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- Dec 5, 2013
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अपडेट-36
निधि- ये क्या बोल रही हो मम आप, ऐसा कैसे हो सकता ह,
अंजलि- यहाँ सब कुछ हो सकता ह, और ऐसा पहले भी हो चुक्का ह,
निधि- पहले मतलब
अंजलि- सब पता चल जायेगा लेकिन उसे जानने से पहले मुझे तुम्हारा सच जानना ह पूरा सच, शुरू से आज तक का पूरा सच,
निधि- मेरे सच का आपके परिवार से क्या रिश्ता, मेरा सच बहुत बुरा ह मम, इसमें सिर्फ तकलीफ hi तकलीफ ह,
अंजलि- बेटी दर्द और तकलीफ क्या होती ह मुझसे भीतर शायद hi कोई समझ पाए, इसलिए तू बेफिक्र होकर बोल, तेरे सच से शायद हमारा पास्ट भी जुड़ा हो सकता ह,
निधि- आपका पास्ट मतलब मैं समझी नहीं,
अंजलि- जो घटनाये तेरी बेटी नित्य के साथ घटनी ह, वो इस परिवार के साथ जुडी हुई हैं, और वो क्यों जुडी हुई हैं ये सोचने वाली बात ह,
निधि- मैं सबके सामने नहीं बता पाऊँगी,
अंजलि- मुझे और निधि को एकांत जगह दो,
निधि- मैं चाहती हु ह्रदय वह रहे, उसे मेरा सच जानने का अधिकार ह, मैंने उससे बहुत कुछ छुपाया ह,
अंजलि ने ह्रदय को वही बुलवा लिया, अब रूम में निधि अंजलि ह्रदय थे,
आगे का part निधि की जुबानी उसका पास्ट…………
मेरा नाम निधि ह, मैं उत्तराखंड के रुड़की की रही वाली हु, मेरे परिवार में मेरे पिता सोराब कुमार और माँ मनीषा और मैं और 3 भेने और सबसे छोटा एक भाई थे,
हम चार बहेनो के बाद एक लड़का पैदा हुआ था, वो भी एक बाबा की कृपा से, उन्होंने कुछ तंत्र मात्रा किया था तब हमारा भाई पैदा हुआ था, माँ उस आश्रम में हमेशा जाया करती थी, और वो महाराज भी अक्सर घर आते थे,
पिता मजदूरी किया करते थे, हमारी पढाई रुक गई थी, छोटे भाई को अच्छा जीवन देने के लिए हम चारो बहेनो का एक टाइम खाना तक बंद हो गया था, तो मैंने पिता के साथ मजदूरी शुरू क्र दी, बहार काम करने की वजह से मैं जल्दी hi जवान लगने लगी थी, लोगो की नजर मुझे गन्दी होने लगी थी,
एक बार आश्रम के मजरज हमारे घर आये तो उनकी नजर मुझ पैर पड़ी, मैंने उस महाराज की नजरो में गन्दगी देखि, लेकिन हमारे लिए तो वो पूजनीय थे,
उस महाराज ने मेरे पिता को अपने आश्रम में काम पर रख लिया, और मुझे भी आश्रम की सफाई उसके कमरे की सफाई के लिए नौकरी पर रख लिया, चीजे काफी ठीक सी होने लगी, लेकिन अचानक मेरे पिता की तबियत ख़राब रहने लगी, तो उनकी जगह माँ आने लगी, कुछ समय तो सब नार्मल चल रहा था, लेकिन एक दिन उस महाराज ने मेरी बैक पैर हाथ फिर दिया, मैं दर क्र दूर हो गई, वो मुस्कुराता रहा, मैं वह से चली गई, मैंने माँ को बताया तो माँ ने कहा गलती से लग गया होगा, और वो महाराज हैं, उनकी सेवा अच्छे से किया कर,
मैं कुछ दिन महाराज से दूर बचती रही लेकिन एक दिन मैं सफाई कर रही थी तो महाराज कमरे में आ गए और दरवाजा बंद क्र लिया, मैं दर गई, महाराज मेरे पास आये
महाराज- तू बहुत खूबसूरत ह, तुझे यहाँ नौकरानी नहीं यहाँ की शिष्य होना छाइये, ये सब काम छोड़ क्र मुझसे दीक्षा ले ले, फिर देख तू कितना खुस रहती ह,
निधि- महाराज जी अगर मैं दीक्षा ले लुंगी तो घर कैसे चलेगा मुझे तो काम करना hi पड़ेगा,
महाराज- यहाँ की सेविका बन क्र बहुत पैसे मिलते हैं, बस कुछ समय मेरी सेवा करना फिर सब समझ जाएगी,
महाराज ने मेरी चूचियों पैर हाथ मर दिया, मैं एक दम दर गई और बहार को भागी लेकिन उसने मुझे पकड़ पैर बिस्टेर पैर लिटा दिया, काफी ताकतवर आदमी था वो, वो मेरे उप्पेर लेटने लगा तभी किसी ने दरवाजा खटखटा दिया,
महारज गुस्से इ चिलाय- कोण ह,
बहार से- गुरु जी बड़े गुरु जी का फ़ोन आया ह,
बड़े गुरु जी का नाम सुनते hi वो तुरंत बहार को भगा, आज मेरी जानबच गई थी, मैं रट हुए वह से बहार को सीधे माँ के पास भागी,
निधि ने माँ को सब बताया, तो मेरी माँ ने बहुत गुस्सा किया,
माँ- मैं बात करती हु महाराज जी से,
माँ बहार चली गई, मैं दरी हुई बैठी रही, कुछ देर में माँ आई और बोली महाराज बिजी हैं किसी व्यवस्था में, वो अपनी गलती पैर शर्मिंदा हैं, शाम को तुझे मिलकर माफ़ी मांगेंगे, तू चिंता मत कर,
निधि- माँ घर चलिए न यहाँ से, मुझे दर लग रहा ह,
माँ- नहीं आज तो हमे देर तक काम करना होगा, कल आश्रम में बहुत बड़े लोग आ रहे हैं, बहुत सफाई और तैयारी करनी होगी,
निधि- मैं कल से नहीं आउंगी yaha,kahi और काम कर लुंगी,
माँ- ठीक ह कल से मत आना,
मैं मान गई और काम में लग गई, शाम को अँधेरा होने लगा था, मैंने बहुत काम किया था, पूरा आश्रम सजा दिया था, वह से जल्दी जाने के चक्कर में बहुत जालिद जल्दी काम क्र रही थी, फिर भी अँधेरा हो चुक्का था,
सारा काम ख़तम करके मैं माँ को ढूंढ़ने गई, लेकिन माँ कही नहीं मिली, मैं ढूंढ़ते हुए महाराज के कमरे तक पहुंची तो मुझे अंदर आवाज सुनाई दी, जिसमे माँ की आवाज भी थी, मैं अंदर घुसने लगी तो अंदर का नजारा देख क्र मेरी रूह तक कैंप गई, मनीषा मेरी माँ उस महाराज के सामने घुटनो पैर बैठी हुई थी एक दम नंगी और वो महाराज माँ के सामने खड़ा था एक दम नंगा, उसका लुंड माँ के शामे झूल रहा था,
मुझे अपनी आँखों पैर विश्वास नहीं हो रहा था, ऐस अलग रहा था जैसे मेरा शरीर प्राण त्याग चुक्का ह, मेरा दिमाग एक दम सुन था, कदम वही जैम गए थे, मैं फटी आँखों से सब देख रही थी, माँ ने महारज का लुंड पकड़ा जो काफी मोटा और लम्बा था, उसे अपने मुँह में भर लिया,
महाराज- चल कुटिया मादरचोद चूस इसे, तेरी उस रंडी कुटिया बेटी ने इसे नाराज किया ह, तू इसे खुश कर,
मनीषा जोर जोर से लुंड को चूसने लगी, काफी देर चूसने के बाद,
मनीषा- वो तो मूरख ह उस करमजली को क्या पता जीवन का सुख क्या ह, आपके निचे आ जाएगी तो काली से फूल बन जाएगी फिर कही नहीं जाएगी, वो भी ऐसे hi चूसेगी आपका ये लुंड,
महाराज- कब आएगी वो हरामजादी,
मनीषा- आप कहो तो आज hi ला दू, लेकिन आपने थोड़ी जल्दबाजी क्र दी उसके साथ, मैं धीरे धीरे तैयार करती उसे,
महाराज- उसे पाने के चक्कर में उसके बाप को काम दिया, फिर उसे काम दिया,
मनीषा- और मुझे यहाँ बुलाने के लिए तो आपने लिमिट hi पर क्र दी, उसके बाप को इतना बीमार क्र दिया को वो कभी भी मर सकता ह,
महाराज- वो मरेगा फिर तू आजाद हो ाजेगी न, फिर हमेषा के लिए यहाँ आ जाएगी और तेरी बेटी निधि मेरी सेवा करेगी, फिर तू मेरे बाकि चलो की सेवा करेगी, सब तुझे देख क्र लुंड हिलाते हैं, मैंने देखा ह,
मनीषा- है मैंने भी देखा ह, आप जिससे कहोगे मैं चुद लुंगी, आपकी सेवा करना मेरा धरम ह,
महाराज- तेरी छूट से लड़का जो निकला ह मैंने,
मनीषा- आपके लुंड का hi दम ह वर्ण मैंने तो सोचा था मेरी छूट से कभी लड़का निकलेगा hi नहीं, मेरे नामर्द पति ने तो 4-4 लकडिया दे दी,
महाराज- अरे उसने तो बहुत भला काम किया ह, वो चारो लड़किया मेरी सेवा करेंगी, पहले ये निधि, जब से इसके वो अनार जैसे चुके हाथ में लगे हैं लुंड बैठ hi नहीं रहा, उसके बाद तेरी दूसरी बेटी जब वो जवान होगी तो उसका भोग मैं लगाऊंगा, और निधि को बाकि चलो के लिए भेज दूंगा, फिर तीसरी फिर छोटी, चारो को आश्रम की गणिका बनाऊंगा, जो बहार जाकर बड़े बड़े लोगो को खुश करेंगी और यहाँ के लिए पैसा कमा कर लाएंगी,
मनीषा- जैसा आप कहे महाराज,
महाराज- और तेरा बीटा इस आश्रम की सेवा करेगा, हमारे लिए लकडिया लाया करेगा, जल्दी hi तेरा पति इस दुनिया से चला जायेगा, बस फिर तू जल्दी से यहाँ आकर रहने लग्न और इस रंडी निधि को मेरे इस लोडे के निचे ले आ, जब उसके मुँह में मेरा ये लोढ़ा जायेगा तो अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa
महाराज की आठ उसकी चीख में बदल गई, और उसके सामने बैठी मनीषा का मुँह कौन से लथपथ हो गया, और महाराज का खड़ा लुंड जमीन पर पड़ा था, हाथ में निधि एक तेज धार वाला चुरा लिए कड़ी थी, महाराज जोर जोर से चीख रहा था, निधि ने अगला वॉर उसकी गार्डन पैर किया और एक hi वॉर में उसकी गले को चिर दिया, महाराज के मुँह से चीखे बंद हो गई बस चारो तरफ खून hi खून था,
मनीषा दर और दहशत की वजह से शॉकेड में चली गई थी, महाराज के गिरते hi निधि ने मनीषा की तरफ देखा, और उसने मनीषा के बाल पकडे,
निधि- कलंकनी तू इतना गिर गई की अपने पति को धोखा देने लगी,
माणसीः- मुझे माफ़ कर दे बेटी
निधि- बेटी कैसी बेटी, वही बेटी जिसे तू इस कमीने से छुड़वाना चाहती थी, अपनी मासूम सी छोटी बच्चियों को नहीं बक्शा, और मेरे पापा तू मेरे पापा को मरना चाहती ह, तूने उन्हें मरने की कोशिश की,
मनीषा कुछ बोलने वाली थी की निधि ने वो चुरा मनीषा के मुँह में hi घुसा दिया, और मनीषा का मुहबन्द क्र दिया, मनीषा वही जमीन पैर गिर पड़ी और तड़प तड़प क्र मर गई, आश्रम के बाकि लोग जब तक चीख सुन क्र वह पहचुहे तब तक निधि ने दोनों को मार दिया था, निधि गुस्से में झुलस रहीथी, वो कड़ी उन दोनों को देखती रही, आश्रम के लोगो ने उसे पकड़ लिया और बांध दिया,
इतना सब होने के बाद भी किसी ने पुलिस को फ़ोन नहीं किया, सब एक दूसरे से बाते करने लगे,
उनमे जो सबसे उम्रदराज और महाराज के बाद सब काम सम्हालता था उसका नाम रणवीर था,
रणवीर- बड़े गुरु जी को फ़ोन करो और उन्हें सब बताओ, पुलिस को खबर नहीं लगनी चाहिए, पुलिस आश्रम के अंदर आई तो सब बर्बाद हो जायेगा,
निधि का गुस्सा जैसे जैसे शांत हुआ वो रोने लगी थी, सुबह तक उसे ऐसे hi बंधे रखा था, सुबह एक गुरु वह आये बहुत लम्बे चोदे, एक दम शांत किसम के इंसान थे, उन्होंने वह देखा तो बस मुस्कुराये और मेरे सामने आकर बैठ गए,
उन्होंने मेरे सर पैर हाथ फिराया, मैं रोये जा रही थी,
गुरु जी- शांत हो जा एक दम शांत हो जा, कुछ नहीं होगा, मुझे बता क्या हुआ था यहाँ, तूने ऐसा क्यों किया,
मैं चुप रही,
गुरु जी- मुझे नहीं बताएगी तो मैं तुझे यहाँ से बचाऊंगा कसिए,
निधि ने गुरु जी को सब बताना शुरू किया,
गुरु जी- इस कन्या के हाथ खोलो, और इसे नहला कर साफ़ सुत्रे कपडे पहनाओ,
कुछ औरते मुझे ले गई, तब तक उस कमरे का हुलिया hi बदल दिए गया, जैसे hi मैं साफ़ होकर आई तो देखा कमरा पूरा साफ़ ह
गुरु जी- अब क्या चाहती ह तू,
निधि- मेरे पापा वो मरने वाले हैं, मुझे उनके पास जाना ह,
गुरु जी- तू यहाँ से बहार मत जा अगर किसी ने शिकायत कर दी तो शंश्य हो जाएगी,
मैं शांत हो गई,
गुरु जी- इसके पिता का इलाज करवाओ, जाओ तुरंत,
निधि- मेरी भेने और भाई
गुरु जी- उन्हें आश्रम में भेजो और किसी पाठशाला में भर्ती कराओ,
मैंने गुरु जी के पैरो में पद गई,
गुरु जी- यहाँ नहीं बच्ची मेरे गले लग, तूने बहुत बहादुरी काम काम किया ह,
गुरु जी ने मुझे गले लगा लिया,
गुरु जी- मेरा नाम ह चिरनिवि, मैं इन सब का गुरु हु, तू मेरे साथ चल और वही रह इन सब से दूर,
मैंने मन करना चाहा लेकिन उनके अहसानो के आगे नहीं बोल पाई,
निधि- मेरे पिता
चिरंजीवी- ठीक होने के बाद उन्हें भी वही बुला लेंगे,
मैंने गुरु जी की बात मान ली, और उनके साथ वह से निकल क्र उनके आश्रम में चली गई, उनका आश्रम जम्मू कश्मीर की पहाड़ियों में था,
अभी मैं वह पहुंची hi थी की मुझे खबर मिली की मेरे पिता ने दम तोड़ दिया, मैं पूरी तरह टूट गई, बहुत रोई, ऐसा मन करता था मैं मर जाऊ, लेकिन गुरु जी की वजह से खुद को शांत रखने लगी और खुद को उनकी सेवा में लगा दिया,
कुछ महीने तो ठीक रहे, आश्रम में बहुत से टीचर आते जो वह की सभी लड़के लड़कियों को पढ़ते थे, मैं पढाई में कमजोर थी, लेकिन न जाने मुझे क्या हुआ की मेरा दिमाग काफी तेजी से सब कवर करने लगा, जिसका मुझे बाद में पता चला की वह सभी लड़कियों को कुछ दवाइया दी जाती थी जिससे उनके दिमाग की छमता बधाई जाती थी,
मैं काफी होशियार हो चुकी थी, लेकिन मेरी किस्मत में सब कुछ अच्छा कैसे हो सकता था, मेरे अंदर सेक्स की इच्छा बढ़ने लगी थी, हमेशा ऐसा मन करता की किसी के साथ सेक्स क्र लू, और चिरंजीवी बाबा की ाचै देख क्र वह की सभी लड़किया उनकी तरफ आकर्षित रहती थी, उसी तरह मैं भी रहती थी, ये सब दवाइयों का असर था जो वह ाकि लड़कियों को खाने में दी जाती थी,
एक बार में बाबा के कमरे की सफाई कर रही थी की, मैं उनके बाथरूम में थी, उनका बाथटब साफ़ करते हुए उसी में फिसल गई और पूरी भीग गई, तभी गुरु जी आ गए,
मैं दर क्र बहार जाने लगी तो गुरु जी ने कपडे बदलनेको कहा, उन्होंने एक साड़ी दी, मैंने उनके बाथरूम में पुरे कपडे उतर दिए और नंगी हो गई, फिर वो साड़ी पहन क्र बहार आई,
गुरु जी- तू बड़ी खूबसूरत ह निधि,
मैं शर्मा गई,
गुरु जी- तेरे नितम्ब पैर जो टिल ह बड़ा सूंदर ह
मैं चौंक गई, मेरे नितम्ब इन्होने कैसे देख लिए, मैंने उनकी तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रहे थे,
उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और बीएड पैर गिरा दिया, मैं उठने लगी तो उन्होंने वो साड़ी पकड़ क्र खींच दी, छोटी सी साड़ी थी निचे मैं बिलकुल नंगी थी, मैं उनके सामने नंगी हो गई,
मैं बहुत दरी और शॉकेड थी, मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था, मैं भागना छाती थी लेकिन मेरा बदन कुछ और hi बोल रहा था, गुरु जी के हाथ मेरे बदन पैर पड़े तो मैं गरम सी महसूस क्र रही थी,
निधि- गुरु जी मुझे जाने दीजिये
गुरु- तू घबरा मत सब ठीक ह, बस आराम से लेट जा मैं तुझे आज काली से फूल बना दूंगा,
मैं भागना छाती थी लेकिन चिरंजीवी बहुत ताकतवर था, उसने मुझे लिटाया और मेरे उप्पेर आ गया, उसने एक आयल ुत्या और मेरी छूट पैर दाल दिया, फिर अपनी धोती खोली और पूरा नंगा हो गया, उप्पेर से तो वो हमेसा नंगा hi रहता था, उसने मेरी चूचियों को अपणु मुठी में भीचा मेरे मुँह से दर्द भरी चीख सी निकल गई,
और अगले hi पल ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरी छूट को चिर दिया हो, चिरंजीवी का मोटा लम्बा लुंड मेरी कुँअरि छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया, मैं जोर से चीखी और बेहोश हो गई, लेकिन उस पैर कोई असर नहीं हुआ, कुछ देर बाद मुझे होश आया मेरी छूट में भयंकर दर्द हो रहा था, मैं दर्द से तड़पने लगी, लेकिन वो मुझे छोड़ता रहा, अगले 1 घंटे तक वो मुझे छोड़ता रहा, मेरी छूट फैट चुकी थी, मैं न जाने कितनी बार बेहोश हुई होंगी, मुझे याद तक नहीं,
जब वो झाड़ा तो मैं फिर से बेहोश हो गई, वो एक ऐसा हैवान था, जिसके अंदर कोई दया रहम नहीं था, उसे बस कुँअरि लड़कियों की छूट चाहिए थी,
जब मुझे होश आया तो मैं चिरंजीवी के कमरे में hi निचे फर्श पैर पड़ी हुई थी बिलकुल नंगी, 4-5 आदमी और कुछ औरते वही थी, औरते बीएड की सफाई कर रही थी, कुछ उस बाबा की सफाई कर रही थी, आदमी बस मेरे पास खड़े थे,
मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी, मैंने उठना चाहा लेकिन उठ न सकीय, अपनी जगह से हिल भी नहीं सकीय,
चिरंजीवी- कैसी ह निधि,
निधि- तुमने मेरे साथ बलात्कार किया ह, तुमने ऐसा क्यों किया,
बाबा- अरे मैंने तेरा भला किया ह, देखना मैं तुझे कितना कामयाब बना दूंगा
निधि- मैं पुलिस में रिपोर्ट करुँगी, तुम बलात्कारी हो, मैंतुम्हेँ बर्बाद कर दूंगी,
बाबा बस मुस्कुराया,
तभी एक आदमी बोलै पहले ये देख ले फिर फैसला कर क्या करना ह,
सामने रखे टीवी पैर उसने एक वीडियो चला दी, जिसमे मेरे हाथ में चुरा ह और मैं उस महाराज और अपनी माँ को मार रही हु, फिर जब से मैं यहाँ और जिस कमरे में रही उसमे बाथरूम में हर जगह कमरे लगे थे, तो मेरी नंगी वीडियोस का ढेर था, जो सबके समाने चल रही थी,
मैं शर्म और दर से पागल हुई जा रही थी, मेरा मन कर रहा था मैं मर जाऊ,
बाबा- तू hi फैसला कर तुझे क्या करना ह यहाँ रहना ह या बहार पुलिस के पास जाना ह,
निधि- मैं खुद को ख़तम कर लुंगी
बाबा- न न ऐसा मत करना वर्ण तेरे भाई बहन उनका क्या होगा, वो सड़क पैर भीक मांगेंगे, और तेरी बहन यही मेरे बिस्टेर पैर,
निधि- बास कीजिये,
मैं जोर जोर से रोने लगी, तो दो आदमियों ने मुझे नंगी को hi उठाया और सबके सामने hi मुझे मेरे रूम में लेजाकर बीएड पैर फेंक दिया, मैं अगले तीन दिन तक ऐसे hi पड़ी रही रोटी रही, लेकिन जब भूक जगती ह तो इंसान की शर्म सम्मान सब को खा जाती ह, और मेरे पेट की भूक ने मुझे मजबूर क्र दिया, मैंने अपनी किस्मत के साथ समझौता कर लिया, और बाबा के सामने जाकर हाथ जोड़ लिए,
बस उस दिन से मेरी ट्रेनिंग शुरू हो गई, उस ट्रेनिंग में मुझे इंग्लिश में बिज़नेस में और सेक्स में इतनी महारत दिला दी की मैं जल्दी hi बाबा के लुंड को आसानी से अपनी छूट में लेने लगी, कुछ hi समय में मैं आश्रम की सबसे बेस्ट गणिका बन गई, बाबा मुझे आश्रम में आने वाले बिज़नेस में के सामने परोसने लगा,
इधर वह आश्रम में कुछ आवाजे आने लगी थी, किसी के छिलने की, इतनी भयंकर आवाजे थी की किसी की आत्मा तक कैंप जाये, और ये बाबा का चेला रवि हमेशा उसके साथ रहता, फिर ये 3 महीने के लिए गायब हो गया, और जब ये तीन महीने बाद आया तो बहुत ताकतवर हो चुक्का था, इधर वो आवाजे भी आणि बंद हो गई,
फिर एक दिन बाबा ने मुझे बुलाया और एक बच्ची मेरी गॉड में दी और बोलै की आज से इस बच्ची को तुम पलोगी, इसे अपनी तरह काबिल बनाओगी लेकिन ख्याल रहे जवान होने तक इसे कोई छू न पाए, जब ये जवान होगी मैं इसका भोग लगाऊंगा, ये तुम्हारी जिम्मेदारी ह,
उस बच्ची को पाकर मैं बहुत खुश थी, क्योकि अब मुझे लोगो के सामने सोना नहीं पड़ता था, मैं खुद माँ नहीं बन सकती थी, क्योकि आश्रम में मेरी कोक को बाँझ क्र दिया था, मैं एक माँ की तरह उस बच्ची का ख्याल रखने लगी, वो थी मेरी बेटी नित्य,
लेकिन मेरे अंदर एक दर सताने लगा, की जब ये बड़ी होगी तो वो हैवान उसके साथ वैसा hi करेगा, नहीं मैं ये नहीं होने दूंगी, लेकिन मेरे पास कोई रास्ता नहीं था, तभी उस आश्रम में अशोक कपूर आया,
अशोक और बाबा के बिच एक डील हुई थी जिसमे अशोक के साथ एक ताकतवर आदमी और एक बहुत hi सेक्सी लड़की जनि थी, ये अशोक को तय करना था किसे लेकर जायेगा, और वो लड़की भी अपनी मर्जी से तैयार होनी चाहिए थी,
मुझे काफी टाइम बाद किसी मर्द के पास भेजा गया, अशोक कपूर मुझे इतना खुश हुआ की वो मुझे अपने साथ लेकर जाने को कहने लगा, मुझे एक उम्मीद जगी और मैंने अशोक कपूर के साथ चलने का फैसला कर लिया लेकिन उसे एक शर्त राखी की उसकी बेटी उसके साथ जाएगी, लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए,
अशोक ने मुझे एक आईडिया दिया की मैं किसी तरह इस बच्ची को मारा हुआ दिखा दू और यहाँ से बहार निकल दू, मैंने वैसा hi किया, नित्य को अशोक के हाथो आश्रम से बहार निकल दिया, अशोक ने मुझे एक मरे हुए बच्चे की बॉडी लेकर दी, आश्रम के बहार बहुत घेरि खाई थी, और मैंने ऐसे दिखाया की मेरा पेअर फिसल गया और बच्ची उसमे गिर गई,
अशोक कपूर ने पहले hi वह आदमी लगाए थे, जिन्होंने वह खून दिखा क्र ऐसा दिखाया की कोई जानवर बच्ची को खा गया,
उस दिन बाबा इतना गुस्सा हुआ की पूरा आश्रम दहल उठा, उस दिन बाबा के कहर से बस मुझे किस्मत ने बचा लिया था, वर्ण वो मुझे उसी दिन मर देता,
उस दिन अशोक कपूर मुझे वह से बचा लाया, उसके बाद मैं फिर कभी वापस नहीं गई, और नित्य को अपनी बेटी बना कर पलटी रही, अशोक ने आश्रम में ये बताया की उसने एक बेटी गॉड दिलवाई ह मुझे ताकि किसी को शक न हो, मैं अशोक के अहसान निचे इतना डाब गई की उसका कहा हर काम करने लगी, उसके लिए लोगो से छोड़ने लगी, उसके बिज़नेस को बढ़ने लगी, जो हो सकता था वो करती गई, और नित्य को छुपा कर पलटी रही, लेकिन आज वो उस बाबा के सामने आ hi गई,
निधि अपनी बात कह क्र चुप हो गई, उसकी आँखों में आंसू थे, अंजलि ने उसके सर पैर हाथ रखा और उसे दिलासा दिया,
ह्रदय की आँखों में दर्द और अफ़सोस था,
हार्डी- मुझे माफ़ करना, मैंने आपके साथ इतना बुरा व्यव्हार किया,
निधि- तुमने जो किया अपनी जगह बिलकुल सही था, मेरे साथ गलत हुआ इसका मतलब ये नहीं ह की मैं किसी के साथ गलत करू,
ह्रदय- अब आप आजाद हैं आपने अशोक का अहसान उतरने के लिए आपने बहुत कुछ कर दिया ह,
अंजलि- तुम्हारे भाई बहेनो का क्या हुआ,
निधि- सबकी शादी हो गई, सब विदेश में सिफत करवा दिए थे मैंने,
अंजलि- गुड, अच्छा अशोक को ताकतवर इंसान क्यों चाहिए था,
निधि- अशोक का एक बीटा ह रोहन, जिस रात मैंने उस महाराज और अपनी माँ को मारा उसी दिन एक और घटना हुई थी, अशोक का बीटा एक अंश नाम के लड़के से भीड़ गया था, और अंश ने उसे इतना मारा की वो कोमा में चला गया, अशोक कपूर उसे बदला लेना छटा था, तो वो चिरंजीवी के पास आया था, लेकिन चिरंजीवी ने अशोक को रोक दिया की वह कुछ चल रहा ह, अशोक का बदला अपने आप पूरा हो जायेगा,
लेकिन कुछ महीनो बाद भी जब कुछ नहीं हुआ तो अशोक फिर गया चिरंजीवी के पास तो उसने रवि को भेजा वह लेकिन वो बहुत बुरी तरह पिट कर आया, बड़ी मुश्किल से जान बची उसकी, उसके बाद से वह कोई नहीं गया,
इसलिए अशोक अपने अलग मकसद पैर निकल गया,
ह्रदय- अलग मकसद मतलब
निधि ने अशोक के मकसद के बारे में बताया, जिसे सुन क्र ह्रदय शॉकेड रह गया,
तभी कपिल का फ़ोन अंजलि के पास आया,
अंजलि- है क्या हुआ
कपिल- दीपा आ गई माँ,
अंजलि- मैं आती हु,
अंजलि निधि को लेकर बहार चली गई, ह्रदय भी साथ था,
अंजलि- दीपा जल्दी से अपने उस पंडित जी से बात क्र जिसने तुम लोगो की शादी करवाई थी,
दीपा- वो तो बहुत बूढ़ा हो चुक्का होगा माँ
अंजलि- शादी करवानी तो आती होगी न उसे
दीपा- है वो तो आती होगी,
अंजलि- तो तुरनत बुला और शादी में क्या क्या सामान चाहिए जालिद से पूछ, जब तक वो यहाँ पहुंचे हमे पूरी तैयारी करनी ह,
दीपा ने तुरंत फ़ोन मिला दिया, और कुछ बात करने के बाद, उसके फ़ोन पैर एक संस आ गया
दीपा- माँ शादी के सामान की लिस्ट आ गई ह,
अंजलि- कपिल जल्दी से सामान मँगाओ, और तुम सब लड़कियों को तेया रकरो,
ह्रदय- लड़कियों मतलब
अंजलि- दीपा इसे लेकर जा और रेडी कर शादी के लिए,
दीपा को घर में आते hi सब बता दिया था परिवार वालो ने,
दीपा ह्रदय का हाथ पकड़ क्र रूम में ले गई,
ह्रदय- माँ ये सब क्या ह, नित्य के अलावा भी किसी की शादी ह क्या,
दीपा- तू ज्यादा मत सोच जो हो रहा ह वो होने दे, माँ जैसा कर रही हैं वो होने दे बस,
ह्रदय- मैं उनके किये को रोक नहीं रहा हु, लेकिन मुझे भी तो पता होना चाहिए क्या हो रहा ह, ये लड़ाई मुझे लड़नी ह और मुझे hi नहीं पता,
तभी वह अंजलि आ गई,
अंजलि- सही कहा तूने, अगर तुझे hi पता नहीं होगा तो तू लड़ाई लड़ेगा कैसे, तेरी शादी आज 9 लड़कियों से होगी, क्यों होगी इसका कारन मैं तुझे समझाउंगी,
निधि- ये क्या बोल रही हो मम आप, ऐसा कैसे हो सकता ह,
अंजलि- यहाँ सब कुछ हो सकता ह, और ऐसा पहले भी हो चुक्का ह,
निधि- पहले मतलब
अंजलि- सब पता चल जायेगा लेकिन उसे जानने से पहले मुझे तुम्हारा सच जानना ह पूरा सच, शुरू से आज तक का पूरा सच,
निधि- मेरे सच का आपके परिवार से क्या रिश्ता, मेरा सच बहुत बुरा ह मम, इसमें सिर्फ तकलीफ hi तकलीफ ह,
अंजलि- बेटी दर्द और तकलीफ क्या होती ह मुझसे भीतर शायद hi कोई समझ पाए, इसलिए तू बेफिक्र होकर बोल, तेरे सच से शायद हमारा पास्ट भी जुड़ा हो सकता ह,
निधि- आपका पास्ट मतलब मैं समझी नहीं,
अंजलि- जो घटनाये तेरी बेटी नित्य के साथ घटनी ह, वो इस परिवार के साथ जुडी हुई हैं, और वो क्यों जुडी हुई हैं ये सोचने वाली बात ह,
निधि- मैं सबके सामने नहीं बता पाऊँगी,
अंजलि- मुझे और निधि को एकांत जगह दो,
निधि- मैं चाहती हु ह्रदय वह रहे, उसे मेरा सच जानने का अधिकार ह, मैंने उससे बहुत कुछ छुपाया ह,
अंजलि ने ह्रदय को वही बुलवा लिया, अब रूम में निधि अंजलि ह्रदय थे,
आगे का part निधि की जुबानी उसका पास्ट…………
मेरा नाम निधि ह, मैं उत्तराखंड के रुड़की की रही वाली हु, मेरे परिवार में मेरे पिता सोराब कुमार और माँ मनीषा और मैं और 3 भेने और सबसे छोटा एक भाई थे,
हम चार बहेनो के बाद एक लड़का पैदा हुआ था, वो भी एक बाबा की कृपा से, उन्होंने कुछ तंत्र मात्रा किया था तब हमारा भाई पैदा हुआ था, माँ उस आश्रम में हमेशा जाया करती थी, और वो महाराज भी अक्सर घर आते थे,
पिता मजदूरी किया करते थे, हमारी पढाई रुक गई थी, छोटे भाई को अच्छा जीवन देने के लिए हम चारो बहेनो का एक टाइम खाना तक बंद हो गया था, तो मैंने पिता के साथ मजदूरी शुरू क्र दी, बहार काम करने की वजह से मैं जल्दी hi जवान लगने लगी थी, लोगो की नजर मुझे गन्दी होने लगी थी,
एक बार आश्रम के मजरज हमारे घर आये तो उनकी नजर मुझ पैर पड़ी, मैंने उस महाराज की नजरो में गन्दगी देखि, लेकिन हमारे लिए तो वो पूजनीय थे,
उस महाराज ने मेरे पिता को अपने आश्रम में काम पर रख लिया, और मुझे भी आश्रम की सफाई उसके कमरे की सफाई के लिए नौकरी पर रख लिया, चीजे काफी ठीक सी होने लगी, लेकिन अचानक मेरे पिता की तबियत ख़राब रहने लगी, तो उनकी जगह माँ आने लगी, कुछ समय तो सब नार्मल चल रहा था, लेकिन एक दिन उस महाराज ने मेरी बैक पैर हाथ फिर दिया, मैं दर क्र दूर हो गई, वो मुस्कुराता रहा, मैं वह से चली गई, मैंने माँ को बताया तो माँ ने कहा गलती से लग गया होगा, और वो महाराज हैं, उनकी सेवा अच्छे से किया कर,
मैं कुछ दिन महाराज से दूर बचती रही लेकिन एक दिन मैं सफाई कर रही थी तो महाराज कमरे में आ गए और दरवाजा बंद क्र लिया, मैं दर गई, महाराज मेरे पास आये
महाराज- तू बहुत खूबसूरत ह, तुझे यहाँ नौकरानी नहीं यहाँ की शिष्य होना छाइये, ये सब काम छोड़ क्र मुझसे दीक्षा ले ले, फिर देख तू कितना खुस रहती ह,
निधि- महाराज जी अगर मैं दीक्षा ले लुंगी तो घर कैसे चलेगा मुझे तो काम करना hi पड़ेगा,
महाराज- यहाँ की सेविका बन क्र बहुत पैसे मिलते हैं, बस कुछ समय मेरी सेवा करना फिर सब समझ जाएगी,
महाराज ने मेरी चूचियों पैर हाथ मर दिया, मैं एक दम दर गई और बहार को भागी लेकिन उसने मुझे पकड़ पैर बिस्टेर पैर लिटा दिया, काफी ताकतवर आदमी था वो, वो मेरे उप्पेर लेटने लगा तभी किसी ने दरवाजा खटखटा दिया,
महारज गुस्से इ चिलाय- कोण ह,
बहार से- गुरु जी बड़े गुरु जी का फ़ोन आया ह,
बड़े गुरु जी का नाम सुनते hi वो तुरंत बहार को भगा, आज मेरी जानबच गई थी, मैं रट हुए वह से बहार को सीधे माँ के पास भागी,
निधि ने माँ को सब बताया, तो मेरी माँ ने बहुत गुस्सा किया,
माँ- मैं बात करती हु महाराज जी से,
माँ बहार चली गई, मैं दरी हुई बैठी रही, कुछ देर में माँ आई और बोली महाराज बिजी हैं किसी व्यवस्था में, वो अपनी गलती पैर शर्मिंदा हैं, शाम को तुझे मिलकर माफ़ी मांगेंगे, तू चिंता मत कर,
निधि- माँ घर चलिए न यहाँ से, मुझे दर लग रहा ह,
माँ- नहीं आज तो हमे देर तक काम करना होगा, कल आश्रम में बहुत बड़े लोग आ रहे हैं, बहुत सफाई और तैयारी करनी होगी,
निधि- मैं कल से नहीं आउंगी yaha,kahi और काम कर लुंगी,
माँ- ठीक ह कल से मत आना,
मैं मान गई और काम में लग गई, शाम को अँधेरा होने लगा था, मैंने बहुत काम किया था, पूरा आश्रम सजा दिया था, वह से जल्दी जाने के चक्कर में बहुत जालिद जल्दी काम क्र रही थी, फिर भी अँधेरा हो चुक्का था,
सारा काम ख़तम करके मैं माँ को ढूंढ़ने गई, लेकिन माँ कही नहीं मिली, मैं ढूंढ़ते हुए महाराज के कमरे तक पहुंची तो मुझे अंदर आवाज सुनाई दी, जिसमे माँ की आवाज भी थी, मैं अंदर घुसने लगी तो अंदर का नजारा देख क्र मेरी रूह तक कैंप गई, मनीषा मेरी माँ उस महाराज के सामने घुटनो पैर बैठी हुई थी एक दम नंगी और वो महाराज माँ के सामने खड़ा था एक दम नंगा, उसका लुंड माँ के शामे झूल रहा था,
मुझे अपनी आँखों पैर विश्वास नहीं हो रहा था, ऐस अलग रहा था जैसे मेरा शरीर प्राण त्याग चुक्का ह, मेरा दिमाग एक दम सुन था, कदम वही जैम गए थे, मैं फटी आँखों से सब देख रही थी, माँ ने महारज का लुंड पकड़ा जो काफी मोटा और लम्बा था, उसे अपने मुँह में भर लिया,
महाराज- चल कुटिया मादरचोद चूस इसे, तेरी उस रंडी कुटिया बेटी ने इसे नाराज किया ह, तू इसे खुश कर,
मनीषा जोर जोर से लुंड को चूसने लगी, काफी देर चूसने के बाद,
मनीषा- वो तो मूरख ह उस करमजली को क्या पता जीवन का सुख क्या ह, आपके निचे आ जाएगी तो काली से फूल बन जाएगी फिर कही नहीं जाएगी, वो भी ऐसे hi चूसेगी आपका ये लुंड,
महाराज- कब आएगी वो हरामजादी,
मनीषा- आप कहो तो आज hi ला दू, लेकिन आपने थोड़ी जल्दबाजी क्र दी उसके साथ, मैं धीरे धीरे तैयार करती उसे,
महाराज- उसे पाने के चक्कर में उसके बाप को काम दिया, फिर उसे काम दिया,
मनीषा- और मुझे यहाँ बुलाने के लिए तो आपने लिमिट hi पर क्र दी, उसके बाप को इतना बीमार क्र दिया को वो कभी भी मर सकता ह,
महाराज- वो मरेगा फिर तू आजाद हो ाजेगी न, फिर हमेषा के लिए यहाँ आ जाएगी और तेरी बेटी निधि मेरी सेवा करेगी, फिर तू मेरे बाकि चलो की सेवा करेगी, सब तुझे देख क्र लुंड हिलाते हैं, मैंने देखा ह,
मनीषा- है मैंने भी देखा ह, आप जिससे कहोगे मैं चुद लुंगी, आपकी सेवा करना मेरा धरम ह,
महाराज- तेरी छूट से लड़का जो निकला ह मैंने,
मनीषा- आपके लुंड का hi दम ह वर्ण मैंने तो सोचा था मेरी छूट से कभी लड़का निकलेगा hi नहीं, मेरे नामर्द पति ने तो 4-4 लकडिया दे दी,
महाराज- अरे उसने तो बहुत भला काम किया ह, वो चारो लड़किया मेरी सेवा करेंगी, पहले ये निधि, जब से इसके वो अनार जैसे चुके हाथ में लगे हैं लुंड बैठ hi नहीं रहा, उसके बाद तेरी दूसरी बेटी जब वो जवान होगी तो उसका भोग मैं लगाऊंगा, और निधि को बाकि चलो के लिए भेज दूंगा, फिर तीसरी फिर छोटी, चारो को आश्रम की गणिका बनाऊंगा, जो बहार जाकर बड़े बड़े लोगो को खुश करेंगी और यहाँ के लिए पैसा कमा कर लाएंगी,
मनीषा- जैसा आप कहे महाराज,
महाराज- और तेरा बीटा इस आश्रम की सेवा करेगा, हमारे लिए लकडिया लाया करेगा, जल्दी hi तेरा पति इस दुनिया से चला जायेगा, बस फिर तू जल्दी से यहाँ आकर रहने लग्न और इस रंडी निधि को मेरे इस लोडे के निचे ले आ, जब उसके मुँह में मेरा ये लोढ़ा जायेगा तो अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa
महाराज की आठ उसकी चीख में बदल गई, और उसके सामने बैठी मनीषा का मुँह कौन से लथपथ हो गया, और महाराज का खड़ा लुंड जमीन पर पड़ा था, हाथ में निधि एक तेज धार वाला चुरा लिए कड़ी थी, महाराज जोर जोर से चीख रहा था, निधि ने अगला वॉर उसकी गार्डन पैर किया और एक hi वॉर में उसकी गले को चिर दिया, महाराज के मुँह से चीखे बंद हो गई बस चारो तरफ खून hi खून था,
मनीषा दर और दहशत की वजह से शॉकेड में चली गई थी, महाराज के गिरते hi निधि ने मनीषा की तरफ देखा, और उसने मनीषा के बाल पकडे,
निधि- कलंकनी तू इतना गिर गई की अपने पति को धोखा देने लगी,
माणसीः- मुझे माफ़ कर दे बेटी
निधि- बेटी कैसी बेटी, वही बेटी जिसे तू इस कमीने से छुड़वाना चाहती थी, अपनी मासूम सी छोटी बच्चियों को नहीं बक्शा, और मेरे पापा तू मेरे पापा को मरना चाहती ह, तूने उन्हें मरने की कोशिश की,
मनीषा कुछ बोलने वाली थी की निधि ने वो चुरा मनीषा के मुँह में hi घुसा दिया, और मनीषा का मुहबन्द क्र दिया, मनीषा वही जमीन पैर गिर पड़ी और तड़प तड़प क्र मर गई, आश्रम के बाकि लोग जब तक चीख सुन क्र वह पहचुहे तब तक निधि ने दोनों को मार दिया था, निधि गुस्से में झुलस रहीथी, वो कड़ी उन दोनों को देखती रही, आश्रम के लोगो ने उसे पकड़ लिया और बांध दिया,
इतना सब होने के बाद भी किसी ने पुलिस को फ़ोन नहीं किया, सब एक दूसरे से बाते करने लगे,
उनमे जो सबसे उम्रदराज और महाराज के बाद सब काम सम्हालता था उसका नाम रणवीर था,
रणवीर- बड़े गुरु जी को फ़ोन करो और उन्हें सब बताओ, पुलिस को खबर नहीं लगनी चाहिए, पुलिस आश्रम के अंदर आई तो सब बर्बाद हो जायेगा,
निधि का गुस्सा जैसे जैसे शांत हुआ वो रोने लगी थी, सुबह तक उसे ऐसे hi बंधे रखा था, सुबह एक गुरु वह आये बहुत लम्बे चोदे, एक दम शांत किसम के इंसान थे, उन्होंने वह देखा तो बस मुस्कुराये और मेरे सामने आकर बैठ गए,
उन्होंने मेरे सर पैर हाथ फिराया, मैं रोये जा रही थी,
गुरु जी- शांत हो जा एक दम शांत हो जा, कुछ नहीं होगा, मुझे बता क्या हुआ था यहाँ, तूने ऐसा क्यों किया,
मैं चुप रही,
गुरु जी- मुझे नहीं बताएगी तो मैं तुझे यहाँ से बचाऊंगा कसिए,
निधि ने गुरु जी को सब बताना शुरू किया,
गुरु जी- इस कन्या के हाथ खोलो, और इसे नहला कर साफ़ सुत्रे कपडे पहनाओ,
कुछ औरते मुझे ले गई, तब तक उस कमरे का हुलिया hi बदल दिए गया, जैसे hi मैं साफ़ होकर आई तो देखा कमरा पूरा साफ़ ह
गुरु जी- अब क्या चाहती ह तू,
निधि- मेरे पापा वो मरने वाले हैं, मुझे उनके पास जाना ह,
गुरु जी- तू यहाँ से बहार मत जा अगर किसी ने शिकायत कर दी तो शंश्य हो जाएगी,
मैं शांत हो गई,
गुरु जी- इसके पिता का इलाज करवाओ, जाओ तुरंत,
निधि- मेरी भेने और भाई
गुरु जी- उन्हें आश्रम में भेजो और किसी पाठशाला में भर्ती कराओ,
मैंने गुरु जी के पैरो में पद गई,
गुरु जी- यहाँ नहीं बच्ची मेरे गले लग, तूने बहुत बहादुरी काम काम किया ह,
गुरु जी ने मुझे गले लगा लिया,
गुरु जी- मेरा नाम ह चिरनिवि, मैं इन सब का गुरु हु, तू मेरे साथ चल और वही रह इन सब से दूर,
मैंने मन करना चाहा लेकिन उनके अहसानो के आगे नहीं बोल पाई,
निधि- मेरे पिता
चिरंजीवी- ठीक होने के बाद उन्हें भी वही बुला लेंगे,
मैंने गुरु जी की बात मान ली, और उनके साथ वह से निकल क्र उनके आश्रम में चली गई, उनका आश्रम जम्मू कश्मीर की पहाड़ियों में था,
अभी मैं वह पहुंची hi थी की मुझे खबर मिली की मेरे पिता ने दम तोड़ दिया, मैं पूरी तरह टूट गई, बहुत रोई, ऐसा मन करता था मैं मर जाऊ, लेकिन गुरु जी की वजह से खुद को शांत रखने लगी और खुद को उनकी सेवा में लगा दिया,
कुछ महीने तो ठीक रहे, आश्रम में बहुत से टीचर आते जो वह की सभी लड़के लड़कियों को पढ़ते थे, मैं पढाई में कमजोर थी, लेकिन न जाने मुझे क्या हुआ की मेरा दिमाग काफी तेजी से सब कवर करने लगा, जिसका मुझे बाद में पता चला की वह सभी लड़कियों को कुछ दवाइया दी जाती थी जिससे उनके दिमाग की छमता बधाई जाती थी,
मैं काफी होशियार हो चुकी थी, लेकिन मेरी किस्मत में सब कुछ अच्छा कैसे हो सकता था, मेरे अंदर सेक्स की इच्छा बढ़ने लगी थी, हमेशा ऐसा मन करता की किसी के साथ सेक्स क्र लू, और चिरंजीवी बाबा की ाचै देख क्र वह की सभी लड़किया उनकी तरफ आकर्षित रहती थी, उसी तरह मैं भी रहती थी, ये सब दवाइयों का असर था जो वह ाकि लड़कियों को खाने में दी जाती थी,
एक बार में बाबा के कमरे की सफाई कर रही थी की, मैं उनके बाथरूम में थी, उनका बाथटब साफ़ करते हुए उसी में फिसल गई और पूरी भीग गई, तभी गुरु जी आ गए,
मैं दर क्र बहार जाने लगी तो गुरु जी ने कपडे बदलनेको कहा, उन्होंने एक साड़ी दी, मैंने उनके बाथरूम में पुरे कपडे उतर दिए और नंगी हो गई, फिर वो साड़ी पहन क्र बहार आई,
गुरु जी- तू बड़ी खूबसूरत ह निधि,
मैं शर्मा गई,
गुरु जी- तेरे नितम्ब पैर जो टिल ह बड़ा सूंदर ह
मैं चौंक गई, मेरे नितम्ब इन्होने कैसे देख लिए, मैंने उनकी तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रहे थे,
उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और बीएड पैर गिरा दिया, मैं उठने लगी तो उन्होंने वो साड़ी पकड़ क्र खींच दी, छोटी सी साड़ी थी निचे मैं बिलकुल नंगी थी, मैं उनके सामने नंगी हो गई,
मैं बहुत दरी और शॉकेड थी, मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था, मैं भागना छाती थी लेकिन मेरा बदन कुछ और hi बोल रहा था, गुरु जी के हाथ मेरे बदन पैर पड़े तो मैं गरम सी महसूस क्र रही थी,
निधि- गुरु जी मुझे जाने दीजिये
गुरु- तू घबरा मत सब ठीक ह, बस आराम से लेट जा मैं तुझे आज काली से फूल बना दूंगा,
मैं भागना छाती थी लेकिन चिरंजीवी बहुत ताकतवर था, उसने मुझे लिटाया और मेरे उप्पेर आ गया, उसने एक आयल ुत्या और मेरी छूट पैर दाल दिया, फिर अपनी धोती खोली और पूरा नंगा हो गया, उप्पेर से तो वो हमेसा नंगा hi रहता था, उसने मेरी चूचियों को अपणु मुठी में भीचा मेरे मुँह से दर्द भरी चीख सी निकल गई,
और अगले hi पल ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरी छूट को चिर दिया हो, चिरंजीवी का मोटा लम्बा लुंड मेरी कुँअरि छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया, मैं जोर से चीखी और बेहोश हो गई, लेकिन उस पैर कोई असर नहीं हुआ, कुछ देर बाद मुझे होश आया मेरी छूट में भयंकर दर्द हो रहा था, मैं दर्द से तड़पने लगी, लेकिन वो मुझे छोड़ता रहा, अगले 1 घंटे तक वो मुझे छोड़ता रहा, मेरी छूट फैट चुकी थी, मैं न जाने कितनी बार बेहोश हुई होंगी, मुझे याद तक नहीं,
जब वो झाड़ा तो मैं फिर से बेहोश हो गई, वो एक ऐसा हैवान था, जिसके अंदर कोई दया रहम नहीं था, उसे बस कुँअरि लड़कियों की छूट चाहिए थी,
जब मुझे होश आया तो मैं चिरंजीवी के कमरे में hi निचे फर्श पैर पड़ी हुई थी बिलकुल नंगी, 4-5 आदमी और कुछ औरते वही थी, औरते बीएड की सफाई कर रही थी, कुछ उस बाबा की सफाई कर रही थी, आदमी बस मेरे पास खड़े थे,
मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी, मैंने उठना चाहा लेकिन उठ न सकीय, अपनी जगह से हिल भी नहीं सकीय,
चिरंजीवी- कैसी ह निधि,
निधि- तुमने मेरे साथ बलात्कार किया ह, तुमने ऐसा क्यों किया,
बाबा- अरे मैंने तेरा भला किया ह, देखना मैं तुझे कितना कामयाब बना दूंगा
निधि- मैं पुलिस में रिपोर्ट करुँगी, तुम बलात्कारी हो, मैंतुम्हेँ बर्बाद कर दूंगी,
बाबा बस मुस्कुराया,
तभी एक आदमी बोलै पहले ये देख ले फिर फैसला कर क्या करना ह,
सामने रखे टीवी पैर उसने एक वीडियो चला दी, जिसमे मेरे हाथ में चुरा ह और मैं उस महाराज और अपनी माँ को मार रही हु, फिर जब से मैं यहाँ और जिस कमरे में रही उसमे बाथरूम में हर जगह कमरे लगे थे, तो मेरी नंगी वीडियोस का ढेर था, जो सबके समाने चल रही थी,
मैं शर्म और दर से पागल हुई जा रही थी, मेरा मन कर रहा था मैं मर जाऊ,
बाबा- तू hi फैसला कर तुझे क्या करना ह यहाँ रहना ह या बहार पुलिस के पास जाना ह,
निधि- मैं खुद को ख़तम कर लुंगी
बाबा- न न ऐसा मत करना वर्ण तेरे भाई बहन उनका क्या होगा, वो सड़क पैर भीक मांगेंगे, और तेरी बहन यही मेरे बिस्टेर पैर,
निधि- बास कीजिये,
मैं जोर जोर से रोने लगी, तो दो आदमियों ने मुझे नंगी को hi उठाया और सबके सामने hi मुझे मेरे रूम में लेजाकर बीएड पैर फेंक दिया, मैं अगले तीन दिन तक ऐसे hi पड़ी रही रोटी रही, लेकिन जब भूक जगती ह तो इंसान की शर्म सम्मान सब को खा जाती ह, और मेरे पेट की भूक ने मुझे मजबूर क्र दिया, मैंने अपनी किस्मत के साथ समझौता कर लिया, और बाबा के सामने जाकर हाथ जोड़ लिए,
बस उस दिन से मेरी ट्रेनिंग शुरू हो गई, उस ट्रेनिंग में मुझे इंग्लिश में बिज़नेस में और सेक्स में इतनी महारत दिला दी की मैं जल्दी hi बाबा के लुंड को आसानी से अपनी छूट में लेने लगी, कुछ hi समय में मैं आश्रम की सबसे बेस्ट गणिका बन गई, बाबा मुझे आश्रम में आने वाले बिज़नेस में के सामने परोसने लगा,
इधर वह आश्रम में कुछ आवाजे आने लगी थी, किसी के छिलने की, इतनी भयंकर आवाजे थी की किसी की आत्मा तक कैंप जाये, और ये बाबा का चेला रवि हमेशा उसके साथ रहता, फिर ये 3 महीने के लिए गायब हो गया, और जब ये तीन महीने बाद आया तो बहुत ताकतवर हो चुक्का था, इधर वो आवाजे भी आणि बंद हो गई,
फिर एक दिन बाबा ने मुझे बुलाया और एक बच्ची मेरी गॉड में दी और बोलै की आज से इस बच्ची को तुम पलोगी, इसे अपनी तरह काबिल बनाओगी लेकिन ख्याल रहे जवान होने तक इसे कोई छू न पाए, जब ये जवान होगी मैं इसका भोग लगाऊंगा, ये तुम्हारी जिम्मेदारी ह,
उस बच्ची को पाकर मैं बहुत खुश थी, क्योकि अब मुझे लोगो के सामने सोना नहीं पड़ता था, मैं खुद माँ नहीं बन सकती थी, क्योकि आश्रम में मेरी कोक को बाँझ क्र दिया था, मैं एक माँ की तरह उस बच्ची का ख्याल रखने लगी, वो थी मेरी बेटी नित्य,
लेकिन मेरे अंदर एक दर सताने लगा, की जब ये बड़ी होगी तो वो हैवान उसके साथ वैसा hi करेगा, नहीं मैं ये नहीं होने दूंगी, लेकिन मेरे पास कोई रास्ता नहीं था, तभी उस आश्रम में अशोक कपूर आया,
अशोक और बाबा के बिच एक डील हुई थी जिसमे अशोक के साथ एक ताकतवर आदमी और एक बहुत hi सेक्सी लड़की जनि थी, ये अशोक को तय करना था किसे लेकर जायेगा, और वो लड़की भी अपनी मर्जी से तैयार होनी चाहिए थी,
मुझे काफी टाइम बाद किसी मर्द के पास भेजा गया, अशोक कपूर मुझे इतना खुश हुआ की वो मुझे अपने साथ लेकर जाने को कहने लगा, मुझे एक उम्मीद जगी और मैंने अशोक कपूर के साथ चलने का फैसला कर लिया लेकिन उसे एक शर्त राखी की उसकी बेटी उसके साथ जाएगी, लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए,
अशोक ने मुझे एक आईडिया दिया की मैं किसी तरह इस बच्ची को मारा हुआ दिखा दू और यहाँ से बहार निकल दू, मैंने वैसा hi किया, नित्य को अशोक के हाथो आश्रम से बहार निकल दिया, अशोक ने मुझे एक मरे हुए बच्चे की बॉडी लेकर दी, आश्रम के बहार बहुत घेरि खाई थी, और मैंने ऐसे दिखाया की मेरा पेअर फिसल गया और बच्ची उसमे गिर गई,
अशोक कपूर ने पहले hi वह आदमी लगाए थे, जिन्होंने वह खून दिखा क्र ऐसा दिखाया की कोई जानवर बच्ची को खा गया,
उस दिन बाबा इतना गुस्सा हुआ की पूरा आश्रम दहल उठा, उस दिन बाबा के कहर से बस मुझे किस्मत ने बचा लिया था, वर्ण वो मुझे उसी दिन मर देता,
उस दिन अशोक कपूर मुझे वह से बचा लाया, उसके बाद मैं फिर कभी वापस नहीं गई, और नित्य को अपनी बेटी बना कर पलटी रही, अशोक ने आश्रम में ये बताया की उसने एक बेटी गॉड दिलवाई ह मुझे ताकि किसी को शक न हो, मैं अशोक के अहसान निचे इतना डाब गई की उसका कहा हर काम करने लगी, उसके लिए लोगो से छोड़ने लगी, उसके बिज़नेस को बढ़ने लगी, जो हो सकता था वो करती गई, और नित्य को छुपा कर पलटी रही, लेकिन आज वो उस बाबा के सामने आ hi गई,
निधि अपनी बात कह क्र चुप हो गई, उसकी आँखों में आंसू थे, अंजलि ने उसके सर पैर हाथ रखा और उसे दिलासा दिया,
ह्रदय की आँखों में दर्द और अफ़सोस था,
हार्डी- मुझे माफ़ करना, मैंने आपके साथ इतना बुरा व्यव्हार किया,
निधि- तुमने जो किया अपनी जगह बिलकुल सही था, मेरे साथ गलत हुआ इसका मतलब ये नहीं ह की मैं किसी के साथ गलत करू,
ह्रदय- अब आप आजाद हैं आपने अशोक का अहसान उतरने के लिए आपने बहुत कुछ कर दिया ह,
अंजलि- तुम्हारे भाई बहेनो का क्या हुआ,
निधि- सबकी शादी हो गई, सब विदेश में सिफत करवा दिए थे मैंने,
अंजलि- गुड, अच्छा अशोक को ताकतवर इंसान क्यों चाहिए था,
निधि- अशोक का एक बीटा ह रोहन, जिस रात मैंने उस महाराज और अपनी माँ को मारा उसी दिन एक और घटना हुई थी, अशोक का बीटा एक अंश नाम के लड़के से भीड़ गया था, और अंश ने उसे इतना मारा की वो कोमा में चला गया, अशोक कपूर उसे बदला लेना छटा था, तो वो चिरंजीवी के पास आया था, लेकिन चिरंजीवी ने अशोक को रोक दिया की वह कुछ चल रहा ह, अशोक का बदला अपने आप पूरा हो जायेगा,
लेकिन कुछ महीनो बाद भी जब कुछ नहीं हुआ तो अशोक फिर गया चिरंजीवी के पास तो उसने रवि को भेजा वह लेकिन वो बहुत बुरी तरह पिट कर आया, बड़ी मुश्किल से जान बची उसकी, उसके बाद से वह कोई नहीं गया,
इसलिए अशोक अपने अलग मकसद पैर निकल गया,
ह्रदय- अलग मकसद मतलब
निधि ने अशोक के मकसद के बारे में बताया, जिसे सुन क्र ह्रदय शॉकेड रह गया,
तभी कपिल का फ़ोन अंजलि के पास आया,
अंजलि- है क्या हुआ
कपिल- दीपा आ गई माँ,
अंजलि- मैं आती हु,
अंजलि निधि को लेकर बहार चली गई, ह्रदय भी साथ था,
अंजलि- दीपा जल्दी से अपने उस पंडित जी से बात क्र जिसने तुम लोगो की शादी करवाई थी,
दीपा- वो तो बहुत बूढ़ा हो चुक्का होगा माँ
अंजलि- शादी करवानी तो आती होगी न उसे
दीपा- है वो तो आती होगी,
अंजलि- तो तुरनत बुला और शादी में क्या क्या सामान चाहिए जालिद से पूछ, जब तक वो यहाँ पहुंचे हमे पूरी तैयारी करनी ह,
दीपा ने तुरंत फ़ोन मिला दिया, और कुछ बात करने के बाद, उसके फ़ोन पैर एक संस आ गया
दीपा- माँ शादी के सामान की लिस्ट आ गई ह,
अंजलि- कपिल जल्दी से सामान मँगाओ, और तुम सब लड़कियों को तेया रकरो,
ह्रदय- लड़कियों मतलब
अंजलि- दीपा इसे लेकर जा और रेडी कर शादी के लिए,
दीपा को घर में आते hi सब बता दिया था परिवार वालो ने,
दीपा ह्रदय का हाथ पकड़ क्र रूम में ले गई,
ह्रदय- माँ ये सब क्या ह, नित्य के अलावा भी किसी की शादी ह क्या,
दीपा- तू ज्यादा मत सोच जो हो रहा ह वो होने दे, माँ जैसा कर रही हैं वो होने दे बस,
ह्रदय- मैं उनके किये को रोक नहीं रहा हु, लेकिन मुझे भी तो पता होना चाहिए क्या हो रहा ह, ये लड़ाई मुझे लड़नी ह और मुझे hi नहीं पता,
तभी वह अंजलि आ गई,
अंजलि- सही कहा तूने, अगर तुझे hi पता नहीं होगा तो तू लड़ाई लड़ेगा कैसे, तेरी शादी आज 9 लड़कियों से होगी, क्यों होगी इसका कारन मैं तुझे समझाउंगी,