पर लगी ऑइंटमेंट याद आती है और वो कड़ी होकर अपने आप को मोहनलाल के उस हाथ से दूर करती है लेकिन स्मेल उससे तब भी आ रही होती है. उससे ध्यान आता है की मोहनलाल का हाथ उसके चेहरे पर आ गया था जिसकी वजह से ऑइंटमेंट लग गयी होगी.

तभी मोहनलाल खड़े होकर चाणक्य से उसके चेहरे को साफ़ करने लगता है लेकिन ऐसा करने से ऑइंटमेंट उसके चेहरे पर फ़ैल जाती है तू वो उससे बाथरूम में वाश करने के लिए कहता है.

रुचिका बाथरूम से फेस वाश करके बहार आती है तू उसने दुप्पटा नहीं ूढा हुआ था. कुछ पानी उसके कुर्ते पर गिर गया था जिससे वो गीला हो गया था. गीला होने से उसका कुरता ट्रांसपेरेंट सा हो गया था, जिस वजह से उसकी ब्रा का काफी सारा हिस्सा नज़र आ रहा था. इतना hi नहीं उसके बूब्स के ऊपरी भाग का काफी हिस्सा भी नग्न नज़र आ रहा था. रुचिका की इस हालत को देखकर मोहनलाल की आँखें खुली की खुली रह गयी और उसका ध्यान कन्टिन्यूसली उसके बूब्स पर था. रुचिका ने जब उसकी नज़रों का पीछा किया तू उसने पाया की उसके पापा की नज़र उसके बूब्स को घूरे जा रही है. उसने अपनी हालत का जायजा लिया तू अपने हाथ आगे करके अपने बूब्स को छुपाने का प्रयास करने लगी. तब तक मोहनलाल उसके पास आकर कहने लगा 'यू अरे रियली ब्यूटीफुल'

रुचिका उसके गले लग गयी ताकि अपने बूब्स को छुपा सके, लेकिन इससे उसके बूब्स का स्पर्श मोहनलाल की छथि पर हुआ तू उसकी भावनाओं को अब भड़कने से कौन रोक सकता था. उसने अपने बांये हाथ को उसकी कमर में डालकर अपने नजदीक करते हुए 'मेरी जान को शर्म आ रही है' तू रुचिका मोहनलाल से थोड़ा पीछे होकर उसकी चाहती में घूंसे मरने लगी. अब रुचिका के घूंसो का मोहनलाल पर क्या असर होना था वो तू उसके पीछे हटने से नज़रे उसके बूब्स पर जमा ली. जैसे hi रुचिका को इसका एहसास हुआ तू वो उसके आगोश में से निकल कर पीठ करके कड़ी हो गयी. मोहनलाल तू उसकी पीठ में भी खूबसूरती को ढूंढ़ते हुए उसके पीछे जाकर उसके बालों को हटाकर उसकी गर्दन पर अपने होठों को रख दिया तू रुचिका की साँसे बहुत तेज़ चलने लगी. मोहनलाल ने दुबारा उसकी गर्दन पर किश किया तू वो पलटकर उसकी छाती से लग गयी. मोहनलाल ने इस बार उसकी कमर में हाथ डालकर उससे अच्छे से अपने से लिपटा लिया और फिर अपने होठों से उसके गाल पर किश कर दिया तू रुचिका सिहर उठी और उसकी हाथ अपने आप hi मोहनलाल की पाठ पर चले गए. मोहनलाल ने जब दुबारा उसके गलों पर किश किया तू रुचिका ने मोहनलाल को कास लिया और हद तू तब हो गयी जब रुचिका ने अपने पंजो पर कड़ी होकर मोहनलाल के गाल पर किश कर दिया और फिर शरमाते हुए उसकी बांहों में से निकल कर उलटी होकर कड़ी हो गयी. उसकी साँसें सँभालने का नाम hi नहीं ले रही थी.

मोहनलाल ने सोचा की जयादा आगे बढ़ना अभी ठीक नहीं है और उसने प्यार से पूछा 'क्या हुआ मेरी जान को' तू रुचिका ने कोई जवाब नहीं दिया. तब मोहनलाल जाकर सोफे पर बैठ गया aur.kehne लगा 'चलो तैयार हो जाओ थोड़ा घूम कर आते हैं'
 
आपका इस कहानी पर स्वागत है.

जैसा की आपने लिखा उससे परतीत हो रहा है की आप इस कहानी को पढ़ रहे थे लेकिन कमैंट्स नहीं दिए थे, इसलिए पहले तू कमैंट्स देने के लिए शुक्रिया

आपने इस कहानी को पसंद किया ये ख़ुशी की बात है.

आपके सुझाव बहुत अच्छे हैं, मैं ये तू नहीं कह सकती की सब सुझावों का कहानी में समावेश होगा, हाँ कोशिश जरूर होगी.

धन्यवाद
 
अपडेट 54

मोहनलाल और रुचिका की कहानी के साथ मोहनलाल को अपनी सोचो में छोड़कर चलते हैं आदित्य और संध्या के पास.

अब कहानी प्रेजेंट में

आदित्य जल्दी से अपने कमरे में आ गया और उससे बहुत गुस्सा चढ़ा हुआ था. उसकी माँ उसको झूठा बोलती है. वो बीएड पर लेत गया और सोचने लगा की आज hi तू मैंने उसकी बात मानकर उससे गर्लफ्रेंड बनाया है. वो सोच रहा था की उसने आज पता नहीं क्या क्या प्लान किया हुआ था और सरे प्रोग्राम का सत्यानाश हो गया था. उससे लग रहा था की चलो अच्छा हुआ की अभी तक उसने अपने दिल की बात भी सही तरीके से नहीं बताई है और वो सोच में पद गया की आगे क्या करना चाहिए. इन बातों को सोचते हुए उससे पता नहीं कब नींद आ गयी.

सुबह उठकर आदित्य को रात की बात याद आने लगी लेकिन वो उन बातों को अपने दिमाग़ से झटक कर एक्सरसाइज करने लगा और खूब पसीना बहाने के बाद वो नहाने के लिए बाथरूम में चला गया और जब अपने कपडे उत्तर रहा था तू उसकी माँ की आवाज़ आयी 'जल्दी आ जाओ, नाश्ता तैयार है'

अपनी माँ की आवाज़ सुनकर उससे फिर से अपनी माँ पर प्यार आने लगा और उससे अपनी माँ की चूचियों की याद आने लगी और जैसे hi उसके दिल ने ये सोचा उसका रकत परवाह बढ़ गया और उसके लिंग में तनाव आने लगा. उससे फिर वो भी याद आया की वो उससे झूठा बोल रही थी तू दिल ने कहा 'हो सकता प्यार से कहा हो या छेड़ रही हो' उसका दिमाग़ कह रहा था की 'नहीं जानभूझकर कहा है' उसके दिल ने उससे समझाया 'यार इतनी अच्छी गर्लफ्रेंड मिली है और क्या छोटी सी बात पर उससे छोड़ देगा? अगर कोई समस्या है तू खुल कर बात कर' ये बात दिमाग़ में आते hi उससे फिर से अपनी माँ पर प्यार आने लगा.

उसका लिंग तू पहले hi तन चूका था तू उसका हाथ अनायास hi उस पर चला गया और उससे सहलाने लगा. सहलाते हुए वो अपनी माँ के शरीर के बारे में सोच रहा था, ख़ास तौर से उसकी चूचियां. उसकी चूचियों के दर्शन वो असल में कर चूका था और वो उनका दीवाना भी बन गया था. उसने आँखें बंद कर ली तू उससे वो दृश्य याद आने लगा और उसने ख्यालों में पार्टी कैंसिल करके घर के अंदर आने लगा. उसने अपनी माँ को सहारा दिया हुआ था जिससे उसका बाजु चूचियों को दबा रहा था और उसका दूसरा हाथ उसकी पतली कमर में था. वो उससे घर के अंदर ले आया और बीएड पर लेता दिया. ीोडेक्स से उनके पेअर की मालिश करते हुए उसकी नज़र पल्लू हैट चुकी चूचियों पर केंद्रित थी. चूचियों का याद करते hi उसका हाथ लिंग पर तेजी से चलने लगता.

ख्यालों में hi उसने अपनी सो चुकी माँ की चूचियों से खेलने लगा, पहले कपडे के ऊपर से hi और अपने हाथ को उन चूचियों पर कपडे के अंदर ले जाने लगा. ये सोचते hi उसके लिंग ने बहुत तेज फुंफकारने शुरू कर दिया और उसका हाथ बहुत तेज गति से लिंग की खाल को ऊपर नीचे करने लगा. फिर वो पल भी आ गया जब उसके लिंग ने पिचकारी छोड़ दी. आदित्य लम्बी लम्बी सांसें लेने लगा और थोड़ी देर के बाद उसका मन शांत हो गया और उससे जो गुस्सा था वो भी हवा बन कर उड़द चूका था. वो जल्दी से नहाकर तैयार हुआ और ड्राइंग रूम में आ गया. उसका गुस्सा तू ख़तम था लेकिन वो अभी इतनी जल्दी ये नहीं दिखाना चाहता था की सब कुछ ठीक है, इसलिए वो आकर चुपचाप बैठ गया.

उसकी माँ नाश्ता लेकर टेबल पर लगते हुए 'क्या बात है बड़ा चुपचाप है' आदित्य ने ऐसे दिखाया जैसे अपने ख्यालों में गम हो और उसने कोई जवाब नहीं दिया.

संध्या ने नाश्ता प्लेट में डालकर उसके सामने कर दिया और खाने के लिए कहा तू आदित्य चुपचाप नाश्ता करने लगा और संध्या से कोई बात नहीं कर रहा था. फिर वो दोनों बाइक पर बैठकर चले गए तू रस्ते में भी उसने संध्या से कोई बात नहीं की और उससे इंस्टिट्यूट उत्तर कर कॉलेज चला गया.

कॉलेज पंहुच कर वो बहुत खुश था और फ्री टाइम में उसने श्रुति को ट्रीट के लिए कहा तू उसने कहा की यंहा लोग फालतू बातें बनाएंगे, फिर कभी बहार चलेंगे, लेकिन आदित्य नहीं मन और उससे लेकर कैंटीन में आ गया और उसके साथ एक टेबल पर बैठकर जूस और कुछ स्नैक्स का आर्डर किया तू लोग आज फिर उन दोनों को देखकर आपस में कमैंट्स कर रहे थे. लेकिन उन पर ध्यान न देकर आदित्य ने उससे थैंक्स कहा तू श्रुति ने कहा दोस्ती में थैंक्स का क्या काम. वो दोनों बहार आये hi थे की तभी िरा मैडम का फ़ोन आ गया और उसने आदित्य को किसी काम के लिए उसी वक़्त बुलाया था.

उसने श्रुति से साथ चलने के लिया कहा तू उसने कहा की आज तू वो बिजी है इसलिए उससे अकेला hi जाना पड़ेगा. आदित्य उसको एक बार फिर थैंक्स कहता है तू श्रुति गुस्सा हो जाती है और कहती है 'मुझे दोस्त भी नहीं समझते' आदित्य ने उससे कहा 'आज के बाद नहीं कहुगा, लेकिन तुम मेरी बहुत hi प्यारी दोस्त हो'

आदित्य कॉलेज से निकल कर िरा मैडम के ऑफिस में गया तू उसने रिसेप्शन पर जाकर बताया तू आज उससे वेट नहीं करनी पड़ी और उससे अंदर भेज दिया गया.

िरा मैडम ने बहुत hi चुस्त कपडे पहने हुए थे और वो बहुत अच्छी लग रही थी. आदित्य ने उससे विश किया तू उससे बैठने का इशारा किया और कहने लगी की 'उसका एक क्लाइंट है जिसके सॉफ्टवर्स में सिक्योरिटी इश्यूज हैं, अगर तुम उन्हें सोल्वे कर पाओ तू तुम्हे हर असाइनमेंट के अच्छे पैसे मिलेंगे.' आदित्य ने कहा की 'प्रॉब्लम तू बताओ', तू उसने कहा की 'अभी मीटिंग अर्रंगे की है और उसमे सब बताया जायेगा.'

तिधि देर में कांफ्रेंस शुरू हुई और उस कंपनी के डायरेक्टर अपनी टेक्निकल टीम के साथ आये हुए थे. प्रेजेंटेशन में साडी प्रॉब्लम एक्सप्लेन की गयी तू आदित्य ने उन्हें आश्वासन दिया की वो उनकी प्रॉब्लम सोल्वे कर सकता है. पहला असाइनमेंट 10 लाख का था जिसमे 5 लाख आदित्य को और 5 लाख िरा मैडम को मिलेंगे. जब ये बात हो गयी तू िरा मैडम ने एडवांस के लिए बोलै तू उन्होंने 5 लाख का एडवांस चेक िरा मैडम को दे दिया क्योँकि करार तू मैडम की कंपनी से होना था.

उनके जाने के बाद िरा मैडम आदित्य को अपने केबिन में ले गयी और कॉफ़ी मांगकर कहा 'आदित्य अगर तुमने ये कर दिखाया तू फिर पैसे बरसाने लगेंगे'

आदित्य 'मैडम ये तू आप की म्हणता है की आप मुझे इतना काबिल समझती हैं'

िरा मैडम 'देखो तुम हो hi इस काबिल. अच्छा ये तू बताओ एडवांस कैसे लोगे, कॅश या चेक'

आदित्य 'मैडम एडवांस की क्या जरुरत है'

िरा मैडम 'आदित्य देखो तुम इस बिज़नेस में नए नए आये हो इसलिए मेरी राइ है की बिना एडवांस के कोई भी काम न करना. मेरे साथ जुड़े रहोगे तू इज़्ज़त भी मिलेगी और पैसों में भी खेलोगे, बस अपने काम पर पूरा ध्यान देना'

आदित्य 'मैडम मैं आपकी बात का पूरा पूरा ख्याल रखूँगा'

उसके बाद जब आदित्य चलने लगा तू िरा मैडम ने उससे एक पैकेट पकड़ाया और कहा की इसमें 25000 कॅश हैं और साथ में एक 225000 का तुम्हारे नाम चेक है. बस कोशिश करना की उनका पहला असाइनमेंट जल्दी से जल्दी कर लेना जिससे तुम्हारा विश्वास जैम सके.

आदित्य ने मैडम को थैंक्स कहा और बहार आ गया. वो बहुत खुश था क्योँकि उसकी अब जिंदगी बदलने वाली थी. जब वो बहार आया तू देखा की उसकी माँ की बहुत साडी मिस्ड कॉल्स थी. उसने जैसे hi कॉल की तू वो गुस्सा करने लगी, आदित्य ने आराम से पूछा की वो कान्हा हैं तू उसने बताया की इंस्टिट्यूट के बहार वेट कर रही है. आदित्य ने 15 मिनट में आता हूँ कह कर फ़ोन बंद कर दिया.

आदित्य जैसे hi वंहा पंहुचा तू उसका गुस्सा अभी ख़तम नहीं हुआ था लेकिन आदित्य ने शांति से उससे बाइक पर बैठाया और घर की तरफ चल पड़ा.

घर पंहुच कर संध्या गुस्सा होने लगी की 'आज फिर मुझे लेने नहीं आये, तुम्हे तू मेरी फ़िक्र hi नहीं हैं. पता नहीं कब से फ़ोन कर रही हु, होंगे किसी लड़की के साथ बिजी, इसलिए फ़ोन भी नहीं उठाया'

आदित्य उसकी बात सुनकर चुप रहा तू वो और जयादा गुस्सा करने लगी और श्रुति को भला बुरा कहने लगी. जब बात हद से जयादा बढ़ गयी तू आदित्य ने कहा 'आपको मुझ पर विश्वास तू है नहीं, इसलिए मेरा आपको कुछ भी बताना ठीक नहीं होगा, इसलिए आपको जो सोचना है सोचिये मैं चुप रहुगा'

संध्या 'वैसे तू बड़ी बड़ी बातें कर रहे थे की मुझे कभी अकेला नहीं छोड़ोगे और अब मुझे लेने भी नहीं आते'

आदित्य चुप hi रहा तू उसकी छुपी संध्या को खेलने लगी. उसने जाकर आदित्य को कंधे से पकड़ कर हिलाया और कहने लगी 'अब मुझसे बात भी करना अच्छा नहीं लग रहा' तब आदित्य ने कहा 'आपको मुझ पर विश्वास hi नहीं है तू क्या कान्हू'

संध्या 'प्लीज चुप न रहो, बताओ की क्या हुआ'

आदित्य 'आप क्या करोगी जानकार, मैं जो भी कहुगा वो आपको झूठ hi लगेगा क्योँकि आपकी नज़रो में तू मैं झूठा हूँ, इसलिए मेरी आप से विनती है की कल से आप स्वयं चले जाया करो और खुद hi आ जाया करो'

संध्या 'बस छोड़ दिया न मुझे अकेला और मैंने कब तुम्हे झूठा कहा'

आदित्य 'मैंने आपको न अकेला छोड़ा है और न hi छोडूंगा. रही बात लेन और ले जाने की तू आप को बता दूँ की अब मैं बिजी हो गया हूँ और हो सकता है की आगे भी आपको पिक न कर पौन. कल रात को hi तू कहा था की मैं झूठा हूँ'

संध्या 'मुझे सब समझ आ रही है की मुझे तू खुश करने के लिए कह दिया की मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड हु, लेकिन असल में तुम्हारी गर्लफ्रेंड तू वो लड़की है जिसके साथ जब होते हो तू मेरा फ़ोन उठाना भी नहीं उठाते'

आदित्य हंसने लगा 'आप की बात को मैं कैसे काट सकता हूँ क्योँकि आप सोचती हो की जो आपने सोच लिया वही आपके लिए सही है. आप सच में hi मेरी माँ हो, गर्लफ्रेंड नहीं'

संध्या 'मैं माँ नहीं गर्लफ्रेंड हूँ'

आदित्य मुस्कराते हुए 'गर्लफ्रेंड! बिना मेरी बात सुने गुस्सा, लेकिन फिर भी आपकी जानकारी के लिए बता दूँ की मुझे आज 5 लाख की नै असाइनमेंट मिली है और जिस वक़्त आपका फ़ोन आ रहा था मैं कांफ्रेंस में था और वंहा फ़ोन ले जाना अल्लोवेद नहीं होता. वंहा से बहार आते hi सबसे पहले आपको फ़ोन किया है. सबसे बड़ी बात तुम मेरी जिस दोस्त को इतना भला बुरा कह रही थी, मज़े की बात ये है की उसके कांटेक्ट की वजह से मुझे ये काम मिल रहे हैं. आप के लिए तू मैं झूठा हूँ तू इसलिए झूठ hi कह रहा हूँ'

संध्या' मुझे माफ़ कर दो, आगे से कभी नहीं कंहूगी'

आदित्य 'माँ, आपको मुझसे माफ़ी मांगने की कोई जरुरत नहीं है. आप मेरी माँ हो, इसलिए आपको मुझे कुछ भी कहने के सरे हक़ हैं, मैं बुरा नहीं मानूंगा'

संध्या 'मैं माँ नहीं तुम्हारी गर्लफ्रेंड हूँ'

आदित्य 'आप गर्लफ्रेंड नहीं बन सकती, आप मेरी माँ हो और वही रहो. मैं आपके आने जाने का कोई पक्का इंतेज़ाम कर देता हूँ.'

संध्या 'क्या गर्लफ्रेंड गुस्सा नहीं हो सकती जो मुझे माँ कह रहे हो'

आदित्य 'गर्लफ्रेंड को गुस्सा होने का पूरा अधिकार है, लेकिन काम से काम पहले बात तू सुन्नी चाहिए. आप तू बिना सुने hi गुस्सा हो गयी, वो हक़ माँ का होता है, इसलिए आप मेरी माँ hi ठीक हो'

संध्या 'मुझे सब समझ आ रही है की तुम किसी जवान लड़की को अपनी गर्लफ्रेंड बनाओगे, मुझ बुढ़िया को क्योँ बनाओगे?' वो उद्दस हो गयी और जाने लगी.

आदित्य 'एक मिनट रुको, जब कल मैंने आपको कहा था की आप जवानो से जवान हैं तू मुझे झूठा कह दिया और अब मैं कह रहा हूँ की आप मेरी माँ hi ठीक हैं तू ये भी आपको मंजूर नहीं है तू बताओ मैं क्या करूँ'

संध्या 'मुझे गर्लफ्रेंड बनना है, माँ नहीं, लेकिन मुझे आजकल के महल का पता नहीं है तू गर्लफ्रेंड बनने के लिए थोड़ा वक़्त लग रहा है'

आदित्य ने बांहे फैलाकर कहा 'ठीक है फिर आ जाओ मेरी गर्लफ्रेंड, लेकिन अब दुबारा बिना जाने मत डाटने लग जाना'

संध्या दौड़कर आदित्य के गले लग गयी और दोनों ने एक दूसरे को बांहों के घेरे में कास लिया. संध्या की चूचियों ने आदित्य के दिल में हलचल मचा दी. अभी दोनों एक दूसरे की बांहों में थे की तभी वो हुआ जो आदित्य ने सोचा भी नहीं था. संध्या ने अपना चेहरा उठाकर और अपने पंजो पर खड़े होकर आदित्य के होठों पर अपने होंठ रख दिए और उसका चुम्बन लेकर वो उसकी बांहों से निखारकर गहरी साँसे लेती हुई कड़ी हो गयी.

आदित्य को समझ नहीं आया की ये क्या हुआ लेकिन जो भी हुआ उसके दिल में हलचल मच गयी. उसने सोचा hi नहीं था की उसकी माँ इतना बड़ा कदम उठाएगी और उसका चुम्बन ले लेगी. आदित्य चुपके से अपनी माँ के पीछे गया और उसके कन्धों पर जैसे hi हाथ रखे वो कंपनी लगी और धीरे से अपनी तरफ घूमना चाहा तू वो शरमाते हुए उसके सामने नहीं आ रही थी. तब आदित्य ने उसके कंधे पर हाथ रखे रखे उसके सामने पंहुच गया और जैसे hi उसके चेहरे की अपने हाथों में लिया तू उसने अपनी आँखें बंद कर ली.
 
अपडेट 55

आदित्य को समझ नहीं आया की ये क्या हुआ लेकिन जो भी हुआ उसके दिल में हलचल मच गयी. उसने सोचा hi नहीं था की उसकी माँ इतना बड़ा कदम उठाएगी और उसका चुम्बन ले लेगी. आदित्य चुपके से अपनी माँ के पीछे गया और उसके कन्धों पर जैसे hi हाथ रखे वो कंपनी लगी और धीरे से अपनी तरफ घूमना चाहा तू वो शरमाते हुए उसके सामने नहीं आ रही थी. तब आदित्य ने उसके कंधे पर हाथ रखे रखे उसके सामने पंहुच गया और जैसे hi उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया तू उसने अपनी आँखें बंद कर ली.

जब संध्या ने आँखें बंद कर ली तू आदित्य अपने चेहरे को धीरे धीरे अपनी माँ के चेहरे के पास ले जाने लगा जिससे उसकी साँसें संध्या के चेहरे पर पढ़कर उसकी भावनाओं को आग देने का काम कर रही थी. वो तू पहले से hi आदित्य के पकड़ने से कम्प रही थी और अब उसके चेहरे पर पद रही गरम गरम साँसों ने उसके हृदय की गति बढ़ा दी और उसकी चूचियों ने ऊपर नीचे होना शुरू कर दिया जो आदित्य की चाहती से रगड़ खा कर उससे उत्तेजित कर रही थी. संध्या अपने मन में सोच रही थी की आदित्य उससे उसके होठों पर चुम्बन देगा, लेकिन आदित्य ने जब ऐसा नहीं किया तू कुछ देर के बाद उसने धीरे से आँखें खोलकर आदित्य को देखना चाहा तू उसने देखा की आदित्य उससे एक तक निहारे hi जा रहा है. उसके आँखें खोलते hi आदित्य से उसकी नज़रों के टकराव ने उसकी शर्म को बढ़ने का काम किया और अपनी पलकों को झुका दिया तू आदित्य ने उसकी पलकों पर अपने होठों को रख दिया जिससे संध्या की साँसे और तेज़ हो गयी और उसने बिना कुछ सोचे आदित्य को अपनी बांहों में कास लिया. आदित्य ने भी अपनी बांहों को कन्धों से नीचे लेजाकर उसकी पीठ को अपने घेरे में ले लिया.

दोनों hi एक दूसरे को अपनी बांहों में कस्ते रहे जिससे दोनों के शरीरों में नजदीकी बढ़ने लगी. जब नजदीकी बढ़ती है तू शारिओं का तापमान बढ़ना भी सवाभाविक है और इस से कई बार वो हो जाता जो उस वक़्त नहीं होना चाहिए. ऐसे hi आदित्य के लिंग में तनाव आना शुरू हो गया तू उसने अपनी माँ की गिरफ्त से निकलना चाहा तू संध्या उसको अपनी बांहों में कसने लगी, तब आदित्य थोड़ा सा जोर लगाकर उससे अलग हो गया.

संध्या 'मुझे समझ आ गयी है की मैं तुम्हे अच्छी नहीं लगाती, इसलिए मुझसे अलग हो गए हो'

आदित्य 'माँ, आज के बाद ये कभी न कहना की आप मुझे अच्छी नहीं लगाती हो. मैं अलग नहीं हुआ हूँ बल्कि मैं ये सोच रहा था की कहीं मुझसे गलती से भी गुस्ताखी न हो जाये'

संध्या 'मुझे सब समझ आ रही है, तुम मुझे माँ hi समझते हो और मेरा दिल रखने के लिए गर्लफ्रेंड बोल कर मुझे खुश कर देते हो'

आदित्य 'देखो आप मेरी माँ तू हो hi, इसमें तू न आप कुछ कर सकती हैं और न hi मैं. हाँ आप मेरी गर्लफ्रेंड बनना चाहती है वो मैंने मान लिया है और आपको अपनी गर्लफ्रेंड hi मैंने लगा हूँ'

संध्या 'अगर तुम्हारी सच में मेरे आलावा कोई और गर्लफ्रेंड होती तू क्या ऐसे hi उससे दूर होते जैसे मुझसे हुए हो'

आदित्य 'आप मेरी गर्लफ्रेंड हो और मैं आपसे दूर नहीं हुआ हूँ, लेकिन किसी भी गुस्ताखी के होने से डरता हूँ'

संध्या 'इसलिए तू कहती हूँ की भूल जाओ की मैं तुम्हारी माँ हूँ, मैं सिर्फ और सिर्फ गर्लफ्रेंड हूँ. अगर तुम्हे लगता है की मुझे आजकल की गर्लफ्रेंड बनने के लिए कुछ अलग या नया करना पड़ेगा तू वो भी मैं करुँगी, लेकिन मुझे अपनी गर्लफ्रेंड की तरह ट्रीट करो, न की माँ की तरह'

आदित्य 'आप एक बार फिर सोच लो, क्योँकि जिस रस्ते पर आप मेरे साथ चलने की सोच रही हैं वो आसान नहीं है और उसमे हम दोनों के नजदीक आने से आपको बहुत कुछ बुरा भी लग सकता है इसलिए कहता हूँ की आप मेरी माँ hi रहो और जब दिल करे गर्लफ्रेंड बन जाया करो'

संध्या 'मुझे सब समझ आ रही है, एक तरफ दर दिखा कर मेरा मनोबल तोडना छह रहे हो और दूसरी तरफ अपने लिए किसी और को भी गर्लफ्रेंड बनाने का रास्ता साफ़ कर रहे हो'

उसकी बात सुनकर आदित्य को हंसी आ गयी और कहने लगा 'पहली बात तू मैं आपको डरा नहीं रहा हूँ, मैं तू सिर्फ ये कह रहा हूँ की मेरी गर्लफ्रेंड बनते बनते कुछ ऐसा हुआ जो आपको पसंद नहीं आया तू आप के अंदर की माँ किसी वक़्त भी जाग उठी तू मैं बहुत hi परेशानी में पद जाऊंगा और रही किसी और को गर्लफ्रेंड बनाने की तू मैं आप को गर्लफ्रेंड बनाने के बाद भी तू दूसरी गर्लफ्रेंड बना सकता हूँ'

संध्या 'मैंने इसीलिए कहा था की मैं सिर्फ और सिर्फ गर्लफ्रेंड बनूँगी, माँ नहीं और मुझे विश्वास है की तुम मेरे आलावा किसी और को गर्लफ्रेंड नहीं बनाओगे'

आदित्य अभी कुछ सोच hi रहा था की संध्या फिर से आदित्य के पास आयी और गले लग गयी और अपनी आँखों में प्यार का सागर भरकर कहने लगी 'मैं अब से सिर्फ गर्लफ्रेंड हूँ और मैं अपने बॉयफ्रेंड की किसी भी बात का बुरा नहीं मानूंगी'

आदित्य 'तू आपने फैसला कर लिया की अब सिर्फ और सिर्फ मेरी गर्लफ्रेंड'

संध्या ने कोई जवाब न देकर उसके होठों को फिर से चुम लिया. आदित्य उस चुम्बन से फिर गरम होने लगा और उसके हाथ संध्या की पीठ पर पंहुच कर उससे हलके हलके सहलाने लगे और आदित्य फिर एक हाथ ऊपर करके उसकी गर्दन के पिछले भग्ग पर ले आया और गर्दन के पीछे से सहलाते हुए संध्या के कंधे के नंगे हिस्से को सहलाने लगा और एक तक उसकी आँखों में देखते हुए 'आपको एक बात कान्हू, अगर आप बुरा न मनो तू'

संध्या 'मैं क्योँ बुरा मानूंगी'

आदित्य का जो हाथ उसके कंधे और गर्दन के पीछे घूम रहा था उसमे गले में पड़ी हुई चैन को लपेटे हुए कहा 'आप अगर मेरे साथ बहार जाएँगी तू लोग आपको मेरी गर्लफ्रेंड कभी नहीं मानेंगे'

संध्या 'फिर क्या मानेंगे'

आदित्य 'या तू वो आपको मेरी माँ या बड़ी बहिन या मेरी बीवी कह सकते हैं लेकिन गर्लफ्रेंड नहीं'

संध्या 'बीवी भी कह सकते हैं, लेकिन गर्लफ्रेंड नहीं, क्या मेरी उम्र जयादा लगती है'

आदित्य 'नहीं नहीं गर्लफ्रेंड भी कह सकते हैं, लेकिन तब ये कहेगे की मैंने किसी और की बीवी को गर्लफ्रेंड बना लिया है'

संध्या 'मैं तू पहले hi कह रही थी की मेरी उम्र जयादा है'

आदित्य उस चैन को खींच कर 'आपकी उम्र नहीं, बल्कि जो निशानी आप लेकर घूम रही हैं उसकी वजह से मैंने ये कहा है' संध्या उस चीज़ को देखने लगी.

आदित्य ने जैसे hi चैन खींची तू मंगलसूत्र उसकी चूचियों से रगड़ खता हुआ बहार आ गया. रगड़ खाने से संध्या को मामूली सी खराश आ गयी तू वो पल्लू हटा कर उस खराश पर अपनी उंगली से मालिश करने लगी, जिससे उसकी चूचियों काफी हद तक उजागर हो गयी और आदित्य उन चूचियों और आस पास के हिस्से की सुंदरता को अपनी आँखों में कैद करने लगा और कहने लगा 'सॉरी सॉरी' और हाथ बढाकर वंहा हाथ लगाने लगा तू संध्या एक डैम से पलट गयी और लम्बी लम्बी सांसें लेने लगी.

आदित्य ने पास जाकर कहा 'मैं सेहला देता हूँ'

संध्या शरमाते हुए 'नहीं मैं कर लुंगी' और सोचने लगी की उसने मंगलसूत्र के बारे में तू सोचा hi नहीं था और अब क्या करें. थोड़ी देर वो अपनी चूचियों के ऊपरी हिस्से को सहलाती रही और जब थोड़ा आराम मिला तू वो पलटकर कहने लगी 'तुम क्या चाहते हो की मैं इस मंगलसूत्र को उत्तर दूँ और तुम्हारे पापा को खतरे में दाल दूँ'

उसकी बात सुनकर आदित्य हंसने लगा और कहने लगा 'इसलिए मैं कह रहा था की आप मेरी माँ हो और रहोगी. मैंने कभी नहीं कहा की पापा को मेरी जिंदगी से बहार निकालो बल्कि मैं तू कहता हूँ आप माँ hi बनकर रहो और जब मस्ती का मूड हो तू गर्लफ्रेंड बन जाना'

संध्या 'तुमने मुझे दुविधा में दाल दिया है. मैं सिर्फ संध्या बनकर नए रिश्ते को अपनाना चाहती हूँ लेकिन तुम्हारे पापा को किसी प्रॉब्लम में नहीं डालना चाहती'

आदित्य 'मतलब आप दोहरी जिंदगी जीना चाहती हो, एक तू मेरी गर्लफ्रेंड बनकर और पापा के आने पर उनकी बीवी बनकर. आप के लिए बहुत मुश्किल हो जायेगा क्योँकि सही मायने में आप न तू मेरी गर्लफ्रेंड बन पाओगी और न hi पापा की बीवी'

संध्या 'मुझे तुम्हारी गर्लफ्रेंड बनना है'

आदित्य 'बन जाओ लेकिन साथ में माँ भी बानी रहो'

संध्या 'सिर्फ और सिर्फ गर्लफ्रेंड'

आदित्य 'पापा के आने के बाद'

संध्या 'तुम्हारे पापा अभी काम से काम 6 महीने बल्कि 1 साल तक तो आते नहीं और उसके बाद भी उनका पता नहीं. अगर आ भी गए तू भी 6-6 महीने बहार hi रहते हैं, मैं तू फिर भी अकेली की अकेली'

आदित्य 'मतलब की आप अपने लिए मेरी जिंदगी ख़राब करेंगी'

संध्या दौड़कर फिर से आदित्य के गले लग गयी और उसके मुंह पर अपनी हथेली से बंद कर दिया और कहने लगी 'तुम्हारी जिंदगी ख़राब करने से पहले मैं hi न मर जॉन'

आदित्य ने उसकी बात सुनी और अपनी एक उंगली उसके होठों पर रख दी और कहने लगा 'अब कभी मरने की बात न करना नहीं तू मुझसे बुरा कोई नहीं होगा'

संध्या 'तू फिर बताओ क्या किया जाये'

आदित्य 'फैसला तू आपने करना है. माँ बने रहने में आपको कोई तकलीफ नहीं है, लेकिन गर्लफ्रेंड बनने में तकलीफे hi तकलीफे हैं'

संध्या कुछ देर आदित्य के गले लगी रही और फिर सर उठकर 'प्यार किया तू डरना क्या, तकलीफे हैं तू सहेंगे, मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड' और फिर संध्या ने आदित्य को अपनी बांहों में कास लिया और पूछने लगी 'मुझ बुढ़िया को गर्लफ्रेंड बनाने में तुम्हे तू कोई प्रॉब्लम नहीं'

आदित्य ने उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर निहारते हुए बड़े प्यार से कहा 'ऐसी गुड लुकिंग, चार्मिंग और प्रीटी गर्ल बुढ़िया कैसे हो सकती है'

संध्या 'मैं कोई गर्ल हूँ क्या'

आदित्य 'गर्लफ्रेंड गर्ल नहीं तू क्या बॉय होता हैं'

संध्या उसकी बात सुनकर हंसने लगी और आदित्य ने उसके गलों को अपनी हथेलियों में भरकर कहा 'मेरी गर्लफ्रेंड सब लड़कियों से सुन्दर है' और इतना कहकर उसके माथे को चुम लिया और कहा 'तू फिर आपने मेरी गर्लफ्रेंड बनने का फैसला कर लिया' संध्या ने उससे कहा 'हाँ, मैं हर तरह से तैयार हूँ और प्लीज अब इस बारे में कोई बात नहीं करेंगे'

आदित्य ने बड़े hi नाटकीय अंदाज़ में 'जो हुकुम मेरे आका' संध्या ने उससे अपनी बांहों में कस्ते हुए उसके कान में कहा 'अपनी गर्लफ्रेंड को घुमाओगे नहीं' तू आदित्य ने भी उसके कान में hi बड़े प्यार से कहा 'ये भी कोई पूछने की बात है, चलो जल्दी से तैयार हो जाओ'

संध्या उसकी बांहों से निकलकर जाने लगी तू आदित्य ने उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच कर उससे अपने गले लगा लिया तू उसकी चूचियों एक बार फिर से आदित्य की छाती में धंस गयी तू संध्या ने कहा 'छोडो न तैयार होकर आती हूँ' तू आदित्य ने कहा 'hu...n..hu कैसे छोड़ दू ऐसी प्यारी गर्लफ्रेंड को'

संध्या 'बस अभी आयी'

आदित्य 'मन है मेरी बांहों से निकलने का' तू संध्या ने भी उसी तरह से न में जवाब दिया तू आदित्य ने कहा 'फिर क्योँ जा रही हो' तब संध्या ने कहा 'आपके लिए अच्छे से तैयार होकर आना है' तब आदित्य ने उससे छोड़ दिया और संध्या जाने लगी.

तभी आदित्य ने उससे फिर से पकड़ लिया लेकिन इस बार कमर से पकड़ कर उसकी पीठ से चिपकते हुए अपने हाथों को कमर से धीरे धीरे आगे पेट की तरफ ले जाने लगा तू संध्या कंपते हुए 'जाने दो न' तू आदित्य ने कहा 'मैंने कब मन किया है' और अपने हाथों से उसके पेट को कास लिया और फिर एक हाथ को ऊपर ले जाकर उसके सर से उसके बालों को हटाकर उसके नंगे कंधे पर अपने होठों को रखते हुए धीरे से चुम लिया और उसके कान में कहा 'आप बहुत खूबसूरत हो' संध्या अपने हाथों से उसके हाथों को हटते हुए 'थैंक्स' कहकर उसकी पकड़ से निकल कर अपने कमरे में चली गयी. उसकी साँसें बहुत तेज़ चल रही थी. वो मन hi मन बहुत आंदोलित हो रही थी की उसने आदित्य से एक नया रिश्ता बना hi लिया है.

वो बहुत खुश नज़र आ रही थी और फिर जब उसकी साँसें संभाली तू वो अपने दूसरे कपडे लेकर बाथरूम में चली गयी और उसने पहनने हुए कपडे उतरे और अपने आप को देखने लगी तू उससे लगा की अभी तू वो जवान है. उसने जल्दी से शावर लिया और जैसे hi वो शावर ले रही थी तू उसका हाथ मंगलसूत्र पर पड़ा तू वो उद्दस होने लगी की अब क्या करें. उसने जल्दी से शावर बंद किया और दूसरे कपडे पहनने लगी और हल्का सा मेकअप भी किया और फिर परफ्यूम भी लगाया. उसके बाद वो घर में बने हुए छोटे से मंदिर में भगवन जी से क्षमा मांगते हुए अपना मंगलसूत्र निकलकर वंही भगवन के चरणों में रख दिया तू उसे एक तरह से आत्मिक संतोष मिला. उसके बाद वो हाथ जोड़कर नए रिश्ते को सफल बनाने की कामना करके बहार ड्राइंग रूम में आयी.

आदित्य भी वंहा कपडे बदल कर पहले से hi तैयार बैठा था तू संध्या को देखकर बहुत खुश हुआ क्योँकि अब उसकी माँ ने इस तरह से अपने आप को तैयार किया था की वो उसकी माँ न लगकर एक लड़की लग रही थी जो अपने बॉयफ्रेंड के साथ पहली डेट पर जा रही हो.

आदित्य ने भी गुलदस्ते में से एक गुलाब का फूल जो उसने संध्या के आने से पहले hi निकल लिया था उससे देते हुए 'फॉर माय ब्यूटीफुल गर्लफ्रेंड'' संध्या ने उससे बड़े प्यार से लेते हुए 'थैंक्स' कहा तू आदित्य ने कहा 'गर्लफ्रेंड ऐसे थोड़ी थैंक्स कहती है'

संध्या ने भी उससे छिड़ते हुए 'ये गर्लफ्रेंड ऐसे hi थैंक्स कहती है, अगर नहीं चाहिए तू वापिस ले लेती हु' तब आदित्य उसके बिलकुल पास आ गया और उसको कमर से पकड़ कर अपने आप से चिपकते हुए 'मैं कोई भी चीज़ जो प्यार से दी जाती है वापिस नहीं करता बल्कि और जयादा खुद hi ले लेता हूँ' ये कहकर उसने संध्या के कश्मीरी सेब जैसे गलों को चुम लिया तू संध्या कहने लगी 'लगता है मेरा बॉयफ्रेंड आज मुझे लंच नहीं कराएगा, सिर्फ बातों से पेट भरेगा' आदित्य ने उससे और जयादा नजदीक करके उसकी चूचियों को अच्छे से अपनी छाती से दबाते हुए 'क्या करूँ मेरी गर्लफ्रेंड है hi इतनी खूबसूरत की मन hi नहीं कर रहा कहीं जाने का, लेकिन मैं उससे भूका तू नहीं रख सकता न, इसलिए आपकी सेवा में मैं हाज़िर हूँ चलिए' आदित्य ने जिस तरह कहा था उससे संध्या की हंसी छूट गयी तू आदित्य उसका हाथ पकड़ कर 'चलिए और बस ऐसे hi हँसते रहना जिंदगी भर' फिर वो दोनों हाथ में हाथ डालकर बहार आ गए और चल पड़े.
 
अपडेट 56

आदित्य और संध्या को घूमने जाने दो और हम चलते है मोहनलाल की सोचो में मोहनलाल और रुचिका के पास.

अब कहानी फ़्लैश बैक में

मोहनलाल ने सोचा की जयादा आगे बढ़ना अभी ठीक नहीं है और उसने प्यार से पूछा 'क्या हुआ मेरी जान को' तू रुचिका ने कोई जवाब नहीं दिया. तब मोहनलाल जाकर सोफे पर बैठ गया और कहने लगा 'चलो तैयार हो जाओ थोड़ा घूम कर आते हैं'

रुचिका बाथरूम में जाकर अपने आप को ठीक करने लगी और वंहा पर मौजूद मेकअप से कुछ make-up किया और फिर बहार आने लगी. वो आज बहुत खुश नज़र आ रही थी की उसने अपने प्यार को प् लिया है.

वो जैसे hi बहार आयी तो मोहनलाल ने उससे कहा 'क्या बात है आज तू बहुत सुन्दर लग रही हो' तू वो ब्लश करने लगी. उसको वंही छोड़कर मोहनलाल बाथरूम में चला गया और जल्दी से फेस वाश करके और अपने आप को दुरुस्त करके आ गया और रुचिका से बोलै 'चलें जान' तू वो बड़े प्यार से बोली की 'मैं तू आपकी hi वेट कर रही थी'

मोहनलाल और रुचिका दोनों कमरे से बहार निकल कर लिफ्ट से नीचे रिसेप्शन पर आये और वंहा से पता लगा की पास में एक बहुत hi अच्छी लेक है जो बहुत hi फेमस है और अच्छा टूरिस्ट स्पॉट है. उन दोनों ने वंहा जाने का फैसला किया. दोनों ने एक कैब ली और लेक पर पंहुच गए.

ये एक बहुत hi रमणीय सथल था. लेक का पानी बहुत साफ़ और निर्मल था. लेक के आगे बैलून सफारी, ज़ू, तोय ट्रेंस और एम्यूजमेंट पार्क था. कुल मिला कर एक अच्छी जगह थी.

मोहनलाल ने रुचिका का हाथ पकड़ा हुआ था और दोनों बिलकुल सत्कार चल रहे थे जैसे की नव विवाहित दम्पति हो. मोहनलाल की हाथ की उँगलियों ने रुचिका की हाथ की उँगलियों को कसकर पकड़ा हुआ था और दोनों एक दूसरे को अपने प्यार का परमं दे रहे थे. उन्होंने एंट्री टिकट्स ली और अंदर चले गए. लेक एक अर्धवर्ताकार की तरह थी, जिसके चरों और बड़े बड़े पेड़ लगे हुए थे और एक बहुत hi सुन्दर मेन्टेन किया हुआ ट्रैक था. लेक की भव्यता देखते hi बनती थी. आज वर्किंग डे होने की वजह से जयादा भीड़ नहीं थी.

दोनों ने पैदल hi लेक के साथ साथ चलने का निर्णय किया तू वो दोनों अपनी मस्ती में चले जा रहे थे. दोनों के एक एक हाथ की उंगलियां आपस में लॉक थी और मोहनलाल की बाजु से रुचिका का बूब डाब रहा था जिससे दोनों को मज़ा आ रहा था. दोनों hi इस को महसूस करके मन hi मन आनंदित हो रहे थे. वंहा पर उन जैसे hi कुछ कपल्स थे. जैसे जैसे वे आगे बढ़ रहे थे वो अनुभव कर रहे थे की कपल्स एक दूसरे के साथ मस्ती कर रहे हैं.

वंहा पर बड़े बड़े पेड़ों के पीछे कपल्स अपने पार्टनर के साथ किसिंग और एक दूसरे के अंगो से खेलने के दृश्य दिखाई दे रहे थे और कोई भी किसी दूसरे पर ध्यान नहीं दे रहा था. कुछ कपल्स वंहा पर बड़े बड़े पत्रों पर बैठे हुए थे और कुछ तू अपनी पार्टनर की गॉड में hi बैठकर काम क्रीड़ा में ब्यस्त थे. ये सब देखकर मोहनलाल और रुचिका भी गरम होने लगे.

दोनों एक दूसरे के और नजदीक होने लगे. उनके जो हाथ आपस में लॉक थे वो उनके नजदीक होने की वजह से साइड से उन दोनों के आगे आ गए जिससे दोनों के हाथ एक दूसरे के शरीरों पर रगड़ खाने लगे जो उन दोनों की उत्तेजना को बढ़ने में सहायक हो रहा था.

दोनों ने एक दूसरे के हाथों को न छोड़कर अपनी अपनी बाजुओं को मोड़ लिया और मोहनलाल की छाती तक आ गए. ऐसा करने से रुचिका का हाथ मोहनलाल की छाती पर रगड़ खाने लगा. मोहनलाल की बाजु रुचिका के बूब को बहुत जयादा दबा रही थी जिससे रुचिका की हालत ख़राब होने लगी थी. उससे मजा तू बहुत आ रहा था लेकिन शर्म भी आ रही थी. बिच बिच में दोनों एक दूसरे को देखते और जब दोनों की आँखें मिलती तू मुस्करा देते.

मोहनलाल ने रुचिका के जिस हाथ को पकड़ा हुआ था उसको अपने होठों के पास लेजाकर उससे चुम लिया तू रुचिका सिहर उठी, लेकिन उससे अच्छा भी लगा. अब मोहनलाल थोड़ी थोड़ी देर के बाद उसके हाथ को चुम लेता तू रुचिका ने अपने सर को उसकी बाजु पर रख दिया जिससे उसके बूब्स अब मोहनलाल की चाहती से रगड़ खाकर दोनों के दिल में हलचल मचा रहे थे. मोहनलाल ने उससे आराम देने के लिए अपनी बाजु को रुचिका के सर के पीछे से निकलकर कंधे पर ले आया लेकिन हाथ नहीं छोड़ा. ऐसा करने से मोहनलाल के हाथों की उंगलियां रुचिका के बांये बूब पर पंहुच कर उससे सपर्श कर रही थी जिसने रुचिका के दिल की धड़कन बढ़ा दी.

अभी तक दोनों hi चुपचाप बिना कोई बात किये चले जा रहे थे और एक दूसरे को फील कर रहे थे. जैसे hi रुचिका को मोहनलाल की उंगलियां उसके बूब पर दबाव डालने लगी तू उसने उत्तेजना वश अपने हाथ को मोहनलाल के हाथ से छुड़ा कर मोहनलाल की कमर पर ले गयी इससे मोहनलाल का बांया हाथ अब रुचिका के बांये बूब के उप्परि हिस्से पर था. रुचिका का दांया बूब मोहनलाल की छाती में धंसकर मोहनलाल की उत्तेजना को बढ़ा गया और उसके अरमान भड़कने लगे, लेकिन उससे ये भी दर था की कहीं एकदम से आगे बढ़ने से रुचिका फिर से नाराज़ हो गयी तू उसका क्या होगा. इसलिए वो धीरे धीरे रुचिका को उत्तेजित करना छह रहा था. उसका जो हाथ बूब पर था उसकी एक उंगली से वंहा धीरे धीरे हल्का हल्का सहलाने लगा जिससे रुचिका को नशा सा होने लगा और उसने अपने हाथ (जो मोहनलाल की पीठ पर था) से मोहनलाल को अच्छे से कास लिया जिसने मोहनलाल के अंदर जोश भर दिया.

मोहनलाल रुचिका को और जयादा चिपकने लगा और रुचिका भी जैसे मोहनलाल के ऊपर लड़ना छह रही थी. इस सब में उन दोनों के शरीरों के बिच का हिरशन बढ़ने लगा और भावनाएं उद्देलित होने लगी. मोहनलाल का बांया हाथ अब उसके कंधे और गर्दन के बिच के नंगे हिस्से को सहलाने लगा तू रुचिका ने कहा 'कहीं बैठते हैं'

मोहनलाल 'ठीक है" कहकर उससे एक पेड़ के नीचे झील के किनारे बानी दिवार पर बैठा दिया और खुद भी उसके पास बैठ गया उसके से कहने लगा तू रूचि 'आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो'

रुचिका मुस्कराते हुए 'क्योँ पहले खूबसूरत नहीं लगती थी'

मोहनलाल उसके चेहरे पर नज़र जमाये हुए 'पहले भी खूबसूरत लगती थी, लेकिन......'

रुचिका 'लेकिन क्या'

मोहनलाल ने उसको कंधे से पकड़ कर अपने से चिपकते हुए उसके कान से बाल हटाकर उसके कान में बड़े प्यार से कहा 'पहले तुम्हे बेटी की तरह देखा था और आज पहली बार गर्लफ्रेंड की तरह देख रहा हूँ तू खूबसूरत जयादा लग रही हो'

रुचिका ने भी अपनी बाजु को मोहनलाल की पीठ पर ले जाते हुए उसकी कमीज को अपनी मुठी में भींचते हुए 'क्योँ मैं बदल गयी हूँ क्या'

मोहनलाल ने फिर से उसके कान में 'तुम तू वही हो लेकिन शायद मेरी hi नज़र बदल गयी है'

उसकी बात सुनकर रुचिका हंसने लगी तू मोहनलाल ने उसके गाल पर पड़े डिंपल को चुम लिया तू रुचिका को झटका लगा लेकिन साथ में उससे अच्छा भी लगा. रुचिका ने अपनी बांहे उसके गले में दाल दी और मोहनलाल की चाहती पर अपने बूब्स गाड़ दिए तू उसका तापमान बढ़ने लगा, उसने भी दूसरे हाथ से उसका चेहरा की ठोढ़ी पकड़ कर उससे निहारते हुए देखने लगा और उसके गाल को फिर चुम लिया तू रुचिका ने भी उसका गाल चुम लिया. दोनों hi एक दूसरे के गलों को बरी बरी चूमने लगे और इस प्रक्रिया में उन्हें पता hi नहीं लगा और कब दोनों के होठों ने एक दूसरे के होठों का स्पर्श किया तू एक जोरदार करंट दोनों को लगा और उनके होंठ अलग हो गए. रुचिका एकदम बहुत जयादा शर्मा गयी और मोहनलाल की बांहो से निकलकर कड़ी हो गयी. मोहनलाल भी खड़ा होकर उससे पकड़ कर बैठना छह तू वो भाग कड़ी हुई.

मोहनलाल भी उसके पीछे भागने लगा और काफी दूर तक भागने के बाद उसने रुचिका को पकड़ लिया. दोनों की साँसे ुकजादि हुई थी. मोहनलाल ने उसका हाथ अपने हाथ में पकड़ रखा था और उखड़ती हुई साँसों में 'क्योँ भाग क्योँ रही हो' तू रुचिका ने अपनी नज़रो को नीचे रखकर कोई जवाब नहीं दिया.

मोहनलाल उसको पकड़कर वंहा एक घने पेड़ के पीछे एकांत में ले आया और उसने रुचिका के चेहरे को अपनी हथेलियों में भरकर कहने लगा 'ी लव यू, रुचिका' और उसके होठों पर अपने होठों को रख दिया तू रुचिका को फिर से झटका लगा और फिर से मोहनलाल की बांहों से निकलने लगी. मोहनलाल ने उसकी कमर पकड़ कर अपने से चिपका लिया और फिर से कहा 'ी लव यू, रुचिका'

रुचिका 'आप सिर्फ मेरा मन रखने के लिए कह रहे हैं, असल में आप मुझसे नहीं माँ से प्यार करते हैं'

मोहनलाल 'इसमें कोई दो राइ नहीं है की मैंने तुम्हारी माँ से बहुत प्यार किया है, लेकिन तुमसे पता नहीं क्योँ प्यार तू बहुत छोटा शब्द है, तुम तू मेरे दिल की धड़कन हो'

फिर मोहनलाल ने रुचिका के एक हाथ को पकड़ कर अपने दिल के पास रखकर कहा 'रुचिका ये दिल अब तुम्हारे लिए धड़कता है'

रुचिका उसकी चाहती को अपनी उंगली से कुरेदते हुए 'अगर ये मेरे लिए धड़कता है तू फिर माँ का क्या होगा'

मोहनलाल 'मैं तुमसे झूठ न बोलूंगा और न hi बोल सकता हूँ. मैंने तुम्हारी माँ से बहुत प्यार किया है और उसको मैं अकेला भी नहीं छोडूंगा. ये भी सच है की जब तुम्हारी सहेली ने मुझे तुम्हारा बॉयफ्रेंड कहा तू पहले मुझे बुरा लगा, लेकिन फिर जब तुम मेरी पत्नी बनकर टूर पर आयी तू तुम्हारे साथ कुछ ऐसा लगाव हो गया की मैं अपने दिल का हाल न तू किसी को बता सकता था और न hi तुम्हे कुछ कह सकता था. फिर तुम्हारे भविष्य का सोचकर अपने दिल पर पत्थर रखकर तुमसे दूर होने लगा, लेकिन पता लगा की तुम भी उसी आग में जल रही हो जिसमे मैं. अब सिचुएशन ये है की मैं तुमसे टूट कर प्यार करता हूँ और तुम्हारी ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकता हूँ और तुम्हे इतना प्यार दूंगा की तुमसे संभलेगा भी नहीं. मेरी तुमसे सिर्फ एक गुजारिश है की कभी भी अपनी माँ से न तू नफरत करना और न hi उसको हमारी जिंदगी से दूर करने के लिए कहना क्योँकि तुम्हे ये बता दू की तुम्हारे अंदर उसकी जान बस्ती है. जंहा तक मैं उसको जनता हूँ, अगर उसको हमारे इस नए रिश्ते की भनक भी पद गयी तू वो अपने आप को ख़ुशी ख़ुशी हम दोनों से दूर कर लेगी. इसलिए उससे कभी भी हमारे नए रिश्ते की भनक न लगने देना और उसके सामने नार्मल बेहवे करना. अगर तुम्हे लगता है की मैं गलत कह रहा हूँ तू अभी से अपने आप को मुझसे दूर कर लो'

रुचिका 'जब आप माँ से इतना प्यार करते हैं तू मुझे कैसे कर पाओगे'

मोहनलाल 'तुम्हारे लिए मेरे प्यार में कभी कोई कमी नहीं आएगी'

रुचिका 'मतलब मुझे माँ के साथ प्यार को बाँटना पड़ेगा'

मोहनलाल 'नहीं तुम्हे मुझसे प्यार में कोई कमी नहीं मिलेगी, हाँ थोड़ा बहुत तुम्हारी माँ को भी मिलेगा'

रुचिका 'मतलब की मुझे अपनी माँ की सौतन बनना पड़ेगा और इंतज़ार करना पड़ेगा की कब मेरी बरी आएगी'

मोहनलाल 'सौतन की बजाये उसकी सहेली बनना जो की तुम पहले hi हो. अब थोड़ा पक्की सहेली बन जाना'

रुचिका 'मतलब मुझे हर हालत में त्याग करना पड़ेगा'

मोहनलाल 'मैंने तू सिर्फ एक रिक्वेस्ट की है क्योंकि मैं संध्या को किसी भी कीमत पर भटकने के लिए नहीं छोड़ सकता क्युओंकी वो मेरी जिम्मेवारी है'

रुचिका 'तू माँ के लिए मुझे छोड़ डोज'

मोहनलाल ने उसके चेहरे को पकड़ कर उसकी आँखों में देखते हुए 'जैसा की मैंने पहले भी कहा है की तुम मेरे दिल की धड़कन हो और मैं तुमसे प्यार करना नहीं छोड़ सकता'

रुचिका को हंसी आ गयी और कहने लगी 'वैरी गुड ऑफ़ यू. तवो बर्ड्स, ओने इन हैंड, ओने इन बुश'

मोहनलाल 'तुम शायद गलत समझ रही हो'

रुचिका 'मैं कैसे गलत समझ रही हूँ, जरा समझाइये, आप यही छह रहे हैं न की घर में माँ और बहार मैं. ऊपर से बहार घूमने और मज़े करने के लिए एक जवान बीवी मिल रही है जो कभी किसी से कुछ कहेगी भी नहीं और जितने चाहो मज़े लूटो और वो कभी शिकायत भी नहीं कर सकती क्योँकि वो तू अब आपके सुनहरे जाल में फंस गयी है'

मोहनलाल 'मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं है'

रुचिका 'है ..है .ha..ha, क्या कहने जवान गर्लफ्रेंड मिल गयी है उसके मज़े लूटो और ये सब करने के लिए उसको महंगे से महंगे होटल में ले जाओ, कीमती चीज़ों की आदत डालो ताकि वो आपकी घुलम बन जाये और जैसे मर्जी उसके बदन से खेलो, कोई रोकने वाला नहीं'

मोहनलाल को उसकी बात सुनकर बहुत बड़ा धक्का लगा और उसने रुचिका को एकदम छोड़ दिया. उसके सर पर जो प्यार का नशा था वो छू मंतर हो गया. उसको रुचिका पर गुस्सा तू बहुत आया, लेकिन उसने इसको प्यार से हैंडल करने की सोची और उसने कहा 'रुचिका, मैंने तुम्हे दिल की गहराईयों से प्यार किया है और मेरा प्यार कोई पल दो पल का नहीं है, ये जब तक मेरे दिल में धड़कन है तब तक ये हमेशा जीवित रहेगा. रही बात तुम्हारे बदन से खेलने की तू मैं तुम्हे बता दूँ की मैंने तुमसे प्यार किया है और प्यार में वासना का कोई काम नहीं है. हाँ ये भी सच है की तुम बहुत खूबसूरत हो और जब दो प्यार करने वाले दिल पास आते हैं तू उनके शरीर एक दूसरे से मिलने को आतुर हो जाते हैं. मैं तुम्हे इतना hi कहूंगा की आज के बाद बल्कि अब के बाद तुम्हे हाथ भी नहीं लगानुगा और रही तुम्हारे भविष्य की बात तू कोई अच्छा सा लड़का खुद धुंध लेना या मुझे कहोगी तू मैं धुंध दूंगा और तुम्हारी शादी करा दूंगा'

रुचिका 'आप माँ के लिए मुझे छोड़ सकते हैं, लेकिन मेरे लिए माँ को नहीं छोड़ सकते'

मोहनलाल 'मैं न तू तुम्हे छोड़ रहा हूँ और न hi तुम्हारी माँ को. मैं किसी एक के लिए दूसरे की जिंदगी ख़राब करना, ये मुझसे नहीं हो पायेगा.'

रुचिका 'मतलब अब आप माँ के लिए मुझे छोड़ रहे हैं'

मोहनलाल 'मैं तुम्हे नहीं छोड़ रहा हूँ बल्कि अपने आप को तुमसे दूर कर रहा हूँ'

रुचिका 'मतलब तू वही हुआ न की आपने मुझे छोड़ दिया'

मोहनलाल 'मैं तुम्हे सपने में भी नहीं छोड़ सकता लेकिन मैं तुम पर अपने आप को लड़ना भी नहीं चाहता. ये भी वादा है की जब भी तुम्हे मेरी जैसी भी जरुरत होगी, मैं तुम्हारे साथ खड़ा होँऊगा और उस जरुरत को पूरा करने के लिए कुछ भी कर जाऊंगा'

रुचिका 'आपने मुझे दुविधा में दाल दिया है'

मोहनलाल 'मैंने तू जो भी है वो स्पष्ट शब्दों में तुम्हारे सामने रख दिया है. मैं किसी भी लग लपेट में विश्वास नहीं रखता और दूसरी बात ये है की कोई भी रिश्ता झूठ के सहारे नहीं चल सकता. अच्छा है की शुरू में hi तुम्हे मेरी बातें पसंद नहीं आ रही हैं, लेकिन यही बात कल को पता लगती जब हम कुछ आगे बढ़ चुके होते तू वो और जयादा दुःख देती, इसलिए अपने दिल पर कोई बोझ न रखो. मैं तुम्हारा हमेशा एक दोस्त रहुगा जो तुम्हारे सुख दुःख में काम आ सके'

रुचिका 'मुझे तू कुछ भी समझ नहीं आ रहा है'

मोहनलाल 'ऐसा होता है, लेकिन कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं लेना चाहिए. आराम से ठंढे दिमाग़ से सोचो और मई हमेशा तुम्हारे फैसले का सम्मान करूँगा. मेरे ख्याल से अब हमें चलना चाहिए'

रुचिका कुछ न बोली तू मोहनलाल उस पेड़ के पीछे से निकल कर वंहा बने ट्रैक पर आ गया तू थोड़ी देर में रुचिका भी आ गयी. उसके बाद दोनों बिना कोई बात किया वंहा से निकलकर एक कैब में बैठकर होटल पंहुच गए.
 
आपकी विश्लेषण शक्ति अध्भुत है. आपने जितनी कहानी पढ़ी उसके हिसाब से आपने बहुत hi उत्तम दर्जे का विश्लेषण किया है.

सिर्फ ये और जोड़ना चाहुगी की जो आप देख या पढ़ रहे वो दो अलग अलग समय की बातें हैं. एक भूतकाल और दूसरा वर्तमान.

बीच के समय की पार्टी अभी खुलनी बाकि हैं. मैं अभी कोई कमेंट नहीं करुँगी क्योँकि कहानी का आनंद समापत हो जायेगा.

थोड़ा इंतज़ार करिये और आपको वाकई hi मजा आएगा क्योँकि आप कला के पारखी हैं.

धन्यवाद
 
यू अरे रियली ान इंटेलीजेंट रीडर हु इस ऑलवेज विजिलेंट.

नॉट ओनली थिस यू अरे आल्सो ा वैरी गुड रेविएवेर हु कैन अप्प्रेसियते एंड क्रिटीसीसे ात थे शामे टाइम, होवेवेर पॉजिटिव क्रिटिसिज्म.

यू don't हाईड योर इमोशंस ऑफ़ हैप्पीनेस एंड सडनेस ात थे शामे टाइम.

फर्स्ट ऑफ़ आल एक्सेप्ट अप्पायलॉगिएस फॉर थे ओवरसाइट िंग थे वर्ड, व्हिच वोउल्ड बे ताकें केयर नेक्स्ट टाइम.

थैंक्स सो मच फॉर थे फैंटास्टिक रिव्यु एंड विल वेट फॉर सुच रेविएवस ऑफ़ अपकमिंग फन फिल्लेद उपदटेस.
 
It's रियली हेअरटेनिंग तो नोट तहत थे फोरम है गॉन इन स्लीप मोड.

इन थे लास्ट 48 हॉर्स ओनली ओने कमेंट ों थिस थ्रेड.

वेल, नेक्स्ट अपडेट वोउल्ड बे पोस्टेड वीथिन ओने ऑवर एंड थें थस स्टोरी वोउल्ड बे कट शार्ट इन आर्डर तो कंकड़े सो तहत माय रेगुलर रीडर्स हु ऑलवेज टेक पाइनस तो कमेंट एंड रिव्यु आईटी सिंकेरेली अरे नॉट डेप्रिवेद ऑफ.

थैंक्स तो एवरीवन
 
अपडेट 57

रुचिका कुछ न बोली तू मोहनलाल उस पेड़ के पीछे से निकल कर वंहा बने ट्रैक पर आ गया तू थोड़ी देर में रुचिका भी आ गयी. उसके बाद दोनों बिना कोई बात किया वंहा से निकलकर एक कैब में बैठकर होटल पंहुच गए.

होटल आकर दोनों hi अपनी सोचो में गम थे. मोहनलाल सोच रहा था की वक़्त भी क्या क्या खेल दिखता है. सुबह अलग अलग थे, दोपहर में सरे गीले शिकवे मिटाकर एक हुए और रात होते होते फिर से अलग. वो मन में सोच रहा था की आगे क्या होगा. उसने अपने मन को शांत किया और कहा 'जो होगा अच्छा होगा'.

थोड़ी देर के बाद उसकी हिम्मत नहीं थी की वो रुचिका से डिनर पर चलने के लिए कहे, इसलिए उसने खाने का आर्डर कर दिया और रुचिका की मनपसंद चीज़े माँगा ली. खाना आने पर रुचिका ने खाने से मन किया तू मोहनलाल ने उससे मनाकर कहा 'दोस्त के साथ खाना तू खा सकती हो'. तब उसने खाना खाया और सोने के लिए बिना कपडे बदले hi बीएड पर लेत गयी. मोहनलाल चुप करके सोफे पर सो गया. अगले दिन दोनों तैयार होकर इंस्टिट्यूट गए तू पता चला की कोई सीट खली नहीं है, तब वो दोनों फ्लाइट पकड़ कर वापिस घर आ गए.

घर पर संध्या ने पूछा तू बता दिया की एडमिशन नहीं हुआ तू कहीं दूसरी जगह तरय करना पड़ेगा. तब उसने जिद करके मोहनलाल को रोक लिया और रुचिका के साथ जाने के लिए मन लिया. मोहनलाल रात को इस टूर के हर पहलु पर गौर करते हुए मन hi मन कहने लगा 'ी लव यू, रुचिका' और उसकी यादों में खोकर सो गया. इधर हकीकत में भी वो पुणे में रुचिका को आगोश में लिए हुए सो गया.

चलो हम चलते हैं आदित्य और संध्या के पास

अब कहानी प्रेजेंट में

संध्या ने भी उससे छिड़ते हुए 'ये गर्लफ्रेंड ऐसे hi थैंक्स कहती है, अगर नहीं चाहिए तू वापिस ले लेती हु' तब आदित्य उसके बिलकुल पास आ गया और उसको कमर से पकड़ कर अपने आप से चिपकते हुए 'मैं कोई भी चीज़ जो प्यार से दी जाती है वापिस नहीं करता बल्कि और जयादा खुद hi ले लेता हूँ' ये कहकर उसने संध्या के कश्मीरी सेब जैसे गलों को चुम लिया तू संध्या कहने लगी 'लगता है मेरा बॉयफ्रेंड आज मुझे लंच नहीं कराएगा, सिर्फ बातों से पेट भरेगा' आदित्य ने उससे और जयादा नजदीक करके उसकी चूचियों को अच्छे से अपनी छाती से दबाते हुए 'क्या करूँ मेरी गर्लफ्रेंड है hi इतनी खूबसूरत की मन hi नहीं कर रहा कहीं जाने का, लेकिन मैं उससे भूका तू नहीं रख सकता न, इसलिए आपकी सेवा में मैं हाज़िर हूँ चलिए' आदित्य ने जिस तरह कहा था उससे संध्या की हंसी छूट गयी तू आदित्य उसका हाथ पकड़ कर 'चलिए और बस ऐसे hi हँसते रहना जिंदगी भर' फिर वो दोनों हाथ में हाथ डालकर बहार आ गए और चल पड़े.

जब घर से निकलने लगे तू आदित्य ने पूछा की 'कैसे चलोगी, बाइक से या कैब से'

संध्या 'मुझे तू अपने बॉयफ्रेंड के साथ जाना है वो जैसे जाना चाहे जाउंगी' आदित्य उससे लेकर बहार आया और बाइक निकर कर दोनों उस पर बैठकर चल दिए.

रस्ते में आदित्य 'अगर आप कान्हे तू वंही चले जंहा पर कल गए थे'

संध्या 'इतने पैसे खर्चने की क्या जरुरत है, किसी और अच्छी जगह पर चलते हैं'

आदित्य 'ठीक है जैसे आप कान्हे'

संध्या 'तुम अपनी माँ को ले जा रहे हो या गर्लफ्रेंड को'

आदित्य 'मैं तू गर्लफ्रेंड को ले जा रहा हूँ लेकिन आपको माँ बनकर जाना तू भी कोई बात नहीं'

संध्या 'गर्लफ्रेंड को आप आप करके बुलाते हैं क्या?'

आदित्य 'क्या करूँ आप भी तू गर्लफ्रेंड की तरह नहीं बैठी हैं'

संध्या 'मतलब'

आदित्य 'अगर आप सच में गर्लफ्रेंड बनना चाहती हो तू सबसे पहले ये जान लो की गर्लफ्रेंड बाइक पर टंगे दोनों तरफ करके बैठती है न की एक तरफ और गर्लफ्रेंड इतनी दूर दूर थोड़ी बैठती है'

संध्या 'ठीक है बाइक रोको, लेकिन अब से मुझे सच में गर्लफ्रेंड की तरह ट्रीट करोगे और तुम कह कर बुलाओगे या नाम से. मैं सच में उस तरह से जीना चाहती हु जिस तरह मेरी उम्र सर्टिफिकेट में तुमसे काम लिखी गयी है मुझे अपने से छोटा hi ट्रीट करो'

आदित्य ने बाइक रोक दी, जिससे संध्या दोनों तरफ टंगे करके बैठ गयी और उसने आदित्य को पकड़ लिया. आदित्य 'मैं तू उस तरह ट्रीट करूँगा तू आपको परेशानी नहीं होगी'

संध्या 'क्योँ होगी जबकि मैं अब छोटी लड़की बनकर अपनी जिंदगी को फिर से जीना चाहती हु तू परेशानी कैसी'

आदित्य ने बाइक आगे बढ़ाते हुए 'ठीक जैसे तुम्हारी मर्जी' बाइक चलने से संध्या की चूचियां आदित्य की पीठ पर दबने लगी तू उन चूचियों के एहसास ने आदित्य को आंदोलित कर दिया. अभी संध्या के हाथ उसके कंधे पर रखे हुए थे जिससे चूचियों के दबने का एहसास काम हो रहा था. आदित्य ने बाइक रोकी और कहने लगा 'गर्लफ्रेंड हाथ बाजुओं के नीचे से निकलकर अपने बॉयफ्रेंड की छथि या पेट पर अपने हाथ कास कर बांध लेती है. जिससे सुनकर संध्या को शर्म आने लगी, लेकिन उसने सोचा की जब गर्लफ्रेंड बनना hi है तू फिर डरना क्या. जैसे ाड़जतय ने बताया था संध्या ने वैसा hi किया. ऐसा करने से अब वो बिलकुल hi आदित्य के ऊपर चढ़ी हुई लग रही थी. उसकी दोनों चूचियां ऐसे दबी हुई थी जैसे उन्हें फ्लैट करने के लिए दबाया गया हो. संध्या का पेट भी आदित्य की कमर पर बिच बिच में रगड़ खा रहा था. ये एहसास इतना अच्छा था की आदित्य अपने आप को उत्तेजित होने से बचा नहीं पाया और उसका लिंग पेंट के अंदर सलामी देने लगा. उधर संध्या को भी अपनी चूचियों को आदित्य की पीठ पर रगड़ कर मजा आ रहा था. उससे लग रहा था की जैसे समय का चाकर उल्टा घूमकर उससे फिर से जवान बना गया है. उसके दिल की धड़कन बढ़ गयी थी और आनद के बहाव में उसने अपने सर को आदित्य के कंधे पर रखकर उसकी गर्दन के पास चुम लिया. आदित्य को एकदम से करंट लगा और बाइक पर बैलेंस बिगड़ते बिगड़ते बचा.

आदित्य 'क्या कर रही हो, अभी गिर जाते'

संध्या ने एक बार फिर चुम लिया और कहा 'तुम अपनी गर्लफ्रेंड को गिरा डोज, गर्लफ्रेंड बनाई है तू उसको संभालना भी तू आना चाहिए'

आदित्य ने कहा 'मैं अच्छे से संभल भी सकता हूँ और हर बात का जवाब भी दे सकता हूँ, लेकिन वक़्त आने पर' उसके बाद संध्या आदित्य को तंग करती रही और वो दोनों एक बड़े से मॉल में पंहुच गए और पार्किंग में लगाकर फूडकोर्ट में जाने के लिए लिफ्ट ली तू लिफ्ट आज खली थी और उसमे सिर्फ वो दोनों hi थे. जैसे hi लिफ्ट का दरवाजा बंद हुआ तू आदित्य ने बड़ी हिम्मत करके अपनी माँ को पकड़ कर उसके गलों को बरी बरी से चुम लिया और कहा 'थैंक्स की आप सच में मेरी गर्लफ्रेंड बन गयी हैं'

अभी कुछ और होता वो पंहुच गए थे तू सबसे पहले संध्या वाशरूम जाकर अपने आप को ठीक करके आ गयी और आदित्य का हाथ पकड़ा लिया. दोनों फूडकोर्ट जाने लगे और एक टेबल पर बैठ का आर्डर दिया. आर्डर आने तक आदित्य संध्या को एकटक निहारे जा रहा था और कहने लगा 'यू अरे रियली ब्यूटीफुल'

संध्या ने सोच लिया था की वो उससे झूठा बिलकुल नहीं कहेगी नहीं तू बानी बनायीं बात बिगड़ जाएगी. उसने 'थैंक्स' कहा तू आदित्य ने उसका हाथ पकड़ कर सहलाने लगा तू वो कहने लगी 'कोई देख लेगा'

आदित्य 'यंहा कोई किसी को नहीं देखता, सब अपने में मस्त होते हैं, आप चिंता न करो'

संध्या ने आदित्य को घर कर देखा तू आदित्य को याद आया और उसने कहा 'ठीक है जान, आप नहीं कहुगा'

संध्या 'अभी क्या बोलै था?'

आदित्य 'जान, क्योँ अच्छा नहीं लगा'

संध्या 'अच्छा, बल्कि बहुत अच्छा लगा की तुमने मुझे दिल से गर्लफ्रेंड बना लिया है'

आदित्य 'आगे आगे देखो की क्या होता है, तुम्हे जीने का नया तारिक आ जायेगा'

संध्या खुश होते हुए 'मुझे कभी छोड़ तू नहीं डोज'

आदित्य 'मैं तू कभी नहीं छोडूंगा, हाँ तुम छोड़ दो तू बात दूसरी है'

तभी उनका आर्डर आ गया और वे दोनों आज एक दूसरे को बड़े प्यार से खिलने लगे और बहुत hi प्यार से एक दूसरे को निहार भी रहे थे. लंच ख़तम करके वो बहार आये तू वंहा पर मूवी का पोस्टर लगा देखकर संध्या ने पूछा 'क्या हम मूवी देख सकते हैं'

आदित्य 'इच्छा है तू हुकुम करो, अभी दिखा देते हैं'

संध्या बच्चो की तरह उछालते हुए 'अभी देख सकते हैं वो कैसे'

आदित्य ने वंहा पता किया की पीवीआर कान्हा पर है तू वो संध्या का हाथ पकड़ कर वंहा ले गया आउट दो टिकट्स प्लैटिनम (जो सबसे ऊपर को रौस होती हैं) की ले ली.

फिल्म कोई तीन हफ्ते पुराणी थी, इसलिए क्राउड भी काफी काम थी. फिर वो संध्या को लेकर अंडर पहुंचा. आदित्य ने देखा की जिस क्लास का टिकट लिया था उसमे बहुत काम लोग थे शायद यही कोई 2-3 जोड़े और कुछ सिंगल में जो बहुत दूर दूर बैठे थे. बाकी सब लोग नीचे वाली क्लास में बैठे हुए थे. आदित्य एक किनारे में जहाँ कोई नहीं था और जहाँ बहुत अँधेरा था वहीँ पे संध्या के साथ बैठ गया. वो फिर आदित्य को सवालिया नज़रों से देखने लगी पर आदित्य ने कहा 'यंहा सब अपनी प्राइवेसी चाहते हैं और हम क्योँ किसी के साथ बैठकर अपनी और उनकी प्राइवेसी में खलल डेल'

अभी मूवी शुरू भी नहीं हुई थी और आगे बैठे एक जोड़े ने किसिंग शुरू कर दी. उनकी रौ में बैठे एक जोड़ा भी काम क्रीड़ा में व्यस्त हो गया. जिससे देखकर संध्या ने आदित्य से पूछा तू उसने रिस्पांस में कहा 'मस्त रहो, ध्यान मत दो, ये सब नार्मल हैं' संध्या उसकी बात सुनकर अपनी नज़रे इधर उधर घुमाकर देख रही थी की वो लोग क्या कर रहे हैं. आदित्य ने उसके हाथ को अपने हाथ में लेकर कहा 'परेशान न हो और मस्त रहो, किसी को आपके देखने से कोई फरक नहीं पड़ेगा'

संध्या 'फिर से मुझे आप कहा'

आदित्य 'क्या करूँ मेरी गर्लफ्रेंड दूसरे लोगों में उलझी हुई है और अपने बॉयफ्रेंड पर ध्यान नहीं देगी तू वो दादी अम्मा हुई न तू आप कहना तू बनता है न'

संध्या ने आदित्य की बाजु पर चुटकी काट ली और कहा 'मैं दादी अम्मा, अभी बताती हूँ' और आदित्य के मुंह से 'आउच' निकला और अपनी बाजु को सहलाते हुए 'और क्या कान्हू, दादी अम्मा hi टैंक झांक करती है, गर्लफ्रेंड तू सिर्फ अपने बॉयफ्रेंड में खोयी रहती है जैसे की बाकि लोग कर रहे हैं और उन्हें किसी से कोई मतलब नहीं'

संध्या 'तुम भी तू दुसरो को देख रहे हो तू तुम भी दादा मुनि हुए न'

आदित्य मुंह बनाते हुए 'अब जब दादी अम्मा के साथ आऊंगा तू मैं भी तू दादा मुनि बन जाऊंगा न'

संध्या 'नहीं, तुम बहुत स्मार्ट और हैंडसम हो और सिर्फ मेरे बॉयफ्रेंड हो'

तभी लाइट्स ऑफ हो गयी और मूवी चलने लगी. थोड़ी देर आदित्य और संध्या मूवी देखते रहे फिर आदित्य ने उसका हाथ अपने हाथों में ले लिया और सहलाने लगा और कहने लगा 'अब बताओ की क्या बनना चाहती हो दादी अम्मा या जवान गर्लफ्रेंड'

संध्या ने अपने सर को आदित्य के कंधे पर रखकर कहा 'मुझे अब जिंदगी को फिर से जीना है और मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड hi हूँ और मुझे फील करना है की मैं अब जवान हूँ'

आदित्य ने अपनी बांयी बाजु को उसके सर के पीछे से लेजाकर उसके बांये कंधे को सहलाते हुए 'जान तुम बहुत प्यारी हो और अब से तुम जिंदगी के मज़े लूटो'

संध्या के दांये हाथ को ादिया ने थोड़ा सा संध्या की तरफ होकर उससे पकड़ लिया और फिर हलके हलके सहलाने लगा. उधर बांया हाथ उसके कंधे और गलों के बीच कंधे और गर्दन पर घूमता हुआ संध्या के दिल में हलचल मचने लगा.

इंटरवल से पहले एक सन ऐसा आया जब हीरोइन के साथ हीरो जो की उसका पति नहीं था, स्मूच करता है. इस सन को संध्या बड़े गौर से देखने लगी. और आदित्य संध्या को इस सन को देखते हुए देखता रहा. इस समय आदित्य का मन भी कर रहा था की वो संध्या को स्मूच कर ले लेकिन अपने ऊपर नियंत्रण करते हुए नहीं किया पर उसने संध्या की हटेलियों को जो अब भी उसके हाथों में थी उन को ज़रूर किश करने लगा. वो कुछ न बोली बस सन को देखती रही या देखने का बहाना करती रही.

थोड़ी दूर पर दूसरी जोड़ियां अपनी काम क्रिया में संलिप्त हो चुकी थीं. आदित्य ने संध्या की एक ऊँगली को अपने मुंह में दाल लिया और कास कर अंदर चूसने लगा तो अचानक संध्या के मुँह से एक सेक्सुअल सिसकार निकल गयी. और उसने झट से अपना हाथ खींच कर कहा 'ये क्या कर रहे हो?'

आदित्य को कुछ न सुझा तो उसने कह दिया की 'मुझी आइस क्रीम खाने का मन कर रहा था तो तुम्हारी ऊँगली जो मेरे हाथ में थी और मैं ख्यालों में खोये हुए था तू मुझे लगा की ये आपकी ऊँगली नहीं आइस क्रीम है सो मैंने उसे चूस लिया…. ी म सॉरी, अगर बुरा लगा हो तू.' वो हंस दी और कहने लगी की 'बुरा तू लगा उंगली चूसने से नहीं बल्कि तुम्हारे आप कहने से'

तभी इंटरवल हो गया और बाकि जोड़ियां अपने आप को ठीक करती हुई दिखाई दी तू संध्या 'किसी लड़की को शर्म नहीं आती' तू आदित्य हँसते हुए 'आजकल अगर लड़का कुछ न करे तू लड़की उस लड़के को छोड़ कर दूसरे से दोस्ती कर लेगी, ये शर्म वरं पुराने ज़माने की बातें हैं' आदित्य की बात सुनकर संध्या की आँखें बड़ी बड़ी हो गयी, जैसे की उसने बहुत देख लिया हो.

आदित्य उसके लिए कुछ खाने को लेन चला गया. दो कोक, दो रोल और पॉपकॉर्न ले आया. उन्होंने पहले कोक पिया. उनका आधा कोक hi ख़त्म हुआ था की आदित्य ने कहा की 'जान तुम अपना मुझे दे दो और मेरा कोक तुम पि के देखो' उसने वैसे hi किया लेकिन इससे क्या होगा कोक तू कोक है. तब आदित्य ने कहा की 'मेरी गर्लफ्रेंड के होंठों ने इस कोक को छुआ है तू ये स्पेशल बन गयी और मैं स्पेशल कोक का मज़ा लूंगा' संध्या उसकी बात सुनकर शर्माने लगी.

जब वो रोल खा रहे थे तो इस बार संध्या ने खुद hi एक्सचेंज करने को कहा तू आदित्य ने खुश होते हुए उससे अपना रोल दे दिया जिससे वो बड़े hi प्यार से चाट चाट कर खाने लगी तू आदित्य ने पूछा 'मैंने कोई तुम्हारी तरह लिपिस्टिक थोड़ी न लगायी है इस पर जो इतने प्यार से व्हाट रही हो' तू संध्या ने उसकी भाषा में जवाब दिया 'इस पर मेरे बॉयफ्रेंड का लार (सलीवा) लगा है जो अद्भुत है तू मजे लेकर छटूंगी न' उसकी बात सुनकर दोनों hi हंसने लगे.

फिर खा पि लेने के बाद वे फिल्म देखने लगे और संध्या ने आदित्य के कंधे पर फिर से सर रखकर उसके कान में कहा 'थैंक्स मेरा इतना ख्याल रखने के लिए' आदित्य ने उसकी बात सुनकर बांये हाथ से उसके दांये हाथ को पकड़ते हुए 'जान मैं तुम्हारा ख्याल नहीं रखूँगा तू किसका रखूँगा, तुम जो भी कहोगी मैं उससे पूरा करने की पूरी पूरी कोशिश करूँगा, बस उससे अपना अधिकार समझकर कहना'

संध्या खुश होते हुए अपनी उंगलियां उसके हाथ की उंगलयों में फंसकर 'मैं चाहती हूँ की तुम मुझे आजकल की गर्लफ्रेंड समझते हुए फील कराओ की मैं सच में तुम्हारी गर्लफ्रेंड हूँ'

आदित्य 'ऐसा काने में आप बुरा भी मान सकती हैं, जो मैं बिलकुल नहीं चाहुगा, क्योँकि मैं नहीं चाहता की मेरी इतनी प्यारी गर्लफ्रेंड मुझसे दूर हो जाये'

संध्या 'मैं किसी भी बात का बुरा नहीं मानूंगी, ये वादा है, बस मुझे फील कराओ की मैं आजकल की गर्लफ्रेंड हूँ'

आदित्य उसकी बात सुनकर जिस हाथ को पकड़ा हुआ था उसको हलके से चुम लिया तू संध्या के मुंह से एक सिसकारी निकली. आदित्य ने आगे बढ़ते हुए उसके हाथ की हथेली, उंगलियां और फिर धीरे धीरे उसकी बाजु को चाटने लगा तू संध्या के मुंह से मादक सिसकारियां निकल रही थी. संध्या ने इसको रोकने के लिए आदित्य के हाथ को अपने मुंह के पास लेजाकर उसकी उंगलियां उस तरह से चूसने लगी जैसे आदित्य चूस रहा था.

जब संध्या ये कर रही थी तब आदित्य उत्तेजित हो चूका था और उसने इसी उत्तेजना में अपने दूसरे हाथ को लेजाकर उसकी जांघ पर रख दिया जिससे संध्या को जोरदार झटका लगा लेकिन उससे अच्छा भी लगा और उसने आदित्य की उंगली को अपने डेंटन में दबा दिया तू आदित्य ने भी उसकी जंघा को अच्छे से दबा दिया, जिससे संध्या ने उसका हाथ छोड़ दिया तू आदित्य के हाथ का दबाव भी उसकी जांघ पर थोड़ा काम हो गया लेकिन उसने जांघ को छोड़ा नहीं. अब आदित्य ने अपना हाथ उसके सर के पीछे से लेजाकर उसके कंधे पर रखकर उसके कंधे को सहलाते हुए उसके कुर्ते का हिस्सा जो कंधे पर था उससे उंगली से मसलते हुए कंधे से हटाने लगा तू संध्या ने अपना हाथ उसके हाथ पर रख लिया. आदित्य ने दूसरे हाथ की हथेली से जांघ को धीरे धीरे सहलाना शुरू कर दिया तू संध्या के मुंह से सिसकारियां निकलने लगी और उसने अपने दांये हाथ को आदित्य के हाथ से हटाकर उस हाथ पर रख दिया जिससे वो उसकी जांघ को सेहला रहा था.

तभी मूवी में एक सन आया जिसमे इस बार हीरो हीरोइन को बीएड पर पटक कर उसकी नाभि के साथ खेलने लगा. संध्या उससे ध्यान लगा कर देख रही थी. उसके लिए ये सब अटपटा सा था क्युओंकी वो आज की नहीं बल्कि पुराने ज़माने की थी और आज ट्रेंड बदल चूका था. पहले की तरह सिर्फ फूकिंग नहीं होती थी अब अब तो सकिंग का ज़माना था और स्टिमुलेशन का भी. जब संध्या का ध्यान इस सन में था तब आदित्य ने अपने उस हाथ को जो कंधे पर था उससे संध्या की पीठ के पीछे ले जा कर उसकी पीठ को सहलाने लगा तो वो आदित्य के और करीब आ गयी. संध्या ने आदित्य के कंधे पर अपना सर रख दिया. आदित्य का हाथ उसकी पीठ सहलाते हुए जंहा ब्रा की पट्टी होती है पर पंहुच कर वंहा और उसके आसपास के हिस्से को सहलाने लगा तू वो कम्पनी लगी. इतना hi नहीं आदित्य ने उसकी जांघ को भी सहलाना और बिच बिच में उंगली से कुरेदना जारी रखा. उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थी और वो अपने गलों को कन्धों से आगे लेजाकर आदित्य के गलों से रगड़ने लगी. आदित्य ने भी हिम्मत करते हुए उससे अपने से और चिपका लिया और उसके गलों से अपने गलों को रगड़ते हुए अपने होठों को उसके गलों पर चलने लगा. आदित्य को लग रहा था की अब उसकी हालत खराब हो रही थी. वो तीन तरफ से अटैक कर रहा था. एक हाथ से पीठ को कुर्ते के ऊपर से ब्रा की पट्टी के पास सहलाते हुए, दूसरे हाथ से जांघ को हाथ की उँगलियों से सहलाते और कुरेदते हुए और चेहरे को गलों की रगड़ और होठों की तपिश, इन् सब से कौन स्त्री बच सकती है तू संध्या कैसे बचती. वो तू अपनी हालत को छुपाने के लिए अपनी टैंगो को भींचने लगी जिससे आदित्य का हाथ दोनों टैंगो के बिच फंस गया और संध्या अपने एक हाथ को आदित्य की पीठ पर ले गयी इससे उसकी चूचियों ने आदित्य की छाती पर प्रहार किया जिससे आदित्य बहुत जयादा उत्तेजित हो गया और जो होंठ उसकी माँ के गलों पर थे उसने संध्या के होठों पर अपने होंठ रख दिए और फिर जैसे hi उससे इस का आभास हुआ वो अपनी माँ से दूर होने लगा, लेकिन संध्या ने उससे जकड़ा हुआ था. उसको अपने आगोश में लेकर वो अपने हाथों से उसकी कमर सेहला रही थी और अपनी चूचियों को उसकी चाहती से रगड़ रही थी और आदित्य का हाथ उसने अपनी जांघों से अलग नहीं होने दिया. वो लम्बी लम्बी सांसें ले रही थी जैसे की वो चरमोत्कर्ष पर पंहुचने वाली हो.

संध्या की गरम गरम साँसें आदित्य के चेहरे पर पद रही थी, जो उसको मजबूर कर रही थी की वो अपनी माँ के होठों का रास पिए. उसने अपनी माँ की तरफ देखा तू उसकी आँखों में एक अंजनी प्यास का उससे अनुहाव हुआ और वो झुकता चला गया और अपनी माँ के होठों को अपने होठों से चुम लिया. उससे वो कुछ जयादा hi गरम लगे तू वो थोड़ा दूर होने लगा, लेकिन जैसे hi ये हुआ उसकी माँ ने आगे बढ़कर उसके होठों को अपने होठों में कैद कर लिया. दोनों hi एक दूसरे के होठों को चूस रहे थे लेकिन बड़े प्यार से. दोनों hi एक दूसरे को अब अपने में समेटना छह रहे थे. संध्या का हाथ उसकी पीठ पर उसकी कमीज को पकड़ कर अपनी तरफ खींच रही थी, जिससे उसकी चूचियों आदित्य की छाती पर केहर ध रही थी. उसके शरीर से उठाने वाली सुगंध ने आदित्य को आनंद के सागर में ले जा रही थी और उसका हाथ जो उसकी कमर पर था अब कंधे पर पंहुच कर उसके कुर्ते को उसके कंधे से हटाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन कुरता फिट होने की वजह से हैट नहीं रहा था पर हुआ ये की संध्या की ब्रा का स्ट्राप उसकी ऊँगली में आ गया तू उसने जोश में आकर खींच लिया जिससे संध्या की चूचियों पर जोर पड़ा तू उसने आदित्य के होठों को छोड़ दिया और अपने एक हाथ को अपनी एक चुकी पर लेजाकर उससे सहलाने लगी क्योँकि उससे वंहा खिचाव का अनुभव हो रहा था.

आदित्य अपनी माँ को 'सॉरी, सॉरी आपको मेरी वजह से तकलीफ हुई, आगे से ध्यान रखूँगा' संध्या उसकी बात सुनकर शरमाते हुए अपनी चूचियों को सेहला रही थी तू आदित्य ने कहा 'सॉरी, सॉरी मैं सेहला देता हूँ' संध्या उसकी बात सुनकर बहुत जयादा शर्मा गयी और अपने चेहरे को दूसरी तरफ घुमा लिया.

आदित्य ने उससे कहा 'अगर आपको बुरा लगा है तू ी ऍम रियली वैरी सॉरी'

संध्या एकदम मुड़कर आदित्य को देखने लगी और कहा 'मुझे तुम्हारी किसी बात का बुरा नहीं लग सकता. हाँ मुझे कभी अकेला मत छोड़ना' और इतना कहकर उसने आदित्य की बाजु को अपने हाथ से पकड़ लिया. आदित्य ने भी उसे अपनी बांहों में लेकर कहा 'ये वादा है की चाहे कुछ भी हो जाये मैं अपनी जान को अपने से अलग नहीं करूँगा और कोई भी दुःख तुम पर आने से पहले उससे मुझसे टकराना पड़ेगा'

संध्या की आँखें उसकी बात सुनकर नाम हो जाती हैं और भराई हुई आवाज़ में 'मुझे इतना चाहते हो'

आदित्य उसकी आँखों में आ गयी नमी को अपनी उंगली से साफ़ करते हुए 'मेरी चाहत की कोई सीमा नहीं है फिर उससे अपने में समेटना छह तू संध्या ने उसके चेहरे पर चुम्बनों की बारिश कर दी. जब संध्या अलग हुई तू देखा की आदित्य के चेहरे पर उसकी लिपिस्टिक के निशाँ लगे हुए हैं तू उससे हंसी आने लगी. संध्या ने आगे बढ़कर चाणक्य से उसके चेहरे को जगह जगह से साफ़ करने लगी तू आदित्य 'अच्छा पहले दाग लगाओ फिर उन्हें साफ़ करो'

तब संध्या ने कहा 'ये दाग नहीं प्यार की निशानियां हैं' आदित्य ये सुनकर उसके हाथ को पकड़ते हुए 'तू मिटने की क्या जरुरत है' तब संध्या ने कहा 'ये किसी और को दिखने के लिए नहीं हैं' जब उसने आदित्य के चेहरे को साफ़ करने के बाद तस्सली कर ली तू आदित्य ने अपने हाथ की उंगली से उसकी माँ के होठों के आसपास फ़ैल गयी लिपिस्टिक को साफ़ करने लगा तू संध्या के दिल में फिर से हलचल मचने लगी. उसने आदित्य को चाणक्य पकड़ते हुए कहा 'इससे साफ़ होगा' कहकर वो फिर से शर्मा गयी.

आदित्य ने कुछ नहीं कहा बस चुप करके उसके चेहरे पर होठों के आसपास फैली लिपिस्टिक को साफ़ करके उसने अपने अगूंठे से उसके होठों को सहलाने लगा तू संध्या सिसकारी लेते हुए 'क्या कर रहे हो' तू आदित्य ने कहा 'मैं अपनी जान के होठों पर फैली हुई लिपिस्टिक को ठीक करने की कोशिश कर रहा हूँ' और फिर वो अपने काम में लग गया लेकिन इस में संध्या के दिल की धड़कन बढ़ने लगी और उसकी चूचियों ने ऊपर नीचे होना शुरू कर दिया. आदित्य तू उन चूचियों का पहले से hi दीवाना था इस नज़ारे से उसका मन प्रस्सन हो गया.

तभी थोड़ा सा शोर मचने लगा जिससे पता चल रहा था की मूवी ख़त्म होने जा रही है और तभी लाइट्स ों हो गयी तू दोनों वंहा से एक नए रिश्ते को जनम देकर बहार बाहर आ गए.
 
अपडेट 58

अभी प्रेजेंट की कहानी को थोड़ा यंहा रोककर फिर से हम फ्लैशबैक में चलते हैं.

मोहनलाल प्रेजेंट में रुचिका के साथ पुणे में अपने फ्लैट पर है.

घर पर संध्या ने पूछा तू बता दिया की एडमिशन नहीं हुआ तू कहीं दूसरी जगह तरय करना पड़ेगा. तब उसने जिद करके मोहनलाल को रोक लिया और रुचिका के साथ जाने के लिए मन लिया. मोहनलाल रात को इस टूर के हर पहलु पर गौर करते हुए मन hi मन कहने लगा 'ी लव यू, रुचिका' और उसकी यादों में खोकर सो गया. इधर हकीकत में भी वो पुणे में रुचिका को आगोश में लिए हुए सो गया.

मोहनलाल सो तू गया लेकिन उसके सपने में भी वो सब बीती बातें आती रही जो नीचे फ़्लैश बैक में प्रस्तुत हैं.

अगले दिन सुबह सुबह पता चला की रुचिका को तीसरे दिन इंटरव्यू के लिए जाना है तू मोहनलाल ने संध्या को मन लिया की वो अभी काम पर चला जायेगा और अगले दिन रात तक आ जायेगा और वो तीसरे दिन रुचिका को ले जायेगा. संध्या मान तू नहीं रही थी, लेकिन मोहनलाल के समझने पर वो मान गयी और मोहनलाल वंहा से चला गया. असल में वो रुचिका से दूर होना चाहता था क्योँकि अब उससे दर था की कहीं कोई ऐसी बात न हो जाये जो संध्या को शक के घेरे में दाल दे. वो वंहा से पुणे आ गया और अपने मंजर को सब कुछ समझकर अपने फ्लैट में आ गया और उसने आराम करने की सोची.

वो बीएड पर लेत कर सोच रहा था की क्या करें, उसका मन बहुत विचलित था. वो रुचिका से टूट कर प्यार करने लगा था लेकिन वो संध्या और आदित्य की जिम्मेवारी को भी नहीं भूलना छह रहा था और ऊपर से रुचिका ने ये भाखेड़ा खड़ा कर दिया की 'संध्या को छोड़ दूँ तभी वो मुझसे प्यार करेगी, अब प्यार में शर्तो का क्या काम. शर्तो पर प्यार नहीं समझौता होता है. अगर उससे प्यार करना है तू प्यार करे लेकिन बिना शर्तो के' उसके मन में ये भी आ रहा था की अगर वो नहीं मानती तू वो क्या करेगा. इस मुद्दे पर आकर वो प्रश्न होने लगता था. उसका एक मन कहता था की छोडो उसको और अपने मन को पक्का करके उससे दूर होने की कोशिश करो. कैसे करूँ, मन hi तू नहीं मान रहा. ये सोचते सोचते उससे नींद आ गयी.

जब वो उठा तू देखा की रुचिका की बहुत साडी मिस्ड कॉल्स थी और बहुत सरे मेस्सगेस आये हुए थे. मोहनलाल ने पहले तू सोचा की 'छोडो कोई जवाब नहीं देता, लेकिन दूसरे hi पल उससे लगा की नहीं, जवाब देकर बात को ख़तम करता हूँ' ये सोचते hi उसने मेस्सगेस देखे तू उसमे लिखा था

'आप मुझसे नाराज होकर फिर चले गए'

'ी ऍम सॉरी'

'प्लीज फॉरगिव में'

'आपके बिना मैं नहीं रह सकती'

'ी लव यू'

'प्लीज पिचकूप माय फ़ोन'

'ी लव यू'

'स सम

ो ओने

र रियली

र रेमेम्बेरिंग

य यू'

आखिरी मैसेज पढ़कर मोहनलाल को हंसी आ गयी और अभी वो सोच hi रहा था की रुचिका का फ़ोन आ गया तू उसने सोच hi लिया की उठा लेता हु तू उसने फ़ोन उठाया और 'Hello' कहा

दूसरी तरफ से भराई हुई आवाज़ में 'ी ऍम सॉरी'

मोहनलाल "क्योँ बीटा"

रुचिका "मैं रुचिका बोल रही हूँ"

मोहनलाल "हाँ बीटा पहचान लिया है'

रुचिका 'मैं अब भी आपकी बेटी हूँ'

मोहनलाल 'बेटी hi तू हो'

रुचिका 'मैं आपकी जान हूँ'

मोहनलाल 'हाँ बेटी तुम मेरी जान भी हो'

रुचिका 'ी लव यू'

मोहनलाल 'ी लव यू तू'

रुचिका 'आप मुझसे नाराज़ हो'

मोहनलाल 'नहीं मैं क्योँ नाराज़ होँऊगा, अच्छा मैं अभी बिजी हूँ, कल आकर बात करेंगे'

उसके बाद फ़ोन काट गया आउट मोहनलाल ने अगले दिन तक कोई बात नहीं की. वो अगले दिन देर रात घर पंहुच गया और जाकर संध्या का पास लेत गया तू संध्या ने पूछा 'थक गए क्या'

मोहनलाल 'हाँ थक तू गया हूँ'

संध्या 'वो रुचिका बता रही थी की कल उसका इंटरव्यू है, उसके बाद एक दिन रूककर फिर इंटरव्यू है'

मोहनलाल 'तुमने मुझे फंसा दिया है'

संध्या उसके गले लगकर उसकी छथि को उंगली से कुरेदते हुए 'अपनी बेटी के लिए नहीं करोगे तू किसके लिए करोगे'

मोहनलाल 'चलो तुम्हारा एडमिशन करवा देता हूँ'

संध्या एक ठंढी सांस भरकर 'काश मैं पढ़ी लिखी होती! अब तू बेटी को देखकर लगता है जैसे मैंने पढ़ लिया है. आप जब बेटी का एडमिशन कराओगे तू मुझे लगेगा की मेरा एडमिशन हो गया'

मोहनलाल 'तुम यार मुझे इमोशनल ब्लैकमेल करके सब काम करवा लेती हो, चलो अब सोते हैं क्योंकि सुबह जल्दी जाना है' और वो दोनों सो गए.

अगले दिन सुबह जल्दी निकलकर फ्लाइट में बैठकर मोहनलाल ने आँखें बंद कर ली थी. अभी तक उन दोनों में कोई बात नहीं हुई थी. आज फ्लाइट भी खली थी और कुछ एक पससंजर्स hi थे तू बात करने के लिए पूरी प्राइवेसी थी. रुचिका ने बात शुरू करने से पहले अपने आप को मोहनलाल की तरफ झुखा कर उसके हाथ पर अपना हाथ रखा तू मोहनलाल की नींद खुल गयी और उसने सवालिया निगाहों से पूछा तू रुचिका ने अपने कानो को हाथ लगाकर बोलै 'सॉरी'

मोहनलाल 'सॉरी क्योँ बीटा'

रुचिका 'आप मुझे बीटा कह रहे हैं'

मोहनलाल 'तू क्या कान्हू'

रुचिका 'जान'

मोहनलाल 'Ok, सॉरी क्योँ जान'

रुचिका 'मुझसे गलती हो गयी की मैंने आपके प्यार को नहीं समझा'

मोहनलाल 'कोई बात नहीं, अभी तुम अपने एडमिशन पर कंसट्रटे करो'

रुचिका 'जब तक आप मुझे माफ़ नहीं करेंगे तब तक मैं कंसन्ट्रेट नहीं कर पाऊँगी'

मोहनलाल 'ठीक है बीटा, माफ़ किया, अब खुश'

रुचिका 'Hu..nn..hu, बीटा नहीं, प्लीज मुझे अपना प्यार समझो, अब मैं सच में एक अच्छी पत्नी बन कर दिखूंगी'

मोहनलाल 'बीटा मैंने तुम्हे पहले भी कहा था की कोई भी निर्णय जल्दबाजी में हमेशा नुक्सान देता है. टेक योर टाइम और उसके बाद अगर लगेगा तू सोचेंगे:

रुचिका 'वक़्त कान्हा है, दिया का फ़ोन आया था और वो हमारा प्रोग्राम पूछ रही थी और वो हमारे लिए हमारे नाम से होटल में कमरा भी बुक करवाने के लिए कह रही थी, अब आप बताओ मैं उससे क्या जवाब दू'

मोहनलाल हँसते हुए 'अगर तुम इस दर से फिर से मुझसे नए रिश्ते में आना चाहती हो तू वो सबसे बड़ी मूर्खता होगी. मैं कभी नहीं चाहुगा की तुम अब मेरे साथ मेरी पत्नी बन कर कहीं जाओ. मैं खुद hi बात करके सब संभल लूंगा, लेकिन इसके लिए मेरी पत्नी बनने की कोई आवश्यकता नहीं है'

रुचिका 'वो दर तू है hi, लेकिन मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ:

मोहनलाल 'मुझे सब मालूम है और उस को भूलना होगा ताकि तुम्हारा भविष्य अच्छा हो सके'

रुचिका 'लेकिन मेरा भविष्य तू अब सिर्फ और सिर्फ आपके साथ है'

मोहनलाल 'वो पॉसिबल नहीं है'

रुचिका 'क्या आप मुझसे प्यार नहीं करते या करना छोड़ सकते हैं'

मोहनलाल 'मैंने पहले भी कहा है और अब फिर कह रहा हूँ की प्यार तू बहुत छोटी चीज है है, तुम मेरे दिल की धड़कन हो, इसका मतलब ये नहीं की मैं तुम्हारा भविष्य ख़राब करूँ क्योँकि कोई भी चीज जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए. ये तू हम रिश्ते की बात कर रहे हैं और मुझे तुम्हारी शर्ते मंजूर नहीं हैं, इसलिए बेहतर यही है की हम दोनों अपने अपने रस्ते पर अपनी मर्जी से बिना रोक टोक के चलें और उन बातों को एक सपना समझ कर भूलने की कोशिश करें'

रुचिका 'क्या आप मुझे भूल पाओगे'

मोहनलाल 'तुम मेरी बेटी भी हो और तुम्हे कभी नहीं भूल सकता लेकिन तुम्हारी हर खवाहिश पूरी करने की कोशिश करूँगा'

रुचिका 'अगर मैं कान्हू की मुझे आप के साथ जिंदगी जीनी है'

मोहनलाल 'तुम फिर जल्दबाजी में निर्णय ले रही हो, पहले अपने आप को वक़्त दो फिर सोचना की क्या सही और क्या गलत है'

रुचिका 'मुझे समझ आ गयी है, मैं आपको मेरे लिए माँ को छोड़ने के लिए कह रही थी और वो बेचारी मेरे लिए आपसे लड़ रही थी और वो मेरी छोटी से छोटी चीज का ख्याल रख रही थी और मैं उसके साथ कितना गलत करने जा रही थी . मेरे एडमिशन के लिए वो ऐसे कर रहीं थी जैसे की उनका खुद का एडमिशन हो और मैं हूँ की उस देवी को सौतन समझने लगी थी' फिर उसकी आँखों में आंसू आ गए थे और सुबकते हुए कहने लगी 'मैं उनकी गुनहगार हु, मैं आपको कभी नहीं कंहूगी उन्हें छोड़ने के लिए'

मोहनलाल ' तुम अकेली गुनहगार नहीं हो बल्कि मैं भी उतना hi गुनहगार हु क्योँकि मैंने उसका विश्वास तोडा है. उसने तू मेरे साथ अपनी बेटी को भेझा था और मैंने उससे अपनी पत्नी बनाकर उसकी सौतन hi बना दिया. एक गुनाह तू हो hi गया और अब उस पर दूसरा गुनाह की उस बेचारी को अकेला छोड़ दू, ये पाप मुझसे हरगिज नहीं होगा'

रुचिका 'मुझे आपकी बातें बाद में समझ आयी और सच बताऊँ की मैं आप से पहले से बहुत जयादा प्यार करने लगी बल्कि पूजा करने लगी हूँ और आज के बाद आपकी हर बात को बिना कुछ कहे मानूंगी, बस मुझे अपना लो'

मोहनलाल 'देखो तुम मेरी कोई घुलम नहीं हो की मेरी हर बात को बिना सोचे मानोगी बिलकुल भी नहीं क्योँकि मैं भी इंसान हूँ और गलती मुझसे भी होती है और आगे भी हो सकती है. मैं तुम से अब भी यही कहूंगा की जल्दबाजी में फैसला न लो'

रुचिका 'मैंने तू अच्छे से सोच लिया है और आप को बता दू की अभी तक तू शायद नाटक हो रहा था लेकिन मैंने आपको अपना पति मान लिया है और आपके आलावा मैं अब किसी और से कभी शादी नहीं करुँगी. मुझे लग रहा है की अब आप मुझसे पीछा छुड़ाना छह रहे है तू कोई बात नहीं मैं आपको कभी मुझे अपनाने को नहीं कंहूगी और पूरा जीवन अपने आप को आपकी पत्नी समझ कर अकेले hi पूरी जिंदगी गुजर दूंगी'

मोहनलाल 'तुम बहुत चालक हो, एक तरफ कहती हो की मैं कुछ नहीं कंहूगी लेकिन इतना बड़ा इमोशनल ब्लैकमेल की तुमने मुझे चारो खाने चित कर दिया है'

रुचिका भी मुस्कुराते हुए 'आपने मुझे स्वीकार कर लिया है'

मोहनलाल 'मैंने ऐसा कब कहा है'

रुचिका उदास होते हुए 'सच में नहीं एक्सेप्ट किया'

मोहनलाल 'एक्सेप्ट उसको किया जाता है..... जो आपसे दूर हो, तुम तू मेरे दिल की धड़कन हो तू तुम्हे तू मैं अपने आप से अलग कैसे कर सकता हूँ'

रुचिका का इतना सुन्ना था की उसने मोहनलाल की बाजु के नीचे से अपनी बाजु निकलकर उसके हाथ में अपना हाथ दे दिया और उसकी तरफ बड़े प्यार से कहा 'थैंक्स'

मोहनलाल ने कहा 'तुम मेरी क्या हो' तू रुचिका ने कहा 'पत्नी', तब मोहनलाल ने मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखा तू उससे याद आया तू 'सॉरी सॉरी' तब मोहनलाल ने हँसते हुए कहा 'एक गलती पर दूसरी'

रुचिका 'मुझे ऐसी गलतिया करने का कोई गम नहीं है क्योंकि आपने मुझे अपनी पत्नी मान लिया है'

उसकी बात सुनकर दोनों मुस्कराने लगे और मोहनलाल ने उसके हाथ को चूमते हुए 'तुमने मुझे सिर्फ पति मन है या पति वाले अधिकार भी दिए हैं'

रुचिका 'मैं एक भारतीय नारी हूँ और वो जिसको पति मान लेती है उसके लिए कुछ भी कर गुजराती है'

मोहनलाल 'एक बार फिर से सोच लो क्योँकि ये रास्ता आसान नहीं है'

रुचिका 'मुझे अब किसी से कोई दर नहीं है और न hi अब मुझे दुबारा सोचना है'

तभी प्लेन के लैंड होने की अनाउंसमेंट हुई और दोनों ने बेल्ट बांध ली और लैंड करने के बाद बहार आये तू कैब करके वंहा पंहुच गए जंहा एडमिशन होना था. दोपहर तक वे दोनों खली हो गए लेकिन रुचिका का एडमिशन नहीं हुआ. अब फ्लाइट शाम 6 बजे की थी तू उनके पास कोई 4 घंटे का वक़्त बिलकुल फ्री था तू उन्होंने किसी टूरिस्ट स्पॉट पर जाने की सोची. सामान तू कोई था नहीं उनके पास. उनोहोने एक टैक्सी बुक की जो उन्हें घुमाएगी और फिर एयरपोर्ट छोड़ देगी.

टैक्सी से वो एक बहुत hi प्रसिद्ध और प्राचीन ुधयान में टिकट लेकर अंदर चले गए. अंदर जाकर देखा की वो एक घाना उद्यान है जिसमे बहुत हरियाली है. बड़े बड़े पेड़ हैं और अंदर खाने पीने की बहुत साडी दुकाने हैं. पता लगा की अभी ऑफ सीजन है और दूसरा वर्किंग डे है तू भीड़ बहुत hi काम क्या न के बराबर थी. सबसे पहले वंहा एक पुराणी दुकान पर खुश खाया पिया और वेटर से वंहा के लिए काफी जानकारी ले ली. उसने बताया की ये जगह कपल्स के लिए परफेक्ट है. उसने राइ दी की एक कोल्ड्रिंक, पानी की बोतल और कुछ चिप्स के पैकेट लेकर हम उद्यान में चले जाये तू अंदर घने पेड़ों की छाँव में बहुत आनंद आएगा. मोहनलाल ने उससे अच्छी टिप दी तू उसने बताया की किस जगह पर कोई भी डिस्टर्ब नहीं करेगा. उसने अपना फ़ोन नंबर भी दिया और कहा 'साहब कुछ भी चाहिए तू फ़ोन कर देना, हाज़िर हो जाऊंगा'

मोहनलाल और रुचिका दोनों उद्यान के अंदर चल दिए. उद्यान वाकई देखने लायक जगह है, वंहा पर प्राकर्तिक छठा बिखरी पड़ी थी. दोनों जैसे जैसे आगे बढ़ रहे थे तू बिच बिच में उन्हें एक दो कपल्स दिखाई दिए जो अपने में मस्त थे और उन्हें दीं दुनिया की कोई खबर नहीं थी. दोनों चलते हुए वेटर द्वारा बताई हुई जगह पर पंहुचे तू उनका दिल खुश हो गया. वंहा एक बहुत hi विशालकाय वृक्ष था जिसकी छाँव में बहुत अच्छी गद्देदार घास थी और वो जगह हर किसी की नज़र में भी नहीं आ सकती थी. मोहनलाल ने रुचिका का हाथ पहले से hi पकड़ा हुआ था, उसको लेकर वो उस पेड़ के नीचे पेड़ के एक तने से पीठ लगाकर बैठ गया और रुचिका भी उसके साथ बैठ गयी.

मोहनलाल उससे अपने पास करते हुए 'दूर क्योँ बैठी है'

रुचिका 'मैं दूर कान्हा हूँ, मैं तू आपके पास हूँ'

मोहनलाल उसके कंधे पर हाथ रखते हुए 'हाँ यार हो तू तुम मेरे दिल में लेकिन फिर मुझे दूर क्योँ लग रही हो'

रुचिका हँसते हुए 'एक तू आप के दिल में है, दूसरी मेरे रूप में बहार है'

मोहनलाल 'यार ये तू बहुत जयादती हो जाएगी, एक hi इतना गुस्सा हो जाती है, दो तू पता नहीं क्या क्या करेंगी'

रुचिका 'मैं गुस्सा होती हूँ'

मोहनलाल 'नहीं तुम्हारे बारे में कब कहा, तुम तू सिर्फ प्यार करती हो, गुस्सा तू कोई और होता है'

रुचिका 'कौन'

मोहनलाल 'वही जो मेरे दिल में रहती है'

रुचिका 'मतलब मैं आपके दिल में नहीं रहती'

मोहनलाल 'मैंने ऐसा कब कहा'

रुचिका 'अभी तू आपने कहा की जो मेरे दिल में रहती है वो गुस्सा करती है और आपने कहा की मैं तू गुस्सा करती नहीं हूँ'

मोहनलाल 'अब मैं क्या कह सकता हूँ, तुम खुद hi डीडे कर लो'

रुचिका मोहनलाल की चाहती पर अपना सर रखकर 'मैं hi आपके दिल में रहती हूँ और मैं hi गुस्सा करती हूँ और करती रहूगी, इस पर मेरा अधिकार है'

मोहनलाल 'ठीक है जैसे तुम्हारी मर्जी, चलो गुस्सा तुम करो, प्यार के लिए किसी और को देख लूंगा'

रुचिका 'ख़बरदार, अगर किसी और के बारे में सोचा भी तू, प्यार भी मैं hi करुँगी और सिर्फ प्यार hi नहीं करुँगी बल्कि प्यार की नदिया बहा दूंगी'

मोहनलाल 'वैसे यार एक बात बताओ, अभी तू तुम बीवी बानी नहीं हो तू इतना रोब्ब चला रही हो, बीवी अगर बन गयी तू फिर तू मेरा जीना मुहाल हो जायेगा'

रुचिका 'मैं आपकी बीवी हु, बीवी हु, अब मत कहना बानी नहीं हूँ'

मोहनलाल 'कह देने से थोड़ा न कोई बीवी बन जाता है, उसके लिए तू बहुत कुछ करना पड़ता है, बहुत सारा प्यार करना पड़ता है और हाँ तुम तू कह रही थी की प्यार की नदिया बहा डौगी, लेकिन यंहा नदिया तू दूर, मुझे तू कोई छोटी मोती नाली भी नहीं दिखाई दे रही'

रुचिका मोहनलाल के बिलकुल नजदीक आ गयी और घूम कर अपने आप को मोहनलाल के बिलकुल सामने कर लिया और उसकी आँखों में देखते हुए 'प्यार की तू कोई कमी नहीं है, हाँ देखने वाले के ऊपर है की उससे वो क्या दिखाई देता है, नदी, नाला या नाली या कुछ भी नहीं'

मोहनलाल उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उससे और पास कर लिया तू दोनों की नाक एक दूसरे की नाक से टकराने लगी और उनकी नाक से निकलने वाली गरम गरम सांसें उन दोनों के चेहरों पर जैसे hi पड़ी दोनों hi मस्ती में आ गए और अभी और आगे बढ़ते की रुचिका के चेहरे पर एक बालों की लत उसकी आँखों के ऊपर से होती हुई नाक पर आ गयी जो मोहनलाल को परेशान करने लगी.

मोहनलाल थोड़ा पीछे हुआ और उसके चेहे की लत को उंगली की मदद से पीछे किया और फिर से उसके चेहरे के पास जाने लगा और इस बार उसने रुचिका के गलों को चुम लिया तू रुचिका सिहर उठी और उसने थोड़ा पीछे होना चाहा लेकिन तब तक मोहनलाल ने अपनी टंगे मोड़ ली थी तू उसकी कमर मोहनलाल की जांघो से जा टकराई. रुचिका ने जब पीछे मुड़कर देखा तू मुस्करा दी और खुद hi उन पर पीठ टिका ली.

मोहनलाल उससे निहारने लगा और उससे आगे आने के लिए कहा तू उसने सर हिलाकर न कर दिया. मोहनलाल ने एक चिप्स के पैकेट को उठाकर उसको कटा और चिप्स निकलकर मजे से खाने लगा और ऐसे दिखाई रहा था की जैसे वो वंहा पर अकेला है और वो जानभूझकर रुचिका की तरफ देख hi नहीं रहा था. जब उसने करीब आधा पैकेट खा लिया था तू रुचिका आगे आयी और मोहनलाल से शिकायती अंदाज़ में 'आप तू अकेले अकेले खाये जा रहे हैं, मेरी तू परवाह hi नहीं है'

मोहनलाल 'क्योँ नहीं है, परवाह है तभी तू नहीं दिया'

रुचिका 'क्या मतलब'

मोहनलाल 'अगर तुम खाओगी तू मोती हो जाओगी, इसलिए तू तुम्हे नहीं दिए'

रुचिका अपनी आँखें तरेरते हुए 'मैं मोती हो जाउंगी और आप नहीं होंगे"

मोहनलाल 'मैं तू रोज एक्सरसाइज करके अपनी चर्बी खत्तम कर देता हु'

रुचिका 'देखो मैं कान्हा मोती हूँ, मैं तू रोज hi चिप्स कहती हूँ फिर भी मोती नहीं होती'

मोहनलाल 'खुद को तू ऐसे hi लगता है, ये तू कोई दूसरे देखे तू पता चलता है, और चुन्नी ूढ़ कर तू पतला hi दिखेगा, असली पता तू चुन्नी उत्तर के लगेगा'

रुचिका ने बिना सोचे जोश में आकर चुन्नी उत्तर कर अलग रख दी और कहा 'देखो कान्हा से मोती हूँ'

मोहनलाल ने उसके दोनों हाथों को पकड़ते हुए अपनी तरफ झटका दिया जिससे रुचिका सीधे मोहनलाल की छाती से आ लगी और मोहनलाल ने चिप्स उसके मुंह में डालते हुए कहा 'जान तुम चिप्स खाओ, मैं देख लूंगा की तुम मोती हो की नहीं'

रुचिका को मोहनलाल की चालबाजी समझ आ गयी और उसने पीछे जाना चाहा लेकिन जा नहीं पायी क्योँकि मोहनलाल ने पीछे से टांगों को और जयादा मोड़कर उसकी पीठ से लगा दी और आगे से एक हाथ से उसकी बाजु के नीचे से अपनी बाजु निकलकर उसकी पीठ पर ले गया और दूसरे हाथ से उससे चिप्स खिलने लगा और कहने लगा 'तुम जैसी भी हो बहुत अच्छी हो'

रुचिका 'मैं तू मोती हु न'

मोहनलाल 'मैंने ये नहीं कहा की हो, मैंने कहा की अगर जयादा चिप्स खाओगी तू हो जाओगी' रुचिका ने कहा "अगर मैं मोती हो जाउंगी तू आप मुझे छोड़ डोज"

मोहनलाल ने उसकी बात सुनते hi उससे अपनी बांहों में भर लिया और अपने सीने में चिपटा लिया, जिससे उसके बूब्स डाब गए. मोहनलाल ने कहा 'आज तू कह दिया बस आज के बाद कभी न कहना की अलग हो जाऊंगा या छोड़ दूंगा. अब तुम कोई अलग नहीं हो मेरे hi शरीर का हिस्सा हो और कोई भी अपने आप को अलग नहीं करता है' इतना केकर मोहनलाल ने अपने होंठ उसके माथे पर रखकर उसे हलके से चुम लिया और फिर अपने होठों को माथे से अलग करके रुचिका को निहारने लगा तू रुचिका जो उसकी आँखों में देख रही थी, जयादा देर न देख पायी और अपनी पलके झुका ली.

मोहनलाल जैसे hi अपने होठों को फिर से रुचिका की तरफ ले जाने लगा तू उसकी सांसों की गति बढ़ने लगी और रुचिका को लगा की फिर से उसका माथा चुम लिया जायेगा, लेकिन मोहनलाल ने पहले तू अपने होठों को रुचिका के माथे के बिलकुल पास लेकर कुछ देर रुका रहा जो रुचिका के दिल की धड़कन को बढ़ने के लिए काफी था, लेकिन मोहनलाल ने उसके दिल की धड़कन को और जयादा बढ़ाते हुए माथा न चूमकर अपने होठों को नीचे लेट हुए उसकी आँखों की पलकों को चुम लिया. थोड़ी थोड़ी देर में वह आँखों को बदल बदल कर चुम रहा था जो रुचिका को बहुत उत्तेजित कर रहा था और उसके बूब्स ऊपर नीचे होकर मोहनलाल की छथि पर अपना काम कर रहे थे. मोहनलाल फिर अपने होठों को पलकों से गलों पर ले आया और उन्हें बड़े प्यार से थोड़ी थोड़ी दूर पर चूमकर अपने होठों को उसके चेहरे से अलग कार्य था तू रुचिका तड़प उठती थी, मोहनलाल बड़े प्यार से गलों से ठोढ़ी पर आया तू रुचिका अपने होठों को आपस में मलने लगी, जैसे की उससे लग रहा था की अब होठों की बरी है, लेकिन मोहनलाल ठोढ़ी से फिर दूसरी तरफ के गलों पर चूमने लगा और उसने इस तरह गलों से ठोढ़ी और ठोढ़ी से गलों का सफर तय करने लगा, लेकिन रुचिका के होठों को प्यासा छोड़ दिया.

एक दो बार तू मोहनलाल को लगा की रुचिका खुद hi उसके होठों को पकड़ना चाहा रही है तू वो बच कर निकल गया और गलों पर पंहुच गया और इस बार उसने अपने होठों को गलों से सीधा उसके गुलाब की पंखुड़ियों की तरह नरम नरम होठों पर पहले अपने होंठ रखे और फिर रुचिका के होठों को अपने होठों में कैद कर लिया. रुचिका जो पहले से hi मोहनलाल के सामीप्य और उसकी हरकतों से उत्तेजित थी उसके होठों के स्पर्श की वजह से वो इतनी जयादा उत्तेजित हो गयी की वो ये खुद hi चाहती थी मोहनलाल के होठों में उसके होठों के कैद होते hi उसपर एक नशा च गया. उसका हृदय बहुत तेज गति से धड़कने लगा, जिसकी आवाज मोहनलाल को अपनी चाहती पर सुनाई दे रही थी.

मोहनलाल के हाथ उसकी कमर पर चल रहे थे और वो कभी हाथों से सहलाता और बीच बीच में उंगलियां चला कर गुधुडी करता और उसकी बाजुओं ने रुचिका के बूब्स की साइड को भी दबा रखा था, जिन्हे वो कभी जयादा दबा देता और कभी दबाव काम कर देता, ये सब रुचिका के लिया असहनीय होता जा रहा था, जिससे उसकी योनि में भी हलचल मचने लगी थी. मोहनलाल के हाथ जब उसकी पीठ पर चल रहे थे तू उसके हाथ से एक स्ट्राप टकराया तू वो उससे टटोलने लगा तू पता चला की ये रुचिका के हैंड बागा का स्ट्राप है तू वो रुचिका से थोड़ा अलग हुआ और रुचिका से बोलै 'अरे यार बैग क्योँ लटका रखा है इससे तू हटा देती' ये कहकर मोहनलाल ने खुद hi उसके गले से स्ट्राप निकलकर बैग को अलग कर दिया लेकिन इस प्रक्रिया में मोहनलाल की बाजु से उसका बूब कुछ जयादा hi डाब गया जो रुचिका को आनंद की अनुभूति में चार चाँद लगा गया. उसका दिल छह रहा था की मोहनलाल उससे अपने साथ चिपटकर उससे खूब दबाये.

वो अभी ये सोच hi रही थी की मोहनलाल उससे निहारते हुए कहने लगा 'यू अरे रियली ब्यूटीफुल, जान'

रुचिका इठलाते हुए 'नहीं मैं तू मोती हु न'

मोहनलाल ने आगे बढ़कर उसकी कांखों में अपने हाथ जैसे hi डेल तू रुचिका को एक करंट सा लगा क्योँकि मोहनलाल के अंगूठे से उसका बूब डाब रहा था और कांखों में उँगलियों से गुदगुदी होने लगी, फिर मोहनलाल ने उसकी कांखों में हाथ डेल डेल रुचिका को अपने ऊपर ले लिया और थोड़ा सा लेती हुई मुद्रा में हो गया जिससे रुचिका भी मोहनलाल के ऊपर आ गयी और उसके बूब्स मोहनलाल की छथि में डाब से गए और मोहनलाल के हाथ रुचिका की कमर पर ऊपर नीचे हो रहे थे. मोहनलाल के हाथ रुचिका के कंधे से होकर रुचिका की सलवार की लाइन तक आते और फिर ऊपर चले जाते.

मोहनलाल के होठों ने रुचिका के होठों को फिर से अपनी गिरफत में लेकर उन्हें चूसना शुरू कर दिया जिससे रुचिका को भी जोश आने लगा और वो भी मोहनलाल का साथ देने लगी. उसके हाथ भी मोहनलाल के चेहरे पर पंहुच कर उससे पकड़कर सहलाने लगे. रुचिका का एक हाथ चेहरे से गर्दन पर आ गया और मोहनलाल के कंधे को सहलाते हुए उसकी कमीज पर जंहा बटन होता है वंहा पंहुचकर मोहनलाल की छाती के ऊपरी हिस्से को अपनी उंगली से कुरेदने लगी तू मोहनलाल को भी जोश आ गया और उसके हाथ जो पीठ पर थे वो उसके उभरे हुए नितम्बों पर पंहुच गए और उससे सहलाते हुए अपने साथ दबाने लगा जिससे रुचिका का योनि प्रदेश मोहनलाल के पेट पर रगड़ खाने लगी और रुचिका के मुंह से सिसकारियां निकलने लगी और वो काफी जोश में आ गयी थी. दोनों hi एक दूसरे को फील कर रहे थे.

इस सब में रुचिका का कुरता थोड़ा ऊपर हो गया और मोहनलाल का हाथ जो उसकी पीठ पर ऊपर नीचे हो रहा था वह रुचिका की नंगी पीठ से छू गया तू रुचिका को ऐसा करंट लगा जैसे की उसने एक नंगी तार को छू लिया हो, उसके मुंह से बहुत hi मादक सिसकारियां निकलने लगी और यही हाल मोहनलाल का था उसके मुंह से भी गरम गरम साँसें निकलकर रुचिका के चेहरे पर तपिश पैदा कर रही थी. अभी वो और आगे बढ़ते उनका फ़ोन बज उठा. मोहनलाल ने अपने को नियंत्रित करते हुए फ़ोन उठाया तू पता चला की ड्राइवर का फ़ोन था जो वापिस आने के लिए कह रहा था क्योँकि फ्लाइट का टाइम होने वाला था.

मोहनलाल ने एक बार फिर से रुचिका के होठों को चूमकर और उसकी पीठ को सेहला कर चलने के लिए कहा और खुद भी खड़ा हो गया और फिर दोनों अपने कपडे ठीक करने लगे.
 
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