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इसका मतलब था जीत हमारी हुई थी रम्भा ने अब भी मुझे कस क्र जकड़ा हुआ था और उसकी आँखे बंद थी.
मई (प्यार से ) : रम्भा आँखे खोलो देखो वो सब भाग गए है.
फिर रम्भा ने धीरे से अपनी आँखे खोलो और इधर उदर देखा जब उसे कोई नहीं दिखा तब उसने मेरे होठो पर धीरे से छोटा सा किश किया और मेरी बहो आजाद होकर दूर जाकर ाँपा चेहरा दूसरी तरफ क्र लिया.
मई : रम्भा मेरी जान ये क्या था अगर किश करना hi है तो ठीक से करो न.
रम्भा : नहीं मुझे सरम आ रही है पता नहीं मैंने कैसे ये क्र दिया.
मई : तुम्हे सरम भी आती है दिखाओ दिखो अपना चेहरा तो दिखाओ मई भी तो देखु तुम सरमते हुए कैसी लगती हो .
हम अभी बात hi क्र रहे थे की उतने में पुरे बस्ती वाले खुसी मानते हुए हमारी तरफ आने लगे, स्नेहा तो दौड़ते हुए आयी और मुझे अपने गले से लगा लिया और किश करने लगी थोड़ी देर तक तो मैंने भी साथ दिया फिर बस्ती वालो को देख क्र स्नेहा को पीछे हटा दिया और बोलै-
मई : क्या क्र रही हो स्नेहा सब यही पर है.
स्नेहा सॉरी बोल और शर्मा गयी, फिर मुखिया जी मेरे पास आये.
मुखिया : वह बीटा वह सच में उस ऊपर वाले ने तुम्हे हमलोगो को दानवो से मुक्त करने के लिए भेजा है.
मई : मुखिया जी मुझे आप से कुछ पूछना है .
मुखिया : आइये घर में चल क्र बात करते है.
फिर सभी लोग हमारे आगे चलने लगे मई पीछे hi था मई रम्भा का हाथ पकड़ क्र उसे भी पीछे क्र लिया और धीरे से उसके कण में खा देखा अभी स्नेहा में hi किया उसे कहते है किश करना.
रम्भा : मई अभी इतनी भी बेसरम नहीं हुई हु लेकिन लगता है तुम्हारे साथ रह क्र हो जाउंगी.
मई : सही जा रही हो देखना एक दिन बहुत आगे जाओगी.
उसके बाद हम लोग मुखिया जी के साथ उनके घर आ गए प्रेमलता हम लोगो के लिए पानी लेकर आयी तो मई प्रेमलता को छेड़ते हुए पूछा
मई : मुखियें की ये आपको क्या हो गया आप ऐसे लंगड़ा क्र क्यों चल रही है .
प्रेमलता : वो मई सुबह घर से निकली थी न तो नीचे मोटा सा कटा घुस गया था.
मई : ओह जायदा तकलीफ no नहीं हुई न जब कांटा घुसा था तब .
प्रेमलता : तकलीफ तो बहुत हुई जब कांटा घुसा था तब खून भी निकला अब ठीक है .
जब मई प्रेमलता से बात क्र रहा था तब स्नेहा मुझे hi घर रही थी मई उसकी तरफ देखा फिर चुप चाप सर नीचे क्र लिया.
मुखिया : है तो टाइगर बीटा क्या पूछना चाहते थे पूछो.
मई : मुखिया hi ये दानवो की महारानी कोण है और उसको आप लोगो सी क्या चाहिए.
मुखिया hi कुछ देर तक खामोश थे फिर उन्होंने बोलना स्टार्ट किया बीटा दानवो की महारानी के बारे में मुझे भी जायदा पता नहीं है और सुना जरूर है दादा परदादाओ बे बताया था की वो लोगो को अपनी आँखों से सम्मोहित क्र के उसकी आयु चुरा लेती है और नारियो से उसकी खूबसूरती जिस कारन वो बाबत hi सुन्दर और हमेसा hi जवान लगती है इस सेट जायदा यह बस्ती में किसी को नहीं पता अगर तुम्हे उसके बारे में और जानना है तो तुम्हे हमारे गुरु देव hi से मिलना होगा वो hi तुम्हे पूरी बात बता सकते.
मई : और ये गुरु देव hi मुझे खा मिलेंगे.
मुखिया : वो तुम्हे मिलेंगे पुराणी मंदिर में जिसका रास्ता है नदी हम कल वह और जायेंगे, आस्क आप लोग आराम और लो .
फिर कुछ खास नहीं हुआ रात को सोने के टाइम मुझे नींद नहीं आ रही थी ान चस्का तो लग hi चूका था मई खिड़की की तरफ बार बार देख रहा था अब आएगी प्रेमलता अब आएगी मगर वो नहीं आयी फिर मैंने सोचा की यह मेरे बाजु में hi दो दो जवान लड़किया सोइ हुई है तो मेल इधर उधर क्यों लेकिन मैंने ये भी सोचा की इन दोनों का भी ये पहली बार होगा तो कुछ स्पेशल तो बनता है hi यह सायद सम्भब नहीं होगा लेकिन ऊपर ऊपर से तो क्र hi सकता हु यर सोच क्र मई स्नेहा जहा सोइ हुई थी वह पर मई भी पहुंच गया और पीछे सी जाकर मैंने कास क्र उसे जकड लिया स्नेहा हड़बड़ा क्र उठ गयी और थोड़ा जोर से पीछे की तरफ देखते हुए खा कोण है !
मई : मई हु टाइगर धीरे बोलो यह रम्भा भी सोइ हुई है.
लेकिन यह रम्भा सोइ हुई थी अब स्नेहा के आवाज से उठ गयी थी कमरे में हलकी रोशनी थी क्यों की एक दिया जल रहा जो कमरे में हल्का प्रकाश फैला रहा था.
स्नेहा : क्या हुआ तुम यह क्यों आये ,
मई : मुझे न दर लग रहा था.
स्नेहा : क्या ! क्या बोलै तुमने दर लग रहा है hi hi hi क्यों मजाक क्र थे हो
मई : मजाक तो तुन करती हो एक पति क्यों आता है रात में अपनी पत्नी के पास .
स्नेहा : ओह मई तो कब सी इस पल की रह देख रही थी लेकिन इस रूम में रम्भा भी है.
मई : तुम जायदा आवाज मत करना और मई यह जायदा कुछ नहीं करूँगा क्यों की अपनी फर्स्ट नाईट स्पेशल होगी इसलिए यह सिर्फ मजा लो सजा तो बाद में मिलेगी
फिर मैंने स्नेहा को किश करना स्टार्ट किया और उसके कपड़ो के ऊपर से hi बूब्स को हलके हलके दबाने लगा शहहह क्या अहसास था एक डैम नरम मुलया पहली बार मई इनको छू रहा था ,कुछ देर किश करने के बाद मैंने किश तोड़ी और स्नेहा के कपड़ो को ऊपर किया और ब्रा को निचे खिसकाया दिए की हलकी रोशनी में निप्पल्स साफ दिखाई देने लगे थे फिर मैंने अपनी जीभ से निप्पल को कुरेदने लगा जिसका सीधा असर स्नेहा पर हुआ वो सिसक उठी कुछ देर तक मई निप्पल को कुरेदने और चाटने में लगाया जिससे निप्पल खड़े और गीले हो गए, दूसरे निप्पल को भी मैंने ऐसा hi किया फिर उसको मुँह में भर क्र चूसने लगा और दूसरे को दबाने लगा
स्नेहा : सीईई जोर से चुसोऊ आह्हः बहुत अच्छा लग रहा है आह्हः काटो नहीं न मई कभी एक बूब्स को चुस्त तो कभी दूसरे को स्नेहा की सिसकिया तो रुक hi नहीं रही थी.
स्नेहा : आह्हः मेरी जान कुछ करो न नहीं क्यों तड़पा रहे होओओओओ.
मैंने देखा की स्नेहा बहुत गरम हो गयी है इसको ठंडा करना भी बहुत जरुरी था नहीं तो ये कुछ भी क्र सकती थी इसलिए मैंने उसकी सलवार का नाडा खोला और निचे खिसकाया साथ में पैंटी भी थोड़ी निचे क्र दिया फिर मई स्नेहा की छूट को छुआ तो पता चला की यह तो नदिया बाह रही थी उसके छूट और हलके हलके बल थे जो बहुत hi नरम मुलया लग रहे थे फिर मैंने उसके छूट को धीरे धीरे रगड़ना स्टार्ट किया.
स्नेहा: हा ऐसे होई करते रो बहुत अच्छा लग रहा है अह्ह्ह्हह
कुछ देर तक उसकी छूट को रगड़ने के बाद स्नेहा का ससिर अकड़ गया और झटके ले ले क्र उसने अपना पानी निकल दिया और वो निढाल हो गयी फिर मैंने उसके कपडे सही किये और वो सो गयी
क्यों की मैंने कुछ और hi देखा था इसलिए स्नेहा को मैंने सोने दिया मई सोच रहा था की यह मई और स्नेहा hi जगे हुए है और मई गलत था क्यों की यह कोई और भी जगा हुआ था
इसका मतलब था जीत हमारी हुई थी रम्भा ने अब भी मुझे कस क्र जकड़ा हुआ था और उसकी आँखे बंद थी.
मई (प्यार से ) : रम्भा आँखे खोलो देखो वो सब भाग गए है.
फिर रम्भा ने धीरे से अपनी आँखे खोलो और इधर उदर देखा जब उसे कोई नहीं दिखा तब उसने मेरे होठो पर धीरे से छोटा सा किश किया और मेरी बहो आजाद होकर दूर जाकर ाँपा चेहरा दूसरी तरफ क्र लिया.
मई : रम्भा मेरी जान ये क्या था अगर किश करना hi है तो ठीक से करो न.
रम्भा : नहीं मुझे सरम आ रही है पता नहीं मैंने कैसे ये क्र दिया.
मई : तुम्हे सरम भी आती है दिखाओ दिखो अपना चेहरा तो दिखाओ मई भी तो देखु तुम सरमते हुए कैसी लगती हो .
हम अभी बात hi क्र रहे थे की उतने में पुरे बस्ती वाले खुसी मानते हुए हमारी तरफ आने लगे, स्नेहा तो दौड़ते हुए आयी और मुझे अपने गले से लगा लिया और किश करने लगी थोड़ी देर तक तो मैंने भी साथ दिया फिर बस्ती वालो को देख क्र स्नेहा को पीछे हटा दिया और बोलै-
मई : क्या क्र रही हो स्नेहा सब यही पर है.
स्नेहा सॉरी बोल और शर्मा गयी, फिर मुखिया जी मेरे पास आये.
मुखिया : वह बीटा वह सच में उस ऊपर वाले ने तुम्हे हमलोगो को दानवो से मुक्त करने के लिए भेजा है.
मई : मुखिया जी मुझे आप से कुछ पूछना है .
मुखिया : आइये घर में चल क्र बात करते है.
फिर सभी लोग हमारे आगे चलने लगे मई पीछे hi था मई रम्भा का हाथ पकड़ क्र उसे भी पीछे क्र लिया और धीरे से उसके कण में खा देखा अभी स्नेहा में hi किया उसे कहते है किश करना.
रम्भा : मई अभी इतनी भी बेसरम नहीं हुई हु लेकिन लगता है तुम्हारे साथ रह क्र हो जाउंगी.
मई : सही जा रही हो देखना एक दिन बहुत आगे जाओगी.
उसके बाद हम लोग मुखिया जी के साथ उनके घर आ गए प्रेमलता हम लोगो के लिए पानी लेकर आयी तो मई प्रेमलता को छेड़ते हुए पूछा
मई : मुखियें की ये आपको क्या हो गया आप ऐसे लंगड़ा क्र क्यों चल रही है .
प्रेमलता : वो मई सुबह घर से निकली थी न तो नीचे मोटा सा कटा घुस गया था.
मई : ओह जायदा तकलीफ no नहीं हुई न जब कांटा घुसा था तब .
प्रेमलता : तकलीफ तो बहुत हुई जब कांटा घुसा था तब खून भी निकला अब ठीक है .
जब मई प्रेमलता से बात क्र रहा था तब स्नेहा मुझे hi घर रही थी मई उसकी तरफ देखा फिर चुप चाप सर नीचे क्र लिया.
मुखिया : है तो टाइगर बीटा क्या पूछना चाहते थे पूछो.
मई : मुखिया hi ये दानवो की महारानी कोण है और उसको आप लोगो सी क्या चाहिए.
मुखिया hi कुछ देर तक खामोश थे फिर उन्होंने बोलना स्टार्ट किया बीटा दानवो की महारानी के बारे में मुझे भी जायदा पता नहीं है और सुना जरूर है दादा परदादाओ बे बताया था की वो लोगो को अपनी आँखों से सम्मोहित क्र के उसकी आयु चुरा लेती है और नारियो से उसकी खूबसूरती जिस कारन वो बाबत hi सुन्दर और हमेसा hi जवान लगती है इस सेट जायदा यह बस्ती में किसी को नहीं पता अगर तुम्हे उसके बारे में और जानना है तो तुम्हे हमारे गुरु देव hi से मिलना होगा वो hi तुम्हे पूरी बात बता सकते.
मई : और ये गुरु देव hi मुझे खा मिलेंगे.
मुखिया : वो तुम्हे मिलेंगे पुराणी मंदिर में जिसका रास्ता है नदी हम कल वह और जायेंगे, आस्क आप लोग आराम और लो .
फिर कुछ खास नहीं हुआ रात को सोने के टाइम मुझे नींद नहीं आ रही थी ान चस्का तो लग hi चूका था मई खिड़की की तरफ बार बार देख रहा था अब आएगी प्रेमलता अब आएगी मगर वो नहीं आयी फिर मैंने सोचा की यह मेरे बाजु में hi दो दो जवान लड़किया सोइ हुई है तो मेल इधर उधर क्यों लेकिन मैंने ये भी सोचा की इन दोनों का भी ये पहली बार होगा तो कुछ स्पेशल तो बनता है hi यह सायद सम्भब नहीं होगा लेकिन ऊपर ऊपर से तो क्र hi सकता हु यर सोच क्र मई स्नेहा जहा सोइ हुई थी वह पर मई भी पहुंच गया और पीछे सी जाकर मैंने कास क्र उसे जकड लिया स्नेहा हड़बड़ा क्र उठ गयी और थोड़ा जोर से पीछे की तरफ देखते हुए खा कोण है !
मई : मई हु टाइगर धीरे बोलो यह रम्भा भी सोइ हुई है.
लेकिन यह रम्भा सोइ हुई थी अब स्नेहा के आवाज से उठ गयी थी कमरे में हलकी रोशनी थी क्यों की एक दिया जल रहा जो कमरे में हल्का प्रकाश फैला रहा था.
स्नेहा : क्या हुआ तुम यह क्यों आये ,
मई : मुझे न दर लग रहा था.
स्नेहा : क्या ! क्या बोलै तुमने दर लग रहा है hi hi hi क्यों मजाक क्र थे हो
मई : मजाक तो तुन करती हो एक पति क्यों आता है रात में अपनी पत्नी के पास .
स्नेहा : ओह मई तो कब सी इस पल की रह देख रही थी लेकिन इस रूम में रम्भा भी है.
मई : तुम जायदा आवाज मत करना और मई यह जायदा कुछ नहीं करूँगा क्यों की अपनी फर्स्ट नाईट स्पेशल होगी इसलिए यह सिर्फ मजा लो सजा तो बाद में मिलेगी
फिर मैंने स्नेहा को किश करना स्टार्ट किया और उसके कपड़ो के ऊपर से hi बूब्स को हलके हलके दबाने लगा शहहह क्या अहसास था एक डैम नरम मुलया पहली बार मई इनको छू रहा था ,कुछ देर किश करने के बाद मैंने किश तोड़ी और स्नेहा के कपड़ो को ऊपर किया और ब्रा को निचे खिसकाया दिए की हलकी रोशनी में निप्पल्स साफ दिखाई देने लगे थे फिर मैंने अपनी जीभ से निप्पल को कुरेदने लगा जिसका सीधा असर स्नेहा पर हुआ वो सिसक उठी कुछ देर तक मई निप्पल को कुरेदने और चाटने में लगाया जिससे निप्पल खड़े और गीले हो गए, दूसरे निप्पल को भी मैंने ऐसा hi किया फिर उसको मुँह में भर क्र चूसने लगा और दूसरे को दबाने लगा
स्नेहा : सीईई जोर से चुसोऊ आह्हः बहुत अच्छा लग रहा है आह्हः काटो नहीं न मई कभी एक बूब्स को चुस्त तो कभी दूसरे को स्नेहा की सिसकिया तो रुक hi नहीं रही थी.
स्नेहा : आह्हः मेरी जान कुछ करो न नहीं क्यों तड़पा रहे होओओओओ.
मैंने देखा की स्नेहा बहुत गरम हो गयी है इसको ठंडा करना भी बहुत जरुरी था नहीं तो ये कुछ भी क्र सकती थी इसलिए मैंने उसकी सलवार का नाडा खोला और निचे खिसकाया साथ में पैंटी भी थोड़ी निचे क्र दिया फिर मई स्नेहा की छूट को छुआ तो पता चला की यह तो नदिया बाह रही थी उसके छूट और हलके हलके बल थे जो बहुत hi नरम मुलया लग रहे थे फिर मैंने उसके छूट को धीरे धीरे रगड़ना स्टार्ट किया.
स्नेहा: हा ऐसे होई करते रो बहुत अच्छा लग रहा है अह्ह्ह्हह
कुछ देर तक उसकी छूट को रगड़ने के बाद स्नेहा का ससिर अकड़ गया और झटके ले ले क्र उसने अपना पानी निकल दिया और वो निढाल हो गयी फिर मैंने उसके कपडे सही किये और वो सो गयी
क्यों की मैंने कुछ और hi देखा था इसलिए स्नेहा को मैंने सोने दिया मई सोच रहा था की यह मई और स्नेहा hi जगे हुए है और मई गलत था क्यों की यह कोई और भी जगा हुआ था