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- Dec 5, 2013
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आरती फिर आपने साड़ी ठीक करके बिना नवाज़ को देख के सीधा अपने कमरे की तरफ निकल पड़ती हैं जैसे hi वो नवाज़ के रूम से बहार पड़ती है वैसे hi नवाज़ बीएड पाई उठ के बैठ जाता है..
अब आरती गर्दन से होते हुई आपने रूम मई जा रही थी.. नवाज़ आरती की थिरकती हुई गांड को खा जाने वाली नजरोंसे से बस देख रहा था.. और तब तक उसे ऐसे hi देखता रहा जब तक आरती उसकी नज़रो से ओझल नहीं हो जाती .. इस समय आरती ने एक बार भी पलट के देखा नहीं ..
जैसे hi आरती नवाज़ के रूम से आपने घर मई आयी तब उसे सामने आपने पति अरविन्द दिखा .. वो देख के उसको बड़ा शॉक लगा .. आपने पति को ऐसे सामने अचानक देखने से वो थोड़ी दर सी गयी ..क्यों की उसके पति ने उसे बोलै नहीं था की रात में वो आ जायेगा .. इसलिए वो बड़े आशर्य से आपने पति को देखने लगी ..
तब अरविन्द आपने पत्नी को देखते हुई वो कहता है
" कैसी हो मेरी जान"
ऐसा कह के उसे अपनी बाँहों में जकड लेता हैं.. और पूछता है
पापा कहा है ..दिख नहीं रहे है
वो शांतनु चाचा बीमार है न .. वह गए है .. आएंगे की नहीं पता नहीं
तब अरविन्द कहता है
ाचा हैं अब इस घर में हम दोनों अकेले है .. हमें एक साथ टाइम स्पेंड करने का मौका hi नहीं मिलता ..
इतना बोलकर अरविन्द आरती के कंधे पर अपने हाथ रख देता हैं और उसे सरकते हुई नीचे उसके बूब्स के तरफ ले जाने लगता हैं....... तब झट से आरती पीछे हैट जाती है..
आप फ्रेश हुई क्या
नहीं
फ्रेश हो जाएये .. मई आप के लिए खाना लेके आती हु
ऐसा बोल के बिना आपने पति को देखे किचन में चली जाती है .. जैसे hi आरती किचन में जाती है वो लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगती इहै और सोचने लगती hai..aapne बालो मई हाथ घूमते हुई ..
कैसे वो ये सब किसी पराये मर्द के साथ कर सकते है और उसके बारे में कैसे ऐसे सोच सकती है ..........
फिर खुदको को कहती है
अगर उस वक़्त अरविन्द वह आ जाते तो ...
ओह्ह्ह माय god..phir मई क्या karte..aur उनको क्या जवाब देते.. क्या बताती की मई इस वक़्त आपने नौकर के रूम मई क्या कर रही हु
फिर वो अब अपने आपको पूरी तरह से नार्मल करने की कोशिश करने लगती हैं .....और फिर एक चेयर पाई जेक बैठ जाते है .. और सोचने लगती है..
और आपने आप को कहती है
पर मैंने तो ऐसा वैसा कुछ भी नहीं किया है नवाज़ के साथ ..
फिर खुद के सवाल का खुद hi जवाब देते है
तूने कुछ नहीं किया आरती पर तेरा ये सब सोचना भी पाप hain...........tu शाधिशुद्धा लेडी है .. कोई कॉलेज गोइंग लड़की नहीं है .. जो रात के इस वक़्त मई उसके रूम मई हो और वो तेरा नौकर है ..
वो कभी कभी ये सोच रही थी की कैसे वो ये सब किसी पराये मर्द के बारे में सोच सकती है ............ ये सब हराम हैं ......
वो अब तक पूरी तरह पाक साफ़ थी ......उसका दिमाग तर्क- वितर्क कर रहा था मगर दिल तो बार बार इन्ही सब चीज़ों की तरफ जा रहा था की मैंने कुछ गलत नहीं किया है ....... उसके दिल में अजीब अजीब से ख्याल बार बार आ रहे थे जो उसके मैं को विचलित करते जा रहा था ......................
थोड़े देर बाद वो सोचते है अरविन्द के लिए सब्जी गरम करती हु .. ऐसा सोच के उठ के वो किचन के रैक पर जेक अपने दोनों हाथों को रखती है और लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगाती है .......
फिर खुद को शांत करते हुई स्टोव चालू करके आपने पति के लिए सब्जी गरम करने लगी ..
अब आरती गर्दन से होते हुई आपने रूम मई जा रही थी.. नवाज़ आरती की थिरकती हुई गांड को खा जाने वाली नजरोंसे से बस देख रहा था.. और तब तक उसे ऐसे hi देखता रहा जब तक आरती उसकी नज़रो से ओझल नहीं हो जाती .. इस समय आरती ने एक बार भी पलट के देखा नहीं ..
जैसे hi आरती नवाज़ के रूम से आपने घर मई आयी तब उसे सामने आपने पति अरविन्द दिखा .. वो देख के उसको बड़ा शॉक लगा .. आपने पति को ऐसे सामने अचानक देखने से वो थोड़ी दर सी गयी ..क्यों की उसके पति ने उसे बोलै नहीं था की रात में वो आ जायेगा .. इसलिए वो बड़े आशर्य से आपने पति को देखने लगी ..
तब अरविन्द आपने पत्नी को देखते हुई वो कहता है
" कैसी हो मेरी जान"
ऐसा कह के उसे अपनी बाँहों में जकड लेता हैं.. और पूछता है
पापा कहा है ..दिख नहीं रहे है
वो शांतनु चाचा बीमार है न .. वह गए है .. आएंगे की नहीं पता नहीं
तब अरविन्द कहता है
ाचा हैं अब इस घर में हम दोनों अकेले है .. हमें एक साथ टाइम स्पेंड करने का मौका hi नहीं मिलता ..
इतना बोलकर अरविन्द आरती के कंधे पर अपने हाथ रख देता हैं और उसे सरकते हुई नीचे उसके बूब्स के तरफ ले जाने लगता हैं....... तब झट से आरती पीछे हैट जाती है..
आप फ्रेश हुई क्या
नहीं
फ्रेश हो जाएये .. मई आप के लिए खाना लेके आती हु
ऐसा बोल के बिना आपने पति को देखे किचन में चली जाती है .. जैसे hi आरती किचन में जाती है वो लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगती इहै और सोचने लगती hai..aapne बालो मई हाथ घूमते हुई ..
कैसे वो ये सब किसी पराये मर्द के साथ कर सकते है और उसके बारे में कैसे ऐसे सोच सकती है ..........
फिर खुदको को कहती है
अगर उस वक़्त अरविन्द वह आ जाते तो ...
ओह्ह्ह माय god..phir मई क्या karte..aur उनको क्या जवाब देते.. क्या बताती की मई इस वक़्त आपने नौकर के रूम मई क्या कर रही हु
फिर वो अब अपने आपको पूरी तरह से नार्मल करने की कोशिश करने लगती हैं .....और फिर एक चेयर पाई जेक बैठ जाते है .. और सोचने लगती है..
और आपने आप को कहती है
पर मैंने तो ऐसा वैसा कुछ भी नहीं किया है नवाज़ के साथ ..
फिर खुद के सवाल का खुद hi जवाब देते है
तूने कुछ नहीं किया आरती पर तेरा ये सब सोचना भी पाप hain...........tu शाधिशुद्धा लेडी है .. कोई कॉलेज गोइंग लड़की नहीं है .. जो रात के इस वक़्त मई उसके रूम मई हो और वो तेरा नौकर है ..
वो कभी कभी ये सोच रही थी की कैसे वो ये सब किसी पराये मर्द के बारे में सोच सकती है ............ ये सब हराम हैं ......
वो अब तक पूरी तरह पाक साफ़ थी ......उसका दिमाग तर्क- वितर्क कर रहा था मगर दिल तो बार बार इन्ही सब चीज़ों की तरफ जा रहा था की मैंने कुछ गलत नहीं किया है ....... उसके दिल में अजीब अजीब से ख्याल बार बार आ रहे थे जो उसके मैं को विचलित करते जा रहा था ......................
थोड़े देर बाद वो सोचते है अरविन्द के लिए सब्जी गरम करती हु .. ऐसा सोच के उठ के वो किचन के रैक पर जेक अपने दोनों हाथों को रखती है और लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगाती है .......
फिर खुद को शांत करते हुई स्टोव चालू करके आपने पति के लिए सब्जी गरम करने लगी ..