Intehah................(A टेल ऑफ़ लस्ट) - Page 13 - SexBaba
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Intehah................(A टेल ऑफ़ लस्ट)

अपडेट- 59(बी) (मेघा अपडेट)

सामने दो लोग आ रहे they...........ek तो वाइट ड्रेस पहना हुआ था और उसके चेहरे पर थोड़ी बड़ी बड़ी ढाढी thi...........shakal सूरत से वो कोई डॉक्टर लग रहा tha.............haath में उसके दो glubs...........aur गले पर आला लटका हुआ tha...........aur पीछे जो बाँदा था वो भी उसके कदम से कदम मिलता हुआ उसके साथ चल रहा tha..............jab काव्य उस साख की ओरे देखती हैं उसकी आँखें हैरत से थोड़ी फ़ैल जाती hain...................kyon की ये शकल उसे कुछ जाना पहचाना सा लग रहा tha...............ya शायद वो इस आदमी से कभी मिली thi.........ya कभी उसे कहीं पर देखा tha.................shayad कुछ धुंदली सी यादें............

" यू अरे मोस्ट welcome..............aapka यहाँ मेरे इस लैब में स्वागत hain.......................waise इस नाचीज़ को नरेश के नाम से लोग यहाँ जाना करते hain.............magar तुम चाहो तो मुझे मेरे वहीँ नाम से पुकार सकती ho............ya फिर डॉक्टर कह सकती ho..........waise मैं पेशे से डॉक्टर hi hoon........aur साथ hi साथ कुछ छोटी मोती चीज़ों का रीसर्च भी अक्सर किया करता hoon...........aur आपको ये जानकर हैरानी होगी की यहाँ मैं कभी किसी को नहीं bulata.............aur न hi मेरे इस राज़ के बारे में किसी को कानों कान कोई खबर hain.............tum मेरे दोस्त रघु की बहुत ख़ास हो इस लिए तुम यहाँ पर आ saki...........khair.............chalo अंदर मैं तुम्हें कुछ दिखता हूँ.........." और नरेश इतना कहकर पीछे की तरफ मुड़ता हैं और फिर धीरे धीरे चल पड़ता हैं वहीँ उसके पीछे पीछे राजन भी चल पड़ता hain............wahin काव्य राजन को बहुत गौर से देख रही thi..........shayad राजन का वो चेहरा उसे कुछ याद दिला रहा था..............

" वैसे ये लैब किस चीज़ की hain............aur यहाँ पर तुम किस तरह के रीसर्च करते हो............" और काव्य फ़ौरन सवाल करती हैं वहीँ इरफ़ान उसके सवालों को सुनकर धीरे से हंस पड़ता हैं.........

" ऐसी भी क्या जड़ली hain........ander तो चलो सब पता चल jayega............ki तुम यहीं रहकर hi सब कुछ जान जाना चाहती हो..........." और जैसे hi काव्य अंदर दूसरे कमरे में जब जाती हैं उसके होश मनो उड़द जाते hain............wo चरों तरफ अपने सामने उस लैब को बड़े गौर से देखने लगती hain..............lab काफी लुम्बा और बड़ा tha................samney एक बहुत बड़ा हाल जैसा tha...........uske चरों तरफ कई सरे टेस्टोबेस और चेमिकल्स रखे हुए they............aur सामने के दीवार पर दो बड़े बड़े करीब 7 फुट ऊँची गिलास की जार भी thi............jismein दो इंसान रखे हुए they........wo भी पूरे nangey...........aur ज़िंदा bhi.............jinke लुंड पर दो तीन तुबेस लगी हुई thi.........jo एक दूसरे से कनेक्टेड thi.............aur गले के नीचे का सारा हिस्सा एक अजीब सा पानी में डूबा हुआ tha.............kuch रंगीन और ग्रीन कलर के पानी jaisa.........us इंसान के चेहरे पर मास्क लगा था और पीछे एक बड़ा सा ऑक्सीजन सिलिंडर भी उसके सांस की नाली से कनेक्ट tha.................same वही सिचुएशन उसके बगल के जार का भी था................

वहीँ कुछ दूर पर तरह तरह के सीज़्ज़ेर्स और इंस्ट्रूमेंट्स रखे हुए they........shayad ओपेरटशन करने के ..........तो किसी टेस्टोबे में आदमी का लुंड काटकर एक जार में रखा हुआ tha........uspar कई तरह के चेमिकल्स भी लगे they..........aur सामने एक बड़ा सा नीले रंग का प्लास्टिक उस फर्श पर बिछा हुआ था जिसपर तेल जैसा कुछ चिपचिपा सा चेमिकल्स साफ़ नज़र आ रहा tha.........jo तेल की वजह से काफी चमक रहा tha...........ye सब नज़ारा देखकर काव्य के तो जैसे होश उड़द गए थे..........................

" yeeeeeeeeeeeeeeee साअबब kyyaaaaaaaaaa hhhaaaiinnnnnnnnnnnnnnn......." और काव्य जैसे तैसे धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ इरफ़ान उसकी बाटिओं को सुनकर धीरे से हंस पड़ता हैं...........

" जब तुमने पूछ hi लिया तो मैं तुम्हें सब कुछ बता hi देता hoon............maine बताया न की मैं एक पेशे से डॉक्टर hoon.....aur साथ hi साथ यहाँ रीसर्च भी करता रहता hoon..........ye तो मेरी बस एक छोटी सी लैब hain.............jo तुम्हारी आँखों के सामने हैं............" और इस बार इरफ़ान हँसता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य के तो जैसे होश उदय हुए they.............aab उसे ऐसा लगने लगा था की आज उसने रघु की बात मानकर अपनी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी भूल की हैं..........

" magar............ye लैब आखिर हैं किस चीज़ ki............aur यहाँ पर तुम किस तरह के रीसर्च करते हो............." और काव्य अजीब सी नज़रियों से इरफ़ान की तरफ देखती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ इरफ़ान उसकी बाटिओं को सुनकर फिर से हंस पड़ता हैं...........

" transgender........................samjhti ho...........kisey कहते hain..............ladke को अगर लड़की बनाना ho...............ya लड़की को लड़का तो ............मैं ये काम यहाँ पर करता hoon...............sabki नज़रियों से chipkar.............main उनके लिंग चेंज करके मेल से female........aur फीमेल से फिर मेल बनता hoon..........aur वैसे मुझे इस काम के काफी ज़्यादा पैसे मिलते hain......aur मज़े bhi......aur मैं ये काम अब तक कीटों पर कर चूका हूँ................" और इरफ़ान फिर से काव्य की तरफ देखता हुआ हंस पड़ता हैं वहीँ काव्य दुर्र से मनो सेहम जाती hain..........uski तो जैसे अब बोली नहीं निकल रही थी............

" तो क्या tum...................mere saath..........bhi............."aur काव्य की जुबान जैसे लड़खड़ा सी जाती हैं वहीँ इरफ़ान उसकी बाटिओं को सुनकर फिर से हंस पड़ता हैं........

" अरे nahin.........nahin...........tum ऐसा क्यों सोच रही ho...........tum डरो nahin...............hum तुम्हारे साथ ऐसा वैसा कुछ नहीं karengey............bus तुम पर एक दो छोटे मोठे प्रयोग करने हैं और फिर तुम्हारी यहाँ पर ाचे से चुदाई होनी hain.........jo मेरे यहाँ सभी दोस्त मिलकर तुम्हारे साथ karengey..........aur kya.......iske बाद तुम पूरी तरह से आज़ाद हो......................." और इरफ़ान इस बार थोड़ा सा सीरियस होता हुआ फिर से बोल पड़ता hain........wahin काव्य के चेहरे का रंग फीका पड़ता जा रहा tha..........usey कुछ समझ में नहीं आ रहा था की आखिर ये सब लोग उसके साथ करना क्या चाहते हैं.......

"मुझे नहीं करना यहाँ तुमसब से कोई prayog...........tum सब सरे के सरे पीछे ho...........aadhe पागल हो.........." और काव्य जैसे तड़प उठती हैं वहीँ इस बार इरफ़ान उसकी तरफ देखता हुआ फिर से मुस्कुरा पड़ता हैं..............

" तुमने सही पहचाना humein...........khair..........raghu बता रहा था की तुम अक्सर कपड़े में hi मूट दिया करती ho..........aur वैसे भी तुम आजकल मूट ज़्यादा रही हो तो ये तुम्हारे सेहत के लिए ज़्यादा ाची बात नहीं hain..........to मैं चाहता हूँ की मैं तुम्हारे इस बीमारी का इलाज़ karun.........to तुम्हारे लिए ये इंजेक्शन ठीक rahega.............jo मैंने तुम्हारे लिए ख़ास तौर पर तैयार किया hain.............isko लगाने के बाद तो तुमपर जैसे एक नशा सा च jayega............aur तुम पूरी तरह मस्त होकर हम सब से छुड़ा करोगी........................" और इस बार इरफ़ान सामने रखा एक इंजेक्शन अपने हाथों में उठता हैं और सामने रखे कई सरे टेस्टोबेस में से थोड़ी थोड़ी सब में से उस इंजेक्शन को फइलल करता हैं और जब 5मल इंजेक्शन जब पूरी तरह जब भर जाता हैं उस इंजेक्शन का रंग जैसे ग्रीन हो जाता hain.........jisey देखकर इस बार काव्य ज़ोरों से चीख पड़ती हैं..........

" नहीं nahin..........mujhe यहाँ से जाना हैं bus....................mujhe जाने do.......please.........." और काव्य लगभग चीखती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ इरफ़ान उसकी बाटिओं को सुनकर फिर से मुस्कुराने लगता हैं....

" अरे ये क्या!!!!!!!!!!! हम तो तुम्हारे साथ प्यार का खेल खेलना चाहते हैं और तुम हमारे साथ co-orporate नहीं कर rahi........ye गलत बात hain..............raghu ........jeetu........pakdo इसके दोनों हाथ और इसे ले चलो उस कमरे में........." और रघु और जीतू इस बार काव्य को कसकर जकड लेते हैं और उसे उठकर अपनी गॉड में सामने के कमरे में ले जाते हैं और उसी जगह बैठा देते हैं जहाँ पर वो जिम वाला सेट tha..............jeetu पीछे जाकर काव्य के दोनों हाथ पीछे की तरफ जकड़कर पूरी तरह से फोल्ड कर देता hain.......aur रघु काव्य के दोनों पवन फैलता हुआ हवा में 6 फुट ऊँचा उस रोड के दोनों बगल लटका देता हैं और राजन और जावेद उसके दोनों पवन को तेज़ी से जकड लेते हैं...........

काव्य का अब पूरा जिस्म हवा में झूल रहा tha..........uske पूरे जिस्म का वजन अब उसकी थाई पर tha........wahin इरफ़ान उस इंजेक्शन को काव्य के पास ले आता हैं और बड़े गौर से उसके तरफ एक तुक देखने लगता hain..........wahin काव्य दुर्र से रू पड़ती hain.............usey तो ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था की ये लोग न जाने आगे उसके साथ क्या करने वाले hain...........wo अब पूरी तरह से बेबस नज़र आ रही thi.........wo चाह कर भी अपने आपको इन दरिंदों से नहीं छुड़ा पा रही थी...........

" please.........mujhe अब यहाँ से जाने do.............mujhe छोड़ do....please..........." और काव्य उन सब के आगे फर्याद करने लगती हैं वहीँ उनके चेहरे पर कोई शिखन नहीं आती........

" तुम्हें हम छोड़ dengey...........daro मुट्ठ baby.............tumhein कुछ नहीं hoga............is इंजेक्शन में वो साडी खूबियां हैं जो तुम्हें चुदाई के वक़्त chahiye...........aur सबसे बड़ी बात इसमें जितने भी दवाइयां हैं साडी की साडी मेरी बनायीं हुई hain..........aur इस दवाई का असर 7 से 8 घंटे तक रहता hain..........aur जहाँ पर भी ये इंजेक्शन लगेगा ये उस हिस्से को पूरी तरह से ढीला और फ्लेक्सिबल बना dega........fir चाहे ये लोग उस हिस्से को फाड़े या कुछ भी करे तुम्हें ज़रा भी तकलीफ नहीं hoga.........balki मज़ा aayega........aur इसको लगाने के बाद तुम सिर्फ चुदाई के बारे में hi sochogi.......jissey तुम्हारे छूट से पानी तो बहेगा hi मगर तुम्हारी प्यास एक सेकंड के लिए भी ख़तम नहीं hogi......chahe तुम जितना इन सब से छुड़वा लो..........

तो मेरे ख्याल से ये इंजेक्शन तुम्हारे शरीर का सबसे बेस्ट हिस्सा ................तुम्हारी ये छूट hain............jahan पर मैं ये इंजेक्शन को अब तुम्हारे शरीर में इंजेक्ट करने जा रहा hoon........yaad हाँ तुम्हें वो पाउडर जो रघु ने तुम्हें पानी में घोलकर पिलाया tha..........wo तो बस 40% परसेंट hi काम करता tha...........magar इस इंजेक्शन में पूरे 100% परसेंट वो ताक़त हैं जो तुम्हें मज़े की बुलंदियों पर pahuchayega..........waise वो दवाई भी मेरी hi बनायीं हुई thi...........aur ये भी मेरी hi बनायीं हुई हैं............" और इस बार इरफ़ान अपना एक हाथ काव्य के जांघों के बीच रख देता हैं और उसकी स्कर्ट को ऊपर की तरफ करने लगता hain.......wahin काव्य की स्कर्ट ऊपर होते hi उसकी खुली हुई बुर फिर से सबके सामने be-parda हो जाती hain.........irfan बड़े गौर से काव्य के बुर को एक तुक देखता रहता हैं फिर वो उसकी बुर के लिप्स को धीरे से फ़ैलाने लगता हैं और काव्य के बुर के अंदर वो लाल हिस्सा अब साफ़ सबकी सामने चमकने लगता हैं........

वो उस इंजेक्शन को काव्य के बुर के पास ले जाता हैं और उसकी नीदडले को इस बार उसके छोटे से मूट के छेद के थोड़ा सा ऊपर उसके क्लिटस पर हौले से रखता हैं और फिर बहुत आहिस्ता आहिस्ता से उस इंजेक्शन को काव्य के जिस्म में इंजेक्ट करना शुरू करता hain.........jaise hi इंजेक्शन का नीदडले अंदर घुसता हैं काव्य इस बार पूरी ताक़त से चीख पड़ती hain.........magar उसके चीखने की बरी तो अब थी ...........जब उसमें रखा दवाई जब काव्य के बुर के रास्ते धीरे धीरे अब उसके जिस्म में घुलता जा रहा tha.........irfan धीरे धीरे उस इंजेक्शन को काव्य के शरीर में इंजेक्ट करता हैं वहीँ काव्य इस बार और भी ज़ोरों से चीखने चिल्लाने लगती hain.........usey ऐसा लग रहा था जैसे दर्द से उसका बुर अभी फुट jayega...........uski आँखों से आंसूं लगातार बह रहे थे........

मगर इरफ़ान कहाँ मानेवाला tha...........wo तो बस उस दवा को काव्य के बुर के रास्ते उसके शरीर के अंदर कैसे भी पहुँचाना चाहता tha............aur वो इसमें सफल भी हो रहा tha............injeection की आखिरी आते आते काव्य जैसे चीखती हुई बेहोश हो जाती hain..........kyon की अब दर्द बर्दास्त करना उसके बस का नहीं tha..........wahin जब इरफ़ान उस इंजेक्शन को पूरा लगा देता हैं अगले hi पल उसके चेहरे पर एक गन्दी हंसी तैर जाती हैं वहीँ वो काव्य के खूबसूरत से चेहरे की तरफ एक तुक देखने लगता hain...........aane वाला समय काव्य पर कितना भरी पड़ने वाला था और ये सब लोग उसके साथ और क्या करने वाले they............ye तो बस आने वाला वक़्त hi बता सकता था...............................

टिल कॉन्टिनोएड.................................................
 
अपडेट- 60 (ा) (मेघा अपडेट)

मगर इरफ़ान कहाँ मानेवाला tha...........wo तो बस उस दवा को काव्य के बुर के रास्ते उसके शरीर के अंदर कैसे भी पहुँचाना चाहता tha............aur वो इसमें सफल भी हो रहा tha............injection की आखिरी आते आते काव्य जैसे चीखती हुई बेहोश हो जाती hain..........kyon की अब दर्द बर्दास्त करना उसके बस का नहीं tha..........wahin जब इरफ़ान उस इंजेक्शन को पूरा लगा देता हैं अगले hi पल उसके चेहरे पर एक गन्दी हंसी तैर जाती हैं वहीँ वो काव्य के खूबसूरत से चेहरे की तरफ एक तुक देखने लगता hain...........aane वाला समय काव्य पर कितना भरी पड़ने वाला था और ये सब लोग उसके साथ और क्या करने वाले they............ye तो बस आने वाला वक़्त hi बता सकता था...............................

अब आगे.................................................................................

करीब 5 मिनट बाद काव्य को जब होश आता हैं तो वो उसी हाल में फर्श पर सोई हुई मिलती hain........usi नीले रंग की प्लास्टिक par............jispar ढेर सारा तेल जैसा कुछ केमिकल लगा हुआ tha........is तरह सोये रहने से वो केमिकल अब उसके जिस्म और कपड़ों पर भी लग रहा tha...........wo फ़ौरन उठकर बैठ जाती हैं और बड़े गौर से इधर उधर देखने लगती hain...........uske चरों तरफ सभी लोग खड़े उसी तरफ देखते हुए मुस्कुरा रहे they.............uska सर अब हल्का हल्का सा चक्र रहा था शायद नशे की वजह से...............

" अब तुम कैसा फील कर रही हो............. मरस काव्य mehta...............mere ख्याल से अब तुम बहुत रिलैक्स महसूस कर रही hogi.........tumhara जिस्म बहुत हल्का सा तुम्हें लग रहा hoga..............aur अब बदन में कहीं भी दर्द महसूस नहीं हो रहा hoga............tumpar इस समय पूरी तरह से मदहोशी छायी हुई hogi...........bus कुछ hi मिनटों बाद तुम्हारे बुर में एक तेज़्ज़ खुजली होनी शुरू हो jayegi..........aisa लगेगा जैसे तुम्हारी बुर के अंदर हज़ारों चीटियां एक साथ रींग रही ho.........kaat रही ho.............aur समय के साथ साथ तुम्हारी ये खुजली भी बढ़ती चली jayegi........aur इस हुड्ड तक बढ़ जाएगी की तुम अपनी बुर और गांड मरवाने के लिए कुछ भी कर jawogi..............kisi भी हुड्ड तक गिर जाओगी ............वैसे खेल में मज़ा तब आता हैं जब सामने वाला खिलाडी मज़बूत ho.......aur दमदार ho..............to चलो अब खेल शुरू करते hain....................lets थे गेम begin....................now.................." और इस बार इरफ़ान हँसता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य एक तुक सबके चेहरे को बस देखे जा रही थी...........

इरफ़ान फिर अपने जेब से वहीँ पुड़िया निकलता हैं और एक एक करके सबको वहीँ पुड़िया थमता हुआ उसे खाने को कहता hain..........magar ये पुड़िया पहले वाले पूड़िये से कुछ अलग tha..........iska रंग bhi......aur इसका पावर bhi........sab बरी बरी से उस पूड़िये में रखे उस दवा को कहते चले जाते हैं और कुछ hi पलों में सबकी आँखें हवस से पूरी तरह लाल हो जाती hain.........bari बरी से सब अपने अपने कपड़े एक एक कर उतरना शुरू करते हैं और तब तक किसी के हाथ नहीं रुकते जब तक उनके जिस्म से सारा कपडा पूरी तरह से उतर नहीं jate..............irfan का लुंड कोई ख़ास नहीं था ..........न hi ज़्यादा मोटा और न hi ज़्यादा lumba.......magar था dumdaar...........magar राजन और जावेद का लुंड रघु से थोड़ा छोटा था मगर मोटा काफी tha...............aur कला भी....................

इस वक़्त काव्य उन 5 मर्दों के बीच अकेली घिरी हुई thi.....aur पाँचों के पाँचों मर्द अब पूरी तरह से उसके सामने नंगे खड़े they.............sare के सरे लुंड अब उसकी दो छेदों में घुसने को पूरी तरह से बेताब they.........kisi के जिस्म पर कपड़े का एक भी रेशा नहीं tha..........tha तो बस काव्य के जिस्म par...........wo भी उतना जितना वो पहनकर वहां आयी thi.................kavya पर अब उस दवा का असर धीरे धीरे होने लगा tha.............uska सर हल्का हल्का सा घूम रहा tha........aur आँखें पूरी तरह से सूर्ख लाल होती जा रही thi.............aisa लग रहा था जैसे वो इस वक़्त नशे में ho...........aur शायद वो इस वक़्त नशे में hi थी.........

जावेद सामने की अलमारी में से करीब 5 पैकेट 250मल का तेल की शीशी लेकर आता hain...........ye एक लुब्रीकेंट आयल tha.........shayad वैसा जो इस वक़्त उस नीले रंग के प्लास्टिक पर लगा हुआ tha.............aur अब हल्का हल्का काव्य के जिस्म पर भी लगता जा रहा tha..............javed फिर उस आयल को एक एक कर सबके हाथों में थमा देता हैं और सभी के सभी एक एक कर काव्य के तरफ धीरे धीरे बढ़ने लगते hain.........usey घेरते hue...........raghu काव्य के पीछे जाता हैं और उस तेल की शीशी को काव्य के गुर्दें और पीठ पर रखकर उस बोतल को धीरे से प्रेस करता hain.............aagey बोतल की धाकन में छेद होने की वजह से उसमें से कुछ तेल प्रेशर के साथ निकलता हुआ काव्य के बदन पर धीरे धीरे अब गिरने लगता hain...........wahin काव्य के कपड़े भी तेल से पूरी तरह से भीगते चले जाते hain........fir उसके बाद जीतू उसकी कमर पर तेल गिरता hain........to राजन उसके सीने par........to कोई उसकी पीठ par........is तरह से सब लोग बरी बरी से उस तेल को काव्य के हर जिस्म के हिस्से पर गिरा रहे थे...........

अब ये खेल चलता जा रहा tha............kavya पल पल अब उस तेल में भीगती जा रही thi...........sir से लेकर पवन तक उसका जिस्म अब उस तेल में नाहा गया tha..............yahan तक के उसके कपड़ों से भी अब तेल टपकने लगा tha.........jo अब नीचे बिछे उस बड़े से प्लास्टिक पर गिर रहा tha...........poorey तेल में भीगने की वजह से काव्य का बदन अब चमकने लगा tha.........wahin बरी बरी से कभी वे सब भी अपने अपने जिस्म पर तेल गिरते जा रहे थे............

अभी तो खेल का पहला दौर चल रहा tha..............dusara दौर आते hi सब उसी तरह काव्य को घेरकर फिर से खड़े हो जाते हैं....... ........और फिर से नए तेल की बोतल उनके हाथों में होती hain...........javed इस खेल को पहले शुरू करता hain........wo थोड़ा सा आगे बढ़ता हैं और काव्य के कमर पर अपने हाथ धीरे से सरकता हुआ उसे अपनी बाँहों में कसकर जकड लेता hain.........wahin काव्य भी उसकी गिरफ्फत में आसानी से आ जाती hain...........javed इस बार अपना एक हाथ काव्य के कमर के थोड़ा और ऊपर उसके बड़े बड़े चूचियों की तरफ ले जाने लगता हैं और इस बार उसके नरम और मुलायम चूचियों को कसकर अपने कठोर हाथों से मीइससससस देता hain........aur साथ hi साथ अपने दूसरे हाथों से वो उस तेल को भी उसकी ब्रा के अंदर डालने लगता hain........wahin काव्य इस बार ज़ोरों से सिसक पड़ती hain..................ye देखकर सभी ज़ोरों से हंस पड़ते हैं...........

" तू तो इसेक दूध को ऐसे मसल रहा हैं जैसे इनमें से दूध की जगह तेल निकलता ho...............dekh तो कैसे इसके दूध से तेल तप तप करके छु रहा हैं.............." और इस बार राजन मज़े लेता हुआ जावेद की तरफ देखता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ सभी उसकी बाटिओं को सुनकर ठहाका मरकर हंसी लगते hain.............wahin काव्य को भी अब इस खेल में मज़ा आने लगा tha...........uski बुर से पानी अब बहना शुरू हो गया tha...........wo तो खुद अब चाहती थी की ये सभी लोग उसे आज बहुत बुरी तरीके से रगड़े..........

" तू खुद hi क्यों नहीं पूछ लेता की इसके दूध को मसलने से तेल निकलता हैं या .........फिर कुछ और..........." और इस बार जावेद काव्य के दोनों चूचियों को बरी बरी से मसलता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ इस बार फिर से सभी लोग ज़ोरों से हंस पड़ते हैं..................

"अभी तो फिलहाल इसमें से तेल निकल रहा hain..........magar आगे हो सकता हैं कुछ और निकल जाये..........." और इस बार राजन ताना मरता हुआ फिर से हंस पड़ता hain..........ek बार फिर से ननगापन का खेल शुरू हो गया था.....................

कुछ देर तक जावेद काव्य के चूचियों को बरी बरी से मिष्टा रहता हैं फिर वो काव्य को आगे की तरफ धकेल देता hain...........rajan के taraf..........rajan इस बार काव्य को मज़बूती से अपनी गिरफ्त में ले लेता hain...........aur उसे अपने सीने से लगता हुआ उसके होंठों को चूमने लगता hain..........chatney लगता hain..............aur इस बार अपने दोनों हाथों को काव्य के कमर से नीचे की तरफ सरकता हुआ उसके बड़े बड़े गांड पर ले जाता हैं और बरी बरी से उसके गांड को मसलना शुरू करता hain..........to कभी अपने हाथों में थमा तेल उसके स्कर्ट पर गिरने लगता hain.............ye देखकर इस बार जावेद ज़ोरों से हंस पड़ता हैं.....

" अब तू क्या बोलता hain...................tu तो साला इसके गांड से तेल निकल रहा हैं be...............maine तो सुना हैं की इसमें से कुछ और hi चीज़ निकलती हैं..........." और राजन फिर से ज़ोरों से हँसता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ जावेद भी उसकी बाटिओं को सुनकर मुस्कुरा पड़ता हैं.....

" तू फ़िक्र मुट्ठ kar..........aab तक इसके दोनों छेद में से कुछ न कुछ निकलता tha...............magar अब इसके छेद में कुछ न कुछ jayega.........tabhi तो खेल का असली मज़ा आएगा............." और इस बार राजन उस बोतल को काव्य के स्कर्ट के अंदर दाल देता हैं और उस बोतल को कसकर प्रेस करता hain.........jissey ढेर सारा तेल काव्य के स्कर्ट के अंदर से बेहटा हुआ उसके दोनों टांगों के बीच से होता हुआ नीचे की तरफ गिरने लगता हैं वहीँ सब इस बार ज़ोरों से हंस पड़ते हैं..............

फिर वो इस बार काव्य को इरफ़ान के पास धकेल देता हैं और इरफ़ान मुस्कुराता हुआ अपना एक हाथ काव्य के स्कर्ट के अंदर दाल देता हैं और उसके बुर और गांड के बीच दरार में धीरे धीरे अपनी उँगलियों से छेड़ने लगता hain..........jab काव्य की गांड के सूराख के पास जब उसकी ऊँगली जाती हैं वो थोड़ा सा रुक जाता hain...........aur धीरे से मुस्कुरा पड़ता hain.........aur इस बार अपने दोनों ुंगियों को फिर से काव्य के गांड पर रखता हैं और अंदर राखी जो काव्य के गांड में गाजर थी वो उसे धीरे धीरे से खींचता हुआ बहार निकलने लगता hain.........magar बहुत आहिस्ता aahista...........aur जब वो गाजर निकल जाती हैं वो उस गाजर को बड़े गौर से देखने लगता हैं और फिर मुस्कुराता हुआ सबको दिखाकर उस गाजर को धीरे धीरे से खाने लगता hain.........magar न hi इरफ़ान अपने उँगलियों को काव्य के बुर से हटाता hain.........aur न hi उसे छोड़ता hain.......jab तक की उसका गाजर पूरा ख़तम नहीं हो जाता.........

" कौन कह रहा था की इसकी बुर और गांड से बस तेल निकलता hain...............ye dekho.........bada सा gajar...........jo अभी अभी मैंने इसकी गांड के अंदर से निकला hain...............waise इसका स्वाद और भी टेस्टी हो गया hain.............ye मुट्ठ भूलो की मैं एक डॉक्टर hoon.........jo चाहे वो मैं इसके दोनों छेद से निकलवा भी सकता hoon.............aur दाल भी सकता हूँ..............." और इस बार इरफ़ान काव्य के गुर्दें को धीरे से चूमता हुआ बोल पड़ता हैं और साथ hi साथ उसके दोनों चूचियों को बरी बरी से मसलने लगता hain.........wahin काव्य अब पल पल बेचैन होती जा रही thi.......dheere धीरे अब उसका साबरा टूटता जा रहा tha............fir इरफ़ान जीतू के पास काव्य को धकेल देता हैं और जीतू इस बार उस बोतल को काव्य के स्कर्ट के अंदर डालता हैं और उसकी बुर में उस तेल को गिरने लगता hain..............kavya पूरी तरह से तेल में नाहा चुकी thi............aur अब आखरी में रघु भी एहि खेल खेलता hain.................aisa लग रहा था जैसे काव्य कोई खिलौना hain..........aur ये सब उसके साथ खेलकर अपना मुन्न बेहला रहे हो...................

" नंगा करो isey...............khel का असली मज़ा तो तब आएगा जब ये भी हमारी तरह पूरी नंगी rahegi..........aabhi तो इसके साथ बहुत से खेल खेलने हैं..........." और इरफ़ान इतना कहता हुआ काव्य के ऊपरी स्कर्ट को नीचे की तरफ सरका देता hain......wahin सब बरी बरी से आगे बढ़ते हैं और उसके कपड़े एक एक कर उतरना शुरू करते hain..........to कोई faadna.............pehle उसकी स्कर्ट उतरती hain............fir shirt.............aur लास्ट में उसी bra............aur सरे कपड़े उतर जाने के बाद वो उसके कपड़े को एक कोने में किसी कचरे की तरह फेंक देते hain.............ab काव्य एक बार फिर से सर से लेकर पवन तक पूरी नंगी thi..............magar अब उसे शर्म नहीं आ रहा tha.............balki अब उसे इस खेल में मज़ा आ रहा tha.........wo तो अब खुद चाहती थी की ये सब उसके साथ पूरा नंगापन का खेल खेले.......................

उसकी प्यास अब इस हुड्ड तक बढ़ चुकी थी की वो बस एहि चाहती थी की ये सब उसकी दोनों छेद को आज पूरी तरह से फाड़ dein..........usmein जी भर का अपना लुंड pele........uske बुर और गांड के साथ जो चाहे ये सब kare.................kyon की काव्य अब अपने दिमाग से नहीं बल्कि अपने बुर से सोच रही thi..........aab वो दवा उसके जिस्म पर पूरी तरह से हावी होता जा रहा ttha.............usey बस चुदाई से मतलब tha........chahe जैसे ho.........aab ये सब उसके साथ कुछ भी kare.............usey अब बिलकुल भी परवाह नहीं थी...............

रघु वहां से फ़ौरन दूसरे कमरे में जाता हैं और जहाँ पर ढेर साडी नायलॉन की रस्सियां राखी हुई थी वो उसे जाकर ले आता hain..........aur इस बार वो काव्य के ठीक पीछे जाकर खड़ा हो जाता hain.............ussey ठीक satkar.........itne करीब की उसका लौड़ा अब काव्य की गांड को दस्तक देने लगा tha.............wo फिर उसके होंठों को धीरे धीरे से चूसता हुआ उसके दोनों हाथों को पीछे की तरफ फोल्ड करता hain.............aur जब काव्य के दोनों हाथ पीछे की तरफ फोल्ड हो जाते हैं वो उसके दोनों हाथों को क्रॉस करता हुआ उस राशि से कसकर उसके हाथों को बांधने लगता हैं..........

वहीँ काव्य न hi कोई सवाल जवाब करती हैं और न hi रघु को रोकती hain..........aur जब काव्य के दोनों हाथ पूरी तरह से टाइट बंद जाते हैं रघु उसके लबों को चूसना बंद कर देता हैं और इस बार काव्य को ढाका देता हुआ आगे की तरफ धीरे से धकेल देता hain..........wahin काव्य उस नीले रंग की प्लास्टिक पर धाम से गिर पड़ती hain..........ye नाज़ारा देखकर सभी ज़ोरों से हंस पड़ते हैं......

अब काव्य का पूरा जिस्म तेल में नाहा गया tha...............aisa कहीं कोई हिस्सा नहीं बचा था उसके जिस्म का जहाँ पर तेल न लगा ho.......jeetu आता हैं और काव्य को उठता हुआ उसके दोनों पवन फोल्ड करके उसे सबके बीच घुटनों के बल बैठा देता hain............wahin काव्य के दोनों हाथ पीछे बंधे होने की वजह से वो बस उनके तरफ बस देखती रहती hain........wahin उन सब के दिमाग में कुछ बहुत खतरनाक प्लान चल रहा tha............jisey अब वो अंजाम देना चाहते थे............

" सुना हैं की तू लुंड बहुत ाचा से चूसती hain............raghu तेरी बड़ी तारीफें किया करता hain.............chalo आज देख भी लेते हैं की रघु तेरे बारे में सही कहता हैं या ........झूठ ........." और इस बार इरफ़ान हँसता हुआ आगे बढ़ता हैं और काव्य के बालों को कसकर अपनी मुट्ठी में जकड लेता हैं वहीँ काव्य दर्द से अपना मुँह पूरा खोल लेती हैं और इरफ़ान उसकी तरफ देखता हुआ धीरे से अपने मुँह में से गधा गधा गन्दा थूक निकलता हुआ उसे काव्य के मुँह के अंदर धीरे धीरे से गिरने लगता hain............wahin काव्य उसके लार और थूक को अपने हलक़ के नीचे उतरती चली जाती hain......fir वो ढेर सारा तेल अपने लौड़े पर भी गिरता हैं और अगले hi पल वो अपने काळा लौड़े को उसके होंठों से लगता हुआ अपना लुंड उससे चूसवाने लगता हैं.............

पहले धीरे dheere...........fir गुज़रते वक़्त के साथ साथ इरफ़ान का वहिसिपं भी बढ़ता चला जाता hain..........wo काव्य के बालों को खींचता हुआ अपना लौड़ा पूरे उसके हलक में उतरता जा रहा tha........wahin काव्य बेबस और लाचार सी उसके लौड़े को अपने हलक में लेती जा रही thi..........haath उसके बंधे होने की वजह से वो न hi इरफ़ान को रोक सकती thi..........aur न hi उससे दूर जा सकती thi.........tabhi जावेद और राजन भी अपने अपने लौड़ा हिलाते हुए काव्य के पास आते हैं और उसके मुँह में बरी बरी से अपना लौड़ा ठूसने लगते हैं...........

कंटिन्यू...................................................................
 
अपडेट- 60(बी) (मेघा अपडेट)

कभी राजन अपना लौड़ा उसके मुँह में पूरा pelta.............to कभी javed............to कभी irfan...............magar रघु और जीतू वहीँ सामने खड़े बस उन सबको देख रहे they.............jeetu फिर आता हैं और इस बार वो अपने हाथों को काव्य के कमर के नीचे की तरफ ले जाने लगता hain............aur अपने हाथों को धीरे धीरे बढ़ते हुए और नीचे की तरफ ले जाने लगता hain...........uske बुर और गांड की तरफ................

फिर अगले hi पल वो अपने दो उँगलियों को काव्य के बुर के अंदर पेलता हैं और फिर तेज़ी से काव्य की बुर को रगड़ना शुरू करता hain...........wahin काव्य लुंड चूसना और तेज़्ज़ कर देती hain............uski भी आहें तेज़्ज़ होती जा रही thi......aur बुर से ढेर सारा पानी निकलता जा रहा tha...............jaise जैसे जीतू का हाथ तेज़्ज़ चल रहा था काव्य और तेज़ी से उन तीनों का लुंड चूसती जा रही thi..........khel अब शुरू हो गया था.....................

जावेद को जब बर्दास्त नहीं होता वो फ़ौरन आगे बढ़ता हैं और काव्य के मुँह के पास अपने दोनों टांगों को ले जाता हैं और अपने दोनों पवन उसके सर के दोनों बगल रख देता hain..............aab काव्य का सर जावेद के टांगों के बीच tha..........wo उसी हाल में अपना लौड़ा इस बार काव्य के मुँह के अंदर पेलना शुरू करता हैं और तब तक ऐसे hi दबाव बनाये रखता हैं जब तक की उसका पूरा लौड़ा काव्य के हलक़ में नहीं समां jata..................ek बार फिर से काव्य पूरी तरह बेबस नज़र आ रही thi...............wo तो जिसे अब इन सब की खिलौना बानी हुई थी चाहे जो जैसा उसे इस्तेमाल कर रहा था.............

जावेद अपने लुंड को करीब 20 सेकंड तक काव्य के हलक़ में फंसाये रखता हैं और जब उसे लगता हैं की काव्य अब बर्दास्त नहीं कर पायेगी वो फ़ौरन अपने लौड़ा को बहार खींच लेता हैं वहीँ काव्य इस बार ज़ोरों से ख़ास पड़ती hain............uski आँखों से आंसूं लगातार बहे जा रहे they...............magar ये खेल बस जावेद तक नहीं सिमित tha............us कमरे में बरी बरी से सभी लोग उसके साथ एहि बर्ताव कर रहे they............javed तो अपने लौड़े चूसवाने के साथ साथ अपने दोनों ांडों को भी बरी बरी से चुसवा रहा tha.......to कभी वो अपने गन्दी गांड को काव्य के मुँह पर रखकर उससे चतवता............

थोड़े देर बार सभी राउंड में घूम जाते हैं और सबकी गांड काव्य के चेहरे की तरफ हो जाती hain.............aab काव्य को ये समझाना या बताना ज़रूरी नहीं था की वे सब अब क्या चाहते hain...........kavya घुटनों के बल फिर से होती हैं और पहले राजन के गांड और उसके दोनों ांडों को बरी बरी से चूसकर और चाटकर साफ़ करती hain.................fir वो जावेद के पास जाती हैं और एहि सिलसिला यु hi चलता रहता हैं जब तक सभी के सभी अपनी गांड और ाँद काव्य से साफ़ नहीं करवा लेते...............

करीब 45 मिनट तक सब बरी बरी से अपने लुंड को काव्य के मुँह और हलक़ में पेलते रहते हैं और जब तक जिसका जी चाहता हैं वो उसके साथ खेल खेलता हैं....... फिर एक एक कर सभी उससे दूर हुत्त जाते hain...........wahin काव्य घुटनों के बल बैठी लुम्बी लुम्बी सांसें ले रही थी...........

उसके मुँह से गधा गधा थूक और लार टपक रहा tha.......jo उसके सीने और होंठों से बेहटा हुआ नीचे गिर रहा tha...........magar काव्य को तो आज बस उन सब का दर्द सहना tha............aur शायद उन्हें काव्य को ऐसे दर्द देने में मज़ा भी बहुत आ रहा था..................

" मुझे घोड़े की सवारी देखनी hain...............to मैं चाहता हूँ की तुम इसे घोड़े पर baithawo.................maza आएगा इसे भी.............." और इस बार जावेद हस्ता हुआ उनकी तरफ देखकर बोल पड़ता hain.............wahin सब के सब हंस पड़ते हैं मगर काव्य उन्हें अजीब सी नज़रियों से एक तुक देखने लगती hain.............shayad उसे जावेद की बातें ज़्यादा समझ में नहीं आयी thi...........wo ये नहीं समझ पा रही थी की ये लोग कौन से घोड़े पर उसे बैठने की बात कर रहे hain..............tabhi रघु अंदर कमरे में जाता हैं और जब वो थोड़े देर बाद वापस लौटता हैं उसके हाथ में एक बड़ा सा लकड़ी का घोडा tha................kareeb 3 से 4 फुट uncha............aur 3 फुट lumba............wahin जो बाचे अक्सर झूला में बैठकर झूलते hain..............magar इस घोड़े में एक चीज़ जो सबसे अलग थी वो थी उसके पीठ पर लगा लकड़ी का करीब 4 इंच मोटा और 12 इंच लुम्बा मोटा tukda.............jispar एक सफ़ेद रंग की एक लेयर रबर की छड़ी हुई थी...........

घोड़े के पवन में नीचे रोलिंग बानी हुई थी जो चउरवे शेप में थी जो ख़ास लकड़ी की बानी हुई thi..........jissey घोडा आगे पीछे मूवमेंट करता रहता tha...........raghu उस घोड़े को उस हॉल के बीचों बीच रख देता हैं और उस घोड़े की पीठ पर जिसपर रबर लगा हुआ था वो उसपर ढेर सारा वो लिक्विड गिरने लगता hain............aur तब तक गिरता हैं जब तक वो रबर पूरी तरह से भीग नहीं jata...........aab काव्य को भी अब धीरे धीरे समझ में आने लगता हैं की आगे उसके साथ अब क्या होने वाला hain............lakdi का टुकड़ा इतना मोटा और लुम्बा था की अगर वो उसके किसी भी छेद में घुसता तो यकीनन उसके उस छेद को पूरी तरह से फाड़ deta........chahe वो उसका ched............bur ho.............ya फिर गांड.............

" लड़की की kaathi.............kaathi पे ghoda...............ghode के दम pe.............jo मारा hathoda............dauda दौड़ा dekho............ghoda दम दबाकर dauda..............tumne आज से पहले कभी घोड़े की सवारी नहीं की hogi.............magar इस घोड़े की सवारी करने के बाद तुम्हें मज़ा आ jayega........aur असली मज़ा तब आएगा जब ये मोटा सा लड़की का टुकड़ा तुम्हारी बुर को फाड़ता हुआ पूरी अंदर तक ghusega.........magar तुम्हें ज़्यादा फ़िक्र करने की ज़रुरत nahin..............tumhein उतनी तकलीफ नहीं होगी जितना होनी chahiye.........balki तुम्हें तो इसमें और भी मज़ा आएगा..........." और इरफ़ान काव्य की तरफ देखता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ अबकी बार राजन और जीतू काव्य को हवा में उठाते हुए उस घोड़े की तरफ ले जाने लगते हैं वहीँ काव्य ये देखकर ज़ोरों से चीख पड़ती हैं............

" नहीं nahin............mujhe नहीं बैठना wahan..............mujhe घोड़े की सवारी नहीं karni.........meri फुट jayegi..............please.........." और काव्य तड़प उठती हैं मगर आज तो जैसे वे सब एहि चाहते थे की उसकी साडी छेद पूरी तरह से खुल jaye..........."aur काव्य अपने जिस्म को ैठने लगती हैं मगर एक तो उसके हाथ बंधे थे ऊपर से दो लोग उसके जकड़े हुए they.......to भला काव्य कैसे उनके चुंगुल से बच पति..........

" चिंता मुट्ठ करो madam.........tumhein दर्द नहीं होगा बल्कि अब तो तुम्हें इसमें मज़ा आने वाला hain.............jaise जैसे ये मोटा लड़की का टुकड़ा तुम्हारे बुर में घुसता जायेगा तुम्हारे अंदर और भी चाहत बढ़ती जाएगी इसे पूरा अपने अंदर लेने ki...........arey थोड़ा इसकी बुर के अंदर भी तो ये लिक्विड डालो ...........नहीं तो कैसे अंदर जायेगा.............." और इरफ़ान हँसता हुआ फिर से बोल पड़ता हैं रघु आता हैं और काव्य के बुर के अंदर ढेर सारा तेल डालता हैं जिससे काव्य की बुर पूरी तरह से उस तेल में भीग जाती hain................aur थोड़े देर बाद काव्य के बुर से ढेर सारा तेल बहार की तरफ टपकने लगता hain.........tabhi वो दोनों काव्य को उठाकर इस बार उसकी बुर की छेद को उस 4 इंच मोठे लड़की के उस तड़के पर सेट करते हैं जिसपर रबर चढ़ा हुआ था.............

जैसे hi काव्य का वजह पूरा उस लड़की के तड़के पर पड़ता है वो मोती लकड़ी धीरे धीरे अब उसके बुर के अंदर घुसना शुरू हो जाती hain.......aur जैसे जैसे अंदर जाती हैं काव्य का बुर बुरी तरह से फैलता चला जाता hain.............magar न hi काव्य को कहीं अब दर्द हो रहा था और न hi किसी बात की takleef..........balki उसे मज़ा आ रहा tha............aab तो उसकी बुर किसी रबर की तरह और भी स्ट्रेच होती जा रही thi..........jo उस मोती सी लड़की को पल पल अपने अंदर लेती जा रही thi..........jeetu एक तरफ जाता हैं और काव्य के एक पवन को कसकर पकड़ लेता हैं और उसे हवा में ऊपर की तरफ उठाने लगता hain............wahin राजन भी दूसरी तरफ से जाकर एहि काम करता हैं.........

इस तरह काव्य की दोनों पवन हवा में होने से उसका सारा वजन अब उसके छूट पर आकर टिक जाता hain........wo दोनों हवा में उसकी दोनों टांगों को पूरा फैलाये हुए they.........aur थोड़े देर बाद आखिर काव्य की आहें निकालनी शुरू हो जाती hain...........aab वो लड़की का टुकड़ा करीब करीब 6 इंच अंदर तक घुस गया tha..........aur पल पल अंदर घुसता जा भी रहा tha.......wo दोनों हवा में काव्य के पवन को हिलने लगते हैं जिससे उसकी बुर में वो लड़की का टुकड़ा और भी अंदर तक घुसने लगता hain............aur जब पूरा घुस जाता हैं काव्य लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई आहें भरने लगती hain.........usey भी ऐसा लग रहा था जैसे उसकी बुर में किसी ने बम्बू दाल दिया हो............

इरफ़ान बड़े गौर से काव्य की तरफ देख रहा tha............wo सोचकर कुछ मुस्कुरा देता हैं और फिर काव्य के पास आकर उसके बुर के ऊपरी हिस्से को अपने जीभ से चटनी लगता हैं..........

"अभी कहाँ पूरा घुसा हैं madam..............ghusega तो aab................aabhi भी देखो ये 5 इंच बहार hi हैं........" और इस बार इरफ़ान उस घोड़े पर आकर चढ़ जाता हैं और काव्य के दोनों पवन के बीच पहले अपना एक पवन काव्य के एक जांघ पर रखता hain.........fir वो अपना टांग दूसरे जांघों par................issey पहले काव्य कुछ samajhti...................wo अपना वजन काव्य के दोनों तइस पर रखना शुरू करता hain.........yani की उसके दोनों जांघों पर अब बैठना शुर करता hain..............uske इस हरकत पर काव्य इस बार ज़ोरों से चीख पड़ती हैं और उसके बुर में फंसा वो काठ का तड़का एक hi बार में अंदर और अंदर घुसता चला जाता हैं.............

अब काव्य की बुर पूरी तरह से फटने लगी thi........aaj से पहले कभी इतना अंदर लुंड नहीं गया था अब वो लड़की का तड़का उसके बुर में पूरा घुस छुअका tha........kuch सेकण्ड्स तक इरफ़ान ऐसे hi उसके जांघों पर बैठा रहता हैं और फिर वो अचानक से उतर जाता hain.........aur जब उसकी नज़र काव्य के बुर पर पड़ती hain............uske बुर से धीरे धीरे खून टपकना शुरू हो जाता hain.........jo उस लड़की के टुकड़े से होता हुआ फर्श पर गिरने लगा tha..............magar काव्य को ज़्यादा दर्द नहीं हो रहा tha........magar फिर भी काव्य ज़ोरों से चीख और चिल्ला रही थी.......................

अब करीब 10 इंच तक वो लड़की काव्य के बुर में पूरा समां गया tha..........kavya कुछ देर तक ऐसे hi उस लड़की के घोड़े पर बैठी रहती हैं फिर वो दोनों उसे उस घोड़े से उतारकर सामने एक बड़े से ऊँचे टेबल पर सुला देते hain............aab भी काव्य के बुर से थोड़ा थोड़ा कौन निकल रहा tha..............magar अब उसकी बुर पूरी तरह से खुल गयी thi............ander करीब 3 इंच में गहरा सूराख साफ़ नज़र आ रहा tha......jo गुलाबी रंग में tha........jispar ाअब सबकी नज़रें थी............

"अरे ये क्या!!!!!!! तुम्हारी बुर तो पूरी तरह से फुट gayi..............aab इस तरह से छोड़ने में हमें मज़ा तो नहीं आयेगा na............main इतना निर्दयी थोड़ी न हूँ की मैं तुम्हारे साथ कुछ गलत होने doonga............tumhare इस समस्या का इलाज़ भी मेरे पास हैं............." और इस बार इरफ़ान हस्ता हुआ सामने रखा एक बॉक्स उठता हैं और उसे लेकर सीधा काव्य के पास चल पड़ता hain........jaise hi वो उस बॉक्स को खोलता हैं और जब काव्य की नज़रें उस बॉक्स के अंदर रखे उस चीज़ पर पड़ती hain................uske फ़ौरन ना में अपनी गुर्दें हिला देती hain.....................kyon की वो चीज़ ऐसा था जिसे देखकर काव्य के होश उड़द गए they........................dekhna था की काव्य और उन सब के सितम और कितना बर्दास्त करती hain...............ye तो बस वक़्त hi बता सकता था......................

टिल कॉन्टिनोएड.................................................
 
Update-61(A) (मेघा अपडेट)

"अरे ये क्या!!!!!!! तुम्हारी बुर तो पूरी तरह से फुट gayi..............aab इस तरह से छोड़ने में हमें मज़ा तो नहीं आयेगा na............main इतना निर्दयी थोड़ी न हूँ की मैं तुम्हारे साथ कुछ गलत होने doonga............tumhare इस समस्या का इलाज़ भी मेरे पास हैं............." और इस बार इरफ़ान हस्ता हुआ सामने रखा एक बॉक्स उठता हैं और उसे लेकर सीधा काव्य के पास चल पड़ता hain........jaise hi वो उस बॉक्स को खोलता हैं और जब काव्य की नज़रें उस बॉक्स के अंदर रखे उस चीज़ पर पड़ती hain................uske फ़ौरन ना में अपनी गुर्दें हिलडेति hain.....................kyon की वो चीज़ ऐसा था जिसे देखकर काव्य के होश उड़द गए they........................dekhna था की काव्य और उन सब के सितम और कितना बर्दास्त करती hain...............ye तो बस वक़्त hi बता सकता था......................

अब आगे.................................................

काव्य की नज़रें अभी भी सामने रखे उस बॉक्स पर thi.................kyon की इरफ़ान के हाथ में जो चीज़ था वो उसके होश उदा देने के लिए काफी tha...................wo एक राउंडेड सुई थी जो एक काळा रंग के धागे में पिरोयी हुई thi..............irfan उस बॉक्स में से एक डेटोल की एक शीशी निकलती हैं और उस शीशी में पहले उस सुई को पूरा डूबता hain.......fir उस धागे ko..........jissey वो सुई और धागा पूरी तरह से डेटोल में भीग जाते hain................aab ये बताने की ज़रूरत नहीं थी की ये कौन सी सुई thi............is सुई का इस्तेमाल अक्सर ताका लगाने के काम में आता हैं जो डॉक्टर्स अक्सर एक्सीडेंटल केसेस में कहीं जिस्म फुट या सुत्त जाये तो उसे सीलने के लिए इस्तेमाल करते हैं............

मगर काव्य की क्या फटी thi........bur..............to क्या अब इरफ़ान उसकी बुर को उस सुई से सीलने वाला tha................yakeenan...........wo अब काव्य के साथ एहि करने जा रहा tha.........javed काव्य के पास आता हैं और उसके एक पवन को कसकर जकड लेता हैं और फिर पूरा फैला देता hain...........wahin दूसरी तरफ जीतू आता हैं और उसके दूसरे तंग को दूसरी तरफ फैलाकर कसकर जकड लेता hain................kavya के हाथ पहले से बढ़े हुए थे सो वो कुछ कर नहीं सकती thi............siwaye हिल दल ke.............apne ऊपर होते उस जुल्म को बस अब उसे सहना hi tha............chahe जिस हाल में...........

" मैंने तुमसे पहले hi कहा था रघु की मुझे कोरी माल बेहद पसंद hain...........jab कुंवारी छूट में लुंड घुसता हैं तो पूछो mutt.........kitna मज़ा आता hain........lund तो ऐसे जकड़ता हुआ जाता हैं जैसे अभी साला छुम निकल padega...............aur बुर से छोड़ते वक़्त अगर खून न निकले तो छोड़ने का मज़ा hi क्या!!!!!!!!!! मगर तुम तो पहले सी hi इसके दोनों छेद को फाड़कर हमारे पास ले आये ho..............khair................jab खून निकलने की बात हैं तो वैसे भी इसकी चुदाई के दौरान इसके बुर से खून तो निकलेगा hi...........chahe जैसे निकले............." और इरफ़ान धीरे से मुस्कुराता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य अजीब सी नज़रियों से उन सब को देखने लगती hain...........uske दिल में भी दुर्र अब बढ़ती जा रही thi.............wahin उसकी सासनें तेज़्ज़ चलने लगी थी..............

वो भी अब धीरे धीरे समझने लगी थी की यहाँ पर जो कुछ भी ये लोग कर रहे हैं .....बहुत गलत कर रहे hain.........yahan उसके साथ चुदाई नहीं बल्कि कुछ और hi हो रहा hain.............shayad ये सब उससे किसी बात का बदला ले रहे ho.............ya फिर अपनी कोई निजी दुश्मनी निकल रहे ho..................wahin बार बार काव्य को राजन का चेहरा बहुत परेशां करता जा रहा tha...............aakhir क्यों उसे बार बार ये चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लग रहा tha.............aur अगर वो जाना पहचाना सा हैं तो यहाँ पर क्यों aaya...........kya उसके liye.......ya फिर उसके आने का कोई ख़ास maksad...............ya फिर उसकी barbadi...............agar ये सब लोग उसकी बर्बादी चाहते हैं तो रघु तो उसका अपना hain............fir वो क्यों इन सब का साथ दे रहा hain..........aur अगर रघु अपना hi हैं तो वो उसे यहाँ क्यों लाया इन दरिंदों के beech..............kyon वो इन सब को मन नहीं कर raha...............kyon.............aakhir क्यों!!!!!!!!!!!!!!!! ये सवाल ऐसे थे जो अब काव्य को परेशां करने लगे they..............magar वो लाख सोचकर भी उन सवालों के जवाब नहीं ढूंढ पा रही thi................magar अब उसे किसी भी हाल में इन सरे सवालों के जवाब चाहिए they..............jaise भी हो.............

मगर अब उसके आँख खुल चुके they................aab वो एक एक बातें अब गौर करने लगी thi...................un सब की baatein.....unka soch...........unka उठना baithna................un सब का मिलना julna...........aur धीरे धीरे काव्य को उन सब की बातें कुछ अलग hi हालात के तरफ अब इशारे कर रहे they..............wo हर एक चीज़ गौर कर रही थी जो उसके बीच यहाँ रहकर घाट रहा tha...........magar वो अब ये भी जान गयी थी की उसका यहाँ कोई अपना नहीं hain.........na raghu........na jeetu.....aur न और koi.............bus ये सब अपना बनाने का सिर्फ दिखावा कर रहे hain............inka मकसद ज़रूर कुछ खरतनाक hain............magar क्या........!!! शायद इस सवाल का जवाब अब उसे कैसे भी करके ढूढ़ना tha...................shayad इस वजह से वो अब उन सब के हर एक सितम को बस चुप चाप से सेहती जा रही थी.............

"तुम्हें थोड़ी तो तकलीफ होगी मेरी jaan..................magar जब तक तुम चीखोगी या चिल्लाओगी नहीं हमें मज़ा भी कहाँ आने वाला ..........आखिर तुम्हारी फटी हुई बुर को सीलन जो hain.............to थोड़ी तकलीफ तो तुम्हें सहनी hi पड़ेगी .........."और इस बार इरफ़ान उस सुई को काव्य के बुर के पास ले जाता हैं वहीँ काव्य इस बार दुर्र से चीख पड़ती हैं.............

" नहीं nahin......please.......ruk jawo.................mere साथ ऐसा मुट्ठ karo............maine तुम सब का क्या बिगाड़ा hain.............main तुम सब को पूरी मनमानी करने तो दे रही hoon.....fir ये सब तुम मेरे saath..............."aur काव्य इस बार इरफ़ान के सामने गिड़गिड़ाने लगती हैं वहीँ इरफ़ान उसकी तरफ देखता हुआ धीरे से हंस पड़ता हैं.............

" हम कहाँ तुमसे कोई दुश्मनी निकल rahe............hum तो बस अपने मज़े के लिए ये सब कर rahe..............aab तुम hi बताओ इतना बड़ा तुम्हारे बुर का भोंसड़ा बन गया हैं तो उसे हमें छोड़ने में मज़ा कहाँ से आने wala...............fikar मुट्ठ karo............tum बस हमारा साथ देती जाओ तुम्हें भी आगे बहुत मज़ा आने वाला हैं..............." और इस बार इरफ़ान काव्य के छूट के दोनों लिप्स को आपस में चिपकता हैं और धीरे धीरे से उस सुई को काव्य के छूट में धसना शुरू करता hain.........wahin इस बार काव्य दर्द से oooooooooooooooohhhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa..........naaaaaaaaaaaaaahiiiiiiiiinnnnnnnnnnnn.....kehti हुई चीख पड़ती hain.................magar उनमें से कहाँ कोई मानने वाला था............

इरफ़ान उस सुई से काव्य के बुर को सीता जा रहा tha...............wahin काव्य पल पल दर्द से चीख रही thi...........chilla रही thi.......tadap रही thi..........wahin सब अपने अपने लौड़े को मसलते हुए बड़े गौर से उसके बुर को सीता हुआ देख रहे they.............jaise जैसे उसकी सुई की नोक उसके बुर के लिप्स को छेदती जा रही थी वैसे वैसे काव्य का दर्द और चीखना भी बढ़ता जा रहा tha..............irfan को न मानना था सो वो न mana......wo इसी तरह से काव्य के बुर को उस सुई से सीता रहा जब तक की उसकी बुर पूरी तरह से सील नहीं gayi.......wahin काव्य दर्द से चीखती और चिल्लाती रही ............और उसकी आँखों से आंसूं भी गिरते rahe..........magar उनमें से किसी को भी उसपर ज़रा भी तरस नहीं aayi...........bus एक 1/2 इंच का होल छोड़कर वो फ़ौरन हुत्त जाता हैं वहीँ काव्य चीखी हुई दुबारा से रू पड़ती hain......uski बुर इस कदर जलन और दर्द कर रही थी की बस वही जानती thi............aab तो उसकी बुर के कुछ हिस्से में खून भी धीरे धीरे आ रहा tha.........jahan जहाँ सुई घुसी हुई thi..............magar अभी तो काव्य का दर्द शुरू हुआ था..................

" अरे waah...............tumhari बुर तो अब किसी नए नवेली दुल्हन जैसी लग रही hain...........aab तो इसे छोड़ने में और भी मज़ा aayega.............aur तुम्हारी बुर में लुंड डालने का शुभराम मैं karunga...........kyon की मेरा लुंड तुम सब के मुकाबले थोड़ा छोटा hain..........aur पतला bhi........to इसे थोड़ी तकलीफ कम होगी............ ऐसा मेरा मानना हैं................." और इस बार इरफ़ान हँसता हुआ काव्य को उठककर उसी नीले रंग की प्लास्टिक पर लता हैं और उसे सबके बीच पीठ के बल लिटा देता hain.........fir चरों आकर घेरे में फिर से खड़े हो जाते हैं और अपने अपने लौड़े को फिर से हिलने लगते हैं,............

इरफ़ान आगे बढ़ता हैं और अपने लौड़े पर थोड़ा सा तेल गिरता हुआ इस बार वो अपना लौड़ा काव्य के बुर के उस छोटे से छेद पर हौले से रखता हैं जहाँ बस 1/2 इंच का सूराख tha...........uska सूपड़ा अब काव्य के बुर में घुसने को पूरी तरह से बेताब tha...........wahin काव्य अब ाचे से जान गयी थी की आने वाला वक़्त उसके लिए कितनी तकलीफें देने वाला hain..........jaise जैसे उसका लौड़ा उसकी बुर के अंदर jayega..........uske बुर पर लगे वो टांके भी एक एक कर टूटते चले jayengey..............aur हर बार उसे दर्द का सामना करना hi padega............jo वो किसी भी हाल में नहीं करना चाहती थी..................

इरफ़ान अपने लौड़े को काव्य के बुर पर सेट करता हैं और इस बार धीरे धीरे उसपर एक तेज़्ज़ प्रेशर बनाना शुरू करता hain...........pehle तो दो तीन बार ऐसा करने पर उसका लुंड बिलकुल भी अंदर नहीं ghusta.............magar फिर से इरफ़ान काव्य के बुर के छेद पर तेल लगता हैं और ..............कुछ अपने लौड़े par.......aur फिर से वो अपना लौड़ा घुसना शुरू करता hain..........magar इस बार ज़्यादा प्रेशर se..........jaise hi वो एक ज़ोर का ढाका मरता हैं काव्य की ज़ोर की चीख निकल पड़ती hain.............itni ज़ोर से वो कभी चीखी नहीं थी जितनी की आज वो चीक रही thi............uski बुर के एक दो टांके टूट गए थे और इरफ़ान का लौड़ा थोड़ा अंदर चला गया tha...........wahin काव्य के बुर से फिर खून आना शुरू हो जाता हैं मगर इरफ़ान को उससे कोई फर्क नहीं पड़ता..............

वो दो तीन बार ऐसे hi ज़ोर के ढ़ाके लगता हैं वहीँ काव्य पल पल चीखती चिल्लाती रहती hain.........uski बुर पल पल फटती जा रही thi........wo टांका जैसे जैसे टूट रहा था उसके बुर से खून भी निकलता जा रहा tha.......halanki वो दर्द का दवा उन इंजेक्शन में ले चुकी थी मगर फिर भी ये दर्द उसे बहुत तकलीफ दे रहा tha...........jaise तैसे तो इरफ़ान अपने लौड़े को अंदर दाखिल करता हैं और जब उसे लगता हैं की उसका लौड़ा पूरा अंदर चला गया हैं वो अपने लुंड को एक hi बार बहार निकलता हैं और फिर से एक ज़ोर का ढाका मरता हैं जिससे काव्य इस बार बुरी तरह से ....ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh .............mmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaa....... कहती हुई चीख पड़ती hain..........uski बुर की लिप्स पल पल चलनी होकर फटती जा रही thi...........wahin उन सब को इसमें मज़ा आ रहा tha...........thode देर बाद जब इरफ़ान अपने लुंड को बहार निकता हैं तो उसका लौड़ा खून में आधा सना हुआ होता हैं...........

फिर वो जावेद को अपनी तरफ आने का इशारा करता hain..........aur जावेद हँसता हुआ आएगी बढ़ता हैं और काव्ये के दोनों चूचियों को कसकर मसलता हुआ और अपने लौड़े को काव्य के बुर पर सेट करता हुआ एक ज़ोर का ढाका मरता हैं जिससे काव्य की बुर पर बचा खुचा टांका भी टूटता चला जाता hain............wahin काव्य ज़ोरों से अपने पवन को दर्द से उछलने लगती हैं मगर जीतू और राजन के सामने उसकी एक नहीं chalti...............dard क्या होता हैं आज काव्य को पल पल एहसास हो रहा tha...............wo एहि सोच रही थी की इतना दर्द सहने से पहले वो आखिर मुरर क्यों नहीं गयी..................

एक बार फिर से जावेद का पूरा लौड़ा काव्य के बुर में घुस गया था और वो अब काव्य को वहीँ सबके बीच छोड़ रहा tha..........apne लुंड को उसकी बुर के अंदर तेज़ी से अंडे बहार कर रहा tha.............rajan उसकी तरफ देखता हुआ काव्य के दोनों हाथ खोलने का इशारा करता हैं और जैसे hi काव्य के दोनों हाथ खुलते हैं वो जावेद के कमर को कसकर पकड़ लेती हैं और उसे रोकने की लगातार कोशिश करती हैं और जावेद के लुंड को बहार निकलने की उससे मिन्नतें करती hain...........wahin जावेद कुछ देर के लिए रुक तो जाता हैं मगर अपना लौड़ा काव्य की बुर से एक पल के लिए भी बहार नहीं निकलता.............

" please.............ruk जाओ तुम sab...........main मन थोड़ी न कर rahi.........magar अब मुझसे ये दर्द बर्दास्त नहीं हो रहा ............चाहे तो मेरी दूसरी छेद में अपने लुंड दाल दो तुम sab.......magar आगे nahin........please..........." और इस बार काव्य उन सब के आगे फर्याद करने लगती हैं वहीँ उन सब के चेहरे पर हंसी आ जाती हैं.............

" अरे waah.............isey तो गांड मरवाने का भी शौक hain.............dekho इसे ये तो खुद हमसे अपनी गांड मरवाने का खुला इन्विते कर रही hain..........chalo हम अभी इसका शौक पूरा किये देते हैं.........." राजन हँसता हुआ काव्य की तरफ देखर धीरे से बोल पड़ता hain...........wahin इस बार जावेद अपना लौड़ा बहार निकलता हैं और उसके लौड़े पर भी खून की कुछ लाग ढाबे साफ़ नज़र आने लगते hain.............wahin काव्य थोड़ी रहत की सांस लेने लगती hain.........magar वे सब उसे आज कहाँ इतनी आसानी से छोड़ने वाले थे.............

राजन इस बार आगे बढ़ता हैं और काव्य को वहीँ फर्श पर पेट के बल सुला देता हैं और खुद इस बार उसके ऊपर चढ़कर अपना मोटा लौड़ा इस बार काव्य के गांड के सूराख पर हौले से रखता हुआ ............उसपर धीरे धीरे दबाव डालना शुरू करता hain..........wahin इस बार उसका लौड़ा तेल में साणे होने की वजह से पूउउउउउउउछहहहहहहह्की आवाज़ के साथ काव्य के गांड की गहराई में चला जाता hain..........wahin काव्य फिर से दर्द से चीख पड़ती hain..............rajan फिर उसी पोस्टिव में काव्य के ऊपर लेता रहता हैं हैं और उसकी गांड मरना शुरू करता hain.............wahin उसके दोनों हाथ काव्ये के दोनों चूचियों पे थे जिन्हें वो कसकर अपनी दोनों हथेलियों से इस वक़्त जकरा हुआ tha............ya यु कहो की उसकी दोनों चूचियों को पकड़े हुए वो काव्य की गांड में अपना लौड़ा पेल रहा tha..........har शॉट पर उसका लुंड काव्य के गांड की गहराई में उतरता जा रहा tha..........wahin काव्य पल पल दर्द और मज़े से चीख रही thi...........aab धीरे धीरे उसकी छूट का दर्द कुछ कम होता जा रहा था..........

वहीँ जावेद इस बार उस तेल की शीशी को लेता हैं और राजन अगले hi पल अपना लौड़ा काव्य की गांड से बहार निकल लेता hain..........javed फिर उस बोतल की नोक को काव्य के गांड में अंदर डालकर उस बोतल को ज़ोरों से प्रेस करने लगता hain........is तरह प्रेस होने से उसमें ढेर सारा तेल अब काव्य की गांड की गहराई में उतरता चला जाता hain............fir राजन अगले hi पल अपना लौड़ा एक hi बार में काव्य के गांड में पूरा घुसा देता हैं......... और फिर तेज़ी से उसकी गांड को फाड़ना शुरू करता hain............wahin काव्य उसके हर शॉट पर आहें भर रही thi.............sisak रही थी..............

कंटिन्यू........................................................
 
अपडेट- 61(बी) (मेघा अपडेट)

थोड़ी देर गांड मरने के बाद राजन उसे सीधा लेततता हैं जिससे उसकी गांड के अंदर जमा सारा तेल धीरे धीरे बहार की तरफ टपकने लगता hain........fir राजन अपनी पोजीशन बदलता हैं और इस बार व्वो खुद नीचे पीठ की बल लेट जाता हैं और काव्य को अपने ऊपर लेता देता hain.........aur फिर से अपना लौड़ा काव्य के गांड में डालकर उसकी गांड मरना शुरू करता hain.........magar इस बार बहुत तेज़ se.............javed फिर आगे आता हैं और काव्य के मुँह में फिर से लुंड डालकर उससे अपना लौड़ा चूस्वाता hain...........idher काव्य भी उसके लौड़े को अपने मुँह में लेकर चूसती जा रही thi...........wahin राजन तेज़ी से अपने लुंड को काव्य के गांड के अंदर बहार कर रहा tha..........aur कभी कभी बीच बीच में वो उसकी गांड पर दो चार कहते भी लगा दिया करता जिससे काव्य दर्द से चीख पड़ती...............

खेल चलता रहा और खिलाडी बदलते rahe.........kabhi इरफ़ान पीछे से आकर उसकी गांड में लुंड पेलता तो कभी javed.............to कभी रघु ....तो कभी jeetu............jo उसकी गांड मर लेता वो फ़ौरन आगे बढ़ जाता और काव्य के मुँह में अपना लौड़ा उससे चूस्वाता...........

वहीँ रघु भी काव्य के चेहरे के पास आता हैं और उससे अपना लुंड chooswata...........kuch देर तक सब बरी बरी से काव्य की गांड में अपना लुंड डालकर उसकी ायचे से गांड मरते hain..........magar बाकि बचे लोग अकेले कब तक बैठे rehtey.......unka भी तो लुंड कहीं घुसना था na...........so अब इरफ़ान काव्य के बुर पर फिर से अपना लौड़ा टिका देता हैं और राजन कुछ देर के लिए रुक जाता hain..........fir वो एक ज़ोर का ढाका मरता हैं जिससे उसका पूरा लौड़ा एक hi बार में काव्य के बुर के अंदर समां जाता hain..........ek बार फिर से काव्य बुरी तरह चीख पड़ती hain.........udher कभी जीतू अपना लुंड काव्य के मुँह में डालता तो kabhi......javed........to कभी रघु...........

अब काव्य के तीनों सूराख में लुंड बरी बरी से अंदर बहार जा आ रहे they..........aur उसके तीनों होल की एक hi समय पर एक साथ चुदाई हो रही thi..........kabhi जावेद का लुंड बहार निकलता तो इरफ़ान घुसा deta......to कभी raghu.....to कभी जीतू बरी बरी से अपने लुंड chuswate............khel चला रहा और सब के चेहते पर थकान धीरे धीरे गहराने lagi........magar इरफ़ान ाचे से जनता था की अगर इन सब का छुम चूत गया तो खेल का मज़ा hi पूरा ख़तम हो jayega.........is लिए अब वो खेल को दूसरी दिशा में मोड़ना चाहता tha........kuch ऐसा करना चाहता था जिससे सभी को मज़ा आये और काव्य की बुरी तरीके से फटती rahe............magar क्या!!!!! ये उसकी समझ में नहीं आ रहा tha...........tabhi राजन बीच में hi बोल पड़ता हैं............

" क्यों ना खेल का रुख अब मोड़ दिया jaye..............main जो चीज़ देखना चाहता हूँ उसके लिए न जाने मैं कब से तरस गया hoon.......agar तुम सब की इज़ाज़त हो तो मैं कुछ कहूं..................." और राजन अपने चेहरे पर गन्दी सी हंसी लता हुआ काव्य की तरफ देखता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य उसे बड़े गौर से एक तुक देख रही thi..........aur शायद सोच रही थी की अब इससे हुड्ड और क्या हो सकता hain..........jo अब तक इन लोगों ने उसके साथ नहीं किया..........

राजन इरफ़ान के पास जाता हैं और काव्य की तरफ देखता हुआ धीरे से इरफ़ान के कान में कुछ कहता हैं जिससे सुनकर इरफ़ान भी हंसी लगता hain...........wahin वो राजन की तरफ बड़े गौर से एक तुक देखने लगता हैं..........

" मैं तो समझा था की यहाँ मुझसे बड़ा कमीना और कोई नहीं hain............magar अब ऐसा लगता हैं की यहाँ हम पाँचों से बड़ा हरामी इस दुनिया में और कोई nahin...............hum सब एक से बढ़कर एक hain.............waise मैं कुछ ऐसे hi मौके के तलाश में tha.........chalo bhai..........main तुम्हारी ये इच्छा अभी पूरी कर देता hoon............tum भी क्या याद रखोगे की तुम्हारा पला किस्से पड़ा था............." और इरफ़ान इतना कहकर ठहाका मरकर हंसी लगता हैं वहीँ काव्य का दुर्र और भी गहराता चला जाता hain..........waise काव्य का दुर्र बेबुनियाद नहीं tha..........rajan के दिमाग में बहुत खतरनाक प्लान चल रहा था........

इरफ़ान काव्य को वहीँ फर्श पर पीठ के बल सुला देता हैं और उन सब को उसके हाथ पवन कसकर जकड़ने का इशारा करता hain..........ek बार फिर से काव्य उन सब के आगे बेबस और लाचार सी साबित होने लगती hain...........ek तो उसका दिमाग पूरा साथ नहीं दे रहा tha.........upar से उसपर नशा और एक खुमार सा चाय हुआ tha.............is वजह से वो अब और भी कमज़ोर सी लग रही थी........

थोड़े देर बाद इरफ़ान फिर से उस कमरे में आता हैं और जब काव्य की नज़र उसके हाथ पर पड़ती हैं वो बड़े गौर से इरफ़ान के तरफ एक तुक देखने लगती hain..............wahin राजन को छोड़कर किसी को भी समझ में नहीं आ रहा था की आखिर ये दोनों काव्य के साथ करना क्या चाहते hain.............magar जो भी ये करने वाले थे काव्य को आगे चलकर फिर से तकलीफ का सामना करना hi tha..............chahe उनकी मर्ज़ी se.............ya ज़बरदस्ती से...............

इरफ़ान के हाथ में एक छोटी सी दूध की बोतल thi...........kareeb 100 मल ki...........aur एक कुप्पी थी जिसमें ीक 1/2 इंच का पाइप लगा हुआ tha.......jiska एक सिरा उस कुप्पी से जुड़ा हुआ tha...........wahin उसके दूसरे हाथ में एक कांची (कांच की गोली) के बराबर की एक कांच की माला thi........ya उसी के तरह चमकदार चीज़ जैसी .............जो कई सरे छोटे छोटे बॉल्स में एक hi धागे से पिरोयी हुई thi............aur उसकी लम्बाई करीब 5 इंच के आस पास thi...............wahin इरफ़ान काव्य के तरफ देखता हुआ अजीब सा हंस रहा tha............wahin काव्य का दिल ज़ोरों से धक् धक् करने लगा tha.............wo ये नहीं समझ पा रही थी की वो आखिर उस मेल और उस कुप्पी का करने क्या वाला hain........magar अगले hi पल उसको सरे सवालों के जवाब मिलने वाले थे...........

इरफ़ान अगले hi पल काव्य के छूट के लिप्स को पूरा खोलता हैं और उसके दोनों लिप्स को दोनों तरफ करके उसे रघु को पकड़ने का इशारा करता hain...........raghu काव्य की हाथ छोड़ता हुआ आगे आता हैं और काव्य के बुर के लिप्स को दोनों बगल करके पूरा फैला देता hain...........ander गुलाबी रंग की चमड़ी साफ़ नज़र आ रही थी जिन्हें राजन , रघु और इरफ़ान अब बड़े गौर से देख रहे they...........aur जब इरफ़ान को काव्य का पी होल (मूट की छेद) जब नज़र आता हैं वो राजन की तरफ देखता हुआ धीरे से मुस्कुरा देता हैं.........

वो अपने हाथ में थामे उस माला को काव्य के छूट की तरफ ले जाता हैं और काव्य के चेहरे की तरफ बड़े गौर से देखने लगता hain.........wahin काव्य उन सब के बीच अकेली ....ashyahaay.............si उनके गिरफ्त्त में रहती hain...........chaah कर भी वो हिल दल नहीं पा रही thi..........irfan फिर उस माला को जैसे hi काव्य की पी होल पर टच करता हैं अगले hi पल काव्य के चेहरे का रंग एक दम से फीका पढ़ जाता hain..........wo अब समझ जाती हैं की आगे ये सब उसकी साथ क्या करने वाले hain.............yani अब उसकी मूट की छेद में वो ये माला को अंदर dalengey...........jis छेद में एक सुई बराबर hi छेद होती हैं............

"नहीं nahin..................ye तुम सब लोग क्या कर रहे ho...............wahan nahin.............mujhse बर्दास्त नहीं होगा wahan..........."aur काव्य इस बार बुरी तरह से तड़पती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ राजन उसकी तरफ देखता हहआ धीरे से मुस्कुरा देता हैं.........

" कुछ नहीं होगा मेरी जान tujhe...........bus एक बार तू उस छेद में भी कुछ अंदर ले le............bus.....fir मेरा सपना जैसे पूरा हो jayega..............main जनता हूँ की तेरे उस मूट के छेद में कुछ जाने से raha............magar कोशिश करने में क्या हर्ज़ hain.........bus तुझे थोड़ी सी तकलीफ और सहनी hain...............bus हमारे खातिर..............." और इस बार राजन मुस्कुराता हुआ अपने लौड़ा को मसलता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ इरफ़ान उस छोटे से बॉल को काव्य के पी होल पर सेट करता है और उसे अंदर धीरे धीरे पुश करना शुरू करता hain...........aur थोड़ी म्हणत के बाद आखिर उसे कामयाबी मिल hi जाती हैं जब वो छोटी सी बॉल काव्य के पी होल के छेद पर एडजस्ट हो जाता hain..............wahin इस बार काव्य पूरे दम लगाकर चीख पड़ती हैं...............

उसे अब ऐसा लग रहा था जैसे उसकी मूट की नाली अभी फुट jayegi...............pee होल में भी कोई डालने की चीज़ हैं मगर ये सब लोग न जाने किस मिटटी के बने they............bade बड़े हवसी उसने सुना था और देखा था मगर ये लोग तो उससे भी परे they.............irfan तेज़्ज़ प्रेशर अपने हाथों पर डालता हैं और इस बार एक बॉल काव्य के पी होल में पूरा घुस जाता hain..........wahin काव्य बुरी तरह से चीख पड़ती hain.......chilla पड़ती hain...........uski आँखों से आंसूं किसी झरने की तरफ फुट पड़ते hain...........wo अपने आपको बचने और छुड़ाने की लगातार कोशिश करती हैं मगर न hi उसका बस चलता hain..........aur न hi वो उनके चुंगुल से आज़ाद हो पति हैं............

इरफ़ान फिर धीरे धीरे से उस माला को अंदर बहार करने लगता हैं और हर एक शॉट पे वो अपने हाथों पर प्रेशर बनाये रखता hain.......aur कुछ मिनटों में काव्य की चीखें और भी बढ़ने लगती hain.............jaise जैसे वो बॉल्स अंदर जा रहे थे वैसे वैसे काव्य की चीखें भी बढ़ती जा रही thi..............itna dard.......itni तकलीफें वो कभी आज से पहले बर्दास्त नहीं की thi.............sach पूछों तो आज उसे चुदाई का नशा उतर सा गया tha...................aur अब उसे ऐसा लगने लगा था की अगर ये सिलसिला अगर न थमा तो ये लोग आज उसकी जान भी ले लेंगे...............

" ला यार तुझसे नहीं hoga...........tu तो ऐसे घुसा रहा हैं जैसे अंदर जाने के लिए कोई रास्ता बना रहा ho.............dekh मैं कैसे घुसता हूँ............" और इस बार राजन उस माला इरफ़ान के हाथों से अलग करता हैं और काव्य की तरफ देखता हुआ गन्दी सी हंसी अपने चेहरे पर लता हैं और इस बार पूरी ताक़त से उस मेल को और अंदर डालने लगता हैं वहीँ काव्य की सासनें जैसे दर्द की वजह से कुछ पल के लिए रुक सी जाती hain............aab उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसकी मूट की नाली अब्भी फुट jayegi...........rajan करीब करीब 5 बॉल्स अंदर दाल चूका tha............wahin काव्य दर्द से चीख और चिल्ला रही थी..........

"अबे मरेगा क्या!!!!! अब अगर ज़्यादा अंदर डाला तो ये साली मुरर jayegi...............dekh नहीं रहा हैं इसकी क्या हालत हो गयी hain........aab रहने भी दे............" और इस बार इरफ़ान उस बीड्स को अपने हाथों में लेता हैं और धीरे धीरे से उसे बहार की तरफ एक एक कर निकलना शुरू करता hain.......wahin काव्य पल पल सिसकती रहती hain.........jaise hi वो बीड्स बहार निकलती हैं राजन उस बीड्स को फ़ौरन अपने मुँह में डालकर उसे पूरा चूसने लगता hain...........wahin इरफ़ान इस बार उस 1/2 इंच प्लास्टिक के पाइप को फिर से काव्य के पी होल में डालता हैं और वहीँ काव्य एक बार फिर से दर्द से चीख पड़ती हैं..........

कंटिन्यू............................................................
 
अपडेट- 61© (मेघा अपडेट)

" जिस किसी को भी अगर मूतना हो वो चाहे तो इस कुप्पी में आकर मूट सकता hain............iske अंदर मूतने से वो मूट इसके मूट के थैली के अंदर jayegi...........main तो इसमें पहले ये 100 मल दूध डालने वाला hoon........aur जब ये म्यूटेगी तो इसकी मूट के रास्ते ये दूध निकलेगा..........." और इरफ़ान उस कुप्पी के अंदर धीरे धीरे वो दूध डालना शुरू करता हैं वहीँ काव्य अपने मूट की थैली में कुछ भरता हुआ सा महसूस कर रही thi...............usey बहुत अजीब सा लग रहा tha...........dheere धीरे करके इरफ़ान उस दूध को पूरा काव्य के पी होल के रास्ते अंदर दाल देता हैं फिर जावेद और राजन आकर उस कुप्पी में थोड़ा थोड़ा करके मूतते hain.........saath hi साथ उसमें थूकते भी hain..........jo काव्य के पी होल के रास्ते अंदर चला जाता हैं.............

ये नज़ारा देखकर सबका लौड़ा पूरा अकड़ गया tha..........wahin वो उस कुप्पी को बहार निकता हैं और काव्य को उसी पोजीशन में बैठा देता हैं जिस पोजीशन में वो मूतति hain..........kavya भी अगले hi पल मूतना शुरू करती हैं और उसके मूट से इस बार दूध और जावेद और राजन का मूट और उसका मू सबकुछ उसके मूट के रास्ते बहार निकलने लगता hain............wahin सभी के सभी ये नज़ारा बड़े गौर से देख रहे थे................

अब कहाँ किसी को कण्ट्रोल tha...........kavya की मूट ख़तम होती उससे पहले hi जावेद काव्य पर टूट पड़ता हैं और राजन अपना लौड़ा उसकी गांड में डालकर उसकी चुदाई शुरू कर देता hain................pehle धीरे dheere...........fir बहुत tezz..........aab कमरे में काव्य की आहें और उनक सब के लुंड की ffffffffffffffffffffaaaaaaaaaaaaaaaaaccccccchhhhhhhhhhhh fffffffffffffffffffffffffaaaaaaaaaaaaaaaacccccccccccccchhhhhhhhhhhh की आवाज़ें लगातार गूँज रही thi................wahin अब चुदाई का खेल फिर से शुरू हो गया tha....................akhir इतने दर्द सहने के बाद काव्य को थोड़ी सी रहत और मज़े मिल रहे they.............khel ज़्यादा देर तक नहीं चला और इस बहार जावेद की शासन फूलने लगती हैं वहीँ राजन का भी हाल बिगड़ने लगता hain............aab व्वो दोनों अपने चरम की ओरे लगातार बढ़ रहे they............wahin काव्य उन दो मर्दों की बीच अकेली पिसती हुइ जा रही thi...........do दो लुंड उसकी दोनों चीड़ में तेज़ी से अंदर बहार हो रहे थे वहीँ सबकी नज़रें सामने चल रही उस लाइव शो पर थी................

जावेद अगले hi पल चीखता हुआ अपना सारा छुम काव्य के बुर के अंदर दाल देता हैं और ज़ोरों से हांफता हुआ उसके ऊपर गिर पड़ता hain...............wahin राजन भी पसीने से लथपथ हो जाता हैं और काव्य की गांड में अपना छुम सारा का सारा निकालनी लगता hain.............dono थक का चूर हो गए they............magar काव्य को अभी तीन तीन मर्दों को अभी संभालना tha..............raghu काव्य के ममुह के पास आता हैं और अपना लौड़ा उससे चुसवाने लगता hain...........wahin जीतू काव्य को घोड़ी पोजीशन में घुटनों की बल लेता देता हैं और पीछे से उसकी गांड मरना शुरू करता hain............wahin इरफ़ान आगे लेटकर उसके दोनों चूचियों को मसलता हुआ बरी बरी से चूसता hua............uski बुर में अपना लौड़ा डालकर उसकी चुदाई शुरू कर देता हैं...........

एक बार फिर से उस कमरे में जैसे तूफ़ान सा आ गया tha...........kamrey में चरों तरफ aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhsssssssssssssssss.......fffffffffffaaaaaaaaaaaaaaacccccccchhhhhhhhhhhhhhhhh...............jaisi आवजें लगातार निकल रही thi..............jo उस माहोल को पल पल गरम करती जा रही thi.............jeetu बहुत तेज़्ज़ी से काव्य के गांड को फाड़े जा रहा tha..........wahin इरफ़ान का भी दम फूलने लगा tha...........khel चलता रहा और इस तरह काव्य के तीनों छेद में एक साथ लुंड अंदर बहार होते rahe.........wo भी अब बुरी तरह से थक गयी thi...........uska जिस्म पसीने से बुरी तरह से भीग गया tha.............aab उसके अंदर और छोड़ने की हिम्मत नहीं बची थी.............

मगर वो ये भी जानती थी की जब तक इनके छुम नहीं निकल जाएंगे ये उसको छोड़ने वाले हैं nahin...............aur करीब 1/2 घंटे की म्हणत के बाद आखिर जीतू भी ज़ोरों से चीखता हहआ अपना सारा छुम काव्य की गांड में उतरता चला जाता हैं वहीँ इरफ़ान भी अपना छुम काव्य की बुर में उतर देता hain............raghu भी अब थक गया tha.............wo भी अब अपने चरम पर tha...........aur आखिरकार उसका भी साबरा टूट जाता हैं और वो अपना सारा छुम काव्य के मुँह में गिरता हुआ लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगता hain..................sabhi पसीने से लथपथ हो चुके थे और सब अपनी अपनी सांसें दुरुस्त करने में लगे थे................

" अब मैं यहाँ से जाना चाहती हूँ raghu..........please............aab मुझे यहाँ से ले chalo.............aab और नहीं..............." और काव्य अपने चेहरे पर आये पसीने को साफ़ करती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ रघु उसकी तरफ देखता हुआ धीरे से मुस्कुरा देता हैं..............

" ऐसी भी क्या जल्दी हैं janeman.........bus जाते जाते मेरी एक आखरी इच्छा तो पूरी करती jawo..................uske baad.................tum हमेशा हमेशा के लिए हम सबसे आज़ाद हो.............." और रघु मुस्कुराता हुआ काव्य के तरफ अजीब सी नज़रियों से देखने लगता हैं वहीँ काव्य उसे एक तुक देख रही thi...........aab उसे रघु पर गुस्सा भी आ रहा था मगर ये सही समय नहीं था गुस्सा करने ka.......is लिए वो चुप हो जाती हैं वहीँ रघु अंदर कमरे में जाता हैं और जब वो वापस आता हैं उसके हाथ में एक 200मल की पेप्सी की शीशी की बोतल thi...............khali .................जिसे काव्य बड़े गौर से देख रही थी..............

" ये क्या हैं raghu...............kya अब भी तुम सबका मुन्न नहीं भरा जो तुम अब इस बोतल को मेरे अंदर डालना चाहते ho...........tum एहि चाहते हो शायद की मैं आज अपने पैरों से चलकर घर न jawun...........sab कुछ तो मेरा फाड़ hi दिए हो तुम सब ..........अब बचा hi क्या हैं mera...........jo और फाड़ोगे.................." और काव्य रघु की तरफ घूरती हुई देखकर बोल पड़ती हैं वहीँ रघु उसकी बाटिओं को सुनकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं.............

"तेरी ये gand..................jo अभी तक बची हुई hain................main उसका भी भोंसड़ा बनता हुआ देखना चाहता hoon............yaad हैं वो kheera.........jo तू अपने गांड में लेने वाली थी मगर ली nahin...........usi के बदले अब तू इसे अपनी गांड में पूरा ले le.........fir तू यहाँ से चुप चाप चली jana..........uske बाद तू हमेशा हमेशा के लिए आज़ाद हैं..........." और रघु उस पेप्सी की बोतल को वहीँ टेबल पर रखता हुआ काव्य की तरफ बड़े गौर से देखने लगता हैं वहीँ काव्य उसकी बाटिओं को सुनकर मुस्कुरा पड़ती हैं.............

" ठीक हैं raghu......jab मैं तुम्हारे लिए इतना नीचे गिर hi चुकी हूँ तो थोड़ा और sahi...............agar इसे अंदर डालने के बाद मेरी गांड फुट hi जाएगी तो आज एहि sahi.............main तुम्हारे लिए अब वो भी करने को तैयार hoon...........agar तुम इसी में खुस हो to...........magar कभी मैंने तुमसे कुछ अगर माँगा तो याद rakhna..................tumhara जवाब ना नहीं होना chahiye.........agar ना हुआ तो उस दिन समझ लेना ki...............tum काव्य का दूसरा रूप देखोगे................" और इस बार काव्य खुद उस बोतल को टेबल पर बीचों बीच सेट करती हैं और उस टेबल पर चढ़ती हुई अपने गांड के सूरकः को धीरे धीरे से नीचे की तरफ ले जाने लगती हैं.........

और जब उसकी गांड की छेद से वो बोतल जब टच होती हैं रघु उस बोतल को कसकर पकड़ लेता हैं और काव्य फिर धीरे धीरे अपने गांड को उस बोतल पर दबाव डालना शुरू करती hain.............wo भी ाचे से जानती थी की उसके लिए ये काम करना कितना मुस्खिल hain............magar ाअब वो भी जूनून पर उतर आयी thi............mohabaat की nahin..............balki उन सब से नफरत ki...................wo हर एक चीज़ आज गौर कर रही थी जो उसके बीच यहाँ घाटी thi............usey सारा कुछ ाचे से याद tha.........ki किसने क्या खा था और किसने उसके साथ क्या किया था..............

"oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa....." और काव्य इस बार थोड़ी सी प्रेशर और डालती हैं अपने गांड पर जिससे वो पेप्सी की बोतल उसकी गांड में आधी से ज़यादि घुस जाती hain.............maar राजन और जावेद इस बार उसके जिस्म को हवा में दोनों तरफ करके उठा लेते हैं और इस बार उसके शरीर का पूरा वजह उस बोतल पर डालते हैं वहीँ इस बार काव्य बुरी तरह से चीख पड़ती हैं...............70% बोलते अब उसकी गांड में पूरी तरह से घुस गयी थी ये देखकर इरफ़ान ज़ोरों से उन दोनों पर चिल्ला पड़ता हैं..........

" अरे madarchodon.............aahista से karo............agar वो बोतल अंदर टूट गयी तो लेने के देने पढ़ jayengey.............mujhe अभी इसी वक़्त इसकी गांड का ऑपरेशन करना padega..........aur मैं इस वक़्त ऐसे किसी मूड में नहीं हूँ.........." और इरफ़ान उन दोनों की तरफ गुस्से से देखता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य दर्द से चीखती हुई इरफ़ान की तरफ देखती हुई हंस पड़ती है.............

"क्यों फुट गयी क्या teri..............gand मेरी फुट रही हैं और तकलीफ तुझे हो रहा hain......kyon...............murr hi जावूँगी न main.......waise भी अब जीने में क्या रखा hain.............tum लोगों ने तो मुझे कहीं का नहीं chodha.............khair...............chinta मुट्ठ karo.........main इतनी आसानी से मरने वाली हूँ nahin.............aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh.......aur कुछ देखना बाकि रह गया हैं डॉक्टर बाबू तो वो भी देख lo..........aur कोई एक्सपेरिमेंट मेरे पर करना चाहते हो तो वो भी कर lo............baad में मैं तुम सबको आगे कोई मौका नहीं देने वाली..............." और काव्य की गांड से खून निकलना शुरू हो जाता हैं वहीँ वो उन सब की तरफ देखती हुई हंस रही thi............shayad अपने जीत se................ya फिर उनकी हार से.............

इरफ़ान आगे बढ़ता हैं और एक इंजेक्शन फइलल करता हुआ काव्य के पास जाता हैं और सबसे पहले उसके गांड में फंसा वो बोतल निकलता hain............jo इस समय खून से पूरा लाल हो गया tha...........wo उस इंजेक्शन को काव्य के बाँहों में लगा देता हैं और उसकी तरफ एक तुक देखने लगता हैं...............

" ये इंजेक्शन तुम्हें साडी तकलीफों से मुक्त कर dega..........aur तुम बेहोश होकर चैन से सो jawogi................aab मैं तुम्हारे साथ एक आखिरी एक्सपेरिमेंट करने जा रहा hoon.............jo तुम्हारे जिस्म में हैं मगर मुझे नहीं लगता की तुम जैसी रंडी को आगे उस चीज़ की कभी ज़रुरत भी पढ़ने वाली hain..................aur कहो तो मैं तुम्हें थोड़ा हिंट भी दे देता हूँ.................." और इरफ़ान रघु की तरफ देखता हुआ धीरे से आँख मार देता हैं वहीँ रघु हाँ में अपना सर हिलता हुआ उसका पूरा समर्थन करता हैं...........

" कौन ssssssssssiiiiiiiiiiiiiii cheezzzzzzzzzzzz........main कुछ समझी नहीं........." और काव्य हकलाते हुए बोल पड़ती hain........uski आँखों में दुर्र एक बार फिर से साफ़ नज़र आने लगता हैं................

" सोच रहा हूँ तुम्हें बाचे की कभी ज़रूरत नहीं पड़ने wali...........is लिए अब मैं तुम्हारा छोटा सा एक ओपेरटशन करने जा रहा hoon..........iske बाद तुम हर किसी से खुलकर chudwawogi.............na बाचा रुकने का कोई कभी टेंशन rahega..............na पति से पकड़ने का कभी दुर्र............." ये शब्द आखिरी थे जो काव्य इरफ़ान के मुँह से सुनी thi........uske बाद वो वहां पूरी तरह से बेहोश हो चुकी thi..............uske बाद इरफ़ान ने ऑपरेशन करके उसकी बाछेदनी निकल ली thi...............jo आगे चलकर काव्य के लिए ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सबक tha............wo सबक जिसे वो जीते जी कभी भूल नहीं सकती थी................

अउ जब उसे होश आया तो वो अपने उसी आलिशान बंगलो में thi.................apne बिस्टेर पर सोई hui..............haan उसके जिस्म पर एक शाल ज़रूर tha................jo उसके नंगे बदन को ढके हुआ tha.................aur सामने जिसकी शकल थी वो थी उसके सबसे chahetey.............uske प्यारे से उस देवर.............. राम ki...........................jo वहीँ उसके पास बाजु में बैठा हुआ उसके हाथों में अपना हाथ rakhey................aankhon में आँखें डेल बस उसे लगातार एक तुक देख रहा tha................aur उससे ये पूछ रहा था ki.............kya ये इन्तेहाह hain.......................uske मोहबात ki................ya ये इन्तेहाह hain.................uske हवस ki............ya ये इन्तेहाह hain...................uske जवानी ki.....................jiski वजह से आज वो इस मुकाम पर कड़ी thi...................jahan पर न अब प्राश्चियत tha................aur न hi पछतावा..........................

टिल कॉन्टिनोएड...........................................
 
ये इन्तेहाह का सबसे बड़ा अपडेट और इम्पोर्टेन्ट अपडेट tha...............is अपडेट के बाद कहानी पूरी तरह से बदलने वाली hain............ho सकता हैं इस उपदटेस में कुछ ऐसे भी सीन्स थे जो एक्सट्रीम लेवल के सेक्स को दर्शाते थे मगर उसे मैं यहाँ दिखाना इस लिए चाहता था क्यों की आगे उन सब का एक हम रोले हैं जो इस कहानी की हर एक कड़ी को जोड़ता hain.............agar कुछ इस अपडेट में बुरा लगा हो तो ीाम sorry................magar इसके बाद से इस तरह के सेक्स मैं कभी नहीं लिखूंगा और न hi कभी इस तरह की kahani..............shuwaat hi में मैंने कह दिया था की ये कहानी हाइली इरोटिका हैं जिसे पसंद हो वहीँ pade.......is अपडेट के बाद अपने एप राइ ज़रूर dena.................thanks...............

इंडेक्स अपडेटेड..............
 
अपडेट- 62 (ा) (मेघा अपडेट)

अउ जब उसे होश आया तो वो अपने उसी आलिशान बंगलो में thi.................apne बिस्टेर पर सोई hui..............haan उसके जिस्म पर एक शाल ज़रूर tha................jo उसके नंगे बदन को ढके हुआ tha.................aur सामने जिसकी शकल थी वो थी उसके सबसे chahetey.............uske प्यारे से उस देवर.............. राम ki...........................jo वहीँ उसके पास बाजु में बैठा हुआ उसके हाथों में अपना हाथ rakhey................aankhon में आँखें डेल बस उसे लगातार एक तुक देख रहा tha................aur उससे ये पूछ रहा था ki.............kya ये इन्तेहाह hain.......................uske मोहबात ki................ya ये इन्तेहाह hain.................uske हवस ki............ya ये इन्तेहाह hain...................uske जवानी ki.....................jiski वजह से आज वो इस मुकाम पर कड़ी thi...................jahan पर न अब प्राश्चियत tha................aur न hi पछतावा..........................

अब आगे...................................................................................

काव्य का सारा जिस्म बहुत बुरी तरह से दुःख रहा tha................uski choot...............gand ........और साथ hi साथ उसके पेट का वो हिस्सा जहाँ पर उसकी बाछेदनी thi.........................jo शायद अब नहीं thi.................jab उसे थोड़ा होश आता हैं वो फ़ौरन अपने एक हाथ को उस शाल के अंदर ले जाती हैं और अपने पेट पर लगे उस टांके को अपने हाथों से टटलोनी लगती hain...........aur खुद महसूस करती हैं की काश वो जगह पहले के जैसा ho............uspar कोई टांका न लगा ho..............achanak से उसके जेहन में इरफ़ान की वो आखिरी बातें याद आने लगती हैं जो उसने उससे कही thi............magar काव्य का ये भ्रम दूर हो जाता हैं जब उसके हाथ उसके टांकों और उन जख्मों पर पड़ते हैं जो उसे उन पाँचों ने किसी सौगात के रूप में उसे दी thi...............wo ज़ख्म जिन्हें वो कभी मरते दम तक नहीं भूलने वाली थी................

और जब काव्य को ये एहसास होता हैं की वहां पर टांके लगे हुए हैं तो वो अपने आपको नहीं रोक पति और वहीँ फुट फुट कर अबकी बार रू पड़ती hain..............uski आँखों से आंसूं किसी झरने की तरह लगातार बहे जा रहे they...............wahin राम गुमसुम सा बैठा काव्य का हाथ अपने हाथों में लिए bus................khamoshi से उसकी तरफ देखे जा रहा tha................dil तो उसका भी पूरी तरह से टूट गया tha............magar न hi उसके पास कहने को कुछ अलफ़ाज़ बचे they................aur न hi लफ्ज़..................

वो हौले से अपने एक हाथ काव्य के सर पर ले जाता हैं और उसे चुप करता hain............wahin काव्य बेषुश बस रोये जा रही thi..........shayad उसे आज अपने किये की सजा जो मिल गयी thi...........paschyataap साफ़ उसकी आँखों में नज़र आ रहा tha........tabhi वो फ़ौरन अपने आँखों से आंसूं पूछती हैं और राम के तरफ देखती हुई उसके सीने पर अपना सर रखकर दुबारा से फुट फूटकर रू पड़ती hain...........aaj उसकी आँखों से ये आंसूं थमने का नाम नहीं ले रहे they...............shayad वो आज दिल खोलकर रूना चाहती thi.......apne किये गए उन पापों का प्राश्चिकित करना चाहती thi............apne दिल का बोझ हल्का करना चाहती thi...........magar शायद अब वक़्त निकल चूका tha.............aab शायद बहुत देर हो चुकी thi..............ram बस एक तुक उसकी तरफ देखे जा रहा tha...............bol उसके मुँह से भी एक शब्द नहीं फुट रहे थे..............

शायद राम कहना तो बहुत कुछ चाहता था magar...............ussey कह नहीं पा रहा tha..........kavya का dukh..........tadap..........uski bebasi.............laachari............ dard...........sab कुछ उसके दिल पर एक टीश बनकर चुभ रहा tha...............kavya का यु फुट फूटकर रोना उसके दिल को पल पल चलनी करता जा रहा tha..............chahta तो वो एहि था की वो उसके सरे गम को अपना बना le..........uske सरे दुखों को दूर कर de............magar हालत के आगे शायद वो भी अब मज़बूर हो गया tha..............jaise तैसे वो अपने ज़ज़्बातैव को संभालता हुआ काव्य के सर पर अपने हाथ फेरता hua..............bade प्यार से किसी बाचों की तरह उसे प्यार देता हुआ आहिस्ता से बोल पड़ता हैं..............

" चुप हो जाओ bhabhi...............please.............mujhe आपका ये रूना अब देखा नहीं जा रहा................." और इस बार राम अपने एक हाथ को काव्य के गलों पर ले जाता हैं और उसके आँखों से बहते उन आंसूंओं को एक एक कर पूछने लगता hain...........aur बड़े प्यार से उसकी आँखों में आँखें डेल उसकी तरफ देखता रहता hain...........wahin काव्य बेसुध सी रोटी हुई राम की आँखों में देखती हैं और फिर से फुट फूटकर रू पड़ती हैं................

" क्यों न रोवुँ main..........................ram..............kyon.....................aakhir रोने के सिवा मेरे पास अब बचा hi क्या hain.................sab कुछ तो उन लोगों ने मेरी लूट li................meri izzat...............meri मान maryaada.....................mera wajood.............mera atmasamman..................mera गुरूर................." इतनी बड़ी भूल आखिर मुझसे कैसे हो gayi................kyon मैं उनलोगों के इरादों को समझ नहीं payi.....................kyon................aakhir क्यों!!!!!!!!!!!!!! मैं इसी के लायक hoon...............aab तो मुझे जीने का भी हक़ नहीं hain..............main अब मुरर जाना चाहती hoon................nahin जीना mujhe....................nahin जीना aab...................main अब अपनी ज़िन्दगी से पूरी तरह हार चुकी हूँ..................." और काव्य इतना कहकर फिर से फुट फूटकर रू पड़ती हैं वहीँ राम बस टकटकी लगाए काव्य के तरफ देखे जा रहा tha...........usey कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था की वो काव्य को आखिर कैसे समझाए...............

" भाभी ...........जो हुआ वो ठीक नहीं hua.............magar अब आप उसे बदल तो नहीं सकती na............is लिए अब आपके लिए एहि ाचा होगा की आप उन बीती बाटिओं को किसी बुरे सपने की तरह भूल jaiye.................aur फिर से एक नयी ज़िन्दगी दुबारा से शुरू कीजिये................" और राम इस बार काव्य का हाथ हौले से उसके हाथों पर रख देता हैं और बड़े प्यार से उसकी तरफ देखता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य जैसे बौखला सी जाती हैं...........

" भूल jawun...........................aur वो भी unhein.............ye कभी नहीं हो सकता ...........और मेरे जीते जी तो ये मुमकिन nahin................aur अगर ऐसा हुआ तो वो मेरा आखरी दिन hoga.............ye ज़ख्म तो अब इतना गहरा बन चूका हैं की जब तक मैं जीवूंगी तब तक ये नासूर की तरह मेरे सीने में हमेशा चुबता rahega...................main उन सब को कभी माफ़ नहीं करने wali................kabhi नहीं................." और इस बार काव्य की आँखों में प्रतिशोध की भावना धीरे धीरे जनम लेने लगती हैं वहीँ राम टकटकी लगाए बस काव्य के चेहरे को देखे जा रहा था................

" भाभी ऐसे ज़ज़्बाती होने से कुछ हासिल नहीं होने wala..................main हूँ न आपके saath...............aapke हर कदम से कदम मिलकर मैं अब chalunga.............main आपको हर जगह सहारा dunga............aur मैं खुद आपका सहारा banuga..............kabhi bhi.....kisi भी मोड़ पर.................." और राम इस बार काव्य की हिम्मत बढ़ता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य टकटकी लगाए बस राम के तरफ देखे जा रही थी...............

" ram.........................mujhe एक पैन किलर लेकर dogey...............mera जिस्म बहुत दुःख रहा hain...............ye दर्द तो अब लगता हैं जैसे मेरी जान लेकर rahega..........kaash..................meri मौत आ जाये तब जाकर मुझे सुकून और चैन मिलेगा.................." और काव्य फिर से रू पड़ती hain...............wahin राम भी भावुक हो गया tha...................uski आँखों में भी चाँद आंसूं थे जिन्हें वो बड़े मुस्खिलों से अपने पलकों पर रोका हुआ tha...............magar ये आंसूं कभी भी उसकी आँखों से बरस सकते थे...............

" bhabhi.........please............aap चुप हो jaiye...........aap मरने की बातें क्यों करती hain..................mujhe ाचा नहीं lagta..............main हूँ न............" और राम इस बार अपने पलकों पे उन आंसुओं को नहीं रोक पता और उसकी आँखों से वो आंसूं किसी झरने की तरह बरस पड़ते hain.............wahin काव्य भी रोटी हुई उसकी तरफ एक तुक देखे जा रही थी..............

" गलती मेरी hi थी ram...........kaash मैं वहां जाने से पहले एक बार इस बारे में तुमसे ज़िक्र तो की होती .............और तुम मुझे मन कर दिए hote............to ......shayad...........ye न होता..............." और काव्य रूट हुए फिर से बोल पड़ती हैं वहीँ राम इस बार उसकी आँखों से आंसूं पूछता हैं और इस बार उसे बड़े प्यार से गले लगा लेता hain..............kafi देर तक दोनों एक दूसरे की बाँहों में रट रहते हैं फिर राम काव्य को अपने से दूर करता हैं और जाकर पैन किलर ले आता हैं...........

" ये लीजिये दवा .........इसे आप खा lijiye.............isey आपका दर्द कुछ कम हो जायेगा................." और राम उस पैन किलर को काव्य के हाथों में देता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य उस दवा को खा लेती हैं..........

" ये ज़ख्म तो फिर भी भर जाएंगे ...............ram.......magar इन लोगों ने जो ज़ख्म ..........जो घाव मुझे दिए hain..........uska क्या!!!!! वो तो कभी नहीं भरेंगे na.............main उन सब को कभी माफ़ नहीं करने wali...........aab तक ये सब मेरे दोस्त जैसे they..............magar आज से ये सब मेरे सबसे बड़े दुश्मन hain..............aur अगर दुश्मन को हराना हैं तो सबसे पहले उसके बारे में सब कुछ जान लेना chahiye............uski taqat.........uski kamzori..........uska पीछे का ithihaas..............aur सबसे बड़ा सवाल तो मुझे अब तक ये खाये जा रहा हैं की जीतू और रघु ने मेरे साथ ऐसा क्यों kiya.........mana की वे सब मेरे दुश्मन they................magar दुश्मनी अगर इन्हें मुझसे निकालनी hi थी तो इन लोगों ने मुझसे दोस्ती का झूठा नाटक क्यों kiya..............in सब के पीछे ज़रूर कुछ गहरा राज़ छुपा हैं जो अब तक मुझसे अनजान hain..........aur रघु तो गुडगाँव सेहर का रहने वाला हैं न................"

" तो क्या वो यहाँ मुझे बर्बाद करने के मकसद से hi यहाँ आया tha.................ho न हो मेरे अतीत में hi ये सरे राज़ कहीं न कहीं दफ़न ज़रूर hain..............aur अगर मुझे इन सब के बारे में अगर शुरू से जानना हैं तो एक बार फिर से मुझे उसी jagah.............usi सेहर में जाना होगा जहाँ मैं वो सेहर बहुत पहले पीछे छोड़ आयी hoon..................gurgaon.................wahan जाने के बाद hi इन सब के असलियत से पर्दा उठेगा..................

और सबसे बड़ी बात मुझे वो राजन नाम का साक्ष कुछ जाना पहचाना सा laga............agar वो यहाँ नया होता या इस सेहर का होता तो यकीनन मैं उसे पहले कभी यहाँ न देखि होती या उससे न मिली hoti......na hi उसका चेहरा मुझे परेशां karta...............kahin ये भी तो गुडगाँव सेहर से नहीं aaya...............kahin ये भी किसी चीज़ का मुझसे बदला तो नहीं ले रहा..........." और काव्य अपने दिमाग पर ज़ोर डालने लगती हैं और किसी मूवी की तरह एक एक घटना उसकी आँखों के सामने नज़र आने लगता hain............aur जब उसके दिमाग में कुछ बाटें याद आती हैं उसके चेहरे का रंग एक बार फिर से फीका पढ़ जाता हैं.............

" bhabhi........is वक़्त आपको आराम करने की ज़रूरत hain............aap आराम kijiye..........ye सब आप बाद में भी सोच सकती हैं.................." और राम काव्य के सर पर हौले से अपना हाथ रखता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य अभी भी अपने ख्यालों में कहीं गम थी.........

कंटिन्यू...........................................................
 
अपडेट-62 (बी) ( मेघा अपडेट)

" अब ज़्यादा वक़्त नहीं बचा हैं ram.............mujhe इस अनसुलझे कड़ी को कैसे भी करके सुलझाना hoga............nahin तो कहीं ऐसा न हो की कहीं बहुत देर हो जाये..................." और काव्य अपने दिमाग पर ज़ोर डालते हुए फिर से अपने ख्यालों में डूबती चली जाती हैं ..........और अचानक से उसका मोबाइल बज उठता हैं जिससे वो फ़ौरन अपने सोच से बहार निकलती hain.................phone सना का था.........

" कैसी हो मेरी jaan.............kal मैं आ रही हूँ तुम्हारे यहाँ................" और सना चहकती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ काव्य जवाब में बस मुस्कुरा देती हैं.............

" ठीक हैं sana.............tum आ jana..............waise भी मुझे तुम्हारे सहारे की अब ज़रुरत हैं..........." और काव्य आहिस्ता से बोल पड़ती हैं वहीँ सना के चेहरे पर हैरानी साफ़ नज़र आने लगती हैं..............

" अब मेरी जान को सहारे की क्या ज़रूरत पढ़ gayi..............tum तो खुद कितनों को सहारा देती हो............." और सना मुस्कुराते हुए धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ काव्य का चेहरा फिर से उदास हो जाता हैं...........

" कभी कभी हालात के आगे इंसान को समझौता करना पड़ता हैं sana............tum नहीं समझोगी.............." और काव्य अपने सोच में फिर से डूबती चली जाती हैं वहीँ सना उसकी बाटिओं को सुनकर मुस्कुरा पड़ती हैं..........

" oye.............shayri की aulaad...........mujhe कभी कभी तेरी ये बातें ज़्यादा समझ में नहीं aati...........main तुझे ये बताने के लिए फ़ोन की थी की कल मैं सुबह तेरे पास पहुँच jawungi........fir तू मुझे जी भरके पकाते rehna.............chal रखती हूँ phone............bye........" और सना इतना कहकर अपना फ़ोन सुत्त कर देती हैं वहीँ काव्य फिर से अपने सोच में डूबती चली जाती hain.......aur थोड़े देर बाद जब उसे कुछ सना की कुछ बातें याद आती हैं वो अपने जगह से ऐसे उछलती हैं मनो उसके जिस्म में किसी ने 440 वाल्ट का करंट चुवा दिया हो.........

" कहीं ये वो दोनों के बाप तो नहीं हैं जिसकी वजह से उन लड़कों ने गुर्गों में सुसाइड की thi.............aur सना जिसका दोष हर वक़्त मुझे hi देती thi...............ho न हो इन सब के पीछे कहीं न कहीं ऐसा हो सकता hain.................magar ये कैसे पता चलेगा की जो मैं सोच रही हूँ वो सही hain...........ye तो खैर वहां जाकर hi पता chalega..............ek तो राजन हो सकता हैं उस पहले लड़के का baap................aur दूसरा फिर कौन हो सकता हैं........

इरफ़ान ..............नहीं वो तो '. hain............aur मरने वाले दोनों लड़कों का नाम प्रशांत और रोहित tha..............aur वो दोनों ***** they..............to इस अंदाज़ से जावेद भी उन दोनों का बाप नहीं हो sakta.............to फिर बचा kaun................ek तो raghu...............aur दूसरा jeetu...............ho सकता हैं इन दोनों में से कोई ऐसा हो जो यहाँ बदले के इरादे से यहाँ आया ho..................aur जहाँ तक मुझे लगता हैं जीतू भी वो साक्ष नहीं हो sakta.............kyon की जब राहुल को नौकर की जब ज़रूरत थी तब वो प्रेस में गए थे इश्तिहार dene.........tab उनके किसी दोस्त ने जीतू को यहाँ भेजा था और शायद वो जीतू को भी जानते hongey.............khair ये तो प्रेस में जाने पर पता चल hi jayega............to बचा अब रघु................

तो क्या रघु hi उन दोनों में से किसी लड़के का बाप हो सकता hain.............yakeeenan...............aisa हो सकता hain............kyon की वो जब यहाँ आया था तो उसने गुडगाँव का ज़िक्र मुझसे किया tha................aur उसने ये भी कहा था की उसका परिवार बिखेर गया hain.....uska लड़का भी मुरर चूका hain.................oh माय गॉड!!!!!!!!!!!!!! यानि की इतना सब कुछ मेरे पीठ पीछे चल रहा और मुझे ज़रा भी भनक तक नहीं lagi...............aab तो मुझे इस बात की सचाई जानने के लिए मुझे फिर से उसी सेहर में जाना hoga............fir से मेरे अतीत के एक एक पानों को फिर से खोलना hoga.............aur उसके लिए मुझे जाना hoga........................gurgaon................" और काव्य लुम्बी सांस छोड़ते हुए अपनी बात ख़तम करती हैं वहीँ राम बड़े गौर से एक तुक काव्य के चेहरे को देखे जा रहा tha..............usey आधे से ज़्यादा काव्य की बातें समझ में नहीं आयी थी................

" गुडगाँव hi क्यों bhabhi.........yahan रहकर भी तो सिक्योरिटी अफसर के मदद से सब कुछ पता लगाया जा सकता hain............fir वहां जाने की क्या ज़रूरत...................." और राम काव्य के तरफ देखता हुआ धीरे से सवाल करता हैं वहीँ काव्य आगे बोल पड़ती हैं...........

" कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं राम जो वहां जाने पर hi पता लगती hain............main एक डॉन दिन में गुडगाँव के लिए niklungi..........aur सरे राज़ पता करके hi वहां से lautngi..............mera गुडगाँव जाना उतना hi ज़रूरी हैं जैसे इंसान के लिए खाना खाना..........." और काव्य राम की तरफ देखती हुई फिर से बोल पड़ती हैं वहीँ अचानक उसके दिमाग में कुछ ख्याल आता हैं जिससे उसके चेहरे पर आशा की किरण नज़र आने लगती हैं...............

" मेरा एक काम करोगे ram..........................agar मेरा शक सही हैं तो हो न ho.............raghu और जीतू के कमरे में से ऐसा कुछ ज़रूर मुझे मिलेगा जो मेरे इस शक को पूरी तरह से सच साबित कर dega..............tum उनके कमरे में जाकर उनके सामान की तलाशी ले सकते ho.............shayad कुछ ऐसा मिल जाये जिससे मेरा काम और भी आसान हो jaye................ya शायद मुझे जिस चीज़ की तलाश हैं................" और काव्य अपनी सांस छोड़ते हुए फिर से बोल पड़ती hain..............na जाने क्यों उसे यकीन हो चला था की उसे ज़रूर रघु और जीतू के कमरे में से कुछ न कुछ तो मिलेगा hi............

" मगर bhabhi.................ye होगा kaise................wey लोग तो सारा दिन अपने घर में hi रहते hain.............agar वे लोग बहार जाये तो काम बन सकता हैं................." और राम सोचता हुआ अपनी बात काव्य से बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य बस हूंणणन्न में जवाब देती हैं..............

" वो तुम मुझपे छोड़ do.............aur एक काम karo...........jawo और इसी वक़्त रघु और जीतू दोनों को यहाँ मेरे पास अभी बुला lawo...............main उन्हें बाटिओं में उलझायी रहूंगी तब तक तुम अपना काम कर aana...........magar होशियारी से.........." और काव्य कुछ सोचकर हौले से बोल पड़ती हैं व्वहिं राम भी फ़ौरन रघु और जीतू के कमरे की तरफ चल पड़ता hai...........jaise hi वो उनके कमरे के पास जाता हैं दरवाज़ा हमेशा की तरह सत्ता hi रहता hain........uske हाथ लगते hi दरवाज़ा खुलता चला जाता hain............wahin पर एक तरफ रघु और जीतू कुछ परेशां से बैठे हुए नज़र आ रहे they........wahin राम को ऐसे उनके पास आता हुआ देखकर वो थोड़ा और भी परेशां से नज़र आने लगते हैं...........

" भाभी ने आप दोनों को इसी वक़्त अपने कमरे में बुलाया हैं................" और राम इतना कहकर अपना चेहरा दूसरी तरफ गुस्से से घुमा लेता हैं वहीँ रघु और जीतू की जैसे फुट जाती hain..........jiska उन्हें दुर्र ठावहिं अब hua...........aab उन्हें यकीन हो चूका था की आज उनकी मेमसाहेब उन्हें छोड़ने वाली हैं nahin.........magar मालकिन का हुकुम था so.............unhein जाना hi tha.........unke बहार जाते hi राम चरों तरफ देखता हुआ फ़ौरन अपने काम में जुट जाता हैं और उधर जैसे hi रघु और जीतू अंदर पहुंचते हैं उनका दिल दुर्र से ज़ोरों से धड़कने लगता hain...........raghu और जीतू किसी गुनेहगार की तरह अपना सर झुकाये काव्य के सामने खड़े हो जाते हैं वहीँ काव्य गुस्से से उन दोनों को घूरने लगती हैं..........

" मुझे माफ़ कर दीजिये memsaheb..........hum लोगों से बहुत बड़ी गलती हो गयी..........." और रघु अपना सर नीचे की तरफ झुकता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य गुस्से से रघु को अब भी घूरे जा रही थी.............

" मैं यहाँ पर तुम दोनों को माफ़ी देने के लिए नहीं बुलाई hoon..........main तुम दोनों से कुछ कहना चाहती हूँ........." और काव्य गरजते हुए बोल पड़ती हैं वहीँ रघु और जीतू की रही सही बोलती भी बंद हो जाती हैं............

" तुम दोनों के लिए अब एहि ाचा होगा की तुम अपनी दूसरी नौकर कहीं और जाकर ढूंढ लो........... इस घर में तुम्हारे लिए अब कोई जगह nahin..............aur जितनी जड़ली हो सके तुम अपनी बोरिया बिस्टेर यहाँ से समेत lo...............nahin तो मुझे खुद उठाकर तुम्हारे ये सामान अब बहार फेंकना padega..............is तहत clear.............now गेट आउट फ्रॉम माय हाउस................" और काव्य गुस्से से उन दोनों की तरफ देखती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ रघु और जीतू फ़ौरन काव्य के सामने अपने हाथ जोड़ लेते हैं.......

" memsaheb...........hum बेशक यहाँ से चले jayengey......magar हमें कुछ दिन की मोहलत तो और do...........humein इस सेहर में नौकरी ढूढ़ने और नयी जगह तलाश करने में कम से कम 1 महीना तो लगेगा hi................." और रघु सफाई देता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य गुस्से से और भी भड़क जाती हैं.............

" तुम्हें इतने दिनों का वक़्त नहीं मिल sakta..........zyada से ज़्यादा 15 din............agar इन 15 दिनों में एक दिन और भी बढ़ा तो याद rakhna...........main तुम्हारा सामान इस रोड पर फेंकवा dungi............aur haan..........aaj के बाद तुम दोनों को यहाँ काम करने के लिए अंदर आने की जौरात नहीं hain..............na hi तुम दोनों अंदर आवोगे और न hi किसी से तुम milogey.............kisi से का मतलब समजह रहे हो na..............main अपने देवर की बात कर रही hoon...........tumhein बस बहार का काम करना hain............now गेट out..........aab तुम लोग अपनी ये मनहूस शकल दुबारा मुट्ठ दिखाना............." और काव्य जैसे उन्हें वारं करती हुई कहती हैं तभी राम भी उस कमरे में आ जाता हैं वहीँ रघु और जीतू अपना सर झुकाये चुप चाप से उस कमरे से बहार की तरफ निकल जाते hain..........wey ाचे से जानते थे की अब उनके साथ ऐसा hi कुछ होने वाला hain.............is लिए उन्हें हैरानी नहीं हो रही थी.........

उन दोनों के बहार जाते hi राम जल्दी से जाकर मैं दूर लॉक करता हैं और भागता हुआ काव्य के पास आता हैं और जब वो अपने जेब से उस चीज़ को निकलता हैं काव्य की आँखें हैरत से फैलाती चली जाती hain........wo उस चीज़ को एक तुक अपने हाथों में लेकर बस देखती रह जाती hain........................ek बार फिर से उसके सामने उसका अत्तीत आकर खड़ा हो गया tha.......dekhna था की आगे वक़्त को क्या मंज़ूर था......................................

टिल कॉन्टिनोएड............................................................
 
अपडेट- 63 (ा) (मेघा अपडेट)

उन दोनों के बहार जाते hi राम जल्दी से जाकर मैं दूर लॉक करता हैं और भागता हुआ काव्य के पास आता हैं और जब वो अपने जेब से उस चीज़ को निकलता हैं काव्य की आँखें हैरत से फैलाती चली जाती hain........wo उस चीज़ को एक तुक अपने हाथों में लेकर बस देखती रह जाती hain........................ek बार फिर से उसके सामने उसका अत्तीत आकर खड़ा हो गया tha.......dekhna था की आगे वक़्त को क्या मंज़ूर था......................................

अब आगे...................................................................................

काव्य के हाथों में इस वक़्त वहीँ पुराण उसका फोटो था जिस वक़्त रघु भिकारी की हालत में उसकी तस्वीर लिए इस सेहर में दर दर भटक रहा tha..........aur उसका पता सबसे पूछ रहा tha..................ye फोटो उसके कॉलेज के ज़माने का tha............magar अब सवाल ये था की आखिर रघु के पास उसका इतना पुराण फोटो आया कहाँ से .........................अब उसे भी यकीन हो चला था की इन सब के पीछे कोई न कोई गहरा साज़िश hain..............nahin तो रघु यहाँ यु hi नहीं aata............aab धीरे धीरे काव्य को एक एक कड़ी सुलझानी थी और उसके लिए उसे अब खुद मैदान में उतरना tha................aur न hi मैदान में बस कूदना था बल्कि ये जुंग भी उसे अब जितनी थी..............

" आपकी ये फोटो रघु के पास आखिर आयी कहाँ से भाभी.............." और राम बड़े गौर से काव्य के तरफ ................तो कभी उस फोटो के तरफ देखता हुआ धीरे से सवाल करता हैं वहीँ काव्य टकटकी लगाए बस अपने उस तस्वीर को देखती जा रही thi.............agar उसके पास कोई जवाब होता तब तो वो राम के सवालों का जवाब देती............

" मुझे नहीं पता ram.................yehi तो अब पता करना hain................ki मेरी ये तस्वीर रघु के पास आयी कहाँ se..........jahan तक मुझे याद हैं की मैंने अपनी तस्वीर किसी को नहीं di........to इस सवाल का जवाब तो मुझे वहीँ जाकर hi मिल सकता हैं जहाँ की ये तस्वीर hain.............main दो दिन में जावूँगी............. gurgaon..............jahan मेरे सरे सवालों के जवाब मुझे मिल सकेंगे................" और काव्य लुम्बी सांस छोड़ती हुई धीरे से अपनी बात ख़तम करती हैं वहीँ राम बिना किसी सवाल जवाब के अपने कमरे में चला जाता हैं.....................

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उधर रघु और जीतू के चेहरे का रंग पूरा उतर गया tha..................wey लोग जानते तो थे की उनकी मेमसाहेब उन्हें इस घर से ढ़ाके मरकर निकल degi..........magar इतनी jadli.............ye उन्हें उम्मीद नहीं thi............khair अब जो हो गया...... सो हो gaya.............raghu तो अपना बदला काव्य से ले चूका tha................magar वो अभी और भी बहुत कुछ करना चाहता था जो समय रहते पूरा नहीं हो पाया tha.....................bus इसी बात का उसे थोड़ा पछतावा था................

" अब क्या करना हैं raghu.................chal हम दोनों अपना बोरिया बिस्टेर समेत लेते हैं और चले जाते हैं वहां उसी जगह......... जहाँ से हम आये they.................main अब आगे और कोई खतरा नहीं उठाने वाला.........." और जीतू रघु के चेहरे की तरफ देखता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ रघु अभी भी अपने ख्यालों में डूबा हुआ था...............

" इतनी भी क्या जल्दी हैं jeetu..............khel अभी ख़तम नहीं hua...........aabhi तो हमलोगों को यहाँ 15 दिन और रहना हैं ..............और इन 15 दिनों में मुझे और भी बहुत कुछ करना hain........dekha नहीं उस साली की अकड़ अभी पूरी तरह से गयी nahin...............mujhe यहाँ रहकर एक काम और करना हैं जिससे वो साली पूरी तरह से बर्बाद हो jaye............uska पति उसे लात मार de..............aur वो कामिनी सिर्फ कोठी पर बैठने लायक बस रह jaye............tab जाकर मुझे शांति और सुकून मिलेगा................" और रघु की आँखें गुस्से से लाल हो जाती हैं वहीँ जीतू ख़ामोशी से रघु के चेहरे की तरफ देखने लगता हैं...........

" अब कितना बर्बाद करेगा yaar............kahin ऐसा न हो की उसे बर्बाद करने के चाकर में कहीं हम बर्बाद न हो jaye.............meri मान तो चल यहाँ से कहीं और चलते हैं.............." और जीतू हिदायक देते हुए फिर से बोल पड़ता हैं वहीँ रघु उसकी तरफ गुस्से से घूरने लगता हैं..........

" तुझे जाना हैं तो चले jaa...........main तुझे नहीं rokunga.............magar मैं तो यहाँ 15 दिन और rahunuga.............yaad हैं न वो video............bus कैसे भी करके मुझे वो वीडियो हासिल करना hain..............aur एक बार अगर वो वीडियो मेरे पास आग गया to.............samajh ले की काव्य को कोठी पर बैठने से कोई नहीं रोक sakta............uska पति खुद उसे वहां तक लेकर jayega..............kyon की मैं उस वीडियो को उसके पास जो भेजने वाला hoon.............uske भोले भले पति के पास..........." और रघु के चेहरे पर कमीनी मुस्कान तैर जाती हैं वहीँ जीतू की आँखें हैरत से फैलती चली जाती hain.............usey अब रघु के इरादे से दुर्र लगने लगा था.............

" bhai...................ye सब करके तुझे क्या milega..............hum लोगों ने इतना कुछ तो किया हैं उसके saath..........mera कहा मान ले और हम चल चलते हैं कहीं और......... जहाँ हम बाकि की ज़िन्दगी सुकून और चैन से गुज़र लेंगे.................." और जीतू रघु के सामने फर्याद करने लगता हैं वहीँ रघु उसकी बाटिओं को सुनकर हंस पड़ता हैं................

" तू तो बुज़दिल निकला be.................main तो तुझे बहादुर समझता tha...............khair ये आखरी काम मुझे कर लेने de........fir मैं तेरे साथ जहाँ कहेगा वहां चलूँगा..................." और रघु जीतू के कंधे पर अपने हाथ रखता हुआ फिर से मुस्कुरा पड़ता हैं वहीँ जीतू भी हाँ में उसका समर्थन करता हैं....................

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शाम hui........shaam से फिर raat..................kavya अब पहले से काफी रहत महसूस कर रही thi.............ram सारा वक़्त उसी के पास rehta...........shaam को खाना खाने के बाद दोनों एक hi बिस्टेर पर जाकर सू जाते hain..............subeh उठकर राम काव्य के लिए खुद चाय बनाकर लता हैं तब काव्य की आँख खुलती hain..........wo अभी भी बिस्टेर पर सोई हुई अंगड़ाई ले रही thi.............wo राम की तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुरा पड़ती हैं...........

" तुमने क्यों तकलीफ की ...........ram..........main खुद आकर चाय बना देती.............." और काव्य मुस्कुराते हुए राम की तरफ देखती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ राम भी जवाब में मुस्कुरा पड़ता हैं...............

" इसमें तकलीफ कैसी bhabhi............aapko नींद में सोता हुआ देखा तो सोचा की आपको एक छोटा सा सरप्राइज दूँ............." और राम उस चाय के ट्रे को काव्य के पास बढ़ता हुआ धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं वहीँ काव्य उसे अभी भी बड़े प्यार से देखे जा रही थी..........

" एक बात केहनी थी tumse..............ram..............aaj सना आ रही हैं यहाँ पर rehney..............aur हो सके तो कल मैं यहाँ से गुडगाँव के लिए निकल jawungi....................to बचे बस तुम दोनों अकेले इस बड़े से घर mein................aur वो दो जाहिर log...............bus तुम्हें कैसे भी करके सना को इन दोनों से दूर रखना hain.............usey हमेशा उलझाए रखना hain............taki उसका ध्यान इन दो कमीनों की तरफ बिलकुल न jaye................kyon की मैं सना को बहुत ाचे से जानती hoon..............wo मुझसे भी ज़्यादा गरम रहती हैं और बहुत जल्दी वो किसी के बाटिओं में आ जाती hain..............halanki वो ऐसी नहीं हैं magar.........choot की आग होती hi कुछ ऐसी हैं की वो किसी से कुछ भी करवा सकती hain.............islliye मेरे लौटने तक तुम उसका पूरा ध्यान रखना............" और काव्य गहरी सांस छोड़ते हुए अपनी बात ख़तम करती हैं वहीँ राम हाँ में धीरे से अपना सर हिला देता हैं...............

" मगर मैं हर वक़्त तो उनके साथ नहीं रह सकता na.............mujhe कॉलेज और कोचिंग भी तो जाने होते hain............haan उसके बाद सारा वक़्त मैं उनके साथ रह सकता हूँ............" और राम काव्य के बाटिओं का जवाब देते हुए बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य कुछ देर तक सोचती हैं फिर वो जवाब में धीरे से मुस्कुरा देती हैं...........

" ठीक hain..........koi बात nahin............tumhein जितना वक़्त मिले उसके साथ rehna............aur haan..........sana से मेरे बारे में कुछ भी न kehna..........ki मेरा इन नौकरों के साथ कोई तालुकात they...........tum समझ रहे हो न............." और काव्य फ़ौरन अपने बिस्टेर से उठतथि हैं और जाकर फ्रेश होती hain...........uske छूट में दर्द अब भी tha.........jissey उसे चलने में तकलीफ हो रही thi..........wahin राम जवाब में हाँ कहता हुआ काव्य को सहारा देता हैं और उसे बाथरूम तक छोड़ आता हैं...............

करीब 9 बजे सना की कार काव्य के बंगलो पर पहुँचती hain............humesha की तरह वो चहकती हुई आती हैं और काव्य से आकर लिपट जाती hain.............wahin कुछ दूर पर खड़ा राम सना को बड़े गौर से देख रहा था..................

Sana.................ek दिलकश ladki.......................dikhney में जितनी वो सूंदर थी उतनी hi खुले विहारों वाली भी thi..............wo भी काव्य की तरह गोरी और बेहद खूबसूरत thi.............magar काव्य से उसकी हाइट थोड़ी लुम्बी thi.............aur स्लिम body..............badan का कटाव ऐसा जैसा किसी मॉडल का....................32 के चुके...............28 की पतली kamar.........aur 36 की भरी हुई gand.............jo थोड़ी बहार की तरफ निकली hui..........jo हर मर्द को अपनी तरफ ाखर्षक करती thi...............har मर्द उसकी गांड को देखकर बस एहि सोचता की काश उसका लुंड उसके इस टाइट से छेद में कहीं घुसा हुआ rehta................sana अक्सर सलवार और सूट पहनना ज़्यादा पसंद करती thi............aur वो उन कपड़ों में ज़्यादा कम्फर्टेबले फील करती थी...........

कंटिन्यू....................................................................
 
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