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Update-42(B) (मेघा अपडेट)
" नहीं नहीं raghu...........please.....yahan से मुट्ठ jawo...........tum मेरे साथ ऐसा नहीं कर sakte.........tum इस तरह से मुझसे मुँह मोड़कर नहीं जा सकते............." और काव्य जैसे तड़प उठती हैं वहीँ रघु इस बार काव्य को फिर से हटाता हैं और आगे की तरफ जाने लगता hain..........magar इस बार काव्य जैसे उसके क़दमों में बैठ जाती हैं और उसके पवन को अपने हाथों से जकड लेती hain...........wahin रघु टकटकी लगाए बस काव्य के तरफ गुस्से से देखे जा रहा था............
" behanchod..............jane दे mujhe..........apne आपको न जाने क्या समझती hain............mujhe नहीं करनी तेरी चुदाई..........." और रघु फिर से गुस्से से काव्य पर बादक उठता hain.......kal तक जो काव्य को मेमसाहेब और जी लगाकर बात करता था आज वहीँ गली और बढ़तमीज़ी पर उतर आया tha...........wahin काव्य बस चुप चाप से रघु की बातें सुनी जा रही thi............hawas ने आज उसे पूरी तरह से अँधा कर दिया tha.......wo ये भी आज भूल चुकी थी की वो इस घर की मालकिन हैं और जिसके क़दमों में वो आज बैठी हुई हैं वो इस घर का एक नौकर हैं...............
" रघु please.............aisa न bolo............is तरह से नाराज़ होना ठीक nahin.............main तुम्हें मन थोड़ी न कर रही hoon...........bus तुमसे ये कह रही हूँ की मुझे थोड़ा वक़्त chahiye...........maine कभी आज तक अपने पति को भी वहां नहीं दिया hain........wahan सुना हैं बहुत दर्द होता hain...........aur............" काव्य आगे कुछ बोलती रघु अपने मज़बूत हाथ काव्य के गुर्दें पर ले जाता हैं और उसके बालों को कसकर अपनी मुट्ठी में जकड लेता hain......wahin काव्य न चाहते हुए भी ज़ोरों से सिसक पड़ती hain...........dard उसकी आँखों में साफ़ नज़र आ रहा tha........wahin रघु गुस्से से काव्य के चेहरे को घूरे जा रहा tha............uske मासूम चेहरे ko...........bade गौर से निहारे जा रहा tha.............wo कैसे भूल सकता था की एहि मासूम चेहरा आज उसकी ज़िन्दगी तबाह कर चूका हैं.......
" कैसा waqt.............bol............mujhe अभी तेरा फैसला chahiya.........bata हाँ या naaaaaaaa.............agar तेरा जवाब ना हैं तो मैं जा रहा हूँ अभी..........." और रघु गुस्से से काव्य के चेहरे को घूरने लगता हैं वहीँ काव्य फ़ौरन शर्माकर अपनी नज़रें नीचे की तरफ फेर लेती हैं..........
" ठीक हैं raghu...................mujhe तुम्हारी खातिर आज सब मंज़ूर hain............main तैयार हूँ........." और काव्य जैसे तैसे बोल पड़ती hain..........usney आज रघु की वजह से बोल तो दिया था मगर वो एक बार फिर से सोच में पढ़ गयी थी की उससे ये सब होगा kaise........kyon की रघु का लुंड वो देख चुकी thi........apne मुँह में भी पूरा ले चुकी थी मगर गांड की सूराख उसकी बहुत छोटी thi............aurr बहुत टाइट bhi...........jaise तैसे वो एक ऊँगली भी अंदर नहीं जाती थी तो रघु का लुंड क्या ख़ाक jayega..........aur उसे पूरा यकीन था की जब रघु का लुंड उसकी गांड के अंदर जायेगा उसकी गांड आज पूरी तरह से फुट jayegi.........kitna दर्द होगा वो शायद इसका अंदाज़ा आसानी से लगा सकती थी मगर आज वो रघु के सामने पूरी तरह से मज़बूर नज़र आ रही thi...........shayad अपने छूट की आग की वजह से.............
" साफ़ साफ़ bol............kahan लेगी मेरा lund.......khulkar bata.......aur देख तुझसे मिलने आज कौन आया हैं............." और रघु जीतू को आवाज़ लगता हैं वहीँ जीतू फ़ौरन अंदर के कमरे में चला आता hain........aur जब उसकी नज़र सामने काव्य ार पड़ती हैं वो भी हैरान होता हुआ कभी रघु को तो कभी काव्य के तरफ बड़े गौर से देखने लगता hain.........hairani की बात तो थी hi.......raghu आज उसके बालों को कसकर अपनी मुट्ठी में जकड़ा हुआ था और काव्य वहीँ दर्द से तड़प रही थी.............
" अब क्या हुआ behanchod.............bol क्यों नहीं rahi..........kahan लेगी मेरे लुंड को ........साफ़ साफ़ बता........." और रघु एक बार फिर से काव्य के बालों को कसकर झंझोर देता हैं वहीँ काव्य फिर से दर्द से तड़प उठती hain............aaj वो रघु के सामने पूरी तरह से बेबस नज़र आ रही थी वहीँ रघु के तेवर आज पूरी तरह से बदले हुए नज़र आ रहे they........jeetu भू चुप चाप से खड़ा बस तमशा देख रहा tha............wahin काव्य को उसके सामने शर्म सी आ रही थी..........
" गग्गाआँआंनददददद memeiinnnnnnnnnn............." और काव्य जैसे तैसे बोल पड़ती हैं वहीँ रघु उसके बालों को अब भी अपनी मुट्ठी में जकड़े हुआ था............
" साफ़ साफ़ बोल की तू मेरा लुंड अपनी गांड में लेगी और आज मुझसे अपनी गांड मरवायेगी............." और रघु फिर से काव्य की तरफ अजीब नज़रियों से घूरने लगता हैं वहीँ काव्य बिना वक़्त गंवाए फ़ौरन बोल पड़ती hain...........wo भी ाचे से जानती थी की आज रघु एक नहीं मानने वाला .............और व्वो तब तक उसे नहीं चोदहेगा जब रक् वो अपनी वाली कर नहीं lega..........to बेहतर था की वो उसका hi कहा मानती...........
" जजजजजज्जजीईई मैंन तुम्हारा लूङ्नंदद ायप्प्नी गगगगआनंददद में lungi....aur तुमसे अपनी गाआआआंदददददद मरवाउंगी............" और काव्य की जुबान जैसे लड़खड़ा सी जाती हैं वहीँ रघु इस बार अपने हाथों की पकड़ ढीली करता हैं और काव्य को पूरी तरह से आज़ाद कर देता hain..........aur जीतू की तरफ बड़े गौर से देखने लगता hain...........wahin जीतू भी अजीब नज़रियों से रघु और काव्यको बस देखे जा रहा था.........
" तू ऐसे खड़े खड़े क्या देख रहा hain........chal अंदर कमरे mein...........tujhe आज मैं रियल में चुदाई दिखता हूँ की सुहागरात कैसे मनाई जाती hain..............tu भी क्या याद करेगा की तेरा पला किस्से पड़ा था............" और रघु फ़ौरन काव्य को अपनी गॉड में उठा लेता हैं और उसे उठाते हुए अंदर के कमरे में ले चल पड़ता hain........wahin काव्य भी अब नार्मल हो चुकी थी वो भी जानती थी की आज उसकी इज़्ज़त जीतू के सामने सरे आम नीलम होने वाली hain............magar वो अब छह कर भी कुछ नहीं कर सकती thi...siwaye रघु से छुड़वाने के..............
जीतू अंदर जाता हैं और सामने के लड़की के कुर्सी पर जाकर बैठ जाता hain....mano जैसे कोई मूवी चालू होने वाली ho.........wahin रघु काव्य को बिस्टेर पर लेजाकर आराम से बैठता हैं और खुद भी उसके पास जाकर बैठ जाता हैं फिर वो जीतू की तरफ देखता हुआ धीरे से मुस्कुरा देता hain..........wahin जीतू का लुंड अब सख्त होए लगा tha........wo अपने अंदर छुपे एक्ससिटेमेंट को कब से दबाये बैठा thaa.........aab तो उसका इंतज़ार कारण एक एक पल मुश्किल होता जा रहा था....................
" मैंने जो चीज़ तुझे यहाँ लेन को कहा था क्या वो चीज़ तू यहाँ लाया हैं..............." और रघु जीतू की तरफ देखता हुआ धीरे से कुछ इशारा करता हैंवहीँ जीतू अपने पॉकेट से एक डिब्बा निकलता हैं और वो उस चीज़ को रघु के हाथों में धीरे से थमा देता hain.........fir वो एक बड़ा सा पानी का बोतल निकलता हैं और उसे भी रघु के पास रख देता hain.......wahin रघु भी जवाब में धीरे से मुस्कुरा देता हैं........
" आज मैं अपनी रानी के लिए एक नायब तोहफा लाया hoon.........kya करूँ मैं बहुत गरीब हूँ न तो मैं तुझे हीरा मोती तो नहीं दे sakta.........magar हाँ मज़ा बहुत दे सकता hoon..........aisa मज़ा जो तू आज के बाद कभी ज़िन्दगी भर नहीं भूल payegi..........aur ये हमारी सुहागदिन सबसे यादगार rahegi.............ussey पहले मैं तुझे ये दीबा दूँ सबसे पहले तू इसमें रखा पानी आधी ख़तम कर de..............yaad रहे इस बोतल में रखा सारा पानी तुझे hi पीना hain.............aur तब तक पीना हैं जब तक ये पूरी बोतल ख़तम नहीं हो जाती...........
काव्य कोई सवाल जवाब नहीं करती और बोतल में रखा पानी धीरे धीरे पीने लगती hain........waise उस पानी का रंग कुछ लाल सा tha..........aur कुछ मीठा bhi...........aur ये निश्चित था की उसमें कुछ मिला हुआ tha...........magar जो भी था उसका स्वाद बहुत ाचा tha......kavya उस पानी को लागतात अपने हलक में उतरती जा रही thi......aur जैसे hi पानी आधे से ज़्यादा ख़तम होती हैं काव्य उस पानी को साइड में रख देती हैं और सवाल भरे नज़रियों से रघु के चेहरे की तरफ एक तुक देखने लगती hain...........mano उससे पूछ रही हो की ऐसा इस पानी में क्या मिला hain.......ussey पहली वो रघु से कुछ पूछती रघु धीरे से बोल पड़ता हैं..............
" memsaheb...............aap डरिये nahin.........ye पानी बाकि पानी की तरह hain..........bus इसमें थोड़ी सी उत्तेजक वाली गोली मिली हुई हैं और थोड़ी सी roohafza...........isko पीने के बाद आपकी बुर में आग और भड़क जाएगी और आप पूरे मज़े के साथ छुडवाएंगी........." और रघु अब तू से सीधा आप पर आए जाता hain.......wahin वो एक छोटी सी डीबी निकलता हैं और जब वो उस डिब्बी को काव्य के सामने अपने हाथों पर रखता हैं काव्य अजीब नज़रियों से उस डिब्बी की तरफ ऐसे देखने लगती हैं जैसे कोई अजूबा देख रही ho............aur जब उसे उसमें राखी जो चीज़ नज़र आती हैं वो अपनी जगह से ऐसे उछाल पड़ती हैं जैसे किसी ने उसके जिस्म में हज़ार वात का करंट चुवा दिया ho................wo चीज़ ऐसी थी जिसे देखकर काव्य के चेहरे पर पसीने चालक पड़े थे.............
वो ये तय नहीं कर पा रही थी की रघु आज उसके साथ कौन सा खेल खेलना चाहता hain..........kyon की न तो उसकी समझ में कुछ आ रहा tha.........aur न रघु उसे खुलकर कुछ बता रहा tha.........wahin कुछ दूर पर बैठा जीतू भी मंद मंद मुस्कुराये जा रहा tha..........shayad अपने दोस्त की जीत par.......................ya फिर शायद काव्य के हार पर.............................
कंटिन्यू.................................................................
" नहीं नहीं raghu...........please.....yahan से मुट्ठ jawo...........tum मेरे साथ ऐसा नहीं कर sakte.........tum इस तरह से मुझसे मुँह मोड़कर नहीं जा सकते............." और काव्य जैसे तड़प उठती हैं वहीँ रघु इस बार काव्य को फिर से हटाता हैं और आगे की तरफ जाने लगता hain..........magar इस बार काव्य जैसे उसके क़दमों में बैठ जाती हैं और उसके पवन को अपने हाथों से जकड लेती hain...........wahin रघु टकटकी लगाए बस काव्य के तरफ गुस्से से देखे जा रहा था............
" behanchod..............jane दे mujhe..........apne आपको न जाने क्या समझती hain............mujhe नहीं करनी तेरी चुदाई..........." और रघु फिर से गुस्से से काव्य पर बादक उठता hain.......kal तक जो काव्य को मेमसाहेब और जी लगाकर बात करता था आज वहीँ गली और बढ़तमीज़ी पर उतर आया tha...........wahin काव्य बस चुप चाप से रघु की बातें सुनी जा रही thi............hawas ने आज उसे पूरी तरह से अँधा कर दिया tha.......wo ये भी आज भूल चुकी थी की वो इस घर की मालकिन हैं और जिसके क़दमों में वो आज बैठी हुई हैं वो इस घर का एक नौकर हैं...............
" रघु please.............aisa न bolo............is तरह से नाराज़ होना ठीक nahin.............main तुम्हें मन थोड़ी न कर रही hoon...........bus तुमसे ये कह रही हूँ की मुझे थोड़ा वक़्त chahiye...........maine कभी आज तक अपने पति को भी वहां नहीं दिया hain........wahan सुना हैं बहुत दर्द होता hain...........aur............" काव्य आगे कुछ बोलती रघु अपने मज़बूत हाथ काव्य के गुर्दें पर ले जाता हैं और उसके बालों को कसकर अपनी मुट्ठी में जकड लेता hain......wahin काव्य न चाहते हुए भी ज़ोरों से सिसक पड़ती hain...........dard उसकी आँखों में साफ़ नज़र आ रहा tha........wahin रघु गुस्से से काव्य के चेहरे को घूरे जा रहा tha............uske मासूम चेहरे ko...........bade गौर से निहारे जा रहा tha.............wo कैसे भूल सकता था की एहि मासूम चेहरा आज उसकी ज़िन्दगी तबाह कर चूका हैं.......
" कैसा waqt.............bol............mujhe अभी तेरा फैसला chahiya.........bata हाँ या naaaaaaaa.............agar तेरा जवाब ना हैं तो मैं जा रहा हूँ अभी..........." और रघु गुस्से से काव्य के चेहरे को घूरने लगता हैं वहीँ काव्य फ़ौरन शर्माकर अपनी नज़रें नीचे की तरफ फेर लेती हैं..........
" ठीक हैं raghu...................mujhe तुम्हारी खातिर आज सब मंज़ूर hain............main तैयार हूँ........." और काव्य जैसे तैसे बोल पड़ती hain..........usney आज रघु की वजह से बोल तो दिया था मगर वो एक बार फिर से सोच में पढ़ गयी थी की उससे ये सब होगा kaise........kyon की रघु का लुंड वो देख चुकी thi........apne मुँह में भी पूरा ले चुकी थी मगर गांड की सूराख उसकी बहुत छोटी thi............aurr बहुत टाइट bhi...........jaise तैसे वो एक ऊँगली भी अंदर नहीं जाती थी तो रघु का लुंड क्या ख़ाक jayega..........aur उसे पूरा यकीन था की जब रघु का लुंड उसकी गांड के अंदर जायेगा उसकी गांड आज पूरी तरह से फुट jayegi.........kitna दर्द होगा वो शायद इसका अंदाज़ा आसानी से लगा सकती थी मगर आज वो रघु के सामने पूरी तरह से मज़बूर नज़र आ रही thi...........shayad अपने छूट की आग की वजह से.............
" साफ़ साफ़ bol............kahan लेगी मेरा lund.......khulkar bata.......aur देख तुझसे मिलने आज कौन आया हैं............." और रघु जीतू को आवाज़ लगता हैं वहीँ जीतू फ़ौरन अंदर के कमरे में चला आता hain........aur जब उसकी नज़र सामने काव्य ार पड़ती हैं वो भी हैरान होता हुआ कभी रघु को तो कभी काव्य के तरफ बड़े गौर से देखने लगता hain.........hairani की बात तो थी hi.......raghu आज उसके बालों को कसकर अपनी मुट्ठी में जकड़ा हुआ था और काव्य वहीँ दर्द से तड़प रही थी.............
" अब क्या हुआ behanchod.............bol क्यों नहीं rahi..........kahan लेगी मेरे लुंड को ........साफ़ साफ़ बता........." और रघु एक बार फिर से काव्य के बालों को कसकर झंझोर देता हैं वहीँ काव्य फिर से दर्द से तड़प उठती hain............aaj वो रघु के सामने पूरी तरह से बेबस नज़र आ रही थी वहीँ रघु के तेवर आज पूरी तरह से बदले हुए नज़र आ रहे they........jeetu भू चुप चाप से खड़ा बस तमशा देख रहा tha............wahin काव्य को उसके सामने शर्म सी आ रही थी..........
" गग्गाआँआंनददददद memeiinnnnnnnnnn............." और काव्य जैसे तैसे बोल पड़ती हैं वहीँ रघु उसके बालों को अब भी अपनी मुट्ठी में जकड़े हुआ था............
" साफ़ साफ़ बोल की तू मेरा लुंड अपनी गांड में लेगी और आज मुझसे अपनी गांड मरवायेगी............." और रघु फिर से काव्य की तरफ अजीब नज़रियों से घूरने लगता हैं वहीँ काव्य बिना वक़्त गंवाए फ़ौरन बोल पड़ती hain...........wo भी ाचे से जानती थी की आज रघु एक नहीं मानने वाला .............और व्वो तब तक उसे नहीं चोदहेगा जब रक् वो अपनी वाली कर नहीं lega..........to बेहतर था की वो उसका hi कहा मानती...........
" जजजजजज्जजीईई मैंन तुम्हारा लूङ्नंदद ायप्प्नी गगगगआनंददद में lungi....aur तुमसे अपनी गाआआआंदददददद मरवाउंगी............" और काव्य की जुबान जैसे लड़खड़ा सी जाती हैं वहीँ रघु इस बार अपने हाथों की पकड़ ढीली करता हैं और काव्य को पूरी तरह से आज़ाद कर देता hain..........aur जीतू की तरफ बड़े गौर से देखने लगता hain...........wahin जीतू भी अजीब नज़रियों से रघु और काव्यको बस देखे जा रहा था.........
" तू ऐसे खड़े खड़े क्या देख रहा hain........chal अंदर कमरे mein...........tujhe आज मैं रियल में चुदाई दिखता हूँ की सुहागरात कैसे मनाई जाती hain..............tu भी क्या याद करेगा की तेरा पला किस्से पड़ा था............" और रघु फ़ौरन काव्य को अपनी गॉड में उठा लेता हैं और उसे उठाते हुए अंदर के कमरे में ले चल पड़ता hain........wahin काव्य भी अब नार्मल हो चुकी थी वो भी जानती थी की आज उसकी इज़्ज़त जीतू के सामने सरे आम नीलम होने वाली hain............magar वो अब छह कर भी कुछ नहीं कर सकती thi...siwaye रघु से छुड़वाने के..............
जीतू अंदर जाता हैं और सामने के लड़की के कुर्सी पर जाकर बैठ जाता hain....mano जैसे कोई मूवी चालू होने वाली ho.........wahin रघु काव्य को बिस्टेर पर लेजाकर आराम से बैठता हैं और खुद भी उसके पास जाकर बैठ जाता हैं फिर वो जीतू की तरफ देखता हुआ धीरे से मुस्कुरा देता hain..........wahin जीतू का लुंड अब सख्त होए लगा tha........wo अपने अंदर छुपे एक्ससिटेमेंट को कब से दबाये बैठा thaa.........aab तो उसका इंतज़ार कारण एक एक पल मुश्किल होता जा रहा था....................
" मैंने जो चीज़ तुझे यहाँ लेन को कहा था क्या वो चीज़ तू यहाँ लाया हैं..............." और रघु जीतू की तरफ देखता हुआ धीरे से कुछ इशारा करता हैंवहीँ जीतू अपने पॉकेट से एक डिब्बा निकलता हैं और वो उस चीज़ को रघु के हाथों में धीरे से थमा देता hain.........fir वो एक बड़ा सा पानी का बोतल निकलता हैं और उसे भी रघु के पास रख देता hain.......wahin रघु भी जवाब में धीरे से मुस्कुरा देता हैं........
" आज मैं अपनी रानी के लिए एक नायब तोहफा लाया hoon.........kya करूँ मैं बहुत गरीब हूँ न तो मैं तुझे हीरा मोती तो नहीं दे sakta.........magar हाँ मज़ा बहुत दे सकता hoon..........aisa मज़ा जो तू आज के बाद कभी ज़िन्दगी भर नहीं भूल payegi..........aur ये हमारी सुहागदिन सबसे यादगार rahegi.............ussey पहले मैं तुझे ये दीबा दूँ सबसे पहले तू इसमें रखा पानी आधी ख़तम कर de..............yaad रहे इस बोतल में रखा सारा पानी तुझे hi पीना hain.............aur तब तक पीना हैं जब तक ये पूरी बोतल ख़तम नहीं हो जाती...........
काव्य कोई सवाल जवाब नहीं करती और बोतल में रखा पानी धीरे धीरे पीने लगती hain........waise उस पानी का रंग कुछ लाल सा tha..........aur कुछ मीठा bhi...........aur ये निश्चित था की उसमें कुछ मिला हुआ tha...........magar जो भी था उसका स्वाद बहुत ाचा tha......kavya उस पानी को लागतात अपने हलक में उतरती जा रही thi......aur जैसे hi पानी आधे से ज़्यादा ख़तम होती हैं काव्य उस पानी को साइड में रख देती हैं और सवाल भरे नज़रियों से रघु के चेहरे की तरफ एक तुक देखने लगती hain...........mano उससे पूछ रही हो की ऐसा इस पानी में क्या मिला hain.......ussey पहली वो रघु से कुछ पूछती रघु धीरे से बोल पड़ता हैं..............
" memsaheb...............aap डरिये nahin.........ye पानी बाकि पानी की तरह hain..........bus इसमें थोड़ी सी उत्तेजक वाली गोली मिली हुई हैं और थोड़ी सी roohafza...........isko पीने के बाद आपकी बुर में आग और भड़क जाएगी और आप पूरे मज़े के साथ छुडवाएंगी........." और रघु अब तू से सीधा आप पर आए जाता hain.......wahin वो एक छोटी सी डीबी निकलता हैं और जब वो उस डिब्बी को काव्य के सामने अपने हाथों पर रखता हैं काव्य अजीब नज़रियों से उस डिब्बी की तरफ ऐसे देखने लगती हैं जैसे कोई अजूबा देख रही ho............aur जब उसे उसमें राखी जो चीज़ नज़र आती हैं वो अपनी जगह से ऐसे उछाल पड़ती हैं जैसे किसी ने उसके जिस्म में हज़ार वात का करंट चुवा दिया ho................wo चीज़ ऐसी थी जिसे देखकर काव्य के चेहरे पर पसीने चालक पड़े थे.............
वो ये तय नहीं कर पा रही थी की रघु आज उसके साथ कौन सा खेल खेलना चाहता hain..........kyon की न तो उसकी समझ में कुछ आ रहा tha.........aur न रघु उसे खुलकर कुछ बता रहा tha.........wahin कुछ दूर पर बैठा जीतू भी मंद मंद मुस्कुराये जा रहा tha..........shayad अपने दोस्त की जीत par.......................ya फिर शायद काव्य के हार पर.............................
कंटिन्यू.................................................................