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नेक्स्ट डे
अगले दिन फिर सब चल पड़े इस टूर के नेक्स्ट डेस्टिनेशन के liye…Iss बार ज़ू जाने की डीडे किया सभी ने.
अजय:- (तो अतुल) तू तो बहुत एक्ससिटेड लग रहा है ज़ू जाने के लिए ?
अजय ने अतुल की चेहरे को देखते हुए कहा.
अतुल:- है बहुत एक्ससिटेड.
अजय:- कोई ख़ास वजह?
अतुल:- सुना है एक hi शक्ल के दुनिया में 7 प्राणी (लिविंग बैंग्स) होते है.
अजय:- वो तो मैंने भी सुना hai…Lekin तू कहना क्या चाहता है?
अतुल:- कुछ ख़ास nahi…Insaano में तेरा हमशकल देखा नहीं hai…Socha ज़ू में hi कोई मिल jaaye…Kisi चिंपांज़ी से तेरा चेहरा मैचिंग करना है.
अतुल की इस बात पर सभी हसने lage…Nisha bhi…Usne सोच लिया था अतुल को कैसे सही रास्ते में लाना hai…Filhaal वो भी टूर को एन्जॉय करने की सोच रही थी.
अजय:- अच्छा जोके tha…Hasu क्या?
अजय ने मुंह बिगाड़ते हुए कहा.
अतुल:- वो तो पता चल hi रहा है अच्छा जोके hai…Nahi तो सब एक साथ ऐसे नहीं हँसते.
फिर ऐसे hi हंसी मजाक करते हुए सभी ज़ू पहुँच जाते hai…Atul सभी दोस्तों के साथ हंसी मजाक में बिजी था और निशा भी कोई मौका नहीं छोड़ रही थी अतुल से बातें करने की.
सभी एक साथ अलग अलग केज के आस पास घूमते रहे और अलग अलग एनिमल्स और बर्ड्स को देखते rahe…Rahul सर भी सभी स्पीशीज के बारे में कुछ कुछ जरुरी इंफॉर्मेशंस देते रहे.
सभी डेस्टिनेशंस की तरह hi ज़ू विजिट भी सब बहुत एन्जॉय कर रहे the…Yaha सभी को ऐसे ऐसे स्पीशीज देखने को मिल रहा था जो किसी ने अपने लाइफ में कभी नहीं देखा tha(except राहुल sir)...Aur राहुल सर का इंफॉर्मेशंस उस स्पीशीज को और अच्छे से जाने में मदद (हेल्प) कर रहा था.
यहाँ भी सभी दोस्तों का हसी मजाक चलता raha…Naye नए स्पीशीज देखने ka…Unke बारे में जाने का और कोई भी मस्ती का मौका नहीं छोड़ रहे थे.
करीब 3 घंटा तक सभी अलग अलग जगह घूमते रहे और लग अलग स्पीशीज देखते रहे.
अजय:- सर भूख लग रहा है?
डॉ. राहुल:- इतनी जल्दी?
अजय:- 6 घंटा हो गया है कुछ नहीं khaaya…Abhi ज़ू में भी चल hi रहे hai…Jyada रेस्ट भी नहीं kiya…Thoda थकान भी है.
राहुल सर कुछ सोच hi रहे थे तभी,
अंजलि:- सर मुझे भी भूख लग रहा है.
अंजलि की इस बात पर राहुल सर ने कुछ सोच कर कहा.
डॉ. राहुल:- और किसी को?
काजल:- मुझे भी.
फिर राहुल सर अतुल और निशा की तरफ देखते है.
डॉ. राहुल:- तुम दोनों को?
अतुल:- नहीं sir…Mai ज़ू विजिट से निकलने से 1 घंटा पहले hi खा कर आया tha…Lagh भाग 4 घंटे pehle…Aur अब्ब 1-2 घंटे में पूरी ज़ू देख भी लेंगे फिर होटल में जा कर खाऊंगा.
डॉ. राहुल:- निशा तुम?
निशा:- मुझे भी भूख नहीं है.
निशा की बात पर अंजलि उससे अलग hi नजरो से घूरती hai…Nisha भी मुस्कुरा कर उससे बता देती है की उसने सही सोचा.
अजय:- कोई बात nahi…Tu मत khaa…Lekin हमारे साथ बैठ.
अतुल:- कोई जरुरी nahi…Pata नहीं ऐसे मौका कब mile…Mai तो एक नजर फिर सभी स्पीशीज पर lagaunga…Pata नहीं फिर कब देख पाउ इन्हे.
अजय:- आज तेरे लिए दोस्त से ज्यादा टूर इम्पोर्टेन्ट हो गया?
अजय ने इमोशनल होने की एक्टिंग करते हुए कहा.
अतुल:- Haa…Kehte है न घर की मुर्गी दाल barabar…Tu तो हमेशा अपने पास hi रहेगा.
अतुल की इस बात पर सभी अजय पर हसने लगे.
अतुल:- बाद में तो तेरे साथ hi टाइम पास करना है yaar…Jaa तू खा कर aa…Mai तब तक इधर उधर hi देखता रहूँगा.
इस बार अतुल ने अच्छे से समझाते हुए कहा.
काजल:- लेकिन इस ज़ू में कोई होटल और रेस्टोरेंट मिलेगा?
डॉ. राहुल:- ये तो नहीं pata…Mil भी सकता है और नहीं bhi…Agar नहीं मिला तो पॉप कॉर्न, इसक्रीम्स से काम चला लेंगे.
फिर सभी चले गए खाने के liye…Baaki रह गए अतुल और निशा.
दोनों साथ में वही केज की तरफ चले गए जो दोनों ने पहले hi देख लिया था.
निशा ने महसूस किया अतुल बातें तो अच्छे से कर रहा है लेकिन वो कुछ सोच में भी गुम्म है.
निशा:- क्या सोच रहे हो?
अतुल:- बस यही की इस ज़ू विजिट को एन्जॉय करू या नहीं.
अतुल की बात से hi पता चल रहा था की वो कितनी गहराई में ये बात सोच रहा था.
निशा:- अब्ब तुम्हे क्या हो gaya…Kitna मजा आ रहा है.
अतुल:- मजा तो आ रहा hai…Naya एक्सपीरियंस भी है और कुछ नॉलेज भी मिल रहा hai…Lekin ये बात भी परेशान कर रहा है की क्या सच मई हमें ज़ू को इतना एन्जॉय करना चाहिए?
हम जिस जानवर और छिड़ियों को देख रहे hai…Unhe कैद किया गया hai…Agar दूसरी सेंटेंस में कहु तो उनके फ्रीडम को चीन गया hai…Jo बिलकुल भी सही नहीं hai…Aur हम इसी चीज़ को एन्जॉय करने यहाँ आये hai…Kya हम इंसान अपने ख़ुशी और मजे के लिए दूसरे जानवरो के साथ ऐसे बर्ताव कर सकते है?
अतुल की बात सुन कर निशा थोड़ा हसने lagi…Atul को ये बहुत अजीब लगा.
निशा:- बहुत सोचते हो.
अतुल कुछ नहीं bola…Bas निशा को देखता रहा.
निशा:- अच्छा एक बात bataao…Tum वेग हो या नॉन - वेग?
अतुल:- नॉन - वेग.
अतुल ने जैसे hi ये kaha…Wo खुद hi और सीरियस हो गया.
निशा:- किसी को मारना कैद करने जितना बुरा भी नहीं है.
निशा की इस बात ने अतुल को अंदर तक झटका diya…Wo अब्ब बहुत बड़ी सोच में पद गया.
निशा:- तुम तो और भी सीरियस हो gaye…Non - वेग होना कोई गलत नहीं hai…Kuch नुट्रिशन हमें मिलते है जो बहुत जरुरी है और सिर्फ मीट में hi मिलता है.
एक और example…Bahut साड़ी जंगली जानवर कर्नीवोरोस (नॉन - वेग) hi होते hai…Abb उन्हें भी तो गलत नहीं कह sakte…Kyu की नेचर ने सभी को बनाया hi ऐसे hai…Aur डार्विन का theory…Struggle फॉर existence…Jo दुनिया से लड़ सकता है और जीने की काबिल है वो hi सर्वाइव करता hai…Aur वो जानवर जो दुसरो का शिकार बनते है उनके पास भी ऐसे कई खासियत होता है जो शिकारी जानवर के पास नहीं.
नेचर ने सभी को बराबर बनाया hai…Kisi में कुछ अच्छाई तो कुछ बुराई.
और रही बात ज़ू में कैद करने ki…Ha ये गलत हो सकता है लेकिन बहुत फायदा भी है.
टूरिज्म और लोकल सिटीजन की इस ज़ू विजिट से गवर्नमेंट बहुत कमा भी सकता hai…Aur यही फण्ड अच्छे काम और डेवलपमेंट में भी लगाया जा सकता hai…Jisse शायद बहुत इंसान का भला हो सकता है.
और कैद jaanwar…Ha उनकी आजादी जरूर चीन जाती है लेकिन उन्हें फुल टाइम खाने के लिए मिलता भी है और प्रोटेक्शन भी मिलता hai…Ye नहीं कहूँगी की उनके लिए अच्छा है ये सब लेकिन कुछ हद्द तक जरूर है.
किसी की लाइफ में सब कुछ अच्छा हमेशा तो नहीं हो सकता hai…Kuch मज़बूरी और कोम्प्रोमाईज़ करना hi पड़ता है.
यहाँ तक की पूरी दुनिया hi ऐसी hai…Bahu साड़ी अच्छाई और बुराई bhi…Aur ऐसी छोटी छोटी बातो पर रिग्रेट नहीं karte…Samjhe बुद्धू.
निशा की एक्सप्लनेशन और उसकी बातो से अतुल भी थोड़ा मुस्कुराने लगा.
अतुल:- इतना नॉलेज?
अतुल की आवाज से पता चल रहा था वो निशा की बातो से बहुत इम्प्रेस हो गया है.
निशा:- कोई शक? ज्यादा बोलती नहीं हु तो तुमने मुझे मुर्ख समझ लिया ?
अतुल:- तो फिर बोलै करो yaar…Mujh गवार को भी कुछ नॉलेज दे do…Pata नहीं कब काम आ जाए.
निशा:- Jarur…Kabhi कभी किताबों से बाहर निकल कर हमसे बातें कर लिया karo…Har एक सेंटेंस में ज्ञान मिलेगा.
अतुल:- जो हुकुम Madam...Koshish करूँगा.
फिर दोनों साथ में चलते रहे ऐसे hi हसी मजाक करते hue…Dono बहुत पहले hi एक दूसरे से खुल गए the…Aisi हसी मजाक दोनों के बिच अब्ब आम बात हो चूका था.
अतुल:- तुम भी कोई सोच में खोयी ho…Kya बात है?
निशा:- ये वाइल्डलाइफ के बारे में सोच रही hu…Sirf जंगल hi उनकी दुनिया hai…Aur इतनी छोटी दुनिया में भी कितनी ख़ुशी और प्यार से जीते है.
मई भी यही सोच रही thi…Kaash मेरे लाइफ भी ऐसा hi ho…Jyada पैसा और ज्यादा शान नहीं चाहिए लाइफ me…Bas ख़ुशी और प्यार से अपने जिंदगी जी पाउ इतना hi बहुत hai…Simple एंड स्वीट फॅमिली हो.
अतुल:- तो तुम किसी जंगल में रहने वाले आदि वाशी से शादी करने की सोच रही हो?
जब अतुल ने ये बात कहा तब निशा बोतल से पानी पी रही thi…Atul की अचानक इस बात से निशा चौंक गयी और मुंह में भरा हुआ पानी अचानक hi अतुल के मुंह में उढ़ेल दिया.
निशा:- सॉरी sorry…Anjaane में हो गया.
अतुल ने उससे चुप होने का का इशारा करते हुए kaha…Fir पॉकेट से अपना चाणक्य निकाल कर चेहरा साफ़ करने लगा.
अतुल:- बहुत डेंजरस हो tum…Abb तो संभल कर मजाक करना padega…Warna पता नहीं आगे क्या हाल होगा. :सकारेद:
निशा:- सॉरी.
अतुल:- कोई बात nahi…Jaan बुझ कर तुमने ऐसा नहीं किया.
फिर दोनों के बिच कुछ पल की खामोशी चा गया.
अतुल:- तुमने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया.
अतुल फिर मजाक के मूड में आ गया.
निशा:- बुद्धू hi रहोगे tum…Baat को गलत तरीके से कैसे समझना है कोई तुम से sikhe…Maine तो कहा था की मेरी लाइफ सिंपल एंड स्वीट ho…Wildlife तो बस एक्साम्प्ले था.
निशा:- और तुम्हारा क्या प्लानिंग है फ्यूचर का.
अतुल:- अभी ज्यादा आगे का सोचा नहीं hai…MBBS के बाद मद के लिए किसी फॉरेन कंट्री में jaaunga…USA या फिर कोई यूरोपियन.
निशा:- (इन हेर मंद) तुम्हारे लिए वह भी चली jaaungi…Bas इतना याद rakhna…Tab तक तुम मेरे बन जाओगे और बनना hi पड़ेगा.
निशा:- क्यों? हमारे देश में कॉलेज काम है क्या या फिर पढ़ाई का क्वालिटी अच्छा नहीं है?
अतुल:- Nahi…Wo बात नहीं hai…Ek बार बाहर घूमने जाने का सोचा hai…To फिर सोचा वही पढ़ भी लूंगा और नयी नयी जगह भी देख paaunga…Baad में तो यहाँ आ कर काम करना hi है.
निशा:- फिर यहाँ वापसी क्यों? अगर वही सेटल्ड हो गए तो ओप्पोर्तुनिटी और एअर्निंग भी अच्छा होगा.
अतुल:- बात तो सही hai…Doctors के लिए बाहर स्कोप बहुत अच्छा hai…Lekin मुझे बिलकुल भी इंटरेस्ट नहीं hai…Apna देश अपना hi होता hai…Aur पैसा hi सब कुछ नहीं है मेरे liye…Ek अच्छा और ईमानदार डॉक्टर बनना चाहता hu…Bas यही काफी है.
मब्ब्स पढ़ने से पहले hi सोच लिया था maine…Ek ऐसे गांव में काम करूँगा जो बहुत hi ुंडेवेलोपेड हो और जहा हेल्थ कंडीशन बहुत बुरा हो.
अगर फॉरेन कंट्री जाऊँगा तो हमेशा मन में यही दर्द रहेगा की मेरे देश में लोग मर रहे है छोटी छोटी बीमारी की वजह se…Aur मई यहाँ पैसे कमा रहा हु और खुदगर्ज़ बन गया हु.
क्या फायदा ऐसे पैसे का और इज़्ज़त का जो खुद की नजरो में hi गिरा दे.
वैसे भी फुल स्कालरशिप में पढ़ रहा hu…Aur ये गवर्नमेंट कॉलेज hai…Desh ने इतना कुछ किया है मेरे liye…Free में पढ़ा रहा hai…Doctor का डिग्री दे रहा है.
मेरा भी तो फ़र्ज़ बनता है देश का क़र्ज़ उतारने का और सेवा करने ka…Issi लिए सोच लिया है निस्वार्थ भाव से सेवा करूँगा किसी गांव में जहा मेडिकल और हेल्थ फैसिलिटी का पहुँच ना हो.
ये कहते वक्त अतुल की आँखों में आंसू के कुछ बून्द आ गया.
निशा उससे प्यार भरी निगाह से देखती रही और फिर खुद hi उसने अतुल की आंसू पांच दिए.
नेक्स्ट डे
अगले दिन फिर सब चल पड़े इस टूर के नेक्स्ट डेस्टिनेशन के liye…Iss बार ज़ू जाने की डीडे किया सभी ने.
अजय:- (तो अतुल) तू तो बहुत एक्ससिटेड लग रहा है ज़ू जाने के लिए ?
अजय ने अतुल की चेहरे को देखते हुए कहा.
अतुल:- है बहुत एक्ससिटेड.
अजय:- कोई ख़ास वजह?
अतुल:- सुना है एक hi शक्ल के दुनिया में 7 प्राणी (लिविंग बैंग्स) होते है.
अजय:- वो तो मैंने भी सुना hai…Lekin तू कहना क्या चाहता है?
अतुल:- कुछ ख़ास nahi…Insaano में तेरा हमशकल देखा नहीं hai…Socha ज़ू में hi कोई मिल jaaye…Kisi चिंपांज़ी से तेरा चेहरा मैचिंग करना है.
अतुल की इस बात पर सभी हसने lage…Nisha bhi…Usne सोच लिया था अतुल को कैसे सही रास्ते में लाना hai…Filhaal वो भी टूर को एन्जॉय करने की सोच रही थी.
अजय:- अच्छा जोके tha…Hasu क्या?
अजय ने मुंह बिगाड़ते हुए कहा.
अतुल:- वो तो पता चल hi रहा है अच्छा जोके hai…Nahi तो सब एक साथ ऐसे नहीं हँसते.
फिर ऐसे hi हंसी मजाक करते हुए सभी ज़ू पहुँच जाते hai…Atul सभी दोस्तों के साथ हंसी मजाक में बिजी था और निशा भी कोई मौका नहीं छोड़ रही थी अतुल से बातें करने की.
सभी एक साथ अलग अलग केज के आस पास घूमते रहे और अलग अलग एनिमल्स और बर्ड्स को देखते rahe…Rahul सर भी सभी स्पीशीज के बारे में कुछ कुछ जरुरी इंफॉर्मेशंस देते रहे.
सभी डेस्टिनेशंस की तरह hi ज़ू विजिट भी सब बहुत एन्जॉय कर रहे the…Yaha सभी को ऐसे ऐसे स्पीशीज देखने को मिल रहा था जो किसी ने अपने लाइफ में कभी नहीं देखा tha(except राहुल sir)...Aur राहुल सर का इंफॉर्मेशंस उस स्पीशीज को और अच्छे से जाने में मदद (हेल्प) कर रहा था.
यहाँ भी सभी दोस्तों का हसी मजाक चलता raha…Naye नए स्पीशीज देखने ka…Unke बारे में जाने का और कोई भी मस्ती का मौका नहीं छोड़ रहे थे.
करीब 3 घंटा तक सभी अलग अलग जगह घूमते रहे और लग अलग स्पीशीज देखते रहे.
अजय:- सर भूख लग रहा है?
डॉ. राहुल:- इतनी जल्दी?
अजय:- 6 घंटा हो गया है कुछ नहीं khaaya…Abhi ज़ू में भी चल hi रहे hai…Jyada रेस्ट भी नहीं kiya…Thoda थकान भी है.
राहुल सर कुछ सोच hi रहे थे तभी,
अंजलि:- सर मुझे भी भूख लग रहा है.
अंजलि की इस बात पर राहुल सर ने कुछ सोच कर कहा.
डॉ. राहुल:- और किसी को?
काजल:- मुझे भी.
फिर राहुल सर अतुल और निशा की तरफ देखते है.
डॉ. राहुल:- तुम दोनों को?
अतुल:- नहीं sir…Mai ज़ू विजिट से निकलने से 1 घंटा पहले hi खा कर आया tha…Lagh भाग 4 घंटे pehle…Aur अब्ब 1-2 घंटे में पूरी ज़ू देख भी लेंगे फिर होटल में जा कर खाऊंगा.
डॉ. राहुल:- निशा तुम?
निशा:- मुझे भी भूख नहीं है.
निशा की बात पर अंजलि उससे अलग hi नजरो से घूरती hai…Nisha भी मुस्कुरा कर उससे बता देती है की उसने सही सोचा.
अजय:- कोई बात nahi…Tu मत khaa…Lekin हमारे साथ बैठ.
अतुल:- कोई जरुरी nahi…Pata नहीं ऐसे मौका कब mile…Mai तो एक नजर फिर सभी स्पीशीज पर lagaunga…Pata नहीं फिर कब देख पाउ इन्हे.
अजय:- आज तेरे लिए दोस्त से ज्यादा टूर इम्पोर्टेन्ट हो गया?
अजय ने इमोशनल होने की एक्टिंग करते हुए कहा.
अतुल:- Haa…Kehte है न घर की मुर्गी दाल barabar…Tu तो हमेशा अपने पास hi रहेगा.
अतुल की इस बात पर सभी अजय पर हसने लगे.
अतुल:- बाद में तो तेरे साथ hi टाइम पास करना है yaar…Jaa तू खा कर aa…Mai तब तक इधर उधर hi देखता रहूँगा.
इस बार अतुल ने अच्छे से समझाते हुए कहा.
काजल:- लेकिन इस ज़ू में कोई होटल और रेस्टोरेंट मिलेगा?
डॉ. राहुल:- ये तो नहीं pata…Mil भी सकता है और नहीं bhi…Agar नहीं मिला तो पॉप कॉर्न, इसक्रीम्स से काम चला लेंगे.
फिर सभी चले गए खाने के liye…Baaki रह गए अतुल और निशा.
दोनों साथ में वही केज की तरफ चले गए जो दोनों ने पहले hi देख लिया था.
निशा ने महसूस किया अतुल बातें तो अच्छे से कर रहा है लेकिन वो कुछ सोच में भी गुम्म है.
निशा:- क्या सोच रहे हो?
अतुल:- बस यही की इस ज़ू विजिट को एन्जॉय करू या नहीं.
अतुल की बात से hi पता चल रहा था की वो कितनी गहराई में ये बात सोच रहा था.
निशा:- अब्ब तुम्हे क्या हो gaya…Kitna मजा आ रहा है.
अतुल:- मजा तो आ रहा hai…Naya एक्सपीरियंस भी है और कुछ नॉलेज भी मिल रहा hai…Lekin ये बात भी परेशान कर रहा है की क्या सच मई हमें ज़ू को इतना एन्जॉय करना चाहिए?
हम जिस जानवर और छिड़ियों को देख रहे hai…Unhe कैद किया गया hai…Agar दूसरी सेंटेंस में कहु तो उनके फ्रीडम को चीन गया hai…Jo बिलकुल भी सही नहीं hai…Aur हम इसी चीज़ को एन्जॉय करने यहाँ आये hai…Kya हम इंसान अपने ख़ुशी और मजे के लिए दूसरे जानवरो के साथ ऐसे बर्ताव कर सकते है?
अतुल की बात सुन कर निशा थोड़ा हसने lagi…Atul को ये बहुत अजीब लगा.
निशा:- बहुत सोचते हो.
अतुल कुछ नहीं bola…Bas निशा को देखता रहा.
निशा:- अच्छा एक बात bataao…Tum वेग हो या नॉन - वेग?
अतुल:- नॉन - वेग.
अतुल ने जैसे hi ये kaha…Wo खुद hi और सीरियस हो गया.
निशा:- किसी को मारना कैद करने जितना बुरा भी नहीं है.
निशा की इस बात ने अतुल को अंदर तक झटका diya…Wo अब्ब बहुत बड़ी सोच में पद गया.
निशा:- तुम तो और भी सीरियस हो gaye…Non - वेग होना कोई गलत नहीं hai…Kuch नुट्रिशन हमें मिलते है जो बहुत जरुरी है और सिर्फ मीट में hi मिलता है.
एक और example…Bahut साड़ी जंगली जानवर कर्नीवोरोस (नॉन - वेग) hi होते hai…Abb उन्हें भी तो गलत नहीं कह sakte…Kyu की नेचर ने सभी को बनाया hi ऐसे hai…Aur डार्विन का theory…Struggle फॉर existence…Jo दुनिया से लड़ सकता है और जीने की काबिल है वो hi सर्वाइव करता hai…Aur वो जानवर जो दुसरो का शिकार बनते है उनके पास भी ऐसे कई खासियत होता है जो शिकारी जानवर के पास नहीं.
नेचर ने सभी को बराबर बनाया hai…Kisi में कुछ अच्छाई तो कुछ बुराई.
और रही बात ज़ू में कैद करने ki…Ha ये गलत हो सकता है लेकिन बहुत फायदा भी है.
टूरिज्म और लोकल सिटीजन की इस ज़ू विजिट से गवर्नमेंट बहुत कमा भी सकता hai…Aur यही फण्ड अच्छे काम और डेवलपमेंट में भी लगाया जा सकता hai…Jisse शायद बहुत इंसान का भला हो सकता है.
और कैद jaanwar…Ha उनकी आजादी जरूर चीन जाती है लेकिन उन्हें फुल टाइम खाने के लिए मिलता भी है और प्रोटेक्शन भी मिलता hai…Ye नहीं कहूँगी की उनके लिए अच्छा है ये सब लेकिन कुछ हद्द तक जरूर है.
किसी की लाइफ में सब कुछ अच्छा हमेशा तो नहीं हो सकता hai…Kuch मज़बूरी और कोम्प्रोमाईज़ करना hi पड़ता है.
यहाँ तक की पूरी दुनिया hi ऐसी hai…Bahu साड़ी अच्छाई और बुराई bhi…Aur ऐसी छोटी छोटी बातो पर रिग्रेट नहीं karte…Samjhe बुद्धू.
निशा की एक्सप्लनेशन और उसकी बातो से अतुल भी थोड़ा मुस्कुराने लगा.
अतुल:- इतना नॉलेज?
अतुल की आवाज से पता चल रहा था वो निशा की बातो से बहुत इम्प्रेस हो गया है.
निशा:- कोई शक? ज्यादा बोलती नहीं हु तो तुमने मुझे मुर्ख समझ लिया ?
अतुल:- तो फिर बोलै करो yaar…Mujh गवार को भी कुछ नॉलेज दे do…Pata नहीं कब काम आ जाए.
निशा:- Jarur…Kabhi कभी किताबों से बाहर निकल कर हमसे बातें कर लिया karo…Har एक सेंटेंस में ज्ञान मिलेगा.
अतुल:- जो हुकुम Madam...Koshish करूँगा.
फिर दोनों साथ में चलते रहे ऐसे hi हसी मजाक करते hue…Dono बहुत पहले hi एक दूसरे से खुल गए the…Aisi हसी मजाक दोनों के बिच अब्ब आम बात हो चूका था.
अतुल:- तुम भी कोई सोच में खोयी ho…Kya बात है?
निशा:- ये वाइल्डलाइफ के बारे में सोच रही hu…Sirf जंगल hi उनकी दुनिया hai…Aur इतनी छोटी दुनिया में भी कितनी ख़ुशी और प्यार से जीते है.
मई भी यही सोच रही thi…Kaash मेरे लाइफ भी ऐसा hi ho…Jyada पैसा और ज्यादा शान नहीं चाहिए लाइफ me…Bas ख़ुशी और प्यार से अपने जिंदगी जी पाउ इतना hi बहुत hai…Simple एंड स्वीट फॅमिली हो.
अतुल:- तो तुम किसी जंगल में रहने वाले आदि वाशी से शादी करने की सोच रही हो?
जब अतुल ने ये बात कहा तब निशा बोतल से पानी पी रही thi…Atul की अचानक इस बात से निशा चौंक गयी और मुंह में भरा हुआ पानी अचानक hi अतुल के मुंह में उढ़ेल दिया.
निशा:- सॉरी sorry…Anjaane में हो गया.
अतुल ने उससे चुप होने का का इशारा करते हुए kaha…Fir पॉकेट से अपना चाणक्य निकाल कर चेहरा साफ़ करने लगा.
अतुल:- बहुत डेंजरस हो tum…Abb तो संभल कर मजाक करना padega…Warna पता नहीं आगे क्या हाल होगा. :सकारेद:
निशा:- सॉरी.
अतुल:- कोई बात nahi…Jaan बुझ कर तुमने ऐसा नहीं किया.
फिर दोनों के बिच कुछ पल की खामोशी चा गया.
अतुल:- तुमने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया.
अतुल फिर मजाक के मूड में आ गया.
निशा:- बुद्धू hi रहोगे tum…Baat को गलत तरीके से कैसे समझना है कोई तुम से sikhe…Maine तो कहा था की मेरी लाइफ सिंपल एंड स्वीट ho…Wildlife तो बस एक्साम्प्ले था.
निशा:- और तुम्हारा क्या प्लानिंग है फ्यूचर का.
अतुल:- अभी ज्यादा आगे का सोचा नहीं hai…MBBS के बाद मद के लिए किसी फॉरेन कंट्री में jaaunga…USA या फिर कोई यूरोपियन.
निशा:- (इन हेर मंद) तुम्हारे लिए वह भी चली jaaungi…Bas इतना याद rakhna…Tab तक तुम मेरे बन जाओगे और बनना hi पड़ेगा.
निशा:- क्यों? हमारे देश में कॉलेज काम है क्या या फिर पढ़ाई का क्वालिटी अच्छा नहीं है?
अतुल:- Nahi…Wo बात नहीं hai…Ek बार बाहर घूमने जाने का सोचा hai…To फिर सोचा वही पढ़ भी लूंगा और नयी नयी जगह भी देख paaunga…Baad में तो यहाँ आ कर काम करना hi है.
निशा:- फिर यहाँ वापसी क्यों? अगर वही सेटल्ड हो गए तो ओप्पोर्तुनिटी और एअर्निंग भी अच्छा होगा.
अतुल:- बात तो सही hai…Doctors के लिए बाहर स्कोप बहुत अच्छा hai…Lekin मुझे बिलकुल भी इंटरेस्ट नहीं hai…Apna देश अपना hi होता hai…Aur पैसा hi सब कुछ नहीं है मेरे liye…Ek अच्छा और ईमानदार डॉक्टर बनना चाहता hu…Bas यही काफी है.
मब्ब्स पढ़ने से पहले hi सोच लिया था maine…Ek ऐसे गांव में काम करूँगा जो बहुत hi ुंडेवेलोपेड हो और जहा हेल्थ कंडीशन बहुत बुरा हो.
अगर फॉरेन कंट्री जाऊँगा तो हमेशा मन में यही दर्द रहेगा की मेरे देश में लोग मर रहे है छोटी छोटी बीमारी की वजह se…Aur मई यहाँ पैसे कमा रहा हु और खुदगर्ज़ बन गया हु.
क्या फायदा ऐसे पैसे का और इज़्ज़त का जो खुद की नजरो में hi गिरा दे.
वैसे भी फुल स्कालरशिप में पढ़ रहा hu…Aur ये गवर्नमेंट कॉलेज hai…Desh ने इतना कुछ किया है मेरे liye…Free में पढ़ा रहा hai…Doctor का डिग्री दे रहा है.
मेरा भी तो फ़र्ज़ बनता है देश का क़र्ज़ उतारने का और सेवा करने ka…Issi लिए सोच लिया है निस्वार्थ भाव से सेवा करूँगा किसी गांव में जहा मेडिकल और हेल्थ फैसिलिटी का पहुँच ना हो.
ये कहते वक्त अतुल की आँखों में आंसू के कुछ बून्द आ गया.
निशा उससे प्यार भरी निगाह से देखती रही और फिर खुद hi उसने अतुल की आंसू पांच दिए.