अपडेट 75
मोहनलाल को एक बार फिर से उसकी यादों में छोड़कर हम चलते हैं आदित्य और संध्या के पास.
अब कहानी वर्तमान में
संध्या को उसकी बात सुनकर कुछ तस्सली तू हुई लेकिन फिर भी उससे अपने ऊपर विश्वास नहीं तह की वो ये बात उससे बता पायेगी और क्या भरोसा है की ये मुझसे गुस्सा नहीं करेगा या मुझे छोड़ कर नहीं जायेगा. लेकिन अब ये भी सच था की वो बिना जाने रहेगा नहीं. संध्या ने बड़ी हिम्मत करते हुए एक बार आदित्य के चेहरे को निहारा लेकिन फिर अपनी पलके झुकाते हुए कहने लगी 'वो.... न... वो न.... '
आदित्य 'क्या'
संध्या 'वो.... न... वो न.... '
आदित्य 'ये क्या है वो न वो न, बताना है तू बताओ'
संध्या 'वो न .. मुझे... न .. तुम. से .. pa....a ..yaa...r. हो गया है' इतना कहकर वो आदित्य के गले लग गयी.
आदित्य तू अपनी माँ की बात सुनकर एक डैम से शॉकेड हो गया की ये क्या हुआ, वो सोचने लगा 'उसकी माँ ने ये क्या कह दिया की उनको मुझसे प्यार हो गया. माँ तू अपने बेटे से प्यार करती है, लेकिन ये कौनसे प्यार की बात कर रही हैं' उसकी माँ के गले लग जाने से उसकी चूचियों ने उसके सीने में हलचल मचा दी और उसका हाथ अपने आप hi उसकी माँ की पीठ पर पंहुच कर उससे सहलाने लगा. जैसे जैसे वो अपनी माँ की पीठ सेहला रहा था तू उसका मन कर रहा था की और जोर से सहलाये क्योँकि एक तू उसकी नरम नरम चूचियों का सीने पर दबना और उसकी माँ का प्यार करने की बात ने उसके दिल के तारों को छेड़ दिया
आदित्य प्रत्यक्ष में 'माँ आप क्या कह रही हो, मैं समझा नहीं'
संध्या ने उसको और जयादा जोर से गले लगते हुए 'मुझे तुमसे प्यार हो गया है' इस तरह करने से आदित्य का रक्त परवाह तेज होने लगा और उत्तेजना में उसकी आवाज लड़खड़ाने जैसी हो रही थी
आदित्य ने अपने आप को सँभालते हुए 'मतलब आपको अपने बेटे से पहले प्यार नहीं था?'
संध्या भी ये बात करते हुए और अपने बेटे के गले लगने से उत्तेजित हो रही थी और उस की भी आवाज़ लड़खड़ा रही थी 'मुझे tu..m..se पहले भी py..aar था जैसे एक माँ को अपने बेटे से होता है, लेकिन मुझे वो वाला py..aar हो ga...ya है जैसे एक la...dki और lad...ke में होता है'
आदित्य का मन तू नहीं था फिर भी दिखने के लिए अपनी माँ से थोड़ा अलग होते हुए 'ये आप क्या कह रही हैं'
संध्या ने शरमाते हुए अपनी पलकों को झुकाया हुआ था और इसी मुद्रा में लड़खड़ती जुबां से 'Ha...an mu..jhe तुम से py...aar हो gay....aa है'
आदित्य 'ये फीलिंग आपको कब से हुई'
संध्या 'ये fee...ling तू मुझे ba...hut पहले हो गयी थी'
आदित्य 'कब से'
संध्या ने एक ठंढी सांस ली और अपने आप को संयत करते हुए 'तुम्हे शायद याद होगा की मैं बीमार हो गयी थी और घर पर तुम्हारे आलावा कोई नहीं था'
आदित्य 'क्योँ दी नहीं थी क्या'
संध्या 'वो टूर पर गयी हुई थी, मैंने तुम्हे कॉल करके जैसे hi बताया तू तुम जल्दी से घर आये और मुझे डॉक्टर के पास ले गए और दवाई दिलवाई'
आदित्य 'क्या माँ, ये तू नार्मल सी बात है क्योंकि एक बीटा अपनी बीमार माँ को डॉक्टर के पास लेकर तू जायेगा hi, इसमें नया क्या है'
संध्या 'डॉक्टर से दवाई लेन से लेकर उसके बाद तुम चार दिन तक जब तक मैं ठीक नहीं हुई घर से बहार नहीं गए और दिन रात मेरी सेवा कैट रहे'
आदित्य 'वो तू मेरा फ़र्ज़ था, उसमे कौन सी नै बात हो गयी'
संध्या 'तुम पूरी रात जागते रहे, मेरे सर पर ठन्डे पानी की पट्टी बदलते रहे, फिर तुमने मेरे शरीर में जंहा भी दर्द हो रहा होता था, मालिश करते रहे. तुमने चार दिन तक घर से बहार कदम भी नहीं रखा. तुम्हारे पता नहीं कितने फ़ोन आये लेकिन तुमने सबको मन कर दिया. पुरे घर का काम खुद hi करते रहे. वक़्त पर खाना, फल, दवाई और मेरी सेवा, इसके आलावा तुमने कुछ नहीं किया. तुमने मेरे मन में एक अलग hi जगह बना ली'
आदित्य 'मैं तू इससे सब नार्मल समझता हूँ'
संध्या 'ये कोई नार्मल बात है की तुमने उन् चार दिनों में अपना एक पेपर मेरी वजह से छोड़ दिया और तुम्हारा इतना बड़ा क्रिकेट मैच था, तुम उसमे भी नहीं गए. ये सब मामूली बात नहीं है. बीटा तू कोई न कोई बहाना बनाकर न तू पेपर छोड़ता और न hi मैच. तुमने तू मेरे कहने के बावजूद भी नहीं गए. जो तुमने किया वो एक साधारण बात नहीं थी. ये सब कुछ मेरे दिल में अंदर तक बैठ गया. मुझे तुम्हारी सेवाभाव से बहन हुआ की मुझे तुम्हारे जैसे एक सच्चे दोस्त की जरुरत है जिससे मैं अपने दिल की बात कर सकू'
आदित्य 'आप जो भी बता रही हैं, वो मेरी नज़रों में सब साधारण बात है'
संध्या की आँखों में नमी आ गयी थी और वो कहने लगी 'ये सब तुम्हारे लिए साधारण हो सकती हैं, लेकिन मेरे लिए नहीं. उस बात ने मेरे दिल में एक अलग hi स्थान ले लिया, लेकिन मैं समझ नहीं पा रही थी की ये क्या है. वक़्त के साथ साथ तुम्हारी केयर करने की भावना ने मेरी सोच को एक अलग दिशा दे दी और मुझे लगने लगा की मैं तुम से प्यार करने लगी हूँ. मेरी कभी हिम्मत नहीं हुई तुम्हे कुछ कहने की क्योँकि मैं खुद अपने आप में ुल्हि हुई थी. बहुत बार सोचा की तुमसे बात करू, लेकिन नहीं कर पायी. हर बार घर बार मेरी भावनाओं के बिच आ जाते थे. तुमने शायद नोट किया हो या न किया, उस वाकये के बाद मैं तुम्हे दिन में काम से काम एक बार फ़ोन करके तुम्हारे बारे में पूछती थी. तुम जब देर से आते तू मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगता था. मैं तुम्हारा इंतज़ार करती, तुम्हारे लिए अच्छी अच्छी डिशेस बनती. मुझे काफी वक़्त लगा समझने में की मुझे तुम से प्यार हो गया है. जैसे hi ये भावना मेरे मन में पनपी, एक बार तू मैं दर गयी की ये कैसे मुमकिन है और मैं अपने आप से लड़ने लगी और क्या सही है क्या गलत कुछ भी समझ नहीं आता था'
आदित्य 'अब आपने कैसे हिम्मत कर ली ये बात स्वीकार करने में'
संध्या 'ये हिम्मत भी तुम्हारी वजह से आयी है'
आदित्य 'मेरी वजह से कैसे'
संध्या 'तुम्हे याद होगा की जब हम किले में गए थे और वंहा पर चूबतरे पर बैठे थे तू तुमने कहा था की तुम मेरे दोस्त बनकर रहोगे और मुझे घुमाओगे. मेरी हर तरह से मदद करोगे. पहले तू मैं डर्टी थी, लेकिन अब अकेलेपन की वजह से और तुम्हारे साथ की वजह से मुझमे तुम्हे ये सब बताने की हिम्मत आ गयी है'
आदित्य 'आप अकेली कान्हा हैं'
संध्या की आँखों में नमी तू पहले hi थी लेकिन अब वो सुबकने लगी और सुबकते हुए कहने लगी 'अकेली, मैं तू शुरू से hi अकेली हूँ. जब से तुम्हारा जनम हुआ है तुम्हारे पापा तू बस साल में एक दो बार hi घर आते हैं और वो भी आने के बाद अपने कामों में उलझे रहते हैं. कभी कभी तू ऐसा होता है की रात को आये और अगले दिन सुबह सुबह जल्दी चले गए तू मैं अपने दिल का हाल किसको बताऊँ'
आदित्य 'क्या पापा आपसे प्यार नहीं करते'
संध्या 'अगर न करते होते तू मैं कबकी हिम्मत करके जो बात आज बताई है वो तुम्हे पहले hi बता देती'
आदित्य 'जब पापा आपसे प्यार करते हैं तू फिर समस्या क्या है. कहीं ऐसा तू नहीं की आप उनसे प्यार नहीं करती हो'
संध्या का सुबकना अब थोड़ा काम हो गया था और वो आदित्य की बात सुनकर सोच में पद गयी, लेकिन फिर उसने कहा 'तुम्हारे पापा बहुत अच्छे हैं, लेकिन उनकी अपनी मजबूरियां हैं, अगर वो काम नहीं करते तू हम भूखे मरते. एक बार जो उनको पैसा कमाने की धुन लगी तू वो घर को जयादा वक़्त नहीं दे पाए. घर को संभालने की जिम्मेवारी मेरे ऊपर आ गयी और घर सँभालते संभालते कब उम्र निकल गयी पता hi नहीं लगा. तुम लोग बड़े हो गए, तुम्हारे पापा अपने काम में कुछ जयादा hi व्यस्त हो गए और मैं इस सब में अकेली रह गयी. जंहा तक बात है की मैं तुम्हारे पापा से प्यार करती हूँ की नहीं तू इसके जवाब में बस इतना hi कहूंगी की उनसे बहुत प्यार करती हूँ, बल्कि उनकी इज़्ज़त करती हूँ'
आदित्य 'जब आप उनसे प्यार करती हैं तू फिर आप मुझसे प्यार कैसे कर सकती हैं'
संध्या 'ये मैं भी नहीं समझ पा रही हूँ. मैं उनसे प्यार करती हूँ, लेकिन तुमसे भी प्यार करती हूँ'
आदित्य 'जंहा तक मुझे समझ आ रहा है, आप पापा से प्यार करती हैं और क्योँकि आप अपने आप को अकेली महसूस करने लगी हैं, इसलिए अब आप एक ऐसा साथी छथि हैं जिससे आप दिल की बात कर सके और इस बात के लिए मैं आपके सामने हूँ तू आप मुझे बॉयफ्रेंड बनाना छह रही हैं और अब आप कहती हैं की
आप मुझसे प्यार करती हैं'
संध्या 'मैं तुमसे सच में प्यार करने लगी हूँ'
आदित्य 'देखो या तू आप पापा से प्यार नहीं करती हो, या फिर मुझसे नहीं करती हो'
संध्या 'मैं तुम्हारे पापा से और तुम से भी प्यार करती हूँ'
आदित्य 'ऐसा कैसे संभव है'
संध्या 'क्या एक व्यक्ति एक से जयादा लोगो से प्यार नहीं कर सकता'
आदित्य 'कर सकता है, लेकिन ऐसे प्यार में उस व्यक्ति को दुःख जयादा मिलेंगे और सुख काम'
संध्या 'लेकिन मैं क्या करून, मुझे तू अब प्यार हो गया है'
आदित्य 'देखो आप बेशक मेरी माँ हैं, मैं अब आप से एक दोस्त की हैसियत से कह रहा हूँ की आप सिर्फ और सिर्फ पापा से प्यार करो और जंहा तक मेरा सवाल है तू आपको चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है. मैं आपकी पूरी केयर करूँगा, बल्कि पहले से भी जयादा करूँगा और आपको कभी अकेला नहीं छोडूंगा'
संध्या 'मुझे सब समझ आ रही है की तुम मुझसे किसी भी तरीके से पीछा छुड़ाना चाहते हो ताकि तुम्हे मुझे न तू गर्लफ्रेंड बनाना पड़े और प्यार तू बहुत दूर की बात है' इतना कहकर वो उठकर सुबकते हुए जाने लगी.
जैसे hi वो उठकर जाने लगी तू आदित्य भी अपनी जगह से खड़ा हुआ और अपनी माँ को पीछे से उसके कन्धों को पकड़ा तू संध्या के मुंह से निकला 'aa...uu..cc...hh' असल में आदित्य का एक हाथ उसके कंधे पर जले हुए हिस्से पर लग गया था और जैसे hi याद आया तू अपने हाथ को हटात्ते हुए 'सॉरी सॉरी', लेकिन उसने दूसरे कंधे को नहीं छोड़ा.
संध्या 'छोडो मुझे और तुम मेरी तरफ से किसी बंधन में नहीं हो, तुम्हारे जो मन में आये करो, मेरी जिंदगी में जो होगा वो मैं अकेले भुगत लुंगी' और वो सुबकने लगी.
आदित्य ने उसके कंधे पर दबाव डालकर अपनी ओर घूमते हुए उसकी आँखों से नमी को अपनी उँगलियों से पोंछने लगा तू संध्या ने कहा 'छोडो मुझे और ये सब करने की जरुरत नहीं है, मैं अपना ख्याल खुद hi रख सकती हूँ'
आदित्य ने उसको न तू छोड़ा और न hi उसकी आँखों की नमी को पोंछना बंद किया. वो अपना काम करते हुए कहने लगा 'आप ने ये कैसे सोच लिया की आप मुझसे अलग हो और आपने ये क्योँ सोचा की मैं आपको अकेले छोड़ दूंगा'
संध्या 'तुमने अभी तू कहा था की या तू मुझसे प्यार करो या तुम्हारे पापा से'
आदित्य ने उसको फिर से अपनी तरफ घूमने की कोशिश की लेकिन वो तस से मास नहीं हुई और आदित्य अभी जयादा जोर नहीं लगाना छटा था, इसलिए वो पीछे से अपनी माँ के ओर जयादा नजदीक हो गया, जिससे उसका सीना उसकी माँ की पीठ को स्पर्श करने लगा और वो अपने हाथ को कंधे से उसके चेहरे पर ले जाते हुए उसके गाल को पकड़ कर पीछे की तरफ घूमकर कहने लगा 'आप मेरी फ्रेंड हो और सच्चे दोस्त का काम होता सही सलाह देना और हो सकता है की सही सलाह देने में सलाह देने वाले दोस्त का नुक्सान भी हो सकता है लेकिन उससे अपने नुक्सान की परवाह किये बिना ये करए करना चाहिए. मैंने भी वही किया है. मैं आपसे दोस्ती निभाते हुए ये कह रहा हूँ. अगर मैं आपका दोस्त नहीं होता तू आपका फायदा उठकर आपको तड़पता हुआ छोड़ देता'
संध्या उसकी बात सुनकर एक डैम से घूम गयी और आदित्य के गले लग गयी 'नहीं मुझे दोस्ती चाहिए, मुझे अकेला नहीं छोडो नहीं तू मैं टूट जाउंगी'
आदित्य ने भी उससे अपने आगोश में लेते हुए अपना हाथ को उसकी पीठ पर लेजाकर सहलाते हुए कहने लगा 'आप मेरी दोस्त हैं और मैं आपसे वादा कर चूका हूँ की आपको अकेले नहीं छोडूंगा, इतना hi नहीं एक सच्चा दोस्त होने के नाते आपको कोई भी गलत सलाह नहीं दूंगा, चाहे आपको अच्छा लगे या बुरा'
संध्या 'अगर बुरा लगा और मैं नाराज़ हो गयी तू'
आदित्य उसकी पीठ पर अपने हाथ का दबाव बढाकर अपने से थोड़ा दबाते हुए 'अगर आप नाराज़ हो गयी तू या तू थोड़ी देर में आपको मेरी बात समझ आ जाएगी और आप अपनी नाराजगी छोड़ डौगी, नहीं तू मैं आपको मन लूंगा'
संध्या 'अगर मैं नहीं मणि तू'
आदित्य मुस्कुरा दिया और कहने लगा 'आप मेरी गर्लफ्रेंड हो और अब मुझसे प्यार भी करती हो तू फिर कैसे नहीं मानोगी. हाँ अगर प्यार नहीं करती तू बात दूसरी है'
संध्या 'लेकिन तुम तू मुझसे प्यार तू दूर, अभी पूरी तरह से गर्लफ्रेंड भी नहीं मानते'
आदित्य उसकी पकडे पकडे अपने बीएड के पास लेजाकर बीएड पर बैठा दिया और खुद भी उससे बिलकुल सत्कार बैठ गया और उसके एक कंधे पर अपने हाथ को रखा और दूसरा हाथ अपने दूसरे हाथ में ले लिया, जिससे संध्या की चूचियां आदित्य की बाजु के साथ दबने लगी और आदित्य की धमनियों में रक्त परवाह बढ़ने लगा. उसका मन कर रहा था की वो थोड़ा इस को ओर जयादा दबाये लेकिन उसके दिमाग़ में जो प्रश्न चल रहे थे, उनका समाधान वो पहले चाहता था. आदित्य ने अपनी माँ की तरफ थोड़ा घूमकर उसके हाथ को पकडे पकडे अंगूठे से उसके हाथ की पिछली तरफ को सहलाते हुए 'आप एक बात बताओ की अगर मैं आपसे प्यार करूँ और साथ में किसी और से भी करूँ तू आपको कैसा लगेगा?'
संध्या 'मुझे मालूम था की तुम किसी ओर से प्यार करते हो, इसलिए तुम मुझसे पीछा छुड़ा रहे हो. वैसे भी तुम्हे तू बहुत साडी जवान लड़कियां मिल जाएगी तू मुझ बुढ़िया को क्योँ अपने साथ रखोगे'
आदित्य ने अपनी बाजु को जो उसके पीछे थी उससे अपने आगोश में लेने की कोशिश करने लगा तू संध्या गुस्सा होने लगी की 'मुझे छोडो और जाओ किसी जवान लड़की के पास, मैं रह लुंगी अकेले'
आदित्य ने उससे नहीं छोड़ा और धींगा मुष्टि में उसकी चूचियां आदित्य से दबाने लगी और भावनाओं का भड़काना शुरू हो चूका था. आदित्य ने उससे कहा 'पहली बात तू अब के बाद आप अपने मन से निकल दो की आप बुढ़िया हो, अगर आपको विश्वास नहीं हैं तू मैं आपको किसी भी अनजान जगह ले चलता हूँ और वंहा पर ये बिलकुल भी मत बताना की आप मेरी माँ हैं तू वंहा पर जो लोग होंगे वो हमें इक्कठे देखकर लवर्स hi समझेंगे न की माँ बीटा. रही दूसरी बात की मैं किसी दूसरी लड़की से प्यार करूँ तू आपको कैसा लगेगा. मैंने ये इसलिए आप को कहा है की आपको जब ये सोचकर hi बुरा लगने लगा की मैं आपके आलावा किसी ओर से भी प्यार करने लगा हूँ तू हकीकत में क्या होगा.
आप जरा सोचो की आप वास्तव में दो लोगों से एक साथ प्यार करने की बात कर रही हो तू उन दोनों को जब ये पता लगेगा तू उन्हें कैसा लगेगा. आप की तरह बुरा नहीं लगेगा और बुरा लगते hi वो क्या करेंगे. वो या तू आपके साथ लड़ेंगे या आप को छोड़ भी सकते हैं
मैंने आपका सच्चा दोस्त होने के नाते hi यह बात कही थी की आप सिर्फ और सिर्फ पापा से प्यार करो न की मुझसे, बाकि आपकी मर्जी'
संध्या ने उसकी बात सुनी और आदित्य के साथ जोर से गले लग गयी और उसके गलों पर अपने तपते हुए होठों को रखकर एक चुम्बन लिया और पूछने लगी 'मुझे अकेला तू नहीं छोड़ोगे'
आदित्य 'मैं तू आपको अकेला नहीं छोडूंगा, लेकिन आप क्या करोगी'
संध्या 'मैं समझी नहीं'
आदित्य ने अपने जिस हाथ से उसका हाथ पकड़ा हुआ था उस हाथ को धीरे धीरे हाथ से बाजु और कंधे की तरफ ले जाने लगा जिससे संध्या की भी भावनाएं भड़काने लगी. वो हाथ ऊपर होते हुए उसके गलों तक पंहुच गया और अपने हाथ से उसकी गर्दन और फिर गाल सहलाते हुए अपने अंगूठे से उसके होठों को मसलते हुए पूछने लगा 'एक बात बताओ जब पापा आ जायेंगे तब आपको अगर दोनों में से सिर्फ और सिर्फ एक को चुनना पड़े तू आप किसको चुनोगी'