KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION - Page 9 - SexBaba
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KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION

लेकिन कुछ भी हो जो मज़ा इस लौंडे को छोड़ने मई आएगा उसके सामने सब बेकार है... आह्हः जब मेरा ये लुंड इस के मुँह मई जाएगा.. जब मई इस के मम्मी को दबाऊंगा.. और जब मई अपना ये लुंड इस की गांड मई उतारूंगा अह्ह्ह क्या नजारा होगा...

नवाज़ ये आरती के बॉडी को देखकर इमेजिन कर रहा था...

पर ये छोटे मालिक से सटिस्फी होंगे तो मेरे निचे कैसे आएंगे.. फिर तो मेरा सपना सपना hi रहेगा.. नहीं नहीं.. ऐसे नहीं होगा मुझे कुछ न कुछ करना पड़ेगा.. फिर मुझे कुछ नए आईडिया लगाने पड़ेगे.. नीता की हेल्प लेने पड़ेगे..

ये सोचते हुई उसने आपने हाथ लुंड से hataya...aur कहा

हाँ मैडम यही कॉक है..

आरती गर्दन घुमा के कहती है

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पता है..

पता है तो ठीक करो न उसे

देख नहीं रहे हो क्या मेरा हाथ पहुंच नहीं रहा है.. नीता तुम्हारे आशिक़ को जरा समजाओ न ..

मेमसाब वो मेरा आशिअक नहीं है

तो कोण है तेरा

आरती आपने हाथ कॉक तक पहुँचाने की कोशिश करते हुई कहती है

वो तो मेरा बस

वो तो क्या तेरा

बॉयफ्रेंड ..

तब झट से नवाज़ कहता है

मई एक आईडिया दू मेमसाब

आरती तब नवाज़ की तरफ गुस्से से देखते है और मैं मई कहते है...

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आ गया अपनी माशूका को बचाने... इस ने बात बीच मई hi काट डाली..

बताओ.. बताओ.. मुझे तो तुम्हारे बात सुनाने hi पड़ेगे hi न.. मेरे कामवाली के आशिक़ जो ठैरे तुम. . . नहीं नहीं बॉयफ्रेंड जो ठहरे तुम.

ऐसा कह के नवाज़ को स्माइल देते है... और नीता की तरफ इशारा करती है..

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मेमसाब आप भी न..

नीता नाराजगी दिखते हुई कहते है..

तभी बहार से सेठजी का आवाज़ आता है..

नीता.. नीता... कहा हो तुम

तब बुरा सा मू करके आरती कहती है

जाओ तुम पापा बुला रहे है

आरती को नीता से सच सुनना था पर पापा की वजह से उससे ये मौका हाथ से चला गया

तब शेठ जी फिर से आवाज लगते है..

आरती -

जाओ जल्दी से नहीं तो पापा जी गुस्सा होंगे

आ रही हु शेठ जी.. यही किचन मई हु..

जल्दी आना

नीता को नवाज़ को चोर के जाने का मैं नहीं था पर उससे जाना पड़ा.. वो बुरा सा मू बनके किचन से जाती है.. और धीरे से नवाज़ को कहती है

जल्दी hi आती हु नवाज़

ये बात आरती ने सुनी थी.. वो जानती थी ये आपने आशिक़ को जल्द hi आती हु बोल के गए है पर अब वो कब आएंगे ये इसके हाथ मई नहीं है..

नीता के किचन से जाते hi आरती घूम जाती है और सिंक को पिट सात के खड़े हो जाती है और नवाज़ की तरफ देखते हुई उसे कहती है..

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वैसे क्या कह रहे थे तुम ..

मई क्या कह रहा था

कुछ तो कह रहे थे न

नहीं तो .. मई कब कहा कह रहा था ..

अभी तो कहा था न तुमने..

कब ..

अभी थोड़े देर पहले

कब मुझे तो याद नहीं..

हे भगवन मई क्या करू इस आदमी का..

ऐसा कहा के आरती आपने हाथ सर पाई मार के ले रही थी..

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नवाज़ मेरा दिमाग मत ख़राब करो पहले से मई बहुत परेशां हु ...

आप को मैंने कब परेशान किया ..

मैंने कब ऐसा कहा ..

अभी तो कहा..

मैंने कहा मई परेशान हु मैंने नहीं कहा तुमने मुझे परेशान किया ..

वो aisa..muje लगा मैंने आप को परेशां किया ..

तुम कुछ भी लाक सकता है वो जाने दो .. पहले बताओ तुम क्या कह रहे थे..

कुछ तो नहीं

फिर से सुरु हो गए तुम

क्या सुरु हो गया मई

अभी तुमने कुछ कहा था

कब मेमसाब

अभी नीता थी तब ... देखो मेरे हाथ की हालत क्या होगये है .. ये कॉक ठीक करते हुई और तुम कहते जा रहे हो कब क्या

ऐसा कहते हुई वो आपने हाथ उसे दिखने लगे

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आरती ने अब आपने दोनों हाथ आगे की तरफ किये हुई थे .... आरती ने ऐसे करते hi नवाज़ उसको कुछ देर तक देखता रह जाता हैं...... आरती चुप चाप वहीँ कड़ी थी ....... हाथ आगे किये हुई.. इस वक़्त कमरे में गहरी ख़ामोशी छायी हुई थी......... कुछ पल के बाद नवाज़ आरती को सर से लेकर पवन तक घूरता हैं .. नवाज़ जैसे उसे घर रहा था उस वजह से आरती ने अपनी नज़रें नीचे झुका लिए...

आरती बाला सी ख़ूबसूरत थी ..... इस वक़्त आरती के बदन पर एक हलकी से नीली रंग की साडी थी ....... बड़ी बड़ी नीली आँखें ...... माथे पर एक नीले रंग की छोटी सी बिंदिया ...... आँखों में सुरमयी काजल लगे hue......kale घने लम्बे बल जो उसके कमर को बार बार टच कर रहे थे ....... और सबसे जान लेवा उसकी नरम और गुलाबी लिप्स ........ कानों में बड़े बड़े झुमके और नाक में एक छोटी सी नाथ ...... नीचे उसके सीने का साइज 38 जिससे देखने से ऐसा लग रहा था मनो उसके दोनों बूब्स अभी उसके ब्लाउज फाड़कर बहार निकल पड़ेंगे ......उसके बड़े उभारों से उसकी खूबसूरती और भी क़हर धा रही thi......haathon में उसी रंग की खनकती चूड़ियां .....नीचे उसका डीप नैवेल जो 1 इंच की घेरे में था बेहद आकृषक .......जो किसी का लुंड आसानी से खड़ा कर सकता था......

और सबसे जानलेवा थी उसकी gand.......uski कमर की साइज भी 28 के आस पास hogi.........jise देखकर बुद्धों के लुंड में भी खून की एक नयी संचार तेज़्ज़ हो जाये ........ कमर बिलकुल पतली और उसके जिस्म का रंग बिलकुल दूध की तरफ गोरा ...... दूसरे शब्दों में अगर कहा जाये तो वो एक जीती जगती सेक्स की मूरत थी........

इतना कहर दहने वाली औरत अगर अपना हाथ आगे रखे तो कोण मर्द वो हाथ आपने हाथो मई न ले… नवाज़ ने भी वही kiya..waise नवाज़ बहुत डियर तक उसे सर से लेकर पवन तक ऐसे hi घूरता raha.......fir जब उसे होश आया तब उसने आरती के हाथ आपने हाथो मई लिया..

जैसे hi नवाज़ के कठोर हाथों ने आरती के नाज़ुक और कोमल हाथो को चुवा वैसे hi आरती के बदन में एक अजीब सा एहसास हुआ ....... और उसे बड़ा झटका लगा .. और फिर आरती शर्मा गए ...

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और फ़ौरन आरती अपना हाथ नवाज़ के हांथो से से चुरा लेते है ...वो वहीँ खड़े रहते हुई गर्दन नीचे करते हुई आपने आँखे बंद कर लेते है....

नवाज़ - आप बहुत ख़ूबसूरत हैं मेमसाहेब ......... मैंने आपके जैसी सूंदर लड़की इससे पहले कभी नहीं देखि ........ साहेब तो सच में बहुत किस्मत वाले hain.......kisi किसी को ऐसी किस्मत मिलती हैं.......

आरती नवाज़ के मुँह से अपनी टैरिफ सुनकर शर्मा सी गयी ........

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आरती को नवाज़ में कोई दिलचस्पी नहीं थी मगर उसका यु टैरिफ करना आरती को ाचा लग रहा था......

ऐसे कहते हुई नवाज़ एक बार फिर से उसके चेहरे की तरफ बड़े गौर से देखने लगा........

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आरती अभी नीचे देख रही थी ... आरती का कोई ओपपोसे या गुस्से वाला रिएक्शन न पाकर नवाज़ मान मई कहता है…

लगता है कहीं न कहीं अब मेमसाब के दिल में एक छोटी सी जगह मैंने ज़रूर बना ली है........

पता नहीं क्यों अब नवाज़ के बात पर आरती को गुस्सा नहीं आ रहा था … गुस्सा तो नहीं था पर वो ओपपोसे भी नहीं कर रही थी ... आरती कुछ पल तक नवाज़ की बात को सुनकर खामोश रही ..... और कुछ पल के बाद आपने नखरा दिखते हुई कहते है ...

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चलो हटो जीई ... मई आपने हाल बया कर रही हु और तुम पड़े है मेरे खूबसूरती की ... मेरे खूबसूरती के पीछे पड़े हो और उसकी झूठमूठ की तारीफ कर रहे हो ..

अदा के साथ आरती कहती है .... ये बात खिलाडी नवाज़ अच्छे से समाज चुक्का था ...

झूठमूठ की तारीफ नहीं मेमसाब ... जो मुझे दिख रहा है वही बोल रहा हु

अच्छा जी

उसका नखरा दिखते हुई वो कहती है ...

हाँ मेमसाब

मई क्या इतने खूबसूरत हु क्या

अड्डा के साथ नवाज़ को देखते हुई आरती कहती है ...

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हाँ मेमसाब

तुम्हारे साहब तो नहीं कहते ऐसे कभी

वो क्या है न मेमसाब .......ऊपर वाले की लीला देखो जिसके पास हीरा होता हैं न उसे हीरे की कोई क़द्र नहीं होती ....... और जिसके पास नहीं होता है वो दिन रात हीरा पाने की फ़िराक मई रहता है और उस हीरे की याद में तड़पता रहता हैं.........
 
हाँ मेमसाब

तुम्हारे साहब तो नहीं कहते ऐसे कभी

वो क्या है न मेमसाब .......ऊपर वाले की लीला देखो जिसके पास हीरा होता हैं न उसे हीरे की कोई क़द्र नहीं होती ....... और जिसके पास नहीं होता है वो दिन रात हीरा पाने की फ़िराक मई रहता है और उस हीरे की याद में तड़पता रहता हैं.........

इस पर आरती जोर से हसने लगती है...

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और कहती है

मैं हीरा हु क्या..

हीरा नहीं हो आप

तब आरती आचार्य से नवाज़ की तरफ देखती है

तो

डायमंड हो आप

तब आरती एक बार फिर जोरसे हसने लगती है ...

मई मर्दो की आदतों से वाकिब हु

कैसे आदत

कोई खूबसूरत औरत देखे की उसकी पीछे पद जाते है

ऐसा क्या

हाँ नवाब मिया

तो आरती मैडम आप को क्या लगता है आप खूबसूरत हो

ज्यादा फॉर्म मई मत आओ.. मेमसाब से डायरेक्ट मेरा नाम

मैडम भी बोलै न आपको..

ठीक है.. ठीक है..

नखरा करते हुई कहती है.. कुछ देर वो खामोश रहती है.. फिर उसे कुछ याद आता है तो वो नवाज़ की तरफ देखते हुई कहती है..

क्या कहा तुमने ... मई खूबसूरत नहीं हु

ऐसा कब कहा मैंने मेमसाब..

कहा न की आप को लगता है क्या की आप खूबसूरत हो क्या

हाँ

अभी तुमने hi कहा था न

क्या

की मई हॉट सेक्सी एंड ब्यूटीफुल हु

अरे हॉट कहना hi रह गया

तब आरती आपने हूंठ चबा देती है दातो के बीच.. तब उसे याद आता है की इसने तो हॉट कहा hi नहीं था.. मैंने hi जोश मई कह दिया..

मेमसाब आप को क्या लगता है खूबसूरत लेडी दिखे तो मई उसके पीछे भागता हु क्या

हाँ

मई ऐसा नहीं हु

तो तुम कैसे हो नवाज़ मिया

मई न

हाँ

मई न

हाँ बताओ

मई न सिर्फ खूबसूरत औरत के पीछे भागता हु

तब दोनों हँसाने लगे

ऐसे hi नीता को पटाया लगता है ... झूठमूठ की तारीफ करके ... उसके खुबसुरती की ... और उसके साथ अच्छी अछि बाते कर के..

नहीं मेमसाब

तो कैसे पटाया

वो कभी बाद मई बताऊंगा

मतलब तूअमने पटाया है उसे न

नवाज़ कुछ नहीं कहता

तुम दोनों का चक्कर है न

इस पर नवाज़ कुछ नहीं कहता ... आरती जानती थी की उसका नीता के साथ चक्कर है.. फिर भी नवाज़ और नीता के बारे मई ज्यादा जानने के क्यूरोसिटी के वजह से उसने नवाज़ को पूछा.. कुछ देर पहले नीता से उसने पूछा जो शेठ जी के आवाज देने की वजह से नीता ने उसे बताया नहीं था .. वो अब नवाज से जानना चाहती थी ...

बताओ न ऐसे चुप क्यों हो ..

अब आप को तो सब पता तो चल hi गया है न मेमसाब

तब बताओ न खुल के.. कैसे पटाया नीता को

बाद मई

अभी क्या बिजी हो क्या

आरती अब नवाज़ की टांग खींचने के मूड मई थी

नहीं मेमसाब

तो अभी बता दो ... मेरे प्यारे से सेक्सी .. ब्यूटीफुल ... कामवाली को तुमने कैसे पटाया ..

अगर वो ब्यूटीफुल एंड सेक्सी है तो आप क्या हो मेमसाब

आरती नवाज़ की बात को सुनकर शर्मा सी गयी ...... उसने शर्म से अपनी पलकें नीचे झुका ली.......

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नवाज़ अभी भी आरती के चेहरे की तरफ देख रहा था....... उसने आरती के चहरे की तरफ देखते हुई पूछा ..

बतायेना मेमसाब

क्या

शरमाते हुई आरती ने कहा

यही की अगर नीता ब्यूटीफुल एंड सेक्सी है तो आप क्या हो ...

आरती का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा.......... वो सोचने लगे अब मई क्या कहु नवाज़ को ......... शायद चुप रहना hi बेहतर होगा ..

बतायेना न

नवाज़ हँसते हुई धीरे से बोल पड़ा ....

कुछ देर तक आरती उसकी बात के बारे मई सोचती रही की मैं उसके इस सवाल का क्या जवाब दूँ ......सच तो ये था की आरती के पास नवाज़ के सवाल का कोई जवाब नहीं था … वो कुछ देर तक खामोश रही और फिर धीरे से कुछ सोचकर दुबारा से बोल पड़ी......

मुझे नहीं पता

पर मुझे पता है न

एआरटी झट से बोली

क्या

आप तो उससे ज्यादा सेक्सी एंड ब्यूटीफुल हो ...

नखरा करते हुई ... और शरमाते हुई आरती कहती है...

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चल हैट बदमाश !!!!!!

फिर नवाज़ कहता है

आप हो न उससे ज्यादा सेक्सी और ब्यूटीफुल

मुझे नहीं पता

आप हो

पता है तो पूछ क्यों रहे हो

आरती ने गहरी सांस छोड़ते हुए धीरे से कहा .....

आप के मू से सुनना चाहता हु

हटो जी !!!!

ऐसा कह के धीरे से नवाज़ के चट्टी मई आरती मुक्का मरती है

आह्ह्ह्ह....

जोर से लगा क्या

जोर से मारा और पूछ रही हो जोर से लगा क्या

मैंने तो धीरे से मारा था

फिर जोर से कैसे लगा

मुझे क्या पता ... इतने स्ट्रांग दिखते हो और एक औरत के एक हलके से पांच से हवा निकल गए ...

और क्या क्या दीखता है मुज मई .... आरती मैडम

मुझे नहीं पता

बताओ न जी ...

बात को मत घुमाओ ...

मई कोनसे बात को घुमा रहा हु

तुम तुम्हारे और नीता के लव स्टोरी के बारे मई बताओ पहले ...

बताऊंगा तो

मई भी बताउंगी

क्या

तुम मई क्या अच्छा दिखता है मुझे ...

अच्छा बाद मई बताऊंगा ...

अभी क्यों नहीं ..

क्यों की मेरे प्यारे सी .. सेक्सी सी .. ब्यूटीफुल से .... मेमसाब के हाथो मई इतने तकलीफ हो रही है और हम लोग उस नीता के बारे मई बात करेंगे ये सही नहीं होगा न मेमसाब ..

मेरे साथ फ़्लर्ट कर रहे हो क्या

नहीं तो

तो ये क्या है

क्या

प्यारे से सेक्सी से मेमसाब

आप हो इसलिए कह रहा हु

तब आरती बुरा सा मू बनके नवाज़ की तरफ देखने लगती है..

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आप को अच्छा नहीं लगा क्या

अच्छा लगाने की बात नहीं है.. ये बात मेरे साथ मेरा हस्बैंड के अलावा कोई नहीं कर सकता

मैंने तो ऐसे hi कहा मेमसाब

क्या तुम ये बात हर किसी के साथ करते हो

नहीं न मेमसाब

ये तो सिर्फ आप क लिए

अच्छा जी

तब नवाज़ बात को बदल देता है..

आपका हाथ बहुत दुःख रहा है न मेमसाब

है न नवाज ... मेरे हाथ बहुत दुःख रहा है ...

मई भी यही कह रहा हु मेमसाब ... आप के हाथो की तकलीफ के आगे नीता क्या चीज़ है ...

ऐसा कह के नवाज़ आरती का हाथ आपने हाथ मई लेता है ...तब आरती झट से आपने हाथ झटका देके चुरा लेती है ..

देखने दीजिये न आपने हाथो की तकलीफ ..

तकलीफ जानने के लिए मेरा हाथ पकड़ना जरूरी है क्या

हाँ न मेमसाब .. उसके सिवाय कैसे पता चलेगा की आपके हाथ कितना लाल पड़ा हुआ है .. इन् कॉक की वजह से ...

हाँ ये बात भी सही है तुम्हारे ..

तब नवाज आरती का हाथ फिर से आपने हाथ मई लेता है ..

कितना कोमल और नाज़ुक हाट है आप का ..

तब आरती गुस्से से नवाज़ को देखते हुई बोलती है ...

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तुमने इस के लिए मेरा हाट पकड़ा है न ...

नहीं नहीं मेमसाब ...

तो ..

आरती गुस्सा हो गए है ये देखकर नवाज़ फिर से बात को बदल देता है..

सच मई आप के हाथ की हालत ख़राब हो गए है मेमसाब
 
आरती गुस्से से बोलती है ...

तुमने इस के लिए मेरा हाट पकड़ा है न ...

नहीं नहीं मेमसाब ...

तो ..

आरती गुस्सा हो गए है ये देखकर नवाज़ फिर से बात को बदल देता है..

सच मई आप के हाथ की हालत ख़राब हो गए है मेमसाब

ऐसा कह के नवाज़ जुख के उसके हाट पाई फुक मरता है ... उस वजह से आरती के हाथो मई ठंडक मिलती है .. इस वजह से उसके मू से आह निकल जाती है ... अब आरती के दोनों हाथ नवाज़ के दोनों हाथो मई थे ..

देखो न मेरे हाथ कितने ख़राब हो गए है नवाज़

हाँ न मेमसाब आप के हाथ सच मई बहुत ख़राब हो गए है..

आरती के कोमल हाथ को आपने हाथ मई फील करते हुई नवाज़ कहता है..

मेरे को कितना सारा काम करना पड़ता है.. तुम्हारे नीता कुछ भी काम नहीं करती है ..

मई बताता हु उसे

क्या बताओगे उसे

मई बोलूंगा तुम्हारे वजह से आरती मेमसाब के कोमल हाथ ख़राब हो रहे है .. आगे से सब काम तुम करोगे ... आरती मेमसाब को कुछ काम मत करने देना.. उनके नाजुक से कोमल से हाथ ख़राब होंगे नहीं तो मुजसे बुरा कोई नहीं होगा

तब एआरटी नवाज़ की आँखों मई देखते हुई कहती है..

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ऐसा कहोगे तुम नवाज़

हाँ न मेमसाब आप के लिए इतना तो कर सकता हु

हाउ स्वेट ...

आरती फिर कुछ पल खामोश रही ...... नवाज़ बस आरती के कोमल हाथो फील कर रहा था ... फिर कुछ समय के बाद आरती कहती है ...

अब हाथ छोड़ेगा क्या मेरा या ऐसे hi दिनभर पकड़ के रखोगे ...

ऐसा मौका मिल जाये तो मई अल्लाह का शुकरगुजर रहूँगा ...

नवाज़ के ऐसे बोलने से वो शर्मा जाती है और शर्म की वजह से अपनी आँख बांध कर लेती hai..aur फिर आरती ने धड़कते दिल से कहा..

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चलो हटो बदमाश और चोरो मेरा हाथ

उसका गाला बार बार सुख रहा था .......... शायद घबराहट ... और दुर्र की वजह से ... आज से पहले उसीने कभी ऐसे सिचुएशन को फेस नहीं किया था...

नवाज़ बड़े गौर से आरती को देख रहा था ..आरती की हालत देख कर उसके चेहरे पर एक गन्दी सी हंसी एक बार फिर से झलक पड़ी ..... मुन्न hi मुन्न वो खुस हो रहा था ...... शायद अपनी जीत पर ..... या फिर शायद आरती की हालत पर… .कुछ देर की ख़ामोशी के बाद आखिर नवाज़ धीरे से बोल पड़ता हैं ........

क्या मुझे एक गिलास पीने को पानी मिल सकता हैं क्या मेमसाहेब .........

आरती कुछ पल तक नवाज़ की बात को सुनकर खामोश रही ...... फिर वो अपनी आँखें धीरे से खोलती हैं और सामने खड़े नवाज़ पर एक नज़र डालती हैं ... नवाज़ उसको hi देख रहा था .. वो देखते hi फ़ौरन अपनी नज़रें नीचे जुका लेती हैं.........

आरती- ाचा ठीक हैं ........ मैं तुम पानी देती हूँ.......

और आरती अपनी गर्दन उप्पर उतके उसके तरफ सेक्सी तरीके से देखने लगे..

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ठंडा hi चाहिए न..

जो आप पिलाओ

तब आरती आपने सेक्सी स्माइल देते है.. और कहते है ..

पर उसके लिए तुम मेरा हाथ छोड़ना पड़ेगा ...

हाँ वो तो है

ऐसा बोल के नवाज़ उसका हाथ चोर देता है ..

धनवाद नवाज़ मिया.. जो आपने हमारा हाथ चोर दिया. .

ऐसा कह के स्माइल करते है और फिर आरती ने फ्रीज से पानी लेकर आये और नवाज़ को दिया..

एक बात कहूं मेमसाहेब ........

पानी पीते हुई नवाज़ कहता है. .

हाँ कहो

आप सच में बहुत ख़ूबसूरत हैं .......... बस जी करता हैं की आपको बस ऐसे hi देखता राहु ... .

नवाज़ के ऐसे कहने से आरती के धड़कों की रफ़्तार बहुत तेज़्ज़ हो गयी........... वो आपने आप को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रही थी. . आपने आप को कण्ट्रोल करते हुई वो कहती है..

चुप चाप पानी पीओ.. और चले जाओ यहाँ से.. और बहार जेक देख लो तुम्हारे माशूका क्या कर रही है..

आप नहीं चलोगे

तब आरती मैं मई सोचने लगती है .. मई क्यों जाऊ इसके साथ .. इसका कुछ बुरा इरादा तो नहीं है न ..इस वक़्त उसका कलेजा बहुत ज़ोरों से धड़क रहा था ...... एक अजीब सा दुर्र उसके जेहन में बार बार उठ रहा था ... ऐसा लग रहा था जैसे उसके साथ कुछ बुरा होने वाला हैं.............

मई क्यों औ तुम्हारे साथ भला.. कबाब मई हड्डी..

रूम ढूंढने के लिए

दम दोनों लोवेबिरदस के लिए मई क्यों रूम धुंडु भला…

रूम कोनसे साफ़ करनी है वो आप hi दिखाओगे न

उसके लिए

तो आप क्या समजे

मई कुछ और hi समजे

ऐसा बोल के आरती शर्मा जाती है..

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और नीचे देखने लगाती है

आप क्या सामजी मेमसाब

कुछ नहीं

आप कही ये तो नहीं समजे की मैंने रूम का जिक्र इसलिए किया की मुझे नीता के साथ मस्ती करनी थी

अरे नहीं.. मई ऐसा क्यों समझूंगी ..

तो आप क्या समाज रहे थी

आरती का कलेजा इस वक़्त बहुत ज़ोरों से धड़क रहा था ....... वो आपने आप से कहने लगे.. मैंने ये कैसे सोच लिया और कह भी दिया की मई कुछ और hi समाज रही थी.. आरती को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो उसके इन बातों का क्या जवाब दे ...... वो ाचे से उसके कहे हुए बाटिओं का मतलब समझ रही थी की वो उससे क्या कहलवाना चाहता hain..................jise कहना उसके मर्यादा के खिलाफ था ....................

नवाज़ ने फिर से एक बार पूछा तो.. . आरती हड़बड़ाते हुए धीरे से बोल पड़ी..

मई तो वो बस ऐसे hi.........

ऐसा कहते हु आरती ने शर्म से अपनी नज़रें नीचे झुका ली ......

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वहीँ आरती का जवाब सुनकर नवाज़ का चेहरा खिल उठा…

नवाज़ उसके चेहरे को बड़े गौर से पढ़ने की कोशिश कर रहा था ....... शायद वो आरती के ख़ामोशी को समझ भी गया tha.........waise भी उसकी नज़र आरती पर thi........use तो बस एक मौका चाहिए था .. उसके साथ बात करने का......... उसके नज़दीक जाने का .. और शायद अब वो मौका उसे मिल गया था ..

नवाज़ के चेहरे पर अभी भी भद्दी सी एक हंसी थी ............. और इधर दूसरे तरफ शर्म के मरे आरती उससे अपनी नज़रें नहीं मिला पा रही थी ........

आप तो बस क्या मेमसाब..

नवाज़ की नज़र अभी भी आरती के चेहरे पर hi तिकी हुई थी ..... वहीँ आरती नीचे देखते हुई मंद मंद मुस्कुरा रही थी … शायद उसके दिमाग में इस वक़्त कुछ चल रहा था....... उसने कुछ सोचा और जैसे तैसे अपनी बात कहने लगे ........................

मई ये सोच रही थी की कोनसे कमरे से सुरु किया जय…

ऐसे कहते हुई आरती ने बात hi पलट डाली.. यही आरती सोच रही थी... और सोच कर मुस्कुरारा रही थी... ये बात नवाज़ समाज गया.. और मैं मई कहने लगा..

लौंडे बहुत चालू है. .

ऐसा सोचते हुई बुरा सा मू बनाते हुई कहता है

ूहू ऐसा क्या

नवाज़ की हालत देखते हुई आरती मुस्कुराते हुई कहते है. .

हाँ
 
मई ये सोच रही थी की कोनसे कमरे से सुरु किया जय…

ऐसे कहते हुई आरती ने बात hi पलट डाली.. यही आरती सोच रही थी... और सोच कर मुस्कुरारा रही थी... ये बात नवाज़ समाज गया.. और मैं मई कहने लगा..

लौंडे बहुत चालू है. .

ऐसा सोचते हुई बुरा सा मू बनाते हुई कहता है

ूहू ऐसा क्या

नवाज़ की हालत देखते हुई आरती मुस्कुराते हुई कहते है. .

हाँ

तभी नवाज़ की नज़र आरती के छथि पाई गए.. वह साड़ी का पल्लू थोड़ा साइड मई गया था इस वजह से उसके आम का क्लीवेज नवाज़ को दिखने लगा.. .

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पक्का आप यही सोच रही थी मेमसाब

आरती के सीने को घूरते हुए उसने ये बात बोली.......

हाँ जी. . . तुम कोई शक है क्या.. .

नहीं न मेमसाब. . मुझे क्यों शक होगा..

ऐसा बोलते हुई उसके कहते को घूरने लगा... तब आरती सोचने लगे ये कहा देख रहा hai...usne नवाज़ के नज़र का पीछा किया तो उसे सब पता चला.. उसने झट से आपने साडी का पल्लू ठीक किया.. और मैं मई सोचने लगे..

ये कमीना आपने आदत से बाज़ नहीं आएगा.. .मुझे ऐसा देख रहा है की जैसे मैं अभी उसके सामने पूरी नंगी कड़ी हूँ...... कमीना साला... इस कमीने की नज़रें मुझे पल पल नंगा करती जा रही hai.......Iski नज़रें मेरे कपड़ों के अंदर पल पल झाँकने की कोशिश में रहती है ....

यही सोचते हुई एक बार फिर गुस्से से आरती का चेहरा लाल पढ़ गया .........

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फिर वो गुस्से से नवाज़ को कहती है

क्या देख रहे थे तुम

कुछ तो नहीं

देख रहे थे तुम

नहीं देख रहा था मेमसाब मई… आप hi बताओ… क्या देख रहा था मई..

तब आरती आपने बूब्स की तरफ देखती है.. और जल्दबाज़ी मई कहती है..

देख रहे थे और वो भी ी…. .

और रुक जाती है.. उसे समाज आ जाता है की वो क्या बोलने वाली थी…

क्या देख रहा था में

कुछ नहीं

वही तो मई बोल रहा था

नवाज़ के कहने के बाद आरती क्या कहती.. वो तो ये नहीं कह सकती की तुम मेरे बूब्स को देख रहे थे. . वो इस वजह से चुप हो जाती है.. नवाज़ भी ये अच्छे से जनता था की आरती ये नहीं कह सकती.. .

आरती कुछ पल तक नवाज़ की बात को सुनकर खामोश रही ...... और फिर कुछ पल के बाद बोल पड़े. .

तुम कुछ कह रहे the..Kuch पल पहले..

कब और क्या

नीता थी तब. . ये कॉक ठीक करने का कुछ प्लान था तुम्हारे पास..

हाँ है न

तो बोलो न

बताऊंगा तो क्या मिलेगा मुझे

आपने फेस थोड़े आगे करते हुई.. आरती के चेहरे की taraf..tab आरती नवाज़ की तरफ देखते हुई कहते है..

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चलो हटो बदमाश .. थोड़ा पीछे हो जाओ..

तब आरती की बायत न सुनते हुई नवाज़ कहता है..

बताओ न जी .. मेमसाब जी मई आईडिया दूंगा तो मेरा क्या फायदा होगा

तब नखरा दिखते हुई अड्डा के साथ आरती कहती है. .

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तुम्हारा फायदा? ? ?

हाँ?? मेमसाब??

तब आरती शरमाते हुए आपने बाल बांधने का नाटक करते हुई धीरे से बोल पड़ती है ..

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तुम क्या चाहिए मुझसे??

आरती ये आहिस्ता से बोल पड़ी .... सच तो ये था की उसका दिल इस वक़्त बहुत ज़ोरों से धड़क रहा था ये सब कहते हुई.. उसने आज तक किसी को ऐसे डायरेक्टली नहीं कहा था..

वहीँ आरती के मुँह से ऐसी बात को सुनकर पहले तो नवाज़ के चेहरे पर एक अजीब सी चमक आ गयी ...... और नवाज़ के लुंड में एक तेज़्ज़ अंगड़ाई होनी शुरू हो गयी ... पर बाद मई आरती के ऐसे डायरेक्ट कहने से नवाज़ सोच मई पद जाता है. . नवाज़ ने सोचा भी नहीं था आरती डायरेक्टली ऐसा पूछ लगे.. उस वजह से नवाज़ शांत हो जाता है और सोचने लगता है की अब आगे इस लौंडे को क्या कहु.. अब आगे क्या करू.. कैसे आगे बदु..

तब आरती एएब्रोस उड़ाते हुई कहती है

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बोलो नवाज़ क्या चाहिए मुझसे तुम

नवाज़ हड़बड़ाते हुई कहता है

मुझे न... . . मुझे न...

आरती थोड़ा आगे फेस करती है नवाज़ के चहरे की तरफ और बड़े धीरे से प्यार से उसके शर्ट की कालर पकड़ लेते है..

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उस वजह से नवाज़ थोड़ा दर जाता है.. कालर पकड़ के उसको थोड़ा आपने और खिंच के कहते है.. प्यार से

तुमने मेरे बारे मई ऐसा वैसा कुछ सोचा नहीं न .. नवाज़ ..

तब नवाज़ न मई गर्दन हिलता है

तब उसके कालर चोर के पीछे हो जाते है और बड़े प्यार से अड्डा के साथ कहते है. .

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अच्छा है. . सोचो भी मत ... बी थे वे तुम कहना क्या चाहते थे .. क्या चाहिए तुम मुझसे...

मेरा जी तो बहुत कुछ चाहता है आपसे …

क्या चाहता है तुम्हारा जी

चाहता तो बहुत कुछ पर

पर क्या जी

मगर डरता हूँ की कहीं अगर आप बुरा मान जाएँगी तो ..... मुझ जैसे गरीब का फिर क्या होगा .........

और नवाज़ इतना कहकर हौले से मुस्कुरा देता है

अच्छा जी... मई बुरा मान जाउंगी..

हाँ मेमसाब

मई बुरा मान जाउंगी तो क्या होगा

तो क्या होगा??

हाँ तो क्या होगा? तुम बताओ नवाज़..
 
मगर डरता हूँ की कहीं अगर आप बुरा मान जाएँगी तो ..... मुझ जैसे गरीब का फिर क्या होगा .........

और नवाज़ इतना कहकर हौले से मुस्कुरा देता है

तब नवाज़ को आपने सेक्सी लुक देते हुई कहते है...

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अच्छा जी... मई बुरा मान जाउंगी..

हाँ मेमसाब

मई बुरा मान जाउंगी तो क्या होगा

तो क्या होगा??

हाँ तो क्या होगा? तुम बताओ नवाज़..

कुछ नहीं होगा.. इतने मस्त खूबसूरत मेमसाब से बात करने का.. इतने नज़दीक आने का मौका हाथ से चला जायेगा..

तब नखरे से कहती है.. उसको और देखते हुई..

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अच्छा जी .. और मैं क्यों भला बुरा मॉंगी ................

जोश जोश मई उसकी आँख बंद हो जाती है.. आरती जरा फॉर्म मई आ गयी थी ..

बुरा मानाने की बात होंगे तो

तब मान सकती हु .. .. पर तुमने ऐसा क्यों पूछा ...

तब नवाज़ आरती के थोड़ा नज़दीक आ जाता है.. अब उसका फेस आरती के फेस के और करीब आ चूका था.. डिस्टेंस तो नवाज़ ने रखा था पर इतना भी ज्यादा नहीं .. जितना डिस्टेंस रखना चाहिए उतना डिस्टेंस उन दोनों के बीच अब नहीं था.. वो अब चुप चाप से खड़ा हो गया था ... आपने फेस उसके फेस के करीब लेकर वो उसके सामने खड़ा था ... जब की आरती किचन प्लेटफार्म को सत् के खड़े थी ...

नवाज़ आरती को देखता हुआ मंद मंद मुस्कुराने लगा ....और साथ hi साथ टकटकी लगाए आरती को अजीब सी नज़रो से घूरने लगा था ..... वही आरती एक नज़र जब नवाज़ के चेहरे की तरफ देखती हैं तब नवाज़ जिस तरीके से वो उसको देख रहा था उस वजह से अगले hi पल वो अपनी नज़रे नीचे की तरफ झुका लेती हैं...............

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तब नवाज़ मुस्कुराता हुई कहता है

मई तो ऐसे hi पूछ रहा था अगर मैं प्लान दूंगा तो मुझे क्या मिलेगा

वहीँ आरती शर्म से अब तक अपनी नज़रे नीची की तरफ झुकाये खड़े थी ..... वो बहुत ाचे से नवाज़ के शब्दों का मतलब समझ रही थी ...... वो आपने चेहरा अब उप्पर करती है और नवाज़ की आँखों मई देखते है...

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अच्छा जी.. तुमने ऐसे hi कहा..

हाँ मेमसाब. .

तुम्हारे इस कहने के पीछे कोई मकसद नहीं था..

नहीं मेमसाब..

सच्ची

हाँ मेमसाब .. मेरा क्या मकसद हो सकता है. . मेरे जैसे एक गरीब का भला ..

तब नवाज़ को देख कर कहते है

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उसके आँखों मई एक मादक अड्डा थी

मई तुम्हारे जैसे गरीब को अच्छे से जानती हु और उसके मकसद को पचन्ति भी हु..

ऐसा क्या मेमसाब

हाँ

तो क्या मकसद होता है मेरे जैसे गरीब का

जो तुम भी जानते हो

मई तो कुछ नहीं जनता मेमसाब. . मई तो एक भोला भला गरीब इंसान हु. . जो आप जैसे अमीरो के यहाँ छोटा मोटा काम करके आपने गुजरा कर रहा हु

आरती इस पर मुस्कुराने लगती है..

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और. .

और क्या मेमसाब

और कुछ नहीं ...

आपने और कहा न इसलिए पूछा ..

तब नवाज़ की आँखों मई देखते हुई आरती कहती है

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और उस आमिर घर के भोली भली लड़की और औरत को आपने जाल मई फंसना

आरती ठीक उसके सामने कड़ी थी …उसकी आँखों मई देखते हुई उसने ये कहा था ..

मई ऐसा हु क्या मेमसाब

मुझे क्या पता

तो आपने ऐसे क्यों कहा .. पता नहीं है तो ..

मैंने तुम्हारे बारे मई नहीं कहा .. तुम्हारे जैसे भोले भले गरीबो के बारे मई कहा

ऐसा क्या

हाँ जी

उसकी नज़र ठीक उसके चूचियों पर thi..nawaz के ऐसे करने से आरती उसकी तरफ गुस्से से देखने लगी …….

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और गुस्से से वो बोल पड़ती है .................

" ये क्या बढ़तमीज़ी हैं ..... ये सब करना हो तो नीता के साथ करो.. यहाँ नहीं!!!!!! जाओ उसके पास .. और उसके साथ करो.. जो करना चाहते हो "...
 
उसकी नज़र ठीक उसके चूचियों पर thi..nawaz के ऐसे करने से आरती उसकी तरफ गुस्से से देखने लगी …….

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और गुस्से से वो बोल पड़ती है .................

" ये क्या बढ़तमीज़ी हैं ..... ये सब करना हो तो नीता के साथ करो.. यहाँ नहीं!!!!!! जाओ उसके पास .. और उसके साथ करो.. जो करना चाहते हो "

ऐसे तैसे अपनी सांस संभालती हुई गुस्से से आरती बोल पड़ी ....... पर उसकी आवाज़ में न तो वो बात थी और न ताक़त थी जिससे नवाज़ पर कोई डर या फर्क पड़ता ....... इतना कुछ करने के बाद भी आरती ज्यादा गुस्सा नहीं हुई.. उसपे चिलए नहीं.. थोड़ा बहुत बोलै पर उसमे कुछ डैम नहीं था.. उसके चहरे पर गुस्सा दिख रहा तह .. पर उसमे वो बात नहीं थी ..

ये सब नवाज़ आरती को देखते हुई सोचने लगा .. इस वजह से उसकी हिम्मत और भी बढ़ चुकी थी...............

इधर आरती ने कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं दी और जैसी वो कड़ी थी वैसे hi बस कड़ी rahi............aur नवाज़ को देखने लगे..

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उसने न नवाज़ को पीछे जाने को कहा और न hi उसके चहरे पर नवाज़ के इस हरकत को लेके गुस्सा था.. ये वो क्यों कर रही थी ये वो खुद भी नहीं जानती थी..

इतना कुछ होने के बाद आरती खुद को नार्मल दिखा रही थी .. पर वो नार्मल नहीं थी.. वहीँ नवाज़ उसकी तरफ टकटकी लगाए बस देकता रहा और उसकी नज़रें आरती के दोनों चूचियों पर आकर जैसे ठहर गयी .... लुम्बी लुम्बी सांस लेने की वजह से उसके ये दोनों बड़ी बड़ी चूचियां तेज़ी से ऊपर नीचे की तरफ हो रही थी जिससे नवाज़ के लुंड में फिर से हलचल होनी शुरू हो गयी थी..... वो ललचायी हुई नज़रों से आरती के दोनों चूचियों को बस घूरे जा रहा था मनो आरती को कहना चाह रहा हो की इसका रूस पीला दो और इसको अपने कठोर हाथों से बस मसलता रहूं ....

आरती जानती थी की नवाज़ क्या देख रहा है पर उसने फिर से कुछ नहीं कहा.. शायद उसे अब नवाज़ की ये गन्दी नज़र भी ाची लग रही थी..................

इधर नवाज़ अब भी बस उसकी चूचियों को जी भरकर बस घूरते जा रहा था .......जब से उसने आरती को देखा था तब से उसे आरती को पाने की चाहत थी जो अब पूरी होती दिख रही थी ..... और इतना सुनेहरा मौका नवाज़ भला कैसे अपने हाथ से जाने दे सकता था ...... सच तो ये था की अब नवाज़ का साबरा टूटने लगा tha....wo अब एक पल का देर और नहीं करना चाहता था..........

अब उसके बूब्स को नवाज़ घर रहा था फिर भी आरती कुछ नहीं कह रही थी ... सिर्फ नवाज़ को वो देख रही थी ..

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नवाज़ भी उसे hi देख रहा था.. तब नवाज़ ने मुस्कुराते हुई आरती की आँखों में देखा और शरारती अंदाज़ में धीरे से बोल पड़ा ....

आप ने नहीं बताया मुझे क्या मिलेगा..

इस पर आरती कुछ नहीं कहती.. और शर्माकर अपनी गर्दन निचे करती है..

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नवाज़ उसकी अंदर छुपी हुई वासना को जगाने की कोशिश कर रहा था.. आरती कुछ कह नहीं रही थी न hi उसे ओपपोसे कर रही थी.. वो तो बस नीचे गर्दन कर के शर्मा रही थी और आपने भवनों को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रही थी.. आरती कोई ओपपोसे नहीं कर रही है ये जान कर नवाज़ का हौसला अब बाद गया tha..tab आपने फेस उसके फेस के बहुत करीब लता है..
 
नवाज़ उसकी अंदर छुपी हुई वासना को जगाने की कोशिश कर रहा था.. आरती कुछ कह नहीं रही थी न hi उसे ओपपोसे कर रही थी.. वो तो बस नीचे गर्दन कर के शर्मा रही थी और आपने भवनों को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रही थी.. आरती कोई ओपपोसे नहीं कर रही है ये जान कर नवाज़ का हौसला अब बाद गया tha..tab आपने फेस उसके फेस के बहुत करीब लता है.. और उसका एक हाथ पकड़ लेता है..

नवाज़ ने उसका हाथ पकड़ते hi वो आपने गर्दन उप्पर उठा लेती है.. और उसके आँखों मई देखते है ..

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और उसके आँखों मई देखते हुई उसके हाट से आपने हाथ को चुरा लेके उसके दोनों शोल्डर को पकड़ लेती है.. उसके ऐसे देखने से और उसके शोल्डर को पकड़ने से नवाज़ को लगाने लगा की वो भी रेडी है .. इसी सोच मई उसको देखते हुई नवाज़ कहता है..

बताइये न मेमसाब मुझे क्या मिलेगा..

पर नवाज़ के सोच पर उसे गुस्सा आ जाता है.. वो उसे गुस्से से देखते है..

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वो सोचते है सेल को क्या मिल रहा है इसमे इंटरेस्ट नहीं है पर क्या मिलने वाला है ये मेरे मू से सुनना चाहता है.. नीता मिल रही है और वो वंदना भी मिल चुकी है .. और मई इसे इतने अच्छे से बाते कर रही हु पर उसे और ज्यादा चाहिए .. इसको तो अब सिर्फ नाश्ता hi मिलेगा .. िस्ससि लायक है ये लोफर .. यही सोच कर आरती आपने चहरे पर मुस्कराहट लेट हुई उसके शोल्डर पकड़ कर जोर से पीछे धकेल देती है.. और हसने लगती है

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और हस्ताते हुई कहते है

नाश्ता

आरती ने जब उसे जोर से धकेला था इस वजह से वो पीछे फ्रीज पाई जेक गिर जाता है .. वो कैसे तो आपने आप को संभालते हुई उठता hai..aur आरती के तरफ देखते हुई कहता है. ..

क्या??

नाश्ता.. मिलेगा तुम ...

एएब्रो उड़ाते हुई चेहरा और आँखों से इशारा करते हुई आरती कहते है...

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आरती ने जैसे hi ये कहा वो हसने लगे ...

आरती के इस जवाब ने नवाज़ के मूड की ऐसे के तैसे हो गए.. उसे लगा था आरती अब लाइन पाई आ रही है.. मुझे डरा रही है पर मैंने जब इसके फेस के नज़दीक आपने चेहरा आगे किया था इसने कुछ नहीं कहा .. पर आरती तो उसके साथ मज़ाक कर रही थी. . अब नवाज़ का मू देखने लायक हो गया था..

एक तो अब आरती ने जो मूड ऑफ किया था उस वजह से नवाज़ परेशान था और फ्रीज पर गिराने की वजह से उसके सर पाई और माथे पर हल्का सा लगा था .. इस वजह माथा हल्का सा दुःख रहा था.. इसलिए वह वो आपने हाथ से मालिश करने लगा..

आरती को तब लगा नवाज़ को फ्रीज लगा है.. इस लिए वो उसके पास गए और पूछने लगे..

कहा लगा है..

तब नवाज़ ने आपने माथे की तरफ इशारा किया.. तब आरती आपने को थोड़ा उप्पर उठाये और उसके माथे पर हलकी से फूक मरने लगे..

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उस वजह से नवाज़ को थोड़े ठंडक मिली.. अब वो आपने हाथो से वह मालिश करने लगे.. तब नवाज़ कहने लगा..

खुद hi जखम देती हो और खुद hi मलम लगते हो

तब आरती कहती है

सच मई नवाज़ ..मुझे कोई आईडिया नहीं थी की मेरे पुश करने से तुम पीछे फ्रीज पाई गिर जाओगे और तुम लग जायेगा

ऐसा बोल के आरती फिर से एक बार उसके माथे पर फूख मरती है .. उसके लिए चेहरा उसके चहरे के करीब लेट है तब नवाज़ कहता है

नज़दीक से और hi ज्यादा खूबसूरत लग रही हो आप

तब शरमाते हुई आरती कहती है

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चल हैट बदमाश !!

तब नवाज़ कहता है

सच कह रहा हु मेमसाब

तब उसको आपने सेक्सी लुक देते हुई आरती कहते है

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मुझे नहीं पता ..

तब नवाज़ कहता है

मेमसाब सच में आप इस साडी मई बेहद खूबसूरत लग रही हो .....

तब स्माइल करते हुई कहते है

अच्छा

हां मेमसाब

इतना लगा है फिर भी तुम्हारे हरकते ऐसे है

आप के सामने इतनी छोटी मोठी जखम हमारा क्या बिगड़ लेगी मेमसाब

अच्छा जी

तुम शर्म नहीं आती

अब इसमे क्या शर्म

तब आरती नवाज़ के शोल्डर पर हल्का सा मरकर स्माइल करती है और पीछे हैट जाती hai..aur एक जगह पर बैठ जाती है ..और उसको देखते हुई कहते है..

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तुम जो मेरे साथ कर रहे हो मई उसके बारे मई बोल रही हु ..

मैंने क्या किया आप के साथ

ऐसा बोल के नवाज़ आरती जहा बैठी थी वह चला जाता है

तुम मेरे साथ क्या कर रहे हो ये तुम नहीं पता क्या

बिलकुल नहीं

अच्छा जी

हां मेमसाब

तब नखरे से आरती कहती है

क्या तुम मेरे साथ फ्लेर्टिंग नहीं कर रहे हो

बिलकुल नहीं

तो मेरे खूबसूरती की तारीफ़

आरती आगे कुछ बोलती है उससे पहले hi नवाज़ कहता है

अगर कोई लड़का किसी लड़के या औरत के खूबसूरती की तारीफ करता है तो इसका ये तो मतलब नहीं होता की वो उसके साथ फ्लेर्टिंग कर रहा है

तब आरती स्माइल करते हुई कहते है.. उसकी और देखते हुई

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बात तो तुम्हारी सच है नवाज़ ..

इसलिए तो कह रहा हु मेमसाब.. इस साडी पाई आप बहुत खूबसूरत लग रही हो

ऐसा बोल के निचे जुख के उसके साड़ी का पल्लू थोड़ा पकड़ लेता है

तब नखरा दिखते हुई कहते है

अच्छा जी .. मतलब पहले मई तुम खूबसूरत नहीं लग रही थी ..

ऐसा बोल के उसके हाट से आपने साडी का पल्लू निकल लेती है

वो बात नहीं है

तो क्या मेरे वो साड़ी या ड्रेस तुम पसंद नहीं आया या उसपर मई तुम खूबसूरत नहीं लग रही थी ..

यही बात थोड़े देर पहले नीता और नवाज़ की हुई थी तब आरती है रही थी और अब उसी सवाल पर नवाज़ को नखरा दिखा रही थी ..

बात वो नहीं है

तो क्या बात है

आप मुझे पहले दिन से खूबसूरत लग रही थी ..

तब स्माइल करते हुई कहते है

मतलब जब पहले तुमने मुझे देखा तब से तुम्हारी मुज पर नज़र थी

हां मेमसाब पर ये साडी आप पाई बहुत जज रही है .. ये साड़ी आपके खूबसूरती पर चार चाँद लगा रही है ..

तब शर्मा के आरती कहते है

और नीता ने पहने होती तो

नहीं

और वंदना

आप को कैसे पता वंदना के बारे मई

मेरे बंगलो मई गन्दा काम करोगे और मुझे पता नहीं चलेगा

मेमसाब वही मुझे मिलाने को आयी थी

तब शर्मा के आरती कहते है

तो सिर्फ मिलाना hi था न

तो सिर्फ मिला hi .. और कुछ नहीं

अच्छा जी मेरे से झूठ

अब थोड़ा बहुत झूठ चलता है न मेमसाब

मैंने सोचा था तुम बोहत अचे इंसान हो लेकिन तुमने नीता के भरोसे का फायदा उठाकर ये सब किया …

मेमसाब नीता को मत बताना उसको कुछ पता नहीं है

तुम शर्म नहीं आयी नीता के

साथ ऐसा करते हुई .. वो बेचारे तुम कितना प्यार करती हो और तुम hi की किसी दूसरे लड़की के साथ

मई भी उसे प्यार करता हुआ

ऐसा प्यार
 
मैंने सोचा था तुम बोहत अचे इंसान हो लेकिन तुमने नीता के भरोसे का फायदा उठाकर ये सब किया …

मेमसाब नीता को मत बताना उसको कुछ पता नहीं है

तुम शर्म नहीं आयी नीता के साथ ऐसा करते हुई .. वो बेचारे तुम कितना प्यार करती हो और तुम हो की किसी दूसरे लड़की के साथ

मई भी उसे प्यार करता हु

ऐसा प्यार

तभी नीता वह आ गए ..

हो गया क्या नाश्ता .. नवाज ..

तब नवाज झट से पीछे हैट जाता है .. और आरती पीछे घूम के आपने साडी और बाल ठीक कर लेती है ..

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हो गया होगा .. इतने देर मई ..

शेठ जी पीछे से आके पानी पिटे हुई कहते है ..

तब आरती घूम जाती है और नवाज़ की तरफ देखने लगती है ..

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नवाज़ भी उसको hi देखे जा रहा था .. तब झट से शेठ जी कहते है ..

नीता .. तुम जाओ इस लड़के को लेके ..और काम का रूम दिखा दो .. और तुम लड़के अच्छे से रूम की सफाये करो ..

जी शेठ जी ..

दोनों ने एक साथ कहा और किचन से बहार चले गए ..

वो जाने के बाद शेठ जी भी किचन से चले गए और बहार जेक नेवसपपेर पड़ने बैठ गए .. इधर किचन मई आरती अकेले चौथा मोटा काम करने लगे .. काम करते हुई आरती मैं मई सोचते है..

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कमीना मेरे कितने करीब आया था .. पर उस वक़्त उसको दुर्र हटाने को या दुर्र हैट जा ऐसा कहने को मेरा मैं नहीं कर रहा था .. मेरी नज़रें एक पल के लिए भी नवाज़ से हटाए नहीं हुत्त रही थी....... जो भी है जैसा भी hai.......magar कुछ तो बात है इस कमीने में........... जो मैं चाह कर भी उसे कुछ बोल नहीं पा रही थी .....एक अजीब सी डोर मुझे बार बार उसकी तरफ खींच रही थी ...... और ये कमीना इससे अच्छे से जान गया था . इस लिए तो ये कमीना है.. और इसका ये अच्छे से फायदा उठा रहा था .. कितना करीब आ गया था मेरे.. जैसे मेरा हस्बैंड hi हो.. 420 साला.. पहले अपनी ऐसे चिकनी चोपड़े शब्दों से नीता को फसाया .. वंदना को फसाया.. और अब मुझे फ़साने की कोशिश कर रहा है.. देखते हु आगे और क्या क्या करता है मेरे साथ..

फिर आपने काम करने लगी .. काम ख़तम होने के बाद वो दोपहर का खाना बनाने लगे .. नीता अभी तक वापिस नहीं आये थी .. वो नवाज़ के साथ hi थी..

अब दोपहर का टाइम हो गया था .. कुछ 2-3 बजे होंगे ..

जैसे तैसे वो खाना बना लेती hain..tabhi उसका ससुर बहार से आवाज देता है

आरती बीटा खाना तैयार हो गया क्या

हाँ पापा

परोस दो मुझे

फिर आरती आपने ससुर को खाना परोस देती है और फिर उसका ससुर दिंनिंग टेबल पाई बैठ के खाना खाने लगता है.. तब उसे याद आता है तब वो आरती को कहता है..

आरती बीटा

इतने देर तक आरती गुमसुम वह किचन मई खड़े थी .. आपने सोच विचार mai..aapne ससुर के आवाज से उसकी नींद टूटते है और वो झट से बोलती है..

हाँ पापा जी

तुमने खाना खा लिया

आपका होते hi खा लुंगी..

और उन दोनों ने

अभी hi आरती नवाज़ के बारे मई सोच रही थी..

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आपने ससुर क्या बोल रहा है उसपर उसका ध्यान नहीं था .. आपने ससुर के सवाल का उसने कोई जवाब नहीं दिया तो फिर से उसके ससुर ने उसे पूछा

उन्दोनो ने खा लिया

आरती समाज नहीं प् रही थी की किन दोनों की बात पापा जी कर रहे है .. वो झट से कहते है

कोण दोनों पापा जी

तब आरती का ससुर उसकी तरफ देखने लगा..

तुम्हारे तबियत तो ठीक है न

आरती बीटा

हाँ ठीक है..

क्या सोच विचार मई हो

कुछ नहीं पापा जी

कुछ तो सोच रही हो

नहीं न पापा जी

तब हस्ते हुई शेठ जी कहते है

मायके जाना है क्या

तब स्माइल करते हुई कहते है

नहीं na..aabhi तो आये हु

तो क्या अरविन्द ने कुछ कहा क्या

नहीं

जगदा हो गया है क्या अरविन्द क साथ

नहीं न पापा ji..wo कुछ कहते है क्या muje..jagade की तो कोई बात hi नहीं hai..par आप को ऐसा क्यों लग रहा है पापा जी..

क्यों की मई कब से देख रहा हु तुम घूम शूम से ho..mere बात पर ध्यान भी नहीं है..

तब आरती मैं मई गालिया देने लगती है..

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कमीना sala..iski वजह से ये सब कुछ हो रहा hai..mere दिलो दिमाख मई चाय हुआ है.. हरामी.. साला ..

आरती अब आपने ससुर की तरफ देखते हुई कहते है..

नहीं ऐसे कोई बात नहीं hai..mera पूरा ध्या आप की तरफ hi है..

तब बताओ मैंने क्या कहा था तुम थोड़े देर पहले

शेठ जी के ऐसे कहने पर आरती सोचने lage..innone क्या कहा था मुझे..

आरती के ऐसे सोचने पर शेठ जी कहते है..

इसलिए मई कह रहा था तुम्हारा पूरा ध्यान नहीं है .. शायद तुम्हारे तबियत ठीक नहीं है..

नहीं वैसे बात नहीं है.. सिर्फ थोड़ा सरदर्द कर रहा है..

तो जेक आराम करो..

अच्छा करती हु..

पर पहले खाना खा लो

आप के होते hi खा लुंगी

मेरे होते हुई नहीं पहले खाना खा लो

हाँ खा लुंगी

वैसे वो कामचोर किदार गए.. दिख नहीं रहे है..

तब आरती थोड़ा सा स्माइल करती हुई कहते है..

उस नए लड़के के साथ गए है ..

आरती का उसका नाम लेने का मूड नहीं था ..

उस नवाज के साथ

हाँ

इतने देर तक

हाँ मैंने थो उसको रूम दिखने को बोलै था पर अभी तक नहीं आये

शयद उसको काम मई हेल्प कर रही होंगे

हम्म्म

वैसे आरती बीटा वो नया लड़का कैसा है

अब एआरटी सोचते है

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अब क्या बोलू पापा जी वो एक नंबर का लफंगा है.. जब से आया है तब से आप के बहु के पीछे पड़ा है..

आरती कुछ बोलने वाली थी उससे पहले hi शेठ जी बोले

वैसे तुम भी कैसे पता होता.. इतने देर तक वो किचन मई hi था.. तुमने काम कहा देखा है..

हम्म्म

वैसे तुम्हारे तबियत ठीक नहीं है नहीं तो मई तुम कहने वाला था तुम्हारे खाने के बाद जरा तुम जेक देख के आओ की उस कामचोर और नवाज़ ने काम कैसा किया है या अभी तक टाइमपास hi कर रहे है..

तब आरती झट से बोलती है

मई देख लुंगी पापाजी

अरे रहने दो आज.. कल देख लेना.. चामरे तबियत ठीक नहीं है..

नहीं नहीं ऐसे कोई बड़े बात नहीं है.. सिर्फ थोड़ा सरदर्द कर रहा है

पक्का

हाँ पापाजी..

फिर वो दोनों खाना खाने लगे.. कुछ देर बाद आरती को कुछ याद आया..

वैसे पापाजी आप क्या कह रहे थे..

मई…

थोड़ा सोकहने के बाद शेठ जी कहने लगे.

ारे मई खाने मई और आपने बातो मई भूल hi गया..

क्या पापा जी

उन्दोनो के खाने का क्या.. उनोने खा लिया या नहीं

तब आरती सोचते है.. और धीरे से बोलते है..

मई तो भूल hi gaye..Kya उनका खाना बनाया है या नहीं

बनाया है बनाया है.. सिर्फ उनको बोलना भूल गए.. टाइम भी काफी हो गया है.. शयद 2_3 बज गए है.. उन दोनों को भूख लगे होंगे

हाँ बीटा.. एक काम करो तुम उस कामचोर को यही विंडो से आवाज दो.. आवाज पहुँच जायेगे तो वो आ जायेगे और खाना लेके जायेगे

आरती सोचते है यही ठीक रहेगा.. नहीं तो मई बुलाने जाउंगी तो वो दोनों किस हालत मई उस वक़्त होंगे पता नहीं और मुझे सामने देखने के बाद वो कमीना कुछ न कुछ गलत हरकत करेगा.. और मुझे आपने जाल मई खींचेगा.. साला कमीना बहुत चालू है.. और उसके ऐसे गंदे हरकत से वो मेरे अन्दर की आग को भड़का देता है और मई उसकी और खींची चली जाती हु..

क्या सोच रही हु बीटा

मई ऐसा hi करती हु

ठीक है.. वैसा hi करना.. आराम से खाना खाओ.. उस के बाद उस कामचोर को बुला के खाना दो और फिर कुछ देर आराम करने के बाद hi वह जाओ.. वो क्या काम कर रहे है वो देखो.. अब मेरा हो गया है.. अब मई जा रहा हु आपने रूम मई.. आराम करने..

अच्छा पापा.. आप आराम करो.. मई देखते हु यहाँ का सब

Ok

और फिर शेठ जी किचन से चले जाते है.. उसके बाद आरती सोचते सोचते खाना खा लेते है.. खाना खाने के बाद वो विंडो के पास आती है और नीता को आवाज देते है.. पर उसके तरफ से कोई रिप्लाई नहीं था..

तब आरती सोचने लगती है.. सेल इन् दोनों को मेरे आवाज़ जा रही है या नहीं ये भी पता नहीं है या ये सो गए उस रूम मई.. क्या करू मई.. फिर खुद को कहते है.. कुछ और आवाज़ लगाती हु.. सेल ये जवाब क्यों नहीं दे रहे है..
 
और फिर शेठ जी किचन से चले जाते है.. उसके बाद आरती सोचते सोचते खाना खा लेते है.. खाना खाने के बाद वो विंडो के पास आती है और नीता को आवाज देते है .. पर उसके तरफ से कोई रिप्लाई नहीं था..

तब आरती सोचने लगती है.. सेल इन् दोनों को मेरे आवाज़ जा रही है या नहीं ये भी पता नहीं है या ये सो गए उस रूम मई.. क्या करू मई.. फिर खुद को कहते है.. कुछ और आवाज़ लगाती हु .. ऐसा कह के वो नीता को आवाज़ लगाती है

सेल ये जवाब क्यों नहीं दे रहे hai..tab आरती सोचने लगती है.. क्या करू मई.. फिर खुद को कहते है.. कुछ और आवाज़ लगाती हु ... वैसे hi वो आवाज़ लगाती है.. पर सामने से कोई जवाब नहीं aata..phir वो थोड़े गुस्से से कहते है..

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सेल ये दोनों जवाब क्यों नहीं दे रहे है..

अब वो किचन मई का आपने बचा हुआ काम खरते हुई नवाज़ और नीता क्या कर रहे होंगे यही सोचते है.. अब उसका किचन मई का काम ख़तम हो चूका tha..kaam ख़तम करने के बाद आरती सोचते है अब नीता और नवाज़ के पास जेक वो क्या कर रहे है ये जेक देखते hu..jo काम उन दोनों को बोलै है वही काम कर रहे या आपने hi काम कर रहे है… ऐसा सोचते हु हलकी सी स्माइल उसके चहरे पर आ जाती है..

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यही सोचकर वो किचन से बहार हॉल मई आ जाती है.. आरती हाल मई आकर सोफे पाई बैठ जाती है

सोफे पाई बैठ कर आरती नीता और नवाज़ के बारे मई सोच रही थी. जबकि इधर नीता और नवाज़ मज़े कर रहे थे...

जब किचन से निकल कर नवाज़ और नीता इस रूम मई आये तब अन्दर आते hi नीता को साबरा नहीं हुआ और उसने नवाज़ को गले से लगा liya..Nawaz को आरती ने बहुत गरम किया था.. इस वजह से जब नीता उसके गले लग गए थे तब वो बहुत कुश हो गया ..

इधर नवाज़ के बारे मई सोचते हुई अब आरती अपनी गर्दन सोफे के पिछले वाले हिस्से पर रखते hai...aur आपने आँखे बंद करते है..

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सोचते हुई आरती खुद से कहने लगे..

मुझे यकीन करना मुश्किल हो रहा है की मेरे साथ मेरे hi घर में वो इतने काम टाइम में मेरे इतने करीब आया .. उसने ये सब कुछ किया और तो और मैं भी उसकी हरकत से अपने आप पर काबू नहीं रख पायी. वो फिर नवाज़ को गाली देती जा रही थी.

कमीना.. हरामी साला..

उसके आँखों मई लगभग आंसू आ गए थे..

वो फिर कहने लगे..

मुझे बोहोत बुरा लग रहा है की अरविन्द की बीवी होने के बाद भी मैंने अपने इतने क्लोज उसे आने दिया.

फिर वो सोकहने लगे..

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ये सोचते हुई उसका बदन बुरी तरह से thar-thar काँप रहा था. उसे अभी भी अपने हातो मई नवाज़ ने उसका जो हाथ लिया था वो महसूस हो रहा था ..

कमीना साला अब उधर नीता के साथ मज़े कर रहा होगा और इधर मई उसके बारे मई सोच रही हु.. और परेशां हो रही हु.. मुझे पक्का यकीं है जब से यहाँ से गया तब से उसने कुछ काम नहीं किया होगा.. आपने मीठे मीठे बाटे करके नीता के साथ मज़े किये होंगे.. और इधर पापा जी कह रहे है उसने क्या काम किया है वो देख लो और उसे काम बता दो.. अब मुझे पता है ये कमीना कुछ काम नहीं करेगा तो उसको काम बताके क्या फायदा..

काफी देर तक आरती ऐसे hi खुद से सवाल जवाब करती रही. ..सोचते रहे.. सोफे पाई बैठ कर..
 
काफी देर तक आरती ऐसे hi खुद से सवाल जवाब करती रही. .. सोचते रहे.. सोफे पाई बैठ कर..

वो फिर कहने लगे.. इन् दोनों को जाकर बहुत टाइम हुआ है अब.. ऐसा कहते हुई वो घडी की और देखने लगे.. इन् लोगो को भूक नहीं लगे होंगे क्या..

फिर वो कहने लगे..

उस कमीने को भूख नहीं लगे होंगे.. पर नीता को तो भूख लगे होंगे न.. उस कमीने के भूख मई अच्छे से जानते हु.. पर आरती वो तो लव बर्ड है.. तू तो जानती है न लव बर्ड को प्यार मई भूख प्यास कुछ नहीं लगती.. तू hi जेक उनको बुलाना चाहिए.. पर ऐसा बुलाना ठीक रहेगा क्या..

इधर एक का चलना न चलना एक बराबर था. क्यों की एक मई भी उसे पसीना आ रहा था.. नवाज़ और नीता के बारे मई सोच कर..

फिर वो खुद को कहने लगे..

मुझे जाना hi चाहिए.. पर……. कही वो रूम मई या बहार अकेला hi हुआ तो ? और वह नीता नहीं हुई थो.. और मुझे अकेला पाकर कही उसने मेरे साथ कुछ गन्दा काम करना चाहा तो..

नहीं….. नहीं .. नीता होंगे वह.. वो कहा जायेगे.. वो उसे इतने जल्दी अकेले नहीं छोड़ेगे ..आरती ने अपने आप hi सवाल किया और अपने आप hi उसका जवाब दे दिया. पर फिर भी एक बार कन्फर्म कर लेना ठीक है. पर कही उसने ये सब हरकत दोबारा शुरू कर दी तो ?

नहीं नहीं वो शयद नहीं करेगा.. मुझे लगता है वो लोग भहर नहीं होंगे.. रूम मई hi होंगे ..

आखिर कर वो कुछ सोचकर हॉल से निकली और वो दोनों जहा थे उस रूम की और चल पड़े ..जिस रूम मई सफाये करने थी उस रूम के मैं दूर पर आरती पहुँच गए.. कुछ देर वही ruki..aur सोचने लगे..

आगे जाऊ या नहीं.. या आवाज दू.. आख़िरकार आरती से रहा नहीं गया और उसने बोहोत hi धीरे से थोड़ा सा दरवाजा खोला और सर निकल कर इधर उधर देखा .. उसने चारो तरफ देख लिया और उसे विश्वास हो गया की वो कही भी नहीं है. .. तब उसने पूरा दरवाजा खोल दिया और सामने के कमरे की तरफ चलने लगे .

सामने 3 रूम थे.. पहले उसने लेफ्ट वाली रूम देखे.. वह कोई नहीं था.. फिर राइट वाली रूम देखे.. वह भी कोई नहीं था.. फिर वो सेंट्रल वाली रूम की तरफ देखने लगे.. वो रूम का दूर अन्दर से बांध था..

वो रूम देख कर वो खुद को कहते है..

लगता है वो दोनों इस कमरे मई होंगे क्यों की इस कमरे का दरवाजा बंद है..

फिर वो उस कमरे के पास जाती है.. फिर कुछ सोचकर वो कहती है. .

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इस का मतलब वो इस कमरे में hi है… और… माय गोड़.. कुछ गन्दा काम कर रहे है..

रूम के दूर पर जाकर वो बहुत नज़दीक जाकर खड़े हो जाती है..

आअह्ह्ह्ह…. इसको भी चुसो न… एक hi चुकी को कितनी देर तक चुसोगे .. uuiiii….maaaa….

बहार खड़े आरती ये सुनकर काँप गए.. उसकी इस कामुकता से भरी लस्करी को sunkar…wo समाज गए थी की अन्दर जरूर कुछ और हो रहा hai..wo सोचने लगे.. क्या मई देखु उनको ये सब करते हुई..

अंदर से आ रही आवाजे आरती को बैचैन करने लगी.. उन आवाजों को सुन कर आरती के दोनों पेअर कपङे lage..aarti को समझ नहीं आरहा था की यहाँ पर रुक कर ये सब सुनु या आवाज लगा कर उनको रोकू.. या फिर बिना कुछ कहे अपने कमरे में वापस जाऊ.. एक अजीब सी बेचैन कर देने वाली इस्थिति ने आरती को घेर लिया था.. कुछ भी समझना उसके लिए बोहोत मुश्किल होता जा रहा था..

आरती अभी अपनी hi सोच में डूबी थी की अंदर से आ रही आवाज ने उसका ध्यान तोड़ दिया..

नीता तेरी मेमसाब एक डैम मस्त माल है.. अरविन्द साहब तो जैम कर मजे लेते होंगे..?

नवाज़ ने नीता से पूछा..

आईई…. धीरे धीरे दबाओ न .. दर्द होता है..

हाँ ये बात तो है.. मेमसाब बोहोत सूंदर है.. एक दो बार मैंने उनके कमरे की सफाई करते हुए जब उनके बीएड की चादर देखि तो समझ गयी थी की रात को साहब ने मेमसाब की जैम कर चुदाई की है.. पूरी की पूरी चादर पर लैंड छूट के पानी के निशाँ थे.. और कई बार तो सफाई करते हुए मुझे वो रबर के गुब्बारे क्या बोलते है उन्हें कंडोम भी मिले थे.. बड़ा gil-gila सा होता है..

तूने कभी देखा है उनको चुदाई करते हुए ?

नहीं ऐसा मौका कभी नहीं मिला.. हाँ पर जब साहब की छूती होती है तो साहिब मेमसाब को एक दूसरे से lipat’te हुए जरूर देखा है..

अच्छा तुझे क्या लगता है साहब मेमसाब की छूट hi मरते होंगे या गांड भी..?

हे भगवान् ये क्या हो रहा है.. ये लड़का मेरे बारे में सब पूछता जा रहा है.. और ये हरामखोर नीता भी उसे मजे ले कर सब कुछ बताये जा रही है..
 
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