Incest Story EK MAA PART-2 - Page 7 - SexBaba
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Incest Story EK MAA PART-2

अपडेट-43






रवि अपने गिने चुने आदमियों के साथ बाबा के सामने खड़ा था,

बाबा- मुझे तुझे से उम्मीद नहीं थी, तू उस औरत से हर गया, क्या इतने लोगो में से किसी को नहीं मर पाया तू,

रवि- गुरु जी वह 3-4 औरते hi थी बस, लेकिन ये समझ नहीं आया वो थी कोण कोण, हवेली में अँधेरा था, बस गोलिया चल रही थी, हम उन्हें नहीं देख पाए, बस उनकी गाड़ी जाती दिखी उसी में पता चला की 3-4 औरते थी, पूरी हवेली खली थी,

बाबा- वो पूरी तैयारी के साथ थी, मैंने इस अंजलि को हलके में ले लिया, ये बहुत शातिर ह, मैं उसके पुरे खानदान का नामोनिशान मिटा दूंगा, मुझे वो लड़किया चाहिए, किसी भी कीमत पैर और वो लड़का भी,

रवि- गुरु जी आपके पास उसका बाप ह, उसके बाप में भी तो ताकत ह न, आप उसकी ताकत का इस्तेमाल कर लीजिये न, वही लड़का क्यों

बाबा- तू नहीं समझ पायेगा, तुझे क्या लगता ह मुझे ताकत की जरुरत ह, मेरे अंदर कितनी ताकत ह ये तो तू जनता hi होगा,

रवि- ये hi मैं आज तक समझ नहीं पाया हु आपके पास इतनी ताकत ह फिर आपको ताकत की क्या जरुरत ह,

बाबा- तुझे समझ नहीं आएगा, बस इतना जान ले अगर मुझे जिन्दा रहना ह तो वो ताकत हमे हासिल करनी होगी, वर्ण न मैं रहूँगा न hi तुम सब, और ये कभी भी हो सकता ह, समय निकला जा रहा ह, क्या पता निकल भी गया हो,

रवि- कैसा समय, आप किस से दर रहे हो गुरु जी, इस धरती पैर कोण ह जो आपको डरा सके,

बाबा- तू ये सब छोड़ और उस लड़के को ढूंढ और उन लड़कियों को भी, मुझे काम से काम एक लड़की के साथ सम्भोग करना ह, लेकिन ख्याल रहे वो कुँअरि हो, मैंने उन दोनों लड़कियों को अपने लिए hi सम्हाला था, लेकिन सब बर्बाद हो गया, वो कुटिया निधि भी धोखा दे गई मुझे,

रवि- उस निधि को तो मैं मारूंगा गुरु जी, आप फ़िक्र न कीजिये मैं उन्हें ढूंढ लाऊंगा, जल्दी hi ढूंढ लाऊंगा,

इधर कश्मीर में ह्रदय ने तीनो लड़कियों को अलग दिशा में भेजा, दिया और दृष्टि एक साथ थी ाव्य अकेली और ह्रदय अकेला, सभी अलग दिशा में चल दिए रास्ता देखने, लेकिन ह्रदय चल दिया सीधे सामने वाले रस्ते की तरफ, वो जैसे hi दरवाजे के पास पंहुचा तभी उसे थक की अव्वज आई तो ह्रदय वापस दौड़ क्र पेड के पीछे चिप गया, तभी वो दरवाजा खुला और वह से 2 आदमी पुरे पैक ड्रेस में गन के साथ बहार निकले, और आगे बढे, लेकिन कुछ दूर जाकर ठिठक गए,

दोनों ने एक दूसरे को देखा और दौड़ क्र वापस दरवाजे के पास पहुंचे, दरवाजा बंद होने hi वाला था, दोनों आदमियों ने जोर से चिलाय, - यहाँ कोई आया ह किसी के पैरो के निशान ह यहाँ पैर,

ह्रदय को आवाज आ गई थी, ह्रदय को यही सही मौका लगा उसने बड़ी तेजी से दौड़ लगा दी उन आमदियो की तरफ जब तक वो सम्हाल पते ह्रदय ने एक जोर दर टक्कट मरी जिससे एक आदमी की गार्डन दरवाजे से टकराई और टूट गई, वो वही ढेर हो गया, दूसरे आदमी को ह्रदय ने गार्डन से पकड़ा और हवा में उठा क्र जमीन में दे मारा और अपने घुटना उसकी गार्डन पैर रख क्र गार्डन तोड़ दी,

तभी अंदर से एक आदमी और बहार आया जिसे ह्रदय ने हाथ पकड़ क्र घुमा दिया, उसका हाथ टूट गया, ह्रदय ने उसे हवा में उठाया और अपने घुटने पैर पटक दिया जिससे उसकी कमर की हड्डी टूट गई, फिर ह्रदय ने जल्दी जल्दी उनमे से एक आदमी के कपडे बदले और अंदर घुस गया और दरवाजे को बंद नहीं होने दिया, वह एक आदमी को बिच में ऐडा दिया जिससे थोड़ा सा दरवाजा खुला रहे,

ह्रदय सावधानी से आगे बढ़ने लगा था, जमीन के निचे एक बहुत बड़ा एरिया कवर किया हुआ था, ये एक बहुत बड़ी और आधुनिक लैब सी लग रही थी, बहुत से लोग हथियारों के साथ थे बहुत से साइंटिस्ट घूम रहे थे,

ह्रदय किसी पैर हुम्ला नहीं करना छटा था, ताकि वह के आदमी चौकन्ने न हो जाये, वो चुप्पता हुआ सब देखता हुआ अंदर घुस गया, ह्रदय ने वह के सुकीर्ति की ड्रेस फेनी थी तो पहेली बार में किसी को शक भी नहीं हो रहा था, चारो तरफ एक से एक आधुनिक हथियार थे, ह्रदय को जो ढूंढ़ना था उसकी जानकरी मिलना आसान नहीं लग रहा था,

तभी ह्रदय की नजर एक रस्ते पैर गई जहा बहुत से गार्ड गन के साथ खड़े थे, ह्रदय को वही अपनी मंजिल दिखाई दी, ह्रदय उनके नजदीक पंहुचा लेकिन यहाँ से अंदर घुसने के लिए अब लड़ाई के अलावा कोई तरीका नहीं था,

ह्रदय जैसे hi उनके नजदीक पंहुचा तो एक गार्ड बोलै- अबे तू यहाँ क्या कर रहा ह, तेरी ड्यूटी कहा लगी हुई ह,

ह्रदय- वो मुझे यही भेजा ह

दूसरा गार्ड- यहाँ किसी को नहीं भेजा जाता, कोण ह तू

तीसरा गार्ड- गोली मर इसे यहाँ किसी और गार्ड की आणि की हिम्मत नहीं ह, ये कोई बहरूपिया ह,

जैसे hi उन लोगो ने ह्रदय पैर गन तानी, ह्रदय ने तुरंत अपनी फुरती का प्रदशन किया और एक की गन को पकड़ा और उसके मुँह पैर एक घुसा मारा और गन चीन क्र दूसरे के सर में गन की बूत मरी, तीसरे के जांघो के बिच में एक लात मरी और गन को उसके सर में घुसा दिया,

चौथा आदमी जल्दी से अलार्म बजने के लिए डोडा, लेकिन ह्रदय ने एक गार्ड की कमर में लगा चाकू निकला और चौथे गुंडे की पीठ में घुसा दिया, चारो गार्ड वही ढेर हो गए, ह्रदय ने जल्दी से उनकी साइड में छुपा दिया और अंदर घुस गया,

यहाँ शीशे के कमरे बने हुए थे, ह्रदय उनमे देखता हुआ अंदर चलता चला गया, तभी उसकी नजर एक कमरे पैर गई जहा एक औरत बेसुध सी पड़ी हुई थी, ह्रदय उसके नजदीक पंहुचा, और गोर किया तो ह्रदय पहचान गया की वो अलका ह,

ऐसा लगता था जैसे उसके अंदर जान hi न हो, ह्रदय ने अंदर घुसने का रास्ता ढूंढ़ना चाहा लेकिन कोई रास्ता नहीं दिखा, तभी दूसरे कमरे से एक आदमी निकला देखने से एक साइंटिस्ट लग रहा था,

आदमी- हे तुम यहाँ क्या कर रहे हो, तुम अंदर कसिए आये, तुम्हे पता ह न यहाँ आना मन ह,

ह्रदय- वो मुझे इस औरत को देखने भेजा ह की वो जिन्दा ह या नहीं, शायद गुरु जी को इसकी जरुरत पड़ने वाली ह,

ह्रदय ने अँधेरे में तीर चलाया था, लेकिन सही जगह लग गया,

आदमी- ओह गुरु जी का आदेश ह, मैं चेक करता हु,

आदमी ने अपना एक कार्ड निकला और सेंसर पैर लगाया जिससे दरवाजा खुल गया, वो आदमी अलका के पास पंहुचा और उसको लात मरी- उठ जिन्दा ह या मर गई.

ह्रदय को गुस्सा आ गया उसने उस आदमी के सर पैर एक जोर दर घुसा मारा जिससे वो वही चित हो गया, अलका लत लगने से घबरा क्र उठी थी, लेकिन जब उसके सामने ह्रदय ने उस आदमी को घुसा मारा तो वो और घबरा गई, और एक दम पीछे हो गई, अलका दर कर चीखने hi वाली थी की ह्रदय ने उसके मुँह पैर हाथ रख दिया

ह्रदय- अलका मौसी शांत हो जाइये चिलाना नहीं प्लस

अलका ने चौंक क्र ह्रदय को देखा,

ह्रदय- मौसी मैं हु ह्रदय

ह्रदय नाम सुनकर क्र अलका की आँखे बड़ी हो गई, अलका को ह्रदय नाम याद था, ह्रदय ने अलका के मुँह से हाथ हटाया

अलका- तुम तुम ह्रदय लेकिन तुम कैसे, मुझे यकीन नहीं हो रहा, तुम झूट बोल रहे हो, फिर से कोई चल खेल रहे हो मेरी साथ,

ह्रदय- नहीं मौसी मैं ह्रदय हु, अंजलि माँ ने मुझे भेजा ह आपको पापा को और रूचि माँ को ढूंढ़ने के लिए, जल्दी कीजिये हमारे पास समय काम ह,

अलका तुरंत ह्रदय के गले लग गई,

ह्रदय ने सहारा देकर अलका को उठाया,

अलका- तुम यहाँ आये कैसे

ह्रदय- आप सबका आशीर्वाद ह मेरे सर पैर, आप सबने बहुत इंतजार किया ह मौसी, पूरा परिवार आपके लिए पलके बिछाये बैठा ह, जल्दी hi आप उनके पास होगी,

अलका- लेकिन तेरे पापा वो

ह्रदय- कहा ह वो

अलका ने एक कमरे की तरफ इशारा किया,

अलका- रूचि और तुषार वह कैद हैं, बस किसी तरह जिन्दा हैं,

ह्रदय रूचि को लेकर उधर चलने लगा तभी 4 आदमी उनकी तरफ दौड़ते हुए आ रहे थे, ह्रदय ने अलका को साइड किया और आगे बढ़ क्र उन चारो को अपनी ताकत का एक छोटा सा नमूना दिखाया जिससे वो चारो वही ढेर हो गए, जिसे देख अलका के फेस पैर एक सकूं सा दिखा

अलका- तू बिलकुल अपने पापा जैसा ह,

ह्रदय आगे बढ़ा और दरवाजे के पास पंहुचा, ह्रदय ने उस आदमी के कार्ड से दरवाजा खोलना चाहा लेकिन खुला नहीं, इस पैर सिक्योरिटी ज्यादा थी,

अलका- इस दरवाजे को उस चिरंजीवी के अलावा कोई नहीं खोलता,

ह्रदय- आज खुलेगा ये दरवाजा,

ह्रदय ने आगे बढ़ क्र दरवाजे को देखा फिर अलका को साइड में किया और 10 कदम पीछे हुआ, और पूरी रफ़्तार से दरवाजे की तरफ डोडा और पूरी ताकत से उसमे टक्कर मरी, जिससे वो दरवाजा उखड क्र अंदर जा गिरा, दरवाजे के उखड़ते hi पुरे इलाके रेड सिरों बजने लगे, और तभी बाबा के फ़ोन पैर भी सिरों बजने लगा,

बाबा ने फ़ोन देखा,

बाबा- नहीं नहीं ये नहीं हो सकता, वो लोग वह पहुंच गए हैं, ये दरवाजा नहीं खुल सकता, रवि जल्दी से हेलीकाप्टर तैयार क्र हमे अड्डे पैर पहुंचना होगा,

इधर ह्रदय अंदर घुसा तो वह 3 आदमी थे जो कंप्यूटर के सामने बैठे हुए थे और रीडिंग्स देख रहे थे, दरवाजे के उखड़ते hi वो खड़े हो गए, अलका और ह्रदय अंदर गए तो देखा एक बिस्टेर पैर रूचि पड़ी हुई थी, उसकी नशो में बॉटल्स चढ़ाई जार hi थी, दूसरी तरफ था तुषार जिसे एक मशीन में बंद किया हुआ था, उसके सर पैर शोक देने वाली मशीन लगी हुई थी, और हाथ पाओ सब जगह सिरिंज लगी हुई थी जिनसे तुषार को जिन्दा रखा जा रहा था, तुषार की हालत ऐसी थी जैसे कोई कंकाल हो,

ह्रदय ने वह खड़े आदमियों से कहा- अगर जिन्दा रहना छाते हो तो इन्हे आजाद कर दो वर्ण यही मार दूंगा,

वो आदमी दर गए और उन्होंने तुरनत दोनों को आजाद कर दिया, रूचि को तो थोड़ा होस था लेकिन तुषार को कोई होस नहीं था, ह्रदय ने एक कंधे पैर तुषार को उठाया और दूसरे कंधे पैर रूचि को, फिर बहार की तरफ दौड़ लगा दी, लेकिन जैसे hi बहार आया उसके सामने 100 से ज्यादा आदमी खड़े थे सबके हाथ में बंदूके थी,

वही बाबा जल्दी से हेलीकाप्टर की तरफ भगा और तुरंत कश्मीर के लिए निकल गया,

ह्रदय चारो तरफ से घिरा हुआ था, और उसके सामने खड़े थे वो दो आदमी जिनसे वो पहले भी टकरा चुक्का था, ह्रदय ने तुषार और रूचि को निचे उतरा अलका ने उन दोनों को सम्हाला,

वो दोनों आदमी ह्रदय की तरफ बढे और उस पैर हुम्ला कर दिया, ह्रदय मजबूर था वो हुम्ला नहीं कर सकता था उसे दर था कही सामने खड़े आदमी गोली न चले दे, और गोली अलका रूचि या तुषार को न लग जाये,

वो उन दोनों आदमियों से मर खाने लगा, उसके मुँह से खून आने लगा था, अलका तड़प रही थी, उसकी आँखों से आंसू आ रहे थे,

तभी एक आदमी बोलै- गुरु जी आ रहे हैं उनका हेलीकाप्टर निकल चुक्का ह, बस इसे कुछ देर रोक क्र रखना ह, फिर गुरु जी इसका फैसला कर्नेगे, और गुरु जी ने कहा ह इन सबको जिन्दा रखना ह, अगर ईनमसे से किसी को कुछ हुआ तो वो सबको मर देंगे,

उस आदमी की बात सुनकर ह्रदय के फेस पैर स्माइल आ गई, तभी पीछे से तीन लकड़ियों के छिलने की आवाज आई जिनके हाथो में बंदूके थी और वो चिलाती हुई गोलिया बरसाती हुई डोडी चली आ रही थी,

ाव्य जोर से चिल्ला कर- उठो और बताओ इनको तुम कोण हो और क्या कर सकते हो, ये भें के लोडे तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ सकते, इन सबकी माँ छोड़ दो आज,

गन पकडे आदमी तीनो लड़कियों की तरफ मुड़े तब तक ह्रदय मुस्कुराता हुआ उठा और एक गुंडे को पकड़ा और उसकी कमर में एक घुसा मारा उसके मुँह से खनन की फुहार निकल गई और वो वही मर गया, उसकी हालत देख क्र वह खड़े सभी लोग दहशत में आ गए, ह्रदय तुरंत उन दोनों आदमियों की तरफ डोडा और एक के मुँह पैर लात मरी और दूसरे के मुँह पैर घुसा, फिर फुर्ती से उनकी तलवार निक्कल ली, और तलवार लेकर बाकि गुंडों की तरफ दौड़ पड़ा, और जो सामने आ रहा था उसे एक hi वॉर चीरता हुआ चला जा रहा था,

वही ाव्य की गोलिया ख़तम हो गई थी, उसने अपनी ताकत का इस्तेमाल करना शुरू क्र दिया था, वह एक भी गुंडा ऐसा नहीं था जो ाव्य को छू भी सके, ाव्य का एक एक मुक्का किसी पहलवान को जमीन में लिटाने लायक था,

वही दृष्टि और दिया चुप चुप क्र घोलिया बरसा रही थी, बेचारियो के निशाने तो अच्छे नहीं थे लेकिन फिर भी वो गुंडों को डरा क्र तो रखे हुए थी, इसका फायदा ाव्य उठा रही थी, जिससे वो उन गुंडों को जाकर थोक दे रही थी, वही ह्रदय अपनी तलवार से चीरता हुआ चला जा रहा था,

तभी संभु और दूसरा साथी उठे और अलका रूचि और तुषार की तरफ बढे, उन्हें अपने कब्जे में लेना छाते थे, ह्रदय का धयान दूसरी तरफ था, लेकिन ाव्य वह पाहकः गई और उन दोनों के सामने कड़ी हो गई,

ाव्य ने उछाल क्र एक की छाती में लात मरी, वो गिरा तो नहीं लेकिन उसके कदम पीछे हैट गए थे,

ाव्य- खबर दर जो मेरी माँ और पापा की तरफ आँख उठाई, कसम अपनी माँ की लुंड काट क्र तुम दोनों की गांड में दे दूंगी,

वो दोनों ाव्य की तरफ बढे, ाव्य ने उन पैर हुम्ला किया लेकिन वो ाव्य से ज्यादा ताकतवर थे और दो थे, ाव्य कुछ hi देर में उनके कब्जे में आने लगी, उनमे से एक ने ाव्य के मुँह पैर एक घुसा मारा जिससे ाव्य दूर जाकर गिरी उसके मुँह से खून आ गया था, अलका ने दौड़ क्र ाव्य को देखा

अलका- तुम ठीक हो बेटी, ये जल्लाद हैं इनसे तुम नहीं लड़ पाओगी,

ाव्य की आँखों में आंसू थे, आज पहेली बार वो अपनी माँ की गॉड में थी, उसकी माँ उसका मुँह पैर लगा खून अपने पल्लू से पॉच रही थी,

तभी उस आदमी ने अलका के बाल पकडे, तो ाव्य के आँखे गुस्से में लाल हो गई वो जोर से चिल्लाई

ाव्य- hardayyyyyyyyyy इस भें के लोडे ने माँ को हाथ लगाया ह,

तभी ह्रदय किसी तूफ़ान की तरह दौड़ता हुआ आया और उछाल क्र अपना घुटना उस आदमी के हाथ में मारा वो आदमी दर्द में चीख पड़ा, उसका हाथ कोहनी पैर से टूट क्र लटक गया था,

तभी दूसरा आदमी ह्रदय की तरफ बढ़ा जिसे ह्रदय ने हवा में उठा लिया और जमीन में दे मारा, जैसे hi उन दोनों आमदियो की ऐसे हालत हुई तभी वह बचे हुए आदमियों ने हथियार फेंक दिए और बहार की तरफ दौड़ पड़े,

दृष्टि और दिया जल्दी से अलका रूचि और तुषार के पास पहुंची उन्हें सम्हालने लगी, इधर ह्रदय उन दोनों आमदियो को किसी जानवर की तरह मरे जा रहा था, जैसे शेर के सिकंजे में कोई सूअर आ गया हो जिसे वो अपने जबड़ो से चिर रहा हो,

ाव्य- इन्हे ऐसी सजा दो जिससे उस बाबा की रूह तक कैंप जाये,

ह्रदय ने उन दोनों की हालत ख़राब कर दी थी, ह्रदय की ताकत सच में बहुत बढ़ गई थी, जिसका अनुमान खुद ह्रदय को नहीं था,

जिस आदमी का हाथ तोडा था उसका दूसरा हाथ ह्रदय ने पकड़ा और उसकी छाती पैर पेअर रख क्र हाथ को खींचने लगा, उस आदमी के चीखने की आवाज चारो तरफ फ़ैल गई, ह्रदय ने उसका हाथ hi उखड लिया था, तभी दूसरे आदमी ने अपनी लात ह्रदय पैर चलाई जिसे ह्रदय ने पकड़ लिया और जमीन में गिरा लिया और दूसरे पेअर पैर पेअर रख क्र चीरने लगा,

वो आदमी दर्द से बिलबिला उठा, लेकिन ह्रदय के सर पैर जानूं सवार था और उसने उसकी टैंगो को बिच से चिर दिया था, वो दोनों आदमी वही मर गए, ह्रदय की आँखों में गुस्सा भरा हुआ था, वो जोर से चिल्लाया

ह्रदय चीखते हुए- ह कोई तो आओ, आज मैं बताऊंगा मेरे माँ बाप को हाथ लगाने पैर क्या होता ह, मेरी पत्नियों की तरफ किसी ने आँख भी उठाई तो ऐसे hi चिर दूंगा सबको,

ाव्य दौड़ क्र ह्रदय से लिपट गई

ाव्य- शांत हो जाओ अब कोई नहीं ह, शांत हो जाओ,

तभी बहार से हेलीकाप्टर की आवाज आई,

दिया- लगता ह बाबा यहाँ आ चुक्का ह, निकलते हैं यहाँ से

ह्रदय- नहीं मैं इस बाबा का खेल आज ख़तम कर दूंगा

ाव्य- नहीं ये सही समय नहीं ह, माँ पापा साथ ह उन्हें बचाना जरुरी ह पहले,

दृष्टि- ाव्य सही बोल रही ह, यहाँ से निकलो, उससे भिड़ने के लिए हमे पूरी तैयारी करनी होगी,

ह्रदय ने तुषार को अपने कंधे पैर उठाया और रूचि को ाव्य ने उठा लिया,

दिया और दृष्टि एक रस्ते की तरफ दौड़ पड़े,

दिया- ये रास्ता सेफ ह, हम इसी से अंदर आये थे,

सभी दिया के पीछे दौड़ पड़े, वो लोग एक छोटी सी पहाड़ी के उप्पेर निकले, वह एक रास्ता बना हुआ था, जो हवा आने जाने के लिए बना था,

इधर बाबा जैसे hi अड्डे पैर घुसा चारो तरफ अपने आदमियों को लाशे देख क्र उसकी आँखों में खून उतर आया था, और जब उसने अपने दोनों खास आदमियों की हालत देखि उसकी सच में गांड फैट गई थी, इन दोनों की ऐसी हालत करना नामुमकिन था,

रवि की तो आँखे फटी रह गई,

रवि- ऐसा कोण कर सकता ह

बाबा- वही लड़का, मैंने उसकी ताकत को काम आंक लिया था, उसने मुझे किसी की याद दिला दी, ऐसी ताकत मैंने बस दो बार देखि ह, ऐसा करने की ताकत बस उनमे थी, ये कहा से आ गया, ये हमारे लिए बहुत बड़ा खतरा ह,

तभी वह कुछ साइंटिस्ट आ गए,

सब एक साथ- गुरु जी वो लोग उस रस्ते से भागे हैं, 1 लड़का और तीन लड़किया हैं और साथ में हमारे तीनो कैदी भी हैं,

रवि तुरंत अपने आदमी लेकर उस तरफ डोडा,

बाबा बस वह का नजारा देखे जा रहा था, तभी उसे कुछ याद आया और वो एक दिशा में दौड़ पड़ा, उसे दौड़ता हुआ देख सभी चौंक गए,

बाबा एक कमरे के पास पंहुचा और दरवाजा खोल क्र अंदर घुस गया, उसके आदमी बहार खड़े रह गए, ये एक ऐसा कमरा था जिसमे किसी को जाने की अनुमति नहीं थी, बाबा के अलावा उसमे आज तक कोई नहीं गया था,

रवि उस रस्ते से बहार निकला लेकिन काफी देर हो चुकी थी वो लोग काफी आगे निकल चुके थे, और इस वक़्त रवि के पास इतने आदमी भी नहीं थे जो उनका पीछा कर सके और पकड़ लिया तो ह्रदय का सामना कर सके, इसलिए वो वापस आ गया,

बाकि आदमियों के साथ रवि भी उस कमरे के सामने खड़ा हो गया,

इधर ह्रदय और बाकि सब अपनी गाड़ी के पास पहचुहे, धुप खिली हुई थी, ठण्ड तो थी लेकिन सब के अंदर एक जानूं और जोश था जिसकी वजह से उन्हें अहसास नहीं हो रहा था,

ह्रदय ने सबको गाड़ी में बैठाया और गाड़ी को डोडा दिया अपने मंजिल की तरफ, वो लोग जैसे hi नेटवर्क में आये उनके फ़ोन पैर अलर्ट संस आने लगे थे, वही संस यहाँ चंडीगढ़ में अंजलि वर्षा वन्य के फ़ोन पैर भी पाहकः गए, की वो लोग नेटवर्क में आ गए हैं,

वन्य ने तुरंत फ़ोन मिलाया जो ाव्य ने उठाया और स्पीकर पैर दाल लिया,

वन्य- ाव्य कहा हो तुम, कैसे हो तुम लोग सब ठीक हो न

ाव्य- हम ठीक हैं, हम आ रहे हैं

अंजलि ने वन्य के हाथ से फ़ोन ले लिया और स्पीकर पैर डाला

अनजलि- ाव्य बेटी तुम्हे वो मिले

ाव्य- है माँ हमने उन्हें ढूंढ लिया,

अंजलि का गाला भर आया वो थरथराती आवाज में बोली- फिर से बोल फ़ी से बोल

ाव्य- है माँ हमने उन्हें ढूंढ लिया वो हमारे साथ हैं, हम उन्हें लेकर आ रहे हैं,

तभी अंजलि की आवाज पहचान क्र अलका बोल पड़ी,

अलका- माँ

अलका की आवाज सुनकर वर्षा और अंजलि दोनों का रोना निकल गया,

अंजलि- अलका मेरी बच्ची

अलका- माँ मैं आ रही हु

अंजलि- जल्दी आजा मेरी बच्ची जल्दी आजा, ाव्य जल्दी से अपनी माँ को लेकर आ जा

अलका ने ाव्य की तरफ देखा और अलका की आँख भर आई

अलका- मेरी बेटी

अंजलि- है अलका ाव्य तेरी hi बेटी ह,

अलका तुरंत ाव्य से लिपट गई, और दोनों माँ बेतिया रोने लगी, सबकी आँखे भर आई थी,

ह्रदय पूरी रफ़्तार से गाड़ी दौड़ाये जा रहा था, वन्य ने उन्हें अपनी लोकेशन बता दी,

फ़ोन दिया ने ले लिया,

दिया- अंजलि माँ हमे डॉक्टर्स चाहिए होंगे, आप पूरी टीम तैयार कीजिये, पापा और रूचि माँ होश में नहीं हैं, और हम नहीं जानते उन्हें हुआ क्या ह, इसलिए पूरी टीम तैयार रखिये,

अंजलि- तुम लोग आ जाओ मैं पूरी टीम के साथ तैयार मिलूंगी,

वही सोनिया और शाक्षी बंधे हुए थे, सोनिया लगातार खुद को छुड़वाने की कोशिश कर रही थी, और वो उसमे सफल हो भी गई, उसका हाथ निकल गया और उसने खुद को आजाद क्र लिया, पहले तो वो खुद hi भागी तभी शाक्षी बोल पड़ी

शाक्षी- आरी हरामजादी मेरे साथ अब भी धोखा कर रही ह

सोनिया- अरे नहीं मैं तो रास्ता देख रही थी,

सोनिया वापस मुड़ी और शाक्षी को खोल दिया और दोनों वह से भाग निकली,

वही कश्मीर में काफी देर बाद चिरंजीवी उस कमरे से बहार आया उसके चेरे के रंग उदा हुआ था, अपने आप में hi कुछ बड़बड़ा रहा था,

सब खामोश खड़े थे,

रवि- क्या हुआ गुरु जी सब ठीक ह न,

बाबा ने गुस्से में रवि की तरफ देखा- तुझे ये सब ठीक लग रहा ह क्या, सब बर्बाद हो रहा ह, मेरे आदमी मरे गए, और वो मुझे

इतना बोल क्र बाबा चुप हो गया, रवि भी खामोश हो गया था, कुछ देर बाद बाबा फिर बोलै

बाबा- रवि तुझे **** जाना होगा और वह तुझे एक तांत्रिक मिलेंगे उनसे मिलना होगा और एक सन्देश उन्हें देना होगा,

रवि- ठीक ह बाबा लेकिन वो ह कोण

बाबा- उनके सामने कोई सवाल मत करना बस जो मैं बोल रहा हु वो सन्देश उन्हें देना ह, अगर कुछ कहा तो तेरे प्राण वही चीन लेंगे वो,

रवि- जी समझ गया, लेकिन आप तो बता सकते हो वो कोण हैं,

बाबा- मेरे पास भी उनके बारे में बात करने का अधिकार नहीं ह, समझ ले वो मेरे भी गुरु हैं, उनकी भी वही जिम्मेदारी ह जो मेरी ह, वो अपनी जिमेदारी में असफल हुए थे लेकिन मैं असफल नहीं होना चाहता, तू उनसे मिल और उन्हें सन्देश पंहुचा, तब तक मैं यहाँ सब ठीक करता हु, हमे सफल होना ह किसी भी कीमत पैर सफल होना ह,

रवि- ठीक ह गुरु जी मैं निकलता हु, रवि वह से निकल गया,

बाबा अपने आदमियों से- एक टीम चंडीगढ़ भेजो और सभी हॉस्पिटल में अपने आदमी लगाओ, उन सबको इलाज की जरुरत ह वो लोग हॉस्पिटल जरूर जायेंगे, इसलिए मुझे साडी खबर चाहिए,

आदमी- जी गुरु जी अभी लगता हैं,

बाबा- और इस अड्डे को तबाह कर दो, यहाँ कुछ नहीं मिलना चाहिए आज के बाद ये पूरी तरह भर दो, बस ये कमरा सेफ रहेगा और यहाँ आने का रास्ता बदलो,

आदमी- ठीक ह गुरु जी,

बाबा खुद से hi- हॉस्पिटल जाकर भी उसे नहीं बचा पायेगा तू लड़के

ह्रदय सबको लेकर अंजलि के पास पहुंच गया, सभी पलके बिछाये उनके िटजर में खड़े हुए थे, जैसे hi सब बहार निकले वर्षा दौड़ क्र अलका से लिपट गई, अंजलि तुषार के पास पहुंची लेकिन तुषार और रूचि दोनों बेहोश थे, अंजलि रोने लगी, ह्रदय ने उसे सम्हाला,

तुरंत सबको अंदर लेकर गए, जहा डॉक्टर्स खड़े हुए थे, और पूरा सेटअप लगया हुआ था, अंजलि ने पुरे डॉक्टर्स की टीम और जरुरत का सब सामान वही फार्महाउस पैर मंगवा दिया था,



तुषार की हालत देख क्र सबकी साँस सी अटकी हुई थी, डॉक्टर्स तुषार और रूचि को चेक कर रहे थे, वही अलका अंजलि से लिपटी हुई थी, अंजलि उसे साइन से लगाए रोये जा रही थी, वन्य ने बाकि परिवार वालो को भी खबर भेज दी थी की सभी मिल चुके हैं,
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