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- Dec 5, 2013
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तो बनके पिलाओ आपने नवाज़ को उसका मनपसंद मिल्कशेक
ठीक है
मई क्यों बनु आप दोनों के बीच मई कबाब की हदी.. चलने दो आप दोनों का.. और नवाज़ के चक्कर मई पापा जी को मत भूल जाना भाभी.. रखते हु.. गुड bye
bye भाभी
गुड bye
दीदी. .
फ़ोन रखने के बाद नवाज़ की तरफ देखते हुई आरती कहते है..
चलो तुम मिल्कशेक देते हु..
ऐसा कह के आरती किचन मई जाने लगी और नवाज़ उसके पीछे. .पीछे चलते चलते आरती की थिरतकी हुई गांड को बड़े hi ध्यान से नवाज़ देख रहा था ..... और ये सोच रहा था की काश अगर ये गांड मुझे मिल जाये ......
जैसे hi नवाज़ किचन मई आता है नवाज़ अपने सामने कड़ी आरती की तरफ देखता है और फिर धीरे से मुस्कुरा देता हैं वहीँ आरती एक नज़र नवाज़ के तरफ देखती है और फिर तुरंत से अपनी नज़ारे दूसरी तरफ फेर लेती हैं.............
न जाने क्यों उसका दिल धड़क उठा है ...... जैसे किसी माशूका का आपने आशिके सामने पाकर धड़क उठता है वैसे.. जैसे hi नवाज़ आरती के करीब आता हैं उसके बदन से एक अजीब तरह की स्मेल उठने लगती हैं ...........जो आरती को और भी बेचैन कर रही थी..........
आरती बड़े गौर से नवाज़ के बदन को एक तुक देखने lagi...........(aarti थी बहुत हसीं और खूबसूरत ........उसके बदन पर गन्दगी का एक नामोनिशान तक नहीं था ........ उसका बदन किसी संगमरमर की तरह सूंदर और पूरी तरह से साफ़ .........जो हमेशा गुलाबों की तरह महकता tha...............aur हमेशा उसके बदन से एक परफ्यूम की खुसबू आती रहती थी.............. वहीँ नवाज़ एक दम गन्दा ....... तेल उसके सर पर चिपका रहता था ...... दांत भी हलके पीले … ऊपर से उसके मुह से हमेशा तम्बाकू और बीड़ी की अजीब सी बदबू आती थी .......कुल मिला जुलकर वो सर से लेकर पवन तक सिर्फ और सिर्फ गन्दा था......) उसके ऐसे देखने से नवाज़ भी उसे देखने लगा तब आरती शर्मा जाती है..
शर्म से उसका गोरा चेहरा लाल पड़ता जा रहा था.. नवाज़ के बदन से आ रही स्मेल बुरी थी या अच्छी ये भी आरती समाज नहीं पा रही थी.. उसका दिमाग कह रहा था की वो इस वक़्त नवाज़ के पास से फ़ौरन हैट जाये ..... उसे अपने पास भी न आने दे ... उसके ये बदबू की वजह से वो उससे वो दुर्र जाना चाहा रही थी पर दिल के मरे नहीं जा प् रही थी.. वह वो रुकना नहीं चाहा रही थी मगर दिल शायद कुछ और hi कह रहा था .........
वैसे नवाज़ एक बात पुछु तुमसे
हाँ मेमसाब
तुम बुरा तो नहीं लगेगा
भला मुझे बुरा कोई लगेगा
मेरे बात का
आप हमारे मेमसाब हो..
आरती कुछ नहीं कहते.. सिर्फ नवाज़ को देखने लगती है..
हो न
तब आरती हाँ मई अपनी गर्दन हिलती है
भला किसी बुद्धू को hi आपने इतने सुन्दर और अच्छी मेमसाब के बात का बुरा लगेगा
हम्म्म
पूछिए क्या पूछना चाहती हो आप
वैसे तुम्हारा यहाँ दिल तो लगता है न..
ये बात आरती ने कहते hi नवाज़ कहता है आपने आप को ( मैं मई)
ये हुई न बात मेमसाब मुझे भी यही चाहिए था
वैसे मई जानती हु नीता के होते हुई तुम्हारा दिल यहाँ लगेगा पर मई पूछना चाहती हु.. तुम यहाँ का काम तो पसंद है न
कैसे बात कर रही हो मेमसाब .. यहाँ क्या प्रॉब्लम है.. यहाँ की नौकरी आराम की नौकरी है मेमसाब ............. आप मुझे पहनने को साहब के अच्छे अचे कपडे देता हो ........और रहने को इतना आलीशान bungala.........aur पेटभर khana............upar से 20,000 रुपैये महीने का .........
इस बार नवाज़ आरती को सर से लेकर पवन तक ाचे से स्कैन करता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं ..
और सबसे ाची बात ............ मालकिन भी मिली तो एक दम zabardast.........bilkul हीरोइन जैसे ................साला एक पल के लिए मेरी नज़ारे आपको भूला नहीं पति .............
आरती ाचे से जानती थी की नवाज़ की नज़र कैसी hain........wo उसे कैसी नज़रो से देख रहा हैं ..... मगर न जाने क्यों उसे कुछ भी बुरा नहीं लग रहा tha......ya फिर वो उसकी नज़रो को अनदेखा कर रही थी.. पर नवाज़ के ऐसे कहने से नवाज़ के आँखों मई देखते हुई धीरे से बोल पड़ी..
धत्त बेशर्मम!!!!!!
और शर्मा गयी.. नवाज़ उसके इस अड्डा पाई खुश हो गया.. उसे लगा बात बन गयी.. आज तो मुर्गी फास hi गयी.. इसको यहाँ नहीं तो रस्ते मई छोड़ hi लेंगे.. वैसे भी शेठ जी अब घर पर नहीं है और नीता का पता नहीं है.. देखते है तरय मार्के किश
मिलता है या नहीं. ऐसे सोच के साथ नवाज़ उसके बहुत करीब पहुँच जाता है. ..
अपने मालिक कितने किस्मत वाले हैं न जो उन ऐसी सूंदर बीवी मिली है ....... सर से लेकर पवन तक बस क़यामत हैं क़यामत ....... अगर ऐसी बीवी मेरी किस्मत में अगर होती तो मैं........
और नवाज़ चुप हो जाता है.. नवाज़ के मैं मई जो भी था उसने एक साथ बक दिया.. उसने नहीं सोचा की मेमसाब को बुरा लग सकता है या वो आपने पति या ससुर को कह के उसे नौकरी से निकलवा सकती thi..naukari से क्या गाँव से hi नवाज़ के फॅमिली को निकलवा सकती thi..wo जनता था आरती की फॅमिली उतनी पावरफुल है.. पर इस वक़्त नवाज़ ने ये सब नहीं सोचा..
वहीँ आरती बड़े गौर से उसके चेहरे की तरफ बस देख रही थी..............
जब आरती की नज़र नवाज़ के ललचही नज़र पर जब पड़ती हैं तो उस वक़्त उसकी आँखों में एक अजीब सा खुमार साफ़ नज़र आ रहा था जो उस वक़्त आरती को बेचैन कर देने के लिए काफी था ...... नवाज़ की नज़ारे आरती के दिल में हलचल मचने के लिए काफी थी ..... आरती शर्माती हुई फ़ौरन अपनी नज़रे नवाज़ के चहरे की तरफ से हटा लेती हैं मगर उस वक़्त नवाज़ के चहरे पर एक गन्दी और कुटिल मुस्कान थी.........
मेमसाब एक बात पुछु
तब आरती फिर से उसे देखती है और कहते है..
पूछो
आप इतनी खूबसूरत पहले से hi थी या शादी के बाद बन गयी..
नवाज़ के ऐसे कहने से आरती हस्ती है और वो अपनी केहुनी नवाज़ को कसकर मरती हैं उसके पेट मई.. और उसे आँख दिखती हुई उससे दूर होने लगती हैं....
शायद शर्म की वजह से....... वहीँ नवाज़ उसे देखता हुआ बस मुस्कुराये जा रहा था ....... आरती अब नवाज़ की तरफ पिट करके खड़े थी.. अब उसने एक लुम्बी सांस लेती हुई अपनी आँखें बंद की .. अपने बेकाबू हो रहे साँसों को फिर से सँभालने लगती हैं ....... मगर न जाने क्यों उसकी ये बेचैनी अब कम होने के बजाये और भी बढ़ती hi जा रही थी ....... तभी नवाज़ कहता है..
मेमसाब आप इस गाउन मई पहले से ज्यादा खूबसूरत दिख रही हो..
तब नखरा करते हुई पीछे की और देखते हुई चहरे पर थोड़ा गुस्सा और थोड़े हसी लेट हुई कहते है..
मेरे बुद्धू रा.... (और रुकर.. कहती है..) नौकर.. नवाज.. फॉर योर काइंड इनफार्मेशन ये गाउन नहीं तो मॉडर्न ड्रेस है.. जो घर मई और स्पेशलय रात को पहनते है.. जिसे लोग निघ्त्य कहते है..
बहुत नखरे से कहती है.. जब भी नीता को नवाज़ पाई बहुत प्यार आता था तब वो नवाज़ को मेरे बुद्धू राजा कहती थी और आरती ने ये एक दो बार सुना था.. अब वैसे hi कुछ आरती कहनेवाली थी पर खुद को कण्ट्रोल किया.. पर नवाज़ समाज गया था की वो क्या कहना चाहती थी और उसने क्या कहा..
फिर तो ये गाउन hi हुआ न.. वो भी रात को hi पहनते है न मेमसाब..
तब गुस्से से उसको देखती है..
कुछ कहनेवाली थी की नीता वह आती है.. वो दूर से अंदर आनेवाली थी उससे पहले आरती ने उसे देखा और झट से दूर की तरफ गयी और उसको बोली.. जरा नखरे से..
तेरे बुद्धू राजा को वह फ्रीज़ मई का मिल्कशेक दे दे.. और साहब का कुछ अच्छा ड्रेस दे दे पहनने को..
और नवाज़ को देखते हुई कहती है..
ऐसे ड्रेस मई इससे हॉस्पिटल लेजाना ठीक नहीं रहेगा.. मेरे इज़्ज़त का सवाल है..
और वह से आपने बैडरूम मई जाने लगी.. फिर पलट कर नीता को कहती है..
हाँ नीता आपने बुद्धू राजा को गाउन और निघ्त्य का फरक भी बता दे..
तब बड़े आशर्य से नीता दोनों को देखने लगी.. तब आरती कहते है.
तेरा बुद्धू राजा मेरे इस निघ्त्य को गाउन बोल रहा है..
और हसते हुई आपने बैडरूम मई जाती है ..
ठीक है
मई क्यों बनु आप दोनों के बीच मई कबाब की हदी.. चलने दो आप दोनों का.. और नवाज़ के चक्कर मई पापा जी को मत भूल जाना भाभी.. रखते हु.. गुड bye
गुड bye
फ़ोन रखने के बाद नवाज़ की तरफ देखते हुई आरती कहते है..
चलो तुम मिल्कशेक देते हु..
ऐसा कह के आरती किचन मई जाने लगी और नवाज़ उसके पीछे. .पीछे चलते चलते आरती की थिरतकी हुई गांड को बड़े hi ध्यान से नवाज़ देख रहा था ..... और ये सोच रहा था की काश अगर ये गांड मुझे मिल जाये ......
जैसे hi नवाज़ किचन मई आता है नवाज़ अपने सामने कड़ी आरती की तरफ देखता है और फिर धीरे से मुस्कुरा देता हैं वहीँ आरती एक नज़र नवाज़ के तरफ देखती है और फिर तुरंत से अपनी नज़ारे दूसरी तरफ फेर लेती हैं.............
न जाने क्यों उसका दिल धड़क उठा है ...... जैसे किसी माशूका का आपने आशिके सामने पाकर धड़क उठता है वैसे.. जैसे hi नवाज़ आरती के करीब आता हैं उसके बदन से एक अजीब तरह की स्मेल उठने लगती हैं ...........जो आरती को और भी बेचैन कर रही थी..........
आरती बड़े गौर से नवाज़ के बदन को एक तुक देखने lagi...........(aarti थी बहुत हसीं और खूबसूरत ........उसके बदन पर गन्दगी का एक नामोनिशान तक नहीं था ........ उसका बदन किसी संगमरमर की तरह सूंदर और पूरी तरह से साफ़ .........जो हमेशा गुलाबों की तरह महकता tha...............aur हमेशा उसके बदन से एक परफ्यूम की खुसबू आती रहती थी.............. वहीँ नवाज़ एक दम गन्दा ....... तेल उसके सर पर चिपका रहता था ...... दांत भी हलके पीले … ऊपर से उसके मुह से हमेशा तम्बाकू और बीड़ी की अजीब सी बदबू आती थी .......कुल मिला जुलकर वो सर से लेकर पवन तक सिर्फ और सिर्फ गन्दा था......) उसके ऐसे देखने से नवाज़ भी उसे देखने लगा तब आरती शर्मा जाती है..
शर्म से उसका गोरा चेहरा लाल पड़ता जा रहा था.. नवाज़ के बदन से आ रही स्मेल बुरी थी या अच्छी ये भी आरती समाज नहीं पा रही थी.. उसका दिमाग कह रहा था की वो इस वक़्त नवाज़ के पास से फ़ौरन हैट जाये ..... उसे अपने पास भी न आने दे ... उसके ये बदबू की वजह से वो उससे वो दुर्र जाना चाहा रही थी पर दिल के मरे नहीं जा प् रही थी.. वह वो रुकना नहीं चाहा रही थी मगर दिल शायद कुछ और hi कह रहा था .........
वैसे नवाज़ एक बात पुछु तुमसे
हाँ मेमसाब
तुम बुरा तो नहीं लगेगा
भला मुझे बुरा कोई लगेगा
मेरे बात का
आप हमारे मेमसाब हो..
आरती कुछ नहीं कहते.. सिर्फ नवाज़ को देखने लगती है..
हो न
तब आरती हाँ मई अपनी गर्दन हिलती है
भला किसी बुद्धू को hi आपने इतने सुन्दर और अच्छी मेमसाब के बात का बुरा लगेगा
हम्म्म
पूछिए क्या पूछना चाहती हो आप
वैसे तुम्हारा यहाँ दिल तो लगता है न..
ये बात आरती ने कहते hi नवाज़ कहता है आपने आप को ( मैं मई)
ये हुई न बात मेमसाब मुझे भी यही चाहिए था
वैसे मई जानती हु नीता के होते हुई तुम्हारा दिल यहाँ लगेगा पर मई पूछना चाहती हु.. तुम यहाँ का काम तो पसंद है न
कैसे बात कर रही हो मेमसाब .. यहाँ क्या प्रॉब्लम है.. यहाँ की नौकरी आराम की नौकरी है मेमसाब ............. आप मुझे पहनने को साहब के अच्छे अचे कपडे देता हो ........और रहने को इतना आलीशान bungala.........aur पेटभर khana............upar से 20,000 रुपैये महीने का .........
इस बार नवाज़ आरती को सर से लेकर पवन तक ाचे से स्कैन करता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं ..
और सबसे ाची बात ............ मालकिन भी मिली तो एक दम zabardast.........bilkul हीरोइन जैसे ................साला एक पल के लिए मेरी नज़ारे आपको भूला नहीं पति .............
आरती ाचे से जानती थी की नवाज़ की नज़र कैसी hain........wo उसे कैसी नज़रो से देख रहा हैं ..... मगर न जाने क्यों उसे कुछ भी बुरा नहीं लग रहा tha......ya फिर वो उसकी नज़रो को अनदेखा कर रही थी.. पर नवाज़ के ऐसे कहने से नवाज़ के आँखों मई देखते हुई धीरे से बोल पड़ी..
धत्त बेशर्मम!!!!!!
और शर्मा गयी.. नवाज़ उसके इस अड्डा पाई खुश हो गया.. उसे लगा बात बन गयी.. आज तो मुर्गी फास hi गयी.. इसको यहाँ नहीं तो रस्ते मई छोड़ hi लेंगे.. वैसे भी शेठ जी अब घर पर नहीं है और नीता का पता नहीं है.. देखते है तरय मार्के किश
अपने मालिक कितने किस्मत वाले हैं न जो उन ऐसी सूंदर बीवी मिली है ....... सर से लेकर पवन तक बस क़यामत हैं क़यामत ....... अगर ऐसी बीवी मेरी किस्मत में अगर होती तो मैं........
और नवाज़ चुप हो जाता है.. नवाज़ के मैं मई जो भी था उसने एक साथ बक दिया.. उसने नहीं सोचा की मेमसाब को बुरा लग सकता है या वो आपने पति या ससुर को कह के उसे नौकरी से निकलवा सकती thi..naukari से क्या गाँव से hi नवाज़ के फॅमिली को निकलवा सकती thi..wo जनता था आरती की फॅमिली उतनी पावरफुल है.. पर इस वक़्त नवाज़ ने ये सब नहीं सोचा..
वहीँ आरती बड़े गौर से उसके चेहरे की तरफ बस देख रही थी..............
जब आरती की नज़र नवाज़ के ललचही नज़र पर जब पड़ती हैं तो उस वक़्त उसकी आँखों में एक अजीब सा खुमार साफ़ नज़र आ रहा था जो उस वक़्त आरती को बेचैन कर देने के लिए काफी था ...... नवाज़ की नज़ारे आरती के दिल में हलचल मचने के लिए काफी थी ..... आरती शर्माती हुई फ़ौरन अपनी नज़रे नवाज़ के चहरे की तरफ से हटा लेती हैं मगर उस वक़्त नवाज़ के चहरे पर एक गन्दी और कुटिल मुस्कान थी.........
मेमसाब एक बात पुछु
तब आरती फिर से उसे देखती है और कहते है..
पूछो
आप इतनी खूबसूरत पहले से hi थी या शादी के बाद बन गयी..
नवाज़ के ऐसे कहने से आरती हस्ती है और वो अपनी केहुनी नवाज़ को कसकर मरती हैं उसके पेट मई.. और उसे आँख दिखती हुई उससे दूर होने लगती हैं....
शायद शर्म की वजह से....... वहीँ नवाज़ उसे देखता हुआ बस मुस्कुराये जा रहा था ....... आरती अब नवाज़ की तरफ पिट करके खड़े थी.. अब उसने एक लुम्बी सांस लेती हुई अपनी आँखें बंद की .. अपने बेकाबू हो रहे साँसों को फिर से सँभालने लगती हैं ....... मगर न जाने क्यों उसकी ये बेचैनी अब कम होने के बजाये और भी बढ़ती hi जा रही थी ....... तभी नवाज़ कहता है..
मेमसाब आप इस गाउन मई पहले से ज्यादा खूबसूरत दिख रही हो..
तब नखरा करते हुई पीछे की और देखते हुई चहरे पर थोड़ा गुस्सा और थोड़े हसी लेट हुई कहते है..
मेरे बुद्धू रा.... (और रुकर.. कहती है..) नौकर.. नवाज.. फॉर योर काइंड इनफार्मेशन ये गाउन नहीं तो मॉडर्न ड्रेस है.. जो घर मई और स्पेशलय रात को पहनते है.. जिसे लोग निघ्त्य कहते है..
बहुत नखरे से कहती है.. जब भी नीता को नवाज़ पाई बहुत प्यार आता था तब वो नवाज़ को मेरे बुद्धू राजा कहती थी और आरती ने ये एक दो बार सुना था.. अब वैसे hi कुछ आरती कहनेवाली थी पर खुद को कण्ट्रोल किया.. पर नवाज़ समाज गया था की वो क्या कहना चाहती थी और उसने क्या कहा..
फिर तो ये गाउन hi हुआ न.. वो भी रात को hi पहनते है न मेमसाब..
तब गुस्से से उसको देखती है..
कुछ कहनेवाली थी की नीता वह आती है.. वो दूर से अंदर आनेवाली थी उससे पहले आरती ने उसे देखा और झट से दूर की तरफ गयी और उसको बोली.. जरा नखरे से..
तेरे बुद्धू राजा को वह फ्रीज़ मई का मिल्कशेक दे दे.. और साहब का कुछ अच्छा ड्रेस दे दे पहनने को..
और नवाज़ को देखते हुई कहती है..
ऐसे ड्रेस मई इससे हॉस्पिटल लेजाना ठीक नहीं रहेगा.. मेरे इज़्ज़त का सवाल है..
और वह से आपने बैडरूम मई जाने लगी.. फिर पलट कर नीता को कहती है..
हाँ नीता आपने बुद्धू राजा को गाउन और निघ्त्य का फरक भी बता दे..
तब बड़े आशर्य से नीता दोनों को देखने लगी.. तब आरती कहते है.
तेरा बुद्धू राजा मेरे इस निघ्त्य को गाउन बोल रहा है..
और हसते हुई आपने बैडरूम मई जाती है ..