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- Dec 5, 2013
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लेकिन कुछ भी हो जो मज़ा इस लौंडे को छोड़ने मई आएगा उसके सामने सब बेकार है... आह्हः जब मेरा ये लुंड इस के मुँह मई जाएगा.. जब मई इस के मम्मी को दबाऊंगा.. और जब मई अपना ये लुंड इस की गांड मई उतारूंगा अह्ह्ह क्या नजारा होगा...
नवाज़ ये आरती के बॉडी को देखकर इमेजिन कर रहा था...
पर ये छोटे मालिक से सटिस्फी होंगे तो मेरे निचे कैसे आएंगे.. फिर तो मेरा सपना सपना hi रहेगा.. नहीं नहीं.. ऐसे नहीं होगा मुझे कुछ न कुछ करना पड़ेगा.. फिर मुझे कुछ नए आईडिया लगाने पड़ेगे.. नीता की हेल्प लेने पड़ेगे..
ये सोचते हुई उसने आपने हाथ लुंड से hataya...aur कहा
हाँ मैडम यही कॉक है..
आरती गर्दन घुमा के कहती है
पता है..
पता है तो ठीक करो न उसे
देख नहीं रहे हो क्या मेरा हाथ पहुंच नहीं रहा है.. नीता तुम्हारे आशिक़ को जरा समजाओ न ..
मेमसाब वो मेरा आशिअक नहीं है
तो कोण है तेरा
आरती आपने हाथ कॉक तक पहुँचाने की कोशिश करते हुई कहती है
वो तो मेरा बस
वो तो क्या तेरा
बॉयफ्रेंड ..
तब झट से नवाज़ कहता है
मई एक आईडिया दू मेमसाब
आरती तब नवाज़ की तरफ गुस्से से देखते है और मैं मई कहते है...
आ गया अपनी माशूका को बचाने... इस ने बात बीच मई hi काट डाली..
बताओ.. बताओ.. मुझे तो तुम्हारे बात सुनाने hi पड़ेगे hi न.. मेरे कामवाली के आशिक़ जो ठैरे तुम. . . नहीं नहीं बॉयफ्रेंड जो ठहरे तुम.
ऐसा कह के नवाज़ को स्माइल देते है... और नीता की तरफ इशारा करती है..
मेमसाब आप भी न..
नीता नाराजगी दिखते हुई कहते है..
तभी बहार से सेठजी का आवाज़ आता है..
नीता.. नीता... कहा हो तुम
तब बुरा सा मू करके आरती कहती है
जाओ तुम पापा बुला रहे है
आरती को नीता से सच सुनना था पर पापा की वजह से उससे ये मौका हाथ से चला गया
तब शेठ जी फिर से आवाज लगते है..
आरती -
जाओ जल्दी से नहीं तो पापा जी गुस्सा होंगे
आ रही हु शेठ जी.. यही किचन मई हु..
जल्दी आना
नीता को नवाज़ को चोर के जाने का मैं नहीं था पर उससे जाना पड़ा.. वो बुरा सा मू बनके किचन से जाती है.. और धीरे से नवाज़ को कहती है
जल्दी hi आती हु नवाज़
ये बात आरती ने सुनी थी.. वो जानती थी ये आपने आशिक़ को जल्द hi आती हु बोल के गए है पर अब वो कब आएंगे ये इसके हाथ मई नहीं है..
नीता के किचन से जाते hi आरती घूम जाती है और सिंक को पिट सात के खड़े हो जाती है और नवाज़ की तरफ देखते हुई उसे कहती है..
वैसे क्या कह रहे थे तुम ..
मई क्या कह रहा था
कुछ तो कह रहे थे न
नहीं तो .. मई कब कहा कह रहा था ..
अभी तो कहा था न तुमने..
कब ..
अभी थोड़े देर पहले
कब मुझे तो याद नहीं..
हे भगवन मई क्या करू इस आदमी का..
ऐसा कहा के आरती आपने हाथ सर पाई मार के ले रही थी..
नवाज़ मेरा दिमाग मत ख़राब करो पहले से मई बहुत परेशां हु ...
आप को मैंने कब परेशान किया ..
मैंने कब ऐसा कहा ..
अभी तो कहा..
मैंने कहा मई परेशान हु मैंने नहीं कहा तुमने मुझे परेशान किया ..
वो aisa..muje लगा मैंने आप को परेशां किया ..
तुम कुछ भी लाक सकता है वो जाने दो .. पहले बताओ तुम क्या कह रहे थे..
कुछ तो नहीं
फिर से सुरु हो गए तुम
क्या सुरु हो गया मई
अभी तुमने कुछ कहा था
कब मेमसाब
अभी नीता थी तब ... देखो मेरे हाथ की हालत क्या होगये है .. ये कॉक ठीक करते हुई और तुम कहते जा रहे हो कब क्या
ऐसा कहते हुई वो आपने हाथ उसे दिखने लगे
आरती ने अब आपने दोनों हाथ आगे की तरफ किये हुई थे .... आरती ने ऐसे करते hi नवाज़ उसको कुछ देर तक देखता रह जाता हैं...... आरती चुप चाप वहीँ कड़ी थी ....... हाथ आगे किये हुई.. इस वक़्त कमरे में गहरी ख़ामोशी छायी हुई थी......... कुछ पल के बाद नवाज़ आरती को सर से लेकर पवन तक घूरता हैं .. नवाज़ जैसे उसे घर रहा था उस वजह से आरती ने अपनी नज़रें नीचे झुका लिए...
आरती बाला सी ख़ूबसूरत थी ..... इस वक़्त आरती के बदन पर एक हलकी से नीली रंग की साडी थी ....... बड़ी बड़ी नीली आँखें ...... माथे पर एक नीले रंग की छोटी सी बिंदिया ...... आँखों में सुरमयी काजल लगे hue......kale घने लम्बे बल जो उसके कमर को बार बार टच कर रहे थे ....... और सबसे जान लेवा उसकी नरम और गुलाबी लिप्स ........ कानों में बड़े बड़े झुमके और नाक में एक छोटी सी नाथ ...... नीचे उसके सीने का साइज 38 जिससे देखने से ऐसा लग रहा था मनो उसके दोनों बूब्स अभी उसके ब्लाउज फाड़कर बहार निकल पड़ेंगे ......उसके बड़े उभारों से उसकी खूबसूरती और भी क़हर धा रही thi......haathon में उसी रंग की खनकती चूड़ियां .....नीचे उसका डीप नैवेल जो 1 इंच की घेरे में था बेहद आकृषक .......जो किसी का लुंड आसानी से खड़ा कर सकता था......
और सबसे जानलेवा थी उसकी gand.......uski कमर की साइज भी 28 के आस पास hogi.........jise देखकर बुद्धों के लुंड में भी खून की एक नयी संचार तेज़्ज़ हो जाये ........ कमर बिलकुल पतली और उसके जिस्म का रंग बिलकुल दूध की तरफ गोरा ...... दूसरे शब्दों में अगर कहा जाये तो वो एक जीती जगती सेक्स की मूरत थी........
इतना कहर दहने वाली औरत अगर अपना हाथ आगे रखे तो कोण मर्द वो हाथ आपने हाथो मई न ले… नवाज़ ने भी वही kiya..waise नवाज़ बहुत डियर तक उसे सर से लेकर पवन तक ऐसे hi घूरता raha.......fir जब उसे होश आया तब उसने आरती के हाथ आपने हाथो मई लिया..
जैसे hi नवाज़ के कठोर हाथों ने आरती के नाज़ुक और कोमल हाथो को चुवा वैसे hi आरती के बदन में एक अजीब सा एहसास हुआ ....... और उसे बड़ा झटका लगा .. और फिर आरती शर्मा गए ...
और फ़ौरन आरती अपना हाथ नवाज़ के हांथो से से चुरा लेते है ...वो वहीँ खड़े रहते हुई गर्दन नीचे करते हुई आपने आँखे बंद कर लेते है....
नवाज़ - आप बहुत ख़ूबसूरत हैं मेमसाहेब ......... मैंने आपके जैसी सूंदर लड़की इससे पहले कभी नहीं देखि ........ साहेब तो सच में बहुत किस्मत वाले hain.......kisi किसी को ऐसी किस्मत मिलती हैं.......
आरती नवाज़ के मुँह से अपनी टैरिफ सुनकर शर्मा सी गयी ........
आरती को नवाज़ में कोई दिलचस्पी नहीं थी मगर उसका यु टैरिफ करना आरती को ाचा लग रहा था......
ऐसे कहते हुई नवाज़ एक बार फिर से उसके चेहरे की तरफ बड़े गौर से देखने लगा........
आरती अभी नीचे देख रही थी ... आरती का कोई ओपपोसे या गुस्से वाला रिएक्शन न पाकर नवाज़ मान मई कहता है…
लगता है कहीं न कहीं अब मेमसाब के दिल में एक छोटी सी जगह मैंने ज़रूर बना ली है........
पता नहीं क्यों अब नवाज़ के बात पर आरती को गुस्सा नहीं आ रहा था … गुस्सा तो नहीं था पर वो ओपपोसे भी नहीं कर रही थी ... आरती कुछ पल तक नवाज़ की बात को सुनकर खामोश रही ..... और कुछ पल के बाद आपने नखरा दिखते हुई कहते है ...
चलो हटो जीई ... मई आपने हाल बया कर रही हु और तुम पड़े है मेरे खूबसूरती की ... मेरे खूबसूरती के पीछे पड़े हो और उसकी झूठमूठ की तारीफ कर रहे हो ..
अदा के साथ आरती कहती है .... ये बात खिलाडी नवाज़ अच्छे से समाज चुक्का था ...
झूठमूठ की तारीफ नहीं मेमसाब ... जो मुझे दिख रहा है वही बोल रहा हु
अच्छा जी
उसका नखरा दिखते हुई वो कहती है ...
हाँ मेमसाब
मई क्या इतने खूबसूरत हु क्या
अड्डा के साथ नवाज़ को देखते हुई आरती कहती है ...
हाँ मेमसाब
तुम्हारे साहब तो नहीं कहते ऐसे कभी
वो क्या है न मेमसाब .......ऊपर वाले की लीला देखो जिसके पास हीरा होता हैं न उसे हीरे की कोई क़द्र नहीं होती ....... और जिसके पास नहीं होता है वो दिन रात हीरा पाने की फ़िराक मई रहता है और उस हीरे की याद में तड़पता रहता हैं.........
नवाज़ ये आरती के बॉडी को देखकर इमेजिन कर रहा था...
पर ये छोटे मालिक से सटिस्फी होंगे तो मेरे निचे कैसे आएंगे.. फिर तो मेरा सपना सपना hi रहेगा.. नहीं नहीं.. ऐसे नहीं होगा मुझे कुछ न कुछ करना पड़ेगा.. फिर मुझे कुछ नए आईडिया लगाने पड़ेगे.. नीता की हेल्प लेने पड़ेगे..
ये सोचते हुई उसने आपने हाथ लुंड से hataya...aur कहा
हाँ मैडम यही कॉक है..
आरती गर्दन घुमा के कहती है
पता है..
पता है तो ठीक करो न उसे
देख नहीं रहे हो क्या मेरा हाथ पहुंच नहीं रहा है.. नीता तुम्हारे आशिक़ को जरा समजाओ न ..
मेमसाब वो मेरा आशिअक नहीं है
तो कोण है तेरा
आरती आपने हाथ कॉक तक पहुँचाने की कोशिश करते हुई कहती है
वो तो मेरा बस
वो तो क्या तेरा
बॉयफ्रेंड ..
तब झट से नवाज़ कहता है
मई एक आईडिया दू मेमसाब
आरती तब नवाज़ की तरफ गुस्से से देखते है और मैं मई कहते है...
आ गया अपनी माशूका को बचाने... इस ने बात बीच मई hi काट डाली..
बताओ.. बताओ.. मुझे तो तुम्हारे बात सुनाने hi पड़ेगे hi न.. मेरे कामवाली के आशिक़ जो ठैरे तुम. . . नहीं नहीं बॉयफ्रेंड जो ठहरे तुम.
ऐसा कह के नवाज़ को स्माइल देते है... और नीता की तरफ इशारा करती है..
मेमसाब आप भी न..
नीता नाराजगी दिखते हुई कहते है..
तभी बहार से सेठजी का आवाज़ आता है..
नीता.. नीता... कहा हो तुम
तब बुरा सा मू करके आरती कहती है
जाओ तुम पापा बुला रहे है
आरती को नीता से सच सुनना था पर पापा की वजह से उससे ये मौका हाथ से चला गया
तब शेठ जी फिर से आवाज लगते है..
आरती -
जाओ जल्दी से नहीं तो पापा जी गुस्सा होंगे
आ रही हु शेठ जी.. यही किचन मई हु..
जल्दी आना
नीता को नवाज़ को चोर के जाने का मैं नहीं था पर उससे जाना पड़ा.. वो बुरा सा मू बनके किचन से जाती है.. और धीरे से नवाज़ को कहती है
जल्दी hi आती हु नवाज़
ये बात आरती ने सुनी थी.. वो जानती थी ये आपने आशिक़ को जल्द hi आती हु बोल के गए है पर अब वो कब आएंगे ये इसके हाथ मई नहीं है..
नीता के किचन से जाते hi आरती घूम जाती है और सिंक को पिट सात के खड़े हो जाती है और नवाज़ की तरफ देखते हुई उसे कहती है..
वैसे क्या कह रहे थे तुम ..
मई क्या कह रहा था
कुछ तो कह रहे थे न
नहीं तो .. मई कब कहा कह रहा था ..
अभी तो कहा था न तुमने..
कब ..
अभी थोड़े देर पहले
कब मुझे तो याद नहीं..
हे भगवन मई क्या करू इस आदमी का..
ऐसा कहा के आरती आपने हाथ सर पाई मार के ले रही थी..
नवाज़ मेरा दिमाग मत ख़राब करो पहले से मई बहुत परेशां हु ...
आप को मैंने कब परेशान किया ..
मैंने कब ऐसा कहा ..
अभी तो कहा..
मैंने कहा मई परेशान हु मैंने नहीं कहा तुमने मुझे परेशान किया ..
वो aisa..muje लगा मैंने आप को परेशां किया ..
तुम कुछ भी लाक सकता है वो जाने दो .. पहले बताओ तुम क्या कह रहे थे..
कुछ तो नहीं
फिर से सुरु हो गए तुम
क्या सुरु हो गया मई
अभी तुमने कुछ कहा था
कब मेमसाब
अभी नीता थी तब ... देखो मेरे हाथ की हालत क्या होगये है .. ये कॉक ठीक करते हुई और तुम कहते जा रहे हो कब क्या
ऐसा कहते हुई वो आपने हाथ उसे दिखने लगे
आरती ने अब आपने दोनों हाथ आगे की तरफ किये हुई थे .... आरती ने ऐसे करते hi नवाज़ उसको कुछ देर तक देखता रह जाता हैं...... आरती चुप चाप वहीँ कड़ी थी ....... हाथ आगे किये हुई.. इस वक़्त कमरे में गहरी ख़ामोशी छायी हुई थी......... कुछ पल के बाद नवाज़ आरती को सर से लेकर पवन तक घूरता हैं .. नवाज़ जैसे उसे घर रहा था उस वजह से आरती ने अपनी नज़रें नीचे झुका लिए...
आरती बाला सी ख़ूबसूरत थी ..... इस वक़्त आरती के बदन पर एक हलकी से नीली रंग की साडी थी ....... बड़ी बड़ी नीली आँखें ...... माथे पर एक नीले रंग की छोटी सी बिंदिया ...... आँखों में सुरमयी काजल लगे hue......kale घने लम्बे बल जो उसके कमर को बार बार टच कर रहे थे ....... और सबसे जान लेवा उसकी नरम और गुलाबी लिप्स ........ कानों में बड़े बड़े झुमके और नाक में एक छोटी सी नाथ ...... नीचे उसके सीने का साइज 38 जिससे देखने से ऐसा लग रहा था मनो उसके दोनों बूब्स अभी उसके ब्लाउज फाड़कर बहार निकल पड़ेंगे ......उसके बड़े उभारों से उसकी खूबसूरती और भी क़हर धा रही thi......haathon में उसी रंग की खनकती चूड़ियां .....नीचे उसका डीप नैवेल जो 1 इंच की घेरे में था बेहद आकृषक .......जो किसी का लुंड आसानी से खड़ा कर सकता था......
और सबसे जानलेवा थी उसकी gand.......uski कमर की साइज भी 28 के आस पास hogi.........jise देखकर बुद्धों के लुंड में भी खून की एक नयी संचार तेज़्ज़ हो जाये ........ कमर बिलकुल पतली और उसके जिस्म का रंग बिलकुल दूध की तरफ गोरा ...... दूसरे शब्दों में अगर कहा जाये तो वो एक जीती जगती सेक्स की मूरत थी........
इतना कहर दहने वाली औरत अगर अपना हाथ आगे रखे तो कोण मर्द वो हाथ आपने हाथो मई न ले… नवाज़ ने भी वही kiya..waise नवाज़ बहुत डियर तक उसे सर से लेकर पवन तक ऐसे hi घूरता raha.......fir जब उसे होश आया तब उसने आरती के हाथ आपने हाथो मई लिया..
जैसे hi नवाज़ के कठोर हाथों ने आरती के नाज़ुक और कोमल हाथो को चुवा वैसे hi आरती के बदन में एक अजीब सा एहसास हुआ ....... और उसे बड़ा झटका लगा .. और फिर आरती शर्मा गए ...
और फ़ौरन आरती अपना हाथ नवाज़ के हांथो से से चुरा लेते है ...वो वहीँ खड़े रहते हुई गर्दन नीचे करते हुई आपने आँखे बंद कर लेते है....
नवाज़ - आप बहुत ख़ूबसूरत हैं मेमसाहेब ......... मैंने आपके जैसी सूंदर लड़की इससे पहले कभी नहीं देखि ........ साहेब तो सच में बहुत किस्मत वाले hain.......kisi किसी को ऐसी किस्मत मिलती हैं.......
आरती नवाज़ के मुँह से अपनी टैरिफ सुनकर शर्मा सी गयी ........
आरती को नवाज़ में कोई दिलचस्पी नहीं थी मगर उसका यु टैरिफ करना आरती को ाचा लग रहा था......
ऐसे कहते हुई नवाज़ एक बार फिर से उसके चेहरे की तरफ बड़े गौर से देखने लगा........
आरती अभी नीचे देख रही थी ... आरती का कोई ओपपोसे या गुस्से वाला रिएक्शन न पाकर नवाज़ मान मई कहता है…
लगता है कहीं न कहीं अब मेमसाब के दिल में एक छोटी सी जगह मैंने ज़रूर बना ली है........
पता नहीं क्यों अब नवाज़ के बात पर आरती को गुस्सा नहीं आ रहा था … गुस्सा तो नहीं था पर वो ओपपोसे भी नहीं कर रही थी ... आरती कुछ पल तक नवाज़ की बात को सुनकर खामोश रही ..... और कुछ पल के बाद आपने नखरा दिखते हुई कहते है ...
चलो हटो जीई ... मई आपने हाल बया कर रही हु और तुम पड़े है मेरे खूबसूरती की ... मेरे खूबसूरती के पीछे पड़े हो और उसकी झूठमूठ की तारीफ कर रहे हो ..
अदा के साथ आरती कहती है .... ये बात खिलाडी नवाज़ अच्छे से समाज चुक्का था ...
झूठमूठ की तारीफ नहीं मेमसाब ... जो मुझे दिख रहा है वही बोल रहा हु
अच्छा जी
उसका नखरा दिखते हुई वो कहती है ...
हाँ मेमसाब
मई क्या इतने खूबसूरत हु क्या
अड्डा के साथ नवाज़ को देखते हुई आरती कहती है ...
हाँ मेमसाब
तुम्हारे साहब तो नहीं कहते ऐसे कभी
वो क्या है न मेमसाब .......ऊपर वाले की लीला देखो जिसके पास हीरा होता हैं न उसे हीरे की कोई क़द्र नहीं होती ....... और जिसके पास नहीं होता है वो दिन रात हीरा पाने की फ़िराक मई रहता है और उस हीरे की याद में तड़पता रहता हैं.........