तेईसवीं क़िस्त
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अम्मी जान.. गुलशन
अम्मी जान पापा को सुलाने के बाद मेरे कमरे में आ गई.. आते hi खुद से मेरे कमरे को
लॉक करती हुई मेरे साथ बीएड पर आ कर मेरे साथ लेट गई.. मुझे चूमने लगी..
अम्मी जान - हाँ तो मेरे बाबू ने मुझसे कोनसी बात करनी है.
अम्मी जान के बदन से बड़ी hi मसहूरकुन खुशबु आ रही थी. मई लम्बी सांस
खेंच खुशबु अपने अंदर उतरने लगा. खुशबु उतारता मई ऑंखें बंद कर गया था.
अम्मी जान मुझे मीठी स्माइल से देखने लगी. फिर मेरे गाल पर किश कर गयी
मैंने ऑंखें खोल देखा तो अम्मी जान मुस्कुरा रही थी. मुझे कुर्बान हो जाने वाली
निगाह से देख रही थी.
मई - अम्मी जान आप दुन्या में सबसे हसीं हाँ
अम्मी जान - अच्छा जी
मई - जी अम्मी जान
अम्मी जान - दुन्या का कोण बीटा ऐसा होगा. जिसे अपनी अम्मी जान दुन्या की सबसे हसीं
अम्मी जान नहीं दिखती.
मई अम्मी जान के गोर महकते गालों के बीच तीखी नक् को चूमता हुआ बोलै
मई - हर उस बेटे की अम्मी जान सबसे ज़यादा हसीं नहीं हाँ अम्मी जान. जिस अम्मी जान
का बीटा बाबू नहीं है
अम्मी जान है पड़ी - हेहेहे.. बाबू तुम भी न. ये तो अब कन्फर्म हो चूका है. दुन्या
में एक hi बाबू है
मई - रो फिर मान लीजिये.. आप hi दुन्या में सबसे ज़यादा हसीं हाँ
अम्मी जान हस्ती हुई - मान लिया. अब खुश
मई - नहीं
अम्मी जान मुझे घूर कर - वो क्या भला
मई - ख़ुशी इतनी सी बात पर भला थोड़ी न हासिल हो जाती है.
अम्मी जान - तो फिर कैसे हासिल होती है. मुझे बताओ. मई अपने बेटे को ख़ुशी कहीं
से भी इकठी करके तोहफे के तौर कर दे दूंगी
मई - तोहफे के तुअर कर
अम्मी जान - हेहेहे तो और कैसे दूँ
मई - वो तो एक अम्मी जान का फ़रीज़ा होगा न
अम्मी जान - चलो तो फिर मेरा बाबू अपनी अम्मी जान को खुद hi बता दे
मई - कोई भी अम्मी जान इतनी भोली तो नहीं होती. जो अपने बेटे की असली ख़ुशी से
अनजान हो
मेरी इस बात पर अम्मी जान के चेहरे पर शर्म की लाली आई.. फिर चेहरे की साडी
लाली आँखों में सिमट एक मीठी स्माइल में कन्वर्ट हो गई.
अम्मी जान - अम्मी जान का बाबू इतना प्यारा होने के साथ साथ गहरा भी हो. तो अम्मी जान
जो पुराने ख़यालात की मालिक है, अम्मी जान अगर आज के ज़माने की पूरी सूझ बूझ न
रखती हों तो कैसे भला वो ऐसा सब जान सकती हाँ.
मई मुस्कुरा पड़ा अम्मी जान के बात ताल जाने के खूबसूरत अंदाज़ पर
अम्मी जान भी मेरे hi जैसे अंदाज़ में स्माइल करने लगी. फिर आगे होकर मेरे गाल को
चुम गई
अम्मी जान - बाबू मेरे बाबू मेरे दिल के सुकून तुम लम्हा बा लम्हा और भी ज़यादा
प्यारे होते जा रहे हो.
मई - और आप
अम्मी जान - मई भी
मई - ाचा अम्मी जान पता है आप मुझे बहार कोण मिली थी
"मिली थी" पर अम्मी जान ने मुझे चौंक कर देखा
अम्मी जान - कहीं उन्ही दो लड़कियों में से तो कोई नहीं मिल गयी तुम्हे बाबू
मई -


जलन तो नहीं होने लगी आप को
अम्मी जान


हस्ती हुई मेरे गाल पर चुटकी काट गयी - मई भला क्यों जलने लगी
तेरे साथ किसी लड़की का सुनकर
मई - मैंने कब कहा मुझे कोई लड़की मिली थी
अम्मी जान हैरानी से - तोह ??
मई - वो मुझे आज एक और अम्मी जान मिल गयी थी

अम्मी जान हैरान रह गयी - एक और अम्मी जान
मई हस्ता हुआ - क्या ख्याल है. पापा आप से चीटिंग नहीं कर सकते. आखिर वो
पठान हाँ
मई अम्मी जान के पिछवाड़े को देख आगे बोलै - किसी और की भी पापा को इनसपिरे कर
सकती है.
अम्मी जान का पूरा मोह खुल गया - kyaaaaaaaaaaaa
मई - दिल किसी पर आये तो बाँदा सबर कर लेता है अम्मी जान. पर पठानों को एक hi
चीज़ साडी दुन्या भुला सकती है. और वो है गाआआआ----
अम्मी जान झट से मेरे मोह पर हाथ रख मेरा मोह करती हुई बोली - बेशरम.. अपनी
अम्मी जान से बेहूदा बात करता है.
कमल की अम्मी जान थी मेरी. ज़रा भी गुसा नहीं आया मेरी बात पर.. शर्म की लाली
उनके गोर गालों पर फिरसे बढ़ गई. आँखों में भी बढ़ गई. कानों पर भी बढ़
गई.
मई अम्मी जान को सीधा करता अपनी जगा लेता हुआ अम्मी जान का चेहरा पकड़ पहले बरी
बरी दोनों गाल चुम गया. फिर अम्मी जान के माथे को, फिर दोनों आँखों को बरी बरी
चूमा, फिर अम्मी जान की नक् को. आखिर में मैंने अम्मी जान के कण को मोह में ले लिया.
ऊपर से hi ले सका. नीचे तो अम्मी जान ने कांटे पहने हुए थे.
मई कानो अच्छे से चूस hi गया
अम्मी जान की शर्म से सांस भरी हुई. लेकिन वो खुद पर काबू बनती हुई बोली
अम्मी जान - बाबू ये क्या. भला कण भी कोई चूमता है.
मई - मई बाबू हों न. मेरा प्यार अनमोल है न. मई कुछ भी कर सकता हों. कहीं भी
चुम सकता हों. क्यों मैंने सही कहा न
अम्मी जान हस्ती हुई - हाँ बाबू तुम बाबू हो. तुम्हारा प्यार अनमोल है. तुम कुछ भी कर
सकते हो. तुम मुझे कहीं भी चुम सकते हो. अब खुश
मई - अम्मी जान यू अरे ग्रेट. तो आखिर आप ने मेरे दिल की सदा सुन hi ली
अम्मी जान घबरा कर - kk--kaise सदा बाबू
मई -



आप हकला क्यों रही हाँ अम्मी जान. आपने hi तो कहा है. मई कुछ भी कर
सकता हों. कहीं भी आप को चुम सकता हों. थैंक गॉड जो आप ने मुझे परमिशन दे
दी. वर्ण तो मई समझ रहा था.. नजाने मुझे कितने पापड़ बेलने पड़ेंगे
अम्मी जान के चेहरे पर एक रंग आने लगा, दूसरा जाने लगा.
पहले hi अम्मी जान के माथे से माथा जोड़ मई अम्मी जान के मोह से बहुत कुछ बुलवा
चूका था. फिर बाद में मैंने कोई ऐसी बात नहीं करि थी. शायद अम्मी जान भूल गई
थी. शायद उनके ख्याल में ये रहा होगा. मई अभी ऐसी कोई बात नहीं करूँगा.
हकलाना तो बनता hi था.
फिर मई हसने लगा. अम्मी जान की हालत देख मुझे हसी आ गई थी
अम्मी जान मेरी हसी सुन मुझे घूरने लगी.. एक लम्बी सांस लेने के बाद मोह के रस्ते
छोड़ती हुई मुझे सीधा लिटा कर मेरे सीने पर एक हाथ रख भार डालती हुई बोली
अम्मी जान - बाबू के बच्चे. मुझे लगा तो एक hi जस्ट में--
मई -


क्या एक hi जस्ट में..


बताइये न क्या एक hi जस्ट में



अम्मी जान रोथ गयी.. ऐसे hi मेरे सीने पर हाथ रख मुझे घूरती हुई नज़रें फेर
गई और बोली - जाओ बाबू के बच्चे मई तुमसे बात नहीं करती.
अम्मी जान को मेरा अनमोल प्यार ऐसा बहाने लगा था. अम्मी जान एक अम्मी जान से एक बेस्ट
फ्रेंड एक माशूका बनकर सरे नखरे साडी अदाएं दिखने लग पड़ी थी.
अम्मी जान मेरे प्यार की तरह दिन बा दिन और भी पायरी होती जा रही थी. और भी
हसीं होती जा रही थी. असल में जो कोई दिल के बहुत ज़यादा करीब आ जाये. दूसरा
फारद उसी के संग hi ऐसे खुला करता है. उसकी साडी अदाएं सरे अंदाज़ उसके अंदर से
बहार निकल ज़ाहिर होना शुरू हो जाते हाँ.
मई अम्मी जान को कमर से पकड़ अपने ऊपर कर गया. अम्मी जान पूरी तरह मेरे ऊपर
थी. अम्मी जान की फुद्दी मेरे लुंड पर थी. लेकिन लुंड अभी शांत था. बहुत शांत.
अम्मी जान वैसे hi रूठी हुई मेरी आँखों से ऑंखें फेरे हुए थी.
मई अम्मी जान के चेहरे को चूमने लगा. अम्मी जान एक नखरीली और नाराज़ माशूका की
तरह अपने चेहरे साइड करती मेरे होंटो से हटा रही थी
अम्मी जान - न कर मुंडिया तू देख नहीं रहा मई रूठी हुई हों तुझसे
मई - वही तो कर रहा हों. जो माशूका के नाराज़ होने पर उसका आशिक़ करता है. मई
मन रहा हों अम्मी जान आप को
अम्मी जान ने मुझे घूरा - माशूका ?. कोण ?. क्या तू मुझे माशूका कह रहा है
मई राइट साइड मिरर में अम्मी जान को देखता हुआ - नहीं मई तो उसे कह रहा हों.
अम्मी जान ने झट उधर देखा. फिर तेज़ी से सर घुमा कर मेरी आँखों में देखा और
है पड़ी
अम्मी जान - उधर भी मई hi हों
फिर सीरियस होकर बोली - तू मुझसे कुछ ज़यादा hi छेड़ कहानी नहीं कर रहा है
मई - माशूका दिल से राज़ी हो. उसे छेड़ कहानी पर मज़ा भी आता हो तो माशूक़
बेचारे की ये ड्यूटी होती है न. उसका दिल न भी करे तो भी वो उसे अपनी ड्यूटी
निभानी hi पड़ती हुई.. k**da किसी की माशूका तो दे.. लेकिन ऐसी माशूका
अम्मी जान - क्या मतलब.. मई क्या अच्छी माशूका नहीं हों.
मई है पड़ा - ो लवली अम्मी जान. आप मान गई. आप मेरी माशूका हो
अम्मी जान चौंकती हुई अपने लफ़्ज़ों पर धयान देने लगी. फिर मुझे देख हसने लगी
अम्मी जान - मई भी तुझसे थोड़ी सी मस्ती कर रही थी. भला एक अम्मी जान अपने बाबू
जैसे बेटे की माशूक़ा बन भी कैसे सकती है
मई - वैसे अम्मी जान. आप कुछ ज़यादा hi हेअल्थी नहीं हो गई. मेरा तो सीना hi डाब
गया है. साँस लेने में दुश्वारी होने लगी है
अम्मी जान ने झट अपने गरेबान में देखा.. उनके मोठे मुम्मे दबे हुए थे मेरे सीने
पर
अम्मी जान मुझे घूरने लगी. और मई शरीफ बच्चा बन साइड देखने लगा
अम्मी जान ने मेरी नक् अपने डेंटन में भर ली. हलके से काट कर बोली - पीटूँगी तुझे
मई बाबू के बच्चे
मई - जब मई बच्चा था तब भी ये भरी hi थे.. और मेरी प्रॉपर्टी हुआ करते थे
अम्मी जान - अब तो बच्चे नहीं हो न.. अब क्यों उधर धयान दिए तुमने
मई - किधर ध्यान दी मैंने अम्मी जान
अम्मी जान मुझे घूरने लगी - तुम सब समझ रहे हो बाबू
मई - क्या समझ रहा हों अम्मी जान. मई तो शरीफ बच्चा हों. भोला बच्चा हों.
मुझे कहाँ ऐसी बातों की समझ है
अम्मी जान को हसी आने लगी. लेकिन वो अपने दोनों होंठ अपने डेंटन में दबा कर अपनी
हस्ती रोकती हुई मेरी आँखों में घूरने लगी. मई हसने लगा.. अम्मी जान अपनी हसी को
काबू में करने की कोशिश में लगी रही
नाकाम होने लगी. तो झट से मेरे एक गाल पर दांत गाढ़ गई हलके से प्यार से
फिर जब अम्मी जान ने मेरे दन्त छोड़े तो उनकी हसी पर उनका पूरा पूरा कण्ट्रोल बन
चूका था.
अम्मी जान - कोण मिली थी तुम्हे आज बहार
मई - बताया तो था अम्मी जान मिली थी. आप hi की तरह हसीं
अम्मी जान ने घूरा - मेरी hi तरह
मई - आप hi की तरह पाकीज़ा चेहरे वाली
अम्मी जान - मेरी जितनी पाकीज़गी उनके चेहरे पर थी
मई - बातों में शहद के जितनी मिठास
अम्मी जान हैरान हुई - मुझसे भी ज़यादा मीठा बोलती हाँ वो
मई - उनका रोशन चेहरा, उनका बातें करना का अंदाज़, उनकी आँखों में मेरे लिए प्यार
बेशुमार



कुछ भी तो आप से मुख्तलिफ नहीं था अम्मी जान. कुछ चेंज होगा तो
फ्यूचर में पता चलेगा
अम्मी जान - भला वो कैसे पता चलेगा तुझे
मई - उनके माथे से माथा जोड़, उनके अंदर की बातें जान कर, उनके साथ भी अनमोल
प्यार की शुरुआत करके, फिर उनके साथ भी वही साडी बातें जो मैंने उस दिन आपके
साथ कारण थी
अम्मी जान ने मेरे होंटो पर हाथ रख दिए - बास बास अब वापिस आ जा.. खुली आँखों
से खवाब नहीं देखते हाँ बाबू.. बनाने वाले ने मुझे एक hi बना कर भेजा था.
मेरी कोई जुड़वां नहीं है मेरे बच्चे..
मई - हो भी नहीं सकती.
फिर मई ज़यादा न अम्मी जान को परेशान करते हुए मोबाइल निकल आज मिलने वाली फूल
शॉप वाली आंटी से पहले खुद बात करने के बाद अम्मी जान से उनकी बात करवाने लगा.
अम्मी जान मेरे ऊपर hi रहती हुई उनसे बात करने लगी.
जब तक अम्मी जान उनसे बात कर रही थी. मई अम्मी जान को परेशान नहीं करने वाला
था... ये खिलाफ इ तहज़ीब भी होता और मेरी अम्मी जान की शान में गुस्ताखी के साथ
साथ उनकी इज़्ज़त के लिए गलत होता.
इस बार मई एक लायक फयक और सुलझा हुआ बच्चा बन गया था..
अम्मी जान पहले हैरानी से फिर बेपनाह ख़ुशी के साथ उनसे बातें करने लगी...
और मई अम्मी जान को देखने और सुनने लगा.
कुछ मिनट की बात चीत के बाद मैंने एक बार फिरसे आंटी से बात करि और गूडनिघत
बोल कर कॉल एन्ड कर दी.
अम्मी जान - बहुत पायरी और सुलझी हुई हाँ तेरी दूसरी अम्मी जान





मई भी हसने लगा


अम्मी जान - वैसे मई कुछ समझ नहीं पाई हों बाबू.. उन्हों ने क्यों तुझसे रोड पर
बात करि. और नंबर भी एक्सचेंज कर लिए.
मई स्माइल करता हुआ - दो दो बेटियों की अम्मी जान हाँ आप अम्मी जान.. किन्ज़ा एपीआई और
माहिरा एपीआई के लिए रिश्ते की बात आगे बधाई जा सकती है. अच्छी फॅमिली है. फ्यूचर
में काम आ सकती है. वैसे तो जोड़े ऊपर वाला बनता है.. पर कुछ ज़िम्मेदारियाँ
हमारी भी होती हाँ.. कुछ कहा नहीं जा सकता है.. क्या पता आने वाला वक़्त क्या
कुछ ले आये.
अम्मी जान मुझे इस बार हैरतों की इन्तहा के साथ देख रही थी.