KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION - Page 17 - SexBaba
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KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION

तो बनके पिलाओ आपने नवाज़ को उसका मनपसंद मिल्कशेक

ठीक है

मई क्यों बनु आप दोनों के बीच मई कबाब की हदी.. चलने दो आप दोनों का.. और नवाज़ के चक्कर मई पापा जी को मत भूल जाना भाभी.. रखते हु.. गुड bye 👋👋 bye भाभी

गुड bye👋👋 दीदी. .

फ़ोन रखने के बाद नवाज़ की तरफ देखते हुई आरती कहते है..

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चलो तुम मिल्कशेक देते हु..

ऐसा कह के आरती किचन मई जाने लगी और नवाज़ उसके पीछे. .पीछे चलते चलते आरती की थिरतकी हुई गांड को बड़े hi ध्यान से नवाज़ देख रहा था ..... और ये सोच रहा था की काश अगर ये गांड मुझे मिल जाये ......

जैसे hi नवाज़ किचन मई आता है नवाज़ अपने सामने कड़ी आरती की तरफ देखता है और फिर धीरे से मुस्कुरा देता हैं वहीँ आरती एक नज़र नवाज़ के तरफ देखती है और फिर तुरंत से अपनी नज़ारे दूसरी तरफ फेर लेती हैं.............

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न जाने क्यों उसका दिल धड़क उठा है ...... जैसे किसी माशूका का आपने आशिके सामने पाकर धड़क उठता है वैसे.. जैसे hi नवाज़ आरती के करीब आता हैं उसके बदन से एक अजीब तरह की स्मेल उठने लगती हैं ...........जो आरती को और भी बेचैन कर रही थी..........

आरती बड़े गौर से नवाज़ के बदन को एक तुक देखने lagi...........(aarti थी बहुत हसीं और खूबसूरत ........उसके बदन पर गन्दगी का एक नामोनिशान तक नहीं था ........ उसका बदन किसी संगमरमर की तरह सूंदर और पूरी तरह से साफ़ .........जो हमेशा गुलाबों की तरह महकता tha...............aur हमेशा उसके बदन से एक परफ्यूम की खुसबू आती रहती थी.............. वहीँ नवाज़ एक दम गन्दा ....... तेल उसके सर पर चिपका रहता था ...... दांत भी हलके पीले … ऊपर से उसके मुह से हमेशा तम्बाकू और बीड़ी की अजीब सी बदबू आती थी .......कुल मिला जुलकर वो सर से लेकर पवन तक सिर्फ और सिर्फ गन्दा था......) उसके ऐसे देखने से नवाज़ भी उसे देखने लगा तब आरती शर्मा जाती है..

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शर्म से उसका गोरा चेहरा लाल पड़ता जा रहा था.. नवाज़ के बदन से आ रही स्मेल बुरी थी या अच्छी ये भी आरती समाज नहीं पा रही थी.. उसका दिमाग कह रहा था की वो इस वक़्त नवाज़ के पास से फ़ौरन हैट जाये ..... उसे अपने पास भी न आने दे ... उसके ये बदबू की वजह से वो उससे वो दुर्र जाना चाहा रही थी पर दिल के मरे नहीं जा प् रही थी.. वह वो रुकना नहीं चाहा रही थी मगर दिल शायद कुछ और hi कह रहा था .........

वैसे नवाज़ एक बात पुछु तुमसे

हाँ मेमसाब

तुम बुरा तो नहीं लगेगा

भला मुझे बुरा कोई लगेगा

मेरे बात का

आप हमारे मेमसाब हो..

आरती कुछ नहीं कहते.. सिर्फ नवाज़ को देखने लगती है..

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 हो न

तब आरती हाँ मई अपनी गर्दन हिलती है

भला किसी बुद्धू को hi आपने इतने सुन्दर और अच्छी मेमसाब के बात का बुरा लगेगा

हम्म्म

पूछिए क्या पूछना चाहती हो आप

वैसे तुम्हारा यहाँ दिल तो लगता है न..

ये बात आरती ने कहते hi नवाज़ कहता है आपने आप को ( मैं मई)

ये हुई न बात मेमसाब मुझे भी यही चाहिए था

वैसे मई जानती हु नीता के होते हुई तुम्हारा दिल यहाँ लगेगा पर मई पूछना चाहती हु.. तुम यहाँ का काम तो पसंद है न

कैसे बात कर रही हो मेमसाब .. यहाँ क्या प्रॉब्लम है.. यहाँ की नौकरी आराम की नौकरी है मेमसाब ............. आप मुझे पहनने को साहब के अच्छे अचे कपडे देता हो ........और रहने को इतना आलीशान bungala.........aur पेटभर khana............upar से 20,000 रुपैये महीने का .........

इस बार नवाज़ आरती को सर से लेकर पवन तक ाचे से स्कैन करता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं ..

और सबसे ाची बात ............ मालकिन भी मिली तो एक दम zabardast.........bilkul हीरोइन जैसे ................साला एक पल के लिए मेरी नज़ारे आपको भूला नहीं पति .............

आरती ाचे से जानती थी की नवाज़ की नज़र कैसी hain........wo उसे कैसी नज़रो से देख रहा हैं ..... मगर न जाने क्यों उसे कुछ भी बुरा नहीं लग रहा tha......ya फिर वो उसकी नज़रो को अनदेखा कर रही थी.. पर नवाज़ के ऐसे कहने से नवाज़ के आँखों मई देखते हुई धीरे से बोल पड़ी..

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 धत्त बेशर्मम!!!!!!

और शर्मा गयी.. नवाज़ उसके इस अड्डा पाई खुश हो गया.. उसे लगा बात बन गयी.. आज तो मुर्गी फास hi गयी.. इसको यहाँ नहीं तो रस्ते मई छोड़ hi लेंगे.. वैसे भी शेठ जी अब घर पर नहीं है और नीता का पता नहीं है.. देखते है तरय मार्के किश 💋 मिलता है या नहीं. ऐसे सोच के साथ नवाज़ उसके बहुत करीब पहुँच जाता है. ..

अपने मालिक कितने किस्मत वाले हैं न जो उन ऐसी सूंदर बीवी मिली है ....... सर से लेकर पवन तक बस क़यामत हैं क़यामत ....... अगर ऐसी बीवी मेरी किस्मत में अगर होती तो मैं........

और नवाज़ चुप हो जाता है.. नवाज़ के मैं मई जो भी था उसने एक साथ बक दिया.. उसने नहीं सोचा की मेमसाब को बुरा लग सकता है या वो आपने पति या ससुर को कह के उसे नौकरी से निकलवा सकती thi..naukari से क्या गाँव से hi नवाज़ के फॅमिली को निकलवा सकती thi..wo जनता था आरती की फॅमिली उतनी पावरफुल है.. पर इस वक़्त नवाज़ ने ये सब नहीं सोचा..

वहीँ आरती बड़े गौर से उसके चेहरे की तरफ बस देख रही थी..............

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जब आरती की नज़र नवाज़ के ललचही नज़र पर जब पड़ती हैं तो उस वक़्त उसकी आँखों में एक अजीब सा खुमार साफ़ नज़र आ रहा था जो उस वक़्त आरती को बेचैन कर देने के लिए काफी था ...... नवाज़ की नज़ारे आरती के दिल में हलचल मचने के लिए काफी थी ..... आरती शर्माती हुई फ़ौरन अपनी नज़रे नवाज़ के चहरे की तरफ से हटा लेती हैं मगर उस वक़्त नवाज़ के चहरे पर एक गन्दी और कुटिल मुस्कान थी.........

मेमसाब एक बात पुछु

तब आरती फिर से उसे देखती है और कहते है..

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पूछो

आप इतनी खूबसूरत पहले से hi थी या शादी के बाद बन गयी..

नवाज़ के ऐसे कहने से आरती हस्ती है और वो अपनी केहुनी नवाज़ को कसकर मरती हैं उसके पेट मई.. और उसे आँख दिखती हुई उससे दूर होने लगती हैं....

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शायद शर्म की वजह से....... वहीँ नवाज़ उसे देखता हुआ बस मुस्कुराये जा रहा था ....... आरती अब नवाज़ की तरफ पिट करके खड़े थी.. अब उसने एक लुम्बी सांस लेती हुई अपनी आँखें बंद की .. अपने बेकाबू हो रहे साँसों को फिर से सँभालने लगती हैं ....... मगर न जाने क्यों उसकी ये बेचैनी अब कम होने के बजाये और भी बढ़ती hi जा रही थी ....... तभी नवाज़ कहता है..

मेमसाब आप इस गाउन मई पहले से ज्यादा खूबसूरत दिख रही हो..

तब नखरा करते हुई पीछे की और देखते हुई चहरे पर थोड़ा गुस्सा और थोड़े हसी लेट हुई कहते है..

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मेरे बुद्धू रा.... (और रुकर.. कहती है..) नौकर.. नवाज.. फॉर योर काइंड इनफार्मेशन ये गाउन नहीं तो मॉडर्न ड्रेस है.. जो घर मई और स्पेशलय रात को पहनते है.. जिसे लोग निघ्त्य कहते है..

बहुत नखरे से कहती है.. जब भी नीता को नवाज़ पाई बहुत प्यार आता था तब वो नवाज़ को मेरे बुद्धू राजा कहती थी और आरती ने ये एक दो बार सुना था.. अब वैसे hi कुछ आरती कहनेवाली थी पर खुद को कण्ट्रोल किया.. पर नवाज़ समाज गया था की वो क्या कहना चाहती थी और उसने क्या कहा..

फिर तो ये गाउन hi हुआ न.. वो भी रात को hi पहनते है न मेमसाब..

तब गुस्से से उसको देखती है..

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कुछ कहनेवाली थी की नीता वह आती है.. वो दूर से अंदर आनेवाली थी उससे पहले आरती ने उसे देखा और झट से दूर की तरफ गयी और उसको बोली.. जरा नखरे से..

तेरे बुद्धू राजा को वह फ्रीज़ मई का मिल्कशेक दे दे.. और साहब का कुछ अच्छा ड्रेस दे दे पहनने को..

और नवाज़ को देखते हुई कहती है..

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ऐसे ड्रेस मई इससे हॉस्पिटल लेजाना ठीक नहीं रहेगा.. मेरे इज़्ज़त का सवाल है..

और वह से आपने बैडरूम मई जाने लगी.. फिर पलट कर नीता को कहती है..

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हाँ नीता आपने बुद्धू राजा को गाउन और निघ्त्य का फरक भी बता दे..

तब बड़े आशर्य से नीता दोनों को देखने लगी.. तब आरती कहते है.

तेरा बुद्धू राजा मेरे इस निघ्त्य को गाउन बोल रहा है..

और हसते हुई आपने बैडरूम मई जाती है ..
 
हाँ नीता आपने बुद्धू राजा को गाउन और निघ्त्य का फरक भी बता दे..

तब बड़े आशर्य से नीता दोनों को देखने लगी.. तब आरती कहते है.

तेरा बुद्धू राजा मेरे इस निघ्त्य को गाउन बोल रहा है..

और हसते हुई आपने बैडरूम मई जाती है .. फिर कुछ समय बाद वो तैयार होकर निचे आते है..

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तब तक निचे नीता ने एक अच्छा से ड्रेस नवाज़ को दिया था.. वो ड्रेस देखते hi आरती नीता पाई गुस्सा हो जाती है..

ारे ये क्यों ड्रेस दिया..

क्या हुआ दीदी.. ये अच्छा ड्रेस है न..

तब कुछ न कहते हुई एक अच्छा ड्रेस वो निकलती है और नवाज़ को देती है और गुस्से से कहते है..

इससे पहनो और बहार जेक खड़े हो जाती है.. कुछ 5-10 मिनट्स बाद नवाज़ वो ड्रेस पहन के आता है.. तब वह नीता नहीं थी तब वो बैडरूम मई जेक एक अच्छा वाला महंगा परफ्यूम जो उसका पति हमेशा उसे करता था और जो आरती को पसंद था वो लेके आती है और उसके पास जाकर उसके बॉडी पर स्प्रे करती है..

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पर कहती कुछ नहीं.. और कार मई बैत जाती है.. उसके पीछे पीछे नवाज़ कार मई आ जाता है.. और वो शहर जाने लगते है... रस्ते मई दोनों मई कुछ बात नहीं होती है.. शेठ जी को जहा खड़े थे वह से उन लेके जाते है.. और हॉस्पिटल पहुँच जाते है.. वह पाई रेगुलरली शेठ जी पाई डॉ. सरिता ट्रीटमेंट करती थी..

पहले तो आरती नवाज़ को लेके डॉ. सरिता के केबिन गयी..

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दोनों ने कुछ दिएर बात की.. फिर आरती के कहने पाई नवाज़ ने शेठ जी को निचे से लेके आया.. डॉक्टर को अभी तक नहीं पता था की ये कोण है.. उनका नौकर है भी पता नहीं था. .. अभी तक नवाज़ ने कुछ बोलै नहीं था.. वो सिर्फ उन्दोनो की बाते सुने जा रहा था.. एक्चुअली आदि बात उसके सर के उप्पेर से जा रही थी.. और बीच बीच मई ये दोनों इंग्लिश मई बोलती तो जो भी समाज आया था वो भूल जाता है.. उसको सिर्फ इतना पता था शेठ जी को शुगर और बप की बीमारी है.. उस वजह से उन यहाँ लाया गया है..

अब फिर से नवाज़ डॉक्टर सरिता के केबिन मई आया था.. शेठ जी के साथ.. डॉक्टर ने शेठ जी वो वह लेटने को कहा तब नवाज़ ने पहली बार कहा..

डॉक्टर मैडम जी..

यस बोलिये

जैसे hi सरिता ने कहा वैसे hi आरती नवाज़ की तरफ देखने लगी..

न - शेठ जी बीमारी बहुत बड़े है क्या

तब आरती नवाज़ की तरफ देखते हुई कहते है..

नहीं.. नवाज़ ज्यादा बड़ी नहीं है..

अब पहली बार सरिता नवाज़ को देख के कहती है..

ज्यादा बड़ी नहीं है

तब नवाज़ फिर से कहता है..

कितने बड़ी है..

नवाज़ के ऐसे कहने से आरती की हसी छूट जाती है..

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स - कह नहीं सकती..

न - पक्का आप डॉक्टर हो न..

वह स्ट्रेचर पर लेते लेते शेठ जी कहते है..

वो अच्छी डॉक्टर है..

तब सरिता आँखों से शेठ जी के तरफ इशारा करते हुई कहते है..

सुन लिया न

शेठजी ये कैसे अच्छी डॉक्टर है इनने आप की बीमारी कितने बड़े है ये भी पता नहीं है..

अब आरती को पक्का यकीं हो गया था ये डॉक्टर से फ़्लर्ट कर रहा है.. इसलिए वो उसे चुप रहने को कहती है

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लेकिन चुप रहेगा तो नवाज़ कैसा..

डॉक्टर मैडम मुझे लगता है आप दिखने मई अच्छी है इसलिए पेशेंट्स आप के पास आते है उन ठीक कर पति हो या नहीं ये खुदा को पता. ..

तब डॉक्टर गुस्से से नवाज़ को देखते है वो आगे कुछ बोलती उससे पहले hi आरती कहती है

मैडम आज इंजेक्शन देना है क्या??

हाँ देना है.. आप उन बाजु वाले रूम मई लेके जाओ.. मई आती हु.. अंकल वह कुछ देर रेस्ट कर लेंगे. . ..

अच्छा.. नवाज पापा को उठाओ और बाजु वाले रूम मई लेके जाओ..

तब सरिता नवाज़ के तरफ देख के कहते है..

नवाज़ नाम है क्या इसका..

हां मैडम जी.. इस नाचीज़ का नवाज़ नाम है..

तब आरती मैं मई कहते है..

इस डॉक्टर को इस का नाम जानने की इतनी क्या दिलचस्पी..

तब नवाज़ कहता है..

आप का नाम??

बहार बोर्ड नहीं पड़ा

नहीं

सरिता.. डॉ. सरिता..

डॉ. सरिता.. अच्छा नाम है..

थैंक यू..

तब आरती नवाज़ का हाथ पकड़ के कहते है..

पापा को लेलो..
 
फिर नवाज़ शेठ जी को लेके बहार आके एक रूम मई लेके लेता देता है.. अब डॉ. सरिता वह आती है तब नवाज़ कुछ बोलने वाला होता है तभी डॉक्टर उसे चुप रहने को कहती है..

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फिर वो दोनों बहार आते है.... तब आरती उसके और गुस्से से देखते हुई कहती है..

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जी कर रहा है तुम एक गुस्सा दे दू..

ऐसा क्या कर दिया मैंने..

क्या कर दिया.. तुम को थोड़ी बहुत भी शर्म हैं की नहीं ....... जहा मौका मिलता हैं तुम वहीँ शुरू हो जाते हो ....... ये भी नहीं देखते की आस पास कोई है या नहीं ........ खुद तो बेशरम हो पर हमारी.. ी मैं मेरे और पापा जी की इज़्ज़त का तो ख्याल किया करो..

और आरती शिकायती स्वर दिखते हुई नवाज़ के चेहरे की तरफ देखती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं..

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वहीँ नवाज़ जवाब में फिर धीरे से मुस्कुरा देता हैं..........

कहे की sharam.....aur कैसी शर्म....... वैसे आप मुझे बेशरम कहते हो hi न मेमसाब..

और नवाज़ आरती के खूबसूरत चेहरे की तरफ एक बार देखता hai......aur कहता है.

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और मेमसाब ऐसे मॉल के पास आने के लिए तो शर्म बेचनी hi पड़ती हैं न ..... पूरा बेशरम होना hi पड़ता है न ........

तब आरती हौले से अपना हाथ उसके गलों के पास ले जाती हैं और कसकर उसकी गाल को चिकोटी काट लेती हैं वहीँ नवाजिस बार दर्द से चिल्ला पड़ता हैं............

आह्ह्ह्ह.. मेमसाब

कुछ फायदा नहीं है वो तुम्हारी जाल मई नहीं आएंगे..

वो बोलता है

क्यों..

उसका आलरेडी बॉयफ्रेंड है डॉ. राहुल.. और वो दोनों शादी करने वाले है..

तरय करने मई क्या जाता है..

पटके दिखाओ

दिखाओ

चैलेंज

हाँ..

शर्त क्या होगी

तब आरती कहती है शर्त बिरत कुछ नहीं ऐसे hi

अच्छा.. चलेगा.. पर मेरे हेल्प करोगे उसको पटाने मई

आरती हास्के कहते है..

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No वे

करो न

मई क्यों करू और हम अपोजिट टीम मई है तो अपोजिट टीम मेंबर की हेल्प नहीं की जाती मैच मई

ये मैच है

हाँ.. चैलेंज लगाया है न तुमने तो मैच hi होगा

तो मैच भी सही ढंग से होना चाहिए न

मतलब

हम यहाँ सिर्फ 15 मिनट है और 15 मिनट्स मई कोनसा मैच होता है

मतलब बच्चू तुम हार मान रहे हो न.. इन इंदिरेक्ट वे

नहीं नहीं मैंने ऐसा कब कहा

मैच जित नहीं सकते इसलिए बहाने बना रहे हो

बहाना नहीं टाइम बढ़ाने की बात कर रहा हु

20-20 के ज़माने मई मैच काम समय मई hi होता है

हाँ पर 20 ओवर का होता है..

हाँ होता है

मतलब 40 ओवर का मैच होता है

हाँ

तो उसको ख़तम होने मई कितना टाइम लगता है

लघबघ 4 घंटे

तो मुझे भी इतना टाइम चाहिए

बहुत चालू हो.. तुम पता है हम यहाँ अब इस समय 4 घंटे नहीं रुख सकते और वो डॉक्टर भी नहीं रुख सकती इसलिए ये अजीब शर्त रख रहे हो.. मतलब शर्त मई पूरी नहीं कर पाउंगी इसलिए तुम कहोगे तुमने शर्त पूरी नहीं की इसलिए मैच कैंसिल और तुम हार से बच गए.. सही न..

सचमुच मेमसाब आप का दिमाख लोमड़ी का दिमाख है..

लौंडे का दिमाख??

और हँसाने लगी.. फिर अचानक शांत हो गयी.. और सोचने लगी और नाटकी गुस्सा दिखते हुई कहती है..

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क्या?? मतलब तुमने मुझे लोमड़ी कहा

ये गुस्सा हो गयी है ये जानकर नवाज़ बात पलट देता है

नहीं नहीं ऐसा नहीं

फिर

आप ने इतने जल्दी इतना कुछ सोचा.. हम आदमी लोग इतना फ़ास्ट इतना कुछ सोच नहीं सकते.. लौंडे जैसे जानवर hi सोच सकते है.. इसलिए आपके दिमाग को लोमड़ी का दिमाग कहा.. आप को नहीं..

आरती जान गयी ये बात बदल रहा है .. चलो तुम हार नहीं मान रहे हो पर मई जीत गयी हु इसलिए यहाँ का इस शहर का सबसे बेस्ट सबसे पॉपुलर मिल्कशेक तुम पिलाते हु मेरे जीत की ख़ुशी मई

मई हरा नहीं हु

पर मई जीती नहीं हु

अगर मई हरा नहीं तो आप जीते कैसे

वैसे जैसे तुम हरे..

और हँसाने लगी..

वो जाने दो मई ऐसे hi पिलाते हु तुम मिल्कशेक.. वैसे भी तुम मिल्कशेक बहुत पसंद है न ..

और उसे देखने लगी..

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आप का मिल्कशेक पसंद है

मेरे मिल्कशेक से ये बेहतर है.. यहाँ का मिल्कशेक पिओगे तो मेरा मिल्कशेक भूल जाओगे

ऐसा हो hi नहीं सकता.. की मई आप का मिल्कशेक भूल जाऊ

अच्छा.. मेरे मिल्कशेक से अच्छा होगा तो भी

हाँ और वैसे भी आप के मिल्कशेकेस से अच्छा मिल्कशेक इस दुनिया मई हो hi नहीं सकता

इतना पसंद है मेरा मिल्कशेक

हाँ कोई शक

नहीं बाबा कोई शक नहीं.. अब पापाजी आराम कर रहे है तब तक हम मिल्कशेक पाइक आते है

ठीक है चलिए..

चलो..

और फिर वो दोनों मिल्कशेक पिने चले गए..
 
दोनों अब एक कच्चे रस्ते पर चल रहे थे . ..सर्दियों का मौसम tha…Shyam हो गयी थी.. हलकी हलकी ठण्ड पद रही thi...hava की वजह से आरती के बाल उड़ने lage..uske साड़ी का पल्लू उड़ने लगा..

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उस सेक्सी नज़ारे no नवाज़ देखने लगा.. नवाज़ का मैं था के अभी उससे चूम ले लेकिन उसने अपने आप पर काबू रखा… फिर उसने आपने हाथ अपनी जेब में डाला और एक बीड़ी का बंडल बहार निकला. जैसे hi उसने बीड़ी निकल कर मुँह में डाली आरती ने उससे रोका..

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ये काया कर रहे हो? मुझे सिगरेट बिलकुल पसंद नहीं. ..

सिगरेट नहीं है

नखरा करते हुई आरती कहती है.. ..

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उतना पता है मुझे .. बुद्धू नहीं हु ..अरविन्द भी नहीं पिटे.. फेंको इससे ..

ारी क्यों? बचपन से पी रहा हूँ, मेरी माँ भी पीती, मेरा बाप भी पिता है..

तो तुम्हे पीना ज़रूरी है?

अरे बोहोत मस्त चीज़ है ye...aap तरय करो

पागल हो क्या .. मुझे ये सब नहीं पसंद..

तरय किया है क्या कभी?..

nahi..kabhi हाथ भी नहीं लगाया.. मई तुम्हारे जैसे नहीं हु..

नखरा करते हुई कहती है...

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तो कैसे हो आप

पक्कड़ नहीं हु

तो.. बिना तरय किये hi बोल दिया पसंद नहीं. चलो एक बार तरय करके देख लो आप..

आरती ने ये सब कभी तरय करने का सोचा भी नहीं था.

नहीं कभी नहीं

नीता भी पीती है..

पीती होगी.. और मई नीता नहीं हु

मेरे साथ आप वो सब कर सकती हो जो आप किसी के सामने मतलब साहब और शेठजी के सामने नहीं कर sakti..main आज़ाद पंछी हूँ और आ भी आज़ाद हो जाओ..

नहीं हो सकती.. शाधिशुद्दा हु .. तुम्हारे साहब की बीवी हु..

साहब को नहीं पता चलेगा

मुझे घिन आती है

ठीक है तो मुझे तो पीने दो..

आरती ने कुछ ज्यादा नहीं सोचा और जल्दबाजी मई कह गयी..

पीओ पर मुझसे दूर होक.. पैसिव स्मोकिंग ऑलवेज डेंजरस..

क्या??

तब स्माइल करते हुई आरती कहती है..

कुछ नहीं..

फिर नवाज़ बीड़ी पीने लगा. .. और आरती उससे दूर खड़े होकर चलने लगी.. और सोचने लगी..

मैंने कैसे उसके हां मई हां कहा.. कैसे उसे बीड़ी पिने दिया.. अरविन्द कितने रिक्वेस्ट करते है पर मई बैडरूम मई पिने नहीं देते. बैडरूम क्या घर मई अल्लोव नहीं karti..aur यहाँ इतने थोड़े देर मई मैंने उसे बीड़ी पिने अल्लोव किया..

ऐसे वो सोच रही थी..

उधर नवाज़ को लग रहा था आरती को गुस्सा आ गया है .. इसलिए वो बाते नहीं कर रही है और दूर दूर से चल रही.. मई कैसे उसके नज़दीक जाऊ.. तब उसे लगा एक गाना लगता हु... और वैसे hi उसने किया ..

चुराके दामन तो जा रहे हो

ठहरे क्यों दो कदम पे जा के

दो कदम पे जा के

खबर है मुझको है प्यार तुझको

ठहरे क्यूँ यूं नज़र मिला के

यूं नज़र मिला के

गाने की आवाज आते hi आरती नवाज़ की और देखने लगी..

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तू रू

चुराके दामन तो जा रहे हो

ठहरे क्यूँ दो कदम पे जा के

दो कदम पे जा के

खबर है मुझको है प्यार तुझको

ठहरे क्यूँ यूं नज़र मिला के

यूं नज़र मिला के

ला ला ची ...

नज़र मिलाना भी एक अदा है

नज़र झुकाना भी इक अदा है

ये बात सच है किसीसे पूछो

नज़र चुराना भी इक अदा है

है उधर nahii.n कुछ उधर न देखो

इधर है वो दिल जो तुझको चाहे

बहुत hasii.n है तुम्हारा गुस्सा

हमें तो इसपे भी प्यार आये

तुम्हारी आँखों ने क्या कहा है

पूछो तुम ये करीब आके

है ये करीब आके

चुरा के दामन ...

ला ला

अजीब हालत है आज अपनी

हर एक तमन्ना मचल रही है

kyuu.n आज मुझको ये लग रहा है

की दिल की dha.Dakan बदल रही है

है आशिकाना मिज़ाज़ अपना

कहो तुम्हारा मिज़ाज़ क्या है

अगर कहो तुम तो मई बता दू

छुपा दिल me.n वो राज़ क्या है

mai.n चाहती huu.N की तुमको रख लू

अपनी हर saa.Ns me.n छुपा के

saa.Ns me.n छुपा के

गाना ख़तम होते hi स्माइल करते हुई कहते hai..dusare और मू करके..

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चॉइस अच्छी है तुम्हारे

वो तो है hi

मई गाने की बात कर रही हु..

मैं भी वही कह रहा हु

वो ऐसे hi चलते चलते बातें करते रहे… बाते करते वक़्त नवाज़ उसके पास कब आया उसे पता hi नहीं चला.. जब उसने उसके पास आके धुवा छोरा तब उसके खंड को मरते हुई आरती ने कहा..

दूर रहने को कहा था na..paas क्यों आये..

अब आ गया हु तो सजा डोज क्या आप

देने होंगे..

ऐसा कह के होटल के अंदर पहुँच जाते है . . दोनों होटल मई जेक अंदर एक जगा बैठ गए.. और बाते करते हुई मिल्कशेक पिने लगे..

कैसा लगा मिल्कशेक

बहुत अच्छा

तब चहरे पर गुस्सा दिखते हुई कहते है

तुम तो कह रहे थे मेरे मिल्कशेक से कोई अच्छा मिल्कशेक नहीं हो सकता और अब इसको बहुत अच्छा बोल रहे हो

पर आप से काम..

बहुत चालू हो तुम.. बात को झट से बदल दिया तुमने

और दोनों हँसाने लगे..

ऐसे hi बाते करते हुई वो कुछ देर वह बैठे रहे होटल मई.. तभी आवाज़ आयी

अरे तुम लोग घर मई बैठते हो या हमेशा घूमते रहते हो

ये आवाज़ थी आरती की दीदी कीर्ति की .. जो उस दिन उन मिली थी और जो नवाज़ को आरती का हस्बैंड मानती थी

ऐसा कहते हुई आरती की दीदी कीर्ति उनके पास आती है

उसको देख के कीर्ति कहते है

दीदी आप

ऐसा कह के आरती उठ गयी तो नवाज़ भी उठ गया और वो दोनों उनके टेबल से थोड़े बहार आ गए .. अब कीर्ति उन दोनों के पास आके खड़े होती है तब नवाज़ कहता है

अब इतनी खूबसूरत बीवी मिली है तो घूमना तो पड़ेगा hi न

ऐसा बोलते hi आरती शर्मा के उसके पिट को मरते है

हां ये बात तो आप ने सही कही जीजा जी .. इतनी खूबसूरत बीवी है तो उसपे ध्यान देना hi पड़ेगा नहीं तो कोई दूसरा उदा ले जा सकता है

ऐसे कैसे कोई उदा ले जा सकता है

ऐसा बोल के उसके कमर के पीछे हाट रख के उसको आपने से सत्ता देता है

मेरे बहन ऐसा कुछ नहीं करेंगे पर आप इसको छोड़ के किसी दूसरे के पास मत चले जाना जीजाजी

तब आरती की और बड़े पैर से देखते हुए नवाज़ ने कहा...

अरे पागल हो क्या साली साहिबा … आप . ..इतनी प्यारी सी बीवी का दिल तोड़ने की गुस्ताखी कौन कर सकता है भला....... बल्कि मुझे तो अल्ला..

फिर कुछ देर रुख के कहती है

भगवन का शुक्रगुजार करना चाहिए जो उसने मुझे इतने प्यारी बीवी दी है

हां वो तो है

आरती को नवाज़ की बात बहुत अच्छी लग रही थी........

सच है आप जीजै .... आरती कितने खुस है आप के साथ .....सच्ची खुसी तो तभी होती है जब अपनों के लबो पर मुस्कराहट आ jaye..........mai आज बहुत खुस हु जीजाजी ...ी म रियली happy.............ye सब आप की वजह से hi हुआ है .....थैंक यू ... थैंक यू ... थैंक यू ......

कीर्ति ऐसा बोलती हुई नवाज़ के गले लग गयी.... कीर्ति जो खुसी के मरे नवाज़ के गले लग गयी thi.....use जल्द hi अपनी गलती का अहसास हुआ ..... और वो तेजी से नवाज़ से अलग हो गयी.......

और थोड़ा शरमाते हुई कहते है

ी ऍम सॉरी

तब नवाज़ के नज़रे कीर्ति के चेहरे की तरफ gayi......Tab बात को संभालते हुई कीर्ति कहते है

वैसे बीवी पाई hi ध्यान डोज या साली पाई भी ध्यान डोज

साली पाई भी ध्यान है न ..

ध्यान है कह रहे हो पर आप ने शादी मई मुझे नहीं बुलाया

तब आरती कहती है

दीदी आप तब यहाँ कहा थे .. बहार थी न .. आउट ऑफ़ इंडिया .. जीजा जी के साथ

तू चुप बैठेगी .. आपने हस्बैंड की हमेशा ऐसे साइड लेने अच्छी बात नहीं है .. और वैसे भी ये जीजा साली के बीच मई का मामला है ..तुम बीच मई मत बोलो ..

तब आरती चुप हो जाती है

बोलिये जीजा जी मुझे क्यों नहीं बुलाया

अभी आरती ने कहा न आप आउट ऑफ़ इंडिया ..आप के हस्बैंड के साथ..

तब नखरे से आरती की और देखते हुई कीर्ति कहते है

करा दिया न मेरा पोपट आरती तुमने .. अच्छा खासा मौका मिला था मुझे आपने जीजा जी टांग खीचने का वो भी तुमने गँवा दिया

आगे मौका मिलेगा .. हम जीजा साली है तो मिलते रहेंगे .. आप को क्या चाहिए.. खाने मई .. मई लेके आता हु

मेरे लिए मेरा जीजा क्यों तकलीफ लगे .. मेरे बहन लेके आ

एगे न .. आरती तू लेके आ

जी दीदी

कहके वो तीनो के लिए जूस लती है .. फिर जूस पिटे हुई बाते करते है .. आरती ने जांभोज कर नहीं बताया की यहाँ उसके ससुर एडमिट है .. उसे लगा वह जाने के बाद दीदी को पता न चले की नवाज़ उसका हस्बैंड नहीं बल्कि उनके यहाँ काम करने वाला एक नौकर है ..

और फिर कुछ देर बाद वो तीनो उठ के होटल के बहार आ गए ..
 
और फिर कुछ देर बाद वो तीनो उठ के होटल के बहार आ गए .. आरती की बहन कीर्ति bye बोलके आपने कार मई बैठ के चली गए ...

तब नवा मोबाइल निकल के किसी को कॉल करने लगा तब आरती कहती है

किस को कॉल कर रहे हो

तब नवाज़ कहता है

एक कीर्ति ने गरम किया है तो सोच रहा हु ये गर्मी दूसरे कीर्ति मई उतर दू

तब शरमाते हुई आरती उसको मरते हुई कहते है

कमीने

और फिर पलट कर हॉस्पिटल की और आरती जाने लगी तब आरती को सामने से नवाज़ की माशूका कीर्ति दिखी .. जो उस दिन उन लोगो को मिली थी .. उसको देखते हुई आरती कहती है

फ़ोन लगाने की कोई जरुरत नहीं है

आरती को देखते हुई नवाज़ कहता है

मतलब

लगता है कीर्ति तुम्हारे जिंदगी से निकलने का नाम नहीं लेगी. एक गयी तो दूसरी चली आएंगे .. अब तुम्हारी अपनी कीर्ति आ गयी

तब नवाज़ आरती को देखता है

वो भी तो मेरे अपनी hi कीर्ति है .. साली आधी घरवाली होती है न जी ..

ऐसा कह रहे हो जैसे मई तुम्हारी सच मई की बीवी हु और कीर्ति दीदी सच मई तुम्हारी साली हो

मई तो कबसे रेडी हु तुम अपनी सच की बीवी बनाने को

अपनी औकात मत भूलो

औकात कहा भूल रहा हु भाभी जी

भाभी जी कहते hi वो स्माइल करते है

और बेगम बन जाये इसलिए तो ये प्लान बनाया..

कोनसा प्लान

तब कुछ सोच के कहती है

मतलब यहाँ आने का

हां

तब सोच के कहते है

तुम कंचन को जानते हो

कोण कंचन

मेरे नानन्द

नहीं

फिर कैसा प्लान तुमने बनाया .. उसने मुझे तुम लेके जाने को कहा

ी मैं भगवन ने बनाया

मुझे तो तुमने डरा दिया प्लान बनाया बोल के .. मुझे तो लगा तुमने प्लान बनाया .. तुमने और कंचन ने ..

कहके रुख गयी

मेरे कहा इतनी हैसियत की अग्रवाल खंडन की बहु और बेटी को जान सखी

सही कहा .. वैसे भी आदमी ने आने औकात और हैसियत से ज्यादा उड़ाना नहीं चाहिए.. कहते है न चढार देख क पेअर पसारने चाहिए

वैसे भी अगर इतने बड़े रियासत की मालकिन मेरे बेगम बन जाये तो मेरे किस्मत ऑटोमेटिकली बदल जायेगे .. और औकात भी

चुंगेरेलाल के सपने बाद मई देखो और उधर देखो तुम्हारी माशूका तुम hi देख रही है

तब नवाज़ उधर देखता है

वो इशारे से कहती है

कॉल नहीं किया तुमने

तब नवाज़ आरती को देखता है

वो कह रही है कॉल क्यों नहीं किया

अब क्या बोलू उसे

मुझे क्या पता

बोलो न क्या बोलू उसे

तब उसे कहती है

कह दो चामा हस्बैंड साथ मई होगा इस लिए कहा

वैसा hi नवाज़ कीर्ति को देखते हुई उसे इशारे से कहता है

तब कीर्ति कहती है

मुझे तुमसे मिलना है

तब आरती कहती मिलाने का कह रही है

नवाज़ कहता है

क्या बोलू

कीर्ति को देखते हुई बोलता है आरती को

आरती दूसरे और देखते हुई कहते है

हां बोल दो

हां अब मिलाना hi पड़ेगा न एक कीर्ति ने गरम किया है तो वो गर्मी दूसरे कीर्ति मई उतरने पड़ेगे न

तब आरती शर्मा जाती है और उसको मरती है

पर मिलोगे कहा ..यहाँ तो लॉज नहीं होगा

उसकी कार है न

तब आरती कहती है

एक नंबर के कमी हो

अब बता भी दो उसे वो इधर hi देख रही है

हां

तब आरती की और देखते हुई वो कहते है

कबाब मई हड्डी का क्या करे

ऐसा वो आरती और आपने हस्बैंड की तरफ इशारा करते हुई कहते है

मुझे कबाब मई हदी बोल रही है

तभी उसका हस्बैंड उसको आवाज़ देता है ..

कीर्ति जरा इधर आओ

तब कीर्ति उसके साथ चली गयी

तब आरती कहती है

लगत है आज तुम्हारे नसीब मई कोई भी कीर्ति नहीं है

सही कहा .. लगता है आज आरती hi है

ऐसा बोलते hi उसको मरने लगी ..

हरामी

तब नवाज़ शेठ जी की तरफ जाने लगा.. और आरती उसके पीछे .. अब हॉस्पिटल से उप्पेर जाने वाले होते है की तभी आरती को उसके पुराणी सहेली तन्वी मिलते है.. उसने आरती को आवाज़ दिया तब आरती पलट गयी.. पर तन्वी नवाज़ को आरती के साथ देख के खुश हो जाती है..

आरती के दोस्त तन्वी ने जब उन्हें देखा तो भागते हुए से उनके तरफ आ गए..

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और उसे अपने तरफ भागता हुआ आता देख कर और उसके उछाल रहे छानतयों को देख कर नवाज़ को ऐसा लग रहा था जैसे हिंदी पिक्चर का कोई सीन देख रहा hai..aaj वो किसी शादी को जा रही थी ..इस लिए कुछ अलग हे तरीके के सजी हुई थी ...

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भरी भरकम लहंगा पहना था usne...aur ऊपर थी उसके डिज़ाइनर छोले, जो के बैकलेस थी ... साफ़ पता चल रहा था के उसके अंदर ब्रा नहीं पहनी हुई थी . और ऊपर से उसके मम्मी इतने बड़े थे के ऐसा लग रहा था जैसे दो स्माल साइज के फुटबॉल लेके घूम रही है वो.

पास आकर तन्वी ने उसके साथ वाले फ्रेंड का परिचय आरती से करवाया ... बाजु मई खड़े होक नवाज़ ने तन्वी को ऊपर से नीचे तक nihara..nawaz के ऐसे आपने फ्रेंड को देखने से आरती को ऑकवर्ड फील हो रहा था.. वो नवाज़ को कुछ बोलनेवाली थी की तन्वी बोली :

वाओ … आरती … नवाज़ तुम कहा मिला.. हे इस तू स्मार्ट … अजय तुम जानते हो न नवाज़ को..

ऐसा कह के नवाज़ को देखने लगी..

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हाँ बिलकुल जनता हु.. इससे कैसे भूल सकते है ..इस की वजह से तो हम बच गए उस दिन नहीं तो आज जिन्दा नहीं होते..

हाँ नवाज़ थैंक यू वैरी मच..

इतना कह कर तन्वी नवाज़ से लिपट गयी...

नवाज़ का हाथ अपने आप उसके लचीली कमर पर आ लगा… ये देख कर आरती मैं मई कहती है ..

सेल को तो चांस hi चाहिए

... कमीना कही का..

तन्वी के मुह्ह से नवाज़ के बारे मई ये सुन के आरती को धक्का लगा..

तन्वी - आरती वैसे तुम ये सुन के चौंकी न ??

आरती - हाँ

तन्वी - मई बाद मैं बताउंगी हम नवाज़ को कैसे जानते है पर पहले ये बताओ नवाज़ तुम्हारे साथ कैसे और अब इस वक़्त यहाँ हॉस्पिटल मई तुम..

आरती - नवाज़ अब हमारे साथ काम करता है.. और यहाँ हॉस्पिटल मई मेरे ससुर एडमिट है

एनीथिंग सीरियस

नथिंग नथिंग.. रेगुलर चेकउप है.. शुगर एंड बप

ओह्ह ी सी

आरती तुम बुरा तो नहीं मानोगे तो एक बात कह सकती हु

हाँ.. सूरे..

नवाज़ को हम दोनों बहुत दिनों बाद मिले है तो क्या हाफ ऑवर के लिए हमारे साथ ले जा सकते है..

आरती ने बुरे मू से हां कहा तब तन्वी और उसके हस्बैंड नवाज़ को आपने साथ ले गए... आरती वही कड़ी होक सोचने लगी . .

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ये तन्वी नवाज़ को क्यों आपने साथ ले गए.. बात करनी थी तो यही भी कर सकती थी.. मेरे सामने.. मेरे साथ.. इन् दोनों के बिच कुछ चल तो नहीं रहा न या पहले था.. इसके कमर पाई हाथ रखने के बाद भी उसने कुछ नहीं कहा.. या ये मेरा वहां था.. वैसे ये नहीं हो सकता .. उसका हस्बैंड भी तो साथ है.. उसके साथ होते हुई ये कैसे पॉसिबल है.. और वो तन्वी ये तो नहीं.. वो डायरी वाली.. ओह्ह गोड़ मैंने क्यों जाने दिया.. मुझे कुछ करना पड़ेगा.. ऐसा कुछ वो सोचने लगी तभी डॉक्टर का उसके मोबाइल पाई कॉल आया..

मैडम आप कहा हो

यहाँ निचे

यहाँ उप्पर आइये

Ok आ रही हु

ऐसा कह के आरती आपने ससुर की तरफ चले गयी..
 
ये तन्वी नवाज़ को क्यों आपने साथ ले गए.. बात करनी थी तो यही भी कर सकती थी.. मेरे सामने.. मेरे साथ.. इन् दोनों के बिच कुछ चल तो नहीं रहा न या पहले था.. इसके कमर पाई हाथ रखने के बाद भी उसने कुछ नहीं कहा.. या ये मेरा वहां था.. वैसे ये नहीं हो सकता .. उसका हस्बैंड भी तो साथ है.. उसके साथ होते हुई ये कैसे पॉसिबल है.. और वो तन्वी ये तो नहीं.. वो डायरी वाली.. ओह्ह गोड़ मैंने क्यों जाने दिया.. मुझे कुछ करना पड़ेगा.. ऐसा कुछ वो सोचने लगी तभी डॉक्टर का उसके मोबाइल पाई कॉल आया..

मैडम आप कहा हो

यहाँ निचे

यहाँ उप्पर आइये

Ok आ रही हु

ऐसा कह के आरती आपने ससुर की तरफ चले गयी..

अब वो तीनो तन्वी के ऑफिस के और जा रहे थे.. उसका पति आगे चल रहा था कॉल पाई किसी से बाते करते हुई और उसके पीछे वो दोनों बाते करते हुई चल रहे थे.. फिर नवाज़ तन्वी का हाथ आपने हाथ मई लेता है तब तन्वी पहले आपने पति की और देखते है और फिर वो पीछे मुड़कर एक नज़र इधर उधर देखती है.. उस वक़्त वह कोई नहीं था.. वो तीनो स्टेप चढ़ाते हुई उप्पर जा रहे थे ........ तन्वी का हस्बैंड तो आपने धुन में आगे आगे चले जा रहा था.. उसे पता भी नहीं था की उसके पत्नी के पुराने यार ने उसका हाथ आपने हाथ मई लिया है ... नवाज़ उस वक़्त तन्वी को जी भरकर देख रहा था .......

कहा थे इतने दिन

यही.. आरती मैडम के गाँव..

कब से हो आरती के साथ..

अभी अभी 4-5 दिन हो गए है..

पता तो नहीं लिया न उसे

अभी तक तो नहीं

तरय तो मारा होगा न

हाँ चल रहा है..

बहुत तीखी मिर्ची है.. कॉलेज मई किसी के हाथ मई नहीं आये थे.. देख तुजे पैट गयी तो

सच क्या

नहीं तो क्या.. मई तुम झूट क्यों बोलूंगी..

अच्छा

मेरे याद नहीं आये क्या

आये

फिर मिलाने क्यों नहीं आये

शहर आया hi नहीं तबसे

क्यों?? आरती लेके नहीं आती क्या

नहीं

फिर आज

उनका ड्राइवर नहीं था

अच्छा

अब तीनो उनके ऑफिस पहुँच गए थे.. तन्वी का हस्बैंड आपने केबिन मई पहुंच गया था और वो दोनों बहार हॉल मई खड़े थे.. तभी वो कहता है..

तुम दोनों इधर hi आओ.. यही पाई बाते करते है..

तन्वी - हाँ आते है..

और उसका हस्बैंड फ़ोन पाई बात करने लगा.. तभी

नवाज़ आगे बढ़कर तन्वी के गले में अपनी बाहें डालते हुई उसे अपनी तरफ खींचता है तब तन्वी अंदर कमरे की तरफ इशारा करती है और इशारे से कहती है अंदर मेरा हस्बैंड है.. जरा आहिस्ता.. तब उसके इशारे को इग्नोर करते हुई उसको किश करने के लिए आपने मू आगे करती है तब तन्वी अपनी आंखें गोल गोल नाचती हुई एक बार आपने हस्बैंड के तरफ देखते वो अभी भी उसके केबिन मई उन्दोनो की तरफ पिट करके किसी से कॉल बात कर रहा था तब तन्वी नवाज़ के चेहरे की तरफ देखने लगती hain........use आँख दिखती हुई उसके बाँहों को अपने गुर्दें से हटाने लगती hain.............usse दूर होने लगती hain...............shayad शर्म की वजह से ......... वहीँ नवाज़ उसे देखता हुआ बस मुस्कुराये जा रहा था ........

अब जैसे hi तन्वी आपने हस्बैंड के तरफ जा रही थी नवाज़ इस बार तन्वी का हाथ तेज़ी से अपनी तरफ खींचता हुआ उसे अपनी बाँहों में कसकर जकड लेता हैं.......

आह्ह्ह्हह

इस वक़्त उसके दोनों हाथ तन्वी के कमर पर थे.. जिन्हें वो मज़बूती से अपनी गिरफ्फत में डेल रखा tha.............wahin तन्वी थोड़ा बहुत बहुत छूटने का तरय करती हैं फिर वो भी नवाज़ के सीने से लिपट जाती हैं और अपने दोनों हाथों से उसके सीने पर कसकर मुक्के मरने लगती हैं.................

छोड़ो mujhe................tum सच में बहुत गंदे हो ...............तुमने मेरे गले में जब बाहें डाली थी तब मेरे हस्बैंड ने देख लिया होता तो मेरा क्या होता पता है न..

देख तो नहीं लिया न..

मेरे बारे मई जरा भी सोचते नहीं हो

तेरे बारे मई सोचकर hi तो तुजे बाँहों मई लिया है न

वो भला कैसे

तू तो कहती थी न मेरे बाँहों मई तुजे सुकून मिलता है

हम्म्म

अब नहीं मिलता है क्या

मिलता है न

ओपपोसे क्यों कर रही है फिर

मेरे हस्बैंड ने देख लिया तो क्या होगा.. ये सोचकर डर रही हु

उस बोण्डु को कुछ नहीं पता चलेगा

तब नाराजगी दिखते हुई कहती है..

बोण्डु मत कहो

बोण्डु नहीं तो क्या कहु.. याद है उस दिन वो हाल मई बैठा था और मई तुझे तेरे बैडरूम मई छोड़ रहा था..

शरमाते हुई कहती है..

अच्छे से याद है.. तुमने उसे दिन बहुत बुरा हाल किया था.. बहुत जोर से कर रहे थे और मई चिल्ला भी नहीं पा रही थी.. बहुत ज़ालिम हो तुम..

ठीक hai..aaj धीरे से करूँगा..

नहीं बाबा

क्यों

शरमाते हुई कहती हाउ..

बहुत दिनों से नहीं किया है न

तेरे बोण्डु ने नहीं किया क्या

किया है पर तुम्हारा बहुत बड़ा है ..

और ..

और क्या रानी

उस बोण्डु ने हमें देख लिया तो

तो उस तुम्हारे बोण्डु को चोर के मेरे पास आ जाओ..

मई तो आए जाउंगी... पर तुम अब एक गाँव मई जेक बैठे हो.. और मेरे आने के बाद तुम्हारी आरती का क्या होगा...

क्या होगा तुम दोनों को एक साथ छोडूंगा..

की जानी दो बाबा.. ऐसा है तो मुझे नहीं करना है...........

गुस्सा क्यों करती हो..

तन्वी कुछ नहीं बोलते

वो जाने दो.. मुझे एक किश दो न

पागल हो kya...samne मेरे पति है

उसे थोड़े hi पता चलेगा

ये काम तुम उसके जाने के बाद भी तो कर सकते हो न .... मगर नहीं ....... तुमर अभी करना है.. तुम थोड़े भी नहीं बदले

मैं तो बेशरम हूँ hi ........ तुम तो जानती हो hi.. मैं तो कहीं भी शुरू हो जाता हु.. तुजे तो पता है hi..

तब गुस्से मई कहते है..

तुम कहीं भी शुरू हो सकते हो मगर.... मैं नहीं ...मेरी इज़्ज़त हैं....

और इस बार तन्वी मुँह बनाते हुई बोली.. ........

aacha......tumhari िज़ात hain.............to चलो अब मैं उसे लुटा hun...............aur ऐसी मॉल को लूटने में बड़ा मज़ा aayega...............fir मैं भी देखता हूँ की तुम्हारी िज़ात बचाने कोण आता है..

और इस बार नवाज़ अपना होंठ तन्वी के गार्डन पर रखकर उसके गार्डन को हौले हौले से चूमने और चाटने लगता हैं वहीँ तन्वी ज़ोरों से सिसक पड़ती हैं............

aaaaaaahhhhhhhhhhh.................aacha तो अब मैं तुम्हारे मॉल हु.. पहले तो कहते थे तुम मेरे जान हो.. तुम मेरे जिंदगी हो.. और अब mall...kuch दिन के बाद तुम मुझे कुछ और hi कहने लगोगे ...

तो क्या फरक पड़ता है उससे.. कहने से... प्यार तो प्यार है.. नाम कुछ भी रखने से क्या फरक पड़ता है..

दूर हटो मुझसे ..... तुम रोमांस कब और कहा करे ये समझ नहीं आता.. कब भी और कहा भी सुरु हो जाते हो.. कब सुबह हुई........... कब दिन hain............aur कब रात....... ये समाज नहीं आता.. कभी भी कहीं भी तुम सुरु हो जाते हो ....... हटो मुज्दे दूर.. मुझे ऑफिस मई और भी काम हैं........

प्यार के लिए कोई भी समय सही hi होता है..

ऐसा कह के उसको किश करने लगता है तब उसे पीछे पुश करते हुई तन्वी कहते है..

तुम भी न........ इतने दिनों बाद हम मिले है.. कुछ प्यार भरी बात करने के बजाये तुम मेरे बॉडी चाहिए..

तो इसमें गलत क्या है.. मैंने तुम भोगे हुई कितने दिन हो गए है..

जी तो कर रहा की मैं अभी तुम काचा चबा जावून................

ऐसा तन्वी शरारती अंदाज़ में बोल पड़ती हैं तब नवाज़ अपनी दोनों बाहें खुद hi उसके सामने फैला देता हैं............

शौक se......roka किसने हैं ........काश वो दिन कब आएगा जब ये मेरे माशूका मुझे कच्चा चबा jayegi....kasam से बड़ा मज़ा aayega.............bahut खुसनसीब होऊंगा मैं उस दिन .......

और नवाज़ इस बार ज़ोरों से हंस पड़ता हैं वहीँ तन्वी सोफे पर रखा पिलो अपने हाथों में उठती हैं और कसकर नवाज़ की तरफ फेंक मरती है..

और नवाज़ को गुस्से से देखते है तन नवाज़ फिर से उसके पास चला जाता है

और इस बार तन्वी नवाज़ को से दूर करते हुए पीछे की तरफ मुड़ती हैं तभी नवाज़ कसकर उसकी गांड पर एक ज़ोर का थप्पड़ मरता हैं जिस वजह से वो जोर से आह्ह्ह्हह करके सिसक जाती है और वो गुस्से से नवाज़ की तरफ देखने लगती हैं .... और उसे कुछ कहना चाहा रही थी तब उसका हस्बैंड पलट कर कहता है..

क्या गिर गया.. कैसे आवाज़ थी.. तन्वी..

तब वो झट से घूम के कहते है..

शयद बालकनी मई कुछ गिर गया होगा देखती हु..

तब उसका हस्बैंड कहता है..

ारे नवाज़ वह क्यों खड़े हो.. शर्मा रहे हो क्या?? आपने hi ऑफिस संजो और इधर केबिन मई आओ..

तब तन्वी मैं मई कहते है..

ये कहा शर्मा रहा है ये तो तुम्हारे बीवी को छोड़ने के फ़िराक मई है..

अब नवाज़ उन दोनों के साथ उनके केबिन मई बैठ जाता है.. अब तीनो बातचीत कर रार रहे थे.. तन्वी उसे hi देखते हुए हौले हौले से मुस्कुरा रही थी ......... उसके पति को समाज न आहे ऐसे नवाज़ से बाते कर रही थी.. तभी उसके हस्बैंड को किसी का कॉल आता है.. कॉल आने की वजह से उसको उन लोगो को मिलाने जाना पड़ा..
 
अब नवाज़ उन दोनों के साथ उनके केबिन मई बैठ जाता है.. अब तीनो बातचीत कर रार रहे थे.. तन्वी उसे hi देखते हुए हौले हौले से मुस्कुरा रही थी ......... उसके पति को समाज न आहे ऐसे नवाज़ से बाते कर रही थी.. तभी उसके हस्बैंड को किसी का कॉल आता है.. कॉल आने की वजह से उसको उन लोगो को मिलाने जाना पड़ा .. तब नवाज़ ने मन बना लिया था की आज इसको ऐसा छोडूंगा की बार बार वो खुद छुड़वाने उसके पास aaye…uske गाँव आये..

उसका पति वह से जाते hi नवाज़ ने तन्वी को बाँहों में लिया और नवाज़ तन्वी के फेस को अपने दोनों हाथों से पकडे हुई उसके लाल लाल होंठो को मस्ती से चूसने लगा.. तन्वी भी उसका भरपूर साथ दे रही थी. उसके दबे हुई होंठो से बस unnnnnnnnnhhhh…unnnnhhh sisisissi…ki आवाज़ निकलते रही..

थोड़ी देर चूमने के बाद नवाज़ ने उसके होंठों को आज़ाद kiya.fir उसके कमर को कास के पकड़ लिया… और नवाज़ ने तन्वी के गले को आपने जीभ से चाटने लगा … आपने गाल से उस के गालो को मसलने laga...Fir उसने उसके ड्रेस की ज़िप निचे कर के ब्रा की स्ट्रिप उसके शोल्डर से बहार खिचके निकली और उसके निप्पल पर अपनी उंगली गुमा ली…

फिर अपनी जीभ को तन्वी के कान में दाल दिया.. और कान को चाटने laga...Jibh पुरे कान में घुमाई ... उसने बाद मई एक हाट कमर से हटके उप्पर उप्पेर हाथ को लेके गया लेकिन उसके बॉल को नहीं दबाया ..... और उसके कान को चाटते हुई उसको बोलै..

...क्या महक है तन्वी तेरे बदन की .......मज़ा आ गया…

तन्वी अब कण्ट्रोल से बहार हो रही thi...par उसने कुछ नहीं कहा तभी उसके पंत का बेल्ट खोल के उसके बटन निकल दिया की उसकी पंत निचे गिर gayi..tab उसके पंतय के अंदर हाथ दाल के उसके छूट को नवाज़ ने मसल दिया.. और वही हाथ उस के नाक और मूठ पे रख दिया…

कैसे है सुंगंध.. तेरे छूट की

हम्म्म

और तन्वी को पीछे से पकड़ के दिवार की तरफ ढकेल दिया.. और पीछे से जोर के 3-3 झटके diye..uske लैंड तन्वी की गांड के बिच वाले लकीर के पास tha..isliye वो अंदर जाने की कोशिश करने लगा पर अब वह पंतय थी..

आह्हः यहाँ नहीं

फिर

सोफे पाई

उसको उतके वह जो ऑफिस सोफे था उसपे उसको लेता दिया..

अब तेरी छूट तड़प के उठेंगी…

ऐसा बोल के उसके दोनों पेअर फैलाके उसके पंतय निकल फेंक दी.. और उसने आपने लुंड तन्वी की छूट पे रख के घूमने laga...aur छूट को लुंड से घिसने लगता hai...tab तन्वी बोली..

आराम से daalana..yaar.. तेरा लुंड बहोत जायदा ज्यादा है.. जाएगा नहीं आसानी से..

पहले तो जाता था

अब आदत नहीं है न

नवाज़ लैंड को छूट पे घिसते हुई तन्वी को बोलता है

तन्वी कभी तेरे पति ने तेरे को नंगा करके छोड़ा है क्या..

नहीं..

तन्वी को उलझाया रखता hai..aur लुंड को छूट पे घिसते रहता हैं..

दर्द से तन्वी काँप रही थी.. उसके पेअर और पेट लाप लाप हिल रहे थे ...तभी नवाज़ ने जोर से लुंड उसके छूट मई दाल दिया..

आह्हः मर गयी.. बहार निकालो इससे..

लेकिन नवाज़ ने लैंड को बहार नहीं निकला .....

क्या है ye...ye तुमने ऐसा इतनी ज़ोर से एकदम दाल diya..koi ऐसा करता है क्या ..

अब कुछ समय तक नवाज़ कुछ नहीं करता.. अब तन्वी को थोड़ा दर्द पहले से काम लग रहा था.. तब वो एक बार फिर ज़ोरदार झटके मरना शुर करंट hai...aur अब रुकता भी नहीं…

आआअह्ह ऊऊऊऊऊह्यी ायः रे एआरएमसी कार नाहहहह ाअहह... दुख रहहहहहाआ हानआईई ररररीी आआईटी मर्डर gayee....lag रहा है आज तू मुझे मार hi डालेगा.. ....

और तन्वी अपने हाथ से उसका मुयह उप्पर उठा के उसको पीछे धकेलने की कोशिश करती है.. पर नवाज़ के ताकत के आगे वो कुछ कर नहीं पा रही थी. …नवाज़ बिना कोई तन्वी के दर्द की परवाह किये तापा तप ज़ोर ज़ोर से लैंड को छूट में गुसा के तन्वी को चूड रहा tha..jab नवाज़ तन्वी की छूठ में झटका मरता thaa..us झटके से तन्वी की जांघों से लेके पीट और उसके बॉल भी हिल जाते the..pure बदन में वाइब्रेशन होने लगता था

तन्वी को दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा thaa..use लगा की नवाज़ 5 मं में ज़द जायेगा... लेकिन नवाज़ ने 15 मं तक पहला ज़ोरदार शॉट मारा.. छूट लाल हो गयी.. और दोनों पसीना पसीना हो गए थे ..

फिर नवाज़ लुंड बहार निकल कर जीभ से तन्वी की छूट को चाटने लगता है... पूरा जितना हो सके उतनी जीभ को छूट में दाल देता है… तन्वी को इससे मज़ा आने lagata..aur एकबार फिर बिना बताये नवाज़ उसका मोटा कला बड़ा लैंड तन्वी की छूट में दाल deta....aur तन्वी फिर दर्द से तड़प कर चिल्लाने लगाती है

आअह्हह्हह ारे अरम्म से दाल ना … आअह्ह्ह्ह आआअह्ह hah.ooooohhhhh

और नवाज़ को मरने लगती हैं.. नवाज़ तन्वी का गाला दबाके पुरे ज़ोर से छोड़ने लगता है… अब तन्वी को उल्टा करके नवाज़ उसको घोड़ी बना देता hai....aur उस की जांघो को दबाने लगता hai....nawaz का लम्बा छोड़ने का स्टैमिना देख कर तन्वी को बड़ी कृषि हो रही thi..kyo की आज तन्वी नवाज़ से मन से छुड़वाना चाहती thi..…aise चुदाई वो भूल गए थे.. उसे पता था नवाज़ ऐसे hi छोड़ता hai..nawaz अभी पीछे से उसको छोड़ रहा था.. तन्वी सिसकियाँ देती रहती hai...fir नवाज़ दोनों हाथ से उस की बड़ी गांड को दबाने लगता hai…nawaz के ज़ोर से गांड दबाने ने से तन्वी की गांड लाल हो जाती है.. .. अब नवाज़ पीछे से तन्वी की गांड को चाटने लगता hai…nawaz और तन्वी एकदूसरे को काफी एंजोयेड कर रहे थे ... ..पांच मिनट्स गांड को चाटने के बाद नवाज़ उसके दोनों हाथ तन्वी की गांड से घूमते हुए उसकी कमर पाई ले जाता है ...और दोनों हाथो से तन्वी को निचे दबोच देता है..

नवाज़ तन्वी के बालो को घुमा के एक हाथ से पकड़ लेता है और दूसरे हाथ से उस के दोनों हाथ को पीछे करके कमर पे पास रख के पकड़ लेता hai...kuch देर तक कुछ नहीं किया तभी तन्वी कहते है

देख नवाज़ गाड़ में मात दाल... ...तू ये सब मत kar..yaha ऑफिस मई मत कर बहुत दर्द होगा.. बाजु वाले सब ऑफिस के लोग यहाँ आ जायेंगे..

नवाज़ उस के बालो को छोड़ देता है और हाथ पैर चखः लगा के लैंड को थूक से भीगा देता और फिर कसके उस के बाल पकड़ लेता और बोलता है ..

जब तक तू नहीं बोलेंगी तब तक तेरी गांड में नहीं डालूंगा रानी ... वैसे भी तेरी छूट तो बहोत ज्यादा टाइट लग रही है ...इतने दिनों से तेरा पति ने तुजे छोड़ा नहीं क्या.. पहले तो इतने टाइट नहीं थी..

छोड़ा है पर तेरे जैसे नहीं.. तू इतने दिन नहीं था न इस वजह से टाइट हो गयी है..

..बातो बातो में एक बार फिर नवाज़ ने ज़ोरदार झटके के के साथ लैंड को तन्वी की छूट में धकेल दिया .. इसबार झटका कुछ ज्यादा hi ज़ोर का था… तन्वी एकदम दर्द से बहोत ज़्यादा ज़ोर से चिल्लाने लगी…

आअहाआ मुंईईई मर गयीईइ री.. मादरचोद बताके दाल न.. ... आअह्हह्हह ह्ह्ह्हह्हआ माय पुस्सीय ...... मेरी छूट को दर्द हो रहा है बातके दाल ..

नवाज़ अब तन्वी के उप्पेर गिर जाता hai..uske कान को जीभ से चूमने लगता hai..aur बोलता है

इतना मत चिल की बाजु वाले ऑफिस के लोग यहाँ आ जाये..

कुछ 2-3 मं नवाज़ प्यार से धीरे धीरे तन्वी की चुदाई करता है… तन्वी भी आराम से सिसकियाँ देती रही और मज़े लेती रही.. फिर अचानक वो तन्वी के दोनों हातो को उसके दोने हाथो से पकड़ के पीछे की तरह खिचके उस की छूट में लैंड से अब्ब तक की सबसे ताकद्वर जातको से छोड़ने शुरू कर देता है.. वो अब जड़ने की स्टेज पे tha..aur वो तन्वी के हाथ को कसके पकड़ कर दाना दान झटके देते हुए उस को छोड़ रहा tha...land कुछ ज्यादा hi अंदर तक जा रहा thaa..aur तन्वी बुरी तरह से दर्द से तड़फ रही थी.. निचे नवाज़ ने तन्वी के पेअर के उप्पेर उसके घुटने रख दिए the..to एक hi समय उस को छूट और पेअर की पोटरी में दर्द होने लगा था… नवाज़ मनो जानवर की तरह दाना दान दाना दान उसकी चुदाई कर रहा था.... तन्वी कुछ देर तक आराम से सिसकियाँ दे रही थी लेकिन अब दर्द बर्दाश्त नहीं होने के कारण एकदम तड़फ कर बोली

आआअह्ह कितना अंदर तक डालेगा.. निकाल अब्ब बहार ... रंडी थोड़ी हुऊ Mai...aaa आहहहहह ओह्ह्ह्ह yyessssssss..baad मई मुझे चलना भी आना चाहिए नहीं तो हस्बैंड शक करेगा..

अब नवाज़ उसको पुरे पीछे कीचता है और उसका मूह को पीछे करके किश करता है.. पूरी जीभ से तन्वी की जीभ को चोसे के उसे पिने लगता hai..hoonth को ऐसा चुस्त है जैसे कोई आम हो... निचे से ठुकाई और तेज़ कर देता है.. तन्वी पूरी तरह पसीने से और भीग जाती है.. नवाज़ को भी बहोत ज्यादा पसीना आ रहा था...

तभी नवाज़ उस को किश करना बंद कर देता है और दोनों हाथ से उसकी कमर पे रख के उसकी कमर को दबाने लगता है ..और फिर वही हाथ तन्वी के गले के पास लेके तन्वी का मूह दबाने लगता है ...और बाद मई नवाज़ उसका पूरा वेट तन्वी की छूट पे डालके उसे छोड़ने लगा.. तन्वी अब ज़ोर से चिलाती है.. क्यों की उसे ऐसा लग रहा था की किसीने उसके छूट में कोई लकड़ी डाली है और उप्पर से कोई हथोड़ा मार रहा hai..jab उस का लैंड तन्वी की छूट में जाता तब उसे नेक्स्ट लेवल का दर्द होता.. प्रेशर इतना बन जाता की तन्वी की जांघो दर्द करती और वो चिल्ला उठाती.. नवाज़ बहोत hi हार्डकोर चुदाई कर रहा था.. तन्वी दर्द से चीला तो रही थी लेकिन उसे ऐसी hi चुदाई चाहिए थी..

अब कुछ समय बाद तन्वी झाड़ जाती hain..Nawaz के लैंड को तन्वी की छूट में hi महसूस हो जाता हैं की तन्वी ज़द रही है.. वो झटके और तेज़ करने लगता है .. तन्वी को लगता की नवाज़ का अब निकलने वाला hai..kahi वो उसका स्पर्म उसके अंदर ना छोड़ दे..

उधर नवाज़ दोनों हाथो से तन्वी को निचे दबाके पुरे ज़ोर से उप्पेर से चुदाई करता रहता hai..lekin जैसे तो कुछ करके तन्वी छूट में से नवाज़ का लैंड निकल लेती है और सोफे से निचे उतरना चाहा रही थी.. क्यों की वो वैसे hi रही तो नवाज़ आपने स्पर्म आपने अंदर डालेगा उसको पक्का पता था.

वो थोड़ी निचे जाते hi नवाज़ उसके पैरों को पकड़ के उसे फिर से उप्पर खिचके के वही सोफे पाई की छोटी से जगा में पटक देता hai...magar तन्वी इस बार नवाज़ का हाथ पकड़ के नवाज़ के उप्पेर चढ़ जाती है .. फिर भी नवाज़ उसका लैंड तन्वी की छूट में एक बार फिर दाल देता है... थोड़ी देर तन्वी उप्पेर से खुद उछाल उछाल के जातको से नवाज़ का लैंड अपनी छूट में लेती hain..aur अचानक वो नवाज़ के छाती की बाल नोचने लगती है.. कुछ देर बाद ज़ोरदार थप्पड़ से नवाज़ के मूठ को मारने लगती है... .. नवाज़ दर्द से तड़पने लगता और बोलता है..

तानी क्या हुवा.. एकदम से ..अरे बातो छूठ में दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा क्या... हाथ बहोत चल रहे है तेरे आज

तन्वी कुछ नहीं बोलती और उसको को किश करने लगती है... लेकिन किश करते वक़्त उसकी जीभ को काट लेती है… नवाज़ एकदम से तड़पने लगता है… तन्वी नवाज़ के बाल को बड़ी जोरसे किचन लगती है..

नवाज़ को समाज नहीं आ रहा था की चल क्या रहा hai..Fir नवाज़ दोनों हाथ से तन्वी को उसके उप्पेर ले लेता hai..aur ज़ोर उसको छोड़ने लगता है.. नवाज़ का अब निकलने वाला था.. तन्वी नवाज़ के गले को चाटने लगाती hai...aur नवाज़ के निप्पल को मूठ में लेके चूसना सुरु कर देती है और एकदम उसे उसके निप्पल्स को भी काट लेती है ... दर्द से तपड़ता हुई नवाज़ का लैंड तन्वी की छूट से बहार आ जाता है…

तन्वी अब नवाज़ के लुंड की तरफ जाके उसको मूठ में लेती है.. कुछ समय तक नवाज़ पड़ा रहता और जिससे उसे लगता की उसका स्पर्म निकलने वाला है.. वो तन्वी का मूह दबा देता है ..और पूरा लैंड उसके मुयह में चला जाता है .. नवाज़ कैसे भी करके खड़ा हो जाता है और उसके मूठ में लुंड घूमने लगता है .... तन्वी नवाज़ को किसी जंगली की तरह जो मार रही थी, काट रही थी उससे नवाज़ थोड़ा उलझन में पद गया था... लेकिन अब तन्वी के मूठ में नवाज़ का लैंड था तो नवाज़ अब ज़ोर से तन्वी के मुयह में झटके मरने लगा...

कुछ समय बाद तन्वी के मुयह से थूक बहार आकर उसके गले से होते हुए छाती और उसके बॉल को लग रही थी…

नवाज़ तन्वी के बॉल्स को कीचे के उसके मूह में ज़ोरदार झटके दे रहा था… नवाज़ का लैंड तन्वी के गले को लग रहा था ..

नवाज़ ने अब तन्वी के नाक को दबा दिया और एक हाथ से उसका मूठ लैंड के उप्पेर दबा रहा tha..tanvi अब सास भी नहीं ले प् रही thi..Wo दोनों हातो से नवाज़ की जांघो पे मार रही थी.. ज़ोरदार झटके से तन्वी का मूह अब ढकने लगा था.

ओह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह्ह निकाल..

तंवक की आवाज़ निकल नहीं रही है थी सासे ातक गयी thi...Muh में से लाल टपक के गाला और छाती भीग गयी thi...fir भी नवाज़ लैंड को बहार नहीं निकल रहा tha...Kuch hi समय में नवाज़ का लैंड झड़ने लगता hai.tanvi की मुयह me...nawaz का स्पेर्म्स तन्वी के मूठ में गिर जाता है.. स्पेर्म्स इतना ज्यादा होता है की तन्वी उसे थूकना चाहती hai..uske पीना नहीं चाहती है ...और वो थूक देती है..

अब दोनों वही पड़े रहते है ..... नवाज़ एक और राउंड तन्वी को छोड़ना चाहता था लेकिन तन्वी मन कर देती है ...

एक जबरदस्त किश के साथ तन्वी बोलती है..

एक और किया न मई चलने के काबिल नहीं रहूंगी और फिर मेरा हस्बैंड मुझे तरह तरह के सवाल पूछ के बेज़्ज़र करेगा.. और उससे पकड़े जाने का चांस भी रहता है..

ोकक रानी..

और निचे तेरे मेमसाब भी वेट कर रही होंगी..

ठीक है.. मई चलता हु ..

ऐसा कह के नवाज़ वह से निचे चला जाता है..
 
और निचे तेरे मेमसाब भी वेट कर रही होंगी..

ठीक है.. मई चलता हु ..

ऐसा कह के नवाज़ वह से निचे चला जाता है..

नीचे आरती आपने ससुर के रूम मई बैठी थी.. नवाज़ को देखते hi आरती कहते है ..

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हो गया मिलाना

हाँ

पता है 1 घंटा हो गया

हाँ वो साहब आने hi नहीं दे रहे थे

और तन्वी

वो तो किसी काम मई बिजी थी

अच्छा

फिर वो नवाज़ के शर्ट को देखते है वो थोड़ा भीगा हुआ था

तेरा शर्ट कैसे भीग गया

पसीने से

हाँ पर पसीना कैसे आया इतने ठंडी मई

तब बात को घूमते हुई नवाज़ कहता है

वो सीढ़ियों से भाग के आया

क्यों.. लिफ्ट तो है

वो हमें चलने नहीं आती है

आरती ने फिर कुछ सोचा और नवाज़ से पूछा

वैसे तुम कैसे जानते हो तन्वी को

तब उसके सवाल का जवाब देने के बजाय नवाज़ उल्टा सवाल उसको पूछता है..

आप कैसे जानते हो तन्वी को

मई कैसे जानती हु उसको??

हाँ

नीता के बुद्धू राजा.. पहले मैंने सवाल पूछा.. सवाल का जवाब देने के बजे मुझे उलटा सवाल पूछ रहे हो

बताइये न

हम क्लासमेट है.. कॉलेज मई एक साथ थे..

तब तो तन्वी से आप के बारे मई बहुत कुछ पता लग सकता है..

मेरे बारे मई..

तब नखरा करते हुई कहती है..

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क्या जानना है तुम मेरे बारे और वो भी तन्वी से

यही की आप इतनी खूबसूरत है तो कॉलेज मई आप का कोई न कोई चक्कर होगा न..

तब नखरा करते हुई गुस्से से कहते है. .

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एक थप्पड़ मिलेंगे ऐसा कुछ किसी को मेरे बारे मई पूछा तो

क्यों

तुम मई ऐसे लगती हु क्या

नहीं नहीं मुझे नहीं लगती पर आज कल हर किसी का बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड होता है न

मई कोई बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड वाली नहीं हु.. मेरा पहला प्यार अरविन्द था और आखरी भी

फिर लड़के तो पीछे होंगे न

होंगे.. उसका मुझे क्या करना है

तन्वी मैडम को पूछना पड़ेगा

पूछ लो.. वो क्या अलग बोलेगे वो भी यही बोलेगे.. मेरा कोई चक्कर नहीं है ऐसा hi बोलेगे..

लड़के पीछे थे या नहीं वो तो बतायेगे

तब शरमाते हुई आरती कहते है

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थे न.. बहुत सरे लड़के थे पीछे.. कुछ ने तो प्रोपोज़ भी किया था.. पर मैंने घास नहीं डाला

अच्छा

हाँ

ऐसे कितने लड़को ने प्रोपोज़ किया होगा आप को

तब नखरे से कहते है

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उससे तुम क्या??

बताइये न मेमसाब

इतने सरे सवाल पूछ रहे हो.. इतना तो मेरे हस्बैंड ने भी मुझे नहीं पूछा कभी

हस्बैंड ने पूछा तो वो शक वाला सवाल हो जाता है..

हम्म्म्म..

फिर कुछ सोच कर कहते है

नहीं नहीं अरविन्द ने कभी शक नहीं किया मुझपर

साहब ाचे है

मई नहीं हु क्या

आप भी बहुत अच्छे है.. अब आप बता दो न

ठीक से याद नहीं है पर कुछ 7-8 होंगे

सभी कॉलेज के है

नहीं उसमे 1-2 कॉलोनी के और 1-2 ऐसे किसी फंक्शन मई गयी तब रिलेटिव लोंगो मई से किसी ने किये थे..

इसमे कोई भी आप को पसंद नहीं आया क्या

वैसे बात नहीं है नवाज़.. पसंद या नापसंद.. पर हमारे संस्कार मई नहीं बैठता ये सब.. घर वालो ने जिस से शादी की उनसे प्यार करो यही हमारे संस्कार है..

अच्छी बात है..

तभी तन्वी वह आ जाती है..

कैसे है तबइयत अंकल की

तब आरती कहते है..

अच्छे है.. अब सो रहे है.. इंजेक्शन की वजह से..

अच्छा..

फिर तीनो इधर उधर की बाते करते है…

तब नवाज़ कहता है

न - वैसे तन्वी मैडम सुना है आप दोनों क्लासमेट थी

टी - हाँ

न - तो आप को हमारे मेमसाब के बारे मई बहुत कुछ पता होगा

तब आरती स्माइल करते है

टी - हाँ.. बहुत कुछ पता है आप के मेमसाब के बारे मई

न - तो हमें बताओ न

अब नवाज़ के ऐसे कहने से आरती शर्मा जाती है

टी - बता तो दूंगी पर हमारा क्या फायदा

न - बोलिये आप को क्या चाहिए

टी - मुझे न..

ऐसा बोल के सोचने लगी

तब आरती कहते है

ा- तन्वी उसको बता दे नहीं तो ये मुझे सवाल पे सवाल पुचके परेशान करता रहेगा

टी - वैसे नवाज़ तुम्हारे मेमसाब न पहले से बहुत अच्छे है.. उसके ज्यादा फ्रेंड तो नहीं थे.. पर उसके पीछे न बहुत सरे लड़के पागल थे.. पर इसने न किसी को घास नहीं डाली.. पता नहीं तुम्हारे साहब मई इसे क्या दिख गया जो इनके प्यार मई ये इतने पागल हो गयी की आपने पुराने दोस्त को भूल गए.. उसको पति के चक्कर मई फ्रेंड को कॉल करना याद भी नहीं रहा

तब आरती हस्ते हुई कहते है

तन्वी वैसे बात नहीं है.. वो जरा ज्यादा बिजी हो गयी थी.. अब जरूर करुँगी

ठीक है तुम दोनों बात करो मुझे निकलना है.. निचे मेरे हस्बैंड मेरा वेट कर रहे है..

उसने दोनों को bye bye किया और वह से nikale..tanvi जाते टाइम दूर के पास जेक पलट के नवाज़ को उसने फ्लाइंग किश दिया ..

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ये इतना फ़ास्ट किया तन्वी ने की आरती अच्छे से देख नहीं पायी पर उसका नवाज़ और तन्वी पाई उसे शक हो जाता है.. और वो वही सोचने लगी..

कुछ 4-5 मिनट बाद नवाज़ कहता है..

बड़े मालिक को होश कब तक आ सकता है..

तब आरती आपने होश मई आ जाती है..

पता नहीं डॉक्टर से पूछना पड़ेगा..

तब नवाज़ कहता है..

क्या अब तक वो हॉट डॉक्टर नहीं आये क्या

तब नखरे से आरती नवाज़ को देखती है..

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हॉट डॉक्टर हाँ??

हाँ मेमसाब

लाइन मार रहे हो क्या उसपर

हां आप को पता hi है

मुझे लगा मज़ाक कर रहे हो

सुन्दर लेडी के बारे मई मैं मज़ाक नहीं करता मेमसाब

अच्छा

ऐसा बोल के उसके पास जाती है.. और गुस्से से उसको मरने के लिए हाथ उठाती है और उसके गाल तक हाथ लेके जाते है और खुद पाई कण्ट्रोल करते हुई बोलती है..

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ये शेखचिल्ली की औलाद ...... ख्याली पुलाव बनाना बंद कर ...... नहीं तो जो नौकरी हाथ लगी हैं न.... वो भी कहीं हाथ से न निकल जाये........

अब इसमे नौकरी कहा से बीच मई आ गयी मेमसाब

तूने अगर कही उलटी सीधी हरकत की न और उस डॉक्टर ने पापा जी को बोलै न तो नौकरी चली जायेगे हाट से..

ऐसा हो सकता है क्या

और नहीं तो क्या.. उस डॉक्टर के सपने देखना बंद कर ...... उस पारी को पाना तेरे जैसे लंगूर के बस में नहीं हैं ...... वो चिझे कभी नहीं मिलने वाली ..... और तू ये बता … आखिर तुझ में हैं ऐसा क्या जो वो तुझे थोड़ा भी भाव degi.......ek बात अपने दिल और दिमाग में गाँठ बाँध le....dr.sarika को पाना सपने को मुट्ठी में कैद करने के बर्बर जितना हैं ....... ये तेरे बस का नहीं है ..........

आरती कह रही थी और नवाज़ उसे गौर से सुन रहा tha..aur आखिरकार उसके चेहरे पर फिर से एक कमीनी सी मुस्कान आ hi जाती हैं ..............

मेमसाब कहते है.. किसी भी चीज़ को पाने की ज़िद्द हो to.....der सबीर इंसान उस चीज़ को आखिर हासिल कर hi लेता hain..............bus उस काम को करने में सच्चाई . दिल से म्हणत ...... .lagan........aur शिद्दत होनी चाहिए .....बाकि तो सब ऊपर वाला हैं hi .........

तब आरती पलट कर कहती hai..kuch सोच कर...

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जो तू गांव में कई साडी औरतों को बेहला फुसलाकर उनके साथ जो करम काण्ड करता है न .... ऐसा यहाँ जो कुछ तू सोच रहा वो बिलकुल नहीं चलेगा ....ये सब शहर की लौंडिया हैं .......... दिखने में जितनी भोली होती है ......अंदर से उतनी hi चालू ........ और टेढ़ी होती है ..........

और आरती एक hi सांस में अपनी बात ख़तम करती हैं..

उसकी आधी नंगी पिट को देखते हुई कहता है

आप भी शहर की है न

तब आरती झट से पलट जाते है.. और उसके आँखों मई देखते हुई कहती है..

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अब क्या मेरा ख्याल आ रहा है क्या तुजे .. सोचना भी मत..

वैसे बात नहीं

तो

आप भी शहर की है तो आप भी जानते होगी न शहर की लौंडिया कैसे पटती है

इतना घ्यान दिया कुछ पल्ले नहीं पड़ा क्या

आरती चाहा रही थी की नवाज़ डॉक्टर से दूर रहे और नवाज़ चाहा रहा था की वो डॉक्टर के पास चला जाये..

आप hi आईडिया दो न

तुम अपनी नौकरी प्यारे नहीं है क्या

मेरे नौकरी नहीं जायेगे.. आप हो न.. हमारी प्यारे मेमसाब.. आप के होते हमारे नौकरी कोई भी हमसे चीन नहीं पायेगा..

अब भला मई कैसे तुम्हारी नौकरी बचा सकती हु अगर पापा जी तुम निकलने का फैसला किया तो

पहले बात मेमसाब शेठजी ऐसा कुछ नहीं करेंगे अगर उस डॉक्टर ने शेठ जी को मेरे बारे मई कहा भी तो..

और दूसरी बात

अगर शेठ जी ने उसकी बात सुनी और मुझे नौकरी से निकलने का फैसला किया तो आप आपने लोमड़ी वाला दिमाख चला के ..

तब आरती गुस्से से देखती है..

तब कहता है..

मतलब आप का दिमाख चलके कुछ आईडिया निकल लोगी और मुझे बचाओगे..

अच्छा... मस्का मत लगाओ मुझे ..

मस्का नहीं सच बता रहा हु..

और मई ऐसा क्यों करुँगी

आप करोगे.. आप बहुत अच्छी हो..

मई अच्छी हु तो क्या तुम्हारे लिए मेरे ससुर जी से जगदा मोड़ लुंगी

नहीं आप उन प्यार से समजाओगे

पर मई कहती हु इतना रिस्क लेने की क्या जरुरत है..

मुझे वो बहुत पसंद आ गयी है

कितनी

तब आपने हाथ फैलाकर कहता है

इतनी

तब दोनों हँसाने लगे..

तभी नीता का आरती के मोबाइल पर कॉल आता है

आ गया तुम्हारे रानी का फ़ोन..

बोलो हमारे नवाज़ मिया की बुलबुल

आज पहले बार नीता ने नवाज़ के साथ नवाज़ मिया कहा था.. और उसे साथ मई हमारे नवाज़ मिया कहा था.. इस बात पर नवाज़ खुश हो जाता है और उधर नीता शर्मा जाती है..

दीदी.. आप भी न कुछ भी बोलती हो..

अच्छा तुम एक दूसरे के आशिक़ और माशूका हो तो मुझे कहने के लिए क्या आपत्ति.. वैसे कॉल क्यों किया ये बता दो या आपने आशिक़ की जुदाई बर्दास्त नहीं हो रही थी क्या..

वैसे बात नहीं है

तो

आपने कहा था न दीदी आप मेरे पसंद की चीज़ लाओगे..

हाँ जल्दनजी मैं मई भूल गयी .. अब बता दो

तब नीता सब चीज़े बता देती है..

ठीक है लेट हु

ठीक है दीदी

वैसे नीता तुजे तेरे आशिक़ की याद आ रही थी क्या

तब नीता शर्मा जाती है..

दीदी आप भी न

पर मुझे लगता है तेरे आशिक़ को तेरे याद नहीं आ रही थी...

वो भला क्यों दीदी

क्यों की तेरा आशिक़ यहाँ एक डॉक्टर पाई लट्टू हो गया है

वो वैसा hi है..

वो वैसा hi है.. तुजे गुस्सा नहीं आया इस बात पर..

गुस्सा करके क्या फायदा दीदी.. वो थोड़े hi सुदराने वाला है...

तो क्या फिर ऐसे hi उसको फ्री हैंड देंगे क्या..

तो क्या करू मई दीदी

उसपे कण्ट्रोल कर

कैसे दीदी

तब आरती देखते है दूर से डॉक्टर आ रही है

मई तुम बाद में बताती हु.. तेरे सौतन आ रही है..

तब नवाज़ दूर की तरफ देखते है

मेरी सौतन

वही डॉक्टर जिस पाई तेरा आशिक़ फ़िदा है

नवाज़ हँसाने लगा..

देख कैसे आँखे फाड़ के उस हसीं डॉक्टर को देख रहा है लग रहा है आँखों से hi उसका रपे कर देगा..

तब नवाज़ और नीता हँसाने लगे.. अब डॉक्टर उस रूम मई आ जाती है..

मई रखती हु.. बाद मई बात करती हु..

ऐसा कह के वो कॉल कट करती है..

अब डॉक्टर रूम मई आके शेठ जी को देखने आगे बढ़ती hai..wahin नवाज़ डॉक्टर की थिरतकी हुई गांड को बड़े hi ध्यान से देख रहा था ...... .जिसे देखकर आरती ना में अपना सर हिलती हुई धीरे से कहती ...

तेरा कुछ नहीं हो सकता..

तब पलट कर डॉक्टर कहती है..

नवाज़ मई मेरा स्ट्रेटोकोपे मेरे केबिन मई भूल गए हु.. लेके आ सकते हो..

और आगे की तरफ देखते है.. तब नवाज़ आरती की तरफ देखता है.. ....... तब आरती कहते है..

No..

नवाज़ प्यार से कहता है..

प्ल्ज़.. आप ये पुण्य का काम एक बार कर लो मेरे लिए..

तब स्माइल करते हुई आरती कहती है..

ताकि तुम उसका काम तमाम कर लो..

और फ़ौरन बहार की तरफ चली जाती हैं ...... और कहती है..

डॉक्टर मई लेके आती हु..

थैंक यू मैडम

ऐसे डॉक्टर कहते है
 
फिर आरती डॉक्टर के केबिन मई चुप चाप से बैठ जाती hain.......aur कुछ सोचने लगती हैं......

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अब कमीना क्या कर रहा होगा.. क्या वो डॉक्टर को पता लेगा क्या... इतने जल्दी.. पर कैसे.. वो अब ये सोच रही थी की कैसे वो ये सब किसी पराये मर्द के बारे में सोचने लगी ........ ये सब सोचना भी उसके लिए पाप hain...........wo शादी शुद्धा है.. पहली बार उसे बहुत अजीब सा लग रहा था ....... उसका मुन्न बार बार नवाज़ के तरफ जा रहा था ..... कभी उसके चेहरे पर मायूसी आ जाती ......तो कभी बेचैनी .......... सारा टाइम वो बस एहि सब सोचती रहती है ..

वहीँ दूसरी तरफ आरती के जाने से नवाज़ का चेहरा खिल उठता है.. जैसे बहुत ख़ुशी होने के बाद खिल ुआतता है वैसे. ...आरती के जाने से अब डॉक्टर सरिता को पटाने की उसकी उम्मीद बहुत हुड तक बढ़ गयी थी...... और वो अब कैसे भी करके उसको पटना चाहता था ....... चाहे उसे उसके लिए जो कुछ भी क्यों न करना पड़े ...... सरिता जैसी माल को वो अपने हाथों से इतनी आसानी से जाने देने वालों में से वो नहीं था......

इधर आरती का दिमाग भले hi तर्क- वितर्क कर रहा था मगर दिल तो बार बार नवाज़ की तरफ जा रहा tha......dil में अजीब अजीब से विचार बार बार उठ रहे थे जो मुन्न को विचलित करते जा रहे थे....... वो सोचते है क्या अब वो सरिता से चिपक के खड़ा होगा क्या.. आरती के मुन्न में ये ख्याल आते hi उसके चेहरे पर शर्म और लाज की लाली साफ़ नज़र आने लगती हैं ..............

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नवाज़ अब डॉक्टर सरिता के पास आया और आकर उसके बाजु में खड़ा हो गया ....... और बड़े ध्यान से सरिता के चेहरे की तरफ देखने लगा ..

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सफ़ेद रंग की सूट में सरिता बहुत सूंदर लग रही thi.....laggy स्किन से पूरी तरह से चिपकी होने की वजह से उसकी गांड और भरी हुई जांघें नवाज़ के जैसे तन बदन में आग लगा रही thi.............wo बड़े गौर से उसके बदन का पूरा जायज़ा ले रहा था......

नवाज़ को अपनी इतने नज़दीक आके खड़े होने से सरिता को दर तो लग रहा था पर आपने चहरे पर वो दर न लेट हुई उसकी और देखते हुई वो हौले से मुस्कुरा देती हैं .........

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वहीँ नवाज़ भी सरिता के तरफ देखते हुई मुस्कुरा देता हैं ..........वो कभी उसके उभरी हुई चूचियों को देख रहा था to......kabhi उसकी बहार की तरफ उठी हुई गांड ko...............Tab सरिता नवाज़ की तरफ देखते हुई धीरे से एक पर्ची उसके हाथ में दे देती हैं.. तब नवाज़ जान बूझकर सरिता के उँगलियों और हाथों को छूटे हुई धीरे से मुस्कुरा देता हैं मगर सरिता न hi उसे और कुछ कहती हैं और न hi उसके हरकतों का कोई विरोध करती hain..........par मैं मई उसके इस हरकत पर उसे गली देती है..

कमीना साला.. जब से आया है मुझे घूरे जा रहा है और अब मेरे हाथ को छू भी लिया इस कमीने ने..

वहीँ नवाज़ के चेहरे पर ख़ुशी झलक पड़ती हैं..... उसको चुने से.. वैसे उस पर्ची मई कुछ दवा लिखी thi..aur नवाज़ के देने का मतलब था की उसको मेडिकल स्टोर मई लेन को कहा गया.. पर नवाज़ आखिर नवाज़ था.. उसे इसका मतलब था पर वो चाहा रहा था की सरिता उसे बात करे.. उसे मू से कहे.. इसलिए वो वही रुखा.. जब 2-3 मं तक नवाज़ नहीं गया तब सरिता पलट कर उसको देखती है और कहती है..

मैडम को देखे उनको निचे से मेडिकल से दवा लेन को कहो..

जी मैडम

और आते टाइम स्टेटिसकोपे लेके आना

जी .. मैडम जी..

मैडम जी आप कितने अच्छे है मैडम जी..

तब अड्डा के साथ उसके तरफ देखते हुई कहते है..

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क्या मतलब है तुम्हारा..

आपने ये सब आरती मेमसाब को करने को कहा .. पर मुझे नहीं.. मतलब आप चाहती हो की मई यहाँ रुकू आप के पास..

इस लिए तुमने मुझे अच्छा कहा..

जी

ये बुद्धू.. आपने दिमाख से ये सब पहले निकल के फेंको.. मई जानती हु ये इंग्लिश है और तुम इंग्लिश नहीं संजोगे.. दूसरे ये महंगे दवा है तो पैसे आरती के पास hi होंगे.. इसलिए कहा..

वो कुछ भी हो आप बहुत अच्छी हो

तब गुस्से से वो कहते है .. ....

मेरा दिमाख मत खाओ और आरती को देके वो स्टेटिसकोपे लेके आओ.. अंकल को चेक करके दूसरे पेशेंट्स को भी मुझे चेक करना है..

जी मैडम

कहके नवाज़ जाता है आरती की तरफ और आरती के हाथ मई वो पर्ची देखे कहता है..

डॉक्टर मैडम ने कहा है आप निचे से लेके आओ..

तब आरती गुस्से से उसे देखते है..

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आरती कुछ कहे उससे पहले वो वापिस जाता है और दूर से फिर से वापिस आता है..

वो डॉक्टर मैडम का गले मई डालने वाला कहा है.. आपने लेक नहीं दिया..

तब आरती और गुस्सा हो जाती है..

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मई क्या तेरे बाप की या उस कामिनी डॉक्टर सरिता के बाप की नौकर नहीं हु जो तुम लोंगो के काम करू . .

आप तो गुस्सा हो हाई मेमसाब

गुस्सा न करू तो क्या प्यार करू तू में..

वो भी चलेगा..

मैंने यहाँ तुम मेरे हेल्प करने को लाया था पर यहाँ तेरे सब काम मुझे करने पद रहे है.. और उप्पर से तू मुझे काम बता रहा है..

मई कब आपको काम बता रहा हु मेमसाब

तब पर्ची हवा मई लहराते हुई कहते है

तो ये क्या है

डॉक्टर मैडम ने कहा है ये इंग्लिश मई है तुजे पता नहीं चलेंगे उसमे क्या लिखा है और क्या लाना है..

तेरे डॉक्टर मैडम कुछ भी कहेगे और मई मानूगी क्या.. और इसमे इंग्लिश समजने की बात कहा से आये.. यहाँ कितने सरे पेशेंट्स है जिनको इंग्लिश समाज नहीं आती.. वो क्या दवाये नहीं लेट क्या.. इंग्लिश वो मेडिकल वाला समाज लेगा..

वो बात भी सही है..

मुझे लग रहा है तुम्हारे वो डॉक्टर मैडम तुजे छोड़ना नहीं चाहते. तुमसे चिपक के रहना चाहती है..

और गुस्से मई आरती ने आपने मैं की बात कही..

मुझे भी ऐसा hi लग रहा है मेमसाब.. क्या मई उसको पसंद आ गया हु क्या..

मुझे क्या पूछ रहा है उसे hi पूछ

हाँ उसे हु पूछता हु

तब गुस्से मई कहती है

एक काम कर यहाँ hi कम्पाउण्डर की जॉब कर ले

ये अच्छी आईडिया बताये आपने.. ये मेरे दिमाग मई क्यों नहीं आया.. ऐसा hi करता हु.. क्या मुझे वो मुझे जॉब देंगे क्या..

तब गुस्से से कहती है

मुझे क्या पता..

तब नवाज़ कहता है

आप गुस्सा क्यों कर रही हो

तब खुद को संभालते हुई कहती है..

मई कहा गुस्सा कर रही हु..

अच्छा मई जाता हु.. सरिता मेरा वेट कर रही होंगे..

सरिता?? डॉक्टर मैडम नहीं क्या अब..

हाँ वही वही

और वो जाने लगता है तब आरती कहती है. .

तुम्हारे सरिता का स्टेटिसकोपे लेके नहीं जाना है क्या..

पलट कर कहता है

हाँ हाँ दे दो

और उसके हाट से लेते हुई उसके हाथो को आपने हाथो मई लेते हुई है कहता है..

शुक्रिया मेमसाहेब ........आप बहुत ाची हैं.........

वो लेके सरिता के पास जाता है.. और इधर आरती नवाज़ को देखती रहती है..

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नवाज़ ने ऐसे करने से आरती के तन बदन में एक अजीब सा सेंसेशन होना शुरू हो गया ........... वो अपनी आँखें बंद करती हुई एक लुम्बी सी सांस लेती हैं और नवाज़ ने अब कुछ वक़्त पहले उसके साथ जो किया था उस के बारे मई सोचने लगी..

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उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान तो थी मगर अंदर hi अंदर उसे शर्म भी बहुत आ रही थी.........
 
नवाज़ ने ऐसे करने से आरती के तन बदन में एक अजीब सा सेंसेशन होना शुरू हो गया ......... आज पहली बार नवाज़ ने आरती का हाथ आपने हाथ मई लिया था.. वो अपनी आँखें बंद करती हुई एक लुम्बी सी सांस लेती हैं और नवाज़ ने अब कुछ वक़्त पहले उसके साथ जो किया था उस के बारे मई सोचने लगी..

उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान तो थी मगर अंदर hi अंदर उसे शर्म भी बहुत आ रही थी .........

नवाज़ के इस हरकत से आरती के दिल और दिमाग में तो जैसे एक तूफ़ान सा उठा हुआ था.. काफी देर तक आरती नवाज़ ने उसके साथ किये हुई एक एक हरकत के बारे मई सोचने लगती है.. नवाज़ उसके घर काम करने जब से आया है तब से उसकी लाइफ में उसका क्या असर पड़ा है उसके बारे मई आरती सोचने लगी.. तब उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती हैं .....

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और वो उस मुस्कान के साथ नीचे चली जाती है मेडिकल शॉप पर.. दवाई लेन..

और इधर नवाज़ डॉक्टर सरिता के पास पहुँच जाता है .. सरिता अपने ख्यालों में कहीं खोयी हुई सी थी ..... उसे पता hi नहीं था की नवाज़ उसके करीब आके खड़ा हुआ है और उसे घूरे जा रहा है ...... वो टकटकी लगाए सामने के तरफ बस देखे जा रही थी ...... या शायद कुछ और hi सोच रही थी............

डॉक्टर मैडम .......क्या हुआ आपको...... क्या सोच रहे हो आप

नवाज़ इस बार थोड़ा जोर से बोलता हैं तब सरिता नवाज़ की तरफ एक देखती हैं ..

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और बहुत धीरे से कहती है ..

कुछ नहीं

डॉक्टर मैडम मुझे आपसे कुछ बात करनी थी..

तब सरिता उसके और देखते हुई कहते है..

हां करलो पर सर जी के दवाई कहा है

वो आरती मेमसाब लेन गए है..

तुम कुछ काम करते हो या आरती मेमसाब से सब काम करते हो

तब हस्ते हुई नवाज़ कहता है

नहीं मई hi करता हु ऐसे काम पर आपने कहा था न ये काम मेमसाब करे

अच्छा.. वैसे बात क्या करना चाहते हो मुझसे

ऐसे कोई दवा है क्या जिससे लड़की जल्दी पैट जाये

सरिता को इसकी उम्मीद नहीं थी की नवाज़ इतने जल्दी ऐसा कुछ बोलेगा ...

तेरा दिमाग ख़राब है kya..tujhe पता है न अगर मेने शेठ जी को ये सब बता दिया तो वो तुझे क्या कहेंगे ..

सरिता ने गुस्से से बोलते हुए kaha..jab नवाज़ ने देखा की सरिता गुस्सा हो गयी है तब उसने हाट मई मोबाइल लेके मोबाइल का एक वीडियो दिखते हुई बात बदलते हुए कहा ...

मई इस वीडियो के बारे मई बात कर रहा था मैडम.. इस मई जो बाते कहे गयी है वो सच है क्या?? सच होती है क्या ऐसे बाते??

तब सरिता ने वीडियो एक बार देखा और फिर नवाज़ की तरफ देखते हुई कहा..

कुछ सच नहीं होता..

ऐसा कह के वो वह से चली गयी.. गुस्से मई.. और इधर वह उस रूम मई एक छोटी सी चेयर थी वह नवाज़ बैठ जाता है.. कुछ दिएर बाद आरती वह आ जाती है.. नवाज़ का चहरे का मूड देख के वो भी उसके बगल मई बैठ गई....

कहा है तुम्हारे सरिता

मुझे क्या पता??

लगता है बात नहीं बानी

नवाज़ कुछ नहीं कहता तब आरती कहती है..

चलो सरिता को ढूंढते है..

कहा और क्यों??

पापाजी के दवा के बारे मई पूछना है न

ठीक है चलिए..

और वो दोनों इधर उधर उसको ढूंढते है और आख़िरकार वो एक केबिन मई बैठी उन दोनों को मिलते है..

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जब वो नवाज़ को देखते है तब गुस्से से उसे देखते है ..तब आरती हसती है..

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और फिर आरती को देखते हुई सरिता कहती है..

अच्छा हुआ मैडम आप आ गयी.. मुझे भी अब एक सर्जरी को निकलना था.. अब दवाई दिखा दो मई बता देती हु.. कोनसी दवा कब लेने है..

ठीक है डॉक्टर

ऐसा कह के आरती उसको दवा दिखा देती है .. तब सरिता आरती को दवा के बारे मई सब बता देती है और कहते है..

सर को होश मई आने मई और 2-3 घंटे लगेंगे.. मई अब निकलते हु..

ऐसा कह के नवाज़ को गुस्से से देखते हुई वह से चली जाती है..
 
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