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Part 94
Part 94 – रूही की सुहागरात की तयारी
आज शाम के 7 बज रहे थे.
रूही के पीरियड आज ऑफिशियली ख़तम हो चुके थे – कल रात उसकी सुहागरात होने वाली थी.
घर में एक खास माहौल था: मेहुल और निधि (माँ) को सब पता था, और वह खुद hi तयारी में लगी हुई थी.
पहले निधि ने रूही को अपने कमरे में बुलाया.
उसने एक बड़ा सा लाल ब्राइडल लेहेंगा निकाला – हैवी एम्ब्रायडरी वाला, जिसमे गोल्ड का काम था, और मैचिंग जेवेलरी सेट.
निधि (प्यार से रूही के बाल सहलाते हुए):
“बेटी… कल रात तेरी सुहागरात है.
यह लेहेंगा पेहेन कर तू बिलकुल दुल्हन लग्न… और अपने भैया को इम्प्रेस कर देना.
मैं और मेहुल तैयार करेंगे तुझे – मेहँदी, सोलह श्रृंगार, सब कुछ.”
रूही शर्मा गयी, आँखें नीचे कर ली,
“मम्मी… मुझे दर लग रहा है… पहली बार होगी न…”
निधि ने उसको गले लगाया,
“दर मत बीटा… तेरा भैया तुझे बहुत प्यार करेगा.
वह इतना वाइल्ड और केयरिंग है… तू ज़िन्दगी भर याद रखेगी.
और अगर कुछ दर्द हो तो बता देना… हम सब तेरी मदद करेंगे.”
तभी मेहुल अंदर आयी, हाथ में मेहँदी की थाली लिए.
उसने रूही को बैठाया और उसके हाथों और पैरों पे इंटरसाते मेहँदी लगनी शुरू कर दी – फ्लोरल दसिग्नस, और बीच में “र” और “र” लिखा (रोहन और रूही के लिए).
मेहुल (मुस्कुराते हुए):
“रूही… कल रात भैया तुझे सजायेंगे… तेरी सील तोड़ने के बाद तू पूरी तरह से उनकी बीवी बन जाएगी.
मैं और मम्मी भी वहां रहेंगे अगर ज़रुरत पड़ी… जैसे हमने अपनी तयारी में किया था.
तेरी छूट को पहली बार इतना प्यार मिलेगा की तू चिल्लायेगी ख़ुशी से.”
रूही की चीक्स लाल हो गयी, वह मेहँदी लगवाते हुए बोली,
“दीदी… सच में? मम्मी भी आओगी?”
निधि ने हाँ में सर हिलाया,
“हाँ बीटा… अब घर में सब एक हैं.
तेरी सुहागरात पूरी फॅमिली अफेयर होगी… सेफ और मज़ेदार.”
तयारी चलती रही:
- निधि ने रूही को वैक्सिंग करवाई – पूरी बॉडी स्मूथ कर दी, खास कर छूट और गांड के aas-paas.
- मेहुल ने मेकअप प्रैक्टिस की – रेड लिपस्टिक, कोहल, बिंदी, और सिन्दूर का डब्बा रेडी रखा (कल रोहन खुद लगाएगा).
- रूम को सजाया गया: लाल शीट्स, रोज पेटल्स, डिम लाइट्स, और एक बड़ा मिरर बीएड के सामने ताकि सब एक्शन देख सके.
रात को डिनर के बाद रोहन रूही के कमरे में आया.
सब तयारी देख कर मुस्कुराया.
रोहन (रूही को गॉड में उठा कर):
“मेरी जान… तयारी पूरी है?
रात 12 बजे मैं आऊंगा… तुझे नंगा करूँगा, मेहँदी वाले हाथों से मेरा लुंड पकड़वायुंगा…
फिर तेरी छूट में पहली बार डालूंगा… dhire-dhire सील तोडूंगा… फिर वाइल्ड बन जाऊंगा.
तेरी गांड भी मारूंगा… और मम्मी और दीदी साइड में बैठे देखेंगी की उनकी छोटी बेटी कितनी चुड़क्कड़ है.”
रूही ने शर्मा के उसके सीने में मुँह छुपा लिया,
“भैया… अब दिल धड़क रहा है… जल्दी कल आ जाये.”
मेहुल और निधि साइड में कड़ी मुस्कुरा रही थी.
निधि ने बोलै:
“बीटा… हम सब तेरी ख़ुशी के लिए हैं.
कल रात घर में सिर्फ प्यार और मस्ती होगी.”
रोहन ने रूही को किश किया और गया – अब सिर्फ काउंटडाउन था.
कल रात रूही की ज़िन्दगी बदल जाएगी…
एक बहिन से बीवी, रंडी और गुलाम बन कर.
घर अब पूरा रोहन का था – और सुहागरात सिर्फ शुरुआत थी.
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**Part 95 – रूही की सुहागरात**
रात के 11:55 बज रहे थे.
घर में बिलकुल सन्नाटा था, सिर्फ एक कमरे से halki-halki सितार की आवाज़ आ रही थी.
रूही का कमरा पूरा सजाया गया था:
- लाल रोजेज की पट्टी बिछी हुई,
- चरों तरफ कैंडल्स,
- बीएड पर लाल सिल्क शीट,
- बड़े मिरर के सामने एक छोटा सा पूजा का थाल – सिन्दूर, मंगलसूत्र, चूड़ियां.
रूही बिलकुल दुल्हन बानी बैठी थी:
- भारी लाल लेहेंगा, गोल्ड जारी का काम,
- गहरा बैकलेस ब्लाउज,
- मांग में सिन्दूर की लाइन (मेहुल ने पहले से hi लगा दी थी),
- haathon-pairon में ालता और मेहँदी,
- गले में मंगलसूत्र,
- चूड़ियां खनक रही थी,
- आँखों में काजल, होंठों पे लाल लिपस्टिक,
- और अंदर – कुछ भी नहीं.
मेहुल और निधि (माँ) भी कमरे में थी – दोनों सिल्क निघ्त्य में, साइड में कुर्सियों पर बैठी, मुस्कुरा रही थी.
Tik-tik… 12 बज गए.
दरवाज़ा खुला.
रोहन अंदर आया – शेरवानी पहने, बिलकुल दूल्हा लग रहा था.
उसने दरवाज़ा अंदर से लॉक किया.
रोहन ने रूही को ऊपर से नीचे तक देखा, आँखों में हवस और प्यार दोनों.
रोहन (धीमी आवाज़ में):
“मेरी दुल्हन… मेरी रूही… आज से तू मेरी बीवी है.”
रूही शर्मा के कड़ी हो गयी, घूँघट नीचे किया हुआ.
रोहन उसके पास गया, घूँघट धीरे से उठाया, रूही के होंठों पे एक लम्बी किश की.
फिर उसने रूही को गॉड में उठाया और बीएड पर लेटाया.
मेहुल और निधि मुस्कुरा रही थी, निधि ने धीमे से बोलै:
“बीटा… अब शुरू कर… तेरी छोटी बीवी इंतज़ार कर रही है.”
रोहन ने अपनी शेरवानी उतरी, बिलकुल नंगा हो गया.
लुंड पूरा खड़ा, टोपा लाल और मोटा.
रूही ने पहली बार इतना बड़ा लुंड बिलकुल पास से देखा – उसकी आँखें बड़ी हो गयी, सांस तेज़.
रोहन बीएड पर चढ़ गया, रूही के ऊपर.
उसने रूही का लेहेंगा dheere-dheere ऊपर उठाया – नीचे कुछ नहीं था, छूट बिलकुल साफ़ और गीली चमक रही थी.
रोहन ने रूही की टाँगे चौड़ी की, लुंड छूट पे रगड़ा.
रूही (कांपती आवाज़ में):
“भैया… डर लग रहा है… बहुत बड़ा है…”
रोहन ने उसके कान में गुंजडा:
“शठ… मेरी जान… पहले प्यार से डालूंगा… फिर वाइल्ड बनूँगा.”
उसने टोपा छूट के मुँह पर सेट किया और dheere-dheere धकेला.
रूही की चीख निकली:
“ाआअह… भैया… दर्द… आआह…”
रोहन रुक गया, रूही के होंठों को चूसने लगा, मुम्मों को दबाने लगा.
फिर दोबारा dheere-dheere अंदर धकेलने लगा.
आधा लुंड अंदर गया तो रूही के आंसू निकल आये,
“आआह… सील टूट गयी… भैया… अब पूरा दाल दो…”
रोहन ने एक ज़ोर का धक्का मारा – पूरा लुंड अंदर तक.
रूही की लम्बी चीख निकली:
“आआआआअह्ह्ह्हह… माँ… पहात गयी… भैया… अब छोड़ दो मुझे!”
रोहन ने स्पीड पकड़ ली – धीरे से शुरू किया, फिर तेज़ी से.
Thap-thap-thap-thap…
बीएड हिलने लगा, चूड़ियां खनकने लगी.
रूही के मुँह से अब मज़ा निकलने लगा:
“आआह… भैया… कितना मज़ा आ रहा है… ज़ोर से… तेरी बीवी की छूट फाड् दे!”
मेहुल और निधि साइड में बैठी देख रही थी, दोनों की निघ्त्य के अंदर हाथ चल रहे थे.
10 मिनट बाद रूही तीन बार झाड़ चुकी थी.
रोहन ने पलटा दिया – घोड़ी बना दिया.
उसने रूही की गांड पे थप्पड़ मारा और लुंड गांड में सेट किया.
रूही घबरा गयी:
“भैया… गांड में नहीं… प्लीज…”
रोहन ने मुस्कुराते हुए:
“आज सुहागरात है मेरी जान… दोनों छेद मेरे.”
उसने धीरे से गांड में दाल दिया.
रूही रो पड़ी फिर चिल्लाई:
“आआह… गांड भी टूट गयी… अब ज़ोर से… तेरी बीवी की गांड भी फाड् दे!”
रोहन ने गांड मारनी शुरू कर दी – तेज़ी से.
रूही चिल्लाती रही:
“हाँ… ऐसे hi… आआह झाड़ रही हूँ मैं… गांड से भी!”
15 मिनट तक दोनों छेद मारता रहा रोहन.
आखिर में छूट में वापस दाल कर zor-zor के धक्के मारे और अंदर hi पूरा माल भर दिया.
रूही का बदन काँप उठा, उसने रोहन को जकड लिया.
रोहन ने रूही के मांग में सिन्दूर भरा, मंगलसूत्र पहनाया, चूड़ियां पहनाई.
फिर बोलै:
“अब तू मेरी बीवी है… पूरी तरह से.”
रूही ने rote-muskurate हुए बोलै:
“भैया… पति… अब से तेरी गुलाम हूँ… जब बुलाएगा आ जाउंगी… छूट हो या गांड… मुँह हो… सब तेरा.”
मेहुल और निधि ने ताली बजायी.
निधि (प्यार से):
“मुबारक हो बीटा… अब हम चार बीवियां हैं… एक पति के.”
रोहन ने तीनो को बाहों में भर लिया.
रूही अब पूरी तरह से उसकी हो चुकी थी –
दुल्हन भी, रंडी भी, बीवी भी.
सुहागरात ख़तम नहीं हुई थी…
सिर्फ शुरुआत थी.
तीनो औरतें उसकी गॉड में आयी…
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**Part 95 (कॉन्टिनोएड – रात भर का सिलसिला)**
रात के 2:30 बज रहे थे…
बीएड पर लाल चादर पूरी गीली हो चुकी थी, रोज पेटल्स idhar-udhar बिखर गए थे, कैंडल्स अभी भी जल रही थी.
रूही अभी भी काँप रही थी, उसकी छूट और गांड से माल टपक रहा था.
वह रोहन के सीने पर सर रख के सांस ले रही थी, आँखें बंद, चेहरे पर ख़ुशी और थकन.
रोहन ने रूही के बाल सहलाते हुए निधि (माँ) को देखा.
निधि कुर्सी पर बैठी थी, निघ्त्य ऊपर तक उठी हुई, हाथ अपनी छूट पर, आँखों में हवस.
रोहन (धीमी आवाज़ में):
“मम्मी… अब तेरी बारी.
आजा… अपने बेटे को दिखा की माँ कितनी गरम है अब भी.”
निधि शर्मा गयी, पर उसने धीरे से निघ्त्य उतर दी.
उसके bade-bade मुम्मे अभी भी टाइट, निप्पल्स खड़े हुए.
वह बीएड पर चढ़ गयी, रोहन के बगल में लेट गयी.
रोहन ने माँ को पलटा दिया, घोड़ी बना दिया और उसकी गांड पर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा.
निधि की सिसकी निकली:
“आआह… बीटा… माँ की गांड अब भी टाइट है… छोड़ दे आज फिर से.”
रोहन ने लुंड (जो अभी भी गीला और सख्त था) माँ की गांड में एक hi धक्के में पेल दिया.
निधि की चीख निकली:
“आआआह… हाय… कितना मोटा हो गया है तेरा… माँ की गांड फोड़ दे आज!”
रोहन ने तेज़ी से गांड मारनी शुरू कर दी – thap-thap-thap-thap…
माँ के बड़े हिप्स हर धक्के से हिल रहे थे.
निधि चिल्लाई:
“हाँ बीटा… ज़ोर से… तेरी माँ की गांड में आज पूरा माल भर दे…
आआह… झाड़ रही हूँ मैं… फिर से!”
रूही साइड में लेती देख रही थी, उसने माँ का हाथ पकड़ लिया और मम्मी के मुम्मे दबाने लगी.
मेहुल भी अब बीएड पर आ गयी, रोहन के गोटियों को मुँह में ले लिया.
5 मिनट में निधि तीन बार झाड़ चुकी थी.
रोहन ने स्पीड और बढ़ा दी और माँ की गांड के अंदर hi garam-garam माल छोड़ दिया.
निधि का बदन ढीला पद गया, वह पलंग पर गिर पड़ी, सांस फूलती हुई.
रोहन ने माँ को सीधा किया, उसके माथे पे किश की और बोलै:
“मम्मी… अब तू भी हर रात मेरे पास सोयेगी… समझी?”
निधि ने शर्मा के सर हिला दिया:
“हाँ मेरा पति… अब तेरी माँ तेरी सबसे बड़ी रंडी है.”
फिर रोहन ने रूही को फिर से खींच लिया.
रोहन (रूही के कान में):
“अब तेरी बारी फिर से, मेरी नयी बीवी…
अबकी बार ऊपर चढ़ के दिखा कितनी चुड़क्कड़ है तू.”
रूही ने मुस्कुराते हुए रोहन के ऊपर चढ़ गयी, लुंड को हाथ से पकड़ कर अपनी गीली छूट में दाल लिया और तेज़ी से उछलने लगी.
चूड़ियां खनक रही थी, मेहँदी वाले हाथ रोहन की छाती पर,
रूही चिल्लाई:
“आआह भैया… पति… अब रोज़ छोड़ना मुझे…
तेरी छोटी बीवी को हमेशा भर के रखना… आआह झाड़ रही हूँ मैं!”
रोहन नीचे से धक्के मार रहा था, मेहुल और निधि दोनों रूही के मुम्मों को चूस रहे थे.
रूही 4 बार झाड़ गयी, उसका पानी रोहन के लुंड पर टपक रहा था.
आखिर में रोहन ने रूही को नीचे लिटाया, मिशनरी में दाल कर zor-zor के धक्के मारे और उसकी छूट में दोबारा माल भर दिया.
रूही ज़ोर से चीख पड़ी:
“आआह… भैया… अब पूरा भर दिया तूने… अब से रोज़ ऐसे hi भरना… तेरी बीवी बन गयी हूँ मैं!”
सुबह के 5 बज गए थे…
चार बदन एक दुसरे में लिपटे हुए सो गए.
बीएड पर:
- रूही (नयी दुल्हन) रोहन के सीने पर,
- निधि (माँ) रोहन के दाएं तरफ,
- मेहुल रोहन के बाएं तरफ.
घर में अब कोई राज़ नहीं बचा था…
सिर्फ प्यार, हवस और एक hi मालिकिन – रोहन.
यह सिर्फ पहली सुहागरात थी…
अब हर रात सुहागरात होने वाली थी.
Part 94 – रूही की सुहागरात की तयारी
आज शाम के 7 बज रहे थे.
रूही के पीरियड आज ऑफिशियली ख़तम हो चुके थे – कल रात उसकी सुहागरात होने वाली थी.
घर में एक खास माहौल था: मेहुल और निधि (माँ) को सब पता था, और वह खुद hi तयारी में लगी हुई थी.
पहले निधि ने रूही को अपने कमरे में बुलाया.
उसने एक बड़ा सा लाल ब्राइडल लेहेंगा निकाला – हैवी एम्ब्रायडरी वाला, जिसमे गोल्ड का काम था, और मैचिंग जेवेलरी सेट.
निधि (प्यार से रूही के बाल सहलाते हुए):
“बेटी… कल रात तेरी सुहागरात है.
यह लेहेंगा पेहेन कर तू बिलकुल दुल्हन लग्न… और अपने भैया को इम्प्रेस कर देना.
मैं और मेहुल तैयार करेंगे तुझे – मेहँदी, सोलह श्रृंगार, सब कुछ.”
रूही शर्मा गयी, आँखें नीचे कर ली,
“मम्मी… मुझे दर लग रहा है… पहली बार होगी न…”
निधि ने उसको गले लगाया,
“दर मत बीटा… तेरा भैया तुझे बहुत प्यार करेगा.
वह इतना वाइल्ड और केयरिंग है… तू ज़िन्दगी भर याद रखेगी.
और अगर कुछ दर्द हो तो बता देना… हम सब तेरी मदद करेंगे.”
तभी मेहुल अंदर आयी, हाथ में मेहँदी की थाली लिए.
उसने रूही को बैठाया और उसके हाथों और पैरों पे इंटरसाते मेहँदी लगनी शुरू कर दी – फ्लोरल दसिग्नस, और बीच में “र” और “र” लिखा (रोहन और रूही के लिए).
मेहुल (मुस्कुराते हुए):
“रूही… कल रात भैया तुझे सजायेंगे… तेरी सील तोड़ने के बाद तू पूरी तरह से उनकी बीवी बन जाएगी.
मैं और मम्मी भी वहां रहेंगे अगर ज़रुरत पड़ी… जैसे हमने अपनी तयारी में किया था.
तेरी छूट को पहली बार इतना प्यार मिलेगा की तू चिल्लायेगी ख़ुशी से.”
रूही की चीक्स लाल हो गयी, वह मेहँदी लगवाते हुए बोली,
“दीदी… सच में? मम्मी भी आओगी?”
निधि ने हाँ में सर हिलाया,
“हाँ बीटा… अब घर में सब एक हैं.
तेरी सुहागरात पूरी फॅमिली अफेयर होगी… सेफ और मज़ेदार.”
तयारी चलती रही:
- निधि ने रूही को वैक्सिंग करवाई – पूरी बॉडी स्मूथ कर दी, खास कर छूट और गांड के aas-paas.
- मेहुल ने मेकअप प्रैक्टिस की – रेड लिपस्टिक, कोहल, बिंदी, और सिन्दूर का डब्बा रेडी रखा (कल रोहन खुद लगाएगा).
- रूम को सजाया गया: लाल शीट्स, रोज पेटल्स, डिम लाइट्स, और एक बड़ा मिरर बीएड के सामने ताकि सब एक्शन देख सके.
रात को डिनर के बाद रोहन रूही के कमरे में आया.
सब तयारी देख कर मुस्कुराया.
रोहन (रूही को गॉड में उठा कर):
“मेरी जान… तयारी पूरी है?
रात 12 बजे मैं आऊंगा… तुझे नंगा करूँगा, मेहँदी वाले हाथों से मेरा लुंड पकड़वायुंगा…
फिर तेरी छूट में पहली बार डालूंगा… dhire-dhire सील तोडूंगा… फिर वाइल्ड बन जाऊंगा.
तेरी गांड भी मारूंगा… और मम्मी और दीदी साइड में बैठे देखेंगी की उनकी छोटी बेटी कितनी चुड़क्कड़ है.”
रूही ने शर्मा के उसके सीने में मुँह छुपा लिया,
“भैया… अब दिल धड़क रहा है… जल्दी कल आ जाये.”
मेहुल और निधि साइड में कड़ी मुस्कुरा रही थी.
निधि ने बोलै:
“बीटा… हम सब तेरी ख़ुशी के लिए हैं.
कल रात घर में सिर्फ प्यार और मस्ती होगी.”
रोहन ने रूही को किश किया और गया – अब सिर्फ काउंटडाउन था.
कल रात रूही की ज़िन्दगी बदल जाएगी…
एक बहिन से बीवी, रंडी और गुलाम बन कर.
घर अब पूरा रोहन का था – और सुहागरात सिर्फ शुरुआत थी.
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**Part 95 – रूही की सुहागरात**
रात के 11:55 बज रहे थे.
घर में बिलकुल सन्नाटा था, सिर्फ एक कमरे से halki-halki सितार की आवाज़ आ रही थी.
रूही का कमरा पूरा सजाया गया था:
- लाल रोजेज की पट्टी बिछी हुई,
- चरों तरफ कैंडल्स,
- बीएड पर लाल सिल्क शीट,
- बड़े मिरर के सामने एक छोटा सा पूजा का थाल – सिन्दूर, मंगलसूत्र, चूड़ियां.
रूही बिलकुल दुल्हन बानी बैठी थी:
- भारी लाल लेहेंगा, गोल्ड जारी का काम,
- गहरा बैकलेस ब्लाउज,
- मांग में सिन्दूर की लाइन (मेहुल ने पहले से hi लगा दी थी),
- haathon-pairon में ालता और मेहँदी,
- गले में मंगलसूत्र,
- चूड़ियां खनक रही थी,
- आँखों में काजल, होंठों पे लाल लिपस्टिक,
- और अंदर – कुछ भी नहीं.
मेहुल और निधि (माँ) भी कमरे में थी – दोनों सिल्क निघ्त्य में, साइड में कुर्सियों पर बैठी, मुस्कुरा रही थी.
Tik-tik… 12 बज गए.
दरवाज़ा खुला.
रोहन अंदर आया – शेरवानी पहने, बिलकुल दूल्हा लग रहा था.
उसने दरवाज़ा अंदर से लॉक किया.
रोहन ने रूही को ऊपर से नीचे तक देखा, आँखों में हवस और प्यार दोनों.
रोहन (धीमी आवाज़ में):
“मेरी दुल्हन… मेरी रूही… आज से तू मेरी बीवी है.”
रूही शर्मा के कड़ी हो गयी, घूँघट नीचे किया हुआ.
रोहन उसके पास गया, घूँघट धीरे से उठाया, रूही के होंठों पे एक लम्बी किश की.
फिर उसने रूही को गॉड में उठाया और बीएड पर लेटाया.
मेहुल और निधि मुस्कुरा रही थी, निधि ने धीमे से बोलै:
“बीटा… अब शुरू कर… तेरी छोटी बीवी इंतज़ार कर रही है.”
रोहन ने अपनी शेरवानी उतरी, बिलकुल नंगा हो गया.
लुंड पूरा खड़ा, टोपा लाल और मोटा.
रूही ने पहली बार इतना बड़ा लुंड बिलकुल पास से देखा – उसकी आँखें बड़ी हो गयी, सांस तेज़.
रोहन बीएड पर चढ़ गया, रूही के ऊपर.
उसने रूही का लेहेंगा dheere-dheere ऊपर उठाया – नीचे कुछ नहीं था, छूट बिलकुल साफ़ और गीली चमक रही थी.
रोहन ने रूही की टाँगे चौड़ी की, लुंड छूट पे रगड़ा.
रूही (कांपती आवाज़ में):
“भैया… डर लग रहा है… बहुत बड़ा है…”
रोहन ने उसके कान में गुंजडा:
“शठ… मेरी जान… पहले प्यार से डालूंगा… फिर वाइल्ड बनूँगा.”
उसने टोपा छूट के मुँह पर सेट किया और dheere-dheere धकेला.
रूही की चीख निकली:
“ाआअह… भैया… दर्द… आआह…”
रोहन रुक गया, रूही के होंठों को चूसने लगा, मुम्मों को दबाने लगा.
फिर दोबारा dheere-dheere अंदर धकेलने लगा.
आधा लुंड अंदर गया तो रूही के आंसू निकल आये,
“आआह… सील टूट गयी… भैया… अब पूरा दाल दो…”
रोहन ने एक ज़ोर का धक्का मारा – पूरा लुंड अंदर तक.
रूही की लम्बी चीख निकली:
“आआआआअह्ह्ह्हह… माँ… पहात गयी… भैया… अब छोड़ दो मुझे!”
रोहन ने स्पीड पकड़ ली – धीरे से शुरू किया, फिर तेज़ी से.
Thap-thap-thap-thap…
बीएड हिलने लगा, चूड़ियां खनकने लगी.
रूही के मुँह से अब मज़ा निकलने लगा:
“आआह… भैया… कितना मज़ा आ रहा है… ज़ोर से… तेरी बीवी की छूट फाड् दे!”
मेहुल और निधि साइड में बैठी देख रही थी, दोनों की निघ्त्य के अंदर हाथ चल रहे थे.
10 मिनट बाद रूही तीन बार झाड़ चुकी थी.
रोहन ने पलटा दिया – घोड़ी बना दिया.
उसने रूही की गांड पे थप्पड़ मारा और लुंड गांड में सेट किया.
रूही घबरा गयी:
“भैया… गांड में नहीं… प्लीज…”
रोहन ने मुस्कुराते हुए:
“आज सुहागरात है मेरी जान… दोनों छेद मेरे.”
उसने धीरे से गांड में दाल दिया.
रूही रो पड़ी फिर चिल्लाई:
“आआह… गांड भी टूट गयी… अब ज़ोर से… तेरी बीवी की गांड भी फाड् दे!”
रोहन ने गांड मारनी शुरू कर दी – तेज़ी से.
रूही चिल्लाती रही:
“हाँ… ऐसे hi… आआह झाड़ रही हूँ मैं… गांड से भी!”
15 मिनट तक दोनों छेद मारता रहा रोहन.
आखिर में छूट में वापस दाल कर zor-zor के धक्के मारे और अंदर hi पूरा माल भर दिया.
रूही का बदन काँप उठा, उसने रोहन को जकड लिया.
रोहन ने रूही के मांग में सिन्दूर भरा, मंगलसूत्र पहनाया, चूड़ियां पहनाई.
फिर बोलै:
“अब तू मेरी बीवी है… पूरी तरह से.”
रूही ने rote-muskurate हुए बोलै:
“भैया… पति… अब से तेरी गुलाम हूँ… जब बुलाएगा आ जाउंगी… छूट हो या गांड… मुँह हो… सब तेरा.”
मेहुल और निधि ने ताली बजायी.
निधि (प्यार से):
“मुबारक हो बीटा… अब हम चार बीवियां हैं… एक पति के.”
रोहन ने तीनो को बाहों में भर लिया.
रूही अब पूरी तरह से उसकी हो चुकी थी –
दुल्हन भी, रंडी भी, बीवी भी.
सुहागरात ख़तम नहीं हुई थी…
सिर्फ शुरुआत थी.
तीनो औरतें उसकी गॉड में आयी…
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**Part 95 (कॉन्टिनोएड – रात भर का सिलसिला)**
रात के 2:30 बज रहे थे…
बीएड पर लाल चादर पूरी गीली हो चुकी थी, रोज पेटल्स idhar-udhar बिखर गए थे, कैंडल्स अभी भी जल रही थी.
रूही अभी भी काँप रही थी, उसकी छूट और गांड से माल टपक रहा था.
वह रोहन के सीने पर सर रख के सांस ले रही थी, आँखें बंद, चेहरे पर ख़ुशी और थकन.
रोहन ने रूही के बाल सहलाते हुए निधि (माँ) को देखा.
निधि कुर्सी पर बैठी थी, निघ्त्य ऊपर तक उठी हुई, हाथ अपनी छूट पर, आँखों में हवस.
रोहन (धीमी आवाज़ में):
“मम्मी… अब तेरी बारी.
आजा… अपने बेटे को दिखा की माँ कितनी गरम है अब भी.”
निधि शर्मा गयी, पर उसने धीरे से निघ्त्य उतर दी.
उसके bade-bade मुम्मे अभी भी टाइट, निप्पल्स खड़े हुए.
वह बीएड पर चढ़ गयी, रोहन के बगल में लेट गयी.
रोहन ने माँ को पलटा दिया, घोड़ी बना दिया और उसकी गांड पर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा.
निधि की सिसकी निकली:
“आआह… बीटा… माँ की गांड अब भी टाइट है… छोड़ दे आज फिर से.”
रोहन ने लुंड (जो अभी भी गीला और सख्त था) माँ की गांड में एक hi धक्के में पेल दिया.
निधि की चीख निकली:
“आआआह… हाय… कितना मोटा हो गया है तेरा… माँ की गांड फोड़ दे आज!”
रोहन ने तेज़ी से गांड मारनी शुरू कर दी – thap-thap-thap-thap…
माँ के बड़े हिप्स हर धक्के से हिल रहे थे.
निधि चिल्लाई:
“हाँ बीटा… ज़ोर से… तेरी माँ की गांड में आज पूरा माल भर दे…
आआह… झाड़ रही हूँ मैं… फिर से!”
रूही साइड में लेती देख रही थी, उसने माँ का हाथ पकड़ लिया और मम्मी के मुम्मे दबाने लगी.
मेहुल भी अब बीएड पर आ गयी, रोहन के गोटियों को मुँह में ले लिया.
5 मिनट में निधि तीन बार झाड़ चुकी थी.
रोहन ने स्पीड और बढ़ा दी और माँ की गांड के अंदर hi garam-garam माल छोड़ दिया.
निधि का बदन ढीला पद गया, वह पलंग पर गिर पड़ी, सांस फूलती हुई.
रोहन ने माँ को सीधा किया, उसके माथे पे किश की और बोलै:
“मम्मी… अब तू भी हर रात मेरे पास सोयेगी… समझी?”
निधि ने शर्मा के सर हिला दिया:
“हाँ मेरा पति… अब तेरी माँ तेरी सबसे बड़ी रंडी है.”
फिर रोहन ने रूही को फिर से खींच लिया.
रोहन (रूही के कान में):
“अब तेरी बारी फिर से, मेरी नयी बीवी…
अबकी बार ऊपर चढ़ के दिखा कितनी चुड़क्कड़ है तू.”
रूही ने मुस्कुराते हुए रोहन के ऊपर चढ़ गयी, लुंड को हाथ से पकड़ कर अपनी गीली छूट में दाल लिया और तेज़ी से उछलने लगी.
चूड़ियां खनक रही थी, मेहँदी वाले हाथ रोहन की छाती पर,
रूही चिल्लाई:
“आआह भैया… पति… अब रोज़ छोड़ना मुझे…
तेरी छोटी बीवी को हमेशा भर के रखना… आआह झाड़ रही हूँ मैं!”
रोहन नीचे से धक्के मार रहा था, मेहुल और निधि दोनों रूही के मुम्मों को चूस रहे थे.
रूही 4 बार झाड़ गयी, उसका पानी रोहन के लुंड पर टपक रहा था.
आखिर में रोहन ने रूही को नीचे लिटाया, मिशनरी में दाल कर zor-zor के धक्के मारे और उसकी छूट में दोबारा माल भर दिया.
रूही ज़ोर से चीख पड़ी:
“आआह… भैया… अब पूरा भर दिया तूने… अब से रोज़ ऐसे hi भरना… तेरी बीवी बन गयी हूँ मैं!”
सुबह के 5 बज गए थे…
चार बदन एक दुसरे में लिपटे हुए सो गए.
बीएड पर:
- रूही (नयी दुल्हन) रोहन के सीने पर,
- निधि (माँ) रोहन के दाएं तरफ,
- मेहुल रोहन के बाएं तरफ.
घर में अब कोई राज़ नहीं बचा था…
सिर्फ प्यार, हवस और एक hi मालिकिन – रोहन.
यह सिर्फ पहली सुहागरात थी…
अब हर रात सुहागरात होने वाली थी.