Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 3 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

धन्यवाद आपका.

आप की बात सही है. लेकिन जिस तरह का माहौल है कहानी का. उसके हिसाब से भाई को बहन पटाने की कोसिस करने में थोड़ा वक्त तो लगेगा. कुछ सोच विचार करता न.

की बस जाकर बहन को पकड़ कर छोड़ देगा.

और मैं पूरी कोसिस कर रही हों की अधिक से अधिक कन्वर्सेशन हो बहनो और भाइयो में.

आप हमारी कमिया बता रहे हैं हमको बहुत अच्छा लगा. और आगे भी कोई कमी नज़र आई तो जरूर बताइयेगा. हम स्टोरी की जरुरत के हिसाब से उसे सुधरने की कोशिश करेंगे.

साथ बने रहेगा.
 
अपडेट-19

आज झड़ते समय पहली बार मेरे मुंह से दीदी निकला था. अब मैं पूरी तरह से सविता दीदी और सरिता दीदी पर उत्तेजित हो चुक्का था, लेकिन अभी भी मेरे मन में मनीषा के लिए कोई भी गलत विचार नहीं जन्मे थे जैसा दोनों दीदियों के लिए मेरे मन में गंदे विचार थे.

झड़ने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया और सो गया. अगले पुरे दिन फिर वही रूटीन रहा. सुबह मैंने अपनी कसरत की. जब कमरे से बहार निकला तो दोनों दीदियां चाट पर टहल रही थी. दोनों की मस्त माल बानी हुई थी. मैंने एक नज़र दोनों की उफनती चूचियों पर डाला और घर से बहार निकल गया. घर से बहार आने के बाद मैं अपने दोस्तों से मिला और फिर वही रोज़ की बाते करने के बाद वापस अपने घर चला गया.

अब तो मेरी यही दिनचर्या बन गई थी. इसी तरह नताशा को गए हुए पुरे 1 महीने बिट चुके थे और इन एक महीनो में मैंने छूट नहीं मरी थी. छूट मरने की बात तो दूर छूट के दर्शन भी नहीं किये थे.

रात को खाना खाने के बाद मैं अपने रूम में चला गया और बीएड पे लेटकर कुछ सोचने लगा. जब मुझे लगा की सब सो गए हैं तो मैंने अपने मोबाइल में गन्दी साइट ओपन की और फिर भाई बहन की सेक्स स्टोरी पढ़ने लगा. आज मुझे एक स्टोरी बहुत hi अच्छी लगी. जिसका नाम था ‘’राबिआ का बहछोड भाई’ इस स्टोरी को पढ़ने के बाद मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ और मैं बाथरूम में जाकर मुठ मरने लगा.

आज भी मुट्ठ मरते समय मेरी नज़रो के सामने मेरी बहनो का hi चेहरा घूम रहा था. और मेरा हाँथ मेरे लुंड पर तेज़ी से चल रहा था. जब मैं झड़ने के करीब पंहुचा तो मैं अपनी बहनो को याद करके बड़बड़ाने लगा.. अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह…… सविता दीदी. क्या चूचिया है तुम्हारी. मन करता है इनमे का सारा रास पि जाऊ….. aaaahhhhhhhhhhahhh………



सरिता दीदी…… क्या गदराया हुआ माल हो तुम. तुम्हे देखने के बाद मेरा लुंड बहुत प्यासा हो जाता है…………



haaiiiiiiiiiiiiii मेरी बहनो. मैं तुम दोनों को छोड़ना चाहता हूँ…………. पटक पटक कर छोड़ना चाहता हूँ…… तुम दोनों को अपनी रुंडी बना कर छोड़ना चाहता हूँ……………. Aaaaaaahhhhhhhhhhh मेरी रंडियों कब छुडवाओगी अपने भाई से…



और इसके बाद मेरी साँस उखाड़ने लगी और मेरे लुंड ने वीर्य की बौछार कर दी . मेरा वीर्य आज रोज के मुकाबले ज्यादा निकला था और पुरे प्रेशर में निकला था. मुट्ठ मार कर जब मैं बाथरूम से बहार निकला तो मुझे ऐसा लगा की कोई सविता दीदी के कमरे में घुसा है. मैं तो बहुत दर गया की कही सविता दीदी ने मुझे मुट्ठ मरते हुए और गन्दी गन्दी बाते करते हुए देख तो नहीं लिया.

मुठ मरने के बाद मैं अपने कमरे में आया और बहुत गहराई से सोचने लगा. मैंने सोचा की आखिर कब तक मैं मुठ मरूंगा. मुझे अपने लुंड के लिए छूट चाहिए थी. लेकिन कोई लड़की पैट hi नहीं रही थी.

अब मेरे पास बस 3 रस्ते hi रह गए थे.

पहला रास्ता यह था की मैं कोठे पर जाओ और किसी रुंडी को छोड़कर अपने लुंड की भूख को शांत करू.

दोसरा राष्ट यह था की जब तक शादी नहीं हो जाती तब तक मुठ मार्कर hi गुजरा करू.

और तीसरा राष्ट यह था की मैं अपनी किसी बहन को hi पतौ और अपने लुंड की भूख को शांत करू.

पहला राष्ट तो मुझे कहीं से भी ठीक नहीं लग रहा था क्योंकि मेरे पापा बैंक में थे और मान टीचर थी तो दोनों लोगो की समाज में बहुत जान पहचान भी थी. और कोठे पर जाने का मतलब था की अगर किसी ने मुझे वह जाते हुवे देख लिया और घर में शिकायत कर दी तो पापा मुझे धक्के मार्कर घर से निकल देते. और रुंडी छोड़ने के लिए पैसे भी देने पड़ते हैं और गलती से यदि कोई बीमारी लग गयी तो ज़िन्दगी का सत्यानाश होना तय था.

दूसरा रास्ता ठीक थक दिख रहा था परन्तु अभी मेरी शादी के दूर दूर तक कोई अक्षर नज़र नहीं आ रहे थे तो कितने दिन मुट्ठ मरू ये भी समझ में नहीं आ रहा था.

और तीसरा रास्ता जो था वह बहुत hi खतरनाक था. ये समझ लीजिये की काँटों भरी राह थी. जिसको अगर मैं पार न कर पाया तो ज़िन्दगी भर मां पापा और बहनो से नज़ारे नहीं मिला पाउँगा और यदि एक बार मैंने ये काँटों भरी राह पार कर ली तो पूरी ज़िन्दगी के लिए छूट का इंतज़ाम हो जायेगा. और वैसे भी मेरी बहाने एकदम मस्त पटाखा माल थी.

बहुत विचार करने, ऊंच नीच को सोचने के बाद मुझे तीसरा राष्ट ठीक लगा. मैंने अपने लुंड के लिए इन काँटों भरी राह पर चलना मंजूर कर लिया. अब मुझे सविता दीदी और सरिता दीदी को अपने लुंड के निचे लेन के लिए कोई प्लान बनाना था जो फ़िलहाल इस समय मेरे दिमाग में नहीं आ रहा था. इसलिए मैंने इसको कल पर तलकर सोने का निश्चय किया और अपने बीएड पर लेट गया और कुछ देर बाद मैं नींद की आगोश में चला गया.

सुबह जब मेरी आँख कुली तो सुबह के 7 बज रहे थे. आज देर से सोने के कारन मेरी नींद देर से खुली. आज मैंने कसरत करना ठीक नहीं समझा और मैं उठकर बाथरूम में गया. फ्रेश होकर कपडे पहने और निचे नाश्ता करने के लिए आ गया. निचे मां पापा खाना नाश्ता कर रहे थे क्योंकि उनको जॉब पर जाना था. और मनीषा भी अपना नास्ता कर रही थी. मैं भी अपना नास्ता करने लगा और नास्ता करने के बाद अपने कमरे में जाने लगा. जब मैं आधी सीधी पर पंहुचा था तो दोनों दिदिया नाश्ता करने के लिए निचे आ रही थी.

अब मैं ठीक उनके सामने पहुंच गया तो सरिता दीदी मेरे बगल से होते हुवे निचे उतर गई लेकिन सविता दीदी वही सीधी पर hi रुक गयी अब सिचुएशन ये थी की मैं सीधी के एक स्टेप निचे था और सविता दीदी सीधी क एक स्टेप ऊपर थी मैं मेरी हिघ्त दोनों दीदियो से करीब 3”बड़ी थी. तो मेरे चेहरे के कुछ hi निचे अब सविता दीदी की 36”की कड़क चूचिया थी. आज उन्होंने एक बड़े गले का ब्लाउज पहना हुआ था और जो सदी पहनी हुई थी वो भी विज़िबल थी और कमर में कास कर लपेटी हुई थी.



सदी विज़िबल होने के कारन मुझे उनकी कुछ यदा hi बहार नज़र आ रही चूचियों की गहराई का नज़ारा मिल रहा था. दीदी कुछ देर ऐसे hi कड़ी मुझे अपनी पहाड़ जैसी चूचियों के दर्शन कराती रही और मैं भी उनकी आँखों में देखते हुए उनकी चूचियों को जी भर कर देखता रहा. फिर उन्हें अचानक से होश आया और वो मुझे एक तरफ घक्का देकर निचे की तरफ चल दी. मैं तो उनके धक्के से गिरते गिरते बचा.

जब मैंने अपने आप को संभल कर निचे की तरफ देखा तो दीदी की मोती गांड जो सदी में बहुत hi कासी कासी लग रही थी. उसका नज़ारा मिल गया. मैं अब दीदी के पिछवाड़े को घूरने लगा. दीदी जब लास्ट स्टेप भी उतर गई तो पलट कर मेरी तरफ देखा और जब मुझे मुंह खोले अपनी गांड की तरफ घूरते पाया तो. थोड़ा गुस्से भर लहज़े में धीरे से कहा जिसको सिर्फ मैंने hi सुना.



सविता दीदी- तू सच में बहुत कमीना है अभी.

और इतना बोलका वो नाश्ता करने चली गई और मैं अपने कमरे में आकर दोनों दीदियों की चुदाई कैसे की जाए इस बारे में सोचने laga.lekin मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की ऐसा कौन सा प्लान उसे करूँ की दोनों दीदी जल्द से जल्द मेरी रंडी बन जाये.

काफी देर सोचने के बाद मुझे 3 रस्ते नज़र आये. जिसको उसे करके मैं दोनों दीदी को पाटकर अपनी रंडी बना सकता था. लेकिन ये इतना आसान नहीं था. सबसे पहले तो मुझे उन दोनों से bat-chit बढ़ानी होगी. दूसरी बात ये थी की मुझे उनकी जानकारी में hi उनके शरीर के हरेक हिस्से को घूरना था. और उन्हें यह एहसास करना था की मैं उनमे बहुत दिलचस्पी ले रहा हूँ. लेकिन उन दोनों के अभी तक के बर्ताव से से ये बहुत hi रिस्की लग रहा था. थोड़ी सी भी जल्दबाज़ी मेरे लुंड पर ठंडा पानी दाल सकती थी. इसलिए मुझे ये तो करना hi था लेकिन बहुत hi सावधानी से और धीरे धीरे. की यदि कभी उनको थोड़ा बहुत बुरा भी लगे तो वो दोनों ज्यादा बखेड़ा न खड़ा करे. और तीसरा प्लान ये था की उन दोनों को मैं इंदिरेक्टली भाई बहन की चुदाई की बातो को तरफ आकर्षित करू. भाई बहन की चुदाई की कहानिया पढ़ने के लिए मजबूर करूँ. इसके लिए मुझे फेसबुक या व्हाट्सप्प का सहारा लेना था और इस तरह से लेना था की उन दोनों को कभी शक न हो की मैं hi हूँ जो उन्हें भाई बहन की चुदाई के लिए प्रेरित कर रहा हूँ. उन्हें ऐसा लग्न चाहिए की उन्होने अपने भाई यानि की मुझे पता कर छूट की चुदाई कराई है. ताकि आगे चलकर वह केवल मुझे hi दोषी न मने.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका।

आप लोग के सहयोग के बिना हमे कहानी लिखने में परेशानी होगी।

जो भी कमी होगी कहानी में वो आप जैसे अनुभवी लोगों के मार्गदर्शन से ही तो सुधरेंगे।

बस इसी तरह मार्गदर्शन करते रहिए। बाकी मैं पूरी कोशिश करूँगी कि कहानी ज्यादा से ज्यादा अच्छे तरीके से आप सब की खिदमत में पेश कर सकूं।

साथ बने रहिएगा।
 
अपडेट-20

इतना सब सोचने के बाद मैंने अपना निर्णय ले लिया की अब चाहे जो हो जाये. इसके लिए चाहे जो भी कीमत चुकानी पड़ी लेकिन मैं अपनी बहनो को अपनी रखैल जरूर बनोंग और इतनी बुरी तरह छोडूंगा की उन्हें मेरे आलावा और कोई दिखाई hi न दे.

लेकिन उसके लिए मुझे शुरुवात तो करनी hi थी तो मैंने सोचा की जब नताशा यहाँ से गई थी तो मैंने सरिता दीदी से गली देकर बात की थी. तो सबसे पहले तो मुझे उनसे माफ़ी मांगनी चाहिए. और दोनों से घुलना मिलना चाहिए तभी मेरी मंज़िल (दोनों की छूट और गांड) मुझे जल्दी मिल सकती है.

इतना सोचने के बाद मैं अपने कमरे से बहार निकला और बाथरूम में फ्रेश होने चला गया. बाथरूम में पहुंचने के बाद मुझे मुट्ठ मरने की तालाब होने लगी. मैंने मुट्ठ मरने के लिए अपने लुंड को हाँथ में ले लिया और आगे पीछे करने लगा. लेकिन तभी पता नहीं क्यों मैंने अपना हाँथ अपने लुंड से हटा लिया और मैंने निर्णय लिया की अब मैं मुठ नहीं मरूंगा. अब तो मेरे लुंड का पानी मेरी बहनो की छूट गांड और मुंह में hi निकलेगा.

ऐसा सोचकर मैंने अपने लुंड को पंत के अंदर डाला और उसके बैठने का इंतज़ार करने लगा. जब मेरा लुंड बैठ गया तो मैं बाथरूम से बहार निकला और सीधे सरिता दीदी के कमरे की तरफ चल पड़ा और उनके कमरा का दरवाज़ा खटखटा दिया.

सरिता di-andar आ जाओ दरवाज़ा खुला है.

मैं- दीदी वो मैं आपसे………………….. इसके आगे के शब्द मेरे मुंह में hi रह गए.

दीदी के ऐसा बोलने के बाद मैं उनके कमरे में चला gaya.lekin जैसे hi मैं कमरे में पंहुचा तो मेरे ऊपर की साँस ऊपर और निचे की साँस निचे hi रह गई. मेरा मुंह खुला का खुला रह गया. क्योंकि दीदी अभी कपडे बदल रही थी. उनके शरीर पर इस समय एक ब्रा थी जो बहुत hi स्टाइलिश लग रही थी. वो शीशे के सामने कड़ी थी. उनकी बैक मेरी तरफ थी. कमरे में उनके साथ सविता दीदी भी मौजूद थी.



(चूँकि मेरा और दोनों दीदियों की कभी बनती नहीं थी. इसलिए मैं उन दोनों के कमरे में कभी नहीं जाता था. और तभी जाता था जब वो दोनों मुझे बुलाती थी. और आज भी मैं बिना बुलाये गया था और दरवाज़ा खटखटाने पर उन्हें लगा की मनीषा आई है इसलिए उन्होंने बिना पूछे की बहार कौन है मुझे अंदर बुला लिया.)

मैं बस आँख फाड़े सरिता दीदी को देखे जा रहा था. जबकि सविता दीदी गुस्से से मुझे घूरे जा रही थी. मेरी आवाज़ सुनकर सरिता दीदी मेरी तरफ पलट गाइट hi. जिससे उनको हाहाकारी चूचिया ब्रा में हो जानलेवा लग रही थी. मैं खा जाने वाली नज़रो से सरिता दीदी की चूचियों को देखे जा रहा था. ये सब बस कुछ hi सेकंड हुआ की मैं अपने होश में आया और पलट कर ये कहते हुवे कमरे से बहार निकल गया की मैं आपसे कुछ जरूरी बात करने आया था.





मैं कमरे से बहार आकर चाट पर चला गया और दीवाल से पीठ लगाकर दीदी के बारे में सोचने लगा. कहा तो मैं दीदी से माफ़ी मांगने गया था और कहाँ मैं दीदी को ब्रा में देख लिया. पता नहीं क्या सोच रही होंगी. कही मेरा काम बनाना से पहले hi उसपर पानी न फिर जाये. अभी मैं यही सब सोच रहा था की सरिता दीदी ने मुझे आवाज़ दी की कमरे में आ जाओ.

मैं छत से निचे उतरा और सरिता दीदी के कमरे में चला गया. जब मैं अंदर गया तो उन्होंने कपडे पहन लिए थे. और सविता दीदी भी वही बैठी थी.

मैं- दीदी मैं आपसे कुछ बात करना चाहता हूँ.

सरिता दी- बोलो अभी क्या बात करनी है (बेरुखी के साथ)

मैं- दीदी मैं आपसे माफ़ी मांगना चाहता हूँ

सरिता दी- किस बात के लिए. अभी के लिए.

मैं- हाँ दीदी अभी के लिए भी और वो उस दिन मैंने आपसे बहुत hi गलत तरीके से बात की उसके लिए भी.

सरिता दीदी- बहुत जल्दी माफ़ी मांग रहे हो. मुझे तो लगा शायद तुम भूल गए की तुमने अपनी बहन को गली दी थी.

मैं- (मैं उनके बिस्टेर के पास जाकर उनके पैरो के पास बैठकर) दीदी मैं बहुत शर्मिंदा हूँ. उस समय पता नहीं मुझे क्या हो गया था की मेरे मुंह से गली निकल गयी. मुझे माफ़ कर दो.

सरिता दीदी- मैं तुझे माफ़ नहीं करुँगी. तुमने मुझे हार्ट किया है. मैंने कई बार तुझसे बात करने की कोशिश की लेकिन तूने हर बार मुझे इग्नोर किया. अब क्यों माफ़ी मांगने आया है.

मैं- मैं बहुत शर्मिंदा था दीदी. मुझे आपका सामना करने में दर लगता था इसलिए मैं आपको इग्नोर करता था. मुझे माफ़ कर दो दीदी.

सरिता दीदी- क्यों माफ़ करू तुझे. ताकि तू फिर से हमको गली दे.

मैं- नहीं दीदी वो उस समय बात hi ऐसी हो गई थी और आप भी मुझे बार बार रोक रही थी इसलिए मुझे गुस्सा आ गया और मेरे मुंह से आपके लिए गली निकल गई. मैंने ऐसा जानबूझकर नहीं किया दीदी.

सरिता दीदी- अच्छा अगर तुझे गुस्सा आएगा तो तू अपनी बहनो को भी गली देगा. वैसे मैं भी तो सुनु की ऐसी क्या बात हो गयी थी की तूने अपनी बहन का भी लिहाज़ नहीं किया और गली दे दी.

मैं- कुछ नहीं दीदी. वो बस ऐसे hi………. आप जाने दीजिए न उस बात को मैं आपसे माफ़ी तो मांग रहा हूँ न. फिर उस बात का क्या मतलब है.

सरिता दीदी- अब तो माफ़ी तभी मिलेगी जब तू बताएगा की ऐसी क्या बात थी जिसके कारन तूने मुझे गली दी.

मैं- जाने दो न didi.main माफ़ी तो मांग hi रहा हूँ न आपसे. फिर उस बात का क्या लेना देना.

सरिता दीदी- नहीं तुझको तो बताना तो पड़ेगा है अगर माफ़ी चाहिए तो.

(अभी तक घर में मनीषा के आलावा घर में किसी को पता नहीं था की नताशा मेरी गर्लफ्रेंड है. दोनों दीदियो को तो बस इतना मालूम था की मैं और नताशा बचपन से hi एक hi स्कूल में पढ़ते थे और हम अचे दोस्त हैं.)

दीदी की बात सुनकर मैं सोच में पद गया की दीदी को बताऊ या नहीं. नताशा तो अब चली गई. उसकी छूट तो अब मिलने से रही और अगर मैंने दीदी को नहीं बताया तो हो सकता है जो छूट फ्यूचर में मेरे लुंड की प्यास बुझा सकती थी वो भी न मिले. इसलिए मैंने दीदी को बताना hi बेहतर समझा.

मैं- (धीमी आवाज़ में) वो नताशा इस शहर को छोड़कर जा रही थी. मुझे उससे मिलना था और वो बहाना बना रही thi.isliye मुझे गुस्सा आ गया था.

सरिता दी- नताशा जा रही थी तो तुझे गुस्सा किसलिए आया. और तूने उसके जाने के कारन मुझे गली दी.

इतने में सविता दीदी की आवाज़ दुनि दी.

सविता दीदी- लेकिन तू उस दिन क्या बोलै था की मुझको इस जगह मिल मुझे tujhe…………………..itna बोलकर दीदी रुक गई.

जब मैंने उनके मुंह से ये बात सुनी तो मैंने उनकी तरफ नज़र उठाकर देखा तो वो हल्का हल्का मुस्कुरा रही थी. तब मैं समझ गया की वो मेरी हालत का मज़ा ले रही हैं. जबकि सविता दीदी की बात सुनकर सरिता दीदी उन्हें घूर कर देख रही थी. इतने में मैं बोल पड़ा.

मैं- अरे यार वो मेरी गर्लफ्रेंड थी. तो मैं उसके साथ कुछ समय अकेले बिताना चाहता था लेकिन वो नखरे कर रही थी.

सरिता दीदी- अकेले समय बिताने का मतलब ये थोड़े होता है की तू उसे गली दे और उसका गुस्सा हम लोगो पर निकले.

मैं- (एकदम धिरे से) अरे यार अब मैं इन्हे कैसे बताऊ की वो मेरी गर्लफ्रेंड थी तो मैं जाने से पहले उसकी चुदाई करना चाहता था.

मैंने ये बात बहुत डाइम कही थी परन्तु सविता दीदी मेरे ज्यादा नजदीक थी सरिता दीदी की अपेक्षा. इसलिए उन्होंने मेरी बात सुन ली और मुझे घूर के देखा लेकिन कहा कुछ नहीं.

सरिता दीदी- क्या कहा तूने. थोड़ा तेज़ बोल मैंने सुना नहीं.

मैं- कुछ नहीं दी मैं तो ये कह रहा था की अब तो मैंने आपको सब सच बता दिया है. अब तो मुझे

माफ़ कर दो.

सरिता दीदी- ठीक है इस बार तो मैंने तुम्हे माफ़ किया. लेकिन अगली बार अगर तूने कोई ऐसी वैसी बात की तो समझ लेना मैं तेरा क्या हाल करुँगी.

मैं- (मन में). इस बार माफ़ कर दो दीदी. अगली बार माफ़ी मांगने की नौबत hi नहीं आएगी. कुछ दिनों में मैं तुम दोनों को अपनी रंडी बनाकर छोडूंगा और तुम दोनों मेरे लुंड पर उछाल उछाल कर छुडवाओगी और मैं तुम दोनों को इससे भी गन्दी गन्दी गली देकर छोडूंगा और तुम दोनों मेरी रखैल. कुटिया बैंकर छुडवाओगी. बस कुछ दिन और इंतज़ार करो.

सविता दी- क्या हुआ अभी क्या सोचने लगा.

मैं- कुछ नहीं दीदी बस ऐसे hi. दीदी मैं आपसे भी माफ़ी मांगता हूँ. मैंने जाने अनजाने आपको भी हर्ट किया है. उसके लिए मुझे माफ़ कर दो.

सविता दी- मैं तुझसे पहले बहुत नाराज़ थी. और तुझे कभी माफ़ नहीं करती लेकिन कुछ दिनों में मैंने रीलीज़ किया है की तुझे एक मौका देना चाहिए अपनी गलती सुधरने का इसलिए मैंने तुझे पहले hi माफ़ कर दिया है.

मैं- थैंक यू सरिता दीदी. थैंक यू सविता दीदी.

सरिता दी- चल ठीक है अब सुधर जा हम तेरी बहाने हैं. हमारी इज़्ज़त करना तेरी ज़िम्मेदारी है तो कुछ भी गलत बोलने या सोचने से पहले ये दिमाग में बिठा लेना की हम तेरी बहाने हैं.

मैं- थैंक यू दीदी. वन्स अगेन. आगे से ऐसी गलती नहीं होगी.

इतना बोलकर मैं अपने कमरे में आ गया. और आगे के प्लान के बारे में सोचने लगा. मेरा पहला जो टारगेट रहा दोनों दीदी से माफ़ी मांगना. वो तो पूरा हो गया था. अब मेरा अगला टारगेट था उनको सडके काने का. लेकिन इसमें सबसे बड़ी समस्या थी की मैं उनको डायरेक्ट सडके तो नहीं कर सकता था. मुझे डायरेक्ट सडके करने के साथ साथ इंदिरेक्ट भी भाई बहन की चुदाई की बातो की तरफ अत्त्रक्ट करना था. इसीलिए मैं उन दोनों को व्हाट्सप्प और फेसबुक के माध्यम से hi सडके करने का सोचने लगा. इसके लिए मैंने एक नई सिम खरीदने के लिए बाजार निकल gaya(Ki यदि कभी इस no. को उसे करने की जरूरत पद गयी तो उसे करूँगा). वहां पर जरुरी फॉरमैलिटीज पूरी करके मैं सिम लेकर मैं वापस घर आ गया. और सिम एक्टिवटे होने का इंतज़ार करने लगा. फिर मैंने फेसबुक पर मीरा नाम से एक फेक ईद बनाई जिसका एड्रेस मैंने कानपूर डाला न और भी जरुरी डिटेल्स दाल दी ताकि अगर कभी दीदी को शक हो और वो इस ईद को चेक करे तो उन्हें मेरे ऊपर बिलकुल भी शक न हो.

मैं सविता दीदी में आये बदलाव के कारन उन्हें नार्मल तरीके से hi पटाने का रिस्क लेने का सोचा क्योंकि मुझे कही न कही ये विश्वास था की मैं उन्हें नार्मल तरीके से भी पता सकता हूँ. लेकिन अगर जैसा मैं सोच रहा हूँ अगर वैसा नहीं हुआ तो छूट गई हाँथ se(isi बात से बचने के लिए मैंने नई सिम ली थी). बस थोड़ा शुरुवात की देर hai.lekin सरिता दीदी को मैं डायरेक्ट और इंदिरेक्ट दोनों तरह से सडके करना चाहता था. क्योंकि उनकी शादी एक महीने के बाद थी और मैं इस कोसिस में था की उन्हें शादी से पहले hi छोड़कर मैं अपने लुंड की प्यास बुझा सकू.

मैं ये जनता था की सरिता दीदी फेसबुक उसे करती हैं और उनकी ईद क्या है वो रात में अपने दोस्तों से फेसबुक पर बात करती थी. कभी कभी होने वाले जीजा जी से भी बात करती थी. जो मुझे पता था. इसलिए मैंने मीरा नाम से जो फेक ईद बनाई थी उससे सरिता दीदी वाली फेसबुक ईद पर रिक्वेस्ट भेज दी और एक्सेप्ट होने का वेट करने लगा.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-21

फिर मैं वापस रोज की दिनचर्या में व्यस्त हो गया. मैंने अपने कमरा का दरवाज़ा बंद करके अपने मोबाइल में भाई बहन की कहानी को ओपन कर लिया और पढ़ने लगा की शायद कोई नई ट्रिक मिल जाये बहनो को पटाने की लेकिन हर स्टोरी में लगभग शामे hi ट्रिक बहन को पटाने में भाई उसे करता है इसलिए मैंने भी इन्ही सब ट्रिक का उसे करके दोनों दीदियों को पटाने का सोचा.

उसके बाद सारा दिन बिट गया अब मैं रात का इंतज़ार करने लगा. और दिए धीरे रात भी हो गयी तो सभी खाने के लिए जमा हो गए. जब खाना खाना शुरू हुआ तो पापा ने मुझसे कहा.

पापा- अभी. मैंने तुंहरे लिए एक जॉब ढूंढी है. दिन भर में 4 से 5 घंटे का काम है और मैं चाहता हूँ की तुम वॉक ऍम करो..

मैं- ठीक है पापा कल hi मैं उनसे मिल कर काम शुरू कर दूंगा.

मेरा मन तो बिलकुल नहीं था काम करने का. क्योंकि मुझे अभी अपने मिशन दीदियों की चुदाई पर ध्यान देना था, पर पापा को मन भी नहीं कर सकता था. क्योंकि मेरी जॉब न करने के कारन पापा हमेशा डाटते रहते थे. इसलिए मैंने पापा की बात मान ली की चलो इसी बहाने पापा की नज़रो में मेरी कुछ तो इज़्ज़त बढ़ेगी.

मैं खाना कहते हुवे सरिता दीदी की तरफ देखा तो वो रोज़ की अपेक्षा आज खुश नज़र आ रही थी. और सविता दीदी तो मेरी समझ से hi परे हो गई थी इन कुछ दिनों में.

मैं खाना खाकर कुछ देर t.v. देखने की सोची चूँकि t.v. हल में hi था तो मैं रिमोट लेकर t.v. देखने बैठ गया. मेरे साथ मनीषा भी बैठकर t.v. देखने लगी. हम दोनों t.v. देखते हुवे इधर उधर की बाते करने लगे. और दोनों दीदियां बर्तन समेटना किचन में चली गयी.

मैं कुछ देर तक t.v. देखने के बाद छत पर चला गया. और अपने कमरे में न जाकर ऊपर hi घूमने लगा. अभी मुझे ऊपर आये कुछ hi देर हुई थी की सविता दीदी भी बर्तन समेत कर ऊपर आ गयी.

क्योंकि ये सोने का समय था तो दीदी ने उस समय निघ्त्य पहनी हुई थी. निघ्त्य एकदम नार्मल थी. उसमे कुछ भी दिख नहीं रहा था. लेकिन दीदी की चूचिया इतनी बड़ी थी की वह निघ्त्य के ऊपर से hi नज़र आ रही थी. मैंने एक भरपूर नज़र उनकी चूचियों को देखा. फिर ये सोचकर अपनी नज़ारे हटा ली की कही दीदी फिर से न नाराज़ हो जाये और मेरा उन्हें छोड़ने का सपना बस सपना hi बैंकर रह जाये.



सविता दीदी चलते हुवे मेरे पास आ गई. छत पर हलकी हलकी हवा चल रही थी. गर्मी का मौसम था तो हवा बहुत सुहानी लग रही थी मैं रेलिंग के सहारे घर के आगे बहार का नज़र ले रहा था. मेरे घर के सामने कोई घर नहीं बना था घर के सामने खुला मैदान था. छत के आगे की तरफ केवल रेलिंग hi लगी हुई थी लेकिन बाकि और जहा पर बीम पड़ती है उतनी उचाई तक दीवाल उठी हुई थी. आस पास के घर भी दो मंज़िला hi थे इसलिए कोई मेरी चाट पर नदी देख सकता था की क्या हो रहा है.

तो सरिता दीदी चलती हुई मेरे पास आई और बोली.

सविता दीदी- अभी क्या कर रहे हो.

मैं- कुछ नहीं दीदी बस ठंडी हवा चल रही थी तो उसी के मज़े ले रहा हूँ.

सविता दी- और क्या चल रहा है.

मैं- कुछ ख़ास नहीं चल रहा है दीदी. बस काट रही है.

सविता दी- क्या बात है अभी तुम मुझसे नाराज़ हो क्या जो अब बात भी नहीं करते मुझसे.

मैं- नहीं दी नाराज़ नहीं हूँ बस आपने कभी बात करने का मौका hi नहीं दिया. जब बात करता हूँ तो पापा से शिकायत करती हो. डाटती रहती हो. और जब बात नहीं करता हूँ तो बोलती हो की बात नहीं करता हूँ

सविता दी- हाँ वो तो है. लेकिन तू भी तो उलटी सीधी हरकते करता था न.

मैं- कहा दीदी. वो तो आप दोनों मुझे बहुत परेशां करती थी इसलिए मैं थोड़ा गुस्सा हो जाया करता था जिसके कारन गलती हो जाती थी.

इसके बाद हम दोनों में ख़ामोशी छ गई. हम दोनों चुप चाप बहार की तरफ देख रहे थे. की तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया. की अगर दीदी को अपने लुंड के निचे लाना है तो इनसे नजदीकियां बधाई पड़ेगी और इसके लिए मुझे इनसे jyada-se-jyada बातचीत करनी पड़ेगी. इसलिए कुछ सोचकर मैंने दीदी से कहा.

मैं- दीदी एक बात कहूँ बुरा तो नहीं मानोगी न.

सविता दी- कोई उलटी सीधी बात मत करना नहीं तो बहुत बुरा होगा तेरे साथ.

मैं- नहीं दीदी कोई गन्दी बात नहीं है मैं तो ये कह रहा था की अगर हम दोनों दोस्त बन जाए तो कैसा रहेगा.

सविता दी- अच्छा. मुझे नहीं करनी तुमसे दोस्ती. वैसे तुम्हारे मन में ये विचार आज कैसे आ गया.

मैं- वो क्या है न दीदी अब तो हम दोनों के बिच सुलह भी हो गई है. आप ने मुझे माफ़ भी कर दिया है. तो मैंने सोचा की हम दोनों दोस्त बन सकते है. और वैसे भी रहना तो हम दोनों को इसी घर में है.

सविता di-achha. तो तुम्हे क्या लगता है की मैं तुमसे दोस्ती करुँगी.

मैं- मुझे तो ऐसा hi लगता है बाकि आपकी मर्जी. मैं कोई जबरदस्ती तोड़ी hi करूंगा दोस्ती के लिए.

सविता दी- (मुस्कुराकर) मैं सोचकर बताउंगी. अब मैं सोने जा रही हूँ. गुड नाईट.

मैं- गुड नाईट दीदी.

उसके बाद दीदी निचे जाने लगी और मैं उनकी गदराई गांड को देखने लगा. जब दीदी सीढ़ियों के पास पहुंची तो उन्होंने पलटकर पीछे देखा और मुझे अपनी गांड को घूरता हुआ पाया. मैं तो उनकी गदरायी गांड को hi देखने में खोया था. जब कुछ सेकंड बाद मैंने उनकी आँखों में देखा तो वो मुझे घूर रही थी. लेकिन उनके चेहरे पर न गुस्से का और न hi नाराज़गी का कोई भाव था. उनका चेहरा एकदम सपाट था. जब मैंने उनकी तरफ देखा तो उन्होंने कहा.



सविता दी- इसी लिए मुझसे दोस्ती करेगा??

और इतना कहकर वो निचे चली गई. मैं उनके द्वारा कहे गए आखिरी शब्द के बारे में सोच रहा था. मुझे ये समझ में नहीं आ रहा था की दीदी की इस बात का मतलब क्या है. क्या उन्हें अच्छा लगा की मैंने उनकी गांड का टाडा ये उन्ही बुरा लगा मेरी ऐसी हरकत का. लेकिन उनके अभी तक के स्वाभाव को देखते हुवे अब मैं अपने आपको कोष रहा था की मैं क्यों अपनी नज़रो को कण्ट्रोल नहीं कर पाया. अगर ऐसे hi बर्ताव मैं करता रहा तो छूट मिलने से पहले hi हाँथ से निकल जाएगी. इसलिए मैंने आगे के कदम सोच विचार कर रखने का निश्चय किया.

दीदी के जाने के कुछ देर बाद मैं अपने कमरे में चला गया और अपने मोबाइल से जो मीरा नाम की फेक ईद बनाई थी उसको ओपन किया, लेकिन अभी तक सरिता दीदी मेरी फ्रेंड रक्स्ट एक्सेप्ट नहीं की थी. फिर मैं अपनी फेसबुक ईद ओपन की तो दीदी ऑनलाइन थी. फिर मैंने कुछ सोचकर उन्हें ही का मस्सगे भेज दिया. थोड़े देर के बाद hi दीदी का रिप्लाई आ गया.

सरिता दी- क्या बात है अभी. आज सूरज वेस्ट से कैसे निकल आया.

मैं- (मज़ाक में) अभी तो रत हो गई है अभी सूरज कहा से निकलेगा.

सरिता दी- अरे भाई आज अपनी इस बहन को मस्सगे कैसे कर दिया. कही गलती से तो नहीं भेज दिया मेरे पास मस्सगे.

मैं- नहीं दी. मैंने गलती से नहीं भेजा. मैंने आपको hi मस्सगे किया था.

सरिता दी- अरे वाह क्या बात है. तेरी तबियत तो ठीक है न.

मैं- मेरी तबियत को क्या हुवा. वो तो बिलकुल ठीक है. लेकिन आप ऐसे क्यों कह रही हैं.

सरिता दी- अरे जो लड़का कभी सीधे मुंह बात नहीं करता था आज अचानक उसका मस्सगे आया तो मुझे लगा की शायद तेरी तबियत ख़राब हो.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-22

मैं- क्यों झूठ बोल रही हो दीदी.

सरिता दी- मैं कौन सा झूठ बोल रही हूँ

मैं- आप दोनों hi मुझे हमेशा डाटती रहती थी. मेरी शिकायत करती रहती थी. सिलिये मैं आप दोनों से दूर- दूर रहता था की कही कोई गलती न हो जाये और मुझे फिर से डट पड़े.

सरिता di-Achha चल बहुत हुआ. अब मैं सोने जा रही हूँ. गुड नाईट.

मैं- गुड नाईट दीदी.

मैंने भी सोचा आज के लिए इतना काफी है. ऐसे hi धीरे धीरे मुझे आगे बढ़ना होगा. नहीं तो मेरा पूरा गेम बिगड़ जाएगा.

फिर मैंने सोचा की आज पोर्न देखते हैं तो मैंने भाई बहन की चुदाई का एक पोर्न वीडियो चालू किया और उसे देखने लगा. वो पोर्न देखते हुवे मैं ख्यालो में खुद को और सविता दीदी को इमेजिन करना लगा.



जिसके कारन मुझे बहुत मज़ा आने लगा और मेरा हाँथ मेरे खड़े लुंड पर पहुंच गया. और मैं मुठ मरने hi जा रहा था की मुझे अपना वडा याद आया जो मैंने अपने लुंड से किया था की लुंड का माल मेरी बहनो के मुंह छूट और गांड में hi गिराऊंगा तो मैंने अपना हाँथ वापस खींच लिया और पोर्न देखने के बाद मैं गहरी नींद में सो गया.

सुबह जब मैं सो कर उठा तो सबसे पहले मैंने अपना जिम का वर्कआउट पूरा किया. उसके बाद 15 मिनट आराम किया. फिर मैं अपने कमरे से बहार निकला बाथरूम जाने के लिए. जब मैं अपने कमरे से बहार आया तो सरिता दीदी. छत पर टहल रही थी. वो इस समः रात वाली निघ्त्य में hi थी. उन्हें देखते hi मेरी नज़ारे भटकने लगी. क्योंकि उनकी निघ्त्य ट्रांसपेरेंट थी. जिसमे से उनकी ब्रा की हलकी हलकी झलक मिल रही थी. मैंने तुरंत अपनी नज़रो को काबू किया और कोई भी उलटी सीधी हरकत न करते हुवे दीदी को विश किया.

मैं- गुड मॉर्निंग दीदी.

सरिता दी- गुड मॉर्निंग अभी

और मैं बाथरूम में चला गया. जब मैं फ्रेश होकर लगभग 15 मिनट बाद बहार आया तो दीदी भी बाथरूम में फ्रेश होने चली गयी. मैं अपने कमरे में आ गया और बीएड पर बैठ गया. थोड़ी देर बाद सरिता दीदी फ्रेश होकर बहार आयी तो मैंने उनसे कहा.

मैं- दीदी मेरे लिए थोड़ा नाश्ता बना दो. आज मुझे जॉब के लिए भी तो जाना है.

सरिता दी- अरे वाह अभी. तू तो din-b- दिन सुधरता जा रहा है.

मैं- मैं बिगड़ा hi कब था दीदी. मैं पहले से hi सुधरा हुआ था. लेकिन आपको कभी दिखाई hi नहीं दिया

सरिता दी- (थोड़ा सीरियस होकर) लेकिन तूने उस दिन जो मुझसे गन्दी बात किट hi. उससे तो नहीं लगता की तू पहले से सुधरा हुआ था.

मैं- ( धीमी आवाज़ में) उसके लिए मैं बहुत शर्मिंदा हूँ दीदी. और मैंने उसके लिए आपसे माफ़ी भी मांग ली है. वो उस दिन पता नहीं मेरे मुंह से कैसे वो सब बाटे निकल गयी.

सरिता दी- ऐसे hi नहीं निकल गयी तेरे मुंह से वो बाटे. जरूर तेरे मन में ये सब पहले से hi था.

अरे तेरी की. मैं जितना सरिता दीदी को समझ रहा था ये तो उससे भी ज्यादा कठिन टारगेट नजर आ रही थी. इनकी बात से तो इनकी छूट के मिलने के आसार दूर दूर तक नज़र hi नहीं आ रहे थे. इसलिए मैंने सरिता दीदी को इमोशनली टारगेट करने का सोचा और थोड़ा इमोशनल होकर कहा.

मैं- अब मुझे समझ में आ रहा है की आपने मुझे अभी तक माफ़ नहीं किया है. मैं hi पागल हूँ जो ये सोचता था की मेरी दीदी बहुत अच्छी हैं वो मेरी एक नासमझी वाली गलती को माफ़ कर देंगी. लेकिन मुझे ये नहीं मालूम था की वो उस बात को अभी तक अपने दिल में लगाए बैठी हैं. ठीक है दीदी. मुझे माफ़ मत कीजिए. शायद यही मेरी सजा हैं मेरी गलतियों की.

इतना कहकर मैंने अपना मुंह दूसरी तरफ गुमा लिया. मेरी इमोशनल बातो ने भी शायद दीदी पर असर डाला था तभी तो दीदी मेरे पास आई और मेरे कंधो को पददकर मुझे अपनी तरफ घुमाया. मैं अभी भी निचे hi देख रहा था.

सरिता दी- मेरी तरफ देखो अभी.

मैंने जब अपनी नज़र ऊपर की टी मेरी नज़र पहले उनके चेहरे पर न जा कर 1 से 2 सेकंड के लिए उनकी मस्तानी चूचियों पर गई जिसे उन्होंने भी देख लिया. मैंने तुरंत hi अपनी नज़र उनकी चूचियों से हटाकर उनके चेहरे की तरफ देखने लगा तब दीदी ने कहा.



सरिता दी- देख अभी. मैंने तुझे सच में माफ़ कर दिया है. लेकिन तू hi सोच मैं तेरी बहन हूँ और तूने मुझे गन्दी लंगड़गे में बात किट hi. तो उसे भूलने में मुझे थोड़ा वक्त तो लगेगा hi न.

मैं- सच में आपने मुझे माफ़ कर दिया है न.

सरिता दी- हाँ भाई मैंने तुझे माफ़ कर दिया.

फिर मैंने एकक नज़र उनकी मस्तानी चूचियों को देखा और फिर उनको देखकर कहा.

मैं- थैंक यू दीदी. आप बहुत अच्छी है.

सरिता दी- चल जा अब ज्यादा मस्का मत मर. तू बहुत बड़ा कमीना है (हँसते हुवे ये कहकर वो निचे जाने लगी)

जब वो निचे जा रही थी तो सीधी के स्टेप पर निचे उतरते समय उनकी मस्त गांड इधर उधर हो रही थी जिसे मैं बहुत गौर से देख रहा था. जब दीदी आखिरी स्टेप उतर गई तो पीछे मुड़कर मुझे देखा लेकिन तब तक मैं अपनी नज़रें उनकी थिरकती गांड से हटा चुक्का था. तो मैंने उनसे कहा.

मैं- दीदी मैं तैयार होकर आ रहा हूँ आप प्ल्ज़ मेरा नाश्ता रेडी कर दीजिए.

सरिता दी- ठीक है तो तैयार होकर निचे आ जा मैं नाश्ता बनती हूँ.

मैं जल्दी से तैयार होकर निचे आया तो घर के सभी लोग वह नाश्ता करने के लिए मौजूद थे. जब मैं नाश्ता करने बैठा तो पापा ने कहा.

पापा- क्यों बरखुरदार आज …….. पते पर जाकर मर…………… से मिल लेना और मेरा नाम बता देना. वी तुम्हे क्या काम करना है बता देंगे.

मैं- जी पापा, बस नाश्ता करके निकल रहा हूँ

मान- देखा मैं न कहती थी की मेरा बीटा बहुत होनहार है. देखना मेरा बीटा मन लगाकर काम करेगा और शिकायत का कोई मौका नहीं देगा.

सविता दी- हाँ अभी कितना होनहार है ये हमें अच्छी तरह से पता है.

दीदी की बात सुनकर जब मैंने दीदी की और देखा तो वो हल्का हल्का मुस्कुरा रही थी. उनको देख कर मेरे चेहरे पर अनायास hi मुस्कराहट आ गई. फिर मैंने जल्दी से अपना नाश्ता ख़तम किया और पापा की बताई हुई जगह पर जाने के लिए घर से बहार आ गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-23

मैं बहार आकर अपनी बाइक स्टार्ट करके पापा के बताये हुए पते पर पहुंच गया. वह के जो मालिक थे. (उनका नाम लिखना जरूरी नहीं है.) उनसे मिला और उन्हें पापा के बारे में बताया. वह मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए. क्योंकि वो पापा को अच्छी तरह से जानते थे. तो उन्होंने मुझे कुछ काम दिया. जो इंटरनेट से सम्बंधित था. उन्होंने बताया की मुझे जो भी काम करना होगा वो नेट से hi करना होगा. लेकिन उसके लिए लैपटॉप की जरूरत थी. तो मैं ये कहकर वह से वापस आ गया की पहले लैपटॉप ले लू उसके बाद काम शुरू करूँगा.

वह से निकलकर मैंने पापा को फ़ोन किया और उन्हें साडी बात बता दी. पापा भी लैपटॉप दिलाने के लिए राज़ी हो गए. फिर मैं घर जाने लगा. तो मैंने सोचा की क्यों न बहनो के लिए कुछ खाने की चीज़े ले लू. तो मैंने 4 चॉकलेट ले ली 20 रस. वाली और घर के लिए निकल पड़ा. मैंने अपनी बाइक अंदर पार्क की और जब मैं घर पंहुचा तो मनीषा तो अपने कॉलेज गयी हुई थी. दोनों दिदिया hi घर में थी. वो दोनों हाल में सोफे पर hi बैठी थी मैं भी जाकर सोफे पर बैठ गया.

सरिता दी- तो मिल गई जॉब.

मैं- अभी कहा दी. जो काम मुझे करना है उसके लिए लैपटॉप की जरूरत है. उसके बाद hi कोई काम हो सकता है.

सविता दी- लो ग अभी जॉब लगी भी नहीं और खर्चे अभी से शुरू हो गए. मेरी मान तो ये जॉब मत hi कर.

मैं- हाँ ताकि पापा फिर से मेरी वाट लगा दे.

मरी बात सुनकर दोनों दीदी हंसने लगी. फिर मैंने अपने जेब से चॉकलेट निकली और उसे दोनों दीदी की तरफ बढ़ा दिया. दोनों ने मेरी तरफ आश्चर्य से देखा और चॉकलेट ले ली.

सरिता दी- क्या बात है आज बड़ी मेहरबानी की जा रही है. आज से पहले तो तू कभी कुछ भी नहीं लाया बहार से खाने लिए.

मैं- इसके पहले हम सब में बनती hi कहा थी जो कुछ लता. लेकिन अब तो हम सब के बिच सब कुछ ठीक हो गया है तो सोचा अपनी बहनो के लिए कुछ लेता चालू. उनको अच्छा लगेगा.

सविता दी- चल अच्छी बात है काम से काम इसी बहाने तू कुछ ले तो आया हमारे लिए.

फिर दोनों ने अपनी अपनी चॉकलेट ख़तम की और अपने अपने कमरे में चली गयी. मैं भी अपने कमरे में चला गया और सोचने लगा की अब आगे मुझे क्या करना चाहिए. फिर मैंने अपनी मीरा वाली फेसबुक ईद ओपन की. और अपनी रक्स्ट का स्टेटस चेक कर लगा, लेकिन दीदी ने अभी तक फ्रंड रक्स्ट एक्सेप्ट नहीं किट hi. मुझे उनपर बहुत गुस्सा आ रहा था और साथ साथ ख़ुशी भी हो रही थी की मेरी बहन कितनी संस्कारी है जो अनजान लोगो से दोस्ती नहीं करती चाहे वह लड़की hi क्यों न हो.

फिर मैंने अपनी मीरा वाली फेसबुक ईद लॉगआउट की और अपनी ओरिजिनल ईद ओपन की तो देखा सरिता दीदी ऑनलाइन थी तो मैंने ही का मश्ग लिखकर उन्हें सेंड कर दिया. थोड़े देर बाद hi उनका रपल्य भी आ गया.

मैं- ही दी

सरिता दी- ही अभी.

मैं- क्या कर रही हो दी.

सरिता दी- कुछ नहीं बस दोस्तों से बात कर रही हूँ.

मैं- क्यों जीजा जी से बात नहीं करती हो क्या.

सरिता दी- करती हूँ लेकिन रात में जब वो फ्री होते हैं.

मैं- एक बात कहु दी

सरिता दी- हाँ कहो

मैं- दी जब आपकी शादी हो जाएगी तो मुझको बिलकुल भी अच्छा नहीं लगेगा. मैं फिर अकेला हो जाऊंगा इस घर में. कोई भी लड़ने झगड़ने वाला नहीं रहेगा. कोई भी पापा से शिकायत करने वाला नहीं रहेगा. मैं आपको बहुत मिस करूँगा दी.

सरिता दी- (मज़ाकिया लहज़े में) अरे तू क्यों परेशां हो रहा है मैं आती रहूंगी न तुझसे ladne-jhagadne और परेशां करने के लिए. और वैसे भी अभी तो शादी को एक महीने हैं तो तब तक तो परेशां करुँगी तुझे.

मैं- अच्छा दीदी क्या आप अब भी सचमुछ मुझसे नाराज़ नहीं हैं.

सरिता दी- नहीं अब मैं तुझसे नाराज़ नहीं हूँ. लेकिन अगर तूने फिर कोई हरकत की तो इस बार मैं तुझे माफ़ नहीं करुँगी.

मैं- ठीक है दीदी अब मैं आपको शिकायत का मौका नहीं डोंगा. वैसे एक बात कहु अगर आप बुरा न मने तो.

सरिता दी- हां कहो.

मैं- क्या हम दोनों दोस्त बन सकते हैं.

सरिता दी- वॉक योन तुझे मुझसे दोस्ती क्यों करनी है.

मैं- क्योंकि मेरा कोई अच्छा दोस्त नहीं है और जो दो दोस्त हैं उनके साथ मैं रहता हूँ तो आपको अच्छा नहीं लगता. इसलिए मैं सोच रहा हूँ की अगर आप और मैं दोस्त बन जाते हैं तो मुझे एक अच्छा दोस्त मिल जाएगा.

सरिता दी- चलो ठीक है आज से हम दोनों दोस्त है.

मैं- थैंक यू दीदी. आप बहुत अच्छी है.

सरिता दी- अच्छा अब तू रख मैं जरा अपने दोस्तों से बात कर लू.

मैं- bye दी.

इसके बाद मैंने अपना अकाउंट लॉगआउट किया और सोचा की चलो अपनी मंज़िल की तरफ तो पहला कदम सफल रहा. सरिता दीदी से तो दोस्ती भी हो गई है. अब उन्हें अपने लुंड के निचे लेन के लिए धीरे धीरे आगे बढ़ना होगा. फिर मैंने जो नई सिम ली थी उसको चेक किया तो वह एक्टिव हो गई थी तो मैंने अपने मोबाइल के दूसरे स्लॉट में वो सिम लगाया और उस no. से व्हाट्सप्प का दोसरा अकाउंट क्रिएट किया. उसकी प्रोफाइल में एक सुन्दर सी लड़की को फोटो लगाई और सविता दीदी को ही मश्ग कर दिया.

थोड़ी देर इंतज़ार करने के बाद भी जब उनका रपल्य नहीं आया तो मुझे लगा की शायद वो सो गई हैं तो मैंने भी अपना मोबाइल साइड में रखा और अपने बिस्तर पर लेट गया. थोड़ी देर के बाद मैं नींद के आगोश में चला गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 


अपडेट-24

जब मैं सोकर उठा तो शाम का समय हो रहा था तो मैं बाथरूम से फ्रेस होकर निचे हाल में आया तो मनीषा सोल्लगे से आ चुकी थी. मैंने उसे चॉकलेट दी तो वह बहुत खुश हुई. मैं निचे हॉल में बैठकर t.v. देखने लगा. कुछ देर t.v. देखने के बाद जब में बोर होने लगा तो घर के पास में hi बने एक पार्क में चला गया. पार्क में आने के बाद मैंने वह के रंगीन नज़ारे का लुत्प उठाया और जब आंध्र होने लगा तो मैं घर आ गया.

जब मैं घर आया तो मुझे बहुत प्यास लगी थी इसलिए मैं किचन में पानी पिने चला गया. जब मैं किचन में अन्तर हुआ तो सरिता दीदी निचे बैठ कर आता गूथ रही थी. उन्होंने सलवार कमीज़ पहनी हुई थी. और गले में दुपट्टा लिया हुआ था लेकिन आता गुथने समय जब वह झुकती तो उनकी चूचियों की गहराई अंदर तक नज़र आती. सरिता दीदी की चूचिया बहुत hi जबरदस्त थी. उसे देख कर मेरा आज का पूरा दिन बन गया था. मैं दरवाज़े पर खड़ा उनकी चूचियों को देखता रहा. जब दीदी की नज़र मुझपर पड़ी तो उन्होंने पूछा.



सरिता दी- अभी. तू यहाँ क्या कर रहा है. कुछ चाहिए क्या.

उनके ऐसा पूछने पर मेरे मन में आया की बोल दू की अपनी रसीली चूचियों का रास पीला दो, लेकिन मैंने खुद पर काबू किया और कहा.

मैं- हाँ दी बहुत प्यास लगी है. पानी पिने आया हूँ.

तो दीदी ने उठकर मुझे पानी दिया और दोबारा आता गुथने बैठ गयी, लेकिन इस बार उठकर दोबारा बैठने से उनका दुपट्टा उनकी चूचियों पर था जिसके कारन मुझे उनकी चूचियों की गहराई दिखाई नहीं दे रही थी.

मैं- दीदी मैं आपकी कुछ मदद करू.

सरिता दी- तुम क्या मेरी मदद करोगे किचन में.

मैं- कुछ भी जो मैं कर सकता हूँ. और दीदी. किचन की hi नहीं आपको मेरी किसी भी तरह की मदद की जरूरत हो तो आप मुझसे कह सकती हैं.

सरिता दी- ठीक है जब मुझे तुम्हारी मदद की जरुरत पड़ेगी तो मैं बोल दूंगी.

इसके बाद बात करने के लिए कुछ बचा hi नहीं था इसलिए मैं किचन से बाहर आ गया और अपने कमरे में जाने लगा. तभी सविता दीदी मुझे सीढ़ियों पर मिल गयी. आज दीदी की चूचिया रोज के मुकाबले बड़ी लग रही थी. शायद उन्होंने अंदर कुछ नहीं पहना था. दीदी सीढ़ियों से उतर रही थी और मैं ऊपर जा रहा था. साथ hi उनकी चूचियों को भी देख रहा था. उनकी चूचिया इतनी ज्यादा बहार को निकली हुई थी की अगर उनके पैरो के पास बैठकर कोई ऊपर देखे तो उनका चेहरा नज़र hi न आये.



मैं और दीदी जब आमने सामने पहुंचे तो मैंने एक भरपूर नज़र उनकी चूचियों पर डाली और फिर उनके चेहरे की तरफ देखा तो दीदी मुझे hi देख रही थी. मैंने गौर से देखा तो दीदी के चेहरे पर मुस्कान की एक हलकी सी लकीर नज़र आ रही थी. तो मैंने फिर से उनकी चूचियों पर अपनी नज़ारे गदा दी. तो सविता दीदी ने कहा.

सविता दी- तू नहीं सुधरने वाला.

और इतना कहकर वह निचे जाने लगी. मैं वही पर खड़ा होकर पीछे से उनकी मटकती गांड को ताड़ने लगा. जब दीदी निचे उतर गई तो एक नज़र मुड़कर पीछे देखा और मुझे अपनी गांड को ताड़ता हुआ पाकर उन्होंने कहा.



सविता दी- कमीने सुधर जा.

और इतना कहकर वो किचन में सरिता दीदी के पास चली गई. लेकिन उन्होंने जब कहा की कमीने सुधर जा तो मुझे उनकी बातो से कही भी ऐसा नहीं लगा की वो गुस्से में हो या कोई नाराज़गी हो. लेकिन मैं अभी भी उनके बर्ताव से कन्फूसिओं में था.

दीदी के वह से जाने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया और एक किताब लेकर बैठ गया. तभी मुझे अपने मोबाइल का ध्यान आया. जब मैंने मोबाइल चेक किया तो उसमे सविता दीदी का मस्सगे आया हुआ था.

सविता दी- आप कौन हैं.

मैंने दीदी को रपल्य किया.

मैं- मेरा नाम कोमल है.

उसके बाद मैं अपना मोबाइल साइड में रखा और सोचने लगा की मुझे बड़ी सावधानी से आगे बढ़ना होगा. अभी तो सब कुछ अच्छा hi जार अहा है, लेकिन मेरी एक गलती मेरा सारा गेम बिगड़ सकती है. मुझे कमरे में आये हुए 1 हॉर्स हो चुके थे. तभी मनीषा ने आकर मुझे खाना खाने के लिए कहा.

मैंने उसे आने का बोलकर फ्रेश होने चला गया. जब मैं निचे खाने के लिए आया तो पापा मां, दोनों दीदी और मनीषा वह पहले से hi मौजूद थे. मैं भी बैठकर खाना खाने लगा. तभी मुझे याद आया की मुझे पापा से लैपटॉप के लिए बात करनी है.

मैं- पापा आज मैं आपके बताये हुए एड्रेस पर गया था. उनका सब काम ऑनलाइन होता है तो उसके लिए मुझे एक लैपटॉप चाहिए.

पापा- ठीक है कल पैसे ले लेना और सरिता या सविता के साथ जाकर लैपटॉप ले लेना.

मैं- दीदी के साथ किसलिए. मैं खुद चला जाऊंगा.

पापा- क्यों अगर कोई तेरे साथ चला जाएगा तो तुझे कोई प्रॉब्लम है क्या.

मैं- नहीं पापा मैं तो बस ऐसे hi कह रहा था. ठीक है कल मैं सविता दीदी के साथ जाकर लैपटॉप ले लूंगा.

इसके बाद किसी ने कोई बात नहीं की सबने अपना खाना कम्पलीट किया. खाना खाने के बाद मां पापा अपने कमरे में चले गया. दोनों दीदी किचन को समेटने के लिए चली गयी. मैं और मनीषा t.v. देखने लगे. मैं t.v. देखते हुवे मनीषा को देखा तो वो बड़ी खुश नज़र आ रही थी. मैंने उससे पूछ.

मैं- तुझे क्या हुवा. आज बड़ी खुश नज़र आ रही हो.

मनीषा- ववववव भैया आप लैपटॉप ले रहे हो. अब तो मज़ा आ जाएगा.

मैं- लैपटॉप तो मैं ले रहा हूँ. तो तू इतनी खुश क्यों हो रही है.

मनीषा- अरे भैया जब मैं बोर हो जाउंगी तो लैपटॉप पर गेम खेलूंगी. फिर वो कई गेम के नाम गिनने लगी. जैसे लैपटॉप उसी के गेम खेलने के लिए ख़रीदा जार अहा था.

मैं- मैं नहीं दूंगा तुझे लैपटॉप गेम खेलने के लिए. वो मैं अपने काम के लिए ले रहा हूँ.

मनीषा- अच्छा देखती हूँ कैसे नहीं देते आप मुझे.

इसके बाद मैंने T.V बंद कर दी. और मैं और मनीषा साथ में hi अपने कमरे की तरफ जाने लगे. ऊपर आकर मनीषा अपने कमरे में चली गई और मैं छत पर अपने कमरे में जाने लगा. फिर मैंने सोचा की शायद सविता दीदी ऊपर आये, इसलिए मैं कमरे में न जाकर कल की तरह रेलिंग के सहर खड़ा होकर बहार का नज़ारा करने लगा.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-25

मैं बहार का नज़ारा करते हुए सविता दीदी का इंतज़ार करने लगा. लगभग आधा हॉर्स इंतज़ार करने के बाद भी जब वह नहीं आई तो मैं बहुत मायुश हुआ और अपने कमरे में जाने के लिए के लिए सोचने लगा तह की इतने में सविता दीदी छत पर आ गई. वो जब छत पर आई तो मैं बस उनको hi देखने लगा उन्होंने आज रोज की अपेक्षा बहुत hi सेक्सी निघ्त्य पहनी थी. जिसमे वो एक छुडासी माल लग रही थी. मैं तो बस उन्हें अपनी तरफ आता हुआ देखता रहा.

जब दीदी आकर मेरे पास रुकी तो मैं बस उनकी चूचियों को hi देख रहा था. दीदी भी आज मुझे अपनी चूचियों का नज़ारा करवा रही थी. कुछ देर दीदी की चूचियों को देखने के बाद मैंने कहा.



मैं- (उनकी चूचियों को देखते हुए नज़र उठाकर) क्या दीदी मैं कब से आपका इंतज़ार कर रहा था और आप आप अब आ रही हैं.

सविता didi-(meri आंको में देखते हुवे) भला मेरा इंतज़ार क्यों कर रहा था. मैंने तो मुझे कहा नहीं था इंतज़ार करने के लिए.

मैं- ( वापस नज़र उनकी चूचियों पर डालते हुए) मुझे कुछ देखना था इसलिए आपका इंतज़ार कर रहा था.

सविता दीदी- (मेरी आंखों में देखते हुवे). क्या देखने के लिए इंतज़ार कर रहा था.

मैं- (बात बदलते हुवे) अरे मैं तो ये देखने चाहता था की मेरी दीदी मुझसे बात करने के लिए आती हैं या नहीं. आपने क्या सोचा दीदी.

सविता दी- कुछ भी तो नहीं मैं भी तो तुझसे बात करने के लिए आयी हूँ.

मैं बस लगातार दीदी की चूचियों को ताड़ता रहा. और जब नज़र उठाकर उनकी आंको में देखा तो वो मुझे hi देख रही थी उनके चेहरे पर हलकी सी मुस्कान थी. फिर हम दोनों इधर उधर की बात करने लगे. कुछ देर बाद मैंने दीदी से कहा.



मैं- वैसे दीदी आज आप इन कपड़ो में बहुत खूबसूरत लग रही है.

सविता दी- क्यों क्या और कपड़ो में मैं खूबसूरत नहीं लगती.

मैं- नहीं दीदी आप तो हर कपड़ो में खूबसूरत लगती हैं. फिर एकदम धिरे से- और बिना कपड़ो के तो और भी खूबसूरत लगती होंगी.



मैं ये बोलने के बाद अपनी नज़र दीदी की तरफ की तो उनके चेहरे पर चुकने वाले भाव थे. शायद उन्होंने लास्ट लाइन सुन ली थी. वो बस मुझे hi देखे जा रही थी. मैं भी उनकी चुचुओं को वापस ताड़ने लगा था. दीदी को ऐसे माल के रूप में देखकर मेरा लुंड भी खड़ा हो गया था. जो पंत के अंदर उभरा हुआ नज़र आ रहा था. दीदी को ऐसे अचंभित देखकर मैंने फिर बात को बदल दी और कहा.

मैं- वैसे दीदी कल आपने कुछ कहा था मुझसे सोच कर बताने के लिए.

सविता दी- (वापस सामान्य होते हुवे). मैंने क्या कहा था.

मैं- मेरे दोस्ती के प्रस्ताव के बारे में क्या सोचा आपने दीदी.

सविता दी- क्या तू सच में मुझसे दोस्ती करना चाहता है. मैं तो अब शादीशुदा हूँ. तू अपनी उम्र की किसी लड़की से दोस्ती कर ले.

मैं- (मैं इन बातो के दौरान लगातार उनकी चूचियों को घूरे जा रहा था) हाँ दीदी मैं आपसे दोस्ती करना चाहता हूँ. आप शादीशुदा हैं तो भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता और वैसे भी अगर मैं अपनी उम्र की किसी लड़की के साथ दोस्ती करता हूँ तो वो मुझे कभी भी छोड़कर जा सकती है. लेकिन आप तो मेरी दीदी हैं. आप तो हमेशा मेरे साथ रहेंगी, इसलिए मैं आपसे दोस्ती करना चाहता हूँ.

सविता दी- (मेरी और देखते हुवे) तू एक बार फिर सोच ले. कही मुझसे दोस्ती करके तू पीछे तो नहीं हैट जाएगा.

मैं- हाँ दीदी मैंने सोच लिया है. मैं अपनी दोस्ती से कभी भी पीछे नहीं हटूंगा.

मेरे इतना कहते hi पता नहीं कैसे दीदी के हाँथ से मोबाइल निचे गिर पड़ा.( या उन्होंने जानबूझकर निचे गिराया ये पता नहीं) जब वह मोबाइल उठाने के लिए निचे झुकी तो उनकी चूचिया चलकर बाहर आने को मचलने लगी. उनकी चूचिया झुकाने की वजह से निघ्त्य के गले से ऐसे झाँक रही थी जैसे कह रही हो की आओ और मुझे निचोड़ दो. मेरा भी मन हुआ की उनकी चूचियों को पकड़कर मसल दो.



मगर मैं जल्दबाज़ी में अपना काम ख़राब नहीं करना चाहता था. तो मैं बौ उनकी चूचियों की गहराई में खो गया. इतना कामुक दृश्य देखने के बाद मेरे लुंड मेरे पेंट में फुल खड़ा हो गया जो बहुत फुल्ल हुआ नज़र आ रहा था पर शायद अभी दीदी की नज़र मेरे पंत के फुले हुए भाग पर नहीं पड़ी थी. दीदी ने झेकर अपना मोबाइल उठाया और झुके हुए hi एक नज़र मेरी और देखा और मुझे अपनी चूचियों की और भूखे कुत्ते की तरह देखता पाया वो जल्दी से कड़ी हो गई और हल्का सा मुस्कुरा कर कहा.



सविता दी- ठीक हैं मुझे तेरी दोस्ती मंज़ूर है.

मैं दीदी की बात सुनकर बहुत खुश हुवा. मैं इस मज़े को और आगे बढ़ाना छठा था. इसलिए मेरे दिमाग में एक आईडिया आया और मैंने दीदी से कहा.

मैं- दीदी क्या मैं आपको हुग कर सकता हूँ.

सरिता- और वो किस ख़ुशी में.

मैं- अरे आज से हम दोनों दोस्त हुवे न तो मैं बहुत खुश हूँ इसलिए आपको हुग करना चाहता हूँ.

दीदी ने ये सुनाने के बाद आँख के इशारे से मुझे परमिशन दे दी. मैं दीदी की है सुनते hi लपककर उन्हें अपने बहो में भर लिया. और तीते तरीके से हुग कर liya.mere तीते हुग करने से दीदी की बड़ी बड़ी गुदाज़ चूचिया मेरे साइन में डाब गई. मुझे उनकी चूचियों का एहसास बहुत hi मज़ा दे रहा था. उनकी चूचियों की छुवन से मेरे लुंड ने एक झटका खाया जो सीधे दीदी के पेट के निचे लगा.



दीदी को भी इसका एहसास हो गया था इसलिए उन्होंने मुझे आवाज़ दी अलग होने के लिए. लेकिन मैं उनकी चूचियों को अच्छे से फील करके अलग hi दुनिया में चला गया था. जब दीदी ने दोबारा आवाज़ दी तो मैंने अपने हाँथ को हल्का सा उनकी गांड के एक पैट पर फेरता हुआ उनसे अलग हो गया.



मेरे अलग होते hi उनकी नज़र सीधा मेरे पंत पर बने उभर पर गई. और जब उन्होंने मेरे लुंड के उभर को देखा तो उनको शोक लगा. इसलिए उन्होंने जल्दी वह से जाना सही समझा और मुझे गुड नाईट बोलकर जाने लगी. मैं भी अब दीदी को रोकना नहीं चाहता था. आज के लिए इतना hi बहुत था. इसलिए मैंने भी गुड नाईट बोल दिया और दीदी की मटकती गांड को देखने लगा. दीदी ने सीधी के पास पहुंच कर वापस पीछ मुड़कर देखा और मुझे अपने गांड को घूरता हुवा पाकर “KAMINA”kaha और निचे चली गयी.

दीदी के निचे जाने के बाद मैं भी अपने कमरे में चला गया. कमरे में आकर मैं अपने बीएड पर बैठ गया. मुझे अभी भी अपने साइन में दीदी की गुदाज़ चूचिया महसूस हो रही थी. मैं फिर से उन्ही सुखद एहसासो में खोने लगा. मेरा लुंड अभी भी खड़ा था. जो पंत में दर्द करने लगा था. तो मैंने अपनी पंत को उतर दिया और. जिससे मुझे कुछ रहत मिली. मैंने अपने लुंड पर हाँथ फेरकर उसे सांत्वना दी की कुछ दिन और इंतज़ार कर ले. बहुत hi जल्द एक छूट तेरे निचे आने वाली hai.main आज के पुरे दिन के वाकये के बारे में सोचने लगा. मेरे एक काम तो हो गया था की दोनों दीदी से मेरी दोस्ती हो गई थी और बातचीत भी शुरू हो चुकी थी. यही सब सोचते हुवे मैं बाथरूम में चला गया और फ्रेश होकर अपने बीएड पर आकर लेट गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..

 
अपडेट-26

बीएड पर लेटने के बाद मैंने अपना मोबाइल निकला और सविता दीदी के no पर अपने ओरिजिनल व्हाट्सप्प से मश्ग किया. वो अभी ऑनलाइन थी.

मैं- दीदी.

थोड़े देर इंतज़ार करने के बाद भी उनका कोई रपल्य नहीं आया. लेकिन उन्होंने मश्ग रीड कर लिया था. उसके बाद मैंने अपनी फेसबुक पर मीरा वाली ईद ओपन की तो अभी भी फ्रंड रक्स्ट एक्सेप्ट नहीं हुई थी. फिर मैं उस ईद से लॉगआउट हुआ और अपनी ईद से ओपन किया तो सरिता दीदी ऑनलाइन थी. तो मैंने उन्हें ही का मश्ग लिखकर भेज दिया. थोड़ी देर बाद hi उनका रपल्य आ गया.

मैं- Hi दीदी.

सरिता दी- Hi

मैं- कैसी हो दीदी.

सरिता दी- ठीक हूँ तुम अपना बताओ.

मैं- मैं भी ठीक हूँ. और क्या कर रही हैं आप.

सरिता दी- कुछ नहीं दोस्तों से बात कर रही हूँ.

मैं- क्यों जीजा जी से बात नहीं की क्या अभी.

सरिता दी- नहीं कुछ देर में करुँगी.

मैं- अच्छा दीदी एक बात कहु आप बुरा तो नहीं मानोगी.

सरिता दी- है बोल न.

मैं- नहीं पहले प्रॉमिस करो की आप बुरा नहीं मानेंगी.

सरिता di-chal प्रॉमिस मैं बुरा नहीं मानूंगी.

मैं- दीदी आप किचन में दुपट्टा ठीक से पहनकर काम किया कीजिए.

सरिता दी- पहनती तो हूँ लेकिन तू ऐसे क्यों कह रहा है.

मैं- अब कैसे बताऊ दीदी. जाने दीजिए कुछ और बात करते हैं.

(मैं दीदी की नज़र में अपनी इज़्ज़त और बढ़ने के लिए उन्हें किचन वाली बात बताने की सोची ताकि उन्हें लगे की उनका भाई अब सुधर गया hi और उनकी इज़्ज़त करने लगा है. लेकिन फिर मैंने सोचा कही ये दांव उल्टा न पद जाए. इसलिए मैंने अपना मन बदल लिया. लेकिन लड़कियों की आदत होती है की अगर कोई बात बिच में छोड़ दो तो वो उसे जानने के लिए उत्साहित रहती हैं.)

सरिता दी- नहीं बता न क्या कहना चाहता है.

मैं- जाने दीजिए न दी. आप नाराज़ हो जाओगी.

सरिता दी- बता न मैं नाराज़ नहीं होउंगी मैंने प्रॉमिस भी तो किया है.

मैं- वो दीदी जब मैं आज किचन में आया था और आप आता गूथ रही थी तो आपका दुपट्टा आपके गले में था और आपके वो नज़र आ रहे थे.

सरिता दी- क्या कह रहा है तू. कुछ समझ में नहीं आ रहा है.

मैं- अरे दीदी जब आप आता गूँथ रही थी तो आपका दुपट्टा आपके गले में था और आता गूंथने के लिए आप जब झुकती थी तो आपके बूब्स कमीज़ के गले में से दिख रहे थे.



सरिता दी- अभी. तूने फिर से dekha.(thoda नाराज़ होकर)

मैं- देखो मैंने कहा था न की मैं नहीं बताऊंगा आप नाराज़ हो जाओगी. लेकिन आपने hi ज़िद की बताने की और अब आप नाराज़ भी हो गई.

सरिता दी- मैं नाराज़ नहीं हूँ. लेकिन तुझे नहीं देखना चाहिए था.

मैं- वो मैंने जानबूझकर नहीं देखा. वो दिख रहे थे और मेरी नज़र उसपर पद गई बस

सरिता दी- हां तुझसे तो सबकुछ अनजाने में hi होता है. चाल आगे से ध्यान रखूंगी.

मैं- वाइस ीक बात कहु बुरा तो नहीं मानोगी.

सरिता दी- अब क्या कहना बचा हुआ है.

मैं- पहले प्रॉमिस करो तब बताऊंगा.

सरिता दी- ठीक है बताओ. प्रॉमिस बुरा नहीं मानूंगी.

मैं- वैसे देखने में वो बड़े मस्त लग रहे थे.

पहले तो दीदी ने मेरी बात का मतलब नहीं समझा की क्या मस्त लग तहे थे, लेकिन जब उन्हें समझ में आया की मैं किसकी बात कर रहा हूँ तो उन्होंने कहा.

सरिता दी- अभी…….. तू सच में बहुत बड़ा कमीना है. सुधर जा नहीं तो मर खयेगा.

मैं- अच्छ दीदी अब मैं फ़ोन रखता हूँ. आप जीजा जी से बात करो. गुड नाईट.

और इतना कहकर मैंने फ़ोन रख दिया. और सो गया..

अगले दिन मैं सोकर उठा और रोज़ की तरह अपने सभी काम फिनिश किये. और जब कमरे से बहार आया तो आज सविता दीदी छत पर टहलने नहीं आई थी. मुझे लगा की शायद कल कुछ ज्यादा hi हो गया था जो दीदी को बुरा लगा हो.

फिर मैं चाट पर आ गया और टहलने लगा. कुछ देर टहलने के बाद मैं अपने कपडे लेकर बाथरूम में चला गया और नहाने लगा. 15 मिनट में जब मैं नहाकर बहार निकल रहा था तो दीदी छत पर आती हुई नज़र आई. उन्होंने रात वाली hi निघ्त्य पहनी हुई थी.



लेकिन मैंने उनपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया की कल कुछ ज्यादा हो गया था कही वो बुरा न मान जाए. मैं नाहा कर केवल टॉवल लपेटकर बाथरूम से बहार आया था. तो दीदी नई नज़र मेरे बलिष्ट शरीर पर तैर रही थी मेरे जिम करने की वजह से मेरा शरीर गठीला हो गया था. मैंने इस बात को इग्नोर करते हुवे अपने कमरे में चला गया और कपडा बदलने लगा. कुछ देर बाद दीदी मेरे कमरे के दरवाज़े पर आयी और बोली.

सविता दी- अरे अभी आज चलना है न लैपटॉप लेने.

मैं- (बिना उनकी तरफ देखे)- हाँ दीदी बस आप तैयार हो जाओ फिर नाश्ता करके निकलते हैं.

सविता दी- ठीक है तू चल निचे मैं नहाकर आती हूँ.

मैं अब तक अपने कपडे पहन चूका था तो मैं कमरे से बहार निकलने लगा. दीदी अभी भी दरवाज़े पर hi कड़ी थी. मैं एक नज़र उनकी चूचियों को देखा और निचे हॉल में चला गया. जब मैं वह पंहुचा तो पापा और मां जॉब पर जा रहे थे. उन्होंने मुझे पैसे दिए और और मेरी बाइक की लेकर जॉब पर निकल गए (पापा की गाड़ी शायद ख़राब थी इसीलिए उन्होंने मेरी बाइक ली)

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
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