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EPISODE – 52
रिया पहले hi अपने कमरे में जा चुकी थी और उस ने स्लीवलेस निघ्त्य पेह ली थी… ब्रा और पंतय पहले से उतर चुकी थी… निघ्त्य भी ओने पीेछे थी जो के पीछे एक ज़िप को खोलने से पूरी उतर जाती… वर्षा और अक्षरा भी अपने अपने पति के साथ अपने कमरे में जा कर चेंज करके निघ्त्य पहन ली और सोने लगी… गोविन्द कमरे में आ कर नाईट सूट जो पहले से ढीला था उतर कर पूरा नंगा हो गया… वो पूरी तरह से तैयार था एक्शन के लिए… अब इंतज़ार करना उस के तन्ने हुए लुंड के लिए मुमकिन नहे था… सब के दिमाग़ चेक किये… कही से कोई इशू नहे था… सेठ, उस की पत्नी सो चुके थे… चेतन और बिपिन मदहोश थे… वर्षा और अक्षरा भी निघ्त्य पहन कर अपने अपने पति के पास लेट गयी थी… उस ने रिया के दिमाग़ में आ कर उस को गाइड करते हुए अपने कमरे में ले आया… रिया जेसे अंदर आयी… गोविन्द ने दरवाज़े को लॉक कर दिया…. रिया उस का तन तना तन लुंड देख कर शर्मा गयी और तिरछी नज़रो से देकने लगी…
रिया… “में वर्जिन हु…”
गोविन्द… “don’t वोर्री… बोहत प्यार से छोडूं गए अपनी जान को…”
छोड़ने का शब्द सुन कर रिया शरमाते हुए उस के गले लग गयी…
दोनों की बांहे और होंठ आपस में मिल गए… गोविन्द ने देर न करते हुए… उस की ज़िप खोल दी और निघ्त्य वही फर्श पे गिर गयी… अब दोनों hi नंगे थे पूरे के पूरे….
ठीक उसी शामे… अक्षरा बेचैन सी हो कर उठी… उस को घबराहट भी हो रही थी… उससे कुछ समझ नहीं आया तो अपने बीएड से उठ कर बहार निकल आयी… बिपिन तो बेहोश पारा था बीएड पर… और अक्षरा ने होल से वर्षा के कमरे का दरवाज़ा नॉक कर दिया… वर्षा भी जग रही थी… चेतन पूरी तरह मदहोश था और ज़ोर ज़ोर से खर्राटे ले रहा था… वर्षा ने दरवाज़े पर दस्तक सुनी तो उठ कर दरवाज़ा खोल दिया…
वर्षा… “तू यहाँ इस वक़्त…. क्या हुआ अक्षरा…??”
अक्षरा… “मुझे सख्त बेचैनी हो रही हे… क्यों न कुछ देर गोविन्द से बात कर लें… वो देखो उस के कमरे की लाइट ों हे… वो जग रहा हे…”
वर्षा… “बेवक़ूफ़… वो कोण सा हमारा सागा लगता हे जो रत के इस पहर उस के कमरे में चले जाएँ… वो क्या सोचे गए हमारे बारे में…”
अक्षरा… “दीदी वो बारे अचे सुबहो का लड़का हे… देखा नहे था वो तो हमें दीदी कह कर बुला रहा था… वो बुरा नहे समझे गए इससे… चलो न प्लस कुछ देर उस के साथ बाटे कर के फिर वापिस आकर सो जयें गए…”
वर्षा… “हम्म्म ठीक हे… चलो…”
वो दोनों गोविन्द के कमरे के दरवाज़े के बहार पोहंच गयी… और अक्षरा ने हाथ उठा लिया के दस्तक दे दरवाज़े पर… फ़ौरन से वर्षा ने उस का हाथ पाकर के रोक लिया… अक्षरा उस की तरफ आश्चर्य से देखने लगी… के क्यों रोका…
वर्षा… “मुझे अंदर से किसी की बात करने की आवाज़ आ रही हे… ठहरो…”
अंदर कमरे में… गोविन्द ने रिया को खरे खरे पलट दिया और पीछे से लुंड उस की गांड में दबाते हुए… उस के कान और गर्दन पर किश करने लगा और एक हाथ से उस के चुके दबाने लगा… और दूसरा हाथ उस से उसकी छूट को दबाने लगा…
रिया को बोहत ाचा लग रहा था… “हम्म्म …. ऐसे hi छतो मेरी गर्दन… बोहत मज़ा आ रहा हे… हम्म्म… ाः आह” छूट पे हाथ महसूस कर के सिसकने लगी और उस की आवाज़ काफी बुलंद थी बहार साफ सुनी जा रही थी…
वो दोनों कमरे में दरवाज़े के बिलकुल पास थे…
वर्षा और अक्षरा भी कमरे के बहार दरवाज़े के बिलकुल पास थी… वो दोनों शादी शुदा थी… समझ गयी के अंदर क्या हो रहा हे…
अक्षरा… हेरात से … “अंदर लड़की कोण हे…???”
वर्षा… “शठ… आहिस्ता बोलो… रिया हे…”
अक्षरा का मुंह शॉक से खुल गया और उस ने अपने मुंह पर हाथ रख लिया…
वर्षा उस का हाथ पकड़ते हुए कमरे की साइड में बानी खिरकी की तरफ ले गयी… अंदर से खिरकी पर पर्दा ज़रा सा हटा हुआ था और अंदर का पूरा मंज़र नज़र आ रहा था… लाइट्स फुल ों थी कमरे की…
अंदर का नज़ारा देख कर दोनों की आँखें फटी की फटी रह गयी… दोनों अंदर नंगे थे… गोविन्द, रिया के पीछे खरा एक हाथ से उस के चुके दबा रहा था और दुसरे हाथ से छूट सेहला रहा था…
वर्षा और अक्षरा बट सी बन गयी… उन के कदम वही जम गए और आँखें गोविन्द के बदन पर… दोनों को साइड से गोविन्द का लुंड पूरा नहे दिख रहा था क्यों के उस का लुंड इस वक़्त… काफी सारा रिया की गांड की फैंको के अंदर ग़ुस्सा वह की सैर कर रहा था…
वर्षा… “रिया बेशरम को देखो… क्यों आयी यहाँ इस से छुड़वाने…”
अक्षरा… “रिया को चोरो… गोविन्द को देखो… इस का बदन कितना मज़बूत और खूबसूरत हे… इस का लुंड भी मोटा लग रहा हे…”
बहार की लाइट्स ऑफ थी और अंदर रौशनी फुल थी तो बहार से अंदर तो पूरा नज़र आ रह था मगर अंदर से बहार नहे देखा जा सकता था और वैसे भी पर्दा बस ज़रा सा हटा हुआ था मगर इस एंगल से हटा हुआ था के पूरा कमरा बहार से साफ साफ दिख रहा था…
रिया की छूट पूरी गीली हो चुकी थी… उस की छूट में अब एक ऊँगली अंदर बहार होने लगी थी… मज़े से रिया ने अपनी कमर दोहरी कर ली… और उस की गांड पूरे निशाने पर थी लुंड के… गोविन्द ने चुके वाला हाथ अपने लुंड पर रखते हुए जेसे hi लुंड गांड के छेद पर टिकाया वो उछाल कर सीढ़ी हो गयी… “यहाँ नहे डालो…”
वो समझ रही थी के गोविन्द उस की गांड में लुंड डालने वाला हे… गोविन्द हंसने लगा ये देख कर और फिर से उस के होंठ चूसने लगा…
रिया के पोजीशन चेंज करने की वजा से गोविन्द का लुंड पूरा नज़र में आया वर्षा और अक्षरा के… और दोनों के मुंह हेरात से खुल गए…
अक्षरा… “ये इंसान हे या बेल… इस का लुंड कितना बारे और मोटा हे…”
वर्षा… सहमति दिखते हुए… “हम्म्म…. पता नहे रिया कुंवारी हे या पहले लुंड ले चुकी हे… अगर कुंवारी हे तो इस की छूट आज पहात जये गई…”
और फिर बारे घोर से अंदर का मंज़र देखने लगी….
अब रिया अपने घुटनो पर बेथ कर लुंड को चूसने लगी…
कुछ देर के बाद गोविन्द ने उस के चेहरे को दोनों तरफ से पाकर कर एक जगा रोक लिया और अपने लुंड से उस के मुंह को छोड़ने लगा…
फिर गोविन्द ने पूरा लुंड उस के मुंह में दाल दिया…
अब थूक निकलने लगी थी… रिया के मुंह से….
और उस को मुश्किल हो रही थी पूरे लुंड को मुंह में लेने से… नहीं लिया जा ारः था मुंह में…
बहार: वर्षा… “पूरी रांड हे साली कैसे चूस रही हे…”
अक्षरा अपने होंटो पर ज़बान फेरते हुए… “हम्म्म इस को ाचा लग रहा हे ये लुंड अपने मुंह में… मज़े से चूस रही हे…”
मुखछोडन की रफ़्तार बढ़ने लगी और फिर रिया बर्दाश्त न कर सकीय और उस का गाला जेसे बंद सा होने लगा था और आँखों से आंसू आ गए… उस ने फ़ौरन अपना मुंह चुराया और ज़ोर ज़ोर से खांसने लगी… कुछ साँस बहाल होने के बाद… “जान ज़ुल्म तो न करो… प्यार से करो न…”
और उठ कर उस के गले लग गयी…. अब गोविन्द ने उस को अपनी बांहो में उठाते हुए बिस्तर पे लिटा दिया… और उस के बराबर में लेट कर उस की छूट के दाने को सहलाने लगा… और सहलाते सहलाते उस की छूट में ऊँगली करने लगा… छूट पूरी गीली थी… रिया ने आँखे बंद कर ली और पूरा आनंद ले रही थी… इस लम्हे का….
वर्षा… “ये कुंवारी हे… सिर्फ एक ऊँगली जा रही हे इस की छूट में…”
अक्षरा… “हम्म्म… इस को बोहत मज़ा आ रहा हे…” और एक हाथ से अपनी छूट को सहलाने लगी…
गोविन्द उस की छूट में ऊँगली करने के साथ साथ उस के चुके भी चूसने लगा… और कुछ देर के बाद उस के निप्पल पर काट भी रहा था…. Aaah…aaah…aah…aaah….aaah…mmmm…aaammm.. सिसकिया निकल रही थी रिया के मुंह से… गोविन्द ने उस के होंटो को भी चूसना शुरू कर दिया… और अब हाथ से उस की छूट को रगड़ने लगा… और फिर से एक ऊँगली अंदर दाल दी और अंगूठे से छूट के डेन को दबाने लगा…
आआह…. Aaaa……aaa….mmmm….mmmaamm…. aaa…mmm… उस ने अपना पूरा मुंह खोल लिया… गोविन्द भी अब उस को देखने लगा के कितने मज़े में हे वो…
और अपनी टंगे आपस में जोर कर उस के हाथ को दबाने लगी टैंगो में और अपनी छूट को ऊपर उठाने लगी और फिर एक ज़ोरदार चीख के साथ झरने लगी…. एक पानी का फुवारा निकल पारा और छींटे फर्श पर दूर जा कर गिरे… रिया बारे ज़ोर से झरि थी… और उस का जिस्म अब तक झटके खा रहा था… उस ने एक हाथ से गोविन्द का बाज़ू दबोच लिया और अपने नाख़ून गर दिए उस की खाल में…
वर्षा… मज़े से सिसकी लेते हुए… “मममम अअअअअअअ… ककक… बोहत मज़ा आया हे इस को….” और अपनी छूट सहलाने लगी निघ्त्य के ऊपर से… अक्षरा पहले hi अपना हाथ अपनी निघ्त्य की छड़ी में दाल चुकी थी…
रिया कुछ देर बेसुध रही… गोविन्द ने जब उस के चुके फिर से चूसने स्टार्ट किये तो उस को होश आया और उस ने अब गोविन्द के लुंड की तरफ हाथ बढ़ा दिया जेसे अब उस को इस मुसल को अपने वश में करना था… गोविन्द उस के उतावले पैन को देखते हुए खुद लेट गया और रिया को खेंच कर 69 की पोजीशन में ले आया… उस के मुंह में लुंड दे कर खुद उस की छूट चाटने लगा…
रिया की साडी शर्म अब ख़तम हो चुकी थी वो पूरे मज़े से गोविन्द के लुंड को चूसने लगी… गोविन्द भी उस के चूतरो को पूरा खोलते हुए… उस के छेद और छूट दोनों के ऊपर ज़बान फेरने लगा… गोविन्द ने देखा के जब वो गांड के छेद पर और छूट के डेन को छत्ता हे तो रिया उछाल जाती हे तो उस ने इन दोनों जगा को टारगेट कर लिया…
अब अक्षरा से बर्दाश्त न हुआ और उस ने अपनी पंतय उतर कर हाथ को छूट पे ज़ोर ज़ोर से मसलते हुए कहा… “दीदी… में अंदर जा रही हु… उन के साथ में भी करू गई…”
वर्षा अपनी छूट को मसलते हुए… अपनी अध् खुली आँखों से अक्षरा को जाते हुए देखा और बेबसी से अपनी छूट को और ज़ोर से मसलने लगी…
रिया पहले hi अपने कमरे में जा चुकी थी और उस ने स्लीवलेस निघ्त्य पेह ली थी… ब्रा और पंतय पहले से उतर चुकी थी… निघ्त्य भी ओने पीेछे थी जो के पीछे एक ज़िप को खोलने से पूरी उतर जाती… वर्षा और अक्षरा भी अपने अपने पति के साथ अपने कमरे में जा कर चेंज करके निघ्त्य पहन ली और सोने लगी… गोविन्द कमरे में आ कर नाईट सूट जो पहले से ढीला था उतर कर पूरा नंगा हो गया… वो पूरी तरह से तैयार था एक्शन के लिए… अब इंतज़ार करना उस के तन्ने हुए लुंड के लिए मुमकिन नहे था… सब के दिमाग़ चेक किये… कही से कोई इशू नहे था… सेठ, उस की पत्नी सो चुके थे… चेतन और बिपिन मदहोश थे… वर्षा और अक्षरा भी निघ्त्य पहन कर अपने अपने पति के पास लेट गयी थी… उस ने रिया के दिमाग़ में आ कर उस को गाइड करते हुए अपने कमरे में ले आया… रिया जेसे अंदर आयी… गोविन्द ने दरवाज़े को लॉक कर दिया…. रिया उस का तन तना तन लुंड देख कर शर्मा गयी और तिरछी नज़रो से देकने लगी…
रिया… “में वर्जिन हु…”
गोविन्द… “don’t वोर्री… बोहत प्यार से छोडूं गए अपनी जान को…”
छोड़ने का शब्द सुन कर रिया शरमाते हुए उस के गले लग गयी…
दोनों की बांहे और होंठ आपस में मिल गए… गोविन्द ने देर न करते हुए… उस की ज़िप खोल दी और निघ्त्य वही फर्श पे गिर गयी… अब दोनों hi नंगे थे पूरे के पूरे….
ठीक उसी शामे… अक्षरा बेचैन सी हो कर उठी… उस को घबराहट भी हो रही थी… उससे कुछ समझ नहीं आया तो अपने बीएड से उठ कर बहार निकल आयी… बिपिन तो बेहोश पारा था बीएड पर… और अक्षरा ने होल से वर्षा के कमरे का दरवाज़ा नॉक कर दिया… वर्षा भी जग रही थी… चेतन पूरी तरह मदहोश था और ज़ोर ज़ोर से खर्राटे ले रहा था… वर्षा ने दरवाज़े पर दस्तक सुनी तो उठ कर दरवाज़ा खोल दिया…
वर्षा… “तू यहाँ इस वक़्त…. क्या हुआ अक्षरा…??”
अक्षरा… “मुझे सख्त बेचैनी हो रही हे… क्यों न कुछ देर गोविन्द से बात कर लें… वो देखो उस के कमरे की लाइट ों हे… वो जग रहा हे…”
वर्षा… “बेवक़ूफ़… वो कोण सा हमारा सागा लगता हे जो रत के इस पहर उस के कमरे में चले जाएँ… वो क्या सोचे गए हमारे बारे में…”
अक्षरा… “दीदी वो बारे अचे सुबहो का लड़का हे… देखा नहे था वो तो हमें दीदी कह कर बुला रहा था… वो बुरा नहे समझे गए इससे… चलो न प्लस कुछ देर उस के साथ बाटे कर के फिर वापिस आकर सो जयें गए…”
वर्षा… “हम्म्म ठीक हे… चलो…”
वो दोनों गोविन्द के कमरे के दरवाज़े के बहार पोहंच गयी… और अक्षरा ने हाथ उठा लिया के दस्तक दे दरवाज़े पर… फ़ौरन से वर्षा ने उस का हाथ पाकर के रोक लिया… अक्षरा उस की तरफ आश्चर्य से देखने लगी… के क्यों रोका…
वर्षा… “मुझे अंदर से किसी की बात करने की आवाज़ आ रही हे… ठहरो…”
अंदर कमरे में… गोविन्द ने रिया को खरे खरे पलट दिया और पीछे से लुंड उस की गांड में दबाते हुए… उस के कान और गर्दन पर किश करने लगा और एक हाथ से उस के चुके दबाने लगा… और दूसरा हाथ उस से उसकी छूट को दबाने लगा…
रिया को बोहत ाचा लग रहा था… “हम्म्म …. ऐसे hi छतो मेरी गर्दन… बोहत मज़ा आ रहा हे… हम्म्म… ाः आह” छूट पे हाथ महसूस कर के सिसकने लगी और उस की आवाज़ काफी बुलंद थी बहार साफ सुनी जा रही थी…
वो दोनों कमरे में दरवाज़े के बिलकुल पास थे…
वर्षा और अक्षरा भी कमरे के बहार दरवाज़े के बिलकुल पास थी… वो दोनों शादी शुदा थी… समझ गयी के अंदर क्या हो रहा हे…
अक्षरा… हेरात से … “अंदर लड़की कोण हे…???”
वर्षा… “शठ… आहिस्ता बोलो… रिया हे…”
अक्षरा का मुंह शॉक से खुल गया और उस ने अपने मुंह पर हाथ रख लिया…
वर्षा उस का हाथ पकड़ते हुए कमरे की साइड में बानी खिरकी की तरफ ले गयी… अंदर से खिरकी पर पर्दा ज़रा सा हटा हुआ था और अंदर का पूरा मंज़र नज़र आ रहा था… लाइट्स फुल ों थी कमरे की…
अंदर का नज़ारा देख कर दोनों की आँखें फटी की फटी रह गयी… दोनों अंदर नंगे थे… गोविन्द, रिया के पीछे खरा एक हाथ से उस के चुके दबा रहा था और दुसरे हाथ से छूट सेहला रहा था…
वर्षा और अक्षरा बट सी बन गयी… उन के कदम वही जम गए और आँखें गोविन्द के बदन पर… दोनों को साइड से गोविन्द का लुंड पूरा नहे दिख रहा था क्यों के उस का लुंड इस वक़्त… काफी सारा रिया की गांड की फैंको के अंदर ग़ुस्सा वह की सैर कर रहा था…
वर्षा… “रिया बेशरम को देखो… क्यों आयी यहाँ इस से छुड़वाने…”
अक्षरा… “रिया को चोरो… गोविन्द को देखो… इस का बदन कितना मज़बूत और खूबसूरत हे… इस का लुंड भी मोटा लग रहा हे…”
बहार की लाइट्स ऑफ थी और अंदर रौशनी फुल थी तो बहार से अंदर तो पूरा नज़र आ रह था मगर अंदर से बहार नहे देखा जा सकता था और वैसे भी पर्दा बस ज़रा सा हटा हुआ था मगर इस एंगल से हटा हुआ था के पूरा कमरा बहार से साफ साफ दिख रहा था…
रिया की छूट पूरी गीली हो चुकी थी… उस की छूट में अब एक ऊँगली अंदर बहार होने लगी थी… मज़े से रिया ने अपनी कमर दोहरी कर ली… और उस की गांड पूरे निशाने पर थी लुंड के… गोविन्द ने चुके वाला हाथ अपने लुंड पर रखते हुए जेसे hi लुंड गांड के छेद पर टिकाया वो उछाल कर सीढ़ी हो गयी… “यहाँ नहे डालो…”
वो समझ रही थी के गोविन्द उस की गांड में लुंड डालने वाला हे… गोविन्द हंसने लगा ये देख कर और फिर से उस के होंठ चूसने लगा…
रिया के पोजीशन चेंज करने की वजा से गोविन्द का लुंड पूरा नज़र में आया वर्षा और अक्षरा के… और दोनों के मुंह हेरात से खुल गए…
अक्षरा… “ये इंसान हे या बेल… इस का लुंड कितना बारे और मोटा हे…”
वर्षा… सहमति दिखते हुए… “हम्म्म…. पता नहे रिया कुंवारी हे या पहले लुंड ले चुकी हे… अगर कुंवारी हे तो इस की छूट आज पहात जये गई…”
और फिर बारे घोर से अंदर का मंज़र देखने लगी….
अब रिया अपने घुटनो पर बेथ कर लुंड को चूसने लगी…
कुछ देर के बाद गोविन्द ने उस के चेहरे को दोनों तरफ से पाकर कर एक जगा रोक लिया और अपने लुंड से उस के मुंह को छोड़ने लगा…
फिर गोविन्द ने पूरा लुंड उस के मुंह में दाल दिया…
अब थूक निकलने लगी थी… रिया के मुंह से….
और उस को मुश्किल हो रही थी पूरे लुंड को मुंह में लेने से… नहीं लिया जा ारः था मुंह में…
बहार: वर्षा… “पूरी रांड हे साली कैसे चूस रही हे…”
अक्षरा अपने होंटो पर ज़बान फेरते हुए… “हम्म्म इस को ाचा लग रहा हे ये लुंड अपने मुंह में… मज़े से चूस रही हे…”
मुखछोडन की रफ़्तार बढ़ने लगी और फिर रिया बर्दाश्त न कर सकीय और उस का गाला जेसे बंद सा होने लगा था और आँखों से आंसू आ गए… उस ने फ़ौरन अपना मुंह चुराया और ज़ोर ज़ोर से खांसने लगी… कुछ साँस बहाल होने के बाद… “जान ज़ुल्म तो न करो… प्यार से करो न…”
और उठ कर उस के गले लग गयी…. अब गोविन्द ने उस को अपनी बांहो में उठाते हुए बिस्तर पे लिटा दिया… और उस के बराबर में लेट कर उस की छूट के दाने को सहलाने लगा… और सहलाते सहलाते उस की छूट में ऊँगली करने लगा… छूट पूरी गीली थी… रिया ने आँखे बंद कर ली और पूरा आनंद ले रही थी… इस लम्हे का….
वर्षा… “ये कुंवारी हे… सिर्फ एक ऊँगली जा रही हे इस की छूट में…”
अक्षरा… “हम्म्म… इस को बोहत मज़ा आ रहा हे…” और एक हाथ से अपनी छूट को सहलाने लगी…
गोविन्द उस की छूट में ऊँगली करने के साथ साथ उस के चुके भी चूसने लगा… और कुछ देर के बाद उस के निप्पल पर काट भी रहा था…. Aaah…aaah…aah…aaah….aaah…mmmm…aaammm.. सिसकिया निकल रही थी रिया के मुंह से… गोविन्द ने उस के होंटो को भी चूसना शुरू कर दिया… और अब हाथ से उस की छूट को रगड़ने लगा… और फिर से एक ऊँगली अंदर दाल दी और अंगूठे से छूट के डेन को दबाने लगा…
आआह…. Aaaa……aaa….mmmm….mmmaamm…. aaa…mmm… उस ने अपना पूरा मुंह खोल लिया… गोविन्द भी अब उस को देखने लगा के कितने मज़े में हे वो…
और अपनी टंगे आपस में जोर कर उस के हाथ को दबाने लगी टैंगो में और अपनी छूट को ऊपर उठाने लगी और फिर एक ज़ोरदार चीख के साथ झरने लगी…. एक पानी का फुवारा निकल पारा और छींटे फर्श पर दूर जा कर गिरे… रिया बारे ज़ोर से झरि थी… और उस का जिस्म अब तक झटके खा रहा था… उस ने एक हाथ से गोविन्द का बाज़ू दबोच लिया और अपने नाख़ून गर दिए उस की खाल में…
वर्षा… मज़े से सिसकी लेते हुए… “मममम अअअअअअअ… ककक… बोहत मज़ा आया हे इस को….” और अपनी छूट सहलाने लगी निघ्त्य के ऊपर से… अक्षरा पहले hi अपना हाथ अपनी निघ्त्य की छड़ी में दाल चुकी थी…
रिया कुछ देर बेसुध रही… गोविन्द ने जब उस के चुके फिर से चूसने स्टार्ट किये तो उस को होश आया और उस ने अब गोविन्द के लुंड की तरफ हाथ बढ़ा दिया जेसे अब उस को इस मुसल को अपने वश में करना था… गोविन्द उस के उतावले पैन को देखते हुए खुद लेट गया और रिया को खेंच कर 69 की पोजीशन में ले आया… उस के मुंह में लुंड दे कर खुद उस की छूट चाटने लगा…
रिया की साडी शर्म अब ख़तम हो चुकी थी वो पूरे मज़े से गोविन्द के लुंड को चूसने लगी… गोविन्द भी उस के चूतरो को पूरा खोलते हुए… उस के छेद और छूट दोनों के ऊपर ज़बान फेरने लगा… गोविन्द ने देखा के जब वो गांड के छेद पर और छूट के डेन को छत्ता हे तो रिया उछाल जाती हे तो उस ने इन दोनों जगा को टारगेट कर लिया…
अब अक्षरा से बर्दाश्त न हुआ और उस ने अपनी पंतय उतर कर हाथ को छूट पे ज़ोर ज़ोर से मसलते हुए कहा… “दीदी… में अंदर जा रही हु… उन के साथ में भी करू गई…”
वर्षा अपनी छूट को मसलते हुए… अपनी अध् खुली आँखों से अक्षरा को जाते हुए देखा और बेबसी से अपनी छूट को और ज़ोर से मसलने लगी…