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- Dec 5, 2013
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इकत्तीसवीं क़िस्त
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पूरी लाइफ का ढंग hi बदल कर रह गया था. घर का खुशगवार माहौल सोगवारी में बदल गया था. हमारा प्यार अब भी अनमोल था. पर सिवाए दर्द के अब कुछ और रंग नहीं देखने को मिल रहे थे जीवन में.
किन्ज़ा एपीआई, माहिरा एपीआई, सराह भाभी, नदीम भैया, दादा दादी सब के सब गहरे ग़म में डूबे जी रहे थे. एक मेरे दम से, मेरे अनमोल प्यार के चलते घर में रौनक थी. अम्मी जान के प्रेग्नेंट होने और पापा को यकीन की हद तक शक पद जाने से मई पापा से नज़रें चुराने पर मजबूर हो गया था. अंदाज़ा hi नहीं था, ज़िन्दगी में कभी कोई ऐसा टर्न भी आ सकता है.
दादा जान मुझसे मिले -- बाबू. तुम्हारे होते हुए इस घर में इतना सोग. इतना सन्नाटा. इतनी ख़ामोशी. यार बाबू, ऐसे तो मैं वक़्त से hi पहले hi मौत की आग़ोश में जा सोऊंगा
और मैं दादा जान की बात सुनकर तड़प उठा था. दादा जान से देर तक बातें हुई और मेरे अंदर का असली फिरोज जो बाबू बन चूका था, अंगड़ाई लेकर बेदार होने लगा. सच में मैं बहुत कुछ कर सकता था. बास पे डरपे बदलते हालातों ने मुझे चक्र कर रख दिए था.
दादा जान को तसली देने के बाद मई घर से निकल गया. मैं रवि किनारे चला गया. वहां एक जगा बेथ मैं सोचने लगा. कैसे सब फिरसे पहले जैसा कर डालूं. आसान नहीं था. पापा की जलती नज़रों का सामना कर पाना आसान नहीं था. एक बीटा होकर अपने बाप की प्रॉपर्टी पर हाथ डाला था मैंने. अम्मी जान के साथ बिना कुछ किये hi उन्हें प्रेग्नेंट कर डाला था. अंदाज़ा होता तो मई अपनी मणि अम्मी जान की फुद्दी में उंडेलता hi नहीं.
ऐसी कोई सोच, कोई डर तो अम्मी जान के दिल को भी नहीं था. होता तो वह मुझे रोक देती, या फिर फ़ौरन hi उठ कर मेरी मणि अपनी फुद्दी से निकल देती. या फिर कोई प्रेगनेंसी रोकने वाली टेबलेट खा ली लेती. कुछ भी और कर जाती. लेकिन ये सब होना था. सो हो गया था. अब जब सब हो गया था. तो ऐसे तो बात नहीं बनने वाली थी. ऐसे तो ज़िन्दगी नहीं गुजरने वाली थी. अभी तो अम्मी जान मेरे साथ रिलेशन पर दिल में दर्द लिए जी रही थी. फिर किन्ज़ा एपीआई, माहिरा एपीआई सराह भाभी सब की सब दिल पर रोग लेती हुई जीने पर मजबूर हो जाती
और मेरा हस्ता मुस्कुराता, गुलिस्तां के जैसे महकता हुआ घर कब्रिस्तान बन जाता. नहीं....... मई ये नहीं होने दे सकता था. ये सब जो भी हो रहा था. या हो गया था. गलत था भी तो मुझे कुछ तो ऐसा करना होगा. जिससे सब सेट हो जाए. खोई खुशियां वापिस लौट आएं
मैं देर तक रवि किनारे बैठा फ्रेश एयर खता रहा. गुज़रते पानी के ज़बरदस्त रेल को देखता रहा. बहुत कुछ मंद में आ रहा था. बहुत कुछ हटके इस बार करना पड़ने वाला था मुझे. कुछ ऐसा, जिसे सोच कर hi कोई भी कैंप उठता
पर मुझे अपने अनमोल प्यार से साड़ी खोई खुशियां वापिस लौटानी थी.
मई घर वापिस लौट रहा था. नदीम भाई की कॉल आई.
नदीम -- यार बाबू.. तुम तो ऐसे न थे.. तुम सब को सँभालने की बजाये सबके साथ मिल ग़मगीन लाइफ जीने लगे. कुछ करो बाबू..... अब घर आते हुए मुझे खौफ आने लगा है यार. घर का माहौल पहले जैसा बना दूँ. अब ऐसे माहौल में मैं और नहीं जी सकता यार.. ये अहसान कर दालु मुझपर. सब पर..
और मेरे अंदर एनर्जी लेवल बढ़ने लगा. जैसे शेर खुद को एक्टिव करने के लिए अपने बदन को झंझोड़ता है. मई भी अंदर से खुद को झंझोड़ता हुआ पुराने बाबू को ज़िंदा करने लगा. इस बार के बाबू के इरादे hi और थे.
मई घर लौट आया. पापा फैक्ट्री गए हुए थे. अम्मी जान लॉन में झूले पर लेती आँखों पर बाज़ू धरे हुए थी. उनका फेस ग़म के गहरे रंग में लोथड़ा दूर से hi मैंने जान लिए था
मई अम्मी जान के पास जा पोहंचा
अम्मी जान मेरा आया जान नहीं पायी. नाना के चले जाने से भी बड़ा ग़म पापा की नज़रों में गिरना था. गिरा हुआ तो मैं भी खुद को समझने लगा था. लेकिन अब नहीं. अब मैं सब कुछ बदल देने के लिए खुद को तैयार कर चूका था.
मई अम्मी जान के पास ग्रास पर hi बेथ गया.. अम्मी जान का हाथ थमा और अम्मी जान जो गहरी सोचों में थी. हड़बड़ाती हुई ऑंखें खोल गई. उफ्फ्फ अम्मी जान की आँखों में करब ो अज़िय्यत के गहरे रंग थे. मुझे देख कर भी अम्मी जान के चेहरे की पुराणी चमक लौट कर नहीं आई.
अम्मी जान मुझसे खफा नहीं थी.
अम्मी जान मरे लहजे में बोली -- बाबू!. क्या बात है
मई 2 महीनो के बाद पहली बार पुराने स्टाइल में मुस्कुराता हुआ अम्मी जान का हाथ थाम कर चुम गया तो अम्मी जान के चेहरे पर हैरत भरे तासरत उभर आये
पुराण बाबू देख कर हैरान थी
मई -- अम्मी जान हमारे अनमोल प्यार में बढ़ते हमारे क़दमों को जान कर हमने सब कुछ एक्सपेक्ट नहीं कर लिए था.
अम्मी जान अपने होंटो डेंटन में दबा गई. आँखों में करब कुछ और बढ़ गया. चुप रही
मई -- असल में अम्मी जान. तेज़ी से बदलते हालत ने हमें सोचने समझने के क़ाबिल नहीं छोड़ा था. वर्ण हर मसले का कोई न कोई हल ज़रूर होता है
अम्मी जान के चेहरे पर मेरे अंदाज़ और बात पर कोई ख़ुशी नहीं झलकी
अम्मी जान - तो तुम्हारे पास इस मसले का भी कोई हल है बाबू.
मई -- जी अम्मी जान
मेरे ऐसा बोलने पर भी अम्मी जान खुश नहीं हुई
मई -- क्या आप को ख़ुशी नहीं मिली पुराने बाबू को लौट ते देख कर
अम्मी जान - अब ज़िन्दगी में किसी और रंग की छह नहीं रही बाबू. मुझे अंदाज़ा नहीं था. बायत इस हद तक भी पोहंच सकती है. इस उम्र में प्रेगनेंसी.. वह भी तुम्हारी वजा से
अम्मी जान ऐसा बोलते हुए ज़रूर शर्मा जाती. लेकिन गहरे ग़म ो दुःख ने अम्मी जान की जैसे शर्म तक छीन ली थी. बास पापा की नज़रों को देख सर झुका जाया करती थी
मई -- क्या गलत हुआ अम्मी जान
अम्मी जान सिसक पड़ी -- पूछते हो क्या गलत हुआ.. सही भी क्या हुआ है बाबू. जो हो रहा था, गलत तो वह भी बहुत था. लेकिन दिल पागल समझना hi नहीं चाहता था. दिल तो अब भी बेक़रार हो रहा है तुम्हारे अनमोल प्यार को पाने के लिए. लेकिन माँ बनना, वह भी तुम्हारे बच्चे की. ऐसा मैं खवाब में भी नहीं सोच सकती थी बाबू. अपने hi बेटे के बच्चे की मा--
माँ इन्तेहाई करब से सिसकती हुई आंसू बहाने लगी थी.
मई उनके हाथ को चूमता हुआ बोलै -- जब सब कुछ hi गलत था तो फिर इतने से गलत की भी गुंजाइश को दिल और दिमाग में रखना चाहिए था अम्मी जान
अम्मी जान -- नहीं बाबू.. ये सही नहीं हुआ. ये मई सोच नहीं सकती थी. कर नहीं सकती थी.
मई -- लेकिन अब तो हो चुका अम्मी जान
अम्मी जान रोने लगी -- बहुत गलत हुआ बाबू
मई -- मई सब ठीक कर दूंगा अम्मी जान. अपने बाबू पर भरोसा कीजिये
अम्मी जान -- अब कुछ ठीक नहीं होगा. अब से एक एक सांस घुट घुट लेनी होगी. जिस शोहर के सामने हमेशा सर उठा कर जीती आई हों. अब उसी के सामने सर झुका कर जीना होगा. और ऐसे जिया नहीं जाएगा मुझसे. मुझे लगता है बाबू. अब मैं और ज़यादा नहीं जी पाऊँगी.
मई तड़पता हुआ अम्मी जान को अपने गले से लगा गया.. अम्मी जान मुझसे लिपट गई
मई -- नहीं अम्मी जान. आप मेरी जान हो. प्ल्ज़ ऐसा मत बोलिये. आप को इतने से ग हम में देख कर मई पल पल मर रहा हों. खुदा न करे आप को कुछ हो. फिर मैं ज़िंदा रह कर क्या करूँगा अम्मी जान
अम्मी जान रोटी हुई बोली -- अब बाबू तुमने भी मरने की बातें शुरू कर दी
मई -- चलिए अब नहीं करते हम दोनों ऐसी बातें. बास आप अपने बाबू पर पहले के जैसे भरोसा को ज़िंदा कीजिये
अम्मी जान -- मुमकिन नहीं होगा बाबू. तुम्हारे पापा के नॉलेज में सब आ चूका है. अब तुम कुछ नहीं कर सकते. उन्हें समझाया नहीं जा सकता. मर्द हैं वह. पठान हैं वह. ये भी शुक्र है हम दोनों को तेरे पापा ने शूट नहीं कर दिए. वर्ण वह ऐसे hi पठान हैं. बात का अंदाज़ा होते hi हम दोनों को बिना एक भी पल गंवाए शूट कर देते
मई -- सब पुराणी बातें हो गई अम्मी जान. कहा न. आप सब फिक्रें छोड़ दें. बस्स्स अपने बाबू पर भरोसा कीजिये
अम्मी जान -- खली भरोसे से क्या होगा बाबू. हालत का अपने कण्ट्रोल में आना भी ज़रूरी होता है. यहाँ तो मटर hi ऐसा है. कुछ भी मेरे तुम्हारे हाथ में अब नहीं रहा. और न hi कभी आएगा. हमारे हाथ hi नहीं रहे हैं बाबू
मई -- मई मायूस नहीं हुआ हों अम्मी जान. आप कैसे मायूस हो सकती हैं अम्मी जान
अम्मी जान -- ऐसा है तो बाबू--
अम्मी जान दोनों हाथ मेरे आगे जोड़ गई -- मुझे अब इस के शिव किसी और बात की परवा नहीं रही बाबू.. मेरा वक़ार मुझे वापिस मिल जाए. मैं सर झुका कर, तुम्हारे पापा की नज़रों में गिर कर नहीं जी सकती. रोज़ उलटी सीढ़ी सोचें आने लगती हैं. किसी दिन मैं ख़ामोशी से ऑंखें बंद कर जाउंगी.
अम्मी जान देर तक ऐसी hi बातें करती रही. और मैं तड़प रहा था. कैसे भी करके मैंने अम्मी जान को खुद पर पहले जैसा भरोसा करने पर तैयार कर hi लिए
अम्मी जान -- तब मई समझूंगी. तुम्हारे अनमोल प्यार ने मुझे फिरसे ज़िंदा कर दिए बाबू.. जितनी जल्द हो सके सब सही कर डोज. सब पहले जैसा कर दो.
मई अम्मी जान को छेड़ता हुआ बोलै -- वैसे अम्मी जान मेरे बेटे का नाम भी ज़रूर आप ने सोच रखा होगा
और अम्मी जान इस बार बुरी तरह से शर्मा गई.
बास मैं यही चाहता था. अम्मी जान का शर्माना साबित कर गया. अम्मी जान पुराणी अम्मी जान बनने के लिए राज़ी भी हैं और बहुत खुश भी.
पहले मुझे भी बड़ा अजीब लगा था. अम्मी जान मेरे hi बच्चे की माँ बनने जा रही थी. लेकिन अब मेरी बदलती सोच ने मुझे अनोखी ख़ुशी देनी शुरू कर दी थी. मेरी अम्मी जान मेरे बच्चे की अम्मा बनेंगी.. उफ्फ्फ्फ़ लाइफ तो और भी मस्त हो जाने वाली थी
बास एक बार पापा मेरे काबू में आ जाएँ
मई प्लान पर प्लान सोचने लगा. और एक अछूता और कमीनगी से भरा प्लान मुझे सूझ hi गया था. इधर मैं और अम्मी जान, मतलब माँ बेटे के बच्चे की माँ बनने जा रही थी. माँ बेटे के बीच फिजिकल रिलेशन्स का यकीन पापा को हो गया था.
एक इधर माँ बीटा, और अब दूसरी ऑर्डर दूसरे दो माँ और बीटा
अब दादी को पापा के साथ चक्कर में डालना पड़ेगा. ऐसा हो जाता है तो पापा खुद हमारी नज़रों में चोर बन जाते. फिर कभी भी हमें कुछ कह नहीं सकते थे. अब बास दादी को लाइन पर लाना था. और दादी मर जाती. पर पापा के साथ कुछ ऐसा वैसा करने की सोचती भी नहीं.
बहुत सोच विचार के बाद मैंने दादी को पापा के लिए मुन्तख़ब कर लिए था. बूढी दादी और नाराज़ पापा.. हाहाहा
वहहह मज़ा आने वाला था. पापड़ भी बेलने पड़ने वाले थे.
मई अम्मी जान को दिलासा देता हुआ दादी की तलाश में अंदर जाने लगा. अम्मी जान को मैंने कुछ नहीं बताया था. अम्मी जान को मई सरप्राइज देना चाहता था.
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पूरी लाइफ का ढंग hi बदल कर रह गया था. घर का खुशगवार माहौल सोगवारी में बदल गया था. हमारा प्यार अब भी अनमोल था. पर सिवाए दर्द के अब कुछ और रंग नहीं देखने को मिल रहे थे जीवन में.
किन्ज़ा एपीआई, माहिरा एपीआई, सराह भाभी, नदीम भैया, दादा दादी सब के सब गहरे ग़म में डूबे जी रहे थे. एक मेरे दम से, मेरे अनमोल प्यार के चलते घर में रौनक थी. अम्मी जान के प्रेग्नेंट होने और पापा को यकीन की हद तक शक पद जाने से मई पापा से नज़रें चुराने पर मजबूर हो गया था. अंदाज़ा hi नहीं था, ज़िन्दगी में कभी कोई ऐसा टर्न भी आ सकता है.
दादा जान मुझसे मिले -- बाबू. तुम्हारे होते हुए इस घर में इतना सोग. इतना सन्नाटा. इतनी ख़ामोशी. यार बाबू, ऐसे तो मैं वक़्त से hi पहले hi मौत की आग़ोश में जा सोऊंगा
और मैं दादा जान की बात सुनकर तड़प उठा था. दादा जान से देर तक बातें हुई और मेरे अंदर का असली फिरोज जो बाबू बन चूका था, अंगड़ाई लेकर बेदार होने लगा. सच में मैं बहुत कुछ कर सकता था. बास पे डरपे बदलते हालातों ने मुझे चक्र कर रख दिए था.
दादा जान को तसली देने के बाद मई घर से निकल गया. मैं रवि किनारे चला गया. वहां एक जगा बेथ मैं सोचने लगा. कैसे सब फिरसे पहले जैसा कर डालूं. आसान नहीं था. पापा की जलती नज़रों का सामना कर पाना आसान नहीं था. एक बीटा होकर अपने बाप की प्रॉपर्टी पर हाथ डाला था मैंने. अम्मी जान के साथ बिना कुछ किये hi उन्हें प्रेग्नेंट कर डाला था. अंदाज़ा होता तो मई अपनी मणि अम्मी जान की फुद्दी में उंडेलता hi नहीं.
ऐसी कोई सोच, कोई डर तो अम्मी जान के दिल को भी नहीं था. होता तो वह मुझे रोक देती, या फिर फ़ौरन hi उठ कर मेरी मणि अपनी फुद्दी से निकल देती. या फिर कोई प्रेगनेंसी रोकने वाली टेबलेट खा ली लेती. कुछ भी और कर जाती. लेकिन ये सब होना था. सो हो गया था. अब जब सब हो गया था. तो ऐसे तो बात नहीं बनने वाली थी. ऐसे तो ज़िन्दगी नहीं गुजरने वाली थी. अभी तो अम्मी जान मेरे साथ रिलेशन पर दिल में दर्द लिए जी रही थी. फिर किन्ज़ा एपीआई, माहिरा एपीआई सराह भाभी सब की सब दिल पर रोग लेती हुई जीने पर मजबूर हो जाती
और मेरा हस्ता मुस्कुराता, गुलिस्तां के जैसे महकता हुआ घर कब्रिस्तान बन जाता. नहीं....... मई ये नहीं होने दे सकता था. ये सब जो भी हो रहा था. या हो गया था. गलत था भी तो मुझे कुछ तो ऐसा करना होगा. जिससे सब सेट हो जाए. खोई खुशियां वापिस लौट आएं
मैं देर तक रवि किनारे बैठा फ्रेश एयर खता रहा. गुज़रते पानी के ज़बरदस्त रेल को देखता रहा. बहुत कुछ मंद में आ रहा था. बहुत कुछ हटके इस बार करना पड़ने वाला था मुझे. कुछ ऐसा, जिसे सोच कर hi कोई भी कैंप उठता
पर मुझे अपने अनमोल प्यार से साड़ी खोई खुशियां वापिस लौटानी थी.
मई घर वापिस लौट रहा था. नदीम भाई की कॉल आई.
नदीम -- यार बाबू.. तुम तो ऐसे न थे.. तुम सब को सँभालने की बजाये सबके साथ मिल ग़मगीन लाइफ जीने लगे. कुछ करो बाबू..... अब घर आते हुए मुझे खौफ आने लगा है यार. घर का माहौल पहले जैसा बना दूँ. अब ऐसे माहौल में मैं और नहीं जी सकता यार.. ये अहसान कर दालु मुझपर. सब पर..
और मेरे अंदर एनर्जी लेवल बढ़ने लगा. जैसे शेर खुद को एक्टिव करने के लिए अपने बदन को झंझोड़ता है. मई भी अंदर से खुद को झंझोड़ता हुआ पुराने बाबू को ज़िंदा करने लगा. इस बार के बाबू के इरादे hi और थे.
मई घर लौट आया. पापा फैक्ट्री गए हुए थे. अम्मी जान लॉन में झूले पर लेती आँखों पर बाज़ू धरे हुए थी. उनका फेस ग़म के गहरे रंग में लोथड़ा दूर से hi मैंने जान लिए था
मई अम्मी जान के पास जा पोहंचा
अम्मी जान मेरा आया जान नहीं पायी. नाना के चले जाने से भी बड़ा ग़म पापा की नज़रों में गिरना था. गिरा हुआ तो मैं भी खुद को समझने लगा था. लेकिन अब नहीं. अब मैं सब कुछ बदल देने के लिए खुद को तैयार कर चूका था.
मई अम्मी जान के पास ग्रास पर hi बेथ गया.. अम्मी जान का हाथ थमा और अम्मी जान जो गहरी सोचों में थी. हड़बड़ाती हुई ऑंखें खोल गई. उफ्फ्फ अम्मी जान की आँखों में करब ो अज़िय्यत के गहरे रंग थे. मुझे देख कर भी अम्मी जान के चेहरे की पुराणी चमक लौट कर नहीं आई.
अम्मी जान मुझसे खफा नहीं थी.
अम्मी जान मरे लहजे में बोली -- बाबू!. क्या बात है
मई 2 महीनो के बाद पहली बार पुराने स्टाइल में मुस्कुराता हुआ अम्मी जान का हाथ थाम कर चुम गया तो अम्मी जान के चेहरे पर हैरत भरे तासरत उभर आये
पुराण बाबू देख कर हैरान थी
मई -- अम्मी जान हमारे अनमोल प्यार में बढ़ते हमारे क़दमों को जान कर हमने सब कुछ एक्सपेक्ट नहीं कर लिए था.
अम्मी जान अपने होंटो डेंटन में दबा गई. आँखों में करब कुछ और बढ़ गया. चुप रही
मई -- असल में अम्मी जान. तेज़ी से बदलते हालत ने हमें सोचने समझने के क़ाबिल नहीं छोड़ा था. वर्ण हर मसले का कोई न कोई हल ज़रूर होता है
अम्मी जान के चेहरे पर मेरे अंदाज़ और बात पर कोई ख़ुशी नहीं झलकी
अम्मी जान - तो तुम्हारे पास इस मसले का भी कोई हल है बाबू.
मई -- जी अम्मी जान
मेरे ऐसा बोलने पर भी अम्मी जान खुश नहीं हुई
मई -- क्या आप को ख़ुशी नहीं मिली पुराने बाबू को लौट ते देख कर
अम्मी जान - अब ज़िन्दगी में किसी और रंग की छह नहीं रही बाबू. मुझे अंदाज़ा नहीं था. बायत इस हद तक भी पोहंच सकती है. इस उम्र में प्रेगनेंसी.. वह भी तुम्हारी वजा से
अम्मी जान ऐसा बोलते हुए ज़रूर शर्मा जाती. लेकिन गहरे ग़म ो दुःख ने अम्मी जान की जैसे शर्म तक छीन ली थी. बास पापा की नज़रों को देख सर झुका जाया करती थी
मई -- क्या गलत हुआ अम्मी जान
अम्मी जान सिसक पड़ी -- पूछते हो क्या गलत हुआ.. सही भी क्या हुआ है बाबू. जो हो रहा था, गलत तो वह भी बहुत था. लेकिन दिल पागल समझना hi नहीं चाहता था. दिल तो अब भी बेक़रार हो रहा है तुम्हारे अनमोल प्यार को पाने के लिए. लेकिन माँ बनना, वह भी तुम्हारे बच्चे की. ऐसा मैं खवाब में भी नहीं सोच सकती थी बाबू. अपने hi बेटे के बच्चे की मा--
माँ इन्तेहाई करब से सिसकती हुई आंसू बहाने लगी थी.
मई उनके हाथ को चूमता हुआ बोलै -- जब सब कुछ hi गलत था तो फिर इतने से गलत की भी गुंजाइश को दिल और दिमाग में रखना चाहिए था अम्मी जान
अम्मी जान -- नहीं बाबू.. ये सही नहीं हुआ. ये मई सोच नहीं सकती थी. कर नहीं सकती थी.
मई -- लेकिन अब तो हो चुका अम्मी जान
अम्मी जान रोने लगी -- बहुत गलत हुआ बाबू
मई -- मई सब ठीक कर दूंगा अम्मी जान. अपने बाबू पर भरोसा कीजिये
अम्मी जान -- अब कुछ ठीक नहीं होगा. अब से एक एक सांस घुट घुट लेनी होगी. जिस शोहर के सामने हमेशा सर उठा कर जीती आई हों. अब उसी के सामने सर झुका कर जीना होगा. और ऐसे जिया नहीं जाएगा मुझसे. मुझे लगता है बाबू. अब मैं और ज़यादा नहीं जी पाऊँगी.
मई तड़पता हुआ अम्मी जान को अपने गले से लगा गया.. अम्मी जान मुझसे लिपट गई
मई -- नहीं अम्मी जान. आप मेरी जान हो. प्ल्ज़ ऐसा मत बोलिये. आप को इतने से ग हम में देख कर मई पल पल मर रहा हों. खुदा न करे आप को कुछ हो. फिर मैं ज़िंदा रह कर क्या करूँगा अम्मी जान
अम्मी जान रोटी हुई बोली -- अब बाबू तुमने भी मरने की बातें शुरू कर दी
मई -- चलिए अब नहीं करते हम दोनों ऐसी बातें. बास आप अपने बाबू पर पहले के जैसे भरोसा को ज़िंदा कीजिये
अम्मी जान -- मुमकिन नहीं होगा बाबू. तुम्हारे पापा के नॉलेज में सब आ चूका है. अब तुम कुछ नहीं कर सकते. उन्हें समझाया नहीं जा सकता. मर्द हैं वह. पठान हैं वह. ये भी शुक्र है हम दोनों को तेरे पापा ने शूट नहीं कर दिए. वर्ण वह ऐसे hi पठान हैं. बात का अंदाज़ा होते hi हम दोनों को बिना एक भी पल गंवाए शूट कर देते
मई -- सब पुराणी बातें हो गई अम्मी जान. कहा न. आप सब फिक्रें छोड़ दें. बस्स्स अपने बाबू पर भरोसा कीजिये
अम्मी जान -- खली भरोसे से क्या होगा बाबू. हालत का अपने कण्ट्रोल में आना भी ज़रूरी होता है. यहाँ तो मटर hi ऐसा है. कुछ भी मेरे तुम्हारे हाथ में अब नहीं रहा. और न hi कभी आएगा. हमारे हाथ hi नहीं रहे हैं बाबू
मई -- मई मायूस नहीं हुआ हों अम्मी जान. आप कैसे मायूस हो सकती हैं अम्मी जान
अम्मी जान -- ऐसा है तो बाबू--
अम्मी जान दोनों हाथ मेरे आगे जोड़ गई -- मुझे अब इस के शिव किसी और बात की परवा नहीं रही बाबू.. मेरा वक़ार मुझे वापिस मिल जाए. मैं सर झुका कर, तुम्हारे पापा की नज़रों में गिर कर नहीं जी सकती. रोज़ उलटी सीढ़ी सोचें आने लगती हैं. किसी दिन मैं ख़ामोशी से ऑंखें बंद कर जाउंगी.
अम्मी जान देर तक ऐसी hi बातें करती रही. और मैं तड़प रहा था. कैसे भी करके मैंने अम्मी जान को खुद पर पहले जैसा भरोसा करने पर तैयार कर hi लिए
अम्मी जान -- तब मई समझूंगी. तुम्हारे अनमोल प्यार ने मुझे फिरसे ज़िंदा कर दिए बाबू.. जितनी जल्द हो सके सब सही कर डोज. सब पहले जैसा कर दो.
मई अम्मी जान को छेड़ता हुआ बोलै -- वैसे अम्मी जान मेरे बेटे का नाम भी ज़रूर आप ने सोच रखा होगा
और अम्मी जान इस बार बुरी तरह से शर्मा गई.
बास मैं यही चाहता था. अम्मी जान का शर्माना साबित कर गया. अम्मी जान पुराणी अम्मी जान बनने के लिए राज़ी भी हैं और बहुत खुश भी.
पहले मुझे भी बड़ा अजीब लगा था. अम्मी जान मेरे hi बच्चे की माँ बनने जा रही थी. लेकिन अब मेरी बदलती सोच ने मुझे अनोखी ख़ुशी देनी शुरू कर दी थी. मेरी अम्मी जान मेरे बच्चे की अम्मा बनेंगी.. उफ्फ्फ्फ़ लाइफ तो और भी मस्त हो जाने वाली थी
बास एक बार पापा मेरे काबू में आ जाएँ
मई प्लान पर प्लान सोचने लगा. और एक अछूता और कमीनगी से भरा प्लान मुझे सूझ hi गया था. इधर मैं और अम्मी जान, मतलब माँ बेटे के बच्चे की माँ बनने जा रही थी. माँ बेटे के बीच फिजिकल रिलेशन्स का यकीन पापा को हो गया था.
एक इधर माँ बीटा, और अब दूसरी ऑर्डर दूसरे दो माँ और बीटा
अब दादी को पापा के साथ चक्कर में डालना पड़ेगा. ऐसा हो जाता है तो पापा खुद हमारी नज़रों में चोर बन जाते. फिर कभी भी हमें कुछ कह नहीं सकते थे. अब बास दादी को लाइन पर लाना था. और दादी मर जाती. पर पापा के साथ कुछ ऐसा वैसा करने की सोचती भी नहीं.
बहुत सोच विचार के बाद मैंने दादी को पापा के लिए मुन्तख़ब कर लिए था. बूढी दादी और नाराज़ पापा.. हाहाहा
वहहह मज़ा आने वाला था. पापड़ भी बेलने पड़ने वाले थे.
मई अम्मी जान को दिलासा देता हुआ दादी की तलाश में अंदर जाने लगा. अम्मी जान को मैंने कुछ नहीं बताया था. अम्मी जान को मई सरप्राइज देना चाहता था.