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अपडेट _ 62
कारन कुछ वकत बहार रहा फिर घर के अंदर चला गया अंदर रूपा एक टेबल पर चढ़े कर एक डंडे को लेकर दीवार पर से मकरी के झोल साफ कर रही थी जो रूपा दर भी रही थी के टेबल से गिर न जॉन क्यू के साफ करते हुवे रूपा टेबल पर डगमगा रही थी फिर रूपा की नज़र बहार गयी तो देखा कारन बहार खड़ा था सर निचे किया हुवा
रूपा : कारन बीटा कहा चला गया था चल आ ये टेबल पकड़ वरना मैं गिर जाउंगी आवर रूपा ने ने अपनी पल्लू को खोल कर अपने नाभि को धक् लिया क्यू के रूपा की नाभि अभी भी दिख रही थी तो रूपा ने पल्लू खोल कर धक् लिया क्यू के नाभि देख कारन फिर से उसे पकड़ न ले इस लिए रूपा ने आएसा किया
कारन : ममी सॉरी वह गलती से हो गया मुझे कुछ समझे मैं नहीं आया मैंने आएसा क्यू किया मुझे मांफ कर दीजिये कारन को आवर भी सर्मिन्दा हुवा के रूपा कारन को देख अपने पल्लू से नाभि को धक् लिया है
रूपा : कोई बात नहीं बीटा गलती मेरी भी थी मुझे वैसे तेरे सामने नहीं करना चाहिए था चल छोड़े आ टेबल को पकड़ जल्दी से हमेह घर भी जाना है सफाई कर के रूपा को भी अब थोड़ी सरम आ रही थी जो रूपा यह से सफाई कर के जल्दी जाना चाहती थी
कारन जाकर रूपा के पीछे खड़ा हो गया रूपा सफाई करने लगी जब रूपा ऊपर झोल साफ करने लगी तभी डगमगा गयी मगर रूपा संभल भी गयी आवर पलट कर कारन को देखने लगी जो कारन अभी भी निचे hi देख रहा था
रूपा : कारन बीटा अब क्या हुवा चल मेरी कमर पकड़ ले निचे क्या देख रहा है अभी मैं गिर जाती तो
कारन : ममी मैं कैसे ये पकड़ कारन बोलना तो छह रहा था के ममी मैं कैसे आप की कमर पकड़ सकता हुईं मगर कह न सका जो रूपा समझ गयी कोई नहीं बीटा तू मेरा बेटे की तरह है आवर बीटा अपनी माँ को पकड़ सकता है चल पकड़ ले आवर रूपा फिर ऊपर देखते हुवे साफ करने लगी कारन कुछ देर तक निचे देखता रहा फिर अपना सर ऊपर किया तो कारन का मुंह रूपा के गांड से लग गयी जो रूपा की एक आआह्ह्ह्हह्ह निकल गयी कारन को भी झटका लगा क्यू के रूपा की गांड कारन को गद्दे की तरह लगा कारन जल्दी hi अपना मुंह रूपा के गांड से हटा लिया आवर रूपा के कमर पकड़ लिया दोनों हांथो से आवर कारन का मुंह रूपा के ठीक गांड के ऊपर लग रहा था रूपा के हिलने से जो अब हर बार रूपा को अजीब अहसास हो रहा था जो रूपा को अब कुछ जयादा hi पसीने निकल रहा था कारन के पकड़ने से रूपा के जिसम सनसना जा रहा था
ये आज मुझे क्या हो रहा है कारन के पकड़ने से मुझे ैजब क्यू लग रहा है आवर मेरी वह भी गुदगुदी हो रही है रूपा रुक कर सोचने लगी आवर फिर पीछे पलट कर कारन को देखने के लिए पलटी आवर रूपा की एक सिसकियाँ निकल गयी आवर रूपा के हाँथ से डंडा निचे गिर गया आवर रूपा ने कारन का सर पाकर कर अपने पेट पर दबा दिया आवर कारन का मुंह सीधे रूपा के गहरी नाभि पे टाच होते hi कारन ने उसे चुम लाया आआह्ह्ह्हह्ह कारन बीटा रूपा के मुंह से एक माधोसी मैं ाःह निकल गयी आवर रूपा सीधे कारन पर अपनी गदराया हुवा जिसम लेकर गिर गयी ये तो अच्छा हुवा के पीछे बीएड था जो कारन बीएड पर रूपा को लेकर गिर गया आवर कारन ने रूपा को भर अकसर मैं पकड़ लिया आवर कारन का एक हाँथ से रूपा की चुकी डाब गयी अब कारन का मुंह ठीक रूपा के चुकी के निचे था कारन ने अपना मुंह उठा कर रूपा के चुकी के निप्पल को बलाउज के ऊपर से hi उसे मुंह मैं लेकर जइब से उसे चुने लगा जो रूपा की एक सिसकियाँ के साथ मदहोशी मैं आअह्ह्ह निकल गयी आउट रूपा का पूरा सरीर hi हिल गया आवर रूपा कारन का सर पर हाँथ फिरने लगी अभी रूपा पूरी hi मदहोस हो गयी थी रूपा की छूट से बून्द बून्द पानी निकल रहा है ऐसा रूपा को अहसास हो रहा था आवर ऊपर से कारन रूपा की निप्पल को बलाउज के ऊपर से hi चूसे जा रहा था आवर कारन एक हाँथ से रूपा की पेट पर चला रहा था आवर दूसरा हाँथ रूपा के पेअर को छूटे हुवे रूपा के छूट की तरफ ला रहा था कारन का हाँथ अभी रूपा के छूट पर जाने hi वाला था के रूपा ने कारन का हाँथ पकड़ लिया आवर रूपा कारन से अलग हो गयी रूपा की सांसे बहुत ज़ोर ज़ोर से चल रहा था फिर रूपा की नज़र कारन पर पड़ी जो कारन रूपा को hi एक आस से देख आवर पूछ रहा हो के ममी आप मुझसे दूर क्यू गयी
फिर रूपा की नज़र निचे कारन के पेंट पर पड़ी जहा कारन का लैंड पेंट मैं hi फुफकार मार रहा था रूपा की नज़र कारन के पेंट पर hi टिक गयी कारन की लैंड की बेताबी देख रूपा की छूट भी अब गरम होने लगी थी क्या कारन मेरे साथ सेक्स करना चाहता है जो कारन का लैंड ऐसा हो रहा है मगर कारन कैसे गलत सोच सकता है आवर कारन का लैंड कितना बड़ा है जो पेंट मैं है फिर भी इतना उठा हुवा है रूपा के कारन के लैंड को देख कर सोच रही थी रूपा के होंठ भी बिलकुल सुख गया था मगर रूपा के चहरे पर पसीना अभी भी बाह रहा था रूपा फिर पयासी नज़र से कारन को देखने लगी कारन उठ काट फिर रूपा के पास चला गया आवर रूपा के होंठ पर अपना होंठ रख दिया आवर रूपा के नरम मोलायम रास से भरी होंठ को चूसने लगा इस बार रूपा ने कारन को दूर नहीं किया बल्कि रूपा भी कारन के सर को पकड़ कर उसपे हाँथ फेरने लगी कारन एक हाँथ रूपा के पेटीकोट के ऊपर से hi रूपा के छूट को पकड़ लिया जो कारन को रूपा की छूट किसी भट्टी की तरह गरम लगा कारन का हाँथ अपने छूट पर पते hi रूपा की एक सिसकियाँ निकल गयी आवर रूपा ने अपना मुंह कारन के मुंह से निकल लिया आवर रूपा फिर से कारन को पयासी नज़र से देखने लगी मगर कारन का हाँथ अभी भी रूपा के छूट के ऊपर hi था क्यू के रूपा ने कारन का हाँथ हटाने के बगैर खुद अपना हाँथ कारन के हाँथ पर रख कर दबा दिया आवर अपना चेहरा ऊपर कर के झड़ने लगी रूपा 30 सेक् तक झड़ी रही झड़ने के बाद रूपा अपने हाँथ से कारन के हाँथ को झटका से हटा कर बाथरूम मैं जाने लगी तब कारन को अहसास हुवा आवर कारन रूपा का हाँथ पकड़ लिया
कारन : ममी मुझे मनाफ़ कर दीजिये मैं आप के साथ ऐसा नहीं करना चाहता था मुझसे गलती हो गयी मगर कारन सच मैं रो रहा था मगर रूपा ने कारन के तरफ देखा भी नहीं आवर चली गयी कारन बस रूपा को जाते हुवे देखता रहा
रूपा बाथरूम मैं जाने के बाद अपना पेटीकोट को निकल कर पेंटी को देखा तो रूपा की पेंटी आगे से पूरी भींग गयी थी ये मुझे क्या हो गया था जो मैं कारन को रोकने के बगैर मैं उसके साथ दे रही थी मैं ऐसा कैसे कर सकती हुईं मैं एक लड़के के आगे कैसे इस तरह कमज़ोर पद सकती हुईं आवर कारन का लैंड कैसे उसके पेंट मैं मचल रहा था जैसे वह मेरी छूट मैं जाना चाहता हो आअह्ह्ह कितना बड़ा लग रहा था कारन का लैंड मेरी छोटी सी छेद मैं वह कैसे जायेगा हे भगवन मैं ये कैसे सोच सकती हुईं मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हुईं आवर मैं आज उन्ही को ढोकला देने वाली थी रूपा बाथरूम में अपने आप से hi बात कर रही थी फिर रूपा अपनी पेंटी को देख कर उसकी आँखे लाल हो गयी कारन के साथ आज पहली बार मेरी छूट से इतना पानी कैसे निकल रहा है जैसे मुझे लग रहा है मेरी छूट से अभी भी पानी निकल रहा है ये सब उनके वजह से हुवा है अगर वह मुझे जवानी मैं इतना नहीं चौड़ाई की होती तो मैं इतनी पयासी नहीं रहती जवानी मैं तो मुझे जी भर के छोड़ा आवर कितने सल्ल से मुझे छोड़ भी नहीं रहे है आज भी मुझे छोड़ते तो मैं आज एक लड़के के साथ इतनी कमज़ोर नहीं पड़ती रूपा के आँख नम हो गयी थी आवर रूपा खुद से hi बोले जा रही थी
अभी रूपा बाथरूम में पेंटी आवर बलाउज मैं थी जो बहुत कामुक ोुरत आवर कामदेवी लग रही थी कुछ देर रोने के बाद रूपा अपना मुंह धोकर अपनी साड़ी को ठीक कर के आई तो कारन रूम मैं नहीं था कारन कहा चला गया अभी तो एहि था कही कारन को भी मेरी तरह दुःख तो नहीं हुवा होगा वह अभी बच्चा है अगर कारन मायुश होगा तो कही अपने आप को कुछ कर न ले मैं कारन से इस बारे मैं बात करुँगी आवर उससे मैं समझाउंगी रूपा कारन को रूम मैं नहीं देखा तो रूपा को कारन की चिंता होने लगी रूपा फिर अकेले hi जल्दी जल्दी रूम साफ की आवर घर के लिए निकल गयी मगर हर बार रूपा कारन के बारे मैं hi सोच रही थी के कारन अभी कहा होगा वह अपने आप को कुछ कर न ले रूपा का मन बेचैन था
*******************************************गीता कब तक बेहोश रही गीता को पता नहीं था जब गीता को होश आया तो देखा गीता के एक तरफ पायल तो एक तरफ शांति थी शांति गीता के सर पर हाँथ फेरते हुवे रो रही थी आवर डॉ गीता को चेक कर रहा था
शांति : क्या हुवा है मेरी बेटी को डॉ साहब जो गीता बेटी बेहोश थी कब से
डॉ : आप को घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है ये बिलकुल ठीक है ये बस किसी चीज को कुछ जयादा hi सोचने के लिए अपने दिमाग पर ज़ोर दिया होगा जो बेहोश हो गयी बाकि सब ठीक है बस इन्हे आओ लोग जयादा मत सोचने दे ये ठीक है आवर प्लीज इनके सामने रूट मत इनके लिए अच्छा रहेगा डॉ के कहने पर शांति आवर पायल चुप हो गयी डॉ गीता को फिर से नींद का इंजेक्शन दे कर चला गया
रात के 11पं को गीता के घर का बेल बजा तो पायल ने गेट खोला जो एक लड़की थी
पायल : कौन हो आप किस्से मिलना है
लड़की : मैं तुम्हारी गीता दीदी की दोस्त हुईं मेरा नाम शीतल है मुझे गीता से मिलना है मैं कब से गीता को फ़ोन लगा रही थी मगर गीता का फ़ोन लगा नहीं तो मुझे आना पड़ा
पायल : ठीक है आप आ जाइये दीदी का फ़ोन ख़राब हो गया है वह मेरे से hi गिर गया था पायल शीतल को अंदर लेकर गेट बंद कर दिया आवर पायल गेट के बगल से एक चीज उठा कर शीतल के पीछे चलने लगी
शीतल : कही तुम पायल तो नहीं हो न शीतल बोल पड़ी जो पायल थोड़ी हैरानी से शीतल को देखने लगी आवर शीतल को पकड़ के उसके गले पर चाकू रख दिया
पायल : कौन हो आप आवर आप को मेरा नाम कैसे पता आवर मुझे अच्छे से पता है गीता दीदी की कोई भी यहाँ दोस्त नहीं है तो आप मुझे बताइये कौन हो आप आवर यह क्यू आई हो वरना मैं आप की गाला काट दूंगी
मगर शीतल झटके मैं सरीर से पायल को झटका दिया आवर पायल के हाँथ से चाकू चीन कर अपने हाँथ मैं ले लिया
शीतल : तुम भी अपनी गीता दीदी की तरह चालक आवर बहादुर हो मगर मैं सच कह रही हुईं मैं तुम्हारी गीता दीदी की दोस्त hi हुईं अगर तुमेह बिस्वास नहीं तो ये लो चाकू आवर मुझे मर दो आउट शीतल ने चाकू पायल की तरफ भाषा दी जो पायल ने चाकू लेकर फिर से शीतल के ऊपर रख दिया मगर इस बात पायल ने शीतल को मज़बूती से पकड़ लिया था आवर उसी तरह पायल गीता के रूम के पास गयी आवर गेट के पास hi रुक गयी
पायल : दीदी क्या आप जाग रही हो
गीता : है पायल क्या हुवा पहले अंदर तो आजा तुझे पता है गेट खुला है
पायल : दीदी क्या आप की कोई शीतल नाम की दोस्त है
गीता : पायल क्या हुवा तू ये क्यू पूछ रही है आवर तू अंदर क्यू नहीं आ रही है गीता को थोड़ी हैरानी हुयी के शीतल के बारे मैं पायल क्यू पूछ रही है
पायल : दीदी पहले बोलिये आप की कोई शीतल नाम की दोस्त है की नहीं प्लीज बताइये गीता बोल दे यार नहीं तो तेरी बहन मेरी गाला काट देगी गीता के बोलने से पहले hi शीतल बोल पड़ी
गीता : शीतल तू अभी इतनी रात को यह क्या कर रही है है पायल ये मेरी दोस्त है इसे अंदर आने दे
गीता के कहने पर पायल शीतल को अंदर लेकर गयी मगर अभी भी पायल ने शीतल के गले से चाकू नहीं हटाया था दीदी एहि है शीतल आप क दोस्त पायल शीतल की चेहरा गीता को देखते हुवे पूछा
गीता : है पायल एहि है मेरी दोस्त शीतल अब चाकू हटा भी ले तब जाकर पायल ने शीतल के गले से चाकू हटाया चाकू हट्टे hi शीतल खाने लगी क्यू के पायल ने अंदर आते हुवे आवर ज़ोर से शीतल की गाला पाकर लिया था कुछ देर तक पायल खासते रही तब तक पायल जाकर गीता के पास बैठ गयी
शीतल : सुक्रिया महा रानी मेरी जान बचाने के लिए वर्ण आप की ये बहन मेरी गाला काट देती वैसे सच कह रही हुईं गीता अगर ये मेरी टीम मैं रही तो ये तुझसे भी आगे निकल सकती है
गीता : शीतल क्या बकवास कर रही है किस लिए यह आई है ये बता पहले गीता ने चिल्ला कर गुस्से मैं कहा जो शीतल के साथ पायल भी दर गयी गीता के गुस्से को देख कर तब शीतल को अहसास हुवा के शीतल ने अभी क्या बोल गयी
पायल : ये क्या कह रही है के आप से भी आगे मैं निकल जाती ये किस बारे मैं बात कर रही है पायल आज पहली बार गीता को चीला कर गुस्से मैं बोलते सुना था इस लिए पूछा भी तो निचे देखते हुवे जो गीता को भी अपनी बहन को निचे देखते हुवे पूछना अच्छा नहीं लगा तो गीता पायल के सर पर हाँथ रख दिया
गीता : छोटी अभी तू रूम मैं जाकर सो जा मैं तुझे कल बताउंगी अभी बहुत रात हो गयी है मुझे शीतल से कुछ बात करनी है " पायल भी कुछ नहीं बोली आवर अच्छे लड़की की तरह उठा कर चली गयी मगर उसके दिमाग मैं शीतल की बात ज़रूर चल रही थी आवर पायल अभी पूछ भी नहीं सकती थी क्यू के गीता ने कल बताने को कहा था तो पायल सीधे अपने कमरे मैं चली गयी
गीता : सॉरी यार के मैं तुझपे चिलाती मैं नहीं छाती के कोई जाने के मैं क्या हुईं मगर अब पायल जब तक जाएगी नहीं मुझे नहीं छोड़ने वाली खैर शीतल इतनी रात को यह आई कोई बात है क्या
शीतल : मुझे भी मनाफ़ करदे यार मैं बस पायल की बहादुरी देख कर मेरी मुनाह से निकल गयी कितनी आसानी से उसने मुझे अंदर लिया आवर मेरी गले पर चाकू रख दिया एक वकत के लिए तो मैं खुद दर गयी थी सच मैं तेरी बहन बहादुर आवर चालक है शीतल की बात सुन गीता के चहरे पर मुस्कान आ गयी
गीता : है आखिर बहन भी तो मेरी hi है मगर अभी तक शीतल तुमने बताई नहीं तू अचानक इतनी रात को मेरे घर क्यू आई है
शीतल : गीता यार एक बुरी खबर है तुझे तो पता है मैं अपने बन्दे को धरमपुर भेजा था जो 4 आदमी थे मगर मेरे 3 बंदी मरे गए आवर एक धरमपुर मैं hi छिपा है आवर उसी ने कुछ तस्वीरें भेजी है जिसे देख मुझे रहा नहीं गया मैं कब से तुझे फ़ोन कर रही थी मगर तेरा फ़ोन ऑफ आ रहा था तो मुझे आना पड़ा इतनी रात को क्यू के ये तस्वीर तुझे देखना ज़रूरी था
गीता : क्या ज़रूरी था ऐसा क्या है उस तस्वीर मैं जो मुझे देखना ज़रूरी था
शीतल : ले तू खुद देख ले आवर 10 से 12 तस्वीर शीतल ने बीएड पर रख दिया जो गीता उसे हैरानी से देखने लगी ये कैसे hi सकता है शीतल मेरी फॅमिली तो कभी उस आंटी से मिली भी नहीं है आवर कारन तो यह भी नहीं था फिर ये तस्वीर आंटी के पास कैसे है आवर ये तस्वीर हाँथ से बनाया हुवा है आखिर ये आंटी है कौन आवर मेरा रिस्ता है आंटी से गीता को दिमाग फिर से चकराने लगा आवर गीता ने अपना सर पकड़ लिया
कारन कुछ वकत बहार रहा फिर घर के अंदर चला गया अंदर रूपा एक टेबल पर चढ़े कर एक डंडे को लेकर दीवार पर से मकरी के झोल साफ कर रही थी जो रूपा दर भी रही थी के टेबल से गिर न जॉन क्यू के साफ करते हुवे रूपा टेबल पर डगमगा रही थी फिर रूपा की नज़र बहार गयी तो देखा कारन बहार खड़ा था सर निचे किया हुवा
रूपा : कारन बीटा कहा चला गया था चल आ ये टेबल पकड़ वरना मैं गिर जाउंगी आवर रूपा ने ने अपनी पल्लू को खोल कर अपने नाभि को धक् लिया क्यू के रूपा की नाभि अभी भी दिख रही थी तो रूपा ने पल्लू खोल कर धक् लिया क्यू के नाभि देख कारन फिर से उसे पकड़ न ले इस लिए रूपा ने आएसा किया
कारन : ममी सॉरी वह गलती से हो गया मुझे कुछ समझे मैं नहीं आया मैंने आएसा क्यू किया मुझे मांफ कर दीजिये कारन को आवर भी सर्मिन्दा हुवा के रूपा कारन को देख अपने पल्लू से नाभि को धक् लिया है
रूपा : कोई बात नहीं बीटा गलती मेरी भी थी मुझे वैसे तेरे सामने नहीं करना चाहिए था चल छोड़े आ टेबल को पकड़ जल्दी से हमेह घर भी जाना है सफाई कर के रूपा को भी अब थोड़ी सरम आ रही थी जो रूपा यह से सफाई कर के जल्दी जाना चाहती थी
कारन जाकर रूपा के पीछे खड़ा हो गया रूपा सफाई करने लगी जब रूपा ऊपर झोल साफ करने लगी तभी डगमगा गयी मगर रूपा संभल भी गयी आवर पलट कर कारन को देखने लगी जो कारन अभी भी निचे hi देख रहा था
रूपा : कारन बीटा अब क्या हुवा चल मेरी कमर पकड़ ले निचे क्या देख रहा है अभी मैं गिर जाती तो
कारन : ममी मैं कैसे ये पकड़ कारन बोलना तो छह रहा था के ममी मैं कैसे आप की कमर पकड़ सकता हुईं मगर कह न सका जो रूपा समझ गयी कोई नहीं बीटा तू मेरा बेटे की तरह है आवर बीटा अपनी माँ को पकड़ सकता है चल पकड़ ले आवर रूपा फिर ऊपर देखते हुवे साफ करने लगी कारन कुछ देर तक निचे देखता रहा फिर अपना सर ऊपर किया तो कारन का मुंह रूपा के गांड से लग गयी जो रूपा की एक आआह्ह्ह्हह्ह निकल गयी कारन को भी झटका लगा क्यू के रूपा की गांड कारन को गद्दे की तरह लगा कारन जल्दी hi अपना मुंह रूपा के गांड से हटा लिया आवर रूपा के कमर पकड़ लिया दोनों हांथो से आवर कारन का मुंह रूपा के ठीक गांड के ऊपर लग रहा था रूपा के हिलने से जो अब हर बार रूपा को अजीब अहसास हो रहा था जो रूपा को अब कुछ जयादा hi पसीने निकल रहा था कारन के पकड़ने से रूपा के जिसम सनसना जा रहा था
ये आज मुझे क्या हो रहा है कारन के पकड़ने से मुझे ैजब क्यू लग रहा है आवर मेरी वह भी गुदगुदी हो रही है रूपा रुक कर सोचने लगी आवर फिर पीछे पलट कर कारन को देखने के लिए पलटी आवर रूपा की एक सिसकियाँ निकल गयी आवर रूपा के हाँथ से डंडा निचे गिर गया आवर रूपा ने कारन का सर पाकर कर अपने पेट पर दबा दिया आवर कारन का मुंह सीधे रूपा के गहरी नाभि पे टाच होते hi कारन ने उसे चुम लाया आआह्ह्ह्हह्ह कारन बीटा रूपा के मुंह से एक माधोसी मैं ाःह निकल गयी आवर रूपा सीधे कारन पर अपनी गदराया हुवा जिसम लेकर गिर गयी ये तो अच्छा हुवा के पीछे बीएड था जो कारन बीएड पर रूपा को लेकर गिर गया आवर कारन ने रूपा को भर अकसर मैं पकड़ लिया आवर कारन का एक हाँथ से रूपा की चुकी डाब गयी अब कारन का मुंह ठीक रूपा के चुकी के निचे था कारन ने अपना मुंह उठा कर रूपा के चुकी के निप्पल को बलाउज के ऊपर से hi उसे मुंह मैं लेकर जइब से उसे चुने लगा जो रूपा की एक सिसकियाँ के साथ मदहोशी मैं आअह्ह्ह निकल गयी आउट रूपा का पूरा सरीर hi हिल गया आवर रूपा कारन का सर पर हाँथ फिरने लगी अभी रूपा पूरी hi मदहोस हो गयी थी रूपा की छूट से बून्द बून्द पानी निकल रहा है ऐसा रूपा को अहसास हो रहा था आवर ऊपर से कारन रूपा की निप्पल को बलाउज के ऊपर से hi चूसे जा रहा था आवर कारन एक हाँथ से रूपा की पेट पर चला रहा था आवर दूसरा हाँथ रूपा के पेअर को छूटे हुवे रूपा के छूट की तरफ ला रहा था कारन का हाँथ अभी रूपा के छूट पर जाने hi वाला था के रूपा ने कारन का हाँथ पकड़ लिया आवर रूपा कारन से अलग हो गयी रूपा की सांसे बहुत ज़ोर ज़ोर से चल रहा था फिर रूपा की नज़र कारन पर पड़ी जो कारन रूपा को hi एक आस से देख आवर पूछ रहा हो के ममी आप मुझसे दूर क्यू गयी
फिर रूपा की नज़र निचे कारन के पेंट पर पड़ी जहा कारन का लैंड पेंट मैं hi फुफकार मार रहा था रूपा की नज़र कारन के पेंट पर hi टिक गयी कारन की लैंड की बेताबी देख रूपा की छूट भी अब गरम होने लगी थी क्या कारन मेरे साथ सेक्स करना चाहता है जो कारन का लैंड ऐसा हो रहा है मगर कारन कैसे गलत सोच सकता है आवर कारन का लैंड कितना बड़ा है जो पेंट मैं है फिर भी इतना उठा हुवा है रूपा के कारन के लैंड को देख कर सोच रही थी रूपा के होंठ भी बिलकुल सुख गया था मगर रूपा के चहरे पर पसीना अभी भी बाह रहा था रूपा फिर पयासी नज़र से कारन को देखने लगी कारन उठ काट फिर रूपा के पास चला गया आवर रूपा के होंठ पर अपना होंठ रख दिया आवर रूपा के नरम मोलायम रास से भरी होंठ को चूसने लगा इस बार रूपा ने कारन को दूर नहीं किया बल्कि रूपा भी कारन के सर को पकड़ कर उसपे हाँथ फेरने लगी कारन एक हाँथ रूपा के पेटीकोट के ऊपर से hi रूपा के छूट को पकड़ लिया जो कारन को रूपा की छूट किसी भट्टी की तरह गरम लगा कारन का हाँथ अपने छूट पर पते hi रूपा की एक सिसकियाँ निकल गयी आवर रूपा ने अपना मुंह कारन के मुंह से निकल लिया आवर रूपा फिर से कारन को पयासी नज़र से देखने लगी मगर कारन का हाँथ अभी भी रूपा के छूट के ऊपर hi था क्यू के रूपा ने कारन का हाँथ हटाने के बगैर खुद अपना हाँथ कारन के हाँथ पर रख कर दबा दिया आवर अपना चेहरा ऊपर कर के झड़ने लगी रूपा 30 सेक् तक झड़ी रही झड़ने के बाद रूपा अपने हाँथ से कारन के हाँथ को झटका से हटा कर बाथरूम मैं जाने लगी तब कारन को अहसास हुवा आवर कारन रूपा का हाँथ पकड़ लिया
कारन : ममी मुझे मनाफ़ कर दीजिये मैं आप के साथ ऐसा नहीं करना चाहता था मुझसे गलती हो गयी मगर कारन सच मैं रो रहा था मगर रूपा ने कारन के तरफ देखा भी नहीं आवर चली गयी कारन बस रूपा को जाते हुवे देखता रहा
रूपा बाथरूम मैं जाने के बाद अपना पेटीकोट को निकल कर पेंटी को देखा तो रूपा की पेंटी आगे से पूरी भींग गयी थी ये मुझे क्या हो गया था जो मैं कारन को रोकने के बगैर मैं उसके साथ दे रही थी मैं ऐसा कैसे कर सकती हुईं मैं एक लड़के के आगे कैसे इस तरह कमज़ोर पद सकती हुईं आवर कारन का लैंड कैसे उसके पेंट मैं मचल रहा था जैसे वह मेरी छूट मैं जाना चाहता हो आअह्ह्ह कितना बड़ा लग रहा था कारन का लैंड मेरी छोटी सी छेद मैं वह कैसे जायेगा हे भगवन मैं ये कैसे सोच सकती हुईं मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हुईं आवर मैं आज उन्ही को ढोकला देने वाली थी रूपा बाथरूम में अपने आप से hi बात कर रही थी फिर रूपा अपनी पेंटी को देख कर उसकी आँखे लाल हो गयी कारन के साथ आज पहली बार मेरी छूट से इतना पानी कैसे निकल रहा है जैसे मुझे लग रहा है मेरी छूट से अभी भी पानी निकल रहा है ये सब उनके वजह से हुवा है अगर वह मुझे जवानी मैं इतना नहीं चौड़ाई की होती तो मैं इतनी पयासी नहीं रहती जवानी मैं तो मुझे जी भर के छोड़ा आवर कितने सल्ल से मुझे छोड़ भी नहीं रहे है आज भी मुझे छोड़ते तो मैं आज एक लड़के के साथ इतनी कमज़ोर नहीं पड़ती रूपा के आँख नम हो गयी थी आवर रूपा खुद से hi बोले जा रही थी
अभी रूपा बाथरूम में पेंटी आवर बलाउज मैं थी जो बहुत कामुक ोुरत आवर कामदेवी लग रही थी कुछ देर रोने के बाद रूपा अपना मुंह धोकर अपनी साड़ी को ठीक कर के आई तो कारन रूम मैं नहीं था कारन कहा चला गया अभी तो एहि था कही कारन को भी मेरी तरह दुःख तो नहीं हुवा होगा वह अभी बच्चा है अगर कारन मायुश होगा तो कही अपने आप को कुछ कर न ले मैं कारन से इस बारे मैं बात करुँगी आवर उससे मैं समझाउंगी रूपा कारन को रूम मैं नहीं देखा तो रूपा को कारन की चिंता होने लगी रूपा फिर अकेले hi जल्दी जल्दी रूम साफ की आवर घर के लिए निकल गयी मगर हर बार रूपा कारन के बारे मैं hi सोच रही थी के कारन अभी कहा होगा वह अपने आप को कुछ कर न ले रूपा का मन बेचैन था
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शांति : क्या हुवा है मेरी बेटी को डॉ साहब जो गीता बेटी बेहोश थी कब से
डॉ : आप को घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है ये बिलकुल ठीक है ये बस किसी चीज को कुछ जयादा hi सोचने के लिए अपने दिमाग पर ज़ोर दिया होगा जो बेहोश हो गयी बाकि सब ठीक है बस इन्हे आओ लोग जयादा मत सोचने दे ये ठीक है आवर प्लीज इनके सामने रूट मत इनके लिए अच्छा रहेगा डॉ के कहने पर शांति आवर पायल चुप हो गयी डॉ गीता को फिर से नींद का इंजेक्शन दे कर चला गया
रात के 11पं को गीता के घर का बेल बजा तो पायल ने गेट खोला जो एक लड़की थी
पायल : कौन हो आप किस्से मिलना है
लड़की : मैं तुम्हारी गीता दीदी की दोस्त हुईं मेरा नाम शीतल है मुझे गीता से मिलना है मैं कब से गीता को फ़ोन लगा रही थी मगर गीता का फ़ोन लगा नहीं तो मुझे आना पड़ा
पायल : ठीक है आप आ जाइये दीदी का फ़ोन ख़राब हो गया है वह मेरे से hi गिर गया था पायल शीतल को अंदर लेकर गेट बंद कर दिया आवर पायल गेट के बगल से एक चीज उठा कर शीतल के पीछे चलने लगी
शीतल : कही तुम पायल तो नहीं हो न शीतल बोल पड़ी जो पायल थोड़ी हैरानी से शीतल को देखने लगी आवर शीतल को पकड़ के उसके गले पर चाकू रख दिया
पायल : कौन हो आप आवर आप को मेरा नाम कैसे पता आवर मुझे अच्छे से पता है गीता दीदी की कोई भी यहाँ दोस्त नहीं है तो आप मुझे बताइये कौन हो आप आवर यह क्यू आई हो वरना मैं आप की गाला काट दूंगी
मगर शीतल झटके मैं सरीर से पायल को झटका दिया आवर पायल के हाँथ से चाकू चीन कर अपने हाँथ मैं ले लिया
शीतल : तुम भी अपनी गीता दीदी की तरह चालक आवर बहादुर हो मगर मैं सच कह रही हुईं मैं तुम्हारी गीता दीदी की दोस्त hi हुईं अगर तुमेह बिस्वास नहीं तो ये लो चाकू आवर मुझे मर दो आउट शीतल ने चाकू पायल की तरफ भाषा दी जो पायल ने चाकू लेकर फिर से शीतल के ऊपर रख दिया मगर इस बात पायल ने शीतल को मज़बूती से पकड़ लिया था आवर उसी तरह पायल गीता के रूम के पास गयी आवर गेट के पास hi रुक गयी
पायल : दीदी क्या आप जाग रही हो
गीता : है पायल क्या हुवा पहले अंदर तो आजा तुझे पता है गेट खुला है
पायल : दीदी क्या आप की कोई शीतल नाम की दोस्त है
गीता : पायल क्या हुवा तू ये क्यू पूछ रही है आवर तू अंदर क्यू नहीं आ रही है गीता को थोड़ी हैरानी हुयी के शीतल के बारे मैं पायल क्यू पूछ रही है
पायल : दीदी पहले बोलिये आप की कोई शीतल नाम की दोस्त है की नहीं प्लीज बताइये गीता बोल दे यार नहीं तो तेरी बहन मेरी गाला काट देगी गीता के बोलने से पहले hi शीतल बोल पड़ी
गीता : शीतल तू अभी इतनी रात को यह क्या कर रही है है पायल ये मेरी दोस्त है इसे अंदर आने दे
गीता के कहने पर पायल शीतल को अंदर लेकर गयी मगर अभी भी पायल ने शीतल के गले से चाकू नहीं हटाया था दीदी एहि है शीतल आप क दोस्त पायल शीतल की चेहरा गीता को देखते हुवे पूछा
गीता : है पायल एहि है मेरी दोस्त शीतल अब चाकू हटा भी ले तब जाकर पायल ने शीतल के गले से चाकू हटाया चाकू हट्टे hi शीतल खाने लगी क्यू के पायल ने अंदर आते हुवे आवर ज़ोर से शीतल की गाला पाकर लिया था कुछ देर तक पायल खासते रही तब तक पायल जाकर गीता के पास बैठ गयी
शीतल : सुक्रिया महा रानी मेरी जान बचाने के लिए वर्ण आप की ये बहन मेरी गाला काट देती वैसे सच कह रही हुईं गीता अगर ये मेरी टीम मैं रही तो ये तुझसे भी आगे निकल सकती है
गीता : शीतल क्या बकवास कर रही है किस लिए यह आई है ये बता पहले गीता ने चिल्ला कर गुस्से मैं कहा जो शीतल के साथ पायल भी दर गयी गीता के गुस्से को देख कर तब शीतल को अहसास हुवा के शीतल ने अभी क्या बोल गयी
पायल : ये क्या कह रही है के आप से भी आगे मैं निकल जाती ये किस बारे मैं बात कर रही है पायल आज पहली बार गीता को चीला कर गुस्से मैं बोलते सुना था इस लिए पूछा भी तो निचे देखते हुवे जो गीता को भी अपनी बहन को निचे देखते हुवे पूछना अच्छा नहीं लगा तो गीता पायल के सर पर हाँथ रख दिया
गीता : छोटी अभी तू रूम मैं जाकर सो जा मैं तुझे कल बताउंगी अभी बहुत रात हो गयी है मुझे शीतल से कुछ बात करनी है " पायल भी कुछ नहीं बोली आवर अच्छे लड़की की तरह उठा कर चली गयी मगर उसके दिमाग मैं शीतल की बात ज़रूर चल रही थी आवर पायल अभी पूछ भी नहीं सकती थी क्यू के गीता ने कल बताने को कहा था तो पायल सीधे अपने कमरे मैं चली गयी
गीता : सॉरी यार के मैं तुझपे चिलाती मैं नहीं छाती के कोई जाने के मैं क्या हुईं मगर अब पायल जब तक जाएगी नहीं मुझे नहीं छोड़ने वाली खैर शीतल इतनी रात को यह आई कोई बात है क्या
शीतल : मुझे भी मनाफ़ करदे यार मैं बस पायल की बहादुरी देख कर मेरी मुनाह से निकल गयी कितनी आसानी से उसने मुझे अंदर लिया आवर मेरी गले पर चाकू रख दिया एक वकत के लिए तो मैं खुद दर गयी थी सच मैं तेरी बहन बहादुर आवर चालक है शीतल की बात सुन गीता के चहरे पर मुस्कान आ गयी
गीता : है आखिर बहन भी तो मेरी hi है मगर अभी तक शीतल तुमने बताई नहीं तू अचानक इतनी रात को मेरे घर क्यू आई है
शीतल : गीता यार एक बुरी खबर है तुझे तो पता है मैं अपने बन्दे को धरमपुर भेजा था जो 4 आदमी थे मगर मेरे 3 बंदी मरे गए आवर एक धरमपुर मैं hi छिपा है आवर उसी ने कुछ तस्वीरें भेजी है जिसे देख मुझे रहा नहीं गया मैं कब से तुझे फ़ोन कर रही थी मगर तेरा फ़ोन ऑफ आ रहा था तो मुझे आना पड़ा इतनी रात को क्यू के ये तस्वीर तुझे देखना ज़रूरी था
गीता : क्या ज़रूरी था ऐसा क्या है उस तस्वीर मैं जो मुझे देखना ज़रूरी था
शीतल : ले तू खुद देख ले आवर 10 से 12 तस्वीर शीतल ने बीएड पर रख दिया जो गीता उसे हैरानी से देखने लगी ये कैसे hi सकता है शीतल मेरी फॅमिली तो कभी उस आंटी से मिली भी नहीं है आवर कारन तो यह भी नहीं था फिर ये तस्वीर आंटी के पास कैसे है आवर ये तस्वीर हाँथ से बनाया हुवा है आखिर ये आंटी है कौन आवर मेरा रिस्ता है आंटी से गीता को दिमाग फिर से चकराने लगा आवर गीता ने अपना सर पकड़ लिया