Incest The Tiger - Page 15 - SexBaba
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Incest The Tiger

अपडेट 100

इसका मतलब था जीत हमारी हुई थी रम्भा ने अब भी मुझे कस क्र जकड़ा हुआ था और उसकी आँखे बंद थी.

मई (प्यार से ) : रम्भा आँखे खोलो देखो वो सब भाग गए है.

फिर रम्भा ने धीरे से अपनी आँखे खोलो और इधर उदर देखा जब उसे कोई नहीं दिखा तब उसने मेरे होठो पर धीरे से छोटा सा किश किया और मेरी बहो आजाद होकर दूर जाकर ाँपा चेहरा दूसरी तरफ क्र लिया.

मई : रम्भा मेरी जान ये क्या था अगर किश करना hi है तो ठीक से करो न.

रम्भा : नहीं मुझे सरम आ रही है पता नहीं मैंने कैसे ये क्र दिया.

मई : तुम्हे सरम भी आती है दिखाओ दिखो अपना चेहरा तो दिखाओ मई भी तो देखु तुम सरमते हुए कैसी लगती हो .

हम अभी बात hi क्र रहे थे की उतने में पुरे बस्ती वाले खुसी मानते हुए हमारी तरफ आने लगे, स्नेहा तो दौड़ते हुए आयी और मुझे अपने गले से लगा लिया और किश करने लगी थोड़ी देर तक तो मैंने भी साथ दिया फिर बस्ती वालो को देख क्र स्नेहा को पीछे हटा दिया और बोलै-

मई : क्या क्र रही हो स्नेहा सब यही पर है.

स्नेहा सॉरी बोल और शर्मा गयी, फिर मुखिया जी मेरे पास आये.

मुखिया : वह बीटा वह सच में उस ऊपर वाले ने तुम्हे हमलोगो को दानवो से मुक्त करने के लिए भेजा है.

मई : मुखिया जी मुझे आप से कुछ पूछना है .

मुखिया : आइये घर में चल क्र बात करते है.

फिर सभी लोग हमारे आगे चलने लगे मई पीछे hi था मई रम्भा का हाथ पकड़ क्र उसे भी पीछे क्र लिया और धीरे से उसके कण में खा देखा अभी स्नेहा में hi किया उसे कहते है किश करना.

रम्भा : मई अभी इतनी भी बेसरम नहीं हुई हु लेकिन लगता है तुम्हारे साथ रह क्र हो जाउंगी.

मई : सही जा रही हो देखना एक दिन बहुत आगे जाओगी.

उसके बाद हम लोग मुखिया जी के साथ उनके घर आ गए प्रेमलता हम लोगो के लिए पानी लेकर आयी तो मई प्रेमलता को छेड़ते हुए पूछा

मई : मुखियें की ये आपको क्या हो गया आप ऐसे लंगड़ा क्र क्यों चल रही है .

प्रेमलता : वो मई सुबह घर से निकली थी न तो नीचे मोटा सा कटा घुस गया था.

मई : ओह जायदा तकलीफ no नहीं हुई न जब कांटा घुसा था तब .

प्रेमलता : तकलीफ तो बहुत हुई जब कांटा घुसा था तब खून भी निकला अब ठीक है .

जब मई प्रेमलता से बात क्र रहा था तब स्नेहा मुझे hi घर रही थी मई उसकी तरफ देखा फिर चुप चाप सर नीचे क्र लिया.

मुखिया : है तो टाइगर बीटा क्या पूछना चाहते थे पूछो.

मई : मुखिया hi ये दानवो की महारानी कोण है और उसको आप लोगो सी क्या चाहिए.

मुखिया hi कुछ देर तक खामोश थे फिर उन्होंने बोलना स्टार्ट किया बीटा दानवो की महारानी के बारे में मुझे भी जायदा पता नहीं है और सुना जरूर है दादा परदादाओ बे बताया था की वो लोगो को अपनी आँखों से सम्मोहित क्र के उसकी आयु चुरा लेती है और नारियो से उसकी खूबसूरती जिस कारन वो बाबत hi सुन्दर और हमेसा hi जवान लगती है इस सेट जायदा यह बस्ती में किसी को नहीं पता अगर तुम्हे उसके बारे में और जानना है तो तुम्हे हमारे गुरु देव hi से मिलना होगा वो hi तुम्हे पूरी बात बता सकते.

मई : और ये गुरु देव hi मुझे खा मिलेंगे.

मुखिया : वो तुम्हे मिलेंगे पुराणी मंदिर में जिसका रास्ता है नदी हम कल वह और जायेंगे, आस्क आप लोग आराम और लो .

फिर कुछ खास नहीं हुआ रात को सोने के टाइम मुझे नींद नहीं आ रही थी ान चस्का तो लग hi चूका था मई खिड़की की तरफ बार बार देख रहा था अब आएगी प्रेमलता अब आएगी मगर वो नहीं आयी फिर मैंने सोचा की यह मेरे बाजु में hi दो दो जवान लड़किया सोइ हुई है तो मेल इधर उधर क्यों लेकिन मैंने ये भी सोचा की इन दोनों का भी ये पहली बार होगा तो कुछ स्पेशल तो बनता है hi यह सायद सम्भब नहीं होगा लेकिन ऊपर ऊपर से तो क्र hi सकता हु यर सोच क्र मई स्नेहा जहा सोइ हुई थी वह पर मई भी पहुंच गया और पीछे सी जाकर मैंने कास क्र उसे जकड लिया स्नेहा हड़बड़ा क्र उठ गयी और थोड़ा जोर से पीछे की तरफ देखते हुए खा कोण है !

मई : मई हु टाइगर धीरे बोलो यह रम्भा भी सोइ हुई है.

लेकिन यह रम्भा सोइ हुई थी अब स्नेहा के आवाज से उठ गयी थी कमरे में हलकी रोशनी थी क्यों की एक दिया जल रहा जो कमरे में हल्का प्रकाश फैला रहा था.

स्नेहा : क्या हुआ तुम यह क्यों आये ,

मई : मुझे न दर लग रहा था.

स्नेहा : क्या ! क्या बोलै तुमने दर लग रहा है hi hi hi क्यों मजाक क्र थे हो

मई : मजाक तो तुन करती हो एक पति क्यों आता है रात में अपनी पत्नी के पास .

स्नेहा : ओह मई तो कब सी इस पल की रह देख रही थी लेकिन इस रूम में रम्भा भी है.

मई : तुम जायदा आवाज मत करना और मई यह जायदा कुछ नहीं करूँगा क्यों की अपनी फर्स्ट नाईट स्पेशल होगी इसलिए यह सिर्फ मजा लो सजा तो बाद में मिलेगी

फिर मैंने स्नेहा को किश करना स्टार्ट किया और उसके कपड़ो के ऊपर से hi बूब्स को हलके हलके दबाने लगा शहहह क्या अहसास था एक डैम नरम मुलया पहली बार मई इनको छू रहा था ,कुछ देर किश करने के बाद मैंने किश तोड़ी और स्नेहा के कपड़ो को ऊपर किया और ब्रा को निचे खिसकाया दिए की हलकी रोशनी में निप्पल्स साफ दिखाई देने लगे थे फिर मैंने अपनी जीभ से निप्पल को कुरेदने लगा जिसका सीधा असर स्नेहा पर हुआ वो सिसक उठी कुछ देर तक मई निप्पल को कुरेदने और चाटने में लगाया जिससे निप्पल खड़े और गीले हो गए, दूसरे निप्पल को भी मैंने ऐसा hi किया फिर उसको मुँह में भर क्र चूसने लगा और दूसरे को दबाने लगा

स्नेहा : सीईई जोर से चुसोऊ आह्हः बहुत अच्छा लग रहा है आह्हः काटो नहीं न मई कभी एक बूब्स को चुस्त तो कभी दूसरे को स्नेहा की सिसकिया तो रुक hi नहीं रही थी.

स्नेहा : आह्हः मेरी जान कुछ करो न नहीं क्यों तड़पा रहे होओओओओ.

मैंने देखा की स्नेहा बहुत गरम हो गयी है इसको ठंडा करना भी बहुत जरुरी था नहीं तो ये कुछ भी क्र सकती थी इसलिए मैंने उसकी सलवार का नाडा खोला और निचे खिसकाया साथ में पैंटी भी थोड़ी निचे क्र दिया फिर मई स्नेहा की छूट को छुआ तो पता चला की यह तो नदिया बाह रही थी उसके छूट और हलके हलके बल थे जो बहुत hi नरम मुलया लग रहे थे फिर मैंने उसके छूट को धीरे धीरे रगड़ना स्टार्ट किया.

स्नेहा: हा ऐसे होई करते रो बहुत अच्छा लग रहा है अह्ह्ह्हह

कुछ देर तक उसकी छूट को रगड़ने के बाद स्नेहा का ससिर अकड़ गया और झटके ले ले क्र उसने अपना पानी निकल दिया और वो निढाल हो गयी फिर मैंने उसके कपडे सही किये और वो सो गयी

क्यों की मैंने कुछ और hi देखा था इसलिए स्नेहा को मैंने सोने दिया मई सोच रहा था की यह मई और स्नेहा hi जगे हुए है और मई गलत था क्यों की यह कोई और भी जगा हुआ था
 
अपडेट 101

कुछ देर तक उसकी छूट को रगड़ने के बाद स्नेहा का ससिर अकड़ गया और झटके ले ले क्र उसने अपना पानी निकल दिया और वो निढाल हो गयी फिर मैंने उसके कपडे सही किये और वो सो गयी

क्यों की मैंने कुछ और hi देखा था इसलिए स्नेहा को मैंने सोने दिया मई सोच रहा था की यह मई और स्नेहा hi जगे हुए है और मई गलत था क्यों की यह कोई और भी जगा हुआ था,

वो कोई और नहीं रम्भा थी जब मई स्नेहा के छूट को रगड़ रहा था तो जो भी हमे देख क्र कपडे के ऊपर सी hi अपनी छूट को सहला रही थी जिसे मैंने देख लिया था .

मई स्नेहा के पास सी उठ और रम्भा के पास गया और उसका हाथ को पकड़ और धीरे सी उसका नाम पुकारा और उसने कोई जवाब नहीं दिया मुझे पता था वो जग रही है इसलिए मई अपना हाथ उसके एक बूब और रख क्र हल्का सा दबा दिया, जिससे रम्भा के सरीर में थोड़ी कम्पन सी हुई .

मई : रम्भा अब अपनी आँखे खोल भी लो मुझ पता है तुम जग रही हो .

रम्भा बे अपनी आँखे और हॉट वे बंद और ली ,

मई : अगर तुम्हे भी स्नेहा जैसा मजा लेना है तो अपनी आँखे kholo,nhi तो मेल चला जाऊंगा .

रम्भा ने धीरे से अपनी आँखे खोली.

रम्भा ( धीरे से): और दीदी जग गयी तो क्या होगा.

मई : नहीं वो अब नहीं जागेगी क्यों की उसको अभी के लिए सन्ति मिल गयी है , तुम बताओ तैयार हो न मजे करने के लिए .

रम्भा में सर हिला क्र अपनी सहनुभूति दी.

मई : बदले में तुम्हे भी कुछ करना होगा मेरे लिए ठीक है.

रम्भा : क्या करना होगा मुझे.

मई : सब पता चल जायेगा मेरी जान .

फिर मई धीरे से रम्भा के नजदीक गया और फॉर हिम दोनों के होठ एक दूसरे सी मिल गयेवह मेरे मुँह के अंदर जीब

डालने लगी में भी ऐसा किया और हम दोनों के जीब एक दूसरे को चाटने

lage..aisa कुछ 10 मं तक चला फिर मई ने पूछा कैसा लगा जणू..

रम्भा : जान इतना मजा कभी नहीं आया..

और फिर मुझे किश करने लगी… इस बार मेरे उप्पेर लिप्स को और में

उसके लोअर लिप्स तो चाटने लगे और थोड़ी देर बाद हु मेरे लोअर लिप्स

और में उसके उप्पेर लिप्स को छत्ते रहे मेरा हाट अपने आप रम्भा के

बूब्स पर गए और में उसके एक बूब्स को जकड liya…rambha ने जोरसे

मेरे लिप्स को चूसने लगी.. और मैं भी जोरसे उसके लिप्स को चूसने

laga..Todi देर बाद हम ने किसिंग स्टॉप किया और उसे बीएड पे लेता दिया और मई उसके ऊपर आ गया और फिर हमदोनो एक दूसरे के होतोओं को चूसने

lage..Mein भी उसके बूब्स को मसलता रहा और हु और उत्तेजित

हो के मेरे होटों को जोर जोरसे चुस्ती. ..

कुछ देर बाद हमने किसिंग स्टॉप किया… में अपने कपडे उतरके सिर्फ अंडरवियर में कहड़ा हो गया मेरे

लुंड एकदम टाइट हो गया था और अंडरवियर को छेद कर निकलने की

कोशिश में था.. रम्भा मेरे लुंड को बड़े गौर से देखने लगी जैसे कोई पहले बार

लुंड को देख रही हो मुझे बहुत मजा आरहा था.

फिर मैंने रम्भा के टी शर्ट को निकल दिया उसके बाद उसकी पैंठ को भी निकल दिया.

अब सिर्फ एक रेड कलर की ब्रा पंतय में कड़ी thi…..uske दोनों बूब्स तित और निप्पल एकदम टाइट होक कड़ा tha..fir उसके ब्रा को भी निकल दिया में रम्भा के ऊपर जपत पड़ा और उसके नंगे बदन से लिपट गया.. क्या एहसास था दोस्तों

मेरे बदन रम्भा के नंगी बदन से लिपटे hi एकदम करंट सा दौड़ने

लगा.. रम्भा ने मेरा कमर पकड़के अपनी और खींचा और अपने से सत्ता लग रहा था मुझे और स्नेहा को देख क्र रम्भा काफी गरम हो गयी थी इस liya..main भी रम्भा की दोनों गांड को अपने दोनों हाट से पकड़ लिया और

मसलने लगा क्या सॉफ्ट गांड थी एकदम माकन की तरह. .मेरा

लुंड एकदम रम्भा की छूट के आगे था और उसे रगड़ रहा tha..hum दोनों

एकदूसरे से लिपट के चूमा छाती कर रहे the..Mein रम्भा के गांड बूब्स और पुरे बदन पे हाथ फिरा रहा tha…karib 10 मं बाद

हमदोनो अलग हुए और एकदूसरे के आंखों में देख रहे थे..

मई : कैसा लग रहा है जणू.

रम्भा: बता नहीं सकती लेकिन बहुत मज़ा आरहा है..

मई : ये तोह कुछ नहीं जणू अभी और मज़ा बाकी है..

रम्भा : और भी मज़ा ..मेरे बदन में तोह अभी से hi करंट की तरह दौड़

रहा है..

मई : ये तुम्हारा पहली बार है न..

में : हाँ मैंने कभी किसी को ऐसा करते हुए तक नहीं देखा था .कभी किसी लड़के को नंगा तक नहीं देखा था.

मई : अब असली खेल यह नहीं खेल सकते चलो अपने सरिस को चादर से धक् लोहुमी बहार जाना है.

फिर हमदोनो ने अपने आप को चादर से ढाका और जहा मैंने मुखियें को छोड़ा था व्ही रम्भा को लेकर आ गया

फिर रम्भा को व्ही पर लेता दिया और उसके ऊपर आ गया फिर रम्भा के सरीर से चादर हटा क्र उसके बूब्स पर टूट पड़ा उसके एक निप्पल्स को मुँह में लेकर चूसने लगा और

दूसरे को अपने हाथ से मसलने लगा. .जैसे में निप्पल को चूसना शुरू

किया रम्भा एकदम मदहोश हो गयी और उउउउगगगग आअह्ह्हह्ह उममममम करके

सिसकारियां भरने lagi..use सुनके में और जोर जोरसे चूसने लगा और

दूसरे हाथ से उसके दूसरा निप्पल मसलने लगा..

उममममम. . आअह्ह्हह्ह हाहाहा जानू और चुसो .चूस चूस के इसका

सारा दूध पिलो janu…aaraha आ. .. करके रम्भा की सिसकारियां बढ़ने

लगी फिर मैंने दूसरे निप्पल को मुँह में लेके चूसने laga..aise hi में

दोनों मम्मी के साथ खेल रहा था.. रम्भा फिर मेरा सर पकड़के अपने दोनों

बूब्स के अंदर मसल रही thi..uuuuhhhh आ आअह्ह्हह्ह जान चूस डालो

मेरे दोनों बूब्स ko..ummmmm. ….थोड़ी देर चूसने के बाद फिर रम्भा ने

किश करना शुरू किया और हम दोनों एकदूसरे की लिप्स चूसने लगे …मेरा

लुंड अंडरवियर के अंदर से रम्भा के छूट जो पंतय के अंदर था उसे टकरा

रहा था. ..जो की थोड़ा गिला था…

थोड़ी देर के किसिंग के बाद हम दोनों अलग हुए और रम्भा मुझे व्ही पर

लिटा दिया और मेरा अंडरवियर उतरके के फेक दिया और मेरा लुंड एकदम

पहन पहनके बहार निकला रम्भा ने मेरे लुंड को अपने हाथ में liya..mere

पुरे बदन जैसे बिजली सी दौड़ने लगी…

रम्भा: अरे जणू ये क्या है इतना बड़ा ये कैसे जायेगा मुझे तो अभी से दर लग रहा हैऔर उसे मसलने लगी..

में: अब तोह ये तुम्हारा hi है.. इस से दर कैसा सब हो जायेगा बीएस उसे प्यार की जरुरत है .

रम्भा: अब इसे किसीको मत देना मेरी जान ….

ब्लोके रम्भा मेरे लुंड को अपने मुँह liya…aaahhhaahh करके मेरे मुँह से

सिसकारियां निकलने लगी …रम्भा मेरे लुंड के टोपी को मुँह में लेके

लोल्लयपोप के तरह चूसने लगी… पता नहीं ये खा से सीखी थी वह क्या मजा ाअरहा था दोस्तों में उसे

बयां नहीं करसकता ….

में : रम्भा बहुत मजा आरहा है ..आअह्ह्हह्ह

रम्भा : मेरे जणू मस्त लुंड है तेरा इसे तो में चूस चुस्की नोच लुंगी.

मई मन में सोच रहा था की पता नहीं उसने सब खा से सीखा है.

..

रम्भा मेरे लुंड को पूरा अपने मुँह में ले लिया और जोरसे मसल मसल के

चूसने लगी… और फिर वह मेरे लुंड के निचे के दोनों बॉल्स को अपने

मुँह में लेके चूसने lagi…uuuugggg उमा आअह्ह्हह्ह चुसलो ise..haan

मेरे जणू अब तोह ये मेरा है नहीं छोडूंगी. ..और जोरसे कभी बॉल्स

और कभी मेरे लुंड को चूस रही thi..Mein रम्भा का सर पकड़ लिया और

उसके मुँह में जोर जोर से देखे मरने लगा मेरा लुंड का टोपी रम्भा के गले

के अंदर जा रहा tha..rambha भी मस्त उसे मुँह में ले रही थी …

आअह्ह्ह रम्भा चुसो चुसो आअह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह और फिर मेरे लुंड से र अस

निकलने laga…mein अपने लुंड रम्भा के मुँह से बहार निकलने जा रहा था

की उसने जोरसे मेरा लुंड पकड़के अपने मुँह डालके चूसने लगी…. मेरा

सारा रास रम्भा के मुँह में निकल gaya…rambhaa मेरे रास को मुँह में लेके

उसे पुरे मुँह के अंदर लिया और जातक गयी और लुंड को चूसने

lagi..mere लुंड पे लगे रास को पूरा चाट के उसको पी gayi…aur मेरे

लुंड को पूरा साफ़ कर दिया अपने जीब से…

रम्भा: कैसा लगा जणू.

में: जन्नत की सैर की तरह था बड़ा मजा आया पहले कभी ऐसा मज़ा नहीं आया जैसे ऐसा आज आया है..

रम्भा : मेरे जणू अभी तोह जन्नत की सैर बाकी है….

और मुझसे लिपट गयी और दोनों किश करने लगे…

तो बे कॉन्टिनोएड........
 
अपडेट 102

रम्भा : जणू मैंने तोह पहले hi तुम्हे मज़ा दे दिया अब मुझे नहीं डोज..

में: क्यों नहीं मेरी जान ..

रम्भा: तो फिर मेरी छड़ी निकालो न..

में रम्भा की गांड पे हाथ फिरते हुए उसकी छड़ी निकली और क्या नज़ारा

था दोस्तों में पहली बार इतनी गोरी छूट को देख रहा था वह क्या मस्त था एकदम

क्लीन झांट एकदम नहीं tha…full क्लीन छूट tha..Phir में उसके नंगी

गांड को अपने हाथों से महसूस करने laga..Phir रम्भा व्ही पे लेट गयी

और मैंने खा रानी अपने खजाने के दरसन तो कराओ रम्भा ने अपने टंगे फैला

के अपने पुरे छूट के दर्शन diya…mein पहले छूट और हाथ फेरा उसके बाद

रम्भा की छूट के ऊपर की छोटी सी होल थी में उसे अपने हाथ से मसलने

laga..aur रम्भा एकदम मचलने lagi..Phir में उसे अपने जीब से उसे

चाटने लगा उमा एकदम मदहोश हो गयी …उम्मम्मम्म आअह्ह्ह्ह ुह्ह्ह्ह जणू

मेरी जान छतों और छतों कहलो उसी ुह्ह्हह्ह ……में भी उसे ज़ोर

जोरसे चाटने laga…thodi देर बाद रम्भा झट से उठ गयी…

मई : क्या हुआ मेरी जान.

रम्भा :जोरसे सुसु लगी है जणू अभी आती हूँ ब्लोके मथने चली गयी…

और फिर मूठके aayi..aur मुझे गले लगा liya..aur फिर लेटगयी और

बोली ..जणू अब मेरे छूट को पूरा चाट डालो न.. फिर में उसके छूट

के ऊपर के लिप्स को पकड़के खोला तोह अंदर की तरफ एक सुरंग था.

एकदम पिंक कलर की छूट थी होल bhi.chota tha…mein उसके छूट की लिप्स को चाटने लगा

और उसके ऊपर के गोली को भी.. थोड़ी देर से चाटने के बाद में उसके

छूट के अंदर एक ऊँगली डाली.. रम्भा एकदम मचलने lagi..aaahhhh उउउउउउउ

मेरी जान कहले मेरी छूट को चतले और जोरसे चाट. .. में

अपनी ऊँगली उसकी छूट के अंदर बहार करने लगा. रम्भा सिसकारियां भरने

लगी. ..थोड़ी देर बाद मैंने रम्भा से खा अब कुछ अलग करते है मई

उसके ऊपर गया फिर बोलै ऐसे नहीं तू तू मेरे लुंड को अपने मुँह में ले

और मई तुम्हारी छूट चाटूँगा इसे 69 पोजीशन कहते है तुम मेरे लुंड

को चटके फिर टाइट कार्डोँगी. ..उसने ऐसा hi किया हम 69 पोजीशन

में gaye..aur रम्भा मेरा लुंड को फिरसे लोल्लयपोप के तरह चाटने लगी

मैं भी उसका छूट चाटने लगा. ..और फिर उसके छूट अंदर अपने जीब

अंदर बहार करने लगा. .रम्भा मेरे लुंड को जोर जोरसे चाटने लगी..

में भी उसके छूट को अपने जीब से छोड़ना लगा जोरसे अंदर बहार करने लगा

रम्भा अपना कमर उठा उठा के अपना छूट मेरे मुँह में दे रही थी में भी

जोरसे ऊँगली डालके और अपना जीब से उसके छूट को छोड़ना laga…thodi

देर बाद रम्भा एकदम ज़ोर जोरसे कमर hi लेन लगी …उम्मम्मम ाहाहहहह

ऊऊऊह्ह्ह्ह छतो जणू पूरा मुँह डालदे अंदर चाट इसे ब्लोके जोरसे गांड

उठके मेरे मुँह में छूट दे रही thi..Phir उसके छूट से वाइट वाइट

सा पानी निकलने लगा लगता है और रम्भा भी झाड़ गयी…

रम्भा: जणू पूरा रास को अपनी मुँह में लेके चाट लो न प्लस…

में उसका पूरा छूट के रास को अपने मुँह liya…phir रम्भा मेरे पास आयी

और मुझे किश करके मेरे मुँह से अपने छूट के रास को अपने मुँह में

लेने लगी. .और मेरे जीब को अपने जीब से चाटने लगी….

रम्भा ने मेरे लुंड चुस्की फिर से मेरे लुंड को टाइट क्र दिया था

और किश करते समय हु अपने हाथ से मेरे लुंड को ऊपर निचे कर

रही thi…phir रम्भा ने कहा

रम्भा: राजू मेरे जान चलो अब और मत तरसाओ अब अपने लुंड को मेरे छूट

के अंदर दाल दो. .

में : मेरे लुंड भी तुम्हारे छूट के अंदर जाने को तरस रहा है

जान..

मई मान hi मान ये सोच रहा था की ये रम्भा को hi क्या गया ये तो ऐसे नहीं थी बोल तो ऐसे रही है जैसे वो कई बार लुंड ले चुकी है और मेरा पहली बार है और वो मुझे सीखा रही है की ऐसा करो वैसा करो जरूर कुछ तो बात है.

(दोस्तों ये बात आप लोगो को बाद में पता चलेगा की रम्भा को क्या हुआ था)

फिर मैंने रम्भा को व्ही पर लिटाया तो वो खुद hi अपने दोनों टांग फैला के मुझे बुलाया में अपने लुंड को रम्भा

के छूट के पास ले गया.. रम्भा मेरा लुंड पकड़के अपने छूट के दरवाजे के

पास लगाई और मेरे लुंड से अपने छूट को सेहला रही thi..janu अब इसे

अंदर डालो .

मई : जणू दर्द थोड़ा दर्द होगा .

रम्भा : वो सब मेरी प्रॉब्लम है तुम अपना काम करो.

.में अपने लुंड की टोपी को रम्भा के छूट के अंदर घुसने लगा तो

उसकी सिसकारियां निकला और मेरा लुंड फिसल क्र बहार हो गया फिर में अपने लुंड को थोड़ा जोर लगा क्र अंदर घुसाया लेकिन इस से पहले मैंने रम्भा का मुँह अपने होठो से बंद क्र दिया

..और जैसे hi लुंड थोड़ा अंदर गया तो रम्भा चीख उठी पर उसकी आवाज मैंने बंद क्र दी थी इस लिए वो चीख नहीं पाई लेकिन वो चटपटा रही थी थोड़ी देर बाद मैंने रम्भा के मुँह को आजाद किया .

रम्भा : आआअह्ह्ह्ह जणू बहुत दर्द हो रहा है निकल न इसे बहार बाद में क्र लेना.

मई : अब क्या हुआ अभी तो बड़ी बड़ी बात क्र रही थी तुम तो मुझे सीखा रही थी जैसे तुम इस खेल में माहिर हो और मई कच्चा खिलाडी.

रम्भा : नहीं मैंने ऐसा कुछ भी तो नहीं खा था.

मई : चलो ठीक है बीएस अब थोड़ा सा दर्द और होगा फिर तुम्हे मजा आने लगेगा.

मई रम्भा के होठो को फिर से बंद क्र दिया और एक जोरदार धक्का मारा ,मेरा लुंड रम्भा के छूट की सील को तोड़ता हुआ आधे से जायदा उसकी छूट में घुस गया रम्भा बहुत hi जायदा तड़प रही थी मई उसके बूब्स को दबाने लगा कुछ देर में उसका तड़पा तो काम हो गया लेकिन आँखों से आंसू और छूट से खून जरूर निकलने लगे थे मई कुछ देर तक रुका रहा फिर धीरे धीरे अपने लुंड को छूट से अंदर बहार करने लगा छूट बहुत hi तित hi उसकी बाटे से कुछ देर के लिए लगा तो था की उसने पहले भी लुंड ले लिया है और वो सब पता नहीं क्या हुआ था रम्भा को.

कुछ देर तक मई उतने hi लुंड से रम्भा को छोड़ने लगा मई किश तोड़कर रम्भा के बूब्स को चूसने चाटने लगा अब रम्भा को भी थोड़ा ठीक लगने लगा था

:.आआआह्ह्हुउउइइइइइम्मम्मा हूँ मेरी जान आअह्ह्ह ब्लोके रम्भा मुझे किश करने

लगी मेरे लिप्स और जीब को जोर जोरसे चाटने लगी मैं भी अपना लुंड को

अंदर बहार करने लगा थोड़ी देर के बाद में अपने पूरा लुंड एक जोर के

झटके से अंदर डालदिया …. रम्भा मुझसे जोरसे लिपट गयी और मेरे

पीठ को खरोचने lagi…phir मैं जोरसे छोड़ना शुरू कर दिया.

..उउउउइइइइइम्मम्मा आअह्ह्ह्ह छोड़ दे मेरे जणू आआअह्ह्ह्ह मेरे छूट का

बॉदा बना दे मेरी जान उउउउउउउ ह्ह्ह्हआआ ु ु ु ीी ी जोरसे मार

आअह्ह्हा. .

उसके छूट के अंदर बहुत गर्मी thi..Mere लुंड को उसकी छूट की गर्मी

मह्सूस हो रही thi…mein जोर जोरसे झटके मरने लगा… और उसके

बूब्स को मुँह लेके जोरसे छोड़ने laga..pure वादियों में पूछ पूछ पूछ की आवाज़ें और रम्भा की सिसकारियां सुनाई दे रही थी….

थोड़ी देर बाद मई रुका और बोलै मई : अब मई तुम्हे अपनी कुटिया बनके

छोडूंगा .

फिर मई अपना लुंड बहार निकला तो वो लाल हो गया था सायद रम्भा के खून से मई रभा को पलटा वो मेरे तरफ गांड घुमाके अपने गांड को ऊपर उठा के छूट

दिखा रही thi..wah क्या नज़ारा था दोस्तों उसके गांड और उसके छेद

ka…meine उसकी गांड की पापी ली और फिर छूट के अंदर अपने लुंड को

ेखि झटके में दाल diya…rambha की चीक निकल गयी ….. आआअह्ह्ह्ह

छोड़ो जणू और जोर से छोड़ो मुझे अपनी रंडी बना लो मारो जोरसे मारो. .में भी

जोरसे छोड़ना शुरू किया रम्भा के दोनों गांड को पकड़ के छोड़ने लगा पूछ

पूछ करके उसकी गांड मेरे कमर से टकरा रही थी… में पुरे स्पीड

से रम्भा को छोड़ रहा था…

मई : ओह रम्भा मेरी जान आआह्ह्ह उउउउउ ले मेरे लुंड को.

रम्भा : आआआहहह ..मारो जणू अपने लुंड को मेरे छूट में भरदे aàaaaahhh

ूउज्झहहह. .

थोड़ी देर बाद रम्भा ने बोलै ओह जणू मेरा निकलने वाला है जोर से छोड़ो.

मई : मेरा भी होने वाला है मेरी जान.

कुछ hi देर में रम्भा कपट हुए झाड़ गयी और मई भी 10 -12धक्को के बाद अपना सारा रास उसकी छूट में छोड़ diya…aur रम्भा के ऊपर hi लेट गया….

मई : कैसा लगा जन्नत की सैर .

रम्भा : मज़ा आगया मेरी जान मुझे नहीं पता था छोड़ने में इतना मज़ा आता लेकिन सुरु में दर्द बहुत हुआ था.

मई : अब से तुम्हे कभी दर्द नहीं होगा अब सिर्फ जन्नत की सैर करोगी .

चलो अब चलते है रात बहुत हो गयी है.

फरमाई रम्भा के ऊपर से उठा और चादर को अपने ऊपर लपेट लिया रम्भा कड़ी नहीं हो प् रही थी सायद उसे दर्द हो रहा था तब मैंने hi उसे चादर से लपेटा और अपने गॉड में उठा क्र रूम में ले आया यह स्नेहा चैन से सो रही थी .

मई धीरे से रम्भा से खा -

मई - रम्भा दर्द जायदा हो रहा है क्या .

रम्भा - नहीं बीएस थोड़ा hi है आप जाकर सो जाइये.

मई ठीक है फिर भी कुछ जरुरत हो तो मुझे जगा देना .

फिर हम दोनों सो गए.
 
अपडेट 103

सुबह मेरी नींद थोड़ी देर से खुली देखा तो सभी लोग जग गए थे तभी रूम में स्नेहा आयी और खा-

स्नेहा: आखरी तुम बे रम्भा को भी लंगड़ी बना दिया जैसे प्रेमलता को बनाया था मुझे लैब बनाओगे hu..m..

मई : आपका नंबर भी आएगा पर कुछ स्पेशल तरीके से ऐसे hi भी .

स्नेहा : ठीक है वि स्पेशल दिन जब आएगा तब आएगा अभी उठो और जाकर तैयार हो जाओ हमे गुरूजी से भी मिलने जाना है.

फरमाई उठा और फ्रेश हो गया और तैयार हो क्र बहार आया तो मुखिया जी बहार hi खड़े थे मैंने जाकर उन्हें नमस्ते किया फिर उनसे चलने के लिए खा.

बस्ती से कुछ दूर आगे जाने के बाद जंगल के बीचो बिच एक नदी बहती थी हम लोग नदी के किनारे आये तो वह पर 3-4 नव थी हम नव में बैठ गए एक में मई स्नेहा और रम्भा और प्रेमलता थे दूसरे में कुछ बस्ती वाले और मुखिया जी थे उनकी नव आगे थी और हम पीछे पीछे जा रहे थे नदी बिलकुल संत थी हम जंगल के बीचो बिच से जा रहे थे किनारो पर घने पेड़ जो बड़े hi खतरनाक लग रहे थे कुछ घंटे नव में जाने के बाद हम खुले सरोवर जैसे था और सामने एक ुचा पहाड़ था उस पर विभिन्न किस्म की मुर्तिया और कारीगरी की देखने से लग रहा था की ये एक विशाल मंदिर है पहाड़ के पत्थरो को काट काट क्र जबरदस्त कारीगरी की गयी थी, तभी मुखिया जी ने खा -

मुखिया - टाइगर ये है हमारी बस्ती वालो का कुलदेवता का मंदिर ये बहुत hi पवित्र जगह है यह कोई भी दानव आ नहीं सकता और इस के अंदर जाने का एक मात्रा रास्ता ये नदी hi है और यही हमारे गुरुदेव भी रहते है.

मई अभी भी मंदिर की भव्यता में खोया और सरोवर के किनारे भी काफी सुन्दर लग रहे थे सरोवर के एक तरफ झील और सामने मंदिर में जाने का मार्ग tha.nav को तेजी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा था क्यों की पानी का बहाव झरने की जरफ जयादा था.

बहाव को पर क्र के हमारी नव मंदिर के निचे पानी से होते हुए मंदिर के अंदर जा रही थी अंदर और भी बड़े बड़े मुर्तिया बानी हुई थी देखने से hi लग रहा था की ये बहुत hi प्राचीन है और शिल्प कला का भी बेजोड़ नमूना है ये मंदिर .

हमारी नव एक जगह पर आकर रुकी झा पर पानी भी रुका हुआ था हम सब नव से उतरे फिर एक तरफ सीधी था जिसके द्वारा हम ऊपर आ गए और एक तरफ चलने लगे सामने hi एक देवता की विशाल मूर्ति थी और निचे एक बहुत hi बुजुग आदमी माला लेकर आँखे बंद क्र के मंत्रो का जप क्र थे थे मुखिया जी ने हाथ जोड़ लिए तो हम लोगो ने भी हाथ जोड़ लिए.

मुखिया - प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव - आओ बीटा ले आये उन्हें .

मुखिया - जी गुरुदेव.

गुरुदेव - आओ बीटा टाइगर मुझे तुम्हारा hi इंतजार था कई साल बिट गए तुम्हारी रह देखते देखते.

मई : गुरुदेव आप मुझे कैसे जानते है मई तो अभी अभी hi यह आया हु और आप से तो मई पहली बार hi मिल रहा हु.

गुरुदेव : बीटा तुम्हे कोण नहीं जानेगा तुम तो ब्रम्हांड के रक्छक हो और मुझ से तो कोई भी बात नहीं छुपी है, ये तुम्हारे पीछे कड़ी दोनों कन्या तुम्हारी धर्म पत्नी है स्नेहा और रम्भा क्यों सही खा न मैंने.

मई : जी गुरुदेव .

गुरुदेव : अब पूछो तुम्हे क्या पूछना था.

मई : गुरुदेव ये दानवो की महारानी कोण है.

गुरुदेव : दानवो की महारानी नाम है उसका रूपलेखा वो सुरु से दानव नहीं थी वो हमेशा सुन्दर रहना चाहती थी और इसके लिए उसने काली सक्तियो का सहारा लिया और दानवराज बे खुस होते हुए उसे कुछ सकतिया दी और खा की तुम अपने हुस्न के जल में फसा क्र मर्दो से उनकी उम्र और ताकत और नारियो से उसकी सुंदरता और उनकी उम्र छीन लेना जिससे तुम हमेशा जवान खूबसूरत और सकती साली रहोगी उसे जिस किसी नेभी देखा है वो अब जीवित नहीं रहा है वो बहुत hi खूबसूरत और सकती साली है उसे हराना इतना आसान नहीं रहेगा, फिर भी हर किसी की एक कमजोरी रहती है .

मई : क्या कमजोरी है उसकी गुरुदेव और हमे वो खा मिलेगी.

गुरुदेव : तुम उस तक नहीं पहुंच सकते वो खुद hi तुम्हे अपने पास बुलाएगी उसकी सबसे बड़ी ताकत ये है की वो किसी को भी सम्मोहित क्र सकती है .

मई : पर मुझे वो क्यों अपने पास बुलाएगी .

गुरुदेव : क्यों की उसे जो सकती चाहिए वो मई तुम्हे दूंगा और उसे पाने के लिए hi वो तुम्हे अपने पास बुलाएगी.

और उसकी क्या कमजोरी है और तुम उसे कैसे मर पाओगे ये मई तुम्हे कुछ देर बाद hi बताउगा.

मई : जी गुरुदेव.

उसके बाद मई पीछे हैट गया मेरे बाद स्नेहा आयी तो उसे सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद मिला भी रम्भा आयी तो उसे भी सदा सुहागन रहने और जल्द hi पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद mila.jisse रम्भा थोड़ी शर्मा गयी.

फिर बरी आयी मुखिया जी और उनकी पत्नी की तो उन्हें जल्द hi माता पिता बनने का आशीर्वाद मिला जिससे दोनों भी बहुत खुस हुए, उसके बाद बाकि जो भी बचे थे वो लोग भी आशीर्वाद लेने गए .

गुरुदेव : आप लोग कुछ देर के लिए टाइगर और मुझे अकेला छोड़ दो हमें कुछ बता करनी है.

फिर सभी लोग बहार निकल गए उस जगह पर मई और गुरुदेव बीएस hi थे.

गुरुदेव : बीटा अब धयान से मेरी बात सुनो रूपलेखा बहुत hi सुन्दर है वो मर्दो को अपने पास बुला क्र उनके साथ सम्भोग करने के लिए कहती है लेकिन कोई भी उस के साथ सम्भोग नहीं आईटी पता क्यों की वो है hi इतनी खूबसूरत की की कोई भी उसे निर्वस्त्र देख ले वो उसी समय ठंडा पद जाता है और उसी समय वो उसकी उम्र और ताकत छीन लेती है यही उसकी भी कमजोरी है की जब वो सम्भोग के दौरान उसे संत क्र दिया जाये तो वो कुछ देर के लिए सकती विहीन हो जाती है यही वो समय रहेगा जब तुम उसे मर पाओगे तो जब वो तुम्हे अपने पास बुलाएगी तो सयम से काम लेना होगा तुम्हे बाकि तो तुम इस खेल में माहिर हो चलो अब मई तुम्हे सकती देता हु जिस से तुम और भी सक्तिसाली हो जाओगे.

फिर गुरुदेव ने हवं कुंड जलाया और कुछ मंतर पढ़ने लगे फिर उसमे से से एक दिव्या ज्योति निकली और मुझ में समां गयी उसके बाद हम ने गुरुदेव से बिदाई ली और वापस आ गए.
 
अपडेट 104

मुझे अपनी सकती मिल चुकी थी और हम सब मंदिर से वापस आ चुके थे गुरुदेव के आशीर्वाद से सभी खुस थे .

इधर उस दिन जब मैंने दानवो के लीडर का मैंने गाला धड़ से अलग किया था वो सीधा जेक महारानी साहिबा के दरबार में जेक गिरा था महारानी को बहुत hi गुस्सा आया तब से वो मुझ पर नजर रख रही थी फिर जब उसे पता चला की जो सकती उसे चाहिए थी वो मुझे मिल चुकी है तभी उसने सोच लिया की वो मुझे भी अपने जल में फसा क्र मुझ से साडी सकती छीन लेगी उसने जान लिया था की मुझ में काम (सेक्स) की भावना जायदा है इस से उसका ये काम और आसान हो गया.

मंदिर से आने के बाद रात में हम सभी ने साथ में खाना खाया उसके बाद सभी सोने चले गए जब सभी सो गए तब महारानी रूपलेखा ने अपने मायाजाल से मेरे मन के अंदर सेक्स की प्रबल इच्छा जगा दी मुझे नींद में hi नंगी ओराते कोई अपने बूब्स दबा रहा था तो कोई अपने छूट रगड़ रहा था तो कोई मेरा लुंड चूस रहा था मई नींद में hi बहुत गरम हो गया था तभी उसने अपना एक और तीर छोड़ा अपना सबसे बड़ा हथियार सम्मोहन का, उसने मुझे सम्मोहित क्र दिया मई नींद से जग गया मुझे ऐसा लग रहा था की नंगी लड़किया मुझे बुला रहे है मई उनके पीछे पीछे जाने लगा यह पर एक और प्रॉब्लम हो गयी रम्भा भी नींद से जग गयी मुझे बहार निकलता देख क्र रम्भा ने मुझे आवाज लगाई और मई तो सम्मोहित था मुझे क्या सुनाई देता मई बहार निकल गया तब रम्भा ने स्नेहा को भी जगा दिया.

रम्भा : दीदी उठो, उठो दीदी.

स्नेहा : क्या हुआ रम्भा सोने दे न क्यों जगा रही हो.

रम्भा : दीदी लगता है उनको कुछ हो गया है वो बिना बताये hi बहार चले गए और जब मैंने उन्हें आवाज लगाई तो भी नहीं सुना.

स्नेहा : गए होंगे बहार नींद नहीं आ रही होगी तो अच्छा ठीक है चलो चल क्र देखते है.

फिर वो दोनों भी रूम सेबाहर आ गयी

तब तक मई थोड़ा आगे निकल चूका था वो दोनों मुझे देख क्र मेरे पीछे आने लगी मई जंगल के अंदर चला जा रहा था वो दोनों मुझे आवाज लगाती रही पर मई सुन hi नहीं रहा था मई चला hi जा रहा था जंगल में वो भी रात के अंधेरो में और मुझे कोई फर्क नहीं पद रहा था लेकिन वो दोनों जो मेरे पीछे आ रही थी उन्हें जरूर फर्क पद रहा था उन्हें मुझे देखने में परेशानी हो रही थी की मई किधर जा रहा हु ,मई चलते हुए जंगल के अंदर एक झोपडी में घुस गया ये व्ही झोपडी थी जहा से दानवो का लीडर निकलता था वह पर ड्रैगन की एक मूर्ति थी वो धीरे से घूमी जिस से एक तरफ की निचे की जमीं खिसक गयी और सीधी नजर आने लगी तो मई सीढिया उतारते हुए निचे जाने लगा निचे सोने दे जगमगाता राजमहल था और मुझे उससे कोई फर्क नहीं पद रहा था मेरे आँखों के सामने तो सिर्फ छूट, बूब्स और गांड hi नजर आ रहे थे ,मई चलता हुआ सीधे महारानी रूपलेखा के बैडरूम में जा पंहुचा पर वो तो जैसे मेरा hi इंतजार क्र रही थी मई जा क्र महारानी रूपलेखा के पास जाकर खड़ा हो गया.

महारानी : जैसे सोचा था उस सेबड़ क्र पाया वाकई में तुम बहुत hi सुन्दर और नए नए जवान हुए हो और अब तो बहुत hi सकतिया है तुम्हारे अंदर मजा आएगा ये सब तुम से छीन के आज तक तो कोई भी मुझे छू भी नहीं पाया है सब मुझे नंगी देख क्र hi झाड़ गए देखते है तुम खा तक पहुंच पते हो.

इधर रम्भा और स्नेहा मुझे ढूंढ़ते हुए उस झोपडी तक पहुंच गयी और उन्हें वह पर कुछ नहीं मिला वो उस झोपडी के हेर कोनो को देखा पर उन्हें वह कोई सुराग नहीं मिला की मई गया खा.

उधर महारानी उठ क्र मेरे पास आयी और मेरे चारो तरफ घूम क्र देखने लगी फिर उसने मेरा शर्ट निकला फिर मेरे पुरे बदन को अपने हाथो से छू क्र सहला रही थी फिर वो मेरे चेहरे को निहारने लगी अब बरी थी मेरे जादू की जिस पर मेरा कोई कण्ट्रोल नहीं था वो मेरे आँखों में देखने लगी कुछ समय के लिए तो वो खो सी गयी थी फिर सम्हालते हुए

महारानी - ये मुझे क्या हो गया है इसकी आँखों में क्या है जिसे देख क्र मुझे इस में दुब जाने का मन क्र रहा है सभी लोगो को मैंने एक hi मौका दिया है लेकिन तुम्हे तो मई आज पूरा निचोड़ लुंगी जब तक के मेरा मन नहीं भर जाता तब तक .

फिर उसने मेरा पेंट को खोला अंडरवियर में मेरा उभर साफ दिखाई दे रहा था जिसे देख वो थोड़ी चकित हो गयी इस लिए उसने धीरे से मेरा अंडरवियर निचे खिसकना सुरु किया जैसे जैसे मेरी अंडरवियर निचे क्र रही थी मेरा लुंड भी निचे हो रहा था फिर जैसे hi मेरा अंडरवियर जांघो से निचे आया मेरा लुंड स्प्रिंग की उछाल क्र उसके होठो से टकराया मेरे लुंड को देख क्र वो थोड़ा पीछे हैट गयी .

महारानी आश्चर्य से - बाप रे इतना बड़ा तो मैंने आज तक नहीं देखा ओह्ह सच में तुम बहुत खास हो.

थोड़े देर तक तो वो मेरे लुंड को देखती रही फिर धीरे से उसने मेरे लुंड को अपने हाथो में लिया.

महारानी - अगर सच में तुम ने मुझे त्रिपत क्र दिया तो मई तुम्हे हमेसा के लिया तुम्हे अपना बना लुंगी.

फिर उस ने मुझे अपने सम्मोहन से आजाद मई होस में आया तो देखा की मई किसी राजमहल के कमरों में हु मई इधर उधर देखा फिर सामने दे एक बहुत hi खूबसूरत लड़की रानियों के कपड़ो में बैठी हुई है और मुझे hi देख रही है दूद की तरह सफ़ेद स्वर्ग की अप्सरा hi लग रही थी.

फिर मैंने अपने मान में सोचा तो यही है महारानी रूपलेखा गुरुदेव ने सच खा था ये मुझे अपने वश में क्र के अपने पास बुला hi लिया मुझे भी जल्दी से इसका काम तमाम करना होगा.

मई - आप कोण है और मई यह कैसे आ गया.

रूपलेखा : मई यह की महारानी रूपलेखा हु और मैंने hi तुम्हे यह पर ले क्र आयी हु अगर तुम ने मुझे खुस क्र दिया तो मई तुम्हे यह का राजा बना दूंगी.

मई - मुझे क्या करना होगा.

रूपलेखा - तुम्हे मुझे दुनिया का परम सुख देना जो हर लड़की चाहती है सरसिक सुख जिसे पाने के लिए लड़किया कुछ भी क्र जाती है और वैसे भी तुम्हे देख क्र लगता है तुम माहिर हो इस में पर ये भी यद् रखना की मई बरसो की पयासी हु.

मई - तो फिर सुरु करे .

वो बीएस मुस्कुरा दी मई उसकी सहमति पाकर पहले अपने पुरे कपडे उतर दिया फिर उस है हाथ पकड़ क्र उसे उठाया सच में क्या मुलया थे उस के हाथ बता नहीं सकता फिर धीरे धीरे उसके रेशमी परिधान को उतरने लगा सबसे पहले उसके चुनरी उतरी फिर उस के पीछे जाकर सिंगल पीेछे ड्रेस जो पीछे डोरी से बंधी हुई थी वह तक गया और फिर उसके गले के पास किश क्र के डोरी को खीज दिया ड्रेस ढीली हो गयी मई उसके कंधे को चूमते हुए उसकी दरस को पूरा निछ क्र दिया उस ने अंदर और कुछ नहीं पहना था मई समझ गया इस ज़माने में ब्रा एंड पैंतीस का अविष्कार hi नहीं हुआ था तो बेचारी क्या पहनती गहरी नाभि और गदराई जांघों के बिच फुल्ली हुई फ्रेश छूट !पहले मेने उसके तित बूब्स जो 34 के थे उन चुचिअन मुँह में भर-2 कर चूसी तो रूपलेखा की टांगों में कुछ हलचल हुई.

मेने जीभ को नाभि में दाल कर हिलाया तो उसकी जंघे चौड़ी होती गयी हालाँकि उसने आआआहहह करके जांघों के बिच जगह बनायीं मेने उसके भारी चट्टदों के निचे एक तकिया लगाया और टांगों के बिच आ कर तपते हुए होंठ छूट पे रख diye.Utejna से रूपलेखा ने चेहरा एक साइड में कर liya.Me उसके छूट के लहसुन को जीभ से गिटार के तर की तरह छेड़ने लगा, फिर लहसुन को होंठों के बिच दबा कर चूसने laga.Clit तन कर सख्त हो gaya.Mujhb ऐसा लगा की रूपलेखा की सी सिसकारी निकल रही है .मेने आंखे ऊपर उठा कर देखा रूपलेखा के होंठ जरा से खुल कर थरथरा रहे the.Ab मेने दोनों जांघों को ऊपर उठा कर पीछे की तरफ मौर दिया जिस से उसकी डबल रोटी जैसी छूट ज्यादा उभर कर सामने agayi.Phir में पूरी जीभ छूट पे रख कर पैन के पत्ते की तरह चाटने लगा यानि गांड से लेकर छूट के टिंट तक चाटने से रूपलेखा की जंघे मजीद चौड़ी हो गयी.

छूट से लगातार कॉमर्स मेरी जीभ को म्हणत के फल के रूप में मिल रहा tha.maharsni hi को अभी भी यकीं था के छूट का कॉमर्स पी सकता hu.Ab में जीभ को छूट के द्वार में दाल कर lap-lap करके चाटने लगा तो रूपलेखा का बदन अकड़ने लगा और चूतड़ उचकने lage.Me दोनों हाथों को चूतड़ों के निचे लगा कर जोर जोर से छूट से रिस रहे कच्चे खट्टे नमकीन रास को चाटने laga.Kuchh hi देर के बाद रूपलेखा की मुथिअण भींच गयी और एक झटके के साथ छूट मेरे मुँह से चिपक gayi.Charam सुख से छूट khul-band हो रही थी और में लगातार निकल रहे मद्रास को चाट ता रहा जब तक के रूपलेखा पूरी तरह निढाल न हो गयी.
 
अपडेट 105

चरम सुख से छूट khul-band हो रही थी और में लगातार निकल रहे मद्रास को चाट ता रहा जब तक के रूपलेखा पूरी तरह निढाल न हो गयी.

यही समय था जब वो सकती विहीन हो जाती है मई चाहता तो उसे मर सकता था लेकिन फिर सोचा जब ये खुद छोड़ना चाहती है तो मई छोड़ क्र भी तो अपना काम क्र सकता हु.

फिर मैंने कुछ देर तक उसको समय दिया जब वो नार्मल हुई तब वो उठी और मुझे अपने गले से लगा लिया.

रूपलेखा : आज पहली बार मुझे इतना आनंद आया की मई बता नहीं सकती तुम सच में कमल के हो .

मई : अभी असली खेल तो बाकि है लेकिन इसके लिए तुम्हे भी कुछ करना होगा .

रूपलेखा : मुझे पता है की मुझे क्या करना है.

ये बोल क्र वो मेरे पास आयी और घुटनो के बल निचे बैठ गई.

फिर अपना मुँह खोल के लुंड को मुँह के अंदर करने लगी ..

सूपड़ा अंदर जाते

hi मेरे बॉडी के अंदर एक अद्भुद आनंद फील चूका था ...

मेरे लुंड का सूपड़ा फूलने और सिकुड़ ने laga...Lund चूसते चूसते उसका मुँह दुखने lagi...but वो लुंड छोड़ने को तैयार नहीं थी.

रूपलेखा को कुछ होश नहीं थी. ..वो तो लुंड चूसै में लगिहुईथी..

मेरे लुंड के अंदर भूचाल आने hi वाला था तो मैंने

उसके मुँह से लुंड को निकल दिया.

फिर मैंने उसे उठाया उस बीएड पर उसे लेटाया

मई ने रूपलेखा की छूट के पास एके अपना मुँह से ढेर सारा थूक निकल के रूपलेखा की छूट पे लगा देता hu..or

कुछ थूक निकल कर आपने लुंड पे मालिश करता है..

लुंड थूक से चमक ने laga....Mai ने देर न करते रूपलेखा की

छूट के ऊपर अपना सूपड़ा रख के उसकी आंखों में देख ता हे...

वो आंखों से आपने हम सफर.. अपनी हमदम को इशारा से इज़ाज़त दे देती हे....

कच्चाककक........

रूपलेखा : maaaaaaaaaa aaaaaaaaaaaa....aaaaaaaaaaaaaaaaaaa....maaaaaaaaaaa...mommmmmmmmm...aaaaaaahhhhhhhhhaaaaa......

मेरा मोटा सूपड़ा उस की छूट की दोनों दरवाज़ा को बिपरीत दिशा में फैला कर भीतर प्रवेश

कर चूका था.

सूपड़ा घुष्टे hi रूपलेखा को दर्द ह होने लगा था

मई पहला सीधी चढ़ चूका ... मैंने जैसे hi लुंड को अंदर की और ठेलने का पयायश किया..

छूट के अंदर सूपड़ा को कोई रोकता he..wo पुपड़ा को अंदर जाने नहीं दे रा है था....

मई समझा जाता हु ..ये रूपलेखा का पेहेरेदार हे ...जो पता नहीं कितनो साल से रूपलेखा को काली बना के रखा हे..

एहि हे अश्ली काली की साबुत यानी इस सील को तोड़ के सुपडे को रूपलेखा के छूट के अंदर प्रबेश करना हे...

मई उसकी कमर को कसके थमते huye...ek करारा धक्का मर दिया.....

paaakkkkkkkkkkk... बियर बोतल की ढकन खोलने के समय जैसे साउंड होता हे ...ठीक वैसा hi साउंड के साथ रूपलेखा के सील को तोड़ता हुआ मेरा का लुंड 4 इंच तक रूपलेखा की छूट में घुस गया.....

रूपलेखा - aaaaaaaaaaaaaa आआआआह ह्ह्हह्ह्ह्ह hhhh...Meri जान

रूपलेखा के ाँकूँ से कुछ बुँदे असून के साथ साथ उसकी छूट की सील टूट कर.. छूट से खून निकल रही थी और इसकी के साथ वो फड़फड़ाने लगी मई उसके दोनों हाथों को पकड़ क्र उसके निप्पल्स को चूसने लगा जाता हु थोड़ी देर बाद वो थड़ा नार्मल होती है.

मई रूपलेखा के आंखों के आसूं को आपने होंठो से चुम लेता हु.

जैसे hi रूपलेखा अपने इतने साल के अनमोल तूफ़ा को मेरे नाम कर दिया.. वैसे hi उसे दर्द भरी और चाहत की नज़रो से मुझे को देखने लगी.

थोड़ी देर बाद मई आहिस्ता आहिस्ता लुंड को अंदर बहार करता हे..

रूपलेखा : आआह्ह्ह्ह. ooooooo...uuuuuuuuuhhh... ज़रा आहिस्ता.... मेरी जान धीरे आआआआह.

कुछ

समाया के बाद रूपलेखा नार्मल होने लगी. .

रूपलेखा - - मममममममम mm....uuuuuuuuuummmmmmm....uuuuuuuuiiiii... तिगरररररर. थोड़ा सा .. हल्का सा tezzzzz....nhiiiiiiii... उतना तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ नहीं.... हस्सस... हासससससस..

मई ने फिर से एक और धक्का lagaya...ish

बार रूपलेखा की चिखह..... निकल जाती है और पुरे राजमहल में गुजने लग जाती है.

रूपलेखा - माअररररररररर दलाआआआ.. behenchodddddddddd... Neeeeeeeeeee..

मई रूपलेखा के दर्द को देखते हुए उसके होठो को चूसने के साथ धीरे धीरे उस की चुकी को दबा रहा था. फिर निप्पल को अपनी जीभ से लैप लपा kar..chat रहा था..

कुछ समय के बाद उसकी चहरे पर दर्द के बदले हैट क्र सेक्स का नासा छाने लगा था..

वो पहेली की तरह

सेक्स पोजीशन आ चुकी thi...or मुझ को अपनी बाँहों में पकड़ कर.. निचे से कमर हिलने लगा..

मई उसका इशारा समझ जाता हु. और

आहिस्ता आहिस्ता लुंड को आगे पीछे कर ने लगता हे...

लुंड अंदर बहार होने होने से उसको दर्द ज्यादा और मज़ा काम मिलता हे. ..

रूपलेखा िश दर्द को मेरे खातिर झेल रही थी.. आपने प्यार के खातिर झेल रही थी.

आखिर कब तक मेरा लुंड उसकी की छूट को दर्द दे पता..

अगर मई बड़ा लुंड लेकर पैदा हुआ था.. तो वो भी गेहेराई वाली छूट लेकर िश धरती पर आयी थी..

लुंड के बार बार ठोकर से छूट का रास्ता ऑटोमेटिकली खुलती गयी..

छूट की रास्ता खुलने लगी तो रूपलेखा को अब दर्द के बदले मज़ा आने लगी..

रूपलेखा -आआआअह्ह ह्ह्हह्ह्ह्हह्हा aaaaaa...januuuuuuuuuuu... मेरे जन्न्नन्नन्न... टाइगर थोड़ा हल्का सा ज़ोरररररररर लगाआआ .....Nhiiioioo...yessssssss. एसससससस.. ऐसे hi...

मई रूपलेखा के हिसाब से हल्का हल्का जोरर लगता रहा..

मेरे िश चुदाई से रूपलेखा को और मज़ा आने लगी....

रूपलेखा - टाइगर उउउउउम्मम्मम्मम्म.... स्स्स्सस्स्स्शह्ह्हह्ह्ह्ह.. तिगरररररर थोड़ा और ज़ोररररररर लगाआआ नाआ...

मई थोड़ा और जोरर लगा कर रूपलेखा को छोड़ ने लगा...

कुछ टाइम के बाद

..

रूपलेखा - टाइगर मेरी jaannnn..Mereeeeeee राजआआआ.. पुरे जोररर से chod...mujhe बहुत मज़ाआआ आआआआ rahiiiiiiiiii heeeeeeeeeeeeee.....

मेरे लुंड का आधे से जायदा hi उसकी छूट के अंदर बहार हो रहा था..

अभी ऐसे hi खेल चल रहा tha...jab रूपलेखा पूरी सेक्स की नसे में दुब गयी..

मई आपने लुंड महाराज को एक ज़ोरदार की प्रहार से पूरा छूट के अंदर घुसा दिया..

पूरा का पूरा लुंड रूपलेखा की छूट में उतर गयी. . रूपलेखा का मुँह खुला का खुला hi रह गया ..

आखीं बड़ी बड़ी हो गयी. .संश वही की वही थम सी गयी...

मई फिर से रूपलेखा की होंठ को चूमना

चेतना चालू कर दिया.

रूपलेखा की जीभ को मई अपने जीभ से खेलने लगा..

दोनों हाथ से रूपलेखा की दोनों चुकी के

दोनों निपल्स को आहिस्ता आहिस्ता छेड़ छड़ करने लगा.....

अब पूरा का पूरा लुंड उस की छूट के अंदर समां चूका था रूपलेखा का दूद जैसा गोरा बदन लाल हो गया था

अब रूपलेखा निचे से कमर उठा ने लगी तो मुझ को समझने में देर नहीं लगी.

मई अब रूपलेखा को अपना हिसाब से छोड़ना चालू करदिया....

मई उसको को छोड़ ता गया. ...छोड़ ता ..गया...

रूपलेखा अब सेक्स की अग्ग में बावली हो चुकी थी...

रूपलेखा चुदाई की नसे में अंधी होकर kya..kya...bolrahithi...ye. . मेरी समझ के बहार था...

रूपलेखा : टाइगर ररररत मेरेईईई राजा अअअअअअअ. ..ooooooooooo. ..haaaaaa.....Or. ..zorrrrrrrrrrrrr.... सीएएएएएएए. ...

मई - haan..meri जाआआं. ....ईईई ...लीईई. ...और लेस्स ...

रूपलेखा : ...ooooooooooo...mmmmmmmmmm....uuuuuuuuu.....or.....zorrrrr सीईए छोड़... मुझे ... ........तुझे accha.....lag.....ra.

....ha.....he....na....apni....ishhh...jaan....ko. ...chod...te. ..हु. ...ye....AAAAAA....HHHHHH.......OOOOO........

मई : haan.....Meri जान ... तुम को. ...chod...te. ....हुए. ....mujhe.......bahuttt.....anand. .....मिलता. ... हे......

ऐसे hi. ..20 मिनट तक ज़ोरदार की चुदाई चलता रहा...

िश डोर्मियन रूपलेखा 2 बार झाड़ चुकी थी...

रूपलेखा की गांड बीएड से 4 इंच ऊपर उठी हुयी थी ..

क्यों की मई ने रूपलेखा की टंगे को अपने कंधे के ऊपर उठा कर.. जोरर दर धक्के लगाना चालू कर दिया था....

मई हम्पते हुए जान..... ....मेरा .......निकलने वाल्ला he........final....bolo. ..kidhar.....nikal....lu. ...

Ruplekha....mera भी. ......निकालनी. ..vala.....he.........tu. .....मेरे. ...छूट. ...के. ....ander.....bache....dani.

...के. .......bhitar......chhod.....de ...

मई रूपलेखा को कसके पकड़ कर लुंड को जड़ तक घुसके

पिचकारी छोड़ ने laga....or जब पिचकारी रूपलेखा के छूट के अंदर गयी तब उसी समय रूपलेखा एक बार और झाड़ गयी.
 
बस इधर का हो गया अब रेतुर्न तो देहरादून
 
दोस्तों स्टोरी के जो भी करैक्टर है उनका इंट्रोडक्शन फिर से रे रहा हु क्यों की बहुत से लोग भूल गए होंगे

  1. राजनाथ
  2. कांटा
ये है टाइगर के दादा दादी दादा, दादाजी तो अभी जिन्दा है और इनकी दादी जी का एकसार एक्सीडेंट में रब में उन्हें अपने पास बुला लिया.

राजनाथ के तीन बेटे और बहुत थे और दो बेतिया थी, और इन सब का अपना अपना परिवार था.

  1. राजेंद्र - आरती. 1.स्नेहा. 2.सुमन. 3 सोनम. 4. टाइगर( शेर सिंह)
  2. राजेश्वर -अर्चना. 1. प्राची. 2. पूर्वी
  3. रवि - अंकिता.
  4. सीता - केशव. 1. कविता. 2. काव्य
  5. गीता- मुकेश. 1. ऋतू. 2. रूचि
अब आते है टाइगर के मां के घर की तरफ

राजवीर ( धनराज) - वर्षा

  1. दिव्या
  2. दीपिका
  3. नीलम
आरती की और दो बहन भी थी

  1. आराधय
  2. अनीता
अब आते है टाइगर के दूसरे प्लेनेट की फॅमिली से

सेज़ेन्डर

इनकी तीन पत्निया थी

  1. ामंडा
  2. स्टेबेला
  3. सकेंद्र
टाइगर के दोस्त है

  1. मनोज उसकी सिस्टर संध्या
  2. विनोद उसकी सिस्टर रचना
टाइगर की सदी अभी तक

  1. समिति ( ये कविता की बुआ है )
  2. सीतल (ये समिति की फ्रेंड है )
  3. नीलम
  4. दीपिका
  5. स्नेहा
  6. रम्भा ( ये बाबा जी की बेटी है
और भी कुछ लोग है

  1. भैरव - मल्लिका
  2. पतलासुर
  3. बाबा जी
 
अपडेट 106

इधर रम्भा और स्नेहा को जमीं के निचे राज महल से रूपलेखा की चिखह सुनाई तो दी और उन्हें समझ नहीं आया के आवाज कहा से आयी इन इन लोगो ने बहुत ढूंढा और उनके हाथ कुछ नहीं लगा फिर रम्भा ने सोचा की यह कुछ भी नहीं है सिवाय ये ड्रैगन की मूर्ति के जरूर इस में के कुछ होगा ये सोच क्र वो मूर्ति के पास आयी और उसे hi दुला क्र देखा पर कुछ नहीं हुआ फिर वो उसे एक तरफ घुमा दिया तुरंत hi निचे के जमीं खिसकी और उन्हें निचे जाने का मार्ग मिल गया और वो उस से निचे राज महल में आ गए वो लोग अभी इधर उधर घूम hi रहे थे की दूसरी बार चीखने की आवाज आयी तो वो लोग उस आवाज की दिशा में चले गए जब वो लोग वह पहुंचे तो देखा दो जोड़ा आपस में कामक्रीड़ा में लगे हुए है उनलोगो ने मुझे नहीं देखा क्यों की मेरी पीठ उनकी तरफ थी इस लिए इन लोगो ने बिच में डिस्टर्बे न करने का फैसला लिया फिर जब हम लोगो का काम हो गया और हम लोग अभी आराम hi क्र रहे थे की वो दोनों उस रूम में आ घुसे .

स्नेहा - टाइगर...

मई और रूपलेखा ने पलट क्र दरवाजे की तरफ देखा इन दोनों को देख क्र रूपलेखा को बहुत hi गुस्सा आया लेकिन अभी रूपलेखा के पास पावर नहीं था क्यों की वो अभी अभी hi झड़ी थी मई चाहता तो उसे मर सकता था लेकिन उस ने खुद खा था की मई अगर उसे खुस क्र दिया तो वो मेरी गुलाम बन जाएगी उनलोगो को फिर मई बोलै.

मई - तुम लोग यह तक कैसे पहुंची .

स्नेहा - जब तुम नींद में चलने लगे तब हम लोगो बे तुम्हारा पीछा किया और हम लोग यह पर आ गए लेकिन यह तुम तो कुछ और hi गुल खिला रहे हो.

रूपलेखा - कोण हो तुम लोग और यह पर कैसे पहुंची.

मई - रूपलेखा ये दोनों मेरी पत्निया है रम्भा और स्नेहा.

रूपलेखा - तुम्हारी पत्निया है तब तो इन्हे मरना होगा तुम्हारे और मेरे बिच कोई नहीं आ सकता तुम सिर्फ मेरे बन क्र hi रहोगे सिर्फ मेरे .

ये बोल रूपलेखा ने अपने सक्तियो का सहारा लिया सायद अब उसकी ताकत वापस आ गयी थी .

रूपलेखा ने इन और हुम्ला क्र दिया वो एनर्जी लाइट रम्भा की तरफ फेका जिसे रम्भा ने अपने सकती रे रोक दिया ऐसे hi दो तीन बार और इन दोनों पर हुम्ला किया जिसे हेर बार रम्भा ने विफल क्र दिया ये देख क्र रूपलेखा को और भी जायदा गुस्सा आया तब तक मई भी अपने कपडे पहन चूका था .

मई : बस करो रूपलेखा बहोत हो गया तुम्हारा तुम कहती हो मुझ से प्यार करती हो लेकिन तुम्हे तो प्यार का मतलब भी नहीं पता प्यार बाटने से और बढ़ता है इन दोनों से सीखो जब इन्हे पता चला की मेरी और भी पत्निया है फिर भी इन्होने कुछ नहीं खा .

रूपलेखा - क्या और भी है तुम्हारी पत्निया सब को मर दूंगी जो भी मेरे और तुम्हारे बिच में आएगा सब को मर दूंगी .

ये बोल क्र उसने स्नेहा पर वर किया स्नेहा को एनर्जी लाइट लगी और वो दीवार से जाकर टकरा गयी और बेहोस होगी ये देख क्र मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने अपनी तलवार को यद् किया रूपलेखा के बालो को पकड़ क्र उसके पे में तलवार को घुसा दिया .

मेरी तलवार जब उसके पेट से निकली तो रूपलेखा की सकतिया काम होने लगी उसकी धीरे धीरे उम्र काम होने धीरे धीरे वो इतनी बूढी और बत्सुरत हो गयी की पूछो मत फिर वो तड़पा तड़प क्र मर गयी मुझे उसके मरने का भी बहुत अफ़सोस हुआ अगर उस ने इन सब को स्वीकार क्र लिया होता तो वो भी मेरी पत्नी होती मगर खुदा को कुछ और मंजूर था.

मई और रम्भा तुरंत स्नेहा की तरफ भागे.

मई - स्नेहा तुम्हे कुछ नहीं होगा मई हु न मई तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगा स्नेहा उठो स्नेहा ये बोलते हुए मेरी आँखों में आंसू भी आ गए थे.

रम्भा - कुछ नहीं हुआ है इन्हे आप संत हो जाइये रूपलेखा के वर से बेहोस होगी बीएस कुछ घंटो में दीदी को होस आ जायेगा.

फिर मई स्नेहा को उठाया और महल से निकल क्र जंगल में आ गए और वह से उड़ते हुए हम मुखिया जी के घर में आ गए मई स्नेहा को व्ही बिस्तर में सुला दिया और स्नेहा के सर को अपने गॉड में रख क्र व्ही पर बैठ गया रम्भा को मैंने आराम करने को बोल दिया कुछ hi घंटो में सुबह भी होने वाली थी .

देखते hi देखते सुबह भी हो गयी सूरज की किरणे जब स्नेहा पर पड़ी तो धीरे धीरे स्नेहा को होस आने लगा उसे होस में आता देख मेरी भी जान में जान आयी .

मई - स्नेहा आप ठीक तो है न कोई तकलीफ तो नहीं हो रही है.

स्नेहा - नहीं मई अब ठीक हु बीएस सर में थोड़ा दर्द हो रहा है .

तब तक रम्भा अपने हाथ में एक प्याला ले क्र आयी .

रम्भा - दीदी ये कडहा पिलो आप फिर से तारो तजा हो जाओगी.

मई - तो अब यह का काम तो हो गया अब चलते है वापस अपनी दुनिया में क्या ख्याल है और वह भी देखना होगा सभी लोग ठीक थक है की नहीं .

रम्भा - है हम आज hi चले है मुझे भी अपने घर की बहुत यद् आ रही है माँ बाबा से एक बार मिल लेंगे फिर चले जायेंगे..

मई - चलो ठीक है फ्रेश वगेरा हो जाओ फिर मई मुखिया जी से जाने की इज्जत ले लूंगा.

फिर मई जाकर मुखिया जी से मिला और उन्हें बताया की अब महारानी रूपलेखा नहीं रही उसे मैंने ख़तम क्र दिया है तो वो बहुत hi खुस हुए और आज रात जासं करने का फैसला किया लेकिन मैंने जाने की इज्जत मांगी तो उन्हें थोड़ा दुःख भी हुआ .

फिर उन्होंने हम नहीं रोका फिर सरे बस्ती में. ये खुस खबरि फ़ैल गयी की महारानी रूपलेखा अब नहीं रही और हम लोग अब जा रहे है तो कुछ hi देर में पूरी बस्ती इकठ्ठा हो गयी .

फिर जब हम जाने लगे तो सभी ने हमे सुब कामनाये दी .

प्रेमलता ने तो मुझ से कह दिया की बच्चे के होते hi मुझे आना है .

मैंने उन से कह दिया की अगर मई आ सकता तो जरूर आऊंगा.

इस तरह सभी ने हमे और आने का निमंतरण दिया फिर हम लोग उनसे विदा लेकर अपने जाने की जगह पर पहुंच गए और फिर मैंने बाबा जी (रम्भा के फादर) को यद् किया और हम लोग इन की गुफा में पहुंच गए .
 
अपडेट 107

हम जब बाबा जी के गुफा में गए तो सभी ने हमारा संदर सवागत किया रम्भा भी अपने माँ बाबा से मिल क्र बहुत खुस हुई उसके बाद हम लोग सभी से मिले फिर रम्भा की सहेलिया आयी और रम्भा को ले जाने लगी तो वो स्नेहा को भी अपने साथ लेकर चली गयी बच गया मई तो मुझे भी बाबा जी ने रूम में जाकर आराम करने के खा तो मई भी चला गया एक रूम में फिर हम ने साथ में hi भोजन किया रम्भा और स्नेहा फिर से चली गयी मई रूम में आ गया थोड़ी देर बाद बाबा जी मुझ से मिलने आये .

मई : आइये बाबा जी बैठी .

बाबा : बीटा वह का काम तो अच्छे तो हुआ न कोई मुसीबत तो नहीं हुई.

मई : नहीं बाबा जी जयादा मुसीबत तो नहीं हुई बस थोड़ी बहुत hi हुई थी.

बाबा : बीटा मई सब जनता हु क्या मुसीबत हुई और खा तुम हे अच्छा लगा hoga,khair छोडो उस बात को मई तुम्हे ये बताना चाहता हु के जैसे तुम्हे वह पर सम्मोहित क्र के वो कुछ भी करा सकती है वैसे hi और भी बहुत सी तकते है जिससे तुम उन के वस् में हो जाओगे.

मई : वो कोण कोण सो सकती है बाबा जी.

बाबा बीटा वैसे तो बहुत सी तकते है लेकिन मई तुम्हे मुख्य ताकतों के बारे में बताउगा

  1. काम
  2. क्रोध
  3. मोह
  4. लोभ
  5. घमंड
काम - ये तुम पर अपना प्रभाव डालेगा तो तुम कामपुरुस बन जाओगे तुम हेर नारी को सम्भोग की इच्छा से देखोगे , तुम्हे कोई रिस्ता नाता नहीं दिखेगा वो तुम्हे पूरा काम में अँधा बना देगा.

क्रोध - ये तुम्हे क्रोधी बना देगा तुम जरा जरा सी बात पर गुस्सा हो जाओगे , जिससे तुम हर काम गलत करोगे .

मोह - ये तुम्हे मोहि बना देगा जिससे तुम सबसे जायदा प्यार करते हो तुम बस उसी के बारे में सोचोगे किसी और छीज में तुम्हारा मान नहीं लगेगा.

लोभ - ये तुम्हे लोभी बना देगा तुम खुद का hi फायदा देखोगे दुसरो की तुम्हे कोई चिंता नहीं होगी.

घमंड - घमंड मनुष्य को पतन की और ले जाता है इस लिए कभी भी किसी भी बात का घमंड मत करना नहीं तो ये तुम्हे भी नर्क में दाल देगा.

बीटा ये है वो तकते जिस से तुन्हे बच क्र रहना है सच्चा पुरुष व्ही होता है जो इन सब में विजय प्राप्त क्र लेता है तो तुह्मे सयम से काम लेना होगा वार्ना तुम्हे इन बुरी तकते अपने वश में क्र के अपना गुलाम बना लेगी.

ठीक है अब तुम आराम करो सुबह तुम्हे कल और भी काम करने होंगे उसके बाद जिस धरती पर तुम ने जन्म लिया है उस का भी कर्ज चुकाना है .

फिर बाबा जी चले गए मई उनके द्वारा बताये बातो के बारे में सोचने लगा

अगली सुबह हम लोग सभी से विदा लेकर चले गए कश्मीर की तरफ, मैंने रस्ते में रम्भा को बता दिया की तुम्हारे बारे में कुछ hi लोगो को बताउगा बाकि लोगो के लिए तुम मेरे फ्रेंड रहोगी.

पहले हम होटल पहुंचे तो पता चला की वो लोग कल से hi निकले है अभी तक वापस नहीं आये उनलोगो के साथ हमारे गाइड भी उनके साथ गया है उस से भी कोई कांटेक्ट नहीं हो प् रहा है हम भी बहुत परेशान है पुलिस में भी रिपोर्ट करा दी गयी है सर.

मई अपने मन में सोचने लगा की ये लोग खा जा सकते कही कोई मुसीबत में तो नहीं फास गए है .

मैंने स्नेहा और रम्भा को व्ही पर रुकने को खा और मई होटल से बहार आ गया और िफ़ गया आसमान में ऊपर से उड़ते हुए मेरी नजर चारो तरफ थी मई हेर इन जगह को देख रहा था झा वो जा सकती थी लेकिन मुझे कोई सुराग नहीं मिला फिर मई पर्वतो के तरफ देखने का फैसला किया अभी मई थोड़ी दूर गया था की मुझ कुछ नजर आया एक नदी के किनारे बहुत सरे लोग टेंट लगाकर रुके हुए थे जब थोड़ा पास जाकर देखा तो सभी के हाथो में बड़े बड़े गन थे मुझे समझते देर नहीं लगी की ये लोग आतंकवादी है .

मतलब ये लोग हमारे देश में हुम्ला करने के फ़िराक में है मुझे कुछ करना होगा लेकिन मुझे अपनी फॅमिली को भी ढूँढना था फिर मैंने तय किया पहले देश की रक्छा बाद में फॅमिली.

मई सबकी नजरो से बचते हुए एक जगह पर उतरा और टेंट के पास आकर एक आतंकवादी को उसके मुँह को दबा क्र उसका काम hi तमाम क्र दिया और उसे छिपा क्र उसे रख दिया फिर उसके कपडे को पहन लिया और अपने चेहरे को कपडे से धक् क्र उनके साथ शामिल हो गया मई इधर उधर देखा एक तरफ कुछ लोगो को ट्रेनिंग दी जा रही थी कुछ लोग खाना बना रहे थे मई पहले इन लोगो के प्लान को जानना चाहता था की ये लोग क्या साजिश करना चाहते है मई वह से निकल क्र टेंट की तरफ आ गया हेर एक टेंट में जा जा क्र देख रहा था जायदा तर हेर टेंट में आतंकवादी hi थे फिर मई ऐसे टेंट में गया झा पर टेबल और चेयर्स लगे हुए थे लेकिन वो खली था तभी एक आदमी आया और मेरे पीठ पे हाथ रखा मई पीछे पलट क्र देखा तो वो एक आतंकवादी hi था.

आतंकवादी : ये तुम यह क्या क्र रहे हो यह बिना इजाजत के जाना मन है.

मई : माफ़ करना भाई जान हम तो यू hi देख रहे थे .

आतंकवादी : है है ठीक है जाओ यह से जो काम करने बोलै है वो करो.

मई उसे दिखने के लिए एक तरफ चला गया फिर जब वो वह से हटा तब मई दूसरे टेंटो को देखने क्र लिए जा hi रहा था की मुझे कुछ आवाज सुनाई दी तो मई उस आवाज का पीछा करते हुए एक टेंट के पास गया ,पास से ये आवाज किसकी है ये मुझे पहचानते हुए जरा सी भी देर नहीं लगी क्यों की ये आवाज .........
 
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