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अपडेट- 59(बी) (मेघा अपडेट)
सामने दो लोग आ रहे they...........ek तो वाइट ड्रेस पहना हुआ था और उसके चेहरे पर थोड़ी बड़ी बड़ी ढाढी thi...........shakal सूरत से वो कोई डॉक्टर लग रहा tha.............haath में उसके दो glubs...........aur गले पर आला लटका हुआ tha...........aur पीछे जो बाँदा था वो भी उसके कदम से कदम मिलता हुआ उसके साथ चल रहा tha..............jab काव्य उस साख की ओरे देखती हैं उसकी आँखें हैरत से थोड़ी फ़ैल जाती hain...................kyon की ये शकल उसे कुछ जाना पहचाना सा लग रहा tha...............ya शायद वो इस आदमी से कभी मिली thi.........ya कभी उसे कहीं पर देखा tha.................shayad कुछ धुंदली सी यादें............
" यू अरे मोस्ट welcome..............aapka यहाँ मेरे इस लैब में स्वागत hain.......................waise इस नाचीज़ को नरेश के नाम से लोग यहाँ जाना करते hain.............magar तुम चाहो तो मुझे मेरे वहीँ नाम से पुकार सकती ho............ya फिर डॉक्टर कह सकती ho..........waise मैं पेशे से डॉक्टर hi hoon........aur साथ hi साथ कुछ छोटी मोती चीज़ों का रीसर्च भी अक्सर किया करता hoon...........aur आपको ये जानकर हैरानी होगी की यहाँ मैं कभी किसी को नहीं bulata.............aur न hi मेरे इस राज़ के बारे में किसी को कानों कान कोई खबर hain.............tum मेरे दोस्त रघु की बहुत ख़ास हो इस लिए तुम यहाँ पर आ saki...........khair.............chalo अंदर मैं तुम्हें कुछ दिखता हूँ.........." और नरेश इतना कहकर पीछे की तरफ मुड़ता हैं और फिर धीरे धीरे चल पड़ता हैं वहीँ उसके पीछे पीछे राजन भी चल पड़ता hain............wahin काव्य राजन को बहुत गौर से देख रही thi..........shayad राजन का वो चेहरा उसे कुछ याद दिला रहा था..............
" वैसे ये लैब किस चीज़ की hain............aur यहाँ पर तुम किस तरह के रीसर्च करते हो............" और काव्य फ़ौरन सवाल करती हैं वहीँ इरफ़ान उसके सवालों को सुनकर धीरे से हंस पड़ता हैं.........
" ऐसी भी क्या जड़ली hain........ander तो चलो सब पता चल jayega............ki तुम यहीं रहकर hi सब कुछ जान जाना चाहती हो..........." और जैसे hi काव्य अंदर दूसरे कमरे में जब जाती हैं उसके होश मनो उड़द जाते hain............wo चरों तरफ अपने सामने उस लैब को बड़े गौर से देखने लगती hain..............lab काफी लुम्बा और बड़ा tha................samney एक बहुत बड़ा हाल जैसा tha...........uske चरों तरफ कई सरे टेस्टोबेस और चेमिकल्स रखे हुए they............aur सामने के दीवार पर दो बड़े बड़े करीब 7 फुट ऊँची गिलास की जार भी thi............jismein दो इंसान रखे हुए they........wo भी पूरे nangey...........aur ज़िंदा bhi.............jinke लुंड पर दो तीन तुबेस लगी हुई thi.........jo एक दूसरे से कनेक्टेड thi.............aur गले के नीचे का सारा हिस्सा एक अजीब सा पानी में डूबा हुआ tha.............kuch रंगीन और ग्रीन कलर के पानी jaisa.........us इंसान के चेहरे पर मास्क लगा था और पीछे एक बड़ा सा ऑक्सीजन सिलिंडर भी उसके सांस की नाली से कनेक्ट tha.................same वही सिचुएशन उसके बगल के जार का भी था................
वहीँ कुछ दूर पर तरह तरह के सीज़्ज़ेर्स और इंस्ट्रूमेंट्स रखे हुए they........shayad ओपेरटशन करने के ..........तो किसी टेस्टोबे में आदमी का लुंड काटकर एक जार में रखा हुआ tha........uspar कई तरह के चेमिकल्स भी लगे they..........aur सामने एक बड़ा सा नीले रंग का प्लास्टिक उस फर्श पर बिछा हुआ था जिसपर तेल जैसा कुछ चिपचिपा सा चेमिकल्स साफ़ नज़र आ रहा tha.........jo तेल की वजह से काफी चमक रहा tha...........ye सब नज़ारा देखकर काव्य के तो जैसे होश उड़द गए थे..........................
" yeeeeeeeeeeeeeeee साअबब kyyaaaaaaaaaa hhhaaaiinnnnnnnnnnnnnnn......." और काव्य जैसे तैसे धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ इरफ़ान उसकी बाटिओं को सुनकर धीरे से हंस पड़ता हैं...........
" जब तुमने पूछ hi लिया तो मैं तुम्हें सब कुछ बता hi देता hoon............maine बताया न की मैं एक पेशे से डॉक्टर hoon.....aur साथ hi साथ यहाँ रीसर्च भी करता रहता hoon..........ye तो मेरी बस एक छोटी सी लैब hain.............jo तुम्हारी आँखों के सामने हैं............" और इस बार इरफ़ान हँसता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य के तो जैसे होश उदय हुए they.............aab उसे ऐसा लगने लगा था की आज उसने रघु की बात मानकर अपनी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी भूल की हैं..........
" magar............ye लैब आखिर हैं किस चीज़ ki............aur यहाँ पर तुम किस तरह के रीसर्च करते हो............." और काव्य अजीब सी नज़रियों से इरफ़ान की तरफ देखती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ इरफ़ान उसकी बाटिओं को सुनकर फिर से हंस पड़ता हैं...........
" transgender........................samjhti ho...........kisey कहते hain..............ladke को अगर लड़की बनाना ho...............ya लड़की को लड़का तो ............मैं ये काम यहाँ पर करता hoon...............sabki नज़रियों से chipkar.............main उनके लिंग चेंज करके मेल से female........aur फीमेल से फिर मेल बनता hoon..........aur वैसे मुझे इस काम के काफी ज़्यादा पैसे मिलते hain......aur मज़े bhi......aur मैं ये काम अब तक कीटों पर कर चूका हूँ................" और इरफ़ान फिर से काव्य की तरफ देखता हुआ हंस पड़ता हैं वहीँ काव्य दुर्र से मनो सेहम जाती hain..........uski तो जैसे अब बोली नहीं निकल रही थी............
" तो क्या tum...................mere saath..........bhi............."aur काव्य की जुबान जैसे लड़खड़ा सी जाती हैं वहीँ इरफ़ान उसकी बाटिओं को सुनकर फिर से हंस पड़ता हैं........
" अरे nahin.........nahin...........tum ऐसा क्यों सोच रही ho...........tum डरो nahin...............hum तुम्हारे साथ ऐसा वैसा कुछ नहीं karengey............bus तुम पर एक दो छोटे मोठे प्रयोग करने हैं और फिर तुम्हारी यहाँ पर ाचे से चुदाई होनी hain.........jo मेरे यहाँ सभी दोस्त मिलकर तुम्हारे साथ karengey..........aur kya.......iske बाद तुम पूरी तरह से आज़ाद हो......................." और इरफ़ान इस बार थोड़ा सा सीरियस होता हुआ फिर से बोल पड़ता hain........wahin काव्य के चेहरे का रंग फीका पड़ता जा रहा tha..........usey कुछ समझ में नहीं आ रहा था की आखिर ये सब लोग उसके साथ करना क्या चाहते हैं.......
"मुझे नहीं करना यहाँ तुमसब से कोई prayog...........tum सब सरे के सरे पीछे ho...........aadhe पागल हो.........." और काव्य जैसे तड़प उठती हैं वहीँ इस बार इरफ़ान उसकी तरफ देखता हुआ फिर से मुस्कुरा पड़ता हैं..............
" तुमने सही पहचाना humein...........khair..........raghu बता रहा था की तुम अक्सर कपड़े में hi मूट दिया करती ho..........aur वैसे भी तुम आजकल मूट ज़्यादा रही हो तो ये तुम्हारे सेहत के लिए ज़्यादा ाची बात नहीं hain..........to मैं चाहता हूँ की मैं तुम्हारे इस बीमारी का इलाज़ karun.........to तुम्हारे लिए ये इंजेक्शन ठीक rahega.............jo मैंने तुम्हारे लिए ख़ास तौर पर तैयार किया hain.............isko लगाने के बाद तो तुमपर जैसे एक नशा सा च jayega............aur तुम पूरी तरह मस्त होकर हम सब से छुड़ा करोगी........................" और इस बार इरफ़ान सामने रखा एक इंजेक्शन अपने हाथों में उठता हैं और सामने रखे कई सरे टेस्टोबेस में से थोड़ी थोड़ी सब में से उस इंजेक्शन को फइलल करता हैं और जब 5मल इंजेक्शन जब पूरी तरह जब भर जाता हैं उस इंजेक्शन का रंग जैसे ग्रीन हो जाता hain.........jisey देखकर इस बार काव्य ज़ोरों से चीख पड़ती हैं..........
" नहीं nahin..........mujhe यहाँ से जाना हैं bus....................mujhe जाने do.......please.........." और काव्य लगभग चीखती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ इरफ़ान उसकी बाटिओं को सुनकर फिर से मुस्कुराने लगता हैं....
" अरे ये क्या!!!!!!!!!!! हम तो तुम्हारे साथ प्यार का खेल खेलना चाहते हैं और तुम हमारे साथ co-orporate नहीं कर rahi........ye गलत बात hain..............raghu ........jeetu........pakdo इसके दोनों हाथ और इसे ले चलो उस कमरे में........." और रघु और जीतू इस बार काव्य को कसकर जकड लेते हैं और उसे उठकर अपनी गॉड में सामने के कमरे में ले जाते हैं और उसी जगह बैठा देते हैं जहाँ पर वो जिम वाला सेट tha..............jeetu पीछे जाकर काव्य के दोनों हाथ पीछे की तरफ जकड़कर पूरी तरह से फोल्ड कर देता hain.......aur रघु काव्य के दोनों पवन फैलता हुआ हवा में 6 फुट ऊँचा उस रोड के दोनों बगल लटका देता हैं और राजन और जावेद उसके दोनों पवन को तेज़ी से जकड लेते हैं...........
काव्य का अब पूरा जिस्म हवा में झूल रहा tha..........uske पूरे जिस्म का वजन अब उसकी थाई पर tha........wahin इरफ़ान उस इंजेक्शन को काव्य के पास ले आता हैं और बड़े गौर से उसके तरफ एक तुक देखने लगता hain..........wahin काव्य दुर्र से रू पड़ती hain.............usey तो ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था की ये लोग न जाने आगे उसके साथ क्या करने वाले hain...........wo अब पूरी तरह से बेबस नज़र आ रही thi.........wo चाह कर भी अपने आपको इन दरिंदों से नहीं छुड़ा पा रही थी...........
" please.........mujhe अब यहाँ से जाने do.............mujhe छोड़ do....please..........." और काव्य उन सब के आगे फर्याद करने लगती हैं वहीँ उनके चेहरे पर कोई शिखन नहीं आती........
" तुम्हें हम छोड़ dengey...........daro मुट्ठ baby.............tumhein कुछ नहीं hoga............is इंजेक्शन में वो साडी खूबियां हैं जो तुम्हें चुदाई के वक़्त chahiye...........aur सबसे बड़ी बात इसमें जितने भी दवाइयां हैं साडी की साडी मेरी बनायीं हुई hain..........aur इस दवाई का असर 7 से 8 घंटे तक रहता hain..........aur जहाँ पर भी ये इंजेक्शन लगेगा ये उस हिस्से को पूरी तरह से ढीला और फ्लेक्सिबल बना dega........fir चाहे ये लोग उस हिस्से को फाड़े या कुछ भी करे तुम्हें ज़रा भी तकलीफ नहीं hoga.........balki मज़ा aayega........aur इसको लगाने के बाद तुम सिर्फ चुदाई के बारे में hi sochogi.......jissey तुम्हारे छूट से पानी तो बहेगा hi मगर तुम्हारी प्यास एक सेकंड के लिए भी ख़तम नहीं hogi......chahe तुम जितना इन सब से छुड़वा लो..........
तो मेरे ख्याल से ये इंजेक्शन तुम्हारे शरीर का सबसे बेस्ट हिस्सा ................तुम्हारी ये छूट hain............jahan पर मैं ये इंजेक्शन को अब तुम्हारे शरीर में इंजेक्ट करने जा रहा hoon........yaad हाँ तुम्हें वो पाउडर जो रघु ने तुम्हें पानी में घोलकर पिलाया tha..........wo तो बस 40% परसेंट hi काम करता tha...........magar इस इंजेक्शन में पूरे 100% परसेंट वो ताक़त हैं जो तुम्हें मज़े की बुलंदियों पर pahuchayega..........waise वो दवाई भी मेरी hi बनायीं हुई thi...........aur ये भी मेरी hi बनायीं हुई हैं............" और इस बार इरफ़ान अपना एक हाथ काव्य के जांघों के बीच रख देता हैं और उसकी स्कर्ट को ऊपर की तरफ करने लगता hain.......wahin काव्य की स्कर्ट ऊपर होते hi उसकी खुली हुई बुर फिर से सबके सामने be-parda हो जाती hain.........irfan बड़े गौर से काव्य के बुर को एक तुक देखता रहता हैं फिर वो उसकी बुर के लिप्स को धीरे से फ़ैलाने लगता हैं और काव्य के बुर के अंदर वो लाल हिस्सा अब साफ़ सबकी सामने चमकने लगता हैं........
वो उस इंजेक्शन को काव्य के बुर के पास ले जाता हैं और उसकी नीदडले को इस बार उसके छोटे से मूट के छेद के थोड़ा सा ऊपर उसके क्लिटस पर हौले से रखता हैं और फिर बहुत आहिस्ता आहिस्ता से उस इंजेक्शन को काव्य के जिस्म में इंजेक्ट करना शुरू करता hain.........jaise hi इंजेक्शन का नीदडले अंदर घुसता हैं काव्य इस बार पूरी ताक़त से चीख पड़ती hain.........magar उसके चीखने की बरी तो अब थी ...........जब उसमें रखा दवाई जब काव्य के बुर के रास्ते धीरे धीरे अब उसके जिस्म में घुलता जा रहा tha.........irfan धीरे धीरे उस इंजेक्शन को काव्य के शरीर में इंजेक्ट करता हैं वहीँ काव्य इस बार और भी ज़ोरों से चीखने चिल्लाने लगती hain.........usey ऐसा लग रहा था जैसे दर्द से उसका बुर अभी फुट jayega...........uski आँखों से आंसूं लगातार बह रहे थे........
मगर इरफ़ान कहाँ मानेवाला tha...........wo तो बस उस दवा को काव्य के बुर के रास्ते उसके शरीर के अंदर कैसे भी पहुँचाना चाहता tha............aur वो इसमें सफल भी हो रहा tha............injeection की आखिरी आते आते काव्य जैसे चीखती हुई बेहोश हो जाती hain..........kyon की अब दर्द बर्दास्त करना उसके बस का नहीं tha..........wahin जब इरफ़ान उस इंजेक्शन को पूरा लगा देता हैं अगले hi पल उसके चेहरे पर एक गन्दी हंसी तैर जाती हैं वहीँ वो काव्य के खूबसूरत से चेहरे की तरफ एक तुक देखने लगता hain...........aane वाला समय काव्य पर कितना भरी पड़ने वाला था और ये सब लोग उसके साथ और क्या करने वाले they............ye तो बस आने वाला वक़्त hi बता सकता था...............................
टिल कॉन्टिनोएड.................................................
सामने दो लोग आ रहे they...........ek तो वाइट ड्रेस पहना हुआ था और उसके चेहरे पर थोड़ी बड़ी बड़ी ढाढी thi...........shakal सूरत से वो कोई डॉक्टर लग रहा tha.............haath में उसके दो glubs...........aur गले पर आला लटका हुआ tha...........aur पीछे जो बाँदा था वो भी उसके कदम से कदम मिलता हुआ उसके साथ चल रहा tha..............jab काव्य उस साख की ओरे देखती हैं उसकी आँखें हैरत से थोड़ी फ़ैल जाती hain...................kyon की ये शकल उसे कुछ जाना पहचाना सा लग रहा tha...............ya शायद वो इस आदमी से कभी मिली thi.........ya कभी उसे कहीं पर देखा tha.................shayad कुछ धुंदली सी यादें............
" यू अरे मोस्ट welcome..............aapka यहाँ मेरे इस लैब में स्वागत hain.......................waise इस नाचीज़ को नरेश के नाम से लोग यहाँ जाना करते hain.............magar तुम चाहो तो मुझे मेरे वहीँ नाम से पुकार सकती ho............ya फिर डॉक्टर कह सकती ho..........waise मैं पेशे से डॉक्टर hi hoon........aur साथ hi साथ कुछ छोटी मोती चीज़ों का रीसर्च भी अक्सर किया करता hoon...........aur आपको ये जानकर हैरानी होगी की यहाँ मैं कभी किसी को नहीं bulata.............aur न hi मेरे इस राज़ के बारे में किसी को कानों कान कोई खबर hain.............tum मेरे दोस्त रघु की बहुत ख़ास हो इस लिए तुम यहाँ पर आ saki...........khair.............chalo अंदर मैं तुम्हें कुछ दिखता हूँ.........." और नरेश इतना कहकर पीछे की तरफ मुड़ता हैं और फिर धीरे धीरे चल पड़ता हैं वहीँ उसके पीछे पीछे राजन भी चल पड़ता hain............wahin काव्य राजन को बहुत गौर से देख रही thi..........shayad राजन का वो चेहरा उसे कुछ याद दिला रहा था..............
" वैसे ये लैब किस चीज़ की hain............aur यहाँ पर तुम किस तरह के रीसर्च करते हो............" और काव्य फ़ौरन सवाल करती हैं वहीँ इरफ़ान उसके सवालों को सुनकर धीरे से हंस पड़ता हैं.........
" ऐसी भी क्या जड़ली hain........ander तो चलो सब पता चल jayega............ki तुम यहीं रहकर hi सब कुछ जान जाना चाहती हो..........." और जैसे hi काव्य अंदर दूसरे कमरे में जब जाती हैं उसके होश मनो उड़द जाते hain............wo चरों तरफ अपने सामने उस लैब को बड़े गौर से देखने लगती hain..............lab काफी लुम्बा और बड़ा tha................samney एक बहुत बड़ा हाल जैसा tha...........uske चरों तरफ कई सरे टेस्टोबेस और चेमिकल्स रखे हुए they............aur सामने के दीवार पर दो बड़े बड़े करीब 7 फुट ऊँची गिलास की जार भी thi............jismein दो इंसान रखे हुए they........wo भी पूरे nangey...........aur ज़िंदा bhi.............jinke लुंड पर दो तीन तुबेस लगी हुई thi.........jo एक दूसरे से कनेक्टेड thi.............aur गले के नीचे का सारा हिस्सा एक अजीब सा पानी में डूबा हुआ tha.............kuch रंगीन और ग्रीन कलर के पानी jaisa.........us इंसान के चेहरे पर मास्क लगा था और पीछे एक बड़ा सा ऑक्सीजन सिलिंडर भी उसके सांस की नाली से कनेक्ट tha.................same वही सिचुएशन उसके बगल के जार का भी था................
वहीँ कुछ दूर पर तरह तरह के सीज़्ज़ेर्स और इंस्ट्रूमेंट्स रखे हुए they........shayad ओपेरटशन करने के ..........तो किसी टेस्टोबे में आदमी का लुंड काटकर एक जार में रखा हुआ tha........uspar कई तरह के चेमिकल्स भी लगे they..........aur सामने एक बड़ा सा नीले रंग का प्लास्टिक उस फर्श पर बिछा हुआ था जिसपर तेल जैसा कुछ चिपचिपा सा चेमिकल्स साफ़ नज़र आ रहा tha.........jo तेल की वजह से काफी चमक रहा tha...........ye सब नज़ारा देखकर काव्य के तो जैसे होश उड़द गए थे..........................
" yeeeeeeeeeeeeeeee साअबब kyyaaaaaaaaaa hhhaaaiinnnnnnnnnnnnnnn......." और काव्य जैसे तैसे धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ इरफ़ान उसकी बाटिओं को सुनकर धीरे से हंस पड़ता हैं...........
" जब तुमने पूछ hi लिया तो मैं तुम्हें सब कुछ बता hi देता hoon............maine बताया न की मैं एक पेशे से डॉक्टर hoon.....aur साथ hi साथ यहाँ रीसर्च भी करता रहता hoon..........ye तो मेरी बस एक छोटी सी लैब hain.............jo तुम्हारी आँखों के सामने हैं............" और इस बार इरफ़ान हँसता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य के तो जैसे होश उदय हुए they.............aab उसे ऐसा लगने लगा था की आज उसने रघु की बात मानकर अपनी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी भूल की हैं..........
" magar............ye लैब आखिर हैं किस चीज़ ki............aur यहाँ पर तुम किस तरह के रीसर्च करते हो............." और काव्य अजीब सी नज़रियों से इरफ़ान की तरफ देखती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ इरफ़ान उसकी बाटिओं को सुनकर फिर से हंस पड़ता हैं...........
" transgender........................samjhti ho...........kisey कहते hain..............ladke को अगर लड़की बनाना ho...............ya लड़की को लड़का तो ............मैं ये काम यहाँ पर करता hoon...............sabki नज़रियों से chipkar.............main उनके लिंग चेंज करके मेल से female........aur फीमेल से फिर मेल बनता hoon..........aur वैसे मुझे इस काम के काफी ज़्यादा पैसे मिलते hain......aur मज़े bhi......aur मैं ये काम अब तक कीटों पर कर चूका हूँ................" और इरफ़ान फिर से काव्य की तरफ देखता हुआ हंस पड़ता हैं वहीँ काव्य दुर्र से मनो सेहम जाती hain..........uski तो जैसे अब बोली नहीं निकल रही थी............
" तो क्या tum...................mere saath..........bhi............."aur काव्य की जुबान जैसे लड़खड़ा सी जाती हैं वहीँ इरफ़ान उसकी बाटिओं को सुनकर फिर से हंस पड़ता हैं........
" अरे nahin.........nahin...........tum ऐसा क्यों सोच रही ho...........tum डरो nahin...............hum तुम्हारे साथ ऐसा वैसा कुछ नहीं karengey............bus तुम पर एक दो छोटे मोठे प्रयोग करने हैं और फिर तुम्हारी यहाँ पर ाचे से चुदाई होनी hain.........jo मेरे यहाँ सभी दोस्त मिलकर तुम्हारे साथ karengey..........aur kya.......iske बाद तुम पूरी तरह से आज़ाद हो......................." और इरफ़ान इस बार थोड़ा सा सीरियस होता हुआ फिर से बोल पड़ता hain........wahin काव्य के चेहरे का रंग फीका पड़ता जा रहा tha..........usey कुछ समझ में नहीं आ रहा था की आखिर ये सब लोग उसके साथ करना क्या चाहते हैं.......
"मुझे नहीं करना यहाँ तुमसब से कोई prayog...........tum सब सरे के सरे पीछे ho...........aadhe पागल हो.........." और काव्य जैसे तड़प उठती हैं वहीँ इस बार इरफ़ान उसकी तरफ देखता हुआ फिर से मुस्कुरा पड़ता हैं..............
" तुमने सही पहचाना humein...........khair..........raghu बता रहा था की तुम अक्सर कपड़े में hi मूट दिया करती ho..........aur वैसे भी तुम आजकल मूट ज़्यादा रही हो तो ये तुम्हारे सेहत के लिए ज़्यादा ाची बात नहीं hain..........to मैं चाहता हूँ की मैं तुम्हारे इस बीमारी का इलाज़ karun.........to तुम्हारे लिए ये इंजेक्शन ठीक rahega.............jo मैंने तुम्हारे लिए ख़ास तौर पर तैयार किया hain.............isko लगाने के बाद तो तुमपर जैसे एक नशा सा च jayega............aur तुम पूरी तरह मस्त होकर हम सब से छुड़ा करोगी........................" और इस बार इरफ़ान सामने रखा एक इंजेक्शन अपने हाथों में उठता हैं और सामने रखे कई सरे टेस्टोबेस में से थोड़ी थोड़ी सब में से उस इंजेक्शन को फइलल करता हैं और जब 5मल इंजेक्शन जब पूरी तरह जब भर जाता हैं उस इंजेक्शन का रंग जैसे ग्रीन हो जाता hain.........jisey देखकर इस बार काव्य ज़ोरों से चीख पड़ती हैं..........
" नहीं nahin..........mujhe यहाँ से जाना हैं bus....................mujhe जाने do.......please.........." और काव्य लगभग चीखती हुई बोल पड़ती हैं वहीँ इरफ़ान उसकी बाटिओं को सुनकर फिर से मुस्कुराने लगता हैं....
" अरे ये क्या!!!!!!!!!!! हम तो तुम्हारे साथ प्यार का खेल खेलना चाहते हैं और तुम हमारे साथ co-orporate नहीं कर rahi........ye गलत बात hain..............raghu ........jeetu........pakdo इसके दोनों हाथ और इसे ले चलो उस कमरे में........." और रघु और जीतू इस बार काव्य को कसकर जकड लेते हैं और उसे उठकर अपनी गॉड में सामने के कमरे में ले जाते हैं और उसी जगह बैठा देते हैं जहाँ पर वो जिम वाला सेट tha..............jeetu पीछे जाकर काव्य के दोनों हाथ पीछे की तरफ जकड़कर पूरी तरह से फोल्ड कर देता hain.......aur रघु काव्य के दोनों पवन फैलता हुआ हवा में 6 फुट ऊँचा उस रोड के दोनों बगल लटका देता हैं और राजन और जावेद उसके दोनों पवन को तेज़ी से जकड लेते हैं...........
काव्य का अब पूरा जिस्म हवा में झूल रहा tha..........uske पूरे जिस्म का वजन अब उसकी थाई पर tha........wahin इरफ़ान उस इंजेक्शन को काव्य के पास ले आता हैं और बड़े गौर से उसके तरफ एक तुक देखने लगता hain..........wahin काव्य दुर्र से रू पड़ती hain.............usey तो ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था की ये लोग न जाने आगे उसके साथ क्या करने वाले hain...........wo अब पूरी तरह से बेबस नज़र आ रही thi.........wo चाह कर भी अपने आपको इन दरिंदों से नहीं छुड़ा पा रही थी...........
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" तुम्हें हम छोड़ dengey...........daro मुट्ठ baby.............tumhein कुछ नहीं hoga............is इंजेक्शन में वो साडी खूबियां हैं जो तुम्हें चुदाई के वक़्त chahiye...........aur सबसे बड़ी बात इसमें जितने भी दवाइयां हैं साडी की साडी मेरी बनायीं हुई hain..........aur इस दवाई का असर 7 से 8 घंटे तक रहता hain..........aur जहाँ पर भी ये इंजेक्शन लगेगा ये उस हिस्से को पूरी तरह से ढीला और फ्लेक्सिबल बना dega........fir चाहे ये लोग उस हिस्से को फाड़े या कुछ भी करे तुम्हें ज़रा भी तकलीफ नहीं hoga.........balki मज़ा aayega........aur इसको लगाने के बाद तुम सिर्फ चुदाई के बारे में hi sochogi.......jissey तुम्हारे छूट से पानी तो बहेगा hi मगर तुम्हारी प्यास एक सेकंड के लिए भी ख़तम नहीं hogi......chahe तुम जितना इन सब से छुड़वा लो..........
तो मेरे ख्याल से ये इंजेक्शन तुम्हारे शरीर का सबसे बेस्ट हिस्सा ................तुम्हारी ये छूट hain............jahan पर मैं ये इंजेक्शन को अब तुम्हारे शरीर में इंजेक्ट करने जा रहा hoon........yaad हाँ तुम्हें वो पाउडर जो रघु ने तुम्हें पानी में घोलकर पिलाया tha..........wo तो बस 40% परसेंट hi काम करता tha...........magar इस इंजेक्शन में पूरे 100% परसेंट वो ताक़त हैं जो तुम्हें मज़े की बुलंदियों पर pahuchayega..........waise वो दवाई भी मेरी hi बनायीं हुई thi...........aur ये भी मेरी hi बनायीं हुई हैं............" और इस बार इरफ़ान अपना एक हाथ काव्य के जांघों के बीच रख देता हैं और उसकी स्कर्ट को ऊपर की तरफ करने लगता hain.......wahin काव्य की स्कर्ट ऊपर होते hi उसकी खुली हुई बुर फिर से सबके सामने be-parda हो जाती hain.........irfan बड़े गौर से काव्य के बुर को एक तुक देखता रहता हैं फिर वो उसकी बुर के लिप्स को धीरे से फ़ैलाने लगता हैं और काव्य के बुर के अंदर वो लाल हिस्सा अब साफ़ सबकी सामने चमकने लगता हैं........
वो उस इंजेक्शन को काव्य के बुर के पास ले जाता हैं और उसकी नीदडले को इस बार उसके छोटे से मूट के छेद के थोड़ा सा ऊपर उसके क्लिटस पर हौले से रखता हैं और फिर बहुत आहिस्ता आहिस्ता से उस इंजेक्शन को काव्य के जिस्म में इंजेक्ट करना शुरू करता hain.........jaise hi इंजेक्शन का नीदडले अंदर घुसता हैं काव्य इस बार पूरी ताक़त से चीख पड़ती hain.........magar उसके चीखने की बरी तो अब थी ...........जब उसमें रखा दवाई जब काव्य के बुर के रास्ते धीरे धीरे अब उसके जिस्म में घुलता जा रहा tha.........irfan धीरे धीरे उस इंजेक्शन को काव्य के शरीर में इंजेक्ट करता हैं वहीँ काव्य इस बार और भी ज़ोरों से चीखने चिल्लाने लगती hain.........usey ऐसा लग रहा था जैसे दर्द से उसका बुर अभी फुट jayega...........uski आँखों से आंसूं लगातार बह रहे थे........
मगर इरफ़ान कहाँ मानेवाला tha...........wo तो बस उस दवा को काव्य के बुर के रास्ते उसके शरीर के अंदर कैसे भी पहुँचाना चाहता tha............aur वो इसमें सफल भी हो रहा tha............injeection की आखिरी आते आते काव्य जैसे चीखती हुई बेहोश हो जाती hain..........kyon की अब दर्द बर्दास्त करना उसके बस का नहीं tha..........wahin जब इरफ़ान उस इंजेक्शन को पूरा लगा देता हैं अगले hi पल उसके चेहरे पर एक गन्दी हंसी तैर जाती हैं वहीँ वो काव्य के खूबसूरत से चेहरे की तरफ एक तुक देखने लगता hain...........aane वाला समय काव्य पर कितना भरी पड़ने वाला था और ये सब लोग उसके साथ और क्या करने वाले they............ye तो बस आने वाला वक़्त hi बता सकता था...............................
टिल कॉन्टिनोएड.................................................