Incest Story - Didi Ki Chinta - Page 12 - SexBaba
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Incest Story - Didi Ki Chinta

Part 94

Part 94 – रूही की सुहागरात की तयारी

आज शाम के 7 बज रहे थे.

रूही के पीरियड आज ऑफिशियली ख़तम हो चुके थे – कल रात उसकी सुहागरात होने वाली थी.

घर में एक खास माहौल था: मेहुल और निधि (माँ) को सब पता था, और वह खुद hi तयारी में लगी हुई थी.

पहले निधि ने रूही को अपने कमरे में बुलाया.

उसने एक बड़ा सा लाल ब्राइडल लेहेंगा निकाला – हैवी एम्ब्रायडरी वाला, जिसमे गोल्ड का काम था, और मैचिंग जेवेलरी सेट.

निधि (प्यार से रूही के बाल सहलाते हुए):

“बेटी… कल रात तेरी सुहागरात है.

यह लेहेंगा पेहेन कर तू बिलकुल दुल्हन लग्न… और अपने भैया को इम्प्रेस कर देना.

मैं और मेहुल तैयार करेंगे तुझे – मेहँदी, सोलह श्रृंगार, सब कुछ.”

रूही शर्मा गयी, आँखें नीचे कर ली,

“मम्मी… मुझे दर लग रहा है… पहली बार होगी न…”

निधि ने उसको गले लगाया,

“दर मत बीटा… तेरा भैया तुझे बहुत प्यार करेगा.

वह इतना वाइल्ड और केयरिंग है… तू ज़िन्दगी भर याद रखेगी.

और अगर कुछ दर्द हो तो बता देना… हम सब तेरी मदद करेंगे.”

तभी मेहुल अंदर आयी, हाथ में मेहँदी की थाली लिए.

उसने रूही को बैठाया और उसके हाथों और पैरों पे इंटरसाते मेहँदी लगनी शुरू कर दी – फ्लोरल दसिग्नस, और बीच में “र” और “र” लिखा (रोहन और रूही के लिए).

मेहुल (मुस्कुराते हुए):

“रूही… कल रात भैया तुझे सजायेंगे… तेरी सील तोड़ने के बाद तू पूरी तरह से उनकी बीवी बन जाएगी.

मैं और मम्मी भी वहां रहेंगे अगर ज़रुरत पड़ी… जैसे हमने अपनी तयारी में किया था.

तेरी छूट को पहली बार इतना प्यार मिलेगा की तू चिल्लायेगी ख़ुशी से.”

रूही की चीक्स लाल हो गयी, वह मेहँदी लगवाते हुए बोली,

“दीदी… सच में? मम्मी भी आओगी?”

निधि ने हाँ में सर हिलाया,

“हाँ बीटा… अब घर में सब एक हैं.

तेरी सुहागरात पूरी फॅमिली अफेयर होगी… सेफ और मज़ेदार.”

तयारी चलती रही:

- निधि ने रूही को वैक्सिंग करवाई – पूरी बॉडी स्मूथ कर दी, खास कर छूट और गांड के aas-paas.

- मेहुल ने मेकअप प्रैक्टिस की – रेड लिपस्टिक, कोहल, बिंदी, और सिन्दूर का डब्बा रेडी रखा (कल रोहन खुद लगाएगा).

- रूम को सजाया गया: लाल शीट्स, रोज पेटल्स, डिम लाइट्स, और एक बड़ा मिरर बीएड के सामने ताकि सब एक्शन देख सके.

रात को डिनर के बाद रोहन रूही के कमरे में आया.

सब तयारी देख कर मुस्कुराया.

रोहन (रूही को गॉड में उठा कर):

“मेरी जान… तयारी पूरी है?

रात 12 बजे मैं आऊंगा… तुझे नंगा करूँगा, मेहँदी वाले हाथों से मेरा लुंड पकड़वायुंगा…

फिर तेरी छूट में पहली बार डालूंगा… dhire-dhire सील तोडूंगा… फिर वाइल्ड बन जाऊंगा.

तेरी गांड भी मारूंगा… और मम्मी और दीदी साइड में बैठे देखेंगी की उनकी छोटी बेटी कितनी चुड़क्कड़ है.”

रूही ने शर्मा के उसके सीने में मुँह छुपा लिया,

“भैया… अब दिल धड़क रहा है… जल्दी कल आ जाये.”

मेहुल और निधि साइड में कड़ी मुस्कुरा रही थी.

निधि ने बोलै:

“बीटा… हम सब तेरी ख़ुशी के लिए हैं.

कल रात घर में सिर्फ प्यार और मस्ती होगी.”

रोहन ने रूही को किश किया और गया – अब सिर्फ काउंटडाउन था.

कल रात रूही की ज़िन्दगी बदल जाएगी…

एक बहिन से बीवी, रंडी और गुलाम बन कर.

घर अब पूरा रोहन का था – और सुहागरात सिर्फ शुरुआत थी.

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**Part 95 – रूही की सुहागरात**

रात के 11:55 बज रहे थे.

घर में बिलकुल सन्नाटा था, सिर्फ एक कमरे से halki-halki सितार की आवाज़ आ रही थी.

रूही का कमरा पूरा सजाया गया था:

- लाल रोजेज की पट्टी बिछी हुई,

- चरों तरफ कैंडल्स,

- बीएड पर लाल सिल्क शीट,

- बड़े मिरर के सामने एक छोटा सा पूजा का थाल – सिन्दूर, मंगलसूत्र, चूड़ियां.

रूही बिलकुल दुल्हन बानी बैठी थी:

- भारी लाल लेहेंगा, गोल्ड जारी का काम,

- गहरा बैकलेस ब्लाउज,

- मांग में सिन्दूर की लाइन (मेहुल ने पहले से hi लगा दी थी),

- haathon-pairon में ालता और मेहँदी,

- गले में मंगलसूत्र,

- चूड़ियां खनक रही थी,

- आँखों में काजल, होंठों पे लाल लिपस्टिक,

- और अंदर – कुछ भी नहीं.

मेहुल और निधि (माँ) भी कमरे में थी – दोनों सिल्क निघ्त्य में, साइड में कुर्सियों पर बैठी, मुस्कुरा रही थी.

Tik-tik… 12 बज गए.

दरवाज़ा खुला.

रोहन अंदर आया – शेरवानी पहने, बिलकुल दूल्हा लग रहा था.

उसने दरवाज़ा अंदर से लॉक किया.

रोहन ने रूही को ऊपर से नीचे तक देखा, आँखों में हवस और प्यार दोनों.

रोहन (धीमी आवाज़ में):

“मेरी दुल्हन… मेरी रूही… आज से तू मेरी बीवी है.”

रूही शर्मा के कड़ी हो गयी, घूँघट नीचे किया हुआ.

रोहन उसके पास गया, घूँघट धीरे से उठाया, रूही के होंठों पे एक लम्बी किश की.

फिर उसने रूही को गॉड में उठाया और बीएड पर लेटाया.

मेहुल और निधि मुस्कुरा रही थी, निधि ने धीमे से बोलै:

“बीटा… अब शुरू कर… तेरी छोटी बीवी इंतज़ार कर रही है.”

रोहन ने अपनी शेरवानी उतरी, बिलकुल नंगा हो गया.

लुंड पूरा खड़ा, टोपा लाल और मोटा.

रूही ने पहली बार इतना बड़ा लुंड बिलकुल पास से देखा – उसकी आँखें बड़ी हो गयी, सांस तेज़.

रोहन बीएड पर चढ़ गया, रूही के ऊपर.

उसने रूही का लेहेंगा dheere-dheere ऊपर उठाया – नीचे कुछ नहीं था, छूट बिलकुल साफ़ और गीली चमक रही थी.

रोहन ने रूही की टाँगे चौड़ी की, लुंड छूट पे रगड़ा.

रूही (कांपती आवाज़ में):

“भैया… डर लग रहा है… बहुत बड़ा है…”

रोहन ने उसके कान में गुंजडा:

“शठ… मेरी जान… पहले प्यार से डालूंगा… फिर वाइल्ड बनूँगा.”

उसने टोपा छूट के मुँह पर सेट किया और dheere-dheere धकेला.

रूही की चीख निकली:

“ाआअह… भैया… दर्द… आआह…”

रोहन रुक गया, रूही के होंठों को चूसने लगा, मुम्मों को दबाने लगा.

फिर दोबारा dheere-dheere अंदर धकेलने लगा.

आधा लुंड अंदर गया तो रूही के आंसू निकल आये,

“आआह… सील टूट गयी… भैया… अब पूरा दाल दो…”

रोहन ने एक ज़ोर का धक्का मारा – पूरा लुंड अंदर तक.

रूही की लम्बी चीख निकली:

“आआआआअह्ह्ह्हह… माँ… पहात गयी… भैया… अब छोड़ दो मुझे!”

रोहन ने स्पीड पकड़ ली – धीरे से शुरू किया, फिर तेज़ी से.

Thap-thap-thap-thap…

बीएड हिलने लगा, चूड़ियां खनकने लगी.

रूही के मुँह से अब मज़ा निकलने लगा:

“आआह… भैया… कितना मज़ा आ रहा है… ज़ोर से… तेरी बीवी की छूट फाड् दे!”

मेहुल और निधि साइड में बैठी देख रही थी, दोनों की निघ्त्य के अंदर हाथ चल रहे थे.

10 मिनट बाद रूही तीन बार झाड़ चुकी थी.

रोहन ने पलटा दिया – घोड़ी बना दिया.

उसने रूही की गांड पे थप्पड़ मारा और लुंड गांड में सेट किया.

रूही घबरा गयी:

“भैया… गांड में नहीं… प्लीज…”

रोहन ने मुस्कुराते हुए:

“आज सुहागरात है मेरी जान… दोनों छेद मेरे.”

उसने धीरे से गांड में दाल दिया.

रूही रो पड़ी फिर चिल्लाई:

“आआह… गांड भी टूट गयी… अब ज़ोर से… तेरी बीवी की गांड भी फाड् दे!”

रोहन ने गांड मारनी शुरू कर दी – तेज़ी से.

रूही चिल्लाती रही:

“हाँ… ऐसे hi… आआह झाड़ रही हूँ मैं… गांड से भी!”

15 मिनट तक दोनों छेद मारता रहा रोहन.

आखिर में छूट में वापस दाल कर zor-zor के धक्के मारे और अंदर hi पूरा माल भर दिया.

रूही का बदन काँप उठा, उसने रोहन को जकड लिया.

रोहन ने रूही के मांग में सिन्दूर भरा, मंगलसूत्र पहनाया, चूड़ियां पहनाई.

फिर बोलै:

“अब तू मेरी बीवी है… पूरी तरह से.”

रूही ने rote-muskurate हुए बोलै:

“भैया… पति… अब से तेरी गुलाम हूँ… जब बुलाएगा आ जाउंगी… छूट हो या गांड… मुँह हो… सब तेरा.”

मेहुल और निधि ने ताली बजायी.

निधि (प्यार से):

“मुबारक हो बीटा… अब हम चार बीवियां हैं… एक पति के.”

रोहन ने तीनो को बाहों में भर लिया.

रूही अब पूरी तरह से उसकी हो चुकी थी –

दुल्हन भी, रंडी भी, बीवी भी.

सुहागरात ख़तम नहीं हुई थी…

सिर्फ शुरुआत थी.

तीनो औरतें उसकी गॉड में आयी…

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**Part 95 (कॉन्टिनोएड – रात भर का सिलसिला)**

रात के 2:30 बज रहे थे…

बीएड पर लाल चादर पूरी गीली हो चुकी थी, रोज पेटल्स idhar-udhar बिखर गए थे, कैंडल्स अभी भी जल रही थी.

रूही अभी भी काँप रही थी, उसकी छूट और गांड से माल टपक रहा था.

वह रोहन के सीने पर सर रख के सांस ले रही थी, आँखें बंद, चेहरे पर ख़ुशी और थकन.

रोहन ने रूही के बाल सहलाते हुए निधि (माँ) को देखा.

निधि कुर्सी पर बैठी थी, निघ्त्य ऊपर तक उठी हुई, हाथ अपनी छूट पर, आँखों में हवस.

रोहन (धीमी आवाज़ में):

“मम्मी… अब तेरी बारी.

आजा… अपने बेटे को दिखा की माँ कितनी गरम है अब भी.”

निधि शर्मा गयी, पर उसने धीरे से निघ्त्य उतर दी.

उसके bade-bade मुम्मे अभी भी टाइट, निप्पल्स खड़े हुए.

वह बीएड पर चढ़ गयी, रोहन के बगल में लेट गयी.

रोहन ने माँ को पलटा दिया, घोड़ी बना दिया और उसकी गांड पर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा.

निधि की सिसकी निकली:

“आआह… बीटा… माँ की गांड अब भी टाइट है… छोड़ दे आज फिर से.”

रोहन ने लुंड (जो अभी भी गीला और सख्त था) माँ की गांड में एक hi धक्के में पेल दिया.

निधि की चीख निकली:

“आआआह… हाय… कितना मोटा हो गया है तेरा… माँ की गांड फोड़ दे आज!”

रोहन ने तेज़ी से गांड मारनी शुरू कर दी – thap-thap-thap-thap…

माँ के बड़े हिप्स हर धक्के से हिल रहे थे.

निधि चिल्लाई:

“हाँ बीटा… ज़ोर से… तेरी माँ की गांड में आज पूरा माल भर दे…

आआह… झाड़ रही हूँ मैं… फिर से!”

रूही साइड में लेती देख रही थी, उसने माँ का हाथ पकड़ लिया और मम्मी के मुम्मे दबाने लगी.

मेहुल भी अब बीएड पर आ गयी, रोहन के गोटियों को मुँह में ले लिया.

5 मिनट में निधि तीन बार झाड़ चुकी थी.

रोहन ने स्पीड और बढ़ा दी और माँ की गांड के अंदर hi garam-garam माल छोड़ दिया.

निधि का बदन ढीला पद गया, वह पलंग पर गिर पड़ी, सांस फूलती हुई.

रोहन ने माँ को सीधा किया, उसके माथे पे किश की और बोलै:

“मम्मी… अब तू भी हर रात मेरे पास सोयेगी… समझी?”

निधि ने शर्मा के सर हिला दिया:

“हाँ मेरा पति… अब तेरी माँ तेरी सबसे बड़ी रंडी है.”

फिर रोहन ने रूही को फिर से खींच लिया.

रोहन (रूही के कान में):

“अब तेरी बारी फिर से, मेरी नयी बीवी…

अबकी बार ऊपर चढ़ के दिखा कितनी चुड़क्कड़ है तू.”

रूही ने मुस्कुराते हुए रोहन के ऊपर चढ़ गयी, लुंड को हाथ से पकड़ कर अपनी गीली छूट में दाल लिया और तेज़ी से उछलने लगी.

चूड़ियां खनक रही थी, मेहँदी वाले हाथ रोहन की छाती पर,

रूही चिल्लाई:

“आआह भैया… पति… अब रोज़ छोड़ना मुझे…

तेरी छोटी बीवी को हमेशा भर के रखना… आआह झाड़ रही हूँ मैं!”

रोहन नीचे से धक्के मार रहा था, मेहुल और निधि दोनों रूही के मुम्मों को चूस रहे थे.

रूही 4 बार झाड़ गयी, उसका पानी रोहन के लुंड पर टपक रहा था.

आखिर में रोहन ने रूही को नीचे लिटाया, मिशनरी में दाल कर zor-zor के धक्के मारे और उसकी छूट में दोबारा माल भर दिया.

रूही ज़ोर से चीख पड़ी:

“आआह… भैया… अब पूरा भर दिया तूने… अब से रोज़ ऐसे hi भरना… तेरी बीवी बन गयी हूँ मैं!”

सुबह के 5 बज गए थे…

चार बदन एक दुसरे में लिपटे हुए सो गए.

बीएड पर:

- रूही (नयी दुल्हन) रोहन के सीने पर,

- निधि (माँ) रोहन के दाएं तरफ,

- मेहुल रोहन के बाएं तरफ.

घर में अब कोई राज़ नहीं बचा था…

सिर्फ प्यार, हवस और एक hi मालिकिन – रोहन.

यह सिर्फ पहली सुहागरात थी…


अब हर रात सुहागरात होने वाली थी.
 
Part 95

**Part 95 – घर में बम पहात गया **

अगले दिन दोपहर के 12 बज रहे थे.

सब लोग drawing-room में बैठे थे – रोहन, मेहुल, रूही, निधि और रोहित (पापा) भी घर पर थे.

अचानक दरवाज़े की बेल्ल बजी.

एक 40-42 साल की औरत, डिज़ाइनर साड़ी में, साथ में एक 19-20 साल की जवान लड़की (गोरी, लम्बी, टाइट top-jeans में) अंदर आयी.

और सीधा बम फोड़ दिया.

सुनीता (तेज़ आवाज़ में):

“रोहित जी… नमस्ते.

यह मानसी है… आपकी बेटी.

आपके और मेरे ऑफिस अफेयर की निशानी.”

सब के मुँह खुले रह गए.

रोहित एकदम से खड़ा हो गया, चेहरा लाल:

“क्या बकवास कर रही हो सुनीता?

यह झूठ है! मैं किसी से अफेयर में नहीं था!

निकल जाओ यहाँ से!”

सुनीता बिलकुल शांत रही.

उसने अपना पर्स खोला, एक फाइल निकली और रोहित के सामने रख दी.

सुनीता (ठंडी मुस्कान के साथ):

“झूठ?

यह लो… डीएनए रिपोर्ट.

मानसी का और आपका.

99.99% मैच.

गोवा ट्रिप के 4 साल बाद का रिजल्ट है.”

रोहित ने हाथ कांपते हुए रिपोर्ट उठायी.

Padhte-padhte उसका चेहरा सफ़ेद पद गया.

निधि के मुँह से सिर्फ एक सिसकी निकली.

मेहुल, रूही हैरान.

रोहन chup-chaap देख रहा था.

रोहित (हकलाते हुए):

“यह… यह… गलत होगा… फेक होगा…”

सुनीता ने एक और कॉपी निकाल कर टेबल पर फ़ेंक दी:

“फेक?

दो alag-alag लैब्स से करवाया है मैंने.

अब मन करने से क्या फायदा?

मानसी आपकी सगी बेटी है… और अब हम दोनों को इस घर में रहने का पूरा हक़ है.”

रोहित के घुटने लड़खड़ाए, वह सोफे पर धन से बैठ गया.

उसने सर पकड़ लिया:

“सॉरी निधि… सॉरी सबको… गलती हो गयी थी…”

निधि रो पड़ी और अपने कमरे की तरफ चली गयी.

सुनीता ने मानसी का हाथ पकड़ा और मुस्कुराते हुए बोली:

“चलो बीटा… अब यह तुम्हारा भी घर है.

रूम दिखाओ कोई.”

मानसी ने पहले रोहन को देखा – सीढ़ी आँखों में – और हलके से स्माइल दी.

रोहन ने भी वापस स्माइल की.

घर में एक नया तमाशा शुरू हो चूका था…

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**Part 97 – घर में ठंडक**

मानसी (मनु) घर आये हुए 4 दिन हो चुके थे.

वह बहुत कोशिश कर रही थी सबसे ghulne-milne की:

- सुबह निधि के साथ किचन में हाथ बताती,

- मेहुल के साथ शॉपिंग के लिए जाती,

- रूही के साथ रील्स बनती,

- रोहित (पापा) से बातें करती, “पापा” बुलाती.

पर घर का माहौल बिलकुल ठंडा था.

निधि उससे देखते hi आँखें फेर लेती थी.

मेहुल और रूही सिर्फ “हम्म” या “हाँ” तक बात करते.

रोहित शर्मा से ज़मीन में घुस जाते.

सबसे बुरा असर रोहन पर पड़ा था.

पहले जो हर रात सुहागरात चलती थी, अब बंद हो चुकी थी.

- मेहुल और रूही apne-apne कमरों में लॉक कर के सो जाते,

- निधि भी दरवाज़ा बंद करके लेट जाती,

- रोहन रात भर अकेला लुंड हिलता रहता.

रोहन को गुस्सा आ रहा था, पर अभी कुछ बोल नहीं सकता था, क्यूंकि घर में टेंशन आलरेडी बहुत थी.

एक दिन दोपहर को रोहन अकेला drawing-room में बैठा था.

मनु (मानसी) पास आयी, उसने छोटी सी क्रॉप टॉप और शॉर्ट्स पहना था, बिलकुल कासुअल.

मनु (मासूम आवाज़ में):

“भैया… सब मुझसे नाराज़ हैं न?

मैं क्या करूँ? मैं तो बस अपना घर समझ कर आयी हूँ…”

रोहन ने उसको ऊपर से नीचे देखा – जवान बदन, बड़े मुम्मे, गोल हिप्स.

दिल में कुछ हलचल हुई, पर चेहरे पर गुस्सा था.

रोहन (ठंडी आवाज़ में):

“तूने घर में आग लगा दी है मनु.

सबकी ज़िन्दगी ख़राब कर दी.”

मनु ने आँखें नीचे कर ली, फिर धीरे से बोली:

“भैया… मैं जानती हूँ मम्मी (सुनीता) ने गलत किया…

पर मैं तो बस अपने पापा और फॅमिली के पास आना चाहती थी.

अगर सब इतने नाराज़ हैं… तो मैं चली जाउंगी.”

इतना बोल कर वह रोने लगी, आँखों में आंसू.

रोहन का दिल पिघल गया.

उसने मनु का हाथ पकड़ा और खींच कर अपनी गॉड में बिठा लिया.

रोहन (धीमे से):

“रोना बंद कर… तू मेरी छोटी बहिन है… सगी बहिन.

तू कहीं नहीं जाएगी.

जो हुआ सो हुआ… अब तू यहीं रहेगी.”

मनु ने रोहन के गले लग गयी, उसका बदन रोहन से चिपक गया.

रोहन को पहली बार उसकी गर्मी महसूस हुई – टाइट टॉप में मुम्मे डाब रहे थे, शॉर्ट्स में हिप्स उसकी जांघ पर.

रोहन के लुंड में हलचल हुई.

रोहन (दिल में):

“एक और बहिन… बिलकुल कच्ची काली…

अब इसको भी अपना बनाना है…

पर पहले घर का माहौल ठीक करना पड़ेगा.”

उसने मनु के बाल सहलाते हुए बोलै:

“तू फ़िक्र मत कर… मैं सबको समझा दूंगा.

और जो भी हुआ… अब हम सब एक फॅमिली हैं.”

मनु ने शर्मा के सर हिला दिया.

पर रोहन के दिल में एक नया प्लान बन चूका था:

- पहले घर के सबको मनाना है,

- फिर मनु को भी अपनी हराम में शामिल करना है.

खेल अभी ख़तम नहीं हुआ था…

सिर्फ थोड़ा रुक गया था.

जल्दी hi फिर से शुरू होने वाला था – और इस बार और बड़ा.

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**Part 98 – सुनीता और निधि का कोंफ्रोंटेशन (एडिटेड)**

शाम को किचन में सिर्फ दोनों औरतें थी.

सुनीता (चाय का कप हाथ में लिए, ठंडी मुस्कान के साथ):

“निधि जी… चाय एक कप मुझे भी.”

निधि ने पलट कर देखा, आँखें लाल, हाथ काँप रहे थे.

उसने कप ज़ोर से टेबल पर रखा.

निधि (तेज़ आवाज़ में):

“तुम्हे शर्म नहीं आती सुनीता?

मेरे पति के साथ अफेयर, एक बेटी पैदा की… और अब मेरे घर में आ कर बैठ गयी हो?

यह मेरा घर है… मेरा परिवार मेरा है!”

सुनीता ने धीरे से चाय पि और शांत आवाज़ में बोली:

सुनीता:

“गुस्सा अच्छा नहीं लगता आप पर, निधि जी.

हाँ, मैंने और रोहित जी ने गलती की थी… लेकिन वह भी तो पूरी तरह शामिल थे न?

गोवा ट्रिप में तीन रातें… वह भी तो मुझे रोज़ छोड़ते थे.

अब मानसी बड़ी हो गयी है… ज़िम्मेदारी उनकी भी है.

मैंने आज तक एक रूपया नहीं माँगा… अब सिर्फ अपनी बेटी का हक़ मांग रही हूँ.”

निधि के आंसू निकल आये.

निधि (रोटी हुई):

“तुमने मेरा सब कुछ चीन लिया… मेरा सुख, मेरा घर, मेरी शांति…”

सुनीता ने कप नीचे रखा, निधि के बिलकुल पास आयी और धीमी लेकिन दबंग आवाज़ में बोली:

सुनीता:

“चीन नहीं… बांटा है, निधि जी.

अब यह घर दोनों का है.

रोहित जी अब भी मुझे चाहते हैं… कल रात भी वह मेरे कमरे में आये थे… पूरा साल बाद उन्होंने मुझे छोड़ा… जैसे पुराने दिन वापस आ गए हों.

आप अकेली रह गयी होंगी… लेकिन अब आपको अकेला नहीं रहना पड़ेगा.”

निधि के बदन में झटका लगा.

निधि (कांपती आवाज़ में):

“मतलब?”

सुनीता ने निधि की कमर पर हाथ रख दिया और कान में गुंजडा दिया:

सुनीता:

“मतलब… अब घर में सब बाँट कर खुश रहेंगे.

रोहित जी दोनों को टाइम देंगे.

और आप भी… अगर चाहें तो फिर से गरम हो सकती हैं.

मानसी तो जवान है… घर में नयी ख़ुशी आएगी.

आप भी मुस्कुराने लगेंगी… बस थोड़ी सी बात समझ लो.”

निधि के होंठ काँप रहे थे.

उसने सुनीता का हाथ झटकने की कोशिश की, लेकिन हिम्मत नहीं हुई.

सुनीता ने निधि के गाल पर एक हलकी सी ऊँगली फेरी और बोली:

सुनीता:

“सोच लो निधि जी…

या तो गुस्सा करती रहो और अकेली तड़पती रहो…

या फिर हम दोनों मिलकर इस घर को फिर से खुशियों से भर दें.

मानसी आपकी बेटी जैसी hi है… अब हम सब एक हैं.”

फिर सुनीता मुस्कुराते हुए चाय ख़तम कर के निकल गयी.

निधि किचन में अकेली कड़ी रह गयी –

दिल में गुस्सा, शर्म, और एक गहरी बेचैनी.

घर का नया दौर शुरू हो चूका था…

और अब निधि को फैसला करना था –

लड़ना या साथ देना.

************************************

उस रात 1:30 बजे.

घर में सब सो रहे थे… या सोये हुए थे.

निधि अपने कमरे में अकेली बैठी थी.

Rote-rote उसकी आँखें लाल हो चुकी थी, लेकिन अब आंसू रुक गए थे.

उसके दिल में एक गहरा तूफ़ान चल रहा था –

गुस्सा, शर्म, बेइज़्ज़ती… और साथ hi एक खौफनाक खलियापन.

उसने सुनीता की बात baar-baar याद की:

“या तो अकेली तड़पती रहो… या साथ मिलकर खुश रहें.”

फिर उसने अपने बेटे रोहन को याद किया –

उसकी जवानी, उसकी दबंग आँखें, उसका बदन…

जो पहले hi उसने उसकी हर तड़प को मिटाया था.

निधि ने धीरे से अपनी अलमारी खोली.

एक लाल सिल्क निघ्त्य निकली – जो सालों से नहीं पहनी थी.

उसने नहाया, खुद को साफ़ किया, परफ्यूम लगाया, बाल खुले छोड़े,

और फिर अपने कमरे का दरवाज़ा खुला छोड़ कर…

रोहन के कमरे की तरफ चल दी.

रोहन का दरवाज़ा अंदर से बंद था, लेकिन लॉक नहीं था.

निधि ने धीरे से धक्का दिया और अंदर चली गयी.

रोहन बीएड पर नंगा लेता था, अकेला, लुंड थोड़ा खड़ा – शायद सपने में भी तड़प रहा था.

निधि बीएड के पास आयी, उसने अपनी निघ्त्य के स्ट्राप धीरे से नीचे किये…

निघ्त्य ज़मीन पर गिर गयी.

वह बिलकुल नंगी रोहन के बगल में लेट गयी, उसके सीने पर सर रख दिया और धीरे से बोलै:

निधि (कांपती लेकिन ठोस आवाज़ में):

“बीटा… अब मम्मी अकेली नहीं तडपेगी.

जो भी नया नियम है घर का… मम्मी उसको मंज़ूर करती है.

अब से तू hi इस घर का मालिक है… और मम्मी तेरी… पूरी तरह तेरी.”

रोहन की आँख खुल गयी.

उसने माँ को नंगा देखा, उसकी गर्माहट महसूस की…

और एक बड़ी सी मुस्कान चेहरे पर आ गयी.

रोहन ने माँ को पलटा, उसके ऊपर चढ़ गया और सीधा लुंड माँ की छूट में पेल दिया.

निधि की चीख निकली… फिर मज़ा लेने लगी:

“आआह… हाँ बीटा… अब से हर रात… मम्मी तेरे पास hi सोयेगी… तेरी बीवी बांके…”

रोहन ने zor-zor से धक्के मरने शुरू कर दिए.

उस रात निधि ने अपना फैसला सुना दिया –

नफरत नहीं, बल्कि पूरी तरह से समर्पण.

अब घर में दो मैं थी…

एक पुराणी, एक नयी…

और दोनों एक hi बेटे के नीचे आने वाली थी.

निधि का फैसला हो चूका था:

अब वह भी रोहन की हराम का हिस्सा थी…

और इस बार ख़ुशी से, दिल से, पूरे बदन से.



******************
 
Part 96

मानसी (मनु) घर आये हुए पांच दिन हो चुके थे, लेकिन उसका रिएक्शन बिलकुल अलग था – न गुस्सा, न शर्म, बल्कि एक छुपी हुई एक्ससिटेमेंट और क्यूरोसिटी.

पहले दिन से hi मनु सबको देख रही थी:

- निधि की उदास आँखें,

- मेहुल और रूही की दूरी,

- रोहन की ठंडी नज़र,

- पापा रोहित की शर्मिंदगी.

पर मनु के दिल में कोई गुस्सा नहीं था.

वह जानती थी मम्मी (सुनीता) ने जो किया, वह गलत था… लेकिन उसने सोचा, “अब क्या फायदा? मैं यहाँ हूँ, अपने पापा के पास, अपने bhai-behnon के साथ. अब सबको टाइम देना पड़ेगा.”

एक शाम मनु अपने नए कमरे में बैठी थी – जो पहले गेस्ट रूम था.

उसने डायरी में लिखा:

“पहले दिन शॉक था… सब मुझे देख कर चुप हो जाते हैं.

निधि आंटी (मम्मी?) मुझसे बात hi नहीं करती.

रूही और मेहुल सिर्फ ‘hi’ बोलती हैं.

पापा तो मुझसे आँख नहीं मिलते.

लेकिन रोहन भैया… उनकी नज़र अलग है. जैसे मुझे मैसूर कर रहे हों.

मम्मी ने बताया था, यह घर ‘स्पेशल’ है… शायद यहाँ सब कुछ बांटा जाता है.

मुझे दर नहीं लग रहा… एक्ससिटेमेंट हो रहा है. मैं भी इस फॅमिली का हिस्सा बनाना चाहती हूँ… जैसे भी हो.”

अगली सुबह ब्रेकफास्ट टेबल पर.

सब chup-chaap बैठे थे. मनु ने पहली बार खुद बात शुरू की.

मनु (मुस्कुराते हुए, सबको देख कर):

“सब लोग… सॉरी अगर मैंने आप सबकी ज़िन्दगी में अचानक एंट्री कर दी.

मैं जानती हूँ यह इजी नहीं है.

पर मैं यहाँ रहना चाहती हूँ… और तरय करुँगी सबको खुश करने की.

निधि मम्मी… आपकी चाय बहुत अच्छी बनती है, कल से मैं हाथ बताउंगी.

रूही दी… आज शाम रील्स बनाएंगे साथ में?

मेहुल दी… शॉपिंग पे चलेंगी?

पापा… आपके साथ ऑफिस की स्टोरीज सुनूंगी.

और रोहन भैया… आप तो क्वाइट हो, पर मुझे लगता है आप सबसे समझदार हो. मुझे घर के रूल्स सीखा डोज न?”

सब चौंक गए.

निधि की आँखें नाम हो गयी – पहली बार.

रूही ने हलके से स्माइल की.

मेहुल ने “हाँ, चलेगी” बोलै.

रोहित ने सर हिलाया.

रोहन ने सीधा मानसी को देखा, उसकी शैतानी मुस्कान देखि, और दिल में सोचा: “यह लड़की स्मार्ट है… और खतरनाक भी.”

मनु का रिएक्शन था – एक्सेप्टेन्स और pro-active.

वह जानती थी यह घर नार्मल नहीं है, और वह इसमें फिट होने के लिए तैयार थी.

शायद वह पहले hi रोहन के खेल को महसूस कर रही थी… और रेडी थी शामिल होने के लिए.

अब घर का माहौल dheere-dheere गरम होने लगा…

मनु की वजह से, और रोहन के प्लान से.

***************

रात के 12:30 बजे.

रोहन के कमरे में दरवाज़ा अंदर से लॉक.

रूही, मेहुल और रोहन तीनो बीएड पर बैठे थे – बिलकुल सीरियस मूड में.

रूही (धीरे से):

“भैया… यह मनु… बिलकुल मासूम लगती है, पर बहुत स्मार्ट भी है.

आज उसने मुझसे रील्स बनाये, मेहुल दी के साथ शॉपिंग पे गयी… निधि मम्मी को भी ‘मम्मी’ बोलने लगी.

लगता है यह जल्दी से घर में घुलना चाहती है.”

मेहुल (सर हिलाते हुए):

“हाँ… और पापा ने भी गलती की थी न?

उन्होंने सुनीता आंटी को छोड़ा था ऑफिस अफेयर में… उसी से मनु पैदा हुई.

अब मनु का क्या दोष? वह तो बस अपने पापा के पास आयी है.”

रोहन (मुस्कुराते हुए, लेकिन गहरी आवाज़ में):

“एक्साक्ट्ली.

पापा ने अपने ज़माने में जो मज़े किये, वह हमसे अलग थोड़ी थे?

हम भी तो अपना ग्रुप चला रहे हैं… मम्मी, रूही, तू (मेहुल), अब नेहा दूर से…

अब मनु भी सगी बहिन है.

इसका मतलब… यह भी हमारे फॅमिली का हिस्सा है.

इसको भी अपने ग्रुप में लेना है.”

रूही (शर्मा कर):

“पर भैया… चुदाई वाला ग्रुप?

अभी तोह यह बिलकुल नयी है… अगर हमने सीधा बता दिया तोह डर के भाग जाएगी!”

मेहुल (हाँ में सर हिलाते हुए):

“बिलकुल. कोई भी नार्मल लड़की bhai-behnon में चुदाई को एक्सेप्ट नहीं करेगी पहले दिन.

पहले दोस्ती, प्यार, ट्रस्ट बनाना पड़ेगा.

फिर dheere-dheere इंट्रोडस करेंगे… जैसे हम लोगों ने किया था.”

रोहन ने दोनों को देखा और फाइनल फैसला सुना दिया:

रोहन:

“ठीक है. प्लान यह:

1. अभी सिर्फ pyar-mohabbat, bhai-behen वाला रिश्ता दिखाओ.

2. मनु को पूरा फॅमिली फील करवाओ – शॉपिंग, मूवीज, late-night टॉक्स, सब.

3. जब यह कम्प्लीटली कम्फर्टेबले हो जाये… तब एक रात ‘ट्रुथ और डरे’ या कोई गेम में slowly-slowly खोलेंगे राज.

4. और जब यह तैयार हो… तब इसे भी अपने बीएड में लाएंगे.

पर अभी चुदाई का ज़िक्र बिलकुल नहीं.

समझी दोनों?”

रूही और मेहुल दोनों ने मुस्कुराते हुए हाँ में सर हिलाया.

रूही (शैतानी स्माइल के साथ):

“भैया… यह बिलकुल कच्ची काली है… जब यह तैयार होगी न, तब बहुत मज़ा आएगा.”

मेहुल (हस्ते हुए):

“और तब तक हम तीनो भी थोड़ा कण्ट्रोल कर लेंगे… वर्ण यह देख लेगी तोह पहले hi डर जाएगी.”

रोहन ने दोनों को गले लगाया:

“डील.

अब से ऑपरेशन ‘मनु को अपना बनाना’ शुरू.

पहले दोस्ती… फिर हवस.”

तीनो ने हाथ मिलाया.

अब घर में एक नया मिशन शुरू हो चूका था –

मनु को पहले प्यार में, फिर बीएड में लाना.

और तीनो bhai-behen एक साथ मिलकर यह खेल खेलने वाले थे.

**************************

एक हफ्ता बीत गया…

घर का माहौल dheere-dheere बदलने लगा था.

1. **मॉर्निंग एक्सरसाइज**

हर सुबह 6 बजे तीनो बहनें और रोहन टेरेस पर या लॉन में योग + लाइट वर्कआउट करते.

मनु पहले शर्माती थी, लेकिन अब बिलकुल फ्री हो गयी थी:

- टाइट स्पोर्ट्स ब्रा और लेग्गिंग्स में उसका फिगर एकदम किलर लगता,

- रोहन उसको “गुड फॉर्म” बोल कर कभी कमर पर हाथ रख देता, कभी हिप्स करेक्ट करने के बहाने छू लेता,

- लेकिन हमेशा “भैया वाला” अंदाज़ में – कोई हवस वाली बात नहीं, सिर्फ प्यार और केयर.

मनु खुद भी खुल गयी थी – रोहन के साथ रेस लगाती, push-ups में हेल्प मांगती, और है है कर थक जाती.

2. **शॉपिंग ट्रिप्स**

रोहन हर दुसरे दिन kisi-na-kisi को ले जाता – कभी रूही, कभी मेहुल, कभी मनु.

मनु के लिए पहली बार रोहन ने खुद जीन्स, टॉप्स, लिंगेरी सेक्शन तक ले गया.

वह शर्मा कर “भैया यह ब्रा थोड़ी छोटी नहीं?” बोलती तो रोहन हंस कर बोलता,

“अरे परफेक्ट है, तू अभी जवान है, फिट आएगी.”

बिलकुल भाई वाला अंदाज़ – पर अंदर से उसका लुंड खड़ा हो जाता, लेकिन दिखता कुछ नहीं.

3. **पार्क और late-night टॉक्स**

शाम को चार bhai-behen पार्क जाते – ice-cream कहते, झूलों पर बैठते, फोटोज खींचते.

रात को टेरेस पर बैठ कर बातें करते – कॉलेज लाइफ, क्रश, फ्यूचर ड्रीम्स.

मनु ने एक रात खुद बताया की उसका एक बॉयफ्रेंड था, लेकिन break-up हो गया.

रूही और मेहुल ने उसको हुग किया, रोहन ने भैया बन कर सर पर हाथ फेरा.

4. **हुग रूटीन**

हर सुबह वर्कआउट के बाद, हर शाम पार्क से वापस आते वक़्त,

रोहन तीनो को bari-bari गले लगता –

- रूही को थोड़ा वाइल्ड हुग (क्यूंकि उसकी सुहागरात हो चुकी थी),

- मेहुल को थोड़ा पोस्सेस्सिवे हुग (बीवी वाला),

- मनु को बिलकुल प्यारा, प्रोटेक्टिव भाई वाला हुग – हाथ सिर्फ कमर तक, 4-5 सेकंड का.

पर हर बार जब मनु उसके सीने से चिपक टी थी,

उसके मुम्मे रोहन की छाती से दबते थे,

उसकी साँसें गरम लगती थी,

रोहन के लुंड में तेज़ी से खून दौड़ता था…

लेकिन वह कण्ट्रोल करता – कोई गलत मूवमेंट नहीं, कोई हवस वाली बात नहीं.

मनु खुद भी कम्फर्टेबले हो चुकी थी –

अब वह खुद hi रोहन के कंधे पर सर रख देती,

“भैया” बोल कर हाथ पकड़ लेती,

वर्कआउट के बाद टॉवल मांगती,

और kabhi-kabhi उसकी गोदी में बैठ कर फ़ोन दिखती.

तीनो bhai-behen देख रहे थे –

मनु अब पूरी तरह से फॅमिली में घर चुकी है.

अब सिर्फ एक आखरी कदम बाकि था…

उसको सचाई दिखने का,

और फिर बीएड में लाने का.

लेकिन अभी नहीं…

अभी वह बिलकुल सेफ, प्यार और ट्रस्ट के सर्किल में थी.

रोहन रात को अकेला लेट कर सोचता:

“बस थोड़ी सी और मोहब्बत…

फिर यह खुद hi मेरे नीचे आएगी…

बिना दर्रे, बिना फाॅर्स किये… दिल से.”

ऑपरेशन “मनु को अपना बनाना”

फेज-1: 100% सक्सेसफुल.

फेज-2: अभी शुरू होने वाला था.

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एक हफ्ता और बीत गया.

घर में एक खामोश समझौता बन चूका था.

रोहित ने अपना पुराण रिश्ता दोबारा शुरू कर दिया था:

- एक रात सुनीता के कमरे में जाता,

- अगली रात निधि के कमरे में.

दोनों औरतें अब chup-chaap apni-apni बारी लेती थी.

कोई झगड़ा नहीं, कोई हंगामा नहीं.

बस रोहित जिस रात सुनीता के साथ होता, निधि उस रात अपने बेटे रोहन के कमरे में चली जाती.

**पैटर्न यह बन गया:**

**रात 1**

रोहित → सुनीता के कमरे में

सुनीता की चीखें, “रोहित… ज़ोर से… कितने दिन बाद…”

निधि → रोहन के कमरे में

निधि (नंगा होकर लेट ते हुए): “बीटा… आज तेरी मम्मी अकेली है… आ जा…”

रोहन उस रात माँ को छोड़ता – छूट भी, गांड भी, पूरा माल अंदर छोड़ता.

**रात 2**

रोहित → निधि के कमरे में

निधि की आवाज़ें, “रोहित… धीरे… अब तुम्हारी उम्र…”

सुनीता → अकेली सोई रहती (या खुद हाथ से काम चला लेती)

निधि → रोहन के पास नहीं जाती.

**रोहन का फायदा:**

जब भी रोहित सुनीता के साथ बिजी होता, रोहन को माँ मिल जाती – बिलकुल फ्री, बिना किसी टेंशन के.

और जब रोहित निधि के साथ होता, रोहन मेहुल या रूही के साथ चुपके से मज़े लेता.

**एक रात का सन:**

रोहित सुनीता के कमरे में गया.

सुनीता ने दरवाज़ा लॉक किया, लाइट बंद की, और रोहित को बीएड पर धकेल दिया.

सुनीता (गरम आवाज़ में): “आज पूरा साल बाद… आज पूरा हक़ लेना है मुझे.”

रोहित ने उसकी साड़ी फाड़ दी, छूट में लुंड पेल दिया – दोनों पुराने प्रेमी की तरह tez-tez धक्के.

इधर निधि चुपके से रोहन के कमरे में पहुंची.

उसने सिर्फ एक सिल्क रोबे पहना था – अंदर कुछ नहीं.

निधि (रोबे उतारते हुए):

“बीटा… आज पापा सुनीता के साथ हैं… तेरी मम्मी तड़प रही है…”

रोहन ने माँ को बीएड पर लिटाया, उसकी टाँगे चौड़ी की और सीधा लुंड माँ की छूट में दाल दिया.

निधि (चीख कर):

“आआह… हाँ बीटा… ज़ोर से… तेरी मम्मी की छूट आज फिर से भर दे…

पापा जो सुनीता को देते हैं… तू मुझे दे दे… आआह झाड़ रही हूँ मैं!”

रोहन ने 20 मिनट तक माँ को छोड़ा – मिशनरी, डोगग्य, गांड भी मारी –

आखिर में माँ की छूट में गरम माल भर दिया.

निधि (सांस फूलते हुए):

“अब से जब भी पापा सुनीता के साथ जायेंगे… मम्मी तेरे पास hi सोयेगी…

तू मेरा असली पति बन गया है बीटा…”

रोहन ने माँ को गले लगाया:

“हाँ मम्मी… अब तू भी मेरी बीवी है… चाहे पापा कितना भी छोड़ ले.”

घर में अब यह रूटीन चल रहा था:

- रोहित दो औरतों को बाँट रहा था,

- रोहन अपनी माँ को जब भी मौका मिलता, छोड़ लेता.

दोनों मैं खुश –

एक पुराने पति से,

एक नए, जवान पति (बेटे) से.

और यह खेल chupke-chupke चल रहा था…

जब तक मानसी को इसका अंदाज़ा न हो.


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भाई हो सका तो इसका दूसरा PART लिख दूंगा पर अभी के लिए सॉरी. मुझे खुद को ये कहानी बोर करने लगी है. इसमें कुछ लिख नहीं प् रहा हूँ मैं. पक्का दुबारा शुरू करूँगा. प्लाट भी दिमाग में है. पर अभी एक शुरू की HAI...JANNAT..AUR दूसरी शुरू करने जा रहा हूँ जल्द HI. थैंक्स फॉर लिकिंग माय स्टोरी एंड राइटिंग सो मच बीआरओ
 
Part 97


एक रात, जैसे रूटीन बन चूका था, पापा (रोहित) निधि के कमरे में गए.

रोहन को पता था आज माँ नहीं आएगी.

रोहन ने मनु को मैसेज किया:

“मनु… आज टेरेस पे बैठ कर मूवी देखेंगे? Late-night प्लान.”

मनु तुरंत आ गयी – छोटी सी निघ्त्य पहने, बाल खुले, बिलकुल कम्फर्टेबले मूड में.

दोनों टेरेस पर सोफे पर बैठे, एक ब्लैंकेट ओढ़ा, नेटफ्लिक्स चला दिया.

ठण्ड थी, तो मनु ने खुद hi रोहन के कंधे पर सर रख दिया.

मनु (प्यार से):

“भैया… आप इतने अच्छे हो… सब लोगों से ज़्यादा प्यार देते हो मुझे.”

रोहन ने उसकी कमर पर हाथ रखा और धीरे से खींच कर गोदी में बिठा लिया – जैसे हर रोज़ होता था.

लेकिन आज लुंड पहले से hi थोड़ा खड़ा था.

जब मनु की गांड उसकी जांघ पर लगी, लुंड एकदम अकड़ गया – सख्त, मोटा, मनु के हिप्स के नीचे डाब गया.

मनु को तुरंत महसूस हुआ.

वह एकदम से थोड़ी सी उखड गयी, फिर शर्मा कर वापस बैठ गयी – पर अब लुंड और भी ज़ोर से डाब रहा था.

मनु (दिल में):

“यह क्या है? भैया का… यह… इतना सख्त क्यों हो गया?

हर बार जब मैं गोदी में बैठती हूँ तब hi ऐसा होता है?

क्या मैं कुछ गलत कर रही हूँ?”

उसने कुछ नहीं बोलै, बस शर्मा कर रोहन के सीने में मुँह छुपा लिया.

मूवी ख़तम होने के बाद रोहन बोलै:

“मनु… आज मेरे कमरे में hi सो जा… टेरेस पे ठण्ड है, और मूवी भी देख ली.”

मनु ने हाँ कर दी – वह अपने प्यारे भाई को नाराज़ नहीं करना चाहती थी.

कमरे में बीएड पर दोनों लेट गए – मनु साइड में, रोहन उसके पीछे.

रोहन ने ब्लैंकेट ओढ़ा दिया, फिर धीरे से मनु को पीछे से हुग किया – जैसे भाई अपनी छोटी बहिन को प्यार से लगता है.

पर हुग ज़ोर का था.

उसके सख्त लुंड ने मनु की गांड के बीच में सीधा दस्तक दे दी – टोपा बिलकुल छेद पर.

मनु की सांस रुक गयी.

उसने अपनी गांड थोड़ी पीछे हटाने की कोशिश की, लेकिन रोहन ने कमर पकड़ कर और ज़ोर से चिपका लिया.

रोहन (धीमे से, प्यार भरी आवाज़ में):

“मनु… मेरी छोटी बहिन… सो जा… मैं हूँ न तेरे साथ.”

उसने मनु के माथे पर एक लम्बी किश की, गाल पर एक और,

फिर उसकी कमर को सहलाते हुए ज़ोर से हुग किया.

मनु का पूरा बदन गरम हो गया.

छूट में एक अजीब सी गीलाहट महसूस हुई.

वह उनकंफर्टबले थी, लेकिन प्यार भी इतना था की मन नहीं कर पायी.

मनु (दिल में):

“यह क्या हो रहा है?

भैया मुझे इतना प्यार करते हैं… लेकिन यह जो डाब रहा है… यह क्या है?

क्या सब भाइयों के साथ ऐसा होता है?

नहीं… शायद मैं ज़्यादा सोच रही हूँ…

भैया इतने अच्छे हैं… मैं उनको नाराज़ नहीं कर सकती.”

उसने आँखें बंद कर ली, अपनी गांड थोड़ी पीछे कर दी ताकि लुंड और डाब जाये,

और रोहन के सीने में मुँह छुपा कर सो गयी.

रोहन ने आँखें बंद कर ली, लेकिन लुंड अभी भी सख्त था – मनु की गांड के बीच में.

रोहन (दिल में):

“बस थोड़ी सी और मोहब्बत…

फिर यह खुद hi मुझे अपनी छूट देगी…

बिना बोले, बिना रोके.”

उस रात मनु ने पहली बार अपने भाई के लुंड की दस्तक को महसूस किया –

और उसने मन नहीं किया…

क्यूंकि वह अब रोहन से दिल से प्यार करने लगी थी.

सिर्फ प्यार नहीं…

एक नयी, गहरी, गरम फीलिंग भी शुरू हो चुकी थी.

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**Part 105 – रूही और रोहन का सीक्रेट (जो अब तक सिर्फ दोनों को पता है)**

रूही और रोहन का रिश्ता घर में सबसे पहले शुरू हुआ था,

और वही सबसे गहरा, सबसे वाइल्ड, और सबसे सीक्रेट भी था.

**शुरुआत कैसे हुई थी**

जब रूही के पीरियड ख़तम हुए थे और उसकी सुहागरात की तयारी चल रही थी, तब से hi रूही ने एक सीक्रेट प्रॉमिस किया था:

रूही (रोहन के कान में, सुहागरात के बाद):

“भैया… अब से मैं सिर्फ तेरी हूँ.

चाहे मम्मी हो, मेहुल दी हो, नेहा दी हो, या कोई नयी आये…

मेरी छूट और गांड हमेशा पहले तेरी होंगी.

तू जब भी बोलेगा… रात हो या दिन… मैं आ जाउंगी… बिना पंतय के.”

**उनका सीक्रेट रूटीन**

1. हर सुबह 5:30 बजे – जब घर सो रहा होता है

रूही चुपके से रोहन के कमरे में आती,

ब्लैंकेट के अंदर घुस कर सीधा लुंड मुँह में लेती,

10 मिनट में रोहन का माल पी लेती,

फिर वापस अपने कमरे में चली जाती – किसी को कनख़बर नहीं.

2. कॉलेज के बाद – जब भी मौका मिलता

रोहन रूही को कार में ले जाता “ड्राप” के बहाने,

बखसैत पर रूही उसका लुंड चूसती या ऊपर चढ़ कर क्विक राउंड कर लेती.

3. रात को “इमरजेंसी कॉल”

रूही का कोड था: “भैया… हेडाचे हो रहा है, दवाई चाहिए.”

यह मतलब – अभी आ जाओ, छूट या गांड मरने का टाइम है.

**सबसे बड़ा सीक्रेट**

रूही ने एक छोटा सा टैटू बनवाया था –

लेफ्ट हिप पर, बिलकुल पंतय लाइन के पास:

एक छोटा सा “र” क्राउन के साथ.

सिर्फ रोहन को पता था.

जब भी रोहन उसको छोड़ता, वह टैटू को किश करता और बोलता:

“मेरी प्रॉपर्टी.”

**और एक सीक्रेट**

रूही प्रेग्नेंट होने का सपना देखती थी – रोहन के बच्चे का.

दोनों ने डीडे किया था – जब सब सेटल हो जायेगा,

रूही सेक्रेटली प्रेग्नेंट हो जाएगी…

ताकि घर में रोहन का “पहला वारिस” उसकी फवौरीते बीवी से आये.

**आज का सीक्रेट मोमेंट**

सुबह 5:15 बजे.

रूही चुपके से रोहन के कमरे में आयी.

रोहन ने उसको ब्लैंकेट के अंदर खींच लिया.

रूही (धीमी आवाज़ में):

“भैया… आज मनु के साथ वर्कआउट में तुम्हारा लुंड खड़ा हो गया था न?

मुझे पता चल गया… अभी मेरी छूट गरम हो रही है जेएलओसी से.”

रोहन ने रूही को पलटा दिया, उसकी निघ्त्य ऊपर की और सीधा लुंड छूट में पेल दिया.

रोहन (कान में):

“तू मेरी पहली और सबसे फवौरीते बीवी है रूही…

मनु को तैयार कर रहा हूँ… लेकिन तेरी जगह कोई नहीं ले सकता.”

रूही चिल्लाई (धीमी आवाज़ में):

“हाँ भैया… ज़ोर से छोड़… तेरी फवौरीते रंडी को याद दिला…

आआह… आज अंदर hi भर देना… तेरा बच्चा दाल दे मुझ में!”

10 मिनट बाद रोहन ने रूही की छूट में गरम माल भर दिया.

रूही ने किश किया और वापस चली गयी.

यह सीक्रेट सिर्फ दोनों का था –

सबसे पुराण, सबसे वाइल्ड, और सबसे पक्का.

रूही हमेशा रोहन की No.1 रहेगी…

चाहे घर में कितनी भी नयी बीवियां आ जाएँ.

*******************************************************

सुबह 5:27 बजे.

रूही चुपके से रोहन के कमरे में आयी थी (जैसे हर रोज़).

दोनों ब्लैंकेट के अंदर थे, लाइट बंद, सिर्फ बीएड की हलकी सी चीख और thap-thap की आवाज़ आ रही थी.

रूही (धीमी चीख):

“आआह भैया… धीरे… आज ज़ोर से मत… आआह… अंदर मत छोड़ना… कल कॉलेज है…”

रोहन (गरम सांस):

“चुप… मेरी फवौरीते रंडी… आज अंदर hi भर दूंगा… तुझे प्रेग्नेंट कर दूंगा…”

मनु उस वक़्त अपने कमरे में सो रही थी,

लेकिन उसको कुछ आवाज़ सुनाई दी – जैसे कोई धीमी चीख और बीएड की हिलने की आवाज़.

वह आँख मलते हुए उठी.

पहले तोह समझी शायद सपना है,

फिर आवाज़ बार बार आयी – “आआह… भैया… धीरे…”

मनु कंफ्यूज हुई.

उसने छोटी सी निघ्त्य पहनी और चुपके से रोहन के कमरे की तरफ चली गयी.

दरवाज़ा अंदर से बंद था, लेकिन झिरी से हलकी सी रौशनी आ रही थी

और आवाज़ें बिलकुल क्लियर:

रूही (धीमी लेकिन गरम आवाज़):

“भैया… मेरी छूट… आआह… कितना मोटा है… पहाड़ दो आज…”

रोहन (सांस फूलते हुए):

“ले मेरी बीवी… आज पूरा अंदर… आआह झाड़ रहा हूँ…”

फिर एक लम्बी धीमी चीख…

और फिर सन्नाटा.

मनु वहां कड़ी रह गयी – दिल zor-zor से धड़क रहा था.

उसके दिमाग में हज़ारों सवाल:

- यह रूही दी की आवाज़ थी?

- “भैया” बोल रही थी?

- “छूट”… “अंदर”… यह सब क्या था?

- क्या भैया और रूही दी… अंदर… वह…?

वह कभी सोच भी नहीं सकती थी की उसका प्यारा भाई और छोटी बहिन अंदर चुदाई कर रहे हैं.

मनु के haath-paire ठन्डे पद गए.

उसने दरवाज़ा खोलने की हिम्मत नहीं की,

बस वही कड़ी रह गयी… सांस रोक कर सुनती रही.

फिर अंदर से रूही की धीमी हंसी और किश की आवाज़ आयी.

मनु चुपके से वापस अपने कमरे में चली गयी,

दिल ज़ोर से धड़क रहा था,

छूट में एक अजीब सी गीलाहट… और दिमाग में एक तूफ़ान.

उसने अपने ब्लैंकेट में मुँह छुपा लिया और सोचा:

“मैं गलत समझी होंगी…

नहीं… यह नहीं हो सकता…

भैया और रूही दी… ऐसा नहीं कर सकते…”

लेकिन उसके दिल को अब शक हो चूका था.

और साथ hi… एक अजीब सी क्यूरोसिटी भी जग चुकी थी.

अब मनु के लिए “भैया का प्यार”

सिर्फ प्यार नहीं लगा था…

उसने पहली बार उसकी गहराई को महसूस किया था.

सीक्रेट अब दरवाज़े के बहार तक आ चूका था…

बस अब एक कदम और.


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यार क्या कहूं मैं इस कहानी से बोर हो गया हूँ. कुछ लिखने बैठता हूँ तो कुछ समझ नहीं आता क्या करूँ? थोड़ा गैप भी लिया था कहानी से. हालाँकि इसमें अभी काफी कुछ बाकि hai..mitali के साथ रिलेशनशिप और एक सीक्रेट और था इस कहानी में जो बाद में खुलना था. पर भाई आप एक लेखक की मनःस्थिति नहीं समझ पाओगे. लिखने बैठता हूँ तो दिमाग ब्लॉक हो जाता है (writer's ब्लॉक). आपसे वादा करता हूँ जब मन फिर से लगेगा इस कहानी में तो एक बार फिर से इसका सेकंड सीजन लेकर आऊंगा. अभी एक कहानी जन्नत चल रही है उसे पढ़िए और जल्द hi एक और कहानी शुरू होने जा रही है "दीवाना मस्त हुआ दिल" सो don't बे डिसअप्पोइंटेड. बहुत कुछ आने वाला है. शार्ट स्टोरीज भी चल रही हैं उसे भी पढ़िए प्लीज. थैंक्स ा लोट बीआरओ. थिस मैसेज इस फॉर माय इतर रीडर्स आल्सो. थैंक यू सो मच फ्रेंड्स फॉर गिविंग सपोर्ट तो माय स्टोरीज.
 
Part 98

उस सुबह के बाद मनु बिलकुल बदल गयी थी,

बहार से वही मासूम, खुश रहने वाली लड़की,

अंदर से एक तूफ़ान चल रहा था.

**दिन 1**

सुबह वर्कआउट के दौरान रोहन ने जैसे hi मनु की कमर पर हाथ रखा,

मनु ने एक झटका सा लिया.

उसने पहली बार लुंड की सख्ती को कॉन्ससियसली महसूस किया.

उसने शर्मा कर नज़रें नीचे कर ली, लेकिन दिल में सवाल उठा:

“यह हर बार क्यों होता है… सिर्फ मेरे साथ?”

**दिन 2**

शाम को पार्क में रूही और रोहन थोड़ा दूर बैठ कर बातें कर रहे थे.

मनु पास से गुज़री तोह देखा, रूही रोहन के कंधे पर सर रख कर कुछ धीमे से बोल रही थी और रोहन उसकी जांघ पर हाथ फेर रहा था.

मनु ने दूर से देखा, रूही की आँखों में एक अलग सी चमक थी.

उसने सोचा: “यह bhai-behen वाला प्यार… या कुछ और?”

**दिन 3**

रात को 2 बजे मनु को फिर आवाज़ आयी,

इस बार मेहुल के कमरे से.

“आआह… भैया… ज़ोर से… तेरी बीवी की छूट पहाड़ दो…”

मनु दरवाज़े के पास पहुंची, सांस रोक कर सुनती रही.

फिर रोहन की आवाज़: “ले… आज अंदर hi भर देता हूँ…”

मनु के पेअर कांपने लगे.

उसने वापस भागने की कोशिश की, लेकिन पेअर जैसे जैम गए.

**दिन 4**

सुबह निधि मम्मी किचन में थी.

मनु ने देखा उनकी चल में एक अलग सी ख़ुशी थी,

जैसे रात भर चूड़ी हो.

उसने निधि मम्मी की गर्दन पर एक छोटा सा निशाँ देखा, किश मार्क.

दिल में एक तेज़ झटका लगा:

“मम्मी भी…?”

**दिन 5 – सबसे बड़ा शॉक**

मनु को कॉलेज से जल्दी छूती मिल गयी.

वह घर आयी तोह देखा मेहुल दी और रूही दोनों रोहन के कमरे में गए और दरवाज़ा बंद कर दिया.

मनु चुपके से पास गयी,

अंदर से तीन लोगों की आवाज़ें:

रूही: “भैया… आज दोनों साथ में…”

मेहुल: “हाँ… मेरी गांड भी ले लो आज…”

फिर thap-thap की आवाज़ और तीनो की धीमी चीखें.

मनु वहां बैठी रह गयी,

दिल zor-zor से धड़क रहा था,

छूट अपने आप गीली हो गयी,

लेकिन दिमाग में सिर्फ एक hi सवाल:

“यह घर… यह bhai-behen… मम्मी…

सब लोग… रोहन भैया के साथ…

चुदाई करते हैं???”

उस रात मनु अपने कमरे में लेती रही,

ब्लैंकेट में मुँह छुपा कर रोई भी,

और साथ hi अपनी छूट पर हाथ भी फेरा,

क्यूंकि अब वह भी उसी गर्माहट को महसूस कर रही थी

जो घर की हर औरत महसूस करती थी.

उसने फैसला कर लिया,

अब वह चुप नहीं रहेगी.

अगली बार जब रोहन उसे गोदी में बेतहीएगा या हुग करेगा,

वह मन नहीं करेगी…

बल्कि देखना चाहेगी की आगे क्या होता है.

मनु का शक अब यक़ीन बन चूका था.

अब सिर्फ एक कदम बाकि था,

खुद उस खेल में उतर जाना.

*************************************

उस रात 12:45 बजे.

घर बिलकुल सन्नाटा था.

मनु अपने कमरे में लेती थी, दिल zor-zor से धड़क रहा था.

उसने फैसला कर लिया था – अब वह चुप नहीं रहेगी.

उसने एक छोटी सी वाइट crop-top और पिंक शॉर्ट्स पहना (अंदर कुछ नहीं),

बाल खुले छोड़े, और चुपके से रोहन के कमरे की तरफ चली गयी.

दरवाज़ा अंदर से बंद था, लेकिन लॉक नहीं था.

मनु ने धीरे से खोला और अंदर घुस गयी.

रोहन बीएड पर अकेला लेता था, फ़ोन चला रहा था.

उसने मनु को देखा – सफ़ेद टॉप में बड़े मुम्मे उभर रहे थे, शॉर्ट्स से हिप्स दिख रहे थे.

रोहन (हैरानी से):

“मनु… इतनी रात को? सब ठीक?”

मनु ने दरवाज़ा बंद किया, फिर बीएड के पास आयी,

आँखें नीचे, लेकिन आवाज़ में एक थोड़ी सी लड़खड़ाहट:

मनु:

“भैया… मुझे नींद नहीं आ रही…

और… और मुझे कुछ बात करनी है.”

रोहन ने फ़ोन साइड रखा, उठ कर बैठा,

उसने मनु का हाथ पकड़ा और धीरे से अपनी गोदी में बिठा लिया – जैसे हर रोज़ होता था.

लेकिन आज मनु ने विरोध नहीं किया.

उसने खुद hi अपनी गांड को थोड़ा पीछे किया ताकि लुंड और ज़ोर से लगे.

रोहन का लुंड एकदम अकड़ गया – शॉर्ट्स के अंदर से सख्त टोपा मनु की गांड के छेद पर डाब रहा था.

मनु (धीमी आवाज़ में):

“भैया… यह जो हर बार मेरे बैठने से होता है…

यह क्या है?”

रोहन ने पहली बार खुल कर मनु की कमर को सहलाते हुए बोलै:

रोहन:

“यह मेरा प्यार है मनु…

तेरा भाई तुझसे बहुत प्यार करता है…

और अब तू बड़ी हो गयी है… तू भी महसूस कर सकती है.”

मनु ने पहली बार अपना हाथ नीचे किया और शॉर्ट्स के ऊपर से hi लुंड को छुआ.

मनु (सांस तेज़):

“यह… यह इतना बड़ा…

भैया… रूही दी… मेहुल दी… मम्मी… सब लोग…

क्या यह hi करते हैं आपके साथ?”

रोहन ने मनु के होंठों पर ऊँगली राखी और धीमे से बोलै:

रोहन:

“हाँ मेरी जान…

यह घर का प्यार है…

सब लोग एक दुसरे को खुश रखते हैं…

अब तू भी हमारे साथ है…

चाहे तोह अभी से शुरू कर सकती है.”

मनु की आँखों में आंसू आ गए, लेकिन साथ hi एक गरम सांस.

उसने खुद hi रोहन के शॉर्ट्स का नाडा खोला,

लुंड बहार निकला – पहली बार इतना बड़ा, मोटा, सख्त लुंड देखा.

मनु (रोटी हुई लेकिन गरम आवाज़ में):

“भैया… डर लग रहा है…

लेकिन मैं भी चाहती हूँ…

मुझे भी अपना बना लो…

जैसे सबको बनाया है.”

रोहन ने मनु को बीएड पर लिटाया,

crop-top ऊपर किया – बड़े, टाइट मुम्मे खुल गए.

शॉर्ट्स उतर दी – छूट बिलकुल गीली, क्लीन शवेद.

रोहन ने पहले मनु के होंठों को किश किया,

फिर मुम्मों को चूसा,

फिर छूट पर मुँह लगाया – 5 मिनट तक zor-zor से चूसा.

मनु चिल्लाई:

“आआह भैया… यह क्या हो रहा है… आआह… बहुत मज़ा आ रहा है…”

फिर रोहन ने लुंड छूट पर रगड़ा.

मनु (रोटी हुई):

“भैया… धीरे… पहली बार है…”

रोहन ने धीरे से डाला – टोपा अंदर गया.

मनु की चीख निकली:

“आआह… दर्द… भैया…”

रोहन रुक गया, किश किया, फिर dheere-dheere पूरा लुंड अंदर पेल दिया.

मनु के आंसू निकल आये, लेकिन उसने रोहन को जकड लिया:

“अब छोड़ दो भैया…

अब से मैं भी तेरी हूँ…”

रोहन ने स्पीड पकड़ ली –

thap-thap-thap…

मनु के मुम्मे उछाल रहे थे,

उसकी चीखें पूरे कमरे में गूँज रही थी.

15 मिनट बाद मनु 4 बार झाड़ चुकी थी.

रोहन ने उसकी छूट में गरम माल भर दिया.

मनु सांस फूलते हुए रोहन से लिपट गयी:

मनु:

“भैया… अब से मैं भी तेरी बीवी हूँ…

जब बुलाओगे… बिना पंतय के आ जाउंगी…

छूट हो या गांड… सब तेरा…”

रोहन ने उसके माथे पर किश की:

रोहन:

“मेरी सबसे नयी और सबसे प्यारी बीवी…

अब तू भी हमारे हराम का हिस्सा है.”

उस रात मनु का पहला अनुभव पूरा हुआ –

डर के साथ, प्यार के साथ, और पूरी सबमिशन के साथ.

अब घर में पांच बीवियां थी…

और हराम अब पूरा हो चूका था.

*******************************************

**Part 109 – मनु का दूसरा अनुभव (अब दर नहीं, सिर्फ हवस)**

दो दिन बाद.

सुबह के 6:15 बजे, वर्कआउट के बाद सब लोग नहाने चले गए थे.

मनु ने रोहन को आँख मारी और चुपके से उसके कमरे में चली गयी.

दरवाज़ा लॉक किया.

मनु ने खुद hi अपना स्पोर्ट्स ब्रा उतरा, लेग्गिंग्स नीचे की – अंदर कुछ नहीं पहना था.

मनु (गरम सांस, शर्माती हुई मुस्कान):

“भैया… आज सुबह से hi तड़प रही हूँ…

कल रात पापा सुनीता मम्मी के साथ थे… मैं अकेली सोई…

अब जल्दी से भर दो मुझे.”

रोहन ने एक सेकंड में अपना लोअर उतरा, लुंड पूरा खड़ा.

उसने मनु को दीवार से सत्ता दिया, एक टांग ऊपर उठायी और सीधा छूट में पूरा लुंड पेल दिया.

मनु की चीख निकली, फिर हंस पड़ी:

“आआह… हाँ भैया… आज बिना रुके… zor-zor से!”

रोहन ने स्पीड पकड़ ली –

thap-thap-thap-thap…

दीवार से मनु का बदन टकरा रहा था,

मुम्मे उछाल रहे थे.

मनु (चिल्लाते हुए):

“हाँ… ऐसे hi… तेरी नयी बीवी को रोज़ सुबह ऐसे hi छोड़ना…

आआह… झाड़ रही हूँ… पहली बार subah-subah… आआह!”

सिर्फ 7 मिनट में मनु तीन बार झाड़ गयी.

रोहन ने उसको घोड़ी बनाया, गांड में भी एक झटके में दाल दिया.

मनु (मज़ा से):

“आआह… गांड भी… अब दोनों छेद तेरी प्रॉपर्टी हैं भैया…

ाः… रोज़ गांड भी मारना… मुझे भी एडिक्टेड कर दो!”

रोहन ने 10 मिनट तक गांड मारी,

फिर वापस छूट में दाल कर ज़ोर के 8 धक्के मारे

और अंदर hi गरम माल भर दिया.

मनु का बदन काँप उठा, वह रोहन के गले लग गयी.

मनु (सांस फूलते हुए):

“भैया… अब से मैं भी रूही दी की तरह सुबह 5:30 बजे आउंगी…

तेरा लुंड मुँह में लुंगी… फिर छोड़ना…

और जब भी मौका मिलेगा… कार में, टेरेस पे, बाथरूम में…

मैं तेरी रंडी बनूँगी.”

रोहन ने उसके होंठों को चूमा:

रोहन:

“मेरी सबसे नयी, सबसे गरम बीवी…

अब तू भी पूरा ग्रुप ज्वाइन कर चुकी है…

आज शाम को रूही और मेहुल के साथ तेरा वेलकम पार्टी होगा…

तीनो साथ में लेंगे.”

मनु ने शर्मा कर आँखें नीचे की, फिर मुस्कुराते हुए बोली:

“जल्दी शाम हो…

मैं भी देखना चाहती हूँ… कैसे सब लोग एक दुसरे को प्यार करते हैं.”

उस सुबह मनु का दूसरा अनुभव पूरा हुआ –

अब दर बिलकुल नहीं था…

सिर्फ भूक, सिर्फ हवस, सिर्फ पूरी सबमिशन.

अब मनु भी घर की हर रात का हिस्सा बनने वाली थी…

और अब वह खुद मांगने वाली थी.

******************************************

शाम के 8:30 बजे.

घर में सब लोग डिनर के बाद “फॅमिली मीटिंग” के बहाने रोहन के कमरे में इकठ्ठा हो गए.

कमरा पूरा सजाया गया था:

- लाल लाइट्स,

- बीएड पर नयी सिल्क चादर,

- चरों तरफ कैंडल्स और रोज पेटल्स,

- साइड टेबल पर चॉकलेट्स, कंडोम्स, लुबे, और एक बड़ा सा मिरर.

सब लोग आ चुके थे:

- निधि (माँ) – लाल सिल्क निघ्त्य में,

- मेहुल – ब्लैक लास लिंगेरी,

- रूही – पिंक baby-doll,

- मनु – पहली बार, बिलकुल नंगी (सिर्फ एक छोटा सा लाल रिबन गले में),

- रोहन – सिर्फ ब्लैक शॉर्ट्स में.

रोहन ने मनु का हाथ पकड़ा और बीएड के बीच में खड़ा किया.

रोहन (सबको देखते हुए):

“आज से मनु हमारे ग्रुप में ऑफिशियली शामिल हो चुकी है.

अब यह भी मेरी बीवी है… और आप सबकी छोटी behan-cum-saheli.

आज इसका वेलकम पार्टी है… सब मिलकर इसको अपना बनाएंगे.”

निधि ने पहले आगे बढ़ी, मनु को गले लगाया और उसके होंठों पर एक गहरी किश की.

निधि (प्यार से):

“बेटी… अब तू भी इस घर की हो… पूरी तरह से.”

फिर मेहुल और रूही ने मनु को सैंडविच हुग दिया –

दोनों तरफ से मुम्मे दबाये, होंठ चूमे.

रूही (शैतानी मुस्कान के साथ):

“अब देख छोटी… आज तुझे तीन तरफ से प्यार मिलेगा.”

**पार्टी शुरू**

1. **पहला राउंड – सबकी तरफ से प्यार**

तीनो औरतें मनु को बीएड पर लिटाया.

- निधि ने मनु के मुम्मों को चूसना शुरू किया,

- मेहुल ने छूट पर मुँह लगा दिया,

- रूही ने मनु के होंठ चूसने शुरू किये.

मनु 5 मिनट में hi तीन बार झाड़ गयी –

उसकी चीखें पूरे कमरे में गूँज रही थी:

“आआह… मम्मी… दी… यह क्या हो रहा है… आआह बहुत मज़ा आ रहा है!”

2. **रोहन का एंट्री**

रोहन शॉर्ट्स उतर कर बीएड पर चढ़ा.

उसने मनु की टाँगे चौड़ी की और सीधा छूट में पूरा लुंड पेल दिया.

मनु की चीख निकली:

“आआह भैया… आज सबके सामने… आआह फाड् दो आज!”

रोहन ने तेज़ी से धक्के मरने शुरू कर दिए –

thap-thap-thap-thap…

तीनो औरतें साइड में बैठी देख रही थी और खुद को सेहला रही थी.

3. **ग्रुप प्ले**

- रूही रोहन के मुँह पर चढ़ गयी – रोहन उसकी छूट चाटने लगा,

- मेहुल मनु के मुम्मों को चूसने लगी,

- निधि ने रोहन के गोटियों को मुँह में लिया.

कमरे में सिर्फ चीखें, सांसें और thap-thap की आवाज़.

4. **ग्रैंड फिनाले**

रोहन ने सबको लाइन में लिटाया –

मनु, रूही, मेहुल, निधि – घोड़ी स्टाइल.

वह ek-ek करके सबकी छूट और गांड मारता गया.

हर औरत की बारी में 2-3 मिनट –

सब चिल्लाती रही:

“भैया… पति… बीटा… ज़ोर से… आज सबको भर दो!”

आखिर में रोहन ने मनु के सामने आया,

उसकी छूट में वापस डाला और ज़ोर के 10 धक्के मारे –

“ले मेरी नयी बीवी… आज तेरा ऑफिसियल वेलकम… अंदर hi भर देता हूँ!”

मनु ज़ोर से चीखी और काँप गयी.

रोहन ने पूरा माल मनु की छूट में छोड़ दिया.

सब थक कर बीएड पर गिर गए – पांच बदन एक दुसरे में लिपटे हुए.

रूही ने मनु के मांग में सिन्दूर भरा,

मेहुल ने चूड़ियां पहनाई,

निधि ने मंगलसूत्र पहना दिया.

निधि (प्यार से):

“अब तू पूरी तरह से हमारे घर की दुल्हन है…

हर रात सुहागरात होगी.”

मनु (आंसुओं और मुस्कान के साथ):

“अब मैं भी आप सबकी हूँ…

भैया की बीवी… मम्मी की बेटी… दी की सहेली…

और सबकी रंडी.”

सब ने ताली बजायी और एक दुसरे को गले लगाया.

वेलकम पार्टी ख़तम नहीं हुआ था…

सिर्फ शुरुआत थी.

उस रात से मनु भी पूरा ग्रुप ज्वाइन कर चुकी थी –

अब घर में पांच बीवियां और एक hi मालिक.

हर रात अब और भी वाइल्ड होने वाली थी.


***********************************
 
Part 99

रात के 11:30 बजे.

कमरा लाल लाइट से भरा हुआ था, कैंडल्स जल रही थी, बीएड के चरों तरफ chhote-chhote मिर्रोर्स लगे हुए थे, ताकि हर एंगल दिखे.

सब तैयार थे:

- मनु – बिलकुल नंगी, सिर्फ गले में लाल रिबन और मांग में सिन्दूर.

- रूही – पिंक लास थोंग और ब्रा.

- मेहुल – ब्लैक फिशनेट बोड़ीसुईट.

- निधि (माँ) – मैरून सिल्क निघ्त्य, अंदर कुछ नहीं.

- रोहन – सिर्फ एक टॉवल लपेटा हुआ.

**शुरुआत**

रोहन ने मनु को बीएड के बीच में लिटाया और बोलै:

“आज तेरी पहली पूरी ग्रुप रात है…

आज तू हर तरफ से प्यार लेगी… और देगी भी.”

रूही और मेहुल ने मनु की दोनों टाँगे चौड़ी कर दी,

निधि ने मनु के मुम्मों को दबाना शुरू किया,

रूही ने छूट पर मुँह लगा दिया,

मेहुल ने मनु के होंठों को चूमना शुरू किया.

मनु 3 मिनट में hi ज़ोर से काँप उठी:

“आआह… यह क्या हो रहा है… मम्मी… दी… आआह… मैं मर जाउंगी मज़ा से!”

**रोहन का टर्न**

रोहन टॉवल उतर कर मनु के ऊपर चढ़ा.

उसने मनु की टाँगे कंधे पर राखी और एक hi धक्के में पूरा लुंड छूट में पेल दिया.

मनु की चीख निकली:

“आआह भैया… मम्मी देख रही हैं… आआह ज़ोर से!”

रोहन ने तेज़ी से छोड़ना शुरू किया –

हर धक्के के साथ मनु के मुम्मे उछाल रहे थे.

निधि ने मनु के मुँह पर अपनी छूट रख दी –

मनु पहली बार माँ की छूट चूसने लगी.

मेहुल और रूही दोनों रोहन के गोटियों को चूसने लगी.

कमरे में सिर्फ चीखें और सांसें:

मनु (माँ की छूट चूसते हुए):

“आआह मम्मी… भैया मुझे फाड् रहे हैं… आआह झाड़ रही हूँ मैं!”

**सबकी बारी**

1. रूही ने रोहन के ऊपर चढ़ कर रिवर्स काउगर्ल किया –

मनु ने रूही के मुम्मों को दबाया.

2. मेहुल घोड़ी बानी –

मनु ने पहले बार मेहुल दी की गांड पर जीभ फेरी,

रोहन ने मेहुल की छूट मारी.

3. निधि ने मनु को 69 पोजीशन में लिटा दिया –

दोनों एक दूसरी की छूट चूसने लगी,

रोहन ने पीछे से माँ की गांड मारी.

**ग्रैंड फिनाले – सब साथ में**

रोहन ने सबको लाइन में घोड़ी बना दिया –

मनु, रूही, मेहुल, निधि.

वह ek-ek करके सबकी छूट और गांड मारता गया:

- पहले मनु की छूट → गांड

- फिर रूही की छूट → गांड

- फिर मेहुल की छूट → गांड

- आखिर में माँ की छूट → गांड

हर बारी में 2-3 मिनट –

सबकी चीखें एक साथ गूँज रही थी:

“बीटा… भैया… पति… ज़ोर से… फाड् दो… अंदर भर दो!”

आखिर में रोहन ने मनु के सामने आया,

उसकी छूट में वापस डाला और ज़ोर के 15 धक्के मारे.

सब ने मिलकर काउंटडाउन किया:

“10… 9… 8… 7… 6… 5… 4… 3… 2… 1…”

रोहन ने ज़ोर से चीखा और मनु की छूट में पूरा गरम माल भर दिया.

मनु का बदन एकदम से काँप उठा –

वह 7वि बार झाड़ गयी.

सब बीएड पर गिर गए – पांच बदन एक दुसरे में लिपटे हुए.

रूही ने मनु के होंठों पर किश किया:

“अब तू पूरी तरह से हमारी हो गयी.”

मेहुल ने उसकी गांड पर थप्पड़ मारा:

“कल से सुबह 5:30 बजे तू भी लाइन में लगेगी.”

निधि ने उसके मांग में और सिन्दूर भरा:

“अब तू भी मेरी बेटी से ज़्यादा बीवी है.”

मनु (सांस फूलते हुए, ख़ुशी के आंसू):

“अब मैं कभी अकेली नहीं रहूंगी…

हर रात ऐसे hi… सबके साथ…

मैं भी तेरी रंडी बन गयी भैया…

और सबकी सहेली.”

रोहन ने सबको अपनी बाहों में भर लिया.

उस रात मनु की पहली ग्रुप रात पूरी हुई –

अब वह सिर्फ बहिन नहीं…

घर की सबसे नयी, सबसे गरम बीवी थी.

और अब हर रात ग्रुप रात होने वाली थी.

***********************************

रात के 1:15 बजे.

रोहित निधि के कमरे में था – उनकी आवाज़ें dheemi-dheemi आ रही थी.

मनु ने रोहन को मैसेज किया:

“भैया… अभी आ जाओ… मम्मी निधि के साथ बिजी हैं.”

रोहन चुपके से मनु के कमरे में पहुंचा.

दरवाज़ा लॉक किया.

मनु ने एक सेकंड में अपनी निघ्त्य उतर दी – बिलकुल नंगी.

रोहन ने भी शॉर्ट्स उतरा.

मनु रोहन के ऊपर चढ़ गयी, लुंड पकड़ कर छूट में दाल लिया और तेज़ी से उछलने लगी.

मनु (धीमी चीख):

“आआह भैया… ज़ोर से… आज गांड भी मारना…”

रोहन ने उसको पलटा दिया, घोड़ी बनाया और गांड में एक hi धक्के में पेल दिया.

Thap-thap-thap… आवाज़ें गूँज रही थी.

**तभी…**

सुनीता अपने कमरे से कुछ सामान लेने रोहित के कमरे से वापस आ रही थी.

उसने मनु के कमरे के दरवाज़े के पास से आवाज़ें सुनी –

“आआह भैया… गांड फाड् दो… आआह!”

सुनीता का दिल बैठ गया.

उसने दरवाज़ा खोला – लॉक नहीं था – और अंदर का नज़ारा देख कर उसका मुँह खुला रह गया.

मनु घोड़ी बानी हुई थी, रोहन पीछे से गांड मार रहा था,

मनु की चीखें, रोहन के धक्के – सब क्लियर.

सुनीता (तेज़ चीख):

“यह क्या गन्दगी है?!

मनु! तू अपने भाई के साथ?!

मैं अभी सबको उठती हूँ! यह घर बर्बाद कर डोज तुम लोग!”

मनु और रोहन एकदम से रुक गए.

मनु रो पड़ी, रोहन ने ब्लैंकेट ओढ़ा.

रोहन (शांत लेकिन दबंग आवाज़):

“सुनीता आंटी… गुस्सा मत कीजिये.

यह घर ऐसा hi है…

जैसे आप और पापा ने शुरू किया था…

वही हम लोग कंटिन्यू कर रहे हैं.”

सुनीता (गुस्से से कांपती):

“मैं और रोहित ने गलती की थी!

लेकिन मेरी बेटी… अपने भाई के साथ…?

यह पाप है!”

मनु (रोटी हुई, लेकिन हिम्मत से):

“मम्मी… तुमने पापा के साथ जो किया… उसी से मैं पैदा हुई.

अब मैंने रोहन भैया के साथ किया…

तोह गलत क्या है?

यह घर का प्यार है…

सब लोग खुश हैं…

मैं भी अब खुश हूँ…

बहुत खुश.”

सुनीता का गुस्सा dheeme-dheeme ठंडा पड़ा.

उसने अपनी बेटी को नंगा, रोहन के नीचे देखा…

और खुद के पुराने दिन याद आ गए.

सुनीता (धीमी आवाज़ में):

“तूने… तूने खुद चुना यह?”

मनु ने हाँ में सर हिलाया.

रोहन ने ब्लैंकेट हटाया, अपना खड़ा लुंड दिखते हुए बोलै:

“आंटी… अब आप भी देख लीजिये…

क्या गलत है इसमें?

आप भी तोह जवान हैं अभी…”

सुनीता की नज़र लुंड पर पड़ी –

उसकी सांस तेज़ हो गयी.

मनु ने माँ का हाथ पकड़ा और बीएड पर खींच लिया.

मनु (प्यार से):

“मम्मी… आज हम दोनों साथ में…

जैसे तुम और निधि आंटी पापा को बाँट लेती हो…

हम दोनों रोहन को बाँट लेंगे.”

सुनीता ने पहली बार विरोध नहीं किया.

उसने धीरे से अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया…

…और अगले 2 घंटे तक कमरे में तीन लोग थे –

रोहन, मनु, और सुनीता.

सुनीता की चीखें सबसे तेज़ थी:

“आआह… बीटा… कितना बड़ा है…

मेरी बेटी के साथ… अब मुझे भी… आआह!”

उस रात सुनीता भी इन्क्लुडे हो गयी –

अपनी बेटी के साथ मिलकर,

अपने सौतें के बेटे के नीचे.

अब घर में छे औरतें –

एक hi मालिक के हराम में…

बिलकुल ऑफिशियली.

***************************

उस रात के बाद सुनीता का गुस्सा बिलकुल शांत हो गया था.

अब वह खुद hi रोहन के कमरे में आने लगी थी –

मनु के साथ या अकेली.

एक रात, जब मनु सो रही थी और रोहित निधि के साथ बिजी था,

सुनीता चुपके से रोहन के कमरे में पहुंची.

सुनीता (नंगी होकर बीएड पर लेट ते हुए, गरम आवाज़ में):

“बीटा… आज सिर्फ हम दोनों…

तेरी नयी मम्मी को पूरा मज़ा दे…

जैसे तूने मनु को दिया था.”

रोहन ने दरवाज़ा लॉक किया, कपडे उतरे और बीएड पर चढ़ गया.

उसने सुनीता की दोनों टाँगे चौड़ी कर दी –

छूट बिलकुल गीली थी, पसीना से चमक रही थी,

सुनीता की उम्र के बावजूद उसकी छूट टाइट और गरम थी.

रोहन ने पहले जीभ से छूट को छठा –

टॉप से नीचे तक, क्लीट को ज़ोर से चूसा.

सुनीता की कमर ऊपर उठ गयी:

“आआह… हाय… कितनी गहरी जीभ है तेरी…

मनु ने सही बोलै था… तू मॉन्स्टर है… आआह झाड़ रही हूँ मैं!”

सिर्फ 3 मिनट में सुनीता दो बार झाड़ गयी –

उसका पानी रोहन के मुँह पर टपक रहा था.

फिर रोहन ने सुनीता के मुम्मों को पकड़ा –

बड़े, सॉफ्ट, निप्पल्स सख्त.

उसने एक निप्पल मुँह में लिया और ज़ोर से चूसा,

दुसरे को उँगलियों से मसला.

सुनीता चिल्लाई:

“आआह… बीटा… चूस ले… तेरी नयी मम्मी के मुम्मे…

अब से रोज़ दूध पियेगा… आआह!”

रोहन ने सुनीता को पलटा दिया – मिशनरी में.

लुंड को छूट के मुँह पर रगड़ा, फिर एक hi ज़ोर के धक्के में पूरा अंदर पेल दिया –

टोपा से ले कर जड़ तक.

सुनीता की ज़ोर की चीख:

“आआआह… माँ मर गयी… कितना मोटा है तेरा…

रोहित से ढाई गुना बड़ा… आआह पहाड़ दी मेरी छूट…

अब ज़ोर से मार… तेरी मम्मी को रंडी बना दे!”

रोहन ने स्पीड पकड़ ली –

thap-thap-thap-thap-thap…

हर धक्के के साथ सुनीता के मुम्मे उछाल रहे थे,

उसकी कमर हिल रही थी,

बीएड की चादर खिंच रही थी.

सुनीता के नाख़ून रोहन की पीठ पर गड गए:

“हाँ… बीटा… ऐसे hi… माँ की छूट में इतना गहरा…

आआह… झाड़ रही हूँ… फिर से… आआह… तू मुझे प्रेग्नेंट कर देगा!”

रोहन ने 15 मिनट तक non-stop छोड़ा –

पोजीशन बदली: डोगग्य में.

सुनीता की गांड ऊपर उठा कर, रोहन ने पीछे से छूट में वापस डाला.

सुनीता (ज़ोर से):

“आआह… अब गांड भी मार…

तेरी मम्मी की गांड भी ले ले…

जैसे मनु की ली थी… आआह!”

रोहन ने लुंड निकाला, गांड के छेद पर थूक लगाया और एक झटके में आधा अंदर दाल दिया.

सुनीता की चीख:

“आआआह… पहात गयी… बहुत मोटा है…

धीरे… आआह… अब ज़ोर से… माँ की गांड फाड् दे!”

रोहन ने पूरा लुंड अंदर डाला और तेज़ी से गांड मारनी शुरू कर दी –

हर धक्के में सुनीता का बदन आगे पीछे हिल रहा था.

सुनीता (मज़ा से पागल):

“हाँ… बीटा… अब से रोज़ गांड मांगूंगी…

तेरी मम्मी अब तेरी रंडी है… आआह… झाड़ रही हूँ गांड से भी!”

10 मिनट बाद रोहन ने सुनीता को सीधा किया,

उसके ऊपर चढ़ कर छूट में वापस डाला और zor-zor के 20 धक्के मारे.

सुनीता के मुँह से सिर्फ “आआह… दाल दे… भर दे…” निकला.

रोहन ने ज़ोर से चीखा और सुनीता की छूट के अंदर garam-garam माल छोड़ दिया –

इतना ज़्यादा की टपकने लगा.

सुनीता का बदन एकदम से काँप उठा –

वह 8वि बार झाड़ गयी,

रोहन को ज़ोर से जकड लिया:

“बीटा… अब से मैं भी तेरी बीवी हूँ…

जब मनु को बुलाएगा… मुझे भी बुला लेना…

हम दोनों maa-beti साथ में लेंगे तेरा लुंड.”

रोहन ने उसके होंठों पर किश की:

“हाँ मम्मी… अब तू भी मेरा हराम का हिस्सा है…

रोज़ रात को आ जाना.”

उस रात के बाद सुनीता हर रात मनु के साथ रोहन के कमरे में आने लगी –

maa-beti मिलकर एक hi लुंड से खुश होने लगी.

घर अब और भी गरम हो चूका था –


सब औरतें एक hi मालिक के नीचे.
 
Part 100

चाचा (रूही के पापा) और चची (राधा, जो रूही की मम्मी थी) 3 दिन बाद घर आये थे.

पहली रात hi सब सोच रहे थे की चुपके से खेल चलाएंगे,

लेकिन राधा चची को कुछ शक हो गया था.

**कैसे पता चला**

दूसरी रात 2 बजे.

राधा चची को नींद नहीं आ रही थी.

वह पानी लेने के बहाने रोहन के कमरे के पास से गुज़री,

दरवाज़ा थोड़ा सा खुला था,

अंदर से आवाज़ें आ रही थी:

रूही (धीमी चीख):

“भैया… ज़ोर से… मम्मी देख रही हैं… आआह गांड मारो आज!”

निधि (गरम आवाज़):

“हाँ बीटा… तेरी छोटी बहिन की गांड पहाड़ दे… मैं भी देखूंगी…”

राधा चची ने झिरी से देखा –

रोहन रूही को गांड मार रहा था,

निधि साइड में बैठी खुद को सेहला रही थी.

राधा चची के पेअर ठिठक गए.

पहले तोह शॉक, फिर गुस्सा, फिर एक अजीब सी गर्माहट.

उसने दरवाज़ा बंद कर दिया और अपने कमरे में वापस चली गयी,

दिल zor-zor से धड़क रहा था,

छूट में एक तेज़ गीलाहट महसूस हुई.

राधा चची (दिल में):

“यह घर… यह सब लोग…

अपने bhai-behen, maa-bete के साथ…?

मैं क्यों पीछे रहूं?

मेरा भांजा इतना जवान, इतना बड़ा…

मैं भी तोह अकेली हूँ…

चाचा में अब पहले जैसा डैम कहाँ रहा है…”

**तीसरी रात – राधा चची का कदम**

रात 1:30 बजे.

सब लोग सो गए थे.

राधा चची ने एक लाल सिल्क निघ्त्य पहनी (अंदर कुछ नहीं),

चुपके से रोहन के कमरे में पहुँच गयी.

रोहन अकेला लेता था.

राधा चची ने दरवाज़ा बंद किया और बीएड के पास आकर कड़ी हो गयी.

राधा चची (धीमी, गरम आवाज़):

“रोहन बीटा… चची को भी नींद नहीं आ रही…

और… और कल रात जो देखा…

अब चची भी चाहती है…

तू अपनी चची को भी अपना बना ले.”

रोहन एक सेकंड हैरान रहा, फिर मुस्कुराया.

उसने चची का हाथ पकड़ा और बीएड पर खींच लिया.

रोहन:

“चची… आप भी…?

पक्का?”

राधा चची ने खुद hi निघ्त्य उतर दी –

बिलकुल नंगी, बड़े मुम्मे, गोल गांड, छूट गीली.

राधा चची (गरम सांस):

“पक्का बीटा…

अब तू मुझे छोड़…

जैसे रूही को छोड़ता है…

जैसे मनु को छोड़ता है…

अपनी चची को भी रंडी बना दे.”

रोहन ने चची को लिटाया,

टाँगे चौड़ी की और सीधा छूट में लुंड पेल दिया.

राधा चची की ज़ोर की चीख:

“आआआह… कितना मोटा है तेरा…

चाचा से तीन गुना बड़ा…

आआह पहाड़ दे आज चची की छूट!”

रोहन ने तेज़ी से धक्के मरने शुरू कर दिए –

thap-thap-thap-thap…

राधा चची के मुम्मे उछाल रहे थे.

राधा चची (चिल्लाते हुए):

“हाँ भांजा… ज़ोर से…

अब से चची तेरी बीवी है…

जब बुलाएगा आ जाउंगी…

छूट हो या गांड… सब तेरा…

आआह झाड़ रही हूँ मैं!”

20 मिनट तक रोहन ने चची को छोड़ा –

मिशनरी, डोगग्य, गांड भी मारी.

आखिर में राधा चची के मुँह में दाल कर माल छोड़ा –

चची ने सब पी लिया.

राधा चची (सांस फूलते हुए):

“अब से मैं भी तेरे हराम का हिस्सा हूँ बीटा…

जब चाचा सो जायेंगे… मैं तेरे पास आ जाउंगी…

और जब चाचा मेरे साथ होंगे… तू मुझे याद करना.”

रोहन ने चची को गले लगाया:

“अब घर में सात बीवियां हैं चची…

और तू भी मेरी फवौरीते mausi-biwi बन गयी.”

उस रात से राधा चची भी इन्क्लुडे हो गयी –

अपने भांजे के नीचे…

और घर का हराम और बड़ा हो गया.

************************************

उस रात के दो दिन बाद, शाम के 10 बजे.

घर में सब लोग apne-apne कमरों में थे.

राधा चची (मौसी) चुपके से रोहन के कमरे में पहुँच गयी –

उसने एक लाल ट्रांसपेरेंट निघ्त्य पहनी थी, अंदर कुछ नहीं, बाल खुले, होंठों पर लाल लिपस्टिक.

राधा चची (गरम सांस के साथ, दरवाज़ा लॉक करते हुए):

“रोहन बीटा… आज चची को फिर से मांग है…

चाचा सो गए हैं… अब तू अपनी मौसी को पूरा मज़ा दे…

पहली बार जैसा वाइल्ड बना दे मुझे.”

रोहन ने उठ कर चची को दीवार से सत्ता दिया, निघ्त्य एक झटके में ऊपर उठा दी.

चची की badi-badi छूट बिलकुल गीली थी, मुम्मे उभर रहे थे.

रोहन (धीमी दबंग आवाज़ में):

“चची… आज पहले तेरी छूट को फाड़ूंगा… फिर गांड को…

तू चिल्लायेगी… पर आवाज़ मत निकालना… घर जाग जायेगा.”

राधा चची ने हाँ में सर हिलाया, आँखें बंद कर ली.

**पहला राउंड – छूट की चुदाई**

रोहन ने चची की दोनों टाँगे उठा कर दीवार से सत्ता दी –

एक हाथ से मुम्मे दबाते हुए, दुसरे हाथ से लुंड को छूट के मुँह पर रगड़ा.

चची की सांस तेज़:

“आआह… बीटा… रगड़ मत… दाल दे… तेरी मौसी की छूट तड़प रही है.”

रोहन ने एक hi ज़ोर के धक्के में आधा लुंड अंदर पेल दिया –

चची की धीमी चीख निकली:

“आआह… हाय… कितना मोटा है… पहात जाएगी… आआह धीरे!”

रोहन रुक गया, चची के होंठों को चूसा, मुम्मों को ज़ोर से दबाया,

फिर दोबारा एक धक्का मारा – पूरा लुंड अंदर तक.

चची की कमर अकड़ गयी:

“आआआह… माँ… पूरा अंदर… अब छोड़ बीटा… zor-zor से!”

रोहन ने स्पीड पकड़ ली –

thap-thap-thap-thap-thap…

हर धक्के के साथ चची का बदन दीवार से टकरा रहा था,

उसकी बड़ी गांड हिल रही थी,

मुम्मे उछाल रहे थे.

चची के नाख़ून रोहन की पीठ में गड गए:

“हाँ… बीटा… ऐसे hi… तेरी मौसी की छूट में इतना गहरा…

आआह… झाड़ रही हूँ… पहली बार… आआह… और ज़ोर से!”

रोहन ने पोजीशन बदली – चची को गॉड में उठा लिया,

लुंड अंदर hi रखा, और khade-khade छोड़ने लगा.

चची की टाँगे रोहन की कमर पर लपेटी हुई थी,

वह upar-neeche हो रही थी.

राधा चची (मज़ा से पागल):

“आआह… बीटा… कितना ताकत है तुझमे…

चाचा से ढाई गुना… आआह… अब गांड में दाल…

मौसी की गांड भी मांग रही है!”

**दूसरा राउंड – गांड की चुदाई**

रोहन ने चची को बीएड पर झुका दिया – घोड़ी स्टाइल में.

गांड ऊपर उठी हुई, छेद बिलकुल खुला.

रोहन ने पहले जीभ से गांड को छठा –

अंदर तक जीभ दाल कर चूसा.

चची की कमर हिल गयी:

“आआह… हाय… यह क्या कर रहा है…

कितनी गन्दी मस्ती… आआह मज़ा आ रहा है!”

फिर रोहन ने लुंड पर थूक लगाया, गांड के मुँह पर सेट किया और धीरे से टोपा डाला.

चची की चीख:

“आआह… धीरे बीटा… गांड में पहली बार इतना मोटा…

आआह पहात जाएगी…!”

रोहन रुक गया, चची की गांड के गालों को सहलाया, थप्पड़ मारा,

फिर एक ज़ोर का धक्का – आधा लुंड अंदर.

चची के आंसू निकल आये:

“आआआह… माँ… दर्द हो रहा है… पर रुकना मत…

अब पूरा दाल दे… तेरी मौसी की गांड तेरी है!”

रोहन ने दोबारा धक्का मारा – पूरा लुंड अंदर तक.

चची का मुँह खुला रह गया, सिर्फ सिसकी निकली.

रोहन ने dheere-dheere स्पीड बधाई –

thap-thap-thap…

हर धक्के में चची की गांड हिल रही थी.

दर्द dheere-dheere मज़ा में बदल गया:

“आआह… अब मज़ा आ रहा है… ज़ोर से बीटा…

मौसी की गांड फाड् दे… आआह झाड़ रही हूँ गांड से!”

रोहन ने 12 मिनट तक गांड मारी –

पोजीशन बदली: चची ऊपर चढ़ गयी, रिवर्स काउगर्ल में गांड में लुंड लिया और खुद उछलने लगी.

चची (ज़ोर से):

“हाँ… ऐसे hi… अब से रोज़ गांड मांगूंगी…

तेरी मौसी अब तेरी गुलाम है… आआह… भर दे अंदर!”

रोहन ने चची की कमर पकड़ी और नीचे से धक्के मरने लगा –

zor-zor के 15 धक्के मारे और गांड के अंदर गरम माल छोड़ दिया.

चची का बदन एकदम से काँप उठा –

वह 6वि बार झाड़ गयी,

रोहन के ऊपर गिर गयी, सांस फूलते हुए.

राधा चची (थकी हुई आवाज़ में):

“बीटा… अब से तेरी मौसी हर रात तेरे पास सोयेगी…

जब मनु को बुलाएगा… मुझे भी बुला लेना…

हम maa-beti तेरी रंडियां बन गयी हैं.”

रोहन ने चची को गले लगाया और किश किया:

“अब तू भी मेरा हराम का हिस्सा है चची…

रोज़ आ जाना.”

उस रात राधा चची की चुदाई पूरी हुई –

छूट से गांड तक, डिटेल में, गहरी और वाइल्ड.

अब घर में और भी गर्माहट बढ़ गयी –

हर औरत अब रोहन की मांग पर तैयार.

**************************************

यह घर की आखरी और सबसे बड़ी रात थी –

शादी की आखरी रसम के बाद,

जब सब लोग थक चुके थे, लेकिन दिल में एक नयी उम्मीद और हवस जाग रही थी.

रोहन ने सबको अपने बड़े मास्टर बैडरूम में बुलाया था –

कमरा पूरा सजाया गया था जैसे कोई रॉयल हराम:

- 12क्ष12 का king-size बीएड, लाल वेलवेट चादर बिछी हुई, ऊपर से लाल कैनोपी,

- चरों तरफ bade-bade मिर्रोर्स लगे हुए – हर एंगल से एक्शन दिखे,

- लाल लेद लाइट्स, धीमी रोमांटिक म्यूजिक (स्लो बीट्स वाला),

- साइड टेबल पर चॉकलेट्स, व्हिप्पड क्रीम, हैंडकफ्फ्स, लुबे, कंडोम्स, और एक बड़ा सा ट्रे फ्रूट्स का (अंगूर, स्ट्रॉबेरीज – जो चुदाई में उसे होने वाले थे),

- हवा में जस्मिने और सन्दलवुड की खुशबू – इन्सेंसे स्टिक्स जल रही थी.

सब लोग आ चुके थे – टोटल 10 लोग, एक hi कमरे में:

- **पुरुष (मालिक लोग):**

- रोहन: 22 साल का जवान, मस्कुलर बॉडी, लुंड 8 इंच का मोटा – सिर्फ एक ब्लैक सिल्क रोबे पहना हुआ.

- रोहित (पापा): 50 साल का, थोड़ा बुद्धा लेकिन अभी भी ताकतवर – ग्रे शॉर्ट्स में.

- चाचा: 48 साल का, फिट बॉडी – टॉवल लपेटा हुआ.

- **महिलाएं (Biwiyaan/Randiyaan):**

- निधि (माँ): 45 साल की, बड़े मुम्मे, गोल गांड – लाल साड़ी में, अंदर कुछ नहीं.

- सुनीता (दूसरी माँ): 42 साल की, सेक्सी फिगर – ब्लैक लिंगेरी, फिशनेट स्टॉकिंग्स.

- राधा Chachi/Mausi: 40 साल की, टाइट बॉडी – पिंक baby-doll निघ्त्य.

- मेहुल (बड़ी बहिन): 25 साल की, एथलेटिक बॉडी – रेड bra-thong सेट.

- रूही (छोटी बहिन): 20 साल की, क्यूट और जवान – वाइट लास टेडी.

- मनु (नयी बहिन): 19 साल की, वर्जिन जैसी फ्रेश – नुदे, सिर्फ गले में लाल रिबन.

- नेहा (दूर की बहिन): 22 साल की, कर्तव्य – ब्लू साटन स्लिप.

रोहन ने सबको सर्किल में बैठाया और लाइट्स डिम कर दी –

सिर्फ कैंडल्स और लाल ग्लो.

रोहन (दबंग आवाज़ में, सबको देखते हुए):

“आज घर का आखरी सीक्रेट खुलने वाला है…

अब कोई शर्म नहीं, कोई दर नहीं, कोई रिश्ता नहीं.

सब एक दुसरे के हैं – bhai-behen, maa-beta, baap-beti, chacha-bhanji…

सब मिलकर एक hi हराम में खुश रहेंगे.

कपडे उतरो… और शुरू करो.”

**कपडे उतरने का सन**

सबने dheere-dheere कपडे उतरे:

- निधि की साड़ी गिरी – उसके बड़े मुम्मे उछाल कर बहार आये, छूट पसीने से चमक रही थी.

- सुनीता ने लिंगेरी उतरी – उसकी गांड गोल, मुम्मे टाइट, निप्पल्स सख्त.

- राधा चची ने निघ्त्य फेंकी – उसकी कमर पतली, हिप्स वाइड.

- मेहुल, रूही, मनु, नेहा सब नंगी – जवान बदन, गीली छूट, खड़े निप्पल्स.

- पुरुषों ने भी उतरा – रोहन का लुंड सबसे बड़ा, रोहित और चाचा के भी खड़े.

**पहला राउंड – Warm-up**

सब बीएड पर चढ़ गए.

रोहन ने सेंटर में मनु को लिटाया (नयी होने के कारन).

- रूही और मेहुल ने मनु की टाँगे चौड़ी कर दी – छूट खुल गयी.

- निधि और सुनीता ने मनु के मुम्मों को चूसना शुरू किया – दोनों मैं मिलकर निप्पल्स काटने लगी.

- राधा चची ने मनु की छूट पर जीभ फेरी – पहली बार mausi-bhanji वाला मज़ा.

- नेहा ने मनु के होंठों को चूमा.

मनु की चीखें:

“आआह… सब लोग… आआह मम्मी… दी… चची… आआह… मैं झाड़ रही हूँ… पहली बार इतने लोगों से!”

मनु 4 बार झाड़ गयी – उसका पानी बीएड पर गिर रहा था.

**दूसरा राउंड – पुरुषों का अटैक**

रोहन ने रूही को पकड़ा – उसकी छूट में लुंड पेल दिया.

रोहित ने निधि और सुनीता को साथ लिया – निधि की छूट, सुनीता की गांड मारता हुआ.

चाचा ने राधा चची को ऊपर चढ़ा दिया – लुंड लेते हुए.

तीनो पुरुष तेज़ी से धक्के मरने लगे:

- रोहन की thap-thap से रूही चिल्लाई: “भैया… फाड् दो… तेरी फवौरीते बीवी की छूट!”

- रोहित निधि को छोड़ते हुए सुनीता को किश कर रहा था: “अब दोनों मैं मेरी… आआह!”

- चाचा राधा को उछालते हुए: “मौसी… तेरी गांड… आआह कितनी टाइट!”

बाकि औरतें एक दूसरी को सेहला रही थी – मनु नेहा की छूट चूस रही थी.

**तीसरा राउंड – मिक्स & मैच**

अब सब बदल गए:

- रोहन ने राधा चची की गांड मारी – “चची… अब तू भी मेरी रंडी… आआह!”

- रोहित ने मनु (अपनी बेटी) को पहली बार छोड़ा – मनु: “पापा… आपका भी इतना गरम… आआह भर दो!”

- चाचा ने सुनीता की छूट ली – “सुनीता… तेरी बेटी जैसी hi गरम है तू… आआह!”

- निधि ने मेहुल और रूही के साथ 69 किया – तीनो maa-betiyaan एक दूसरी की छूट चूस रही थी.

- नेहा रोहन के गोटियों को चूस रही थी.

**चौड़ा राउंड – ग्रैंड सर्किल**

सबने एक बड़ा सर्किल बनाया:

- रोहन → मनु की गांड

- मनु → रोहित का लुंड मुँह में

- रोहित → निधि की छूट

- निधि → चाचा का लुंड मुँह में

- चाचा → राधा चची की गांड

- राधा चची → सुनीता की छूट चूसती हुई

- सुनीता → मेहुल की छूट चूसती हुई

- मेहुल → रूही की छूट चूसती हुई

- रूही → नेहा की छूट चूसती हुई

- नेहा → रोहन के गोटियों को चूसती हुई

पूरा सर्किल एक साथ हिल रहा था –

चीखें, chab-chab, thap-thap की सिम्फनी.

**आखरी क्लाइमेक्स**

रोहन ने कमांड दिया:

“अब सब साथ में झड़ेंगे!”

तीनो पुरुष ने apni-apni फवौरीते को पकड़ा:

- रोहन → मनु की छूट में माल भरा

- रोहित → सुनीता की गांड में माल भरा

- चाचा → राधा चची की छूट में माल भरा

सब औरतें एक साथ झाड़ गयी –

चीखें पूरे घर में गूँज रही थी.

सुबह के 4 बजे सब थक कर सो गए –

10 बदन एक दुसरे में लिपटे हुए,

माल से गीले, पसीना से चमकते.

रोहन ने सबको किश किया और बोलै:

“अब यह घर हमारा है…

हर रिश्ता हमारा है…

हर रात हमारी है.”

स्टोरी का अंत यहीं था –

एक पूरा परिवार, एक hi हराम में,

प्यार और हवस के साथ…

हमेशा के लिए.

**थे एन्ड**



वैसे अंत तो किसी चीज का कभी होता नहीं है. अगर कभी मूड हुआ तो इसके बाकि रहते किस्से को मैं इसके सीजन 2 में लिखूंगा. तब तक के लिए अलविदा dosto…milte हैं एक नयी कहानी के साथ. बने रहिएगा……
 
दोस्तों जैसा के आप लोगों को पता है हिंदी कहानियों का कांटेस्ट चल रहा है तो मैंने भी बाप बेटी पर एक इन्सेस्ट स्टोरी लिखी HAI...PLEASE आप उसे पढ़कर रिव्यु थ्रेड में रिव्यु दे देना ताकि आपके फेवरेट लेखक की कहानी को कोई अच्छा स्थान मिल SAKE...LINK निचे दिया है....



रिव्यु का लिंक चाहिए होगा तो बता DENA...KAISE करना है मैं बता DUNGA....PLEASE मुझे वहां काम से काम 200 लाइक्स और 100 कमैंट्स CHAHIYE...BAS मेरी रिक्वेस्ट मान लीजिये फिर आप लोगों को एक तड़कती भड़कती नयी कहानी दूंगा....
 
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