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आठवीं क़िस्त
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मैंने दूर नॉक किया. अंदर से भाभी बोली
भाभी - दरवाज़ा खुला है.
ये इशारा था दूर नॉक करने वाला अंदर दखल हो सकता है. और मई दरवाज़ा खोल अंदर दखल हो गया. भाभी बीएड पर तक लगाए बैठी हथु में नावेल पकडे हुए थी. मुझे देख एक बार तो भाभी का मोह हैरत से खुल गया.. फिर नावेल साइड रखती हुई बोली
भाभी - तुम नहीं गए बारिश में नहाने
मई - आप के बिना बारिश में नहाने को दिल नहीं मन
भाभी - क्यों मेरा तुम्हारा तुम्हारे दिल का और बारिश का क्या कनेक्शन है
मई बीएड के करीब चेयर घसीट कर उसपर बैठता हुआ बोलै - बारिश हम मर्दों को इतनी पसंद नहीं आती जितनी आप औरतों को. भाभी जी मानिये न मानिये आप का दिल उदास है. कोई परेशानी ऐसी है. जिसने बारिश के मज़े को भी फीका बना दिया
भाभी अपने माथे पर हाथ मारती हुई बोली - बाबा तुम तो एक hi बात के पीछे hi पद गए हो. कहा न मुझे कोई परेशानी नहीं है
मई - ऐसी बात है तो फिर चलिए मेरे साथ और बारिश का लुत्फ़ उठाइये
भाभी - नहीं.. मेरा मूड नहीं है बारिश में भीगने का भी.. नहाना तो दूर की बात है
मई - मई मूड बना दूंगा.. आप उठिये.. नहीं उठना है तो फिर आप अपनी परेशानी मुझे बता दीजिये
भाभी मुझे घूर कर देखती रही.. फिर एक सांस लेकर छोड़ती हुई बीएड से उत्तरी और बोली
भाभी - तुम कितने ज़िद्दी हो फिरोज.. चलो मई चलती हों तुम्हारे साथ छत.. मई भीगोंगि.. बीमार पद गई तो फिर अफ़सोस मत करना
मई भी उठ चूका था. भाभी का हाथ थम कर बोलै - मेरी भाभी इतनी भी नाज़ुक नहीं हाँ.. मुझे यकीन है.. आप को कुछ नहीं होगा
भाभी - तुम और तुम्हारा यकीन.. अब तो बारिश में भीगना hi पड़ेगा.. फिर चाहे मुझे ठण्ड लगे या सर दर्द हो जाए.. बुखार हो या कुछ और.. अब मई नाहा कर दिखाऊँगी
मई भाभी के साथ छत पर जा पोहंचा. हम दोनों को देख माहिरा एपीआई और किन्ज़ा एपीआई दोनों भाभी को घूरने लगी.. फिर मोह टेढ़ा करती नाराज़गी जताने लगी
माहिरा - भाभी मैंने कहा तब आपने इंकार कर दिए.. अब बाबू ने कहा तो आप मान गई. क्या हम इसका ये मतलब समझें. हमारी वैल्यू आपकी नज़र में बाबू से काम है
भाभी तेज़ी से बोली - अरे नहीं नहीं. वो तो फिरोज ने ज़िद्द पकड़ ली थी.. मैंने मन भी किया.. कहा बीमार पद जाउंगी.. लेकिन ये नहीं मन. बड़ा ज़िद्दी है
किन्ज़ा - क्या आप से ज़िद्द करके कोई भी बात मनवाई जा सकती ह
भाभी बारिश में भीग चुकी थी. बारिश ज़यादा तेज़ नहीं थी. हलकी भी नहीं थी. थोड़ी सी hi देर में मई और भाभी दोनों पूरी तरह भीग गए. भाभी दोनों बाहें पहला कर अपना चेहरा ऊपर उठा गई.. मई दिल थाम कर रह गया.. कितने खुश नसीब थे बारिश के क़तरे.. भाभी के इतने हसीं चेहरे को चूमते हुए नीचे भाभी के गले से होते हुए भाभी के कपड़ो में उतर रहे थे.. वहां जहाँ दुन्या के दो अनमोल ख़ज़ाने छुपे थे.. वहां जहाँ की खुशबु दुन्या की मस्त कर देने वाली खुशबुओं से बेहतर थी. वहां से होते हुए फिर नीचे वहां से भाभी की बंद मोह वाली केव को चूमते हुए नीचे गिर रहे थे.. uffffffffff... काश मई बारिश का कोई कटरा होता.. और भाभी के हसीं जिस्म के नशेब ो फ़राज़ को पूरी तरह से जाना लेता.. भाभी की लम्बी टांगों बीच गुलाबी लबों वाली घर जो यकीनन हज़ारों शराबों से बानी कॉकटेल से भी बढ़कर नशा अवर थी. वहां से गुज़रता हुआ घर के मोह को चुम कर टांगों को चूमता हुआ नीचे बाह जाता.
किन्ज़ा एपीआई की बात के जवाब में भाभी मोह ऊपर उठाये हुए बोली - मई बारिश में नहाने आ hi गई हों तो बातों के जवाब बाद में दूंगी.. बीमार पड़ना मेरी किस्मत में है भी तो मई इस वक़्त कुछ और नहीं सोचूंगी..
फिर भाभी ने मुझे देखा. मई भाभी के गोर भीगे गाल ताड़ रहा था..
भाभी - मुझे क्यों घूर रहे हो तुम.. तुमने कहा था न कमरे में.. तुम मर्दों की निस्बत हम लड़कियों को बारिश ज़यादा पसंद है.. तो मई कहती हों हाँ... मुझे बारिश से इश्क़ है.. बारिश जब भी बरसती है मई बड़े शौक के साथ नहाया करती हों.. ाचा किया जो तुम मुझे छत पर ले आये फिरोज..
माहिरा एपीआई मूड में आती थोड़ी दूर कड़ी होकर बारिश के मज़े लेने लगी.. भाभी आगे बढ़कर माहिरा एपीआई को पीछे से हुग कर गई... मई और किन्ज़ा एपीआई दोनों भाभी और माहिरा एपीआई को देखने लगे
मई तो बारिश में भीग रही अपनी दोनों बहनो और भाभी को मस्त नज़रों से देखने लगा.. इस बार की बारिश मेरी बदल चुकी सोचों में पहली आई थी... आज बारिश में नहाने और तीनो तितलियों को देखने में अलग hi मज़ा मिल रहा था.. तीनो की ब्रा नज़र आ रही थी.. गोर बदन जितने दिख सक्के थे. दिखाई दे रहे थे. भाभी ने ब्लैक ड्रेस पहन रखा था. फिर भी उसके जिस्म की झलक साफ़ पता चल रही थी. किन्ज़ा एपीआई और माहिरा एपीआई मेरे सामने खुल कर नहाया करती थी बारिश में.. उनकी ब्रा घुटनो से नीचे का पूरा गोरा गोरा जिस्म साफ़ दिखाई दे रहा था..
फिर किन्ज़ा एपीआई ने जैसे मेरी नज़रों को भटकता हुआ देख लिए.. मेरे करीब आ कर बोली
किन्ज़ा - ये तुम टुकर टुकर क्या देख रहे हो
मई किन्ज़ा एपीआई को देख मुस्कुरा पड़ा.. यहाँ मई कंफ्यूज होता तो दिल का चोर पकड़ा जाता.. लेकिन मैं तो पहले से hi सब सोच चूका tha.iradon का कमज़ोर नहीं था मई
मई - जो भी देख रहा हों.. आप मेरी आँखों से सब देख नहीं पा रही हाँ क्या ??
किन्ज़ा एपीआई ने मुझे गहरी नज़र से देखा. फिर बोली
किन्ज़ा - देखा हम बहने और भाभी तुमपर कितना ट्रस्ट करती हाँ..
मई - क्या मई ट्रस्ट करने के काबिल नहीं हों
किन्ज़ा एपीआई ने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया - तुम तो हम सब की जान हो
मई - हाँ एपीआई.. मई आप सब की और आप सब मेरी जान हाँ. एपीआई ये बात कभी भूलियेगा.. बचपन से हम ऐसी सैंकड़ों बारिशों में भीगते आ रहे हाँ.. और---
फिर रुक कर बोलै - आगे की बात आप कहे बिना hi समझ लें तो ाचा है
किन्ज़ा एपीआई मुझे बेशर्मों की न बोल कर इशारे में बात समझने वाली बात पर मुस्कुरा पड़ी
किन्ज़ा - बाबू तुम बहुत अच्छे बहुत प्यारे हो
मई - एहि भरोसा कायम रखना एपीआई.. मैंने कसम खाई है.. आप सब को इतना प्यार दूंगा. कोई भाई अपनी बहन को दे सका हो.. बास अपने दिल और आँखों में मेरे लिए फर्क न आने देना.. बाकि सब कुछ क़ुबूल है
माहिरा और भाभी पलट कर हमें देखती हुई एक साथ बोली - तुम दोनों क्या खुसर फुसर कर रहे हो
मई - आप दोनों क्या खुसर फुसर कर रही थी
माहिरा एपीआई - ये हम गर्ल्स के बीच की बातें हाँ मुंडिया
मई - यहाँ भी कुछ ऐसा hi मटर है
भाभी - हेहेहे... मतलब कल जो तुमने कहा.. वो सच कहा था
मई भी हस्ता हुआ बोलै - हाँ उसे सच hi समझिये
माहिरा - तो क्याआआ मई अपना मेकअप बॉक्स तैयार रखूं
मई - आप को पूछने की ज़रूरत hi नहीं है..
मैंने किन्ज़ा एपीआई के सर पर हाथ रख दिया.. फिर बोलै - एपीआई की कसम... मई आप के दिल की ख़ुशी के लिए अपणु की ख़ुशी के लिए कुछ भी कर जाऊँगा.. खास भाभी और अपनी बहनो के लिए कुछ भी.. ये फिरोज हर हद से गुज़र जाएगा...
मैंने खास भाभी को देख कर बोलै था.. भाभी चौंक कर मुझे देखने लगी थी.. जैसे मेरी बात को टोल रही हों....
माहिरा - फिर तो मज़ा आएगा
किन्ज़ा एपीआई के सर पर मेरा हाथ अभी भी था... वो मेरा हाथ पकड़ अपने सीने के साथ लगा कर बोली
किन्ज़ा - बाबू.. तुमने मेरी कसम खाई... मेरी कसम खा कर तुमने लड़के होकर लड़की का मेकअप कर लोगे..
किन्ज़ा एपीआई बड़ी हैरान हुई थी
मई - हाँ एपीआई.. मैं खुद को बदल चूका हों. और भी बदलना चाहता हों.. एपीआई आज हमारे मुल्क में कितने एक्टर हाँ.. जो पैसों के लिए मर्द से औरत बन जाया करते हाँ...
माहिरा एपीआई और भाभी करीब ा कर मेरी बात सुनने लगी
मई - क्या वो एक्टिंग करते हुए मर्द से औरत बनकर हमेशा के लिए लोगो की नज़रों से गिर जाते है.. नहीं.. जो जितना ाचा एक्ट करता है.. उसे उतनी hi ज़यादा इज़्ज़त दी जाती है.. नाम शोहरत में कई गुना इज़ाफ़ा हो जाता है.. मई तो आप सब से प्यार इन्तहा की हद तक करना चाहता हों.. आप सब की ख़ुशी के लिए क्या इतना सा भी नहीं कर सकता... नहीं एपीआई.. नहीं भाभी... ये तो कुछ भी नहीं.....
फिर मैंने फ़िल्मी स्टाइल मारने का सोच लिया.. ऐसे hi स्टाइल की तो लड़कियां फैन हुआ करती हाँ... जो मैंने करनी की सोची थी.. वैसा करने के बाद एक अलग hi तमाशा बनता.. और क्या खूब तमाशा बनता..
मई बात अधूरी छोड़ कर सब से अलग होकर कोठी की छत की दीवार जो 5फट ऊँची थी.. उसपर चढ़ गया..
मई तीनो को देख बोलै - मई आप सब के लिए जान दे भी सकता हों.. कोई शक हो तो मई अभी कूद-------
भाभी का मोह खुल गया.. ऑंखें बड़ी बड़ी हो गई.. रंग उड़ गया..
किन्ज़ा एपीआई और माहिरा एपीआई दोनों ज़ोर से चीख पड़ी
किन्ज़ा - नाहीईई.. नहीं नहीं बाबू... तुझे मेरी कसम से नीचे उतर आ.. देख दीवार पर पानी है.. तू स्लिप हो जाए... गिर जाएगा..
माहिरा - देख बाबू तेरा ऐसा मज़ाक मुझे सख्त न पसंद है..
मैंने ज़यादा परेशां करना मुनासिब नहीं समझा.. और नीचे उतर आया.. मेरे नीचे उतारते hi तीनो भाग कर मेरे करीब आयी.. और फिर मेरे गालों पर ज़िन्दगी में पहली बार दो चांटे पड़े.. एक किन्ज़ा एपीआई का दूसरा माहिरा एपीआई.. फिर दोनों रोटी हुई मेरे आगे से पीछे से मेरे सीने से लग गई.. आज तो कमल hi हो गया था.. दोनों कभी ऐसे खुल कर मेरे गले से नहीं लगी थी.. मुझे क्या पता था. ऐसा ड्रामा मुझे इतना ज़यादा इन दोनों के करीब कर देगा..
किन्ज़ा एपीआई ने मुझे आगे से जपहि डाली हुई थी.. माहिरा एपीआई ने पीछे से.. भाभी भी पास कड़ी मुझे नाराज़गी से घूर रही थी.
किन्ज़ा एपीआई - तुमने तो मेरी जान hi निकल कर रख दी बाबू
माहिरा - बाबू ऐसा हत्या मज़ाक फिर कभी मेरे साथ नहीं करना
भाभी - ये पागल भी है.. मुझे पता नहीं था.. बारिश में दीवार पर ज़यादा फिसलन होती है.. ये पागल को पता नहीं क्याआआआ ??? पूरा क्रैक है कमीना
मई स्माइल करता किन्ज़ा एपीआई और भाभी को देखने लगा
किन्ज़ा - हस्स मत बाबू... सुन मेरे दिल की धड़कन...
किन्ज़ा एपीआई सांस लेने को रुकी.... मैंने ऑंखें बंद कर ली
मई - हाँ बहुत स्पीड से धड़क रहा है आप दिल.. और माहिरा एपीआई आप का भी.. लेकिन आप तो किन्ज़ा एपीआई से ज़यादा स्ट्रांग हाँ.. फिर आप के दिल की ये हालत...
माहिरा एपीआई मुझसे अलग होकर नाराज़गी भरा एक मुक्का मेरी पीठ पर मारा.. फिर मेरे सामने आ कर बोली
माहिरा - तू जनता है न बाबू. तेरे अंदर हमारी जान है. फिर भी तूने ये ड्रामा किया
मई - प्यार सबत करने के लिए ड्रामा करना ज़रूरी होता होता है एपीआई... सच कहूं तो पता नहीं मुझे क्या हो गया है इन थोड़े से दिनों में.. लेकिन मई ये कहूंगा.. मई खुल कर जीना चाहता हों. जिनसे प्यार हो.. उनसे खुल कर प्यार करते हुए जीना चाहता हों..
बारिश अब धीमी पड़ने लगी थी..
किन्ज़ा एपीआई मुझसे अलग हो गई.. शुक्र है अलग हो गई थी. जितनी देर से वो मुझसे लिपटी रही थी.. मई खुद से लड़ रहा था. देर होती तो एपीआई के भीगे बदन के नशे में मस्त हो जाता.. फिर मेरा लुंड खड़ा हो जाता.. जो एपीआई की भीगी फुद्दी को चूमने लगता.. बारिश हो रही थी.. लुंड थोड़ा सा भी मूड में आता तो तीनो को दिखाई दे जाता.. और हो जाता मेरी फुड़दियों में घुसने वाले प्लान का पूरा का पूरा कबाड़ा.. धीरे धीरे hi काम बनने वाला था..
अब देखो.. कैसे मैंने दोनों बहनो को करीब कर लिए था.. दोनों के भीगे गरम बदन मेरे भीगे बदन से जुड़ गए थे.... जवान होने के बाद ये पहला मौका था.. और मज़ा hi आ गया था मुझे...
फिर हम नीचे जाने लगे... छत वाले दरवाज़े पर पोहंचे... तो किन्ज़ा एपीआई मेरा चेहरा देख चौंकी
फिर मेरे गाल पर हाथ फेरती हुई दुखी होकर बोली
किन्ज़ा - सॉरी बाबू मैंने तुम्हे चांटा मारा
माहिरा एपीआई को भी अहसास हुआ .. वो भी मेरे गाल पर हाथ फेरती हुई सॉरी बोली
भाभी अपने हाथ देखती हुई बोली - मैंने कभी अपने भाई को चांटा नहीं मारा. कई बार दिल भी किया... लेकिन मौका नहीं बन सका..
भाभी किन्ज़ा एपीआई और माहिरा को नॉटी स्माइल के साथ देखती हुई बोली
भाभी - तुम दोनों मेरी सिफारिश करो न.. मई भी एक हल्का सा चांटा फिरोज के गाल पर सजा दूँ.. मेरा दिल खुश हो जायेगा.. मेरा रिकॉर्ड भी टूट जायेगा
मैंने किन्ज़ा एपीआई के कान में कुछ कहा.. पहले तो वो शरमाई.. फिर माहिरा एपीआई के कान के भी वही बोली... दोनों को खुसर फुसर करते देख भाभी को दाल में कुछ कला लगा...
फिर किन्ज़ा एपीआई और माहिरा एपीआई ने भाभी को देखा.... फिर एक साथ बोली - ठीक है.. हमें कोई ऐतराज़ नहीं है
भाभी दोनों को घोर से देखती हुई बोली - कुछ लोचा लग रहा है मुझे..
किन्ज़ा - नहीं.. कोई लोचा नहीं है. आप आएं सामने.. और बाबू को चांटा मारें
माहिरा - हम दोनों बाबू के साइड कड़ी हो जाती है. आप ैसिलय बाबू को चांटा मर सकती है..
भाभी उलझी नज़रों से दोनों को देखने लगी. पहले कैसे वो मूड में आती मस्ती पर उतर आई थी. भाभी कड़ी रही. दोनों को बरी बरी देखती रही.. मुझे देखा.. मई मासूम बनकर खड़ा हो गया
भाभी मुझे ऑंखें दिखती हुई बोली - इसका दिमाग आज कल कुछ ज़यादा hi चल रहा है.. ज़रूर कुछ तो गड़बड़ है.. नहीं मई अपनी बात वापिस लेती हों
माहिरा - नहीं भाभी जी.. आप ने कहा. हमने मान लिया. अब हम कह रही हाँ तो आप को चांटा मारना hi पड़ेगा
किन्ज़ा - इंकार का कोई ऑप्शन नहीं बचा भाभी जी आपके पास
भाभी कश्मकश में पद गई.. फिर जैसे फैसला करती हुई मेरे सामने आई और हाथ उठा कर मेरे गाल पर चांटा मार दिया...
भाभी ने चांटा ज़ोर का मारा था.. अछि खासी आवाज़ हुई.. और मेरा गाल थलथला कर रह गया. मुझे दर्द भी हुआ.. लेकिन मई बर्दाश्त कर गया
किन्ज़ा - भाभी आप ने जैसे बाबू से दुश्मनी निकली है.. कितनी ज़ोर का चांटा मारा आपने
माहिरा एपीआई ने किन्ज़ा एपीआई के कण में कुछ कहा.. फिर किन्ज़ा एपीआई सर उठा कर भाभी को स्माइल से देखने लगी.. किन्ज़ा एपीआई की स्माइल देख भाभी कुछ घबराई. वह कुछ समझ नहीं पाई थी... लेकिन इतना तो समझ hi गई थी. कोई बड़ा लोचा है..
और लोचा सामने आ गया. भाभी का मोह हैरत के मारे पूरा का पूरा खुल गया.. पहले माहिरा एपीआई ने मेरे चेहरे को थाम मेरे गाल को तसली के साथ चूमा. फिर किन्ज़ा एपीआई ने मेरे गाल पर अपने होंठ सबत कर दिए...
भाभी ये देख वहां से भागने लगी.. लेकिन माहिरा एपीआई भी काम नहीं थी.. वो ऐसा hi कुछ एक्सपेक्ट कर रही थी. उन्हों ने भाभी की कलाई पकड़ ली..
भाभी घबरा कर बोली - नहीं... मई ऐसा कुछ नहीं करुँगी.. मई पहले से hi समझ गई थी.. फिरोज कमीने के दिल में कोई उल्टा सीधा hi आया होगा
माहिरा - तभी आप ने बाबू को ज़ोर का चांटा मारा..
किन्ज़ा - आप भी समझ गई थी. कीमत भरी चुकानी पड़ेगी.. इसलिए तसली से चांटा मारा.. अब शराफत एक साथ जिस गाल पर चांटा मारा है.. उसे चुम कर अपने चांटे की भरपाई कीजिये..
भाभी - मैंने कहा न.. मई नहीं करुँगी ऐसा..
किन्ज़ा - वह तो आप को करना hi पड़ेगा
माहिरा - भाभी जी आप के पास दो hi रस्ते हाँ.. या तो वही कीजिये जो हम कह रही हाँ.. वर्ण हम एहि बात बाबू से कहेंगी... फिर बाबू का मोह होगा और आप का---
भाभी - माहिरा कुछ तो शर्म कर.. मई तेरी भाभी हों.. तेरे भैया की बीवी हों.. मई भला ऐसा कैसे कर सकती हों..
किन्ज़ा - वो तो करना hi पड़ेगा आप को भाभी जी.. बड़े होने के बाद हम दोनों बहनो ने कभी बाबू के गाल को प्यार नहीं दिया.. लेकिन चांटा मार कर हमने जो गलती की.. फिर भरपाई भी की.. अब आप की बरी है.. बिना भरपाई के छुटकारा मुमकिन नहीं.. हमारे बाबू का गाल बहुत कीमती है भाभी जी
भाभी जी बहुत ज़यादा झिझक रही थी.. शर्म से उनके गाल बिना चांटे के hi लाल पड़ते जा रहे थे... फिर फिरसे कश्मकश में दिखाई देने लगी..
मई - किन्ज़ा एपीआई माहिरा एपीआई छोड़ दें भाभी जी.. हमारा और आप का मामला खून का दूध का दिलों है.. भाभी को आये ज़यादा वक़्त नहीं हुआ.. भाभी हमारे साथ खुल कर भी इतना कभी नहीं खुलना चाहेंगी तो हमें चाहिए हम भाभी को फाॅर्स न करें..... प्यार कहे जाने पर नहीं किया और दिया जाता api...pyar लेने और देने के लिए दिल में प्यार का होना भी ज़रूरी है..
माहिरा एपीआई ने भाभी की कलाई छोड़ दी.. भाभी दूसरे हाथ से अपनी कलाई पकड़ कर मसलने लगी.. मुझे तेज़ नज़र से देखने लगी.. फिर मेरे करीब आ गयी..
भाभी - बहुत बड़ी बड़ी बातें करना सीख गए हो न तुम.. मज़ा आता है न तुम्हे ऐसी बातें करके.. हर दूसरी लड़की की ज़िन्दगी में एक देवर ज़रूर आता है.. हर लड़की को तुम जैसा देवर नहीं मिला करता.. ये मई कह रही हों... सराह खान.. जिसे उसके खंडन में सबसे ज़यादा चाहा जाता है.. मेरे भी भाई हाँ. मई उनसे बहुत प्यार करती हों.. और तुममे मुझे मेरा भाई नज़र आता है. लेकिन मई अपने सेज भाई के साथ भी कभी इतनी नहीं खुल सकीय हों.. लेकिन ये भी सच है.. मेरे सेज भाइयों ने कभी तुम्हारी तरह खुल कर प्यार की बातें करना नहीं सीखा है.. खुल कर प्यार करना नहीं सीखा है.. हम ऐसे खंडन से ताल्लुक़ रखती हाँ.. जहाँ लड़की जवान होते hi अपने भाइयों से अपने बाप अपने मां और चाचा सभी से फैसले बना लेती है. ऐसे में तुम मुझे वो काम करने को कह रहे हो फिरोज. जो मैंने कभी नहीं किया.. हमारे खंडन में कभी किसी ने नहीं किया...
भाभी सांस लेने को रुकी.. फिर बोली - ठीक है.. लेकिन मेरी भी एक बात सुन लेना तुम फिरोज... लड़की कोई भी हो, बहन हो, कजिन हो, भाभी हो या खंडन में कोई भी हो.. उसे अगर खुल कर प्यार करने पर त्यार कर hi दिए जाता है तो फिर एक बात कान खोल कर तुम मेरी सुन्ना.. प्यार काम हो या ज़यादा.. ज़ाहिर में हो या बटन में.. लेकिन मेरे जैसी लड़की कभी ये बर्दाश्त नहीं कर पाएगी. कोई उसपर ऊँगली उठाये.. मई अगर मेरे hi माँ बाप के घर में महमानो के सामने अपने hi भाई के मोह को चूमुंगी तो कोई रिश्तेदार देख कर ये नहीं कहेगा. कितना प्यार करती है ये फरहा अपने भाई से. बालकः ये कहेगा... कितनी बेशरम है.. भाई से प्यार है तो क्या ऐसे hi किसी के भी सामने भाई का मोह चुम लेगी... फिरोज तुम.. किन्ज़ा तुम और माहिरा तुम... मानती हों तुम सब फिरोज से बहुत ज़यादा प्यार करती हो.. ये भी मानती हों फिरोज जैसे भाई मेरे तुम्हारे खंडन में कोई दूसरा नहीं होगा.. मई फिरोज का गाल चूमुंगी.. लेकिन अगर किसी ने किसी ने मेरे किरदार पर ऊँगली उठाई... तो कसम है मुझे.. मई जान पर खेल जाउंगी...
भाभी बड़ी जज़्बाती हो गई थी.. अपनी बात का जवाब पाने का भाभी ने इंतज़ार नहीं किया.. और मेरा चेहरा थम कर जहाँ चांटा मारा था..... वहां मेरे गाल पर अपने होंठ रख दिए... हल्का सा चुम कर अलग हुई.. और तेज़ी एक साथ नीचे उतरती चली गई..
माहिरा - भाभी क्या समझती हैं. जैसी बातें वो कर के गई han...kyaa हम भी अपनी ज़ात पर ऐसी ऊँगली उठते देख ज़िंदा रहने का सोच सकती हाँ.. हमें भी हमारी इज़्ज़त हमारी जान से बढ़कर प्यारी है
किन्ज़ा - भाभी भी सही है माहिरा... बाबू का प्यार अनमोल है.. लेकिन जिस खंडन से हम ताल्लुक़ रखते हाँ.... वहां इतना सब भी नहीं होता..
फिर मुझे घूरती हुई बोली - क्या ज़रूरत थी तुम्हे ऐसा करने के कहें की.. मेरी भी मैट मरी गई थी... जो ऐसा इरादा बना बैठी...
माहिरा - इस बाबू के बच्चे ने दीवार पर चढ़ कर हमारे सोचने समझने की सलाहियत को hi जंग लगा दिया था..
मई - क्या जो हुआ वो गलत था
किन्ज़ा एपीआई मेरा हाथ थाम कर प्यार से बोली - बाबू... यहाँ बात गलत सही की नहीं है.. प्यार की भी नहीं है. जैसी ज़िन्दगी जीने को हमें मिली है.. जैसी लेक्चर हम सुनती हुई बड़ी हुई हाँ.. हमारे खून के साथ साथ वो सरे लेक्चर दौड़ रहे हाँ.. हम अपने खंडन से अलग रह कर भी नहीं जी सकते.. तुम्हारा प्यार अनमोल है बाबू.. लेकिन अगर अनजाने में किसी गैर के सामने खुल कर ऐसा सब हो गया तो.. क़यामत से पहले क़यामत आ जाएगी बाबू.....
मई दोनों हथु से किन्ज़ा एपीआई के गीले कंधे पकड़ कर अपना चेहरा किन्ज़ा एपीआई के चेहरे के करीब करता हुआ बोलै
मई - यहाँ मई आप सब के इतने करीब इसलिए हों एपीआई.. के यहाँ कोई बेगाना देखने वाला नहीं है. क्या मई सूरत से ऐसा hi उल्लू दीखता हों.. जैसे लेक्चर आप गर्ल्स की रगों में खून के साथ दौड़ रहे हाँ ना.. मेरी रगों में भी वही खून है.. वही सरे लेक्चर हाँ.. मई पठान हों. इज़्ज़त के लिए जान दे सकता हों तो ले भी सकता हों.. मई आप सब को वो प्यार देना चाहता हों. जो कोई भाई न दे सका हों.. लेकिन आप सब के डर को समझते हुए बास इतना hi कहूंगा.. अगर मेरे डर आप में से किसी के अंदर डर बाकि रहा.. तो एक कसम मई भी खता हों एपीआई... मई एक नार्मल लड़का बनकर बाकि की ज़िन्दगी गुज़र दूंगा.. एक ऐसा नार्मल पठान.. जो खाने पीने और ज़रूरी बात करने के लिए hi अपनी बहनो के पास आया करता है.
मेरी आखरी बात पर माहिरा एपीआई और किन्ज़ा एपीआई दोनों तड़प क्र रह गई
किन्ज़ा एपीआई नाम आवाज़ में बोली - नहीं बाबू.. अपनी कसम वापिस ले. देख हम सब तुझसे इतना प्यार करते हाँ.. तू दूसरी बहनो के भाइयों जैसा बनकर जियेगा तो कैसे हम बहने जी पाएंगी.. नहीं बाबू. ऐसा मत बोल
माहिरा - देख बाबू.. मैंने इतने काम वक़्त में इतना ज़यादा जज़्बाती होना नहीं सीखा है.. लेकिन जब से तू बदला है न.. नजाने मुझे क्या हो गया है... मई बहुत ज़यादा जज़्बाती होने लगी हों.. देख मेरी आँखों में देख.. देख तेरे लिए नमी है इन आँखों में.. तीन दिनों में ये तेरे लिए कई बार भीग चुकी हाँ बाबू.. जो तूने जोश में आ कर कहा है... जो कसम खाई है न तू उसे वापिस ले.. और ख़बरदार जो तूने प्यार में कमी लेन की सोची भी तो.. पता है तेरा ये थोड़े दिनों वाला प्यार कितना कीमती है.. इतना कीमती है.. हम बहनो को ऐसा लग रहा है.. जैसे हमारे सरों पर सायादार घने दरख्तों की ठंडी मीठी छाओं अब hi उतरी है.. दादा जान डैड और नदीम भाई के होते हुए भी हमें ऐसा ऐसा कुछ कभी महसूस नहीं हुआ.. लेकिन तुम्हारे बदल जाने से सब हो गया है..
किन्ज़ा एपीआई मेरे गाल को सहलाती हुई बोली - तू चाहता है न.. हम तेरी तरह खुल कर प्यार करें.. तो ठीक है.. तूने तीन दिन पहले बंद कमरे में मेरा गाल चूमा था न..
माहिरा एपीआई ने चौंक कर किन्ज़ा एपीआई को देखा.. किन्ज़ा एपीआई माहिरा एपीआई को नज़र अंदाज़ करती आगे बोली - देख मई आज माहिरा के सामने तेरे गाल को चूमती हों. तू भी चाहे तो मेरे गाल को फिरसे चुम सकता है.. पहले शायद मई ऐसा न बोलती.. न करती.. लेकिन तेरे प्यार की जैसी शिद्दत और पाकीज़गी मैंने अभी महसूस करि है न.. पहले कभी महसूस नहीं की. अभी जब तुमने कहा न तू टिपिकल भाई बनकर जियेगा.. तो मुझे तेरा मेरे गाल को चूमना याद आ गया.. मुझे अहसास हुआ.. मुझे कभी तेरा ऐसा करना बुरा लग hi नहीं सकता.. मई तड़प कर रह गई.. मेरा दिल मचल गया.. अंदर से आवाज़ आई.. किन्ज़ा तेरा भाई कभी तुझसे प्यार नहीं करेगा.. अगर तू बुज़दिल बन गई तो.. देख बाबू मई तेरे लिए अपना डर दिल से हमेशा के लिए निकल देती हों.. लेकिन फराह भाभी की आखरी बातें मेरे दिल की भी आवाज़ है.. वही एक ऊँगली.. और जान हार---
मैंने किन्ज़ा एपीआई के होंटो पर हाथ रख दिया.. एपीआई खुल कर आंसू बहा रही थी..
माहिरा एपीआई अपनी फ्रेंड के साथ लेस्बियन सेक्स करती रहती थी.. वो मेरे साथ इसलिए नहीं खुल रही थी.. माहौल उसके हिसाब से नहीं था.. और वो नज़रों में गिरना नहीं चाहती थी..
किन्ज़ा एपीआई खुल कर बोली तो माहिरा एपीआई बोली - किन्ज़ा एपीआई आप ने बाबू का प्यार अपने गाल पर प् लिया. लेकिन मई तो बरसों से बाबू के प्यार से दूर हों.. बाबू आज मई भी किन्ज़ा एपीआई के जैसे तुमपर यकीन करती हों. और ये hi कहती हों. तू hi हमारा सच्चा मुहाफ़िज़ है. तू hi है.. जो हमेशा वो प्यार दे सकता ह.. जो कोई भाई किसी बहन को नहीं दे सकता.. देख मई खंडन में सबसे अलग सोच रखने वाली लड़की हों. मई मॉडल बनना चाहती थी. लेकिन नहीं बन सकती.. देख एक मॉडल बनने वाली लड़की की सोच कितनी एडवांस होती होगी. लेकिन देख मैंने आज तक तेरा प्यार खुल कर नहीं पाया.. न तेरे चेहरे को चुम सकीय. न hi तुझे भाई का दर्जा देते हुए अपने गालों पर मोहरे मोहब्बत सबत करने का कोई मौका दिया.. आज मई भी वही सब कहूँगी. जो अभी किन्ज़ा एपीआई ने कहा.. चल आ और अपना प्यार मेरे गालों पर सबत कर दे. फिर मैं भी अपने प्यार तुझे दिखाउंगी..
माहिरा एपीआई ने भीगी आँखों के साथ मेरे गले में बाहें दाल दी. खूब अचे से मेरे गले से लगने के बाद मेरे दोनों गालों पर एक बार नहीं दो बार नहीं तीन तीन बार अपने होंठ रखे.. बड़े सुकून के साथ माहिरा एपीआई ने मेरे गलों को चूमा था. माहिरा एपीआई की भीगे ब्रा के अंदर भीगे गरम नरम मुम्मे मेरे सीने के साथ लगे मेरे दिल की धड़कनो को बढ़ा रहे थे..
माहिरा एपीआई - चल अब.. तू दिखा अपना प्यार
मैंने धयान दिए तो मुझे माहिरा एपीआई की आँखों में श्रम की गहरी छाप दिखाई दी. पहली बार मेरे ऐसे गले लग कड़ी थी वह.. कितनी प्यारी लग रही थी माहिरा एपीआई.
मई मुस्कुराता हुआ बोलै - पहले कोनसे गाल पे प्यार दूँ
माहिरा एपीआई मुस्कुरा पड़ी - तू अपने दिल की कर
मई - खुल कर प्यार करने की बात करने वाली अब भी झिझक रही है
माहिरा - मई इतनी झिझिको भी नहीं हों
मई - तो फिर बताइये
माहिरा - चल ाचा काम सीढ़ी साइड से शुरू करते हाँ न तू भी सीधे गाल से शुरू कर. मैंने तो अपना प्यार तुझे दिखा दिए.. जब से तू बड़ा हुआ है.. तेरा ये अनमोल प्यार मुझसे दूर था. देर न कर.. और दे मुझे अपना प्यार..
किन्ज़ा एपीआई कुछ श्रम से लेकिन बहुत ज़यादा ख़ुशी के साथ हमें देख रही थी
मैंने किन्ज़ा एपीआई को देखा - आप बताएं एपीआई. पहले किस साइड प्यार की मोहर लगाऊं
किन्ज़ा एपीआई शर्म से पलकें झुका कर बोली - मई क्या बताओं.. तुम्हारा जो दिल कहे
मई - मई आप से पूछना चाहता हों.. आपको देख कर hi तो माहिरा एपीआई ने हिम्मत पकड़ी है. अब आप hi मुझे गाइड करें
किन्ज़ा एपीआई शर्म से धीरे से बोली - माहिरा ने जैसा कहा है.. सही काम सीढ़ी साइड से शुरू करते हाँ
मई - हाँ ऐसे बरकत भी मिलती है
दोनों मुस्कुरा पड़ी
मैंने माहिरा एपीआई के राइट गाल पर अपने होंठ रख दिए.. uffffffffff... जब से माहिरा एपीआई जवान हुई थी. तब से इनके ये गोर गाल मेरे होंटो से दूर थे.. कितने लम्बे आरसे के बाद मेरे होंटो ने माहिरा एपीआई के गालों का चखा था.. कितना लज़ीद था माहिरा एपीआई का गाल.. मई होंठ रख कर जैसे भूल hi गया.
माहिरा एपीआई ने थोड़ी देर इंतज़ार किया.. फिर बोली - क्या सो गए हो
मई - आज कल झूठे प्यार में इतना नशा है.. दुन्या सब कुछ भुला बैठती है.. सच्चे और अनमोल प्यार के नशे की कोई हद कहाँ हो सकती है एपीआई.. मैं तो फिर भी बरसों बाद आप के गुलाबी गाल को चुम रहा है.. जल्दी कैसे कर सकता हों
माहिरा - देख बाबू. बारिश रुक चुकी है.. देर करेगा तो फिर किन्ज़ा का नंबर रह जायेगा.. मुझ एक से hi काम चलने पड़ेगा फिर तुम्हे
मई है पड़ा.. अपने होंठ माहिरा एपीआई के गाल रखे हुए hi मई है पड़ा था..
ऐसे hi गाल पर मोह रखे मई बोलै - किन्ज़ा एपीआई की मुझे जल्दी नहीं है. उनके गाल मेरे चखे हुए हाँ.. लेकिन मई उन्हें भी सुकून के साथ फिरसे चखना चाहता हों. मेरे पास वक़्त की कोई कमी नहीं है.. अभी न सही. बाद में सही.. यहाँ न सही कमरे में सही...
फिर मैंने अपने होंठ माहिरा एपीआई के दूसरे गाल पर लगा दिए. अब मेरे लुंड में सनसनी सी दौड़ने लगी थी. मई और माहिरा एपीआई ऊपर से साथ जुड़े हुए थे. लेकिन नीचे ाचा खासा गपे था.. लुंड मूड में आता भी तो माहिरा को टच नहीं हो सकता था. लेकिन अलग होने के बाद दिखाई तो दे hi सकता था..
मैंने ज़यादा देर नहीं की.. बारिश के मौसम के वजूद के अंदर करंट कुछ ज़यादा hi बढ़ जाया करता है.. इससे पहले के मेरा जिस्म मूड में आते हुए मेरे लुंड को सख्त करता.. मैंने माहिरा एपीआई के दोनों गालों को अच्छे से प्यार देते हुए उन्हें खुद से अलग कर दिए..
किन्ज़ा एपीआई को देखा.. उनका चेहरा शर्म से टिमटिमाने लगा था..
मैंने किन्ज़ा एपीआई का हाथ पकड़ लिया.. एक हाथ से किन्ज़ा एपीआई की चीन को पकड़ चेहरा उठा हुआ बोलै - अभी हम नीचे चलते हाँ. हम बाद में प्यार का लें दें करेंगे..
किन्ज़ा एपीआई ने जैसे सुख की सांस ली..
लेकिन माहिरा एपीआई - नहीं मेरे सामने hi ये लें दें करना होगा.... जैसे मैंने किया.. शामे वैसे hi किन्ज़ा एपीआई को भी मेरे आँखों के सामने सब करना होगा..
किन्ज़ा एपीआई ने माहिरा एपीआई को घूरा
माहिरा - एपीआई ऑंखें दिखने से काम नहीं चलेगा
मई - ठीक है.. किन्ज़ा एपीआई के कमरे में जाते हुए मई आप को लेता जाऊँगा..
बात दोने हो गई थी.. हम वहां से नीचे उतरने लगे.. जैसे hi हम नीचे उतरे.. हमें अम्मी जान आती हुई दिखाई.. हमें देख मुस्कुराती हुई वह करीब आई.. फिर हम तीनो को बरी बरी गले से लगा कर प्यार देते हुए हम तीनो के मोह चुम गयी..
फिर हम अपने अपने कमरों में घुस गए.. एक बात जो हम अभी नहीं जानते थे.. जब हम स्टैर्स उतारते हुए नीचे उतरे थे. तो हमें नीचे से ऊपर आने वाली स्टैर्स पर अम्मी जान ऊपर अति दिखी थी...
असल में बात कुछ और थी.. जब बारिश हो रही थी.. अम्मी जान छत पर आ रही थी.. वहां भाभी जो बात बोल रही थी.. अम्मी जान ने सब सुन लिया था.. छत पर जाने वाली स्टैर्स के नीच ाचा खासा गपे है.. कोई नीचे उतरता भी है तो धयान देने से hi स्ट्रिस के नीचे खड़े हुए को देख सकता है.. अम्मी जान वही कड़ी होकर हमारी बातें सुनती रही थी.. जब भाभी नीचे उत्तरी.. तो भाभी ने धयान नहीं दिए है.. अम्मी जान छुप कर कड़ी हो गयी थी. भाभी के जाने के बाद देर तक अम्मी जान वहीँ कड़ी रही... मेरी किन्ज़ा एपीआई और माहिरा एपीआई की साड़ी बातें अम्मी जान ने सुन ली थी..
जब हम नीचे उतरने लगे.. तो अम्मी जान जल्दी से स्टैर्स से गौरण्ड फ्लोर पर जाने लगी.. फिर वापिस आने लगी. तभी वो हमें दिखी थी...
हम अनजान थे.. लेकिन हमारी हर एक बात और हरकत से अम्मी जान वाक़िफ़ हो चुकी थी..