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EPISODE – 66
और ऐसा hi हुआ… कुछ देर के बाद आशा ने सरेंडर करते हुए… अपनी छूट उस के मुंह पर रख दी… अब गोविन्द सब से पहले उस के छूट के लबो को छत्ता और फिर वह पे अपनी ज़बान से चोट मरने लगा…
ाः… ोोोोीी… मम्मा…. ोोोीी …. आए अह्ह्ह ा ा अझह्ह्ह
ासः की सांसे अब बेकाबू थी… वो अब जहटके खा रही थी और झटके कहते कहते झरने लगी… और उस ने अपनी छूट रख दी गोविन्द के मुंह पर…
और 69 पोजीशन में आगयी…
गोविन्द भी उस का सारा रास चाट गया…
कुछ देर तक आशा उस का लुंड मुंह में ले कर चूसती रही और गोविन्द उस की छूट छत्ता रहा और फिर आशा उठी…
गोविदं ने उस की आँखों में देखते हुए इशारा किया के उस को खोल दे मगर आशा ने इंकार करते हुए अब उस के लुंड पे अपनी छूट सेट कर दी…
और एक hi झटके में उस का पूरा लुंड ले लिया अंदर…
और खुद hi चीख मरी……. Oooooiiiiiiiiiiiii
लुंड सीधा जा टकराया था बचे दानी से….
कुछ देर वो यूँही बैठी रही….
फिर आहिस्ता से उस ने अपनी गांड हिलायी… और थोड़ा सा ऊपर उठी और फिर से नीचे हो कर पूरा लुंड लेलिया अंदर…
आशा अब बस एक इंच ऊपर को उठ कर लुंड को पूरी तरह से छूट के लबो से पकड़ती हुई रगड़ने लगी…
गोविन्द को ऐसा मज़ा पहले कभी नहीं आया था… वो चाहता था के नीचे से ढके लगाए मगर वो देख रहा था के आज आशा ने अपनी मर्ज़ी से पूरे खेल को एन्जॉय किया हे तो वो उस के दिन को ख़राब नहे कर सकता था… उस का प्यार और बढ़ गया था आशा के लिए जिस ने गोविन्द को अपना मानते हुए उस के साथ अपनी दिल की मस्ती पूरी की थी…
कुछ देर के बाद आशा अपनी पूरी रफ़्तार से ऊपर नीचे होने लगी… आधा लुंड बहार निकलती और फिर से उस को अंदर लेलेती…
गोविन्द को भी मज़ा आरहा था… उस ने अपनी आँख के इशारे से उस को करीब आने को कहा… आशा झुकी उस के ऊपर तो गोविन्द ने किश किया… और फिर से सीढ़ी हो गयी… आज प्यार में दीवानगी थी… क्कुह अधूरी खाव्हिशे तकमील प् रही थी…
अउ फिर आशा पूरा लुंड अंदर ही रखते हुए लेट गयी उस के ऊपर और अपने चुके मसलने लगी गोविन्द के सीने पर और साथ साथ सिर्फ गांड को हिलाते हुए छूट के दाने को रगड़ने लगी…
ाः… ूई… ममम… आह… आह… आह… मममम… ोोोीी…
अभी गोविन्द ये सोच hi रहा था के कब ख़तम होगा ये खेल… एक ज़ोर का झटका लिया आशा के जिस्म ने और फिर एक झटको की सीरीज लग गयी…
आशा की सांसे बेकाबू और आवाज़े बोहत वहशतनाक… ाः.. ममम… ghghh…hhhmmm… ऊऊह्ह्ह्हआ…
गोविन्द को उस का सारा रास अपने लुंड पर और अपनी टैंगो पर निकलता महसूस हो रहा था… क्या ग़ज़ब झरि थी वो…
और फिर से लेट गयी… ख़ामोशी से गोविन्द के सीने पर…
लुंड अब तक छूट के अंदर था… एकरा हुआ तन्ना हुआ… इस का काम अभी ख़तम नहीं हुआ था…
गोवंड… “मज़ा आया…??”
आशा… “हम्म्म… बोहत… तुम्हे…??”
गोविन्द… “नहीं…”
आशा… ये सुन कर… हार्ट से अपना सर उस के सीने उठाते हुए गोविन्द की तरफ देखा… “क्यों… इतना तो ाचा था… और तुम भी तो एन्जॉय कर रहे थे…”
गोविन्द… “यार वो तो ाचा था… बूत… मेरे हाथ जो लॉक्ड हे… और ये लुंड अब तक खरा हुआ हे…”
आशा… मुस्कुराते हुए… “हाथ तो फ़िलहाल लॉक्ड रहे गए… मगर हाँ… इस का कुछ करती हु…” ये कहते उस ने अपनी गांड ज़रा हिलायी… और खुद hi इस के मुंह से सिसकी निकल गयी…
और आहिस्ता से ऊपर होने लगी… और ऊपर होने से लुंड छूट से बहार निकलने लगा…
जब पूरा नीला तो गोविन्द ने देखा के लार की एक लम्बी तार सी बन गयी थी… वो हैरान हुआ के आशा का इतना पानी निकला हे आज…
वो उठी और उठ कर वाशरूम में चली गयी… शायद पी करने… 10 मिनट्स में वापिस आ कर उस की टैंगो में बैठते हुए लुंड को किश करने लगी… लौंद उस की छूट क ेरस से सना हुआ था मगर वो बरी कामुकता से लुंड को चूसने लगी… और साथ में देखती जा रही थी गोविन्द की आँखों में… गोविन्द ने लुत्फ़ और आनंद में अपना सर पिलो पे दबाया तो उस की नज़र गयी चाट पर लगे मिरर पर… तो उससे अपनी आँखों अपर यकीन नहीं हो रहा था के वो इतना कामुक मंज़र देख रहा हे… ऊपर नीचे नोने से और लुंड चूसने से आशा की गांड के दोनों पातर या चूतर साथ मिलते फिर अलग हो जाते…
वो सहन न कर सका… उस ने आशा को कहा… “जान अपनी गांड इधर करो मेरी तरफ…”
आशा ने आँख के इशारे से पुछा के क्यों…
गोविन्द ने दो उनलगियो का इशारा बनाते हुए कहा …
आशा ने मुस्कुराते हुए अपनी गांड उस के तरफ करते हुए फिर से 69 की पोजीशन में आ गयी… मगर अब की बार गोविन्द उस के चूतरो पर किश करने लगा… और ज़बान से चाटने लगा पहल एक चूतर फिर दूसरा चूतर… और फिर उस के दोनों चूतर खोल कर अपनी ज़बान से उस के गांड के छेद को चेरना लगा….
ोीीी… आअह्ह्ह… आशा अपनी सिसकिया न रोक सकीय… और फिर अचानक… आशा ने उस का लुंड चोर कर… उस की गोलिओ को मुंह में ले लिया और ची तरह से चूसने के बाद गोविन्द की गांड के सूराख पर अपनी ज़बान फेरी…
गोविन्द भी चटपटा गया…
अब दोनों एक दुसरे की गांड के सूराख को चाट रहे थे…
गोविन्द ने पूरी तरह से चूतर खोल कर हाथ से अंगूठो से छेद को ज़रा सा खोलते हुए अपनी ज़बान अंदर डालने की कोशिश की… ज़ाहिर हे के अंदर तो न दाल सका ज़बान मगर आशा ने बोहत hi ग़ज़ब का झटका खाया…. ोीी… मा… आआह…
आशा भी जैसे उस का पूरा मुक़ाबला कर रही थी… उस ने बोहत सारा थूक गोविन्द की गांड पे दाल कर अपनी एक ऊँगली उस के छेद में डालने लगी… अब गोविन्द भी …. ोोोुयी… mmmm…aaah…
आशा ने फिर से ज़बान भी डालने की कोशिश की…
दोनों एक दुसरे को लुभा रहे थे और सीखा रहे थे….
आशा ने फिर से अपनी ऊँगली दबाते हुए गोविन्द के छेद पर लुंड अपने मुंह में लेलिया ुर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी… जैसे होश खो बैठी हो….
गोविन्द भी जोश से गांड को जान से कुरदने लगा और अपना एक अंगूठे छूट के दाने को सहलाने लगा…
आआह …. ाअम्मम्म… ोीी… mmm….mmmmaaa…. आआह….
आशा भी अब मज़े में अपने मुंह के साथ सतह अपनी गांड भी हिलने लगी… जैसे गोविन्द को कह रही और ज़ोर ज़ोर से गांड छतो… छूट के डेन को रागरो….
आशा को ऐसा लगा रहा था जैसे उस की छूट फिर से पानी चोर्ने वाली हे… परमानंद के मारे वो लुंड की टोपी पर काटने लगी… गोविन्द भी पागल सा हो कर उस की छूट को काटने और चाटने लगा और फिर दोनों के जिस्म लरज़ने लगे… दोनों हिम्मत हारते हुए फिर से झरने लगे… इस बार दोनों ने हार का ऐलान एक साथ किया था…
कर्मा गूँज रहा था…. ाः… मममम… ोीोोीी… हहममम…
दोनों ने एक दुसरे का सारा मॉल पि लिया था…
फिर आशा सीढ़ी हुई और गोविन्द के होंटो पर प्यार करने लगी और लेट गयी उस के सीने पर सर रख के…
गोविन्द… “यार अब तो खोल दो…”
आशा… मुस्कुराते हुए उस की आँखों में देखते हुए… “ग़ुस्सा तो नहीं करो गए…”
गोविन्द… “करूँ गए यार… इतनी देर सा बंधा हुए हे तुम ने…”
अब जैसे hi देर और टाइम का ज़िकर किया गोविन्द ने तो दोनों की नज़रे सामने लगे वाल क्लॉक पर गयी… वो दोनों 7 बजे से ज़रा पहले यहाँ आये थे और अब 10 बज रहे थे… ये सारा खेल खेलते उन को 3 घंटे लग गए थे…
“ओह हो…” कहते हुए आशा उठी और बैग में से कीस निकल कर गोविन्द की हथकड़ी खोल ली और फिर उस की टंगे भी खोल दी…
गोविन्द ने उठ कर अपने जिस्म को कुछ स्ट्रेच किया और फिर पास खरी आशा को अपनी बांहो में लेकर किश करने लगा… कुछ देर यूँही किश करते रहे फिर दोनों वाशरूम में आ आगये और गोविन्द ने खरे खरे पेशाब किया तो आशा उस को देख कर हनसने लगी… जब गोविन्द ने पुछा क्या हे तो अपना सर को ना में हिलती शावर खोल कर जल्दी से नहाने लगी… गोविन्द भी उस के साथ खरा हो गया… देर हो चुकी थी मगर दोनों का दिल नहीं भरा था एक दुसरे से… इतने कामुक और धुआंधार चुदाई और सेक्स के बाद भी दोनों का मैं नहीं था एक दुसरे से अलग होने का… दोनों नाहा कर बहार निकले और कपड़े पहने… गोविन्द ने जूस निकला और खुद भी पिया ुर आशा को भी पिलाया… फिर जैसे आये थे वैसे hi निकले और गोविन्द ने ड्राप करदिया आशा को पार्क के पास और उस के जाते hi खुद भी घर पोहंच गया…
और ऐसा hi हुआ… कुछ देर के बाद आशा ने सरेंडर करते हुए… अपनी छूट उस के मुंह पर रख दी… अब गोविन्द सब से पहले उस के छूट के लबो को छत्ता और फिर वह पे अपनी ज़बान से चोट मरने लगा…
ाः… ोोोोीी… मम्मा…. ोोोीी …. आए अह्ह्ह ा ा अझह्ह्ह
ासः की सांसे अब बेकाबू थी… वो अब जहटके खा रही थी और झटके कहते कहते झरने लगी… और उस ने अपनी छूट रख दी गोविन्द के मुंह पर…
और 69 पोजीशन में आगयी…
गोविन्द भी उस का सारा रास चाट गया…
कुछ देर तक आशा उस का लुंड मुंह में ले कर चूसती रही और गोविन्द उस की छूट छत्ता रहा और फिर आशा उठी…
गोविदं ने उस की आँखों में देखते हुए इशारा किया के उस को खोल दे मगर आशा ने इंकार करते हुए अब उस के लुंड पे अपनी छूट सेट कर दी…
और एक hi झटके में उस का पूरा लुंड ले लिया अंदर…
और खुद hi चीख मरी……. Oooooiiiiiiiiiiiii
लुंड सीधा जा टकराया था बचे दानी से….
कुछ देर वो यूँही बैठी रही….
फिर आहिस्ता से उस ने अपनी गांड हिलायी… और थोड़ा सा ऊपर उठी और फिर से नीचे हो कर पूरा लुंड लेलिया अंदर…
आशा अब बस एक इंच ऊपर को उठ कर लुंड को पूरी तरह से छूट के लबो से पकड़ती हुई रगड़ने लगी…
गोविन्द को ऐसा मज़ा पहले कभी नहीं आया था… वो चाहता था के नीचे से ढके लगाए मगर वो देख रहा था के आज आशा ने अपनी मर्ज़ी से पूरे खेल को एन्जॉय किया हे तो वो उस के दिन को ख़राब नहे कर सकता था… उस का प्यार और बढ़ गया था आशा के लिए जिस ने गोविन्द को अपना मानते हुए उस के साथ अपनी दिल की मस्ती पूरी की थी…
कुछ देर के बाद आशा अपनी पूरी रफ़्तार से ऊपर नीचे होने लगी… आधा लुंड बहार निकलती और फिर से उस को अंदर लेलेती…
गोविन्द को भी मज़ा आरहा था… उस ने अपनी आँख के इशारे से उस को करीब आने को कहा… आशा झुकी उस के ऊपर तो गोविन्द ने किश किया… और फिर से सीढ़ी हो गयी… आज प्यार में दीवानगी थी… क्कुह अधूरी खाव्हिशे तकमील प् रही थी…
अउ फिर आशा पूरा लुंड अंदर ही रखते हुए लेट गयी उस के ऊपर और अपने चुके मसलने लगी गोविन्द के सीने पर और साथ साथ सिर्फ गांड को हिलाते हुए छूट के दाने को रगड़ने लगी…
ाः… ूई… ममम… आह… आह… आह… मममम… ोोोीी…
अभी गोविन्द ये सोच hi रहा था के कब ख़तम होगा ये खेल… एक ज़ोर का झटका लिया आशा के जिस्म ने और फिर एक झटको की सीरीज लग गयी…
आशा की सांसे बेकाबू और आवाज़े बोहत वहशतनाक… ाः.. ममम… ghghh…hhhmmm… ऊऊह्ह्ह्हआ…
गोविन्द को उस का सारा रास अपने लुंड पर और अपनी टैंगो पर निकलता महसूस हो रहा था… क्या ग़ज़ब झरि थी वो…
और फिर से लेट गयी… ख़ामोशी से गोविन्द के सीने पर…
लुंड अब तक छूट के अंदर था… एकरा हुआ तन्ना हुआ… इस का काम अभी ख़तम नहीं हुआ था…
गोवंड… “मज़ा आया…??”
आशा… “हम्म्म… बोहत… तुम्हे…??”
गोविन्द… “नहीं…”
आशा… ये सुन कर… हार्ट से अपना सर उस के सीने उठाते हुए गोविन्द की तरफ देखा… “क्यों… इतना तो ाचा था… और तुम भी तो एन्जॉय कर रहे थे…”
गोविन्द… “यार वो तो ाचा था… बूत… मेरे हाथ जो लॉक्ड हे… और ये लुंड अब तक खरा हुआ हे…”
आशा… मुस्कुराते हुए… “हाथ तो फ़िलहाल लॉक्ड रहे गए… मगर हाँ… इस का कुछ करती हु…” ये कहते उस ने अपनी गांड ज़रा हिलायी… और खुद hi इस के मुंह से सिसकी निकल गयी…
और आहिस्ता से ऊपर होने लगी… और ऊपर होने से लुंड छूट से बहार निकलने लगा…
जब पूरा नीला तो गोविन्द ने देखा के लार की एक लम्बी तार सी बन गयी थी… वो हैरान हुआ के आशा का इतना पानी निकला हे आज…
वो उठी और उठ कर वाशरूम में चली गयी… शायद पी करने… 10 मिनट्स में वापिस आ कर उस की टैंगो में बैठते हुए लुंड को किश करने लगी… लौंद उस की छूट क ेरस से सना हुआ था मगर वो बरी कामुकता से लुंड को चूसने लगी… और साथ में देखती जा रही थी गोविन्द की आँखों में… गोविन्द ने लुत्फ़ और आनंद में अपना सर पिलो पे दबाया तो उस की नज़र गयी चाट पर लगे मिरर पर… तो उससे अपनी आँखों अपर यकीन नहीं हो रहा था के वो इतना कामुक मंज़र देख रहा हे… ऊपर नीचे नोने से और लुंड चूसने से आशा की गांड के दोनों पातर या चूतर साथ मिलते फिर अलग हो जाते…
वो सहन न कर सका… उस ने आशा को कहा… “जान अपनी गांड इधर करो मेरी तरफ…”
आशा ने आँख के इशारे से पुछा के क्यों…
गोविन्द ने दो उनलगियो का इशारा बनाते हुए कहा …
आशा ने मुस्कुराते हुए अपनी गांड उस के तरफ करते हुए फिर से 69 की पोजीशन में आ गयी… मगर अब की बार गोविन्द उस के चूतरो पर किश करने लगा… और ज़बान से चाटने लगा पहल एक चूतर फिर दूसरा चूतर… और फिर उस के दोनों चूतर खोल कर अपनी ज़बान से उस के गांड के छेद को चेरना लगा….
ोीीी… आअह्ह्ह… आशा अपनी सिसकिया न रोक सकीय… और फिर अचानक… आशा ने उस का लुंड चोर कर… उस की गोलिओ को मुंह में ले लिया और ची तरह से चूसने के बाद गोविन्द की गांड के सूराख पर अपनी ज़बान फेरी…
गोविन्द भी चटपटा गया…
अब दोनों एक दुसरे की गांड के सूराख को चाट रहे थे…
गोविन्द ने पूरी तरह से चूतर खोल कर हाथ से अंगूठो से छेद को ज़रा सा खोलते हुए अपनी ज़बान अंदर डालने की कोशिश की… ज़ाहिर हे के अंदर तो न दाल सका ज़बान मगर आशा ने बोहत hi ग़ज़ब का झटका खाया…. ोीी… मा… आआह…
आशा भी जैसे उस का पूरा मुक़ाबला कर रही थी… उस ने बोहत सारा थूक गोविन्द की गांड पे दाल कर अपनी एक ऊँगली उस के छेद में डालने लगी… अब गोविन्द भी …. ोोोुयी… mmmm…aaah…
आशा ने फिर से ज़बान भी डालने की कोशिश की…
दोनों एक दुसरे को लुभा रहे थे और सीखा रहे थे….
आशा ने फिर से अपनी ऊँगली दबाते हुए गोविन्द के छेद पर लुंड अपने मुंह में लेलिया ुर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी… जैसे होश खो बैठी हो….
गोविन्द भी जोश से गांड को जान से कुरदने लगा और अपना एक अंगूठे छूट के दाने को सहलाने लगा…
आआह …. ाअम्मम्म… ोीी… mmm….mmmmaaa…. आआह….
आशा भी अब मज़े में अपने मुंह के साथ सतह अपनी गांड भी हिलने लगी… जैसे गोविन्द को कह रही और ज़ोर ज़ोर से गांड छतो… छूट के डेन को रागरो….
आशा को ऐसा लगा रहा था जैसे उस की छूट फिर से पानी चोर्ने वाली हे… परमानंद के मारे वो लुंड की टोपी पर काटने लगी… गोविन्द भी पागल सा हो कर उस की छूट को काटने और चाटने लगा और फिर दोनों के जिस्म लरज़ने लगे… दोनों हिम्मत हारते हुए फिर से झरने लगे… इस बार दोनों ने हार का ऐलान एक साथ किया था…
कर्मा गूँज रहा था…. ाः… मममम… ोीोोीी… हहममम…
दोनों ने एक दुसरे का सारा मॉल पि लिया था…
फिर आशा सीढ़ी हुई और गोविन्द के होंटो पर प्यार करने लगी और लेट गयी उस के सीने पर सर रख के…
गोविन्द… “यार अब तो खोल दो…”
आशा… मुस्कुराते हुए उस की आँखों में देखते हुए… “ग़ुस्सा तो नहीं करो गए…”
गोविन्द… “करूँ गए यार… इतनी देर सा बंधा हुए हे तुम ने…”
अब जैसे hi देर और टाइम का ज़िकर किया गोविन्द ने तो दोनों की नज़रे सामने लगे वाल क्लॉक पर गयी… वो दोनों 7 बजे से ज़रा पहले यहाँ आये थे और अब 10 बज रहे थे… ये सारा खेल खेलते उन को 3 घंटे लग गए थे…
“ओह हो…” कहते हुए आशा उठी और बैग में से कीस निकल कर गोविन्द की हथकड़ी खोल ली और फिर उस की टंगे भी खोल दी…
गोविन्द ने उठ कर अपने जिस्म को कुछ स्ट्रेच किया और फिर पास खरी आशा को अपनी बांहो में लेकर किश करने लगा… कुछ देर यूँही किश करते रहे फिर दोनों वाशरूम में आ आगये और गोविन्द ने खरे खरे पेशाब किया तो आशा उस को देख कर हनसने लगी… जब गोविन्द ने पुछा क्या हे तो अपना सर को ना में हिलती शावर खोल कर जल्दी से नहाने लगी… गोविन्द भी उस के साथ खरा हो गया… देर हो चुकी थी मगर दोनों का दिल नहीं भरा था एक दुसरे से… इतने कामुक और धुआंधार चुदाई और सेक्स के बाद भी दोनों का मैं नहीं था एक दुसरे से अलग होने का… दोनों नाहा कर बहार निकले और कपड़े पहने… गोविन्द ने जूस निकला और खुद भी पिया ुर आशा को भी पिलाया… फिर जैसे आये थे वैसे hi निकले और गोविन्द ने ड्राप करदिया आशा को पार्क के पास और उस के जाते hi खुद भी घर पोहंच गया…