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- Dec 5, 2013
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अपडेट-37
शाम को मैं सो कर उठा तो दोपहर में जो मेरे और सविता दीदी के बिच जो हुवा. उसके बाद उनका जो रिएक्शन आया उसे मैं सोच सोच के परेशां हो रहा था. मुझे लग रहा था की मैंने गलत टाइम पर वह स्टेप उठा लिया. मुझे दीदी के और थोड़ा खुलने का इंतज़ार करना चाहिए था. मुझे मेरा काम बिगड़ता दिख रहा था इसलिए मैंने दीदी से मागि मांग लेने में hi अपनी भलाई समझी. मैं वापस दीदी के कमरे में गया तो दीदी वह नहीं थी. मैं निचे हाल में आया तो वह सभी लोग मौजूद थे. सरिता दीदी किचन में थी. मैं भी वह बैठ गया और सबसे बात करने लगा. मैंने सरिता दीदी की तरफ देखा तो वो दूसरी तरफ देख रही थी.
फिर मैंने t.v. ों किया और t.v. देखने लगा. खाना कहते समय भी मैंने सविता दीदी की तरफ देखा तो वह सर निचे किये खाना खा रही थी. मई समझ गया की दीदी नाराज हो गई हैं. फिर मैंने खाना फिनिश किया और छत पर आकर उनका वेट करने लगा. काफी देर इंतज़ार करने के बाद भी दीदी जब नहीं आई तो मैं अपने रूम में चला गया. और माया वाली ईद को ओपन कर सरिता दीदी को मश्ग भेज दिया.
म- ही
थोड़ी देर बार सरिता दीदी का रपल्य आ गया.
सरिता दी- ही
म- कैसी हो आप
सरिता दी- मैं ठीक हूँ.
म- एक बात कहनी थी आपसे अगर आप बुरा न मने तो.
सरिता दी- हां कहिये.
म- बात ये है की यहाँ पर मेरा कोई दोस्त नहीं है. मैंने अभी तक किसी से बात hi नहीं की. लेकिन पता नहीं क्यों आपसे बात करने की इच्छा हो गई.
सरिता दी- ऐसा क्यों की आपने किसी से बात न करते हुवे मुझसे hi बात की.
म- बात ये है की सभी यहाँ पर उलटी सीधी पोस्ट डालते रहता हैं लेकिन आपको मैंने कभी भी कोई गलत पोस्ट या कमेंट करते हुवे नहीं देखा. आपका यही नेचर मुझे भ्ह गया.
सरिता दी- इसका मतलब आप मुझे काफी दिन से फॉलो कर रही thi(hanste हुवे)
म- हां इसलिए तो मैं आपसे सच्ची दोस्ती करना चाहती हूँ. क्या आप मेरी दोस्ती स्वीकार करेंगी.
सरिता दी- हाँ आप भी बहुत अगल लग रही हैं मुझे दुसरो से. इसलिए मैं आपको अपना दोस्त बनाउंगी.
म- थैंक यू सो मच.
सरिता दी- लेकिन दोस्ती में कुछ छुपाया नहीं जाता इसलिए तुम मुझसे कुछ भी मत छुपाना.
म- ठीक है. उस दिन आपने बताया नहीं था की आपकी शादी हो गई है या नहीं.
सरिता दी- अभी नहीं हुई है लेकिन 12 दिन बाद मेरी शादी हैं.
म- अरे वाह. कोंग्रटुलतिओं सिस्टर. ओह्ह सॉरी. दोस्त.
सरिता दी- इतस ोककक…
म- और घर में कौन कौन है. आपके आलावा.
सरिता दी- मां पापा, एक बड़ी दीदी, उनकी शादी हो चुकी है, मुझसे छोटा एक भाई और उससे छोटी एक बहन.
म- काफी अच्छी फॅमिली है. थोड़ा हंसी मज़ाक तो कर hi सकते हैं न आपसे.
सरिता दी- हां लेकिन लिमिट me.(hanste हुवे).
म- और आपके फिऑन्सé से बात तो खूब होती होगी. हर तरह की.
सरिता दी- हां अब शादी होने वाली है तो बाते तो हो hi जाती हैं.
म- अच्छा और क्या सोचा है शादी के बाद (मज़ाकिया लहज़े में)
सरिता दी- सोचना क्या है. जो शादी के बाद सबके साथ होता है वही सब होगा और क्या.
म- अच्छा अब रख रही हूँ भाई बुला रहा है. बाद में बात करते हैं. Bye
सरिता दी- ोकक Bye.
लॉगआउट होने के 15 मिनट बाद मैंने सोचा की चलकर देखा जाए की सरिता दीदी क्या कर रही हैं. तो मैं चुपके चुपके निचे आया और सरिता दीदी के दरवाज़े के पास खड़ा हो गया. वो जीजा जी से बात कर रही थी. मैं अंदर देखना चाहता था तो मैं देखने की जगह तलाशने लगा. मैंने देखा तो उनके कमरे की खिसकी थोड़ी सी खुली हुई थी. मैंने बहार की लाइट ऑफ की और उनकी खिड़की के पास चला गया. जब मैं अंदर झांक कर देखा तो मैं देखता रह गया.
अंदर दीदी जीजा जी से वीडियो कॉल पर बात कर रही और धीरे धीरे जीजा जी के कहने पर कपडे भी उतर रही थी. मैं अंदर देख तो रहा था लेकिन मेरी गांड फटी पड़ी थी की अगर कही मां पापा या मनीषा और सविता दीदी ने मुझे देख लिया तो मेरी तो गांड मार लेंगे सब. लेकिन मन में एक लालच था एक ठरक थी अपनी बहनो को लेकर जो मुझे ऐसा करने पर मजबूर कर रहा था.
जीजा जी- जान आज तो अपने कमरे में हो और दरवाज़ा भी बंद किया है तो आज तो कुछ दिखा दो न.
सरिता दी- अभी कल hi तो दिखाया था. आप को तो रोज रोज देखना होता है.
जीजा जी- (मजाकिया टन में) अरे मेरी जान रोज ये देखना होता है की तुम्हारी चूचिया वैसी hi कड़क हैं ये ढीली हो गयी हैं.
सरिता दी- (मजाक में) हाँ एक hi दिन में थोड़े hi लटक जाएंगे. कोई आम थोड़े hi हैं की चूस लो तो ढीली हो जाये. मेरी चूचिया तो तुम hi ढीली करोगे.
मैं दीदी के मुंह से ऐसे बात सुनकर हैरान था की मेरी दीदी ऐसी भी बात कर सकती हैं. और जीजा जी की किस्मत से जल भी रहा था की ऐसी रसभरी कड़क चूचिया उन्हों चूसने को मिलेगी.
जीजा जी- और नहीं तो क्या. तुम्हारी चूचियों को तो मैं चूस चूस कर इनका सारा रास निचोड़ लूंगा. अच्छा अब चलो अपनी चूचिया दिखाओ.
सरिता दी. आप मानेंगे नहीं न.
और इतना कहकर दीदी ने अपनी t-shirt जिसमे से उनकी बड़ी बड़ी चूचिया पहले से hi आधी नज़र आ रही थी उसे उतरने लगी.
मैं आँखे फाडे आने वाले नज़ारे के लिए तैयार खड़ा था. अब मेरा मन में ये दर भी नहीं था की कोई मुझे देख भी सकता है. मैं तो बस अपने नज़र खिड़की से अंदर आने वाले मादक दृश्य को देखने के लिए गड़ाए हुवे था.
कुछ hi देर में दीदी ने अपनी t-shirt उतर दी. अब दीदी मेरे सामने मतलब फ़ोन के सामने ब्रा और लोअर में कड़ी थी.
फिर दीदी ने जीजा जी के कहने पर अपनी लोअर भी उतर दी. अब दीदी ब्रा पैंटी में अपने कमरे में कड़ी थी. फ़ोन पर उनका फिऑन्स और कमरे के बाहर उनका भाई उनके इस मादक हाहाकारी बदन का रास आँखों से पि रहे थे.
जीजा जी- आअह्ह्ह्ह डार्लिंग तुम कितनी हॉट और सेक्सी हो. तुम ब्रा पैंटी में एकदम माल लगती हो.
सरिता दी- धत्त्त बेशरम. अपनी होने वाली बीबी को माल बोलते हुवे आपको शर्म नहीं आती.
जीजा जी- इसमें शर्म की क्या बात है. तुम मेरी माल hi तो हो. 12 दिन बाद तुम्हे मैं घर में ऐसे hi रखूँगा. कपडे भी नहीं पहनने दूंगा. और जब मन करेगा तुम्हारे इस हुश्न की शराब को पिऊंगा.
मैं बहार खड़ा दीदी के कड़क और मादक जिस्म को और दोनों की कामुक बातो से पूरी तरह उत्तेजित हो गया था. मेरा लुंड लोअर में पूरा टैंकर खड़ा हो गया था. लेकिन मैं मुट्ठ भी नहीं मार सकता था.
थोड़ी देर बाद दीदी ब्रा और पैंटी में hi अपने बिस्टेर पर पीठ के बल लेट गयी. अब तो दीदी मुझे एकदम छुडासी माल लगने लगी थी. वो बिस्तर पर लेटकर जीजा जी के कहे अनुसार जलबिन मछली की तरह तड़पने वाली हारकर करने लगी. उधर से जीजा जी भी दीदी को उत्साहित कर रहे थे.
जीजा जी- हाँ जानेमन तुम बहुत hi हॉट लग रही हो. तुम्हे देखकर मुझे कण्ट्रोल नहीं हो रहा है. काश मई तुम्हारे पास होता तो अब तक तुम्हारे साथ बहुत कुछ कर लेता.
सरिता दी- ऐसे कैसे कर लेते मैं आपको कुछ करने hi नहीं देती. और जब आप यहाँ होता तो आप मेरे कमरे में थोड़े न होते.
फिर दीदी ने करवट बदलकर पेट के बल बिस्टेर पर लेट गयी. अब तो नज़ारा और भी ज्यादा हॉट हो गया था. पेट के बल लेटने से दीदी की चूचिया ब्रा से बहार निकलने को बेताब नज़र आ रही थी. इस तरह दीदी किसी रुंडी की तरह नज़र आ रही थी.
उसके बाद दीदी फिर जीजा जी के कहने पर वैसे hi मचलने लगी और अपनी जीभ होठो पर फिरने लगी. इतना हॉट नज़ारा देख कर मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे दीदी मुझे बुला रही हो की अभी बहार क्यों खड़ा है अंदर आ जा और अपनी दीदी को छोड़कर उसकी प्यास बुझा दे. तभी मुझे जीजा जी की आवाज़ आई.
जीजा जी- जान एक बार अपनी ब्रा को निचे करके अपनी नंगी चूचियों के दर्शन करवा दो.
सरिता दी- मैंने कितनी बार आपसे कहा है की इसके आगे शादी के बाद होगा.
जीजा जी- प्ल्ज़ जान पहली और आखिरी बार इसके बाद मैं कभी नहीं कहूंगा.
सरिता दी- ठीक है लेकिन पूरा नहीं उतरूंगी.
उसके बाद दीदी बिस्टेर पर बैठ गई और अपनी एक चुकी से ब्रा पकड़कर निचे की ये बस 5 सेकंड के लिए hi दीदी ने किया था. लेकिन इन 5 सेकंड में hi मुझे जैसे जन्नत का नज़ारा मिल गया. मेरे लुंड ने लगातार 5 जोरदार झटके लोअर में मरे. दीदी की एक चुकी से ब्रा निचे होने पर मैंने देखा की दीदी के चुकी की घुंडी ब्राउन कलर की है. और एकदम अंगूर के डेन के बराबर थी.
मेरा मन उनको अपने मुंह में भरने को मचलने लगा, लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकता था. मुझे आज मालूम हुवा की मेरी दोनों बड़ी बहाने एकदम पका हुवा माल बन चुकी हैं. जिनका रास पिने में मुझे बहुत मज़ा आने वाला था.
मैं अपनी सोच से बहार निकला और कमरे में देखा टी दीदी अपना कपडा वापस पहन रही थी और उन्होंने फ़ोन रख दिया था. इसका मतलब दीदी कभी भी बहार आ सकती हैं इसलिए मैं वह से चुपचाप अपना खड़ा लुंड दबाये अपने कमरा में आ गया. और बिस्टेर पर लेटकर आज दिन भर के वाकये के बारे में सोचने लगा और पता नहीं कब नींद की आगोश में चला गया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
शाम को मैं सो कर उठा तो दोपहर में जो मेरे और सविता दीदी के बिच जो हुवा. उसके बाद उनका जो रिएक्शन आया उसे मैं सोच सोच के परेशां हो रहा था. मुझे लग रहा था की मैंने गलत टाइम पर वह स्टेप उठा लिया. मुझे दीदी के और थोड़ा खुलने का इंतज़ार करना चाहिए था. मुझे मेरा काम बिगड़ता दिख रहा था इसलिए मैंने दीदी से मागि मांग लेने में hi अपनी भलाई समझी. मैं वापस दीदी के कमरे में गया तो दीदी वह नहीं थी. मैं निचे हाल में आया तो वह सभी लोग मौजूद थे. सरिता दीदी किचन में थी. मैं भी वह बैठ गया और सबसे बात करने लगा. मैंने सरिता दीदी की तरफ देखा तो वो दूसरी तरफ देख रही थी.
फिर मैंने t.v. ों किया और t.v. देखने लगा. खाना कहते समय भी मैंने सविता दीदी की तरफ देखा तो वह सर निचे किये खाना खा रही थी. मई समझ गया की दीदी नाराज हो गई हैं. फिर मैंने खाना फिनिश किया और छत पर आकर उनका वेट करने लगा. काफी देर इंतज़ार करने के बाद भी दीदी जब नहीं आई तो मैं अपने रूम में चला गया. और माया वाली ईद को ओपन कर सरिता दीदी को मश्ग भेज दिया.
म- ही
थोड़ी देर बार सरिता दीदी का रपल्य आ गया.
सरिता दी- ही
म- कैसी हो आप
सरिता दी- मैं ठीक हूँ.
म- एक बात कहनी थी आपसे अगर आप बुरा न मने तो.
सरिता दी- हां कहिये.
म- बात ये है की यहाँ पर मेरा कोई दोस्त नहीं है. मैंने अभी तक किसी से बात hi नहीं की. लेकिन पता नहीं क्यों आपसे बात करने की इच्छा हो गई.
सरिता दी- ऐसा क्यों की आपने किसी से बात न करते हुवे मुझसे hi बात की.
म- बात ये है की सभी यहाँ पर उलटी सीधी पोस्ट डालते रहता हैं लेकिन आपको मैंने कभी भी कोई गलत पोस्ट या कमेंट करते हुवे नहीं देखा. आपका यही नेचर मुझे भ्ह गया.
सरिता दी- इसका मतलब आप मुझे काफी दिन से फॉलो कर रही thi(hanste हुवे)
म- हां इसलिए तो मैं आपसे सच्ची दोस्ती करना चाहती हूँ. क्या आप मेरी दोस्ती स्वीकार करेंगी.
सरिता दी- हाँ आप भी बहुत अगल लग रही हैं मुझे दुसरो से. इसलिए मैं आपको अपना दोस्त बनाउंगी.
म- थैंक यू सो मच.
सरिता दी- लेकिन दोस्ती में कुछ छुपाया नहीं जाता इसलिए तुम मुझसे कुछ भी मत छुपाना.
म- ठीक है. उस दिन आपने बताया नहीं था की आपकी शादी हो गई है या नहीं.
सरिता दी- अभी नहीं हुई है लेकिन 12 दिन बाद मेरी शादी हैं.
म- अरे वाह. कोंग्रटुलतिओं सिस्टर. ओह्ह सॉरी. दोस्त.
सरिता दी- इतस ोककक…
म- और घर में कौन कौन है. आपके आलावा.
सरिता दी- मां पापा, एक बड़ी दीदी, उनकी शादी हो चुकी है, मुझसे छोटा एक भाई और उससे छोटी एक बहन.
म- काफी अच्छी फॅमिली है. थोड़ा हंसी मज़ाक तो कर hi सकते हैं न आपसे.
सरिता दी- हां लेकिन लिमिट me.(hanste हुवे).
म- और आपके फिऑन्सé से बात तो खूब होती होगी. हर तरह की.
सरिता दी- हां अब शादी होने वाली है तो बाते तो हो hi जाती हैं.
म- अच्छा और क्या सोचा है शादी के बाद (मज़ाकिया लहज़े में)
सरिता दी- सोचना क्या है. जो शादी के बाद सबके साथ होता है वही सब होगा और क्या.
म- अच्छा अब रख रही हूँ भाई बुला रहा है. बाद में बात करते हैं. Bye
सरिता दी- ोकक Bye.
लॉगआउट होने के 15 मिनट बाद मैंने सोचा की चलकर देखा जाए की सरिता दीदी क्या कर रही हैं. तो मैं चुपके चुपके निचे आया और सरिता दीदी के दरवाज़े के पास खड़ा हो गया. वो जीजा जी से बात कर रही थी. मैं अंदर देखना चाहता था तो मैं देखने की जगह तलाशने लगा. मैंने देखा तो उनके कमरे की खिसकी थोड़ी सी खुली हुई थी. मैंने बहार की लाइट ऑफ की और उनकी खिड़की के पास चला गया. जब मैं अंदर झांक कर देखा तो मैं देखता रह गया.
अंदर दीदी जीजा जी से वीडियो कॉल पर बात कर रही और धीरे धीरे जीजा जी के कहने पर कपडे भी उतर रही थी. मैं अंदर देख तो रहा था लेकिन मेरी गांड फटी पड़ी थी की अगर कही मां पापा या मनीषा और सविता दीदी ने मुझे देख लिया तो मेरी तो गांड मार लेंगे सब. लेकिन मन में एक लालच था एक ठरक थी अपनी बहनो को लेकर जो मुझे ऐसा करने पर मजबूर कर रहा था.
जीजा जी- जान आज तो अपने कमरे में हो और दरवाज़ा भी बंद किया है तो आज तो कुछ दिखा दो न.
सरिता दी- अभी कल hi तो दिखाया था. आप को तो रोज रोज देखना होता है.
जीजा जी- (मजाकिया टन में) अरे मेरी जान रोज ये देखना होता है की तुम्हारी चूचिया वैसी hi कड़क हैं ये ढीली हो गयी हैं.
सरिता दी- (मजाक में) हाँ एक hi दिन में थोड़े hi लटक जाएंगे. कोई आम थोड़े hi हैं की चूस लो तो ढीली हो जाये. मेरी चूचिया तो तुम hi ढीली करोगे.
मैं दीदी के मुंह से ऐसे बात सुनकर हैरान था की मेरी दीदी ऐसी भी बात कर सकती हैं. और जीजा जी की किस्मत से जल भी रहा था की ऐसी रसभरी कड़क चूचिया उन्हों चूसने को मिलेगी.
जीजा जी- और नहीं तो क्या. तुम्हारी चूचियों को तो मैं चूस चूस कर इनका सारा रास निचोड़ लूंगा. अच्छा अब चलो अपनी चूचिया दिखाओ.
सरिता दी. आप मानेंगे नहीं न.
और इतना कहकर दीदी ने अपनी t-shirt जिसमे से उनकी बड़ी बड़ी चूचिया पहले से hi आधी नज़र आ रही थी उसे उतरने लगी.
मैं आँखे फाडे आने वाले नज़ारे के लिए तैयार खड़ा था. अब मेरा मन में ये दर भी नहीं था की कोई मुझे देख भी सकता है. मैं तो बस अपने नज़र खिड़की से अंदर आने वाले मादक दृश्य को देखने के लिए गड़ाए हुवे था.
कुछ hi देर में दीदी ने अपनी t-shirt उतर दी. अब दीदी मेरे सामने मतलब फ़ोन के सामने ब्रा और लोअर में कड़ी थी.
फिर दीदी ने जीजा जी के कहने पर अपनी लोअर भी उतर दी. अब दीदी ब्रा पैंटी में अपने कमरे में कड़ी थी. फ़ोन पर उनका फिऑन्स और कमरे के बाहर उनका भाई उनके इस मादक हाहाकारी बदन का रास आँखों से पि रहे थे.
जीजा जी- आअह्ह्ह्ह डार्लिंग तुम कितनी हॉट और सेक्सी हो. तुम ब्रा पैंटी में एकदम माल लगती हो.
सरिता दी- धत्त्त बेशरम. अपनी होने वाली बीबी को माल बोलते हुवे आपको शर्म नहीं आती.
जीजा जी- इसमें शर्म की क्या बात है. तुम मेरी माल hi तो हो. 12 दिन बाद तुम्हे मैं घर में ऐसे hi रखूँगा. कपडे भी नहीं पहनने दूंगा. और जब मन करेगा तुम्हारे इस हुश्न की शराब को पिऊंगा.
मैं बहार खड़ा दीदी के कड़क और मादक जिस्म को और दोनों की कामुक बातो से पूरी तरह उत्तेजित हो गया था. मेरा लुंड लोअर में पूरा टैंकर खड़ा हो गया था. लेकिन मैं मुट्ठ भी नहीं मार सकता था.
थोड़ी देर बाद दीदी ब्रा और पैंटी में hi अपने बिस्टेर पर पीठ के बल लेट गयी. अब तो दीदी मुझे एकदम छुडासी माल लगने लगी थी. वो बिस्तर पर लेटकर जीजा जी के कहे अनुसार जलबिन मछली की तरह तड़पने वाली हारकर करने लगी. उधर से जीजा जी भी दीदी को उत्साहित कर रहे थे.
जीजा जी- हाँ जानेमन तुम बहुत hi हॉट लग रही हो. तुम्हे देखकर मुझे कण्ट्रोल नहीं हो रहा है. काश मई तुम्हारे पास होता तो अब तक तुम्हारे साथ बहुत कुछ कर लेता.
सरिता दी- ऐसे कैसे कर लेते मैं आपको कुछ करने hi नहीं देती. और जब आप यहाँ होता तो आप मेरे कमरे में थोड़े न होते.
फिर दीदी ने करवट बदलकर पेट के बल बिस्टेर पर लेट गयी. अब तो नज़ारा और भी ज्यादा हॉट हो गया था. पेट के बल लेटने से दीदी की चूचिया ब्रा से बहार निकलने को बेताब नज़र आ रही थी. इस तरह दीदी किसी रुंडी की तरह नज़र आ रही थी.
उसके बाद दीदी फिर जीजा जी के कहने पर वैसे hi मचलने लगी और अपनी जीभ होठो पर फिरने लगी. इतना हॉट नज़ारा देख कर मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे दीदी मुझे बुला रही हो की अभी बहार क्यों खड़ा है अंदर आ जा और अपनी दीदी को छोड़कर उसकी प्यास बुझा दे. तभी मुझे जीजा जी की आवाज़ आई.
जीजा जी- जान एक बार अपनी ब्रा को निचे करके अपनी नंगी चूचियों के दर्शन करवा दो.
सरिता दी- मैंने कितनी बार आपसे कहा है की इसके आगे शादी के बाद होगा.
जीजा जी- प्ल्ज़ जान पहली और आखिरी बार इसके बाद मैं कभी नहीं कहूंगा.
सरिता दी- ठीक है लेकिन पूरा नहीं उतरूंगी.
उसके बाद दीदी बिस्टेर पर बैठ गई और अपनी एक चुकी से ब्रा पकड़कर निचे की ये बस 5 सेकंड के लिए hi दीदी ने किया था. लेकिन इन 5 सेकंड में hi मुझे जैसे जन्नत का नज़ारा मिल गया. मेरे लुंड ने लगातार 5 जोरदार झटके लोअर में मरे. दीदी की एक चुकी से ब्रा निचे होने पर मैंने देखा की दीदी के चुकी की घुंडी ब्राउन कलर की है. और एकदम अंगूर के डेन के बराबर थी.
मेरा मन उनको अपने मुंह में भरने को मचलने लगा, लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकता था. मुझे आज मालूम हुवा की मेरी दोनों बड़ी बहाने एकदम पका हुवा माल बन चुकी हैं. जिनका रास पिने में मुझे बहुत मज़ा आने वाला था.
मैं अपनी सोच से बहार निकला और कमरे में देखा टी दीदी अपना कपडा वापस पहन रही थी और उन्होंने फ़ोन रख दिया था. इसका मतलब दीदी कभी भी बहार आ सकती हैं इसलिए मैं वह से चुपचाप अपना खड़ा लुंड दबाये अपने कमरा में आ गया. और बिस्टेर पर लेटकर आज दिन भर के वाकये के बारे में सोचने लगा और पता नहीं कब नींद की आगोश में चला गया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।