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EPISODE – 24
गोविन्द विक्रम के शोरूम पोहंच कर खुद अंदर जा कर विक्रम से मिला और उस को बर्गर दिया और कहा के आज जल्दी छुट्टी लेले तो शाम को जल्दी निकलते हैं… उस वक़्त 3 बज रहे थे…
विक्रम ने कहा… “तू फ़िक्र न कर… में 4 बजे की परमिशन ले लूंगा सेठ से… तू बस आ जा 4 बजे…”
गोविन्द वह से निकल कर घर पोहंचा और फ्रेश हो कर शलवार कमीज पहन ली… सीमा को bye किया और गंगा देवी से गले मिला… गंगा देवी भी उस को गले मिल कर बोहत खुश हुई और उस को ढेर साडी दुआएं दी… गंगा देवी ने एक नयी साड़ी अपने पास से निकल कर गोविन्द को उस की माँ के लिए दी और कुछ स्वीट्स और चॉकलेट्स दिए ेषणा के लिए…
गोविन्द ने कपड़े जो मल्टी भाभी और शकुंतला देवी के टेलर से लिए थे वो उठाये और जो कपड़े और चीज़ें उस ने ली थीं सब के लिए वो भी उठायीं… कार में सारा सामान रख कर विक्रम की तरफ गया और उस को पिक किया…
दोनों दोस्त हंसी मज़ाक़ करते गाँव पोहंच गए… विक्रम को घर छोरा और किरण को उस का सूट दिया… किरण भी ख़ुशी से सब के सामने उस के गले लग के… “थैंक यू भैया…” सब हंसने लगे… यहाँ पर गोविन्द ने ज़रा देर रुक कर आशा बक्शी पर धयान लगाया तो पता चला के कोई खास क्राइम रिपोर्ट नहे हुआ और रघु की फाइल और फोटोस दिल्ली पुलिस ने पोस्ट कर दिए हैं जो के मंडे या ट्यूसडे को पोहंचे गए… और आशा अब अपने रेजिडेंस में आ चुकी थी…
फिर गोविन्द हवेली गया… वहां शकुंतला देवी अपने कमरे में थी… ठाकुर और सिमर सिंह भी घर पे नही थे… गोविन्द ख़ामोशी से लाउन्ज में आया जहाँ मल्टी भाभी फ़ोन पर अपने मइके बात कर रही थी… गोविन्द को देखते hi उस ने फ़ोन कट किया और खरी हो गयी अपनी जानेमन के इस्तक़बाल के लिए… साफ लग रहा था के वो उस को अपने गले से लगाना चाहती हे मगर गोविन्द ने उस को रोका ुर कहा के वो ए गए रत में… जब सिमर सिंह शराब पीने जाता हे मर्दाने में… भाभी की आँखें चमक उठी और सब कपड़े और सामान उठा कर ले गयी कमरे में रखने के लिए… साड़ी उस को बोहत पसंद आई थी…
फिर गोविन्द घर पोहंचा और कार घर के बहार ही पार्क कर दी… अभी बापू और प्रकाश घर नहे पोहंचे थे… उस ने सरे कपड़े और गिफ्ट्स उठाये घर में दाखिल हुआ… घर का दरवाज़ा मामूल के मुताबिक़ खुला था… जैसा के गाँव में होता हे…
माँ और ेषणा दोनों बोहत खुश हुई उससे देख कर और सरे गिफ्ट्स उन्हें अचे लगे…
इतनी देर में बापू और प्रकाश भी आ गए… और आते हे पूछने लगे बहार कार किस की हे… गोविन्द ने उन्हें बताया के लाला जी ने ले कर दी हे… वो भी खुश हुए… ेषणा ज़िद करने लगी के उस को कार में बैठना हे… गोविन्द ने सब को कहा चलने को तो बापू और माँ और प्रकाश ने कहा अभी तू इस को घुमा ला… हम बाद में चले जये गए अभी थके हुए हैं और फ्रेश भी होना हे…
गोविन्द, ेषणा को ले कर बहार आया और अगली सीट का दरवाज़ा खोल कर एक प्रिंसेस की तरह बिठाया और बिठा कर हाथ अपने सीने पर रख कर झुका जेसे सेवक अपनी प्रिंसेस को ताज़ीम देते हैं… ेषणा ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी…
गोविन्द बोहत खुश हुआ अपनी प्यारी सी गुड़िया सी बहन को हँसते देख कर… और दूसरी तरफ से ड्राइविंग सीट पे बेथ कर कार को निकला गाँव से बहार रोड पर और हलकी स्पीड में लॉन्ग ड्राइव करने लगा…
शाम का वक़्त… हल्का हल्का अँधेरा… रोड पर बोहत कम ट्रैफिक… और सॉफ्ट म्यूजिक में सांग्स प्ले हो रहे थे…
ेषणा का चेहरा दमक रहा था… “भैया में आप से बोहत प्यार करती हूँ…”
गोविन्द… “में भी अपनी गुड़िया से बोहत पियर करता हूँ…” यह कह कर उस ने अपना बाज़ू ेषणा के गिर्द दाल कर उससे अपने क़रीब कर लिया…
ेषणा… “भैया…” धीमी आवाज़ में सिसक पारी…
और ख़ामोशी से इस लम्हे का आनंद लेने लगी…
गोविन्द… “क्यों चुप हो गुड़िया…?? ाचा नहे लग रहा क्या…??”
ेषणा… मधुर आवाज़ में… “बोहत ाचा लग रहा हे… गोविन्द…”
गोविन्द ने नोटिस नहे किया के ेषणा ने उस को नाम से पुकारा हे और भैया नहे कहा… कुछ देर बाद ेषणा बोली…
ेषणा… “किरण से भी पियर करते हो आप…??”
गोविन्द एक डैम घबरा गया… “तुम्हें किसी ने कुछ कहा क्या…??”
ेषणा… “कोई नहे… परेशां न हो… मुझे कोई ऐतराज़ नहे… बल्कि मुझे ाचा लगा… किरण ने मुझे बताया के तुम ने उस को बारे प्यार से गले लगाया था… उसे बोहत ाचा लगा था… कभी हम दोनों को साथ ले कर गारी में चलो न… या अगर उसे अकेले में ले जाओ तो भी मुझे ाचा लगे गए… वो आप से अकेले में मिलना चाहती हे…”
गोविन्द सोचने लगा… “ोये बहनचोद ये क्या हे…”
फिर बोलै… “देखें गए…” और गारी मोर ली अब घर की तरफ…
ेषणा ने अब आहिस्ता से अपना एक हाथ गोविन्द की छाती पे रख दिया और हलके हलके दबाने लगी… गोविन्द ने शलवार कमीज डाली हुई थी… इस वजा से उस का लुंड खरा होने लगा… गोविन्द को ाचा लग रहा था… ेषणा अपना हाथ होल से उस के सीने पर फेर रही थी… और फिर उस ने अपना हाथ सीने के ऊपरी हिस्से और गले के निचले हिस्से पर… जो नज़र आ रहा था… वह रखा और हल्का सा दबाया… लुंड ने झटका मारा… ज़रूर ेषणा ने देखा होगा… ेषणा ने गोविन्द की कमीज का एक बटन खोल दिया और और अपना हाथ उस के सीने पर फेरने लगी… कमीज के अंदर… अब तो गोविन्द का भी बोहत बुरा हल था… उस के लिए कार चलना मुश्किल हो रहा था… ाचा था उस वक़्त ट्रैफिक नहे थी और कार को उस ने गाँव की तरफ मोर लिया था…
ेषणा का हाथ गोविन्द के सीने पर चलता हुआ उस के निप्पल पर पोहंच गया… गोविन्द के मुंह से सिसकी निकल गयी… ेषणा अपनी ऊँगली से उस के निप्पल को चरने लगी… निप्पल सख्त हो गया… गोविन्द ने अपनी ग्रिफ्ट और मज़बूत कर ली ेषणा पर… और गोविन्द का हाथ नीचे चला गया और गांड की साइड से टच होने लगा… बोहत नरम और रेशमी जिस्म था ेषणा का… कार अब बिलकुल घर की तरफ आ चुकी थी… गोविन्द ने अपना बाज़ू हटाया… ेषणा भी सीढ़ी हो गयी… और कहने लगी… “अब रत को हलकी ठण्ड होती जा रही हे… आप अंदर सो जाओ मेरे पास…”
गोविन्द… “हम्म्म… में अभी जॉन गए हवेली सिमर भइया से मिलना हे…”
कार पार्क कर के… दोनों घर आ गए… सब खुश थे… सब ने मिल कर खाना खाया… खाने से फ़ारिग़ हो कर गोविन्द ने अपने बापू और प्रकाश से कहा के एक ज़रूरी बात करनी हे… तो बापू ने कहा ठीक हे चाय भी पीते हैं और बात करते हैं… माँ और ेषणा किचन की तरफ चलीं गयी चाय बना ने…
गोविन्द ने सारा क़िस्सा सुनाया के कैसे लाला जी को उन का मैनेजर और कुछ कर्मचारी फ्रॉड कर के नुकसान पोहंचा रहे हैं और अब उन के पास मुख्लिस और वफादार लोग नहे हैं जो उन के साथ मिल कर काम करें… और साथ में गोविन्द ने कहा के वो चाहता हे के बापू और प्रकाश, शहर से बहार वाले गोदामों और दूसरी कंस्ट्रक्शन को अपनी निगरानी में कार्यें और फिर बापू वहां पर रह कर मवेशी भी परचेस करे और वह पर जो कर्मचारी हों गए उन को सुपरवाइज़ करे… इसी तरह अगर प्रकाश राज़ी हो तो आस पास के गाँव से ट्रक पे अनाज उठाये और गोदाम तक लये… उस ने अपने बापू को बताया के दौलत पुर के आस पास 15 गांव हैं जहाँ से अनाज और स्पिकेस शहर ज़मींदार खुद लेकर आते हैं और वहां पर अनाज की बोली लगती हे और वहां पे मुंशी अपने मनपसंद बोपारी को नाजायज़ फ़ायदा देता हे और तमाम सौदे / ट्रेडिंग पहले से तय शुदा होती हे या दुसरे लफ़्ज़ों में कहें तो फिक्स होती हे… इस लिए इस बार वो छटा हे के ज़मींदारो से अनाज का सौदा डायरेक्ट उन के गाँव में जाकर करें इस तरह ज़मींदारो के ट्रांसपोर्ट का खर्चा भी बचे गए और मुंशी की बेईमानी भी ख़तम हो जये गई… गोविन्द ने अपने बाप से कहा के अगर वो राज़ी हो जयें तो वो और प्रकाश वहां मुलाज़िम नहे मालिक हों गए और इस तरह हमारी माली हालत भी कुछ बेहतर हो जये गई… गोविन्द ने बताया के लाला जी एक अचे और दयालु इंसान हैं हमें ज़रूर उन की सहयता करनी चाहिए…
बापू और प्रकाश ने एग्री कर लिया पर यह भी सवाल उठाया के अगर वो भी शहर में जा कर रहें गए तो माँ और ेषणा अकेले हो जयें गए…
गोविन्द ने उन को समझाया के कुछ दिनों की बात हे वहां पर कंस्ट्रक्शन अगर 10-15 दिन में हो जये तो माँ और ेषणा भी वह शिफ्ट हो सकते हैं… क्यों के वहां पर 4 कमरे और 2 वाशरूम्स बने गए… और उस पोरशन को अलग किया जा सकता हे फॅमिली के रहने के लिए…
बापू और प्रकाश ने एग्री कर लिया और कहा के कल सुबह वो ज़मींदार से बात कर के अगले रोज़ आ जयें गए शहर… गोविन्द ने उन को प्लाट का पूरा एड्रेस समझा दिया… और कहा के वो भी उन के साथ राब्ते में रहे गए…
उस के बाद गोविन्द ने अपने बाप और माँ को 50,000 दिए खर्च करने के लिए… उन को बताया के वो सिमर भैया से मिलने हवेली जा रहा हे… और निकल आया… उस वक़्त रत के 9 बज रहे थे… सिमर भैया तो बेथ चुके होंगे शराब पीने के लिए और मल्टी भाभी अपने कमरे में हों गई… अब बस गोविन्द को ख़ामोशी से उन के कमरे तक पोहंचना था…
गोविन्द विक्रम के शोरूम पोहंच कर खुद अंदर जा कर विक्रम से मिला और उस को बर्गर दिया और कहा के आज जल्दी छुट्टी लेले तो शाम को जल्दी निकलते हैं… उस वक़्त 3 बज रहे थे…
विक्रम ने कहा… “तू फ़िक्र न कर… में 4 बजे की परमिशन ले लूंगा सेठ से… तू बस आ जा 4 बजे…”
गोविन्द वह से निकल कर घर पोहंचा और फ्रेश हो कर शलवार कमीज पहन ली… सीमा को bye किया और गंगा देवी से गले मिला… गंगा देवी भी उस को गले मिल कर बोहत खुश हुई और उस को ढेर साडी दुआएं दी… गंगा देवी ने एक नयी साड़ी अपने पास से निकल कर गोविन्द को उस की माँ के लिए दी और कुछ स्वीट्स और चॉकलेट्स दिए ेषणा के लिए…
गोविन्द ने कपड़े जो मल्टी भाभी और शकुंतला देवी के टेलर से लिए थे वो उठाये और जो कपड़े और चीज़ें उस ने ली थीं सब के लिए वो भी उठायीं… कार में सारा सामान रख कर विक्रम की तरफ गया और उस को पिक किया…
दोनों दोस्त हंसी मज़ाक़ करते गाँव पोहंच गए… विक्रम को घर छोरा और किरण को उस का सूट दिया… किरण भी ख़ुशी से सब के सामने उस के गले लग के… “थैंक यू भैया…” सब हंसने लगे… यहाँ पर गोविन्द ने ज़रा देर रुक कर आशा बक्शी पर धयान लगाया तो पता चला के कोई खास क्राइम रिपोर्ट नहे हुआ और रघु की फाइल और फोटोस दिल्ली पुलिस ने पोस्ट कर दिए हैं जो के मंडे या ट्यूसडे को पोहंचे गए… और आशा अब अपने रेजिडेंस में आ चुकी थी…
फिर गोविन्द हवेली गया… वहां शकुंतला देवी अपने कमरे में थी… ठाकुर और सिमर सिंह भी घर पे नही थे… गोविन्द ख़ामोशी से लाउन्ज में आया जहाँ मल्टी भाभी फ़ोन पर अपने मइके बात कर रही थी… गोविन्द को देखते hi उस ने फ़ोन कट किया और खरी हो गयी अपनी जानेमन के इस्तक़बाल के लिए… साफ लग रहा था के वो उस को अपने गले से लगाना चाहती हे मगर गोविन्द ने उस को रोका ुर कहा के वो ए गए रत में… जब सिमर सिंह शराब पीने जाता हे मर्दाने में… भाभी की आँखें चमक उठी और सब कपड़े और सामान उठा कर ले गयी कमरे में रखने के लिए… साड़ी उस को बोहत पसंद आई थी…
फिर गोविन्द घर पोहंचा और कार घर के बहार ही पार्क कर दी… अभी बापू और प्रकाश घर नहे पोहंचे थे… उस ने सरे कपड़े और गिफ्ट्स उठाये घर में दाखिल हुआ… घर का दरवाज़ा मामूल के मुताबिक़ खुला था… जैसा के गाँव में होता हे…
माँ और ेषणा दोनों बोहत खुश हुई उससे देख कर और सरे गिफ्ट्स उन्हें अचे लगे…
इतनी देर में बापू और प्रकाश भी आ गए… और आते हे पूछने लगे बहार कार किस की हे… गोविन्द ने उन्हें बताया के लाला जी ने ले कर दी हे… वो भी खुश हुए… ेषणा ज़िद करने लगी के उस को कार में बैठना हे… गोविन्द ने सब को कहा चलने को तो बापू और माँ और प्रकाश ने कहा अभी तू इस को घुमा ला… हम बाद में चले जये गए अभी थके हुए हैं और फ्रेश भी होना हे…
गोविन्द, ेषणा को ले कर बहार आया और अगली सीट का दरवाज़ा खोल कर एक प्रिंसेस की तरह बिठाया और बिठा कर हाथ अपने सीने पर रख कर झुका जेसे सेवक अपनी प्रिंसेस को ताज़ीम देते हैं… ेषणा ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी…
गोविन्द बोहत खुश हुआ अपनी प्यारी सी गुड़िया सी बहन को हँसते देख कर… और दूसरी तरफ से ड्राइविंग सीट पे बेथ कर कार को निकला गाँव से बहार रोड पर और हलकी स्पीड में लॉन्ग ड्राइव करने लगा…
शाम का वक़्त… हल्का हल्का अँधेरा… रोड पर बोहत कम ट्रैफिक… और सॉफ्ट म्यूजिक में सांग्स प्ले हो रहे थे…
ेषणा का चेहरा दमक रहा था… “भैया में आप से बोहत प्यार करती हूँ…”
गोविन्द… “में भी अपनी गुड़िया से बोहत पियर करता हूँ…” यह कह कर उस ने अपना बाज़ू ेषणा के गिर्द दाल कर उससे अपने क़रीब कर लिया…
ेषणा… “भैया…” धीमी आवाज़ में सिसक पारी…
और ख़ामोशी से इस लम्हे का आनंद लेने लगी…
गोविन्द… “क्यों चुप हो गुड़िया…?? ाचा नहे लग रहा क्या…??”
ेषणा… मधुर आवाज़ में… “बोहत ाचा लग रहा हे… गोविन्द…”
गोविन्द ने नोटिस नहे किया के ेषणा ने उस को नाम से पुकारा हे और भैया नहे कहा… कुछ देर बाद ेषणा बोली…
ेषणा… “किरण से भी पियर करते हो आप…??”
गोविन्द एक डैम घबरा गया… “तुम्हें किसी ने कुछ कहा क्या…??”
ेषणा… “कोई नहे… परेशां न हो… मुझे कोई ऐतराज़ नहे… बल्कि मुझे ाचा लगा… किरण ने मुझे बताया के तुम ने उस को बारे प्यार से गले लगाया था… उसे बोहत ाचा लगा था… कभी हम दोनों को साथ ले कर गारी में चलो न… या अगर उसे अकेले में ले जाओ तो भी मुझे ाचा लगे गए… वो आप से अकेले में मिलना चाहती हे…”
गोविन्द सोचने लगा… “ोये बहनचोद ये क्या हे…”
फिर बोलै… “देखें गए…” और गारी मोर ली अब घर की तरफ…
ेषणा ने अब आहिस्ता से अपना एक हाथ गोविन्द की छाती पे रख दिया और हलके हलके दबाने लगी… गोविन्द ने शलवार कमीज डाली हुई थी… इस वजा से उस का लुंड खरा होने लगा… गोविन्द को ाचा लग रहा था… ेषणा अपना हाथ होल से उस के सीने पर फेर रही थी… और फिर उस ने अपना हाथ सीने के ऊपरी हिस्से और गले के निचले हिस्से पर… जो नज़र आ रहा था… वह रखा और हल्का सा दबाया… लुंड ने झटका मारा… ज़रूर ेषणा ने देखा होगा… ेषणा ने गोविन्द की कमीज का एक बटन खोल दिया और और अपना हाथ उस के सीने पर फेरने लगी… कमीज के अंदर… अब तो गोविन्द का भी बोहत बुरा हल था… उस के लिए कार चलना मुश्किल हो रहा था… ाचा था उस वक़्त ट्रैफिक नहे थी और कार को उस ने गाँव की तरफ मोर लिया था…
ेषणा का हाथ गोविन्द के सीने पर चलता हुआ उस के निप्पल पर पोहंच गया… गोविन्द के मुंह से सिसकी निकल गयी… ेषणा अपनी ऊँगली से उस के निप्पल को चरने लगी… निप्पल सख्त हो गया… गोविन्द ने अपनी ग्रिफ्ट और मज़बूत कर ली ेषणा पर… और गोविन्द का हाथ नीचे चला गया और गांड की साइड से टच होने लगा… बोहत नरम और रेशमी जिस्म था ेषणा का… कार अब बिलकुल घर की तरफ आ चुकी थी… गोविन्द ने अपना बाज़ू हटाया… ेषणा भी सीढ़ी हो गयी… और कहने लगी… “अब रत को हलकी ठण्ड होती जा रही हे… आप अंदर सो जाओ मेरे पास…”
गोविन्द… “हम्म्म… में अभी जॉन गए हवेली सिमर भइया से मिलना हे…”
कार पार्क कर के… दोनों घर आ गए… सब खुश थे… सब ने मिल कर खाना खाया… खाने से फ़ारिग़ हो कर गोविन्द ने अपने बापू और प्रकाश से कहा के एक ज़रूरी बात करनी हे… तो बापू ने कहा ठीक हे चाय भी पीते हैं और बात करते हैं… माँ और ेषणा किचन की तरफ चलीं गयी चाय बना ने…
गोविन्द ने सारा क़िस्सा सुनाया के कैसे लाला जी को उन का मैनेजर और कुछ कर्मचारी फ्रॉड कर के नुकसान पोहंचा रहे हैं और अब उन के पास मुख्लिस और वफादार लोग नहे हैं जो उन के साथ मिल कर काम करें… और साथ में गोविन्द ने कहा के वो चाहता हे के बापू और प्रकाश, शहर से बहार वाले गोदामों और दूसरी कंस्ट्रक्शन को अपनी निगरानी में कार्यें और फिर बापू वहां पर रह कर मवेशी भी परचेस करे और वह पर जो कर्मचारी हों गए उन को सुपरवाइज़ करे… इसी तरह अगर प्रकाश राज़ी हो तो आस पास के गाँव से ट्रक पे अनाज उठाये और गोदाम तक लये… उस ने अपने बापू को बताया के दौलत पुर के आस पास 15 गांव हैं जहाँ से अनाज और स्पिकेस शहर ज़मींदार खुद लेकर आते हैं और वहां पर अनाज की बोली लगती हे और वहां पे मुंशी अपने मनपसंद बोपारी को नाजायज़ फ़ायदा देता हे और तमाम सौदे / ट्रेडिंग पहले से तय शुदा होती हे या दुसरे लफ़्ज़ों में कहें तो फिक्स होती हे… इस लिए इस बार वो छटा हे के ज़मींदारो से अनाज का सौदा डायरेक्ट उन के गाँव में जाकर करें इस तरह ज़मींदारो के ट्रांसपोर्ट का खर्चा भी बचे गए और मुंशी की बेईमानी भी ख़तम हो जये गई… गोविन्द ने अपने बाप से कहा के अगर वो राज़ी हो जयें तो वो और प्रकाश वहां मुलाज़िम नहे मालिक हों गए और इस तरह हमारी माली हालत भी कुछ बेहतर हो जये गई… गोविन्द ने बताया के लाला जी एक अचे और दयालु इंसान हैं हमें ज़रूर उन की सहयता करनी चाहिए…
बापू और प्रकाश ने एग्री कर लिया पर यह भी सवाल उठाया के अगर वो भी शहर में जा कर रहें गए तो माँ और ेषणा अकेले हो जयें गए…
गोविन्द ने उन को समझाया के कुछ दिनों की बात हे वहां पर कंस्ट्रक्शन अगर 10-15 दिन में हो जये तो माँ और ेषणा भी वह शिफ्ट हो सकते हैं… क्यों के वहां पर 4 कमरे और 2 वाशरूम्स बने गए… और उस पोरशन को अलग किया जा सकता हे फॅमिली के रहने के लिए…
बापू और प्रकाश ने एग्री कर लिया और कहा के कल सुबह वो ज़मींदार से बात कर के अगले रोज़ आ जयें गए शहर… गोविन्द ने उन को प्लाट का पूरा एड्रेस समझा दिया… और कहा के वो भी उन के साथ राब्ते में रहे गए…
उस के बाद गोविन्द ने अपने बाप और माँ को 50,000 दिए खर्च करने के लिए… उन को बताया के वो सिमर भैया से मिलने हवेली जा रहा हे… और निकल आया… उस वक़्त रत के 9 बज रहे थे… सिमर भैया तो बेथ चुके होंगे शराब पीने के लिए और मल्टी भाभी अपने कमरे में हों गई… अब बस गोविन्द को ख़ामोशी से उन के कमरे तक पोहंचना था…