Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 180 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

काफी गर्मागर्म अपडेट दिए है । बबलू के जाने के बाद पहले मुनीम और महक का रस टपकाने वाला अपडेट और फिर सुन्दरी और परम के आने पर महक और सुन्दरी की कामुक बातों से फिर से घर मे सैक्स का माहौल बन गया और अपनी माँ सुन्दरी के लिए कई दिनों से तरसता परम ने मौका ताड़ लिया और सुन्दरी को कमरे में लेजाकर समागम शुरू कर दिया उधर पूरी रात और सुबह तक संभोग रत रही जवान लड़की अपने भाई और माँ का जलवा देख कर जलन में ही सही अपने बाप को फिर से कमरे में लेजाकर कॉम्पिटिशन करने लगी । घरेलू चुदाई समारोह शुरू हो गया । आगे देखना रोचक रहेगा यह कहाँ तक जाता है और इसका क्या अंजाम होता है । पिछले कई एपिसोड बहुत ही कामुक, लंबे और कुछ ज्यादा ही नयापन लिए हुए है । बहुत ही उम्दा काम किया गया है । मेरी एक इच्छा थी कि जो मैंने बहुत पहले शादी समाहरोह शुरू होने पर जाहिर की थी कि एक अपडेट महक सुन्दरी परम और मुनीम को लेकर घरेलू माहौल में एकसाथ लिखना । आपने काफी हद तक वह कार्य कर दिया है बाकी इच्छा अनुरूप अगर फ्यूचर में कभी इन चारों को एक ही मंच पर दिखा सके तो बहुत खुशी होगी ।
Pics और GIF की बात को लेकर आपका स्टेटमेंट एकदम सही है पाठक अपनी अपनी इमेजिनेशन से उस सीन को इमेजिन करे तो ज्यादा अच्छा रहेगा । और आपकी स्टोरी pics और GIF की मोहताज नही है । शानदार एपिसोड्स लिखने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।


391.
 
ये डबल पोस्ट हो गया इसके लिए सॉरी । फोरम पर बहुत दिक्कत आ रही है । बड़ी मुश्किल से इतना बड़ा कमैंट्स लिखा और फिर पोस्ट नही हुआ । एरर शो कर रहा था । दूसरा टैब खोल कर पहले छोटा कमैंट्स भेजा फिर पहले वाले पर जाकर उसको कॉपी करके यहाँ दोबारा भेजा । अब जाकर सुकून मिला है ।
 
काफी गर्मागर्म अपडेट दिए है । बबलू के जाने के बाद पहले मुनीम और महक का रस टपकाने वाला अपडेट और फिर सुन्दरी और परम के आने पर महक और सुन्दरी की कामुक बातों से फिर से घर मे सैक्स का माहौल बन गया और अपनी माँ सुन्दरी के लिए कई दिनों से तरसता परम ने मौका ताड़ लिया और सुन्दरी को कमरे में लेजाकर समागम शुरू कर दिया उधर पूरी रात और सुबह तक संभोग रत रही जवान लड़की अपने भाई और माँ का जलवा देख कर जलन में ही सही अपने बाप को फिर से कमरे में लेजाकर कॉम्पिटिशन करने लगी । घरेलू चुदाई समारोह शुरू हो गया । आगे देखना रोचक रहेगा यह कहाँ तक जाता है और इसका क्या अंजाम होता है । पिछले कई एपिसोड बहुत ही कामुक, लंबे और कुछ ज्यादा ही नयापन लिए हुए है । बहुत ही उम्दा काम किया गया है । मेरी एक इच्छा थी कि जो मैंने बहुत पहले शादी समाहरोह शुरू होने पर जाहिर की थी कि एक अपडेट महक सुन्दरी परम और मुनीम को लेकर घरेलू माहौल में एकसाथ लिखना । आपने काफी हद तक वह कार्य कर दिया है बाकी इच्छा अनुरूप अगर फ्यूचर में कभी इन चारों को एक ही मंच पर दिखा सके तो बहुत खुशी होगी ।
Pics और GIF की बात को लेकर आपका स्टेटमेंट एकदम सही है पाठक अपनी अपनी इमेजिनेशन से उस सीन को इमेजिन करे तो ज्यादा अच्छा रहेगा । और आपकी स्टोरी pics और GIF की मोहताज नही है । शानदार एपिसोड्स लिखने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।


391.
चलिए जान कर ख़ुशी हुई की आप को आपकी डिमांड अभी तक याद है.......................मैंने उस वक़्त कहा था की खाई न कही आपकी यह डिमांड को पूरी करने की कोशिश करुँगी। मैंने भी लिख के रखा था पर ऐसा कोई समय ही अनहि मिल रहा था। इस समय सभी घर में मौजूद थे तो सोचा क्यों ना इसका भी उपाय किया जाये। पता नहीं कितना आगे लिखूंगी पर फिलहाल तो यही है। अब रही बात चारो को एक साथ रखने की तो वैसे मेरी इस कहानी में थोडा सा ट्विस्ट आगे कर चुकी हूँ की चारो को एकदूसरे की हरकतों का पता नहीं इसलिए मुझे उस को ध्यान रखते हुए अभी फिलहाल मैंने उनको दुसरे कमरों में रखा हुआ है। आगे कोशिश करुँगी की एक साथ चारो एक ही पलंग को तोड़े।

जी बिलकुल मैं ध्यान में रखूंगी की इन चारो को मैं एक ही पलंग पर ले आउंगी और समय और मौके को तलालाश्ते हुए जल्द ही...................... वैसे अब मेरे पास किसी भी रीडर्स की कोई डिमांड नहीं है..........................हा हा हा हा हा.............................. शायद एक है की गुरूजी को बुलाया जाये .............देखते है..................


शुक्रिया दोस्त
 
सुंदरी का गैंगबैंग सुनने से पहले - दूसरों के साथ क्या हो रहा था

सुंदरी अपनी चूत पर परम के मोटे लंड से जोर-जोर से मार खाती हुई कराह रही थी। परम तेज-तेज धक्के मार रहा था। सुंदरी ने हाँफते हुए कहा,

“परम... तुमको तो पता है ना... मुझे (सुंदरी), महक और पूनम को चोदने की चाहत से उनकी पत्नियाँ बहुत नाराज़ हो गई थीं...”

पिछली रात बड़ी बहू ने रेखा के साथ रात बिताई थी, जबकि छोटी बहू फिर से परम और सेठजी से चुदकर आई थी। दोनों भाई (मोटे भाई और छोटे भाई) अपने-अपने कमरे में अकेले सोए थे। लेकिन आज स्थिति बदल गई थी।
प्रस्तुतकर्ता फनलवर है।

रेखा की मौसी अपनी छोटी नवविवाहित बेटियों के साथ आई थीं। और भी कई मेहमान आ गए थे। इसलिए तय हुआ कि बड़ी बहू का कमरा महिलाओं के लिए होगा और दोनों भाई छोटी बहू के कमरे में सोएँगे। बड़ी बहू ने परम के लिए भी वहीं बिस्तर लगवा दिया था। लेकिन आज रात कुछ और बच्चे भी परम के कमरे में सोने आ गए।

(उन बच्चों में किरण भी थी, जिसका कौमार्य कल रात परम ने भंग किया था और आज सुबह सुंदरी ने उसे मुनीम का लौड़ा चखाया था।)

रात का खाना खत्म होने के बाद छोटी बहू और बड़ी बहू दोनों परम के कमरे में आईं। सुंदरी वहाँ नहीं थी। किरण को परम के बगल में बिस्तर पर लेटी देखकर दोनों बहुएँ नाराज़ हो गईं।

बड़ी बहू ने गुस्से से पूछा, “किरण... तू यहाँ क्यों सो रही है?”

किरण ने बेशर्मी से मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “मैं इसी कमरे में सोऊँगी...”

दोनों बहुएँ समझ गईं कि किरण परम से चुदने के लिए आई है। उन्होंने इधर-उधर देखा तो पाँच और लड़के भी कमरे में सो रहे थे।

परम से थोड़ी देर बात करने के बाद सबसे पहले बड़ी बहू उठी और परम को इशारा करके बाहर बुला लिया। कमरे के बाहर पहुँचते ही उसने अपनी साड़ी खोल दी। पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी होकर फुसफुसाकर बोली,

“आज इस कमरे में परम के साथ मस्ती करना संभव नहीं है... किरण के अलावा और भी बच्चे हैं। मैं रेखा के साथ सोने जा रही हूँ। तू किरण को चोदकर मेरी साड़ी लपेट लेना और मेरे कमरे में आ जाना।”

बड़ी बहू ने परम को आँख मारी, “वहाँ मेरी कथित पत्नी रेखा के साथ भी मज़े कर लेना...”

कहकर वह पेटीकोट और ब्लाउज पहनकर रेखा के कमरे में चली गई।

परम ने बड़ी बहू की साड़ी उठाई और अंदर आ गया।
फनलवर का निर्माण।

“परम... साड़ी का क्या करेगा?” किरण ने पूछा।

परम ने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा,

“तेरी गांड में डालूँगा... फिर पहनकर नाचूँगा...”

यह सुनकर छोटी बहू ने भी अपनी साड़ी खोलकर परम के ऊपर फेंक दी और बोली,

“ले इसे भी पहन कर नाचना... साला छोटी चूतों का दीवाना...”

किरण को परम के बगल में अपनी जगह पर बैठा देख छोटी बहू को बहुत गुस्सा आया। वह कुछ बोलना चाहती थी, लेकिन चुप रह गई और दरवाज़ा बंद करके बाहर चली गई।

किरण ने तुरंत अपने सारे कपड़े उतार दिए। वह पूरी तरह नंगी हो गई। उसकी चूत सुबह सुंदरी द्वारा साफ शेव की हुई थी बिल्कुल चिकनी, गुलाबी और आकर्षक।

“परम... देख... मेरी चूत कितना तरस रही है... आजा... ठंडा कर दे...” किरण ने टाँगें फैलाते हुए कहा।

परम ने किरण की चूत को उँगलियों से सहलाया। किरण ने शर्माते हुए कहा, “सुंदरी काकी ने सुबह ही मेरी चूत शेव कर दी थी...”

उसके बाद पिछली रात की तरह परम ने किरण को दो बार खूब जोर-जोर से चोदा, पहली बार मिशनरी में, दूसरी बार कुत्ते की तरह। किरण बार-बार चीखती रही।

“बाप रे... बाप तो बाप... बेटा उससे भी बड़ा चुदक्कड़ है... राजा... मजा आ गया...मेरी चूत वैसे तो तेरे इस लंड से मार खाते-खाते दुःख रही है पर परम मेरी चूत अभी शांत हो गई है, बस चोदते रह, मैं भी तुम से चुदवाने आती रहूंगी राजा। बहोत मारा है तूने मेरी चूत को।” मन ही मन सोच रही थी की उसके बाप जैसा कोई नहीं। क्या चूत को चीरता है, लगे की अभी बच्चा ठहर ही जाएगा।

किरण थककर सो गई। सोने से पहले यह उसका आखिरी वाक्य था।



**************************************.................................


जुड़े रहिये दोस्तों।



Funlover.
 
किरण अपनी फटी हुई और घर्षण से जलती हुई चूत पर हाथ फेरते हुए थककर सो गई। उसकी उँगलियाँ अभी भी अपनी सूजी हुई, लाल चूत पर घूम रही थीं। किरण के मगज में अभी भी मुनीम का मोटा, नसों वाला लंड सवार था। उस लंड पर वह आफरीन थी। मुनीमजी के लंड के लिए वह अब कुछ भी करने को तैयार थी। उसे पता था की अगर मुनीम के लंड से वह चुदी तो दुसरे लंड से चुदवाने में मजा नहीं आएगा पर फिर भी वह मुनीमजी के लंड को बार-बार अपनी चूत में समा के खुद को बड़ा भोसड़ा बनवाने पे तुली थी। उसे वह लंड के धक्के याद कर-कर के अपनी चूत से पानी छोड़े जा रही थी। रचयिता फनलवर है।

“क्या चुदाई थी वह... उफ्फ... मस्त मेरी चूत को फाड़ दिया था... सुपारा अंदर घुसते ही लग रहा था जैसे कोई आग का गोला हो...”

वह मुस्कुराते हुए सो गई, लेकिन उसके सपनों में अभी भी मुनीम का लंड उसकी चूत में घुस रहा था।

किरण को संतुष्ट करने के बाद परम ने कुछ देर आराम किया। उसका लंड अभी भी अर्ध-खड़ा था। वह अपनी प्रियतमा रेखा से मिलना चाहता था। पिछले 5 रातों से वह रेखा से नहीं मिल पाया था क्योंकि रेखा मासिक धर्म में थी। रेखा का वह बदन, गोरा, नाजुक, भरी-भरी चूचियाँ और पतली कमर, परम के दिमाग में घूम रहा था।

उसका लंड रेखा को याद करके फिर से तन गया।

परम ने यह सुनिश्चित कर लिया कि किरण गहरी नींद में है, फिर उठ गया। जैसा बड़ी बहू ने कहा था, उसने बड़ी बहू की साड़ी लपेट ली, माथे पर पल्लू डाल लिया और इधर-उधर देखते हुए सीढ़ियों से ऊपर रेखा के कमरे की तरफ चला गया।

दरवाजा धक्का दिया तो खुला मिला। अंदर का दृश्य देखकर परम बहुत प्रसन्न हुआ।

बड़ी बहू के कमरे में रेखा की मौसी की दो नवविवाहित बेटियाँ, गुड्डी और उसकी छोटी बहन, समेत कई औरतें थीं। दोनों भाई (मोटे भाई और छोटे भाई) अपनी मौसी और उन जवान लड़कियों से शादी के बाद पहली बार मिल रहे थे। दोनों सुंदर, 18-19 साल की लड़कियों को देखकर उनके मन में कामुक विचार घुमड़ रहे थे। वे दोनों लड़कियों को चोदना चाहते थे, लेकिन अभी तक कोई मौका नहीं मिला था।

वे बस उनसे बातें कर रहे थे और आँखों ही आँखों में उन्हें नंगा करने की कल्पना कर रहे थे।

आधी रात हो चुकी थी। इस कमरे में मौजूद लोग दूसरे कमरों में हो रही गतिविधियों से अनजान थे, जैसे परम किरण की चुदाई कर रहा था, बड़ी बहू अपनी ननद रेखा की चूत चूस रही थी, और सुंदरी दूसरे मेहमानों का मनोरंजन कर रही थी।

तभी एक बुजुर्ग महिला ने सलाह दी, “बहुत देर हो गई है, अब सबको सो जाना चाहिए।”
फनलवर का निर्माण।

लेकिन दोनों लड़कियाँ और दोनों भाई अभी और बातें करना चाहते थे। गुड्डी ने कहा,

“क्या माँ, रोज तो सोते हैं... फिर कब भैया से बात करने का मौका मिलेगा?”

“भाई हमें तो नींद आ रही है, मैं तो सोती हूँ,” एक बुजुर्ग महिला ने कहा।

“हाँ, बहुत देर हो गई है, लाइट बंद कर दो,” दूसरी ने अनुरोध किया।

बड़े भाई ने तुरंत मौका पकड़ते हुए कहा,

“चलो गुड्डी, हम दूसरे कमरे में चलते हैं... वहाँ आराम से बातें करेंगे।”

“हाँ, चलो दीदी तुम भी,” छोटे भाई ने दूसरी बहन को सुझाव दिया।

चारों, दो बहनें और दोनों भाई, लाइट बंद करके और दरवाजा बंद करके बाहर आ गए।

पीछे से आवाज आई, “बेटी जल्दी सो जाना...”

चारों छोटी बहू के कमरे में पहुँचे। दोनों भाई यह देखकर बहुत खुश हुए कि कमरे में कोई बहू नहीं थी।

“दोनों भाभी कहाँ हैं?” गुड्डी ने पूछा।

“लगता है कहीं और सो रही हैं, या फिर रेखा के साथ गप्पे मार रही होंगी,” छोटा भाई ने जवाब दिया।

“हम भी वही जाते हैं,” गुड्डी ने कहा।

लेकिन बड़े भाई ने तुरंत उसकी बाँह पकड़ ली और उसे अपने पास खींच लिया।

“अरे गुडिया... उनसे कल बात कर लेना... थोड़ी देर हमारे साथ भी बैठो ना...”

जैसे ही बड़े भाई ने उसकी बाँह खींची, गुड्डी उसके सीने से टकरा गई। उसकी एक भरी हुई चुची बड़े भाई की छाती से जोर से रगड़ गई। गुड्डी शर्मा गई और खिलखिला पड़ी।
फनलवर रचित कहानी।

बड़े भाई को उस 18-19 साल की जवान लड़की की चुची की जकड़न और नरमी साफ महसूस हुई। उसका लंड अंडरवियर में फड़क उठा।

उसने गुड्डी का हाथ खींचकर उसे अपने पास खाट पर बैठा लिया। दूसरे छोर पर छोटा भाई ने दूसरी लड़की को पकड़कर बिठा लिया।

दोनों भाईयों ने लड़कियों को बातों में लगा लिया। सबसे पहले उन्होंने ससुराल, ससुराल वालों और वहाँ के व्यवहार के बारे में पूछताछ की। लड़कियों ने बताया कि उनके दो देवर हैं। दोनों खिलखिलाकर हँस पड़ीं और शरमा भी गईं।

छोटा भाई समझ गया कि ये लड़कियाँ देवरों का नाम लेकर क्यों शरमा रही हैं। उसे याद आ गया कि कैसे शादी से पहले दो सालों तक उसने बड़ी बहू को परेशान किया था, पीछे से पकड़ना, गले लगाना, चूमना, और होली पर उसकी बड़ी चूचियों को बेरहमी से दबाना और निचोड़ना।

ये सब याद करते हुए छोटा भाई ने मुस्कुराते हुए उन लड़कियों से पूछा,

“लगता है, तुम्हारे देवर खूब मस्ती करते हैं तुम दोनों के साथ...!”



*********************************************************.................................



यही तक दोस्तों।

बाकी आपके कोमेंट्स आने के बाद..................


Funlover की तरफ से जय भारत।।

392.
 
Back
Top